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ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, विवादित बयान को लेकर सिलीगुड़ी में मामला दर्ज

सिलीगुड़ी  पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। कोलकाता में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेश के एक हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में केंद्रीय गृह मंत्रालय और गृह मंत्री अमित शाह का नाम घसीटने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह शिकायत सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक वकील द्वारा दर्ज कराई गई है। क्या है पूरा मामला और ममता बनर्जी का दावा? यह विवाद 2 जून 2026 को कोलकाता के धर्मतला (Y-चैनल) में टीएमसी के एक धरना प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ। अपने भाषण में ममता बनर्जी ने दावा किया कि उन्हें बांग्लादेश में हुई एक 'बड़ी हत्या' के पीछे की पूरी साजिश और लोगों के नामों की जानकारी है, लेकिन वह उनका खुलासा नहीं करेंगी क्योंकि इससे पड़ोसी देश में उथल-पुथल मच सकती है। क्या बोलीं थी ममता बनर्जी सभा में ममता बनर्जी ने बांग्लादेश में हुए विवादित ओसमान हादी हत्याकांड का जिक्र किया. नाम लिये बिना ममता बनर्जी बोलीं “बांग्लादेश से एक बड़ा खूनी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था, जिसे लेकर बांग्लादेश में बड़ा बवाल हुआ. मैं दूसरे देश की बात नहीं कर रही. मैं जो पॉइंट बता रही हूं, वो मेघालय से बंगाल आते हैं. यहां आने पर हमारी एसटीएफ पकड़ती है. होम मिनिस्टर खुद कह रहे हैं… इतने दिन नहीं बोली, आज अत्याचार की सीमा पार कर गया इसलिए बोल रही हूं. उन्होंने कहा… आप बंगाल पुलिस को कह दीजिए ये बात बाहर न जाये. ये देश के लिए है. किससे मर्डर करवाया था, किन-किन के नाम आये थे… मैं सब जानती हूं।  विवाद की वजह दरअसल, दिसंबर में बांग्लादेश में ओसमान हादी की हत्या हुई थी. जनवरी में हत्यारे मेघालय बॉर्डर से बंगाल आये तो एसटीएफ ने दो को पकड़ा. ममता ने सभा में इसी केस को लेकर गृह मंत्रालय पर इशारों में टिप्पणी की. गत जनवरी में मेघालय की सीमा पार कर इस राज्य में आते सम ही बंगाल एसटीएफ ने दो लोगों को गिरफ्तार किया।  एफआईआर में क्या आरोप है शिकायत में कहा गया कि ममता ने देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामले पर सार्वजनिक मंच से बयान दिया. गृहमंत्री का हवाला देकर उकसाने वाली बात कही. इसे ‘देशविरोधी’ बताते हुए सिलीगुड़ी साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज हुआ है. तृणमूल का कहना है कि ममता ने सच बोला है, वहीं भाजपा इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़’ बता रही है।  कौन थे ओसमान हादी ओसमान हादी (शरीफ़ उस्मान हादी) बांग्लादेश के एक युवा नेता और लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ता थे. जुलाई 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए छात्र आंदोलन और ‘इंकलाब मंच’ से जुड़े थे. 12 दिसंबर 2025 को ढाका में चुनावी प्रचार के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने उनके सिर में गोली मार दी थी. इसके बाद 18 दिसंबर 2025 को सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गयी थी। उनका इशारा स्पष्ट रूप से बांग्लादेशी छात्र नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या की ओर था। ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब मार्च 2026 में पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस हत्याकांड के संदिग्धों को राज्य से गिरफ्तार किया था, तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था। ममता का दावा है कि अमित शाह ने "राष्ट्रीय हित" का हवाला देते हुए उनसे इस गिरफ्तारी की खबर को दबाने और बाहर न आने देने के लिए कहा था। रिंकी सेन चटर्जी ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए ममता बनर्जी चाहतीं तो इस मामले को सीधे गृह मंत्रालय के समक्ष उठा सकती थीं। उनका आरोप है कि अब वह यह दावा कर रही हैं कि बांग्लादेश में हुई हत्या गृह मंत्रालय के निर्देश पर कराई गई थी। ममता के बयान कट्टरपंथी तत्वों को प्रोत्साहित करने वाले हैं शिकायतकर्ता के अनुसार, इस तरह के आरोप भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ा सकते हैं तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसे बयान बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संवैधानिक पद पर रहते हुए ममता बनर्जी ने देश की गोपनीयता और हितों की रक्षा की शपथ ली थी, लेकिन पद छोड़ने के बाद उनके बयान कट्टरपंथी तत्वों को प्रोत्साहित करने वाले हैं। FIR में क्या आरोप लगाए गए हैं? ममता बनर्जी के इस सनसनीखेज दावे के बाद, सिलीगुड़ी की वकील रिंकी चटर्जी सिंह ने उनके खिलाफ सिलीगुड़ी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में आपराधिक मामला दर्ज कराया है। शिकायत के अनुसार, एक पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा बिना सबूत के केंद्रीय गृह मंत्रालय पर ऐसे गंभीर आरोप लगाना जनता में भ्रम और सामाजिक अशांति पैदा करने का प्रयास है। इस तरह की बयानबाजी भारत और बांग्लादेश के संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती है। बयान को असंवैधानिक और भड़काऊ बताते हुए कहा गया है कि यह राजनीतिक फायदे के लिए गढ़ा गया नैरेटिव है।

