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योगी आदित्यनाथ की सरकार के एसटीईएम विजन को मिला राष्ट्रीय मंच, निखरीं ग्रामीण प्रतिभाएं

सरकारी स्कूल से आईआईटी बॉम्बे तक उड़ान: संभल के बच्चों ने रचा इतिहास योगी आदित्यनाथ की सरकार के एसटीईएम विजन को मिला राष्ट्रीय मंच, निखरीं ग्रामीण प्रतिभाएं परिषदीय विद्यालयों के छात्रों ने टेकफेस्ट-2025 में इंजीनियरिंग छात्रों के समक्ष प्रस्तुत की चुनौती कोज्मोक्लेंच और मेसमराइज जैसी जटिल रोबोटिक्स स्पर्धाओं में सहभागिता कर प्रतिभा का मनवाया लोहा संभल  योगी आदित्यनाथ सरकार की गुणवत्तापरक शिक्षा नीति, एसटीईएम आधारित नवाचार और समान अवसरों के विजन का प्रभाव अब राष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। संभल के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले परिषदीय पृष्ठभूमि के बच्चों ने वह उपलब्धि हासिल की है, जिसे अब तक बड़े और प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों तक सीमित माना जाता रहा है। इन विद्यार्थियों ने IIT Bombay के टेकफेस्ट 2025 में भाग लेकर तकनीकी उत्कृष्टता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। योगी सरकार की एसटीईएम विजन को मिला राष्ट्रीय मंच सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन द्वारा प्रशिक्षित संभल जनपद के विद्यार्थियों ने एशिया के प्रतिष्ठित विज्ञान एवं तकनीकी महोत्सव टेकफेस्ट 2025 में कोज्मोक्लेंच और मेसमराइज जैसी जटिल रोबोटिक्स स्पर्धाओं में सहभागिता की। कक्षा 4 से 9 तक के इन छात्रों ने देशभर के बीटेक विद्यार्थियों की 250 से अधिक टीमों को सीधी चुनौती दी। उनके तकनीकी कौशल और नवाचार क्षमता से प्रभावित होकर आईआईटी बॉम्बे ने विद्यार्थियों को तकनीकी उत्कृष्टता के लिए विशेष प्रशंसा तथा उत्कृष्टता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि परिषदीय विद्यालयों के छात्र भी उच्च स्तरीय तकनीकी मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में सक्षम हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद इन बच्चों ने रोबोटिक्स जैसी जटिल विधाओं में अपनी दक्षता दिखाई और इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों के समक्ष कड़ी प्रतिस्पर्धा प्रस्तुत की। प्रशासनिक संबल और गुणवत्तापरक शिक्षा बन रही पहचान इस सफलता के पीछे योगी आदित्यनाथ की सरकार के शिक्षा सुधारों की स्पष्ट भूमिका दिखाई देती है। एसटीईएम शिक्षा पर विशेष फोकस, अवसरों की समानता और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक सहयोग ने इन विद्यार्थियों को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का अवसर दिया। जिलाधिकारी डॉ राजेन्द्र पैंसिया के संरक्षण में चयनित 11 मेधावी छात्र, जिनमें बालिकाएं, दिव्यांग तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थी भी शामिल थे, शिक्षक दल के साथ मुंबई पहुंचे। बेसिक शिक्षा अधिकारी अलका शर्मा ने बताया कि ये विद्यार्थी इससे पहले आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर में भी पुरस्कृत हो चुके हैं। अब आईआईटी बॉम्बे में दो रोबोटिक्स स्पर्धाओं में सम्मान प्राप्त कर संभल ने शिक्षा और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ा है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा नीति गांव देहात की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में सफल हो रही है।

मध्यप्रदेश सरकार व्यापार व्यवसाय के उन्नयन के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ.यादव

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी के उपयोग को दिया बढ़ावा मध्यप्रदेश सरकार व्यापार व्यवसाय के उन्नयन के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ.यादव मुख्यमंत्री, भोजपाल मेले में हुए शामिल, मालवा के व्यंजन गराडू का लिया स्वाद भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा दिया है। मध्यप्रदेश सरकार भी भोजपाल मेले जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है। व्यापार और वाणिज्य क्षेत्र के उन्नयन के लिए मध्यप्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को भोपाल के भेल क्षेत्र में भोजपाल मेले 2025 को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेले की श्रेष्ठ व्यवस्थाओं और उत्कृष्टआयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मेला वो है जहां लोग परस्पर मिलते हैं। व्यक्तियों के मध्य मतभेद को समाप्त करवाने में भी मेले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के मौसम का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां पर्यटन विकास के लिए बड़ी झील में शिकारों का संचालन प्रारंभ किया गया है। भोपाल के नागरिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और इस तरह के मेलों का आनंद लेना पसंद करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेले में उपस्थित नागरिकों से चर्चा की और उनके साथ सेल्फी भी खिंचवाई। साथ ही विभिन्न व्यंजन स्टॉल्स का अवलोकन किया। उन्होंने मालवा क्षेत्र में लोकप्रिय व्यंजन गराडू का स्वाद लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मेला समिति के पदाधिकारी सुनील यादव और विकास वीरानी ने स्वागत किया।  

1 जनवरी से बड़े बदलाव लागू, जेब पर पड़ेगा असर: सैलरी हाइक से लेकर CNG-PNG की कीमतें घटेंगी

