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सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट में गैस लीक, 65 से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित

तमिलनाडु तमिलनाडु के तिरुवल्लुर जिले में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया. पेरियापालयम के पास कन्निगापेर गांव स्थित 'सेंट पीटर्स पॉल सीफ़ूड प्रोसेसिंग एंड एक्सपोर्ट कंपनी' में अचानक अमोनिया गैस का रिसाव हो गया. गैस फैलते ही फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागने लगे. इस हादसे में 65 से ज्यादा कर्मचारी गैस की चपेट में आ गए, जिनमें इलाज के दौरान दो लोगों की मौत हो गई है. वहीं, उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आए प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं. गैस का असर होते ही कई कर्मचारियों को सांस लेने में तकलीफ, चक्कर और बेचैनी की शिकायत होने लगी. इसके बाद पर फैक्ट्री प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया. प्रभावित कर्मचारियों को अलग-अलग वाहनों के जरिए नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया. अस्पतालों में भर्ती किए गए कर्मचारी प्रभावित कर्मचारियों को इलाज के लिए तुरंत गाड़ियों से पास के वेल्स प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और वेंकटेश्वर प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले जाया गया में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों की टीम ने सभी मरीजों की तत्काल जांच शुरू की और इलाज किया. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, 6 कर्मचारी गैस के प्रभाव से बेहोश हो गए. उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं. वहीं, दो लोगों के नाक से खून आने की भी जानकारी है, जिससे आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया है. गांव के लोगों और फैक्ट्री में मौजूद अन्य कर्मचारियों में भी इस घटना के बाद भय का माहौल है. बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों और फैक्ट्री परिसर के बाहर जमा हो गए हैं. तीन गंभीर मरीजों को किया गया रेफर घटना की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की विशेष टीम ने गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों का प्राथमिक उपचार किया. इसके बाद तीन गंभीर मरीजों को एंबुलेंस के जरिए चेन्नई स्थित स्टेनली गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचाया गया. बता दें कि अमोनिया गैस का इस्तेमाल आमतौर पर कोल्ड स्टोरेज और सीफूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में रेफ्रिजरेशन सिस्टम के लिए किया जाता है. वहीं, राज्य के मंत्री कुमार ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि हादसे में 60 महिलाएं और 4 पुरुष प्रभावित हुए हैं. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मृतकों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया है और अधिकारियों को इस मामले में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. FIR दर्ज, दो फैक्ट्री मालिक हिरासत में हादसे के बाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है. शुरुआती कार्रवाई के तहत फैक्ट्री के दो मालिकों को हिरासत में लिया गया है. उनसे पूछताछ की जा रही है और हादसे के कारणों की जांच जारी है. वहीं, घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति को 24 घंटे के भीतर अंतरिम रिपोर्ट और तीन दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.  