e-HRMS पोर्टल पर कर सकेंगे ट्रांसफर आवेदन, शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना

मध्यप्रदेश में शिक्षकों व कर्मचारियों के स्थानांतरण आवेदन 3 से 8 जून तक e-HRMS पोर्टल पर होगी प्रक्रिया भोपाल  राज्य शासन की स्थानांतरण नीति 2026-27 के तहत जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग ने स्थानांतरण आवेदनों के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार स्वैच्छिक स्थानांतरण के आवेदन 3 जून से 8 जून तक e-HRMS पोर्टल पर ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदक स्थानांतरण के लिए अधिकतम 15 कार्यालयों/संस्थाओं का चयन कर सकेंगे। आवेदन में दर्शाए गए कारणों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज पीडीएफ स्वरूप में अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिनका आकार अधिकतम 2 एमबी निर्धारित किया गया है। एक बार आवेदन सबमिट होने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा। विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि आवेदन में गलत जानकारी देने या सत्यापन में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी एवं सत्यापन अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल पर प्रदर्शित रिक्तियां अस्थायी (टेंटेटिव) होंगी और समय-समय पर अपडेट की जा सकेंगी। माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों के स्थानांतरण केवल उनके विषय की रिक्तियों पर ही किए जाएंगे। वहीं प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक संवर्ग के प्रशासनिक एवं स्वैच्छिक स्थानांतरण परिवीक्षा अवधि के दौरान नहीं किए जाएंगे। जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 5 जून 2026 तक e-HRMS पोर्टल पर सभी रिक्त पदों की सही जानकारी दर्ज एवं सत्यापित करें। रिक्तियों की एंट्री और सत्यापन की जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख, डीडीओ एवं ऑफिस एडमिन की होगी। केवल ऑनलाइन आवेदन करने मात्र से स्थानांतरण का अधिकार सुनिश्चित नहीं होगा। आवेदनों को स्वीकार या अस्वीकार करने का अंतिम निर्णय मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा और इस संबंध में शासन का निर्णय अंतिम माना जाएगा। यह आदेश प्रदेश के जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा शिक्षकों पर लागू होगा।  

अल्मोड़ा नहीं पहुंच सके राहुल गांधी, हेलीकॉप्टर उतारना पड़ा; मोबाइल से किया संबोधन

