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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मिल रहा त्वरित न्याय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल में सेवानिवृत्त कार्मिकों को मिल रहा त्वरित न्याय पेंशनरों की समस्याओं के निस्तारण के लिए शक्ति भवन में शनिवार को लगी पेंशन अदालत अदालत में कुल 14 प्रकरण सुनवाई के लिए रखे गए लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सुशासन मॉडल के तहत उत्तर प्रदेश में सेवानिवृत्त कार्मिकों के कल्याण और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में शनिवार को लखनऊ स्थित शक्ति भवन में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय पर त्रैमासिक पेंशन अदालत का आयोजन किया गया। यह पहल प्रदेश सरकार की उस संवेदनशील सोच को दर्शाती है, जिसमें सेवा निवृत्ति के बाद भी कार्मिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। पेंशन अदालत में कुल 14 प्रकरणसुनवाई के लिए रखे गए। पेंशन अदालत का आयोजन उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष कुमार गोयल के निर्देश पर किया गया। शक्ति भवन में आयोजित इस पेंशन अदालत की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड के अपर सचिव (प्रथम) विनोद कुमार मिश्र ने की, जिसमें पावर कॉरपोरेशन और पारेषण निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। पेंशन अदालत में कुल 14 प्रकरण रखे गए। इनमे से पांच प्रकरणों का त्वरित निस्तारण मौके पर ही कर दिया गया। शेष का जल्द से जल्द करने के स्पष्ट निर्देश अधिकारियों को दिए गए। यह त्रैमासिक पेंशन अदालत मार्च, जून, सितम्बर और दिसम्बर में नियमित रूप से आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य किसी भी पेंशनर को अनावश्यक परेशानी से बचने के लिए है। यही मॉडल प्रदेश के सभी डिस्कॉम और केस्को में भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट संदेश है कि शासन केवल कार्यरत कर्मियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा भी सरकार की जिम्मेदारी है। पेंशन अदालत जैसी व्यवस्थाएं उत्तर प्रदेश को संवेदनशील और जवाबदेह शासन की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं। पेंशन अदालत में अपर सचिव-तृतीय  कैलाश चन्द्र जोशी, संयुक्त सचिव दिनेश प्रताप गुप्ता, संयुक्त सचिव अनिल कुमार, अधीक्षण अभियन्ता रजनीकान्त मिश्रा, उप सचिव राम सूरत सहित अन्य अधिकारीगण इस मौके पर मौजूद रहे।

मध्यप्रदेश पारदर्शी तरीके से हितलाभ राशि अंतरण में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल

हितग्राहियों को पारदर्शी तरीके से हितलाभ राशि अंतरण के मामले में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में है शामिल प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में हुई जिला विकास सलाहकार समिति की प्रथम बैठक जिले को कुपोषणमुक्त बनाने सहित समयावधि में योजनाओं का लाभ एवं विकास कार्यों की पूर्णता सुनिश्चित करने के दिए गए निर्देश भोपाल जिले को कुपोषणमुक्त बनाने के उद्देश्य से विभागीय कार्यक्रम व गतिविधियों के क्रियान्वयन के साथ सामाजिक उत्तदायित्व भी आवश्यक है। गरीब व पात्र हितग्राहियों के हक का पैसा पारदर्शी तरीके से सीधे बैंक खाते में पहुंचाने वाले प्रदेशों की श्रेणी में मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। जिले के सर्वांगीण विकास के लिए सर्वसमाज की सहभागिता जरूरी है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री तथा पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार ने शनिवार को कलेक्टर कार्यालय के सभागार में संपन्न हुई जिला विकास सलाहकार समिति की प्रथम बैठक में कहीं। इस समिति का गठन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में किया गया है। जिले के प्रभारी मंत्री बतौर उपाध्यक्ष समिति में शामिल हैं। बैठक में प्रभारी मंत्री परमार ने विभागवार क्रियान्वित योजनाओं के प्रगति की जानकारी लेकर आवश्यक निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा में शासन की योजनाओं का लक्ष्य पूर्ण करने तथा विकास कार्यों की पूर्णता के लिए निर्देशित किया गया। इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों से समिति में शामिल सदस्यों के आवश्यक सुझाव प्राप्त कर आगामी कार्ययोजना व समग्र विकास के रूपरेखा पर चर्चा की गई। बैठक में 12.65 करोड़ राशि से डायमण्ड पार्क तथा 20 करोड़ लागत राशि से बनने वाले डायमण्ड म्यूजियम के एक स्थल पर लगभग 32 एकड़ भूमि पर निर्माण के संबंध में सर्वसम्मति एवं सहमति से महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री ने दक्षिण वन मण्डल अंतर्गत पोषण से भरपूर कल्दा महुआ लड्डू एवं शहद के लोगो का विमोचन किया। प्रभारी मंत्री ने बैठक के अवसर पर प्रदेश सरकार की दो वर्ष की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में सबसे पहले बड़ा कदम उठाते हुए लाड़ली लक्ष्मी योजना की शुरूआत की। इस योजना के जरिए बेटियों की शिक्षा और भविष्य के स्वावलंबन की नींव रखी गई। प्रदेश सहित जिले में लाड़ली बहना योजना के माध्यम से भी बड़ी संख्या में महिलाएं लाभांवित हो रही हैं। इसी तरह सामाजिक न्याय विभाग की मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में बेटियों को 49 हजार रूपए की राशि हस्तांतरित की जा रही है। जिले में टिकुरिहा, जिगदहा और लक्ष्मीपुर में नवीन विद्युत सब स्टेशन स्वीकृत हुए हैं। किसानों को निर्बाध रूप से 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराना और विद्युतविहीन कुछ राजस्व ग्राम व मजरा टोला में विद्युतीकरण का भी लक्ष्य है। बैठक में खनिज मद की स्थिति सहित शिक्षा विभाग के छात्रवृत्ति वितरण, बालिका छात्रावासों की स्थिति, साईकिल व गणवेश वितरण, सांदीपनि विद्यालय के गुणवत्तापूर्ण भवन निर्माण सहित शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास तथा स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं के विकास के बारे में जानकारी लेकर जरूरी निर्देश दिए गए। प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में हो चिकित्सक की तैनाती प्रभारी मंत्री ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान प्रत्येक प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में आवश्यकता मुताबिक बांड चिकित्सकों की पदस्थापना के संबंध में भी निर्देश दिए। इस दौरान अवगत कराया गया कि ग्राम जनवार में पीपीपी मोड पर बनने वाले चिकित्सा महाविद्यालय की भूमि का सीमांकन 18 दिसम्बर को कराया जाएगा। वर्तमान जिला अस्पताल के 300 बेड के अलावा मेडिकल कॉलेज की निर्माण संस्था द्वारा पृथक से भी 200 बिस्तर की स्थापना की जाएगी। आगामी दिवस में मुख्यमंत्री द्वारा भूमिपूजन उपरांत निर्बाध रूप से चिकित्सा महाविद्यालय का निर्माण शुरू हो जाएगा। प्रभारी मंत्री ने स्वास्थ्य केन्द्रों में रिक्त पदों की जानकारी लेकर सभी स्वास्थ्य अधिकारी-कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से मुख्यालय पर निवास करने, 108 एम्बुलेंस सेवा को बेहतर बनाने, अस्पताल संचालन समय में चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक सहित आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों के वेतन भुगतान मामले पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निजी एजेंसी द्वारा राशि के एवज में कर्मचारियों की नियुक्ति के मामले की विधिवत जांच कर लापरवाही प्रमाणित पाए जाने पर कंपनी के विरूद्ध कार्रवाई करें। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा आउटसोर्स कर्मियों पर अपना नियंत्रण रखा जाए। इन कर्मचारियों के कार्यों का मूल्यांकन एजंेसी पर न छोड़ा जाए, बल्कि अपने स्तर पर स्वयं कार्यों का आकलन करें। इस दौरान अस्पताल एवं स्वास्थ्य केन्द्रों में उपकरणों के क्रय के बाद नियमित रूप से इनके संचालन की व्यवस्था भी सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया गया। नल जल परियोजनाओं की एनओसी के लिए जपं सीईओ को करें अधिकृत बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं जल जीवन मिशन अंतर्गत ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए जिले में संचालित परियोजनाओं के कार्यों की समीक्षा भी हुई। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री द्वारा समयबद्ध रूप से परियोजना का कार्य पूर्ण करने तथा कार्यपूर्णता पर एनओसी के लिए जनपद पंचायत सीईओ को अधिकृत करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि महत्वाकांक्षी नल जल योजनाओं के सफल संचालन के लिए सही व उचित जल स्त्रोत का चिन्हांकन आवश्यक है। पन्ना विधायक द्वारा अजयगढ़ क्षेत्र में गुणवत्ताहीन पाइपलाइन बिछाने तथा सड़क मरम्मत कार्य में लापरवाही बरतने संबंधी जानकारी से अवगत कराने पर प्रभारी मंत्री द्वारा तत्काल समिति का गठन कर जांच के लिए निर्देशित किया गया। उर्वरक वितरण व्यवस्था की समीक्षा के दौरान यूरिया एवं डीएपी खाद की पन्ना जिले के लिए पृथक रैक की उपलब्धता, धरमपुर में वितरण केन्द्र बनाने तथा किसानों को सोलर पम्प जैसी स्कीम से लाभांवित करने के निर्देश भी दिए गए। प्रभारी मंत्री ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा प्राकृतिक एवं आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने तथा कीटनाशक व खाद के सीमित उपयोग के लिए किसानों को जागरूक किया जाए। अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के लिए संचालित योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन तथा विद्यार्थियों के शत प्रतिशत छात्रवृत्ति प्रकरणों के निराकरण सहित केन-बेतवा लिंक परियोजना से छूटे जिले के शेष ग्रामों में भी कृषि सिंचाई के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। प्रत्येक मजरे टोले तक सड़क निर्माण तथा पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में माइनिंग ब्रांच के संचालन तथा प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में उच्च शिक्षा के नवीन … Read more

प्रधानमंत्री की परीक्षा पे चर्चा: विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावकों को परीक्षा के तनाव से मिलेगी मुक्ति

