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रिपोर्ट: भारत की अर्थव्यवस्था 2047-48 तक 26 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छूने की संभावना

नई दिल्ली  अगर भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में 6 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर के साथ बढ़ती है तो देश की जीडीपी वित्त वर्ष 2047-48 तक 26 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। साथ ही, प्रति व्यक्ति आय 15,000 डॉलर होने की उम्मीद है, जो कि मौजूदा स्तर से छह गुना अधिक है। यह जानकारी ईवाई की एक रिपोर्ट में दी गई।  रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में जापान और जर्मनी को पछाड़ कर 2030 तक अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी। भारत ने विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है, जो मुख्य रूप से इसकी आर्थिक उदारीकरण नीतियों के कारण संभव हुआ है। इन नीतियों ने भारत को अधिक बाजार केंद्रीय बनाया, निजी पूंजी की भूमिका को बढ़ाया और इस प्रक्रिया ने देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत किया। आने वाले दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के अनुमान किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे अधिक हैं। 5वीं सबसे बड़ी इकोनॉमी  भारत ने विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है, जो मुख्य रूप से इसकी आर्थिक उदारीकरण नीतियों के कारण संभव हुआ है. इन नीतियों ने भारत को अधिक बाजार केंद्रीय बनाया, निजी पूंजी की भूमिका को बढ़ाया और इस प्रक्रिया ने देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत किया. आने वाले दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के अनुमान किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे अधिक हैं. 2 दशकों में 14% बढ़ा सर्विस एक्‍सपोर्ट  पहले से मजबूत भारत के सेवा निर्यात में पिछले दो दशकों में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2021-22 में यह 254.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया. सेवा निर्यात का एक बड़ा हिस्सा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सेवाओं से आता है, जो 2021-22 में 157 अरब डॉलर था. यह वृद्धि भारतीय मुख्यालय वाली और वैश्विक आईटी कंपनियों दोनों के कारण हुई है. दुनिया के 45% ग्‍लोबल कैपिसिटी सेंटर भारत में  इसके अलावा, अन्य ग्लोबल कॉरपोरेट्स भारत में स्थित अपने क्षमता केंद्रों के माध्यम से भारतीय प्रतिभा का लाभ उठा रहे हैं, जिनमें 50 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं. लागत लाभ के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभा और अत्याधुनिक इनोवेशन का एक प्रमुख स्रोत बन गया है. भारत में स्थित 1,500 वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) वैश्विक जीसीसी के 45 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014-19 की अवधि में, अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में, डिजिटल अर्थव्यवस्था में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से 2.4 गुना अधिक थी. पहले से मजबूत भारत के सेवा निर्यात में पिछले दो दशकों में 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2021-22 में यह 254.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सेवा निर्यात का एक बड़ा हिस्सा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सेवाओं से आता है, जो 2021-22 में 157 अरब डॉलर था। यह वृद्धि भारतीय मुख्यालय वाली और वैश्विक आईटी कंपनियों दोनों के कारण हुई है। इसके अलावा, अन्य ग्लोबल कॉरपोरेट्स भारत में स्थित अपने क्षमता केंद्रों के माध्यम से भारतीय प्रतिभा का लाभ उठा रहे हैं, जिनमें 50 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। लागत लाभ के रूप में शुरू हुआ यह प्रयास अब उच्च गुणवत्ता वाली प्रतिभा और अत्याधुनिक इनोवेशन का एक प्रमुख स्रोत बन गया है। भारत में स्थित 1,500 वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) वैश्विक जीसीसी के 45 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2014-19 की अवधि में, अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में, डिजिटल अर्थव्यवस्था में 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर से 2.4 गुना अधिक थी।

