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सुपर फास्ट ब्रह्मोस मिसाइल: एयर डिफेंस सिस्टम S-400, THAAD, आयरन डोम का निकलेगा दम

नई दिल्ली  ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की प्रचंडता को पूरी दुनिया तक पहुंचा दिया. पाकिस्‍तान के अति सुरक्षित नूर खान एयरबेस को कुछ ही मिनटों में गहरा जख्‍म देना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इस्‍लामाबाद को पता भी नहीं चला और उसका सबसे महत्‍वपूर्ण सैन्‍य एयरबेस ब्रह्मोस का शिकार बन गया. दिलचस्‍प बात यह है कि पाकिस्‍तान अपने संवेदनशील ठिकानों पर चीन निर्मित एयर डिफेंस सिस्‍टम डिप्‍लॉय किया हुआ है. इसके बावजूद पड़ोसी देश के सैन्‍य अमले को पता नहीं चल सका कि ब्रह्मोस किधर से आया और उसके सीने पर वार कर दिया. इससे इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि भारत चाहता तो नूर खान एयरबेस के साथ ही पाकिस्‍तान के अन्‍य महत्‍वपूर्ण ठिकानों को पलभर में तबाह कर देता, पर इंडियन आर्म्‍ड फोर्सेज ने बस ट्रेलर दिखाया और स्‍पष्‍ट रूप से बता दिया कि पाकिस्‍तान का कोई भी कोना सेफ नहीं है. ब्रह्मोस को अभी तक इंटरसेप्‍ट करना किसी भी रडार सिस्‍टम के लिए संभव नहीं हुआ है. विशेषज्ञों का तो यहां तक कहना है कि साल 2040 तक इसे इंटरसेप्‍ट कर पाना आसान नहीं होगा. इस बीच, ब्रह्मोस को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आई है. इंडियन डिफेंस साइंटिस्‍ट अब इस घातक मिसाइल का हाइपरसोनिक वर्जन डेवलप करने में जुटा है. ऐसे में किसी भी एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इसे पकड़ पाना और भी मुश्किल हो जाएगा. यह चीन और पाकिस्‍तान जैसे देशों की नींद उड़ा सकती है. भारत की सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल ब्राह्मोस को लेकर एक बार फिर बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है. ब्राह्मोस एयरोस्पेस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भरोसा जताया है कि मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों के बावजूद 2035 से 2040 तक भी ब्राह्मोस मिसाइल को इंटरसेप्ट करना दुश्मनों के लिए बेहद मुश्किल रहेगा. अधिकारी के मुताबिक, भले ही विरोधी देश अपने रडार, सेंसर और स्पेस-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम को अपग्रेड कर लें, फिर भी एकल ब्राह्मोस लॉन्च को रोकने की संभावना बहुत कम बनी रहेगी. अब तक के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो ब्राह्मोस की इंटरसेप्शन दर सैद्धांतिक रूप से शून्य है. यानी आज तक किसी भी ऑपरेशनल परिस्थिति में ब्राह्मोस मिसाइल को रोका नहीं जा सका है. यह बात हाल ही में मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी साबित हुई, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए. इस ऑपरेशन में Su-30MKI लड़ाकू विमानों से दागी गईं ब्राह्मोस मिसाइलों ने अपने अधिकांश लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया. इस अभियान ने युद्ध जैसे हालात में भी ब्राह्मोस की विश्वसनीयता और मारक क्षमता को एक बार फिर साबित कर दिया. ब्रह्मोस मिसाइल का हाइपरसोनिक वर्जन इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए ब्राह्मोस-2 यानी हाइपरसोनिक संस्करण पर भी काम तेजी से चल रहा है. यह नई मिसाइल मैक 7 (8600 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्‍यादा की गति) से भी ज्यादा की रफ्तार से उड़ान भरेगी, जो मौजूदा ब्राह्मोस से दोगुने से अधिक है. इसके पहले परीक्षण उड़ान 2028 के आसपास होने की संभावना है. ब्राह्मोस-2 की हाइपरसोनिक ग्लाइड क्षमता इसे लगभग अजेय बना देगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल अगले 20 से 30 वर्षों तक क्रूज़ मिसाइल वॉर की परिभाषा बदल सकती है. ब्राह्मोस की ताकत उसकी खास बनावट और तकनीक में छिपी है. यह मिसाइल मैक 2.8 से मैक 3 की रफ्तार से उड़ती है और उड़ान के दौरान अचानक दिशा बदलने में सक्षम है. यह बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है, जिससे रडार को इसे समय रहते पकड़ना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा इसमें इनर्शियल नेविगेशन और सैटेलाइट गाइडेंस का मिश्रण है, जो ट्रैकिंग और इंटरसेप्शन को और जटिल बना देता है. भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से बनी यह मिसाइल समय के साथ लगातार विकसित होती रही है. शुरुआत में इसकी रेंज 290 किलोमीटर थी, जिसे अब बढ़ाकर 450 से 900 किलोमीटर तक किया जा चुका है. यही कारण है कि ब्राह्मोस को जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है. ब्रह्मोस को रोक पाना चुनौती वरिष्ठ अधिकारी ने वास्तविक युद्ध अनुभवों का हवाला देते हुए यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि रूस की P-800 ओनिक्स मिसाइल (जिसे ब्राह्मोस का तकनीकी पूर्वज माना जाता है) पश्चिमी देशों की मदद से लगाए गए आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के सामने भी केवल लगभग 6 प्रतिशत तक ही इंटरसेप्ट की जा सकी. P-800 ओनिक्स भी सुपरसोनिक गति और समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ान भरने की क्षमता रखती है. इसके बावजूद पैट्रियट जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी इसे पूरी तरह रोकने में नाकाम रहे. इससे यह साफ होता है कि इतनी तेज रफ्तार और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली मिसाइलों को रोकना आज भी एक बड़ी चुनौती है. चीन-पाकिस्‍तान का निकलेगा दम भविष्य की बात करें तो अधिकारी का मानना है कि 2040 तक ब्राह्मोस की इंटरसेप्शन दर बहुत सीमित ही रहेगी. अगर पाकिस्तान या चीन जैसे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी गैलियम नाइट्राइड (GaN) आधारित AESA रडार, तेज गति वाले इंटरसेप्टर और बेहतर सेंसर सिस्टम भी विकसित कर लेते हैं, तब भी अधिकतम 15 से 20 प्रतिशत मामलों तक ही ब्राह्मोस को रोका जा सकेगा. उन्होंने यह भी कहा कि इन उन्नत तकनीकों को पूरी तरह लागू करना आसान नहीं है. इसके लिए भारी वित्तीय निवेश, तकनीकी विशेषज्ञता और अलग-अलग प्रणालियों का जटिल एकीकरण जरूरी होता है, जो निकट भविष्य में सभी के लिए संभव नहीं है.