यूक्रेन-पोलैंड तनाव बढ़ा: राष्ट्रपति जेलेंस्की ने डाक से वापस भेजा सम्मान

कीव यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च राजकीय सम्मान लौटा दिया है। जेलेंस्की ने यह कदम जब पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी ने कह कि वह यूक्रेनी नेता से यह सम्मान वापस ले रहे हैं। इसने दोनों देशों के बीच द्वितीय विश्वयुद्ध के समय के विवाद को फिर से खड़ा कर दिया है। जेलेंस्की ने इस कदम के बारे में जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने यह सम्मान पोलैंड के राष्ट्रपति के पास वापस भेज दिया है। आज मैंने यह सम्मान पोलैंड के राष्ट्रपति को वापस भेज दिया है। मेरा मानना है कि भविष्य उस सम्मान की पुष्टि करेगा जिसके यूक्रेन के लोग हकदार हैं। जेलेंस्की ने डाक से वापस भेजा सम्मान एक्स पर पोस्ट में जेलेंस्की ने कहा की यूक्रेनी लोगों का मानना है कि यह सम्मान यूक्रेन के लोगों और उनकी सेना के लिए है। इस संदेश के साथ जेलेंस्की ने पोलैंड के सम्मान और डाक रसीद की तस्वीरें भी शेयर की हैं। इससे पता चलता है कि इसे पोलैंड के राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा जा रहा है। यूक्रेन के तीन अधिकारियों ने भी राष्ट्रपति के साथ एकजुटता दिखाते हुए पोलैंड से मिले सम्मान वापस करने का फैसला किया है। यूक्रेनी सेना की यूनिट पर विवाद साल 2023 में पोलैंड के तत्कालीन राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने जेलेंस्की को पोलिश ऑर्डर ऑफ द वॉइट ईगल से सम्मानित किया था। लेकिन पिछले महीने यूक्रेन के एक कदम से पोलैंड नाराज हो गया। कीव ने यूक्रेनी सेना की एक यूनिट यूक्रेनी इंसर्जेंट आर्मी (UPA) के नाम पर रखा। UPA द्वितीय विश्व यु्द्ध के दौरान लड़ने वाला एक विवादास्पद समूह था, जो 1940 के 1950 के दशक में सक्रिय था। UPA पर नरसंहार का आरोप यूक्रेन में कई लोग UPA के सदस्यों को नायक मानते हैं। उनका मानना है कि इन लोगों ने सोवियत रेड आर्मी, नाजी जर्मनी और पोलिश अधिकारियों के खिलाफ यूक्रेन की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। इस समूह का लाल और काले रंग का झंडा आज भी अक्सर यूक्रेनी सैनिक मोर्चे पर इस्तेमाल करते हैं। पोलैंड का आरोप है कि UPA ने 1943-45 के दौरान वोल्हिनिया में लगभग 1 लाख पोलिश लोगों को नरसंहार किया था। वोल्हिनिया अब यूक्रेन का इलाका है, जिसे वोलिन नाम से जाना जाता है।

किडनी मरीज की मदद को आगे आए मुख्यमंत्री साय, 3.95 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील एवं जनकल्याणकारी नेतृत्व में मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत जशपुर जिले के गंभीर किडनी रोगी जितेन्द्र कुमार यादव (44 वर्ष) को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री साय ने उनके उपचार एवं किडनी प्रत्यारोपण के लिए 3 लाख 95 हजार 121 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जशपुर निवासी जितेन्द्र कुमार यादव गंभीर किडनी रोग से पीड़ित हैं और उन्हें रेनल ट्रांसप्लांट (किडनी प्रत्यारोपण) की आवश्यकता है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके परिवार को उपचार कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इस बीच मरीज के परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के गृह निवास बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पहुंचकर आर्थिक सहायता के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री साय ने त्वरित संज्ञान लिया और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत सहायता राशि स्वीकृत करने के निर्देश दिए। राज्य नोडल एजेंसी द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह राशि अहमदाबाद (गुजरात) स्थित जी.आर. दोशी एवं के.एम. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी एंड रिसर्च सेंटर में किडनी प्रत्यारोपण, उपचार तथा आवश्यक दवाइयों के लिए मंजूर की गई है।     मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य सरकार गंभीर एवं आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि जीवन रक्षक उपचार के अभाव में किसी भी परिवार को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। मुख्यमंत्री द्वारा स्वीकृत इस सहायता से मरीज एवं उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहायता से अब आवश्यक उपचार संभव हो सकेगा। यह पहल राज्य सरकार की संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

स्वैच्छिक ट्रांसफर में शिक्षकों की बढ़ी मुश्किलें, ई-अटेंडेंस के चलते रिक्त पद भी दिखे ‘रिजर्व’

