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सोमाली जेट और अल नीनो का असर, देश में 40% कम बारिश से हालात बिगड़े

नई दिल्ली  देश के सुदूर दक्षिणी छोर केरल में एक तो लेट से मानसून टकराया था। 1 जून को आने वाला यह मानसून इस बार 4 जून को आया। शुरुआत में इसकी रफ्तार मध्य भारत तक ठीक-ठाक रही, मगर जब तक यह ठीक से भिगोता हुआ आगे बढ़ता कि इसकी रफ्तार पर ब्रेक ही लग गया। इसके बाद तो इसके करीब-करीब गायब होने की बातें भी आईं। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों को कवर करने के बाद यह मानसून अचानक लापता हो गया। अब पूरा उत्तर भारत मानसून का बेसब्री से बाट जोह रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र, गुजरात तक में लोग मानसून के स्वागत में खड़े हैं। 12 दिनों से तेलंगाना-महाराष्ट्र में अटका था मानसून ऐसी रिपोर्ट हैं कि महाराष्ट्र और तेलंगाना में यह मानसून बीते 12 दिनों से अटका हुआ था। मगर, अब इसके आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून के लापता होने में सोमाली जेट भी एक बड़ा कारण है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सोमाली जेट के कमजोर विकास ने मानसून की रफ्तार को थाम दिया है। सोमाली जेट क्या होता है, जिसने बिगाड़ा मानसून का मूड     सोमाली जेट एक भूमध्यरेखीय वायु प्रणाली है, जो हिंद महासागर में अफ्रीका के पूर्वी तट के पास बनती है। भारतीय मानसून के लिए अहम सोमाली जेट को फाइंडलेटर जेट भी कहते हैं।     सोमाली जेट पूर्वी अफ्रीका में अपेक्षाकृत कम वर्षा का कारण बनता है। दरअसल सोमाली जेट एक निम्न-स्तरीय वायु प्रवाह है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून को भारत की ओर लाने में मदद करता है।     सोमाली जेट के कमजोर पड़ने से भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है।     बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव प्रणालियों का भी अभाव रहा है, जो आमतौर पर मानसून को अंदरूनी इलाकों तक खींचने में मददगार होती हैं।     इस बार अल नीनो की वजह से भी मानसून के कमजोर पड़ने की आशंका भी मौसम वैज्ञानिक बार-बार जता रहे हैं। 1 से 18 जून तक 40 फीसदी कम बारिश     मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से 18 जून के बीच देश में बारिश औसत से 40% कम रिकॉर्ड की गई है।     आमतौर पर 01 जून से 17 जून के बीच देश में औसतन 80.6 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस साल अब तक सिर्फ 48.5 मिलीमीटर बारिश हुई है।     मध्य भारत क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 01 जून से 18 जून के बीच औसत से 63% कम बारिश दर्ज की गई है। 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंचेगा भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 23 जून तक इसके छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मानसून के लिए जरूरी सिस्टम सक्रिय हो गया है। मध्य भारत में बन रहा चक्रवातीय घेरा     इससे मध्य भारत में चक्रवातीय घेरा बना हुआ है, जिससे मानसून के बादल उत्तर भारत की तरफ आ सकते हैं। मानसून 15 दिन में 19 राज्यों तक पहुंच चुका है, लेकिन 8 जून से तेलंगाना में अटका हुआ है।     इससे पहले बिहार में शुक्रवार को बिजली गिरने से 6 लोगों की और झारखंड में 8 लोगों की जान गई। राजस्थान के 12 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे महाराष्ट्र में हाहाकार मचा, खुले में रात बिता रहे लोग मानसून की इस बेरुखी की वजह से महाराष्ट्र में पानी को लेकर हाहाकार मचा है। पुणे में पानी की सप्लाई के लिए ऑड-इवन फॉर्मूला लागू किया गया है मुंबई में मारे गर्मी के लोग समुद्री तट के किनारे खुले में रात बिता रहे हैं। यहां 11 जून को ही मानसून मुंबई पहुंचने वाला था, मगर अभी तक इसका अता-पता नहीं है। इन राज्यों तक पहुंच चुका है मानसून मौसम विभाग के अनुसार, मानसून केरल, कर्नाटक, गोवा, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर, त्रिपुरा, असम, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक पहुंच चुका है। 20 जून से 5 जुलाई के बीच इन राज्यों में मानसूनी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, लद्दाख, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में 20 जून से 5 जुलाई तक पहुंचेगा। मध्य और दक्षिण भारत में आंधी-तूफान, बंगाल में भारी बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। वहीं, महाराष्ट्र के विदर्भ में 19 से 23 जून तक ऐसा ही मौसम रहने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ में भी 19 से 23 जून के बीच आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की आशंका है। मौसम का यह बदलाव सिर्फ मध्य भारत तक सीमित नहीं। तमिलनाडु और पुडुचेरी में 19 से 21 जून के बीच कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है, जबकि केरल में भी 19 से 23 जून के बीच भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, बंगाल के कोलकाता, सिलिगुड़ी और दार्जिलिंग जिलों में शनिवार को भी भारी बारिश हुई। दार्जिलिंग में बालासन नदी उफान पर आ गई। इससे नदी पर ह्यूम पाइप से बना पुल टूट कर बह गया। मानसून की कमी के बीच पारा 40 डिग्री के पार     मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई शहरों में बुधवार को पारा 40°C से ज्यादा रहा। देश में सबसे ज्यादा पारा उत्तर प्रदेश के बांदा में 44.2°C दर्ज किया गया।     वहीं यूपी के प्रयागराज में 43.6°C, एमपी के खजुराहो 42.4°C, महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी में 42.1°C, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 42°C, बिहार के छपरा में 41.8°C और झारखंड के डाल्टनगंज में 40°C रहा। 21 और 22 जून को क्या होगी बारिश     21 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना है। बिहार में कुछ जगहों पर 50-70kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।     असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।     राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। कई इलाकों में 40-60kmph की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। … Read more

जेफरीज रिपोर्ट: ग्लोबल मार्केट पर बदले हालात, ईरान की बढ़ी ताकत

