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सोना-चांदी के दाम में बड़ा बदलाव, चांदी में आई गिरावट; चेक करें आज का रेट

इंदौर  सोना-चांदी की कीमतों में फिर गिरावट आई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दोनों कीमती धातुएं बुधवार को बाजार ओपन होने के साथ ही फिसल गईं. चांदी का वायदा भाव एक झटके में करीब 2000 रुपये कम हो गया, तो वहीं सोने के भाव में भी कमी आई है. इस ताजा गिरावट के बाद अब 1 किलो चांदी अपने हाई लेवल से 1.92 लाख रुपये सस्ती हो गई है. आइए जानते हैं 20, 22 और 24 कैरेट सोने का क्या रेट है?  चांदी का भाव तेजी से टूटा  एमसीएक्स सिल्वर प्राइस पर नजर डालें, तो सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को वायदा कारोबार की शुरुआत रेड जोन में हुई. 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव अपने पिछले बंद 2,66,707 रुपये प्रति किलो की तुलना में एक झटके में कम होकर 2,64,760 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो 1 Kg Silver Price 1947 रुपये कम हो गया।  चांदी ने इसी साल जनवरी महीने में 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार किया था और लाइफ टाइम हाई लेवल 4,57,328 रुपये छुआ था. इसके बाद इस कीमती धातु का भाव लगातार क्रैश होता चला गया. तमाम उतार-चढ़ाव के बाद अब ताजा गिरावट के बाद वायदा चांदी हाई से 1,92,568 रुपये प्रति किलो तक सस्ती मिल रही है।  सोना भी चांदी के साथ टूटा  सिर्फ चांदी ही नहीं, बल्कि एमसीएक्स पर सोने की कीमत में भी गिरावट आई है और ये कीमती धातु 1.60 लाख रुपये से नीचे आ गई है. MCX Gold Rate पर नजर डालें, तो बीते कारोबारी दिन ये कीमती पीली धातु 1,59,346 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुई थी, जबकि बुधवार को खुलते ही 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold गिरकर 1,58,780 रुपये पर आ गया।  सोने के हाई लेवल से वर्तमान रेट की तुलना करें, तो अब ये और भी सस्ता मिल रहा है. एमसीएक्स पर इस एक्सपायरी वाले वायदा गोल्ड का लाइफ टाइम हाई लेवल 2,04,375 रुपये है और यहां से अब सोना 45,595 रुपये सस्ता मिल रहा है।  घरेलू मार्केट में सोना-चांदी का हाल एमसीएक्स के अलावा अगर घरेलू मार्केट में सोना-चांदी के रेट में आए चेंज की बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, तो 24 कैरेट सोने का दाम 1,56,294 रुपये से कम होकर 1,55,264 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है. वहीं चांदी की कीमत 2,65,300 रुपये प्रति किलो की तुलना में 3,300 रुपये कम होकर 2,62,000 रुपये पर आ गया. अलग-अलग क्वालिटी के गोल्ड रेट की बात करें, तो… गोल्ड क्वालिटी गोल्ड रेट/10 ग्राम 24 Karat Gold 1,55,264 रुपये/10 ग्राम 22 Karat Gold 1,54,642 रुपये/10 ग्राम 20 Karat Gold 1,42,222 रुपये/10 ग्राम 18 Karat Gold 1,16,448 रुपये/10 ग्राम 14 Karat Gold 90,829 रुपये/10 ग्राम ध्यान रहे, घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की ज्वेलरी खरीदने पर ग्राहक को आईबीजेए रेट्स के साथ ही मेकिंग चार्ज और इस पर लागू जीएसटी भी देना होता है, जिसके जुड़ने से इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो जाती है।       

जनता दर्शन में भूमि संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने डीएम को दिए निर्देश

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में भूमि संबंधी शिकायतों पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने डीएम को निर्देशित किया कि भूमि संबंधी शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। प्रकरण की गंभीरता के अनुसार संबंधित के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाए। किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही कतई क्षम्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। कुछ लोगों ने जमीन से जुड़े मामलों में राजस्व कर्मियों की तरफ से लापरवाही किए जाने की शिकायत की तो उन्होंने डीएम को तत्काल कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इस अवसर पर इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे लोगों से उन्होंने कहा कि सरकार इलाज में पूरी मदद करेगी। इसके लिए जरूरतमंद लोगों का आयुष्मान कार्ड बनवाया जाएगा और इसके बाद भी जरूरत पड़ी तो विवेकाधीन कोष से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री ने मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर जरूरतमंद, पात्र व्यक्ति का आयुष्मान कार्ड बनवाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। गोरखनाथ मंदिर परिसर में महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 150 लोगों से मिले। उनके पास जाकर उनकी समस्याएं सुनीं। उनके प्रार्थना पत्रों का अवलोकन कर समस्या, शिकायत का संज्ञान लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिया कि किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है, सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है। एक महिला ने कुछ लोगों द्वारा मकान से बेदखल किए जाने की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि मकान पर महिला का कब्जा दिलाया जाए। उन्होंने अलग-अलग मामलों के निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित करते हुए निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और संतुष्टिप्रद होना चाहिए।  जनता दर्शन में एक महिला ने मां के इलाज के लिए सहायता देने का निवेदन किया। मुख्यमंत्री ने आयुष्मान कार्ड के बारे में पूछा। महिला ने बताया कि उसके पास आयुष्मान कार्ड नहीं है। इस पर सीएम ने मौके पर मौजूद अफसरों को निर्देशित किया कि जल्द से जल्द इनका आयुष्मान कार्ड बनवाया जाए। अधिकारी हर जरूरतमंद का आयुष्मान कार्ड बनवाएं, ताकि उन्हें इलाज के लिए परेशान न होना पड़े। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर आए लोगों को मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया कि उन्हें विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।  गोसेवा की और बच्चों पर प्यार लुटाया सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान बुधवार सुबह भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। प्रातःकाल गुरु गोरखनाथ और अपने ब्रह्मलीन गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ जी का आशीर्वाद लेने के बाद सीएम योगी ने मंदिर की गोशाला में गोसेवा की। गोवंश को अपने हाथ से गुड़-रोटी खिलाकर उन पर स्नेह बरसाया। इसी क्रम में मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए उन्होंने परिजनों के साथ आए बच्चों को पास बुलाकर उन्हें दुलराया। चॉकलेट दीं और उनसे पढ़ाई के बारे में बातचीत की। सीएम ने बच्चों को खूब पढ़ने-आगे बढ़ने का आशीर्वाद भी दिया।

