samacharsecretary.com

PM Kisan 22nd Installment Update: जानें कब मिलेगा 2000 रुपए का लाभ

नई दिल्ली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) के करोड़ों लाभार्थी किसान अब 22वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में 19 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना की 21वीं किस्त जारी की थी, जिसके तहत करीब 9 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 18,000 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। PM Kisan योजना के तहत कितनी मिलती है राशि पीएम किसान योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को हर साल कुल ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि ₹2,000 की तीन किस्तों में हर चार महीने में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है। अब तक जारी किस्तों का विवरण 19वीं किस्त: फरवरी 2025 20वीं किस्त: अगस्त 2025 21वीं किस्त: नवंबर 2025 साल 2025 की तीनों किस्तें जारी हो चुकी हैं। अब अगली किस्त 22वीं किस्त होगी, जो 2026 की पहली किस्त मानी जाएगी। PM Kisan 22वीं किस्त कब आएगी? सरकारी तौर पर अभी 22वीं किस्त की तारीख घोषित नहीं हुई है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स और पिछली किस्तों के पैटर्न के अनुसार माना जा रहा है कि PM Kisan 22वीं किस्त फरवरी 2026 में जारी हो सकती है। क्योंकि इससे पहले भी साल की पहली किस्त फरवरी महीने में ट्रांसफर की जाती रही है। PM Kisan 22वीं किस्त का स्टेटस कैसे चेक करें किसान योजना से जुड़ी हर आधिकारिक जानकारी pmkisan.gov.in वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाती है। यहां आप किस्त की स्थिति , लाभार्थी सूची , e-KYC स्टेटस, भुगतान से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं। साथ ही, वेबसाइट पर मौजूद KISAN E-MITRA चैटबोट की मदद से भी किसान अपने सवालों के जवाब पा सकते हैं।

सूटकेस का साइज भी मायने रखेगा! रेलवे ने बढ़ाई चेकिंग की शर्तें

  नई दिल्ली IRCTC ने ट्रेनों में सामान ले जाने को लेकर नए नियम बनाए हैं। इन नियमों के अनुसार, अगर कोई यात्री तय सीमा से ज्यादा सामान लेकर यात्रा करता है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क (एक्स्ट्रा चार्ज) देना होगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में इन नियमों की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अब ट्रेन में भी हवाई यात्रा की तरह ज्यादा वजन के सामान पर एक्स्ट्रा चार्ज लगेगा। कितना सामान ले जा सकते हैं यात्री? रेलवे ने अलग-अलग कोच के लिए सामान की सीमा तय की है: AC थ्री-टियर और चेयर कार: 40 किलो तक सामान फ्री स्लीपर क्लास: 80 किलो तक सेकंड क्लास: 70 किलो तक फर्स्ट क्लास और AC टू-टियर: 50 किलो तक फ्री, ज्यादा से ज्यादा 100 किलो तक AC फर्स्ट क्लास: 70 किलो तक फ्री, शुल्क देकर 150 किलो तक ज्यादा सामान ले जाने पर कितना चार्ज लगेगा? अगर कोई यात्री तय सीमा से ज्यादा सामान लेकर यात्रा करता है, तो उससे बैगेज रेट का 1.5 गुना शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क सिर्फ उसी क्लास की तय अधिकतम सीमा तक ही लागू होगा। सामान के साइज को लेकर नियम यात्री ट्रेन में सिर्फ वही ट्रंक, सूटकेस या बॉक्स ले जा सकते हैं जिनका साइज अधिकतम 100 सेमी × 60 सेमी × 25 सेमी हो। अगर सामान इससे बड़ा है, तो उसे कोच में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। ऐसे सामान को ब्रेक वैन (SLR) या पार्सल वैन में बुक कराना होगा।

