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सिंहस्थ 2028 की सुरक्षा होगी हाईटेक, RPF ने मांगे 4500 जवान, ड्रोन और 700 CCTV कैमरे

उज्जैन  उज्जैन सिंहस्थ 2028 में 30 करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने मेगा प्लान तैयार कर लिया है। सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए 4500 अतिरिक्त जवान, डॉग स्क्वॉड, ड्रोन और 700 हाईटेक सीसीटीवी कैमरों की मांग का प्रस्ताव भेजा गया है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से लेकर सभी फ्लैग स्टेशनों तक चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखी जाएगी। RPF थाना प्रभारी नरेंद्र यादव के मुताबिक, सिंहस्थ के दौरान उज्जैन मुख्य रेलवे स्टेशन पर दो डॉग स्क्वॉड तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा नईखेड़ी, पिंगलेश्वर, मोहनपुरा, पंवासा, चिंतामन और विक्रमनगर में बन रहे फ्लैग स्टेशनों पर एक-एक डॉग स्क्वॉड की तैनाती रहेगी। बताया जा रहा है कि प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक ड्रोन भी तैनात किया जाएगा, जो आसमान से पूरे क्षेत्र की निगरानी करेगा। इसके साथ ही 700 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों की मांग की गई है, जिन्हें सभी स्टेशनों पर लगाया जाएगा, ताकि कोई भी संदिग्ध गतिविधि कैमरों की नजर से बच न सके। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 4500 अतिरिक्त जवानों की मांग का प्रस्ताव तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजा गया है। इसीलिए पड़ी जरूरत सिंहस्थ 2028 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इनमें से अधिकांश श्रद्धालु ट्रेनों के माध्यम से उज्जैन पहुंचेंगे। रेलवे इस दौरान 7800 विशेष ट्रेनों के संचालन की योजना बना रहा है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए RPF और जीआरएपी दोनों ने अतिरिक्त बल की मांग की है। जीआरएपी भी है तैयार उज्जैन जीआरएपी ने भी 6000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग का प्रस्ताव भेजा है। फ्लैग स्टेशन परिसरों में अस्थायी थाने स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक थाने में 100 पुलिसकर्मी 24 घंटे, सातों दिन (24×7) शिफ्ट के आधार पर तैनात रहेंगे। सिंहस्थ 2028 सुरक्षा प्लान • अतिरिक्त RPF बल – 4500 जवान • डॉग स्क्वॉड – उज्जैन स्टेशन पर 2, बाकी फ्लैग स्टेशनों पर 1-1 • ड्रोन – हर स्टेशन पर 1 • CCTV – 700 अत्याधुनिक कैमरे • GRP बल – 6000 अतिरिक्त जवान • स्पेशल ट्रेनें – 7800 प्लान 

