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सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, 8वें वेतन आयोग को लेकर नई समयसीमा तय

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग (CPC) के तहत एक बड़ा अपडेट सामने आया है. आयोग ने सुझाव और मांग रख्‍ने की डेडलाइन बढ़ाकर 15 जून तक कर दी है. इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्‍य कर्मचारियों को सैलरी, पेंशन और अलाउंस में संशोधन पर विचार करने के लिए एक्‍स्‍ट्रा समय मिल गया है।  यह विस्‍तार ऐसे समय में हुआ है, जब कर्मचारी यूनियनों और पॉलिसी मेकर्स के बीच लंबे समय से इंतजार किए जा रहे फिटमेंट फैक्‍टर पर चर्चा तेज हो गई है. नए नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग ने ऐलान किया है कि  हितधारकों द्वारा अपने ज्ञापन और सिफारिशें प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 जून होगी. इससे पहले आयोग द्वारा दी गई समय सीमा को 31 मई तक बढ़ा दिया गया था और यह दूसरी बार है जब समय सीमा बढा़ई गई है।  आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुझाव केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. परामर्श प्रक्रिया के दौरान फिजिकल डॉक्‍यूमेंट्स, ईमेल, हार्ड कॉपी और पीडीएफ लेटर स्वीकार नहीं की जाएंगी. इस विस्तार का मतलब आयोग द्वारा अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स ग्रुप, डिफेंस इम्‍प्‍लाई के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।  कौन-कौन कर सकता है सिफारिशें   केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनर्स, रक्षाकर्मी, अखिल भारतीय सेवा अधिकारी, केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारी और सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य पात्र अपनी मांग रख सकते हैं. इस पैनल से उम्‍मीद की जाती है कि वह अपने चयन के 18 महनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा. हालांकि, जरूरत पड़ने पर अंतरिम रिपोर्ट भी जारी की जा सकती है।  फिटमेंट फैक्टर आठवें वेतन आयोग के सबसे अधिक ध्यान से देखे जाने वाले पहलुओं में से एक है फिटमेंट फैक्टर, जो वेतन और पेंशन संशोधनों की लिमिट तय करता है. यह संशोधित बेसिक सैलरी और पेंशन के कैलकुलेशन में उपयोग किया जाने वाला एक फैक्‍टर है. हाई फिटमेंट फैक्‍टर से सैलरी और रिटायरमेंट प्रॉफिट में अधिक बढ़ोतरी होती है।  उदाहरण के लिए  छठा वेतन आयोग (2006): फिटमेंट फैक्‍टर 1.86, सातवां वेतन आयोग (2016): फिटमेंट फैक्‍टर 2.57 सातवें वेतन आयोग के फार्मूले के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 तय किया गया था. 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने से पिछले सैलरी स्‍ट्रक्‍चर की तुलना में वेतन में काफी बढ़ी हुई है।  8वें वेतन आयोग के तहत क्‍या हैं मांगे?  कई यूनियनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, आवास की बढ़ती लागत, हेल्‍थ खर्च और बेहतर पेंशन व्यवस्था की आवश्यकता एक व्यापक संशोधन को उचित ठहराती है. खबरों के अनुसार, कई कर्मचारी ग्रुप 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, जिससे न्यूनतम बेसिक लेवल पर बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।  अगर 3.8 से 4.0 की लिमिट में फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिल जाती है, तो हितधारकों के साथ परामर्श के दौरान चर्चा किए गए अनुमानों के अनुसार, न्यूनतम मूल वेतन संभावित रूप से ₹69,000 और ₹72,000 के बीच बढ़ सकता है। 

बढ़ते तापमान ने बढ़ाई किसानों की चिंता, गेहूं की फसल पर मंडरा रहा संकट

नई दिल्ली जलवायु परिवर्तन का असर अब भारत की खाद्य सुरक्षा पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है. एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ता तापमान, विशेष रूप से सर्दियों में गर्मी और रात के समय तापमान में बढ़ोतरी देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर रही है।  क्लाइमेट ट्रेंड्स (Climate Trends) की रिपोर्ट, 'व्हीट अंडर स्ट्रेस: क्लाइमेट चेंज, राइजिंग हीट एंड अडैप्टेशन पाथवेज इन इंडिया’स मेजर व्हीट-ग्रोइंग स्टेट्स' में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में गेहूं की वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई है।  रिपोर्ट बनाने वाली प्रमुख लेखिका और क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिसर्च लीड डॉ. पलक बल्यान कहती हैं कि, भारत के गेहूं उत्पादन के सामने सबसे गंभीर लेकिन कम पहचाने गए खतरे में से एक रात के तापमान में लगातार वृद्धि है. गर्म रातें पौधों में श्वसन प्रक्रिया बढ़ा देती हैं, जिससे अनाज बनने के लिए आवश्यक कार्बोहाइड्रेट भंडार कम हो जाते हैं।   उन्होंने बताया कि फरवरी और मार्च में अचानक बढ़ने वाली गर्मी गेहूं के दाने भरने की अवधि को छोटा कर रही है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ रहा है. गेहूं के दाने छोटे और सिकुड़े हुए रह जाते हैं, जिससे कुल उत्पादन घटता है और गेहूं की क्वालिटी भी खराब हो जाती है।  रिपोर्ट के अनुसार, सभी प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में रात का तापमान दिन के तापमान की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है. गुजरात में यह वृद्धि दिन के तापमान की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक दर्ज की गई है. वहीं, फरवरी का महीना सबसे तेजी से गर्म हो रहा है, जिसमें प्रति दशक 0.69 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि देखी गई है।  क्लाइमेट ट्रेंड्स की संस्थापक और निदेशक आरती खोसला का कहना है कि, जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का जोखिम नहीं रह गया है. यह पहले से ही हमारे खाद्य तंत्र और ग्रामीण आजीविका को प्रभावित कर रहा है. किसानों को लगातार फसल नुकसान, घटती गुणवत्ता और बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु-स्मार्ट कृषि, बेहतर चेतावनी प्रणाली, टिकाऊ खेती और किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने वाले उपायों को प्राथमिकता दिए बिना देश की खाद्य सुरक्षा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना कठिन होगा।  रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जिससे रात के समय गर्मी का प्रभाव बढ़ रहा है. यह स्थिति विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चिंताजनक है, जो भारत के गेहूं उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं।  अध्ययन में पाया गया कि फूल आने, दाना भरने और पकने जैसे महत्वपूर्ण चरण बढ़ते तापमान से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. फरवरी और मार्च में बढ़ती गर्मी फसल की वृद्धि अवधि को कम कर रही है, जिससे दाने छोटे और सिकुड़े हुए रह जाते हैं तथा उत्पादन में गिरावट आती है. इसके अलावा, कटाई के दौरान होने वाली बेमौसम बारिश फसल को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ भंडारण हानि भी बढ़ा रही है।  रिपोर्ट में गुजरात और पंजाब के किसानों के अनुभवों का भी जिक्र किया गया है. किसानों ने खराब अंकुरण, कम टिलरिंग, बढ़ते कीट प्रकोप और घटती गुणवत्ता जैसी समस्याओं की जानकारी दी है. छोटे और सीमांत किसान इन चुनौतियों से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।  विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बुवाई, गर्मी-सहनशील किस्मों का उपयोग, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और मौसम आधारित सलाह सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलवायु-अनुकूल कृषि रणनीतियों को तेजी से लागू करना होगा। 