Ladli Behna Yojana की 37वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, इस तारीख तक आ सकते हैं पैसे

भोपाल  मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश की महिलाओं के लिए चलाई जा रही एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर माह 1500-1500 रुपए दिए जाते हैं। जून 2023 से मई 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। 13 मई 2026 को नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी से सीएम डॉ. मोहन यादव ने ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किस्त जारी की थी। इसके तहत प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ से अधिक की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की गई। अब जून 2026 में 37वीं किस्त जारी की जाएगी। संभावना है कि 10 से 15 जून के बीच सीएम द्वारा किस्त की राशि जारी की जा सकती है, हालांकि फाइनल तारीख को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। गौरतलब है कि मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरूआत की गई थी। 10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रुपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह (18000 रु सालाना) दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रुपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इन्हें मिलता है योजना का लाभ:     मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो ।     विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी योजना की पात्र हैं।     महिलाओं की आयु 21 से 60 वर्ष तक होनी चाहिए ।     स्वयं का बैंक खाता और बैंक खाते मे आधार लिंक एवं डीबीटी होना चाहिए।     समग्र पोर्टल पर आधार के डाटा का ओटीपी या बायोमेट्रिक के माध्यम से वेरिफाई किया होना चाहिए । ये योजना से बाहर :     स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।     जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​     जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) हो।     स्वयं / परिवार का कोई भी सदस्य भारत सरकार अथवा राज्‍य सरकार के     शासकीय विभाग/ उपक्रम/ मण्‍डल/ स्‍थानीय निकाय में नियमित/स्‍थाईकर्मी/ संविदाकर्मी के रूप में नियोजित हो अथवा सेवानिवृत्ति उपरांत पेंशन प्राप्त कर रहा हो। लाभार्थी सूची में कैसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।  

‘2-3 हफ्तों में तेल की कीमतों में बड़ा उछाल’, Hormuz संकट पर ग्लोबल ऑयल कंपनियों की वॉर्निंग