डॉ. यादव के नेतृत्व में तकनीक आधारित सुशासन का मॉडल बना लोक निर्माण विभाग

लोक निर्माण से लोक कल्याण नवाचार से नव निर्माण तक : 2.5 वर्षों में लोक निर्माण विभाग की कार्य पद्धत्ति में आया ऐतिहासिक परिवर्तन डॉ. यादव के नेतृत्व में तकनीक आधारित सुशासन का मॉडल बना लोक निर्माण विभाग हर सड़क, हर परियोजना में गुणवत्ता का संकल्प भोपाल कभी सड़क और भवन निर्माण तक सीमित समझा जाने वाला मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग आज नवाचार, तकनीकी आधुनिकीकरण, पर्यावरण संरक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही के क्षेत्र में देश के अग्रणी विभागों में अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व तथा लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह के मार्गदर्शन में पिछले 2.5 वर्षों के दौरान विभाग ने केवल अधोसंरचना निर्माण ही नहीं किया, बल्कि कार्यप्रणाली में ऐसे परिवर्तनकारी सुधार लागू किए हैं, जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की स्पष्ट सोच रही है कि विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि वह पर्यावरण संरक्षण, जनभागीदारी, तकनीकी दक्षता और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। इसी सोच को आधार बनाकर लोक निर्माण विभाग ने अनेक अभिनव पहलें शुरू की हैं। विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का अनूठा मॉडल : लोक कल्याण सरोवर सड़क निर्माण कार्यों के दौरान आवश्यक मिट्टी एवं मुरम की खुदाई को विभाग ने पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी बनाने का अभिनव निर्णय लिया। अब “लोक कल्याण सरोवर” विकसित किए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में विभाग द्वारा 506 से अधिक लोक कल्याण सरोवर निर्मित किए गए, जिन पर कोई अतिरिक्त व्यय नहीं हुआ। इन सरोवरों के लिए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर विशेष डिजिटल मॉड्यूल विकसित किया गया है, जो निर्माण स्थलों के समीप ऐसे स्थानों की पहचान करता है जहाँ वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके। यह पहल जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण समुदायों को दीर्घकालिक लाभ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सड़कों से भूजल संवर्धन की नई पहल जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट की चुनौती को ध्यान में रखते हुए विभाग ने सड़क किनारे “ग्राउंड वाटर रिचार्ज बोर” निर्माण की अभिनव योजना प्रारंभ की है। प्रत्येक किलोमीटर पर रिचार्ज बोर विकसित किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 840 किलोमीटर लंबाई की सड़कों पर लगभग 1000 रिचार्ज बोर निर्मित किए जा रहे हैं, जिससे वर्षा जल सीधे धरती के भीतर पहुंच सकेगा। ग्रीन बिल्डिंग की दिशा में निर्णायक कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार प्रदेश में सभी नवीन शासकीय भवनों को ग्रीन बिल्डिंग मानकों एवं ऊर्जा दक्षता सिद्धांतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इसके लिए 1500 से अधिक अभियंताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया तथा GRIHA काउंसिल के साथ समझौता कर भवन निर्माण को राष्ट्रीय ग्रीन मानकों से जोड़ा गया। वर्षा जल संचयन, ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन अब प्रत्येक नए भवन निर्माण का अभिन्न हिस्सा बन रहे हैं।  लोकपथ एप लोक निर्माण विभाग द्वारा 2 जुलाई 2024 को शुरू किया गया “लोकपथ मोबाइल ऐप” नागरिक सहभागिता आधारित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुका है। इस ऐप के माध्यम से नागरिक सड़क संबंधी शिकायतों की जियो-टैग्ड तस्वीरें अपलोड कर सीधे विभाग तक पहुंचा सकते हैं। शिकायतों के निराकरण के लिए चार दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है।     आज यह प्लेटफॉर्म केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं, बल्कि जवाबदेह प्रशासन का प्रतीक बन चुका है। हजारों शिकायतों का त्वरित निराकरण कर विभाग ने जनविश्वास को मजबूत किया है। तकनीक आधारित औचक निरीक्षण : गुणवत्ता पर शून्य समझौता गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने देश में अपनी तरह की अनूठी सॉफ्टवेयर आधारित निरीक्षण प्रणाली विकसित की है। प्रत्येक माह की 5 और 20 तारीख को सॉफ्टवेयर द्वारा रैंडम तरीके से चयनित 35 परियोजनाओं का निरीक्षण किया जाता है। अब तक लगभग 980 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप 77 ठेकेदारों को नोटिस जारी किए गए, 28 को ब्लैकलिस्ट किया गया, 16 कंसल्टेंट्स को नोटिस दिए गए, एक को ब्लैकलिस्ट किया गया तथा 105 अभियंताओं के विरुद्ध कार्रवाई की गई। वहीं उत्कृष्ट कार्य करने वाले 38 अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रशंसा भी प्राप्त हुई। यह व्यवस्था स्पष्ट करती है कि विभाग में गुणवत्ता और जवाबदेही पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण निर्माण सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की 14 मंडलीय प्रयोगशालाओं को 61 अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। साथ ही 14 मोबाइल प्रयोगशालाएं भी शुरू की गई हैं, जो निर्माण स्थल पर ही गुणवत्ता परीक्षण कर सकती हैं। 25 निजी प्रयोगशालाओं को भी एम्पैनल किया गया है जिससे स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित हो सके। बिटुमिन गुणवत्ता सुधार का बड़ा निर्णय प्रदेश की सड़कों की दीर्घकालिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने बिटुमिन की खरीद केवल सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियों—आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल से ही सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इससे सड़क निर्माण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जीआईएस आधारित डिजिटल क्रांति भास्कराचार्य संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से विभाग ने 71 हजार 210 किलोमीटर सड़कों, 2 हजार 975 भवनों और 1 हजार 426 पुलों का जियो-टैग्ड सर्वेक्षण पूरा किया है। अब प्रत्येक परिसंपत्ति डिजिटल मानचित्र पर उपलब्ध है। इसी आधार पर रोड नेटवर्क मास्टर प्लान, बजट मॉड्यूल, डीपीआर मॉड्यूल तथा परियोजनाओं के वैज्ञानिक समय निर्धारण जैसे अत्याधुनिक सिस्टम विकसित किए गए हैं। इससे योजना निर्माण अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और परिणामोन्मुख हुआ है।  अभियंताओं की क्षमता वृद्धि पर विशेष ध्यान विभाग ने पहली बार 1700 से अधिक अभियंताओं का प्रशिक्षण आवश्यकता आकलन (Training Need Assessment) कर व्यापक क्षमता निर्माण ढांचा विकसित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 10 जनवरी 2026 को इसके साथ प्रशिक्षण कैलेंडर, लोक कल्याण सूचकांक और विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ हुए समझौतों का शुभारंभ किया।  प्रदेश का पहला इंजीनियर ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट लोक निर्माण विभाग के इतिहास में पहली बार एक समर्पित इंजीनियरिंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ETRI) की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा घोषित यह संस्थान केवल लोक निर्माण विभाग ही नहीं बल्कि प्रदेश के सभी निर्माण विभागों के अभियंताओं के लिए राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट प्रशिक्षण केंद्र बनेगा।    पिछले ढाई वर्षों में लोक निर्माण विभाग ने यह सिद्ध किया है कि अधोसंरचना विकास केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। यदि तकनीक, पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और मानव संसाधन विकास … Read more