Venezuela Oil Deal में भारत निभा सकता है बड़ी भूमिका, खास तेल से बदल सकती है तस्वीर

नई दिल्ली अगर कोई आपसे पूछे कि दुनिया में सबसे ज्यादा तेल किस देश के पास है, तो शायद आपका जवाब सऊदी अरब, रूस या अमेरिका होगा. लेकिन सच यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के पास है. भारत को इस तेल की जरूरत है. और इसी जरूरत को पूरी करने के ल‍िए वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भारत आ रही हैं. उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होगी. लेकिन क्‍या आपको पता है क‍ि वेनेजुएला का तेल यूं ही मार्केट में नहीं आ सकता, वो काफी भारी होता है. उसके ल‍िए एक जादुई तेल ‘नेफ्था’ की जरूरत होती है, और वो तेल भारत के पास भरपूर मात्रा में है. इसल‍िए भारत और वेनेजुएला के ल‍िए यह व‍िन व‍िन स‍िचुएशन होगी।  विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज  7 जून तक भारत दौरे पर रहेंगी. इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी और ऊर्जा, व्यापार, निवेश, दवा, स्वास्थ्य तथा परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी. उनके साथ वेनेजुएला सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी भारत आ रहे हैं।  दोनों एक दूसरे की जरूरत यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वेनेजुएला दुनिया भर में अपने तेल के लिए नए खरीदार तलाश रहा है. दूसरी तरफ भारत भी तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रूस से तेल आपूर्ति को लेकर भू-राजनीतिक चुनौतियां और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता ने नई दिल्ली को वैकल्पिक विकल्पों की तलाश के लिए प्रेरित किया है. ऐसे में भारत और वेनेजुएला की जरूरतें एक-दूसरे से मिलती हुई दिखाई दे रही हैं।  तेल है, लेकिन बेच नहीं पा रहा वेनेजुएला     आप जानकर हैरान होंगे कि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाला देश अपने तेल को बेचने के लिए संघर्ष कर रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह वेनेजुएला के कच्चे तेल की प्रकृति है. सऊदी अरब या खाड़ी देशों का अधिकांश तेल अपेक्षाकृत हल्का होता है. उसे निकालना, पाइपलाइन में भेजना और जहाजों में भरना आसान होता है. लेकिन वेनेजुएला का तेल बेहद भारी और गाढ़ा है।      विशेषज्ञों का कहना है कि उसका तेल कई मामलों में बिटुमेन जैसा व्यवहार करता है. यही कारण है कि उसे जमीन से निकालने, पाइपलाइन में बहाने और बंदरगाह तक पहुंचाने में बड़ी दिक्कत आती है. यानी वेनेजुएला के पास तेल तो बहुत है, लेकिन वह आसानी से बहने वाला तेल नहीं है. यही उसकी सबसे बड़ी चुनौती है. यहीं पर भारत के जादुई तेल यानी नेफ्था की जरूरत पड़ती है।  क‍ितना नेफ्था का प्रोडक्‍शन करता है भारत? भारत में रिफाइनरियां हर साल लगभग 18-20 मिलियन टन नेफ्था का उत्पादन करती हैं. नेफ्था खुद ही एक रिफाइंड पेट्रोलियम फ्रैक्शन होता है. रिफाइनरियों में इसे आगे प्रोसेस कर हाई-ऑक्टेन पेट्रोल, पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक जैसे एथिलीन, प्रोपिलीन और अन्य उत्पादों में बदला जाता है. आम तौर पर 1 टन नेफ्था से लगभग 0.7 से 0.9 टन तक पेट्रोल या अन्य हल्के ईंधन उत्पाद प्राप्त किए जा सकते हैं, हालांकि यह रिफाइनरी की तकनीक और कच्चे तेल की गुणवत्ता पर निर्भर करता है. भारत के कुल पेट्रोलियम उत्पाद उत्पादन में नेफ्था की हिस्सेदारी करीब 6-7% रहती है।  जादुई तेल है क्‍या? जादुई तेल यानी नेफ्था एक हल्का हाइड्रोकार्बन मिश्रण है, जो रिफाइनरियों में कच्चे तेल को प्रोसेस करने के दौरान प्राप्त होता है. इसका इस्तेमाल पेट्रोकेमिकल उद्योग, ईंधन मिश्रण और कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में किया जाता है.लेकिन वेनेजुएला के लिए नेफ्था की अहमियत कुछ और ही है. उसके भारी कच्चे तेल को बहने लायक बनाने के लिए उसमें नेफ्था मिलाया जाता है. यानी नेफ्था एक तरह का थिनर या डायल्यूएंट बन जाता है. यह भारी तेल को पतला करता है, जिससे उसे पाइपलाइन और टैंकरों के जरिए आसानी से ले जाया जा सके. अगर यह नेफ्था न मिले, तो वेनेजुएला के कई तेल क्षेत्रों से उत्पादन और निर्यात करना बेहद मुश्किल हो सकता है।  वेनेजुएला के ल‍िए मुश्क‍िल क्‍यों बड़ी? आमतौर पर तेल उत्पादक देश दूसरे देशों को तेल बेचते हैं. लेकिन वेनेजुएला की स्थिति अलग है. उसे अपना तेल निकालने और बेचने के लिए पहले दूसरे देशों से नेफ्था जैसे हल्के हाइड्रोकार्बन खरीदने पड़ते हैं. यानी जिस देश के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, वह अपने तेल को बाजार तक पहुंचाने के लिए हाइड्रोकार्बन आयात करने पर मजबूर है. यही वजह है कि नेफ्था की आपूर्ति वेनेजुएला के लिए सिर्फ एक व्यापारिक मुद्दा नहीं, बल्कि उसकी पूरी ऑयल इकोनॉमी की लाइफलाइन है।  भारत क्यों बन सकता है सबसे अहम साझेदार? भारत दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनिंग शक्तियों में शामिल है. देश में हर साल करोड़ों टन नेफ्था का उत्पादन होता है. गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में स्थित बड़ी रिफाइनरियां घरेलू जरूरतों के साथ-साथ निर्यात के लिए भी पर्याप्त मात्रा में नेफ्था तैयार करती हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाती हैं. यही कारण है कि भारत वेनेजुएला के लिए सिर्फ तेल खरीदने वाला ग्राहक नहीं, बल्कि ऐसा साझेदार बन सकता है जो उसके तेल उद्योग की सबसे बड़ी समस्या का समाधान भी दे सकता है. अगर भारत से नेफ्था की नियमित आपूर्ति बढ़ती है, तो वेनेजुएला का भारी तेल अधिक मात्रा में वैश्विक बाजार तक पहुंच सकता है।  भारत को क्या फायदा होगा? सबसे बड़ा फायदा ऊर्जा सुरक्षा का होगा. भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए किसी एक क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम पैदा करती है. वेनेजुएला के साथ मजबूत ऊर्जा संबंध भारत को एक अतिरिक्त स्रोत उपलब्ध करा सकते हैं. इसके अलावा भारतीय कंपनियों को वेनेजुएला के तेल और गैस क्षेत्रों में निवेश के अवसर भी मिल सकते हैं. यदि भारत नेफ्था एक्‍सपोर्ट करता है और बदले में लांगटर्म की डील म‍िलती है तो यह दोनों देशों के लिए फायदे का सौदा बन सकता है।   