नई दिल्ली  कैलेंडर बदलने के साथ ही 1 जनवरी 2026 से आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियम बदलने जा रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से लेकर रसोई गैस के दाम और सोशल मीडिया के इस्तेमाल तक, नए साल की सुबह कई बड़े बदलाव लेकर आएगी। अगर आपने समय रहते इन बदलावों की तैयारी नहीं की, तो आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। आइए जानते हैं 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले इन प्रमुख बदलावों के बारे में: 8वें वेतन आयोग का आगाज: सरकारी कर्मचारियों की मौज नए साल का सबसे बड़ा तोहफा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए हो सकता है। 1 जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने की संभावना है। सैलरी में बढ़ोतरी: अनुमानों के मुताबिक, फिटमेंट फैक्टर में बदलाव के साथ कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में 20% से 35% तक का इजाफा हो सकता है। फिटमेंट फैक्टर: चर्चा है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर 2.4 से 3.0 के बीच रखा जा सकता है, जिससे न्यूनतम वेतन में बड़ी वृद्धि होगी। सस्ता होगा सफर और रसोई: CNG-PNG के दाम में राहत यूनिफाइड टैरिफ सिस्टम में बदलाव के कारण नए साल में गैस की कीमतें कम हो सकती हैं: CNG: प्रति किलो 1.25 से 2.50 रुपये तक की कटौती संभव है। PNG: पाइप वाली रसोई गैस के दामों में 0.90 से 1.80 रुपये (प्रति SCM) तक की राहत मिल सकती है। कम होगी लोन की EMI: रेपो रेट में कटौती का असर दिसंबर में आरबीआई (RBI) द्वारा रेपो रेट में 0.25% की कटौती किए जाने के बाद, 1 जनवरी से बैंक अपने लोन की ब्याज दरें घटा सकते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) कम होने की उम्मीद है। LPG सिलेंडर की नई कीमतें तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को रसोई गैस की कीमतों की समीक्षा करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर 1 जनवरी को घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम घट सकते हैं। बच्चों के लिए सुरक्षित होगा इंटरनेट: सोशल मीडिया पर सख्ती अगले साल से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सरकार नए नियमों के तहत बच्चों को आपत्तिजनक कंटेंट से बचाने के लिए 'एज वेरिफिकेशन' जैसे सख्त कदम उठाने जा रही है। नया इनकम टैक्स बिल 1 जनवरी से नया इनकम टैक्स बिल पूरी तरह प्रभावी हो सकता है। इसके तहत टैक्स स्लैब में बदलाव और जीएसटी (GST) में की गई कटौतियों का लाभ सीधे करदाताओं को मिलेगा, जिससे उनकी बचत बढ़ेगी। पैन-आधार लिंक और जुर्माना अगर आपने 31 दिसंबर 2025 तक अपने पैन कार्ड को आधार से लिंक नहीं किया, तो 1 जनवरी से आपका पैन कार्ड 'इनऑपरेटिव' (निष्क्रिय) हो सकता है। इसके बाद लिंक कराने पर आपको भारी जुर्माना देना पड़ सकता है और बैंकिंग ट्रांजेक्शन में दिक्कत आ सकती है। राशन कार्ड ई-केवाईसी (e-KYC) अनिवार्य राशन कार्ड धारकों के लिए 31 दिसंबर आखिरी मौका है। यदि आपने ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है, तो 1 जनवरी से आपको मुफ्त या रियायती राशन मिलना बंद हो सकता है। इसे आप अपने मोबाइल या नजदीकी राशन दुकान के जरिए पूरा कर सकते हैं। 1 जनवरी 2026 से होने वाले ये बदलाव डिजिटल सुरक्षा से लेकर वित्तीय लाभ तक फैले हुए हैं। सुचारू लेनदेन और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 31 दिसंबर तक अपने पेंडिंग काम निपटाना ही समझदारी है।

बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए कठिनाई, मोहम्मद यूनुस की एक गलती का पड़ा असर

ढाका  बांग्लादेश आज हिंसा और कट्टरपंथ की आग में झुलस रहा है. मुहम्मद यूनुस की एक गलती की सजा अब बांग्लादेश भुगत रहा है. चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान, हर कोई हिंसा की आग में जल रहा है. आज बांग्लादेश की जो हालत है, उसकी जड़ें मुहम्मद यूनुस के एक फैसले से जुड़ी हैं. जी हां, जिस फैसले को यूनुस ने लोकतांत्रिक बताकर पेश किया था, आज वही फैसला बांग्लादेश के लिए अभिशाप बन गया है. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मु्हम्मद यूनुस के उस फैसले के कारण ही बांग्लादेश में हिंदू और मुसलमान के बीच खाई बढ़ गई है. अब नौबत यह है कि कभी हिंदू युवक दीपू दास और सम्राट की लिंचिंग हो जाती है तो कभी मुसलमान उस्मान हादी की हत्या. अब सवाल है कि आखिर यूनुस की वह गलती क्या है, जिसका अंजाम बांग्लादेश की आवाम भुगत रही है. कैसे वह एक फैसला हिंदुओं के लिए काल बन चुका है. दरअसल, शेख हसीना के पद छोड़ते ही मुहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश में एक ऐसा फैसला लिया, जिसने पूरे देश को अस्थिरता और कट्टरपंथ की आग में झोंक दिया. वह फैसला था जमात-ए-इस्लामी से बैन हटाना. जी हां, नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना के देश छोड़ते ही जमात-ए-इस्लामी पर लगा प्रतिबंध हटा लिया था. इसे ही अब बांग्लादेश की मौजूदा दुर्दशा और