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भोपाल के बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय को मिला नया नाम, जानें ‘मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी’ रखने की वजह

भोपाल  बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में विश्वविद्यालय का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। प्रस्ताव अब अंतिम निर्णय के लिए राज्य शासन को भेजा जाएगा। शासन की स्वीकृति मिलने के बाद ही नाम परिवर्तन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।  राजा भोज की विरासत का दिया गया हवाला बैठक में राजा भोज के ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रस्ताव के समर्थकों का कहना था कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और बौद्धिक विरासत में राजा भोज का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय को नई पहचान देने की पहल की गई है। राजा भोज की विरासत का दिया गया हवाला प्रस्ताव में राजा भोज के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान का उल्लेख किया गया. प्रस्ताव में कहा गया, 'राजा भोज की तुलना में बरकतउल्ला भोपाली के भोपाल निवासी होने से अधिक इस क्षेत्र के लिए किसी प्रकार का योगदान नजर नहीं आता है'. इसी तर्क के आधार पर विश्वविद्यालय का नाम बदलने की सिफारिश की. प्रस्ताव में ये भी कहा गया कि भोपाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को देखते हुए विश्वविद्यालय का नाम "वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय" किया जाना अधिक उपयुक्त होगा।  कौन थे बरकतउल्ला भोपाली? बता दें कि मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली भोपाल में जन्मे भारत के प्रमुख क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों में से थे. उन्होंने भारत के बाहर रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को वैश्विक समर्थन दिलाने का प्रयास किया. इसके अलावा गदर आंदोलन से जुड़े और भारतीय क्रांतिकारियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बने. वहीं 1927 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में उनका निधन हुआ था।  राजा भोज ने लिखे थे 80 ग्रंथ राजा भोज द्वारा लगभग अस्सी ग्रंथ लिखे गए, जिनमें से 27 ग्रंथ आज भी उपलब्ध है. राजा भोज ने केवल स्वयं ग्रंथ नहीं लिखे, बल्कि अपनी राजधानी धारा (धार) को ज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र बनाया था. उन्होंने वहां 'भोजशाला' (सरस्वती मंदिर) की स्थापना की, जो उस दौर का एक महान विश्वविद्यालय था. भोज शाला में उनके द्वारा स्थापित की गई वाग देवी की प्रतिमा जो आज इंग्लैंड के संग्रहालय में रखी गई है. उन्हें विद्या की आराध्य देवी सरस्वती के रूप में 1000 वर्ष तक पूजी गई।  शासन की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि कार्यपरिषद से प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे शासन के पास भेजा जाएगा। आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। अंतिम फैसला राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाएगा। अरबी-पर्शियन विभागों का होगा पुनर्गठन बैठक में शैक्षणिक ढांचे से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए। इसके तहत अरबी और पर्शियन विभागों को पुनर्गठित कर तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे अकादमिक गतिविधियों में बेहतर समन्वय और अध्ययन के नए अवसर विकसित होंगे। बीएड कॉलेजों पर सख्ती कार्यपरिषद की बैठक में बीएड कॉलेजों के निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं पर भी चर्चा हुई। करीब 30 कॉलेजों में कमियां मिलने के बाद संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि नियमों के पालन को लेकर आगे भी सख्ती जारी रहेगी। 1988 में मिला था 'बरकतउल्लाह' नाम भोपाल के इस प्रमुख उच्च शिक्षा केंद्र की स्थापना साल 1970 में 'भोपाल विश्वविद्यालय' के रूप में हुई थी। इसके बाद, मौलाना बरकतउल्लाह के देश की आजादी में दिए गए अद्वितीय योगदान को सम्मान देने के लिए साल 1988 में इसका नाम बदलकर 'बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय' किया गया था। 1854     भोपाल में महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्लाह का जन्म हुआ। 1915     काबुल (अफगानिस्तान) में बनी भारत की पहली अस्थायी सरकार में मौलाना बरकतउल्लाह प्रधानमंत्री बने। 1970     भोपाल में इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की स्थापना 'भोपाल विश्वविद्यालय' के नाम से हुई। 1988     विश्वविद्यालय का नाम बदलकर क्रांतिकारी मौलाना बरकतउल्लाह के नाम पर रखा गया। 2026 (अब)     कार्य परिषद की बैठक में नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' करने का प्रस्ताव पास हुआ। क्या है नए नाम 'वाग्देवी भोजपाल' का मतलब? विश्वविद्यालय को दिया गया नया नाम 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' इसके ऐतिहासिक और प्राचीन स्वरूप को दर्शाता है। इसमें शामिल 'वाग्देवी' शब्द ज्ञान, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का प्रतीक है। वहीं 'भोजपाल' शब्द भोपाल के प्राचीन इतिहास और राजा भोज के काल से सीधा संबंध जोड़ता है। नाम परिवर्तन पर उठा विरोध का स्वर बैठक में नाम परिवर्तन के प्रस्ताव का विरोध भी सामने आया। कुछ सदस्यों ने स्वतंत्रता सेनानी बरकतउल्लाह भोपाली के योगदान का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय का मौजूदा नाम बरकरार रखने की बात कही। उनका तर्क था कि बरकतउल्लाह भोपाली का स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इसलिए उनके नाम से जुड़े संस्थान की पहचान कायम रहनी चाहिए। कार्यपरिषद के इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में बहस शुरू हो गई है। अब सभी की नजर राज्य शासन के निर्णय पर टिकी है, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगनी है। 

