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नर्सिंग छात्रों ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल को दिया धन्यवाद, विद्यार्थियों के हित में सरकार प्रतिबद्ध

नर्सिंग विद्यार्थियों ने उप मुख्यमंत्री शुक्ल का जताया आभार सरकार विद्यार्थियों के हितों एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध: उप मुख्यमंत्री शुक्ल भोपाल  नर्सिंग विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम घोषित होने से प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है। परिणाम जारी होने से विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई, उच्च कक्षाओं में प्रवेश एवं करियर से जुड़ी बाधाओं का समाधान हुआ है। परीक्षा परिणाम घोषित होने पर नर्सिंग विद्यार्थियों एवं विभिन्न प्रतिनिधियों ने आज भोपाल स्थित उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल के निवास कार्यालय में भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने परीक्षा परिणाम घोषित होने पर सभी विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए न्यायालय के समक्ष छात्र हित का पक्ष मजबूती से रखा। न्यायालय के आदेश के परिपालन में परीक्षा परिणाम घोषित किए गए हैं। सरकार विद्यार्थियों के हितों एवं उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आगे भी आवश्यक कदम उठाती रहेगी। विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने कहा कि परीक्षा परिणाम घोषित होने से विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिली है और उनकी आगे की शिक्षा एवं करियर का मार्ग प्रशस्त हुआ है। विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उप मुख्यमंत्री शुक्ल का धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया तथा छात्र हित में किए गए प्रयासों के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट की बैठक आज, CM साय की अध्यक्षता में लिए गए कई बड़े फैसले

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – 1. मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में लागू अतिथि व्याख्याता नीति (पॉलिसी)-2024 में प्रशासकीय अनुमोदन उपरांत जारी संशोधित नीति-2026 का कार्याेत्तर अनुमोदन किया गया। संशोधित नीति में पूर्व की व्यवस्था को और अधिक स्पष्ट करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि मेरिट सूची में एक ही श्रेणी के दो अभ्यर्थियों के अंक समान होने की स्थिति में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी अभ्यर्थी को वरीयता दी जाएगी। साथ ही, अनुभव के लिए निर्धारित अधिकतम 30 अंकों के अंतर्गत अब शासकीय महाविद्यालय के साथ राजकीय विश्वविद्यालय में एक शैक्षणिक सत्र में न्यूनतम 5 माह अध्यापन कार्य पूर्ण करने पर 5 अंक दिए जाने का प्रावधान किया गया है। पूर्व नीति में राजकीय विश्वविद्यालय में किए गए अध्यापन अनुभव का यह लाभ स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं था। मंत्रिपरिषद द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि शासकीय महाविद्यालयों के साथ राजकीय विश्वविद्यालयों के विस्थापित अतिथि व्याख्याताओं के कार्यानुभव का उपयोग करते हुए उन्हें रिक्त पदों पर पुनर्नियोजन का अवसर दिया जाए तथा मानदेय निर्धारण में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने के लिए कालखण्ड आधारित व्यवस्था के स्थान पर कार्य-दिवस आधारित मानदेय व्यवस्था लागू की जाए। अतिथि व्याख्याताओं एवं अन्य अतिथि शैक्षणिक अमले के कार्य-दायित्व, कार्य-अवधि एवं आकस्मिक अवकाश संबंधी प्रावधानों को भी स्पष्ट किया गया है। 2. मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री जी द्वारा 10 सितम्बर, 2026 को फिल्म ‘हनुमान अंश’ को टैक्स फ्री किए जाने की घोषणा के परिपालन में, फिल्म के प्रदर्शन पर प्रवेश हेतु देय राज्य माल और सेवा कर (एस.जी.एस.टी.) के समतुल्य धनराशि की प्रतिपूर्ति सिनेमाघरों को किए जाने हेतु वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा जारी आदेश का अनुसमर्थन किया गया। 3. मंत्रिपरिषद द्वारा पूर्व अग्निवीर सैनिकों को राज्य की सिविल सेवाओं के तृतीय श्रेणी पदों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान पहले ही किया जा चुका है। इसके तहत पुलिस विभाग में आरक्षक, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में वनरक्षक तथा जेल विभाग में जेल प्रहरी के पदों पर पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण का लाभ मिलेगा। अब इस आरक्षण को लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक सेवा पूर्व अग्निवीर सैनिक भर्ती नियम, 2026 बनाया गया है, जिसका मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन किया गया है। इन नियमों में नियुक्ति एवं सेवा शर्तें, भर्ती के मापदंड, आरक्षण और चयन प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

