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जालंधर में धमकी भरा ईमेल, स्कूल-मंदिर उड़ाने की धमकी; अमित शाह की रैली से पहले हड़कंप

जालंधर जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली से पहले कई स्कूलों को एक धमकी भरा ईमेल भेजे जाने का मामला सामने आया है। ईमेल में रैली स्थल, बसों और श्री देवी तालाब मंदिर समेत अलग-अलग स्थानों पर आईईडी/बम धमाके करने जैसी धमकियां दी गई हैं। वहीं अमृतसर के स्कूलों को भी उड़ाने की धमकी आई है। संदेश में बच्चों को स्कूल भेजने और रैली में जाने को लेकर भी चेतावनी दी गई है। ई-मेल में लिखा है कि रैली के स्टेज के नीचे आईईडी रखा है। स्कूल-मंदिर और कोर्ट को उड़ा देंगे। 100 बसों में से 2-3 बसों में बम फिट किए हैं। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। ईमेल बुधवार तड़के 7:50 पर आया, जिसकी सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही है।  ईमेल में अलगाववादी और हिंसक भाषा के साथ कई संगठनों व व्यक्तियों के नाम भी लिखे गए हैं। ई-मेल कैंब्रिज इनोवेटिव और सीटी स्कूल को आए हैं जिसमें खालिस्तान नेशनल आर्मी और बब्बर खालसा (परमार कनाडा) ग्रुप के नाम हैं। हालांकि, ईमेल में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं।  अमित शाह की रैली के मद्देनजर सुरक्षा अलर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जालंधर रैली के मद्देनजर पुलिस पहले से ही सुरक्षा को लेकर अलर्ट है। दोआबा की 23 विधानसभा सीटों को साधने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जालंधर-लुधियाना हाईवे से सटे परागपुर में रैली को संबोधित करेंगे। इसी रैली में भाजपा की ओर से निकाली गई नशामुक्त पंजाब की 4 यात्राओं का समापन होगा। नशा मुक्त यात्रा का जालंधर में होगा समापन गृह मंत्री के दौरे से पहले पंजाब बीजेपी की तरफ से निकाली जा रही नशा मुक्त पंजाब यात्रा का जालंधर में स्वागत के साथ समापन होगा। पंजाब में बीजेपी की नशा मुक्त पंजाब यात्रा की शुरुआत पठानकोट जिले के माधोपुर से 18 सितंबर 2026 को हुई थी। यात्रा ने लगभग 4000 किलोमीटर का सफर तय किया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा ने लगभग 4000 किलोमीटर का सफर तय किया और राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों को कवर किया। दूसरी तरफ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि लोगों से अपील है कि किसी भी संदिग्ध संदेश या अफवाह को आगे शेयर न करें और केवल पुलिस/प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। अमित शाह की जालंधर में नशा-मुक्त पंजाब यात्रा के समापन कार्यक्रम के तहत रैली प्रस्तावित है और उनके श्री देवी तालाब मंदिर जाने की भी सूचना है। स्टेज और धार्मिक स्थल पर हमले की चेतावनी ईमेल भेजने वाले ने खौफनाक दावा करते हुए कहा है कि जहां गृहमंत्री का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होना है, वहां स्टेज पर बम लगा दिए गए हैं। इसके साथ ही शहर के प्रसिद्ध और पवित्र देवी तालाब मंदिर परिसर को भी अत्याधुनिक डिवाइस या आईफोन की मदद से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस तरह की गंभीर चेतावनी मिलने के बाद से धार्मिक स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यह धमकी भरा मेल कैंब्रिज गर्ल्स स्कूल (अर्बन एस्टेट), कैंब्रिज इनोवेटिव स्कूल और एमजीएम स्कूल समेत कई अन्य शैक्षणिक संस्थानों को प्राप्त हुआ है। मेल में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इस आयोजन के दौरान किसी भी बच्चे को न भेजा जाए। दौरे से ठीक पहले आए इस तरह के धमकी भरे संदेश को पुलिस और जांच एजेंसियां बेहद गंभीरता से ले रही हैं। साइबर टीम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया है ताकि ईमेल के आईपी एड्रेस और इसे भेजने वाले की पहचान की जा सके। इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल और मंदिर परिसर में बम निरोधक दस्तों की मदद से सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।    

तीरंदाजी में भारत का धमाल, चिकिता-साहिल ने जीता गोल्ड

आईची-नागोया Asian Games 2026 के तीरंदाजी इवेंट में एक और गोल्ड भारत को मिल चुका है। 30 सितंबर की सुबह वुमेंस टीम ने गोल्ड पर निशाना लगाया था, जबकि मिक्स्ड टीम इवेंट में भी भारत को गोल्ड मेडल मिला है। वुमेंस टीम में दमदार खेल दिखाने वाली चिकिता तनिपार्थी ने मिक्स्ड टीम में हिस्सा लिया, जहां उनका साथ साहिल राजेश जाधव ने दिया। दोनों ने साथ मिलकर धमाल मचाया और देश को गोल्ड मेडल दिलाया। इस जोड़ी को ओलंपिक का टिकट भी मिल गया है। साउथ कोरिया के खिलाफ कांटे की टक्कर वाले शूट-ऑफ में चिकिता और साहिल ने जीत हासिल की और LA ओलंपिक्स के लिए भारत की जगह पक्की की। भारतीय जोड़ी हाफवे तक 80-78 से आगे थी, लेकिन साउथ कोरिया ने वापसी करते हुए मुकाबला 157-157 से बराबर कर दिया। इसके बाद मुकाबला शूट-ऑफ में पहुंचा, जहां चिकिता और साहिल दोनों ने 10 पॉइंट हासिल किए, जबकि साउथ कोरिया का आखिरी तीर 9 पॉइंट पर लगा। इस तरह भारत को इस रोमांचक मुकाबले में जीत मिली। इस जीत का मतलब यह भी है कि भारत ने हांग्जो 2023 एशियन गेम्स में कंपाउंड मिक्स्ड टीम के तौर पर गोल्ड जीता था, जिसे अपने पास बरकरार रखा है। चिकिता और साहिल का धमाल चिकिता तनिपार्थी और साहिल जाधव ने एक मुश्किल कंपाउंड मिक्स्ड टीम सेमीफाइनल में थाईलैंड को 156-155 से हराया था और गोल्ड मेडल मैच में अपनी जगह पक्की की। भारत ने शुरुआती एंड के बाद बढ़त बनाई थी और फिर पूरे मैच में थोड़ी सी बढ़त बनाए रखी। चिकिथा और साहिल ने फाइनल रोटेशन में लगातार 10-10 पॉइंट का स्कोर करके अपना धैर्य बनाए रखा था और बाद में सिर्फ एक पॉइंट से उन्हें जीत मिली। बनाकर अपना धैर्य बनाए रखा और एक पॉइंट से जीत पक्की कर ली। यही काम इस जोड़ी ने फाइनल में भी किया और परफेक्ट 10 लगाकर खिताब जीता। आपको बता दें, इससे पहले वुमेंस कमाउंड टीम इवेंट में भी भारत ने तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीता था। कंपाउंड टीम में ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप, चिकिता तनिपार्थी सुबह करीब 6 बजे साउथ कोरिया के खिलाफ सेमीफाइनल में उतरीं थीं। इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने गोल्ड मेडल मैच खेला था। फाइनल में उनके सामने चीनी खिलाड़ियो की चुनौती थी, जिससे उन्होंने पार पाया और देश को इन खेलों का सातवां गोल्ड मेडल दिलाया था। विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी इस टीम ने की थी। 238-234 के अंतर से चीन को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। मिसाल से कम नहीं चिकिता और साहिल की कहानी रोमांचक शूट ऑफ में साउथ कोरिया कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीतने वाले साहिल जाधव और चिकिता परितार्थी की कहानी नए तीरंदाजों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है. दोनों ने गोल्ड मेडल के साथ-साथ भारत के लिए 2028 ओलंपिक कोटा भी हासिल कर लिया. 18 साल की चिकिता जहां तेलंगाना के किसान परिवार से आतीं हैं तो महाराष्ट्र के साहिल जाधव ने अपने पड़ोसी को देखकर धनुष-बाण उठाया था।  हार्वेस्टर मशीन बेचकर हुई चिकिता की ट्रेनिंग चिकिता तनिपार्थी के पिता ने अपनी बेटी के लिए धनुष खरीदने और ट्रेनिंग का खर्च उठाने के लिए परिवार की राइस हार्वेस्टर मशीन बेच दी थी और कर्ज भी लिया था. तेलंगाना के पेड्डापल्ली जिले के सुल्तानपुर गांव में रहने वाले 51 साल के किसान श्रीनिवास राव और उनकी पत्नी श्रीलता राव ने अपने संघर्षों को याद करते हुए बताया। 

