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Bhopal Administration सख्त, 15 दिन में देना होगा परमिशन का रिकॉर्ड; 576 अवैध कॉलोनियां निशाने पर

भोपाल भोपाल प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. कोलार इलाके की 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें उन्हें 15 दिनों के भीतर संबंधित अनुमति दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है. पूरे शहर में कुल 576 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है, और उनसे जुड़े मामलों के संबंध में अब तक 300 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. कॉलोनी सेल की एक बैठक के दौरान, सभी ज़ोनल अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करें, जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।  हालांकि पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। शहर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गईं और बड़ी संख्या में एफआईआर भी दर्ज हुईं, लेकिन किसी भी मामले में कार्रवाई अंतिम परिणाम तक नहीं पहुंच सकी। आंकड़ों में सख्ती, जमीनी स्तर पर असर नहीं प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों के तहत राहत देते हुए वैधीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया गया। बाकी कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, फिर भी नहीं हुई गिरफ्तारी अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई जगहों पर केवल औपचारिक कार्रवाई के तहत बाउंड्रीवाल या निर्माण के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में विकास कार्य लगातार जारी रहे। आंकड़ों में बड़ी कार्रवाई, जमीन पर नतीजे शून्य प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों में छूट देकर वैध करने की प्रक्रिया शुरू की गई। शेष कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणाएं तो हुईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी एक भी नहीं अवैध कॉलोनियों के मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई स्थानों पर केवल प्रतीकात्मक तौर पर बाउंड्रीवाल या निर्माण का हिस्सा तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में गतिविधियां जारी रहीं। कोलार की इन 15 कॉलोनियों पर कार्रवाई नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र में 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा क्षेत्र की कई निर्माणाधीन कॉलोनियां शामिल हैं। संबंधित कॉलोनाइजरों से स्वीकृत नक्शे, डायवर्जन और अन्य वैधानिक अनुमतियों के दस्तावेज मांगे गए हैं। फिर शुरू हुआ नोटिस अभियान 1 जून को हुई कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध निर्माण या बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। कोलार क्षेत्र की 15 कॉलोनियां जांच के दायरे में नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र के रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा सहित विभिन्न इलाकों में विकसित हो रही 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। कॉलोनाइजरों से सभी आवश्यक वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। इन कॉलोनाइ्रजर्स को नगर निगम का नोटिस मनीष शर्मा (चित्रांश ग्रुप, ग्राम रतनपुर), खान, (राधापुरम, ग्राम बैरागढ़ चीचली), दूलीचंद यादव (माइल स्टोन स्कूल के पास, ग्राम अकबरपुर), संजय राठौर, (ऐन्जल होम्स कान्हाकुंज के पास, ग्राम अकबरपुर), घनश्याम पाटीदार (ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन पलिया, (हेवेन्स पार्क, ग्राम बैरागढ़ चीचली),चंदप्रताप सिंह, (कुसुमा विहार, ग्राम बैरागढ़ चीचली), राघवेंद्र सिंह (ग्राम बैरागढ़ चीचली), दीपक शर्मा, (हिल्स व्यू सिटी, ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन मारन (दुर्गा विहार कॉलोनी, नयापुरा कोलार रोड), दिनेश पाल (व्यंकटेश्वर धाम, नयापुरा कोलार), रमेश मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), गोविंद मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), अशोक पवार (ग्राम बैरागढ़ चीचली) और अशोक मीणा (सांई रेसीडेन्सी, ग्राम बैरागढ़ चीचली) बाहरी दीवारें गिराकर खानापूर्ति रिकॉर्ड बताते हैं कि अवैध कॉलोनियों पर अब तक 300 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद एक भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई और किसी भी मामले में अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कुछ स्थानों पर दीवारें गिराकर खानापूर्ति की गई। सिटी प्लानर अनिल साहनी के अनुसार 1 जून को हुई 10 सदस्यीय कॉलोनी सेल की बैठक के बाद 15 नए नोटिस जारी किए गए हैं। सेल में जिला प्रशासन, नगर निगम, टीएंडसीपी, सहकारिता और भू-संसाधन प्रबंधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। जोन अधिकारी बना रहे कार्रवाई की सूची सभी जोन अधिकारियों को अवैध कॉलोनियों की लिस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार के निर्माण की सूचना मिलने या संदिग्ध पाए जाने पर उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। – नीरज आनंद लिखार, ग्राम तथा नगर निवेश सभी ज़ोन को मिले जांच और नई सूची बनाने के निर्देश कॉलोनी सेल की बैठक में अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा कि आम जनता की गाढ़ी कमाई को ठगने वाले भू-माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। सभी जोन के अधिकारियों को अपने इलाकों में सक्रिय अवैध कॉलोनियों की पूरी जांच करने और उनकी सूची अपडेट करने को कहा गया है। इसके साथ ही आम लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी नई कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीदने से पहले नगर निगम या रेरा (RERA) से उसके वैध होने की जांच जरूर कर लें। फिर शुरू हुआ अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान 1 जून को आयोजित कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों और संदिग्ध निर्माण गतिविधियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

