samacharsecretary.com

दवा की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ₹3,000 की मेडिसिन ₹27,000 में बिकने पर सवाल

नई दिल्ली दवाओं की बढ़ती और मनमानी कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दवाओं की मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) और रिटेलर को मिलने वाली कीमत (PTR) के बीच भारी अंतर पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सुनवाई के दौरान एक इंजेक्शन का उदाहरण दिया गया, जिसकी रिटेलर कीमत करीब 3,520 रुपये है, लेकिन उसकी MRP 22,437 रुपये तय है. इसी तरह करीब 3 हजार रुपये की कैंसर दवा की MRP 27 हजार रुपये बताई गई।  बेंच ने हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर इस भारी अंतर का पैसा किसकी जेब में जा रहा है? इसके साथ ही, कोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों में इन-हाउस केमिस्ट से ही दवा खरीदने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए और ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत मार्जिन की 16 फीसदी सीमा तय करने का सुझाव दिया।  पीठ के सामने उदाहरण रखा गया कि 22,437 रुपये MRP वाली एक इंजेक्शन की कीमत रिटेलर के लिए करीब 3,520 रुपये है। इसी तरह करीब 27,000 रुपये MRP वाली कैंसर की दवा का प्राइस-टू-रिटेलर लगभग 3,000 रुपये बताया गया। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने सवाल किया कि कीमतों के बीच इतना बड़ा अंतर आखिर किसकी जेब में जा रहा है। अस्पताल की फार्मेसी पर भी सवाल कोर्ट ने अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि मरीजों को अक्सर अस्पताल की अपनी केमिस्ट से ही दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यदि कोई मरीज बाहर से वही दवा कम कीमत पर खरीदकर लाता है तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाने या अस्पताल की ओर से इलाज को लेकर दबाव बनाए जाने की स्थिति पैदा हो सकती है। जस्टिस मेहता ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज आखिर क्या करे। सुनवाई के दौरान उन्होंने अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की। सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं जस्टिस मेहता ने आगे कहा कि सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि कई कॉर्पोरेट अस्पताल यह जरूरी कर देते हैं कि दवाइयां उन्हीं के केमिस्ट या किसी खास फ़ार्मेसी से खरीदी जाएं, और अगर मरीज़ उन्हें बाहर से खरीदता है, तो वे इलाज की गारंटी नहीं देते।  "अगर कोई मरीज सरकारी स्कीम के तहत इलाज करवा रहा है, तो उसका खर्च कौन उठाता है? टैक्स देने वाला. तो फिर सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं?" 16 परसेंट मार्जिन क्यों नहीं उन्होंने कहा, "DPCO के मुताबिक मार्जिन 16 परसेंट होना चाहिए. हर दवा 'ज़रूरी चीज़ों के कानून' (Essential Commodities Act) के दायरे में आती है. हमें समझ नहीं आता कि उनसे कीमतें इस तरह तय करने के लिए क्यों कहा जाता है।  जस्टिस मेहता ने सॉलिसिटर जनरल से यह भी कहा कि अगर कोई ऐसा फ़ार्मासिस्ट मिल जाए जो बहुत दयालु हो और जरूरतमंद को 2,700 रुपये में दवा देने को तैयार हो, तो मरीज़ सोचने लगेगा कि दवा असली है या नकली।  पैसा कहां जाता है "सवाल यह है कि कीमत में 10 गुना बढ़ोतरी क्यों? इतना सारा पैसा कहां जाता है? इससे किसे फ़ायदा हो रहा है?" "आखिरकार नुकसान ईमानदार टैक्सपेयर का ही होता है. हम इस मामले की अच्छी तरह से जांच करेंगे. इसका असर समाज के एक बड़े हिस्से पर पड़ता है," बेंच ने कहा. उन्होंने आगे कहा कि पहले तो दवाओं की कीमत का मामला है और फिर मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के नैतिक तौर-तरीकों का।  मेहता ने आगे कहा कि फार्मा कंपनियों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है और ऐसा लगता है कि फायदा प्राइवेट अस्पतालों को हो रहा है।  जस्टिस मेहता ने कहा कि बिना किसी कॉम्बिनेशन वाली साधारण स्टेटिन की कीमत 40 रुपये है और एस्पिरिन के साथ कॉम्बिनेशन होने पर इसकी कीमत 70 रुपये हो जाती है।  "ऐसा कैसे हो रहा है? कॉर्पोरेट अस्पताल तो इंडस्ट्री हैं. यह कोई सेवा नहीं है. आम आदमी को यह सब क्यों भुगतना पड़े?" बेंच ने सॉलिसिटर जनरल से कहा।  सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा कि याचिकाकर्ता गलत हैं, लेकिन कोई ऐसा तरीका निकालना होगा जिससे सभी पक्षों के हितों में संतुलन बना रहे. जैसा कि मैं समझता हूं, फार्मा कंपनियों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है।  2 याचिकाओं पर सुनवाई बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए तय की और कहा कि वह इस मुद्दे पर केंद्र का जवाब सुनेगी।  सुप्रीम कोर्ट दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था. जिसमें एक याचिका किशनचंद जैन की थी. ये याचिका इस बात पर ज़ोर देती हैं कि जहां 'शेड्यूल्ड' दवाओं की कीमतें तय (सीलिंग) होती हैं, वहीं 'नॉन-शेड्यूल्ड' दवाओं (जो बाज़ार में संख्या और मूल्य के हिसाब से लगभग 80% या उससे ज़्यादा हैं) के मामले में निर्माताओं को MRP तय करने की ज़्यादा आज़ादी होती है, बस उन्हें सालाना 10% तक की बढ़ोतरी की सीमा का पालन करना होता है।  22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की ज़रूरी दवाओं की ज़्यादा कीमतों पर हैरानी जताई और इसे मरीज़ों के साथ "दिन-दहाड़े डकैती" करार दिया था.  कोर्ट ने गौर किया कि एक दवा की MRP 27,000 रुपये थी, जबकि वह खुदरा विक्रेताओं को 2,700 रुपये में सप्लाई की जा रही थी।  कोर्ट ने सवाल किया कि मरीजों को इस तरह कैसे ठगा जा सकता है और कहा, "यह बहुत हैरानी की बात है कि जिन अधिकारियों को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए, वे चुप हैं।  एक याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे फार्मा कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं द्वारा ज़रूरी दवाओं की कथित अनैतिक रूप से ज़्यादा कीमतें वसूलने पर रोक लगाकर दवाओं को सस्ता बनाएं।  दूसरी याचिका में उन डॉक्टरों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है जो मरीज़ों को जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं।   हर दवा पर 16% मार्जिन का सुझाव पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि आवश्यक और गैर-आवश्यक दवाओं के बीच अंतर क्यों रखा जाए और कई दवाओं को Drugs (Prices Control) Order (DPCO) के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि सभी दवाओं पर MRP के स्तर पर 16 प्रतिशत मार्जिन तय करने की व्यवस्था … Read more