खेल और खेलकूद के क्षेत्र में 11 सालों में हुए बड़े परिवर्तन: मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में मा0 विधायक खेल  प्रतिस्पर्धा-2025 के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये विगत 11 वर्षो में खेल और खेलकूद की प्रतियोगिता में बहुत परिवर्तन हुए : मुख्यमंत्री खेलकूद सम-विषम परिस्थितियों में हमें शारीरिक,  मानसिक रूप से चुस्त, दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता मा0 विधायक खेल प्रतिस्पर्धा अगली बार नगरीय क्षेत्र में  दो स्तर पर आयोजित की जायेगी, जो स्कूल और वॉर्ड स्तर पर होगी वॉर्ड स्तर पर लोगों और जो अवकाश प्राप्त कर चुके हैं,  उनके लिए भी खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी गोरखपुर की सभी संस्थाएं एक-एक खेल को गोद लें, उसमें कुछ  सहयोग संस्थाओं का और कुछ सहयोग सरकार द्वारा किया जायेगा गोरखपुर में अन्तर्राष्ट्रीय स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा,  इससे गोरखपुर सहित पूर्वी उ0प्र0 के नौजवानों को खेल और  खेलकूद की प्रतियोगिताओं में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त होगा जब युवा खेलेगा, तभी देश खिलेगा, विकसित भारत की  संकल्पना को साकार करने का रास्ता यही से प्रारम्भ होगा मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में आज उ0प्र0 खिलाड़ियों को बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं उपलब्ध करा रहा : खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज गोरखपुर में वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में मा0 विधायक खेल प्रतिस्पर्धा-2025 के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन प्रतियोगिताओं का आयोजन गोरखपुर विधानसभा शहरी में किया जा रहा है। इस पूरी प्रतियोगिताओं में प्रत्यक्ष रूप में एक हजार खिलाड़ी तथा अप्रत्यक्ष रूप से दस हजार खिलाड़ियों ने प्रतिभाग कर इस आयोजन को एक नई ऊचांई देने का कार्य किया है। खेलकूद सम-विषम परिस्थितियों में हमें शारीरिक, मानसिक रूप से चुस्त, दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज खिलाड़ियों के उत्साह ने इस भीषण शीत लहर को कम कर दिया है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह प्रतियोगिता अगली बार नगरीय क्षेत्र में दो स्तर पर आयोजित की जायेगी, जो स्कूल और वॉर्ड स्तर पर होगी। विद्यार्थीगण चाहें वह बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा तथा विश्वविद्यालय स्तर के हों, इनकी तीन प्रकार की प्रतियोगिताएं तीन चरणों में आयोजित की जाएंगी। इसमें बालक एवं बालिकाओं के वर्ग में अलग-अलग खेल प्रतियोगिताओं को सम्पन्न किया जाएगा। साथ ही, वॉर्ड स्तर पर लोगों और जो अवकाश प्राप्त कर चुके हैं, उनके लिए भी खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। पहले वॉर्ड स्तर पर, उसके बाद चार से छः अलग-अलग छोटे-छोटे उप नगर बनाकर उस स्तर पर तथा महानगर स्तर पर इस पूरी प्रतियोगिता को आयोजित किया जायेगा। इन सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों और पुरस्कार प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को एक बड़े समारोह में सम्मानित किया जायेगा। इसी प्रकार गोरखपुर में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किये जायेंगे। यह प्रतियोगिता आगामी जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जाएगी, जिसमें कला की विभिन्न प्रकार की विधाओं की प्रतियोगिता का आयोजन किया जायेगा।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 13 जनवरी, 2026 को गोरखपुर महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम में जो प्रतिभागी विभिन्न विधाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त करेंगे, वहां पर उनको सम्मानित किया जायेगा। विगत 11 वर्षो में खेल और खेलकूद की प्रतियोगिता में बहुत परिवर्तन हुआ है। कबड्डी, हॉकी, बैडमिण्टन तथा एथेलेटिक्स, इन सबके लिए पूरी दुनिया आपको देखती है।  ओलम्पिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ गेम्स, वर्ल्ड चैम्पियनशिप की कड़ी प्रतिस्पर्धाओं में हमारे खिलाड़ी और बेहतर प्रदर्शन का सकें, इसे ध्यान में रखकर सरकार ने तय किया है कि हर गांव में एक खेल का मैदान होगा, जिसके माध्यम से स्थानीय युवाओं की प्रतिभाओं को निखारा जायेगा। स्पोर्ट्स कॉलेज परिसर में भव्य स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। रीजनल स्टेडियम में 63 करोड़ रुपये की लागत से पक्के स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। गोरखपुर के बेलीपार में अन्तर्राष्ट्रीय स्टेडियम का निर्माण किया जा रहा है। यहां पर इण्टरनेशनल स्पोर्ट्स प्रतिस्पर्धाओं को आगे बढ़ाकर गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के नौजवानों को खेल और खेलकूद की प्रतियोगिताओं में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि विकास खण्ड स्तर पर मिनी स्टेडियम तथा जनपद स्तर पर स्टेडियम का निर्माण सरकार द्वारा किया जा रहा है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचन्द के नाम पर उत्तर मेरठ में प्रदेश के खेल विश्वविद्यालय का नया सत्र प्रारम्भ हो चुका है। वहां पर विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ खेल विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य चल रहा है। हर कमिश्नरी स्तर पर स्पोर्ट्स कॉलेज के निर्माण की भी तैयारी चल रही है।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गोरखपुर की सभी संस्थाएं एक-एक खेल को गोद लें, उसमें कुछ सहयोग संस्थाओं का और कुछ सहयोग सरकार द्वारा किया जायेगा। इसमें अच्छे प्रशिक्षकों को रखा जायेगा, जिससे बच्चों को खेलकूद का एक अच्छा प्लेटफॉर्म मिलेगा। जब युवा खेलेगा, तभी देश खिलेगा। विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने का रास्ता यही से प्रारम्भ होगा। क्यांकि जीवन में सफलताओं के जितने भी मार्ग हैं, वह स्वस्थ शरीर से ही सम्भव हो सकते हैं। स्वस्थ शरीर खेलकूद और यौगिक क्रियाओं के माध्यम से ही प्राप्त होगा।  खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चन्द्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री जी के कुशल नेतृत्व में आज उत्तर प्रदेश चहुंमुखी विकास की ऊचांइयों को छू रहा है। उत्तर प्रदेश में खेल को आगे बढ़ाने और खिलाड़ियों को खेल से जोड़ने के लिए प्रतिस्पर्धा कराकर उनकी प्रतिभा को निखारने का निरन्तर प्रयास किया जा रहा है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की प्रतिभाओं को निखारने, तराशने, और तलाशने का कार्य किया जाता है।  मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में आज उत्तर प्रदेश खिलाड़ियों को बेहतरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। हर दिशा में प्रदेश ऐतिहासिक कदम उठा रहा है। ग्राम पंचायतों में खेल के मैदान, विकास खण्डों में मिनी स्टेडियम, जनपद स्तर पर स्टेडियम का निर्माण लगातार किया जा रहा है। कमिश्नरी स्तर पर खिलाड़ियों को हर प्रकार की बेहतरीन सुविधाएं दी जा रही है। प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने का कार्य कर रही है। खेल कोटा से सभी विभागों में भर्तियां की जा रही हैं। मत्स्य मंत्री संजय निषाद तथा सांसद रवि किशन शुक्ल ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।  इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण तथा शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  ———