ईरान के हमले से कुवैत में तबाही, हवाई अड्डा बना निशाना

कुवैत  कुवैत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है। कुवैत स्थित भारत के दूतावास ने इसकी पुष्टि कर दी है। कुवैत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि हमले में 63 लोग घायल हुए हैं, जिनमें हवाई अड्डे के कर्मचारी और यात्री शामिल हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमले में हवाई अड्डे की सुविधाओं और राजनयिक मिशनों को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे एक बार फिर पश्चिम एशिया में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। इंडियन एंबेसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'कुवैत स्थित भारतीय दूतावास आज कुवैत के हवाई अड्डे पर हमले में एक भारतीय नागरिक की दुखद मौत पर अपनी संवेदना व्यक्त करता है। दूतावास मृतक के परिवार के संपर्क में है और कुवैती अधिकारियों के साथ मिलकर मृतक के परिवार और घटना में घायल हुए लोगों को हर संभव सहायता देने के लिए समन्वय स्थापित किए हुए है।' कुवैत ने जताई कड़ी नाराजगी कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से उनकी जमीन पर क्रूर हमले किए हैं। ईरान के इस तरह के हमले क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। बयान के अनुसार, इन हमले में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई नागरिक और महत्वपूर्ण ढांचागत सुविधाओं को निशाना बनाया गया। कुवैती विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह ईरान के इन हमलों को पूरी तरह खारिज करता है। इस तरह की घटनाएं ना केवल क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाती हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और 2026 के सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2817 का भी उल्लंघन हैं। कुवैत की संप्रभुता, सुरक्षा और उसके नागरिकों की रक्षा रेड लाइन है, जिसे किसी भी हालत में पार नहीं किया जा सकता। कुवैत देगा ईरान को जवाब! कुवैत सरकार ने इन हमलों का जवाब देने के लिए संभावित उपायों पर विचार करने की बात कही है। कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस स्थिति पर ध्यान देने और तनाव कम करने के लिए तत्काल कूटनीतिक प्रयास तेज करने की अपील की है। कुवैती रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि हमले में कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल-1 (टी1) को कई ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। कुवैत पर हमलों के समय ही बुधवार सुबह को बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी चेतावनी सायरन बजाए जाने की जानकारी दी है। गृह मंत्रालय ने बताया कि बुधवार को एक चेतावनी सायरन बजाया गया जिसमें नागरिकों और निवासियों से शांत रहने और सुरक्षा संबंधी आधिकारिक निर्देशों को पालन करते हुए करीब सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई।

रायपुर में बनेगा विश्वस्तरीय हॉस्पिटैलिटी और वेलनेस सेंटर, PPP मॉडल पर तैयार होगी परियोजना

रायपुर में विकसित होगा विश्वस्तरीय हॉस्पिटैलिटी एवं वेलनेस सेंटर, क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के उन्नयन हेतु PPP मॉडल पर प्रस्तावित परियोजना इनडोर स्पोर्ट्स, जिम, स्विमिंग पूल, आधुनिक आवासीय सुविधाओं सहित होगा व्यापक आधुनिकीकरण रायपुर,  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा राजधानी रायपुर स्थित क्वींस क्लब ऑफ इंडिया के विकास, संचालन एवं रख-रखाव के लिए लाइसेंस आधार पर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत एजेंसी नियुक्त करने की महत्वपूर्ण परियोजना प्रस्तावित की गई है। यह पहल रायपुर को एक आधुनिक एवं प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी तथा वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। परियोजना के तहत क्लब परिसर में स्क्वैश कोर्ट, टेनिस कोर्ट, जिम, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन हॉल, बिलियर्ड रूम तथा टेबल टेनिस हॉल जैसी आधुनिक खेल एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं विकसित एवं संचालित की जाएंगी। साथ ही वर्तमान अधोसंरचना का व्यापक आधुनिकीकरण एवं नवीनीकरण भी किया जाएगा। वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि यह परियोजना रायपुर को एक नए प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी हब के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा गुणवत्तापूर्ण शहरी अधोसंरचना विकास को नई गति प्राप्त होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्वींस क्लब ऑफ इंडिया की विशेष आवास योजना के अंतर्गत सांसद एवं विधायक वर्ग के 108 सदस्यों की विशेष सदस्यता पूर्ववत जारी रहेगी। परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान वर्तमान सदस्यों के हितों एवं सुविधाओं का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने बताया कि परियोजना को लाइसेंस, डेवलप, ऑपरेट एवं ट्रांसफर (LDOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार क्लब की मौजूदा सुविधाओं का बेहतर संचालन एवं प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा तथा टेनिस कोर्ट क्षेत्र के रिक्त भूभाग पर लगभग 61 कमरों वाले आधुनिक आवासीय एवं हॉस्पिटैलिटी ब्लॉक का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना में लगभग 25 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इससे अत्याधुनिक सुविधाओं का विकास होने के साथ-साथ दीर्घकालिक राजस्व सृजन, आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि तथा रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। परियोजना की लाइसेंस अवधि 20 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें अतिरिक्त 10 वर्ष तक विस्तार का प्रावधान रहेगा। देव ने कहा कि शहर के प्रमुख क्षेत्रों से उत्कृष्ट सड़क संपर्क एवं बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यह परियोजना निवेशकों और उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इसके माध्यम से राजधानी में उच्चस्तरीय आतिथ्य, खेल एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का नया केंद्र विकसित होगा।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका? TMC के 59 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के खेमे में जाने की चर्चा