नशामुक्त पंजाब का टारगेट 2029, जालंधर रैली में अमित शाह का बड़ा ऐलान

जालंधर  पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी नशे के खिलाफ यात्राएं निकाल रही है। 117 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने के बाद नशा विरोधी यात्राओं का समापन आज जालंधर में एक रैली में हुआ। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस रैली में बतौर मुख्य वक्ता भाग लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जनता को सबंधोति करते हुए कहा कि पंजाब देश में दो चीजों के लिए बहुत अच्छे से जाना जाता है। देश में जब भी खाने पाने की जरूरत पड़ती थी तो पंजाब का किसान गोदामों को भर देता था। देश में जब की सुरक्षा की जरूर पड़ती थी मेरे पंजाब का जवान मां भारती के लिए अपना बलिदान देने के लिए तैयार रहता था। पंजाबियों के बलिदान से न हमें केवल आजादी मिली, आजादी के बाद भारत की सीमाओं की रक्षा के लिए कोई एक सूबे अगर सबसे ज्यादा बलिदान दिया है तो वो मेरे पंजाब ने दिया है। आज नशा मुक्त पंजाब बनाने का समय क्यों आया। चिट्टे के खत्म करने की डेडलाइन बताई आप पार्टी की सरकार ने चिट्टे के व्यापार को खुलेआम चलने दिया। मैं आज पंजाब की जनता को कहना आया हूं, पंजाब के चुनाव में कई मुद्दे हैं। मगर आने वाला चुनाव बीजेपी केवल और केवल नशा मुक्त पंजाब के मुद्दे पर लड़ने वाली है। मैं पंजाब की माताओं और युवाओं को वादा करके जाता हूं, भाजपा को समर्थन करो 31 दिसंबर 2029 से पहले हम पंजाब को चिट्टे से मुक्त कर देंगे। मुझे मालूम है केजरीवाल एंड कंपनी मेरे पीछे क्या कहने वाली है। मैं पंजाब की जनता को बताना चाहता हूं हमने जो कहा है वो करके दिखाया है। शाह बोले- हमने जो कहा है वो करके दिखाया 13 दिन में चार हजार किमी, 117 विधानसभा घूमकर यह यात्रा पहुंची है। मैं कहता हूं कि 31 दिसंबर 2029 को नशामुक्त कर देंगे तो केजरीवाल एंड कंपनी क्या कहेगी। हमने जो कहा है, वह करके दिखाया। कश्मीर को आतंकवाद मुक्त करने का काम मोदी सरकार ने किया। देश में नक्सलवाद को खत्म किया। नॉर्थ ईस्ट के आतंकवाद को खत्म करने का काम मोदी जी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार ने किया। मैं फिर माताओं-बहनों को बता रहा हूं कि 31 दिसंबर 2029 के बाद बच्चों को चिट्टा देने वाला कोई नहीं बचेगा। बीजेपी ही ऐसी पार्टी है, जो पंजाब को नशामुक्त कर सकती है। माताओं से किया वादा, तस्करों को चुन-चुनकर डालेंगे जेल रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, "मैं पंजाब की माताओं को यह विश्वास दिलाने आया हूँ कि 31 दिसंबर 2029 के बाद आपके बच्चों को चिट्टा उपलब्ध कराने वाला कोई नहीं बचेगा।" उन्होंने चेतावनी दी कि नशा बेचने वाले तस्करों को चुन-चुनकर जेलों की सलाखों के पीछे डाला जाएगा। शाह ने कहा कि जो पंजाब कभी पूरे देश के लिए गेहूं और धान उगाता था, आज उस उपजाऊ धरती पर नशा बो दिया गया है। उन्होंने बताया कि वे उन पीड़ित परिवारों से भी मिलकर आए हैं जिन्होंने नशे के कारण अपने जवान बच्चों को खोया है। पंजाब की बदहाल अर्थव्यवस्था और घोटालों पर घेरा राज्य की भगवंत मान सरकार पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आज पंजाब की आर्थिक व्यवस्था बेहद बदहाल स्थिति में है। उन्होंने मोगा विज्ञापन घोटाला, बरनाला भूमि घोटाला और पंजीरी घोटाले जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में हर महीने उगाही हो रही है और केवल विज्ञापनों पर सालाना 785 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से सवाल किया कि 25 लाख नौकरियां देने और 26 फसलों पर एमएसपी देने के उनके वादों का क्या हुआ? रैली से पहले मिली थी बम से उड़ाने की धमकी गृह मंत्री के इस दौरे और रैली से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों में उस समय हड़कंप मच गया जब एक स्कूल (कैंब्रिज स्कूल) को ई-मेल भेजकर यह धमकी दी गई कि रैली के स्टेज के नीचे आईईडी (IED) बम रखा गया है। इस ई-मेल में शहर के अन्य स्कूलों, श्री देवी तालाब मंदिर और बसों को भी निशाना बनाने की बात कही गई थी। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत सतर्कता बरतते हुए मंदिर में माथा टेकने और नशामुक्त पंजाब यात्रा के समापन के बाद सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम के बीच इस कार्यक्रम को संपन्न कराया। नशे को सिर्फ बीजेपी कर सकती है खत्म अमित शाह ने कहा कि पंजाब का विकास तबतक नहीं हो सकता जबतक पंजाब का युवा नशा मुक्त नहीं हो जाता। यह नशा हमारी आने वाली पीढ़ियो को बर्बाद कर देता है। पंजाब के युवाओं को नशा न मिले ऐसे सख्त तंत्र की रचना केवल और केवल पीएम मोदी के नेृत्तव में बीजेपी ही कर सकती है कोई और नहीं। आज पंजाब की आर्थिक व्यवस्था बड़ी बदहाल है। पंजाब के अंदर भ्रष्टाचार के एक के बाद एक घपले हो रहे हैं। भगवंत मान से पूछे सवाल अमित शाह ने भगवंत मान से पूछा आपके वादों का क्या हुआ। आप 25 लाख नई नौकरियां देने वाले थे। उन वादों का क्या हुआ, कुछ नहीं हुआ। विधवा पेंशन 2500 करने वाले थे नहीं किया। खनन की आय सालाना 20 हजार करोड़ बढ़ाने वाले थे। सभी फसलों पर एमएसपी देने वाले थे। आपने तो नहीं दिया, हरियाणा में बीजेपी सरकार ने सभी फसलों पर एमएसपी दे दी। कांग्रेस पर भी बोला हमला कांग्रेस पर हमला करते हुए अमित शाह ने कहा कि 2004-14 तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। कांग्रेस के शासन में मात्र 26 लाख किलो नशा पकड़ा गया। बीजेपी सरकार ने नशे के खिलाफ सख्ती की, एक लाख किलो से अधिक नशा पकड़ा। बीजेपी ने एक लाख 90 हजार करोड़ रुपये का नशा पकड़ा। जालंधर वाले पूछेंगे, पंजाब में क्यों नशा नहीं रुका। आम आदमी पार्टी की सरकार हटेगी तो नशे को खत्म कर देंगे। पंजाब का युवा जब तक नशे से मुक्त नहीं होंगे, विकास भी नहीं हो सकता है। अमित शाह ने एक्स पर शेयर की थी एक पोस्ट पंजाब पहुंचने से पहले अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट सांझा की थी। उन्होंने कहा कि पंजाब ‘आप-दा’ सरकार के कुशासन के कारण नशे की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। पंजाब … Read more