बंगाल में महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’ होने के संकेत? ऋतब्रत बनर्जी की भूमिका पर बढ़ी चर्चा

  कोलकाता पश्चिम बंगाल की सत्ता बदलते ही ममता बनर्जी के सामने सियासी संकट गहराता जा रहा है. चुनाव में मिली करारी हार के बाद एक-एक करके टीएमसी के पत्ते झड़ते जा रहे हैं. टीएमसी के एक के बाद एक नेता बागी तेवर अपनाता जा रहा है. ममता बनर्जी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. टीएमसी से निष्कासित विधायक रि ऋतब्रत बनर्जी क्या अब टीएमसी के 'एकनाथ शिंदे' साबित होंगे?  साल 2022 का महाराष्ट्र में जब एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से बगावत कर उद्धव ठाकरे के हाथों से सरकार और सियासत दोनों ही छीन ली थी. अब ठीक वैसी ही सियासी स्क्रिप्ट अब पश्चिम बंगाल में लिखे जाने की सुगबुगाहट है. इसके केंद्र में टीएमसी से निष्कासित विधायक  ऋतब्रत बनर्जी हैं।   ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने बीती रात कोलकाता स्थित विधायक हॉस्टल में टीएमसी के कई विधायकों से मुलाकात की. टीएमसी के 80 विधायकों में से 60 विधायकों ने ममता बनर्जी की बैठक से दूरी बना ली थी. अब उन्हीं विधायकों से ऋतब्रत बनर्जी की मुलाकात ने बंगाल में सियासी हलचल बढ़ा दी है.  ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई बड़ा खेला होने जा रहा है?  टीएमसी में बगावत के बढ़ते आसार  बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की सियासी चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही है. टीएमसी के कार्यकर्ता से लेकर नेता तक का मोहभंग हो रहा है. ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर विरोध के सुर टीएमसी में तेज होते जा रहे हैं.  टीएमसीके कई नेता और विधायक पार्टी की इस हालत के लिए खुले तौर पर उन्हें ही दोषी ठहरा रहे हैं. वे उन पर भ्रष्टाचार, घमंड, परिवारवाद, सीनियर नेताओं को किनारे करने और I-PAC के प्रोफेशनल्स के ज़रिए पार्टी को अपनी जागीर की तरह चलाने का आरोप लगा रहे हैं।  टीएमसी के कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है. सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है. वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है.  टीएमसी में टूटने का सबसे खतरा वहीं से आ रहा है जहां से तृणमूल कांग्रेस खड़ी हुई थी, मतलब जमीनी स्तर से विरोध तेज हो गया है।  ममता बनर्जी ने रविवार को टीएमसी विधायकों की  पीशी-भाईपो की बुलाई थी, जिसमें 80 में से सिर्फ टीएमसी 20 विधायक ही शामिल हुए. इससे पहले विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है. कई टीएमसी नेता की बीजेपी के साथ बातचीत कर रहे हैं. कुछ लोग, जैसे फिल्म निर्माता और पूर्व विधायक राज चक्रवर्ती, चुनाव में हार के बाद पूरी तरह से राजनीति छोड़ चुके हैं. इस तरह टीएमसी से नेताओं को मोहभंग हो रहा है, जो ममता बनर्जी के लिए सियासी टेंशन का सबब बनता जा रहा है।   ऋतब्रत बनर्जी बनेंगे टीएमसी के 'शिंदे' टीएमसी के टिकट पर विधायक बने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिसके चलते ममता बनर्जी ने दोनों विधायकों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. अब इन्हीं दोनों विधायकों ने टीएमसी के साथ खेला करने की कवायद में जुट गए हैं.  टीएमसी के कई विधायकों के साथ  ऋतब्रत बनर्जी ने देर रात मुलाकात की है. इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि टीएमसी के भीतर एक नया समूह आकार ले सकता है।  विधायक हॉस्टल में  ऋतब्रत बनर्जी से मिलने वालों में पश्चिमी मिदनापुर की एक महिला विधायक भी शामिल थीं.  ऋतब्रत और संदीपन से मिलने वाले टीएमसी के एक विधायक के मुताबिक हम पार्टी तोड़कर कोई अलग दल बनाने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, हम टीएमसी के झंडे तले ही काम करेंगे. ऐसे में साफ है कि टीएमसी के अंदर कुछ सियासी खिचड़ी जरूर पक रही है.  टीएमसी से निष्कासित विधायक जिस तरह से एक्टिव हैं और अभिषेक पर पार्टी को हाईजैक करने का आरोप लगाया, उससे सियासत तेज हो गई है।   ऋतब्रत बनर्जी ने खोला सियासी मोर्चा  ऋतब्रत बनर्जी ने आजतक से बात करते हुएअभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को सीधे तौर पर चुनौती दी है. मुख्य मुद्दा पार्टी में IPAC के संबंध में जूनियर बनर्जी की भूमिका अहम थी. TMC विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया था कि निकाले गए ये दोनों विधायक पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने दक्षिण कोलकाता के एक होटल में कुछ विधायकों के साथ एक गुप्त बैठक की थी, बाद में ऋतब्रत ने इस आरोप से इनकार कर दिया।  अभिषेक बनर्जी की घटना ने बढ़ाई टेंशन अभिषेक बनर्जी को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा. वह सोनारपुर गए थे., उनके ऊपर अंडे और जूते फेंके गए। कल्याण बनर्जी ने अगले दिन आरोप लगाया कि उनके सिर पर एक पत्थर लगा था, लेकिन इन सबसे ऊपर, जहां भी वे गए, चोर, चोर के नारे लगे. इस तरह का दृश्य हर टीएमसी विधायक और सांसद को सियासी तौर पर चिंतित कर रहा है।  टीएमसी के कई नेताओं को डर सता रहा है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के साथ जुड़ाव उनका राजनीतिक करियर बर्बाद कर सकता है.  इसके चलते ही टीएमसी के नेता ममता बनर्जी की बैठक में शामिल नहीं हुए. इससे ममता बनर्जी की सियासी टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि जो विधायक बैठक में नहीं आए, लेकिन उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात की है. इसके चलते ही माना जा रहा है कि कोई बड़ा खेला होने जा रहा है।  कुणाल घोष की अपील डूबते जहाज न छोड़े टीएमसी के 80 विधायकों और 29 सांसदों में से आधे से ज्यादा (लगभग 40-45 विधायक और 15-18 सांसद) ममता बनर्जी से अलग होकर 'दो घास-फूल' वाले चुनाव चिह्न के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करते हैं, तो यह ममता बनर्जी और उनके भतीजे के पार्टी पर दावे को खारिज करने के लिए काफी हो सकता है. सोमवार को MLA कुणाल घोष ने टीएमसी नेताओं से हाथ जोड़कर गुज़ारिश की कि वे डूबते जहाज को छोड़कर न भागें, लेकिन ऐसे मुश्किल समय … Read more

जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून लागू हो, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश के 3 राज्यों ने पहले ही लागू कर दिया है। हमारी सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। शीघ्र ही मध्यप्रदेश भी देश का यूसीसी लागू करने वाला राज्य बन जाएगा। इसके लिए हमने उच्चतम न्यायालय की रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति मती रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीति गठित कर दी है। यह समिति जिला स्तर पर सभी वर्गों से उनकी राय ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को यूसीसी से पृथक रखा जाएगा। उन्हें अपने पारम्परिक रीति-रिवाज मानने की स्वतंत्रता होगी। गुजरात में भी इसी प्रकार का प्रावधान लागू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति योग्य है, तो सरकार जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर कार्य करती है। आज जनजातीय वर्ग से आने वाली मती द्रोपदी मुर्मु देश के राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में अव्वल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की चुनौती के दौर में प्रधानमंत्री डॉ. नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हमारी सरकार ने पर्यावरण और ईंधन को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदा है। अब वे ईवी से ही यात्रा करेंगे। यह पर्यावरण अनुकूल वाहन (ईवी) ईंधन के संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी रोकने में कारगर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ग्रामीण आबादी को दूध उत्पादन, पशुपालन और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए हैं। गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़कों का विकास हुआ है। पिछले साल सरकार ने औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। प्रदेश के इंडस्ट्रियल पार्कों में यूनिट्स खुल गईं और लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस -2025) में 30 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे। इसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर नजर आ रहा है। यह राज्य सरकार का बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर 2002-03 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या केवल 5 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 7 नए मेडिकल कॉलेज तो हमने पिछले 2 साल के दौरान ही प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय खरगोन में टंट्या मामा, गुना में तात्या टोपे और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर शुरू किए गए हैं। सभी 55 जिलों में नए पीएम एक्सीलेंस कॉलेज भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कृषि संकाय की भी पढ़ाई कराई जा रही है। प्रदेश में नए-नए सांदीपनि विद्यालय तेजी से खोले जा रहे हैं। प्रदेश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्लोबल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (जीआईएस) पहले केवल इंदौर तक सीमित थी। हमारी सरकार ने इसे पहली बार राजधानी (भोपाल) में आयोजित किया। इससे पहले राज्य में संभाग और जिला स्तर पर रीवा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, कटनी जैसे स्थानों पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर अंचल की अलग-अलग विशेषता है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 नीतियां लागू कीं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में भारी उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई में देशभर से निवेश आया। कई कारखानों में उत्पादन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में आई औद्योगिक क्रांति से अब तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना आर्थिक सहायता 10 वर्ष तक देगी। अन्य श्रेणी के उद्योगों को आगे बढ़ने में भी सरकार पूरी मदद दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन अपने धर्म पर गर्व करने में क्या बुराई है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान बना रहा है। अब हमारी सरकारें माननीय न्यायालयों के निर्णयों को पूरे सदभाव और शांतिपूर्ण तरीके से लागू करा रही हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। प्रधानमंत्री  मोदी ने विरासत से विकास का घोष वाक्य दिया है। हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है। राजा भोज की कर्मस्थली धार में स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। यहां भोजशाला परिसर में ज्ञान की देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाकर स्थापित किया जाएगा। हम न्यायालय के निर्णय को लागू कराते हुए यहां विकास कार्यों को भी गति देंगे। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक पर्यटन से आर्थिक विकास को गति मिलती है और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। भोजशाला के विकास से धार में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बहनों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को प्रोत्साहन राशि की अब तक 36 किश्तें दी जा चुकी हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक करीब 55 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता लाड़ली बहनों को हम दे चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय संकल्प को पूरा करने के लिये मध्यप्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ विकसित मध्यप्रदेश @2047 के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है।  