भारतीय क्रिकेट टीम का ऐलान आज, टी20 विश्व कप से पहले मुंबई में चयन समिति की बैठक

 नई दिल्ली अगले साल होने वाले टी20 विश्व कप के लिए आज भारतीय टीम का एलान होगा। इसके साथ ही पुरुष चयन समिति न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए टीम की घोषणा करेगी। मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर और टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव दोपहर 1:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। टी20 विश्व कप का आयोजन सात फरवरी से भारत और श्रीलंका की मेजबानी में होगा। अगरकर-सूर्यकुमार करेंगे प्रेस कॉन्फ्रेंस भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की सीनियर राष्ट्रीय चयन समिति की बोर्ड के मुख्यालय में बैठक होगी जिसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी जिसमें भारतीय टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार और मुख्य चयनकर्ता अगरकर मौजूद रहेंगे। भारतीय टीम शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद में पांच मैचों की टी20 सीरीज का आखिरी मुकाबला खेलेगी। बताया जा रहा है कि सूर्यकुमार यादव इस मैच के बाद सीधे मुंबई पहुंचेंगे। न्यूजीलैंड सीरीज के लिए भी होगा टीम का चयन भारतीय टीम को 11 जनवरी से न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज खेलनी है जिसके बाद पांच मैचों की टी20 सीरीज भी खेली जाएगी। माना जा रहा है टी20 विश्व कप से पहले भारतीय टीम की यह आखिरी द्विपक्षीय सीरीज होगी। चयन समिति टी20 विश्व कप के साथ ही न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के लिए भी टीम का चयन करेगी। भारतीय टीम इस वैश्विक टूर्नामेंट में अपने खिताब का बचाव करने उतरेगी। अब तक किसी भी टीम ने टी20 विश्व कप का खिताब का सफलतापूर्वक बचाव नहीं किया है। ज्यादातर स्थान के लिए दावेदार तय इसमें कोई शक नहीं है कि ज्यादातर स्थान के लिए दावेदार तय हैं, लेकिन कुछ स्थान ऐसे हैं जिनके लिए माथापच्ची हो रही है। उपकप्तान शुभमन गिल की खराब फॉर्म टीम प्रबंधन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। उनके शामिल होने से संजू सैमसन को मध्यक्रम में भेजा गया था, लेकिन अब वह पिछले कुछ मैच से अंतिम एकादश से भी बाहर हैं। वहीं, गिल चोट के कारण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चौथे टी20 मैच में भी नहीं खेले थे। भारत ग्रुप ए में शामिल भारत ने 2024 में रोहित शर्मा की कप्तानी में दक्षिण अफ्रीका को हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी। भारत इस टूर्नामेंट में खिताब बचाने के इरादे से उतरेगा। यह इस टूर्नामेंट का 10वां संस्करण होगा। भारत के अलावा ग्रुप ए में पाकिस्तान, अमेरिका, नीदरलैंड्स और नामीबिया की टीम है। ग्रुप बी में ऑस्ट्रेलिया, सह-मेजबान श्रीलंका, आयरलैंड, जिम्बाब्वे और ओमान हैं। ग्रुप सी में इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, बांग्लादेश, नेपाल और इटली मौजूद हैं। वहीं, ग्रुप डी में न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, अफगानिस्तान, कनाडा और यूएई की टीम है। टूर्नामेंट में भारत का कार्यक्रम भारत टूर्नामेंट में अपने अभियान की शुरुआत अमेरिका के खिलाफ सात फरवरी को करेगा। यह मुकाबला मुंबई में खेला जाएगा। इसके बाद भारत और नामीबिया के बीच मैच नई दिल्ली में 12 फरवरी को खेला जाएगा। फिर भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को टूर्नामेंट का महामुकाबला कोलंबो के आर प्रेमादासा स्टेडियम में खेला जाएगा। दरअसल, आईसीसी, बीसीसीआई और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के बीच समझौते के तहत 2027 तक भारत और पाकिस्तान के सभी मैच तटस्थ स्थल पर होंगे। यही कारण है कि दोनों टीमों के बीच मैच की मेजबानी कोलंबो करेगा। भारत ग्रुप चरण में अपना आखिरी मैच अहमदाबाद में 18 फरवरी को खेलेगा।