MP में CSR का नया रोडमैप तैयार, 61 लाख बच्चों के पोषण और 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों पर फोकस

मध्यप्रदेश में सीएसआर का नया रोडमैप, जरूरत के मुताबिक होगा निवेश, परिणाम पर रहेगी नजर : मंत्री सुश्री भूरिया 61 लाख बच्चों के पोषण और 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंच बनाने की तैयारी भोपाल मध्यप्रदेश में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को सरकारी विकास प्राथमिकताओं से जोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में अधिक प्रभावी परिणाम हासिल करने की दिशा में सरकार ने कॉरपोरेट जगत के साथ साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। सीएसआर कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया ने कहा कि सीएसआर केवल गतिविधियां पूरी करने या निर्धारित लक्ष्य हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समुदायों को मजबूत करना और लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना होना चाहिए। मंत्री श्रीमती भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश जैसे विविधताओं वाले राज्य में सीएसआर निवेश के लिए एक जैसी कार्ययोजना के बजाय स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं और कॉरपोरेट संस्थानों की विशेषज्ञता एवं संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल से ऐसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं, जिन्हें लंबे समय तक कायम रखा जा सके। उन्होंने सीएसआर साझेदारियों में स्पष्ट प्राथमिकताओं, जरूरतों की पहचान, प्रभावी मॉनिटरिंग और परिणामों के मापन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सीएसआर पोर्टल के साथ मध्यप्रदेश का पंखुड़ी पोर्टल भी सरकार की विकास आवश्यकताओं और संभावित सीएसआर साझेदारों के बीच सेतु का काम कर सकता है। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों, निवेश की संभावनाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी साझा कर सरकार, कॉरपोरेट, विकास एजेंसियों और अन्य संस्थाओं के बीच अधिक व्यवस्थित साझेदारी विकसित की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि मजबूत सरकारी-सीएसआर सहयोग से विकास के प्रयासों को अतिरिक्त गति देने के साथ उनकी पहुंच और प्रभाव को भी बढ़ाया जा सकता है। मध्यप्रदेश में 1195 करोड़ से अधिक का सीएसआर निवेश, प्राथमिकताओं से जोड़ने पर जोर मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला ने सीएसआर के कानूनी और संस्थागत ढांचे की जानकारी देते हुए कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 के बाद पात्र कंपनियों के लिए सीएसआर एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में सामने आया है। निर्धारित पात्रता पूरी करने वाली कंपनियों को पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर व्यय करना होता है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 1,195.34 करोड़ रुपये सीएसआर पर खर्च किए गए। हालांकि, इस निवेश में जेंडर इक्विटी और महिला सशक्तिकरण से जुड़े क्षेत्रों की हिस्सेदारी करीब दो प्रतिशत ही है। उन्होंने इसे भविष्य में अधिक सक्रिय सीएसआर भागीदारी की संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया। श्री शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में सीएसआर को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर जरूरतों की बेहतर मैपिंग, सरकार की प्राथमिकताओं के साथ सीएसआर कंपनियों की रुचि का मिलान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना होगा। उन्होंने सीएसआर पोर्टल को और सुदृढ़ करने, सरकारी विभागों, कॉरपोरेट संस्थानों और अन्य साझेदारों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई, जिनके परिणाम स्पष्ट रूप से मापे जा सकें और जिन्हें लंबे समय तक संचालित किया जा सके। उन्होंने मध्यप्रदेश सीएसआर फैसिलिटेशन गाइडलाइनस 2017 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में सरकार की भूमिका सुविधा प्रदाता और समन्वयक की है। सीएसआर के प्रभाव को बढ़ाने के लिए सरकारी तंत्र, कंपनियों, विकास संस्थाओं, सिविल सोसायटी और अन्य हितधारकों के बीच साझेदारी को अधिक संरचित स्वरूप देना समय की आवश्यकता है। 61 लाख से अधिक बच्चों के पोषण में सीएसआर की भागीदारी का बड़ा अवसर महिला एवं बाल विकास आयुक्त श्री संदीप जी. आर. ने सीएसआर को बाल पोषण और शुरुआती बाल विकास से जोड़ते हुए कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसके संपूर्ण विकास की बुनियाद तय करते हैं। विशेष रूप से जीवन के पहले छह वर्ष और शुरुआती 1000 दिन पोषण, वृद्धि और विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में समय पर किए गए हस्तक्षेपों का प्रभाव आगे के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने बाल विकास के लिए निरंतर देखभाल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए सरकार के साथ समाज और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। आयुक्त ने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 61 लाख से अधिक संवेदनशील एवं जरूरतमंद बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को बेहतर बनाने तथा स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नवाचारों को बढ़ावा देने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। श्री संदीप ने स्थानीय संसाधनों पर आधारित पोषण समाधानों का उदाहरण देते हुए ‘रंगीन रोटी’ जैसी पहल का उल्लेख किया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक सामग्री, जैसे सहजन की पत्तियों या मिलेट्स को रोजमर्रा के भोजन में शामिल कर ऐसे पोषण मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जो स्थानीय खान-पान की आदतों के अनुरूप होने के साथ व्यवहारिक भी हों। उन्होंने कहा कि इस तरह के स्थानीय और नवाचारी समाधान समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के साथ पोषण परिणामों को भी बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने सीएसआर की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश देश की आबादी में लगभग छह प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, लेकिन राष्ट्रीय सीएसआर व्यय में राज्य की हिस्सेदारी करीब 1.44 प्रतिशत है। ऐसे में राज्य में सीएसआर निवेश बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने श्योपुर में ब्रिटानिया फाउंडेशन और विदिशा में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी साझेदारियां सरकारी प्रयासों को पूरक समर्थन प्रदान कर सकती हैं। जरूरत और निवेश के बीच बनेगा सीधा संबंध कॉन्क्लेव में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सीएसआर को केवल गतिविधि आधारित व्यय के बजाय स्पष्ट और मापनीय परिणामों से जोड़ा जाए। राज्य और जिलों की वास्तविक जरूरतों की पहचान कर उन्हें सीएसआर संस्थाओं की रुचि, क्षमता और विशेषज्ञता से जोड़ने, परियोजनाओं की निगरानी करने तथा सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति … Read more

मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में बड़ा फैसला, मुस्कान और साहिल को कोर्ट ने दोषी माना

मेरठ मेरठ के चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में जिला जज की अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को हत्या का दोषी करार दिया है. कोर्ट ने दोनों को दोषी तो ठहराया, लेकिन अभी सजा का ऐलान नहीं किया है. अदालत के फैसले के बाद अब दोनों को मिलने वाली सजा पर फैसला होना बाकी है।  बता दें, यह मामला 3 मार्च 2025 का है. आरोप है कि मुस्कान और साहिल ने सौरभ राजपूत का मर्डर कर शव के टुकड़े किए और उन्हें नीले ड्रम में पैक कर ऊपर से सीमेंट भरकर सील कर दिया था.  करीब 15 दिन बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जुलाई 2025 में जिला जज की अदालत में केस का ट्रायल शुरू हुआ. पुलिस ने मामले में करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. इस दौरान 126 तारीखों पर सुनवाई हुई और 22 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए. लंबी सुनवाई और अंतिम बहस के बाद 19 सितंबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।  हत्या से कोर्ट में फैसला सुरक्षित होने तक का पूरा घटनाक्रम सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ अपने घर लौटा था. अगले दिन 25 फरवरी को पत्नी मुस्कान ने उसके लौटने की खुशी में घर पर पार्टी रखी. इसके कुछ दिन बाद 28 फरवरी को परिवार ने बेटी पीहू का जन्मदिन मनाया. इसके बाद 3 मार्च को मामले ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने पूरे घटनाक्रम को हत्या के केस में बदल दिया. टाइमलाइन के मुताबिक, मुस्कान ने डिनर में सौरभ को नींद की दवा मिला दी. इसके बाद साहिल शुक्ला को फोन करके बुलाया गया. आरोप है कि सौरभ की हत्या करने के बाद उसके शव के चार टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में पैक कर दिया गया।  4 मार्च को मुस्कान अपनी बेटी पीहू को अपनी मां के घर छोड़कर साहिल के साथ हिमाचल चली गई. इसके बाद 17 मार्च को मुस्कान हिमाचल से वापस लौटी और मायके पहुंचकर अपने पिता-मां को घटना के बारे में बताया. 18 मार्च को पुलिस इंद्रानगर स्थित घर पहुंची. वहां पुलिस को ड्रम में सौरभ की बॉडी मिली. इसके बाद पुलिस ने साहिल और मुस्कान को गिरफ्तार कर लिया. 19 मार्च को पुलिस ने साहिल और मुस्कान को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की. इसी दौरान सौरभ के शव के चार टुकड़ों का पोस्टमार्टम कराया गया।  जांच आगे बढ़ी तो सामने आए कई अहम सुराग 12 मई को पुलिस ने 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की. इस चार्जशीट में 34 गवाहों का जिक्र किया गया था. पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया गया. 17 जून को मुस्कान और साहिल पर हत्या और सबूत मिटाने के आरोप तय हुए. इसके बाद मामले में ट्रायल शुरू हुआ. 4 जुलाई को सौरभ के भाई बबलू की कोर्ट में गवाही हुई. इसके बाद जुलाई से नवंबर के बीच परिवार, पुलिस, डॉक्टर, डांसर और ड्रम बेचने वाले समेत कई गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज किए गए।  ड्रम और दूसरे सामान को बनाया गया सबूत 19 दिसंबर को कोर्ट में नीला ड्रम और ट्रॉली बैग पेश किए गए. इन्हें मामले में महत्वपूर्ण सबूत बताया गया. इसके बाद 23 जनवरी 2026 को जियो के नोडल अधिकारी ने कोर्ट में कॉल डिटेल, चैट और मोबाइल लोकेशन से जुड़ी रिपोर्ट पेश की. 21 अप्रैल को कोर्ट में मुस्कान और साहिल पर लगे आरोपों को लेकर सुनवाई हुई. दोनों ने अपने ऊपर लगे 32 साल की सजा वाले आरोपों को मानने से इनकार कर दिया।  इसके बाद 22 मई से 17 सितंबर के बीच मामले में अंतिम बहस चली. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया. अब इस मामले में 19 सितंबर को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन कोर्ट ने फैसले की तारीख 30 सितंबर तय कर दी. यानी करीब सात महीने तक चली जांच, गवाहियों, सबूतों और अंतिम बहस के बाद अब मामले में फैसला आने का इंतजार है। 