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के महज एक महीने के भीतर राज्य की राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा और अप्रत्याशित भूचाल आ चुका है. पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) आधिकारिक तौर पर दोफाड़ होने की कगार पर पहुंच गई है. कोलकाता के सियासी गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, टीएमसी के भीतर की गुटबाजी अब एक खुली जंग में तब्दील हो चुकी है, जिसके बाद तृणमूल कांग्रेस का आड़ा-तिरछा विभाजन तय माना जा रहा है. इस बड़े उलटफेर ने राज्य से लेकर देश भर के राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है।  59 विधायक हुए बागी? मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, बुधवार सुबह ठीक 10 बजे ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा के नेतृत्व में टीएमसी के बागी विधायकों का एक बहुत बड़ा हुजूम अचानक विधानसभा पहुंच गया. सूत्रों का दावा है कि पार्टी के कुल 80 विधायकों में से दो-तिहाई से कहीं अधिक, यानी कुल 59 नाराज विधायक अब ऋतब्रता बनर्जी के पाले में खड़े हो चुके हैं. इन सभी विधायकों ने एक संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे विधानसभा अध्यक्ष रथेंद्र बसु को सौंपने की तैयारी की जा चुकी है।  ममता के धरने में दिखी कम संख्या इस अभूतपूर्व टूट के बीच सबसे ज्यादा चौंकाने वाला आंकड़ा ममता बनर्जी के खेमे का सामने आया है. राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि अब पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ महज 21 विधायक ही शेष बचे हैं. इस दावे को मंगलवार को तब और हवा मिल गई जब कोलकाता के वाई चैनल पर आयोजित ममता बनर्जी के धरने में पूरी पार्टी से सिर्फ 6 विधायक और 5 सांसद ही शामिल होने पहुंचे. विधायकों की इस बेहद कम संख्या ने खुद टीएमसी नेतृत्व को भी गहरे संकट में डाल दिया है।  ऋतब्रता को विपक्ष का नेता बनाने का दांव ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाला यह बागी गुट अब पूरी ताकत के साथ विधानसभा में खुद को असली तृणमूल कांग्रेस के रूप में स्थापित करने की कोशिश में जुट गया है. बागी विधायकों के दस्तखत वाले पत्र के जरिए विधानसभा अध्यक्ष से मांग की जा रही है कि ऋतब्रता बनर्जी को आधिकारिक तौर पर विपक्ष का नेता घोषित किया जाए. इसके साथ ही संदीपान साहा को उप-विपक्ष का नेता और मुर्शिदाबाद के विधायक अखरुज्जमान को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।  ममता के पास सिर्फ 21 विधायक? सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 59 विधायकों के बागी रुख अख्तियार कर लेने के बाद अब आधिकारिक तौर पर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के पास सिर्फ 21 विधायक बचे हैं. विधायकों का ये नंबर गेम बताता है कि टीएमसी इस वक्त पूरी तरह से मुश्किलों में घिरी हुई।  बताया जा रहा है कि टीएमसी के ये बागी विधायक विधानसभा पहुंच गए हैं, जहां वह विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात करेंगे. इसके लिए स्पीकर भी सदन पहुंच गए हैं. बताया जा रहा है कि स्पीकर से मुलाकात के दौरान ऋतब्रत नेता प्रतिपक्ष के लिए अपनी बात रखेंगे।  क्या है बागी विधायकों की मांग टीएमसी के इन बागी विधायकों की मांग है कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय के बजाय पार्टी के किसी अन्य बेहद वरिष्ठ नेता को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (लीडर ऑफ अपोजिशन) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए, जिसके लिए उन्होंने ये कड़ा रुख अपनाया है। उधर, टीएमसी के बागी विधायकों में शामिल मुस्तफिजुर रहमान ने कहा कि टीएमसी के 59 विधायकों ने हस्ताक्षर किया है. हम सभी ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं है, लेकिन हम चाहते हैं कि किसी वरिष्ठ नेता को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाए। विधानसभा के मौजूदा समीकरणों को देखें तो इस अभूतपूर्व बगावत के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी के पास अब केवल 21 वफादार विधायक ही बचे हैं, जिससे पार्टी के पूरी तरह विभाजित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। आपको बता दें कि हाल ही में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 207 सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर टीएमसी को सत्ता से बेदखल कर दिया।  दिग्गज और अल्पसंख्यक नेताओं की बड़ी बगावत इस विद्रोह की सबसे खास बात यह है कि इसमें ममता बनर्जी के पुराने और सबसे भरोसेमंद सिपहसालार शामिल हैं. बागी गुट में पूर्व मंत्री जावेद खान, शूलि साहा, वीरभूम के कद्दावर नेता काजल शेख, पूर्व मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा, मुर्शिदाबाद के विधायक नियामत शेख, सामशेरगंज के विधायक मोहम्मद नूर आलम, उत्तर दिनाजपुर के विधायक गुलाम रब्बानी, डोमजूर के विधायक तापस मैती और हावड़ा मध्य के विधायक अरूप राय जैसे कद्दावर नाम शामिल हैं. मालदा की विधायक और पूर्व मंत्री साबीना यास्मीन ने खुलेआम ऋतब्रता बनर्जी का समर्थन कर दिया है. इसके अलावा, मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों के अधिकांश अल्पसंख्यक विधायक भी इसी बागी गुट के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।  फर्जी हस्ताक्षर पर छिड़ी कानूनी जंग इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में एक बड़ा कानूनी मोड़ तब आया, जब अभिषेक बनर्जी की तरफ से विधानसभा भेजे गए एक पत्र पर बागी विधायकों ने अपने फर्जी हस्ताक्षर होने का आरोप लगा दिया. ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा ने स्पीकर से लिखित शिकायत की है कि विधायकों की मर्जी के बिना उनके दस्तखत का गलत इस्तेमाल किया गया है. इस गंभीर शिकायत के बाद राज्य की सीआईडी (CID) ने मामले की जांच शुरू कर दी है। 

हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध परंपरा युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत : राज्यपाल पटेल