MP में सुगम परिवहन सेवा का होगा विस्तार, CM यादव ने दिए निर्देश

प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का होगा निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव यात्रियों के लिए जिलों में सुविधायुक्त बस स्टैंड और अन्य प्रबंध किए जाएं मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की व्यवस्थाएं बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के नागरिकों के हित में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरूआत की गई है। प्रदेश में वर्ष 2005 में राज्य परिवहन निगम बंद किया गया था। राष्ट्रवादी विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती, 25 सितम्बर से प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन की शुरूआत हुई है, जिसका निरंतर विस्तार किया जाएगा। अगले पांच वर्ष में 14 हजार 981 बसों के संचालन का लक्ष्य है। इस सेवा में पूर्व से संचालित फिट बसों का उपयोग भी किया जा रहा है, अत: नागरिकों सहित किसी को भी भ्रमपूर्ण जानकारी पर विश्वास नहीं करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंर्तगत नागरिकों की सुविधा के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास के संबंध में जिलों के कलेक्टर्स और पुलिस अधीक्षक को वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा निर्देशित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सेवा संकल्प माह के अंतर्गत प्रारंभ इस सुविधा से स्थानीय प्रशासन द्वारा यात्रियों को व्यवस्थित बस संचालन का लाभ दिलवाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। संबंधित जिलों में प्रशासन के स्तर पर नागरिकों और बस आपरेटर्स को आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए। सेवा के प्रदेशव्यापी विस्तार के साथ सभी जिलों में प्रशासनिक अमला नागरिकों की सुविधा के लिए सजग भूमिका का निर्वहन करेगा। वर्तमान में जिन रूट्स पर बसों का संचालन किया जा रहा है वहां मैदानी अमले द्वारा सहयोगी रवैया अपनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिन स्थानों पर बस डिपो या टर्मिनल बंद स्थिति में हो तो उन्हें स्वच्छता अभियान चलाकर और बैठक एवं अन्य सुविधाओं का विकास कर उपयोगी बनाया जाए। जहां स्टाप या बस स्टैंड खत्म हो चुके हैं वहां भूमि उपलब्ध करवाकर यह सुविधा विकसित की जाए। परमिट के अलावा जो बसें चल रही हैं उनके व्यवस्थित और अनुशासित संचालन को प्राथमिकता दी जाए। निजी बस ऑपरेटरों के फिटनेस, परमिट की शर्तें, ड्राइवर का बस संचालन और व्यवहार के लिए मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारी से नियमित निरीक्षण की व्यवस्था की जाए। क्षेत्रीय कंपनियों के साथ शहरों में आवश्यक अधोसंरचना विकास के लिए स्थानीय प्रशासन सहयोग करे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बसों के बाधारहित संचालन के लिए थाना पुलिस और ट्रैफिक पुलिस का सहयोग दिलवाया जाए। इसके साथ ही जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति की नियमित बैठकें की जाएं। जिला कलेक्टर टीएल बैठक में क्षेत्रीय कंपनी के ईडी से भी प्रत्येक सप्ताह चर्चा करें।राज्य परिवहन उपक्रम की ओर से सभी जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समितियों के समक्ष रूट प्रस्तुतिकरण और सुझाव प्राप्त करने की काईवाई भी सुनिश्चित की जाए। आम जनता के हित में सभी एजेंसियों के बीच परस्पर आवश्यक संवाद रहे। परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ दिलवाने के लिए निजी बस ऑपरेटरों को आवश्यक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यात्रियों से प्राप्त सुझावों पर भी प्रशासन की ओर से जरूरी प्रबंध किए जाएं। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा मध्यप्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना है। परिवहन क्षेत्र में यात्रियों को बेहतर सुविधा मिले इसलिए बस ऑपरेटर्स से प्रशासन का नियमित संवाद हो। विभिन्न तरह की भ्रांतियां को समाप्त किया जाए। जो पूर्व से संचालित फिट बसें हैं, उनका संचालन किया जा रहा है। अनेक आधुनिक तकनीक भी अपनाई गई हैं, जिसमें यात्री एप के माध्यम से यात्रा के संबंध में बेहतर प्लान कर यात्रा कर सकता है। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने प्रजेंटेशन में बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तीन प्रमुख स्तंभ हैं- बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर। वर्तमान में प्रारंभ की गई बसों की संख्या निरंतर बढ़ाई जाएगी। यात्रियों को लाभान्वित करने के साथ निजी ऑपरेटर को उसके कार्य और व्यवसाय का जायज लाभ हो, इसका ध्यान रखा गया है। राज्य परिवहन उपक्रम के लिए भोपाल में कार्यालय की व्यवस्था की गई है। आने वाले तीन माह में भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सागर में क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए शत-प्रतिशत कार्यालय भवन उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही जबलपुर, रीवा और ग्वालियर में भी क्षेत्रीय सहायक कंपनियों के लिए कार्यालय भवन की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए आवश्यक कुल 1190 में से 400 पदों के लिए नियुक्ति की कार्रवाई भी पूर्ण की जाएगी। विशेषज्ञ पद भी भरे जाएंगे। प्रदेश में गत 10 माह में यात्री संख्या और रूट सर्वे के माध्यम से जो आकलन किया गया और आवश्यक बसों की संख्या का अनुमान लगाया गया उसके अनुसार प्रदेश में सात क्षेत्र में 3636 मार्गो पर 13006 बसों की व्यवस्था की जाना है। चरणबद्ध विस्तार भी किया जाएगा। वर्ष 2031 तक प्रदेश में 14981 बसों के संचालन में सफलता मिलेगी। राज्य स्तरीय आईटीएमएस प्लेटफार्म एक विशेष सुविधा है। चलो मोबिलिटी के अंतर्गत आईटीएमएस का अंतरिम रूप से प्रयोग करते हुए आवश्यक माड्यूल निर्धारित किए गए हैं। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने सुगम बस संचालन के लिए अधोसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं की भी जानकारी दी।  