भोपाल. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू किए जाने से पहले ही शिक्षकों के सामने नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। प्रदेश के कई शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में रिक्त पदों को स्थानांतरण पोर्टल पर रिजर्व दर्शाए जाने से हजारों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। वहीं पोर्टल पर आवेदन की तैयारी कर रहे अनेक शिक्षकों को 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता भी बड़ी बाधा बन रही है। शिक्षकों का कहना है कि दो दिन पहले तक पोर्टल पर जो पद रिक्त दिखाई दे रहे थे, वे अब उपलब्ध सूची से गायब हो गए हैं। इससे उन्हें वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी नहीं मिल पा रही है और वे अपनी पसंद के स्थानों के लिए आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं। कई शिक्षकों को पोर्टल पर यह संदेश भी मिल रहा है कि उनकी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत से कम होने के कारण वे आवेदन के पात्र नहीं हैं। पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल शिक्षक संगठनों ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि जब तक स्थानांतरण आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो जाती और सभी पात्र शिक्षकों को विकल्प चयन का अवसर नहीं मिल जाता, तब तक रिक्त पदों को रिजर्व या भरा हुआ दर्शाना उचित नहीं है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में रिक्त पदों को रिजर्व दिखाए जाने से ऐसे शिक्षक प्रभावित होंगे जो वर्षों से पारिवारिक, स्वास्थ्य या अन्य आवश्यक कारणों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इससे उन्हें अपनी पसंद के स्थानों का चयन करने का अवसर नहीं मिल पाएगा। नियमों में संशोधन की मांग शिक्षक संगठनों ने शासन और स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की है कि स्वैच्छिक स्थानांतरण पोर्टल पर सभी वास्तविक रिक्त पदों को प्रदर्शित किया जाए तथा आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी पद को अनावश्यक रूप से रिजर्व न रखा जाए। साथ ही, स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति में संशोधन करते हुए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त समाप्त करने और जनगणना ड्यूटी में संलग्न शिक्षकों को भी स्थानांतरण के लिए पात्र घोषित करने की मांग की गई है। ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त हो 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त हो, साथ ही जनगणना वाले शिक्षकों को भी मौका दिया जाए। यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के शिक्षक लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए बाध्य होंगे। – उपेन्द्र कौशल,कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष,शासकीय शिक्षक संगठन। जनगणना कार्य के बाद कार्यमुक्त जनगणना कार्य करने वाले शिक्षकों को स्थानांतरण से वंचित करना उनके साथ अन्याय है। यदि शासन को जनगणना कार्य प्रभावित होने की आशंका हो, तो स्थानांतरण आदेश में यह शर्त जोड़ी जा सकती है कि संबंधित शिक्षक को जनगणना कार्य पूर्ण होने के बाद ही कार्यमुक्त किया जाए। नीति में संशोधन किया जाए। – जगदीश यादव, प्रांताध्यक्ष,राज्य शिक्षक संघ।