पंतनगर  आज गुरुवार से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा शुरू हुआ है. उत्तराखंड पहुंचते ही राहुल गांधी को मौसम के बिगड़े मूड से जूझना पड़ा. दिल्ली से उड़ा राहुल गांधी का विमान अल्मोड़ा पहुंचने वाला था कि वहां मौसम खराब हो गया. इसके बाद उनके विमान को वापस लौटकर पंतनगर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी।  राहुल गांधी के विमान की पंतनगर में इमरजेंसी लैंडिग: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर पहुंच गए हैं. राहुल गांधी के दौरे पर थोड़ी देर के लिए मौसम ने अड़ंगा डाला. राहुल का विमान दिल्ली से अल्मोड़ा के लिए उड़ा था. अल्मोड़ा में मौसम खराब होने के कारण विमान को वापस लाया गया और पंतनगर एयरपोर्ट पर उसकी इमरजेंसी लैंडिंग हुई. इसका फायदा स्थानीय नेताओं को हुआ।  राहुल गांधी के हेलीकॉप्टर की खराब मौसम के कारण पंतनगर में लैंडिंग करानी पड़ी  कांग्रेस नेताओं ने किया राहुल गांधी का स्वागत: पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे राहुल गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार स्वागत किया. एयरपोर्ट पर किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा और महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने उन्हें बुके भेंट कर स्वागत किया. इसके बाद राहुल गांधी अल्मोड़ा नहीं जा सके. उन्हें पूर्व सैनिकों के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेना था।  राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी गुरुवार को अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के तहत पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे. दिल्ली से विशेष विमान के माध्यम से पहुंचे राहुल गांधी का एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।  कांग्रेस नेताओं ने किया राहुल गांधी का स्वागत: पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे राहुल गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार स्वागत किया. एयरपोर्ट पर किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गाबा और महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने उन्हें बुके भेंट कर स्वागत किया. इसके बाद राहुल गांधी अल्मोड़ा नहीं जा सके. उन्हें पूर्व सैनिकों के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेना था।  राहुल गांधी दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर हैं: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी गुरुवार को अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के तहत पंतनगर एयरपोर्ट पहुंचे. दिल्ली से विशेष विमान के माध्यम से पहुंचे राहुल गांधी का एयरपोर्ट पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।  दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंचे राहुल गांधी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल के समर्थन में नारे लगाए: पंतनगर एयरपोर्ट पर किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिमांशु गावा और महानगर अध्यक्ष ममता रानी ने राहुल गांधी को बुके भेंट कर उनका स्वागत किया. इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाए और उनका अभिवादन किया।  पंतनगर से मोबाइल से किया संबोधन: स्वागत कार्यक्रम के बाद राहुल गांधी ने अल्मोड़ा में आयोजित पूर्व सैनिकों के एक विशेष कार्यक्रम को मोबाइल से ही संबोधित किया. राहुल गांधी पूर्व सैनिकों से पंतनगर से ही मोबाइल पर संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना. माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस पूर्व सैनिक समुदाय के साथ अपने संवाद को और मजबूत करने का प्रयास करेगी।  राहुल का दौरा राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण: राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. उत्तराखंड में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक मजबूती के मद्देनजर कांग्रेस नेतृत्व लगातार राज्य में सक्रिय नजर आ रहा है. राहुल गांधी के इस दौरे को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।  दो दिन का है राहुल का दौरा: दो दिन के इस प्रवास के दौरान राहुल गांधी विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के साथ-साथ पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात कर सकते हैं. उनके दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है और पार्टी इसे संगठन को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। 

ट्विशा मौत मामले के आरोपी समर्थ सिंह की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में पुलिस निगरानी बढ़ाई गई

भोपाल  भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह न्यायिक हिरासत में भोपाल सेंट्रल जेल में हैं। जेल में पहले दिन गिरिबाला सिंह ज्यादातर खामोश रहीं। उन्होंने पीने को साफ पानी मांगा। इधर समर्थ सिंह को इलाज के लिए मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया है। उसके पैर में चोट है जिसका इलाज चल रहा है। वार्ड की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी की गई है। चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब भोपाल पुलिस की कथित लापरवाही भी जांच के दायरे में आ गई है। सीबीआइ ने लिगेचर से संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए हैं। गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया जेल सूत्रों के अनुसार ट्विशा केस में आरोपी सास, रिटायर्ड जिला जज गिरि बाला सिंह ने भोपाल सेंट्रल जेल में अपना पहला दिन शांत और सामान्य तरीके से बिताया। वे जेल में आम कैदियों की तरह रहीं। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह को मंगलवार शाम को यहां लाया गया था। अपनी बैरक में गिरिबाला सिंह ने कढ़ी-पकौड़े और रोटियां खाईं। पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं जेल अधिकारियों के अनुसार गिरिबाला सिंह पूरे समय संयमित, सहयोगी और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नजर आईं। उन्होंने साफ पानी की मांग भी की। विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा डेथ केस की संवेदनशीलता को देखते हुए गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अलग- अलग रखा गया है। जेल अधिकारियों के अनुसार शाम दोनों को जेल लाने के बाद से ही उन्हें विचाराधीन बंदियों को मिलने वाली सामान्य सुविधाएं और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया न्यायिक हिरासत में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को महिला वार्ड में रखा गया है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को इलाज के लिए जेल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके पैर में चोट लग गई थी जिसके कारण खंड-बी स्थित मेडिकल वार्ड में भर्ती कराकर इलाज किया जा रहा है। समर्थ सिंह, कड़ी निगरानी में है। उन्हें भी आम बंदियों के समान नाश्ते के रूप में सुबह दलिया और नमकीन के साथ चाय भी दी गई। 14 दिन की न्यायिक हिरासत जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. सेशन जज शोभना भालवी की अदालत ने यह फैसला दिया. इससे पहले 29 जून को कोर्ट ने दोनों को 5 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा था. आज यानी 2 जून को दोनों की रिमांड खत्म हो रही थी।  27 मई को हुई थी गिरिबाला की गिरफ्तारी सीबीआई ने गुरुवार (27 मई) को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में गिरिबाला सिंह के घर पर सात घंटे से ज्यादा की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया था. गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी गुरुवार (27 मई) को तब हुई, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी. समर्थ सिंह को 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद, लगभग एक सप्ताह तक लापता रहने के बाद, भोपाल पुलिस ने 22 मई को जबलपुर से गिरफ्तार किया था।  समर्थ सिंह को सबसे पहले 23 मई को भोपाल में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास की अदालत में पेश किया गया था. इसके बाद अदालत ने उन्हें 29 मई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया था. मध्य प्रदेश सरकार की सिफारिश पर जांच का जिम्मा संभालने के बाद सीबीआई ने आगे की पूछताछ के लिए समर्थ की हिरासत की मांग की थी. कोर्ट के आदेश के बाद वह 16 जून तक हिरासत में रहेंगे।  कथित तौर पर ट्विशा शर्मा अपने ससुराल कटारा हिल्स में फंदे से लटकी हुई मिली थीं. बाद में उनके परिवार ने उनके पति और ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच की मांग उठी थी. मामले की जांच सीबीआई कर रही है. रिमांड के दौरान सीबीआई समर्थ को कथित अपराध स्थल पर ले गई और विस्तृत फॉरेंसिक जांच की. सीबीआई टीम ने कटारा हिल्स स्थित घर पर कई घंटे बिताए. इस दौरान उन्होंने फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की और सबूत इकट्ठा किए, साथ ही समर्थ से 12 मई की रात की घटनाओं के बारे में पूछताछ भी की। 