भोपाल में रिटायर्ड IAS का मर्डर, गला रेतकर हत्या से सनसनी; नौकर लापता

भोपाल  राजधानी भोपाल में खौफनाक घटना सामने आई है। यहां 70 साल के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की बुधवार को उनके घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस घटना की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि रातीबड़ थाना क्षेत्र के सूरज नगर में घटना की सूचना सुबह करीब पांच बजे पुलिस को मिली। रातीबड़ पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि अग्रवाल अपनी पत्नी के साथ घर में रहते थे और घटना के समय उनकी पत्नी दूसरे कमरे में सो रही थीं। 2 दिन पहले ही रखा था नया नौकर इस घटना की जानकारी देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में घर में काम करने वाले एक घरेलू सहायक पर संदेह जताया गया है, जो घटना के बाद से लापता है। उन्होंने बताया कि अग्रवाल के घर में दो दिन पहले ही नया नौकर रखा गया था और वह घटना के बाद से लापता है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और संदिग्ध की तलाश की जा रही है। हत्या के कारण और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं का पता लगाने के लिए भी जांच जारी है। घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। इस मामले में भोपाल पुलिस घर में और घर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद भी ले रही है। इससे पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के बाद से लापता चल रहा नौकर कहां गया और कब घर से निकला था। इस दौरान पुलिस घटना के समय हुई हरकतों के माध्यम से मामले का खुलासा करने की कोशिश कर रही है। नए नौकर पर शक, वारदात के बाद से गायब जानकारी के मुताबिक राकेश अग्रवाल अपनी पत्नी के साथ सूरजनगर स्थित घर में रहते थे. घर के अंदर ही उनका शव मिला. प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि उनकी हत्या गला रेतकर की गई है. वारदात के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।  पुलिस की शुरुआती जांच में घर पर काम करने वाले एक नौकर पर शक जताया जा रहा है. बताया जा रहा है कि राकेश अग्रवाल के घर पर करीब दो दिन पहले ही एक नया नौकर रखा गया था. वारदात के बाद से यह नौकर घर से गायब है. इसी वजह से पुलिस की जांच की दिशा फिलहाल उस नौकर के इर्द-गिर्द घूम रही है।  पड़ोसियों से भी पूछताछ कर रही पुलिस घटना की जानकारी मिलने के बाद फोरेंसिक और दूसरी पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए शहर में कई टीमों को जांच करने में लगा दिया गया है। पुलिस इस घटना के बाद से लापता चल रहे नौकर की तलाश कर रही है। इस दौरान पड़ोसियों के साथ भी पुलिस पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के दौरान उनके घर में या आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि दिखी थी या नहीं। घटना के बाद पहुंची पुलिस की टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का पूरा शक घर में दो दिन पहले आए नौकर पर ही है। ऐसे में अब पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या नौकर ने इस घटना को अकेले अंजाम दिया है या कोई और भी नौकर के साथ इस घटना को अंजाम देने में शामिल था। पुलिस की कार्रवाई और जांच गौरतलब है कि पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें फरार संदिग्ध नौकर की तलाश में जुटी हुई हैं। पुलिस हत्या के पीछे की असल वजह रंजिश, लूटपाट या कोई अन्य विवाद का पता लगाने के लिए हर एंगल से जांच कर रही है। इसके अलावा फॉरेंसिक टीम (FSL) ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है।

पूर्व अग्निवीरों के लिए MP सरकार का बड़ा ऐलान, 20% आरक्षण

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने अग्निवीरों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने पूर्व अग्निवीरों को वर्दी वाली सेवाओं में 20 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया है। इसके साथ ही 24,500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न योजनाओं एवं परियोजनाओं को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। ये फैसले मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में किए गए। राज्य सरकार के इस फैसले का सीधा फायदा उन युवाओं को मिलेगा जो केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निवीर के रूप में अपनी सेवा पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करते हैं। राज्य सरकार ने क्या बताया? राज्य सरकार के एक अफसर ने बताया कि युवाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पुलिस आरक्षक, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वनरक्षक और आबकारी आरक्षक जैसी वर्दी वाली सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 फीसदी आरक्षण देने को मंजूरी दे दी गई। अफसर के मुताबिक, गृह विभाग के तहत आरक्षक (सामान्य ड्यूटी) के पदों पर भर्ती में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। किसे कितना आरक्षण मिलेगा? अफसर के मुताबिक, विशेष सशस्त्र बल में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, कारागार विभाग के तहत जेल प्रहरियों की नियुक्ति में होमगार्ड को 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों को पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने बताया है कि वनरक्षकों की नियुक्ति में भी होमगार्ड के लिए 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। अधिकारी ने बताया कि वाणिज्यिक कर विभाग के तहत आबकारी आरक्षकों की नियुक्ति में होमगार्ड को 10 फीसदी, पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी और पूर्व अग्निवीरों को 20 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया गया है। अग्निवीरों के लिए दो राज्यों से गुड न्यूज आई। मध्य प्रदेश सरकार ने ऐलान किया कि वह पूर्व अग्निवीरों को वर्दी वाली नौकरियों में 20 फीसदी आरक्षण देगी। वहीं महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की है कि नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच सेवा मुक्त हो रहे अग्निवीरों के पहले बैच को बिना किसी लिखित परीक्षा के सीधे पुलिस और सुरक्षा बलों में नौकरी दी जायेगी। महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि पहले बैच के सेवानिवृत्त अग्निवीरों को महाराष्ट्र पुलिस, राज्य रिजर्व पुलिस बल और अग्निशमन सेवाओं में सीधे समायोजित किया जाएगा। पात्र उम्मीदवारों को नयी लिखित परीक्षा से छूट मिलेगी, चार साल की आयु में छूट दी जाएगी और अगर जरूरी हुआ तो विशेष रूप से बनाए गए पदों पर समायोजित किया जाएगा। एमपी में कहां कहां अग्निवीरों को आरक्षण एमपी सरकार के अधिकारी ने बताया कि युवाओं के सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए पुलिस आरक्षक, विशेष सशस्त्र बल, जेल प्रहरी, वनरक्षक और आबकारी आरक्षक जैसी वर्दी वाली सेवाओं में पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 फीसदी आरक्षण देने को मंजूरी दी गई। गृह विभाग के तहत आरक्षक (सामान्य ड्यूटी) के पदों पर भर्ती में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। उन्होंने बताया कि विशेष सशस्त्र बल में होमगार्ड के लिए 10 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अधिकारी के अनुसार कारागार विभाग के तहत जेल प्रहरियों की नियुक्ति में होमगार्ड को 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों को पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वनरक्षकों की नियुक्ति में भी होमगार्ड के लिए 15 प्रतिशत, पूर्व सैनिकों के लिए पांच प्रतिशत और पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण होगा। अधिकारी ने बताया कि वाणिज्यिक कर विभाग के तहत आबकारी आरक्षकों की नियुक्ति में होमगार्ड को 10 फीसदी, पूर्व सैनिकों को पांच फीसदी और पूर्व अग्निवीरों को 20 फीसदी आरक्षण देने का फैसला किया गया है। जनवरी 2027 तक 19 हजार से अधिक अग्निवीर घर लौट रहे केंद्र की ओर से 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत सशस्त्र बलों में भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि चार वर्ष है। योजना के तहत 25 फीसदी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त किया जाता है। यानी 75 फीसदी को वापस घर भेज दिया जाता है। अब सेना से अग्निवीरों का पहला बैच जनवरी 2027 में सेवामुक्त होने जा रहा है, जिसमें 19 हजार से अधिक अग्निवीर शामिल हैं। इनका चार साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। सेवामुक्त (75 प्रतिशत) होने वाले अग्निवीरों के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने विभिन्न विभागों में ने आरक्षण और प्राथमिकताओं का प्रावधान किया है। अग्निवीरों को बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और असम राइफल्स में सिपाही तथा राइफलमैन के पदों पर 50% आरक्षण। इन्हें लिखित परीक्षा, शारीरिक मानक परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षा से भी छूट मिलेगी। भारतीय रेलवे: श्रेणी-2 और उससे ऊपर के पदों में 5 प्रतिशत और श्रेणी-1 के पदों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण पूर्व अग्निवीरों के लिए निर्धारित किया गया है। अफसरों ने बताया कि हॉरिजॉन्टल आरक्षण सभी श्रेणियों यानी सामान्य वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में लागू होता है। 2022 में शुरू की गई थी अग्निपथ योजना केंद्र की ओर से 2022 में शुरू की गई अग्निपथ योजना के तहत सशस्त्र बलों में भर्ती होने वाले अग्निवीरों की सेवा अवधि चार वर्ष है, जिसमें छह महीने का प्रशिक्षण शामिल है। योजना के तहत 25 फीसदी अग्निवीरों को सशस्त्र बलों में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी 75 प्रतिशत को सेवा से मुक्त कर दिया जाता है। चार साल की सेवा पूरी कर दिसंबर 2026 में अग्निवीर अपने घरों, अपने परिवारों और अपने प्रियजनों के बीच लौटने वाले हैं। ये वे हजारों युवा पुरुष और महिलाएं हैं, जिन्होंने भारतीय सेना का हिस्सा बनने के लिए चार साल की अवधि के लिए भर्ती होने का विकल्प चुना था।