एसआईआर के बाद भोपाल में मतदाता सूची में बदलाव, अभी भी है नाम जोड़ने का मौका

भोपाल   राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश में एसआईआर का पहला चरण पूरा हो गया है. 27 अक्टूबर की स्थिति में भोपाल में 21 लाख 25 हजार मतदात थे. लेकिन अब इनमें से 4 लाख 38 हजार मतदाओं के नाम नई मतदाता सूची से कट सकते हैं. भोपाल जिला उप निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया "एसआईआर का फार्म जमा करने के आखिरी दिन तक 79 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली गई है. जबकि 20.6 प्रतिशत यानि 4 लाख 38 हजार मतादाता अनकनेक्टेबल पाए गए हैं." 23 जनवरी को प्रकाशित होगा ड्राफ्ट भुवन गुप्ता ने बताया "मतदाता सूची का अंतिम ड्राफ्ट 23 जनवरी को प्रकाशित होगा. जो मतदाता इसमें शामिल नहीं होंगे, वो 23 जनवरी के बाद इसके लिए दावा-आपत्ति लगा सकते हैं. इसके साथ ही एक लाख 13 हजार मतदाता ऐसे चिह्नित किए गए हैं, जिनका 2003 की मतदाता सूची से लिंक नहीं मिला. ये मतदाता भी नौ मैपिंग की श्रेणी में हैं. इनकी व्यक्तिगत सुनवाई की जाएगी." इसके लिए अनमैपिंग वाले मतदाताओं को 19 दिसंबर से नोटिस जारी किए जाएंगे. बाद में इनके दस्तावेजों का सत्यापन होगा. इसके बाद इनके नाम मतदाता सूची में शामिल कर लिए जाएंगे. सभी 85 वार्डों में होगी दावा-आपत्ति की सुनवाई भुवन गप्ता ने बताया "जिन मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई है. उनके लिए अलग-अलग वार्डों में कैंप लगाया जाएगा. सभी 85 वार्डों में बीएलओ बैठेंगे, जो दावे-आपत्तियों का निराकरण करेंगे. इसके साथ ही 85 अतिरिक्त निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी बनाने का प्रस्ताव आयोग को भेजा है. ये सभी 85 वार्डों में नोटिस की सुनवाई करेंगे."  भुवन गुप्ता ने बताया "प्रत्येक वार्ड में एक दिन में 50 लोगों के दावे-आपत्तियों की सुनवाई होगी. 35 हजार मतदाता ऐसे भी मिले हैं, जिनकी मृत्यु हो गई है. इनके नाम भी मतदाता सूची से हटेंगे." इस तरह नए मतदाता जुड़वा सकते हैं नाम जिला निर्वाचन अधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया "23 जनवरी को मतदाता सूची का अंतिम ड्राफ्ट जारी होगा, इसके साथ ही दावे-आपत्ति का दौर भी शुरू होगा. इस दौरान 1 जनवरी 2026 की स्थित में जो नए मतदाता हैं, वो अपने नाम जुड़ाने के लिए या संशोधन के लिए भी आवेदन कर सकते हैं. हमारे बीएलओ इस दौरान बूथों में बैठेंगे. फिलहाल जिले में 4 लाख 38 हजार मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं." नागरिकता प्रस्तुत करने के लिए 50 दिन का समय उप निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया "अनकलेक्टेबल पत्रक वाली सूची में आने वाले लोगों को कोई नोटिस नहीं भेजा जाएगा. प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद यदि ऐसे मतदाताओं का नाम सूची में नहीं मिलता है, तो उन्हें फार्म 6 के जरिए नए मतदाता के तौर पर खुद को पंजीकृत करना होगा." "इसके लिए आवेदकों को आवेदन के साथ नाम, पते और जन्मतिथि के प्रमाण के साथ नागरिकता का प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा. ऐसे मतदाताओं को नागरिकता का दस्तावेज पेश करने के 50 दिन का समय दिया जाएगा." एसआईआर के लिए दस्तवेजों की 5 श्रेणियां 1. एक जुलाई 1987 को भारत में जन्मे व्यक्ति को जन्मतिथि और जन्म स्थान की पुष्टि के लिए प्रमाण पत्र देना होगा. 2. एक जुलाई 1987 से दो दिसंबर 2004 तक जन्मे व्यक्ति को स्वयं के जन्मतिथि और जन्म स्थान के प्रमाण के साथ पिता की जन्मतिथि-जन्म स्थान को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज देने होंगे. 3. दो दिसंबर 2004 के बाद जन्मे व्यक्ति को पिता के जन्म स्थान-जन्म तिथि प्रमाण पत्र के साथ माता की जन्मतिथि और जन्म स्थान का प्रमाण भी देना होगा. वहीं यदि माता-पिता में से कोई भारतीय नहीं हैं, तो उनका वैध पासपोर्ट-वीजा की एक प्रति देनी होगी. 4. देश के बाहर जन्मे व्यक्ति को भारतीय मिशन से जारी जन्म पंजीकरण का प्रमाणपत्र देना होगा. 5. यदि किसी को भारतीय नागरिकता पंजीकरण से मिली है, तो उन्हें नागरिकता पंजीकरण का प्रमाणपत्र लगाना होगा.

भोपाल मध्यप्रदेश का दूसरा शहर जहां मेट्रो शुरू, एक दिन में 17 ट्रिप, तेज रफ्तार में यात्रा