नई दिल्‍ली  हाल ही में हुए अमेरिका-ईरान सीजफायर फ्रेमवर्क से ईरान को सबसे ज्‍यादा फायदा हुआ है। जेफरीज की हालिया 'ग्रीड एंड फियर' रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसके अनुसार, प्रस्तावित समझौता जियोपॉलिटिकल हालात में एक बड़ा बदलाव है। इसके ग्लोबल मार्केट पर दूरगामी असर हो सकते हैं। ईरान मार ले गया मैदान रिपोर्ट के मुताबिक, इस ड्राफ्ट फ्रेमवर्क में ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी करने की बात कही गई है। साथ ही लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंधों को हटाए जाने की भी संभावना है। बातचीत औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ही आधी रकम मिलने की उम्‍मीद है। जेफरीज ने इस घटनाक्रम को इस बात का संकेत बताया है कि बातचीत में तेहरान का पलड़ा भारी रहा है। ट्रंप को ऐसे हुआ नुकसान ब्रोकरेज के अनुसार, यह युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बढ़ते राजनीतिक दबाव को भी दिखाता है। उनकी अप्रूवल रेटिंग काफी कम हो गई है। रिपोर्ट में बताए गए रॉयटर्स/इप्सोस सर्वे में 62% लोगों ने उन्हें नापसंद किया। वहीं, 63% लोगों ने अर्थव्यवस्था को संभालने के उनके तरीके को नापसंद किया। मार्केट के नजरिए से जेफरीज का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाला सीजफायर और तेल की कम कीमतें अमेरिका के बाहर के मार्केट, खासकर साइक्लिकल सेक्टर में बेहतर परफॉर्मेंस में मदद कर सकती हैं। इन चार बड़ी कंपनियों की बल्‍ले-बल्‍ले रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश की भारी तेजी पर भी जोर दिया गया है। अमेरिका की चार बड़ी हाइपरस्केलर कंपनियों का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2026 में 680 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह AI की होड़ की तीव्रता को दिखाता है। इन कंपनियों में अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और मेटा शामिल हैं। जापान में बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में ब्याज दरें बढ़ाकर 1% कर दी हैं। ये तीन दशकों से ज्‍यादा समय में सबसे ज्‍यादा स्तर है। यील्ड बढ़ने के बावजूद जेफरीज का मानना है कि बेहतर होती नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ और महंगाई की स्थिति के कारण जापानी इक्विटी सरकारी बॉन्ड की तुलना में काफी ज्‍यादा आकर्षक बनी हुई है। अमेरिका में महंगाई की बढ़ती चिंता ब्रोकरेज के अनुसार, अमेरिका में महंगाई के जोखिमों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। मनी मार्केट अब 2026 के अंत तक ब्याज दरों में लगभग 0.36 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। यह इस चिंता को दिखाती है कि महंगाई पहले की उम्मीद से ज्‍यादा समय तक बनी रह सकती है। जेफरीज का तर्क है कि बॉन्ड यील्ड का बढ़ना निवेशकों के लिए मुख्य जोखिमों में से एक बना हुआ है। साथ ही, कॉर्पोरेट कमाई की उम्मीदें भी मजबूत बनी हुई हैं। आम सहमति वाले अनुमानों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में एसएंडपी 500 की कमाई में साल-दर-साल 22.8 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसमें टेक्नोलॉजी कंपनियां इस बढ़त में सबसे आगे रहेंगी। इमर्जिंग मार्केट्स कंपनियों में कुछ को प्रॉफिट हालांकि, जेफरीज को इक्विटी मार्केट में सट्टेबाजी के बढ़ते संकेत दिख रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले साल MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में शामिल सिर्फ 24.6% शेयरों ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। यह एक रिकॉर्ड निचला स्तर है जो बताता है कि मार्केट का नेतृत्व कुछ ही शेयरों तक सीमित होता जा रहा है। रिपोर्ट में स्‍पेसएक्‍स को लेकर दिख रहे जबरदस्त उत्साह का भी जिक्र किया गया है। हाल ही में लॉन्च किए गए 11 लेवरेज्ड स्‍पेसक्‍स एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने सिर्फ तीन दिनों में 8.2 अरब डॉलर का ट्रेडिंग वॉल्यूम हासिल किया। वहीं, उनके पास मौजूद एसेट्स की कीमत सिर्फ 63.8 करोड़ डॉलर थी। जेफरीज इस घटनाक्रम को आम निवेशकों की तरफ से सट्टेबाजी के बढ़ते जोश का एक और संकेत मानता है। इजरायल रह गया खाली हाथ इजरायल का रिपोर्ट में जिक्र नहीं है। लेकिन, वह खाली हाथ ही रहा है। युद्धविराम से इजरायल नाराज है। ऐसा होने का मुख्य कारण यह है कि इस पूरी बातचीत में इजरायल को पूरी तरह साइडलाइन कर दिया गया। इससे उसके प्रमुख सुरक्षा हित दांव पर लग गए हैं। इजरायल का मानना है कि इस समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करने और लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह व गाजा में हमास जैसे ईरान-समर्थित सशस्त्र समूहों के खतरों को खत्म करने का कोई ठोस रोडमैप नहीं है। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन की ओर से तय की गई शर्तों के तहत दक्षिणी लेबनान से इजरायली सेना की वापसी की मांग ने इजरायल के भीतर राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर भारी असंतोष पैदा कर दिया है। उसे डर है कि युद्ध रुकने से उसके दुश्मनों को फिर से मजबूत होने का मौका मिल जाएगा। चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था इस बीच, चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था संघर्ष कर रही है। रिटेल बिक्री कमजोर हुई है। क्रेडिट ग्रोथ धीमी है। प्रॉपर्टी में निवेश पर दबाव बना हुआ है। फिर भी निर्यात खासकर सेमीकंडक्टर शिपमेंट में तेजी से बढ़ोतरी जारी है। इससे आर्थिक तस्वीर काफी असमान होती जा रही है। कुल मिलाकर, जेफरीज का मानना है कि निवेशक एक ऐसी दुनिया में काम कर रहे हैं जो भू-राजनीतिक अनिश्चितता, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और AI-आधारित बाजार तेजी से आकार ले रही है। यह तेजी कुछ ही क्षेत्रों या शेयरों तक सीमित होती जा रही है।

घोड़ों की उत्पत्ति पर बदली वैज्ञानिक समझ, चीन से मिला बड़ा सबूत