मोहन सरकार का प्रशासनिक सर्जरी प्लान! CMO में नई टीम, 15 अफसरों के तबादले संभव

भोपाल  मध्यप्रदेश के 3 प्रमुख सचिव (पीएस), 2 संभागायुक्त और 10 कलेलटरों पर तबादले की तलवार लटकी है। कभी भी इनके तबादले किए जा सकते हैं। ये सभी लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ है, इनमें से 75 फीसद पहले से नई पदस्थापना की जुगत में हैं तो, कुछ को सरकार बदलने का मन बना चुकी है। सूत्रों के मुताबिक प्रमुख सचिवों में अमित राठौर, गुलशन बामरा और सोनाली पोंकशे वायंगंकर का नाम बताया जा रहा है। इनके पास क्रमश: वाणिज्यिक कर, जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय विभाग है। जहां पर ये दो साल से अधिक समय से काम कर रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय में कुछ पदों पर नए सिरे से जमावट की सुगबुगाहट है। हाल में मुख्यमंत्री के सचिव आलोक सिंह को आईजी पंजीयन बनाकर भेजा है। माना जा रहा है कि उनका काम किसी युवा आइएएस को दिया जा सकता है। हालांकि पहले से मुख्यमंत्री के पास इलैया राजा टी और कौशलेंद्र विक्रम सिंह जैसे दो युवा सचिव हैं। बीते बुधवार को भी 29 IAS का हो चुका है तबादला बता दें कि बीते बुधवार सरकार ने 29 आइएएस का तबादला किया था, जिनमें से 20 फीसद आइएएस को बदलने की जिम्मेदारी ऐन वक्त पर ली गई। अभी भी आइएएस खेमे में कुछ नामों के बदलाव के पीछे कई कयास लगाए जा रहे हैं। कई अफसरों से अतिरिक्त प्रभार भी वापस लिए गए। पशुपालन में पीएस, खादी बोर्ड में आएंगे नए एमडी आइएएस माल सिंह जून माह में सेवानिवृब होंगे। वे फिलहाल खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के एमडी है, जबकि जुलाई में प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव सेवानिवृब हो रहे हैं। वे पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव है। इन दोनों ही आइएएस के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके पास मौजूद जिम्मेदारी किसी अन्य आइएएस (MP Transfer cmo) को देनी होगी। तबादलों को हर बार चुनौती देते हैं हजारों शासकीय सेवक तबादलों के बाद अब 1000 से अधिक मामलों में स्थगन की आशंका है। मध्यप्रदेश के 75 फीसद विभागों ने इससे बचने के लिए हाईकोर्ट जबलपुर समेत हाईकोर्ट की दोनों खंडपीठ में केविएट दायर कर दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि हर बार तबादलों के बाद हजारों की संख्या में शासकीय सेवक कोर्ट चले जाते हैं और तबादलों को चुनौती दे देते हैं। एक विभाग प्रमुख ने बताया कि जो तबादले (MP Transfer IAS Transfer) प्रशासकीय आधार पर किए जाते हैं, उनमें स्थगन की स्थिति कई बार बनती है। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते इस साल पहले ही न्यायालयों में केविएट लगा दी है। ताकि स्थगन से पहले विभाग को भी पक्ष रखने का मौका मिल सके। पूर्व में इन कमियों के कारण शासकीय सेवकों को आसानी से स्थगन मिल गए, बाद में ऐसे प्रकरण लंबे चलते हैं और स्थगन खारिज कराना मुश्किल हो जाता है। स्थगन मिला तो विभागाध्यक्षों को करनी पड़ती है सुनवाई कानून मामलों के जानकारों का कहना है कि स्थगन स्थाई नहीं होते, बल्कि यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें संबंधित शासकीय सेवक को सुनवाई का अवसर दिया जाता है। यह सुनवाई तबादला (MP Transfer IAS Transfer CMO Transfer) करने वाले विभाग के प्रमुख द्वारा की जाती है। यदि वे संबंधित शासकीय सेवक के तर्कों से संतुष्ट न हों तो तबादला यथावत रखते हैं। ये कमिश्नर, जिन्हें बुलाने की तैयारी  मनोज खत्री, ग्वालियर- कब से पदस्थ- 29 जून 2024 सुरभि गुप्ता, शहडोल – कब से पदस्थ – 18 नवंबर 2024 ये पीएस, जिनकी बदल सकती है जिम्मेदारी (MP Transfer PS) अमित राठौर, वाणिज्य कर – कब से पदस्थ – 25 जनवरी 2024 गुलशन बामरा, जनजातीय कार्य – कब से पदस्थ – 12 नवंबर 2024 सोनाली पोंकशे वायंगंकर, सामाजिक न्याय – कब से पदस्थ 12 अगस्त 2024 इन कलेक्टर्स को वापल बुला सकती है सरकार (MP Transfer of Collectors) कलेक्टर – जिला – कब से पदस्थ     रुचिका चौहान- ग्वालियर – 11 नवंबर 2024     केदार सिंह – शहडोल – 13 अगस्त 2024     गिरीश मिश्रा – राजगढ़ – 12 अगस्त 2024     रिजू बाफना – शाजापुर – 5 जनवरी 2024     अदिति गर्ग – मंदसौर – 29 जुलाई 2024     पार्थ जायसवाल – छतरपुर – 6 अगस्त 2024     मृणाल मीना – बालाघाट – 12 अगस्त 2024     हर्षल पंचोली – अनूपपुर – 13 अगस्त 2024     हिमांशु चंद्रा – नीमच – 13 अगस्त 2024     किरोड़ीलाल मीना – भिंड – 16 फरवरी 2024

कतर के LNG प्लांट में मौत का धमाका: 13 की दर्दनाक मौत, भारत-पाकिस्तान के नागरिक भी हादसे का शिकार