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में एनकाउंटर, लश्कर का टॉप आतंकी मूसा मारा गया

बडगाम   मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के ऊंचाई वाले इलाके में राष्ट्रीय राइफल्स के साथ मुठभेड़ में एक आतंकी का एनकाउंटर किया गया। मारा गया आतंकी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का एक सबसे वांछित आतंकवादी थी। सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर स्थित चिनार कोर ने मारे गए आतंकवादी की पहचान का खुलासा नहीं किया, लेकिन अधिकारियों ने उसकी पहचान सुलेमान शाह उर्फ ‘मूसा’ के रूप में की। सेना ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि उसने अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मध्य कश्मीर के कोराग, यूसमर्ग के सामान्य क्षेत्र में अभियान शुरू किया था।सेना ने कहा, 'सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद भीषण गोलीबारी हुई, जिसमें एक आतंकवादी को मार गिराया गया।' यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ में भाग निकला था मूसा अधिकारियों ने बताया कि अभियान अभी जारी है और इस दौरान वन क्षेत्र दूधपथरी में हुई मुठभेड़ में ‘मूसा’ मारा गया। उन्होंने कहा कि कई वर्षों से पीर पंजाल पर्वतमाला के दोनों ओर हुए कई हमलों में शामिल होने के कारण वांछित मूसा इस महीने की शुरुआत में यूसमर्ग की पहाड़ियों में हुई मुठभेड़ से बच निकला था। यासिर का साथी था मूसा सूत्रों ने यह भी बताया है कि मूसा, लश्कर के आतंकवादी यासिर का साथी था. यासिर को इसी महीने की शुरुआत में (4 सितंबर को) ऊंचे पहाड़ों पर 13 दिन तक चले ऑपरेशन के बाद यूसमर्ग के पास के इलाके में मार गिराया गया था।  पुलिस और सुरक्षा रिकॉर्ड के अनुसार, यासिर एक 'हाई-वैल्यू टारगेट' था और उस पर इलाके में कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल होने का आरोप था, जिनमें पुंछ में IAF काफिले पर हमला और सोनमर्ग, बोटा पाथरी और भट्टा डुरियन में हुए हमले शामिल हैं।  यासिर के मारे जाने के बाद से अलर्ट यासिर के एनकाउंटर के बाद, सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर थे और उसके साथ यात्रा कर रहे अन्य साथियों का पता लगाने के लिए घने पीर पंजाल जंगलों में तलाशी अभियान जारी रखे हुए थे।  J&K पुलिस के मुताबिक, यह मुठभेड़ तब हुई जब सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम ने इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की पक्की जानकारी मिलने के बाद घेराबंदी और तलाशी अभियान चलाया।  अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही बल उस संदिग्ध जगह पर पहुंचे, छिपे हुए आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई. सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में एक अज्ञात आतंकवादी मारा गया और ऑपरेशन अभी भी जारी है।  भारतीय सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने एक्स पर लिखा, "खुफिया जानकारी के आधार पर, भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने यूसमर्ग के कोराग इलाके में एक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया।  उन्होंने लिखा, ''सतर्क जवानों ने संदिग्ध गतिविधि देखी और चुनौती देने पर आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे ज़बरदस्त गोलीबारी हुई और इस दौरान एक आतंकवादी को मार गिराया गया।  करीबी सहयोगी का पहले हो चुका एनकाउंटर अधिकारियों के अनुसार, उसका करीबी सहयोगी यासिर पांच सितंबर को हुई उस मुठभेड़ में मारा गया था। अधिकारियों ने कहा कि मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। CRPF और BSF ने चलाया था अभियान अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध गतिविधियों की खबरों के बाद मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के राजौरी, पुंछ और कठुआ ज़िलों में लगभग एक दर्जन जगहों पर सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया है। इन तीनों जिलों के दूर-दराज़ और जंगली इलाकों में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, CRPF और BSF मिलकर तलाशी अभियान चला रहे हैं। राजौरी में कालाकोट के पीर खाना, पोथा नरोटा और अंध गांवों में, और सुंदरबनी के ठंडा पानी और कंसार में तलाशी की गई। कठुआ में सुरक्षा बल पंजवारी, कठेरा और आस-पास के इलाकों में तलाशी ली पुंछ में, यह अभियान मेंढर सेक्टर के अपर कसबलारी, थेराटोपा, नागल गली, कालाबन और पटनातीर इलाकों में चलाया गया। ऑपरेशन जारी रहने के दौरान अधिकारियों ने कहा कि गोलीबारी के दौरान दूधपथरी के दूर के जंगल वाले इलाके में ‘मूसा’ मारा गया. अधिकारियों ने बताया कि मूसा पिछले कई सालों में पीर पंजाल रेंज के दोनों तरफ हुए कई हमलों में शामिल होने के लिए वॉन्टेड था।  इस महीने की शुरुआत में यूसमर्ग पहाड़ियों में हुए एक एनकाउंटर से वह बच निकला था. उसका करीबी यासिर 5 सितंबर को उस एनकाउंटर में मारा गया था. अधिकारियों ने कहा कि मूसा का मारा जाना जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। 

राजभर ने अखिलेश से पूछा- ‘राज्यसभा के तीनों प्रत्याशी आपके PDA वाले होंगे या परिवार, दौलतमंद और अपराधी जाएंगे?’