सीएम योगी बोले- सनातन के बिना भारत की कल्पना अधूरी

लखनऊ  युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यस्मृति के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा के विराम पर बोले मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के विराम सत्र को संबोधित करते हुए सनातन धर्म और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सनातन भारत का मूल धर्म है और देश की पहचान उसकी धर्मनगरी अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज की परंपराओं से जुड़ी है। मुख्यमंत्री ने इस दौरान गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया तथा प्रदेश में गोशालाओं के संचालन और गोवंश संरक्षण के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज का किया उल्लेख दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में कथा श्रवण और व्यासपीठ के समक्ष श्रद्धावनत होने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग उत्तर प्रदेश की सनातन धर्मनगरियों के मर्म को नहीं पहचानते, वे उत्तर प्रदेश और भारत को नहीं समझ पाएंगे। उन्होंने कहा कि अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और कुंभनगरी प्रयागराज की सामाजिक समरसता को समझे बिना उत्तर प्रदेश और भारत को समझना संभव नहीं है। गोमाता में सनातन धर्म की पहचान: योगी मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म में गोमाता की प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन की पहचान गोमाता में है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पहला ग्रास गोमाता का माना गया है। उनके अनुसार, यदि हर सनातनी इस परंपरा का पालन करता तो गोमाता सड़कों पर नहीं विचरतीं। उन्होंने कहा कि इसी तरह अंतिम ग्रास श्वान का माना गया है। यदि इस परंपरा का पालन किया जाता तो सड़क पर निराश्रित कुत्ते राहगीरों को शिकार नहीं बनाते। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में लोगों ने अपने ऋषि-मुनियों की परंपरा का अनुसरण नहीं किया। गोमाता के संरक्षण पर दिया जोर सीएम योगी ने कहा कि धरती माता का एक नाम गोमाता भी है और धरती माता को बचाने के लिए गोमाता को भी बचाना होगा। उन्होंने कहा कि गोमाता के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार अपने स्तर से प्रयास कर रही है, लेकिन नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सात हजार से अधिक गोशालाओं के माध्यम से 16 लाख से अधिक गोवंश का लालन-पालन किया जा रहा है। उन्होंने गोवंश संरक्षण के लिए नागरिकों की सहभागिता पर भी जोर दिया। भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य मुख्यमंत्री ने बताया कि गोमाता और गोवंश के संरक्षण के लिए सरकार निराश्रित गोवंश को रखने पर किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। आमजन भी गोशाला के संचालन में भागीदार बनकर पुण्य लाभ ले सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि गोशाला में गोवंश को गोद लीजिए। उसके अनुरूप व्यवस्था करिए और गोपाष्टमी पर तिलक लगाकर उनका पूजन करिए। ऐसा करने पर आपका घर धन-धान्य से पूर्ण होगा, जीवन सुखमय होगा, सभी प्रकार की आरोग्यता की प्राप्ति होगी और गोमाता के आशीर्वाद से दुख, दरिद्रता नहीं रहेगी। हर बीमारी का रामबाण उपचार है देसी गाय मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि यह सब सिस्टम की गलती का नतीजा है, जिसने रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से हर खाद्यान्न को प्रभावित कर दिया है। इसका समाधान सिर्फ उपचार नहीं है। इस समस्या का समाधान भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है। गाय के गोबर से की गई प्राकृतिक खेती से उपजा अन्न उपयोग किया जाएगा तो कैंसर, किडनी व लीवर की खराबी, डायबिटीज जैसी बीमारियां नहीं होगी और तनाव भी नहीं होगा। गंभीर बीमारियों का रामबाण उपचार भारतीय नस्ल की गोमाता हैं, इसलिए हमें गोवंश का संरक्षण और संवर्धन करना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि आयुष्मान कार्ड से इलाज के अतिरिक्त, गरीबों की गंभीर बीमारियों के इलाज में उन्होंने अपने विवेकाधीन कोष से 1400 करोड रुपये अलग से दिए हैं। कथा व्यास की मुक्त कंठ से सराहना की सीएम योगी ने कथा व्यास मलूकपीठाधीश्वर, वृंदावन से पधारे स्वामी श्री राजेंद्रदास द्वाराचार्य की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए सीएम योगी ने कहा कि स्वामी जी ने अत्यंत सरलता और सहजता से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया। इस कथा के मध्य में देश के कई राज्यों में भीषण आपदा ने जन जीवन को प्रभावित किया। पर, गोरखपुर में शिवावतार महायोगी गोरखनाथ की पावन भूमि पर कथा व्यास के मुखारविंद से पावन कथा अनवरत श्रद्धाभाव से चलती रही। आपदा भी इसके मार्ग में बाधक नहीं बनी और यही भारत की पहचान है। आपदाओं का सामना करके भी कथा अनवरत ससमय प्रारंभ होती रही और सभी श्रद्धालुओं ने मर्यादा, समता, भक्ति और जीवंतता से कथा का आनंद लिया। कथा के विराम पर मुख्यमंत्री, संतजन व यजमानगण ने श्रीमद्भागवत महापुराण और व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के जलशक्तमंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर रोहतक हरियाणा के महंत एवं राजस्थान विधानसभा के विधायक बालकनाथ, वाराणसी से आए डॉ. रामकमल दास वेदांती, अयोध्या से आए स्वामी रामदिनेशाचार्य, गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास सहित कई साधु संत, यजमानगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही। निराश्रित गोवंश के लिए 1500 रुपये की सहायता मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार निराश्रित गोवंश को रखने वाले किसानों को प्रति गोवंश प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। इसी तरह निराश्रित गोआश्रय स्थलों से कुपोषित परिवारों के लिए बियाही गाय और उसके भरण-पोषण की धनराशि दी जाती है। सीएम ने कहा कि देसी भारतीय नस्ल की गोमाता का दूध अमृततुल्य होता है। उन्होंने आमजन से गोशालाओं के संचालन में भागीदार बनने और गोवंश को गोद लेने का आह्वान किया। प्राकृतिक खेती को बताया समाधान मुख्यमंत्री ने कैंसर, किडनी और लिवर की खराबी जैसी बीमारियों पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और खतरनाक दवाओं के इस्तेमाल से खाद्यान्न प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इसका समाधान केवल उपचार नहीं, बल्कि भारतीय गोमाता आधारित प्राकृतिक खेती में है। … Read more