सीएम योगी के सख्त निर्देश पर एक्शन, 761.41 एकड़ जमीन फिर ग्राम सभा के नाम दर्ज होगी

सीएम योगी के निर्देश पर बड़ी कार्रवाईः भोगनीपुर की 761.41 एकड़ भूमि पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश   दो नामी कंपनियों के घोटाले का मामला, थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए वर्ष 2011 में हुआ था भूमि आवंटन   थर्मल पावर प्लांट बनाने के बजाय कंपनियों ने बिना अनुमति बैंकों में गिरवी रख दी थी आवंटित की गई जमीन कंपनियों ने न तो थर्मल पावर प्लांट बनाया और न ही बैंकों का 400 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चुकाया तत्कालीन अपर जिलाधिकारी और कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत से कंपनियों ने लिया था ऋण  भ्रष्टाचार के विरुद्ध योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का असर: नीलामी रुकी, मुकदमा हुआ, अब जमीन भी वापस   कानपुर देहात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप उत्तर प्रदेश में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भोगनीपुर भूमि प्रकरण में बड़ा आदेश हुआ है। जिलाधिकारी कानपुर देहात कपिल सिंह की जांच रिपोर्ट और सिफारिश पर मंडलायुक्त कानपुर के. विजयेन्द्र पांडियन ने वर्ष 2011 में थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहीत लगभग 761.41 एकड़ भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।  भोगनीपुर क्षेत्र में 'हिमावत पावर लिमिटेड' और 'मैसर्स लैंको अनपरा पावर लिमिटेड' को थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए वर्ष 2011 में जमीन आवंटित की गई थी। कंपनियों ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया और बिना सरकार की अनुमति के इस सरकारी भूमि को बैंकों में बंधक रख दिया। इन कंपनियों ने तत्कालीन अपर जिलाधिकारी ओ.के. सिंह और कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत से 400 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण ले लिया लिया। कंपनियों ने न तो प्रोजेक्ट पूरा किया और न ही बैंकों का कर्ज चुकाया, जिसके बाद बैंकों ने इस कीमती भूमि को नीलाम करने की कोशिश शुरू कर दी थी। मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर तत्काल एक्शन जिलाधिकारी कपिल सिंह ने इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए जांच कराई। पता चला कि कंपनियों ने अफसरों के साथ मिलकर राजस्व को भारी क्षति पहुंचाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तत्काल एक्शन लेते हुए बैंकों द्वारा की जा रही नीलामी पर रोक लगवाई और इसे सरकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित कराया। इसके बाद भोगनीपुर की तहसीलदार प्रिया सिंह की तहरीर पर थाना मूसानगर में दोनों कंपनियों, संबंधित बैंकों और पूर्व एडीएम के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी कानपुर देहात के जिलाधिकारी कपिल सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर मंडलायुक्त कानपुर द्वारा भूमि आवंटन निरस्त करते हुए पुनर्ग्रहीत भूमि को पुनः ग्राम सभा के नाम दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं। वहीं, कमिश्नर के. विजयेन्द्र पांडियन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट से यह पूरी तरह साफ है कि जमीन लेने वाली कंपनियों ने पट्टा विलेख की अनिवार्य शर्तों का खुला उल्लंघन किया है।

जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रदेश में शीघ्र लागू होगी समान नागरिक संहिता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनजातीय समुदाय के रीति-रिवाजों को रखा जाएगा यूसीसी से अलग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव दो साल में प्रारंभ किये प्रदेश में 7 नए मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव नई दिल्ली में इंडिया@2047 कॉन्क्लेव में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश में एक निशान, एक विधान और एक कानून लागू हो, इस राष्ट्रीय भावना में कुछ भी गलत नहीं है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को देश के 3 राज्यों ने पहले ही लागू कर दिया है। हमारी सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। शीघ्र ही मध्यप्रदेश भी देश का यूसीसी लागू करने वाला राज्य बन जाएगा। इसके लिए हमने उच्चतम न्यायालय की रिटायर्ड जज न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीति गठित कर दी है। यह समिति जिला स्तर पर सभी वर्गों से उनकी राय ले रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के सभी जनजातीय समुदाय को यूसीसी से पृथक रखा जाएगा। उन्हें अपने पारम्परिक रीति-रिवाज मानने की स्वतंत्रता होगी। गुजरात में भी इसी प्रकार का प्रावधान लागू किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया@2047 कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति योग्य है, तो सरकार जाति, धर्म और समुदाय से ऊपर उठकर कार्य करती है। आज जनजातीय वर्ग से आने वाली श्रीमती द्रोपदी मुर्मु देश के राष्ट्रपति पद की शोभा बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि हम मध्यप्रदेश में यूसीसी लागू करने के लिए खुले विचार और खुले हृदय के साथ काम करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को सभी क्षेत्रों में अव्वल राज्य बनाने के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ईंधन की चुनौती के दौर में प्रधानमंत्री डॉ. नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर हमारी सरकार ने पर्यावरण और ईंधन को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) खरीदा है। अब वे ईवी से ही यात्रा करेंगे। यह पर्यावरण अनुकूल वाहन (ईवी) ईंधन के संरक्षण के साथ-साथ वायु प्रदूषण को भी रोकने में कारगर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कार्य कर रही है। ग्रामीण आबादी को दूध उत्पादन, पशुपालन और आधुनिक खेती से जोड़ने के लिए प्रयास किए गए हैं। गांव-गांव तक बिजली, पानी और सड़कों का विकास हुआ है। पिछले साल सरकार ने औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम किया। इसके परिणामस्वरूप प्रदेश में 10 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। प्रदेश के इंडस्ट्रियल पार्कों में यूनिट्स खुल गईं और लोगों को रोजगार के अवसर मिलने लगे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस -2025) में 30 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साइन हुए थे। इसमें से अब तक करीब 30 प्रतिशत निवेश धरातल पर नजर आ रहा है। यह राज्य सरकार का बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के विकास में शिक्षा का विशेष महत्व है। मध्यप्रदेश की स्थापना से लेकर 2002-03 तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या केवल 5 थी। अब इनकी संख्या बढ़कर 30 हो गई है। इनमें से 7 नए मेडिकल कॉलेज तो हमने पिछले 2 साल के दौरान ही प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय खरगोन में टंट्या मामा, गुना में तात्या टोपे और सागर में रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर शुरू किए गए हैं। सभी 55 जिलों में नए पीएम एक्सीलेंस कॉलेज भी संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में अब कृषि संकाय की भी पढ़ाई कराई जा रही है। प्रदेश में नए-नए सांदीपनि विद्यालय तेजी से खोले जा रहे हैं। प्रदेश के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ग्लोबल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव (जीआईएस) पहले केवल इंदौर तक सीमित थी। हमारी सरकार ने इसे पहली बार राजधानी (भोपाल) में आयोजित किया। इससे पहले राज्य में संभाग और जिला स्तर पर रीवा, ग्वालियर, नर्मदापुरम, कटनी जैसे स्थानों पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव (आरआईसी) आयोजित कर निवेशकों को आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर अंचल की अलग-अलग विशेषता है। राज्य सरकार ने उद्योग केंद्रित 18 नीतियां लागू कीं। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में भारी उद्योग, लघु उद्योग और एमएसएमई में देशभर से निवेश आया। कई कारखानों में उत्पादन शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल पर प्रदेश में आई औद्योगिक क्रांति से अब तक 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करने पर सरकार प्रति श्रमिक 5000 रुपए महीना आर्थिक सहायता 10 वर्ष तक देगी। अन्य श्रेणी के उद्योगों को आगे बढ़ने में भी सरकार पूरी मदद दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसी भी धर्म का अपमान करना हमारी संस्कृति नहीं है लेकिन अपने धर्म पर गर्व करने में क्या बुराई है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपना विशिष्ट स्थान बना रहा है। अब हमारी सरकारें माननीय न्यायालयों के निर्णयों को पूरे सदभाव और शांतिपूर्ण तरीके से लागू करा रही हैं। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। प्रधानमंत्री मोदी ने विरासत से विकास का घोष वाक्य दिया है। हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है। राजा भोज की कर्मस्थली धार में स्थापत्य कला के अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। यहां भोजशाला परिसर में ज्ञान की देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) की प्रतिमा को वापस लाकर स्थापित किया जाएगा। हम न्यायालय के निर्णय को लागू कराते हुए यहां विकास कार्यों को भी गति देंगे। उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक पर्यटन से आर्थिक विकास को गति मिलती है और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है। भोजशाला के विकास से धार में पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार बहनों के कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रदेश की सभी पात्र लाड़ली बहनों को प्रोत्साहन राशि की अब तक 36 किश्तें दी जा चुकी हैं। इस योजना की शुरुआत से अब तक करीब 55 हजार करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता लाड़ली बहनों को हम दे चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित … Read more

आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी

18 शहरों में 1725 एसी इलेक्ट्रिक बसें चलाएगी योगी सरकार जीसीसी मॉडल पर होगा संचालन, नगरीय परिवहन को मिलेगा आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल स्वरूप यात्रियों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं, निजी निवेश से बढ़ेगी सेवा गुणवत्ता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में कुल 24 प्रस्तावों को मिली स्वीकृति लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में  आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के 18 शहरों में ग्रॉस कॉस्ट कॉन्ट्रैक्ट (जीसीसी) मॉडल पर 1725 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य नगरीय परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, पर्यावरण अनुकूल और यात्री सुविधाओं के अनुरूप बनाना है। योजना के तहत आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृंदावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, शाहजहांपुर, सहारनपुर, वाराणसी तथा नोएडा (जेवर सहित) में 9 मीटर और 12 मीटर श्रेणी की कुल 1725 एसी ई-बसों का संचालन किया जाएगा। इन बसों का संचालन निजी ऑपरेटरों द्वारा जीसीसी मॉडल पर किया जाएगा और अनुबंध की अवधि वाणिज्यिक संचालन तिथि से 12 वर्ष होगी। कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कुल 24 प्रस्तावों को कैबिनेट की ओर से स्वीकृति दी गई। जीसीसी मॉडल के अंतर्गत बसों की खरीद, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, चालक एवं तकनीकी कर्मियों की उपलब्धता, बसों का संचालन और अनुरक्षण की पूरी जिम्मेदारी निजी ऑपरेटरों की होगी। निर्धारित मानकों के आधार पर उन्हें संचालन एवं अनुरक्षण शुल्क का भुगतान किया जाएगा। योजना के तहत 12 मीटर ई-बस पर 40 लाख रुपये तथा 9 मीटर ई-बस पर 35 लाख रुपये प्रति बस की दर से अनुदान भी दिया जाएगा। परियोजना के लिए आवश्यक डिपो निर्माण हेतु भूमि संबंधित नगर निगमों और नोएडा प्राधिकरण द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। किराया एवं उपयोगकर्ता शुल्क का निर्धारण राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इस योजना से सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और यात्रियों को आरामदायक, सुरक्षित एवं समयबद्ध परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही निजी निवेश के माध्यम से सरकारी वित्तीय भार कम होगा तथा प्रदेश के शहरों में आधुनिक शहरी परिवहन तंत्र को नई मजबूती मिलेगी। गौरतलब है कि अभी 15 नगर निगमों में नगरीय परिवहन निदेशालय द्वारा 743 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है। आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के विकास को मंजूरी प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये जारी होंगे  कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए धनराशि स्वीकृत करने और व्यय संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से प्रदेश में आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नगरीय विकास को नई गति मिलेगी। प्रदेश सरकार द्वारा तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा शहरों के नियोजित विस्तार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। योजना के संचालन के लिए 6 अप्रैल 2023 को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए गए थे। योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार द्वारा सीड कैपिटल के रूप में अधिकतम 20 वर्षों के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। इससे विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े पैमाने पर नगरीय अवसंरचना विकसित करने में सुविधा मिलेगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसी के अंतर्गत आगरा, बरेली व प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास हेतु संबंधित अभिकरणों को कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है। इसके सापेक्ष प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान करते हुए धनराशि अवमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु पर मुआवजा नीति को मंजूरी आश्रितों को समयबद्ध व त्वरित सहायता होगी सुनिश्चित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में मृतक बंदियों के आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को मुआवजा भुगतान के लिए "उत्तर प्रदेश बंदी मृत्यु एवं मुआवजा भुगतान नीति" बनाए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। नई नीति का उद्देश्य बंदियों के मानवाधिकारों की रक्षा, कारागार प्रशासन में पारदर्शिता तथा पीड़ित परिवारों को समयबद्ध राहत सुनिश्चित करना है। वर्तमान में बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली की संस्तुतियों के आधार पर मुआवजा भुगतान की व्यवस्था प्रचलित है। हालांकि इस प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर अनुमोदन और औपचारिकताओं के कारण मृतक बंदियों के आश्रितों को मुआवजा मिलने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग जाता था। इसी समस्या के समाधान के लिए योगी सरकार ने एक स्पष्ट और संस्थागत नीति बनाने का निर्णय लिया है। नई नीति के तहत कारागारों में निरुद्ध बंदियों की अप्राकृतिक मृत्यु होने पर उनके आश्रितों अथवा निकटस्थ परिजनों को निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान अधिक त्वरित और सुव्यवस्थित ढंग से किया जा सकेगा। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे, जिससे सभी मामलों में एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित हो सके। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्रों के विनियमतीकरण को मंजूरी महायोजना विहीन क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति के लिए बनेगी एसओपी  योगी कैबिनेट ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत किए गए मानचित्रों के विनियमतीकरण तथा विकास क्षेत्र, विस्तारित विकास क्षेत्र एवं विनियमित क्षेत्रों में, जहां अभी महायोजना तैयार नहीं है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। इस निर्णय से लंबे समय से लंबित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विकासात्मक समस्या का समाधान होगा। विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा पूर्व में स्वीकृत किए गए मानचित्रों की वैधता को लेकर जो प्रश्न उठ रहे थे, उन्हें विनियमतीकरण के माध्यम से दूर किया जा सकेगा। इससे आम नागरिकों, भू-स्वामियों और निर्माणकर्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार जिन विकास क्षेत्रों, विस्तारित विकास क्षेत्रों अथवा विनियमित क्षेत्रों की महायोजना अभी तैयार नहीं हुई है, वहां मानचित्र स्वीकृति के लिए एक स्पष्ट और … Read more