राजभर का अखिलेश पर हमला- ‘PDA में परिवार, दौलतमंद और अपराधियों को राज्यसभा भेजने की जुगत में लगे हैं’ राजभर ने अखिलेश से पूछा- ‘राज्यसभा के तीनों प्रत्याशी आपके PDA वाले होंगे या परिवार, दौलतमंद और अपराधी जाएंगे?’ ‘पहला प्रोफेसर साहब, ये PDA वाले परिवार से हो गए; अब D और A से कौन होगा?’ राजभर का अखिलेश पर तंज अखिलेश के PDA फॉर्मूले पर राजभर का सवाल- ‘D से दौलतमंद और A से कोई अपराधी होगा क्या?’ ‘पिछड़े, दलित और मुसलमान जानना चाहते हैं’, राजभर बोले- ‘PDA में परिवार, दौलतमंद और अपराधियों को संसद भेजने की जुगत कैसे?’ राजभर की अखिलेश को सीधी सलाह- ‘तीन राज्यसभा प्रत्याशियों के चक्कर में दूसरा मत गंवा दीजिएगा’ लखनऊ  उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से तीन प्रत्याशी उतारने की चर्चा के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव के ‘PDA’ फॉर्मूले पर सवाल उठाते हुए राज्यसभा के प्रत्याशियों को लेकर सीधे निशाना साधा। राजभर ने अपनी पोस्ट की शुरुआत अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए की। उन्होंने लिखा, ‘अखिलेश जी, सुना है आप राज्यसभा के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में उतारने जा रहे हैं। ये बताइए, तीनों आपके ‘पीडीए’ वाले होंगे या नहीं?’ ‘पहला तो प्रोफेसर साहब हैं, ये आपके PDA वाले परिवार से हो गए’ राजभर ने आगे सपा के संभावित प्रत्याशियों में प्रोफेसर रामगोपाल यादव के नाम की चर्चा का हवाला देते हुए तंज कसा। उन्होंने लिखा, ‘पहला तो प्रोफेसर साहब हैं। ये आपके पीडीए वाले ‘परिवार’ से हो गए। अब ‘डी’ और ‘ए’ से कौन होगा?’ इसके बाद राजभर ने PDA की व्याख्या को लेकर तंज कसते हुए सवाल किया कि ‘डी से कोई ‘दौलतमंद’ होगा क्या? ए से कोई ‘अपराधी’?’ ‘पिछड़े, दलित और मुसलमान जानना चाहते हैं PDA में परिवार-दौलतमंद-अपराधी कैसे?’ राजभर ने अपनी पोस्ट में अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले को सीधे पिछड़े, दलित और मुस्लिम समाज से जोड़ते हुए लिखा कि ‘सभी पिछड़े वर्ग के लोग, दलित भाई और मुसलमान भाई जानना चाह रहे हैं कि आपके पीडीए में परिवार, दौलतमंद और अपराधियों को कैसे आप संसद के ऊपरी सदन भेजने की जुगत में लगे हैं।’ ‘तीन के चक्कर में दूसरा मत गंवा दीजिएगा’ राजभर ने अपनी पोस्ट के आखिर में अखिलेश यादव को राज्यसभा चुनाव के गणित को लेकर भी सलाह दी। उन्होंने लिखा, ‘आख़िर में एक और सलाह है। तीन के चक्कर में दूसरा मत गंवा दीजिएगा।’