रेलवे की बड़ी उपलब्धि, देश में दौड़ी पहली LNG-डीजल ड्यूल-फ्यूल ट्रेन

 नई दिल्ली  अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू करने के 10 महीनों बाद, भारतीय रेलवे ने अब अपनी पहली तरल प्राकृतिक गैस (LNG) ट्रेन भी शुरू कर दी है। रविवार को गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती स्टेशन से भारत की पहली LNG ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह कदम कार्बन उत्सर्जन को कम करने और डीजल पर से अपनी निर्भरता को कम करने की दिशा में रेलवे की बड़ी कामयाबी है। LNG ट्रेन के साथ कुल मिलाकर 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा के कई रेलवे प्रोजेक्ट्स देश को समर्पित किए गए। इनमें रेलवे लाइन को डबल करने के प्रोजेक्ट, कवच ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग का काम और WAG-12 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए मेंटेनेंस शेड शामिल थे। भारत की पहली LNG ट्रेन भारत की पहली LNG से चलने वाली ट्रेन आने वाले सालों में पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान देगी। LNG से चलने वाली यह ट्रेन डुअल-फ्यूल (डीजल और LNG) सिस्टम पर चलती है, जिसे इसके ड्राइविंग पावर कारों (DPCs) के लिए विकसित किया गया है। साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में, 1400 HP की क्षमता वाली दो DPCs को डुअल-फ्यूल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके चलाने के लिए मॉडिफाई किया गया है। यह सिस्टम लोकोमोटिव को डीजल के साथ-साथ LNG का इस्तेमाल करने की सुविधा देता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेक्नोलॉजी की परफॉर्मेंस और भरोसेमंदता को असल हालात में परखने के लिए दो बदले हुए DPC का 2000 km से ज्यादा फील्ड ट्रायल किया गया है। 40 प्रतिशत तक डीजल की खपत होगी कम डुअल-फ्यूल सिस्टम से LNG का इस्तेमाल करके डीजल की खपत को लगभग 40% तक कम किया जा सकता है। रेलवे के जारी किए गए ट्रायल डेटा से पता चलता है कि यह टेक्नोलॉजी फ्यूल की लागत और कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे एमिशन को कम कर सकती है। यह टेक्नोलॉजी इंजन को फ़्यूल की उपलब्धता के आधार पर LNG या डीजल पर चलने की सुविधा भी देती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इससे ट्रेन किसी एक फ्यूल सोर्स पर निर्भर हुए बिना चलती रह सकती है। डीजल की जरूरत के कुछ हिस्से को LNG से बदलने के साथ-साथ, इस सिस्टम को पारंपरिक डीजल इंजन की पावर और काम करने की क्षमता को बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है। हर बदले हुए DPC में लगभग 2200 लीटर क्षमता वाला LNG टैंक लगा है। इस टैंक में लगभग 850-900 kg इस्तेमाल लायक LNG आ सकती है। LNG का एक पूरा टैंक लगभग 1,600 km तक ट्रेन चलाने में मदद कर सकता है, जिससे ट्रेन में बार-बार फ़्यूल भरने की जरूरत नहीं होगी। इंडियन रेलवे का लक्ष्य नेट जीरो का है। किस रूट पर चलेगी LNG ट्रेन? अपनी यात्रा के दौरान, पहली LNG-डीजल ड्यूल-फ्यूल डीईएमयू ट्रेन साबरमती और महेसाणा जंक्शन के बीच चल रही है। यह 8 डिब्बों वाली नॉन-एसी चेयर कार ट्रेन है। इसका नियमित रूट अभी तक तय नहीं हुआ है और मार्ग की पुष्टि होने के बाद इसकी एलान किया जाएगा। हाइड्रोजन और LNG ट्रेनों में क्या अंतर है? दोनों ट्रेनें अलग-अलग वैकल्पिक-ईंधन तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का इस्तेमाल करके फ्यूल-सेल सिस्टम के ज़रिए ट्रेन में ही बिजली बनाती है। वहीं, LNG ट्रेन एक ऐसे इंटरनल-कंबशन इंजन का इस्तेमाल करती है जिसे डुअल-फ्यूल LNG-डीजल सिस्टम में बदला जाता है। LNG मौजूदा सिस्टम में डीजल के इस्तेमाल को लगभग 40 प्रतिशत तक कम कर सकती है। आसान शब्दों में कहें तो, हाइड्रोजन ट्रेन एक फ्यूल-सेल आधारित प्रोपल्शन सिस्टम है, जबकि LNG ट्रेन एक वैकल्पिक-ईंधन सिस्टम है जो डीजल के साथ काम करती है। भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भारतीय रेलवे ने 17 जुलाई, 2026 को हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस हाइड्रोजन ट्रेन ने 25 जुलाई तक 1200 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया और 3200 लीटर से ज्यादा डीजल की बचत की। पारंपरिक डीजल ट्रेन के उलट, हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच केमिकल रिएक्शन से ट्रेन के अंदर ही बिजली बनाती है। इससे निकलने वाली एकमात्र चीज जल-वाष्प है; इसमें न तो धुआं निकलता है और न ही टेलपाइप से सीधे कार्बन का उत्सर्जन होता है। इस ट्रेन में 10 कोच हैं, जिनमें दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कारें शामिल हैं, और यह कुल 2,400 kW की पावर देती है। इसमें लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरी और हाइड्रोजन स्टोरेज सिलेंडर का भी इस्तेमाल किया गया है। LNG या हाइड्रोजन पर्यावरण के लिहाज से अधिक फायदेमंद कौन? पर्यावरण के लिहाज से हाइड्रोजन ट्रेन, एलएनजी (LNG) ट्रेन की तुलना में अधिक फायदेमंद और स्वच्छ है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाइड्रोजन ट्रेन के बाई-प्रोडक्ट के रूप में सिर्फ जल-वाष्प निकलती है।  