देश ने खोया संवैधानिक मामलों का बड़ा विद्वान, डॉ. सुभाष कश्यप नहीं रहे

नई दिल्ली देश के जाने-माने संविधान विशेषज्ञ और पूर्व लोकसभा महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप का निधन हो गया है। अपने निवास स्थान पर उन्होंने 97 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार डॉ. सुभाष कश्यप का निधन कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट (हृदय और फेफड़ों की गति रुक जाने) के कारण हुआ है।  नेहरू के दौर से नौवीं लोकसभा तक डॉ. सुभाष सी. कश्यप का संसदीय करियर अपने आप में एक जीवंत इतिहास रहा है। उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल वाली पहली लोकसभा से लेकर नौवीं लोकसभा तक, कुल 37 वर्षों से भी अधिक समय तक भारतीय संसद की अनवरत और निष्पक्ष सेवा की। इस सुदीर्घ सेवाकाल के दौरान उन्होंने न केवल विधायी प्रक्रियाओं का संचालन किया, बल्कि देश के कई ऐतिहासिक फैसलों और कानून निर्माण की प्रक्रियाओं के वे प्रत्यक्ष गवाह भी रहे। उनके इस अद्वितीय अनुभव और ज्ञान के कारण देश के शीर्ष राजनेता और कानूनविद समय-समय पर संवैधानिक संकटों के समाधान के लिए उनका मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। क्रांतिकारी छात्र जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी डॉ. कश्यप का जन्म वर्ष 1929 में तत्कालीन संयुक्त प्रांत (जो वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के नाम से जाना जाता है) के बिजनौर जिले के चांदपुर नामक स्थान पर एक प्रतिष्ठित स्वतंत्रता सेनानी परिवार में हुआ था। देशभक्ति के माहौल में पले-बढ़े होने के कारण उनके भीतर बचपन से ही राष्ट्र सेवा का जज्बा कूट-कूट कर भरा था। यही वजह रही कि उन्होंने अपनी किशोरावस्था में ही भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू कर दिया था। अपने छात्र जीवन के दौरान उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ पहले बिजनौर और बाद में मेरठ में कई बड़े और ऐतिहासिक छात्र आंदोलनों का अत्यंत कुशलतापूर्वक नेतृत्व किया था। कालजयी कृतियों के रचनाकार एक प्रशासनिक अधिकारी और स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ डॉ. सुभाष सी. कश्यप एक अत्यंत प्रखर लेखक, विचारक और शिक्षक भी थे। उन्होंने संविधान, संसद और राजनीतिक व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर शोध करते हुए 100 से अधिक प्रामाणिक पुस्तकों की रचना की। उनकी लिखी पुस्तकें आज भी देश-विदेश के विश्वविद्यालयों में राजनीति विज्ञान और कानून के विद्यार्थियों के लिए संदर्भ ग्रंथ का काम करती हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध और कालजयी कृतियों में ‘आवर पार्लियामेंट’ (हमारी संसद) और ‘आवर कॉन्स्टिट्यूशन’ (हमारा संविधान) जैसी पुस्तकें शामिल हैं, जिन्होंने आम नागरिकों तक भी देश की जटिल संवैधानिक व्यवस्था को बेहद सरल भाषा में पहुंचाने का अद्भुत कार्य किया। पद्म भूषण से सम्मानित और राष्ट्र के प्रति उनका अमर योगदान भारतीय संविधान, विधायी प्रक्रियाओं और संसदीय लोकतंत्र के विकास में दिए गए उनके असाधारण, अतुलनीय और जीवनपर्यंत योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से नवाजा था। डॉ. कश्यप का पूरा जीवन देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को सहेजने और उन्हें मजबूत करने के प्रति समर्पित रहा। उनका निधन देश के बौद्धिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। वे भले ही आज हमारे बीच भौतिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी लिखी पुस्तकें, उनके विचार और संसदीय प्रक्रियाओं में किए गए उनके सुधार हमेशा भारतीय लोकतंत्र और आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