नए साल में नई नियमावली: 1 जनवरी से बदल रहे हैं LPG, बैंकिंग और वाहन नियम

नई दिल्ली आपसे बस कुछ ही दिनों में साल 2025 अलविदा कहा जाएगा और नए साल की आमद होगी. 1 जनवरी 2026 से सिर्फ लोगों के घरों का कैलेंडर ही नहीं बदलेगा. बल्कि कई ऐसे नियम भी बदलेंगे जिनका असर सीधे आपकी जेब, प्लानिंग और रोजमर्रा के कामों पर पड़ेगा. बैंकिंग से लेकर सरकारी सेवाएं, गाड़ियों की कीमतें, LPG गैस तक. नए साल से यह बदलाव महसूस होंगे. इसके लिए जरूरी है कि समय रहते समझ लें कि क्या बदल रहा है. क्यों बदल रहा है और आपको क्या करना चाहिए. चलिए आपको बता रहे हैं 1 जनवरी 2026 से किन चीजों में कौन-कौन से बदलाव होने जा रहे हैं.  LPG और फ्यूल की कीमतें 1 जनवरी को घरेलू और कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों की समीक्षा होगी. दिसंबर में कमर्शियल सिलेंडर 10 रुपये सस्ता हुआ था. इसलिए उम्मीद है कि घरेलू सिलेंडर में भी राहत मिल सकती है. अगर ऐसा होता है तो रसोई का  मंथली बजट थोड़ा हल्का होगा. इसके साथ ही एविएशन फ्यूल की कीमतों में बदलाव  हो सकता है. इसका सीधा असर हवाई टिकट के किराए पर पड़ सकता है. अगर ईंधन महंगा हुआ तो फ्लाइट महंगी होंगी और सस्ता हुआ तो टिकट के दाम घट सकते हैं.  कार खरीदना होगा महंगा 2026 में कार खरीदने का प्लान है तो खर्च बढ़ने के लिए तैयार रहें. जनवरी से कई ऑटो कंपनियां कीमतें बढ़ाने जा रही हैं. Honda अपनी कारों के दाम 1 से 2 फीसदी तक बढ़ा सकती है. Nissan करीब 3 फीसदी और MG 2 फीसदी तक बढ़ोतरी की तैयारी में है. BYD की Sealion 7 नए साल में महंगी होगी. Mercedes-Benz ने 2 फीसदी इजाफे का संकेत दिया है. जबकि BMW की कारें 3 फीसदी तक महंगी हो सकती हैं.  सरकारी कर्मचारियों और मजदूरों के लिए बदलाव 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू होने की उम्मीद है. क्योंकि 7वां वेतन आयोग 31 दिसंबर को खत्म हो रहा है. इसके साथ ही महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की संभावना है. इसका मतलब है कि केंद्र और राज्य कर्मचारियों की सैलरी में सीधा फायदा. कुछ राज्य जैसे हरियाणा, पार्ट टाइम और दिहाड़ी मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं.  आधार पैन और बैंकिंग नियम पैन और आधार लिंक करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 है. अगर यह काम नहीं किया तो जनवरी 2026 से पैन इनएक्टिव हो जाएगा. इसका असर बैंकिंग, निवेश और ITR फाइलिंग सब पर पड़ेगा. इसके अलावा नया ITR फॉर्म आ सकता है. जिसमें पहले से भरी बैंक और खर्च की जानकारी होगी. बैंकिंग नियमों में भी बदलाव होंगे. क्रेडिट स्कोर एजेंसियां अब हर हफ्ते डेटा अपडेट करेंगी. पहले 15 दिन में होता था. यानी लोन और कार्ड से जुड़ा असर जल्दी दिखेगा. 

बस्तर पंडुम 2026 का आगाज मां दंतेश्वरी मंदिर से, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे आयोजन की शुरुआत