जोधपुर एयरबेस पर F-35 की एंट्री, क्या भारत के सामने खुला 5वीं पीढ़ी के फाइटर का विकल्प?

नई दिल्ली  राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर इस समय दुनिया के सबसे चर्चित लड़ाकू विमानों में शामिल अमेरिकी F-35A Lightning II की मौजूदगी ने सबका ध्यान खींचा है। अमेरिका के छह F-35 लड़ाकू विमान भारत के बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। यह पहली बार है जब F-35 भारत में किसी सैन्य अभ्यास का हिस्सा बन रहा है। F-35 का भारत आना इसलिए भी अहम है क्योंकि यह महज एक सैन्य अभ्यास तक सीमित घटनाक्रम नहीं है। अमेरिका लंबे समय से भारत के साथ रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है और इसी कड़ी में वह दुनिया के अपने सबसे आधुनिक स्टेल्थ लड़ाकू विमानों में से एक F-35 को भारत के सामने एक विकल्प के तौर पर रख चुका है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत ने F-35 खरीदने का फैसला कर लिया है। राजस्थान में उतरा अमेरिका का सबसे घातक फाइटर F-35 F-35 को लेकर अमेरिकी पहल नई नहीं है। फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को F-35 बेचने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका भारत को F-35 स्टेल्थ लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार करेगा। दोनों देशों ने उस समय रक्षा सहयोग बढ़ाने और अमेरिकी सैन्य उपकरणों की बिक्री बढ़ाने पर भी जोर दिया था। यानी अमेरिका का संदेश साफ था- अगर भारत अपनी वायुसेना के लिए पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की तलाश कर रहा है तो उसके सामने F-35 का विकल्प मौजूद है। हालांकि भारत की ओर से उस समय भी साफ कहा गया था कि F-35 खरीदने को लेकर कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। अब जोधपुर में F-35 की मौजूदगी क्यों महत्वपूर्ण है? ‘तरंग शक्ति 2026’ में F-35 की भागीदारी अमेरिका को भारत के सामने अपने विमान की क्षमताओं को वास्तविक ऑपरेशनल माहौल में दिखाने का मौका देगी। छह F-35A और 200 से ज्यादा अमेरिकी एयरमेन इस अभ्यास में शामिल हैं। अभ्यास जोधपुर में 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चल रहा है। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि F-35 सिर्फ कोई सामान्य लड़ाकू विमान नहीं है। यह पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर है, जिसे कम रडार सिग्नेचर, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता के लिए जाना जाता है। ऐसे विमान की मौजूदगी भारतीय वायुसेना के पायलटों और तकनीकी स्टाफ को उसकी क्षमताओं को करीब से समझने का अवसर भी देगी। दूसरे शब्दों में कहें तो अमेरिका अपने सबसे एडवांस फाइटर जेट को भारत में लाकर सिर्फ अभ्यास में हिस्सा नहीं ले रहा, बल्कि भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान को यह दिखाने का मौका भी दे रहा है कि F-35 किस तरह काम करता है। भारत के सामने अब F-35 बनाम Su-57 का विकल्प? भारत की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरत को देखते हुए अमेरिका का F-35 और रूस का Sukhoi Su-57 दोनों चर्चा में हैं। फरवरी 2025 में Aero India में दोनों विमान एक ही जगह नजर आए थे। इसके बाद से भारत के लिए दोनों विकल्पों को लेकर चर्चा और तेज हुई। रूस की ओर से भी Su-57 को लेकर भारत को आकर्षित करने की कोशिश हुई है। रूस भारत को अपने Su-57 के साथ संभावित स्थानीय उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे विकल्पों के जरिए आकर्षित करना चाहता है। हालांकि, भारत और रूस के बीच भी इस विमान की खरीद को लेकर कोई औपचारिक खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। फिलहाल भारत की प्राथमिकता अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की रही है। भारत ने अभी किसी को हरी झंडी नहीं दी सबसे अहम सवाल यही है कि क्या भारत F-35 खरीदने जा रहा है? फिलहाल जवाब है- नहीं, ऐसी कोई औपचारिक खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया था कि अमेरिका के साथ F-35 खरीदने को लेकर कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भी कहा था कि भारत अमेरिका के F-35 या रूस के Su-57 जैसे पांचवीं पीढ़ी के विमानों की खरीद को लेकर औपचारिक बातचीत नहीं कर रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि अभी F-35 और Su-57 दोनों ही संभावित विकल्प और प्रस्ताव की श्रेणी में हैं, न कि भारत के तय किए हुए फाइटर जेट। फिर अमेरिका इतना जोर क्यों दे रहा है? इसके पीछे सिर्फ विमान बेचने की बात नहीं है। भारत दुनिया के बड़े रक्षा बाजारों में शामिल है और आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना को अपने लड़ाकू विमानों की संख्या और क्षमता दोनों बढ़ाने की जरूरत है। भारतीय वायुसेना लंबे समय से स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की तुलना में कम लड़ाकू स्क्वाड्रनों के साथ काम कर रही है। ऐसे में भारत के भविष्य के फाइटर प्रोग्राम पर अमेरिका, रूस और यूरोप की रक्षा कंपनियों की नजर है। लेकिन भारत के लिए फैसला इतना आसान नहीं F-35 बेहद एडवांस विमान है, लेकिन भारत के लिए किसी पांचवीं पीढ़ी के विदेशी लड़ाकू विमान को खरीदना सिर्फ उसकी तकनीकी क्षमता देखने का मामला नहीं होगा। कीमत, लॉजिस्टिक्स, हथियारों और स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, तकनीकी नियंत्रण, भविष्य के अपग्रेड और भारत की ‘मेक इन इंडिया’ प्राथमिकताओं जैसे कई सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे। भारत की अपनी रणनीति भी अब सिर्फ विदेशी विमान खरीदने तक सीमित नहीं है। देश स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में किसी विदेशी स्टेल्थ फाइटर को खरीदने का फैसला AMCA की समयसीमा और भारतीय वायुसेना की तत्काल जरूरतों के बीच संतुलन देखकर ही किया जाएगा। F-35 के लिए राजस्थान में उतरना कितना बड़ा संकेत? यही वजह है कि जोधपुर में F-35 की मौजूदगी को सिर्फ एक अभ्यास की तस्वीर के तौर पर देखना अधूरा होगा। भारत ने अमेरिका के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में से एक को अपने सैन्य अभ्यास में शामिल होने का मौका दिया है। दूसरी ओर अमेरिका को भी भारतीय वायुसेना के साथ अपने विमान को ऑपरेशनल वातावरण में उड़ाने और उसकी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।