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आज  20 दिसंबर से मेट्रो सिटी बन जाएगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्‌टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मेट्रो का उद्घाटन करेंगे। 6.22 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर मेट्रो में सवार होकर शहर को देखेंगे। पहले ही दिन से चुकाना होगा किराया आज 20 दिसंबर को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल मेट्रो को हरी झंडी दिखाएंगे. जबकि 21 दिसंबर से आम लोग इसमें यात्रा कर सकेंगे. भोपाल मेट्रो में यात्रा करने के लिए शहरवासियों को पहले दिन से ही किराया चुकाना होगा. इसके लिए भोपाल मध्य प्रदेश मेट्रो कॉर्पोरेशन भोपाल ने भोपाल मेट्रो का शेड्यूल भी जारी कर दिया है. खास बात यह है कि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन पहुंचने में मेट्रो को महज 3 से 4 मिनट ही लगेंगे. सुबह 9 से शाम 7 बजे तक 17 राइड मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन के प्रबंध संचालक एस कृष्णा चैतन्य ने बताया, '' भोपाल मेट्रो का संचालन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक किया जाएगा. इस दौरान सुभाष नगर से एम्स साकेत नगर तक मेट्रो की 17 राइड रहेगी. तय शेड्यूल के अनुसार सुभाष नगर स्टेशन से एम्स अस्पताल तक 9 राइड जबकि एम्स से सुभाष नगर तक 8 राइड रहेंगी. शुरुआत में एक ही मेट्रो का संचालन किया जाएगा. लेकिन यदि ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है, तो और मेट्रो भी चलाई जा सकती हैं.'' भोपाल में पहले चरण में 27 मेट्रो ट्रेन चलनी है, इनमें से 8 मेट्रो ट्रेन भोपाल डिपो में पहुंच चुकी हैं. 6.22Km में 8 स्टेशन…शुरुआत सुबह 9 बजे से भोपाल में मेट्रो के दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं। पहला ऑरेंज लाइन करोंद से एम्स के बीच 16.74 किलोमीटर लंबा है। वहीं दूसरा प्रोजेक्ट ब्लू लाइन 14.16 किलोमीटर भदभदा से रत्नागिरि तक है। दोनों के लिए डिपो सुभाष नगर में बना है। वहीं पुल बोगदा में जंक्शन बनेगा, यानी ट्रेनें यहां से क्रॉस होंगी। सबसे पहले ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाष नगर से एम्स तक 6.22 किमी की शुरुआत हो रही है। इसमें 8 स्टेशन (सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम ऑफिस, अलकापुरी और एम्स) शामिल हैं। एक रूट पर 75 मिनट के अंदर मेट्रो ट्रिप पूरी करेगी। एक दिन में कुल 17 ट्रिप होंगी, जिसमें एम्स से सुभाष नगर के बीच 9 और सुभाष नगर से एम्स के बीच 8 ट्रिप शामिल हैं। पहली ट्रेन सुबह 9 बजे से एम्स स्टेशन से चलेगी और आखिरी स्टेशन सुभाष नगर तक 40 मिनट में पहुंचेगी। वहीं आखिरी ट्रेन भी एम्स से ही शाम 5 बजे चलेगी, जो शाम 6.25 बजे सुभाष नगर पहुंच जाएगी। 3 जोन में बांटा किराया, अधिकतम 40 रुपए रहेगा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भोपाल मेट्रो का किराया 3 जोन में बांटा है। इसमें कुल 8 स्टेशन हैं। पहले दो स्टेशन का किराया 20 रुपए है। 3 से 5 स्टेशन का 30 रुपए और 6 से 8 स्टेशन का किराया 40 रुपए लगेगा। उदाहरण के तौर पर यदि आप डीबी मॉल स्टेशन से रानी कमलापति स्टेशन जाते हैं तो आपको 20 रुपए चुकाने होंगे, लेकिन यदि आप एम्स तक की यात्रा कर रहे हैं तो आपको 40 रुपए किराया देना पड़ेगा। भोपाल मेट्रो का किराया कितना है? मेट्रो कॉर्पोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि भोपाल मेट्रो का किराया भी अन्य शहरों के बराबर ही रहेगा. पहले दो मेट्रो स्टेशनों के लिए 20 रुपये का किराया तय किया गया है. जबकि 3 से 5 स्टेशन तक सफर करने के लिए 30 रुपये का किराया चुकाना होगा. वहीं 6 से 8 स्टेशनों तक यात्रा करने के लिए 40 रुपये भुगतान करना होगा. कॉर्पोरेशन के एमडी कृष्णा चैतन्य ने बताया कि ये किराया करीब 7.5 किलोमीटर की दूरी के लिए है. बाद में एम्स से करोंद तक जब मेट्रो का संचालन होगा, तब इसका अधिकतम किराया 70 रुपए रहेगा. भोपाल मेट्रो में फ्री राइड क्यों नहीं? अधिकारियों ने बताया कि इंदौर प्रदेश का पहला शहर था, जहां मेट्रो का संचालन सबसे पहले शुरु किया गया था. इसलिए वहां जाय राइड यानी एक सप्ताह तक बिना किराए के यात्रा करने की छूट थी. जबकि इसके बाद तीन महीने तक किराए में छूट दी गई थी. लेकिन भोपाल मेट्रो को लेकर सरकार की कोई प्रमोशनल पॉलिसी नहीं है, इसलिए भोपाल मेट्रो में यात्रियों को पहले दिन से ही किराया चुकाना होगा.