हिंदू समुदाय पर बढ़ते अत्याचारों का मुख्य कारण माना जा रहा है. जमात-ए-इस्लामी एक कट्टरपंथी संगठन है. यह खिलाफत राष्ट्र की वकालत करता है. इसका पाकिस्तान प्रेम समय-समय पर झलका है. यूनुस के इसी फैसले ने एक कट्टरपंथी संगठन को खुली छूट दे दी, जिसका नतीजा आज बांग्लादेश में फैलते अतिवादऔर अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों के रूप में दिखाई दे रहा है. यूनुस की वो साजिशन गलती क्या 8 अगस्त ही वह तारीख थी, जब बांग्लादेश के बुरे दिन शुरू हो गए थे. पिछले साल 8 अगस्त को ही एक बड़ा फैसला हुआ था. वही फैसला अब पूरे बांग्लादेश को परेशान कर रहा है. उसके चलते ही बांग्लादेश की शांति खत्म हो गई है. जगह-जगह हिंसा हो रही है. बांग्लादेश का लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ चुका है. उसके आगे अब यूनुस की भी नहीं चल रही है. जी हां, 8 अगस्त को ही मोहम्मद यूनुस ने जमात-ए-इस्लामी नाम के संगठन पर लगा बैन हटा दिया था. यह संगठन कट्टरपंथी है और हिंदुओं से नफरत करता है. इस फैसले से बांग्लादेश में कट्टरवाद बढ़ गया और हिंदुओं पर हमले ज्यादा हो गए. क्यों शेख हसीना ने लगाया था बैन पहले शेख हसीना की सरकार ने 1 अगस्त 2024 को जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र ग्रुप इस्लामी छत्र शिबिर पर रोक लगाई थी. वजह थी छात्र कोटा के खिलाफ प्रदर्शनों में हुई हिंसा, जहां 150 से ज्यादा लोग मारे गए. शेख हसीना ने इसे आतंकवाद रोकने वाले कानून के तहत बैन किया, क्योंकि यह संगठन हिंसा फैलाने में डायरेक्ट शामिल था. जमात-ए-इस्लामी की शुरुआत 1941 में हुई थी. यह संगठन पूरी तरह से पाकिस्तान परस्त है. वह आईएसआई के इशारों पर काम करता है. इसकी झलक पूरी दुनिया 1971 के जंग में देख चुकी है. जी हां, 1971 के बांग्लादेश आजादी के युद्ध में जमात-ए-इस्लीमी ने पाकिस्तान की सेना का साथ दिया था और लाखों लोगों की हत्या में उसकाा हाथ था. साल 2013 में बांग्लादेश की कोर्ट ने इसे चुनाव लड़ने से रोक दिया था, क्योंकि इसका नियम संविधान के खिलाफ था. जमात-ए-इस्लामी क्या चाहता है? लेकिन 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना ने इस्तीफा दिया और भारत चली आईं. इसके बाद इस कट्टरपंथी संगठन के अच्छे दिन शुरू हो गए. 8 अगस्त को यूनुस की सरकार ने बैन हटा लिया. यूनुस सरकार ने कहा कि जमात की कोई आतंकी गतिविधि नहीं है और शेख हसीना सरकार का आरोप गलत था. पर सच तो यह है कि जमात कट्टर इस्लामी संगठन है, जो बांग्लादेश को शरिया कानून वाला देश बनाना चाहता है. इसका छात्र ग्रुप शिबिर बहुत हिंसक है, जो दुश्मनों की हत्या करता है, धार्मिक झगड़े भड़काता है और झूठी खबरें फैलाता है. यह संगठन हिंदुओं से नफरत करता है और दूसरे कट्टर ग्रुपों से जुड़ा है. साल 2013 में युद्ध अपराध के फैसले के बाद इसके लोगों ने 50 से ज्यादा हिंदू मंदिर तोड़े और 1,500 से ज्यादा हिंदू घरों-दुकानों को आग लगाई. बांग्लादेश में हिंदुओं के प्रति नफरत बढ़ गया है. जमात अब दे रहा हिंदुओं को जख्म मोहम्मद यूनुस के इसी फैसले से जमात को फिर से ताकत मिली. बैन हटने के बाद उन्होंने ढाका में बड़ी-बड़ी रैलियां कीं और कट्टरवाद फैलाया. यूनुस की सरकार आने के बाद देश में कट्टर ग्रुप मजबूत हुए, जिससे अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और लोगों के बीच एकता खराब हुई. सबसे ज्यादा नुकसान हिंदुओं को हुआ. 2024 की हिंसा में 4 से 20 अगस्त तक 2,010 हमले हुए, 1,705 परिवार प्रभावित हुए, 157 घर-दुकानें लूटी या जलाई गईं, और 152 मंदिरों को नुकसान पहुंचा. हिंदुओं की हत्याओं में जमात का कट्टरवाद साफ दिखता है, जहां राजनीति के नाम पर सांप्रदायिक हमले होते हैं. इस जमात के कारण ही बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार बढ़े. अभी बीते कुछ समय से जो हालात बने हुए हैं, उसके पीछे भी जमात है. दीपू दास की हत्या भी जमात की भीड़ ने की. शेख हसीना ने क्यों लगाया था जमात-ए-इस्लामी पर बैन?     शेख हसीना सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर इसलिए प्रतिबंध लगाया था क्योंकि यह संगठन खुले तौर पर कट्टर इस्लामी विचारधारा को बढ़ावा देता रहा है.     जमात पर 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान युद्ध अपराधों, नरसंहार और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के गंभीर आरोप रहे हैं.     शेख हसीना सरकार का मानना था कि यह संगठन लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए खतरा है.     इसी वजह से जमात-ए-इस्लामी को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखा गया था. मुहम्मद यूनुस ने बैन हटाकर दी खुली छूट     शेख हसीना के सत्ता से हटते ही अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने जमात-ए-इस्लामी से प्रतिबंध हटा दिया.     यूनुस सरकार की तरफ से तर्क दिया गया कि जमात-ए-इस्लामी आतंकी गतिविधियों में शामिल नहीं है और उसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अधिकार … Read more

