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सड़क और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए नई पहल: MP हाइवे पर लाल सड़कें और सफेद शोल्डर लाइनें

 जबलपुर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सड़क सुरक्षा और जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पूर्व में नौरादेही अभयारण्य) से गुजरने वाले नेशनल हाइवे पर भारत की पहली 'टेबल-टॉप रेड मार्किंग' की गई है. दुबई के फेमस शेख जायद रोड की तर्ज पर NHAI ने हाईवे के 2 किलोमीटर लंबे घाट पर सड़क की सतह को चमकीले लाल रंग में बदल दिया है. खतरे वाले क्षेत्र में सड़क के ऊपर 5 मिमी मोटी, गर्म करके लगाई गई थर्मोप्लास्टिक की लाल सतह की परत बिछाई गई है. चमकीला लाल रंग वाहन चलाने वालों को तुरंत सचेत करता है कि वे गति-प्रतिबंधित और वन्यजीव-संवेदनशील गलियारे में प्रवेश कर रहे हैं. इसकी हल्की उभरी हुई सतह से वाहन चालक को स्पर्श और ध्वनि का संकेत मिलता है, जिससे वह बिना झटके या अचानक ब्रेक लगाए स्वाभाविक रूप से गति कम कर लेता है. वन्यजीवों और इंसानों के लिए 'सुरक्षा कवच'     यह पहल पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है.     पारंपरिक रंबल स्ट्रिप के मुकाबले यह कम शोर करती है, जिससे जंगल के जानवरों को कम परेशानी होती है.     1.96 किलोमीटर के हिस्से में 25 समर्पित अंडरपास बनाए गए हैं ताकि जानवर सुरक्षित रूप से सड़क के नीचे से गुजर सकें.     हाइवे के दोनों ओर ऊंची बाड़ लगाई गई है ताकि जानवर सीधे सड़क पर न आएं और अंडरपास का उपयोग करें.     पुलों पर लगे कैमरे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं. NHAI की यह परियोजना यह साबित करती है कि आधुनिक इंजीनियरिंग के माध्यम से मानव जीवन और वन्यजीवों को एक साथ सुरक्षित रखा जा सकता है. यहां 'लाल सड़कें' खतरे का नहीं, बल्कि सुरक्षा और हरित इरादे का प्रतीक हैं. NHAI ने एक ऐसा समाधान पेश किया है जो हादसों को कम करके मानव जीवन बचाता है, वन्यजीवों को वाहनों की टक्कर से बचाता है, वन के इको-सिस्‍टम की अखंडता को संरक्षित करता है और सड़क से गुजरने वालों लिए सुगम, आरामदायक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करता है.  

स्कूल से दूर देश की 45.4% लड़कियां: देखें राज्यों के अनुसार आंकड़े

नई दिल्ली संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लड़कियों की शिक्षा को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में अब भी 45.4 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जा रही हैं। यह स्थिति बताती है कि तमाम योजनाओं के बावजूद बालिका शिक्षा अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। महाराष्ट्र में हालात सबसे खराब राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो महाराष्ट्र की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां 66 फीसदी लड़कियां स्कूल से बाहर हैं। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश (54.8%), मिजोरम (53.8%), जम्मू-कश्मीर (53.7%) और ओडिशा (49.5%) में भी बड़ी संख्या में लड़कियां शिक्षा से वंचित हैं। केरल सहित कुछ राज्यों का बेहतर प्रदर्शन वहीं दूसरी ओर, केरल लड़कियों की शिक्षा के मामले में अन्य राज्यों से आगे नजर आता है। यहां केवल 33.2 फीसदी लड़कियां स्कूल नहीं जातीं। मध्य प्रदेश (37.8%) भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। हालांकि बिहार (45.7%), राजस्थान (46.2%) और उत्तर प्रदेश (47.2%) अब भी राष्ट्रीय औसत के आसपास या उससे ऊपर हैं। राज्यवार स्कूल न जाने वाली लड़कियों का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत – 45.4% महाराष्ट्र – 66% हिमाचल प्रदेश – 54.8% मिजोरम – 53.8% जम्मू-कश्मीर – 53.7% ओडिशा – 49.5% उत्तर प्रदेश – 47.2% राजस्थान – 46.2% बिहार – 45.7% मध्य प्रदेश – 37.8% केरल – 33.2% प्री-स्कूल से 12वीं तक के आंकड़े यह डेटा प्री-स्कूल से लेकर कक्षा 12वीं तक का है और पिछले पांच वित्तीय वर्षों (FY 2022 से FY 2026) पर आधारित है। इसमें 2025 और 2026 के आंकड़े अस्थायी हैं, जिनमें आगे बदलाव संभव है। ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि लड़कियों की शिक्षा को लेकर अभी और गंभीर प्रयासों की जरूरत है, ताकि भविष्य में यह अंतर कम किया जा सके।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रदेश में पशुधन विकास की अपार संभावनाएं मौजूद