ग्रीन मोबिलिटी की ओर कदम, इलेक्ट्रिक कार अपनाएंगे CM मोहन यादव; नंबर प्लेट का भी है खास महत्व

भोपाल   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव अब इलेक्ट्रिक कार से सफर करेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा की गई पेट्रोल-डीजल की बचत करने की अपील पर अमल करते हुए सीएम मोहन यादव ने इलेक्ट्रिक कार में सफर करने का फैसला लिया है। सीएम के फैसले के बाद अब उनके काफिले में इलेक्ट्रिक कार को शामिल कर लिया गया है और ऐसा बताया जा रहा है कि शाम को पहली बार सीएम मोहन यादव इलेक्ट्रिक कार में सफर कर सकते हैं। सीएम के काफिले में शामिल हुई इलेक्ट्रिक कार सीएम मोहन यादव के द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत करने का फैसला लिए जाने के बाद उनके काफिले में इलेक्ट्रिक कार को शामिल किया गया है। सीएम के काफिले के लिए नई इलेक्ट्रिक कार महिंद्रा XEV 9e खरीदी गई है, जो कि एक बार की चार्जिंग में करीब 500 किलोमीटर की रेंज देती है। सीएम मोहन यादव आज शाम को पहली बार सीएम हाउस से स्टेट हैंगर जाते वक्त इस इलेक्ट्रिक कार की सवारी कर सकते हैं। कार के नंबर में छिपा है बड़ा संदेश सीएम मोहन यादव के काफिले में जो इलेक्ट्रिक कार शामिल की गई है उसका नंबर MP 02VB 2047 है। सीएम हाउस से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कार के नंबर में भी एक बड़ा संदेश छिपा है। कार के नंबर में विकसित भारत का संदेश है, V का मतलब विकसित और B का मतलब भारत है। 2047 नंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दर्शाता है। मोदी के संदेश पर मोहन का अमल..अब EV पर होंगे सवार मध्य प्रदेश के डॉ मोहन यादव बीजेपी शासित राज्यों के उन मुख्यमंत्रियों में से हैं, जिन्होंने पीएम की अपील का अमल सबसे पहले किया. वे मध्य प्रदेश के इकलौते मुख्यमंत्री होंगे, जो अब इलेक्ट्रिकल व्हीकल से सफर करेंगे. सीएम आज से ही इस पर अमल करेंगे. जानकारी के मुताबिक . बीजेपी प्रवक्ता डॉ हितेष वाजपेयी का कहना है कि "मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की ये पहल अनुकरणीय है और मिसाल बनेगी।  मोहन यादव ईवी कार में चलेंगे जिस तरह से उन्होंने पहले काफिले को सीमित किया और अब ईवी वाहन से चलने का निर्णय लिया है. निश्चित तौर पर पार्टी के भीतर ही नहीं बाकी समाज में भी ईंधन बचाने के साथ पर्यावरण को बचाने का जो संकल्प है, उससे लोगों को प्रेरणा मिलेगी।  ईवी कार में दर्ज विकसित भारत और 2047 इस ईवी कार का नंबर भी बेहद खास है. एमपी 03 सीरीज की इस कार का जो नंबर है, वो वी बी 2047 है. वीबी (VB) के मायने हैं विकसित भारत. जो 2047 का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तय किया है. मोहन यादव प्रदेश के इस लिहाज से पहले मुख्यमंत्री होंगे, जिन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन की सवारी का निर्णय लिया. हालांकि भारत के अन्य राज्यों में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहले ही अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन शामिल कर लिए थे. इसी तरह से मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा भी अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग कर रहे हैं।  13 गाड़ियों से अब केवल पांच गाड़ियों का काफिला मोहन यादव ने इससे पहले अपने काफिले की गाड़ियों को कम किया था. उनके काफिले में 13 गाड़ियां थी, जिन्हें कम करके 8 किया गया और फिर सीमित करके पांच गाड़ियों का काफिला ही बचा. कारकेड कम करने के बाद बीती दिल्ली यात्रा में सीएम डॉ मोहन यादव ने आम आदमी की तरह मेट्रो में यात्रा की थी. अब उसमें भी मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिलक वाहन से यात्रा करने का निर्णय लिया. सभी उच्च तकनीक से लैस महिन्द्रा कंपनी से बनी इस कार के फीचर हैं, एक बार की चार्जिंग में ये औसत 500 किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर तय कर लेती है।  इस कार के टॉप मॉडल की कीमत करीबन 31 लाख 25 लाख है. इसमें आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. इस गाड़ी में पैनोरमिक सनरूफ है, जिससे केबिन में भरपूर प्राकृतिक रोशनी आती है और यात्रियों को खुले आसमान का शानदान नजारा मिलता है. इसमें 360 डिग्री घूमने वाला कैमरा और कई दूसरे सुरक्षा फीचर्स होते हैं. इस गाड़ी में 79 किलोवॉट की लिथियम आयन बैटरी होती है, जो 20 मिनट में 80 परसेंट तक चार्ज हो जाती है. सिर्फ 6.8 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पर पहुंच जाती है।  एक महीने में बचेगा 6 हजार लीटर डीजल गाड़ियों की संख्या कम करने से डीजल-पेट्रोल की खपत में बड़ी कमी आएगी. स्टेट गैरेज के सूत्रों के मुताबिक अप्रैल 2026 में वीआईपी वाहनों में करीबन 24 हजार लीटर डीजल की खपत हुई थी, जो मई माह में घटकर 18 हजार लीटर रह गई है. इस तरह एक माह में करीबन 6 हजार लीटर डीजल की कमी आई है।  पीएम की अपील पर सीएम मोहन यादव ने किया अमल बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल की बचत की अपील करने के बाद सीएम मोहन यादव ने इस पर अमल किया है। सबसे पहले सीएम मोहन यादव ने अपने काफिले से गाड़ियों की संख्या कम कराई थी और एक गाइडलाइन भी जारी की थी। इसके साथ ही बीते दिनों सीएम मोहन यादव खुद इंदौर से उज्जैन तक जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बस में यात्रा कर पहुंचे थे और सादगीपूर्ण प्रशासन का संदेश दिया था। इस दौरान सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्था के लिए केवल तीन अन्य वाहन ही उनके साथ थे। इतना ही नहीं बस में यात्रा के दौरान ही सीएम मोहन यादव ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कई विकासकार्यों और जनहित की योजनाओं पर चर्चा भी की थी।