रायपुर  बस्तर अंचल की समृद्ध लोकपरंपराओं, जनजातीय संस्कृति, कला और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन वर्ष 2026 में भी गत वर्ष की भांति भव्य और आकर्षक रूप में किया जाएगा। इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विगत दिवस मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में आयोजन की विस्तृत तैयारियों की समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन 10 जनवरी 2026 से 5 फरवरी 2026 तक तीन चरणों में प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत 10 से 20 जनवरी तक जनपद स्तरीय कार्यक्रम, 24 से 30 जनवरी तक जिला स्तरीय कार्यक्रम तथा 1 से 5 फरवरी तक संभाग स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस वर्ष बस्तर पंडुम में विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की जा रही है। जिन विधाओं में प्रदर्शन एवं प्रतियोगिताएं होंगी, उनमें बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति, शिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री साय ने तैयारियों के संबंध में विभागीय अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और आयोजन को सुव्यवस्थित, गरिमामय तथा अधिक प्रभावी स्वरूप में संपन्न कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम, बस्तर की असली आत्मा और सांस्कृतिक विरासत का सशक्त मंच है। बैठक में यह बताया गया कि बस्तर पंडुम 2026 का लोगो, थीम गीत और आधिकारिक वेबसाइट का विमोचन माँ दंतेश्वरी के आशीर्वाद के साथ मंदिर प्रांगण में ही मुख्यमंत्री श्री साय द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर वरिष्ठ मांझी–चालकी, गायता–पुजारी, आदिवासी समाज के प्रमुखजन तथा पद्म सम्मान से अलंकृत कलाकार उपस्थित रहेंगे। इस बार विशेष रूप से भारत के विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को आमंत्रित किए जाने पर भी चर्चा हुई, ताकि उन्हें बस्तर की अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर, परंपराओं और जनजातीय जीवन से अवगत कराया जा सके। साथ ही बस्तर संभाग के निवासी उच्च पदस्थ अधिकारी, यूपीएससी एवं सीजीपीएससी में चयनित अधिकारी, चिकित्सक, अभियंता, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि तथा देश के विभिन्न राज्यों के जनजातीय नृत्य दलों को आमंत्रित करने का भी निर्णय लिया गया। प्रतिभागियों के पंजीयन की व्यवस्था इस बार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से करने का प्रस्ताव है, जिससे अधिकाधिक कलाकारों और समूहों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। उल्लेखनीय है कि बस्तर अंचल की कला, शिल्प, त्योहार, खान-पान, बोली-भाषा, आभूषण, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य-गीत, नाट्य, आंचलिक साहित्य, वन-औषधि और देवगुड़ियों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत बस्तर संभाग के सात जिलों के 1,885 ग्राम पंचायतों, 32 जनपद पंचायतों, 8 नगरपालिकाओं, 12 नगर पंचायतों और 1 नगर निगम क्षेत्र में तीन चरणों में आयोजन होगा। इस आयोजन के लिए संस्कृति एवं राजभाषा विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है।  बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति सचिव  रोहित यादव, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, संचालक विवेक आचार्य सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

गांव के आत्मनिर्भर होने से देश होगा आत्मनिर्भर: उप मुख्यमंत्री देवड़ा, 21 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण

गांव के आत्मनिर्भर होने से देश होगा आत्मनिर्भर : उप मुख्यमंत्री देवड़ा ग्राम पिपलिया कराड़िया में 21 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का किया लोकार्पण मंदसौर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने सोमवार को मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पिपलिया कराड़िया में लगभग 21 करोड़ रुपये की लागत से किए गए विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि गांव जब आत्मनिर्भर बनेंगे, तभी देश आत्मनिर्भर बनेगा। उन्होंने ग्रामीणों से स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने, बच्चों एवं अभिभावकों को स्वच्छता अभियान में सहभागी बनाने तथा अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि आज मल्हारगढ़ क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में सड़कों का व्यापक विकास हुआ है। सिंचाई, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, भवन एवं बिजली सहित प्रत्येक क्षेत्र में निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे प्रदेश तेजी से प्रगति की ओर बढ़ रहा है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने 01 करोड़ 7 लाख रुपये की लागत से निर्मित पिपलिया कराड़िया गांव से हाईस्कूल पहुंच मार्ग एवं 01 करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से निर्मित खण्डेरियामारू से नावनखेड़ी मार्ग का लोकार्पण किया। उन्होंने 7 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से लिलदा से नाहरगढ़ पित्याखेड़ी मार्ग का भूमि-पूजन किया। इसके साथ ही 6 करोड़ 90 लाख 97 हजार रुपये की लागत से निर्मित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सुरी तथा 1 करोड़ 99 लाख 90 हजार रुपये की लागत से निर्मित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल पिपलिया कराड़िया का भी लोकार्पण किया। उप मुख्यमंत्री ने ग्राम पाल्यामारु एवं ग्राम लीलदा में 65-65 लाख रुपये की लागत से निर्मित 2 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, जनपद अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधि के साथ जिले के अधिकारी भी उपस्थित रहे।  

भोपाल में पांच राज्यों की शैक्षिक लीडरशिप कार्यशाला का आयोजन, संचालक लोक शिक्षण ने किया शुभारम्भ

पांच राज्यों की शैक्षिक लीडरशिप कार्यशाला का आयोजन भोपाल में संचालक लोक शिक्षण ने किया कार्यशाला का शुभारम्भ भोपाल राष्ट्रीय शैक्षिक नेतृत्व परिषद (एनसीएसएल) नीपा द्वारा 5 राज्यों बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, हरियाणा तथा मध्यप्रदेश की लीडरशिप एकेडमी की समीक्षा एवं योजना निर्माण कार्यशाला का आयोजन भोपाल में एनसीएसल (नेशनल लीडरशिप एकेडमी) नीपा द्वारा जा रहा है। यह कार्यशाला समग्र शिक्षा अभियान, एससीईआरटी तथा सीमेट के योजना निर्माण तथा लीडरशिप संबंधी कार्यो के राज्यों में संपादित कार्यों का रिव्यू एवं आगामी योजना निर्माण के संबंध में आयोजित की जा रही है। भोपाल के अशोका लेकव्यू में 29 से 31 दिसम्बर 2025 तक संचालित होने वाली क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ संचालक लोकशिक्षण डी.एस. कुशवाह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सीमेट के संचालक एवं उप सचिव प्रमोद सिंह, नीपा नई दिल्ली की कार्यशाला प्रभारी डॉ. तृप्ति सिंह, डॉ. योगेश पहाड़िया, डॉ. पंकज सिंह भी उपस्थित थे। कार्यशाला में विभिन्न आमंत्रित राज्यों द्वारा अपने अपने राज्यों में संपादित अनुकरणीय कार्यो (बेस्ट प्रेक्टिसेस) का प्रस्तुतीकरण किया जा रहा है। कार्यशाला में प्रत्येक प्रदेश से 5 से 6 अधिकारियों की सहभागिता की जा रही है। एनसीएसएल नीपा द्वारा मध्यप्रदेश लीडरशिप एकेडमी की स्थापना वर्ष 2016 में की गई थी। वर्तमान में यह लीडरशिप एकेडमी, सीमेट के माध्यम से संचालित है। इसका नामांकन वर्ष 2023-24 में किया गया था। लीडरशिप एकेडमी के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग में प्रधानाध्यापक से लेकर राज्य स्तरीय अधिकारियों के लीडरशिप कार्यक्रमों, मॉड्यूल निर्माण और प्रशिक्षण आदि का संचालन संपादित किया जाता है। इसमें लोक शिक्षण संचालनालय, राज्य शिक्षा केन्द्र एवं जनजातीय कार्य विभाग के द्वारा उपलब्ध कराये गये कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।  