आसमान में मचा हड़कंप! फ्लाईदुबई विमान को हाईजैक की आशंका, सऊदी में हुई लैंडिंग

तेल अवीव  यूएई के दुबई से इजरायली राजधानी तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के एक विमान की सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया है। माना जा रहा था कि इसको हाईजैक करने की कोशिश की गई। हालांकि इसकी सऊदी अरब में लैंडिंग के बाद विमान के अंदर मारपीट का मामला सामने आया है। बताया गया है कि विमान में हिंसा हुई थी। पायलटों के बीच हाथापाई का दावा किया जा रहा है। सऊदी में विमान की लैंडिंग के बाद संबंधित पक्षों ने राहत की सांस ली है। इजरायली मीडिया के मुताबिक, विमानन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि विमान को सऊदी अरब में उतरना था। इससे पहले ही दुबई-तेल अवीव उड़ान की ओर से इमरजेंसी 7700 स्क्वॉक सिग्नल भेजे गए। सिग्नल मिलने के बाद इजरायली सैन्य विमान भेजे गए। ताकि हाईजैकिंग जैसी संभावित घटना का मुकाबला किया जा सके। विमान से आया इमरजेंसी सिग्नल इजरायली मीडिया ने फ्लाइट डेटा का हवाला देते हुए बताया कि तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के एक यात्री विमान ने सऊदी अरब के ऊपर से वापस मुड़ते समय इमरजेंसी घोषित कर दी। इसके बाद इजरायली वायु सेना के लड़ाकू विमानों को भेजा गया और इमरजेंसी स्तर पर इजरायल में मीटिंग शुरू हो गई। N12 के अनुसार, विमान की ओर इजरायली लड़ाकू विमान भेजे गए। इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू और रक्षा मंत्री काट्ज इस मामले पर बातचीत की। सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि शुरू में अधिकारियों को समझ नहीं आया है कि क्या हो रहा है। उन्हें लगा कि यह विमान अपहरण की कोशिश है। हाईजैक से सरकार का इनकार इधर, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के प्रवक्ता ने हाईजैक की घटना से इनकार किया है। पीएम कार्यालय ने कहा कि बुधवार को फ्लायदुबई के एक विमान को रास्ता बदलकर सऊदी अरब भेजे जाने को हाईजैकिंग की घटना नहीं माना जा रहा है। खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हुए हैं, जब पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के चलते तनाव बना हुआ है। यात्रियों से भरा हुआ था विमान मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कथित इमरजेंसी के समय विमान में 27 बच्चों समेत कुल 174 यात्री सवार थे। कहा जा रहा है कि दोनों पायलट्स के बीच हुई बहस के चलते हाईजैक का सिग्नल चला गया था। वहीं, सिग्नल पाते ही इजरायल की वायुसेना अलर्ट मोड पर आ गई थी और आपातकाल बैठक बुलाई गई थी। असल में क्या हुआ था बाद में यह साफ हुआ कि दो पायलट्स के बीच हाथापाई होने के कारण आसमान में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसके चलते गलत सिग्नल चला गया था। वायनेट के अनुसार, घटना का पता चलते ही पीएम नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई थी। पुलिस आयुक्त डैनी लेवी का कहना था कि वह इजरायल भी तरह के हालात के लिए तैयार हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घटना यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब पश्चिम एशिया का एक बड़ा हिस्सा संघर्ष से जूझ रहा है। इजरायल की लेबनान, गाजा और ईरान से तनातनी लगातार जारी है। वहीं सऊदी अरब और यमन के हूतियों के बीच हालिया हफ्तों में लगातार सैन्य संघर्ष देखा गया है। वहीं ईरान में भी इजरायल और अमेरिका की सात महीने से लड़ाई चल रही है। पश्चिम एशिया में इस तनातनी के बीच यूएई की एयरलाइन के विमान से इमरजेंसी सिग्नल मिलने की वजह से हड़कंप मच गया। यूएई को पश्चिम एशिया में इजरायल का सबसे करीबी माना जाता है। ऐसे में ये आशंका पैदा हो गई कि किसी विरोधी पक्ष ने तो इस विमान का अपहरण नहीं कर लिया है। इस तरह की घटनाएं पहले भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हो चुकी हैं। बुलाई गई इमरजेंसी मीटिंग घटना के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री काट्ज ने एक आपातकालीन सुरक्षा परामर्श बैठक बुलाई। हालांकि, एक सुरक्षा सूत्र ने बाद में स्पष्ट किया, "विमान अपहरण के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है, पायलट ने संकट संकेत भेजा था।" विमान के फ्लाइट ट्रैकिंग ऐप से गायब हो जाने के बाद सुरक्षा सूत्रों ने आश्वस्त किया कि विमान सऊदी अरब की धरती पर उतरने वाला था। विमान बाद में उतरा और आम जनता के लिए उपलब्ध ट्रैकिंग ऐप पर वापस दिखाई देने लगा। फ्लाई दुबई विमान ने संयुक्त अरब अमीरात के दुबई से सुबह 7:05 बजे उड़ान भरी और उसे सुबह 9:30 बजे के आसपास बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उतरना था। लेकिन लगभग डेढ़ घंटे की उड़ान के बाद जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही विमान ने कोड 7700 (अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन और संकट कोड) और फिर कोड 7500 प्रसारित किया, जो अपहरण का संकेत था। उसी समय विमान वापस मुड़ गया और सऊदी अरब के आसमान में लौट आया और कम ऊंचाई पर उड़ने लगा। दक्षिण की ओर उड़ने के बाद यह सऊदी अरब के भीतर पश्चिम की ओर मुड़ गया।