MP में सफल हो रहा सेवा संकल्प अभियान 2026, 3-4 अक्टूबर को लगेंगे शिविर

प्रदेश में सफल हो रहा है सेवा संकल्प अभियान 2026: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में सेवा सेतु अभियान के अंतर्गत 3 और 4 अक्टूबर को गावों और शहरों में लगेंगे शिविर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्पन्न गतिविधियों की जानकारी लेकर आगामी कार्यक्रमों के संबंध में दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस से प्रारंभ एक माह के सेवा संकल्प अभियान:2026 की गतिविधियों को अच्छी सफलता मिल रही है। अभियान में गत 12 दिवस अनेक अभिनव कार्य सम्पन्न हुए हैं। अभियान के शेष दिनों में ऐसे ही रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित होंगे जिससे जन-जन को जोड़ने का कार्य होगा। जनकल्याण की दिशा में जहां मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं वहीं सेवा संकल्प अभियान 2026 ने नागरिकों में उत्साह का संचार किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत हुई विभिन्न गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की और अधिकारियों को अभियान की गतिविधियां जारी रखने के निर्देश दिए। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, मंत्रीगण प्रह्लाद पटेल, विजय शाह, विश्वास सारंग, नागर सिंह चौहान, उदय प्रताप सिंह, सुनिर्मला भूरिया, श्रीमती प्रतिमा बागरी, नरेंद्र शिवाजी पटेल और मुख्यसचिव अशोक बर्णवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में अन्य मंत्रीगण वर्चुअल रूप से शामिल हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्म दिवस 17 सितंबर से प्रारंभ हुए एक माह अवधि के सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों से नागरिकों को जोड़ने में सफलता प्राप्त हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभियान के कार्यो की जानकारी प्राप्त की और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की। मंत्री गण और वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित हुए। अनेक मंत्री और जिला स्तर के अधिकारी वर्चुअल रूप से जुड़े। सेवा सेतु अभियान होगा 3 और 4 अक्टूबर को बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 3 और 4 अक्टूबर को सेवा सेतु अभियान आयोजित किया गया। अभियान में 3 अक्टूबर को ग्रामीण क्षेत्र और 4 अक्टूबर को नगरीय क्षेत्रों में शिविर आयोजित होंगे, जिनके माध्यम से नागरिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। इस अभियान में 3 अक्टूबर को साप्ताहिक जन विश्वास अभियान को भी जोड़ा जाएगा। सेवा के रंग- राष्ट्र के संग (भारत मंडल) प्रदेश के 6 जिलों इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, झाबुआ और आलीराजपुर में निर्धारित थीम पर मानव रंगोली की परिकल्पना की गई है। इसके साथ ही सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के अंतर्गत विद्यार्थी, उद्यमी, शिक्षक, अधिकारी विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। कुल 16 फोकस सेक्टर चिन्हित किए गए हैं। सेवा ज्योति कलश यात्रा 7 अक्टूबर को निकाली जाएगी, जिसके राज्य नोडल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग और राज्य प्रभारी अधिकारी संजीव सिंह होंगे। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में इन यात्राओं में हितलाभ वितरण के साथ विकसित भारत और सेवा के संकल्प से जुड़े आयोजन होंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी 7 अक्टूबर को वर्चुअल संबोधन देंगे। आशीर्वाद का दीया गतिविधि से हुए शानदार शुरूआत प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिवस 17 सितम्बर को अभियान प्रारंभ हुआ, जिसके अंतर्गत प्रदेश में 3 करोड़ 87 लाख 80 हजार 463 दीयें जलाए गए। इसमें कुल 2 करोड़ 64 लाख 85 हजार 60 नागरिकों ने सहभागिता की। उज्जैन में दीपक जलाने का विश्व कीर्तिमान बनाया गया। उज्जैन में 33 लाख 27 हजार 125 दिए जलाये गए। इस गतिविधि के लिए नोडल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और राज्य प्रभारी अधिकारी संजय दुबे थे। जनसम्पर्क सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, महिला बाल विकास, राजस्व और स्वास्थ्य विभाग ने दायित्व संभाला। मेरे सपनों का भारत- भाषण और चित्रकला प्रतियोगिता 19 सितम्बर से 26 सितम्बर के बीच प्रदेश में 27 लाख 28 हजार 668 प्रतिभागियों ने चित्रकला प्रतियोगिता में और 12 लाख 37 हजार 810 प्रतिभागियों ने भाषण प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है। नोडल मंत्री उदय प्रताप सिंह और प्रभारी सचिव संजय गोयल ने इस गतिविधि का दायित्व वहन किया। नमो सेवा प्रदेश में 19 सितम्बर से प्रारंभ नमो सेवा गतिविधि के अंतर्गत 5 अक्टूबर तक सांस्कृतिक दलों द्वारा नुक्कड़ टोलियां बनाकर प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। अब तक 3033 कार्यक्रम हुए हैं जिनमें 5208 कलाकारों ने हिस्सा लिया है। इस गतिविधि के नोडल मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी और राज्य प्रभारी अधिकारी अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला हैं। संबंधित जिला प्रशासन के साथ जनसम्पर्क विभाग द्वारा दायित्व निभाया जा रहा है। आंगन मिलन सेवा प्रदेश में आंगन मिलन सेवा के अंतर्गत 26 सितम्बर से गतिविधियां प्रारंभ हुई हैं, जो 5 अक्टूबर तक चलना हैं। आंगनवाड़ियों में 24 लाख 28 हजार 116 महिलाओं और बच्चों ने कार्यक्रम में भागीदारी की है। कुल 1 लाख 35 हजार 110 बहनों का सम्मान भी किया गया। प्रभारी मंत्री सुनिर्मला भूरिया और राज्य प्रभारी अधिकारी श्रीमती जीवी रश्मि हैं1 सेवा की कहानी प्रदेश में कुल 5 लाख 25 हजार 54 प्रेरक कहानियां प्राप्त हुई हैं। सेवा की कहानी प्रकल्प में राज्य नोडल मंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी और राज्य प्रभारी अधिकारी जनसम्पर्क आयुक्त और परिवहन सचिव मनीष सिंह हैं। सेवा की कहानी के अंतर्गत 17 सितम्बर से प्रारंभ गतिविधियां 17 अक्टूबर तक पूरे एक माह की अवधि में संचालित की जा रही हैं। वड़नगर से वाराणसी सेवा यात्रा इस गतिविधि की शुरूआत 17 सितम्बर से हुई है। अब तक 1706 नगरों और कस्बों में 6 लाख 48 हजार 520 नागरिकों की सहभागिता से कार्यक्रम सम्पन्न हुए हैं। मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल नोडल मंत्री हैं। सचिव टी इलैया राज राज्य प्रभारी अधिकारी हैं। यह गतिविधियां 7 अक्टूबर तक चलना है। सेवा मेरा योगदान प्रदेश में 10 गतिविधियों पर केंद्रित सेवा मेरा योगदान का संचालन 2 से 10 अक्टूबर तक किया जाएगा। इसके अंतर्गत स्वच्छता, स्वास्थ्य शिविर, वृद्धाश्रमों और अनाथालयों में सेवा कार्य होंगे। दिव्यांगजन कल्याण और विद्यार्थी कल्याण की गतिविधियां भी राज्य नोडल मंत्री राकेश सिंह और राज्य प्रभारी अधिकारी श्रीमन शुक्ल के पर्यवेक्षण में होंगी। विकसित भारत संकल्प यात्रा प्रदेश में एक माह (17 सितम्बर से 17 अक्टूबर) की अवधि में विकसित भारत संकल्प यात्रा के अंतर्गत अन्य राज्यों के प्रतिनिधि और इनफ्लूएंसर्स प्रदेश भ्रमण पर आ रहे हैं। राज्य नोडल मंत्री इंदर सिंह परमार और राज्य प्रभारी अधिकारी सचिव मनीष सिंह इन गतिविधियों का पर्यवेक्षण और निर्देशन कर रहे हैं।  