गरीबों का हक छीनने, व्यापारियों को धमकाने और बेटी की इज्जत से खिलवाड़ करने वालों को छोड़ेगी नहीं सरकार: सीएम योगी

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विकास और उद्यम के लिए सुरक्षा सर्वाधिक जरूरी है। सुरक्षा के बिना न सुशासन आ सकता है और न ही समृद्धि। 2017 के बाद से सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ आगे बढ़ी है। इस नीति से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। जीरो टॉलरेंस की नीति न मानने वाले जिस बोली-भाषा में समझेंगे, उसी में समझा दिया जाएगा, लेकिन किसी को नौजवानों के रोजगार पर डकैती नहीं डालने दी जाएगी।  सीएम योगी बुधवार को गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के सेक्टर-13 में 42.50 करोड़ रुपये की लागत से बने पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले और प्रदेश के दूसरे फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण तथा गीडा में सेवायोजित कामगारों के लिए ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवासीय परिसर का उद्घाटन करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने गीडा के विभिन्न सेक्टर्स के लिए करीब 208 करोड़ रुपये के 71 विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने ईडब्ल्यूएस व एलआईजी भवन के आवंटियों को प्रमाण पत्र वितरित किए। औद्योगिक भूमि के आवंटियों को भी मुख्यमंत्री के हाथों आवंटन पत्र प्राप्त हुए। सीएम ने नाइलिट से प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को भी प्रमाण पत्र प्रदान किए।  पाताल से भी खोजकर निकाल लाएंगे दुस्साहस करने वालों को अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद से यूपी ने सुरक्षा का एक मॉडल उपलब्ध कराया है। इससे औद्योगिक विकास हुआ और लाखों नौजवानों को रोजगार मिला। अकेले गीडा में पिछले कुछ वर्षों में 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है। सुरक्षा का माहौल बने बिना यह संभव नहीं था। सरकार ने तय किया है कि विकास की प्रक्रिया सतत जारी रहेगी, सुरक्षा सबको मिलेगी और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव सबको मिलेगा। पर, किसी ने गरीबों का हक छीनने की कोशिश की, व्यापारियों को धमकाने की कुत्सित प्रयास किया या बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करने का दुस्साहस किया तो सरकार छोड़ेगी नहीं। ऐसे लोगों को पाताल से भी खोजकर निकाल लाएंगे। यूपी में जीरो टॉलरेंस के भाव से यही कार्य किया जा रहा है।  सुरक्षा का माहौल बना तो मिले 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में बने सुरक्षा के माहौल से सरकार को 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनमें से 15 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव धरातल पर उतारे जा चुके हैं और 7.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव ग्राउंड ब्रेकिंग के लिए तैयार हैं। बड़े पैमाने पर हुए निवेश से लाखों लोगों को नौकरी और रोजगार मिला है। एमएसएमई को प्रोत्साहन मिलने से 3 करोड़ लोगों को उनके गांव-क्षेत्र में ही रोजगार प्राप्त हुआ है।  हर जिले के नौजवान को मिली सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध पर जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ ही सरकार ने भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ भी जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इसका परिणाम है कि प्रदेश में 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी गईं हैं। प्रदेश के सभी जिलों के युवाओं को सरकारी नौकरी मिली हैं। प्रदेश में सरकारी नौकरियों में भर्ती के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।  अच्छी सरकार से ही बेहतरीन उपलब्धि संभव सीएम योगी ने कहा विकास, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में बेहतरीन उपलब्धि तभी संभव है, जब अच्छी सरकार आती है। अच्छी सरकार तब बनती है, जब जनता अच्छे जनप्रतिनिधि चुनती है। 2014 में जनता ने जब नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया तो उनके नेतृत्व में भारत के प्रति दुनिया का दृष्टिकोण बदला है। नए भारत में विकास के साथ विरासत का संरक्षण हो रहा है। पीएम मोदी के आह्वान पर 2017 में यूपी की जनता ने भाजपा की सरकार बनाई तो इस सरकार ने जनता की आकांक्षाओं से दो कदम आगे बढ़कर कार्य किया। मुख्यमंत्री ने अच्छे जनप्रतिनिधि के चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जनता ने रविकिशन को सांसद, विपिन सिंह और प्रदीप शुक्ल जैसे नेताओं को विधायक चुना तो विकास प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी।  9 वर्षों में बदल गया है गीडा   मुख्यमंत्री ने गीडा में हो रहे औद्योगिक विकास पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बीते 9 वर्षों में गीडा बदल गया है। यहां के उद्योगों में स्टील, पाइप, अच्छे कपड़े बन रहे हैं। पेप्सिको की फ्रेंचाइजी वरुण बेवरेज व बिसलेरी की भी यूनिट लगी है। नए-नए उद्योग आ रहे हैं। अच्छी डिस्टिलरी लग रही है। गीता प्रेस का संस्थान भी यहां बन रहा है। उद्योग केवल उत्पादन के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे रोजगार भी ला रहे हैं। गीडा के नाइलिट सेंटर से मिल रही ट्रेनिंग युवाओं को यहीं रोजगार उपलब्ध होने की गारंटी भी है। धुरियापार क्षेत्र तक हो रहा गीडा का विस्तार मुख्यमंत्री ने कहा कि गीडा का विस्तार अब धुरियापार क्षेत्र तक हो रहा है। धुरियापार क्षेत्र में 7 हजार एकड़ में इंडस्ट्रियल टाउनशिप बन रही है। वहां सीमेंट, पेंट की फैक्ट्री आ रही है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस से उद्योग जगत को भी बड़ा फायदा हो रहा है। इससे गोरखपुर से लखनऊ जाने में लगने वाला समय 7-8 घंटे से कम होकर तीन-साढ़े तीन घंटे रह गया है। फ्लैटेड फैक्ट्री एमएसएमई के लिए ‘रेडी टू यूज’ का बेहतरीन मॉडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फ्लैटेड फैक्ट्री को एमएसएमई यूनिट्स के लिए रेडी टू यूज यानी प्लग एंड प्ले का बेहतरीन मॉडल बताया। इसे गीडा का अभिनव प्रयास बताते हुए सीएम ने कहा कि जिन युवाओं के पास जमीन खरीदने और फैक्ट्री लगाने का पैसा नहीं है, वे सीधे यहां आकर काम शुरू कर सकते हैं। छोटी पूंजी लगाकर भी यहां अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। रेडीमेड गारमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक और अन्य एमएसएमई यूनिट्स के लिए यह बेहतरीन मॉडल साबित होगा। उन्होंने दूरदराज से आकर गीडा में सेवायोजित कामगारों के लिए सस्ते दर पर बेहतरीन आवासीय सुविधा देने के लिए भी गीडा की तारीफ की। सीएम योगी के नेतृत्व में इंडस्ट्रियल हब बन रहा गीडा: रविकिशन समारोह में सांसद रविकिशन ने कहा कि सीएम योगी के नेतृत्व में गीडा बड़ा इंडस्ट्रियल हब बन रहा है। यह युवाओं के रोजगार के लिए बड़ा केंद्र बन रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ल ने कहा कि सीएम योगी … Read more