बीजिंग  घोड़ों के विकास के इतिहास को एक नई फॉसिल DNA स्टडी ने बदल दिया है। इस स्टडी से पता चला है कि उत्तर-पूर्वी चीन का विलुप्त हो चुका 'डालियन घोड़ा' (Dalian horse) उत्तरी अमेरिका और यूरेशिया के बीच जेनेटिक कड़ी का काम करता था। सबसे पहले कहां पाए गए घोड़े? सालों से एक बात मानी जा रही है कि घोड़े यूरोप से अमेरिका लाए गए थे। उन्हें स्पेनिश विजेताओं ने अमेरिका पहुंचाया और वहां के मूल निवासियों को एक ऐसे जीव से चौंका दिया था जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था। लेकिन हाल की जीनोमिक रिसर्च ने इस कहानी को पूरी तरह से बदल दिया है। घोड़ों की उत्पत्ति लाखों साल पहले उत्तरी अमेरिका में हुई थी और वे चीन में मौजूद एक आश्चर्यजनक जेनेटिक कड़ी की वजह से ही यूरोप तक पहुंच पाए। डालियन घोड़ा (Dalian Horse) 'स्टेट की लेबोरेटरी ऑफ जियोमाइक्रोबायोलॉजी एंड एनवायर्नमेंटल चेंजेज' के शोधकर्ताओं के मुताबिक, डालियन घोड़ा – जिसे कभी उत्तर-पूर्वी चीन तक सीमित एक स्थानीय अनोखा जीव माना जाता था, उसमें अमेरिका से जुड़ी खास जेनेटिक खूबियां पाई गई थीं। उसने ये खूबियां साइबेरिया में घोड़ों की प्राचीन आबादी तक पहुंचाईं। इस जीन प्रवाह (gene flow) का मतलब है कि जिन वंश-परंपराओं से बाद में आधुनिक यूरोपीय घोड़े बने, उन्हें अपनी अमेरिकी जड़ें इसी चीनी घोड़े से मिलीं। घोड़ों ने तय किया 50,000 साल का सफर इक्वीड्स (घोड़े के परिवार के जीव) की उत्पत्ति शुरुआती इओसीन काल में उत्तरी अमेरिका में हुई थी। 'इक्वस' (Equus) जीनस, जो सबसे पहले करीब 4 से 5 मिलियन साल पहले सामने आया था, एकमात्र जीवित वंश है जिसमें सभी आधुनिक घोड़े, गधे और जेबरा शामिल हैं। फॉसिल रिकॉर्ड्स के मुताबिक, 'इक्वस' करीब 2.6 मिलियन साल पहले बेरिंग लैंड ब्रिज के जरिए उत्तरी अमेरिका से यूरेशिया में फैला और फिर उसमें बड़े पैमाने पर विकासवादी विविधता आई। विलुप्त हो गया डालियन घोड़ा स्टेबल आइसोटोप एनालिसिस से पता चला कि डालियान घोड़ा खास तरह की घास खाने वाला जानवर था। जब लगभग 40,000 साल पहले माहौल बदला और नमी बढ़ गई, जिससे सूखे घास के मैदानों की जगह पीट-लैंड और वेट-लैंड (दलदली और गीली जमीन) ने ले ली, तो सीमित खान-पान की वजह से यह खुद को ढाल नहीं पाया। डालियान घोड़े के बड़े शरीर और सीमित इकोलॉजिकल प्लास्टिसिटी (पर्यावरण के हिसाब से खुद को बदलने की सीमित क्षमता) की वजह से वग अच्छी क्वालिटी का चारा खत्म होने पर जिंदा नहीं रह सका। विलुप्त होने का यह पैटर्न उस दौर के दूसरे बड़े शाकाहारी जानवरों, जैसे उत्तरी अमेरिकी घोड़े और विशाल ऊंट, जैसा ही है।

शरद पवार से उद्धव ठाकरे तक: गठबंधन और बगावत की कहानी

 मुंबई महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय जो कुछ भी हो रहा है, वह कोई नई बात नहीं है। राज्य के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो पार्टियों में टूट, गठबंधनों का बदलना, पार्टी के चुनाव चिह्नों पर विरोधी दावे, रातों-रात बनने वाली सरकारें और एक साझा प्रतिद्वंद्वी को सत्ता से दूर रखने के लिए विरोधियों का हाथ मिलाना आम बात रही है। शिवसेना को अपनी चपेट में लेने वाला यह नया संकट एक ऐसी कहानी का अगला अध्याय है, जिसकी शुरुआत दशकों पहले 1960 के दशक के अंत में कांग्रेस के विभाजन और एक युवा विद्रोही के रूप में शरद पवार के उदय के साथ हुई थी। जैसे-जैसे शिवसेना के दोनों गुट पार्टी की स्थापना के 60 साल पूरे कर रहे हैं, बाल ठाकरे द्वारा बनाया गया यह संगठन आज बंटा हुआ नजर आता है। फिर भी, महाराष्ट्र को इस मुकाम तक लाने वाला रास्ता बहुत पहले ही तैयार हो चुका था। कांग्रेस का विभाजन ने भारतीय राजनीति को बदल दिया आधुनिक भारतीय राजनीति के सबसे निर्णायक क्षणों में से एक नवंबर 1969 में आया, जब कांग्रेस पार्टी ने एक ऐतिहासिक टूट का सामना किया। राष्ट्रपति चुनाव के बाद से यह संकट महीनों से पनप रहा था। इसका चरम तब हुआ जब कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने का असाधारण कदम उठाया। इस कदम ने कांग्रेस के भीतर सत्ता के दो केंद्रों के बीच खुले टकराव को जन्म दिया। तीन घंटे की बैठक के बाद, पार्टी अध्यक्ष एस. निजलिंगप्पा के नेतृत्व में वर्किंग कमेटी के 21 में से 11 सदस्यों ने एक नए नेता के चुनाव के लिए कांग्रेस संसदीय दल की तत्काल बैठक बुलाई। समिति में शामिल गांधी के समर्थक 10 सदस्यों ने इस बैठक का बहिष्कार किया। इंदिरा गांधी और उनके समर्थकों ने वर्किंग कमेटी के फैसले को अवैध और अमान्य बताते हुए खारिज कर दिया। उनका तर्क था कि जब तक उन्हें सांसदों का बहुमत प्राप्त है, तब तक वह कांग्रेस की सदस्य और संसदीय दल की नेता बनी रहेंगी। संसद में 167 कांग्रेस सांसदों का एक समूह एक प्रतिद्वंद्वी पार्टी मुख्यालय में इकट्ठा हुआ और लोकतंत्र और समाजवाद की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा करते हुए इंदिरा गांधी के नेतृत्व को अपना समर्थन दिया। शरद पवार की पहली राजनीतिक बगावत 1969 के विभाजन के बाद, महाराष्ट्र के कई नेताओं ने इंदिरा गांधी की कांग्रेस (आर) या रिक्विजिशनिस्ट का पक्ष लिया। इनमें यशवंतराव चव्हाण और उनके राजनीतिक शिष्य शरद पवार भी शामिल थे। हालांकि, महाराष्ट्र में गहरा विभाजन 1977 के आम चुनाव में आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी की हार के बाद उभरा। तब तक कांग्रेस एक बार फिर टूट चुकी थी। गांधी के गुट को कांग्रेस (आई) के नाम से जाना जाने लगा, जहां आई का अर्थ इंदिरा था, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट कांग्रेस यूनाइटेड के रूप में उभरा। पवार ने यशवंतराव चव्हाण के साथ कांग्रेस (यू) के साथ रहना चुना। दोनों कांग्रेस गुटों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा, लेकिन बाद में जनता पार्टी को महाराष्ट्र में सत्ता से बाहर रखने के लिए हाथ मिला लिया। वसंतदादा पाटिल मुख्यमंत्री बने और पवार एक मंत्री के रूप में सरकार में शामिल हुए। यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल पाई। उसी वर्ष, पवार कांग्रेस (यू) से अलग हो गए, जनता पार्टी के समर्थन से प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) नामक एक गठबंधन बनाया और 38 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बन गए। यह राज्य के इतिहास में राजनीतिक विद्रोह के सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक था। उनका पहला कार्यकाल 1980 में समाप्त हुआ जब केंद्र में सत्ता में लौटीं इंदिरा गांधी ने उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया। फिर भी पवार का कांग्रेस के साथ रिश्ता स्थायी रूप से शत्रुतापूर्ण होने के बजाय लचीला बना रहा। 1987 में वह पार्टी में लौट आए, बाद में यह स्पष्ट करते हुए कि वह शिवसेना के बढ़ते प्रभाव को रोकना चाहते थे। शिवसेना का उदय एक ओर जहां कांग्रेस के गुट वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे थे, वहीं महाराष्ट्र में एक और ताकत उभर रही थी। 