छत्तीसगढ़वासियों के लिए खुशखबरी: पीएम आवास योजना में मिलने वाली राहत पर राज्य सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा

रायपुर  राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) की अवधि एक वर्ष बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव में योजना को 26 दिसंबर 2026 तक विस्तारित करने का अनुरोध किया गया है, जिसे लेकर मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। राज्य पर विशेष प्रभाव नहीं अधिकारियों का कहना है कि यदि योजना बंद भी होती है, तो राज्य पर इसका विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि अधिकांश आवासों का कार्य प्रारंभ हो चुका है। वर्तमान स्थिति में योजना के तहत स्वीकृत कुल आवासों में से केवल 481 आवासों का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है, जबकि 25,758 आवास प्रगतिरत हैं। यदि नगर निगम और नगर पालिकाएं प्रगतिरत आवासों का निर्माण 31 दिसंबर 2025 तक पूर्ण कर उसका क्लेम प्रस्तुत करती हैं, तो संबंधित राशि जारी कर दी जाएगी। योजना के अंतर्गत घटक लाभार्थी आधारित व्यक्तिगत आवास निर्माण (बीएलसी) के तहत 2,06,118 और भागीदारी में किफायती आवास निर्माण (एएचपी) के तहत 27,475 आवास स्वीकृत किए गए थे। 2,17,022 आवास पूरे दोनों घटकों के तहत स्वीकृत आवासों में से 2,17,022 आवास पूरे कर लिए गए हैं। कुल मिलाकर 89 प्रतिशत आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। नगरीय प्रशासन विभाग को नवंबर में केंद्रीय आवासन व शहरी कार्य मंत्रालय से पत्र प्राप्त हुआ था, जिसमें उल्लेख किया गया था कि पीएम आवास योजना (शहरी) की अवधि दिसंबर 2025 में समाप्त हो रही है। पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया था कि अप्रारंभ आवासों के लिए किसी प्रकार की राशि जारी नहीं की जाएगी और ऐसे आवासों को दिसंबर 2025 तक पूर्ण किया जाना संभव नहीं होने की स्थिति में निर्माण कार्य शुरू न किया जाए। केंद्र से मिले निर्देशों के आधार पर नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगरीय निकायों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए थे। साथ ही, राज्य सरकार की ओर से योजना की समयावधि बढ़ाने के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि प्रगतिरत आवासों का निर्माण पूरा कराया जा सके। आवासों की स्थिति घटक का नाम- स्वीकृत- पूर्ण – प्रगतिरत – अप्रारंभ बीएलसी- 2,06,118 – 1,89,547 – 16,264 – 307 एएचपी- 37,143 – 27,475 – 9,494 – 174 छत्तीसगढ़ में इंतजार की लंबी कतार राजस्थान के दौसा जिले में नवल किशोर मीणा और संतोष मीणा पिछले सात साल से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं. कड़ाके की ठंड में यह परिवार खेतों के बीच तिरपाल और बांस-बल्लियों के सहारे जिंदगी गुजार रहा है. जिला कलेक्टर का कहना है कि तकनीकी कारणों से मकान नहीं मिल पाए हैं.  वहीं, छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में अनु जैसी महिलाएं फॉर्म भरकर सालों से बैठी हैं, उन्हें पीएम मोदी के वादे पर भरोसा तो है, लेकिन सिस्टम की सुस्ती से उनके पक्के घर की उम्मीद अब दम तोड़ रही है. पंजाब में अधिकारियों की गलती का भारी खामियाजा पंजाब के फरीदकोट में प्रशासन की एक गलत सलाह ने गरीबों को सड़क पर ला दिया है. नगर पालिका ने 284 परिवारों से कहा कि अगर योजना का लाभ चाहिए तो पुराने मकान तोड़ने होंगे. लोगों ने पैसे की उम्मीद में अपने आशियाने उजाड़ दिए, लेकिन अब अधिकारी वेरिफिकेशन में गलती की दलील देकर राशि देने से इनकार कर रहे हैं. आज ये परिवार धर्मशालाओं में रहने को मजबूर हैं और अपने हक के लिए नगर पालिका के बाहर धरना दे रहे हैं. सात करोड़ से अधिक की राशि अब भी अधर में है. हरियाणा और महाराष्ट्र में अटकी दूसरी किस्त हरियाणा के करनाल में श्यामलाल जैसे लाभार्थियों ने पहली किस्त मिलने के बाद उधार लेकर मकान का काम शुरू करवाया, लेकिन दूसरी किस्त साल भर से नहीं आई. अब वे आधे-अधूरे घर को छोड़कर दूसरों के मकानों में किराए पर रह रहे हैं. महाराष्ट्र के पुणे में भी देवराम कडाले को दो साल पहले अर्जी देने के बाद सिर्फ 85 हजार रुपये मिले हैं, जबकि डेढ़ लाख का वादा था. देश के कई हिस्सों में लाभार्थी अफसरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं, पर उनकी सुनवाई नहीं हो रही है. सिस्टम के पेच में फंसा गरीबों का आशियाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि जब तक हर गरीब को पक्का घर नहीं मिल जाता, वे रुकने वाले नहीं हैं. उन्होंने पिछले 11 साल में 4 करोड़ घर बनाने और अगले 3 करोड़ नए घर बनाने का टारगेट रखा है. हालांकि, आजतक की पड़ताल बताती है कि सरकारी बाबू और फंड की कमी इस नेक योजना के रास्ते में रोड़ा बन रहे हैं. जब तक ग्राउंड लेवल पर किस्तों का भुगतान समय पर नहीं होगा और भ्रष्टाचार कम नहीं होगा, तब तक गरीबों की किस्मत नहीं बदलेगी.