दिल्ली में घने कोहरे से 100 ट्रेनें लेट, एयरपोर्ट पर विमानों का संचालन सामान्य

 नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भीषण सर्दी से ठिठुर रही है. विजिबिलिटी कम है, एक्यूआई का स्तर गंभीर श्रेणी में बना हुआ है और यातायात भी प्रभावित हो रहा है. घने कोहरे और कम विजिबिलिटी के कारण सड़कों पर वाहन रेंग रहे हैं, वहीं ट्रेन परिचालन भी प्रभावित हो रहा है. कोहरे के कारण करीब सौ ट्रेनें लेट चल रही हैं. कोहरे के कारण ट्रेन परिचालन पर पड़ रहे असर को लेकर रेलवे ने बयान जारी किया है. भारतीय रेलवे की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक  करीब सौ ट्रेनें अपने निर्धारित समय से देरी से चल रही हैं. वहीं, कम से कम ट्रेनों के रूट बदले गए हैं. ट्रेनों की लेट-लतीफी के कारण इनमें यात्रा कर रहे यात्री परेशान हैं. हालांकि, दिल्ली एयरपोर्ट पर विमानों की आवाजाही सामान्य हो गई है. दिल्ली एयरपोर्ट पर विमानों के टेकऑफ या लैंडिंग में किसी तरह की कोई समस्या नहीं है और फ्लाइट ऑपरेशंस सामान्य हैं. दिल्ली एयरपोर्ट ने बयान जारी कर इसकी जानकारी दी है. एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि हमारे कर्मचारी यात्रियों की सहायता करने और उन्हें जरूरी सपोर्ट उपलब्ध करा रहे हैं. एयरपोर्ट ने अपनी फ्लाइट की अपडेटेड जानकारी के लिए एयरलाइंस से संपर्क करने की अपील भी यात्रियों से की है. गौरतलब है कि दिल्ली में घने कोहरे के कारण कई जगह विजिबिलिटी बहुत कम रह गई थी. सुबह-सुबह कई जगह विजिबिलिटी सौ मीटर से भी कम रही. इसकी वजह से लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा.     मौसम विभाग ने पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 31 दिसंबर तक घना से बहुत घना कोहरे का अलर्ट दिया     पूर्वी उत्तर प्रदेश में 1 जनवरी 2026 तक घने कोहरे का अलर्ट है     जम्मू और उत्तरी मध्य प्रदेश में 30 दिसंबर और हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार में 5 जनवरी तक घना कोहरा छाया रहेगा     अरुणाचल प्रदेश में 31 दिसंबर तक और असम और मेघालय और नागालैंड, मणिपुर में 3 जनवरी तक घने कोहरे का अलर्ट है.      ओडिशा में 3 जनवरी तक और बंगाल में 31 दिसंबर से 3 जनवरी के दौरान घना कोहरा दिखेगा कोल्ड डे का अलर्ट जारी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में 31 दिसंबर तक कोल्ड डे से लेकर गंभीर शीत दिवस के हालात रहेंगे. यानी भयंकर सर्दी पड़ेगी.हिमाचल प्रदेश में 31 दिसंबर और 1 जनवरी को और उत्तराखंड में 29 और 30 दिसंबर को को शीत लहर का अलर्ट है. पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिचमी मध्य प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी 30-31 दिसंबर तक शीत लहर  के हालात रहने की बहुत अधिक संभावना है. दिल्ली में हवा की गुणवत्ता भी गंभीर और बहुत गंभीर श्रेणी में बनी हुई है. दिल्ली का औसत एक्यूआई 380 के पार है. वहीं, कई एक्यूआई स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता का स्तर 400 के भी पार पहुंच चुका है. दिल्ली से देरी से रवाना होने वाली प्रमुख ट्रेनें ट्रेन का नाम विलंब नई दिल्ली-अमृतसर शान-ए-पंजाब एक्सप्रेस सवा सात घंटे नई दिल्ली-कालका शताब्दी एक्सप्रेस पौने सात घंटे नई दिल्ली-लखनऊ स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस 5.50 घंटे नई दिल्ली-हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस 5.25 घंटे नई दिल्ली-दरभंगा हमसफर विशेष पांच घंटे नई दिल्ली-लोहियां खास सरबत दा भला एक्सप्रेस पांच घंटे नई दिल्ली-सोगरिया (कोटा) सुपरफास्ट एक्सप्रेस सवा दो घंटे आनंद विहार टर्मिनल-अयोध्या कैंट वंदे भारत एक्सप्रेस 5.05 घंटे नई दिल्ली-दरभंगा संपर्क क्रांति एक्सप्रेस एक घंटा पुरानी दिल्ली-जैसलमेर रुनिचा एक्सप्रेस एक घंटा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, भागवत कथा और सत्संग से समाज में समरसता की भावना मजबूत होती है