4 राफेल और 3 MRTT के साथ फ्रांस का मिशन पेगासे, 40 हजार KM की यात्रा पर

नई दिल्ली फ्रांस की एयर और स्पेस फोर्स का ‘मिशन पेगासे’ अपनी 40 हजार किलोमीटर की यात्रा पर है। अभी भारत में है। 2018 में पेगासे मिशन शुरू हुआ था और ये इसका सातवां एडिशन है। 2018 में शुरू किए गए इस मिशन में 300 एयरक्रू के साथ चार राफेल, तीन A330 MRTT फीनिक्स और दो A400M एटलस विमान तैनात किए गए हैं। मिशन की शुरुआत आर्कटिक से हुई है और इस मिशन में नौ जगहों पर फ्रांस के ये विमान रुकेंगे। यह मिशन प्रशांत, पूर्वी एशिया और हिंद महासागर होते हुए मध्य पूर्व और आसपास तक जाएगा। Mission Pégase -26 के हेड मेजर जनरल जूलियन साबेने ने एनबीटी से बात की। उन्होंने बताया कि यह मिशन क्यों अहम है। बहुत गहन और व्यस्त मिशन मेजर जनरल जूलियन ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह वास्तव में बहुत गहन और व्यस्त मिशन है। आप एक नए वातावरण में पहुंचते हैं और लगातार परिस्थितियां बदलती रहती हैं। हम अलास्का के आर्कटिक क्षेत्र के बेहद ठंडे मौसम से आए। इसके बाद अचानक जापान पहुंचे, जहां तापमान 25 डिग्री सेल्सियस है। सिर्फ वातावरण ही अलग नहीं होता, बल्कि टाइम जोन भी बदल जाता है। MRTT विमान से किया जाता कंट्रोल जब आप 10 घंटे की उड़ान भरते हैं, तो ऐसा नहीं है कि आपको आराम से नींद मिल जाए। पूरा पेगासे मिशन कमांड और कंट्रोल के तहत चलता है। यह कमांड और कंट्रोल हमारे एक MRTT विमान से किया जाता है, जहां मैं तैनात हूं। साथ ही फ्रांस में स्थित ऑपरेशन सेंटर से भी हमारा संपर्क रहता है। इसलिए हम लगातार व्यस्त रहते हैं। जब हम किसी जगह पहुंचते हैं तो हमारा मन करता है कि होटल जाकर सो जाएं, लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते। गर्मजोशी से स्वागत करते हैं सहयोगी देश वहां हमारे सहयोगी देशों के लोग हमारा गर्मजोशी से स्वागत करते हैं और उसके बाद अलग टाइम जोन की वजह से जेट लैग भी होता है। हमें अपने शरीर की सामान्य सर्केडियन रिदम यानी जैविक दिनचर्या में वापस आने में करीब एक सप्ताह लगता है। और जब तक हम वहां की परिस्थितियों के अभ्यस्त होते हैं, तब तक वापस निकलने का समय आ जाता है। इसलिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम कहीं भी लंबे समय तक स्थिर नहीं रहते। इसका शरीर पर काफी असर पड़ता है। दुनिया का कोई भी कोना बस 48 घंटे दूर उन्होंने कहा इस साल हमने मिशन में चार लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। 2018 में तीन थे, जबकि 2023 में हमने 10 लड़ाकू विमान तैनात किए थे। इन तीनों स्थितियों में काफी अंतर है। जब आप 10 लड़ाकू विमानों के साथ पहुंचते हैं तो उन्हें एक ही एयरपोर्ट पर उतारना संभव नहीं होता। आपको अलग-अलग जगहों पर विमानों को रखना पड़ता है, क्योंकि एयरपोर्ट पर इतनी जगह या पार्किंग एरिया नहीं होता कि इतने सारे विमान एक साथ खड़े किए जा सकें। इसलिए हर मिशन अलग होता है। बड़े स्तर की तैनाती करने में सक्षम हम बिना देरी किए इतने बड़े स्तर की तैनाती करने में सक्षम हैं और मिशन को तय योजना के अनुसार पूरा कर सकते हैं। आज Pegasus में हम जो कुछ कर पा रहे हैं, उसमें हमारे नए उपकरणों की भी बड़ी भूमिका है। पहले हमारे पास Mirage, C-135 और Transall विमान थे। ये लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले विमान नहीं थे। अब हमारे पास MRTT, Rafale और A330 का एक बहुत अच्छा संयोजन है। ये विमान एक-दूसरे के साथ बहुत अच्छी तरह काम करते हैं। तेजी से कर सकते हैं काम अब दुनिया के लगभग किसी भी हिस्से तक 48 घंटे के भीतर पहुंचना संभव है। वहां पहुंचने के बाद हम बहुत तेजी से विमान में ईंधन भर सकते हैं, हथियार लगा सकते हैं और उसे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार कर सकते हैं। यह क्षमता हमारे पास पहले नहीं थी। यही क्षमता हमें दुनिया के किसी भी हिस्से में ऑपरेशन करने में सक्षम एक वैश्विक ताकत बनाती है। चुनौती ये कि कहीं भी आत्मनिर्भर तरीके से ऑपरेशन चलना उन्होंने कहा कि हमने इन सभी तैनातियों के लिए एक ऐसा तरीका विकसित कर लिया है, जिससे हम हर तरह की तैनाती को सपोर्ट कर सकें। जब हम फ्रांस से रवाना होते हैं तो अलग-अलग विमानों में हमारे पास जरूरत की लगभग हर चीज होती है। हमारे पास MRTT होता है, कार्गो विमान यानी Airbus A330 होता है। इसमें अलग-अलग तरह के लोग होते हैं- इंजीनियर, एयर सपोर्ट टीम, आईटी सपोर्ट टीम और दूसरे कर्मचारी। हमारे पास स्पेयर पार्ट्स, औजार और जरूरत की बाकी सभी चीजें भी होती हैं। 2018 में की थी शुरुआत इसके बाद जब हम अलग-अलग जगहों पर रुकते हुए आगे बढ़ते हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती होती है कि हम किसी भी क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर तरीके से अपना ऑपरेशन चला सकें। अब हम इस मामले में काफी अनुभवी हो गए हैं। जब हमने 2018 में शुरुआत की थी, तब यह समझना बहुत बड़ी चुनौती थी कि हमें अपने साथ क्या-क्या लेकर जाना है। हम सब कुछ अपने साथ नहीं ले जा सकते थे, क्योंकि हमें लड़ाकू विमान और उसमें सवार लोगों को भी ले जाना होता था। सटीकता के साथ कर सकते हैं काम अब हमें काफी अनुभव हो गया है। हम पहले से अनुमान लगा सकते हैं कि जिस तरह के वातावरण में हम ऑपरेशन करने जा रहे हैं, उसमें किस तरह की खराबी या समस्या आने की संभावना है। इसके आधार पर हम बहुत सटीक तरीके से जरूरी स्पेयर पार्ट्स का पैकेज तैयार करते हैं। अब यह काम हम पहले से कहीं ज्यादा सटीकता के साथ कर पाते हैं। हर जगह कुछ नया अनुभव मेजर जनरल जूलियन ने कहा कि अलग-अलग जगहों पर रुकने से हमें बहुत कुछ हासिल भी हुआ। हमें बेहतरीन बातचीत और अनुभव मिले। हमें उनकी संस्कृति को समझने का मौका मिलता है। साथ ही, हमें एयर ऑपरेशंस और स्पेस ऑपरेशंस को संचालित करने के अलग-अलग तरीकों को जानने का मौका मिलता है। यह एक तरह से बेस्ट प्रैक्टिसेज का आदान-प्रदान है। हम जहां भी जाते हैं, वहां कुछ नया सीखते हैं और कोशिश करते हैं कि जो अनुभव हमें … Read more