हिन्दी पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा से युवा प्रेरणा लें : राज्यपाल पटेल सप्रे संग्रहालय में राज्यपाल पटेल की जीवनी का हुआ लोकार्पण राज्यपाल ने पोस्टर प्रदर्शनी : "पुरखों को प्रणाम" का किया अवलोकन भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का प्रारंभिक काल अत्यंत चुनौती पूर्ण था। कर्मठ पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत की अनेक कठिनाईयों के बावजूद पत्रकारिता के आदर्शों और शुचिता को बनाए रखा। हिन्दी पत्रकारिता की इसी गौरवशाली परंपरा से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्यपाल पटेल बुधवार को "हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी महोत्सव, पुरखों को प्रणाम : पोस्टर प्रदर्शनी" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा किया गया है। राज्यपाल ने महान पूर्वजों के स्मरण की अनुकरणीय पहल के लिए संस्थान को बधाई और साधुवाद दिया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि ऐतिहासिक हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं और युग निर्माता संपादकों की पोस्टर प्रदर्शनी, पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक ले जाने का प्रेरक प्रयास है। प्रदर्शनी का आयोजन, राष्ट्र धर्म और जन सेवा के लिए जीवन समर्पित करने वाले युग निर्माता संपादकों के त्याग और समर्पण को सजीव कर दर्शक का मन उन सभी महान विभूतियों की साधना और समर्पण के प्रति आदर भाव से भर देता है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि पत्रकारिता कोई साधारण व्यवसाय नहीं, यह समाज के प्रति उत्तरदायित्व, सत्य के प्रति निष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। गौरव की बात है कि हिन्दी पत्रकारिता ने अपने आरंभ से ही समाचार प्रसार की सीमाओं से आगे बढ़कर कार्य किया। समाज के दिशा दर्शन, जनमत को सशक्त बनाने तथा राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का सशक्त प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के कठिन दौर में भी हिन्दी पत्रकारिता ने जन जागरण, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने में कारगर भूमिका निभाई है। यही कारण है कि हिन्दी पत्रकारिता का योगदान केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं रहा उसने विशाल पाठक वर्ग तैयार कर ज्ञान का प्रसार भी है। हिन्दी पत्रकारिता को डिजिटल माध्यमों और युवाओं से जोड़ना जरूरी राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता आज भी हमारे लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने, नागरिक चेतना जगाने और राष्ट्र निर्माण प्रयासों में प्रभावी भूमिका निभा रही है। विज्ञान और तकनीक के इस दौर में हिन्दी पत्रकारिता को वीडियो, पॉडकास्ट, वेबसाइट और मोबाइल मंचों के माध्यम से युवा पीढ़ी से जोड़ना आवश्यक है। पत्रकारों का आह्वान किया कि युवाओं को पत्रकारिता की विश्वसनीयता, सत्य निष्ठा, निष्पक्षता के मूल्यों की प्रेरणा दें। उनमें नवाचार, कौशल विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भाव और भावनाएं विकसित करें। अपनी लेखनी से सामाजिक सरोकारों और वंचितों के प्रति संवेदनशीलता को मजबूत बनाए। राज्यपाल ने जीवनी के लोकार्पण के लिए माना आभार कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के जीवन पर आधारित पुस्तक "पीर पराई जाने रे" का लोकार्पण किया गया। पुस्तक का लेखन लोकभवन की कंट्रोलर श्रीमती शिल्पी दिवाकर और मुद्रण-प्रकाशन माधवराव सप्रे संग्रहालय द्वारा किया गया है। राज्यपाल पटेल ने जीवनी लेखन, प्रकाशन से संबंधित सभी लोगों का आभार माना।    पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत प्राचीन : महापौर श्रीमती राय महापौर श्रीमती मालती राय ने कहा कि भारत में पत्रकारिता का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। हमारी ज्ञान परंपरा में भी देखा जा सकता है। उन्होंने राज्यपाल पटेल के जन कल्याण प्रयासों में सक्रियता, सहयोग और संवेदनशीलता की सराहना की। वरिष्ठ पत्रकार और संपादक महेश श्रीवास्तव ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, व्यावसायिकता आदि की चुनौतियों के संदर्भ में विचार व्यक्त किए। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने कहा कि देश में पत्रकारिता की समृद्ध संस्कृति है। इसकी झलक पौराणिक ग्रंथों के संदर्भ से लेकर आधुनिक विकास यात्रा मिलती है। महाभारत के पात्र संजय को आधुनिक लाइव प्रसारण का अग्रदूत माना जा सकता है, क्योंकि वे धृतराष्ट्र को युद्ध का प्रत्यक्ष वर्णन सुनाते थे। नारद ऋषि ने लोक-कल्याण के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान किया, उसी परंपरा को आज पत्रकार आगे बढ़ा रहे हैं। राज्यपाल पटेल का माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल को हिन्दी भवन द्वारा पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित विशेषांक भेंट किया गया। स्वागत उद्बोधन विजयदत्त श्रीधर ने दिया। आभार प्रदर्शन डॉ. मंगला ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में लोकभवन के अधिकारी, जनसंपर्क विभाग के सेवा निवृत्त अपर संचालक सुरेश गुप्ता, हिन्दी पत्रकारिता से जुड़े विद्वान, पत्रकार और साहित्य प्रेमी मौजूद थे।  

कर्नाटक की सियासत में नया अध्याय: डीके शिवकुमार ने संभाली कमान, 13 मंत्रियों का शपथ ग्रहण