1966 में बाल केशव ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना की, जिन्हें बालासाहेब ठाकरे के नाम से जाना जाता है। पेशे से कार्टूनिस्ट और समाज सुधारक केशव प्रबोधनकार ठाकरे के बेटे बाल ठाकरे ने महाराष्ट्र की मराठी भाषी आबादी के हितों को लेकर इस पार्टी का निर्माण किया। समय के साथ, शिवसेना ने विशेष रूप से मुंबई में एक मजबूत जमीनी संगठन विकसित किया। इसके कार्यकर्ता अपने आक्रामक सड़क-स्तर के लामबंदी और पार्टी नेतृत्व के प्रति अटूट वफादारी के लिए जाने जाने लगे। पार्टी के उभार ने अंततः इसे भाजपा के साथ दीर्घकालिक गठबंधन में ला खड़ा किया। लगभग 25 वर्षों तक शिवसेना और भाजपा राजनीतिक भागीदार बने रहे। उस अवधि के अधिकांश समय में, शिवसेना को व्यापक रूप से महाराष्ट्र में सीनियर भागीदार के रूप में माना जाता था। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, वह संतुलन 2014 के बाद बदलना शुरू हुआ जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और भाजपा राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी। पहली शिवसेना-भाजपा सरकार वर्ष 1995 एक और ऐतिहासिक क्षण लेकर आया। महाराष्ट्र में पहली बार शिवसेना-भाजपा गठबंधन सत्ता में आया। मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने, जबकि गोपीनाथ मुंडे ने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। यह सरकार केवल औपचारिक गठबंधन पर ही नहीं, बल्कि निर्दलीय और बागी विधायकों के समर्थन पर भी निर्भर थी। अविभाजित शिवसेना ने अंततः तीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी, नारायण राणे और उद्धव ठाकरे दिए। फिर भी, किसी ने भी पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया। पवार का कांग्रेस से दूसरी बार नाता टूटना 1999 में, महाराष्ट्र ने एक और बड़ी राजनीतिक टूट देखी। शरद पवार सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस से अलग हो गए और एक अलग राजनीतिक दल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। विभाजन के बावजूद, राजनीति ने एक बार फिर अप्रत्याशित साझेदारियां पैदा कीं। शिवसेना-भाजपा गठबंधन को सरकार बनाने से रोकने के लिए चुनाव के बाद कांग्रेस और पवार की नई पार्टी ने हाथ मिला लिया। विलासराव देशमुख मुख्यमंत्री बने। 2004 से 2014 तक, पवार केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के भीतर एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए और केंद्रीय मंत्री के … Read more

PhonePe का नया नियम लागू, कुछ सेवाओं पर देना होगा अतिरिक्त शुल्क; चार्ज ₹100 तक पहुंच सकता है

 नई दिल्ली PhonePe चलाने वालों के लिए जरूरी खबर है. जल्द ही पेमेंट ऐप में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. कंपनी ने वॉलेट गाइडलाइंस को अपडेट किया है, जिसके बाद अगर आप लंबे समय तक वॉलेट का यूज करना छोड़ देते हैं, तो 100 की पेमेंट करनी पड़ सकती है।  कंपनी ने हाल ही में अपनी वॉलेट गाइडलाइंस को अपडेट किया है, जिसके तहत अगर कोई फोनपे यूजर 365 दिनों तक अपने PhonePe Wallet का उपयोग नहीं करता है, तो उसपर इनएक्टिविटी मेंटेनेंस फीस लगाई जाएगी. यह फीस 100 रुपये होगी।  फोनपे की नई गाइडलाइंस को लेकर कई लोगों ने नाराजगी जाहिर की है. इसको लेकर बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।  X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर @yabhishekhd नाम के अकाउंट ने बताया कि कई यूजर्स PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करते और सीधे अपने बैंक अकाउंट से UPI पेमेंट करते हैं. कुछ  लोगों ने कहा कि ऐसे फीचर के लिए पैसे वसूलना, जो उसका इस्तेमाल नहीं करते हैं, गलत है।  आजकल लोग लोग Wallet में पैसे डालकर उसे लंबे समय तक बिना इस्तेमाल किए छोड़ देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि Inactive Wallet क्या होता है, किन यूजर्स पर यह शुल्क लागू हो सकता है और इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए। Inactive Wallet किसे माना जाएगा Inactive Wallet का मतलब ऐसे Wallet से है जिसका उपयोग लंबे समय तक नहीं किया गया हो। यदि कोई यूजर Wallet में पैसे रखकर उसे महीनों तक इस्तेमाल नहीं करता, न कोई ट्रांजैक्शन करता है और न ही कोई भुगतान करता है, तो उसे Inactive कैटेगरी में रखा जा सकता है। Inactive Wallet पर हर तीन महीने में 100 रुपए तक का शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि यह चार्ज Wallet में उपलब्ध बैलेंस और अन्य शर्तों के आधार पर भी तय किया जा सकता है। क्या सभी PhonePe यूजर्स पर लागू होगा नियम? नहीं, यह शुल्क केवल Wallet यूजर्स के लिए हो सकता है। जो लोग केवल UPI के जरिए सीधे बैंक अकाउंट से पेमेंट करते हैं, उन पर इसका असर नहीं पड़ने की संभावना है। यह मुख्य रूप से PhonePe Wallet से जुड़े अकाउंट्स के लिए हो सकता है। UPI और Wallet में क्या अंतर और शुल्क से बचने का तरीका कई लोग UPI और Wallet को एक जैसा समझते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग सेवाएं हैं। UPI में भुगतान सीधे बैंक अकाउंट से होता है। वहीं Wallet में पहले पैसे जोड़ने पड़ते हैं और फिर उसी बैलेंस से भुगतान किया जाता है। अगर आप PhonePe Wallet का इस्तेमाल करते हैं, तो समय-समय पर उसमें कोई छोटा ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। मोबाइल रिचार्ज, बिल भुगतान या किसी भी छोटे भुगतान के जरिए Wallet को एक्टिव रखा जा सकता है। इससे Wallet निष्क्रिय नहीं माना जाएगा। किन लोगों पर लगेगी 100 रुपये की फीस  100 रुपये की फीस सिर्फ उन लोगों पर लागू होगी, जिन्होंने एक साल तक अपने PhonePe Wallet से कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया है. सिर्फ PhonePe ऐप खोलना या UPI के जरिए भुगतान करना वॉलेट गतिविधि नहीं माना जाएगा. शुल्क से बचने के लिए यूजर्स को वॉलेट के जरिए कम से कम एक ट्रांजैक्शन करना होगा, जिससे वॉलेट दोबारा एक्विट मान लिया जाएगा।  15 दिन पहले आएगा अलर्ट मैसेज  फोनपे की तरह से फीस काटने से पहले यूजर्स को 15 दिन पहले एक मैसेज भेजा जाएगा. अगर वॉलेट में बैलेंस है तो कंपनी सीधे 100 रुपये काट लेगी. वहीं, अगर वॉलेट में 100 रुपये से कम रकम है तो वह रकम पूरी काट ली जाएगी. हालांकि बैलेंस को नेगेटिव नहीं किया जाएगा।  क्या होता है PhonePe वॉलेट और इसका काम क्या है? जब आप पहली बार अपने मोबाइल में PhonePe ऐप डाउनलोड करते हैं, तो वॉलेट की सर्विस इसके साथ ही इन-बिल्ट (नत्थी होकर) आती है. यूजर इस वॉलेट को अपने बैंक खाते से रीचार्ज करके इसमें पैसे रख सकते हैं. वॉलेट का एकमात्र बड़ा फायदा यह है कि यह ऑफलाइन या कम नेटवर्क में भी काम कर जाता है।  