मध्यप्रदेश: बिजली दरों में 10% से अधिक इजाफा, ग्राहकों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा

भोपाल  मध्यप्रदेश में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि करने की तैयारी चल रही है। मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की टैरिफ पिटीशन मप्र विद्युत नियामक आयोग में लगाई है, जिसमें दावा किया गया है कि बिजली कंपनियां अपने घाटे की भरपाई के लिए यह वृद्धि करवाना चाहती हैं। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है। सूत्रों के अनुसार, मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने तीनों डिस्काम की तरफ से 30 नवंबर से पहले यह पिटीशन आयोग को सौंप दी है। आयोग ने पिटीशन को स्वीकार भी कर लिया है। अब जल्द ही इस पर सार्वजनिक सूचना जारी कर जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी। तारीख कंपनी वार होगी। जनसुनवाई के बाद आयोग तय करेगा कि बिजली की दरों में कितनी वृद्धि या कमी की जाए। यदि बिजली दरों में वृद्धि तय होती है तो वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक अप्रैल से इन्हें लागू किया जाएगा। मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाला वित्तीय वर्ष महंगाई का नया झटका लेकर आ सकता है. राज्य में बिजली दरों में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की तैयारी शुरू हो गई है. मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विद्युत टैरिफ बढ़ाने की याचिका मप्र विद्युत नियामक आयोग में दाखिल कर दी है. टैरिफ पिटीशन स्वीकार, जल्द होगी जनसुनवाई सूत्रों के मुताबिक, तीनों डिस्कॉम की ओर से यह टैरिफ पिटीशन 30 नवंबर से पहले आयोग को सौंपी गई थी, जिसे नियामक आयोग ने स्वीकार कर लिया है. अब जल्द ही सार्वजनिक सूचना जारी कर कंपनीवार जनसुनवाई की तारीख तय की जाएगी. जनसुनवाई के बाद आयोग यह फैसला करेगा कि बिजली दरों में कितनी बढ़ोतरी या राहत दी जाए. यदि वृद्धि को मंजूरी मिलती है तो नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. हजारों करोड़ के घाटे में बिजली कंपनियां राज्य की तीनों विद्युत वितरण कंपनियां भारी वित्तीय संकट से जूझ रही हैं. आंकड़ों के अनुसार— मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर करीब 18,712 करोड़ रुपये का घाटा पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लगभग 16,378 करोड़ रुपये घाटे में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर 7,285 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान इसी घाटे की भरपाई को दर वृद्धि का मुख्य कारण बताया जा रहा है. पहले भी प्रस्ताव ज्यादा, मंजूरी कम पिछले पांच वर्षों में बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित दर वृद्धि और आयोग द्वारा स्वीकृत वृद्धि में बड़ा अंतर रहा है. 2021-22: प्रस्ताव 6.23%, मंजूरी 0.63% 2022-23: प्रस्ताव 8.71%, मंजूरी 2.64% 2023-24: प्रस्ताव 3.20%, मंजूरी 1.65% 2024-25: प्रस्ताव 3.86%, मंजूरी 0.07% 2025-26: प्रस्ताव 7.52%, मंजूरी 3.46% इस बार कंपनियों ने 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है, जिससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है. उपभोक्ताओं पर सीधा असर यदि प्रस्तावित बढ़ोतरी को मंजूरी मिलती है तो घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं की मासिक बिजली बिल राशि में उल्लेखनीय इजाफा हो सकता है. आने वाले दिनों में जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ता संगठन और सामाजिक संस्थाएं अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगी. टैरिफ बढ़ोतरी से राहत उपभोक्ताओं को टैरिफ बढ़ोतरी से राहत मिलती रही है, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग मानी जा रही हैं. 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान आयोग ने बढ़ोतरी की मांग के मुकाबले बहुत कम वृद्धि स्वीकृत की थी. अब जबकि प्रदेश में सहकारिता चुनाव प्रस्तावित हैं, राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद बड़ी राहत की उम्मीद कम लग रही है. सूत्रों का अनुमान है कि इस बार दरें 4 से 6 प्रतिशत की सीमा में तय हो सकती हैं, जिससे नए साल में बिजली बिल बढ़ना लगभग निश्चित माना जा रहा है. 