भागवत कथा और सत्संग से समाज में सदाचार, नैतिकता और समरसता की भावना होती है मजबूत: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रसिद्ध संत कमल किशोर नागर महाराज की कथा में हुए शामिल भागवत कथा वचनों का श्रवण किया इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भागवत कथा और सत्संग से समाज में सदाचार, नैतिकता और समरसता की भावना मजबूत होती है। कथा और सत्संग आध्यात्मिक अनुभूति और सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम भी है। कथा श्रवण और सत्संग से मन तृप्त होता है और जीवन संवरता है। भगवान की भक्ति, कथा श्रवण और सत्संग से वह तृप्ति मिलती है जो भौतिक सुख, वैभव और छप्पन भोग में भी नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को इंदौर के ग्राम चित्तौड़ा में संत कमल किशोर नागर महाराज की कथा के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुरुवर कमल किशोर नागर जी का नाम ही हमारे लिए सौभाग्य का प्रतीक है। वर्षों से आपके प्रवचनों के माध्यम से हम भगवान की भक्ति में स्वर्ग लोक का अनुभव कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कथा एवं सत्संग के श्रवण से स्वर्ग लोक सहित सभी तीर्थों का आनंद प्राप्त हो जाता है। उन्होंने भक्ति और सत्संग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भौतिक सुख-साधन और 56 भोग भी मन को तृप्त नहीं कर सकते, लेकिन भगवान की भक्ति और सत्संग मन को पूर्ण तृप्ति प्रदान करते है और सफल जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गौ माता की सेवा के लिए महाराज कमल किशोर नागर जी द्वारा किए जा रहे कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि गौ माता की सेवा जीवन का सबसे बड़ा पुण्य है। महाराज जी ने समाज को यह चेतना दी है कि केवल प्रवचन ही नहीं, बल्कि संस्कार और सेवा भी उतनी ही आवश्यक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार बनने के बाद गौशालाओं के विकास के लिए लगातार विशेष प्रयास किए जा रहे हैं और मध्यप्रदेश को गौ-सेवा का मॉडल राज्य बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। घर-घर गोपाल की भावना को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि जहां गाय है, वहीं गोपाल का वास है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सनातन संस्कृति की परंपराओं, कुंभ और सिंहस्थ स्नान के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जल केवल शारीरिक शुद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन की उत्पत्ति और परंपरा का आधार है। मुख्यमंत्री ने शिप्रा नदी के शुद्धिकरण और जल संरक्षण के प्रयासों से आगामी सिंहस्थ को ऐतिहासिक और भव्य बनाने का संकल्प भी दोहराया। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में धर्म, संस्कृति और विकास तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ने का संकल्प साकार हो रहा है। प्रदेश में हर गाँव और शहर में गीता भवन बनाये जा रहे हैं। मंत्री सिलावट ने कहा कि शिप्रा नदी के शुद्धिकरण के संकल्प को पूर्ण करने का कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में तेजी से किया जा रहा है। शिप्रा के 29–30 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण, बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान 24 घंटे में करोड़ों श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्थाएँ— सहित सभी ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कार्य हैं। उन्होंने कहा कि नर्मदा और शिप्रा का निरंतर प्रवाह बना रहे, जिससे आचमन और यज्ञ-स्नान जैसे पवित्र कर्म निर्बाध हो इसके लिए तेजी से कार्य हो रहे हैं। संत कमल किशोर नागर जी महाराज ने कहा कि नीति और धर्म से सुसज्जित शासन ही सच्चे विकास की नींव है। जब शासन नीति और धर्म के साथ चलता है, तभी प्रजा की वास्तविक भलाई होती है और विकास एवं प्रगति को नई दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि नीति के बिना राज अधूरा है और धर्म के बिना धन भी अधूरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सराहना करते हुए कहा कि आज मुख्यमंत्री ने आम नागरिकों की तरह जमीन पर बैठकर सरलता और सादगी के साथ कथा का श्रवण किया। यह आचरण उनकी भक्ति भावना, विनम्रता और सहज व्यक्तित्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब किसी प्रदेश में धार्मिक आयोजन होते हैं और उनके साथ नीति एवं धर्म दोनों एक साथ खड़े होते हैं, तब वह प्रदेश स्वतः ही सुशोभित और समृद्ध बनता है। व्यस्ततम कार्यक्रमों के बावजूद मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा ऐसे आयोजनों को समय देना उनकी संवेदनशीलता और आध्यात्मिक रुचि का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव केवल राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के तीर्थों, मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों के भी गहरे जानकार हैं, उनके पास गहरा और समृद्ध अनुभव है। इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक रमेश मेंदोला, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, एसपी ग्रामीण श्रीमती यांगचेन डोलकर भूटिया, सुमित मिश्रा, श्रवण चावड़ा, रणजीत सिंह आंजना सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।  

मंत्री लोधी: श्री रामराजा लोक और चित्रकूट परिक्रमा पथ को प्रमुख पर्यटन स्थल बनाने की योजना

श्री रामराजा लोक और चित्रकूट परिक्रमा पथ को उत्कृष्टतम पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करना हमारी प्राथमिकता : राज्य मंत्री  लोधी राज्य मंत्री  लोधी ने की पर्यटन निगम की समीक्षा भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पर्यटन भवन में मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का कायाकल्प रहा, जिसमें राज्य मंत्री  लोधी ने स्पष्ट किया कि ओरछा स्थित 'श्री रामराजा लोक' और चित्रकूट के 'कामदगिरि पर्वत परिक्रमा पथ' को देश के उत्कृष्टतम पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्य मंत्री  लोधी ने निर्देशित किया कि प्रदेश में निर्माणाधीन विभिन्न सांस्कृतिक लोकों के कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और इन्हें निर्धारित समयावधि में पूर्ण किया जाए। उन्होंने आगामी सिंहस्थ 2028 के लिए निगम की कार्ययोजना का सूक्ष्म अवलोकन किया और उज्जैन सहित पूरे धार्मिक सर्किट में श्रद्धालुओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में क्षेत्रीय पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान देते हुए राज्य मंत्री लोधी ने जागेश्वरधाम बांदकपुर के आगामी चरणों, नोहटा में बोट क्लब की स्थापना और भोपाल में वॉच टावर के निर्माण जैसी नवीन परियोजनाओं को गति देने की बात कही। इसके अतिरिक्त, कटावधाम और भारत माता मंदिर (हटा) के सौंदर्याकरण के साथ-साथ मगरोन (पथरिया) और खर्राघाट से संबंधित विकास कार्यों की प्रशासनिक एवं क्रियान्वयन संबंधी समीक्षा की गई। पर्यटन निगम की वित्तीय प्रगति पर चर्चा करते हुए राज्य मंत्री  लोधी ने आय के स्रोतों को बढ़ाने के लिए आधुनिक नवाचारों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तकनीक और बेहतर प्रबंधन का समन्वय आवश्यक है। साथ ही, संस्थान की मजबूती के लिए कार्य कर रहे कर्मचारियों के कल्याण का ध्यान रखते हुए उन्होंने उनकी वेतनवृद्धि के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए। राज्य मंत्री  लोधी ने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से मध्यप्रदेश न केवल एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बनेगा, बल्कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यहाँ एक अद्वितीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभूति प्राप्त होगी। इस अवसर पर प्रबंध संचालक राज्य पर्यटन विकास निगम डॉ. इलैयाराजा टी सहित सम्बंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें।  

सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर बनाएंगे सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन आने वाले श्रद्धालु सिर्फ मेहमान नहीं, महाकाल के अतिथि हैं, उनके सत्कार में संवेदना भी हो : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर बनाएंगे सिंहस्थ को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक आयोजन पुराने हॉकी स्टेडियम में आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा चिंतामण गणेश बनेगा मुख्य स्टेशन, मोहनपुरा में भी होगा रेलवे स्टेशन, उज्जैन में बन रहा एयरपोर्ट मुख्यमंत्री ने उज्जैन में किया करीब 129 करोड़ रुपए के 12 कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले सभी श्रद्धालुओं का स्वागत है, अभिनंदन है। बीते तीन-चार दिनों के अंदर ही 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। उज्जैन आने वाले सभी श्रद्धालु सिर्फ हमारे मेहमान नहीं, स्वयं बाबा महाकाल द्वारा आमंत्रित अतिथि हैं। महाकाल ने उन्हें दर्शन देने के लिए बुलाया है। इसलिए सभी श्रद्धालुओं के सत्कार से जुड़ी हर व्यवस्था में संवेदना और आत्मीयता भी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से ही उज्जैन नगरी सिर्फ भारत नहीं, सम्पूर्ण विश्व की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनी हुई है। उज्जैन के नागरिकों का सहयोग ही बाबा महाकाल की सच्ची सेवा है। सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर सिंहस्थ-2028 को सबसे भव्य, दिव्य और अनुशासित के साथ एक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और ऐतिहासिक आयोजन बनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को उज्जैन के नानाखेड़ा स्टेडियम में विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां लगभग 129 करोड़ रुपए की लागत के 12 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में युवाओं को केंद्र में रखकर तैयार की गई तीन महत्वपूर्ण पहलों का एक साथ लोकार्पण एवं शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रोजेक्ट स्वाध्याय (Coding for All) का शुभारंभ किया। इस प्रोजेक्ट के जरिए विद्यार्थियों को कम उम्र से ही कोडिंग और डिजिटल सोच से जोडा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने UtkarshUjjain.com वेब पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह पोर्टल युवाओं के लिए सीखने, मार्गदर्शन और अवसरों का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेगा। साथ ही कौशल सेतु इंडस्ट्री-लीड स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम का भी आगाज किया। कौशल सेतु शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को पाटते हुए युवाओं को वास्तविक इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुरूप तैयार करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह तीनों पहले उज्जैन के युवाओं को केवल डिग्री तक ही सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि उन्हें जॉब-रेडी, स्टार्टअप-रेडी और फ्यूचर-रेडी बनाने का आधार तैयार करेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन शहरी क्षेत्र में 124 करोड़ रुपए लागत से बनने वाले 11 विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इसमें करीब 102 करोड़ रुपए लागत से विभिन्न सड़कों का चौड़ीकरण कार्य, 9.50 करोड़ रुपए लागत से कपिला गौशाला (3000 गौ-वंश क्षमता वाली) का संवर्धन एवं विकास कार्य, 8.75 करोड़ रुपए लागत से पंवासा क्षेत्र में ईडब्ल्यूएस कॉलोनी में विकास कार्य, 3.47 करोड़ रुपए लागत से कानीपुरा में स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स का निर्माण तथा लगभग 5 करोड़ रुपए लागत से नवीन जनपद पंचायत भवन निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों के अलावा 45 करोड़ लागत के अन्य काम भी प्रगति पर हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि उज्जैन के इस पुराने हॉकी स्टेडियम में आधुनिक एस्ट्रोटर्फ लगाया जाएगा, जिससे यहां इंटरनेशनल हॉकी मैच हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में भारतीय खिलाड़ी लगभग सभी खेलों में पदक विजेता बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हम मध्यप्रदेश के युवाओं को नौकरी लेने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाने का प्रयास कर रहे हैं। आज की गई पहलें कल इसी दिशा में हमारी मदद करेंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सीखो-कमाओ योजना, स्किल इंडिया मिशन और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप स्कीम जैसी पहलें युवाओं को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव देकर उन्हें बाजार और उद्योगों के लिए तैयार कर रही हैं। यही सही अवसर है कि उज्जैन के युवा स्वयं को आने वाले बेहतर कल के लिए अभी से तैयार करें। अद्भुत होगा सिंहस्थ – 2028 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह भारतीय धर्म, संस्कृति, आध्यात्म और पर्यटन का अद्भुत समागम है। सिंहस्थ को देखते हुए सरकार ने भी सभी तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। हमारी कोशिश है कि 30 किलोमीटर लम्बे घाटों में 24 घंटे में 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान/आचमन कर लें। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ को बेहतर बनाने के लिए हमने उज्जैन में 2675 करोड़ रुपए की लागत से 33 प्रमुख कार्यों को मंजूरी दे दी है। इन कामों पर क्रियान्वयन भी शुरू हो चुका है। सिंहस्थ के दौरान क्राउड मैनेजमेंट पर हमारा विशेष ध्यान रहेगा। इसीलिए संपूर्ण मेला क्षेत्र को फोर लेन और सिक्स लेन मार्गों से जोड़कर निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा रही है। श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उज्जैन को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी दिशा में उज्जैन में आधुनिक मेडिसिटी का निर्माण प्रगति पर है। यहां एक नया इंडस्ट्रियल पार्क भी बनाया जा रहा है। इंजीनियरिंग कॉलेज के पुराने कैम्पस में नया आईटी पार्क और साइंस सिटी बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज प्रोजेक्ट स्वाध्याय के लिए 3 हजार युवाओं के लिए निनौरा और मक्सी के पास 2 हजार युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र शुरू किए हैं। इंदौर-उज्जैन के बीच भविष्य में मेट्रो भी दौड़ेगी, लेकिन उससे पहले वंदे भारत मेट्रो ट्रेन की सौगात मिलेगी। शहर के चिंतामण गणेश स्टेशन को भी मुख्य स्टेशन के तौर पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मोहनपुरा में भी एक नया रेलवे स्टेशन बनेगा। उज्जैन के समीप ही एक बड़ा एयरपोर्ट भी बनाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु सीधे उज्जैन में ही उतर सकें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में शनि लोक का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 140 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यह शनि लोक आस्था और पर्यटन के क्षेत्र में उज्जैन की एक और नई पहचान स्थापित करेगा। उज्जैन को दूसरे शहरों से जोड़ने के लिए यहां चारों दिशाओं में फोरलेन बन रहे हैं। यहां करीब 12-13 नए पुल भी निर्माणाधीन हैं। इससे आवागमन बेहतर होगा। … Read more

राजनांदगांव को विकास की नई सौगात, मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना में ₹87.58 लाख के 17 कार्य स्वीकृत

डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से राजनांदगांव को ₹10,500 करोड़ की औद्योगिक सौगात, गेल लगाएगा यूरिया प्लांट राजनांदगांव को विकास की नई सौगात, मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना में ₹87.58 लाख के 17 कार्य स्वीकृत विस अध्यक्ष एवं क्षेत्र विधायक डॉ. रमन सिंह ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया राजनांदगांव  छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह के निरंतर प्रयासों, दूरदर्शी नेतृत्व एवं औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देने वाली नीति के परिणामस्वरूप राजनांदगांव जिले को एक ऐतिहासिक औद्योगिक उपलब्धि प्राप्त हुई है। देश की प्रतिष्ठित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) द्वारा राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ के निवेश से यूरिया निर्माण इकाई स्थापित किए जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। यह निवेश प्रस्ताव राज्य सरकार द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ स्किल टेक कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जिसका आयोजन राज्य कौशल विकास विभाग एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा किया गया था। इस कार्यक्रम में उर्वरक, टेक्सटाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सोलर क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों ने राज्य में कुल ₹13,690 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में प्रस्तुत इन प्रस्तावों में सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव ₹10,500 करोड़ का गेल द्वारा दिया गया, जिसके अंतर्गत राजनांदगांव में गैस पाइपलाइन आधारित उर्वरक (यूरिया) संयंत्र की स्थापना की जाएगी। इस परियोजना से न केवल क्षेत्र में औद्योगिक आधार मजबूत होगा, बल्कि राज्य के लगभग 3,500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे। प्रस्तावित यूरिया प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग 1.27 मिलियन टन यूरिया उत्पादन किया जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई प्राप्त होगी। इसी क्रम में, राजनांदगांव क्षेत्र के समग्र एवं संतुलित विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना वर्ष 2025–26 के अंतर्गत 87 लाख 58 हजार की लागत से 17 विकास कार्यों के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। इन स्वीकृत विकास कार्यों में सामुदायिक भवन, व्यावसायिक परिसर, रंगमंच निर्माण, सीसी रोड, मुक्तिधाम शेड, प्रतीक्षालय निर्माण सहित अन्य जनोपयोगी अधोसंरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं, जिनसे स्थानीय नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह ने इस ऐतिहासिक औद्योगिक निवेश तथा क्षेत्रीय विकास कार्यों की स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय राजनांदगांव के आर्थिक, औद्योगिक एवं सामाजिक विकास को नई दिशा देगा तथा जिले को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

भोपाल का रुतबा बढ़ेगा, 1756 गांव और तहसीलों का होगा विकास, ग्रेटर भोपाल में होगा अहमदाबाद जैसा बदलाव

 भोपाल  नए साल में भोपाल सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक विशाल महानगर (मेट्रोपॉलिटन रीजन) के रूप में अपनी पहचान दर्ज कराएगा। गुजरात के अहमदाबाद की सेप्ट (सीईपीटी) यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर एक ऐसा सुपर मैप तैयार किया जा रहा है, जो भोपाल के साथ सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ की सीमाओं को एक सूत्र में पिरो देगा। भोपाल की धड़कन इन जिलों में एक साथ सुनाई देगी अब भोपाल की धड़कन सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ में एक साथ सुनाई देगी। मेट्रोपालिटन अथॉरिटी ने हर शहर को उसकी ताकत के अनुसार एक नया रोल दिया है। पांच शहर, पांच अलग पहचान     भोपाल : सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और एडमिनिस्ट्रेटिव हब।     सीहोर व रायसेन : भोपाल के नए इंडस्ट्रियल पावरहाउस।     विदिशा : दुनिया के नक्शे पर चमकता हेरिटेज हब।     राजगढ़ : खेती और उद्योग का एक अनोखा संगम। पहले चरण में 8,791 वर्ग किमी क्षेत्र फाइनल फिलहाल पहले चरण में 8,791 वर्ग किमी का क्षेत्रफल फाइनल किया गया है। जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर 10 हजार वर्ग किमी किया जाएगा। बीडीए के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को नए साल में राकेट की रफ्तार देने वाले हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा वॉटर मैनेजमेंट और कमर्शियल लैंड के सर्वे से होगा, जिससे भविष्य में पानी की किल्लत नहीं होगी और उद्योगों के लिए पर्याप्त जमीन मिलेगी। विकास के साथ ग्रीन कवच भी भोपाल अपनी हरियाली के लिए जाना जाता है। इसलिए मेट्रोपॉलिटन रीजन में उपजाऊ जमीन और पर्यावरण से कोई समझौता नहीं होगा। प्रदूषण नियंत्रण और हरियाली के लिए अलग से कैपिटल इन्वेस्टमेंट प्लान बनाया जा रहा है। कनेक्टिविटी: अब सिर्फ सड़कें नहीं, बल्कि सैटेलाइट टाउन्स और ग्रोथ सेंटर भोपाल को जोड़ेंगे। रोजगार के अवसर : पांच जिलों के जुड़ने से आइटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लाखों नौकरियां पैदा होंगी। रियल एस्टेट : आसपास के क्षेत्रों में जमीन की कीमतों और निवेश में उछाल की संभावना। इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (IMR) के विस्तार पर विचार, भविष्य में होगा बड़ा बदलाव इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (आइएमआर) के विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज है। माना जा रहा है कि इससे औद्योगिकीकरण, निवेश, रोजगार और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी, लेकिन विशेषज्ञों का साफ कहना है कि विस्तार से पहले सुधार जरूरी है, वरना यह महत्वाकांक्षी योजना शहर के लिए भारी पड़ सकती है। शहर का क्षेत्रफल बढ़ने से आसपास के ग्रामीण इलाके शहरी दायरे में आएंगे, जिससे नए औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार के अवसर बन सकते हैं। इंदौर के कई उत्पाद पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान रखते हैं, जिन्हें मेट्रोपॉलिटन रीजन का फायदा मिल सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार इंदौर को एक बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित कर रही है, जिसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार और शाजापुर जिलों के लगभग 1756 गांवों और कई तहसीलें शामिल होंगी, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र का समग्र विकास, औद्योगीकरण और बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है एक्सपर्ट बोलेः योजना के बिना विस्तार विनाशकारी अर्थशास्त्री एवं डीएवीवी के प्रोफेसर कन्हैया आहूजा का कहना है कि सिर्फ क्षेत्रफल बढ़ाने से कोई शहर स्मार्ट या विकसित नहीं बनता। ट्रांसपोर्ट, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य व इंफ्रास्ट्रक्चर की दीर्घकालिक योजना नहीं बनी तो शहर अव्यवस्थित शहर में बदल जाएगा। अवसर बड़े लेकिन चुनौतियां उससे भी बड़ी विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान हालात में इंदौर बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। यदि इन समस्याओं को दूर किए बिना मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार किया गया, तो शहरी दबाव कई गुना बढ़ जाएगा। क्या होना चाहिए प्राथमिक एजेंडा ? -पब्लिक ट्रांसपोर्ट का मजबूत नेटवर्क -मेट्रो परियोजना को पूर्ण क्षमता से चालू करना -बस परिवहन को फिर से सशक्त बनाना -जल आपूर्ति और सीवरेज सिस्टम का विस्तार -स्वास्थ्य और शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश -औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन मेट्रोपोलिटन रीजन का विस्तार इंदौर को औद्योगिक, आर्थिक और निर्यात के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, लेकिन यह तभी संभव है, जब विस्तार से पहले सुधार और सपनों के साथ सिस्टम पर भी बराबर काम किया जाए, वरना मेट्रोपोलिटन रीजन का सपना, शहरी संकट में बदल सकता है। कहां-कहां पिछड़ रहा है इंदौर ? 1- इंफ्रास्ट्रक्चर शहर की सड़कों, फ्लाईओवर, ड्रेनेज और शहरी ढांचे का विकास बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के अनुपात में नहीं हो पाया है। कई इलाकों में ट्रैफिक जाम और जलभराव आम समस्या बन चुके हैं। 2- पब्लिक ट्रांसपोर्ट सबसे कमजोर कड़ी मेट्रो परियोजना अब भी अधूरी, बीआरटीएस बंद हो चुका है और सरकारी बस परिवहन सीमित है। नतीजा यह है कि शहर के अधिकांश नागरिक निजी वाहनों पर निर्भर हैं, जिससे ट्रैफिक और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। 3- सड़कों और कनेक्टिविटी की कमी नईकॉलोनियों और बाहरी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी कमजोर है। सड़कों की गुणवत्ता और क्षमता दोनों ही जरूरत से कम हैं, जिससे रोजमर्रा की आवाजाही चुनौती बन गई है। 4- पानी बना सबसे बड़ा नर्मदा जल योजना का तीसरा चरण अधूरा है। वर्तमान में शहर की 35-40 प्रतिशत आबादी तक नर्मदा का पानी नहीं पहुंच रहा। यदि मेट्रोपॉलिटन रीजन का विस्तार हुआ तो जल आपूर्ति की मांग कई गुना बढ़ेगी, जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा है। 5- स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ेगा बोझ क्षेत्र विस्तार के साथ आबादी बढ़ेगी। ऐसे में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ना तय है। अभी से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना अनिवार्य होगा।