SIR पर विपक्षी रणनीति की बैठक आज, अखिलेश-उद्धव नहीं आएंगे; AAP-DMK भी दूर

नई दिल्ली चुनाव आयोग को लेकर जारी घमासान के बीच बुधवार को INDIA ब्लॉक के बड़े नेता दिल्ली में जुटेंगे. मकसद चुनावी मुद्दों पर विपक्ष की साझा रणनीति तय करना है. लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही विपक्षी एकजुटता पर सवाल खड़े हो गए हैं. कुछ दलों ने बैठक से दूरी बना ली है, तो कुछ ने प्रतिनिधि भेजने का फैसला किया है. बीजेपी को भी विपक्ष पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।  बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, AICC महासचिव जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल, TMC की ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, RJD से तेजस्वी यादव तथा SP, CPI, CPI(M), NCP(SP) और शिवसेना (UBT) जैसी पार्टियों के नेता शामिल होंगे।  लेकिन शामिल होने वाले नेताओं से ज्यादा चर्चा इसमें हिस्सा नहीं ले रहे विपक्षी नेताओं की हो रही है।  एक तरफ DMK और AAP ने साफ कर दिया है कि वे बैठक का हिस्सा नहीं बनेंगे, वहीं SP प्रमुख अखिलेश यादव भी इसमें नहीं होंगे. शिवसेना से उद्धव ठाकरे भी इसमें नहीं होंगे।  अखिलेश जानबूझकर किसी बड़े नेता को नहीं भेज रहे? अखिलेश ने UP में राज्यसभा चुनाव के नामांकन को वजह बताया है. साथ ही प्रतिनिधि भेजने की बात कही है. यादव के बैठक में न आने के बारे में पूछे जाने पर वेणुगोपाल ने कहा, 'मैंने अखिलेश यादव से बात की, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उनसे बात की. उन्हें राज्यसभा चुनाव के नामांकन का काम देखना है, लेकिन उनकी पार्टी के नेता बैठक में शामिल हो रहे हैं।  अब सपा की तरफ से INDIA ब्लॉक की मीटिंग में किसी बड़े चेहरे को भेजने की जगह मोहिबुल्लाह नदवी और हरेंद्र मलिक शामिल होंगे. माना जा रहा है कि अखिलेश यादव ने कांग्रेस से नाराजगी जताने का ये तरीका चुना है. गठबंधन और सीट शेयरिंग को लेकर इमरान मसूद और कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बयानों से अखिलेश यादव नाराज हैं और इसे कांग्रेस का दबाव बनाने की रणनीति माना जा रहा है।  पार्टी सूत्रों के मुताबिक अखिलेश यादव ने जानबूझकर आज का दिन रामगोपाल यादव के नामांकन के लिए चुना, ताकि उनके साथ-साथ रामगोपाल यादव भी इस मीटिंग में ना जा सकें. इसके साथ ही धर्मेंद्र यादव या डिंपल यादव में से भी किसी को इस मीटिंग में नहीं भेजा जा रहा।  DMK बोली- विपक्ष का हिस्सा हैं, INDIA ब्लॉक का नहीं DMK ने इससे दूरी बना ही ली है.  INDIA गठबंधन की बैठक पर DMK प्रवक्ता TKS एलंगोवन ने कहा, 'दूसरे विपक्षी दल बीजेपी का विरोध करते हैं, हम भी उनके साथ खड़े होंगे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम साथ हैं. हम INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं.' हालांकि, उन्होंने कहा कि हम INDIA गठबंधन का हिस्सा न सही लेकिन संसद में, जो कोई भी ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव लाएगा, हम उसका समर्थन करेंगे।  2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद DMK और कांग्रेस का रिश्ता टूट गया था. क्योंकि चुनाव के बाद कांग्रेस ने एक्टर-नेता विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) को समर्थन दिया. DMK ने इस कदम को धोखा बताया और इसके बाद जून में हुई INDIA ब्लॉक की बैठक से दूर रही. DMK नेताओं का कहना है कि पार्टी विपक्ष का हिस्सा तो है, लेकिन अब कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं है।  AAP और कांग्रेस की राह भी अलग वहीं अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) में इसमें नहीं होगी. क्योंकि दिल्ली और पंजाब में चुनावी मुकाबलों को लेकर कांग्रेस के साथ रिश्ते बिगड़ने के बाद, AAP जुलाई 2025 में औपचारिक रूप से INDIA गठबंधन से बाहर हो गई थी।  दोनों पार्टियों ने दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में 2024 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन पंजाब में वे एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी बनी रहीं. 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ने के बाद उनके बीच मतभेद और बढ़ गए थे।  उद्धव ठाकरे दिल्ली नहीं आएंगे उद्धव ठाकरे इस मीटिंग में दिल्ली आकर शामिल नहीं होंगे. उन्होंने बताया कि वे INDIA गठबंधन की बैठक में वर्चुअली शामिल होंगे. बताया जा रहा है कि उद्धव 4 अक्टूबर को मुंबई में होने वाले प्रदर्शन की तैयारियों में जुटे हैं. शिवसेना का ये प्रदर्शन चुनाव आयोग के खिलाफ होगा, इसमें राज ठाकरे की पार्टी भी उनके साथ है।  इंडिया ब्लॉक की मीटिंग का क्या एजेंडा बैठक में नेता SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर संयुक्त आंदोलन की रणनीति तय करेंगे. साथ ही, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी चर्चा होगी।  सूत्रों के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्ताव लाने की नई कोशिश की जा रही है. इसके लिए ड्राफ्ट नोटिस तैयार है. बैठक में इस नोटिस को मंजूरी देने पर चर्चा हो सकती है।  INDIA ब्लॉक की पिछली बैठक 8 जून को हुई थी. बीजेपी के खिलाफ एकजुटता पर जोर देते हुए, INDIA ब्लॉक के सदस्यों ने सर्वसम्मति से फैसला किया था कि वे NEET-CBSE विवाद को लेकर तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करेंगे और SIR प्रक्रिया तथा 'वोट लूट' के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखेंगे। 

जालंधर में धमकी भरा ईमेल, स्कूल-मंदिर उड़ाने की धमकी; अमित शाह की रैली से पहले हड़कंप

जालंधर जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली से पहले कई स्कूलों को एक धमकी भरा ईमेल भेजे जाने का मामला सामने आया है। ईमेल में रैली स्थल, बसों और श्री देवी तालाब मंदिर समेत अलग-अलग स्थानों पर आईईडी/बम धमाके करने जैसी धमकियां दी गई हैं। वहीं अमृतसर के स्कूलों को भी उड़ाने की धमकी आई है। संदेश में बच्चों को स्कूल भेजने और रैली में जाने को लेकर भी चेतावनी दी गई है। ई-मेल में लिखा है कि रैली के स्टेज के नीचे आईईडी रखा है। स्कूल-मंदिर और कोर्ट को उड़ा देंगे। 100 बसों में से 2-3 बसों में बम फिट किए हैं। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। ईमेल बुधवार तड़के 7:50 पर आया, जिसकी सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही है।  ईमेल में अलगाववादी और हिंसक भाषा के साथ कई संगठनों व व्यक्तियों के नाम भी लिखे गए हैं। ई-मेल कैंब्रिज इनोवेटिव और सीटी स्कूल को आए हैं जिसमें खालिस्तान नेशनल आर्मी और बब्बर खालसा (परमार कनाडा) ग्रुप के नाम हैं। हालांकि, ईमेल में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं।  अमित शाह की रैली के मद्देनजर सुरक्षा अलर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जालंधर रैली के मद्देनजर पुलिस पहले से ही सुरक्षा को लेकर अलर्ट है। दोआबा की 23 विधानसभा सीटों को साधने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जालंधर-लुधियाना हाईवे से सटे परागपुर में रैली को संबोधित करेंगे। इसी रैली में भाजपा की ओर से निकाली गई नशामुक्त पंजाब की 4 यात्राओं का समापन होगा। नशा मुक्त यात्रा का जालंधर में होगा समापन गृह मंत्री के दौरे से पहले पंजाब बीजेपी की तरफ से निकाली जा रही नशा मुक्त पंजाब यात्रा का जालंधर में स्वागत के साथ समापन होगा। पंजाब में बीजेपी की नशा मुक्त पंजाब यात्रा की शुरुआत पठानकोट जिले के माधोपुर से 18 सितंबर 2026 को हुई थी। यात्रा ने लगभग 4000 किलोमीटर का सफर तय किया भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इस यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस यात्रा ने लगभग 4000 किलोमीटर का सफर तय किया और राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों को कवर किया। दूसरी तरफ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि लोगों से अपील है कि किसी भी संदिग्ध संदेश या अफवाह को आगे शेयर न करें और केवल पुलिस/प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। अमित शाह की जालंधर में नशा-मुक्त पंजाब यात्रा के समापन कार्यक्रम के तहत रैली प्रस्तावित है और उनके श्री देवी तालाब मंदिर जाने की भी सूचना है। स्टेज और धार्मिक स्थल पर हमले की चेतावनी ईमेल भेजने वाले ने खौफनाक दावा करते हुए कहा है कि जहां गृहमंत्री का मुख्य कार्यक्रम आयोजित होना है, वहां स्टेज पर बम लगा दिए गए हैं। इसके साथ ही शहर के प्रसिद्ध और पवित्र देवी तालाब मंदिर परिसर को भी अत्याधुनिक डिवाइस या आईफोन की मदद से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस तरह की गंभीर चेतावनी मिलने के बाद से धार्मिक स्थल और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यह धमकी भरा मेल कैंब्रिज गर्ल्स स्कूल (अर्बन एस्टेट), कैंब्रिज इनोवेटिव स्कूल और एमजीएम स्कूल समेत कई अन्य शैक्षणिक संस्थानों को प्राप्त हुआ है। मेल में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इस आयोजन के दौरान किसी भी बच्चे को न भेजा जाए। दौरे से ठीक पहले आए इस तरह के धमकी भरे संदेश को पुलिस और जांच एजेंसियां बेहद गंभीरता से ले रही हैं। साइबर टीम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया है ताकि ईमेल के आईपी एड्रेस और इसे भेजने वाले की पहचान की जा सके। इसके साथ ही कार्यक्रम स्थल और मंदिर परिसर में बम निरोधक दस्तों की मदद से सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।    