देश का पहला ‘रेड कार्पेट’ रोड एमपी में, वाहनों की गति पर नियंत्रण और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए तैयार

 जबलपुर  मध्य प्रदेश में भोपाल-जबलपुर नेशनल हाईवे के जंगली इलाके से गुजरने वाले हिस्से पर एनएचएआई ने देश का पहला वाइल्डलाइफ-सुरक्षित रोड कॉरिडोर बनाया है। यह 12 किलोमीटर का खास हिस्सा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से होकर निकलता है। यहां स्पीड कंट्रोल डिजाइन, फेंसिंग, एनिमल अंडरपास और इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग का पूरा इंतजाम है। इसका मकसद जानवरों की सड़क हादसों में मौत को कम करना है।  एनएचएआई ने भारत का पहला 'वाइल्डलाइफ-सेफ' रोड कॉरिडोर बनाया है। यह कॉरिडोर खास तौर पर जानवरों को सड़क पार करते समय होने वाली मौतों को रोकने के लिए बनाया गया है। यह NH-45 के 12 किलोमीटर लंबे हिस्से पर है, जो मध्य प्रदेश के एक महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्य, वीरंगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से होकर गुजरता है। इस कॉरिडोर में स्पीड कम करने वाले डिजाइन, फेंसिंग, जानवरों के लिए अंडरपास और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी जैसी कई चीजें शामिल हैं। इसका मकसद सिर्फ यह देखना नहीं है कि जानवर कहां से सड़क पार करते हैं, बल्कि यह भी देखना है कि गाड़ियां कैसे चलती हैं। गाड़ियों की स्पीड है अधिक इस सड़क पर गाड़ियों की संख्या और रफ्तार काफी बढ़ गई है। पहले यह दो-लेन वाली सड़क थी, जिसे अब चार-लेन का बना दिया गया है। इस पर तेज रफ्तार वाली गाड़ियां, भारी सामान ले जाने वाले ट्रक और ऐसे वाहन चलते हैं जो रास्ते में रुकना पसंद नहीं करते। इसी को ध्यान में रखते हुए एनएचआई ने इसे देश की पहली 'वाइल्डलाइफ-सेंसिटिव' 'रेड रोड' बताया है। दो किमी है रेड रोड इस नई डिजाइन के बीचों-बीच एक 2 किलोमीटर का जोन है, जो पहली नजर में सजावटी लगता है। इस जोन में सड़क के ऊपर लाल रंग की थर्मोप्लास्टिक मार्किंग की गई है। यह 5mm मोटी है और सड़क पर एक लगातार पट्टी की तरह बिछाई गई है। एनएचआई के क्षेत्रीय अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि इस खतरे को कम करने के लिए, NHAI ने टाइगर रिजर्व के अंदर खतरे वाले जोन में सड़क पर 5mm मोटी लाल सतह वाली परत 'टेबल-टॉप' बिछाई है। यह चमकीला लाल रंग ड्राइवरों को संकेत देता है कि वे एक ऐसे हिस्से में प्रवेश कर रहे हैं, जहां वन्यजीवों का ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही, इसकी थोड़ी उठी हुई सतह अपने आप ही गाड़ी की रफ्तार कम कर देती है। उन्होंने आगे कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार, यह देश में लागू किया गया पहला ऐसा कॉन्सेप्ट है। मार्किंग के हैं दो फायदे इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन मार्किंग के दो फायदे हैं। पहला, यह देखने में ड्राइवरों को यह बताता है कि वे जंगल वाले हिस्से में जा रहे हैं, जहां सड़क के नियम थोड़े बदल जाते हैं। दूसरा, यह सड़क पर एक हल्का कंपन पैदा करता है, जो ड्राइवरों को स्पीड ब्रेकर की तरह अचानक झटका दिए बिना, धीरे-धीरे अपनी गाड़ी की रफ्तार कम करने के लिए प्रेरित करता है। स्पीड ब्रेकर को तेज रफ्तार वाली हाईवे पर असुरक्षित माना जाता है। यह तरीका दूसरे देशों में काफी इस्तेमाल होता है, लेकिन भारत के नेशनल हाईवे पर, खासकर वन्यजीवों वाले इलाकों में, यह बहुत कम देखने को मिलता है। जानवरों के लिए है यह सुरक्षित वन्यजीव संरक्षण वैज्ञानिक लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि गाड़ी की रफ्तार ही यह तय करती है कि सड़क पार कर रहे जानवर को समय पर देखा जा सकेगा या नहीं, और ड्राइवर के पास रुकने या मुड़ने के लिए पर्याप्त दूरी होगी या नहीं। अंडरपास और फेंसिंग यह तय करते हैं कि जानवर कहां से सड़क पार करेंगे, लेकिन जब कुछ गलत होता है तो रफ्तार ही सब कुछ तय करती है. NH-45 पर, लाल रंग से चिह्नित यह हिस्सा गाड़ियों को उन जगहों पर पहुंचने से काफी पहले धीरे-धीरे धीमा करने के लिए बनाया गया है, जहां जानवरों के निकलने की सबसे ज्यादा संभावना होती है। लाल पट्टी का अनोखा आइडिया इस कॉरिडोर में सबसे खास है 2 किलोमीटर की लाल रंग वाली सड़क। यहां एस्फाल्ट पर 5 मिलीमीटर मोटी लाल थर्मोप्लास्टिक लेयर बिछाई गई है। यह पट्टी दूर से चमकती दिखती है और ड्राइवर को अलर्ट करती है कि वे वाइल्डलाइफ जोन में प्रवेश कर रहे हैं। एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर एस.के. सिंह कहते हैं, "यह लाल सरफेस हल्की ऊंचाई वाली है। इससे गाड़ी के टायरों में हल्का कंपन होता है, जिससे स्पीड अपने आप कम हो जाती है। स्पीड ब्रेकर जैसा झटका नहीं लगता, जो हाई-स्पीड हाईवे पर सुरक्षित नहीं होता।" उनका दावा है कि देश में यह पहला ऐसा प्रयोग है। विदेशों में यह तरीका काफी इस्तेमाल होता है। यह डिजाइन दो काम करता है। एक तो विजुअल अलर्ट देता है, दूसरा स्पीड को धीरे-धीरे कम करता है। इससे ड्राइवर को जानवर दिखने पर ब्रेक लगाने या स्वर्व करने का मौका मिल जाता है। दो किमी है रेड रोड इस नई डिजाइन के बीचों-बीच एक 2 किलोमीटर का जोन है, जो पहली नजर में सजावटी लगता है। इस जोन में सड़क के ऊपर लाल रंग की थर्मोप्लास्टिक मार्किंग की गई है। यह 5mm मोटी है और सड़क पर एक लगातार पट्टी की तरह बिछाई गई है। एनएचआई के क्षेत्रीय अधिकारी एसके सिंह ने बताया कि इस खतरे को कम करने के लिए, NHAI ने टाइगर रिजर्व के अंदर खतरे वाले जोन में सड़क पर 5mm मोटी लाल सतह वाली परत 'टेबल-टॉप' बिछाई है। यह चमकीला लाल रंग ड्राइवरों को संकेत देता है कि वे एक ऐसे हिस्से में प्रवेश कर रहे हैं, जहां वन्यजीवों का ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही, इसकी थोड़ी उठी हुई सतह अपने आप ही गाड़ी की रफ्तार कम कर देती है। उन्होंने आगे कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार, यह देश में लागू किया गया पहला ऐसा कॉन्सेप्ट है। मार्किंग के हैं दो फायदे इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन मार्किंग के दो फायदे हैं। पहला, यह देखने में ड्राइवरों को यह बताता है कि वे जंगल वाले हिस्से में जा रहे हैं, जहां सड़क के नियम थोड़े बदल जाते हैं। दूसरा, यह सड़क पर एक हल्का कंपन पैदा करता है, जो ड्राइवरों को स्पीड ब्रेकर की तरह अचानक झटका दिए बिना, धीरे-धीरे अपनी गाड़ी की रफ्तार कम करने के … Read more