महाकाल महालोक बनने के बाद महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं और दान की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी, 5.5 करोड़ भक्तों ने किए दर्शन

उज्जैन  विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर साल 2025 मे भी देश-विदेश के आस्थावानों का प्रमुख केंद्र रहा। एक जनवरी 2025 से अब तक 5.5 करोड़ दर्शनार्थियों ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। इसी के साथ मंदिर में 100 करोड़ रुपये से अधिक का दान भी आया। करीब 13 करोड़ रुपये का सोना-चांदी भी भेंट के रूप में प्राप्त हुआ है। कुल मिलाकर यह गत वर्ष की तुलना में अधिक है। बीते वर्ष 92 करोड़ रुपये दान के रूप में प्राप्त हुए थे। 12 ज्योतिर्लिंग में से एक बाबा महाकाल का धाम लाखों करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का खास केंद्र है। वर्ष 2025 में बाबा महाकाल के धाम में धन वर्षा का हैरान कर देने वाला आंकड़ा सामने आया है। एक अरब रुपये से अधिक का दान मंदिर समिति को वर्ष भर में अलग-अलग माध्यमों से मिला है। मंदिर समिति के अनुसार एक जनवरी 2025 से 15 दिसंबर 2025 तक 5.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने साल भर में यह दान राशि अलग-अलग माध्यमों से दी है। प्रत्येक वर्ष श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति के द्वारा यह आंकड़ा मंदिर समिति द्वारा जारी किया जाता है। महाकाल महालोक बनने के बाद से लगातार दान में भी बढ़ोतरी हुई है। यह सभी दान राशि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुविधा सुगम दर्शन व्यवस्थाओं में उपयोग में ली जाती है। बाबा महाकाल का दरबार मंदिर समिति अध्यक्ष और कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया की साल भर में जो सावन का महीना था। उसी में लगभग 30 करोड़ का दान मंदिर समिति को मिला है। जिससे समझ में आता है कि प्रत्येक वर्ष दान राशि मंदिर में बढ़ रही है, क्योंकि पिछले वर्ष सावन के महीने में यह आंकड़ा 21-22 करोड़ का था। ऐसे में साल भर का जो आंकड़ा आया है। वह वाकई हैरान करता है। मंदिर समिति इसी दान राशि से अपनी तमाम व्यवस्थाओं को संचालित करती है। पिछले साल 2024 में जो दान राशि थी, वह लगभग 92 करोड़ रुपये की थी इस बार अधिक है। पिछले वर्ष की तुलना में 15 करोड़ अधिक दान मिला है। यानि इस बार 1 अरब 07 करोड़ 93 लाख है। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने जानकारी देते हुए बताया कि बीते 11 महीने 15 दिनों में कुल 107 करोड़ 93 लाख की आय दान पेटी और शीघ्र दर्शन, आभूषणों के माध्यम से हुई है। जिसमें 592.366 किलो चांदी, 1483.621 ग्राम सोना, जिनकी कीमत लगभग 13 करोड़ से अधिक है। साल भर में अभी 2 दिन शेष है, ऐसे में उम्मीद है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा। प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया की 2025 में 1483.621 ग्राम सोना जो 2024 में 1533 ग्राम था, 592.366 ग्राम चांदी 2025 में जो 2024 में 399 किलो थी। यानी इस वर्ष चांदी का दान ज्यादा मिला है। 13 करोड़ से अधिक के आभूषण हैं। ऐसे ही नकद राशि 43 करोड़ 43 लाख, शीघ्र दर्शन से 64 करोड़ 50 लाख की राशि मिली है। महाकाल महालोक बनने के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या महाकाल मंदिर में श्री महाकाल महालोक बनने और अक्तूबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसका लोकार्पण करने के बाद से ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। पहले मंदिर में रोजाना 35 से 40 हजार श्रद्धालु आते थे। श्री महाकाल महालोक के बाद संख्या 80 हजार से एक लाख प्रतिदिन पहुंच गई। पर्व त्योहार जैसे श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि आदि पर ये संख्या दो लाख के पार हो जाती है। अनुमान है कि आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ेगी। एक नजर इस साल के आंकड़ों पर     5.5 करोड़ दर्शनार्थियों ने किए महाकाल दर्शन।     43 करोड़ रुपये विभिन्न दानपेटियों से भेंट के रूप में प्राप्त हुए।     64 करोड़ रुपये शीघ्र दर्शन व्यवस्था (टिकट) से मंदिर समिति को प्राप्त हुए।     13 करोड़ रुपये का सोना-चांदी भी भेंट स्वरूप मंदिर को मिला है। क्या शामिल क्या नहीं….? मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि 1 अरब से अधिक के दान में शीघ्र दर्शन, दान पेटी, लड्डू प्रसादी, नगद और आभूषणों को जोड़ा गया है। दान राशि में भस्म आरती बुकिंग, अभिषेक पूजन, अन्न क्षेत्र, धर्मशाला बुकिंग, फोटोग्राफी मासिक शुल्क, भांग एवं ध्वज बुकिंग उज्जैन दर्शन बस सेवा से होने वाली आय को शामिल नहीं किया गया है।  