1 अक्टूबर से LPG के 5 बड़े नियम लागू, गैस कनेक्शन कटने से पहले निपटा लें ये काम

 नई दिल्ली  अगर आपके घर में भी खाना पकाने के लिए एलपीजी सिलिंडर (LPG Cylinder New Rules) का इस्तेमाल किया जाता है, तो आपके लिए एक बहुत जरूरी खबर है। 1 अक्टूबर से एलपीजी सिलिंडर (LPG Booking rules) को लेकर कुछ ऐसे बदलाव हो रहे हैं, जिनके बाद से कुछ लोगों को सिलिंडर (Rule changes from 1 oct) नहीं मिलेगा, साथ ही कुछ लोगों को महंगा मिलेगा। तो आइए जानते हैं कि इस परेशानी से बचने के लिए आपको क्या करना है। 1. सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी अगर आपके घर में सब्सिडी वाला घरेलू एलपीजी सिलिंडर (Subsidy LPG Cylinder) लेते हैं, तो अब आपके लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन कराना जरूरी कर दिया गया है। जिन ग्राहकों ने अभी तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें अगली सब्सिडी वाली रिफिल बुक करने से पहले इसे पूरा करना होगा। ये काम आप गैस एजेंसी, डिलीवरी बॉय या फिर घर बैठे तेल कंपनी के एप से भी पूरा कर सकते हैं। 2. बढ़ सकते हैं सिलिंडर के दाम? हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां गैस सिलिंडर के नए रेट (LPG Cylinder Rate) जारी करती है। ये कीमतें इंटरनेशनल मार्केट में ईंधन की कीमत, गैस आयात करने की लागत और सरकार के टैक्स जैसे कई कारकों पर निर्भर करती हैं। फिलहाल दिल्ली (LPG Rate in Delhi) में कमर्शियल सिलेंडर ₹2747 और घरेलू सिलिंडर ₹942 में मिल रहा है। अब देखना होगा कि कल तेल कंपनियां नए रेट को लेकर क्या बताती हैं। 3. रिफिल बुकिंग को लेकर बड़ा बदलाव सरकार ने घरेलू एलजीपी सिलिंडर की अगली रिफिल बुक करने की अवधि को 45 दिन से घटाकर 25 दिन कर दिया है। ये नया नियम देश के सभी घरेलू ग्राहकों पर लागू होगा। पहले सिर्फ शहरी इलाकों में रह रहे लोगों के लिए 25 दिन वाला नियम लागू था, लेकिन अब शहर, गांव और कस्बे हर जगह 25 दिन वाला रूल लागू होगा। 4. पीएनजी कनेक्शन वालों पर सख्ती सरकार पीएनजी (PNG Connections) को बढ़ावा देने के लिए लगातार कई सारे नियम बना रही है। ऐसे में अब जिन इलाकों में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है तो उन ग्राहकों को एलपीजी छोड़ पीएनजी पर शिफ्ट होना पड़ेगा। सरकार के द्वारा भेजे गए नोटिस के 90 दिन बाद आपका एलपीजी कनेक्शन बंद हो सकता है। इसलिए अगर आपके इलाके में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है तो तुरंत उसका कनेक्शन ले लें। 5. डिलीवरी के वक्त OTP जरूरी अब सिलिंडर की सिर्फ बुकिंग रसीद दिखाना काफी नहीं होगा। सिलिंडर की डिलीवरी को और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। बुकिंग के बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) भेजा जाएगा, जिसे सिलिंडर लेते समय डिलीवरी एजेंट को बताना जरूरी होगा। इस व्यवस्था का मकसद फर्जी बुकिंग और बिना रजिस्ट्रेशन के हो रही डिलीवरी पर लगाम लगाना है। फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए बदल जाएगा नियम  फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा जमा करने वाले लोगों के लिए यह खबर काफी जरूरी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। ये नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। नए नियमों के तहत बैंकों को लागू होने वाली ब्याज दरों की जानकारी पहले से देनी होगी। इसके अलावा, बल्क डिपॉजिट पर उपलब्ध ब्याज दरों को रोजाना प्रकाशित करना होगा। ये नियम कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, RRB, लोकल एरिया बैंकों, पेमेंट बैंकों और अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों पर लागू होंगे। रोजाना अपडेट करनी होगी बल्क एफडी दरें बैंकों को हर कामकाजी दिन सुबह 10 बजे तक लागू बल्क डिपॉजिट दरें पब्लिश करनी होंगी। 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया गया है, इसी वजह से दरें सुबह 10:10 बजे तक अपडेट की जा सकती हैं। एक जैसी बल्क एफडी ब्याज दरें एक जैसी बल्क डिपॉजिट के लिए बैंक अलग-अलग दरें नहीं दे सकते, केवल इसलिए कि डिपॉजिट किसी दूसरी ब्रांच में बुक किया गया है। एक ही दिन स्वीकार किए गए एक जैसे डिपॉजिट के लिए सभी ब्रांच में एक ही दर लागू होनी चाहिए। अलग-अलग बल्क एफडी दरों की अनुमति लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो (LCR) फ्रेमवर्क के तहत लागू रन-ऑफ रेट के आधार पर बैंक बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दरें दे सकते हैं। इससे बैंकों को दरें तय करते समय यह सोचने का मौका मिलता है कि अलग-अलग तरह के डिपॉजिट कितनी तेज़ी से बैंक से बाहर जा सकती है। इसमें NRI रुपया डिपॉजिट भी शामिल गैर-निवासियों (NRI) के कुछ रुपया डिपॉजिट पर भी LCR-आधारित यही छूट लागू होगी। क्या आम निवेशकों पर पड़ेगा असर? चूंकि ये नियम बल्क डिपॉजिट (3 करोड़ रुपये और उससे ज्यादा) से जुड़े हैं, इसलिए FD निवेशकों पर इनका असर कम होने की संभावना है। हर महीने की शुरुआत के साथ कुछ नए नियम और बदलाव लागू होते हैं। अब 1 अक्टूबर से भी कई ऐसे बदलाव होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों के रोजमर्रा के काम और जेब पर पड़ सकता है। इनमें LPG, बैंकिंग, UPI पेमेंट, प्रॉपर्टी और गाड़ियों से जुड़े नियम शामिल हैं।  

गोरखपुर में लगातार दूसरे दिन जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं करीब 150 लोगों की समस्याएं