LPG बाजार में बड़ा बदलाव, अमेरिका बना भारत का बड़ा सप्लायर; खाड़ी देशों की बढ़ी टेंशन

  नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत की ऊर्जा खरीद व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है. इसी बदलाव का असर है कि मध्य-पूर्वी देशों से भारी मात्रा में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) आयात करने वाला भारत अमेरिका से यह पेट्रोलियम उत्पाद खरीद रहा है. अब अमेरिका पारंपरिक खाड़ी देशों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है. वहीं, रूस भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिबंधों के बावजूद, भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है।  डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 55% रही, जबकि फरवरी में यह केवल 14% थी. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह अमेरिका इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करना है।  28 फरवरी को दोनों देशों ने ईरान पर हमला कर दिया था जिसके बाद शुरू हुए युद्ध ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में भारी तबाही मचाई. इस युद्ध ने एनर्जी सप्लाई चेन पर बहुत बुरा असर डाला क्योंकि ईरान ने तेल-गैस की सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया. फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बेहद नाजुक युद्धविराम कायम है और युद्ध खत्म करने के लिए कोई भी बातचीत अपने आखिरी मुकाम तक नहीं पहुंच पा रही है।  LPG के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर भारत अब अमेरिका की तरफ मुड़ा  भारत पारंपरिक रूप से अपनी अधिकांश LPG जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहा है. लेकिन युद्ध के कारण संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे देशों से आयात बहुत कम हुआ है. भारत के LPG आयात में इन देशों की संयुक्त हिस्सेदारी फरवरी में 81% से घटकर मई में केवल 16% रह गई।  मई में अमेरिका से भारत को LPG निर्यात 73% बढ़कर लगभग 6.66 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया. इससे खाड़ी क्षेत्र से आने वाले कार्गो में आई भारी गिरावट की भरपाई करने में मदद मिली।    सप्लाई में आई रुकावट के चलते भारत को घरेलू स्तर पर भी सख्त कदम उठाने पड़े. सरकार ने हाल ही में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए LPG सिलेंडर खरीदने पर रोक लगा दी और कुछ उद्योगों को LPG की सप्लाई कम कर दी ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।  घरेलू उत्पादन में बढ़ोतरी ने भी स्थिति को कुछ हद तक संभालने में मदद की है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का LPG उत्पादन संघर्ष से पहले लगभग 35,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन था जो बढ़कर 50,000-52,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है. इससे आयात पर निर्भरता कुछ कम हुई है लेकिन देश की कुल मांग का लगभग 60% हिस्सा अब भी आयात से पूरा होता है।  तेल आयात पर भी ईरान संघर्ष का असर भारत के तेल आयात में भी संघर्ष का असर देखने को मिला है. मई में रूस से कच्चे तेल का आयात 24% बढ़कर 19.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो भारत के कुल लगभग 49 लाख बैरल प्रतिदिन के कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा है।  केप्लर के विश्लेषकों का कहना है कि रूस से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों को सही कीमत पर मिल रहा है. भारत को यह तेल ऐसे वक्त में मिल रहा है जब खाड़ी देशों से सप्लाई लगभग रुकी हुई है।  इसके साथ ही भारत ने वेनेजुएला और ओमान से भी खरीद बढ़ाई है. मई में ओमान से कच्चे तेल का आयात 179% बढ़ा, जो यह दिखाता है कि भारतीय रिफाइनरियां ऐसे सप्लायरों की ओर रुख कर रही हैं जिन्हें समंदर के जरिए देश में लाना आसान हो। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्षों में खेती-किसानी के क्षेत्र में आए परिवर्तन के कारण अन्नदाता किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। किसान समाज व राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ते हुए आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त कर रहे हैं। देश की सबसे अच्छी उर्वरा भूमि और सर्वाधिक सिंचित भूमि (86 फीसदी) यूपी में है। रबी-खरीफ व जायद की तीनों फसलों से किसानों को अच्छा दाम भी मिल रहा है। यह किसानों की मेहनत का परिणाम है कि यूपी का बीमारूपन दूर हुआ और राज्य समृद्ध बना। किसानों ने कृषि विकास दर को 8 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुधवार को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित गोरखपुर, आजमगढ़ व बस्ती की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ करने के उपरांत उपस्थित जन-समूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को  सम्मानित किया और उन्हें ट्रैक्टर की चाबी व केसीसी प्रमाण पत्र प्रदान किए। संगोष्ठी का संचालन चारूशीला सिंह ने किया। 2005-2014 के बीच देश में अनगिनत किसानों ने की आत्महत्या सीएम योगी ने कहा कि 12 वर्ष पहले किसान आत्महत्या पर मजबूर थे। 