 नई दिल्ली करीब दो महीने पहले अमेरिका के इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन ने एक विश्लेषण जारी किया था, जिसमें सवाल पूछा गया था कि 'दुनिया के पास काम चलाने लायक कच्चे तेल का न्यूनतम स्टॉक खत्म होने में कितना वक्त लगेगा?.' इसका सार ये था कि भले ही बाजार में करोड़ों बैरल तेल मौजूद हो, लेकिन अगर इस्तेमाल के लिए उपलब्ध भंडार बहुत कम हो जाए तो पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है. इंसानी शरीर में ब्लड प्रेशर की तरह असली मुद्दा तेल की मात्रा नहीं, बल्कि उसके लगातार प्रवाह का है।  करीब चार हफ्ते बाद बैंक ने एक और विश्लेषण जारी किया, जिसमें बताया गया कि .होर्मुज स्ट्रेट सितंबर तक क्यों खुल जाएगा… किसी न किसी तरह. बैंक के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में वैश्विक तेल भंडार 8.4 अरब बैरल था, लेकिन उसमें से केवल 0.8 अरब बैरल ही ऐसा था जिसे इस्तेमाल किया जा सकता था।  संक्षेप में कहें तो, अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है और तेल की महंगाई के कारण मांग में कमी 55 लाख बैरल प्रतिदिन पर स्थिर रहती है, तो OECD देशों (Organisation For Economic Co-operation and Development) के कमर्शियल तेल भंडार जून तक भारी दबाव में आ सकते हैं।  इसके बाद सितंबर तक दुनिया के तेल भंडार उस न्यूनतम स्तर पर पहुंच सकते हैं, जहां से सामान्य संचालन करना मुश्किल हो जाएगा. दिलचस्प बात यह है कि जेपीमॉर्गन की पिछली रिपोर्ट के बाद तेल की कीमतें बढ़ने के बजाय घटी हैं, इसलिए मांग में गिरावट की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है।  सप्लाई कम फिर भी गिर रही तेल की कीमतें… बड़ा तूफान आने वाला है इस दौरान सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से रोजाना करीब 1 करोड़ बैरल तेल जरूरतमंद देशों तक नहीं पहुंच पा रहा था. सामान्य तौर पर ऐसी स्थिति में कीमतें तेजी से बढ़नी चाहिए थीं ताकि मांग कम हो जाए. लेकिन इसके उलट मार्च के आखिर में बहुत अधिक बढ़ने और फिर एक महीने बाद दोबारा बढ़ने के बाद तेल की कीमतें गिरने लगीं. इससे मांग कम होने के बजाय और बढ़ी है. इसी वजह से जेपीमॉर्गन ने रिपोर्ट जारी कर कहा था कि वैश्विक तेल बाजार के गणित में कुछ गड़बड़ है।  इसके कुछ हफ्ते बाद गोल्डमैन सैक्स ने भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद, मई में वैश्विक तेल भंडार रिकॉर्ड 87 लाख बैरल प्रतिदिन की दर से घटे।  फिर भी मई में तेल की कीमतें काफी नीचे रहीं. इसकी एक बड़ी वजह बाजार को रोजाना दिए जाने वाले वो संकेत थे जिनमें सरकारी और गैर-सरकारी सूत्र लगातार यह कह रहे थे कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता बस होने ही वाला है।  लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तेल बाजार भले ही इस खतरे को नजरअंदाज करना चाहे, लेकिन अब तेल उद्योग की बड़ी कंपनियां खुलकर चेतावनी देने लगी हैं।  तेल स्टोरेज खत्म होने का झटका बाजार सह नहीं पाएगा हाल ही में शेवरॉन के CEO माइक वर्थ ने कहा कि अगले दो महीनों में तेल की कीमतें बढ़ने की संभावना है क्योंकि पहले से ही बेहद कम स्तर पर मौजूद कच्चे तेल के भंडार ईरान युद्ध की वजह से लगातार घट रहे हैं।  उन्होंने गुरुवार को एक कॉन्फ्रेंस में कहा, 'सुरक्षा के लिए मौजूद अतिरिक्त भंडार खत्म हो रहा है और ऐसा झटका सहने की क्षमता भी खत्म होती जा रही है. बाजार के पास इस असंतुलन को संभालने की क्षमता अब पहले की तुलना में काफी कम रह गई है।  उन्होंने आगे कहा, 'अगले कुछ हफ्तों में यह दबाव सीधे तेल की कीमतों में दिखने लगेगा. जून और खासकर जुलाई में कीमतें ऊपर जाएंगी।  वर्थ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पिछले एक हफ्ते में तेल की कीमतों में करीब 10% की गिरावट आई है. इसकी वजह यह उम्मीद रही कि अमेरिका और ईरान तीन महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए कोई समझौता कर सकते हैं. इसी संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद है, जो दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल की आवाजाही का रास्ता है।  उनकी चेतावनी से यह चिंता भी बढ़ गई है कि अगर युद्ध खत्म करने के लिए कोई समझौता हो भी जाता है तब भी तेल की कीमतें महीनों तक ऊपर बनी रह सकती हैं. वैसे भी फिलहाल ऐसा कोई समझौता होता हुआ नजर नहीं आ रहा. इस संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार से रोजाना 1.2 से 1.3 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति गायब हो चुकी है।  युद्ध खत्म हो भी जाए तब भी अगले साल तक नहीं सुधरेंगे तेल बाजार के हालात वर्थ की बात अन्य तेल अधिकारियों की चेतावनियों से भी मेल खाती है. इनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकारी तेल कंपनी Adnoc के प्रमुख भी शामिल हैं. उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि अगर संघर्ष खत्म भी हो जाए, तब भी होर्मुज स्ट्रेट में तेल की सामान्य आवाजाही अगले साल से पहले बहाल होने की संभावना नहीं है।  ADNOC के सीईओ सुल्तान अल-जाबेर ने 21 मई को एक प्रोग्राम में कहा, 'संघर्ष से पहले के स्तर की 80% तेल आपूर्ति बहाल होने में कम से कम चार महीने लगेंगे और पूरी क्षमता से तेल प्रवाह 2027 की पहली या शायद दूसरी तिमाही से पहले शुरू नहीं होगा।  जेपीमॉर्गन की तरह वर्थ ने भी कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतें उतनी नहीं बढ़ीं जितनी उम्मीद थी. इसकी वजह यह रही कि देशों ने इमर्जेंसी के लिए अच्छी मात्रा में तेल जमा कर रखा था, अमेरिका ने बाजार को तेल दिया और ईरान, रूस, वेनेजुएला के प्रतिबंधित तेल भी बाजार में पहुंचे. लेकिन अब ये भंडार तेजी से घट रहे हैं।  ऑयल प्राइस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें एक बड़ा फैक्टर चीन के तेल भंडार हैं जो चुपचाप तेजी से कम हो रहे हैं. इसमें कमर्शियल और स्ट्रैटेजिक दोनों तरह के भंडार शामिल हैं. चीन के रणनीतिक भंडार में करीब 1.4 अरब बैरल तेल होने का अनुमान है. अगर चीन इन्हें बड़े पैमाने पर बाजार में उतारता है, तो संकट कुछ समय के लिए टल सकता है।  वर्थ ने यह भी कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट सरकारों को सीख देगा कि वो भविष्य के लिए … Read more

MP में स्वास्थ्य सेवाओं पर ₹17,059 करोड़ खर्च करेगी सरकार, किसानों को भी मिली बड़ी सौगात