चांदी में भूचाल, एक घंटे में ₹21500 की गिरावट—जानिए किस फैसले से हुई क्रैश

नई दिल्ली चांदी (Silver) की खूब चर्चा हो रही है, सोमवार को भी चांदी की कीमतों में बड़ी उछाल देखने को मिली. MCX पर भाव बढ़कर 2.54 लाख रुपये किलो तक पहुंच गया. लेकिन उसके बाद अचानक एक भूचाल आया और चांदी की कीमत 21500 रुपये प्रति किलो तक गिर गई, यानी एक झटके में सोमवार को चांदी 21 हजार रुपये से ज्यादा सस्ती हो गई.    एक तरह से सराफा बाजार में एक बड़ा मार्केट ड्रामा देखने को मिला. चांदी के भाव ने दिन की शुरुआत में इतिहास रच दिया और फिर एक ही घंटे में 21,500 रुपये तक लुढ़क गए, निवेशक समझ नहीं पा रहे हैं कि ऐसा क्या हुआ, जो चांदी भर-भराकर टूट गई.   पिछले हफ्ते से लगातार रिकॉर्ड बना रही चांदी सोमवार को उस वक्त औंधे मुंह गिर पड़ी, जब उसने ढाई लाख रुपए प्रति किलोग्राम के हाई लेवल को छुआ। इसके कुछ देर बाद ही एक घंटे में चांदी में 21000 रुपए से ज्यादा की भारी गिरावट आई। MCX पर मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी फिसलकर 2,33,120 रुपए प्रति किलोग्राम (silver price crast today) पर आ गई। जिसने निवेशकों को चौंका कर रख दिया। अब सवाल यह कि आखिर चांदी ने इतनी बड़ी गिरावट आई क्यों? दरअसल, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक माहौल के ठंडा पड़ने का नतीजा है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचते ही ट्रेडर्स ने मुनाफा काटना शुरू किया और सेफ-हेवन डिमांड में अचानक ठंडक दिखी। MCX पर भारी गिरावट, 5300 रुपए तक गिरे दाम खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी 2,34,400 रुपए (silver price today) प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी। पिछले दिन के मुकाबले इसमें 2.25 फीसदी यानी 5387 रुपए की गिरावट आई। पिछले कारोबारी सत्र के दौरान यह 2,39,787 रुपए (silver rate today) पर क्लोज हुई थी। खास बात यह है कि आज सुबह मार्केट खुलते ही चांदी में अचानक तेजी आई और कीमत 2,54,174 रुपए प्रति किलोग्राम के हाई लेवल पर पहुचं गई। लेकिन 1 बजे के आसपास इसमें तेजी से गिरावट (silver price crash) आई और 2.34 लाख के आसपास कारोबार करने लगी। यानी चांदी में 21,500 रुपए से ज्यादा की गिरावट आई।  रूस-यूक्रेन युद्धविराम के संकेतों ने गिराई कीमत?  अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही तस्वीर दिखी। चांदी पहली बार उथल-पुथल भरे कारोबार में 80 डॉलर प्रति औंस के ऊपर गई, लेकिन बाद में 75 डॉलर के नीचे फिसल गई। वजह- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेंलेंस्की (Volodymyr Zelensky) के बीच युद्धविराम को लेकर 'काफी करीब' पहुंचने की बात। ट्रंप ने कहा कि दोनों पक्ष यानी रूस और यूक्रेन की शांति वार्ता 'बहुत करीब' है, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर पड़ी। MCX पर आई इस तेज गिरावट को बुलियन मार्केट में ब्रॉड प्रॉफिट बुकिंग का हिस्सा माना जा रहा है। रिलायंस सिक्योरिटीज (Reliance Securities) के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी कहते हैं कि, "ट्रेंड अब भी पॉजिटिव है, लेकिन उतार-चढ़ाव तेज रहेगा। 2.40 लाख चांदी के लिए नजदीकी सपोर्ट है।" वहीं अमेरिकी फर्म BTIG ने चेताया कि कीमती धातुएं पैराबॉलिक हो चुकी हैं। फर्म का कहना है कि, "ऐसी तेजी आमतौर पर समय लेकर नहीं, बल्कि तेज डाउनसाइड रिएक्शन के साथ खत्म होती है।" तकनीकी चार्ट पर चांदी 200-DMA से करीब 89% ऊपर थी- इतिहास बताता है कि ऐसी स्थिति में आगे के हफ्तों में कीमतें अक्सर नीचे आती हैं। अचानक चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट  सुबह जब MCX पर चांदी के मार्च वायदा भाव ने 2,54,174 रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड तोड़ा, तब ऐसे लग रहा था कि 2025 का यह आखिरी कारोबारी सत्र चांदी के नाम हो जाएगा. लेकिन जैसे ही बाजार में प्रॉफिट बुकिंग की लहर चली, भाव ने रफ्तार से उल्टी दिशा पकड़ी और 2,32,663 रुपये तक गिर गया, यानी कुछ ही देर में चांदी की कीमत करीब 21,500 रुपये घट गई.  जानकारों के मुताबिक यह गिरावट अचानक नहीं है, बल्कि तेज उछाल के बाद की सामान्य प्रतिक्रिया है. कई ट्रेडरों ने लाभ सुरक्षित करने के लिए चांदी बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में गिरावट की गति और तेज हो गई. चांदी में तूफानी तेजी के पीछे कारण बता दें, सबसे पहले चांदी पर अंतरराष्ट्रीय बाजार ने दबाव बनाया. वैश्विक सिल्वर की कीमतें पहले $80 प्रति औंस तक पहुंच गईं. लेकिन उसके बाद लुढ़क कर $75 पर पहुंच गई, जिससे घरेलू भावों पर असर पड़ा है. इस बदलाव में यूक्रेन-रूस तनाव में कुछ शांति की खबरें भी शामिल रहीं, जिसकी वजह से 'Safe-Haven' यानी सुरक्षित निवेश की मांग कम हुई.  गौरतलब है कि चांदी ने पिछले एक साल में जबरदस्त रिटर्न दिया है. दिसंबर 2024 में चांदी का भाव करीब 90 लाख रुपये किलो था. जहां से भाव 150% से ज्यादा उछल चुका है. सोमवार को चांदी की कीमत MCX पर 254000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई.  विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी की कीमतों में कई कारणों से बढ़ोतरी देखी जा रही है. औद्योगिक मांग में उछाल, निवेशकों की सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़ती रुचि और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण चांदी की डिमांड बढ़ती जा रही है. खास तौर पर ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर पैनल्स में चांदी की बढ़ती मांग ने कीमतों को उछलने में मदद की है. '10% हाई के बाद 25% गिरी चांदी' BTIG के एनालिस्ट जोनाथन क्रिन्स्की (Jonathan Krinsky) ने 1987 का उदाहरण देते हुए कहा कि जब-जब चांदी ने मल्टी-मंथ हाई पर 10% की एक दिन की छलांग लगाई, उसके बाद 25% तक की गिरावट भी देखी गई। ICICI Prudential Mutual Fund के CIO (फिक्स्ड इनकम) मनीष बंथिया भी मानते हैं कि, "इतनी शानदार रैलियां अक्सर नरमी से नहीं, झटके से ठंडी पड़ती हैं।" हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं होती। केडिया एडवाइजरी के मुताबिक, गिरावट के बाद चांदी ने 80 डॉलर के आसपास तेज रिबाउंड भी दिखाया। मध्य-पूर्व तनाव, अमेरिका-वेनेजुएला खींचतान और दरों में कटौती की उम्मीदें अब भी कीमतों को सहारा दे रही हैं। लंबी अवधि में सप्लाई की कमी, कम इन्वेंट्री और औद्योगिक मांग के चलते ट्रेंड मजबूत है। लेकिन फिलहाल, तेज उतार-चढ़ाव ही नई हकीकत है।