अगर कभी आपके बैंक का सर्वर डाउन है और आप सीधे अकाउंट से पैसे नहीं भेज पा रहे हैं, तो वॉलेट में मौजूद पैसों से तुरंत भुगतान किया जा सकता है. आज के समय में शायद ही कोई वॉलेट में पैसे रखता है. अगर एक ऐप का यूपीआई काम नहीं करता, तो लोग तुरंत गूगल पे (Google Pay) या पेटीएम (Paytm) जैसे दूसरे ऐप का इस्तेमाल कर लेते हैं. इसलिए आम जनता के लिए यह वॉलेट लगभग बेकार ही पड़ा रहता है।  क्या PhonePe का ऐसा चार्ज वसूलना कानूनी है? कई यूजर्स के मन में यह सवाल है कि बिना इस्तेमाल किए पैसे काटना क्या बेईमानी नहीं है? लेकिन तकनीकी और कानूनी रूप से कंपनी ऐसा कर सकती है. जब हम पहली बार ऐप पर साइन-अप या लॉगिन करते हैं, तो हम बिना पढ़े ‘नियम और शर्तों’ (Terms and Conditions) को स्वीकार (Accept) कर लेते हैं. कंपनी इसी कानूनी दांवपेच का फायदा उठा रही है. हालांकि, आम उपभोक्ताओं के नजरिए से देखा जाए तो इसे एक तरह की ‘जबरदस्ती’ ही कहा जाएगा।  वॉलेट चार्ज से अपने ₹100 कैसे बचाएं ? अगर आप इस गैर-जरूरी चार्ज से बचना चाहते हैं, तो आपके पास दो आसान रास्ते हैं. अपने PhonePe वॉलेट में ₹10 या ₹50 डालकर उसे दोबारा एक्टिवेट कर लें और कभी-कभी उससे कोई छोटा-मोटा भुगतान कर दें. इससे आपका वॉलेट इनएक्टिव लिस्ट से बाहर हो जाएगा।  यदि आप इस वॉलेट झंझट को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं, तो ऐप के भीतर जाकर अपने वॉलेट की फुल केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करें. इसके बाद आप वॉलेट को पूरी तरह बंद या हमेशा के लिए इनएक्टिवेट करने का विकल्प चुन सकते हैं।  ध्यान रहे कि इस वॉलेट चार्ज का आपकी सामान्य यूपीआई (UPI) सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यदि आप वॉलेट एक्टिव नहीं भी करते हैं, तो भी आप पहले की तरह बैंक-टू-बैंक यूपीआई ट्रांसफर (Scan & Pay) करते रह सकेंगे।  आखिर PhonePe ऐसा कर क्यों रहा है? बाजार के जानकारों का मानना है कि कंपनी यह कदम अपनी बैलेंस शीट को मजबूत और दमदार दिखाने के लिए उठा रही है. दरअसल, PhonePe आने वाले समय में अपना … Read more

भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल आकार ले रही है। अचल संपत्तियों के पंजीकरण, स्वामित्व सत्यापन और नामांतरण प्रक्रिया को सरल, सुरक्षित एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने व्यापक सुधारों का खाका प्रस्तुत किया।   भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता पर योगी सरकार का फोकस योगी सरकार लगातार प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसी क्रम में संपत्ति पंजीकरण और नामांतरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ऐसे प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिनसे फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। प्रस्तुतीकरण में पंजीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन कर नई धाराएं 22-ए, 22-बी और 35-ए जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया, जिससे संपत्ति के स्वामित्व और अधिकारों की पूर्व जांच अनिवार्य हो सकेगी।   हर संपत्ति को मिलेगी यूनिक पहचान योगी सरकार का लक्ष्य प्रदेश की सभी ग्रामीण एवं शहरी संपत्तियों के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करना है। इस आईडी को जीआईएस मैपिंग और आधिकारिक स्वामित्व अभिलेखों से जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और रिकॉर्ड की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत घरौनी तैयार करने का कार्य पहले से चल रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।  पंजीकरण के साथ ही स्वतः होगा नामांतरण प्रदेश सरकार नागरिकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीकरण पूरा होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इसके लिए विभिन्न विभागों के अभिलेखों का एकीकरण, एपीआई आधारित डेटा साझाकरण और रियल-टाइम रिकॉर्ड अपडेट सिस्टम विकसित किया जाएगा। इससे लोगों को अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय तथा संसाधनों की बचत होगी।  भू-आधार से जुड़ेगा हर भूमि पार्सल योगी सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के अनुरूप भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर भी तेजी से कार्य कर रही है। इसके तहत प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) यानी ‘भू-आधार’ प्रदान किया जाएगा। यह जियो-रेफरेंस्ड पहचान संख्या भूमि अभिलेखों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ने में मदद करेगी, जिससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड अधिक सटीक और अद्यतन रहेंगे।  बिजली, पानी और संपत्ति कर रिकॉर्ड होंगे एक जगह   इस प्रस्तावित सुधारों के तहत संपत्ति कर रजिस्टर को स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग, राजस्व विभाग, बिजली, पानी और सीवर विभागों के रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। कॉमन प्रॉपर्टी आईडी आधारित यह व्यवस्था विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने में सहायक होगी और कर संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी।  ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मिलेगा बल विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों के लागू होने से संपत्ति संबंधी विवादों में कमी आएगी, नागरिकों को तेज और पारदर्शी सेवाएं मिलेंगी तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। योगी सरकार की यह पहल न केवल डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करेगी, बल्कि ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी नई गति प्रदान करेगी। उत्तर प्रदेश को तकनीक आधारित भूमि और संपत्ति प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब फोन आधारित शिक्षण से पूरे जिले के बच्चों को मिलेगा गणित सीखने का अवसर

रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में निज निवास बगिया से जशपुर जिले की अभिनव शैक्षणिक पहल ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ किया। फरसाबहार विकासखंड में सफल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित इस कार्यक्रम को अब जिले के सभी विकासखंडों तक विस्तारित किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की आधारभूत गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों की सहभागिता से सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती है। आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक, पालक और विद्यार्थी एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तब शिक्षा के परिणाम अधिक सकारात्मक और स्थायी होते हैं। मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जश लर्न’ कार्यक्रम बच्चों की गणितीय समझ विकसित करने, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने तथा सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया संवाद, पूछा— क्या-क्या सीखे हो? कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से लाभान्वित विद्यार्थियों वंदना यादव, नव्यता यादव, आयुषी तिर्की एवं कुसुम डडसेना से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि इस कार्यक्रम से उन्हें क्या सीखने को मिला और पढ़ाई में किस प्रकार लाभ हुआ। ग्राम झारमुंडा की कक्षा पांचवीं की छात्रा नव्यता यादव ने बताया कि अब उसे 20 तक पहाड़े याद हो गए हैं और जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसे गणितीय प्रश्न आसानी से हल कर लेती है। धनपुर की छात्रा वंदना यादव ने बताया कि नियमित फोन आधारित मार्गदर्शन और अभ्यास से गणित के प्रति उसका आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले गणित कठिन लगता था, लेकिन अब पढ़ाई में आनंद आने लगा है। बच्चों के अनुभव सुनकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा में तकनीक, शिक्षक और अभिभावकों की संयुक्त सहभागिता से सीखने के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं। डाइट के प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को किया सम्मानित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से जुड़े डाइट जशपुर के प्रथम वर्ष के उन प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया, जिन्होंने मोबाइल आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की गणितीय दक्षता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल शिक्षा क्षेत्र में नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां भावी शिक्षक समाज के बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। फरसाबहार में मिले उत्साहजनक परिणाम जिला प्रशासन जशपुर द्वारा यूथ इम्पैक्ट संस्था के सहयोग से फरसाबहार विकासखंड में ‘जश लर्न’ कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत कक्षा तीसरी एवं चौथी के चयनित विद्यार्थियों को डाइट जशपुर के छात्र-अध्यापकों द्वारा नियमित रूप से मोबाइल फोन के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया। बच्चों की गणितीय दक्षताओं का आकलन कर उन्हें जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसी मूलभूत अवधारणाओं में चरणबद्ध तरीके से मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे घर पर भी बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रही। डाइट जशपुर की प्रशिक्षु छात्रा सृष्टि ने बताया कि अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से गणित में कमजोर बच्चों को उनके अभिभावकों की उपस्थिति में नियमित फोन कॉल कर मूलभूत गणितीय कौशल सिखाए गए। इससे बच्चों को विद्यालय के अतिरिक्त घर पर भी सीखने का अवसर मिला। 260 विद्यार्थियों को मिला लाभ, 75 प्रतिशत बच्चों ने हासिल की दक्षता पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत डाइट जशपुर के 90 प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों ने फरसाबहार विकासखंड के 260 विद्यार्थियों को मोबाइल आधारित शिक्षण सहायता प्रदान की। कार्यक्रम के परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे और लगभग 75 प्रतिशत विद्यार्थियों ने जोड़, गुणा, भाग एवं अन्य मूलभूत गणितीय संक्रियाओं में दक्षता प्राप्त की। बच्चों की सीखने की गति, गणितीय समझ तथा आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। अब जिले के सभी विकासखंडों में पहुंचेगा ‘जश लर्न’ पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम को जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी सीएसी को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। “साथ मिलकर सीखें, आगे बढ़ें” की भावना पर आधारित यह पहल जशपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक और नवाचारपूर्ण मॉडल के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम के विस्तार से जिले के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा तथा उनकी आधारभूत शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, डाइट जशपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, पालकगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मध्यप्रदेश प्राकृतिक खेती अपनाने वाले राज्यों में है सबसे अव्वल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि प्रकृति हमारी माता है और हम सब इसकी संतान। अपनी धरती माता को हमें रासायनिक उर्वरकों और हानिकारक कीटनाशकों से बचाना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का पहला लक्ष्य मिट्टी में जैविक गतिविधियों को बढ़ाना है। यह खेती मिट्टी में केंचुए और सूक्ष्म जीव पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाती है। इससे भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध कृषि की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि किसान भाई अधिक से अधिक प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाएं। इससे हमारी धरती माता की सेहत भी बनी रहेगी और इससे उपजे अनाज के पोषण से हम सब भी स्वस्थ रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल से पीएम किसान सम्मान निधि के अंतरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित तारकेश्वर से देश के 9.40 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किश्त के रूप में कुल 18 हज़ार 880 करोड़ रुपए पात्र किसानों के खातों में अंतरित किए। कार्यक्रम से प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 1640 करोड़ रूपए प्राप्त हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि के सभी लाभार्थियों से अपील करते हुए कहा कि हमें धरती माता को बचाना है। हमें अपने बच्चों को बंजर जमीन नहीं देनी है। भारत सरकार खेत बचाओ अभियान चला रही है। हमें प्राकृतिक खेती अपनाकर रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग कम से कम करना