भोपाल  जनता की सहूलियत के कामों पर सरकार 21 हजार 485 करोड़ रुपए खर्च करेगी। यह राशि अगले 5 साल में खर्च होगी। सबसे ज्यादा 17 हजार 59 करोड़ रुपए स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होंगे। धार स्थित भोजशाला में सरस्वती लोक बनाया जाएगा। भोज शोध संस्थान की स्थापना भी होगी। यहां पूर्व के वर्षों में भोजशाला आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिजनों को आर्थिक मदद दी जाएगी। किसानों को भी दी खुशखबरी किसानों द्वारा कुल पैदा की जाने वाली गर्मी की मूंग का 25 फीसद हिस्सा खरीदा जाएगा। जबकि उड़द के एक-एक दाने की खरीदी होगी। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में 21 हजार 485 करोड़ की विभिन्न योजनाओं की निरंतरता को मंजूरी दे दी है। जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाकी के विषयों की मंत्रियों को बैठक से पहले ब्रीफिंग में जानकारी दी। बरगी कू्रज हादसे की न्यायिक जांच कराए जाने का अनुसमर्थन संघ के 100 वर्ष फिल्म को एसजीएसटी से छूट दिए जाने व बरगी बांध में हुए भीषण हादसे की न्यायिक जांच कराए जाने संबंधी निर्णय का अनुसमर्थन किया। जबकि मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 (संशोधन) अध्यादेश-2026 और मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश-2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया है। यहां खर्च होंगे 17 हजार 59 करोड़  -मेडिकल कॉलेजों के लिए चिकित्सालय योजना को 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया। इस पर 14,363.95 करोड़ खर्च होंगे। यह राशि लोगों को निशुल्क गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सुविधा देने और चिकित्सा के लिए मानव संसाधन विकसित किए जाने पर खर्च होगी। -मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम को मजबूत बनाया जाएगा। इसके लिए 657 करोड़ की मंजूरी मिली। मेडिकल कॉलेजों में केंद्र के आर्थिक सहयोग से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मापदंडों के अनुरूप अतिरिक्त अधोसंरचना का निर्माण, नवीन मशीनें एवं उपकरणों के प्रतिस्थापन के फलस्वरूप अतिरिक्त स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सीटों में बढ़ोतरी होगी। -उज्जैन ,सिवनी, छतरपुर, दमोह और बुदनी में बनाए जा रहे नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण से संबंधित योजना के लिए 1200 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली। -एमबीबीएस की सीट बढ़ाने संबंधी योजना के लिए 838 करोड़ रुपए मिले। इस राशि से मेडिकल कॉलेजों में अधोसंरचना निर्माण, आधुनिक उपकरणों की स्थापना, पठनपाठन एवं महाविद्यालयीन गतिविधियों शुरू की जाएंगी। -इंदौर के पिपल्याहाना में जिला न्यायालय भवन के लिए पुनरीक्षित लागत 626 करोड़ 61 लाख रुपए को स्वीकृति दी।

एक पेड़ माँ के नाम-स्वच्छता अभियान-जनकल्याण शिविर-प्राकृतिक खेती कार्य-शालाएं और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में प्रदेश को अग्रणी बनाने का है लक्ष्य

जनकल्याण अभियान में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देना करें सुनिश्चित : मुख्य सचिव जैन "एक पेड़ माँ के नाम"-स्वच्छता अभियान-जनकल्याण शिविर-प्राकृतिक खेती कार्य-शालाएं और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस में प्रदेश को अग्रणी बनाने का है लक्ष्य मुख्यसचिव जैन ने कलेक्टर्स के साथ अभियान संबंधी तैयारियों की समीक्षा की भोपाल मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर्स से कहा है कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की प्राथमिकता के अनुरूप 5 जून से आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय जनकल्याण अभियान में पात्र हितग्राहियों को केंद्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं का लाभ देना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा है कि इस दौरान विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ माँ के नाम" और स्वच्छता अभियान, जनकल्याण शिविर, प्राकृतिक खेती कार्य-शालाएं तथा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस गतिविधियों का उत्कृष्ट क्रियान्वयन हो जिससे देश में मध्यप्रदेश अग्रणी हो। मुख्य सचिव जैन बुधवार को मंत्रालय से संभाग के कमिश्नर, कलेक्टर और सीईओ जिला पंचायत को वीडियो कांफ्रेसिंग के साथ अभियान की तैयारियों की समीक्ष कर रहे थे। मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर्स से कहा है कि प्रदेश के लिए यह गौरान्वित करने वाली बात है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के 25 दिन पूर्व खजुराहो से काउंट-डाउन शुरू हुआ है। ऐसे में हम सबका यह उत्तरदायित्व है कि शरीर को निरोगी रखने वाले योग से जन-जन को जोड़ें और नया रिकार्ड कायम करें। उन्होंने कहा कि कलेक्टर्स प्रयास करें कि योग का एक कार्यक्रम जिले की ऐतिहासिक धरोहर अथवा पर्यटन स्थल पर जरूर आयोजित हो। बैठक में बताया गया कि गिनीज बुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड के लिए योग की व्यक्तिगत श्रेणी की गतिविधि 14 जून को भी होगी जिससे लोग टोल-फ्री नंबर 18003157008 पर पंजीयन करवा सकते हैं। इस दिन यह आयोजन सुबह 6.15 से 7.35 बजे तक होगा। मुख्य सचिव जैन ने कलेक्टर्स से कहा कि प्रभारी मंत्री से समन्वय कर कलेक्टर्स विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस तक होने वाली सभी गतिविधियों के लिए प्लान तैयार करें। उन्होंने पिछले वर्ष 'एक पेड़ मां के नाम में मध्यप्रदेश की देश में टॉप रैंक होने पर बधाई देते हुए कहा कि इस वर्ष भी प्रदेश को अग्रणी रखने के लिए पूरी प्लानिंग से नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में पौध-रोपण किया जाए। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव 5 जून को भोपाल से अभियान का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान पूरे प्रदेश में जल चेतना और पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। पौध-रोपण जियो टैगिंग और क्यू आर कोड के साथ किया जाएगा। इस गतिविधि के तहत स्वच्छता अभियान चलाकर ठोस और प्लास्टिक अपशिष्ट की सफाई के साथ जल स्त्रोतों की सफाई और गहरीकरण के कार्य भी किए जाएंगे। मुख्य सविच जैन ने 12 से 18 जून की अवधि में हर ब्लाक में 3 दिवसीय जनकल्याण शिविर लगाने पर सर्वाधिक फोकस करने के कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हितग्राही का योजनाओं के लिए चयन और प्रचलित योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने में पूरी गंभीरता बरतें। उन्होंने इस दौरान लोक सेवा गारंटी में प्राप्त शिकायतों के साथ ही समाधान एक दिन में प्राप्त आवेदनों का संतुष्टि पूर्ण समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रयास हो कि समय-सीमा में ही आवेदकों की जायज मांगो और शिकायतों का समाधान हो जाए। उन्होंने कहा है कि संबंधित विभाग संवदेनशील रहें और यह सुनिश्र्चित करें कि कोई भी वंचित पात्र हितग्राही शासन की योजनाओं के लाभ से नहीं छूटे। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि 19 और 20 जून को हर जिले में अनिवार्य रूप से प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदर्शनी और कार्यशालाएं दो-दो स्थानों पर आयोजित की जाएं। उन्होंने कृषि भूमि को अधिक उपजाऊ बनाए रखने के लिए सही अर्थों में फर्टिलाइजर के उपयोग को हतोत्साहित करने और प्राकृतिक खेती को अपनाने पर फोकस करने के लिए कहा है। संपूर्ण प्रदेश में अभियान के अंतिम दिन 21 जून को होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम को समाज के सभी वर्गों की भागीदारी से देश में अग्रणी बनाने के निर्देश दिए हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, संजय शुक्ला, श्रीमती दीपाली रस्तोगी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मशहूर बुरहानपुर केला फसल को भारी नुकसान, मुख्यमंत्री ने तुरंत सर्वे और राहत के दिए निर्देश