पंकज चौधरी का दांव, यूपी में BJP के सबसे कमजोर किले को मजबूत करने की कोशिश

  नई दिल्ली उत्तर प्रदेश बीजेपी की कमान संभालने के साथ पंकज चौधरी ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है. मिशन-2027 का आगाज पश्चिम यूपी से किया. बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी ने मथुरा में बांके बिहारी के दर्शन कर ब्रज क्षेत्र से यूपी यात्रा शुरू की और दूसरे दिन गाजियाबाद होते हुए मेरठ पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ. इस तरह पूरब से पश्चिम यूपी तक जोड़ने की कवायद में पंकज चौधरी जुट गए हैं. बीजेपी ने पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर भले ही यूपी के सामाजिक समीकरण को साधने की कवायद काफी हद तक कर ली है, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ गया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी दोनों ही गोरखपुर से हैं. इस तरह सत्ता और संगठन पर पूर्वांचल का पूरी तरह से दबदबा दिख रहा है. यूपी की सत्ता और संगठन दोनों की कमान पूर्वांचल के गोरखपुर मंडल के नेताओं के पास है. ऐसे में कहीं न कहीं पश्चिम यूपी के लोगों लगता था कि प्रदेश अध्यक्ष पूरब से हैं तो पश्चिम को कोई खास तवज्जे नहीं देंगे. माना जाता है कि यही वजह है कि पंकज चौधरी ने ब्रज क्षेत्र से अपने यूपी दौरे का आगाज कर पश्चिम यूपी के सियासी समीकरण को साधने में जुट गए हैं. पश्चिम यूपी से पंकज चौधरी का मिशन-2027 पंकज चौधरी ने मथुरा में बाके बिहारी का दर्शन कर मिशन 2027 का आगाज शनिवार को किया. इसके बाद आगरा के प्रतापपुरा स्थित एक मैरिज होम में ब्रज क्षेत्र की पहली बैठक को संबोधित करते हुए पंकज चौधरी कहा कि 2027 में हमें 2017 का रिकॉर्ड तोड़ना है. इसके लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर काम करना होगा. ब्रज क्षेत्र की ताकत को वह जानते हैं, आपका सहयोग आवश्यक है. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर जाता है. इसलिए हमें यहां यहां अपने संगठन को मजबूत रखना है. इसके बाद रविवार को मेरठ पहुंचे, जहां उन्होंने पश्चिम यूपी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. इस दौरान पंकज चौधरी ने कार्यकर्ताओं को समझाया कि विपक्ष में कार्य करने और सत्ता में रहकर काम करने का तरीका अलग है. हमें केंद्र की और प्रदेश सरकार की योजनाओं को हर जरूरतमंद तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचाना है. मेरठ में हुआ पंकज चौधरी का भव्य स्वागत बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पंकज चौधरी रविवार को पहली बार मेरठ पहुंचे, जहां पर उनके स्वागत अलग ही अंदाज किया गया. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली के अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने क्रेन में 15 कुंतल वजनी विशाल माला से पंकज चौधरी को पहनाकर स्वागत किया. पंकज चौधरी कहा कि कार्यकर्ताओं का जोश बता रहा है कि 2027 में बीजेपी ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी. संगठनात्मक शक्ति और कार्यकर्ताओं का जोश यह दर्शाता है कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है. यही 2027 में भाजपा की ऐतिहासिक विजय का आधार बनेगा. पंकज चौधरी के स्वागत में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग भी जुटे थे, क्योंकि कुंवर बासित का अपना गृह क्षेत्र मेरठ है. उन्होंने पंकज चौधरी के स्वागत में पूरी ताकत झोंक दी है.   पंकज चौधरी ने पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण को देखते हुए कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद बिना किसी भेदभाव के सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के साथ कार्य किया जा रहा है. मुख्यमंत्री पद पर योगी आदित्यनाथ के आने के बाद प्रदेश की पहचान बदली है. इस तरह से पंकज चौधरी ने पश्चिम यूपी को साधने में जुट गए हैं.  सत्ता और संगठन पर पूर्वांचल का दबदबा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बने पंकज चौधरी भी गोरखपुर से हैं. इस तरह सीएम और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही गोरखपुर क्षेत्र से हो गए हैं. पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी भी पूर्वांचल में आता है तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी प्रयागराज क्षेत्र से हैं. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भले ही लखनऊ से सांसद हैं, लेकिन उनका गृह जनपद मिर्जापुर भी पूर्वांचल के इलाके में आता है. यूपी के दूसरे डिप्टी सीएम बृजेश पाठक लखनऊ कैंट सीट से विधायक हैं. इस तरह से यूपी में बीजेपी की टॉप लीडरशिप पूर्वांचल क्षेत्र से है. योगी सरकार से लेकर बीजेपी संगठन तक में लखनऊ से लेकर गोरखपुर क्षेत्र तक का दबदबा दिख रहा है. योगी सरकार के मोर्चे पर पहले से ही भारी पूर्वांचल का पलड़ा अब संगठन में भी भारी हो चुका है. यही वजह है कि पंकज चौधरी ने मिशन-2027 का आगाज ब्रज इलाके से किया और वेस्ट यूपी को सियासी संदेश देने की कवायद की. पश्चिम यूपी में बिगड़े समीकरण को करेंगे दुरुस्त यूपी में बीजेपी संगठन की बागडोर अभी तक मुरादाबाद से आने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी के हाथों में थी, जिसके सहारे पश्चिम यूपी को साधे रखा था, लेकिन अब प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर पूर्वांचल से आने वाले पंकज चौधरी विराजमान हो गए हैं. ऐसे में बीजेपी के सामने क्षेत्रीय संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है. उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सत्ता में वापसी और सियासी उभार में पश्चिम यूपी का अहम रोल था. लोकसभा चुनाव-2014, 2019 और विधानसभा चुनाव 2017, 2022 में बीजेपी का पश्चिम यूपी में सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है. इस तरह बीजेपी की सियासी ताकत में पश्चिमी यूपी की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही है. 2024 के सियासी झटके से उभारने की कवायद 2024 में बीजेपी को पूर्वांचल के साथ पश्चिमी यूपी और ब्रज के क्षेत्र में सियासी तौर पर गहरा झटका लगा था. 2024 में बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर और अमरोहा सीटें जीती हैं, जबकि नगीना, कैराना, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर जैसी सीट हार गई है. बागपत और बिजनौर सीट बीजेपी की सहयोगी आरएलडी ने भी जीती थीं. पश्चिम यूपी की मुरादाबाद, संभल, रामपुर, आंवला जैसी सीटें इस बार हार गई है. इसके अलावा ब्रज क्षेत्र में फिरोजाबाद, बदायूं और लखीमपुर, सीतापुर, कन्नौज, इटावा जैसी सीटें हार गई है. इसके अलावा बुंदेलखंड की पांच में से चार सीटें बीजेपी हार गई और सिर्फ एक सीट ही जीत सकी थी, … Read more