सुनिश्चित होगा हर व्यक्ति की समस्या का समाधान : मुख्यमंत्री गोरखपुर में लगातार दूसरे दिन जनता दर्शन में सीएम योगी ने सुनीं करीब 150 लोगों की समस्याएं मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश, तत्परता और संवेदनशीलता से कराएं समस्याओं का निराकरण गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन, बुधवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान के प्रति आश्वस्त किया। उन्होंने समस्या/शिकायत लेकर आए लोगों से कहा कि चिंता मत करिए, सरकार हर व्यक्ति की समस्या का समाधान प्रतिबद्धता से कराएगी। इस अवसर पर सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे पूरी तत्परता और संवेदनशीलता से यह सुनिश्चित करें कि बिना भेदभाव सबको न्याय मिले। हर पात्र को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था हो, जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो।  गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 लोगों की समस्याएं सुनीं। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान सुनिश्चित कराएगी। मुख्यमंत्री ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। बुधवार को भी जनता दर्शन में कुछ लोग गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार विवेकाधीन कोष से धन उपलब्ध कराएगी।  गुरु पूजा करने के बाद सीएम योगी ने की गोसेवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखनाथ मंदिर प्रवास पर होते हैं तो प्रातःकाल गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने के बाद अपने पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की समाधि स्थल पर जाकर शीश झुकाना, आशीर्वाद लेना उनकी दिनचर्या में शामिल होता है। पर, इस बुधवार उनके लिए गुरु की विशेष पूजा का अवसर था। बुधवार (आश्विन कृष्ण चतुर्थी) को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी विशेष पूजा अर्चना की। मंदिर प्रवास के दौरान पारंपरिक दिनचर्या के अनुसार मुख्यमंत्री गोसेवा करने गोशाला में भी पहुंचे। यहां उन्होंने गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़ खिलाया। गोशाला में मुख्यमंत्री के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आए संतजन भी उपस्थित रहे।

किसानों के लिए बड़ी खबर, छत्तीसगढ़ को मिले ₹181.99 करोड़; कृषि योजनाओं को मिलेगी रफ्तार

 रायपुर  कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने प्रदेश को 181.99 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। इसमें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 91.20 करोड़ और कृषि उन्नति योजना के तहत 90.79 करोड़ रुपये शामिल हैं। कृषि मंत्रियों का सम्मेलन और केंद्रीय मंत्री से मुलाकात नई दिल्ली में 28 और 29 सितंबर को रबी अभियान 2026 के तहत देशभर के कृषि मंत्रियों का सम्मेलन हुआ। इसी दौरान कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री ने उन्हें दोनों योजनाओं के तहत दूसरी किस्त की राशि जारी किए जाने की जानकारी दी। रबी फसल और अभियानों पर विशेष ध्यान  राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान रबी सीजन की तैयारियों और केंद्र सरकार की कृषि योजनाओं को छत्तीसगढ़ में प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर विस्तृत मंथन किया गया। बैठक में किसानों तक सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने और कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि दर्ज करने पर विशेष जोर दिया गया।  182 करोड़ रुपये के इस नए आवंटन से प्रदेश में चल रहे विकसित संकल्प अभियान और खेत बचाओ अभियान को मजबूती मिलेगी। सरकार का प्राथमिक उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ किसानों तक योजनाओं का पारदर्शी लाभ पहुंचाना है।  दलहन और तिलहन का रकबा बढ़ाने की योजना सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के भीतर दलहन और तिलहन फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने की विशेष रणनीति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को बेहतर कृषि व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। स्वीकृत की गई राशि मिलने से प्रदेश की विभिन्न कृषि योजनाओं तथा अभियानों की रफ्तार बढ़ेगी। इससे रबी सीजन के दौरान किसानों को सहायता मिलेगी और खेती से जुड़े अभियानों को जमीनी स्तर पर गति प्राप्त होगी। किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर केंद्रीय मंत्री चौहान ने एक पत्र देते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है। दोनों योजनाओं के तहत मिली राशि से प्रदेश में कृषि से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। कृषि विकास और योजनाओं के अधिकतम लाभ के लिए राशि का उपयोग कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने राशि जारी करने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के मिलकर काम करने से प्रदेश के कृषि क्षेत्र को नई गति मिल रही है। राशि का उपयोग कृषि विकास से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने और किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने में किया जाएगा।  

दवा की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ₹3,000 की मेडिसिन ₹27,000 में बिकने पर सवाल