मंगल पर कभी बहती थीं नदियां! वैज्ञानिकों ने खोजे 16 प्राचीन नदी मार्ग, पूरा मैप तैयार

कैलिफोर्निया  नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने मंगल पर गंगा जैसी विशाल प्राचीन नदियों की खोज की है. पहली बार 16 बड़े ड्रेनेज बेसिन का पूरा नक्शा तैयार हुआ, जो बताता है कि मंगल कभी गर्म, नम और जीवन योग्य था. यह खोज भविष्य के जीवन-खोज मिशनों के लिए अहम साबित होगी.  भारत में बहने वाली गंगा नदी की तरह ही, ऑस्टिन स्थित Texas University ने, मंगल ग्रह पर मौजूद बहुत बड़ी और पुरानी नदी प्रणालियों का नक्शा बनाया है. इससे वैज्ञानिकों को मंगल के प्राचीन जल नेटवर्क के बारे में नई बातें पता चली हैं. उनका यह नया अध्ययन PNAS नाम की पत्रिका में छपा है. उन्होंने 16 बड़ी नई नदी घाटियों की पहचान की है. यह पहली बार है कि मंगल ग्रह की इतनी बड़ी जल निकासी प्रणालियों का पूरा नक्शा तैयार किया गया है. इन खोजों से उन जगहों के बारे में पता चलता है जहां पहले जीवन की संभावना सबसे अधिक रही होगी.  कैसे बनी मंगल पर नदियां? अरबों साल पहले मंगल ग्रह पर बारिश होती थी जिस वजह से घाटियां और नदियां बन गईं. यह पानी बहकर बड़ी घाटियों और शायद बहुत बड़े पुराने महासागरों तक पहुंचता था. पानी की इस प्रणालियों ने ऐसा माहौल बनाया जो धरती पर जीवन से भरा होता है जैसे कि अमेजन नदी का इलाका. ये बड़ी जल प्रणालियां संभावित मंगल ग्रह के जीवन के लिए एक जन्मस्थान का काम कर सकती थीं.  किसने बनाया ये नक्शा? इन मैप को बनाने का काम यूटी जैक्सन स्कूल ऑफ जियोसाइंसेज के सहायक प्रोफेसर टिमोथी ए. गौडगे और पोस्टडॉक्टरल फेलो अब्दुल्ला एक.जकी ने किया. उन्होंने पहले से मौजूद मंगल ग्रह की घाटियों, झीलों और नदियों के डेटा को एक साथ मिलाया. ऐसा करके उन्होंने पूरे ग्रह के पानी के बहाव के रास्ते का पूरा नक्शा तैयार किया.  कैसे की गई ये खोज? वैज्ञानिकों ने 19 प्रमुख समूह खोजे जिसमें घाटियां, नदियां झीलें और जमा हुई मिट्टी शामिल हैं. इनमें से 16 समूहों का जलग्रहण इलाका 1 लाख वर्ग किमी से भी बड़ा था. यह आकार लगभग धरती पर मौजूद बड़ी नदी घाटियों जितना ही है. अब्दुल्ला एक.जकी ने कहा, 'हमने सबसे आसान काम किया जो किया जा सकता था और हमने बस उनका नक्शा बनाया और उन्हें एक साथ जोड़ दिया'. क्या ऐसा होना आम बात है? धरती पर इतनी बड़ी बेसिन का होना आम बात है. धरती पर 91 पानी इकट्ठा करने वाले क्षेत्र हैं जिसमें 62 लाख वर्ग किमी का अमेजन नदी बेसिन भी शामिल है जो बहुत बड़ा है. लेकिन इसके उलट मंगल ग्रह पर कम बड़े दल निकासी प्रणालियां हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका कारण यह है कि मंगल ग्रह पर अलग-अलग तरह की जमीन बनाती है जिससे बड़ी नदी प्रणालियों को सहारा मिलता है. मंगल ग्रह पर यह गतिविधि नहीं है इसलिए वहां कम बड़ी नदियां हैं.  क्यों हैं ये 16 बड़ी नदियां सबसे अहम? मंगल ग्रह पर ये बड़ी नदी प्रणालियां उसके पुराने भूभाह का सिर्फ 5% हिस्सा ही कवर करती हैं. लेकिन, वैज्ञानिकों ने पाया कि ग्रह पर नदियों से जो मिट्टी और तलछट जमा हुई है उसका लगभग 42% हिस्सा इन्हीं 16 बड़ी प्रणालियों से आया है. जकी ने कहा, तलछट में महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं इसलिए यह जानने के लिए और शोध करना होगा कि तलछट आखिर कहां जाकर जमा हुई.   पहली बार बना मंगल का ग्लोबल नदी नक्शा वैज्ञानिकों ने मंगल का यह नक्शा नासा के मिशनों की मदद से बनाया. उन्होंने इस्तेमाल किया Mars Orbiter Laser Altimeter (MOLA) का डाटा, CTX कैमरा, Mars Reconnaissance Orbiter और फिर ArcGIS Pro सॉफ्टवेयर में नदियों, घाटियों, झीलों और तलछट के निशान ट्रेस किए. कुल 19 समूह मिले, जिनमें से 16 को बड़े ड्रेनेज बेसिन माना गया. हर बेसिन 1 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा फैला था. डॉ गौड्ज कहते हैं कि हमें पता था कि मंगल पर नदियां थीं, लेकिन वे कितनी बड़ी और कितनी संगठित थीं, ये पहली बार साफ दिखा. पांच प्रतिशत जमीन पर बने बेसिन  अध्ययन के अनुसार, ये 16 बेसिन मंगल की प्राचीन सतह के सिर्फ 5% हिस्से में फैले थे. लेकिन इन्होंने कुल नदी-जनित क्षरण (erosion) का लगभग 42% हिस्सा किया और करीब 28,000 क्यूबिक किलोमीटर तलछट (sediment) बहाकर ले गए. तलछट में जीवन के पोषक तत्व सबसे अच्छे से बचते हैं. इसलिए इन जगहों को वैज्ञानिक जीवन की खोज के लिए अहम जगह मान रहे हैं. धरती पर बड़ी नदियां इसलिए बनती हैं क्योंकि यहां टेक्टोनिक प्लेट्स पहाड़ और घाटियां बनाती रहती हैं. लेकिन मंगल पर ऐसी प्लेट्स नहीं हैं. इसी वजह से मंगल पर केवल 16 बड़े नदी बेसिन मिले, जबकि धरती पर 91 से ज्यादा हैं. जैसे 62 लाख वर्ग किमी वाला अमेजन बेसिन. मंगल पर कब आया पानी, कब गया पानी? पुराने अध्ययनों के अनुसार, मंगल लगभग 4.5 अरब साल पहले बना. सतह पर पानी करीब 2 अरब साल तक रहा. बाद में ग्रह का वातावरण और चुंबकीय ढाल कमजोर पड़ गई और सूर्य की किरणों ने धीरे-धीरे इसका पानी छीन लिया. आज जो सूखा मंगल दिखता है, वह कभी पानी और नदियों से भरा ग्रह था. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये 16 बड़े नदी बेसिन अब उन जगहों में शामिल होंगे, जहां भावी मंगल मिशन जीवन के संकेत ढूंढेंगे. डॉ गौड्ज कहते हैं कि अगर कभी मंगल पर जीवन रहा होगा, तो उसके निशान इन बेसिनों में मिलने की संभावना सबसे ज्यादा है. यह खोज मंगल के मौसम और उसके पिछले इतिहास के बारे में हमारी समझ बदल देती है. अब यह साफ हो रहा है कि मंगल पर कभी धरती जैसा पानी का बड़ा चक्र चलता था.