₹79,000 करोड़ की मंजूरी से बदलेगी सेना की ताकत, DAC के फैसले से क्या होंगे बड़े बदलाव?

नई दिल्ली भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं और युद्धक प्रभावशीलता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक निर्णय लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने सोमवार को लगभग ₹79,000 करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों के लिए 'आवश्यकता स्वीकृति' (AoN) प्रदान की। यह मंजूरी मुख्य रूप से भविष्य के युद्धक्षेत्र की जरूरतों, जैसे ड्रोन तकनीक, सटीक मारक क्षमता और उन्नत रडार प्रणालियों पर केंद्रित है। थल सेना के लिए स्वीकृत प्रस्तावों में आधुनिक तकनीक का समावेश किया गया है, जो सामरिक युद्ध क्षेत्र में भारत की बढ़त सुनिश्चित करेंगे। लोइटर मुनिशन सिस्टम: सामरिक लक्ष्यों पर सटीक और घातक हमले करने के लिए इन प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी गई है-     लो लेवल लाइट वेट रडार: ये रडार छोटे आकार के और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAVs) का पता लगाने और उन पर नज़र रखने में सक्षम होंगे।     पिनाका एमआरएलएस (MLRS): पिनाका मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट गोला-बारूद को मंजूरी मिली है, जिससे उच्च मूल्य वाले लक्ष्यों को अधिक सटीकता से निशाना बनाया जा सकेगा।     ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम: एकीकृत ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम एमके-II (Mk-II) भारतीय सेना की महत्वपूर्ण संपत्तियों की रक्षा करेगा। भारतीय नौसेना: समुद्री जागरूकता और सुरक्षित संचार नौसेना की क्षमताओं को आधुनिक बनाने के लिए निम्नलिखित प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई है-     बीपी टग्स (Bollard Pull Tugs): ये टग्स बंदरगाहों और संकरे जलक्षेत्र में जहाजों और पनडुब्बियों की पैंतरेबाजी और लंगर डालने में सहायक होंगे।     सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (HF SDR): हाई फ्रीक्वेंसी एसडीआर मैनपैक के शामिल होने से बोर्डिंग और लैंडिंग ऑपरेशंस के दौरान लंबी दूरी का सुरक्षित संचार सुनिश्चित होगा।     HALE RPAS (पट्टा): हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग रेंज रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम को पट्टे (Lease) पर लिया जाएगा। वायुसेना: एयरोस्पेस सुरक्षा और लंबी दूरी की मारक क्षमता भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े को और अधिक घातक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण हथियारों और प्रणालियों की घोषणा की गई है। ये हैं-     एस्ट्रा एमके-II मिसाइल: हवा से हवा में मार करने वाली इस उन्नत मिसाइल से लड़ाकू विमानों की दुश्मन को लंबी दूरी से नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी।     SPICE-1000 गाइडेंस किट: यह किट भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता (Precision Strike) को और मजबूत करेगी।     फुल मिशन सिमुलेटर: एलसीए (LCA) तेजस के लिए सिमुलेटर पायलटों के प्रशिक्षण को अधिक किफायती, सुरक्षित और प्रभावी बनाएंगे।     ऑटोमैटिक टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम: यह तकनीक एयरोस्पेस सुरक्षा में सुधार करेगी और हर मौसम में स्वचालित रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराएगी। आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव ये सभी प्रस्ताव 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं से भारतीय रक्षा उद्योगों, विशेषकर रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी क्षेत्र के एमएसएमई (MSMEs) को बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिलेंगे, जिससे देश में रोजगार और तकनीकी नवाचार को गति मिलेगी। भविष्य की रणनीतिक तैयारी ₹79,000 करोड़ का यह निवेश न केवल सेनाओं की वर्तमान कमियों को दूर करेगा, बल्कि भारत को भविष्य के 'टेक्नोलॉजी-ड्रिवेन' युद्धों के लिए भी तैयार करेगा। पिनाका और एस्ट्रा जैसी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों पर भरोसा जताना वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती रक्षा निर्यात क्षमताओं और रक्षा विनिर्माण में स्वावलंबन का प्रमाण है।