30 सितंबर को 22 राज्यों में आफत की बारिश, यूपी-राजस्थान समेत कई राज्यों में आंधी का अलर्ट

नई दिल्ली देश में एक बार फिर से बारिश-तूफान लोगों की मुश्किलें बढ़ाने वाला है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान मुताबिक आज  यानी 30 सितंबर को यूपी, बिहार समेत 22 राज्यों में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इसके साथ ही 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है। आम लोगों और किसानों को बहुत अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। इस तेज रफ्तार आंधी की वजह से कुछ राज्यों में बड़े-बड़े वृक्ष जड़ से उखड़ सकते हैं। वहीं, पूर्वी राज्यों में बिजली और वज्रपात का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। जबकि पहाड़ी राज्यों में कुछ जगहों पर लैंडस्लाइड की चेतावनी है। निचले क्षोभमंडल स्तर पर उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आस-पास के इलाकों के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में आज भी तेज हवा चलने की चेतावनी है। वहीं 3 से अधिक राज्यों में ओले गिर सकते हैं। तो चलिए आपलोगों को बताते हैं आज  30 सितंबर को देश के अन्य राज्यों में मौसम का हाल कैसा रहेगा। हम आपलोगों को जिलावार भी बारिश का हाल बताएंगे… देश के 22 राज्यों में भारी बारिश-तूफान की चेतावनी मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक आज  यानी 30 सितंबर को 22 राज्यों यूपी, बिहार, दिल्ली, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, केरल, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, सिक्किम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 65 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलेगी। पूर्वी राज्यों में आंधी के चलते फसलों को नुकसान हो सकता है। दिल्ली में आज  मौसम कैसा रहेगा दिल्ली(30 सितंबर-2 अक्टूबर-बारिश-तेज हवा का अलर्ट): मौसम विभाग की भविष्यवाणी के मुताबिक दिल्ली में 30 सितंबर की सुबह से लेकर 2 अक्टूबर के बीच कभी भी बारिश हो सकती है। इस दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवा के झोंके चलने की संभावना है। वहीं, दिल्ली में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहने की चेतावनी है। इस बारिश की वजह से तापमान में 2 से 3 डिग्री की कमी देखने को मिल सकती है। यूपी में आज  मौसम कैसा रहेगा यूपी(30 सितंबर-बारिश-सतही हवा की चेतावनी): बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, महाराजगंज, सिद्धार्थ नगर, पीलीभीत, लखीमपुर, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और गोरखपुर में कुछ-कुछ जगहों पर हल्की बारिश और सतही हवा चलने की चेतावनी है। इस दौरान 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलेगी। वहीं, लखनऊ में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। बिहार में आज  मौसम कैसा रहेगा बिहार(30 सितंबर-बारिश और आंधी का अलर्ट): गया, जहानाबाद, बक्सर, भोजपुर, सिवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, खगड़िया और भागलपुर में कुछ-कुछ जगहों पर मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की गई है। लोगों को इस दौरान बेवजह बाहर निआज ने से बचने के लिए कहा गया है। वहीं, पटना में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। झारखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा झारखंड(30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): पूर्वी सिंहभूम, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, दुमका, पलामू, रांची और सरायकेला में भारी बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की चेतावनी है। वहीं, रांची में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा तो न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा। उत्तराखंड में आज  मौसम कैसा रहेगा उत्तराखंड(30 सितंबर-2 अक्टूबर-भारी बारिश-आंधी की संभावना): देहरादून, नैनीताल, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, पिथौरागढ़, चमोली, चपावत, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल और ऋषिकेश में 30 सितंबर की रात से लेकर 2 अक्टूबर के बीच कभी भी भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं, देहरादून में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा तो न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा। हिमाचल में आज  मौसम कैसा रहेगा हिमाचल(30 सितंबर-2 अक्टूबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): मंडी, चंबा, किन्नौर, कुल्लू, सोलन, हमीरपुर, कांगड़ा और बिलासपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, इस दौरान 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से तूफान चलेग। वहीं, मनाली में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। जम्मू-कश्मीर में आज  मौसम कैसा रहेगा जम्मू-कश्मीर(30 सितंबर- 1 अक्टूबर-तेज बारिश-हवा की चेतावनी): उधमपुर, पुलवामा, अनंतनाग, किश्तवाड़, बडगाम, गांदरबलऔर बारामूला में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, श्रीनगर में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। पश्चिम बंगाल में आज  का मौसम कैसा रहेगा     पश्चिम बंगाल (30 सितंबर-भारी बारिश-आंधी का अलर्ट): नादिया, दुर्गापुर, झारग्राम, हावड़ा, हुगली, पश्चिम मेदिनीपुर, मुर्शिदाबाद, अलीपुरद्वार और कोलकाता में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने का अलर्ट है। वहीं, आज  यानी 30 सितंबर को कोलकाता में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक जाएगा। पंजाब में आज  मौसम कैसा रहेगा     पंजाब (30 सितंबर- बारिश-आंधी की चेतावनी): संगरूर, होशियारपुर, कपूरथला, संगरूर, लुधियाना, अमृतसर, बरनाला और फरीदकोट में मध्यम बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलेंगे। राजस्थान में आज  मौसम कैसा रहेगा     राजस्थान (30 सितंबर-2 अक्टूबर -भारी बारिश-आंधी की चेतावनी): जयपुर, सवाई माधोपुर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बूंदी, बीकानेर, अजमेर, सीकर, पाली और उदयपुर में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की संभावना है। वहीं, जयपुर में आज  यानी 30 सितंबर को अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रहेगा तो न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस तक रहेगा। मध्य प्रदेश में आज  मौसम कैसा रहेगा     मध्य प्रदेश … Read more