कर्नाटक कर्नाटक में पिछले तीन साल से चल रहा मुख्यमंत्री पद का विवाद आखिरकार थम गया है। कांग्रेस के अहम रणनीति कार माने जाने वाले डीके शिवकुमार राज्य की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। बुधवार को कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में डीके शिवकुमार ने पद और गरिमा की शपथ ली। उनके साथ कर्नाटक कांग्रेस के बड़े दलित नेता जी परमेश्वर ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही डीके के 13 और मंत्रियों ने शपथ ली, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र का नाम भी शामिल है राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए निकले डीके शिवकुमार सबसे पहले अपनी मां के आवास पर पहुंचे। यहां पर उन्होंने उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह सीधे लोकभवन पहुंचे, जहां पर कांग्रेस के तमाम बड़े नेता समेत संत समाज उनकी प्रतीक्षा में था। शिवकुमार ने सबसे पहले वहां मौजूद संतों का अभिवादन किया। संतों ने मिलकर ‘होने वाले मुख्यमंत्री’ को पटका पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद शिवकुमार मंच पर पहुंचे, जहां सबसे पहले उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का गले लगकर अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का स्वागत किया। संविधान की प्रति लेकर ली शपथ राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शिवकुमार को बुलाया, तो डीके के हाथ में लाल रंग की संविधान की प्रति भी थी। इसी प्रति को हाथ में लेकर उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली, जिस वक्त डीके शपथ ले रहे थे उनके कार्यकर्ताओं के बीच में जबरदस्त जोश देखने को मिला। शपथ लेने के बाद डीके ने मंच पर जनता के सामने झुककर उनका अभिवादन किया। डीके के शपथ लेने के बाद जी परमेश्वरा ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद एक-एक करके बाकी मंत्रियों ने भी अपने पद की शपथ ली। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बेटे यतींद्र भी शामिल थे। नए मंत्रियों में कौन-कौन शामिल? कर्नाटक में तीन साल के उठा पटक के बाद सत्ता संभालने वाले डीके शिवकुमार की टीम में नए नाम भी शामिल हुए हैं। उप मुख्यमंत्री के रूप में जी. परमेश्वर ने शपथ ली है। इसके अलावा के.एच. मुनियप्पा, के.जे. जॉर्ज, एम.बी. पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायर गौड़ा, प्रियांक खरगे, यू.टी. खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्दारमैया, बैरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल ने भी मंत्री के रूप में पद और गरिमा की शपथ ली। वीआईपी रहा सीएम शिवकुमार का शपथ ग्रहण कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह भव्य रहा है। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य में मौजूद रहे। उनकी मां गौरम्मा, पत्नी उषा और उनके बच्चे शामिल थे। समारोह में धार्मिक गुरु, फिल्म जगत की हस्तियां, खिलाड़ी और उद्योगपति भी मौजूद थे। चालीस से अधिक धर्मगुरु समारोह में उपस्थित थे। इसके अलावा अभिनेता रविचंद्रन, अभिनेत्री जयमाला, किच्चा सुदीप, रम्या, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद और उद्योगपति अनिल कुंबले जैसी जानी-मानी हस्तियां भी मौजूद थीं। परंपरा से हटकर शपथ ग्रहण समारोह पश्चिम दिशा के बजाय पूर्व दिशा की ओर मुख करके आयोजित किया गया। यह निर्णय आध्यात्मिक और ज्योतिषीय सलाहकारों की सलाह पर लिया गया था। लोक भवन परिसर में स्थित 'ग्लास हाउस' में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जहां निर्धारित स्थानों पर लगभग 3,500 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। धर्मगुरुओं के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी, जबकि समारोह की कार्रवाई को सभी तक पहुंचाने के लिए छह एलईडी स्क्रीन लगाई गई थीं। इस कार्यक्रम के लिए 2,000 से अधिक वीआईपी पास जारी किए गए थे। बता दें, तीन साल तक चली खींचतान के बाद सिद्दारमैया ने आखिर कार अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद शिवकुमार का राजतिलक तय माना जा रहा था। हालांकि, दिल्ली में पार्टी नेताओं ने इस पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन बाद में पूरा मामला खुल गया। दिल्ली से लौटकर आए सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दिया और इसके साथ ही पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया गया। शिवकुमार ने विधायकों के साथ अपना समर्थन दिखाते हुए राज्यपाल से शपथ के लिए समय मांगा। इसके बाद तीन जून की तारीख तय हुई। बुधवार तीन जून को पद और गरिमा की शपथ लेने के साथ ही कर्नाटक में कांग्रेस का किंगमेकर आखिरकार किंग बन ही गया।  

मछुआरों के लिए नई पहल, मुख्यमंत्री साय ने वितरित की आधुनिक उपकरण सामग्री

कोंडागांव/रायपुर. सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सोमवार को कोंडागांव जिले के ग्राम पंचायत बड़ेकनेरा में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर मत्स्य पालन विभाग द्वारा जिले के मत्स्य पालकों एवं मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों को आजीविका संवर्धन के लिए विभिन्न आधुनिक उपकरण एवं सामग्री प्रदान की गई।  मुख्यमंत्री साय ने ग्राम मालाकोट के कमल सिंह नेताम एवं ग्राम जोबा के नरेंद्र कश्यप को मोटर साइकिल और आइस बॉक्स प्रदान किए। इन संसाधनों के माध्यम से अब दोनों हितग्राही अपनी मछलियों को सुरक्षित तरीके से दूरस्थ बाजारों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उनके व्यवसाय को नई गति मिलेगी। हितग्राहियों ने बताया कि पहले मछलियों के परिवहन और संरक्षण में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आइस बॉक्स उपलब्ध होने से अब मछलियों की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी और उन्हें बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। वहीं मोटर साइकिल मिलने से परिवहन आसान होने के साथ-साथ समय और लागत की भी बचत होगी। आधुनिक जाल से बढ़ेगा उत्पादन कार्यक्रम में ग्राम बड़ेकनेरा के ललित बघेल एवं रामलाल नेताम को मछली पकड़ने के लिए आधुनिक जाल वितरित किए गए। हितग्राहियों ने बताया कि नए जाल मिलने से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलेगी तथा व्यवसाय को और अधिक व्यवस्थित एवं लाभकारी बनाया जा सकेगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक व्यवसायों को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। मत्स्य पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों में आय का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभर रहा है और सरकार इस क्षेत्र से जुड़े हितग्राहियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर उनकी आय और जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं मत्स्य पालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन से प्राप्त यह सहयोग उनके व्यवसाय के विस्तार और आर्थिक उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक संसाधनों की मदद से वे अपने मत्स्य व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकेंगे।

पार्टी में फूट की चर्चाओं के बीच TMC में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, ममता ने लिया बड़ा एक्शन