स्वास्थ्य तंत्र की मजबूत प्रतिबद्धता का परिणाम: एनीमिया मुक्त भारत में एमपी दो तिमाही से नंबर-1

एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम में लगातार 2 तिमाही से मध्यप्रदेश प्रथम यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, समर्पण और टीमवर्क का प्रतिफल: उप मुख्यमंत्री शुक्ल वर्ष 2025-26 में 70 लाख से अधिक बच्चों और 9 लाख 42 हज़ार गर्भवती महिलाओं की जाँच 45 लाख महिलाओं एवं बच्चों को चिकित्सकीय उपचार भोपाल  मध्य प्रदेश में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों एवं महिलाओं में रक्त की कमी को दूर करने के लिए निरंतर और समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। एनीमिया मुक्त होने का अर्थ है कि बच्चों और महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य हो, जिससे उनका शारीरिक एवं मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सके। यह कार्यक्रम मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हुआ है। प्रदेश में किए गए सतत और प्रभावी प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत भारत सरकार की एचएमआईएस रैंकिंग में मध्य प्रदेश ने लगातार पिछली दो तिमाही में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की प्रतिबद्धता, समर्पण और टीमवर्क का प्रतिफल है। उन्होंने अभियान से जुड़े समस्त चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मैदानी अमले की सराहना करते हुए कहा कि इन सभी के अथक परिश्रम, संवेदनशीलता और सेवा भाव के कारण ही इतने व्यापक स्तर पर जांच, उपचार और जागरूकता संभव हो पाई है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों को बधाई देते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि वे इसी समर्पण के साथ कार्य करते हुए प्रदेश को पूर्ण रूप से एनीमिया मुक्त बनाने के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर रहेंगे। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान प्रदेश में दस्तक अभियान के प्रथम चरण का संचालन 22 जुलाई से 16 सितम्बर 2025 तक किया गया। इस अवधि में 6 माह से 59 माह तक के कुल 70.62 लाख बच्चों में डिजिटल हीमोग्लोबिनोमीटर के माध्यम से हीमोग्लोबिन की जांच सुनिश्चित की गई। जांच के पश्चात लगभग 35.21 लाख अल्प एवं मध्यम एनीमिक बच्चों को आवश्यक चिकित्सकीय उपचार प्रदान किया गया, जबकि 3,575 गंभीर एनीमिया से ग्रस्त बच्चों को चिन्हांकित कर जिला स्तर पर रक्ताधान अथवा यथोचित प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। अभियान के अंतर्गत प्रदेश की 9.42 लाख गर्भवती महिलाओं की एनीमिया जांच की गई। जांच के दौरान 3.02 लाख मध्यम से गंभीर तथा 10,660 अतिगंभीर एनीमिक महिलाओं को चिन्हांकित किया गया, जिन्हें आयरन एवं फोलिक एसिड (आई.एफ.ए.), आयरन सुक्रोश, एफ.सी.एम. तथा आवश्यकता अनुसार रक्ताधान के माध्यम से उपचारित किया गया। इन प्रयासों से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ सुरक्षित मातृत्व को भी बढ़ावा मिला है। एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए प्रदेश में अपनाई गई बहुआयामी रणनीति एनीमिया की रोकथाम एवं उपचार के लिए प्रदेश में बहुआयामी रणनीति अपनाई गई है, जिसमें आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों एवं सिरप का नियमित वितरण, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बच्चों में कृमि नियंत्रण (डिवॉर्मिंग) अभियान, पोषण युक्त आहार को बढ़ावा, किशोरियों के लिए साप्ताहिक आयरन सप्लीमेंटेशन, स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में स्क्रीनिंग तथा पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियानों का संचालन शामिल है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से सूचना एवं व्यापक प्रचार-प्रसार कर नागरिकों को जागरूक भी किया गया है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा एनीमिया मुक्त भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) के अंतर्गत की गई थी। इस अभियान का वर्तमान लक्ष्य मातृ एवं बाल स्वास्थ्य में सुधार लाना तथा बच्चों और महिलाओं को एनीमिया मुक्त बनाना है। मध्य प्रदेश में किए जा रहे समर्पित प्रयास इस लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं और एक स्वस्थ, सशक्त एवं सक्षम समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।  