न्यूयॉर्क से टेक्सास तक योग का जश्न, अमेरिका में बढ़ी योग की लोकप्रियता

वॉशिंगटन  टेक्सास के पार्कों और न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर से लेकर राज्य विधानसभाओं और गवर्नर के ऑफिस तक, इस हफ्ते के अंत में पूरे अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। यह दिखाता है कि भारत में शुरू हुई यह परंपरा अब एक देशव्यापी स्वास्थ्य कल्याण आंदोलन बन गई और इसे आम लोगों में कितना पसंद किया जा रहा है। इस साल का थीम "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" रहा, जिसमें निवारक स्वास्थ्य देखभाल, सक्रिय जीवनशैली और मानसिक कल्याण पर विशेष जोर दिया गया। अमेरिका में भारत की सांस्कृति पहचान संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किए जाने के एक दशक से अधिक समय बाद अब इसका आयोजन पूरे अमेरिका में व्यापक स्तर पर किया जाता है। देशभर के पार्कों, विश्वविद्यालयों, सामुदायिक केंद्रों, सार्वजनिक स्थलों और सरकारी संस्थानों में योग दिवस मनाया जाता है। करोड़ों अमेरिकी नियमित रूप से योग का अभ्यास करते हैं और यह अमेरिका में भारत की सांस्कृतिक पहचान तथा प्रभाव के सबसे प्रमुख उदाहरणों में से एक बन चुका है। सबसे बड़े समारोह में से एक, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को टेक्सास के शुगर लैंड में हुआ। यहां कॉन्सुल जनरल डी.सी. मंजूनाथ, हिंदू स्वयंसेवक संघ और हिंदू युवा के एक इवेंट के लिए ब्रेजोस रिवर पार्क में मेयर कैरल मैककचियन के साथ शामिल हुए। इस इवेंट में लोग, चुने हुए अधिकारी और योग के शौकीन लोग आउटडोर योग सत्र और कल्याणकारी गतिविधियों के लिए इकट्ठा हुए। मंजूनाथ ने "होलिस्टिक हेल्थ, वेल-बीइंग और तालमेल" को बढ़ावा देने में योग की भूमिका के बारे में बात की। न्यूयॉर्क में, भारत के महावाणिज्यदूत ने मुख्य कार्यक्रम से पहले सेंट्रल पार्क में एक योग सत्र आयोजित किया। इसे "जबरदस्त ऊर्जा वाली शाम" बताते हुए, महावाणिज्यदूत ने कहा कि यह इवेंट न्यूयॉर्क शहर के बीचों-बीच वेलनेस का जश्न मनाता है। टाइम्स स्कावयर में बड़े आयोजन की तैयारी हर वर्ष आयोजित होने वाले ‘सोल्स्टिस इन टाइम्स स्क्वायर’ कार्यक्रम में इस बार हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। यह आयोजन उस परंपरा को आगे बढ़ाता है, जिसके तहत जून महीने में दुनिया के सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाकों में से एक टाइम्स स्क्वायर को खुले आसमान के नीचे एक विशाल योग स्टूडियो में बदल दिया जाता है। वाशिंगटन डीसी में, भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को लिंकन मेमोरियल में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के आयोजन का नेतृत्व किया। सैकड़ों योग के शौकीन लोग नेशनल मॉल के पीछे वाली जगह में "स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग" थीम पर एक सामूहिक योग सत्र के लिए इकट्ठा हुए। इस इवेंट में डिप्लोमैट, कानून बनाने वाले, कम्युनिटी लीडर, योग करने वाले और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्य शामिल हुए, जिससे पूरे अमेरिका में योग की बढ़ती अपील पर जोर दिया गया। न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में योग दिवस का प्रस्ताव इस वर्ष के आयोजनों को अमेरिकी लॉमेकर्स और सरकारी अधिकारियों से व्यापक मान्यता मिली है। न्यूयॉर्क स्टेट सीनेट ने सीनेटर शेली मेयर द्वारा प्रायोजित प्रस्ताव 'जे1895' को सर्वसम्मति से पारित किया। इस प्रस्ताव के माध्यम से गवर्नर कैथी होचुल से 21 जून 2026 को न्यूयॉर्क राज्य में आधिकारिक तौर पर 'योग दिवस' घोषित करने का आह्वान किया गया है। पारित प्रस्ताव में प्राचीन भारत में योग की ऐतिहासिक जड़ों, अमेरिकी नागरिकों के बीच इसकी बढ़ती लोकप्रियता और मानसिक तनाव को कम कर समग्र स्वास्थ्य व कल्याण को बढ़ावा देने में इसके लाभों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली में योग दिवस का एक प्रस्ताव पेश किया गया। यह इस साल किसी स्टेट गवर्नमेंट द्वारा योग दिवस को मिले सबसे बड़े आधिकारिक समर्थन में से एक को दर्शाता है। डेलावेयर के गवर्नर मैथ्यू मेयर (मैट मेयर) ने 21 जून 2026 को आधिकारिक रूप से अपने प्रांत में 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' मनाने का घोषणापत्र जारी किया है। पूरे अमेरिका में योग को लेकर कार्यक्रम इसके अलावा, कैलिफोर्निया में, रेडलैंड्स शहर ने भी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए समर्थन जताया। वहीं कई दूसरी नगर पालिकाओं ने स्थानीय समारोह के साथ-साथ इसकी सराहना करते हुए समर्थन जताया। वेस्ट कोस्ट पर, सैन फ्रांसिस्को के क्रिसी मैदान में गोल्डन गेट ब्रिज के पास योग दिवस मनाया गया। भारतीय डिप्लोमेटिक मिशन और सामुदायिक संगठन ने लॉस एंजिल्स, सिएटल और पैसिफिक नॉर्थवेस्ट के दूसरे शहरों में योग कार्यक्रम आयोजित किए। शिकागो, अटलांटा, मियामी, डेनवर, डेट्रॉइट, बोस्टन और देश भर के यूनिवर्सिटी कैंपस में भी सामुदायिक योग सत्र की जानकारी सामने आईं। योग दिवस के अवसर पर आयोजित प्रमुख कार्यक्रमों में न्यूयॉर्क के हेम्पस्टेड स्थित वैदिक हेरिटेज हनुमान मंदिर में ‘ए लोटस इन द मड’ मैगजीन की तरफ से आयोजित भक्ति-आधारित योग कार्यक्रम भी शामिल रहा। इस आयोजन में 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में ध्यान, संगीत, नृत्य और ‘आध्यात्मिक विकास के लिए भक्ति एक राजमार्ग’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में पद्म भूषण से सम्मानित और मशहूर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दत्तात्रेयुडू नोरी मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। आयोजक ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद योग के आध्यात्मिक पहलुओं के साथ-साथ इससे होने वाले शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य फायदों को भी हाईलाइट करना था। पूरे अमेरिका में योग दिवस के जश्न का बढ़ना दिखाता है कि यह कैसे एक सालाना डिप्लोमैटिक पहल से बढ़कर एक बड़े पैमाने पर सर्व-कल्याणकारी आंदोलन बन गया है। यह 2014 में भारत की तरफ से पेश किए गए संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव के तौर पर शुरू हुआ था और अब पूरे अमेरिका में राज्य विधानसभाओं, गवर्नर के कार्यालय, सिटी हॉल, सार्वजनिक पार्क और सामुदायिक केंद्रों में मनाया जाता है।  