मंत्री कुशवाहा का बयान: समावेशी विकास के लिए सामाजिक न्याय से लेकर कृषि-उद्यानिकी तक मजबूत नींव रखी

विकास एवं सेवा के दो वर्ष सामाजिक न्याय से लेकर कृषि–उद्यानिकी तक, समावेशी विकास की रखी मजबूत नींव : मंत्री कुशवाहा म.प्र. उद्यानिकी के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य 2 वर्षों में उद्यानिकी रकबे में हुई सवा 3 लाख हैक्टेयर की वृद्धि भोपाल  सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण एवं उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन–2047 और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। सामाजिक न्याय से लेकर कृषि–उद्यानिकी तक, समावेशी विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने प्रदेश में गत 2 वर्षों में उद्यानिकी और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में हुए उपलब्धियों, नवाचारों और आगामी 3 वर्षों में विभाग की कार्य योजनाओं के संबंध में अवगत कराया। उद्यानिकी में रिकॉर्ड वृद्धि गत दो वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 25.12 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 28.29 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में उत्पादन 389.10 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 425.68 लाख मीट्रिक टन पहुंच गया है। प्रदेश की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 15.08 मीट्रिक टन, राष्ट्रीय औसत से अधिक है। मध्यप्रदेश मसाला उत्पादन में प्रथम, पुष्प उत्पादन में द्वितीय, सब्जी उत्पादन में तृतीय और फल उत्पादन में चतुर्थ स्थान पर है। जीआई टैग और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस रीवा का सुंदरजा आम और रतलाम का रियावन लहसुन जीआई टैग प्राप्त कर चुके हैं। प्रदेश की 15 फसलों का जीआई पंजीयन कराया गया है। इजराइल के तकनीकी सहयोग से मुरैना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया गया है, जबकि छिंदवाड़ा और हरदा में नए सीओई विकसित किए जा रहे हैं। खाद्य प्रसंस्करण और नवाचार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के अंतर्गत 8,198 ऋण प्रकरण स्वीकृत किए गए हैं और 3,113 उद्यमियों को 108.64 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। सेंसर आधारित स्वचलित फर्टिगेशन, मखाना क्षेत्र विस्तार, एग्जोटिक सब्जी क्लस्टर, हाईटेक नर्सरी और इंक्यूबेशन सेंटर जैसे नवाचार लागू किए जा रहे हैं। आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना आगामी तीन वर्षों में उद्यानिकी फसलों का रकबा 33.39 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने, 15 हजार सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और 25 फसलों को जीआई टैग दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2026: कृषि वर्ष मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया है। इसके अंतर्गत उद्यानिकी को बढ़ावा, खाद्य प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी। सामाजिक न्याय और दिव्यांग कल्याण के क्षेत्र में अभिनव प्रयास मंत्री कुशवाहा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने गत दो वर्षों में सामाजिक और शारीरिक रूप से कमजोर वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई अभिनव और प्रभावी पहल की हैं। दिव्यांगजनों की क्षमताओं को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से विभाग निरंतर कार्य कर रहा है। वर्तमान में प्रदेश के 6 लाख 97 हजार दिव्यांगजनों को प्रतिमाह 41.87 करोड़ रुपये की पेंशन वितरित की जा रही है। साथ ही 9 लाख 89 हजार से अधिक दिव्यांगजनों को यूडीआईडी कार्ड प्रदान किए जा चुके हैं, जिससे उन्हें विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन सशक्तिकरण और कृषि–उद्यानिकी के क्षेत्र में किए गए ये प्रयास प्रदेश को समावेशी, आत्मनिर्भर और समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। शिक्षा, तकनीक और रोजगार पर विशेष फोकस दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रदेश के 17 जिलों में शासकीय एवं अशासकीय विशेष विद्यालयों के तीन-तीन कक्षों को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किया गया है। श्रवणबाधित दिव्यांगजनों की संवाद संबंधी कठिनाइयों को दूर करने के लिए क्यूआर कोड आधारित लाइव इंटरप्रेटर सुविधा प्रारंभ की गई है। अब तक 34 हजार 649 दिव्यांगजनों को 59 हजार से अधिक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। रोजगार सृजन के क्रम में 2,589 दिव्यांगजनों को शासकीय सेवाओं में नियुक्ति दी गई है। निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर केन्द्र सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था एटिपिकल एडवांटेज के साथ 2 दिसंबर 2025 को एमओयू किया गया है। इसके माध्यम से दिव्यांगजनों को उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक संस्था द्वारा 5 दिव्यांगजनों को रोजगार दिया जा चुका है। खेल, विवाह प्रोत्साहन और विशेष उपलब्धियां दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 958 दंपत्तियों को लाभ दिया गया है। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। तैराकी प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए सत्येन्द्र लोहिया, रामबरन पाल एवं सद्दाम खान को पाँच–पाँच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वृद्धजनों का सम्मान: सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन प्रदेश में 81 वृद्ध आश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें राज्य, केंद्र और जनसहयोग से संचालन हो रहा है। प्रति हितग्राही 2,200 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण सहायता सहित अन्य आवश्यक व्ययों का वहन किया जा रहा है। मंत्री कुशवाहा ने बताया कि राजधानी भोपाल में आधुनिक सुविधाओं से युक्त पेड ओल्ड एज होम का संचालन सेवा भारती मध्य भारत प्रांत द्वारा किया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन: 100 प्रतिशत ई-केवाईसी प्रदेश की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 54 लाख से अधिक हितग्राहियों का 100 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण किया गया है। प्रतिमाह 325 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से सीधे खातों में अंतरित की जा रही है। नशामुक्त भारत अभियान: जनभागीदारी से जागरूकता “विकसित भारत का मंत्र, भारत हो नशे से स्वतंत्र” अभियान के तहत प्रदेश में प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से जन-जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह सहायता योजना: बड़ा सामाजिक संबल विगत 2 वर्षों में इस योजना के अंतर्गत 1 लाख 52 हजार हितग्राहियों को 838.44 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है। पात्रता और आयोजन प्रक्रिया को सरल एवं प्रभावी बनाने के लिए योजना में संशोधन किया गया है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवार लाभान्वित हो सकें।  