बुरहानपुर   तेज आंधी और बेमौसम के कारण बुरहानपुर जिले में केले की फसलों को भारी नुकसान हुआ. खासकर शाहपुर और खकनार तहसील क्षेत्रों में फसलें तबाह हो गईं. किसान बर्बादी की कगार पर हैं. संकट की इस घड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के जख्मों पर मरहम लगाया है. उन्होंने कलेक्टर को तुरंत सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं. अब उम्मीद है कि किसानों को जल्द ही 2 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिल सकता है।  सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल मिले मुख्यमंत्री से किसानों की मांगों को लेकर भोपाल में मंगलवार को खंडवा-बुरहानपुर से सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भेंट की. उन्होंने मुख्यमंत्री को बुरहानपुर जिले के विभिन्न गांवों में आई प्राकृतिक आपदा की स्थिति से अवगत कराया. सांसद ने नुकसान की जानकारी उपलब्ध कराई. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुरवासियों के नाम संदेश जारी किया।  बुरहानपुर कलेक्टर को सर्वे कराने के निर्देश सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र पाटिल ने बताया "प्राकृतिक आपदा से जिलेभर में भारी नुकसान हुआ है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कलेक्टर हर्ष सिंह को जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का शीघ्र सर्वे कर राहत एवं सहायता कार्यों को तत्परता से करने को कहा है. इसके अलावा खंडवा जिले की ग्राम पंचायत हंडियाखेड़ा में हुई आगजनी की घटना के बारे में भी जिक्र किया है. हंडियाखेड़ा में 20 से अधिक आवासीय मकान प्रभावित हुए हैं।  विधायक अर्चना चिटनीस पहुंची खेतों में मंगलवार को क्षेत्रीय विधायक अर्चना चिटनीस ने लोनी और बिरोदा गांव के खेतों का जायजा लिया. वह प्रशासनिक अधिकारियों के साथ खेतों में पहुंची. किसानों से सीधा संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनी. अर्चना चिटनिस ने कहा "किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं. प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई और किसानों को राहत दिलाना हमारी प्राथमिकता है।  पिछली बार 2 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिला मध्य प्रदेश सरकार ने पिछली बार केला फसल नुकसान का मुआवजा बढ़ाया था, अब प्रभावित किसानों को उनकी फसल नुकसानी 2 लाख रुपये तक प्रति हेक्टेयर मुआवजा मिलता है, इस बार जिलेभर भारी नुकसान हुआ है, जिसके कारण अब प्रभावित किसानों ने मुआवजा राशि को दोगुना करने और मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू किए जाने की मांग उठाई है।  लोनी गांव के किसान हेमंत पाटिल और बिरोदा गांव के किसान भास्कर झोपे ने सरकार से मुआवजा बढ़ाकर देने की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि जिले में एक सप्ताह के भीतर तीसरी बार नुकसान हुआ है, इससे किसानों की कमर टूट गई है. किसान सदमे में हैं।  बुरहानपुर के कई गांवों में फसलें तबाह बीते शनिवार-रविवार की दरमियानी रात को बे-मौसम बारिश और तेज तूफान किसानों की फसलों पर आफत बनकर बरसे. इस बार फिर प्राकृतिक आपदा से सैकड़ों किसान प्रभावित हुए हैं. शाहपुर क्षेत्र के खामनी, भावसा, मोहद सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों में फसल बर्बादी हो चुकी है. इसी तरह आदिवासी बाहुल्य खकनार क्षेत्र के दर्यापुर, सिंधखेड़ा, सिरपुर, टेंभी, मांजरोद कला, मांजरोद खुर्द, ढाबा, डोईफोडिया सहित अन्य गांवो में किसानों की खड़ी फसल गिर गई है। 

दिग्विजय सरकार में बंद हुआ ट्रिब्यूनल अब फिर होगा शुरू, ड्राफ्ट तैयार करा रही मोहन यादव सरकार