सुकमा की 53 महिलाओं को मिला विशेष प्रशिक्षण, बढ़ेगी आय और मजबूत होगा पर्यावरण संरक्षण

सुकमा/रायपुर. बांस के उपयोग को बढ़ावा देने और इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आय के नए साधन अर्जित करने के लिए एक नवाचार के तहत महिलाओं को बांस से ट्री गार्ड निर्माण का विशेष प्रशिक्षण देकर सक्षम बनाया जा रहा है l सुकमा जिले के तोंगपाल में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 14 स्व-सहायता समूहों की 53 महिलाओं को बांस से ट्री गार्ड निर्माण का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है। बांस आधारित उत्पाद निर्माण की दी गई जानकारी प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को बांस से ट्री गार्ड बनाने की तकनीक, डिजाइन और गुणवत्ता संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। विशेषज्ञों ने बताया कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में टिकाऊ और उपयोगी ट्री गार्ड तैयार किए जा सकते हैं। पौधों की सुरक्षा में निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका प्रशिक्षण के बाद स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले बांस के ट्री गार्डों का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों, सार्वजनिक स्थलों एवं विभिन्न पौधारोपण स्थलों पर किया जाएगा। इससे पौधों को पशुओं और अन्य संभावित नुकसान से सुरक्षा मिलेगी तथा हरित आवरण बढ़ाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। अतिरिक्त रोजगार और आय का अवसर बांस से निर्मित ट्री गार्डों की बढ़ती मांग महिलाओं के लिए आय का नया स्रोत बनेगी। इससे स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं अतिरिक्त आय अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने में भी सहायक होगी। ‘लखपति दीदी’ अभियान को मिलेगा बढ़ावा यह पहल केंद्र और राज्य सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन की योजनाओं के अनुरूप है। बांस आधारित आजीविका गतिविधियों से जुड़कर महिलाएं ‘लखपति दीदी’ अभियान के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकेंगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी भी बढ़ेगी। महिला सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण तोंगपाल में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सतत आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ हरित एवं समृद्ध समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

राष्ट्रपति मुर्मु की मौजूदगी में सजा दीक्षांत समारोह, मेधावी छात्रों को मिले गोल्ड मेडल

जबलपुर. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह रविवार को उस समय ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण का साक्षी बना, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने समारोह में पहुंचकर मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। विश्वविद्यालय परिसर में सुबह से ही उत्साह और गरिमा का माहौल था। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। सर्किट हाउस से विश्वविद्यालय तक पूरे मार्ग पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती रही। समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। राष्ट्रपति के पहुंचते ही परिसर में मौजूद विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। शोभायात्रा और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के विश्वविद्यालय पहुंचने के बाद पारंपरिक शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें मंचासीन अतिथि शामिल हुए। इसके बाद राष्ट्रपति ने दीप प्रज्वलित कर 36वें दीक्षांत समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। कुलगान और अन्य औपचारिक कार्यक्रमों के साथ समारोह आगे बढ़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। कुलगुरु ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां दीक्षांत भाषण की शुरुआत करते हुए कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने वीरांगना रानी दुर्गावती को नमन किया। उन्होंने कहा कि 24 जून को रानी दुर्गावती का 462वां बलिदान दिवस है और विश्वविद्यालय उनके आदर्शों को आत्मसात करते हुए शिक्षा और शोध के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। कुलगुरु ने बताया कि 23 जुलाई 2024 को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने विश्वविद्यालय को 'ए' ग्रेड प्रदान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय मात्र 0.04 अंक से 'ए++' ग्रेड हासिल करने से चूक गया। इसके बावजूद यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्ता और शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाती है। रोजगारोन्मुखी शिक्षा और डिजिटल सुधारों पर जोर प्रो. वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय में कई नवाचार लागू किए गए हैं। रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) से 10 करोड़ रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने 28 घंटे में 28 परीक्षा परिणाम घोषित कर एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। 'भारत' शब्द को बनाया पहचान का हिस्सा अपने संबोधन में कुलगुरु ने एक विशेष पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने अपने सभी आधिकारिक दस्तावेजों में 'इंडिया' के स्थान पर 'भारत' शब्द का उपयोग प्रारंभ कर दिया है। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय अस्मिता और आत्मगौरव से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया। मेधावियों को मिला राष्ट्रपति के हाथों सम्मान समारोह के अंतिम चरण में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विभिन्न संकायों के चयनित विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान कर सम्मानित किया। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह क्षण जीवनभर की याद बन गया। पूरे समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर तालियों की गूंज और उपलब्धियों के उत्सव से सराबोर नजर आया।