सेंसेक्स-निफ्टी पर बिकवाली का दबाव जारी, गिरावट के बीच बाजार ने दिखाई वापसी

मुंबई  शेयर मार्केट में गुरुवार को एक बार गिरावट आई और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स रेड जोन में खुले. लेकिन खास बात ये रही है कि तेज गिरावट लेकर खुलने के कुछ ही मिनटों में रिकवरी भी जोरदार देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ओपनिंग के साथ करीब 500 अंक फिसल गया, लेकिन कुछ देर में ही गिरावट की रफ्तार धीमी पड़ गई. कुछ ऐसा ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी इंडेक्स के साथ ही देखने को मिला है।  सेंसेक्स-निफ्टी की बदली-बदली चाल  गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होते ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,346 की तुलना में गिरकर 73,935 पर खुला और फिर अचानक फिसलकर 73,807 के लेवल पर आ गया. हालांकि गिरावट की तेज रफ्तार कुछ ही देर बाद धीमी पड़ गई और ये 30 शेयरों वाला इंडेस्क 200 अंक के आसपास फिसलकर कारोबार करता हुआ नजर आया।  NSE Nifty की बात करें, तो ये पिछले बंद 23,405 के मुकाबले गिरावट लेकर 23,282 पर ओपन हुआ और फिसलते हुए कुछ ही मिनटों में 23,247 तक चला गया. इसके बाद इसमें भी सुधार आया और खबर लिखे जाने तक 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स सिर्फ 80 अंक फिसलकर 23,322 पर ट्रेड कर रहा था।  शुरुआती कारोबार में निफ्टी पर Coal India, Adani Enterprises, Grasim, ONGC, Adani Ports तेज बढ़त के साथ ओपन हुए, तो वहीं Infosys, HCL Tech, Cipla, Eicher Motors और M&M के शेयरों ने रेड जोन में कारोबार की शुरुआत की।  बुधवार को ऐसा था बाजार का हाल  बीते कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिली थी. बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 74,649 की तुलना में गिरकर 74,507 पर खुला था और फिर देखते ही देखते क्रैश (Sensex Crash) होकर 73,492 के लेवल पर आ गया था. हालांकि, अंत में ये तेज रिकवरी के साथ 303 अंक फिसलकर 74,346 पर क्लोज हुआ था।  पहले ही मिले थे गिरावट के संकेत  भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के संकेत पहले से ही मिल रहे थे. जहां Gift Nifty 200 अंक फिसलकर कारोबार कर रहा था, तो वहीं तमाम एशियाई शेयर बाजारों में कोहराम मचा हुआ नजर आया था. जापान का निक्केई इंडेक्स (Japan Nikkei) करीब 1500 अंक, हांगकांग का हैंगसेंग (HangSeng) करीब 400 अंक और साउथ कोरिया के कोस्पी इंडेक्स (KOSPI) 170 अंक टूटकर कारोबार कर रहा था।  इन शेयरों से बाजार को सपोर्ट  शुरुआती तेज गिरावट से उबारने में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों का रोल रहा, जिन्होंने मार्केट को सपोर्ट दिया. इनमें बीएसई लार्जकैप में शामिल Eternal Share (2%), Titan Share (1.50%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप में Voltas Share (5%), Dixon Share (2%), Suzlon Share (1.90%) की तेजी में नजर आए। 

Trump Tariff Plan से बढ़ सकती है ट्रेड टेंशन, भारत-चीन पर नया टैरिफ प्रस्ताव

 नई दिल्ली डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नया टैरिफ प्लान (Donald Trump Tariff Plan) तैयार कर लिया है और नए अमेरिकी टैरिफ रेट प्रस्तावित किए गए हैं. अमेरिका अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों से किए जाने वाले आयात पर कम से कम 10 फीसदी का टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं और उनका ये प्रपोजल जबरन श्रम प्रथाओं की जांच के बाद आया है.  रिपोर्ट्स की मानें, भारत और चीन को लेकर भी नया टैरिफ तय कर लिया गया है, जो 12 फीसदी से ज्यादा हो सकता है।  India-China समेत किन देशों पर कितना टैरिफ?  ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रस्तावित नए टैरिफ रेट्स को देखें, तो भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से आने वाले सामानों पर ट्रंप 12.5 फीसदी का टैरिफ लगा सकते हैं. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने साफ किया है कि कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय यूनियन, ताइवान और ब्रिटेन समेत अन्य देशों से आयात पर 10 फीसदी की टैरिफ दर लागू होगी।  इधर डील पर बात, उधर टैरिफ प्लान गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा दुनिया के तमाम देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था. अब ट्रंप उन टैरिफ को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत को लेकर ये खास इसलिए भी है, क्योंकि Donald Trump Tariff Plan ऐसे समय में सामने आया है, जबकि US के मुख्य वार्ताकार द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US BTA) को अंतिम रूप देने के लिए नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ तीन दिनों की बातचीत कर रहे हैं।  धारा 301, 60 जांचें, टैरिफ तैयारी रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि ने धारा 301 के तहत की गई 60 जांचों के निष्कर्ष जारी किए हैं, जिनमें भारत को उन 54 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया गया है, जिन्होंने जबरन लेबर बेस्ड सामानों के आयात पर प्रतिबंध नहीं लगाया है या प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया है।  अमेरिकी व्यापार मंत्रालय (USTR) के एक नोटिस में कहा गया है कि जिन अर्थव्यवस्थाओं में जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध है, या जिन्होंने पारस्परिक व्यापार समझौते के माध्यम से प्रतिबद्धता जताई है, या जिनके पास कुछ जबरन श्रम से बने उत्पादों को प्रतिबंधित करने वाली सीमित व्यवस्थाएं हैं, उन्हें अतिरिक्त 10% शुल्क का सामना करना पड़ेगा।  भारत सहित अन्य अर्थव्यवस्थाओं के लिए, अमेरिकी व्यापार मंत्रालय ने 12.5% ​​की हाई एक्स्ट्रा टैरिफ रेट प्रस्तावित किए हैं. ट्रंप प्रशासन के इस ने टैरिफ प्रपोजल में कपड़ों पर आयात का जिक्र भी किया गया है. जो कुछ अर्थव्यवस्थाओं से अमेरिका में एक निश्चित मात्रा में कपड़ा आयात को धारा 301 के तहत कम टैरिफ रेट पर करने की अनुमति देता है। 