भोपाल  म.प्र. के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल गठित करने की तैयारी में है। इसको लेकर सहमति बन चुकी है। वर्तमान में जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों के भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े करीब साढ़े चार लाख मामले लंबित हैं। ट्रिब्यूनल के गठन से इन मामलों का अलग से और तेजी से निपटारा हो सकेगा। दिग्विजय सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान इसे बंद कर दिया गया था जिसे अब एक नए स्वरूप में फिर से चालू किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर राज्य सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल) गठित करने की तैयारी में है। इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच बनी सहमति बन चुकी है। अब सामान्य प्रशासन विभाग इसके गठन का खाका तैयार करने में जुटा है। उधर, एमपी हाईकोर्ट में पेंडिंग केस बढ़ने के कारण न्यायाधीशों के नए पद सृजित किए जाने के प्रस्ताव भी सरकार तक पहुंचे हैं। राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के गठन की कवायद को लेकर सरकार का मानना है कि इससे एमपी के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से संबंधित विवादों और शिकायतों के मामले कोर्ट के बजाय ट्रिब्यूनल के जरिए निराकृत हो सकेंगे। सरकार का यह भी मानना है कि स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (एसएटी) के गठन के बाद एमपी के मुख्य हाईकोर्ट जबलपुर, खंडपीठ इंदौर और ग्वालियर में कर्मचारियों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल में हो सकेगी। ऐसे में इन न्यायालयों पर पड़ने वाले न्यायालयीन मामलों का बोझ कम हो सकेगा। कर्मचारियों की सेवा शर्तों से संबंधित मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल के फैसले की अपील के लिए ही किए जा सकेंगे। सरकार ने ड्राफ्ट को मंजूरी मिलते ही तीनों ही न्यायालय में कर्मचारियों से संबंधित साढ़े 4 लाख मामलों की संख्या में कमी लाने के उद्देश्य से इस फैसले को जल्दी ही लागू करने के संकेत भी दिए हैं। दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की वर्किंग की स्टडी मोहन यादव सरकार मध्य प्रदेश के एसएटी के गठन के पहले दूसरे राज्यों में संचालित राज्य प्रशासनिक अधिकरण की वर्किंग और वक्त के हिसाब में किए गए बदलाव की स्टडी भी करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग दूसरे राज्यों के ट्रिब्यूनल की जानकारी लेकर एमपी की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर प्रस्ताव तैयार करेंगे जिसे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की स्वीकृति मिलने के बाद कैबिनेट में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। फिर इसे विधानसभा में विधेयक लाकर मंजूरी दी जाएगी। दिग्विजय सरकार में बंद किया गया था प्रशासनिक ट्रिब्यूनल मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण (MPAT) को राज्य सरकार ने 2001 में ही बंद कर दिया था। इसके पीछे तब की दिग्विजय सिंह सरकार द्वारा एमपी का पुनर्गठन और प्रशासनिक कारण बताए गए थे। इसके बाद राज्य सरकार के आग्रह पर भारत सरकार द्वारा एक अधिसूचना के माध्यम से 17 अप्रैल 2003 को आधिकारिक रूप से ट्रिब्यूनल को समाप्त कर दिया गया था। 13 साल ही काम कर पाया था ट्रिब्यूनल इस अधिकरण को राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार द्वारा प्रशासनिक न्यायाधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 4(2) के अंतर्गत 29 जून 1988 को स्थापित किया गया था। इसके बाद प्रदेश के कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों का निपटारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य बेंच (जबलपुर) और खंडपीठों (इंदौर और ग्वालियर) द्वारा किया जाता है। मध्य प्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण राज्य के कर्मचारियों को सेवा संबंधी मामलों में त्वरित और सस्ता न्याय दिलाने के लिए यह एक प्रमुख संस्था थी जिसमें वर्ष 2001 से काम बंद हुआ और 2003 में केंद्र ने इसको मंजूरी दे दी थी। भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवाद, शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार जब यह ट्रिब्यूनल काम कर रहा था तो इसमें उच्च न्यायालय का न्यायाधीश या सेवानिवृत्त न्यायाधीश तथा न्यायिक व प्रशासनिक सदस्य नियुक्त किए जाते थे। यह नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की जाती थी। ट्रिब्यूनल को राज्य सरकार के कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े विवादों और शिकायतों पर सुनवाई का अधिकार था। इसमें यह व्यवस्था भी थी कि ट्रिब्यूनल के निर्णयों के खिलाफ अपील सीधे उच्च न्यायालय में की जा सकती थी। प्रशासनिक न्याय अधिकरण को जब बंद किया गया था, तब प्रदेश में कर्मचारियों से संबंधित लंबित मामलों की संख्या 30 हजार थी, जिसे राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया था।  

ममता सरकार को बड़ा राजनीतिक झटका, स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को दी नई जिम्मेदारी