भूमिहीन कृषि मजदूरों को बड़ी राहत, हर पात्र परिवार को मिलेंगे 10 हजार रुपये

सूरजपुर. राज्य सरकार द्वारा भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों की शुद्ध आय में वृद्धि कर उन्हें आर्थिक रूप से संबल प्रदान करने के उद्देश्य से "दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना" संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक पात्र हितग्राही परिवार को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य उन परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना है, जो खेती में परिश्रम तो करते हैं, परंतु उनके पास स्वयं की भूमि नहीं है। यह सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा की जाती है, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो। यह योजना भूमिहीन कृषि मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है, ताकि वे शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। योजना के अंतर्गत आवेदन के लिए आवेदक का छत्तीसगढ़ का मूल निवासी होना आवश्यक है। पात्र समूह में भूमिहीन परिवार, चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी सहित अनुसूचित क्षेत्रों में देवस्थलों से जुड़े पुजारी, वैद्य, गुनिया एवं मांझी परिवार शामिल हैं। इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शासन द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत आवेदन की प्रक्रिया अत्यंत सरल रखी गई है। इच्छुक हितग्राही ग्राम/नगर पंचायत कार्यालय से ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। पूर्ण आवेदन जमा करने के पश्चात विभाग द्वारा सत्यता जांच की जाएगी। इसके अतिरिक्त पंजीयन विवरण ऑनलाइन मोबाइल नंबर, आधार नंबर अथवा पंजीयन क्रमांक के माध्यम से भी देखा जा सकता है। नियमित वित्तीय सहायता भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के लिए स्थायी लाभ सुनिश्चित करेगी। यह पहल राज्य सरकार की ग्रामीण कल्याण नीति में कमजोर वर्ग के उत्थान की प्राथमिकता को दर्शाती है।

इंदौर में NEET अभ्यर्थियों की सख्त चेकिंग, क्लचर से लेकर कानों की बाली तक हटवाई गई

इंदौर. मेडिकल में प्रवेश के लिए देश की सबसे बड़ी री परीक्षा NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर मध्यप्रदेश में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। नीट-यूजी परीक्षा केंद्र के बाहर सुबह 11 बजे से ही गहमागहमी शुरू हो गई थी। डेढ़ बजे तक प्रवेश मिलना था, लेकिन सुरक्षा के नियम इतने कड़े थे कि छात्र-छात्राएं हैरान रह गए। पेन-पेंसिल ले जाने पर भी पाबंदी केंद्र के बाहर ही पेन-पेंसिल रखवा लिए गए और बताया गया कि ये अंदर ही मिलेंगे। परीक्षार्थियों को केवल आधार कार्ड और प्रवेश पत्र ले जाने की अनुमति थी। जांच के दौरान पानी की पारदर्शी बोतलों से स्टिकर हटाए गए, हाथ के पवित्र धागे कटवाए गए और बालिकाओं के बालों से क्लच व पोनीटेल तक निकलवा दिए गए। पुलिस अधिकारियों ने संभाला छात्रा का मोबाइल इसी बीच छात्रा सेजल गुप्ता मोबाइल के साथ पहुंची। परिजन साथ नहीं थे, तो गेट पर तैनात पुलिस अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उसका मोबाइल सुरक्षित संभाला। कान की बाली के लिए भी छात्रा को रोका गया वहीं एक छात्रा सानिया मनियार की एक कान की बाली लाख कोशिशों के बाद भी नहीं निकली, तो गहन जांच के बाद उसे उसी हाल में प्रवेश दिया गया। सबसे ज्यादा परेशानी तब हुई जब एक अन्य छात्रा अपना आधार कार्ड लाना भूल गई। उसे रोका गया तो वह रोने लगी; उसके माता-पिता तुरंत प्रिंट आउट निकलवाने के लिए दौड़े। परीक्षा से पहले का यह दृश्य किसी कड़े इम्तिहान से कम नहीं था।