भारत ने विकसित किया ब्रह्मास्त्र, 5th जेन जेट और हाई-टेक डिवाइस बनाने की तैयारी तेज

नई दिल्ली चीन जिसके दम पर दुनिया पर राज करना चाहता है और जिसपर उसकी सुपरमेसी है, अब उसका अंत होने वाला है. भारत के हाथ ऐसा ‘ब्रह्मास्‍त्र’ लगा है, जिससे ड्रैगन की मनमानी पर नकेल कसना आसान हो जाएगा. आंध्र प्रदेश की 974 किलोमीटर लंबी कोस्‍ट लाइन में रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स का विशाल रिजर्व मिला है. एक्‍सपर्ट का कहना है कि आंध्र प्रदेश के समुद्री तटों पर जो रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स मिले हैं, वे हाई-क्‍वालिटी के हैं. रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स के बिना फाइटर जेट, स्‍मार्टफोन, मिसाइल, इलेक्ट्रिक व्‍हीकल आदि को बना पाना असंभव है. चीन का मौजूदा रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स के 85 फीसद पर कब्‍जा है. अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर को लेकर चीन ने इसके एक्‍सपोर्ट पर नकेल कस दी थी. ऐसे में भारत जैसे देशों में हाई क्‍वालिटी प्रोडक्‍ट्स के डेवलपमेंट पर बुरा असर पड़ा. मौजूदा हालात को देखते हुए भारत ने इस सेक्‍टर में आत्‍मनिर्भर बनने का फैसला किया है. इसके बाद से ही रेयर अर्थ मैटिरियल्‍स का पता लगाने के साथ ही उसके प्रोसेसिंग पर फोकस बढ़ गया है. आंध्र तट पर मिले भंडार का इस्‍तेमाल करने पर भारत 5th जेनरेशन फाइटर जेट के साथ ही iPhone जैसे कटिंग एज डिवाइस अपने दम पर बना सकेगा. साथ ही एक्‍सपोर्ट से बड़ी मात्रा में राजस्‍व भी अर्जित किया जा सकता है. आंध्र प्रदेश की 974 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा सिर्फ खूबसूरत समुद्र तटों और मछली पकड़ने के बंदरगाहों के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि इसके नीचे छिपी रेत भारत के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है. श्रीकाकुलम से लेकर नेल्लोर तक फैले समुद्री किनारों की भारी और गहरी रेत में रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) का विशाल भंडार मौजूद है, जो ग्रीन एनर्जी, डिफेंस और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की जरूरतें पूरी कर सकता है. समुद्री रेत में मोनाजाइट नामक खनिज बड़ी मात्रा में पाया जाता है. मोनाजाइट रेयर अर्थ एलिमेंट्स और थोरियम का प्रमुख स्रोत है. इसके अलावा इल्मेनाइट, रूटाइल, जिरकॉन, गार्नेट और सिलिमेनाइट जैसे मूल्यवान खनिज भी यहां मौजूद हैं. खास बात यह है कि आंध्र प्रदेश के तट से निकलने वाले मोनाजाइट में 55 से 60 प्रतिशत तक रेयर अर्थ ऑक्साइड पाया जाता है, जो वैश्विक स्तर पर हाई क्‍वालिटी का माना जाता है. इसमें 8 से 10 प्रतिशत थोरियम भी होता है, जिसे भारत के भविष्य के परमाणु रिएक्टरों के लिए संभावित ईंधन माना जा रहा है. रेयर अर्थ मिनरल्‍स का कहां-कहां इस्‍तेमाल?     फाइटर जेट     इलेक्ट्रिक व्‍हीकल     मिसाइल     स्‍मार्टफोन     टेलीविजन     पेंट     मेडिकल इक्विपमेंट्स कहां-कहां मिले हैं रेयर अर्थ मिनरल्‍स? इन खनिजों में लैंथेनम, सेरियम, नियोडिमियम, प्रसीओडिमियम, समेरियम और यूरोपियम जैसे हल्के रेयर अर्थ एलिमेंट्स शामिल हैं. ये तत्व इलेक्ट्रिक वाहनों के स्थायी मैग्नेट, पवन ऊर्जा टरबाइन, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, उपग्रह तकनीक, फाइबर ऑप्टिक्स और मॉडर्न मेडिकल इक्विपमेंट में अहम भूमिका निभाते हैं. जीयोलॉजिकल सर्वेक्षणों के अनुसार, आंध्र प्रदेश के तट पर भीमुनिपट्टनम, कलिंगपट्टनम, काकीनाडा, नरसापुर, मछलीपट्टनम, चिराला, वोडारेवु, रामयापट्टनम और दुगराजपट्टनम जैसे क्षेत्रों में लगातार खनिज बेल्ट फैली हुई है.  रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि भारत में कुल 30 करोड़ टन से अधिक भारी खनिज रेत भंडार है, जिसमें 1.2 से 1.5 करोड़ टन मोनाजाइट शामिल है. इसमें से 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा अकेले आंध्र प्रदेश में होने का अनुमान है. लंबे समय तक ये समुद्री तट परमाणु नियमों, सीमित प्रोसेसिंग क्षमता और नीतिगत अड़चनों के कारण पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाए. लेकिन अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में तनाव बढ़ने और चीन पर निर्भरता कम करने की जरूरत के चलते आंध्र प्रदेश रणनीतिक रूप से केंद्र में आ गया है. फिलहाल चीन दुनिया की लगभग 85 प्रतिशत रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता को नियंत्रित करता है. रेयर अर्थ मिनरल्‍स क्‍या होते हैं? रेयर अर्थ मिनरल्‍स कुल 17 तत्‍वों का समूह है, जिनमें नियोडिमियम, लैंथेनम, सेरियम, डिस्‍प्रोसियम और यट्रियम जैसे तत्‍व शामिल हैं. ये नाम से भले ही रेयर लगते हों, लेकिन ये धरती पर मिलते तो हैं, पर बहुत कम मात्रा में और अलग-अलग जगह बिखरे होते हैं. इन्‍हें निकालना और शुद्ध करना मुश्किल और महंगा होता है. रेयर अर्थ मिनरल्‍स को इतना अहम क्‍यों माना जा रहा है? क्‍योंकि आधुनिक तकनीक इन पर टिकी है. मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन चक्‍की, सोलर पैनल, मिसाइल, रडार और सेमीकंडक्‍टर चिप्‍स तक में रेयर अर्थ मिनरल्‍स का इस्‍तेमाल होता है. बिना इनके आज की हाई-टेक दुनिया की कल्‍पना करना मुश्किल है. क्‍या आम आदमी की जिंदगी में भी इनका असर है? बिलकुल…आपके हाथ में मौजूद स्‍मार्टफोन का स्‍पीकर, हेडफोन के मैग्‍नेट, टीवी की स्‍क्रीन, एसी और फ्रिज जैसे घरेलू उपकरण- इन सबमें रेयर अर्थ मिनरल्‍स इस्‍तेमाल होते हैं. यानी ये सीधे-सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक वाहनों में इनकी क्‍या भूमिका है? हरित ऊर्जा के लक्ष्‍य पूरे करने में रेयर अर्थ मिनरल्‍स बेहद जरूरी हैं. पवन चक्‍कियों में लगने वाले ताकतवर मैग्‍नेट और इलेक्ट्रिक कारों की मोटर में नियोडिमियम और डिस्‍प्रोसियम जैसे तत्‍व लगते हैं. अगर इनकी सप्‍लाई बाधित होती है, तो ग्रीन एनर्जी और ईवी सेक्‍टर पर सीधा असर पड़ता है. रक्षा और राष्‍ट्रीय सुरक्षा के लिए ये कितने अहम हैं? रक्षा उपकरणों में रेयर अर्थ मिनरल्‍स की अहम भूमिका है. मिसाइल गाइडेंस सिस्‍टम, जेट इंजन, रडार और कम्‍युनिकेशन उपकरणों में इनका उपयोग होता है. यही वजह है कि कई देश इन्‍हें रणनीतिक खनिज मानते हैं और इनकी सप्‍लाई को राष्‍ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं. दुनिया में इनका सबसे बड़ा उत्‍पादक कौन है? फिलहाल चीन रेयर अर्थ मिनरल्‍स का सबसे बड़ा उत्‍पादक और प्रोसेसर है. वैश्विक सप्‍लाई का बड़ा हिस्‍सा चीन के हाथ में है. इसी कारण अमेरिका, यूरोप, जापान और भारत जैसे देश वैकल्पिक स्रोत खोजने और घरेलू उत्‍पादन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. भारत के लिए रेयर अर्थ मिनरल्‍स क्‍यों अहम हैं? भारत साफ ऊर्जा, सेमीकंडक्‍टर और रक्षा उत्‍पादन में आत्‍मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए रेयर अर्थ मिनरल्‍स जरूरी हैं. देश की लंबी समुद्री तटरेखा और कुछ राज्‍यों में इनके भंडार मौजूद हैं, जिनका सही उपयोग भारत को रणनीतिक रूप से मजबूत बना सकता है. आंध्र प्रदेश ने क्‍या उठाया कदम? इस अवसर … Read more

मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र तक इंदौर-मनमाड़ रेल, रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी, मुआवजे पर विवाद