नई दिल्ली दवाओं की बढ़ती और मनमानी कीमतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दवाओं की मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) और रिटेलर को मिलने वाली कीमत (PTR) के बीच भारी अंतर पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सुनवाई के दौरान एक इंजेक्शन का उदाहरण दिया गया, जिसकी रिटेलर कीमत करीब 3,520 रुपये है, लेकिन उसकी MRP 22,437 रुपये तय है. इसी तरह करीब 3 हजार रुपये की कैंसर दवा की MRP 27 हजार रुपये बताई गई।  बेंच ने हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर इस भारी अंतर का पैसा किसकी जेब में जा रहा है? इसके साथ ही, कोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों में इन-हाउस केमिस्ट से ही दवा खरीदने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए और ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) के तहत मार्जिन की 16 फीसदी सीमा तय करने का सुझाव दिया।  पीठ के सामने उदाहरण रखा गया कि 22,437 रुपये MRP वाली एक इंजेक्शन की कीमत रिटेलर के लिए करीब 3,520 रुपये है। इसी तरह करीब 27,000 रुपये MRP वाली कैंसर की दवा का प्राइस-टू-रिटेलर लगभग 3,000 रुपये बताया गया। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने सवाल किया कि कीमतों के बीच इतना बड़ा अंतर आखिर किसकी जेब में जा रहा है। अस्पताल की फार्मेसी पर भी सवाल कोर्ट ने अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि मरीजों को अक्सर अस्पताल की अपनी केमिस्ट से ही दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यदि कोई मरीज बाहर से वही दवा कम कीमत पर खरीदकर लाता है तो उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाने या अस्पताल की ओर से इलाज को लेकर दबाव बनाए जाने की स्थिति पैदा हो सकती है। जस्टिस मेहता ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज आखिर क्या करे। सुनवाई के दौरान उन्होंने अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की। सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं जस्टिस मेहता ने आगे कहा कि सरकार को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि कई कॉर्पोरेट अस्पताल यह जरूरी कर देते हैं कि दवाइयां उन्हीं के केमिस्ट या किसी खास फ़ार्मेसी से खरीदी जाएं, और अगर मरीज़ उन्हें बाहर से खरीदता है, तो वे इलाज की गारंटी नहीं देते।  "अगर कोई मरीज सरकारी स्कीम के तहत इलाज करवा रहा है, तो उसका खर्च कौन उठाता है? टैक्स देने वाला. तो फिर सबके लिए एक जैसे नियम क्यों नहीं?" 16 परसेंट मार्जिन क्यों नहीं उन्होंने कहा, "DPCO के मुताबिक मार्जिन 16 परसेंट होना चाहिए. हर दवा 'ज़रूरी चीज़ों के कानून' (Essential Commodities Act) के दायरे में आती है. हमें समझ नहीं आता कि उनसे कीमतें इस तरह तय करने के लिए क्यों कहा जाता है।  जस्टिस मेहता ने सॉलिसिटर जनरल से यह भी कहा कि अगर कोई ऐसा फ़ार्मासिस्ट मिल जाए जो बहुत दयालु हो और जरूरतमंद को 2,700 रुपये में दवा देने को तैयार हो, तो मरीज़ सोचने लगेगा कि दवा असली है या नकली।  पैसा कहां जाता है "सवाल यह है कि कीमत में 10 गुना बढ़ोतरी क्यों? इतना सारा पैसा कहां जाता है? इससे किसे फ़ायदा हो रहा है?" "आखिरकार नुकसान ईमानदार टैक्सपेयर का ही होता है. हम इस मामले की अच्छी तरह से जांच करेंगे. इसका असर समाज के एक बड़े हिस्से पर पड़ता है," बेंच ने कहा. उन्होंने आगे कहा कि पहले तो दवाओं की कीमत का मामला है और फिर मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के नैतिक तौर-तरीकों का।  मेहता ने आगे कहा कि फार्मा कंपनियों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है और ऐसा लगता है कि फायदा प्राइवेट अस्पतालों को हो रहा है।  जस्टिस मेहता ने कहा कि बिना किसी कॉम्बिनेशन वाली साधारण स्टेटिन की कीमत 40 रुपये है और एस्पिरिन के साथ कॉम्बिनेशन होने पर इसकी कीमत 70 रुपये हो जाती है।  "ऐसा कैसे हो रहा है? कॉर्पोरेट अस्पताल तो इंडस्ट्री हैं. यह कोई सेवा नहीं है. आम आदमी को यह सब क्यों भुगतना पड़े?" बेंच ने सॉलिसिटर जनरल से कहा।  सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा कि याचिकाकर्ता गलत हैं, लेकिन कोई ऐसा तरीका निकालना होगा जिससे सभी पक्षों के हितों में संतुलन बना रहे. जैसा कि मैं समझता हूं, फार्मा कंपनियों को इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है।  2 याचिकाओं पर सुनवाई बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर के लिए तय की और कहा कि वह इस मुद्दे पर केंद्र का जवाब सुनेगी।  सुप्रीम कोर्ट दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था. जिसमें एक याचिका किशनचंद जैन की थी. ये याचिका इस बात पर ज़ोर देती हैं कि जहां 'शेड्यूल्ड' दवाओं की कीमतें तय (सीलिंग) होती हैं, वहीं 'नॉन-शेड्यूल्ड' दवाओं (जो बाज़ार में संख्या और मूल्य के हिसाब से लगभग 80% या उससे ज़्यादा हैं) के मामले में निर्माताओं को MRP तय करने की ज़्यादा आज़ादी होती है, बस उन्हें सालाना 10% तक की बढ़ोतरी की सीमा का पालन करना होता है।  22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की ज़रूरी दवाओं की ज़्यादा कीमतों पर हैरानी जताई और इसे मरीज़ों के साथ "दिन-दहाड़े डकैती" करार दिया था.  कोर्ट ने गौर किया कि एक दवा की MRP 27,000 रुपये थी, जबकि वह खुदरा विक्रेताओं को 2,700 रुपये में सप्लाई की जा रही थी।  कोर्ट ने सवाल किया कि मरीजों को इस तरह कैसे ठगा जा सकता है और कहा, "यह बहुत हैरानी की बात है कि जिन अधिकारियों को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए, वे चुप हैं।  एक याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे फार्मा कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं द्वारा ज़रूरी दवाओं की कथित अनैतिक रूप से ज़्यादा कीमतें वसूलने पर रोक लगाकर दवाओं को सस्ता बनाएं।  दूसरी याचिका में उन डॉक्टरों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है जो मरीज़ों को जेनेरिक दवाएं नहीं लिखते हैं।   हर दवा पर 16% मार्जिन का सुझाव पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि आवश्यक और गैर-आवश्यक दवाओं के बीच अंतर क्यों रखा जाए और कई दवाओं को Drugs (Prices Control) Order (DPCO) के दायरे से बाहर क्यों रखा गया है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि सभी दवाओं पर MRP के स्तर पर 16 प्रतिशत मार्जिन तय करने की व्यवस्था … Read more