अमोनिया गैस लीक होने पर तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन, पुलिस-NDRF की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा

सीहोर  दोराहा थाना क्षेत्र के सोनाकच्छ टोल प्लाजा के पास आज यानि गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. कोटा से नागपुर की ओर जा रहे अमोनिया गैस से भरे एक टैंकर में अचानक रिसाव शुरू हो गया. गैस रिसाव की खबर मिलते ही प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत एक्शन में आई और समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया गया. राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है।  पुलिस ने सतर्कता दिखाते हुए तुरंत रुकवाया टैंकर जैसे ही अमोनिया गैस के रिसाव की सूचना मिली, दोराहा थाना पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए टोल टैक्स के पास ही टैंकर को रुकवाया और तुरंत पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी. जहरीली गैस के फैलाव को रोकने के लिए एनडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीमों को तत्काल मौके पर तैनात किया गया।  नियंत्रण में स्थिति, नहीं कोई जनहानि मामले के बारे में एसडीओपी पूजा शर्मा ने बताया कि "गैस रिसाव की सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने मोर्चा संभाल लिया था. रिसाव को पूरी तरह से बंद करने और स्थिति को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार तकनीकी प्रयास किए जा रहे हैं. स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।  बताते चलें ​अमोनिया गैस बेहद तीखी और दमघोंटू होती है, लेकिन पुलिस और प्रशासन की सजगता के कारण इसे आबादी क्षेत्र में फैलने से पहले ही रोक दिया गया. इस सूझबूझ भरे ऑपरेशन की वजह से एक बहुत बड़ा हादसा टल गया और हाइवे पर मौजूद राहगीरों व स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली।  इससे पहले खंडवा में हुआ था LPG गैस का रिसाव मध्य प्रदेश में गैस रिसाव की कई घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं. इससे पहले खंडवा में 13 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के पनवेल से जबलपुर जा रहे एलपीजी वैगन में गैस रिसाव हुआ था. यहां खंडवा रेलवे स्टेशन के आउटर पर 36 एलपीजी वैगन खड़ी थी, जिसमें अचानक रिसाव होने लगा था. जानकारी मिलते ही रेलवे व डिजास्टर मैनेजमेंट की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर वैगन को आइसोलेट किया था. यहां भी वक्त रहते प्रशासन ने एक्शन नहीं लिया तो बड़ी घटना हो सकती थी। 