तीरंदाजी में भारत का धमाल, चिकिता-साहिल ने जीता गोल्ड

आईची-नागोया Asian Games 2026 के तीरंदाजी इवेंट में एक और गोल्ड भारत को मिल चुका है। 30 सितंबर की सुबह वुमेंस टीम ने गोल्ड पर निशाना लगाया था, जबकि मिक्स्ड टीम इवेंट में भी भारत को गोल्ड मेडल मिला है। वुमेंस टीम में दमदार खेल दिखाने वाली चिकिता तनिपार्थी ने मिक्स्ड टीम में हिस्सा लिया, जहां उनका साथ साहिल राजेश जाधव ने दिया। दोनों ने साथ मिलकर धमाल मचाया और देश को गोल्ड मेडल दिलाया। इस जोड़ी को ओलंपिक का टिकट भी मिल गया है। साउथ कोरिया के खिलाफ कांटे की टक्कर वाले शूट-ऑफ में चिकिता और साहिल ने जीत हासिल की और LA ओलंपिक्स के लिए भारत की जगह पक्की की। भारतीय जोड़ी हाफवे तक 80-78 से आगे थी, लेकिन साउथ कोरिया ने वापसी करते हुए मुकाबला 157-157 से बराबर कर दिया। इसके बाद मुकाबला शूट-ऑफ में पहुंचा, जहां चिकिता और साहिल दोनों ने 10 पॉइंट हासिल किए, जबकि साउथ कोरिया का आखिरी तीर 9 पॉइंट पर लगा। इस तरह भारत को इस रोमांचक मुकाबले में जीत मिली। इस जीत का मतलब यह भी है कि भारत ने हांग्जो 2023 एशियन गेम्स में कंपाउंड मिक्स्ड टीम के तौर पर गोल्ड जीता था, जिसे अपने पास बरकरार रखा है। चिकिता और साहिल का धमाल चिकिता तनिपार्थी और साहिल जाधव ने एक मुश्किल कंपाउंड मिक्स्ड टीम सेमीफाइनल में थाईलैंड को 156-155 से हराया था और गोल्ड मेडल मैच में अपनी जगह पक्की की। भारत ने शुरुआती एंड के बाद बढ़त बनाई थी और फिर पूरे मैच में थोड़ी सी बढ़त बनाए रखी। चिकिथा और साहिल ने फाइनल रोटेशन में लगातार 10-10 पॉइंट का स्कोर करके अपना धैर्य बनाए रखा था और बाद में सिर्फ एक पॉइंट से उन्हें जीत मिली। बनाकर अपना धैर्य बनाए रखा और एक पॉइंट से जीत पक्की कर ली। यही काम इस जोड़ी ने फाइनल में भी किया और परफेक्ट 10 लगाकर खिताब जीता। आपको बता दें, इससे पहले वुमेंस कमाउंड टीम इवेंट में भी भारत ने तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीता था। कंपाउंड टीम में ज्योति सुरेखा वेन्नम, पृथिका प्रदीप, चिकिता तनिपार्थी सुबह करीब 6 बजे साउथ कोरिया के खिलाफ सेमीफाइनल में उतरीं थीं। इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने गोल्ड मेडल मैच खेला था। फाइनल में उनके सामने चीनी खिलाड़ियो की चुनौती थी, जिससे उन्होंने पार पाया और देश को इन खेलों का सातवां गोल्ड मेडल दिलाया था। विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी इस टीम ने की थी। 238-234 के अंतर से चीन को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। मिसाल से कम नहीं चिकिता और साहिल की कहानी रोमांचक शूट ऑफ में साउथ कोरिया कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीतने वाले साहिल जाधव और चिकिता परितार्थी की कहानी नए तीरंदाजों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है. दोनों ने गोल्ड मेडल के साथ-साथ भारत के लिए 2028 ओलंपिक कोटा भी हासिल कर लिया. 18 साल की चिकिता जहां तेलंगाना के किसान परिवार से आतीं हैं तो महाराष्ट्र के साहिल जाधव ने अपने पड़ोसी को देखकर धनुष-बाण उठाया था।  हार्वेस्टर मशीन बेचकर हुई चिकिता की ट्रेनिंग चिकिता तनिपार्थी के पिता ने अपनी बेटी के लिए धनुष खरीदने और ट्रेनिंग का खर्च उठाने के लिए परिवार की राइस हार्वेस्टर मशीन बेच दी थी और कर्ज भी लिया था. तेलंगाना के पेड्डापल्ली जिले के सुल्तानपुर गांव में रहने वाले 51 साल के किसान श्रीनिवास राव और उनकी पत्नी श्रीलता राव ने अपने संघर्षों को याद करते हुए बताया।