Russian Oil Discount पर अमेरिका का बड़ा कदम, जानिए भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर

 नई दिल्ली रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने वाले भारत के लिए आने वाले दिनों में एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट (सैंक्शंस वेवर) को लंबे समय तक जारी रखने के पक्ष में नहीं है और इसे जल्द से जल्द समाप्त करना चाहता है।  अमेरिकी सीनेट की फॉरेन रिलेशन कमेटी की सुनवाई के दौरान रुबियो ने कहा कि रूसी तेल पर प्रतिबंध अमेरिकी नीति का हिस्सा है और मौजूदा छूट केवल अस्थायी व्यवस्था है. उन्होंने कहा, "हम इसे जितनी जल्दी संभव हो खत्म करना चाहते हैं. यह छूट वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखने के लिए दी गई थी।  मौजूदा वेवर 17 जून को समाप्त होने वाला है. यह छूट पहली बार मार्च में दी गई थी और बाद में दो बार बढ़ाई गई. यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े तनावों के कारण वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति संकट की आशंका को देखते हुए अमेरिका ने यह कदम उठाया था।  भारत इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है. पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस ने भारी छूट पर तेल बेचना शुरू किया और भारत दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल रहा. इससे भारत को कम कीमत पर ऊर्जा मिल सकी और घरेलू अर्थव्यवस्था को राहत मिली।  रुबियो ने स्वीकार किया कि इस छूट का फायदा सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को मिला है. उन्होंने कहा कि रूसी तेल की सप्लाई ने वैश्विक बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की।  हालांकि अमेरिका लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि रूस के तेल निर्यात से मिलने वाला राजस्व यूक्रेन युद्ध को वित्तीय समर्थन देता है. इसी वजह से वाशिंगटन चाहता है कि भारत समेत बड़े खरीदार धीरे-धीरे रूसी तेल पर अपनी निर्भरता कम करें।  हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी. अमेरिका का आरोप था कि भारत रूसी तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से मॉस्को की मदद कर रहा है. बाद में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के तहत इस अतिरिक्त टैरिफ को वापस लेने का फैसला किया गया।  व्हाइट हाउस की तरफ से जारी एक फैक्ट शीट में दावा किया गया था कि भारत ने रूसी तेल के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात को रोकने की प्रतिबद्धता जताई है. हालांकि भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी प्रतिबद्धता की पुष्टि नहीं की।  एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर अमेरिका भविष्य में प्रतिबंधों में ढील देता है या रूसी तेल को लेकर अधिक लचीला रुख अपनाता है, तो भारत को फिर से सस्ते तेल का बड़ा फायदा मिल सकता है. वहीं अगर छूट समाप्त हो जाती है, तो भारत वैकल्पिक सोर्सेज जैसे वेनेजुएला, पश्चिम एशिया और अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाने की रणनीति अपना सकता है। 

लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त को लेकर बड़ा अपडेट, जानिए पैसा आया या नहीं