2005 से 2014 के बीच देश में अलग-अलग स्थानों पर अनगिनत किसानों ने आत्महत्या की थी। इसके पीछे भी त्रासदी थी, उनके लिए अच्छी क्वालिटी के बीज, उचित एमएसपी, आपदा से बचाव के उपयुक्त प्रबंध नहीं थे। लागत अधिक-उत्पादन कम था। यदि किसान ने मेहनत से अन्न उत्पादन किया भी तो उसके क्रय की उचित व्यवस्था नहीं थी।  धरती माता के स्वास्थ्य का भी परीक्षण करा रही सरकार सीएम ने कहा कि पहली बार कोई सरकार कह रही है कि जैसे हम अपने उत्तम स्वास्थ्य के लिए हेल्थ चेकअप करवाते हैं, ऐसे ही धरती माता के स्वास्थ्य का भी परीक्षण होना चाहिए। पीएम मोदी ने 2014 से अनिवार्य रूप से फ्री में सॉइल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना लागू हुईं। दलहन-तिलहन आयात में सरकार को लाखों-करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन किसानों को अच्छे बीज देकर दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विशेष अभियान प्रारंभ किया।  हमारी सरकार ने किसानों के लिए उठाए अभूतपूर्व कदम सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ दिया गया, जिससे अन्नदाता किसान साहूकार के सामने हाथ नहीं फैलाए और न ही कर्ज से दबे। मंडी में व्यापक रिफॉर्म किया गया। प्रदेश में जब डबल इंजन सरकार आई तो उसने भी इसे मजबूती से बढ़ाया। किसानों के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए। 2017 में पहली कैबिनेट मीटिंग में कर्ज से दबे किसानों को राहत दी गई। फसल ऋण की विशेष योजना प्रारंभ की गई। प्रयास रहा कि किसानों को लागत का डेढ़ गुना दाम प्राप्त हो। जगह-जगह सरकारी क्रय केंद्र खोलकर उनकी उपज को खरीदा गया। दशकों से लंबित परियोजनाएं पूरी हुईं  सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में दशकों से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को प्रारंभ करने के साथ बाणसागर, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना, बुंदेलखंड आदि से जुड़ी परियोजनाओं को पूरा कराया गया। 24 लाख हेक्टेयर भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सरकार निजी नलकूप में भी किसानों को फ्री बिजली देती है और इसके लिए 3000 करोड़ रुपये का भुगतान भी करती है।  यूपी ने खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को किया प्राप्त  सीएम ने कहा कि यूपी क्षेत्रफल में देश में चौथे स्थान पर है, इसके बावजूद खाद्यान्न, चीनी, एथेनॉल, आलू, सब्जी व दुग्ध का सर्वाधिक उत्पादन कर रहा है। सरकार के साथ किसानों की मेहनत का परिणाम सामने है। सरकार रबी, खरीफ के समय गोष्ठी के माध्यम से किसानों को बीज, तकनीक, शासन की योजनाओं के बारे में बताती है और उनके सुझावों/परेशानियों की जानकारी लेती है।  आत्मनिर्भरता का लक्ष्य प्राप्त करने का माध्यम बनेगा किसान मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करने का माध्यम बनेगा। सरकार का काम है कि किसान शोषण-अभाव से मुक्त हो, उसके सामने चुनौती न हो, उनके कार्यों में बाधाओं को हटाया जाए। उन्हें अच्छा बीज मिल सके, सुविधा संपन्न करने के साथ उन्हें मंडी से जोड़ा जाए और समय पर उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति की जाए। उत्तर प्रदेश में यह सब संभव हो पा रहा है। यूपी के पास देश की कुल कृषि योग्य भूमि में केवल 11 फीसदी भूमि है, लेकिन वह कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21 फीसदी योगदान कर रहा है। यूपी की आबादी देश की कुल जनसंख्या का 16-17 फीसदी है। खाद्यान्न, सब्जी, औद्यानिक फसलों में यूपी देश को लीड कर रहा है, इसके बावजूद कई चुनौतियां भी हैं। परिजनों को 24 घंटे में पांच लाख की सहायता सीएम ने कहा कि यूपी में किसानों, सह किसानों (बटाईदारों) व उनके पारिवारिक सदस्यों को भी किसी हादसे की स्थिति में मुख्यमंत्री कृषक बीमा दुर्घटना योजना का लाभ दिया गया है। इस पर सरकार हर वर्ष एक हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। किसान अतिवृष्टि, अनावृष्टि, लू, आकाशीय बिजली, वन्यजीव संघर्ष का शिकार हुआ तो सरकार 24 घंटे के अंदर पांच लाख रुपये की सहायता परिवार को उपलब्ध कराती है। लखनऊ में सीड पार्क, कुशीनगर में कृषि विश्वविद्यालय का निर्माण जारी सीएम योगी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के नाम पर लखनऊ में सीड पार्क तथा कुशीनगर में कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का निर्माण किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र उत्तम तकनीक व बीज की क्वालिटी के बारे में जानकारी के माध्यम बने हैं। इसके बाद भी बहुत कुछ किए जाने की आवश्यकता है। जितना किसानों ने उत्पादन बढ़ाया है, इसमें अभी लगभग तीन गुना और वृद्धि कर सकते हैं। हमें बीज की क्वालिटी, तकनीक और समय पर खेतीबाड़ी-फसल चक्र को अपनाना पड़ेगा। इससे उत्पादन बढ़ेगा। किसान इस दिशा में कार्य प्रारंभ करें। सीएम ने चुनौतियों पर भी चर्चा की सीएम ने चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि उत्पादन का पहला चरण यह है कि किसानों को सही बीज प्राप्त हों। सीएम ने क्वालिटी पर जोर देते हुए कहा कि कितना भी उत्पादन कर लें, यदि उत्पाद एक्सपोर्ट के लायक नहीं तैयार किया गया तो उचित मुनाफा नहीं होगा। आम का यहां 40-50 … Read more