है। देशभर के किसान खेत बचाओ अभियान से जुड़ें, दूसरों को भी प्रेरित करें और खेतों की मिट्टी की जांच करवाएं। हम सभी मिलकर धरती मां की रक्षा करें। हम केमिकल से धरती मां को नहीं मार सकते हैं। हमें उसे बचाना ही होगा। केंद्र सरकार ने विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया है, इसमें देशवासियों का सहयोग बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के किसानों से कहा कि जिस तरह प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, उसी तरह योग करने से हमारा तन-मन स्वस्थ रहता है। प्रधानमंत्री ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि सभी देशवासी योग करें, क्योंकि योग ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरूआत फरवरी 2019 में हुई थी। इसके तहत हर साल छह हजार रूपये, दो-दो हजार की तीन समान किश्तों में किसान भाईयों को दिए जाते हैं। अब तक प्रदेश के किसान भाईयों को 22 किश्तों में 33 हजार 800 करोड़ रूपये मिल चुके हैं। शनिवार को 23वीं किश्त का अंतरण किया गया। पश्चिम बंगाल में हुए इस कार्यक्रम का देशभर में सीधा प्रसारण किया गया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में साकार होते देख रहे है रामराज्य की संकल्पना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बरखेड़ीकला स्थित राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (सिपेट) में 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी' में पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी के संपूर्ण संबोधन का श्रवण किया। मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम रामराज्य की संकल्पना को साकार होते देख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने गांव, गरीब, अन्नदाता किसान, युवा और नारी सहित सभी वर्गों के कल्याण से विश्व में भारत की अलग ही पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश को दो-दो नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात दी है। इससे प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और उनके सूखे खेतों में फसलें लहलहाएंगी। आज देश के हर गांव-कस्बे तक बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का जाल बिछ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ही देश के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देने की योजना प्रारंभ की है। यह हमारे अन्नदाता के अथक परिश्रम का सम्मान है। मध्यप्रदेश सरकार भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। हम किसानों के कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि पाने वाले प्रदेश के सभी किसानों को बधाई दी और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। इस अवसर पर विधायक रामेश्वर शर्मा, जनप्रतिनिधि रविन्द्र यति, अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक  बर्णवाल, आयुक्तमती अनुभावास्तव, कलेक्टर भोपाल प्रियंक मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसलों में कीटनाशक और रासायनिक खाद का उपयोग नुकसानदेह है। इससे कैंसर जैसी कई घातक बीमारियां जन्म लेती हैं। सरकार ने किसानों को पुन: प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए पहल की है, इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आज हमारा मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक प्राकृतिक खेती करने वाला राज्यों में अव्वल स्थान पर है। प्राकृतिक खेती की उपज को उचित दाम दिलवाने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। हमारी प्राकृतिक खेती से दुनिया लाभान्वित हों, इसी भाव से कार्य करते हुए प्रदेश में तेजी से गोशालाओं का विस्तार किया जा रहा है। हमारी गौमाता प्राकृतिक खेती में सबसे अधिक मददगार प्राणी है। किसान गोबर और गौमूत्र से खाद बनाकर खेतों में डालें, इसी उद्देश्य से गौपालक किसानों को हमारी सरकार हर महीने 1100 रुपए प्रति गाय की दर से आर्थिक सहायता दे रही है। गौ-आधारित कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उपज का सही दाम मिले, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। पहले सोयाबीन पर भावांतर योजना के माध्यम लाभ दिया, उसके बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देकर किसानों से गेहूं उपार्जित किया। राज्य सरकार ने किसानों से गेहूं का एक-एक दाना खरीदकर उन्हें प्रति क्विंटल 2625 रुपए भुगतान किया है। हमारी सरकार प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। इससे धरती माता की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी और विदेशी रासायनिक खाद पर निर्भरता भी घटेगी। प्रदेश के नागरिकों को प्राकृतिक तरीके से उगाए देसी ज्वार, बाजरा और गेहूं-चना का स्वाद मिलेगा। किसानों को दूध उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा है। इसका दोहरा लाभ आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक खाद निर्माण में भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है। कम सिंचाई में भी फसल अच्छी होती है। प्राकृतिक खेती … Read more

कुनकुरी में जैविक किसान मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर किसानों की समृद्धि ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर फसल चयन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा सुदृढ़ बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समृद्ध बनाए बिना विकास का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी में आयोजित जैविक किसान मेला एवं खेत बचाओ अभियान अंतर्गत प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता तथा मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्व में गोबर खाद, ढैंचा एवं अन्य हरी खादों के उपयोग से खेती अधिक टिकाऊ और भूमि अधिक उपजाऊ रहती थी। आज आवश्यकता है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता को देखते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे विकल्प किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इनके उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी संरक्षित रहती है। किसानों को मिला आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न कृषि प्रदर्शनों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की तथा किसानों से संवाद भी किया। कार्यक्रम में ड्रोन के माध्यम से खेतों में दवा छिड़काव का लाइव