भोपाल   लाडली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की वो योजना है जो प्रदेश की जरुरतमंद महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है, इस महत्वाकांक्षी स्कीम ने बहनों के जीवन को काफी लाभ पहुंचाया है। बहनें हर महीने सरकार की ओर से आने वाली किस्त का बेसब्री से इंतजार करती है और जब ये राशि आ जाती है तो अपनी जरुरत को पूरा करती हैं।  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की करोड़ों पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना चलाती है. इस योजना के तहत प्रदेश की पात्र महिलाओं को हर महीना 1500-1500 रुपये की राशि दी जाती है। इस योजना के तहत अब तक जब से ये योजना शुरू हुई कुल 36 किस्त जारी हो चुकी है. प्रदेश की महिलाओं को अब 37वीं किस्त का इंतजार है।  इस योजना की 37वीं किस्त 10 जून के बाद जारी होनी संभावना है. 37वीं किस्त के रूप में प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के जरिए राशि ट्रांसफर की जाएगी. बता दें कि शुरूआत में महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर 1,500 रुपये किया जा चुका है. हालांकि अच्छी बात ये है कि भविष्य में इस योजना की राशि को बढ़ाकर 3000 रुपये तक किया जाएगा. सीएम मोहन यादव पहले ही इसके बारे में संकेत दे चुके हैं।  लाडली बहना योजना की शुरुआत साल 2023 में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने की थी. शुरुआत में लाडली बहनों के खातों में 1000 रुपये अंतरित किए जाते थे. इस राशि को अक्तूबर 2023 में बढ़ाकर 1250 रुपये कर दिया गया. नवंबर 2025 में योजना की राशि में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई और इसे 1500 रुपये कर दिया गया. अब तक इस योजना की 36 किस्ते जारी हो चुकी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार (13 मई 2026) को नरसिंहपुर के गोटेगांव में आयोजित एक कार्यक्रम में लाडली बहना योजना की 36वीं किस्त जारी की थी।  पिछले महीने की किस्त लाडली बहनों के खाते में आ चुकी है अब फिर से राज्य की 1.25 करोड़ महिलाएं 37वीं किस्त का इंतजार कर रही है। सरकार हितग्राही महिलाओं के खातों में 1500-1500 रुपये राशि ट्रांसफर करती है, अब तक इस योजना की 36 किस्तें अंतरित की जा चुकी हैं और इस जून महीने में 37वीं किस्त बहनो के खाते में आएगी। नरसिंहपुर से हुई थी योजना कि 36वीं किस्त जारी लाडली बहनों की 36वीं किस्त मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पिछले महीने 13 मई को नरसिंहपुर के मुंगवानी से जारी की थी। 1 करोड़ 25 लाख 542 महिलाओं के खातों में करीब 1835 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की गई थी लाडली बहना की 37वीं किस्त कब आएगी? वैसे आमतौर पर हर महीने लाडली बहना योजना की किस्त 10 से 20 तारीख के बीच जारी होती है, जानकारी ये है कि इस बार भी  लाडली बहनो की 37वीं किस्त इन्हीं तारीखों के बीच जारी होगी। हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक इसका आधिकारिक ऐलान तो नहीं किया है लेकिन इन्हीं तारीखों के बीच ये किस्त आ सकती है। DBT को कैसे एक्टिवेट करें? वैसे तो लाडली बहना योजना की किस्त सीधे महिलाओं के खातों में भेजी जाती है लेकिन कई बार आधार कार्ड तो बैंक अकाउंट से लिंक रहता है लेकिन डीबीटी सक्रिय नहीं होता है, अगर ऐसा हो तो नीचे दिए प्रोसेस को अपनाकर  प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. ऑफलाइन ऐसा करें.. जिस बैंक में आपका अकाउंट है उसकी शाखा में जाएं. आधार सीडिंग फॉर्म में अपनी जानकारी भरें. इस फॉर्म के साथ बैंक खाता पासबुक और आधारकार्ड की फोटोकॉपी लगाएं. बैंक से DBT एक्टिवेशन के लिए रिक्वेस्ट करें लिहाजा लाडली बहनों के खाते में कुछ ही दिनों में योजना की 37वीं किस्त आने वाली है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, 8वें वेतन आयोग को लेकर नई समयसीमा तय

 नई दिल्‍ली 8वें वेतन आयोग (CPC) के तहत एक बड़ा अपडेट सामने आया है. आयोग ने सुझाव और मांग रख्‍ने की डेडलाइन बढ़ाकर 15 जून तक कर दी है. इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और अन्‍य कर्मचारियों को सैलरी, पेंशन और अलाउंस में संशोधन पर विचार करने के लिए एक्‍स्‍ट्रा समय मिल गया है।  यह विस्‍तार ऐसे समय में हुआ है, जब कर्मचारी यूनियनों और पॉलिसी मेकर्स के बीच लंबे समय से इंतजार किए जा रहे फिटमेंट फैक्‍टर पर चर्चा तेज हो गई है. नए नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग ने ऐलान किया है कि  हितधारकों द्वारा अपने ज्ञापन और सिफारिशें प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 15 जून होगी. इससे पहले आयोग द्वारा दी गई समय सीमा को 31 मई तक बढ़ा दिया गया था और यह दूसरी बार है जब समय सीमा बढा़ई गई है।  आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सुझाव केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट 8cpc.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. परामर्श प्रक्रिया के दौरान फिजिकल डॉक्‍यूमेंट्स, ईमेल, हार्ड कॉपी और पीडीएफ लेटर स्वीकार नहीं की जाएंगी. इस विस्तार का मतलब आयोग द्वारा अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देने से पहले कर्मचारी यूनियनों, पेंशनर्स ग्रुप, डिफेंस इम्‍प्‍लाई के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।  कौन-कौन कर सकता है सिफारिशें   केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनर्स, रक्षाकर्मी, अखिल भारतीय सेवा अधिकारी, केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारी और सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य पात्र अपनी मांग रख सकते हैं. इस पैनल से उम्‍मीद की जाती है कि वह अपने चयन के 18 महनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा. हालांकि, जरूरत पड़ने पर अंतरिम रिपोर्ट भी जारी की जा सकती है।  फिटमेंट फैक्टर आठवें वेतन आयोग के सबसे अधिक ध्यान से देखे जाने वाले पहलुओं में से एक है फिटमेंट फैक्टर, जो वेतन और पेंशन संशोधनों की लिमिट तय करता है. यह संशोधित बेसिक सैलरी और पेंशन के कैलकुलेशन में उपयोग किया जाने वाला एक फैक्‍टर है. हाई फिटमेंट फैक्‍टर से सैलरी और रिटायरमेंट प्रॉफिट में अधिक बढ़ोतरी होती है।  उदाहरण के लिए  छठा वेतन आयोग (2006): फिटमेंट फैक्‍टर 1.86, सातवां वेतन आयोग (2016): फिटमेंट फैक्‍टर 2.57 सातवें वेतन आयोग के फार्मूले के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 तय किया गया था. 2.57 के फिटमेंट फैक्टर को लागू करने से पिछले सैलरी स्‍ट्रक्‍चर की तुलना में वेतन में काफी बढ़ी हुई है।  8वें वेतन आयोग के तहत क्‍या हैं मांगे?  कई यूनियनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई, आवास की बढ़ती लागत, हेल्‍थ खर्च और बेहतर पेंशन व्यवस्था की आवश्यकता एक व्यापक संशोधन को उचित ठहराती है. खबरों के अनुसार, कई कर्मचारी ग्रुप 3.0 से 4.0 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, जिससे न्यूनतम बेसिक लेवल पर बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।  अगर 3.8 से 4.0 की लिमिट में फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिल जाती है, तो हितधारकों के साथ परामर्श के दौरान चर्चा किए गए अनुमानों के अनुसार, न्यूनतम मूल वेतन संभावित रूप से ₹69,000 और ₹72,000 के बीच बढ़ सकता है। 