कोलकत्ता   पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टूटने और महाराष्ट्र की तरह पार्टी के सिंबल पर कब्जे की खबरों के बीच ममता बनर्जी के सबसे वफादार शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मोर्चा संभाल लिया है. टीएमसी के पहले निर्वाचित विधायक और विधानसभा में मनोनीत नेता प्रतिपक्ष (LoP) चट्टोपाध्याय ने मंगलवार को दल-बदल और बगावत की सभी अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का बहुमत आज भी ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा है. संगठन पर पार्टी के पुराने वफादारों का ही नियंत्रण रहेगा।  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने बड़ा एक्शन लेते हुए तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियों, पार्टी से जुड़े संगठनों को तत्काल प्रभाव से विलय कर दिया है. टीएमसी ने कहा है कि सभी कमेटियों और फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन का पुनर्गठन किया जाएगा।  टीएमसी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा है कि गहन विचार-विमर्श के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियां, साथ ही इसके सभी अनुषांगिक संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग माने जाएंगे।  TMC ने कहा कि पार्टी हर स्तर पर आत्म-निरीक्षण, कार्य-निष्पादन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन की एक व्यापक प्रक्रिया चलाएगी. इस प्रक्रिया के निष्कर्षों के आधार पर मुख्य संगठन और सभी अनुषांगिक संगठनों की संगठनात्मक संरचना का पुनर्गठन किया जाएगा और उचित समय पर इसकी घोषणा की जाएगी।  पार्टी अपने संगठन को सुदृढ़ बनाने और उसे नए उत्साह तथा उद्देश्य के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बता दें कि बंगाल विधानसभा में हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को TMC में फूट का सामना करना पड़ रहा है. कुछ आनुषांगिक संगठन आलाकमान के फैसले से इतर दूसरे गुट के फैसलों के साथ सहमति जता रहे हैं। टीएमसी ने भंग की सारी कमेटियां और संगठन तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अपनी सभी कमेटियों के साथ-साथ अपने सभी फ्रंटल संगठनों को भी तत्काल प्रभाव से भंग करने का फैसला किया है. पार्टी ने कहा कि अब वह एक विस्तृत आंतरिक समीक्षा करेगी, जिसमें सभी स्तरों पर कामकाज और संगठनात्मक कार्यप्रणाली का मूल्यांकन शामिल होगा. इस प्रक्रिया के नतीजों के आधार पर, मुख्य संगठन और उससे जुड़े सभी विंग्स के लिए एक नए सिरे से तैयार संगठनात्मक ढाँचे की घोषणा बाद में की जाएगी।  पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘गहन विचार-विमर्श के बाद, यह फैसला किया गया है कि पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियां, और साथ ही उसके सभी फ्रंटल संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग माने जाएँगे. पार्टी हर स्तर पर आत्म-निरीक्षण, कामकाज की समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन का एक व्यापक अभियान चलाएगी. इस प्रक्रिया से सामने आए नतीजों के आधार पर, मुख्य संगठन और सभी फ्रंटल संगठनों के संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन किया जाएगा और उचित समय पर इसकी घोषणा की जाएगी।  उन्होंने आगे कहा, ‘पार्टी अपने संगठन को मज़बूत करने और उसे नए जोश और उद्देश्य के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।  TMC के 16 फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन हैं. टीएमसी की फ्रंटल संगठन की संख्या लगभग 16 है. आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ये संगठन पार्टी के विभिन्न वर्गों जैसे युवा, महिला, छात्र, मजदूर आदि को संगठित करते हैं।   कमेटियों की बात करें तो इसमें TMC की मुख्य कार्यकारी कमेटी है. इसके अलावा कोर कमेटी, स्टेट कमेटी, जिला और ब्लॉक कमेटी और अनुशासन समिति है. अब इन सभी का विलय कर दिया गया है और कमेटियों का गठन किया जाएगा।   पैसे और सत्ता के दम पर बगावत कराने की कोशिश : शोभनदेव शोभनदेव चट्टोपाध्याय का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब निष्कासित और बागी नेताओं (ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा) के गुट 20 से 50 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं. शोभनदेव ने इन दावों के पीछे की इनसाइड स्टोरी को उजागर करते हुए गंभीर आरोप लगाये।  नेता विपक्ष के पद के लिए 58 विधायकों ने रीताब्रता बनर्जी का समर्थन किया टीएमसी विधायकों की बैठक के बाद 58 सदस्यों के हस्ताक्षरों वाला एक संयुक्त पत्र विधानसभा स्पीकर को सौंपा गया है, जिसमें विपक्ष के नेता के तौर पर रीतातब्रता बनर्जी के नाम का प्रस्ताव किया गया है।   टीएमसी के करीब 60 विधायक बैठक के लिए विधानसभा पहुंचे टीएमसी के 80 विधायकों में से लगभग 60 विधायक बैठक के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे, जिससे इस बात की अटकलें तेज़ हो गई हैं कि वे शायद विधायक दल पर नियंत्रण हासिल करने और विपक्ष के नेता के पद पर दावा ठोकने की कोशिश कर सकते हैं।  तो ममता बनर्जी के पास सिर्फ 20 टीएमसी विधायकों का सपोर्ट? रिताब्रता बनर्जी ने 59 टीएमसी विधायकों के समर्थन का दावा किया है. ऐसे में अगर बनर्जी के बताए नंबर सही हैं, तो इससे विधानसभा के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव दिखेगा, जिससे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास सिर्फ 20 MLAs का सपोर्ट बचेगा. हालांकि, इन दावों को अलग से वेरिफाई नहीं किया गया है, और तृणमूल कांग्रेस ने भी अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

Ranveer Singh के कानूनी कदम का असर? DON 3 पर FWICE का यू-टर्न, फरहान अख्तर पर नजरें