रक्षा मंत्रालय ने 79 हजार करोड़ की रक्षा खरीद को दी मंजूरी, MRSAM मिसाइलें और MQ-9B ड्रोन होंगे शामिल

 नई दिल्ली रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने करीब 80 हजार करोड़ रुपये की रक्षा खरीद और अपग्रेड प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है. यह फैसला भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इसमें पुराने हथियारों का अपग्रेड, नए आधुनिक हथियारों की खरीद और स्वदेशी विकास शामिल हैं. मुख्य मंजूरियां क्या हैं? टी-90 भीष्म टैंकों का ओवरहॉल: करीब 200 टी-90 टैंकों का स्वदेशी तरीके से मिड-लाइफ अपग्रेड और ओवरहॉल किया जाएगा. यह काम डिफेंस पब्लिक सेक्टर यूनिट (DPSU) करेगी. इससे टैंकों की उम्र बढ़ेगी. लड़ाई में ताकत बढ़ेगी. एमआई-17 हेलीकॉप्टरों का अपग्रेड: मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टर एमआई-17 का मिड-लाइफ अपग्रेड होगा. इससे हेलीकॉप्टरों की ऑपरेशनल तैयारी और भरोसेमंदी बढ़ेगी.  लोइटरिंग मुनिशन (कामिकाज़ ड्रोन): आधुनिक युद्ध के लिए लोइटरिंग मुनिशन (सुसाइड ड्रोन) खरीदने की मंजूरी. ये ड्रोन दुश्मन के ठिकाने पर घूमकर सटीक हमला करते हैं. एमआरएसएएम मिसाइलें: भारतीय नौसेना और वायुसेना के लिए मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) खरीदी जाएंगी. इससे हवाई और समुद्री रक्षा मजबूत होगी. Astra मार्क-2 और मीटियोर मिसाइलें: वायुसेना के लिए बहुत बड़ी संख्या में Astra मार्क-2 एयर-टू-एयर मिसाइलें (200 किमी से ज्यादा रेंज) विकसित और खरीदी जाएंगी. साथ ही कुछ मीटियोर मिसाइलें भी ली जाएंगी. स्पाइस-1000 बम: इजरायल से बड़ी संख्या में स्पाइस-1000 एयर-टू-ग्राउंड गाइडेड बम खरीदने पर चर्चा हुई. ये बहुत सटीक हमले करते हैं. पिनाका रॉकेट का विकास: 120 किलोमीटर रेंज वाली नई पिनाका रॉकेट का विकास मंजूर. खास बात यह है कि इन्हें मौजूदा 45 किमी और 80 किमी रेंज वाली पिनाका लॉन्चर से ही दागा जा सकेगा. एयर-टू-एयर रिफ्यूलर और AWACS: हवाई रिफ्यूलिंग टैंकर और एयरबॉर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) की खरीद के लिए RFP (रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल) में बदलाव मंजूर. ये लंबी दूरी के हवाई ऑपरेशन के लिए जरूरी हैं. सी गार्जियन ड्रोन का लीज: अमेरिका से दो MQ-9B हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) सी गार्जियन ड्रोन को 3 साल के लिए लीज पर लेने का फैसला जल्द. भारत पहले ही 31 ऐसे ड्रोन खरीदने का सौदा कर चुका है, जिनकी डिलीवरी 2028 से शुरू होगी. इन फैसलों का महत्व     आधुनिकीकरण: पुराने टैंक और हेलीकॉप्टरों को नया जीवन मिलेगा.     आधुनिक युद्ध क्षमता: ड्रोन, लोइटरिंग मुनिशन और लंबी रेंज मिसाइलें से सटीक और तेज हमले संभव.     स्वदेशी बढ़ावा: टी-90 ओवरहॉल, पिनाका और Astra जैसे प्रोजेक्ट से आत्मनिर्भर भारत को बल.     लंबी दूरी की ताकत: रिफ्यूलर, AWACS और लंबी रेंज हथियारों से वायुसेना की पहुंच बढ़ेगी. DAC की बैठक में रक्षा मंत्रालय के बड़े अधिकारी और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल थे. ये फैसले भारतीय सशस्त्र बलों की युद्ध तैयारी को नई ऊंचाई देंगे. सीमाओं पर मजबूत संदेश देंगे. आगे इन प्रस्तावों को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी मिलने के बाद ठेके दिए जाएंगे.