बरसात की तैयारी तेज, पंजाब में 1400 जलभराव हॉटस्पॉट और हजारों किमी सीवर लाइन होगी दुरुस्त

चंडीगढ़  मानसून के दौरान सीवर ओवरफ्लो और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पंजाब सरकार ने राज्यभर में अब तक का सबसे बड़ा सीवरेज सफाई अभियान शुरू किया है।स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि वर्षा शुरू होने से पहले पंजाब के सभी शहरों और कस्बों में 2,200 किलोमीटर लंबी सीवर लाइनों की सफाई तथा 1,400 पुराने सीवर ओवरफ्लो हाटस्पाट्स को दुरुस्त किया जाएगा। बैंस ने बताया कि इस अभियान के तहत 800 किलोमीटर मुख्य ट्रंक सीवर लाइनों और 1,400 किलोमीटर मोहल्लों की शाखा सीवर लाइनों की सफाई की जाएगी। विभाग ने ऐसे 1,400 स्थानों की पहचान की है जहां हर वर्ष मानसून के दौरान सीवर ओवरफ्लो की समस्या सामने आती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सरकार ने इस बार स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है कि पंजाब के किसी भी शहर या कस्बे में सीवर ओवरफ्लो नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए विशेष अभियान मिशन मोड में चलाया जा रहा है। पटियाला में 93 और नंगल में सात किमी सीवर लाइनों की होगी सफाई मंत्री अनुसार जालंधर में 108 किलोमीटर सीवर लाइन और 47 हाटस्पाट, पटियाला में 93 किलोमीटर, लुधियाना में 40 किलोमीटर और 42 हाटस्पाट, बठिंडा में 55 किलोमीटर और 39 हाटस्पाट, मोहाली में 36 किलोमीटर, जीरकपुर में 14 किलोमीटर और 15 हाटस्पाट, खरड़ में 11 किलोमीटर और 11 हाटस्पाट, धूरी में सात किलोमीटर और तीन हाटस्पाट, कोटकपूरा में 21 किलोमीटर तथा नंगल में सात किलोमीटर सीवर लाइनों की सफाई की जा रही है। जेई से एसई स्तर तक तय होगी जवाबदेही हरजोत बैंस ने कहा कि स्थानीय निकायों और सीवरेज बोर्ड के जेई तथा अन्य कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सुपर सक्शन मशीनों और हाई-कैपेसिटी जेटिंग उपकरणों की तैनाती की गई है। अभियान की प्रगति की निगरानी डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से रोजाना की जाएगी और जेई से लेकर एसई स्तर तक जवाबदेही तय की गई है। उन्होंने कहा कि सभी जिम्मेदार अधिकारियों को मैदान में रहने के निर्देश दिए गए हैं और विधायकों व नगर परिषद प्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ा गया है ताकि इस बार लोगों को जलभराव, सीवर बैकफ्लो और गंदे पानी से फैलने वाली बीमारियों से राहत मिल सके।

मध्यप्रदेश का मौसम बदला, भोपाल समेत कई जिलों में बारिश; 39 जिलों के लिए अलर्ट जारी

भोपाल  पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के चलते देश में मौसम तेजी से बदल रहा है. मौसम विभाग के अनुसार इसका असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिलेगा. लोगों के चिलचिलाती जलन देने वाली गर्मी से राहत मिल सकेगी. मौसम विभाग ने राजधानी भोपाल और इंदौर सहित मध्य प्रदेश के 39 जिलों में तेज आंधी, बारिश के साथ ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है।  वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से अगले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए बेहद भारी मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि "वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते अगले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए बेहद भारी रहने वाले हैं. प्रदेश के 39 जिलों के लिए ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है. उत्तर और दक्षिण भारत से आ रही नमी मध्य प्रदेश के एक बड़े हिस्से में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के हालात बना रही है. ऐसे में लोगों को अगले 48 घंटों तक सावधान रहने की सलाह दी गई है. जिला प्रशासन को सतर्क रहने के साथ लोगों को खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे नहीं ठहरने की एडवाइजरी जारी की गई है।  अचानक मौसम बदल रहा है मौसम विभाग के हिसाब से इस वक्त एक मजबूत वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव है, जिसके चलते अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आ रही है. ऐसे में दोनों सिस्टम जब आपस में मिलते हैं तो हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है. कई क्षेत्रों में बिजली की कड़कड़ाहट के साथ ओले गिरने की आशंका है।  मौसम विभाग ने नीमच, श्योपुर, मुरैना, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओलावृष्टि के साथ 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी है। भोपाल में सुबह से बादल छाए हैं। कई इलाकों में तेज हवा के साथ बूंदाबांदी हुई। इसके अलावा रायसेन, सीहोर और नर्मदापुरम में भी बारिश हुई। उज्जैन, जबलपुर, सागर और रीवा संभाग के 33 जिलों में 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में ट्रफ लाइन और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से प्रदेश में बारिश और आंधी का दौर बना हुआ है। इसी कारण इस बार मानसून की दस्तक सामान्य तिथि 15 जून की बजाय 20 से 22 जून के बीच होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में प्रशासन को अलर्ट रहने की सलाह दी गई तेजी से मौसम में आ रहे बदलाव के चलते अगले 48 घंटे मध्य प्रदेश के लिए बहुत परेशानियां ला सकते हैं. ऐसे में स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रहने की सलाह दी गई है. खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका के चलते मध्य प्रदेश के किसानों के लिए भी एडवाइजरी जारी की गई है. अगले 48 घंटों में मध्य प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में मौसम के सबसे ज्यादा आक्रामक रुख रखने की आशंका है. भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभागों में तेज हवाओं के साथ ओले गिर सकते हैं।  40 डिग्री से ऊपर पारा…रतलाम सबसे गर्म मध्य प्रदेश में बुधवार को आंधी-बारिश के दौर के बीच कुछ शहरों में तेज धूप भी खिली। इससे तापमान 40 डिग्री के ऊपर पहुंच गया। सबसे ज्यादा रतलाम में 42 डिग्री दर्ज किया गया। खरगोन में 41.8 डिग्री, राजगढ़ में 40.6 डिग्री, मलाजखंड-खंडवा में 40.5 डिग्री, खजुराहो-सागर में 40.3 डिग्री, नरसिंहपुर में 40.2 डिग्री, नौगांव, दमोह, उमरिया-मंडला में 40 डिग्री सेल्सियस रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 39.4 डिग्री, इंदौर में 38.5 डिग्री, ग्वालियर में 38.9 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और जबलपुर में पारा 39.8 डिग्री दर्ज किया गया।

अभिभावकों को राहत: पंजाब में स्कूल फीस वृद्धि पर लगी सीमा, CM मान ने किया ऐलान

चंडीगढ़  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य के निजी स्कूल अब सालाना पांच प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इससे अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों को अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी, साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल में अमृतसर में फीस को लेकर सामने आई दुखद घटना के बाद बड़ी संख्या में अभिभावकों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की थी। बच्चों और अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान जिन स्कूलों ने निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, उनकी जांच कर अतिरिक्त वसूली गई रकम अभिभावकों के खातों में रिफंड करवाई जाएगी। इस संबंध में नया कानून आगामी विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जो राज्य के सभी निजी स्कूलों पर लागू होगा। मान ने स्पष्ट किया कि पांच प्रतिशत की सीमा केवल ट्यूशन फीस तक सीमित नहीं होगी। स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी अनिवार्य शुल्क और फंड भी इसके दायरे में आएंगे। इसका उद्देश्य अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के लिए अपनाए जाने वाले अन्य रास्तों को बंद करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत फीस नियमन संबंधी कानून प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो सका, जिससे कई स्कूलों को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने का अवसर मिला। नई व्यवस्था शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी। निगरानी के लिए बनेगी रेगुलेटरी बाॅडी फीस वृद्धि संबंधी शिकायतों की निगरानी और जांच के लिए रेगुलेटरी बॉडी का गठन किया जाएगा। यह सुनिश्चित करेगी कि फीस में बढ़ोतरी केवल वास्तविक खर्च और विकास कार्यों के आधार पर हो तथा संस्थान मुनाफाखोरी न करें। सरकार निजी स्कूलों के वित्तीय ऑडिट की व्यवस्था पर भी विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की कमेटी स्कूलों के पिछले तीन से पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती है। नियम तोड़ने पर होगी कड़ी कार्रवाई कानून के उल्लंघन पर पहली बार 30 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन पर जुर्माना बढ़कर दो लाख रुपये तक हो सकता है। तीसरी बार नियम तोड़ने पर स्कूल की मान्यता या संबद्धता रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी। अभिभावक जिला स्तरीय रेगुलेटरी बॉडी के समक्ष फीस वृद्धि को चुनौती भी दे सकेंगे।