मुंबई  रणवीर सिंह, फिल्म 'डॉन 3' को लेकर विवादों में हैं. फरहान अख्तर की पिक्चर से बाहर होने के बाद से उन्हें एक के बाद एक मुसीबत का सामना करना पड़ा रहा है. हाल ही में फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने उनपर बैन लगा दिया था. इसके बाद खबर आई कि एक्टर ने FWICE को लीगल नोटिस भेजा है. अब FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी अपने नॉन-कोऑपरेशन निर्देश को वापस ले लिया है।  जानकारी के मुताबिक, संगठन ने कहा, 'हम लीगल नोटिस का कानूनी तरीके से जवाब देंगे. हम अभी भी रणवीर सिंह से अपील कर रहे हैं. हम उन्हें आमंत्रित करते हैं कि वे हमारे साथ बैठकर इस मुद्दे को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाएं और इंडस्ट्री के हितों की रक्षा करें।  FWICE के निर्देश को रणवीर सिंह ने दी चुनौती इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने बताया कि FWICE को असहयोग नोटिस मामले में रणवीर सिंह की ओर से कानूनी नोटिस मिला है। उन्होंने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि एसोसिएशन ने इस पूरे मामले पर बातचीत के लिए आज मुंबई में एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाने का फैसला किया है। हालांकि,अशोक पंडित ने इसका खुलासा नहीं किया है कि इस नोटिस में क्या लिखा है, लेकिन अभिनेता के नोटिस के बाद ये मामला और गर्माता नजर आ रहा है। FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ जारी किया था नोटिस जानकारी के लिए बता दें कि पिछले महीने ही फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज़ (FWICE) ने फरहान अख्तर के प्रोडक्शन की फिल्म 'डॉन 3' आखिरी मौके पर छोड़ने को लेकर रणवीर सिंह के खिलाफ असहयोग नोटिस (NCD) जारी किया था। ANI द्वारा शेयर की गई विज्ञप्ति में FWICE ने कहा कि उसने रणवीर सिंह के कथित तौर पर अचानक प्रोजेक्ट से बाहर होने के संबंध में इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) ने शिकायत भेजी थी, जिसे संज्ञान में लेते हुए रणवीर के खिलाफ नॉन को-ऑपरेशनल नोटिस जारी किया गया है। फरहान अख्तर ने 11 अप्रैल 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामले को आगे की कार्रवाई के लिए FWICE को सौंप दिया गया। शूटिंग से ठीक पहले पीछे हटे रणवीर रिपोर्ट्स के अनुसार, रणवीर सिंह ने 'डॉन 3' की शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले इस फिल्म से अपने हाथ पीछे खींच लिए, जिसके बाद उनके और फिल्म का निर्माण कर रहे फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के बीच तनाव बढ़ गया। इस फिल्म का निर्माण  'एक्सेल एंटरटेनमेंट' के तहत किया जा रहा है। रणवीर के शूटिंग से कुछ दिन पहले पीछे हटने से मेकर्स को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा, जिसके बाद मामला बढ़ता गया और फिर FWICE के पास जा पहुंचा। रणवीर सिंह के इस तरह आखिरी मौके पर फिल्म छोड़ने के बाद फेडरेशन के अध्यक्ष बीएन तिवारी, मुख्य सलाहकार अशोक पंडित, मानद महासचिव अशोक दुबे सहित शीर्ष नेतृत्व ने एक महत्वपूर्ण आंतरिक बैठक की। इस बैठक के बाद ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर FWICE द्वारा इंडस्ट्री को इस फैसले की जानकारी दी गई थी। क्या है पूरा मामला? ये पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह ने फिल्म 'डॉन 3' को छोड़ दिया. जानकारी के मुताबिक, पिक्चर की शूटिंग शुरू होने से 10 दिन पहले एक्टर उससे बाहर हो गए थे. ये दावा किया गया कि रणवीर के 'डॉन 3' छोड़ने से फरहान अख्तर को करोड़ों का नुकसान हुआ. फरहान अख्तर ने रणवीर से 40 करोड़ रुपये के नुकसान भरपाई की मांग की थी, जिसे एक्टर ने नहीं भरा।  इसके बाद फरहान अख्तर ने फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) में शिकायत की. इसके चलते FWICE ने रणवीर के खिलाफ नॉन कोऑपरेशन डायरेक्टिव जारी कर दिया. पूरी इंडस्ट्री के सामने ऐलान किया गया कि अब रणवीर सिंह के साथ काम नहीं किया जाएगा. FWICE के इसी फैसले का विरोध करते हुए रणवीर सिंह ने उन्हें लीगल नोटिस भेजा था. इसी के बदले FWICE ने अपना फैसला वापस लेते हुए एक्टर से बातचीत की अपील की है।  FWICE ने रणवीर सिंह के ख‍िलाफ क्‍यों लिया 'बैन' का फैसला हालांकि, अशोक पंडित ने अभी यह खुलासा नहीं किया है कि रणवीर सिंह के लीगल नोटिस में क्या लिखा है। लेकिन सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि FWICE ने एक्‍टर के ख‍िलाफ 'नॉन कॉपरेशन नोटिस' क्‍यों जारी किया। मोटे तौर पर यह फैसला फरहान अख्‍तर की उस शिकायत के आधार पर लिया गया था, जो इस साल की शुरुआत में उन्‍होंने रणवीर सिंह के ख‍िलाफ की थी। अपने आधिकारिक बयान में, फेडरेशन ने बताया कि 'डॉन 3' को लेकर करीब तीन साल तक सारी तैयारी करने के बाद रणवीर सिंह ने अचानक शूटिंग शुरू होने से तीन हफ्ते पहले यह फिल्‍म छोड़ दी। एक्‍टर का रवैया सही नहीं था और तीन बार फेडरेशन की ओर से समन भेजने के बावजूद रणवीर ने बात करने से इनकार कर दिया। बयान में कहा गया, 'फेडरेशन और इस प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों के प्रति दिखाए गए रवैये को देखते हुए, FWICE के कार्यालय ने रणवीर सिंह के ख‍िलाफ 'असहयोग निर्देश' (NCD) जारी करने का फैसला किया है।' रणवीर सिंह और फरहान अख्‍तर विवाद में अब आगे क्या होगा? सबसे पहली बात तो यह है कि फरहान अख्‍तर ने रणवीर सिंह के ख‍िलाफ कानूनी रास्‍ता नहीं अपनाया है। वह किसी अदालत में नहीं गए। उन्‍होंने एक फ‍िल्म संस्था में औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई है, जहां उनकी कंपनी Excel Entertainment ने 'डॉन 3' के प्री-प्रोडक्‍शन पर खर्च हुए ₹45 करोड़ का सबूत दिया है। कंपनी ने रणवीर सिंह की उन शिकायतों का जवाब भी दिया, जिसकी वजह से उन्हें Don 3 से बाहर होना पड़ा था। FWICE ने उन सभी दस्तावेजों को सबूत मानते हुए और रणवीर से मनचाहा जवाब न मिलने पर अपना फैसला लिया है।     FWICE का दावा है कि फिल्‍म इंडस्‍ट्री के 30 अलग-अलग विभाग से 4 लाख से ज्यादा सदस्य उनसे जुड़े हैं। इसमें क्रू मेंबर्स से लेकर तकनीकी टीम के लोग भी हैं। अब जब रणवीर सिंह ने कोर्ट जाने का फैसला किया है तो वहां FWICE अपने फैसले को सही साबित करने के लिए तर्क देगी। यदि अदालत भी यह मानती है कि गलती रणवीर … Read more