कोलकाता विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से जूझ रही है। इसी कड़ी में बुधवार को टीएमसी के 58 बागी विधायकों ने पार्टी से निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मानते हुए विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को अपने फैसले से अवगत करा दिया है। सूत्रों ने बताया कि ऋतब्रत बनर्जी ने संदीपन साहा और कई अन्य बागी विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की और 58 विधायकों के हस्ताक्षर वाले समर्थन पत्र सौंपे। उन्होंने एक नई नेतृत्व टीम का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें ऋतब्रत को विधायक दल का नेता, जावेद खान, संदीपन साहा और शिउली साहा को उप-नेता और रघुनाथगंज के विधायक अखरुज्जमां को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) बनाया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है. पश्चिम बंगाल विधानसभा स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी है. ममता बनर्जी ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया था. इसके बाद पार्टी में बगावत हो गई है. 80 में से 60 विधायकों ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष मानने से इंकार कर दिया. इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों ने स्पीकर रवीन्द्र नाथ बोस से मुलाकात कर उनसे कहा कि वे TMC के असली गुट हैं और ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी जाए. विधायकों की अपील पर विचार करते हुए स्पीकर ने  ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी है।  गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों की वजह से चुनाव नतीजे आने के बाद ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन शाह को TMC से निलंबित कर दिया था। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कर दिया।  स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के कमरे की चाबी दे दी है. टीएमसी के इस गुट में चार उप नेता प्रतिपक्ष बनाए गए हैं. इनके नाम हैं- जावेद अहमद खान, शबीना यास्मीन, शीलू साह, और संदीपन साह. अकीरजम्मा सदन में टीएमसी के चीफ व्हिप होंगे।  स्पीकर के इस फैसले से साफ हुआ है उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी की अगुआई वाली टीएमसी को असली तृणमूल कांग्रेस माना है।   यह घटनाक्रम विधानसभा में बागी विधायकों की एक बैठक के बाद सामने आया। विधानसभा में हुई इस बैठक में शामिल कोई भी विधायक मंगलवार को मध्य कोलकाता में पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के धरने में मौजूद नहीं था। दूसरी ओर, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, नयना बंद्योपाध्याय, मदन मित्रा और कुणाल घोष जैसे नेता बागी विधायकों की बैठक से दूर रहे।बागियों ने ममता को माना पार्टी सुप्रीमोबागी विधायकों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र में ममता बनर्जी को पार्टी का अध्यक्ष बताया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बागी विधायक अपनी लड़ाई को टीएमसी सुप्रीमो के खिलाफ नहीं, बल्कि मौजूदा विधायक दल के नेतृत्व के खिलाफ पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। बागी गुट के सूत्रों ने बताया कि विधायकों ने यह भी साफ कर दिया है कि वे विधायक दल के मामलों पर फैसले लेने के संबंध में अभिषेक बनर्जी के अधिकार को स्वीकार नहीं करते हैं।पार्टी के साथ विश्वासघात हुआ। टीएमसीटीएमसी नेतृत्व ने इस पूरी कवायद को विश्वासघात करार देते हुए खारिज कर दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक कुणाल घोष ने कहा कि संगठन के भीतर बातचीत से किसी भी मतभेद को सुलझाया जा सकता था। अगर उन्हें कोई समस्या थी, तो वे पार्टी के भीतर इस पर चर्चा कर सकते थे। इसके बजाय उन्होंने पार्टी को धोखा देना चुना। बागी विधायकों और उनके समर्थकों को गद्दार बताते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि टीएमसी इस संकट से उबर जाएगी और ममता बनर्जी के नेतृत्व में एकजुट रहेगी।अयोग्य होने से बच जाएंगे बागी विधायकदल-बदल विरोधी कानून के तहत किसी अलग हुए गुट को अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होती है। चूंकि, विधानसभा में टीएमसी के 80 विधायक हैं, इसलिए यह सीमा 54 विधायकों की है। यदि बागी गुट का दावा स्वीकार कर लिया जाता है, तो वे आसानी से इस आंकड़े को पार कर लेंगे और सदन में एक अलग गुट के रूप में मान्यता पाने के अपने दावे को मजबूत करेंगे। यह है मामलाघटनाक्रम की जड़ें छह मई को ममता बनर्जी के आवास पर चुने गए विधायकों की एक बैठक में थीं, जहां विधायकों ने कथित तौर पर पार्टी नेतृत्व को विपक्ष के नेता, उप-नेता और मुख्य सचेतक के नामों पर फैसला करने का अधिकार दिया था। इसके बाद टीएमसी ने विधानसभा को सूचित किया कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय विपक्ष के नेता होंगे, नयना बंद्योपाध्याय और आशिमा पात्रा उप-नेता होंगी और फिरहाद हकीम मुख्य सचेतक होंगे। हालांकि, विधानसभा सचिवालय ने इस सूचना पर कोई कार्रवाई नहीं की और प्रक्रियागत जरूरतों का हवाला दिया कि ऐसे पदाधिकारियों का चुनाव विधायक दल की एक औपचारिक बैठक में होना चाहिए।हस्ताक्षर पर उठे थे सवालविवाद तब और बढ़ गया जब बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा सचिवालय को भेजे गए पत्र पर किए गए हस्ताक्षर सही नहीं हैं। पार्टी नेतृत्व ने इस आरोप को खारिज कर दिया और बागियों पर चुनावी झटके के बाद संगठन को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इसी क्रम में टकराव तब और तेज हो गया जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाल दिया गया।

Bhopal Administration सख्त, 15 दिन में देना होगा परमिशन का रिकॉर्ड; 576 अवैध कॉलोनियां निशाने पर