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों के मंसूबे बुलंद, बैनर लगाकर नरसंहार की धमकी दे रहे

चटगांव  बांग्लादेश में उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस घटना के बाद से देश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में डर बढ़ गया है. हाल ही में दीपू चंद्र दास की कथित तौर पर फर्जी ईशनिंदा के आरोप में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने से यह डर और गहरा गया है. एक ताजा घटना में चटगांव के राउजान उपजिला में एक बैनर सामने आया है, जिसमें हिंदू और बौद्ध समुदाय के दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया है. यह बैनर उस इलाके से बरामद हुआ है, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आगजनी की गई थी. फिलहाल पुलिस ने बैनर को जब्त कर लिया है. बांग्लादेशी सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रतिनिधि कुशल बरुण चक्रवर्ती ने बताया कि उन्होंने हिंसा से पीड़ित हिंदू परिवारों से मुलाकात की है. उनके मुताबिक, बैनर में लिखा था कि हिंदू और बौद्ध समुदाय को पूरी तरह खत्म करने की योजना बनाई गई और इसके लिए फंडिंग भी की गई. इस पूरे मामले में इस्लामी कट्टरपंथी तत्व उस्मान हादी की हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का बिना सबूत दावा कर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं. ‘हिंदुओं और अल्पसंख्यकों का वजूद मिटा देंगे’ स्थानीय मीडिया और पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बैनर में भड़काऊ और डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया था. हिंदू और बौद्ध समुदाय के करीब दो लाख लोगों को मारने की साजिश का दावा किया गया. अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ खुले तौर पर हिंसा की धमकी दी गई. इलाके को साफ करने और अस्तित्व खत्म करने जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया. संदेश का मकसद डर फैलाना और सांप्रदायिक तनाव भड़काना बताया जा रहा है. यह बैनर उसी क्षेत्र से मिला, जहां मंगलवार को हिंदू समुदाय के घरों में आग लगाकर उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी. ऐसे में पुलिस मान रही है कि बैनर और आगजनी की घटना आपस में जुड़ी हो सकती हैं. इस तरह से पोस्टर सिर्फ धमकी नहीं, सामूहिक हिंसा की मानसिक तैयारी की तरह हैं, जो अल्पसंख्यकों का मनोबल तोड़कर उन्हें डराती हैं. यूनुस हिंदुओं का नामोनिशान मिटवा देंगे क्या? बांग्लादेश में सिर्फ दिसंबर के महीने में अब तक 4 हिंदुओं की हत्याएं हो चुकी हैं, जबकि देश में हुए सत्ता परिवर्तन के दौरान से लगातार हिंदुओं को टार्गेट किया जा रहा है.     जोगेश चंद्र रॉय को 7 दिसंबर को बेरहमी से गला रेतकर मार डाला गया. जोगेश के साथ उनकी पत्नी सुबर्णा रॉय की भी हत्या कर दी गई, दोनों का शव उनके घर के अंदर से मिला.     18 दिसंबर 2025 को भालुका में दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोप में लोगों ने पीट-पीटकर मार डाला और शरीर को आग के हवाले कर दिया गया था. इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा.     इसी महीने राजबारी जिले में अमृत मंडल नामक एक हिंदू युवक को भी भीड़ के पीट-पीटकर मार डालने की खबरें आईं. 24 दिसंबर को देर रात उनके ऊपर अचानक हमला हुआ और उन्हें बचने तक का मौका नहीं मिला, 25 दिसंबर को उनकी मौत हो गई. इसके अलावा मंगलवार को हिंदुओं को घर में जिंदा जलाने के मकसद से उनके घरों में आग लगा दी गई थी और अब उन्हें नरसंहार के बैनर ने और दहशत फैला दी है. सवाल ये है कि क्या बांग्लादेश में हिंदू होना अपराध हो गया है? यूनुस के राज में हिंदुओं की यूं ही हत्या होती रहेगी और वे उन्हें मरते देखेंगे?