बढ़ते तापमान ने बढ़ाई किसानों की चिंता, गेहूं की फसल पर मंडरा रहा संकट

नई दिल्ली जलवायु परिवर्तन का असर अब भारत की खाद्य सुरक्षा पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है. एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ता तापमान, विशेष रूप से सर्दियों में गर्मी और रात के समय तापमान में बढ़ोतरी देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर रही है।  क्लाइमेट ट्रेंड्स (Climate Trends) की रिपोर्ट, 'व्हीट अंडर स्ट्रेस: क्लाइमेट चेंज, राइजिंग हीट एंड अडैप्टेशन पाथवेज इन इंडिया’स मेजर व्हीट-ग्रोइंग स्टेट्स' में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में गेहूं की वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई है।  रिपोर्ट बनाने वाली प्रमुख लेखिका और क्लाइमेट ट्रेंड्स की रिसर्च लीड डॉ. पलक बल्यान कहती हैं कि, भारत के गेहूं उत्पादन के सामने सबसे गंभीर लेकिन कम पहचाने गए खतरे में से एक रात के तापमान में लगातार वृद्धि है. गर्म रातें पौधों में श्वसन प्रक्रिया बढ़ा देती हैं, जिससे अनाज बनने के लिए आवश्यक कार्बोहाइड्रेट भंडार कम हो जाते हैं।   उन्होंने बताया कि फरवरी और मार्च में अचानक बढ़ने वाली गर्मी गेहूं के दाने भरने की अवधि को छोटा कर रही है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ रहा है. गेहूं के दाने छोटे और सिकुड़े हुए रह जाते हैं, जिससे कुल उत्पादन घटता है और गेहूं की क्वालिटी भी खराब हो जाती है।  रिपोर्ट के अनुसार, सभी प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में रात का तापमान दिन के तापमान की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है. गुजरात में यह वृद्धि दिन के तापमान की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक दर्ज की गई है. वहीं, फरवरी का महीना सबसे तेजी से गर्म हो रहा है, जिसमें प्रति दशक 0.69 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि देखी गई है।  क्लाइमेट ट्रेंड्स की संस्थापक और निदेशक आरती खोसला का कहना है कि, जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का जोखिम नहीं रह गया है. यह पहले से ही हमारे खाद्य तंत्र और ग्रामीण आजीविका को प्रभावित कर रहा है. किसानों को लगातार फसल नुकसान, घटती गुणवत्ता और बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु-स्मार्ट कृषि, बेहतर चेतावनी प्रणाली, टिकाऊ खेती और किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने वाले उपायों को प्राथमिकता दिए बिना देश की खाद्य सुरक्षा को लंबे समय तक सुरक्षित रखना कठिन होगा।  रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जिससे रात के समय गर्मी का प्रभाव बढ़ रहा है. यह स्थिति विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चिंताजनक है, जो भारत के गेहूं उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं।  अध्ययन में पाया गया कि फूल आने, दाना भरने और पकने जैसे महत्वपूर्ण चरण बढ़ते तापमान से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. फरवरी और मार्च में बढ़ती गर्मी फसल की वृद्धि अवधि को कम कर रही है, जिससे दाने छोटे और सिकुड़े हुए रह जाते हैं तथा उत्पादन में गिरावट आती है. इसके अलावा, कटाई के दौरान होने वाली बेमौसम बारिश फसल को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ भंडारण हानि भी बढ़ा रही है।  रिपोर्ट में गुजरात और पंजाब के किसानों के अनुभवों का भी जिक्र किया गया है. किसानों ने खराब अंकुरण, कम टिलरिंग, बढ़ते कीट प्रकोप और घटती गुणवत्ता जैसी समस्याओं की जानकारी दी है. छोटे और सीमांत किसान इन चुनौतियों से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।  विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर बुवाई, गर्मी-सहनशील किस्मों का उपयोग, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और मौसम आधारित सलाह सेवाओं को मजबूत करना जरूरी है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जलवायु-अनुकूल कृषि रणनीतियों को तेजी से लागू करना होगा।