मुख्यमंत्री साय का आह्वान- रोज़मर्रा की जिंदगी में अपनाएं योग, बनेगा स्वस्थ समाज

अम्बिकापुर/रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अम्बिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में राज्य स्तरीय सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में हजारों नागरिकों, विद्यार्थियों, महिलाओं,  युवाओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ योगाभ्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि योग भारत की सनातन ऋषि परंपरा का अमूल्य उपहार है, जिसने आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाली जीवन पद्धति है, जो व्यक्ति को आत्मबल, अनुशासन, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ आयु के लिए योग” वर्तमान समय की आवश्यकता को प्रतिबिंबित करती है। तेजी से बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग प्रत्येक आयु वर्ग के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्रिय, मानसिक रूप से सजग और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला होता है, इसलिए योग को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखकर जीवन का हिस्सा बनाना होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और सतत प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखे गए प्रस्ताव को रिकॉर्ड समय में व्यापक समर्थन प्राप्त होना इस बात का प्रमाण है कि विश्व ने भारतीय ज्ञान परंपरा और योग की उपयोगिता को स्वीकार किया है। आज 21 जून को पूरी दुनिया जिस उत्साह से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है, वह भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक नेतृत्व का गौरवशाली उदाहरण है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योग स्वास्थ्य और आरोग्य की ऐसी विश्वसनीय साधना है, जो जीवन के हर चरण में व्यक्ति का मार्गदर्शन करती है। योग शरीर को निरोग, मन को शांत और विचारों को सकारात्मक बनाता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव, अनिद्रा और मोटापे जैसी जीवनशैली जनित समस्याओं से बचाव में योग अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी आज योग की उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है और इसे बेहतर स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण आधार के रूप में देख रहा है। मुख्यमंत्री ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया। भगवान शिव को आदियोगी के रूप में स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना में योग सदियों से जीवन का अभिन्न अंग रहा है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग का संदेश देकर संतुलित और उद्देश्यपूर्ण जीवन का मार्ग प्रशस्त किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार योग के व्यापक विस्तार और संस्थागत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से योग विषय को समाज कल्याण विभाग से चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि योग आयुष पद्धति का महत्वपूर्ण अंग है और इस निर्णय से योग शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा जनजागरूकता गतिविधियों को नई दिशा और गति मिलेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य योग को गांव-गांव, स्कूलों, कॉलेजों और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है ताकि स्वस्थ जीवनशैली को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जा सके। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। विद्यालयों में योग को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि जो लोग अब तक योग से नहीं जुड़ पाए हैं, वे आज से इसकी शुरुआत करें, क्योंकि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कोई भी समय देर नहीं होता। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेश में योग के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि योग को घर-घर तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ योग आयोग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आयोग प्रदेश में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने जनजातीय युवाओं की शिक्षा और भविष्य को लेकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 की गई है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। हाल ही में जनजातीय वर्ग के 13 युवाओं द्वारा यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को अवसर, संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें देश और समाज के नेतृत्व के लिए तैयार कर रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ब्रह्ममुहूर्त का विशेष महत्व है और इसी समय योगाभ्यास करना सबसे अधिक लाभकारी माना गया है। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन धरोहर है, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से वैश्विक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई है। इस अवसर पर विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सरगुजा संभाग के कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक झा, आयुष विभाग के संचालक राजेंद्र कुमार कटारा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और नागरिक उपस्थित थे।