भोपाल भोपाल प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. कोलार इलाके की 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें उन्हें 15 दिनों के भीतर संबंधित अनुमति दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है. पूरे शहर में कुल 576 अवैध कॉलोनियों की पहचान की गई है, और उनसे जुड़े मामलों के संबंध में अब तक 300 FIR दर्ज की जा चुकी हैं. कॉलोनी सेल की एक बैठक के दौरान, सभी ज़ोनल अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करें, जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।  हालांकि पिछले तीन वर्षों का रिकॉर्ड प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। शहर में सैकड़ों अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गईं और बड़ी संख्या में एफआईआर भी दर्ज हुईं, लेकिन किसी भी मामले में कार्रवाई अंतिम परिणाम तक नहीं पहुंच सकी। आंकड़ों में सख्ती, जमीनी स्तर पर असर नहीं प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों के तहत राहत देते हुए वैधीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया गया। बाकी कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई के दावे किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, फिर भी नहीं हुई गिरफ्तारी अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई जगहों पर केवल औपचारिक कार्रवाई के तहत बाउंड्रीवाल या निर्माण के कुछ हिस्सों को तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में विकास कार्य लगातार जारी रहे। आंकड़ों में बड़ी कार्रवाई, जमीन पर नतीजे शून्य प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023 में भोपाल में 576 अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई थीं। इनमें से दिसंबर 2016 से पहले विकसित 320 कॉलोनियों को नियमों में छूट देकर वैध करने की प्रक्रिया शुरू की गई। शेष कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई की घोषणाएं तो हुईं, लेकिन अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए। 300 एफआईआर दर्ज, गिरफ्तारी एक भी नहीं अवैध कॉलोनियों के मामलों में अब तक करीब 300 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद किसी भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई। इतना ही नहीं, किसी एक मामले में भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कई स्थानों पर केवल प्रतीकात्मक तौर पर बाउंड्रीवाल या निर्माण का हिस्सा तोड़ा गया, जबकि अधिकांश कॉलोनियों में गतिविधियां जारी रहीं। कोलार की इन 15 कॉलोनियों पर कार्रवाई नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र में 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा क्षेत्र की कई निर्माणाधीन कॉलोनियां शामिल हैं। संबंधित कॉलोनाइजरों से स्वीकृत नक्शे, डायवर्जन और अन्य वैधानिक अनुमतियों के दस्तावेज मांगे गए हैं। फिर शुरू हुआ नोटिस अभियान 1 जून को हुई कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध निर्माण या बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया है। कोलार क्षेत्र की 15 कॉलोनियां जांच के दायरे में नगर निगम और कॉलोनी सेल ने कोलार क्षेत्र के रतनपुर, बैरागढ़ चीचली, अकबरपुर और नयापुरा सहित विभिन्न इलाकों में विकसित हो रही 15 कॉलोनियों को नोटिस जारी किए हैं। कॉलोनाइजरों से सभी आवश्यक वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। इन कॉलोनाइ्रजर्स को नगर निगम का नोटिस मनीष शर्मा (चित्रांश ग्रुप, ग्राम रतनपुर), खान, (राधापुरम, ग्राम बैरागढ़ चीचली), दूलीचंद यादव (माइल स्टोन स्कूल के पास, ग्राम अकबरपुर), संजय राठौर, (ऐन्जल होम्स कान्हाकुंज के पास, ग्राम अकबरपुर), घनश्याम पाटीदार (ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन पलिया, (हेवेन्स पार्क, ग्राम बैरागढ़ चीचली),चंदप्रताप सिंह, (कुसुमा विहार, ग्राम बैरागढ़ चीचली), राघवेंद्र सिंह (ग्राम बैरागढ़ चीचली), दीपक शर्मा, (हिल्स व्यू सिटी, ग्राम बैरागढ़ चीचली), नितिन मारन (दुर्गा विहार कॉलोनी, नयापुरा कोलार रोड), दिनेश पाल (व्यंकटेश्वर धाम, नयापुरा कोलार), रमेश मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), गोविंद मीणा (ग्राम बैरागढ़ चीचली), अशोक पवार (ग्राम बैरागढ़ चीचली) और अशोक मीणा (सांई रेसीडेन्सी, ग्राम बैरागढ़ चीचली) बाहरी दीवारें गिराकर खानापूर्ति रिकॉर्ड बताते हैं कि अवैध कॉलोनियों पर अब तक 300 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इसके बावजूद एक भी कॉलोनाइजर की गिरफ्तारी नहीं हुई और किसी भी मामले में अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। कुछ स्थानों पर दीवारें गिराकर खानापूर्ति की गई। सिटी प्लानर अनिल साहनी के अनुसार 1 जून को हुई 10 सदस्यीय कॉलोनी सेल की बैठक के बाद 15 नए नोटिस जारी किए गए हैं। सेल में जिला प्रशासन, नगर निगम, टीएंडसीपी, सहकारिता और भू-संसाधन प्रबंधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। जोन अधिकारी बना रहे कार्रवाई की सूची सभी जोन अधिकारियों को अवैध कॉलोनियों की लिस्टिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार के निर्माण की सूचना मिलने या संदिग्ध पाए जाने पर उसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। – नीरज आनंद लिखार, ग्राम तथा नगर निवेश सभी ज़ोन को मिले जांच और नई सूची बनाने के निर्देश कॉलोनी सेल की बैठक में अधिकारियों ने सख्त लहजे में कहा कि आम जनता की गाढ़ी कमाई को ठगने वाले भू-माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। सभी जोन के अधिकारियों को अपने इलाकों में सक्रिय अवैध कॉलोनियों की पूरी जांच करने और उनकी सूची अपडेट करने को कहा गया है। इसके साथ ही आम लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे किसी भी नई कॉलोनी में प्लॉट या मकान खरीदने से पहले नगर निगम या रेरा (RERA) से उसके वैध होने की जांच जरूर कर लें। फिर शुरू हुआ अवैध कॉलोनियों के खिलाफ अभियान 1 जून को आयोजित कॉलोनी सेल की बैठक के बाद सभी जोन अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को बिना अनुमति विकसित हो रही कॉलोनियों और संदिग्ध निर्माण गतिविधियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।