बेटियों-बहनों के लिए पंजाब सरकार की सौगात, हर महीने मिलेंगे 1000 रुपए

चंडीगढ़   पंजाब में मुख्यमंत्री मावन ध्यान सत्कार योजना के तहत 1 जुलाई से 52 लाख महिलाओं को 1,000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता मिलेगी, और दलित महिलाओं को 1,500 रुपये की सहायता मिलेगी। 35 लाख लाभार्थियों को कार्ड जारी किए जा चुके हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सब्जी और फल उत्पादकों तथा मत्स्यपालकों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना के विस्तार की घोषणा के लिए आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। मान ने कहा कि सरकार ने इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक धनराशि का बजट पहले ही बना लिया है। राज्य की महिलाओं को यह कहकर गुमराह न किया जाए कि यह योजना केवल कुछ महीनों तक चलेगी। यह महिलाओं के आर्थिक उत्थान के लिए एक दीर्घकालिक योजना है। क्या है 'मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना'? सीएम भगवंत मान ने मंगलवार को किसान क्रेडिट कार्ड योजना को लेकर बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिलाओं से जुड़ी यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि 'मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना' के लिए सरकार ने फंड अलग से रख दिया है।     योजना के तहत लगभग 52 लाख लाभार्थी महिलाओं की पहचान कर ली गई है।     इनमें से करीब 35 से 36 लाख महिलाओं को योजना के कार्ड जारी किए जा चुके हैं।     सरकार को उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक सभी पात्र लाभार्थियों तक उनके कार्ड पहुंच जाएंगे। बता दें कि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने 2026-27 के अपने बजट प्रस्तावों में इस योजना को लागू करने के लिए 9,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। किसे नहीं मिलेगा इस योजना का लाभ? सरकार के मुताबिक, राज्य की अधिकतर महिलाओं को इसका फायदा मिलेगा, लेकिन कुछ विशेष श्रेणियों को योजना से बाहर रखा गया है। योजना का लाभ इन्हें नहीं मिलेगा:     मौजूदा और रिटायर्ड (सेवानिवृत्त) सरकारी कर्मचारी     इनकम टैक्स (आयकर) देने वाली महिलाएं     मौजूदा और पूर्व विधायक व सांसद योजना से जुड़ी अन्य अहम बातें पेंशन के साथ भी मिलेगा लाभ: जिन महिलाओं को पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिल रही है, उन्हें वह पेंशन मिलती रहेगी। उन्हें इस नई योजना का लाभ भी अतिरिक्त रूप से मिलता रहेगा। देर से कार्ड बनने पर भी नुकसान नहीं: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी योग्य महिला का कार्ड देरी से यानी अक्टूबर में भी बनता है, तो भी उसे 1 जुलाई से ही योजना का पैसा मिलना शुरू माना जाएगा और पिछला भुगतान भी किया जाएगा। लंबी अवधि की योजना: सीएम मान ने कहा है कि कोई भी इस योजना को चुनावी हथकंडा न समझे। यह एक लंबी अवधि की योजना है जो चुनावों के बाद भी लगातार जारी रहेगी। AAP का प्रमुख चुनावी वादा महिलाओं को हर महीने 1000 रुपये देने की यह योजना आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले किए गए प्रमुख वादों में से एक थी। योजना को शुरू करने में हो रही देरी की वजह से विपक्ष लगातार सरकार की आलोचना कर रहा था। आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में 18 साल से अधिक उम्र की कुल महिलाओं की संख्या 1.01 करोड़ है, जिनमें से 51.48 प्रतिशत महिलाओं को हर महीने यह ग्रांट मिलेगी। अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पुलिस उनकी तलाश कर रही है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वह सिर्फ कागजी शेर है। उसने अपने आदमियों को पुलिस केस में फंसाया और उन्हें छोड़कर भाग गया। इसी बीच, सहकारिता विभाग का प्रभार भी संभाल रहे मान ने 26 साल पुरानी किसान क्रेडिट कार्ड योजना में बदलाव की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाएगी। उन्होंने कहा कि गेहूं की फसल के लिए ऋण सीमा 24,380 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। पहली बार, फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड में 2,000 रुपये प्रति एकड़ का अलग प्रावधान शामिल किया गया है। गन्ने के किसानों को बड़ी राहत देते हुए, ऋण सीमा बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। सब्जियों और बागवानी फसलों के लिए सीमा 32,000 रुपये से बढ़ाकर 1.57 लाख रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है। उन्होंने आगे बताया कि ड्रैगन फ्रूट, बांस, चिनार और लेमनग्रास जैसी फसलों को पहली बार केसीसी योजना में शामिल किया गया है। संशोधित योजना के तहत, किसानों को छह साल के लिए वैध केसीसी अनुमोदन प्राप्त होगा, जिसकी ऋण सीमा वार्षिक रूप से बढ़ती जाएगी। किसान एटीएम, यूपीआई और डिजिटल बैंकिंग के माध्यम से आसानी से धनराशि निकाल सकते हैं। 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान उन्होंने कहा कि यह एक दूरगामी योजना है और सरकार ने तभी शुरू किया जब इसके लिए बजट का प्रावधान कर दिया गया है. योजना के तहत इस वित्त वर्ष में 9300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।  किन महिलाओं को नहीं मिलेगा लाभ? हालांकि इस योजन में सरकारी कर्मचारी या सरकार से रिटायर हो चुकी महिलाओं, पूर्व और मौजूदा विधायक और सांसद महिलाओं और टैक्स अदा करने वाली महिलाओं को लाभ नहीं मिलेगा।  विधवा पेंशन पाने वालीं महिलाओं को भी लाभ अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन या दिव्यांग पेंशन ले रही महिलयन को इस योजना के तहत सहायता राशि दी जाएगी।  महिलाओं को एक हजार रुपये प्रति महीना सहायता राशि देने का वायदा आम आदमी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले किया था. हालांकि विपक्ष ये सवाल उठा रहा है कि सरकार ने ये योजना कार्यकाल के चार साल पूरे होने के बाद शुरू की है. विपक्ष यह भी मांग करता रहा है कि महिलाओं को ये राशि पिछले चार साल के लिए दी जाए।