हिरण्यगर्भा अभियान से नस्ल सुधार और टीकाकरण में मध्यप्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में पशुधन विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इन संभावनाओं को एक्सप्लोर करने के लिए पशुओं का नस्ल सुधार एक सशक्त माध्यम है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा व्यापक स्तर पर हिरण्यगर्भा अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश में अगले पांच सालों में कृत्रिम गर्भाधान (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) का कवरेज 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत चालू वित्त वर्ष में कुल मादा पशुओं में से 28.04 लाख (लगभग 33 प्रतिशत) गौवंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अप्रैल से नवम्बर 2025 के बीच प्रदेश में 11.76 लाख से अधिक पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान कराकर उल्लेखनीय प्रगति हासिल की गई है। मध्यप्रदेश में पशुपालन को लाभ का व्यवसाय बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में हिरण्यगर्भा अभियान एक प्रभावशाली पहल बनकर उभरा है। हाल ही में हुई 20वीं पशु संगणना के अनुसार प्रदेश में कुल 290.57 लाख से अधिक गौवंशीय एवं भैंस वंशीय पशु उपलब्ध हैं। इनमें से 77.18 लाख पशु (लगभग 27 प्रतिशत) उन्नत नस्ल के हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पशुधन विकास की केन्द्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका में है। नेशनल एनिमल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनएडीसीपी) के अंतर्गत फुट-एंड-माउथ-डिजीज (एफएमडी) टीकाकरण चलाया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में हुए चौथे और पाचवें चरण में मध्यप्रदेश ने देश में सर्वाधिक पशुओं का टीकाकरण कर इसे ऑनलाइन दर्ज किया। वर्तमान में प्रदेश में इसका छठवां चरण संचालित है, जिसमें अब तक 154.16 लाख पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके अलावा राष्ट्रीय पशुधन मिशन – उद्यमिता विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन में भी मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान पाकर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि पशु नस्ल सुधार के लिए चलाए जा रहे हिरण्यगर्भा अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके अंतर्गत प्रदेश की 691 चयनित गौशालाओं में उपलब्ध प्रजनन योग्य गौवंश में भी कृत्रिम गर्भाधान किया जा रहा है। इससे गौवंश की नस्ल/गुणवत्ता में तो सुधार होगा ही, गौशालाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। संचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने बताया कि पशुपालकों के द्वार पर कृत्रिम गर्भाधान की घर पहुंच सेवा उपलब्ध कराने और ग्रामीण शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार देने की मंशा से वर्ष 2014-15 से हर पंचायत में बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता (मैत्री) तैयार किए जा रहे हैं। वर्तमान वित्त वर्ष में 2399 मैत्री कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। साथ ही, ऐसे मैत्री जो किसी कारणवश निष्क्रिय हो गए थे, उन्हें भी पुनः सक्रिय करने के लिए रि-फ्रेशर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक ऐसे 1227 मैत्री कार्यकर्त्ता प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। इस वित्त वर्ष में अब तक 1.28 लाख से अधिक पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि हिरण्यगर्भा अभियान और केन्द्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश पशुधन विकास एवं नस्ल सुधार के क्षेत्र में आदर्श राज्य(इमर्जिंग स्टेट) के रूप में ख्याति प्राप्त कर रहा है। इससे पशुपालकों की दैनिक आय बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई मजबूती मिल रही है। पशुपालकों के जीवन में समृद्धि लाने के लिए विभाग द्वारा कई नवाचार भी किए जा रहे हैं।  

वीरता और राष्ट्रबोध की नई पहचान है ‘परमवीर दीर्घा’ : प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में ‘परमवीर दीर्घा’ का उद्घाटन किया। इस दीर्घा में परमवीर चक्र से सम्मानित सभी 21 वीरों के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खास प्रतिक्रिया दी। पीएम मोदी ने कहा कि परमवीर दीर्घा में देश के अदम्य वीरों के ये चित्र हमारे राष्ट्र रक्षकों को भावभीनी श्रद्धांजलि हैं। एक लंबे कालखंड तक, राष्ट्रपति भवन की गैलरी में ब्रिटिश काल के सैनिकों के चित्र लगे थे। अब उनके स्थान पर, देश के परमवीर विजेताओं के चित्र लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में परमवीर दीर्घा का निर्माण गुलामी की मानसिकता से निकलकर भारत को नवचेतना से जोड़ने के अभियान का एक उत्तम उदाहरण है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 'परमवीर दीर्घा' के उद्घाटन की फोटो शेयर करते हुए लिखा, ''हे भारत के परमवीर, है नमन तुम्हें हे प्रखर वीर। ये राष्ट्र कृतज्ञ बलिदानों पर, भारत मां के सम्मानों पर। राष्ट्रपति भवन की परमवीर दीर्घा में देश के अदम्य वीरों के ये चित्र हमारे राष्ट्र रक्षकों को भावभीनी श्रद्धांजलि हैं। जिन वीरों ने अपने सर्वोच्च बलिदान से मातृभूमि की रक्षा की, जिन्होंने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन दिया, उनके प्रति देश ने एक और रूप में अपनी कृतज्ञता अर्पित की है। देश के परमवीरों की इस दीर्घा को, दो परमवीर चक्र विजेताओं और अन्य विजेताओं के परिवारजनों की गरिमामयी उपस्थिति में राष्ट्र को अर्पित किया जाना और भी विशेष है।'' एक अन्य पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, ''एक लंबे कालखंड तक, राष्ट्रपति भवन की गैलरी में ब्रिटिश काल के सैनिकों के चित्र लगे थे। अब उनके स्थान पर, देश के परमवीर विजेताओं के चित्र लगाए गए हैं। राष्ट्रपति भवन में परमवीर दीर्घा का निर्माण गुलामी की मानसिकता से निकलकर भारत को नवचेतना से जोड़ने के अभियान का एक उत्तम उदाहरण है। कुछ साल पहले सरकार ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में कई द्वीपों के नाम भी परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे हैं।'' आखिरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ''ये चित्र और ये दीर्घा हमारी युवा पीढ़ी के लिए भारत की शौर्य परंपरा से जुड़ने का एक प्रखर स्थल है। ये दीर्घा युवाओं को ये प्रेरणा देगी कि राष्ट्र उद्देश्य के लिए आत्मबल और संकल्प महत्वपूर्ण होते हैं। मुझे आशा है कि ये स्थान विकसित भारत की भावना का एक प्रखर तीर्थ बनेगा।'' राष्ट्रपति भवन में एक विशेष दीर्घा बनाई गई है। इस दीर्घा की विशेषता यह है कि यह स्थान देश के वीर सपूतों को समर्पित है। इस दीर्घा का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया। यहां पर परमवीर चक्र विजेताओं के चित्रों को सम्मान के साथ प्रदर्शित किया गया है। इस पहल का उद्देश्य परमवीर चक्र विजेता, राष्ट्रीय नायकों के अदम्य साहस और बलिदान से देशवासियों को अवगत कराना है।

इथियोपिया में अफ्रीकी चैप्टर क्लोज, अब अरब दुनिया में भारत की सियासी पकड़ मजबूत करेंगे PM मोदी

अफ्रीका अफ्रीका में कूटनीतिक इतिहास रचने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अरब जगत में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की अपनी चार दिवसीय यात्रा के अंतिम चरण में बुधवार को इथियोपिया से ओमान के लिए रवाना हो गए। यह यात्रा भारत की अफ्रीका और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक सक्रियता का अहम संकेत मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की यह इथियोपिया की पहली आधिकारिक यात्रा थी, जो ऐतिहासिक साबित हुई। इस दौरान भारत और इथियोपिया ने अपने पारंपरिक और ऐतिहासिक संबंधों को औपचारिक रूप से ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री मोदी और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में कई अहम समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया, जहां उन्होंने आतंकवाद, वैश्विक शांति और विकास पर भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। इसी दौरान उन्हें इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विदेशी नेता बने। अब प्रधानमंत्री मोदी ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के निमंत्रण पर मस्कट पहुंचेंगे।   ओमान में वे रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी वहां प्रवासी भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। यह प्रधानमंत्री मोदी की ओमान की दूसरी यात्रा होगी।  

कैंसर का बढ़ता खतरा: देश में 15 लाख से ज्यादा मरीज, यूपी बना हॉटस्पॉट, दिल्ली में AAI रेट हाई

नई दिल्ली  भारत में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी तेजी से फैलती जा रही है और इसके फैलने की दर भी लगातार बढ़ ही रही है. देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कैंसर से पीड़ित मरीज हैं. एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि पिछले 5 सालों में कैंसर मरीजों की संख्या में 2 लाख का इजाफा हुआ है और यह अब 15 लाख से अधिक हो गई है. राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद इंदु बाला गोस्वामी ने स्वास्थ्य मंत्रालय से देश में पिछले 5 सालों में कैंसर मरीजों की संख्या और देशभर के सभी जिलों में डे केयर कैंसर सेंटर (DCCC) खोलने की योजना को लेकर सवाल पूछा, इस पर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)- नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) के अनुसार, पिछले 5 सालों में देश में सभी प्रकार के कैंसर के मामलों की अनुमानित घटना 15 लाख से अधिक हो गई है. साल 2024 में कैंसर केस 15 लाख के पार सरकार की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार, पिछले 5 सालों में कैंसर मरीजों की संख्या लगातार बढी है. साल 2020 में देश में 13,92,179 कैंसर मरीज थे. 2021 में यह संख्या बढ़कर 14,26,447 हो गई. साल 2022 में कैंसर मरीजों की संख्या 14,61,427 तक पहुंच गई. 2023 में कैंसर मरीजों की 15 लाख के करीब हो गई और यह संख्या 14,96,972 थी. साल 2024 में कैंसर मरीजों की संख्या 15 लाख (15,33,055) पार कर गई. साल दर साल बढ़ रहा कैंसर साल 2020     1392179 साल 2021     1426447 साल 2022     1461427 साल 2023     1496972 साल 2024     1533055 संसद को दिए जवाब के अनुसार, कैंसर पीड़ितों की सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में है. यहां पर 2024 में कैंसर पीड़ितों की अनुमानित संख्या 2 लाख (2,21,000) से अधिक है. महाराष्ट्र में 1,27,512, पश्चिम बंगाल में 1,18,910 और बिहार में 1,15,123 कैंसर मरीज हैं. उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक DCCC एक अन्य सवाल के जवाब में केंद्र ने बताया कि बजट 2025-26 की घोषणा के अनुसार, सरकार अगले 3 सालों में जिला अस्पतालों में डे केयर कैंसर सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों की सलाह से डे केयर कैंसर सेंटर की स्थापना के लिए एक नेशनल गैप का अध्ययन किया है. इस मामले में सबसे अधिक पीड़ितों का सामना करने वाले जिलों को प्राथमिकता दी गई है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से अपने-अपने प्रस्ताव दिए जाने और संसाधनों को अनुकूलित करने तथा दोहराव से बचने के लिए नेशनल प्रोग्राम कोआर्डिनेशन कमिटी (NPCC) द्वारा अंतिम रूप दिया गया. जवाब के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, पूरे देश में 297 DCCC स्थापित करने की मंजूरी दी गई है, जिसमें हिमाचल प्रदेश में अकेले 18 DCCC शामिल हैं. उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 68 केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी गई है. तेलंगाना ने 27 और बिहार में 21 केंद्र स्थापित किए जाने हैं. मुंबई-कोलकाता से अधिक दिल्ली में केस दूसरी ओर, केंद्र ने संसद को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कैंसर के सबसे ज्यादा केस सामने आ रहे हैं. यहां उम्र के हिसाब से एडजस्टेड इंसिडेंस रेट (Age-Adjusted Incidence Rate, AAIR) पुरुषों के लिए 1 लाख पर 146.7 और महिलाओं के लिए 132.5 है, जो मुंबई, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों से कहीं अधिक है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्यसभा में दिल्ली और पंजाब में कैंसर के मामलों पर एक तारांकित सवाल के जवाब में बताया कि ये आंकड़े इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के तहत जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों पर आधारित हैं और तुलना के लिए वर्ल्ड स्टैंडर्ड पॉपुलेशन के हिसाब से एडजस्ट किए गए हैं.   दिल्ली के अलावा अन्य मेट्रो शहरों में, हैदराबाद में पुरुषों के लिए AAIR 114.7 और महिलाओं के लिए 153.8 रहा, इसी तरह बेंगलुरु में पुरुषों के लिए 127.7 और महिलाओं के लिए 151.3 दर्ज किया गया है. जबकि मुंबई में यह दर कहीं कम थी, यहां पुरुषों के लिए 108.9 और महिलाओं के लिए 114.2, और कोलकाता में यह दर क्रमशः 105.5 और 98.6 दर्ज की गई. पंजाब के पटियाला में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, AAIR पुरुषों के लिए 69.6 और महिलाओं के लिए 80.7 था, जो दिल्ली से बहुत कम है. ब्रेस्ट कैंसर से जूझते दिल्ली और पंजाब आंकड़ों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के सबसे ज़्यादा केस सामने आए, जो 2023 में 3,198 से बढ़कर 2025 में 3,321 हो गए. वहीं सर्वाइकल कैंसर के मामलों में थोड़ी कमी आई, 741 से घटकर यह संख्या 692 हो गई, जबकि फेफड़ों और मुंह के कैंसर के मामले धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं. पंजाब में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले सबसे आम रहे, यहां अब 3,342 से बढ़कर 3,388 केस हो गए. यहां पर पुरुषों में मुंह और प्रोस्टेट कैंसर के केस ज्यादा थे, और 2025 तक प्रोस्टेट कैंसर के मामले अनुमानित 1,170 से ज़्यादा हो जाएंगे.  

जनजीवन, यातायात और निराश्रितों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी लापरवाही: सीएम

कोहरे और ठंड को लेकर सीएम योगी का सख्त निर्देश, बोले-फील्ड में अलर्ट रहें अफसर मंडलायुक्त, आईजी, डीएम, पुलिस, ट्रैफिक बल, नगर निकाय को बेहतर प्रबंधन की जिम्मेदारी सड़कों, गलियों, हाईवे से लेकर एक्सप्रेस-वे तक सुरक्षा इंतजाम रहें चाक-चौबंद जनजीवन, यातायात और निराश्रितों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी लापरवाही: सीएम टोल प्लाजा पर लाउडस्पीकर से दी जाएगी चेतावनी और ओवरस्पीडिंग पर होगी सख्त कार्रवाई लखनऊ  घने कोहरे और कड़ाके की ठंड को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को प्रदेशभर में अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मंडलायुक्त, आईजी, जिलाधिकारी, पुलिस, ट्रैफिक और नगर निकायों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जनजीवन, यातायात और निराश्रितों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि सड़कों, गलियों, हाईवे से लेकर एक्सप्रेस-वे तक सुरक्षा इंतजाम चाक-चौबंद रखे जाएं। इसके साथ ही, एक्सप्रेस-वे पर पेट्रोलिंग बढ़ाने, ब्लैक स्पॉट पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने, टीमें तैनात करने, क्रेन और एम्बुलेंस को 24×7 उपलब्ध रखने तथा टोल प्लाजा पर लाउडस्पीकर से चालकों को कोहरे की चेतावनी देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने खराब विजिबिलिटी में यातायात प्रबंधन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और ओवरस्पीडिंग पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कोहरे के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क प्रकाश व्यवस्था, रिफ्लेक्टर, पेट्रोलिंग और आपात सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। डार्क स्पॉट चिन्हित कर वहां तत्काल बेहतर इंतजाम के निर्देश दिए गए हैं। एनएचएआई और स्टेट हाईवे अधिकारियों के साथ समन्वय कर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा गया है। कोई भी व्यक्ति खुले में सोता न मिले : सीएम ठंड और शीतलहर के मद्देनजर मुख्यमंत्री योगी ने यह भी निर्देश दिए कि कोई भी व्यक्ति खुले में सोता न मिले। निराश्रितों को रैन बसेरों तक पहुंचाया जाए, जहां हीटर, अलाव और कंबल की समुचित व्यवस्था हो। गोशालाओं में भी गोवंश को ठंड से बचाने के लिए अलाव और अन्य जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।   प्रशासन ने जारी की धुंध और कोहरे के दौरान सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए 'ट्रैवल गाइडलाइन' – धुंध के दौरान वाहन की गति निर्धारित सीमा से कम रखें। – वाहन की फॉग लाइट का प्रयोग करें और लो-बीम पर हेडलाइट रखें।  – इमरजेंसी इंडिकेटर्स को चालू रखें  – आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखें  – एक्सप्रेस-वे पर बार-बार लेन बदलने से बचें – ओवरटेकिंग बिल्कुल न करें – यदि कोहरा बहुत घना हो, तो रिस्क न लें – अपने वाहनों के पीछे रिफ्लेक्टर टेप जरूर लगवाएं

रेलवे बोर्ड का नया बदलाव: रिजर्वेशन चार्ट से पहले वेटिंग और RAC की जानकारी मिलेगी

नई दिल्ली  रेलवे यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। अब ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट पहले से ज्यादा जल्दी तैयार किया जाएगा। यानी कन्फर्म और वेटिंग टिकट को लेकर जो आखिरी वक्त तक असमंजस बना रहता था, वह अब काफी हद तक खत्म हो जाएगा। रेलवे बोर्ड ने 16 दिसंबर को इस संबंध में नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत अब ट्रेनों का पहला रिजर्वेशन चार्ट करीब 10 घंटे पहले तैयार किया जाएगा। यह बदलाव खास तौर पर उन यात्रियों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, जो वेटिंग लिस्ट में रहते हुए आखिरी समय तक टिकट कन्फर्म होने का इंतजार करते हैं। रेलवे ने रिजर्वेशन चार्ट का समय क्यों बदला? अक्सर देखा गया है कि ट्रेन छूटने से कुछ घंटे पहले तक यात्रियों को यह साफ नहीं हो पाता कि उनका टिकट कन्फर्म होगा या नहीं। इसी परेशानी को देखते हुए रेलवे ने पहले इस साल जून में 8 घंटे पहले चार्ट बनाने की व्यवस्था शुरू की थी। अब यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए इस समय को बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया है। रेलवे का मानना है कि चार्ट पहले बनने से यात्रियों को समय रहते दूसरा विकल्प चुनने का मौका मिलेगा। किस समय चलने वाली ट्रेनों का चार्ट कब बनेगा? रेलवे बोर्ड के नए आदेश के अनुसार ट्रेनों के समय के हिसाब से चार्ट बनाने का नियम तय किया गया है:-     सुबह 5:01 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक रवाना होने वाली ट्रेनों का पहला रिजर्वेशन चार्ट एक दिन पहले रात 8 बजे तक तैयार कर लिया जाएगा।     दोपहर 2:01 बजे से रात 11:59 बजे तक चलने वाली ट्रेनों के लिए पहला चार्ट कम से कम 10 घंटे पहले तैयार होगा।     रात 12:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक रवाना होने वाली ट्रेनों का चार्ट भी 10 घंटे पहले तैयार किया जाएगा। वेटिंग टिकट वालों के लिए यह फैसला कितना राहत भरा है? अब वेटिंग टिकट वालों को आखिरी पल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पहले कई यात्री स्टेशन पहुंचने के बाद ही यह जान पाते थे कि टिकट कन्फर्म हुआ या नहीं। नए नियम से यात्रियों को पहले ही स्थिति साफ हो जाएगी, जिससे वे अपनी यात्रा की योजना बदल सकते हैं या रिफंड ले सकते हैं। पहली बार रिजर्वेशन चार्ट तैयार करने के समय में बदलाव रेलवे ने यात्रियों को उनकी यात्रा और रिजर्वेशन की स्थिति के बारे में पहले से जानकारी देने और खासकर दूर-दराज से आने वाले यात्रियों की चिंता कम करने के लिए पहली बार रिजर्वेशन चार्ट तैयार करने के समय में बदलाव किया है. इंडिया टुडे से बात करते हुए रेल मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा, 'यात्रियों की सुविधा के लिए चार्ट पहले तैयार किया जाएगा ताकि वे अपनी यात्रा की योजना आसानी से बना सकें.' इस संबंध में सभी जोनल रेलवे डिवीजनों को जरूरी निर्देश जारी कर दिए गए हैं. अब तक 4 घंटे पहले तैयार होता था चार्ट अब तक रेलवे में रिजर्वेशन चार्ट तैयार करने का नियम यह था कि ट्रेन के प्रस्थान से करीब 4 घंटे पहले पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार किया जाता था. इसका मतलब यह होता था कि वेटिंग लिस्ट या आरएसी में चल रहे यात्रियों को कन्फर्म सीट मिली है या नहीं, इसकी जानकारी बहुत आखिरी समय में मिलती थी. यात्रियों को होती थी असुविधा इस पुराने सिस्टम की वजह से खासकर दूर-दराज से स्टेशन आने वाले यात्रियों को काफी परेशानी होती थी. कई बार यात्री चार्ट बनने से पहले ही स्टेशन पहुंच जाते थे और बाद में पता चलता था कि उनका टिकट कन्फर्म नहीं हुआ है. इससे न सिर्फ समय और पैसे की बर्बादी होती थी, बल्कि यात्रा को लेकर असमंजस और तनाव भी बढ़ जाता था. रेलवे को लंबे समय से यात्रियों की ओर से शिकायतें मिल रही थीं कि चार्ट देर से बनने के कारण यात्रा की सही योजना नहीं बन पाती, इसी वजह से अब चार्ट प्रिपरेशन के समय में बदलाव किया गया है. क्या कन्फर्म टिकट वालों को भी फायदा मिलेगा? बिल्कुल। कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को भी सीट और कोच की जानकारी पहले मिल जाएगी। इससे वे समय पर स्टेशन पहुंचने, सामान पैक करने और यात्रा की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे। यात्रियों को अब क्या सावधानी रखनी चाहिए? रेलवे यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे ट्रेन यात्रा से पहले चार्ट स्टेटस जरूर चेक करें। IRCTC ऐप या वेबसाइट के जरिए कन्फर्म और वेटिंग स्थिति आसानी से देखी जा सकती है। इससे आखिरी समय की परेशानी से बचा जा सकेगा। रेलवे का यह फैसला क्या संकेत देता है? रेलवे का यह कदम साफ दिखाता है कि वह यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दे रहा है। चार्ट जल्दी बनने से न सिर्फ भ्रम कम होगा, बल्कि यात्रा भी ज्यादा सुविधाजनक बनेगी।

वेनेजुएला अमेरिका से मुकाबले में कमजोर, फिर भी रूस-चीन और ईरान से हथियार खरीद रहा

कैरेकस वेनेजुएला की सेना मुख्य रूप से रूस, चीन और ईरान से हथियार खरीदती है. अमेरिका ने 2006 से ही वेनेजुएला पर हथियारों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है, क्योंकि उसे आतंकवाद विरोधी प्रयासों में सहयोग न करने का आरोप लगाया गया. इसलिए, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार इन तीन देशों पर निर्भर है. अमेरिकी नौसेना की कैरिबियन में तैनाती से पैदा हुए हालिया तनाव के बीच वेनेजुएला ने इन देशों से और मदद मांगी है. मुख्य हथियार सप्लायर और हालिया डील्स रूस (सबसे बड़ा सप्लायर): पिछले 20 सालों में अरबों डॉलर के हथियार दिए, जैसे Su-30MK2 फाइटर जेट (करीब 24), T-72 टैंक, S-300VM एयर डिफेंस सिस्टम, Buk-M2E और Pantsir-S1 मिसाइल सिस्टम, Igla-S शोल्डर-फायर्ड मिसाइलें (करीब 5,000), AK-103 असॉल्ट राइफलें (स्थानीय उत्पादन भी) और Dragunov स्नाइपर राइफलें. 2025 में: मादुरो ने रूस से Su-30 जेट की मरम्मत, रडार और मिसाइलें मांगीं. रूसी सांसद ने Oreshnik बैलिस्टिक और Kalibr क्रूज मिसाइलें देने की बात कही (अभी कन्फर्म नहीं). अक्टूबर 2025 में रूसी Il-76 कार्गो प्लेन काराकास पहुंचा. कहा जा रहा था कि उसमें संभवतः हथियार थे.      चीन: बख्तरबंद वाहन (VN-4), K-8 ट्रेनर जेट, C-802 एंटी-शिप मिसाइलें, रडार सिस्टम.     2025 में: मादुरो ने चीन से रडार उत्पादन तेज करने और सैन्य सहयोग बढ़ाने की अपील की. चीन वेनेजुएला का बड़ा आर्थिक पार्टनर है, तेल के बदले लोन देता है.     ईरान: ड्रोन टेक्नोलॉजी (शाहेद जैसे मिसाइल-कैरिंग ड्रोन), CM-90 एंटी-शिप मिसाइलें, GPS जैमर, पैसिव डिटेक्शन सिस्टम.     2025 में: ईरान से ड्रोन और मिलिट्री इक्विपमेंट की डिलीवरी हुई. परिवहन मंत्री ने 1000 किमी रेंज वाले ड्रोन मांगे. SIPRI के आंकड़ों से 2023 में वेनेजुएला ने करीब 98 मिलियन डॉलर के हथियार आयात किए, लेकिन आर्थिक संकट और प्रतिबंधों से खरीद कम हुई है. पहले पुराने अमेरिकी F-16 जेट थे, लेकिन अब मेंटेनेंस मुश्किल हो गई है.  तेल टैंकरों के आने-जाने पर पूरी तरह नाकेबंदी का आदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  वेनेजुएला में आने और जाने वाले सभी प्रतिबंधित किए गए तेल टैंकरों की पूरी तरह से नाकेबंदी का आदेश दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इसकी घोषणा की है। उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार पर चोरी की तेल संपत्ति का इस्तेमाल अपराध, आतंकवाद और मानव तस्करी को बढ़ावा देने में कर रही है। वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी सैन्य घेरा ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि 'वेनेजुएला पूरी तरह से दक्षिण अमेरिका के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े नौसैनिक बेड़े से घिरा हुआ है।' इसके साथ चेतावनी दी कि काराकस अमेरिका का तेल, जमीन और दूसरी संपत्ति वापस नहीं करता, तब तक यह घेराबंदी और बढ़ेगी। उन्होंने लिखा, 'यह और भी बड़ा होगा और उन्हें ऐसा झटका लगेगा जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा, जब तक वे अमेरिका से चुराए गए सभी तेल, जमीन और दूसरी संपत्ति वापस नहीं कर देते।' वेनेजुएला पर आतंकवाद को फाइनेंस करने का आरोप अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मादुरो सरकार को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है, जिसमें ड्रग तस्करी, अपहरण, मानव तस्करी और हिंसा के आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि वेनेजुएला के खेतों से तेल चुराकर इसका इस्तेमाल आतंकवाद को फाइनेंस करने के लिए किया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका अब इस सिस्टमैटिक चोरी और आपराधिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा। अमेरिका से मुकाबला: क्या संभव है? वेनेजुएला अमेरिका का सीधा मुकाबला नहीं कर सकता. ग्लोबल फायरपावर 2025 रैंकिंग में अमेरिका नंबर 1 है, वेनेजुएला 50वें स्थान पर. मुख्य अंतर…     सैनिक संख्या: अमेरिका – 13 लाख एक्टिव + 8 लाख रिजर्व. वेनेजुएला – करीब 1.09-1.23 लाख एक्टिव + 8,000 रिजर्व + मिलिशिया (दावा 45 लाख, लेकिन असल कम और कमजोर ट्रेनिंग).     हवाई ताकत: अमेरिका – 13,000+ कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (F-22, F-35 जैसे स्टेल्थ). वेनेजुएला – सिर्फ 229 (ज्यादातर पुराने रूसी Su-30, कई ऑपरेशनल नहीं).     नौसेना: अमेरिका – 440 जहाज (एयरक्राफ्ट कैरियर, न्यूक्लियर सबमरीन). वेनेजुएला – 34 जहाज.     बजट: अमेरिका – 895 बिलियन डॉलर. वेनेजुएला – करीब 2-4 बिलियन डॉलर.     टेक्नोलॉजी और अनुभव: अमेरिका की सेना आधुनिक, ग्लोबल ऑपरेशन का  अनुभव. वेनेजुएला की सेना पुरानी, मेंटेनेंस की कमी, मुख्य काम प्रदर्शन कंट्रोल. क्या और भी देश कूदेंगे जंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बढ़ा रहे हैं. वे ड्रग तस्करी और तेल निर्यात रोकने के नाम पर कैरिबियन सागर में बड़ा सैन्य जमावड़ा कर चुके हैं. नौसेना के जहाज तैनात किए हैं. संभव सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं. इस बीच, वेनेजुएला रूस और चीन से हथियार खरीद रहा है या मदद मांग रहा है. रूस ने पहले सुखोई जेट, S-300 मिसाइल सिस्टम और टैंक दिए हैं, जबकि हालिया तनाव में मादुरो ने रूस से मिसाइलें, रडार और जेट की मरम्मत मांगी है. चीन रडार और आर्थिक मदद दे रहा है. हालांकि रूस और चीन वेनेजुएला के करीबी सहयोगी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि वे सीधे जंग में नहीं कूदेंगे. रूस पहले ही यूक्रेन युद्ध में उलझा है. चीन अपनी घरेलू प्राथमिकताओं को जोखिम में नहीं डालेगा. ईरान ने भी ड्रोन और मिसाइलें दी हैं, लेकिन बड़ा हस्तक्षेप मुश्किल. अन्य देश जैसे क्यूबा या निकारागुआ समर्थन दे सकते हैं, लेकिन सीमित. कुल मिलाकर, अगर अमेरिका हमला करता है तो वेनेजुएला अकेला पड़ सकता है. यह संघर्ष क्षेत्रीय स्तर पर ही रहेगा. आसमान से समंदर तक अमेरिकी घेरेबंदी में है वेनेजुएला पेंटागन ने वेनेजुएला को डराने और दबाव बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कैरेबियन सागर में दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford तैनात किया गया है। अक्टूबर में दो घातक B-1 लांसर बॉम्बर्स ने वेनेजुएला के तट के पास उड़ान भरी थी, जिसे एक सीधे सैन्य संदेश के रूप में देखा जा रहा है। व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी विल्स ने एक इंटरव्यू में बेहद चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की नीति 'तब तक घेरेबंदी की है जब तक मादुरो घुटने न टेक दें'।

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बड़ी शुरुआत, राजधानी में एक साथ जुटेंगी हर जिले की उद्यमी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन : इंटरनेशनल एक्सपर्ट ग्रामीण महिलाओं को बनाएंगे बिजनेस वूमन महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बड़ी शुरुआत, राजधानी में एक साथ जुटेंगी हर जिले की उद्यमी अब ग्रामीण महिलाएं सीखेंगी बिजनेस स्किल, टेक्नोलॉजी और मार्केट के बीच तालमेल जीविकोपार्जन-केंद्रित प्रौद्योगिकियों से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और आधुनिक उद्यमी बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया जा रहा है। महिला नेतृत्व वाली उद्यमिता को मजबूती देने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में प्रदेश के हर जिले से महिला उद्यमी एक मंच पर जुटेंगी और देश-विदेश के विशेषज्ञों से सीखेंगी। महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए 18 दिसंबर को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में राज्य-स्तरीय आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रदेश के हर जिले से महिला उद्यमी भाग लेंगी। कार्यक्रम में बाजार-तैयार तकनीकों, संस्थागत सहयोग और फाइनेंस तक आसान पहुंच पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। योगी सरकार के इस प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आत्मविश्वास के साथ उद्यमिता की दुनिया में कदम रखेंगी और गांव की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। यह पहल प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास की एक मजबूत मिसाल बनने जा रही है। योगी सरकार के विजन के अनुरूप ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़ाकर आधुनिक बिजनेस मॉडल से जोड़ने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। महिलाओं को तकनीक, बाजार और फाइनेंस के बीच तालमेल बैठाने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे अपने उत्पादों को स्थानीय सीमाओं से निकालकर बड़े बाजार तक पहुंचा सकें। ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश की महिला उद्यमी अब राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रही हैं। आने वाले समय में ग्रामीण महिलाएं केवल कामगार नहीं, बल्कि सफल बिजनेस वूमन के रूप में उभरेंगी। जीविकोपार्जन-केंद्रित प्रौद्योगिकियों पर फोकस योगी सरकार ऐसी तकनीकों और नवाचारों को प्राथमिकता दे रही है, जो सीधे महिलाओं की आय बढ़ाने और स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने में सहायक हों। सरकार, तकनीकी संस्थानों, वित्तीय एजेंसियों और समुदाय-आधारित संगठनों के समन्वय से महिला उद्यमियों के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।