केन्द्रीय मंत्रि-परिषद् ने सड़क विकास के लिए मध्यप्रदेश में 2 बड़ी परियोजनाओं को दी मंजूरी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय मंत्रि-परिषद् के आर्थिक मामलों की समिति द्वारा मध्यप्रदेश में 4,415.60 करोड़ रूपए की लागत वाली 2 सड़क निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी का आभार माना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में डबल इंजन की सरकार है, इसलिए यहां विकास की रफ्तार पर भी दोगुनी है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की इस महत्वपूर्ण सौगात से प्रदेश के जनजातीय बहुल जिले बैतूल, खंडवा, खरगौन और बड़वानी के समग्र विकास को तेज गति मिलेगी। साथ ही हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। बुधवार को नई दिल्ली में हुई केन्द्रीय मंत्रि-परिषद् की बैठक में एनएच-347बी के हिवरखेड़ी-रोशनी-आशापुर-रुधी खंड पर मौजूदा इंटरमीडिएट लेन को पक्के शोल्डर स्टैंडर्ड के साथ 2-लेन की सड़क (125.01 किमी) में अपग्रेड करने तथा एनएच-347बी के देशगांव-जुलवानिया खंड (108.643 किमी) को हाइब्रिड एन्युटी मोड अन्तर्गत 2-लेन से 4-लेन सड़क में विस्तारित करने की मंजूरी दे दी गई है। कुल 233.653 किमी लंबी इस परियोजना पर करीब 4,415.60 करोड़ रूपए की लागत आएगी। इस परियोजना में खरगौन जिले में 16.20 किमी लंबा एक ग्रीनफील्ड बायपास भी विकसित किया जाएगा। यह उन्नत कॉरिडोर मध्यप्रदेश में बेहतर रोड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा और 6 पीएम गति-शक्ति आर्थिक नोड्स को जोड़ते हुए मल्टीमॉडल एकीकरण को भी बढ़ावा देगा। यह परियोजना मध्यप्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी। उन्नत कॉरिडोर 6 पीएम गति-शक्ति आर्थिक केंद्रों (1 कपड़ा क्लस्टर, 2 मेगा फूड पार्क, 1 औद्योगिक पार्क, 2 सुपर थर्मल पावर प्लांट), 5 सामाजिक केंद्रों (2 आकांक्षी जिले – खंडवा और बड़वानी, 3 जनजातीय जिले – बेतूल, खंडवा, खरगोन) और 5 लॉजिस्टिक्स केंद्रों (2 प्रमुख रेलवे स्टेशन, 2 हवाई अड्डे, 1 एमएमएलपी) से जुड़कर बहु-मोडल एकीकरण को बढ़ावा देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी।  

सोना-चांदी के दाम में बड़ा बदलाव, चांदी में आई गिरावट; चेक करें आज का रेट

इंदौर  सोना-चांदी की कीमतों में फिर गिरावट आई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दोनों कीमती धातुएं बुधवार को बाजार ओपन होने के साथ ही फिसल गईं. चांदी का वायदा भाव एक झटके में करीब 2000 रुपये कम हो गया, तो वहीं सोने के भाव में भी कमी आई है. इस ताजा गिरावट के बाद अब 1 किलो चांदी अपने हाई लेवल से 1.92 लाख रुपये सस्ती हो गई है. आइए जानते हैं 20, 22 और 24 कैरेट सोने का क्या रेट है?  चांदी का भाव तेजी से टूटा  एमसीएक्स सिल्वर प्राइस पर नजर डालें, तो सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को वायदा कारोबार की शुरुआत रेड जोन में हुई. 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली चांदी का भाव अपने पिछले बंद 2,66,707 रुपये प्रति किलो की तुलना में एक झटके में कम होकर 2,64,760 रुपये पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो 1 Kg Silver Price 1947 रुपये कम हो गया।  चांदी ने इसी साल जनवरी महीने में 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का आंकड़ा पार किया था और लाइफ टाइम हाई लेवल 4,57,328 रुपये छुआ था. इसके बाद इस कीमती धातु का भाव लगातार क्रैश होता चला गया. तमाम उतार-चढ़ाव के बाद अब ताजा गिरावट के बाद वायदा चांदी हाई से 1,92,568 रुपये प्रति किलो तक सस्ती मिल रही है।  सोना भी चांदी के साथ टूटा  सिर्फ चांदी ही नहीं, बल्कि एमसीएक्स पर सोने की कीमत में भी गिरावट आई है और ये कीमती धातु 1.60 लाख रुपये से नीचे आ गई है. MCX Gold Rate पर नजर डालें, तो बीते कारोबारी दिन ये कीमती पीली धातु 1,59,346 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुई थी, जबकि बुधवार को खुलते ही 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला 10 Gram 24 Karat Gold गिरकर 1,58,780 रुपये पर आ गया।  सोने के हाई लेवल से वर्तमान रेट की तुलना करें, तो अब ये और भी सस्ता मिल रहा है. एमसीएक्स पर इस एक्सपायरी वाले वायदा गोल्ड का लाइफ टाइम हाई लेवल 2,04,375 रुपये है और यहां से अब सोना 45,595 रुपये सस्ता मिल रहा है।  घरेलू मार्केट में सोना-चांदी का हाल एमसीएक्स के अलावा अगर घरेलू मार्केट में सोना-चांदी के रेट में आए चेंज की बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, तो 24 कैरेट सोने का दाम 1,56,294 रुपये से कम होकर 1,55,264 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है. वहीं चांदी की कीमत 2,65,300 रुपये प्रति किलो की तुलना में 3,300 रुपये कम होकर 2,62,000 रुपये पर आ गया. अलग-अलग क्वालिटी के गोल्ड रेट की बात करें, तो… गोल्ड क्वालिटी गोल्ड रेट/10 ग्राम 24 Karat Gold 1,55,264 रुपये/10 ग्राम 22 Karat Gold 1,54,642 रुपये/10 ग्राम 20 Karat Gold 1,42,222 रुपये/10 ग्राम 18 Karat Gold 1,16,448 रुपये/10 ग्राम 14 Karat Gold 90,829 रुपये/10 ग्राम ध्यान रहे, घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की ज्वेलरी खरीदने पर ग्राहक को आईबीजेए रेट्स के साथ ही मेकिंग चार्ज और इस पर लागू जीएसटी भी देना होता है, जिसके जुड़ने से इनकी कीमतों में बढ़ोतरी हो जाती है।