इंदौर  मध्यप्रदेश से महाराष्ट्र तक प्रस्तावित इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन के लिए रेल मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। अगले 30 दिन में रेलवे लाइन के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण पर दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। परियोजना में इंदौर जिले की तहसीलों के 19 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। किसान नेता हंसराज मंडलोई ने बताया कि इंदौर-मनमाड़ रेल परियोजना में जहां महाराष्ट्र सरकार चार गुना मुआवजा दे रही है, वहीं प्रदेश सरकार आदिवासी किसानों को केवल दोगुना मुआवजा दे रही है, जो असमानता को दर्शाता है। रेलवे प्रशासन इस परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण बता रहा है। विभाग का दावा है कि इस लाइन के बनने से इंदौर-मुंबई की दूरी करीब 250 किलोमीटर कम हो जाएगी। वहीं तमिलनाडु से दिल्ली की दूरी लगभग 680 किलोमीटर घटेगी। महू से जम्मू-कश्मीर तक सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलने और गुजरात के यात्रियों को भी आवागमन में सुविधा बढ़ने का दावा किया जा रहा है। महू क्षेत्र के 18 गांव होंगे प्रभावित महू (डॉ. आंबेडकर नगर) से शुरू होकर महाराष्ट्र के मनमाड़ तक जाने वाली रेलवे लाइन में महू विधानसभा क्षेत्र के 18 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इन गांवों के करीब 243 आदिवासी किसानों की 131.49 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट की कवायद वर्षों से चल रही है। वर्ष 2023 में टोकन राशि के रूप में दो करोड़ रुपये मिले थे। मप्र के हिस्से में डीपीआर-सर्वे का काम किया गया। काम जारी रखने के लिए 2024 के बजट में एक हजार रुपये की टोकन राशि दी गई थी। अब इस परियोजना के लिए 18 हजार 36 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। वर्तमान में इंदौर से देवास, उज्जैन, रतलाम, थांदला, दाहोद, गोधरा और वडोदरा होते हुए मुंबई जाना पड़ता है, जिसकी दूरी 828 किलोमीटर है। नई रेल लाइन बनने से 188 किलोमीटर की दूरी कम होगी और करीब पांच घंटे का समय बचेगा। प्रदेश में 905 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण रेलवे लाइन से सबसे ज्यादा फायदा मध्यप्रदेश को मिलेगा। कुल 309 किलोमीटर में से 170.56 किलोमीटर का हिस्सा मप्र में है। इसमें प्रदेश की कुल 905 हेक्टेयर निजी जमीन शामिल है। मप्र में बनने वाले 18 स्टेशनों में महू, कैलोद, कमदपुर, झाड़ी बरोदा, सराय तालाब, नीमगढ़, चिक्तायाबड़, ग्यासपुरखेड़ी, कोठड़ा, जरवाह, अजंटी, बघाड़ी, कुसमारी, जुलवानिया, सलीकलां, वनिहार, बवादड़ और मालवा स्टेशन शामिल हैं।

भोपाल में 20 दिसम्बर को शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक, सीएम डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल रहेंगे मौजूद

शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक (उत्तरी एवं मध्य राज्य) भोपाल में 20 दिसम्बर को बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल भी रहेंगे मौजूद भोपाल  केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में शहरी विकास मंत्रियों की क्षेत्रीय बैठक (उत्तरी एवं मध्य राज्यों) 20 दिसंबर शनिवार प्रात: 11 बजे कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र, भोपाल में आयोजित हो रही है। बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रमुख शहरी विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच सहयोग और समन्वय को सुदृढ़ करना है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि यह बैठक राज्यों को योजना-वार प्रगति प्रस्तुत करने, क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं को साझा करने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान तथा मंत्रालय से नीतिगत एवं रणनीतिक मार्गदर्शन प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगी। क्षेत्रीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल और प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान एवं उत्तरप्रदेश के शहरी विकास मंत्री एवं राज्यमंत्री, भारत सरकार एवं राज्यो के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण स्वच्छ सर्वेक्षण वर्ष 2025-26 के लिए कार्य-दिशा पुस्तिका का विमोचन होगा। इस संबंध में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि यह कार्य-दिशा पुस्तिका स्वच्छता, स्थायित्व तथा नागरिक-केंद्रित शहरी प्रशासन को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बैठक में पाँच सत्रों में महत्वपूर्ण विषयों पर होगी चर्चा बैठक के दौरान पाँच सत्रों में शहरी विकास से जुड़े प्रमुख विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इन सत्रों के माध्यम से केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही व्यवहारिक चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकेगा। अमृत योजना के अंतर्गत संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता तथा समयबद्ध पूर्णता से संबंधित विषयों पर विचार किया जाएगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये आवश्यक सुधारात्मक कदमों पर भी मंथन होगा। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत डंप स्थलों के वैज्ञानिक प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट निपटान तथा स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों पर मंथन होगा। स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत निर्माणाधीन एवं स्वीकृत आवासों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी तथा लाभार्थियों को समय पर आवास उपलब्ध कराने में आ रही समस्याओं के समाधान पर विचार किया जाएगा। अंगीकार अभियान की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों एवं चुनौतियों की समीक्षा करते हुए अभियान को अधिक प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। सत्र में शहरी परिवहन व्यवस्था के अंतर्गत नगर बस सेवाओं, भूमिगत रेल प्रणाली तथा पैदल मार्गों से संबंधित आवागमन व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। यातायात को सुगम, सुरक्षित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिये आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। क्षेत्रीय बैठक से राज्य-वार एवं योजना-वार क्रियान्वयन चुनौतियों की पहचान, कार्यक्रमों को सशक्त बनाने के लिये व्यावहारिक अनुशंसाएँ, केंद्र एवं राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा शहरी प्रशासन एवं सेवा प्रदायगी में सुधार के लिए ठोस रणनीतिक सुझाव प्राप्त होगे।