तीन नई एयरलाइंस को NOC जारी, जानें क्यों जरूरी थी नई कंपनियों की एंट्री, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली  भारत सरकार ने देश में एविएशन सेक्टर को और मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तीन नई एयरलाइंस-शंख एयर, अलहिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को परिचालन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इन एयरलाइंस के शुरू होने से न सिर्फ इंडिगो और एयर इंडिया पर निर्भरता कम होगी, बल्कि देशभर में हवाई कनेक्टिविटी को भी नया विस्तार मिलेगा। सरकार ने इन तीनों कंपनियों को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया है। इंडिगो से जुड़ी हालिया परिचालन चुनौतियों और बढ़ती यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।  कब से शुरू होंगी नई एयरलाइंस? NOC मिलने का मतलब यह नहीं है कि ये एयरलाइंस तुरंत उड़ानें शुरू कर देंगी। इसका अर्थ केवल इतना है कि अब ये कंपनियां एयरलाइंस स्थापित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं। यात्रियों को इन सेवाओं का लाभ मिलने में अभी कुछ समय लगेगा। एयरलाइंस शुरू करने के लिए क्या प्रक्रियाएं होंगी पूरी? NOC मिलने के बाद एयरलाइंस कंपनियों को DGCA से एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (AOC) प्राप्त करना होगा। इसके अलावा विमानों की व्यवस्था, पायलट और केबिन क्रू की नियुक्ति, रूट नेटवर्क की योजना और मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। यह पूरी प्रक्रिया आमतौर पर कई महीनों में पूरी होती है, जिसके दौरान एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति और परिचालन क्षमता की भी जांच होती है। अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस परिचालन बेड़े में शामिल होने को तैयार  अल हिंद एयर को केरल-स्थित अलहिंद ग्रुप का समर्थन प्राप्त है। फ्लाईएक्सप्रेस ऐसे इच्छुक एयरलाइंस समूह में शामिल हो रही है, क्योंकि भारत दुनिया के तेजी से बढ़ते एयरलाइन बाजारों में व्यापक भागीदारी के लिए प्रयास कर रहा है।   यह कदम अक्टूबर में क्षेत्रीय खिलाड़ी फ्लाई बिग के निलंबन के बाद आया, जिससे परिचालन घरेलू कैरियरों की संख्या घटकर 9 रह गई। इन 3 एयरलाइंस की मंजूरी हाल के दिनों में प्रमुख एयरलाइंस, खासकर इंडिगो में हुए परिचालन व्यवधानों से उत्पन्न बाजार चिंताओं के बीच आई है।  क्षेत्रीय भागीदारी आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रोत्साहन  नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उड़ान योजना के तहत, विशेषकर कम-सेवा वाले क्षेत्रों में एयरलाइन भागीदारी बढ़ाने पर अपना केन्द्रित रखा है।   इस योजना के माध्यम से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में विस्तार हुआ है, जहां स्टार एयर, फ्लाई91, और इंडियावन एयर जैसे छोटे कैरियर कम-ज्ञात मार्गों पर सेवाएँ दे रहे हैं।   नवमंजूर एयरलाइंस संभवतः ऐसे मार्गों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर केंद्रीकृत उद्योग में अपने परिचालन स्थापित करेंगी।  हालिया बाजार रुझान और पिछली एयरलाइन विफलताएँ  नए कैरियरों का प्रवेश उस अवधि के बाद हो रहा है जब जेट एयरवेज और गो फर्स्ट जैसी एयरलाइंस वित्तीय चुनौतियों के कारण परिचालन से बाहर हो गईं।   नागरिक उड्डयन क्षेत्र में अस्थिरता ने स्थिरता और लागत प्रबंधन को प्रमुख परिचालन प्राथमिकताएँ बना दिया है।   वर्तमान में, भारत की अनुसूचित एयरलाइंस में इंडिगो, एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, एलायंस एयर, अकासा एयर, स्पाइसजेट, स्टार एयर, फ्लाई91, और इंडियावन एयर शामिल हैं।  निष्कर्ष  अल हिंद एयर, फ्लाईएक्सप्रेस, और शंख एयर का जुड़ना भारत के काफी केंद्रीकृत एयरलाइन उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। ये अनुमोदन मौजूदा प्रमुख कैरियरों पर यात्रियों की निर्भरता कम करने में सहायक हो सकते हैं।  नई एयरलाइंस की ज़रूरत क्यों पड़ी? भारत का एविएशन बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। नई एयरलाइंस के जुड़ने से यात्रियों को ज़्यादा सीटें, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रतिस्पर्धी किराए मिलेंगे। साथ ही बाज़ार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवा की गुणवत्ता में भी सुधार होगा और यात्रियों के पास फ्लाइट चुनने के अधिक विकल्प होंगे। ये हैं नई एयरलाइंस जो होंगी शुरू शंख एयरः उत्तर प्रदेश स्थित शंख एयर की उड़ानें 2026 की शुरुआत में शुरू होने की संभावना है। कंपनी अगले तीन वर्षों में अपने बेड़े में 20 से 25 विमान शामिल करने की योजना बना रही है। इसका लक्ष्य देश के प्रमुख शहरों और राज्यों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। अलहिंद एयरः अलहिंद एयर केरल स्थित अलहिंद ग्रुप की पहल है, जिसे ट्रैवल और टूरिज़्म सेक्टर का लंबा अनुभव है। यह एयरलाइन क्षेत्रीय और लो-कॉस्ट उड़ानों पर फोकस करेगी, ताकि आम लोग भी किफायती दरों पर हवाई सफर कर सकें। फ्लाई एक्सप्रेसः फ्लाई एक्सप्रेस का उद्देश्य यात्रियों के साथ-साथ एयर-कार्गो सेवाओं को भी बढ़ावा देना है। कच्चे माल से लेकर तैयार उत्पादों की ढुलाई को आसान बनाते हुए यह एयरलाइन घरेलू कार्गो सेक्टर की बढ़ती मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभा सकती है। विमानन क्षेत्र में एकाधिकार खत्म करने की कवायद वर्तमान में भारतीय आसमान पर टाटा समूह की एअर इंडिया और इंडिगो का एकछत्र राज है। डीजीसीए  के आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू बाजार का 90% से अधिक हिस्सा इन्हीं दो समूहों के पास है। इसमें भी करीब 65% हिस्सेदारी अकेले इंडिगो के पास है। इस 'डुओपोली' के कारण अक्सर यात्रियों को सीमित विकल्पों और मनमाने किरायों का दंश झेलना पड़ता है। हाल ही में इंडिगो एयरलाइन में आई तकनीकी खामियों ने यह साबित कर दिया कि बाजार का एक ही खिलाड़ी पर अत्यधिक निर्भर होना कितना जोखिम भरा हो सकता है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि सरकार का उद्देश्य विमानन बाजार में नए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना है ताकि बाजार में संतुलन बना रहे और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। कौन हैं विमानन बाजार के नए खिलाड़ी? 1. अल-हिंद एयर  केरल स्थित अल-हिंद ग्रुप द्वारा प्रवर्तित यह एयरलाइन दक्षिण भारत से अपनी शुरुआत करने जा रही है। अल-हिंद ग्रुप पहले से ही ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर में एक बड़ा नाम है, जिसका टर्नओवर लगभग 20,000 करोड़ रुपये बताया जाता है। कंपनी की योजना शुरुआत में एटीआर-72 (ATR-72) विमानों के साथ क्षेत्रीय मार्गों पर उड़ान भरने की है, और भविष्य में एयरबस A320 विमानों के साथ अंतरराष्ट्रीय मार्गों, विशेषकर खाड़ी देशों (Gulf countries) को जोड़ने का लक्ष्य है। अल हिन्द एयर का प्रवर्तक केरल स्थित अल हिन्द ग्रुप है। इस समूह की जड़ें 1990 के दशक की शुरुआत में जमी थीं, जब इसने एक छोटी ट्रैवल एजेंसी के रूप में शुरुआत की थी।  मीडिया रिपोर्ट्स और कंपनी के दावों के अनुसार, समूह का कुल टर्नओवर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक है ।  ट्रैक्सन (Tracxn) के आंकड़ों के अनुसार, … Read more