रास लाफान.  कतर में रास लाफान औद्योगिक शहर में भीषण विस्फोट में 13 लोगों की जान चली गई। कतर एनर्जी ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि देश के प्रमुख ऊर्जा केंद्र रास लाफान औद्योगिक शहर के बरजान क्षेत्र में रविवार देर रात हुए विस्फोट में 13 लोगों की मौत हो गई। कंपनी ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की है। कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि विस्फोट घरेलू गैस आपूर्ति संयंत्र को रखरखाव के बाद दोबारा चालू करने की प्रक्रिया के दौरान हुआ। अचानक हुए विस्फोट के बाद आग भड़क उठी, जिसे स्थानीय अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं की टीमों ने तेजी से नियंत्रित कर लिया। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरने वालों में अधिकांश भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। कतर एनर्जी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस हादसे में कुल 66 लोग घायल हुए हैं। घायलों में कतर, भारत, पाकिस्तान, तंजानिया, गिनी, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या और नाइजीरिया के नागरिक शामिल हैं। कंपनी ने आश्वासन दिया कि सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया और उनकी चोटें गंभीर नहीं हैं। किसी भी घायल की हालत चिंताजनक नहीं बताई गई है। बता दें कि रास लाफान कतर का सबसे बड़ा औद्योगिक और ऊर्जा हब है, जहां दुनिया के सबसे बड़े द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) उत्पादन संयंत्र और निर्यात सुविधाएं स्थित हैं। यह क्षेत्र कतर की आर्थिक समृद्धि का मुख्य आधार है और वैश्विक LNG आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कतर एनर्जी ने स्पष्ट किया कि इस विस्फोट से LNG उत्पादन, निर्यात कार्यों या रास लाफान बंदरगाह के बुनियादी ढांचे पर कोई असर नहीं पड़ा है। संयंत्र और बंदरगाह दोनों पूरी क्षमता के साथ सामान्य रूप से संचालित हो रहे हैं। कंपनी ने वैश्विक बाजार को पूरा आश्वासन दिया है कि गैस आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं आएगा। कतर एनर्जी ने विस्फोट के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय तकनीकी जांच समिति गठित कर दी है। विशेषज्ञ टीम घटनास्थल पर पहुंचकर सबूतों का जुटा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि फिर से चालू करने की प्रक्रिया के दौरान विस्फोट होने की बात सामने आई है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने तक कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। घायलों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां आपको बता दें कि मार्च में ईरान की एक मिसाइल ने रास लाफान पर हमला किया था, जिसमें आग लग गई और भारी नुकसान हुआ। इसके बाद से ही कतर ने वहां उत्पादन रोक रखा था। बताया जा रहा है कि उसी को एक बार फिर से चालू करने की कोशिश की जा रही थी, जिस कारण यह हादसा हुआ। फिलहाल सभी घायलों का इलाज चल रहा है।

लखनऊ आग हादसे से नाराज CM योगी, अधिकारियों को लगाई फटकार; जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को तीन मंजिल की इमारत में लगी आग में झुलसकर 15 लोगों की मौत हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और मामले की जांच के सख्त निर्देश दिए। मुख्यमंत्री अपना अलीगढ का दौरा बीच में ही छोडकर लखनऊ लौटे और घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों के मुताबिक आदित्यनाथ ने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (गृह) मौके पर जाकर घटना का जायजा लेने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले की तह में जाकर दोषियों को सजा दिलाई जाएगी। घटना से गुस्साए सीएम योगी ने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई है। यह आग अलीगंज थाना इलाके में उषा मेहता मार्ग पर स्थित तीन मंजिला वाणिज्यिक इमारत में अपराह्न करीब तीन बजे लगी। आग पर काबू पाने के लिए कई दमकल वाहनों और 'हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म' वाली गाड़ी को अभियान पर लगाया गया। पुरनिया बाजार से चंद कदमों की दूरी पर स्थित यह इमारत अलीगंज के पॉश रिहायशी इलाके में है, जहां कोचिंग सेंटर और कैफे जैसी जगहें हैं। अधिकारियों के अनुसार बचाव अभियान के दौरान आग में फंसे लोगों को इमारत से बाहर निकाला गया। कुछ लोगों को 'बॉडी बैग' में लाया गया, जबकि कुछ को कंबल में लपेटा गया था और एम्बुलेंस में ले जाते समय वे बेहोश लग रहे थे। इन लोगों के शवों या घायलों को बगल की इमारत की छत से बाहर निकाला गया। प्रधानमंत्री ने जताया शोक, मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस घटना में लोगों की मौत पर दुख जाहिर करते हुए मृतकों के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''लखनऊ में अग्नि दुर्घटना में हुई जनहानि अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। अखिलेश यादव ने दुख व्यक्त किया सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर लिखा कि इस हादसे के पीछे के कारणों की ईमानदारी से जांच हो। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों से बचा जा सके, यही कोशिश होनी चाहिए। मायावती ने जताया शोक बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी घटना पर शोक व्यक्त करते हुए 'एक्स' पर कहा, ''उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। उन्होंने आगे कहा, ''इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा। आग लगने के समय इमारत के अंदर मौजूद रहे युवकों और युवतियों के रिश्तेदार बताये जा रहे कुछ लोग घटनास्थल के पास खड़े होकर रोते-बिलखते और अधिकारियों से इमारत के अंदर जाने की गुहार लगाते नजर आये।

प्रसूताओं पर संकट के बीच मंत्री गजेंद्र सिंह की टिप्पणी, कहा- दर्द से बचने की चाह से बढ़ रहे सीजेरियन

जोधपुर  राजस्थान में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामलों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. कोटा, बीकानेर और अब जोधपुर में सामने आए मामलों पर उन्होंने कहा कि सभी मामले अलग-अलग प्रकृति के हैं और इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि प्रभावित महिलाओं में से छह की हालत बिल्कुल ठीक है, जबकि एक महिला को बेहतर उपचार के लिए एम्स रेफर किया गया है. चिकित्सा मंत्री ने सिजेरियन डिलीवरी के बढ़ते मामलों पर कहा कि आज की युवा पीढ़ी प्रसव पीड़ा नहीं चाहती, इसलिए सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. मंत्री के इस बयान को लेकर एक बार फिर बवाल मच गया है।  चिकित्सा मंत्री यहीं नहीं रूके, उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मरीज गंभीर हालत में रेफर होकर बड़े अस्पतालों में पहुंचते हैं. लोग विभिन्न अस्पतालों में इलाज के दौरान धक्के खाते हुए आखिरकार मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचते हैं, ऐसे में हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं. उन्होंने दावा किया कि मातृ मृत्यु दर मात्र एक प्रतिशत है. मंत्री ने कहा कि कोटा मामले में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में गड़बड़ी मिलने के बाद निजी खरीद 25 प्रतिशत तक कम करने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि जोधपुर में कोई महिला गंभीर नहीं है और अब तक की जांच में संक्रमण बड़ा कारण सामने नहीं आया है. किडनी फेलियर के कारणों की अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है।  रेफर की गई दो महिलाओं में से एक की हालत गंभीर इधर, जोधपुर के पावटा स्थित सेटेलाइट अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले को लेकर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है. मिली जानकारी के अनुसार, एमडीएम अस्पताल में रेफर की गई दो महिलाओं में से एक की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, जबकि अन्य छह महिलाओं का उपचार सेटेलाइट अस्पताल में जारी है. डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।  प्रारंभिक जांच में किडनी संक्रमण की आशंका है  एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा के अनुसार, आठ महिलाओं में से एक महिला को अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हुआ था, जबकि दूसरी महिला डायबिटीज की मरीज है और उसका ब्लड प्रेशर काफी कम हो गया था. प्रारंभिक जांच में किडनी संक्रमण की आशंका भी जताई जा रही है. संक्रमण के संदेह के चलते अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को फिलहाल बंद कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है. स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है तथा प्रभावित महिलाओं के उपचार के लिए विशेष चिकित्सकीय टीम तैनात की गई है।  जिला कलेक्टर ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. बैठक में डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा, सेटेलाइट अस्पताल के पीएमओ कुलबीर सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक में पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई और अब तक की जांच रिपोर्ट तथा उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी ली गई।      कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो माताओं की हालत गंभीर होने का समाचार बेहद चिंताजनक है।     प्रसूताओं को सेप्टीसीमिया होना और किडनी खराब होने जैसी गंभीर स्थिति पैदा होना चिकित्सा व्यवस्था में आई भारी… पूर्व सीएम गहलोत ने निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और दो महिलाओं की हालत गंभीर होने की खबर बेहद चिंताजनक है. प्रसूताओं में सेप्टीसीमिया और किडनी संबंधी गंभीर समस्याएं सामने आना चिकित्सा व्यवस्था की खामियों और संभावित लापरवाही की ओर इशारा करता है. सबसे गंभीर बात यह है कि एक ओर शहर में सरकारी कार्यक्रमों और वीआईपी दौरों की तैयारियों पर जोर दिया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर माताओं-बहनों की जान जोखिम में पड़ रही थी. ऐसे मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।  भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता पावटा सेटेलाइट अस्पताल में प्रसूता की तबीयत बिगड़ने के मामले पर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है. मामले की जांच जारी है तथा सरकार पूरे घटनाक्रम पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है. राठौड़ ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए चिकित्सा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद बनाया जाएगा।  राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. भगवान भरोसे चल रही है प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था  राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस ने नेता टीकाराम जुली का कहना है कि कोटा में प्रसूताओं की मौत, बीकानेर में चिकित्सीय लापरवाही और अब जोधपुर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 8 महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की घटनाएं बेहद गंभीर हैं. पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है और माताओं-बहनों की जान जोखिम में है. कांग्रेस ने कहा कि सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय अपनी विफलताओं को छिपाने में लगी है. पार्टी ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि अस्पतालों में बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं, दोषियों पर कार्रवाई कब होगी और प्रदेश की जनता को सुरक्षित व भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं आखिर कब मिलेंगी।  कांग्रेस नेता खाचरियावास ने मंत्री के बयान को बताया महिलाओं का अपमान चिकित्सा मंत्री … Read more

राफेल, S-400 और Su-30 बेसों को मिलेगा नया बूस्ट, बंगाल सरकार ने एयरबेस के लिए दी अतिरिक्त जमीन

कलकत्ता पूर्वी भारत की हवाई सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने हसीमारा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 37 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला किया है।  यह जमीन दोनों एयरबेस के बुनियादी ढांचे के विस्तार, नई सुविधाओं और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल होगी. यह कदम भारत की पूर्वी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को नई ताकत देगा, खासकर चीन की सीमा के करीब।  हसीमारा एयरबेस: राफेल और S-400 का गढ़ हसीमारा एयरबेस अलीपुरद्वार जिले में भूटान सीमा के पास स्थित है. यह भारतीय वायुसेना का बेहद महत्वपूर्ण फॉरवर्ड बेस है. यहां राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात है, जो पूर्वी क्षेत्र और भारत-चीन सीमा पर भारत की लड़ाकू क्षमता को बहुत बढ़ाती है।  राफेल बेहद आधुनिक मल्टीरोल फाइटर है जो लंबी दूरी तक हमला कर सकता है. दुश्मन के रडार से बच सकता है. हवा से हवा, हवा से जमीन दोनों तरह के मिशन कर सकता है. सूत्रों के अनुसार इस बेस पर S-400 ट्रायम्फ लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम भी मौजूद हैं. सरकार ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।  1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद 1963 में इस बेस को सक्रिय किया गया था. चुम्बी घाटी त्रिजंक्शन के पास होने के कारण यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है. अतिरिक्त जमीन मिलने से यहां रनवे सुविधाएं, हैंगर, रखरखाव कार्यशालाएं और सैनिकों की आवास व्यवस्था बेहतर होगी. कलाईकुंडा एयरबेस: ट्रेनिंग और ऑपरेशन का प्रमुख केंद्र पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित कलाईकुंडा एयरबेस पूर्वी एयर कमांड के तहत एक बड़ा फाइटर और ट्रेनिंग हब है. यहां Su-30 MKI और हॉक ट्रेनर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं. यह बेस अंतरराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज के लिए भी प्रसिद्ध है, खासकर सिंगापुर एयर फोर्स के साथ हुए कई द्विपक्षीय अभ्यास यहां हो चुके हैं।  कलाईकुंडा की रनवे लगभग 10,000 फीट लंबी है, जो फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दोनों को संभाल सकती है. मिली 37 एकड़ जमीन से यहां लॉजिस्टिक्स, आवास, रखरखाव और सपोर्ट सुविधाएं बढ़ेंगी. यह विकास गेम चेंजर साबित होगा क्योंकि शांति और युद्धकाल दोनों में यहां तैनाती बदलती रहती है।  राफेल और S-400 का संयोजन हसीमारा को दुश्मन के लिए बहुत खतरनाक बना देता है. S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है. राफेल इस डिफेंस को आक्रामक ताकत देता है।  पूर्वी क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच इन बेसों का विस्तार जरूरी है. दोनों बेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है।  पूर्वी कमान की तैयारियों में तेजी भारतीय वायुसेना पूर्वी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है. हसीमारा और कलाईकुंडा के विस्तार के साथ-साथ नए रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और लॉजिस्टिक सपोर्ट को मजबूत किया जा रहा है. यह विकास न सिर्फ चीन बल्कि समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने में मदद करेगा।  पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जमीन आवंटन से रक्षा मंत्रालय और वायुसेना को तेजी से काम करने में आसानी होगी. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा क्योंकि बुनियादी ढांचे के निर्माण में स्थानीय कंपनियां और मजदूर शामिल होंगे।  पूर्वी भारत की भौगोलिक स्थिति काफी संवेदनशील है. भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और चीन की सीमाएं यहां करीब हैं. इन बेसों का मजबूत होना न सिर्फ हवाई श्रेष्ठता बल्कि थल सेना और नौसेना के साथ समन्वय में भी मदद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में एयरबेस सिर्फ विमान उड़ाने के स्थान नहीं रह गए हैं. ये कमांड सेंटर, ड्रोन बेस, लॉजिस्टिक हब और इंटेलिजेंस यूनिट का काम भी करते हैं. अतिरिक्त जमीन इन बहु-उद्देशीय क्षमताओं को विकसित करने में उपयोगी होगी।  पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हसीमारा और कलाईकुंडा एयरबेस के लिए जमीन आवंटित करना पूर्वी भारत की सुरक्षा दृष्टि से एक महत्वपूर्ण फैसला है. राफेल और S-400 जैसी अत्याधुनिक प्रणालियों के साथ इन बेसों का विस्तार भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में मजबूती देगा. आने वाले समय में इन बेसों की क्षमता बढ़ने से वायुसेना की तैयारियां और बेहतर होंगी तथा देश की समग्र रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई मिलेगी। 

UP में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, टिकटों पर मंथन और नए चेहरों की तलाश

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की सियासत में आने वाले दिन बेहद सरगर्मियों से भरे रहने वाले हैं. अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले राज्य में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होंगे. राज्यसभा चुनाव ने राज्य की राजनीतिक हलचल को चरम पर पहुंचा दिया है. इस चुनाव को केवल संसद के ऊपरी सदन का समीकरण बदलने के तौर पर नहीं, बल्कि 2027 के महामुकाबले से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है. जिन 10 सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें भाजपा के हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बृजलाल, नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य, बनवारी लाल वर्मा और दिनेश शर्मा शामिल हैं. वहीं समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।  आइए समझते हैं कि इस बार उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का पूरा गणित क्या है, किसका पत्ता साफ होने जा रहा है और दोनों दल किस रणनीति पर काम कर रहे हैं. भाजपा के मौजूदा सांसदों में से कई ऐसे चेहरे हैं जिनका कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन पार्टी को दोबारा राज्यसभा भेजना मजबूरी है. हालांकि, पार्टी इस बार कई नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में भी है. इससे कुछ मौजूदा सांसदों का पत्ता साफ होना लगभग तय माना जा रहा है. वहीं, समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव भी इस बार कम से कम दो नए वफादारों जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक चेहरों को दिल्ली भेजने की तैयारी में हैं।  राज्यसभा की 10 सीटों के लिए किसका दावा कितना मजबूत? विधानसभा में वर्तमान संख्या बल को देखें तो भाजपा और उसके सहयोगियों के पास करीब 290 विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास लगभग 102 विधायक हैं. ऐसे में गणित भाजपा के पक्ष में दिखाई देता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा 8 सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर सकती है, जबकि सपा के लिए 2 सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं. सबसे ज्यादा चर्चा उन नेताओं को लेकर है जिनकी दोबारा राज्यसभा वापसी हो सकती है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और और पूर्व आईपीएस बृजलाल के नाम फिर से चर्चा में हैं. जबकि, संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले अरुण सिंह का पत्ता कट सकता है. बीजेपी सामाजिक समीकरणों और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखते हुए कई नए चेहरों को भी मौका दे सकती है।  संख्याबल और संभावित जीत यूपी विधानसभा में 403 सदस्य हैं. एनडीए (बीजेपी + सहयोगी): 290-294 MLAs सपा + सहयोगी: 103-105 (सपा 101-102 + कांग्रेस 2) अन्य बसपा 1, JD(L) आदि, कुछ खाली एक सीट जीतने के लिए लगभग 37 वोट चाहिए. ऐसे में मौजूदा गणित के आधार पर बीजेपी/एनडीए 7-8 सीटें आसानी से जीत सकती हैं. सपा 2 सीटें और अधिकतम 3 जीत सकती हैं, अगर बागी न हों और गठबंधन मजबूत हो।  सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने कोर ‘PDA’ फॉर्मूले को मजबूत करने के लिए किसी बड़े अति-पिछड़े या दलित चेहरे को उच्च सदन भेज सकते हैं. वहीं बीजेपी भी पश्चिम से लेकर पूर्व तक के जातीय संतुलन को साधने वाले नेताओं पर दांव लगाएगी. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह राज्यसभा चुनाव दोनों पार्टियों के लिए नाक का सवाल बन चुका है. जो भी पार्टी उम्मीद से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब होगी, वह राज्य में यह नैरेटिव बनाने में सफल रहेगी कि ‘हवा’ उसके पक्ष में बह रही है. बगावत या क्रॉस वोटिंग के जरिए यदि किसी दल ने दूसरे को पटखनी दी, तो विरोधी खेमे के कैडर का मनोबल टूट जाएगा।  बीजेपी और सपा का सीट गणित उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या के आधार पर ही राज्यसभा की इन 10 सीटों का फैसला होगा. एक राज्यसभा सीट को जीतने के लिए तय प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है. बीजेपी अपने मजबूत संख्याबल और सहयोगी दलों जैसे रालोद, सुभासपा, अपना दल के दम पर कम से कम 7 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है. पार्टी इसके लिए अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करने और विपक्षी खेमे में सेंधमारी की रणनीति पर भी काम कर सकती है. वहीं समाजवादी पार्टी के पास पिछले चुनावों के मुकाबले विधायकों की संख्या बेहतर है. कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद सपा आसानी से 3 सीटें अपने दम पर जीतने की स्थिति में है. यदि विपक्ष एकजुट रहता है और कुछ असंतुष्ट विधायक साथ आते हैं, तो सपा चौथी सीट के लिए भी कड़ा मुकाबला पेश करेगी।  किसका चमकेगा भाग्य और किसका कटेगा टिकट? राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार दोनों ही दल किसी भी ऐसे चेहरे को दोबारा मौका नहीं देना चाहेंगे जो आगामी विधानसभा चुनाव में जमीन पर जातीय या क्षेत्रीय समीकरणों को फिट न बैठता हो. जो नेता पिछले कुछ समय से संगठन में निष्क्रिय रहे हैं या जिनका स्थानीय स्तर पर विरोध है, उनका टिकट कटना तय माना जा रहा है. बीजेपी कुछ बुजुर्ग नेताओं को मार्गदर्शक मंडल या संगठन में भेजकर नए और युवा चेहरों को मैदान में उतार सकती है। 

ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा भूचाल! कीर स्टार्मर का इस्तीफा, कहा- देश पहले, पद बाद में

लंदन  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्‍टार्मर ने अपनी लेबर पार्टी के कई सांसदों के महीनों से चले आ रहे दबाव के बाद अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है। नए नेता का चुनाव होने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। अब लेबर पार्टी में एक बार फिर से नए नेता के चुनाव के लिए दौड़ शुरू हो गई है। कीर ने इस्‍तीफा देने के बाद दिए अपने भाषण में कहा कि उनके लिए देश पहले है। पिछले 1 दशक में 7वें नेता अब ब्रिटेन के पीएम बनेंगे। इससे पहले ऋषि सुनक ने अपने पद से इस्‍तीफा दिया था। कीर स्‍टार्मर जब इस्‍तीफा देने के लिए अपने आधिकारिक आवास 10 डाउनिंग स्‍ट्रीट से निकले तो लोगों ने उनका जोरदार स्‍वागत किया। उन्‍होंने पीएम बनने को अपने जीवन लिए सबसे गर्व का क्षण बताया था। कीर ने कहा कि वह करोड़ों लोगों के जीवन को बदलने के लिए राजनीति में आए थे। उन्‍होंने लेबर पार्टी की साल 2024 की शानदार जीत को अपनी सरकार की उपलब्धि बताया। कीर स्टार्मर ने क्या ऐलान किया? देश के नाम अपने संबोधन के आखिर में कीर स्टार्मर की आवाज भावुक होकर भर्रा गई. स्टारमर ने कहा, "अब मेरी पार्टी यह सवाल पूछ रही है कि क्या मैं अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सबसे सही व्यक्ति हूं. मैंने इस सवाल पर अपनी संसदीय पार्टी का जवाब सुन लिया है और मैं उस जवाब को सम्मान के साथ स्वीकार करता हूं।  फिर कीर स्टार्मर ने कहा है कि वे सत्तारूढ़ लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे रहे हैं. स्टार्मर ने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में नया लेबर नेता चुने जाने तक वे कार्यवाहक (केयरटेकर) प्रधानमंत्री के रूप में काम करते रहेंगे।  ब्रिटेन के राजा को दी इस्‍तीफे की जानकारी कीर स्‍टार्मर ने प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के लीडर दोनों ही पद से इस्‍तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका पीएम पद का 2 साल का कार्यकाल खत्‍म हो गया है। उन्‍होंने कहा कि मैंने उन्‍होंने आज सुबह ही राजा से मुलाकात की है और उनको इस इस्‍तीफे के बारे में बताया है। उन्‍होंने कहा कि लेबर पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक होगी और 9 जुलाई से नामांकन होने लगेगा। कीर स्‍टार्मर ने कहा कि जो कोई भी अगला पीएम बनेगा, उसे उनका पूरा समर्थन रहेगा। साथ ही वह एक सामान्‍य तरीके से सत्‍ता के हस्‍तातंरण में पूरी मदद करेंगे। कीर ने कहा कि मैंने जो कोई भी फैसला लिया, उसे देश को ध्‍यान में रखकर लिया जिसे मैं प्‍यार करता हूं। उन्‍होंने कहा कि देश की अर्थव्‍यवस्‍था अब तेजी से विकास कर रही है और मजदूरी भी बढ़ी है। यह महंगाई से ज्‍यादा है। 17 जुलाई तक ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिलेगा स्टार्मर ने कहा कि लेबर पार्टी जुलाई के मध्य तक अपना नया नेता चुन लेगी। नए नेता और प्रधानमंत्री के चुने जाने तक वह अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने उत्तराधिकारी को पूरा सहयोग देंगे। स्टार्मर ने बताया कि उन्होंने सोमवार सुबह ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III को अपने फैसले की जानकारी दे दी। अब लेबर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (NEC) नए नेता के चुनाव का कार्यक्रम तय करेगी। इसके तहत 9 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी और 17 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश से पहले नए नेता का चुनाव पूरा करने की कोशिश की जाएगी। ब्रिटेन में जनता सीधे प्रधानमंत्री नहीं चुनती। लोग अपने-अपने क्षेत्र से सांसद चुनते हैं। जिस पार्टी के पास संसद में बहुमत होता है, उसी पार्टी का नेता प्रधानमंत्री बनता है। अभी लेबर पार्टी की सरकार है। इसलिए जो व्यक्ति लेबर पार्टी का नया नेता बनेगा, वही प्रधानमंत्री बनने का सबसे बड़ा दावेदार होगा। इसके लिए पूरे देश में आम चुनाव कराने की जरूरत नहीं होती। लेबर पार्टी में एंडी बर्नहैम सबसे आगे ब्रिटेन की राजनीति में काफी लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं। उन्हें पार्टी के लेफ्ट और सेंट्रिस्ट दोनों गुटों का समर्थन हासिल है। बर्नहैम पहले स्वास्थ्य मंत्री समेत कई अहम सरकारी पद संभाल चुके हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने मैनचेस्टर के लिए केंद्र सरकार से खुलकर टक्कर ली थी। उस समय उनकी छवि आम लोगों के हितों के लिए लड़ने वाले नेता की बनी, जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़ी। मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत के बाद एंडी बर्नहैम की स्थिति और मजबूत हुई है। कई राजनीतिक जानकार मानते हैं कि वह स्टार्मर की जगह लेने के सबसे बड़े दावेदार हैं। हालांकि अभी तक किसी उम्मीदवार ने आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश नहीं की है। पार्टी के दूसरे नेता भी मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में नेतृत्व का चुनाव मुकाबले वाला भी हो सकता है। लेबर पार्टी के सांसदों और कार्यकर्ताओं का रुख भी काफी अहम रहेगा। अगर बड़ी संख्या में नेता और सांसद बर्नहैम के समर्थन में आ जाते हैं, तो उन्हें बिना ज्यादा मुकाबले के नेता चुना जा सकता है। कीर स्टार्मर को क्यों छोड़नी पड़ी कुर्सी कीर स्टार्मर पर पिछले कुछ दिनों में लगातार दबाव तेजी से बढ़ गया था कि वे लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दें, ताकि एंडी बर्नहम नए ब्रिटिश प्रधानमंत्री बन सकें. पिछले हफ्ते उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहम ने दक्षिणपंथी प्रतिद्वंदी को हराकर बड़ी जीत हासिल की थी. इस जीत के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा और मजबूत हो गया था. अब उनको ही सत्ताधारी लेबर पार्टी का अगला नेता और ब्रिटेन का नया पीएम माना जा रहा है।  जुलाई 2024 के आम चुनाव में कीर स्टार्मर ने 174 सीटों के बड़े बहुमत के साथ शानदार जीत हासिल की थी. लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल पर कई विवाद छाए रहे हैं. इनमें लेबर पार्टी के सीनियर नेता पीटर मेंडलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत बनाना भी शामिल है, जबकि उनके दोषी यौन अपराधी जेफरी एप्सटीन से संबंधों की जानकारी पहले से थी।  इसके अलावा टैक्स और सामाजिक कल्याण योजनाओं (सोशल बेनिफिट्स) को लेकर सरकार के कुछ फैसलों और बाद में उन्हें बदलने (यू-टर्न लेने) से भी उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है. दूसरी तरफ, एंडी बर्नहम पहले कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. बाद में उन्होंने … Read more

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता और अखण्डता को दी सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव डॉ. मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी 23 जून से 6 जुलाई तक का पखवाड़ा डॉ. मुखर्जी को होगा समर्पित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रीय एकीकरण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका जन्म 6 जुलाई 1901 को निधन 23 जून 1953 को हुआ, जिसे राष्ट्रहित में दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान के रूप में देखा जाता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में विशेष व्यवस्था के विरोध में आंदोलन किया था, उनका बलिदान राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक माना जाता है। डॉ. मुखर्जी शिक्षाविद, चिंतक, सांसद और दूरदर्शी राजनेता थे। डॉ. मुखर्जी ने वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की। उन्होंने वैचारिक राजनीति और संगठन निर्माण पर बल दिया और राष्ट्रहित को दलगत राजनीति से ऊपर रखने का संदेश दिया। डॉ. मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून से उनकी जयंती 6 जुलाई तक विशेष पखवाड़ा आयोजित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नगरीय निकायों के महापौर तथा नगरपालिका अध्यक्ष को मुख्यमंत्री निवास से वी.सी. के माध्यम से संबोधित कर यह निर्देश दिए। जनसेवा का अभियान हो पखवाड़ा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि युवा राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने युवाओं को नेतृत्व, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए प्रेरित किया। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है। पखवाड़े के दौरान युवा सम्मेलन, निबंध प्रतियोगिता और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे नई पीढ़ी को राष्ट्रवादी विचारधारा से जोड़ने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगरीय निकायों द्वारा मार्गों और उद्यानों का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जा सकता है। इस प्रकार की पहल के लिए सभी प्रक्रियाओं का पालन, आवश्यक रूप से किया जाए तथा सक्षम स्तर से सभी स्वीकृतियां अवश्य ली जाएं। पखवाड़ा जनसेवा का अभियान होना चाहिए। पौधरोपण, स्वच्छता अभियान, रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं। यह पखवाड़ा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने का अवसर है।