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच जनरल का बड़ा दावा, ‘अमेरिकी बेस बेकार हो चुके हैं’

तेहरान  ईरान के साथ अमेरिका का तनाव फिलहाल खत्म नहीं होने वाला है। ईरान सेना के ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी का ताजा बयान यह साफ संकेत दे रहा है। ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका के पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा। उसे हार माननी होगी और इस इलाके से निकल जाना होगा। 'अपने बेस को बचा नहीं पाया अमेरिका' हुसैन मोहेब्बी ने कहा कि ईरान का अभियान तभी खत्म होगा, जब अमेरिका यह हकीकत स्वीकार कर लेगा कि वह हार चुका है। बता दें कि मिडिल ईस्ट में तनाव अब पहले से ज्यादा बढ़ गए हैं, यह बयान विवाद को और तूल देने का काम कर सकता है। मोहेब्बी ने बताया कि अमेरिका के सैनिक अड्डे हाल के संघर्ष में खुद को भी नहीं बचा पाए। ज्यादातर अड्डे अब पूरी तरह बेकार हो चुके हैं। उन्हें दोबारा बनाने में इतना खर्च आएगा कि अमेरिका के लिए यह फायदेमंद नहीं रहेगा। ईरान लगातार नए हथियार बना रहा है जनरल ने जोर देकर कहा कि ईरान दुनिया की हर उपलब्ध तकनीक का इस्तेमाल कर नए हथियार डिजाइन कर रहा है। पुराने उपकरणों को अपग्रेड किया जा रहा है और रक्षा प्रणालियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है। इसका मकसद देश और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अगर युद्ध का रूप बदलता है तो ईरान मैदान में और नए हथियार लाएगा। पड़ोसियों का बदल रहा रुख मोहेब्बी ने पड़ोसी देशों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका कभी भी ईरान और उसके पड़ोसियों के बीच पुराने रिश्ते और संचार मार्ग नहीं तोड़ सकता। पड़ोसी देशों को अब समझ आ गया है कि उनके इलाके में अमेरिकी अड्डे सुरक्षा नहीं बल्कि असुरक्षा बढ़ाते हैं। दबाव में नहीं आने वाला ईरान बता दें कि ईरान के उत्तर-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी सीमा क्षेत्रों में अमेरिका ने सशस्त्र समूहों का समर्थन किया था। लेकिन यह कोशिश भी नाकाम रही। जनरल ने बताया कि यह अमेरिका की एक और बड़ी विफलता साबित हुई। ईरान का यह रुख साफ है कि वह दबाव में आने वाला नहीं है। मोहेब्बी के शब्दों में अमेरिका अब इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सक्षम नहीं दिख रहा। नए हथियारों के विकास और पड़ोसियों के साथ मजबूत रिश्तों के चलते ईरान अपनी स्थिति को और मजबूत मान रहा है। हालांकि, अमेरिका की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ईरान के इस रवैये से साफ है कि वह अपने बचाव को लेकर पूरी तरह तैयार है।

इंजन फेल होने के बावजूद Starship ने रचा इतिहास, 26 सैटेलाइट किए लॉन्च

वाशिंगटन स्पेसएक्स के अगली पीढ़ी के रॉकेट स्टारशिप ने सोमवार को पहली बार पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने में सफलता हासिल की। उड़ान के दौरान एक इंजन अचानक बंद हो गया था, जिससे मिशन को बीच में ही छोटा करना पड़ा। इसके बावजूद स्टारशिप ने 26 नई पीढ़ी के स्टारलिंक सैटेलाइट कक्षा में सफलतापूर्वक तैनात किए। इसके बाद मिशन को तय समय से करीब 7 घंटे पहले खत्म कर दिया गया और स्टारशिप ने प्रशांत महासागर में नियंत्रित तरीके से उतरते हुए समुद्र में तेज आग के साथ टचडाउन किया। यह उड़ान टेक्सास के स्टारबेस परिसर से हुई थी और 2023 के बाद स्टारशिप की 14वीं उड़ान थी। यह मिशन 10 घंटे चलने वाला था, लेकिन इंजन में आई दिक्कत के बाद इसे करीब तीन घंटे में ही खत्म कर दिया गया। स्टारशिप का ऊपरी हिस्सा अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद उसके तीन मुख्य इंजनों में से एक समय से पहले बंद हो गया। स्पेसएक्स के प्रवक्ता डैन हुओट ने पहले कहा कि इस स्थिति में यान को कक्षा तक भेजने का फैसला नहीं किया जाएगा। हालांकि, इंजीनियरों से मिले अपडेट के बाद उन्होंने कुछ मिनट में बताया कि स्टारशिप अभी भी इंजन फायरिंग के जरिए कक्षा तक पहुंच सकता है। इसके बाद यान ने सफलतापूर्वक यह प्रक्रिया पूरी की। करीब 40 मंजिल ऊंचा यान है स्टारशिप करीब 269 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्टारशिप ने एक-एक करके 26 नई पीढ़ी के स्टारलिंक सैटेलाइट छोड़े। एलन मस्क ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि सभी 26 सैटेलाइट सफलतापूर्वक तैनात हो गए और सामान्य तरीके से काम कर रहे हैं। स्टारशिप करीब 40 मंजिल ऊंचा यान है, जिसमें सुपर हेवी बूस्टर के ऊपर मुख्य स्टारशिप यान लगा होता है। उड़ान के दौरान सुपर हेवी ने स्टारशिप को अंतरिक्ष तक पहुंचाया और फिर खुद समुद्र में नियंत्रित तरीके से उतरा। हालांकि, उसके कुछ इंजन नीचे आते समय काम करना बंद कर गए। कितना मुश्किल रहा अब तक का सफर स्टारशिप का प्रशांत महासागर में उतरना भी योजना के मुताबिक नियंत्रित था। यान ने समुद्र की सतह से टकराने से पहले अपने थ्रस्टर की मदद से खुद को सीधा किया और समुद्र में पहुंचा। इसके बाद उसके निचले हिस्से में आग लग गई और यान एक तरफ झुक गया। स्पेसएक्स ने इस मिशन के बाद स्टारशिप को समुद्र से वापस निकालने की योजना नहीं बनाई थी। कंपनी के लिए यह सफलता इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे पहले 2023 से हुई स्टारशिप की सभी 13 परीक्षण उड़ानें सिर्फ सबऑर्बिटल चरण तक सीमित रही थीं। स्टारशिप को भविष्य में स्टारलिंक सैटेलाइट तेजी से लॉन्च करने और नासा के चंद्र मिशनों में इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा रहा है।

यात्रियों के लिए जिलों में सुविधायुक्त बस स्टैंड और अन्य प्रबंध किए जाएं

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नागरिकों के हित में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरूआत की गई है। प्रदेश में वर्ष 2005 में राज्य परिवहन निगम बंद किया गया था। राष्ट्रवादी विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती, 25 सितम्बर से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन की शुरूआत हुई है, जिसका निरंतर विस्तार किया जाएगा। अगले पांच वर्ष में 14 हजार 981 बसों के संचालन का लक्ष्य है। इस सेवा में पूर्व से संचालित फिट बसों का उपयोग भी किया जा रहा है, अत: नागरिकों सहित किसी को भी भ्रमपूर्ण जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंर्तगत नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास के संबंध में जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक को वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा निर्देशित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सेवा संकल्प माह के अंतर्गत प्रारंभ इस सुविधा से स्थानीय प्रशासन द्वारा यात्रियों को व्यवस्थित बस संचालन का लाभ दिलवाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। संबंधित जिलों में प्रशासन के स्तर पर नागरिकों और बस आपरेटर्स को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। सेवा के प्रदेशव्यापी विस्तार के साथ सभी जिलों में प्रशासनिक अमला नागरिकों की सुविधा के लिए सजग भूमिका का निर्वहन करेगा। वर्तमान में जिन रूट्स पर बसों का संचालन किया जा रहा है वहां मैदानी अमले द्वारा सहयोगी रवैया अपनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन स्थानों पर बस डिपो या टर्मिनल बंद स्थिति में हो तो उन्हें स्वच्छता अभियान चलाकर और बैठक एवं अन्य सुविधाओं का विकास कर उपयोगी बनाया जाए। जहां स्टाप या बस स्टैंड खत्म हो चुके हैं वहां भूमि उपलब्ध करवाकर यह सुविधा विकसित की जाए। परमिट के अलावा जो बसें चल रही हैं उनके व्यवस्थित और अनुशासित संचालन को प्राथमिकता दी जाए। निजी बस ऑपरेटरों के फिटनेस, परमिट की शर्तें, ड्राइवर का बस संचालन और व्यवहार के लिए मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। क्षेत्रीय कंपनियों के साथ शहरों में आवश्यक अधोसंरचना विकास के लिए स्थानीय प्रशासन सहयोग करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसों के बाधारहित संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग दिलवाया जाए। इसके साथ ही जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति की नियमित बैठकें की जाएं। जिला कलेक्टर टीएल बैठक में क्षेत्रीय कंपनी के ईडी से भी प्रत्येक सप्ताह चर्चा करें।राज्य परिवहन उपक्रम की ओर से सभी जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों के समक्ष रूट प्रस्तुतिकरण और सुझाव प्राप्त करने की काईवाई भी सुनिश्चित की जाए। आम जनता के हित में सभी एजेंसियों के बीच परस्पर आवश्यक संवाद रहे। परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ दिलवाने के लिए निजी बस ऑपरेटरों को आवश्यक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यात्रियों से प्राप्त सुझावों पर भी प्रशासन की ओर से जरूरी प्रबंध किए जाएं। मुख्य सचिव  अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। परिवहन क्षेत्र में यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले इसलिए बस ऑपरेटर्स से प्रशासन का नियमित संवाद हो। विभिन्न तरह की भ्रांतियां को समाप्त किया जाए। जो पूर्व से संचालित फिट बसें हैं, उनका संचालन किया जा रहा है। अनेक आधुनिक तकनीक भी अपनाई गई हैं, जिसमें यात्री एप के माध्यम से यात्रा के संबंध में बेहतर प्लान कर यात्रा कर सकता है। परिवहन सचिव  मनीष सिंह ने प्रजेंटेशन में बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं- बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर। वर्तमान में प्रारंभ की गई बसों की संख्या निरंतर बढ़ाई जाएगी। यात्रियों को लाभान्वित करने के साथ निजी ऑपरेटर को उसके कार्य और व्यवसाय का जायज लाभ हो, इसका ध्यान रखा गया है। राज्य परिवहन उपक्रम के लिए भोपाल में कार्यालय की व्यवस्था की गई है। आने वाले तीन माह में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए शत-प्रतिशत कार्यालय भवन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए कार्यालय भवन की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए आवश्यक कुल 1190 में से 400 पदों के लिए नियुक्ति की कार्रवाई भी पूर्ण की जाएगी। विशेषज्ञ पद भी भरे जाएंगे। प्रदेश में गत 10 माह में यात्री संख्या और रूट सर्वे के माध्यम से जो आकलन किया गया और आवश्यक बसों की संख्या का अनुमान लगाया गया उसके अनुसार प्रदेश में सात क्षेत्र में 3636 मार्गो पर 13006 बसों की व्यवस्था की जाना है। चरणबद्ध विस्तार भी किया जाएगा। वर्ष 2031 तक प्रदेश में 14981 बसों के संचालन में सफलता मिलेगी। राज्य स्तरीय आईटीएमएस प्लेटफार्म एक विशेष सुविधा है। चलो मोबिलिटी के अंतर्गत आईटीएमएस का अंतरिम रूप से प्रयोग करते हुए आवश्यक माड्यूल निर्धारित किए गए हैं। परिवहन सचिव  मनीष सिंह ने सुगम बस संचालन के लिए अधोसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं की भी जानकारी दी।