महिला यात्रियों के लिए नया नियम: कैब बुक करते समय चुन सकेंगी महिला ड्राइवर

नई दिल्ली देश में अब बहुत से लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बजाय ओला, उबर और रैपिड जैसी कैब सर्विसेज का सहारा ले रहे हैं. लेकिन इन कैब में कई बार कुछ ऐसी घटनाएं भी हो जाती है. जो यात्रियों को असहज और असुरक्षित महसूस करवा देती हैं. खासतौर पर महिला यात्रियों के साथ ऐसा होता ज्यादा देखा गया है. यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने  ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर्स गाइडलाइंस 2025 में बदलाव किए हैं.  इन नए नियमों का सीधा असर कैब बुकिंग के तरीके पर पड़ेगा. खास बात यह है कि महिला यात्रियों को अब राइड बुक करते समय महिला ड्राइवर चुनने का ऑप्शन मिल सकता है. लंबे समय से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच इसे एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है.  कब से लागू होंगे नए नियम? सरकार की ओर से नोटिफिकेशन के जारी होने के बाद अब महिला यात्रियों के मन में सवाल आ रहा है आखिर यह नियम कब से लागू होगा. तो बता दें नोटिफिकेशन में किसी तय तारीख का साफ तौर पर जिक्र नहीं किया गया है. आमतौर पर ऐसी गाइडलाइंस जारी होते ही प्रभावी मानी जाती हैं. लेकिन इन्हें जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी राज्यों की होती है. इससे पहले जब जुलाई 2025 में एग्रीगेटर गाइडलाइंस लागू की गई थीं. तब राज्यों को तीन महीने का समय दिया गया था.  माना जा रहा है कि संशोधित नियमों के लिए भी राज्यों को इसी तरह का वक्त मिल सकता है. राज्य सरकारें अपने स्तर पर लाइसेंसिंग नियमों में बदलाव करेंगी और उसके बाद ही यह नियम पूरी तरह लागू हो पाएंगे. जब तक राज्य इन गाइडलाइंस को अपनाकर नोटिफिकेशन जारी नहीं करते. तब तक अलग अलग जगहों पर इसकी टाइमलाइन अलग हो सकती है. कब से लागू होगा नया नियम नए नोटिफिकेशन में किसी खास तारीख का जिक्र नहीं किया गया है. आमतौर पर ऐसी गाइडलाइंस जारी होने की तारीख से ही प्रभावी मानी जाती हैं. इससे पहले जुलाई 2025 में जब गाइडलाइंस आई थीं, तब राज्यों को उन्हें लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था. हालांकि अभी कोई तय समय-सीमा घोषित नहीं की गई है, लेकिन संशोधित नियमों के लिए भी कुछ ऐसा ही समय मिल सकता है. जेंडर चॉइस फीचर: कैसे होगा लागू ये नियम केंद्र सरकार ने बनाए हैं, लेकिन इन्हें जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी. राज्य अपने लाइसेंसिंग सिस्टम में इन बदलावों को शामिल करेंगे. कैब कंपनियों को अपने ऐप्स में जरूरी बदलाव करने होंगे, ताकि यात्रियों को ड्राइवर का जेंडर चुनने का विकल्प मिल सके. यह फीचर गाइडलाइंस के क्लॉज के तहत अनिवार्य किया गया है. अगर कोई एग्रीगेटर इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस रद्द भी किया जा सकता है. हालांकि, ऐप अपडेट और सिस्टम में बदलाव करने में कंपनियों को कुछ समय लग सकता है. महिला ड्राइवरों की कम संख्या बनी चुनौती इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस नियम को पूरी तरह लागू करना आसान नहीं होगा. फिलहाल देश में कुल कैब ड्राइवरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 5 फीसदी से भी कम है. ऐसे में हर समय महिला ड्राइवर उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे ऑन-डिमांड सर्विस प्रभावित हो सकती है और वेटिंग टाइम बढ़ सकता है, खासकर रात के समय जब डिमांड ज्यादा और ड्राइवर कम होते हैं. इस मुद्दे पर फिलहाल Ola, Uber और Rapido ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. टिपिंग सिस्टम में भी बदलाव सरकार ने टिप देने के नियमों को भी पारदर्शी बना दिया है. अब यात्री सफर पूरा होने के बाद ड्राइवर को अपनी मर्जी से टिप दे सकेंगे.     टिप देने का विकल्प सिर्फ ट्रिप खत्म होने के बाद ही मिलेगा.     पूरी टिप ड्राइवर को ही मिलेगी, इसमें से कोई कटौती नहीं होगी.     कंपनियां टिप के लिए किसी भी तरह के भ्रामक या दबाव बनाने वाले तरीकों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी. कुल मिलाकर, नए नियमों से यात्रियों की सुरक्षा और ड्राइवरों की कमाई दोनों को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है. जेंडर चॉइस फीचर कैसे होगा लागू? यह नियम केंद्र सरकार ने बनाए हैं. लेकिन इनका क्रियान्वयन राज्य सरकारों के हाथ में होगा. राज्यों को अपने कैब एग्रीगेटर लाइसेंस सिस्टम में इस जेंडर चॉइस फीचर को शामिल करना होगा. इसके बाद Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों को अपने ऐप्स में जरूरी तकनीकी बदलाव करने पड़ेंगे. राइड बुक करते समय यात्रियों को ड्राइवर का जेंडर चुनने का ऑप्शन दिखेगा. यह फीचर गाइडलाइंस के एक मैंडेटरी क्लॉज के तहत रखा गया है. अगर कोई एग्रीगेटर इन नियमों का पालन नहीं करता है. तो उस पर जुर्माना लग सकता है या लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है. हालांकि ऐप अपडेट और सिस्टम इंटीग्रेशन में कंपनियों को कुछ वक्त लगना तय माना जा रहा है. तो कह सकते हैं फिलहाल इसमें वक्त लग सकता है और लागू होने के बाद भी महिला ड्राइवरों की कमी इस कदम को थोड़ा कमजोर कर सकती है. 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल और क्रिकेट स्टेडियम का करेंगे लोकार्पण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 दिसम्बर को सतना जिले को 652 करोड 54 लाख रूपये लागत के विकास कार्यो की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सतना शहर में 31 करोड़ 15 लाख रूपये की लागत से नवनिर्मित अंतर्राज्यीय बस टर्मिनल और 8 करोड़ 39 लाख रूपये लागत के नवनिर्मित धवारी क्रिकेट स्टेडियम का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आई.एस.बी.टी. सतना में आयोजित कार्यक्रम में सतना शहर के 168 लाख 33 हजार रूपये लागत के 6 कार्यो का लोकार्पण और 484 करोड़ 21 लाख रूपये लागत के 6 विकास कार्यो का भूमिपूजन भी करेंगे। साथ ही विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण करेंगे। 650 बिस्तरीय नवीन चिकित्सालय भवन का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव शासकीय मेडीकल कॉलेज सतना में आयोजित कार्यक्रम में 383 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाले 650 बिस्तरीय नवीन चिकित्सालय भवन के निर्माण का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सतना में आयोजित विंध्य व्यापार मेला के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे।