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वंदे भारत ट्रेनों में परोसा जाएगा स्थानीय भोजन, रेलवे ने फर्जी टिकट बुकिंग रोकने के लिए सख्त नियम और ओटीपी प्रणाली लागू की

भोपाल   भारतीय रेलवे यात्रियों को बेहतर और यादगार सफर देने के लिए लगातार नई पहल कर रहा है. इसी कड़ी में अब वंदे भारत ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों को उस क्षेत्र का स्थानीय भोजन चखने का मौका मिलेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में अधिकारियों के साथ हुई एक समीक्षा बैठक में इस योजना की जानकारी दी. उनका कहना है कि इससे यात्रियों को न केवल आरामदायक यात्रा मिलेगी, बल्कि वे उस इलाके की संस्कृति और खानपान से भी जुड़ सकेंगे. वंदे भारत ट्रेनों में मिलेगा लोकल फूड रेल मंत्री ने बताया कि वंदे भारत ट्रेनों में स्थानीय भोजन की सुविधा शुरू की जाएगी. उदाहरण के तौर पर, यदि ट्रेन दक्षिण भारत से गुजर रही है तो यात्रियों को वहां के पारंपरिक व्यंजन मिलेंगे, वहीं उत्तर भारत के रूट पर स्थानीय स्वाद परोसा जाएगा. यह योजना पहले वंदे भारत ट्रेनों में लागू होगी और इसके सफल रहने पर इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा. फर्जी टिकट बुकिंग पर रेलवे की सख्ती रेलवे ने टिकट बुकिंग प्रणाली को पारदर्शी और आम यात्रियों के लिए आसान बनाने के लिए फर्जी टिकट बुकिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं. रेल मंत्री ने बताया कि फर्जी और संदिग्ध यूजर आईडी के कारण असली यात्रियों को तत्काल टिकट नहीं मिल पाता था. अब इस समस्या से निपटने के लिए कड़ा सिस्टम लागू किया गया है. 3.03 करोड़ फर्जी अकाउंट किए गए बंद रेलवे और आईआरसीटीसी ने अब तक 3.03 करोड़ फर्जी अकाउंट बंद कर दिए हैं. इसके अलावा 2.7 करोड़ यूजर आईडी को संदिग्ध गतिविधियों के चलते अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है. कड़े सत्यापन के बाद अब आईआरसीटीसी वेबसाइट पर प्रतिदिन करीब 5,000 नए यूजर अकाउंट ही बनाए जा रहे हैं, जबकि पहले यह संख्या एक लाख तक पहुंच जाती थी. आधार आधारित OTP सिस्टम लागू फर्जी बुकिंग रोकने के लिए रेलवे ने आधार-आधारित ओटीपी सिस्टम लागू किया है. यह व्यवस्था अभी 322 ट्रेनों में शुरू हो चुकी है, जिससे तत्काल टिकट कन्फर्म होने की संभावना करीब 65% तक बढ़ गई है. इसके साथ ही आरक्षण काउंटरों पर भी यह सिस्टम 211 ट्रेनों में लागू किया जा चुका है. एंटी-बॉट तकनीक से मिले बेहतर परिणाम रेल मंत्री ने बताया कि Akamai जैसी एंटी-बॉट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे फर्जी यूजर्स की पहचान आसानी से हो रही है. इससे असली यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान, सुरक्षित और स्मूथ बन गई है. रेलवे के इन कदमों से यात्रियों को अब बेहतर सुविधा और न्यायसंगत टिकट प्रणाली का लाभ मिल रहा है.

कर्नाटक CM पद पर विवाद: ’99 प्रतिशत पक्का’ शिवकुमार के CM बनने की संभावना, सिद्धारमैया और शिवकुमार हाई कमान से मिलेंगे

बेंगलुरु   कर्नाटक की सियासी सरगर्मी अभी फिर से बढ़ने वाली है. राज्य के मुख्यमंत्री पद के लिए डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच जारी घमासान दिल्ली में शांत कराया गया था. लेकिन, अब फिर से सियासी पारा गरम होने की संभावना बढ़ गया है. दरअसल, शनिवार को कांग्रेस MLA एच ए इकबाल हुसैन ने भविष्यवाणी की कि कर्नाटक के डिप्टी चीफ मिनिस्टर डीके शिवकुमार 6 या 9 जनवरी तक राज्य के चीफ मिनिस्टर बन जाएंगे क्योंकि इसी तारीख को CM सिद्धारमैया दिवंगत डी देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़कर कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक CM रहने वाले बन नेता बनेंगे. विधायक हुसैन शिवकुमार के पक्के सपोर्टर माने जाते हैं. उन्होंने एचटी से बात करते हुए बताया, ‘99% चांस है कि वह (शिवकुमार) ही CM बनेंगे. तारीख के बारे में, यह बस एक रैंडम नंबर है. हर कोई यही कह रहा है. यह 6 या 9 जनवरी हो सकती है. ये दो तारीखें हैं.’ रामनगर एमएलए ने कहा कि शिवकुमार को मौका देने के लिए सिद्धारमैया को सीएम पद छोड़ देना चाहिए. कांग्रेस के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में इन दोनों नेताओं की बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी में से किसी एक से हो सकती है। पार्टी के करीबी सूत्र के मुताबिक इस बैठक के लिए समय बहुत कम है लेकिन अगर यह मुलाकात होती है, तो यह कर्नाटक के आगामी हालात के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी। कर्नाटक में कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एचटी से कहा, "सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। यदि वे हमारे किसी भी शीर्ष नेता से मिलना चाहते हैं, तो वह हमेशा ऐसा कर सकते हैं।" सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक के नेताओं की कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से यह मुलाकात नई दिल्ली के 'वोट चोर गद्दी छोड़' अभियान के तहत रामलीला मैदान में होने वाली रैली के बाद होगी। गौरतलब है कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से दोनों नेताओं की मुलाकात की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों खेमों के बीच में पिछले कई दिनों से खींचतान मची हुई है। 2023 से सत्ता में आने के बाद से दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर तंज कसते रहे हैं। लेकिन 20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने पर इन हमलों की तीव्रता बढ़ गई। शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि जीत के बाद सरकार के आधे पड़ाव पर सत्ता हस्तांतरण की बात हुई थी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका। तारीख हो गई है तय तारीख की इंपॉर्टेंस के बारे में पूछे जाने पर हुसैन ने कहा, ‘मुझे नहीं पता. यह बस एक रैंडम नंबर है. हर कोई यही कह रहा है. यह 6 जनवरी या 9 जनवरी हो सकती है. ये दो तारीखें हैं.’ हुसैन खुले तौर पर मांग कर रहे हैं कि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाए और उन्होंने एक दिन पहले भी अपनी इच्छा सबके सामने जाहिर की थी. शिवकुमार नहीं, परमेश्वर बनें सीएम, लोकिन… इस बीच, यूनियन मिनिस्टर ऑफ़ स्टेट फॉर रेलवेज़ और BJP MP वी सोमन्ना ने कहा कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए कर्नाटक के होम मिनिस्टर जी परमेश्वर का सपोर्ट कर रहे हैं. तुमकुरु में एक प्रोग्राम में बात करते हुए सोमन्ना ने कहा, ‘पावर मिलना किस्मत की बात है. मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि परमेश्वर सिर्फ होम मिनिस्टर ही रहेंगे. हमारी इच्छा है कि वे CM बनें. सिर्फ मेरी ही नहीं, बल्कि तुमकुरु के लोगों की भी इच्छा है कि वे CM बनें.’ जब डी के शिवकुमार के बारे में पूछा गया, जिन्हें भी एक मज़बूत दावेदार माना जा रहा है, तो सोमन्ना ने जवाब दिया, ‘छोड़ो यार, वह दूसरी बात है. शिवकुमार क्या बनना चाहते हैं, यह उनकी किस्मत पर निर्भर करता है. आचरण किस्मत से भी बड़ा है.’ क्या हो रहा है? कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार 14 दिसंबर को दिल्ली में कांग्रेस पार्लियामेंट्री पार्टी की चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मिलने वाले हैं. सूत्रों ने शनिवार को बताया, एक बार फिर से राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान को लेकर बात होगी. मामले से जुड़े लोगों ने HT को बताया कि यह मीटिंग नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की मेगा रैली के बाद होगी. यह रैली पार्टी के ‘वोट चोर गड्डी छोड़’ कैंपेन के तहत ऑर्गनाइज़ की गई थी, जिसमें रूलिंग BJP और इलेक्शन कमीशन के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया गया था. लीडरशीप के लिए खींचतान 224 मेंबर वाली असेंबली में कांग्रेस के पास करीब 140 विधायक के साथ मैजोरिटी है. 20 नवंबर को कांग्रेस सरकार के पांच साल के टर्म का आधा हिस्सा पार करने के बाद से लीडरशिप की खींचतान तेज हो गई है, ऐसी खबरें हैं कि जेनरेशन ट्रांज़िशन के हिस्से के तौर पर चीफ मिनिस्टर का टर्म 2.5-2.5 साल के लिए बांटने के लिए एक पॉसिबल एग्रीमेंट हो सकता है. न तो पार्टी और न ही किसी लीडर ने ऑफिशियली ऐसे किसी अरेंजमेंट को कन्फर्म किया है, हालांकि शिवकुमार ने कुछ दिन पहले बिना डिटेल्स दिए एक ‘सीक्रेट डील’ का ज़िक्र किया था. अभी तक, 63 साल के शिवकुमार ने 77 साल के चीफ मिनिस्टर सिद्धारमैया के खिलाफ कोई ओपन कदम नहीं उठाया है.

शहडोल का कल्याणपुर सबसे ठंडा, पारा 4.7°C पर, भोपाल-इंदौर में 7°C से नीचे; उत्तरी राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फबारी और बारिश का मौसम

भोपाल  उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में जारी बर्फबारी का असर मध्यप्रदेश में भी महसूस किया जा रहा है. हालांकि सर्द हवाओं की रफ्तार अभी कम है, इसलिए अगले तीन दिन तक शीतलहर का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है, लेकिन प्रदेश के शहरों के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. शनिवार रात को प्रदेश के शहडोल जिले का कल्याणपुर सबसे ठंडा इलाका रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर भारत की ओर दो नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहे हैं. जिनके प्रभाव से पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश का दौर जारी रहेगा. जैसे ही ये सिस्टम आगे बढ़ेंगे, बर्फ के पिघलने के बाद उत्तर से ठंडी हवाएं मध्यप्रदेश की ओर आएंगी. इससे एक बार फिर शीतलहर का दौर शुरू हो जाएगा. इन जिलों में तापमान 10 डिग्री से नीचे प्रदेश के करीब 25 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया है। राजगढ़-पचमढ़ी में 5.4 डिग्री, इंदौर में 5.9 डिग्री, भोपाल में 6.4 डिग्री, उज्जैन में 9.2 डिग्री और जबलपुर में 8.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया. इसके अलावा ग्वालियर में 9.8, मंदसौर में 6, शाजापुर में 6.4 और रीवा में पारा 7 डिग्री दर्ज किया गया. अन्य शहरों में भी कुछ ऐसा ही हालत है. न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बदलाव नहीं मौसम वैज्ञानिक दिव्या सुरेंद्रन के अनुसार, वर्तमान समय में एक सिनोप्टिक सिस्टम अपर और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में उत्तरी पाकिस्तान के ऊपर बना हुआ है. आने वाले दिनों में यह प्रदेश के ऊपर सक्रिय हो सकता है. इसके साथ ही एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी पश्चिमी हिमालय में सक्रिय होगा. अगले पांच दिनों में प्रदेश में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में बदलाव नहीं होगा. इस जिले का तापमान सबसे कम न्यूनतम तापमान: कल्याणपुर (शहडोल)- 4.7°C (सबसे कम), राजगढ़/पचमढ़ी (नर्मदापुरम)- 5.4°C, इंदौर- 5.9°C, मंदसौर- 6°C, गिरवर (शाजापुर)- 6.4°C बड़े शहरों का न्यूनतम तापमान ग्वालियर- 9.8°C उज्जैन- 9.2°C जबलपुर- 8.5°C भोपाल- 6.4°C इंदौर- 5.9°C एमपी के 25 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार-शनिवार की रात में प्रदेश के 25 शहरों में रात का पारा 10 डिग्री से नीचे रहा। 5 बड़े शहरों में इंदौर में सबसे कम 5.9 डिग्री रहा। भोपाल में 6.4 डिग्री, ग्वालियर में 9.8 डिग्री, उज्जैन में 9.2 डिग्री और जबलपुर में 8.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शहडोल के कल्याणपुर में पारा 4.7 डिग्री रहा। वहीं, राजगढ़-पचमढ़ी में 5.4 डिग्री, मंदसौर में 6 डिग्री, शाजापुर में 6.4 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, रायसेन-नौगांव में 7.6 डिग्री, मलाजखंड में 7.9 डिग्री, मंडला-शिवपुरी में 8.2 डिग्री, दतिया में 8.4 डिग्री, बैतूल में 9 डिग्री, दमोह, सतना, टीकमगढ़ और खजुराहो में तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जेट स्ट्रीम की रफ्तार 176 किमी प्रतिघंटा वर्तमान में जेट स्ट्रीम भी चल रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 176 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी है। क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इस बार रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा सर्दी बढ़ा रही है। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है। दो नए सिस्टम बढ़ाएंगे ठंड का असर मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत की ओर दो और पश्चिमी विक्षोभ बढ़ रहे हैं। इनके असर से पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश जारी रहेगी। जब ये सिस्टम आगे बढ़ेंगे, तब जमी हुई बर्फ पिघलेगी और उत्तर से ठंडी हवाएं मध्यप्रदेश की ओर बढ़ेंगी। इसके बाद एक बार फिर प्रदेश में कोल्ड वेव यानी शीतलहर की वापसी होगी। 25 शहरों में 10 डिग्री से नीचे पारा प्रदेश के 25 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो इंदौर में पारा 5.9 डिग्री रहा, भोपाल में 6.4 डिग्री, ग्वालियर में 9.8 डिग्री, उज्जैन में 9.2 डिग्री और जबलपुर में 8.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। इसके अलावा राजगढ़-पचमढ़ी में 5.4 डिग्री, मंदसौर में 6 डिग्री, शाजापुर में 6.4 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री और कई अन्य जिलों में रात का तापमान 7 से 9 डिग्री के बीच बना रहा। ऊपर आसमान में तेज जेट स्ट्रीम मौसम में ठंड बनाए रखने में जेट स्ट्रीम की भी अहम भूमिका है। वर्तमान में उत्तर भारत के ऊपर जमीन से करीब 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर जेट स्ट्रीम करीब 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही है। इसका प्रभाव मध्यप्रदेश तक महसूस किया जा रहा है। कुछ समय पहले इसकी रफ्तार 222 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच चुकी है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक जेट स्ट्रीम ऊंचाई पर चलने वाली बेहद तेज हवा होती है। जब पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं के साथ इसका मेल होता है, तब ठंड का असर कई गुना बढ़ जाता है। नवंबर में ही टूट चुके रिकॉर्ड इस सीजन में ठंड ने नवंबर में ही पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर रहा। 17 नवंबर की रात भोपाल का तापमान 5.2 डिग्री तक गिर गया, जो अब तक का सबसे कम रिकॉर्ड है। इंदौर में भी 25 साल बाद नवंबर में पारा 6.4 डिग्री तक पहुंचा। दिसंबर-जनवरी में ठंड का असली दौर मौसम विभाग का कहना है कि जिस तरह मानसून में जुलाई-अगस्त सबसे अहम होते हैं, उसी तरह ठंड के लिहाज से दिसंबर और जनवरी सबसे प्रभावी महीने माने जाते हैं। इन्हीं महीनों में उत्तर भारत से आने वाली सर्द हवाएं सबसे ज्यादा असर दिखाती हैं। पश्चिमी विक्षोभ … Read more

IND vs SA: क्या आज संजू सैमसन के साथ होगा इंसाफ, टीम इंडिया की प्लेइंग XI में फेरबदल के संकेत

नई दिल्ली  इंडिया वर्सेस साउथ अफ्रीका 5 मैच की टी20 सीरीज का तीसरा और बेहद महत्वपूर्ण मुकाबला आज धर्मशाला में खेला जाना है। इस मैच के जरिए दोनों टीमों की नजरें सीरीज में बढ़त बनाने पर होगी, क्योंकि पहले दो मैचों के बाद सीरीज 1-1 की बराबरी पर है। धर्मशाला की पिच हाईस्कोरिंग मुकाबले के लिए जानी जाती है, शुरुआती ओवरों में नई गेंद के साथ गेंदबाजों को अच्छी खासी मदद मिलती है, मगर इस पड़ाव को पार करने के बाद मैच पूरी तरह से बल्लेबाजों के लिए खुल जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कप्तान सूर्यकुमार यादव और कोच गौतम गंभीर संजू सैमसन को मौका देने के बारे में सोच सकते हैं। अब सवाल यह है कि सैमसन प्लेइंग XI में आएंगे तो आएंगे किसकी जगह?   भारतीय टी20 टीम के उप-कप्तान शुभमन गिल इस फॉर्मेट में अभी तक अपनी छाप नहीं छोड़ पाए हैं। उन्होंने लगातार 17 पारियां खेल ली है, जिसमें वह 50 रन का आंकड़ा नहीं छू पाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट तो 2025 में 142.93 का रहा है, मगर इस फॉर्मेट में ओपनर से जो बड़ी पारी की दरकार है वो शुभमन गिल भारत को नहीं दे पाए हैं। 2025 में गिल के बल्ले से 14 मैचों में 23.90 की औसत के साथ 263 ही रन निकले हैं। अगर आज गिल एक बार फिर निराश करते हैं तो उनकी टीम में जगह पर तलवार लटक सकती है।   संजू सैमसन की जगह कैसे बनेगी? जब तक प्लेइंग XI में शुभमन गिल हैं, तब तक संजू सैमसन बतौर ओपनर तो टीम में जगह नहीं बना सकते। ऐसे में अगर आज की पिच देखकर उन्हें मौका दिया भी जाता है तो वह मिडिल ऑर्डर में या फिनिशर की भूमिका अदा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। संजू सैमसन को शिवम दुबे की जगह मौका दिया जा सकता है। शिवम दुबे 2025 में बल्ले से कुछ कमाल नहीं दिखा पाए हैं, अभी तक खेले 15 मुकाबलों में उनके बल्ले से 171 ही रन निकले हैं। हालांकि उनके खाते में 11 विकेट जरूर हैं। धर्मशाला में बोर्ड पर रन बनाना ज्यादा अहम होगा, ऐसे में दुबे को रिप्लेस कर ही सैमसन टीम में अपनी जगह बना सकते हैं। भारत की संभावित XI- अभिषेक शर्मा, शुभमन गिल, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या, संजू सैमसन, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह साउथ अफ्रीका संभावित XI- क्विंटन डी कॉक (विकेटकीपर), एडेन मार्कराम (कप्तान), ट्रिस्टन स्टब्स, डेवाल्ड ब्रेविस, डेविड मिलर, डोनोवन फरेरा, जॉर्ज लिंडे, मार्को जानसन, एनरिक नॉर्टजे/कॉर्बिन बॉश, ओटनील बार्टमैन, लुंगी एनगिडी

केरल निकाय चुनाव परिणाम: कांग्रेस की पुनर्वापसी, BJP का उदय और लेफ्ट को बड़ा झटका – क्या है सियासी बदलाव?