प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उनके उपयोग से होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही कृषि नवाचारों, जैविक खेती, पशुपालन एवं मत्स्य पालन से संबंधित जीवंत प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। उत्कृष्ट किसानों का हुआ सम्मान कार्यक्रम में आयोजित किसान प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। ग्राम खोंगा (मनोरा) के किसान महेश सिंह को जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। ग्राम लाखाझार के किसान सुखराम को 33 किलोग्राम वजन के कटहल उत्पादन तथा ठेठेटांगर के किसान विजय भूषण को ढाई किलोग्राम वजन के आम उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के तहत कृषक गुप्तेश्वर को भूमि पट्टा भी प्रदान किया। औषधीय एवं सुगंधित फसलों को मिलेगा बेहतर बाजार कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जिला प्रशासन जशपुर एवं सेमिना एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के बीच औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन के लिए महत्वपूर्ण अनुबंध किया गया। इस पहल से जिले के किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा मूल्य संवर्धन और विपणन की नई संभावनाएं विकसित होंगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। किसानों की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार बनने के तुरंत बाद किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस प्रदान किया गया तथा शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना से बदलेगी खेती की तस्वीर मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत चयनित देश की 100 प्रमुख परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ की एकमात्र बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना शामिल है। लगभग 119 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना से 14 गांवों के लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने वाली इस योजना से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं होगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए देश के चयनित 100 जिलों में छत्तीसगढ़ के केवल तीन जिले—दंतेवाड़ा, कोरबा और जशपुर—शामिल किए गए हैं, जिससे जिले के कृषि विकास को नई गति मिलेगी। सुशासन और डिजिटल सेवाओं से ग्रामीणों को मिल रही सुविधा मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए गुड गवर्नेंस एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। अधिकांश शासकीय कार्य अब ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से संचालित हो रहे हैं तथा भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से 400 से अधिक नागरिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनका लाभ लोग घर बैठे प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश की 6 हजार ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों को बैंकिंग एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि अब नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे दर्ज करा सकते हैं। 24×7 संचालित इस व्यवस्था से 42 विभागों के 8 हजार से अधिक अधिकारी जुड़े हैं और प्रत्येक शिकायत के समयबद्ध निराकरण की निगरानी की जा रही है। कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्षमती गोमती साय, जशपुर विधायकमती रायमुनी भगत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बेसरा, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव,  नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष यशप्रतापसिंह जूदेव सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

पीएम किसान योजना: बिहार में किसानों को मिली राहत, 34 हजार नाम लिस्ट से बाहर

पटना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत बिहार के लाखों किसानों का लंबा इंतजार अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। सरकार की ओर से शनिवार को राज्य के लगभग 73 लाख किसानों के बैंक खातों में योजना की राशि सफलतापूर्वक ट्रांसफर कर दी गई है। प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने बिहार के इन लाभार्थी किसानों के लिए कुल 1,463 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की है, जो सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों के खातों में क्रेडिट हो चुकी है। खेती-किसानी के इस चालू सीजन में बैंक खातों में पैसा आने से बिहार के ग्रामीण इलाकों के किसानों को एक बहुत बड़ी आर्थिक राहत मिली है। किसानों के खाते में पहुंचे दो-दो हजार रुपये इस योजना के नियमों के तहत सभी पात्र और लाभुक किसानों के खातों में दो-दो हजार रुपये की सम्मान राशि भेजी गई है। मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित इस बेहद लोकप्रिय योजना के तहत प्रत्येक वर्ष देश भर के किसानों को हर चार-चार माह के अंतराल पर दो-दो हजार रुपये की तीन बराबर किस्तें सीधे उनके खातों में भेजी जाती हैं। बिहार के किसानों के खातों में आज जो रकम क्रेडिट हुई है, वह इस योजना के तहत मिलने वाली 23वीं किस्त की राशि है। मोबाइल पर मैसेज आते ही बिहार के किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है और वे अपनी अगली फसलों की खाद व बीज की व्यवस्था के लिए बैंकों व सीएसपी केंद्रों का रुख करने लगे हैं। 22वीं किस्त के मुकाबले इस बार 34 हजार किसानों को लगा बड़ा झटका जहाँ एक तरफ 73 लाख किसानों के घरों में इस राशि के आने से उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के हजारों किसानों को इस बार मायूसी का सामना भी करना पड़ा है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पिछली यानी 22वीं किस्त की तुलना में बिहार के लगभग 34 हजार किसानों को इस बार योजना की राशि नहीं मिल सकी है। गौरतलब है कि 22वीं किस्त के समय बिहार के कुल 73 लाख 34 हजार किसानों के खातों में 1,467 करोड़ रुपये की राशि भेजी गई थी। लेकिन इस बार भू-सत्यापन और ई-केवाईसी जैसी जरूरी तकनीकी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा नहीं करने के कारण राज्य के 34 हजार किसानों के नाम लाभार्थी सूची से बाहर हो गए हैं। कृषि विभाग ने इन वंचित किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपनी त्रुटियों को सुधारें ताकि अगली किस्त में उन्हें इस समस्या का सामना न करना पड़े।