तिरुवनंतपुरम केरल में शनिवार को आए स्थानीय निकाय चुनाव नतीजों ने 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल साफ कर दिया है. सत्तारूढ़ CPI(M) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) को राज्यभर में बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में जोरदार वापसी की है. वहीं, BJP के नेतृत्व वाले NDA ने भी अपनी पकड़ मजबूत करते हुए केरल की राजनीति को सिर्फ लेफ्ट बनाम कांग्रेस की लड़ाई तक सीमित ना रहने देने के संकेत दिए हैं. केरल में स्थानीय निकाय चुनावों को हमेशा विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जाता रहा है. इस बार के नतीजे लेफ्ट के लिए इस स्तर पर अनुकूल नहीं माने जा रहे हैं. राज्य के कई जिलों में… यहां तक कि लेफ्ट के परंपरागत गढ़ों में भी उसे नुकसान उठाना पड़ा है. कांग्रेस गठबंधन सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है, जबकि BJP ने खासतौर पर शहरी इलाकों में अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है. इससे यह संकेत मिल रहा है कि केरल की राजनीति अब पूरी तरह द्विध्रुवीय नहीं रह सकती. नगर निगम, नगर पालिका और पंचायतों में किसकी जीत छह नगर निगमों में से चार पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने जीत हासिल की, जबकि एक-एक नगर निगम LDF और NDA के खाते में गया. नगर पालिकाओं की बात करें तो 86 में से 54 पर UDF को जीत मिली, LDF 28 पर सिमट गया और NDA ने दो नगर पालिकाओं में सफलता हासिल की. ग्राम पंचायत स्तर पर कांग्रेस गठबंधन ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया और 941 में से 504 पंचायतों पर कब्जा जमाया. वहीं, LDF को 341 और NDA को 26 पंचायतों में जीत मिली. ब्लॉक पंचायतों में LDF ने 63 और UDF ने 79 सीटें जीतीं, जबकि जिला पंचायत स्तर पर दोनों गठबंधनों को सात-सात सीटें मिलीं. ग्रामीण केरल में कांग्रेस की ऐतिहासिक बढ़त यह पहली बार है जब केरल के ग्रामीण स्थानीय निकायों में कांग्रेस ने इतनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है. आमतौर पर पंचायत स्तर पर CPI(M) का मजबूत कैडर नेटवर्क और संगठनात्मक पकड़ मानी जाती रही है, लेकिन इस बार यह बढ़त भी कमजोर पड़ती दिखी. पिछला पैटर्न और मौजूदा राजनीतिक संदेश केरल के चुनावी इतिहास को देखें तो स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों के नतीजों के बीच मजबूत संबंध रहा है. 2010 में जब कांग्रेस ने निकाय चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था तो अगले ही साल 2011 में UDF ने सरकार बनाई थी. इसके उलट, 2020 के निकाय चुनावों में LDF की जीत के बाद 2021 में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर इतिहास रच दिया था. इसी पैटर्न को देखते हुए मौजूदा नतीजों को लेफ्ट सरकार के खिलाफ जनभावना में बदलाव का शुरुआती लेकिन अहम संकेत माना जा रहा है. लेफ्ट के पारंपरिक गढ़ों में बड़ा झटका इन नतीजों का सबसे चौंकाने वाला पहलू शहरी इलाकों में LDF की भारी हार रही. UDF ने कोल्लम, त्रिशूर और कोच्चि नगर निगम लेफ्ट से छीन लिए और कन्नूर को बरकरार रखा. कोल्लम और त्रिशूर क्रमशः 25 और 10 वर्षों से लेफ्ट के कब्जे में थे. कोझिकोड नगर निगम में मुकाबला बेहद करीबी रहा, जहां अंततः LDF ने मामूली बढ़त के साथ जीत दर्ज की. तिरुवनंतपुरम में BJP का ऐतिहासिक उभार लेफ्ट के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका राजधानी तिरुवनंतपुरम में लगा. यहां CPI(M) के 45 साल पुराने गढ़ में BJP के नेतृत्व वाला NDA आगे निकल गया. तिरुवनंतपुरम नगर निगम की 101 में से 50 डिवीजन जीतकर NDA ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया. LDF सिर्फ 29 सीटों पर सिमट गया, जबकि UDF को 19 सीटें मिलीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे केरल में BJP के लिए एक 'वाटरशेड मोमेंट' बताया. अन्य शहरी इलाकों में BJP की मौजूदगी BJP ने पालक्काड़ नगरपालिका में UDF से मामूली बढ़त बनाते हुए मजबूत चुनौती पेश की. कोझिकोड में भले ही CPI(M) आगे रहा, लेकिन BJP ने कम से कम 14 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की. कोल्लम जैसे परंपरागत लेफ्ट गढ़ में भी BJP ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की. चुनावी मुद्दे और एंटी-इन्कम्बेंसी फैक्टर हावी हालांकि स्थानीय मुद्दों और वार्ड स्तर के प्रचार की भूमिका रही, लेकिन यह चुनाव काफी हद तक राज्य सरकार के खिलाफ जनमत संग्रह जैसा बन गया. विश्लेषकों के मुताबिक, केरल में पहली बार इतनी व्यापक और एकसमान एंटी-इन्कम्बेंसी देखने को मिली है. हालांकि, चुनाव से पहले LDF सरकार ने जनता को रिझाने में कसर नहीं छोड़ी. सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोतरी की. आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में इजाफा किया और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की घोषणा की, लेकिन करीब एक दशक के शासन के बाद मतदाताओं की थकान इन घोषणाओं पर भारी पड़ी. आरोप-प्रत्यारोप और सियासी नैरेटिव भी पहलू UDF ने सबरीमला में कथित सोने की चोरी का मुद्दा उठाया. वहीं, लेफ्ट ने निष्कासित कांग्रेस विधायक राहुल ममकूटाथिल पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप और UDF पर सांप्रदायिक ताकतों से हाथ मिलाने के आरोपों को जोर-शोर से उठाया. राजनीतिक विश्लेषक जोसेफ सी मैथ्यू के मुताबिक, केरल में पहली बार इतनी समान रूप से एंटी-इन्कम्बेंसी देखने को मिली है. यह फैसला दुर्लभ है. उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर CPI(M) की पारंपरिक मजबूती अब हिलती दिख रही है. CPI(M) ने क्या कहा… CPI(M) के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने एंटी-इन्कम्बेंसी के दावों को खारिज किया. उनका कहना है कि 14 में से सात जिला पंचायतों में जीत यह साबित करती है कि पार्टी का जनाधार कायम है. गोविंदन ने नतीजों को 'अप्रत्याशित झटका' बताया और कहा कि 2010 में इससे भी बड़ा नुकसान झेलने के बाद पार्टी ने वापसी की थी. उन्होंने कहा कि पार्टी आत्ममंथन करेगी और जनता से दोबारा जुड़ने की कोशिश करेगी. BJP की बढ़त और बदलती सियासी तस्वीर विश्लेषकों के मुताबिक, BJP की आगे की बढ़त अब कांग्रेस नहीं बल्कि लेफ्ट के वोट बैंक में सेंध लगाकर हो रही है. तिरुवनंतपुरम, पालक्काड़ और कोझिकोड जैसे इलाकों में NDA की मजबूती इस बदलाव का संकेत है. हालांकि CPI(M) नेतृत्व का कहना है कि तिरुवनंतपुरम को छोड़कर BJP की बढ़त को बहुत बड़ा राजनीतिक उभार नहीं कहा जा सकता. कांग्रेस के लिए आगे की चुनौती निकाय चुनाव में मिली जीत से … Read more

पंकज चौधरी बने यूपी बीजेपी अध्यक्ष, सीएम योगी के सामने पीयूष गोयल ने की औपचारिक घोषणा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) को आखिरकार अपना नया अध्यक्ष मिल गया है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के निर्विरोध निर्वाचन का ऐलान राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में किया। लखनऊ के लोकभवन में आयोजित समारोह में पंकज चौधरी के हाथों में कमान आने के साथ ही प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक स्तर पर एक नए युग का सूत्रपात हो गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय परिषद का निर्वाचन भी हुआ है। पीयूष गोयल ने कहा कि यह घोषित करते हुए खुशी हो रही है कि भाई पंकज चौधरी को सर्वसमिति से चुन लिया गया है।   पंकज चौधरी की नियुक्ति को भाजपा का एक बड़ा राजनीतिक दांव माना जा रहा है। वह पूर्वांचल के महाराजगंज से सात बार के अनुभवी सांसद हैं और कुर्मी (OBC) समुदाय से आते हैं। उनकी इस पद पर ताजपोशी के पीछे पार्टी की गहरी और बहुआयामी रणनीति है। यूपी खासकर पूर्वाचंल में ओबीसी आबादी एक बड़ा वोट बैंक है। पंकज चौधरी जैसे मजबूत कुर्मी नेता को कमान सौंपकर भाजपा विपक्ष के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट करना चाहती है और ओबीसी मतदाताओं पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।    पंकज चौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बेहद विश्वस्त माने जाते हैं। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के रूप में उनका अनुभव और संगठनात्मक क्षमता भी इस चयन का एक प्रमुख कारण है। पंकज चौधरी का मजबूत आधार पूर्वांचल है, जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है। उनकी नियुक्ति से इस क्षेत्र में पार्टी को और मजबूती मिलेगी। पंकज चौधरी के सामने अब कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी, जिनमें पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना, आगामी चुनावों के लिए रणनीति बनाना और केंद्रीय व प्रदेश सरकार की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाना शामिल है। उनकी संगठनात्मक क्षमता और अनुभव पार्टी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मददगार साबित होंगे।   कार्यक्रम का शुभारंभ निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के संबोधन से शुरू हुआ। भूपेंद्र चौधरी ने सबसे पहले राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय चुनाव प्रभारी के लक्ष्मण, प्रदेश चुनाव प्रभारी डॉ महेंद्रनाथ पांडेय, नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक आदि का स्वागत किया। अपने संबोधन में भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि संगठन की राजनीति में ऐसा वक्त आता है जब हम अपनी भूमिका बदलते देखते हैं। कितना सीखना, कितना बताना और क्या करना है सब संगठन से तय होता है। पिछले चार साल से एक अभियान चलता रहा और आगे भी ऐसा ही चलता रहे। इसी कामना के साथ हम एकत्रित हुए हैं।  

मध्यप्रदेश पुलिस की प्रभावी पहल: नक्सल-मुक्त राज्य बनाने के लिए रोजगार आधारित रणनीति

मध्यप्रदेश पुलिस की प्रभावी पहल: नक्सल-मुक्त राज्य बनाने के लिए रोजगार आधारित रणनीति नक्सल-मुक्त मध्यप्रदेश की दिशा में पुलिस की रोजगार केंद्रित व्यापक कार्रवाई भोपाल  नक्सल-मुक्त भारत एवं नक्सल-मुक्त मध्यप्रदेश के राष्ट्रीय संकल्प को सुदृढ़ करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निरंतर रोजगार आधारित पहलें की जा रही हैं। मंडला एवं बालाघाट जिलों में संचालित ये प्रयास समाज के अंतिम छोर पर खड़े युवाओं और महिलाओं तक सकारात्मक परिवर्तन पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। इन पहलों के माध्यम से न केवल आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, बल्कि विकास, सुरक्षा और विश्वास का ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को स्थायी रूप से मुख्यधारा से जोड़ने में सहायक सिद्ध हो रहा है। मंडला जिले में पुलिस अधीक्षक श्री रजत सकलेचा के नेतृत्व में “एकल सुविधा केंद्र” के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार से जोड़ने हेतु निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। पूर्व में आयोजित प्लेसमेंट कैंप के उत्साहजनक और सकारात्मक परिणामों को आगे बढ़ाते हुए दिनांक 11 दिसंबर 2025 को बिछिया क्षेत्र के 15 ग्रामीण युवाओं का चयन किया गया। चयनित युवाओं को औपचारिक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए, जिसके पश्चात वे प्रशिक्षण हेतु L&T के लखनादौन स्थित प्रशिक्षण केंद्र के लिए रवाना हुए। उल्लेखनीय है कि मंडला जिले में पूर्व में आयोजित तीन दिवसीय रोजगार मेले के पश्चात यह लगातार मिल रही उपलब्धि इस तथ्य को स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि ग्रामीण युवाओं में अब मुख्यधारा के रोजगार के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। पुलिस की सक्रिय पहल, मार्गदर्शन और विश्वासपूर्ण संवाद के कारण युवाओं को अपने क्षेत्र में ही नए अवसर मिल रहे हैं, जिससे उन्हें पलायन, भटकाव और नकारात्मक प्रभावों से दूर रखने में भी सफलता मिल रही है। इसी क्रम में बालाघाट जिले में माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक बालाघाट श्री आदित्य मिश्रा के नेतृत्व में रोजगार आधारित पहल को और अधिक विस्तार दिया गया है। इस पहल के अंतर्गत महिलाओं को भी रोजगार एवं कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। Confederation of Indian Industry के सहयोग से छिंदवाड़ा में आयोजित रोजगार मेले के माध्यम से 25 ग्रामीण महिलाओं का चयन किया गया। इनमें से प्रथम चरण में 4 महिलाओं को दो माह के प्रशिक्षण हेतु छिंदवाड़ा स्थित प्रशिक्षण केंद्र भेजा गया है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात इन महिलाओं को Taj Hotels में नियुक्ति प्रदान की जाएगी। शेष चयनित महिलाओं को आगामी चरणों में प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिससे उन्हें भी समान रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। प्रशिक्षण हेतु महिलाओं की रवानगी के अवसर पर उनके परिजन भी उपस्थित रहे। उन्होंने पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास माओवाद प्रभावित क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में नई आशा, आत्मविश्वास और सम्मानजनक आजीविका का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। रोजगार और कौशल प्रशिक्षण के ये अवसर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत बुनियाद बन रहे हैं। युवाओं एवं महिलाओं का निजी क्षेत्र से जुड़ना उन्हें संसाधनों की कमी, भटकाव और गलत दिशा में जाने से रोकते हुए आत्मनिर्भरता, स्थिरता और सामाजिक मुख्यधारा की ओर अग्रसर कर रहा है। यह पहल केंद्र सरकार के “नक्सल-मुक्त भारत” के लक्ष्य तथा मध्यप्रदेश की “सुरक्षित एवं आत्मनिर्भर समाज” की नीति को ठोस समर्थन प्रदान करती है। पुलिस-जन समन्वय का यह मॉडल विश्वास निर्माण का एक प्रभावी उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसमें सुरक्षा के साथ-साथ संवेदनशीलता, संवाद और अवसरों का समावेश है। मंडला एवं बालाघाट पुलिस द्वारा संचालित रोजगारोन्मुख कार्यक्रम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और स्थायी सामाजिक परिवर्तन लाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हो रहे हैं। मध्यप्रदेश पुलिस भविष्य में भी ऐसी जन-केंद्रित और समावेशी पहलों के माध्यम से युवाओं एवं महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने हेतु निरंतर प्रयासरत रहेगी।  

उत्तर प्रदेश उद्यमियों के लिहाज से काफी बेहतर विकल्प बनकर उभरा : इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

वोट बैंक की राजनीति बनाम विकास का मॉडल : साढ़े आठ साल में योगी सरकार ने बदली उत्तर प्रदेश की तस्वीर उत्तर प्रदेश उद्यमियों के लिहाज से काफी बेहतर विकल्प बनकर उभरा : इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन कांग्रेस-सपा ने जहां जनता को सिर्फ वोट बैंक माना, वहीं योगी सरकार ने निवेश, कानून व्यवस्था और मानव संसाधन को विकास का केंद्र बनाया बाहर के निवेशक आए, नई फैक्ट्रियां लगीं, युवाओं को मिला प्रशिक्षण और रोजगार लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजनीति में दशकों तक कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की पहचान वोट बैंक आधारित सत्ता प्रबंधन तक सीमित रही। जाति, तुष्टिकरण और प्रतीकात्मक योजनाओं से आगे बढ़ने का प्रयास नहीं हुआ। इसके उलट, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले साढ़े आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने नीतिगत, संरचनात्मक और आर्थिक स्तर पर ऐसे बदलाव देखे हैं, जिनकी पुष्टि सरकारी और स्वतंत्र आंकड़े करते हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन को एक बड़े बदलाव के तौर पर देखता है। आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश गोयल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश उद्यमियों के लिहाज से काफी बेहतर विकल्प बनकर उभरा है। यहां बाहर के निवेशक लगातार आए और अपने उद्यम स्थापित किए। उन्होंने यहां नई फैक्ट्रियां लगाईं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर विकल्प मिले। इसी के साथ उत्तर प्रदेश से पलायन की समस्या भी खत्म हो रही है। और अपने प्रदेश में युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। सीएम योगी के प्रयास से उत्तर प्रदेश का युवा अपने पैरों पर खड़ा हो रहा सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के अन्तर्गत विभिन्न आयोगों एवं भर्ती बोर्ड की ओर से साढ़े आठ वर्षों में 8.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई।  इसके अलावा महिला सशक्तिकरण का पूरा ध्यान रखा गया। इसके अंतर्गत 1.75 लाख से अधिक महिलाओं को सरकारी नौकरी मिली। प्रदेश के युवाओं को देश एवं विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन का भी गठन किया गया है। मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना में 01 लाख से अधिक युवाओं को उद्योगों एवं अधिष्ठानों में पंजीकरण एवं प्रशिक्षण दिया गया। जिससे उत्तर प्रदेश का युवा अपने पैरों पर खड़ा हो रहा है। नए उभरते क्षेत्रों में छात्रों को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार की तरफ मोड़ा गया आई.टी.आई व कौशल विकास मिशन में 25 लाख से अधिक युवा विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षित किए गए और इसके अंतर्गत 10.20 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला। यही नहीं इंडस्ट्री 4.0 के अनुरूप नए उभरते क्षेत्रों जैसे आर्टीफिशियल इन्टेलीजेंस, एडवांस्ड कम्प्यूटिंग (रोबोटिक्स) में छात्रों को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार की तरफ मोड़ा गया। राजनीतिक आरोप बनाम नीतिगत बदलाव राजधानी के इंडस्ट्रियल एरिया में अपना उद्यम चला रहे अनुराग पांडे कहते हैं कि जहां पहले की सरकारों ने जनता को केवल चुनावी गणित तक सीमित रखा, वहीं मौजूदा योगी सरकार ने स्थायी रोजगार, निवेश और कौशल विकास के साथ ही विकास को प्राथमिकता दी है। बाहर से आए उद्योगों और स्थानीय युवाओं को मिले प्रशिक्षण ने यह संकेत दिया है कि उत्तर प्रदेश अब केवल रोजगार की तलाश में पलायन करने वाला राज्य नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उम्मीद पोर्टल पर यूपी ने किया देश में सर्वाधिक 92,832 वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन

उम्मीद पोर्टल पर यूपी ने रचा इतिहास, ऑनलाइन वक्फ संपत्ति रजिस्ट्रेशन में यूपी सबसे आगे मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उम्मीद पोर्टल पर यूपी ने किया देश में सर्वाधिक 92,832 वक्फ संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन  उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रजिस्ट्रेशन की अवधि 6 माह बढ़ी, यूपी रहा रजिस्ट्रेशन में सबसे आगे   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने वक्फ संपत्तियों के डिजिटल रजिस्ट्रेशन के मामले में देश में पहला स्थान हासिल किया है। भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा 6 जून 2025 को शुरू किए गए 'उम्मीद' पोर्टल पर 05 दिसंबर 2025 तक सभी वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन का आदेश जारी किया गया था। इस क्रम में उत्तर प्रदेश में कुल 92,832 वक्फ संपत्तियों का सफलतापूर्वक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा कर लिया है, जिसमें 86,347 सुन्नी और 6,485 शिया वक्फ संपत्तियां शामिल हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की तिथि को 6 माह के लिए बढ़ा दिया है। लेकिन उत्तर प्रदेश की ये उपलब्धि न केवल सीएम योगी आदित्यनाथ के कुशल और पारदर्शिता प्रशासन को दर्शाती है, साथ ही वक्फ बोर्डों की संपत्तियों के संरक्षण और विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। उम्मीद पोर्टल पर यूपी में हुआ सर्वाधिक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उम्मीद पोर्टल के देशव्यापी आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में अब तक हुए कुल वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रजिस्ट्रेशन में उत्तर प्रदेश का योगदान सर्वाधिक है। हालांकि केंद्र सरकार ने उम्मीद पोर्टल में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की अवधि को बढ़ा दिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रियता से यह लक्ष्य न केवल समय पर पूरा हुआ, बल्कि निर्धारित अवधि से पहले ही हासिल कर लिया गया। इस क्रम में उत्तर प्रदेश में 'उम्मीद' पोर्टल पर क्रमशः 86,347 सुन्नी और 6,485 शिया वक्फ संपत्तियों के साथ कुल 92,832 वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हुआ है। प्रदेश सरकार की ओर से चलाए गये जागरूकता अभियान और प्रशासनिक सहयोग से अधिकांश मुतवल्लियों ने वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन समय पर पूरे करवा लिये हैं। शिया वक्फ रजिस्ट्रेशन में लखनऊ, तो सुन्नी वक्फ रजिस्ट्रेशन में बराबंकी अव्वल  उम्मीद पोर्टल के जनपदवार विवरण से पता चलता है कि, शिया वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में लखनऊ सबसे आगे रहा, जहां 625 शिया वक्फ संपत्तियां दर्ज हुई हैं। उसके बाद 539 शिया वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के साथ जनपद अमरोहा दूसरे और 533 वक्फ संपत्तियों के साथ  मेरठ तीसरे स्थान पर रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर सुन्नी वक्फ संपत्तियों के उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के मामले में 4,940 वक्फ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन के साथ बाराबंकी पहले नंबर पर रहा। तो वहीं सीतापुर, दूसर और आजमगढ़ तीसरे स्थान पर रहा। जबकि बिजनौर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ, और जौनपुर जनपद भी सुन्नी वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के मामले में अग्रणी जनपद  हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की यह उपलब्धि सीएम योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और प्रशासन दक्षता को प्रदर्शित कर रही है, साथ ही वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने, इसके दुरुपयोग को रोकने और साथ ही उनके संरक्षण और विकास कार्यों को भी गति प्रदान करेगा।

मेट्रो सेवा की ऐतिहासिक शुरुआत: 20 दिसंबर को सीएम मोहन संग केंद्रीय मंत्री करेंगे उद्घाटन

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल वासियों को लंबे समय से जिस पल का बेसब्री से इंतजार था आखिरकार वो पल महज एक सप्ताह में हकीकत बनते हुए उनके सामने आने वाला है। हम बात कर रहे भोपाल मेट्रो की। आपको जानकर खुशी होगी कि, जिसे मेट्रो का इंतजार भोपालवासी बीते कई वर्षों से कर रहे है, वो पहले चरण के ट्रेक पर आने वाली 20 दिसंबर से पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी। क्योंकी इस तारीख पर शासन की ओर से मुहर लगा दी गई है। मध्य प्रदेश मेट्रो कारर्पोरेंशन के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य का कहना है कि, 20 दिसंबर को भोपाल मेट्रो का लोकार्पण किया जाएगा। शासन ने लोकार्पण की तारीख आधिकारिक रूप से तय कर ली है। साथ ही, मेट्रो प्रबंधन को इसकी औपचारिक सूचना भी भेज दी गई है। लोकार्पण कार्यक्रम शहर के मिंटो हाल में दिन के समय आयोजित किया जाएगा। सीएम मोहन के साथ मेट्रो को झंडी दिखाएंगे केंद्रीय मंत्री कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मिलकर भोपाल मेट्रो को हरी झंडी दिखाकर उसे रवाना करेंगे। जबकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़ेंगे। आपको बता दें कि, पहले फेस में आरेंज लाइन के 7.5 किलोमीटर प्रायोरिटी कारिडोर पर मेट्रो चलाई जाएगी। यह रूट एम्स मेट्रो स्टेशन से लेकर सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक का होगा। इस रूट के शुरू होने से हजारों यात्रियों को रोजाना राहत मिलेगी। जबकि, दोनों प्रमुख स्टेशनों के बीच यात्रा का समय भी काफी कम होगा। सोमवार को जारी होगी विसतृत जानकारी मेट्रो प्रबंधन की ओर से सोमवार को इस पूरे आपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी जारी कर दी जाएगी। जैसे- संचालन समय, किराया, यात्रियों के लिए नियम समेत अन्य जरूरी विवरण शामिल होगा। 100 वर्षों के हिसाब से मेट्रो तैयार मेट्रो प्रबंधन के अफसरों की मानें तो इस प्रोजेक्ट को आगामी 100 वर्षों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या भले ही कम रहे, लेकिन जैसे-जैसे पूरे रूट पर काम पूरा होगा, मेट्रो पर यात्रियों का दबाव बढ़ता जाएगा और मेट्रो भोपाल की लाइफलाइन बन जाएगी।