रायपुर परीक्षा पे चर्चा 2026 का नौवां संस्करण जनवरी 2026 में आयोजित होगा। केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह कार्यक्रम पीएम मोदी का एक इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म है, जिसमें देश-विदेश के विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक परीक्षा से जुड़े तनाव, अनुभव और सकारात्मक तैयारी पर चर्चा करते हैं। कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन  MyGov पोर्टल (innovateindia1.mygov.in) पर शुरू हो चुके हैं और इसकी अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 है। कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थीए शिक्षक और अभिभावक ऑनलाइन डब्फ आधारित प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकते हैं। तनाव को कम करने का प्रयास  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देशभर के विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों को सीधे संवाद करने का एक और सुनहरा अवसर मिल रहा है। प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी परीक्षा पे चर्चा के भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा जो इस श्रंखला का 9 वाँ संस्करण होगा। इस मंच के माध्यम से  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्यों से चयनित बच्चों द्वारा परीक्षा से संबंधित पूछे गए सवालों के जवाब देकर उनका मार्गदर्शन करेंगे और उनके तनाव को कम करने का प्रयास करेंगे। सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उनकी मदद कर सकें  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी माता-पिता और शिक्षकों के साथ बातचीत भी करते हैं, ताकि वे छात्रों के सभी सपनों और लक्ष्यों को पूरा करने के लिए उनकी मदद कर सकें और अपने बच्चों और छात्रों को एग्जाम के तनाव को दूर करने में मदद कर सकें।  परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में केवल कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के छात्र एवं कक्षा 6 से 12 छात्रों के पेरेंट्स रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन करके वे अपना सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सकते हैं। गौरतलब है कि पीपीसी 2025 के 8 वें संस्करण ने भारत और विदेशों में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से पंजीकरण के मामले में एक अभूतपूर्व मील का पत्थर स्थापित किया है। कार्यक्रम की अपार लोकप्रियता छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को संबोधित करने और परीक्षाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने में इसकी सफलता को उजागर करती है। प्रतिभागी अपने प्रश्न 11 जनवरी 2026 तक अपलोड कर सकते हैं इस कार्यक्रम में कक्षा 6 से 12 वीं के विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक सभी अपने प्रश्न अधिकतम 500 शब्दों में तैयार कर सकते हैं। प्रश्न अपलोड करने की सुविधा भारत सरकार के पोर्टल   http://innovateindia1.mygov.in  पर उपलब्ध है।  परीक्षा पे चर्चा विकल्प में प्रतिभागी पुरस्कारों से जुडी तिथियों और अन्य दिशा-निर्देशों की जानकारी देख सकते हैं। कार्यक्रम के लिए प्रश्न अपलोड करने की प्रक्रिया 1 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है और प्रतिभागी अपने प्रश्न 11 जनवरी 2026 तक जमा (अपलोड)कर सकते हैं।

प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार ने की प्रेस वार्ता में महत्वपूर्ण बातें साझा

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री तथा पन्ना जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर संवाद किया। प्रदेश सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जनसंपर्क कार्यालय पन्ना द्वारा आयोजित की गई इस पत्रकार वार्ता में प्रभारी मंत्री द्वारा हर वर्ग के लिए संचालित योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी गई। साथ ही संचार माध्यमों के प्रतिनिधियों के प्रश्नों का समाधान भी किया गया। पन्ना जिले की दो वर्ष की उपलब्धियों के बारे में भी अवगत कराया गया। प्रभारी मंत्री श्री परमार ने मीडिया प्रतिनिधियों को वर्तमान सरकार द्वारा प्रदेश के लिए किए गए प्रयासों, योजनाओं, उपलब्धियों, उल्लेखनीय नवाचार, अधोसंरचना विकास, सामाजिक क्षेत्र में उपलब्धि तथा अन्य कार्यों से अवगत कराया। इसके अलावा निवेश की नई नीतियों, गरीब कल्याण मिशन, महिला सशक्तिकरण, कृषक व युवा हितैषी योजनाओं के क्रियान्वयन सहित स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में अर्जित उल्लेखनीय उपलब्धि तथा भविष्य की कार्ययोजना के बारे में जानकारी दी गई। पत्रकार वार्ता के दौरान पत्रकारों ने जिले के अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं के संबंध में भी प्रभारी मंत्री का ध्यानाकर्षण कराया तथा अपने सुझाव भी दिए। प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री एवं विधायक पन्ना बृजेन्द्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष मीना राजे, प्रभारी कलेक्टर उमराव सिंह मरावी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वंदना चौहान, प्रभारी जनसंपर्क अधिकारी देवेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रिंट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के पत्रकारगण भी उपस्थित थे।  

रायपुर: बस्तर में नक्सलवाद के ख़ात्मे के बाद मूलभूत सुविधाओं का विकास तेज़ी से हो रहा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : नक्सलवाद के उन्मूलन के साथ-साथ बस्तर में मूलभूत सुविधाओं का तेजी से हो रहा विकास – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर अंचल का विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। नक्सलवाद के उन्मूलन के साथ-साथ बस्तर में मूलभूत सुविधाओं का विकास तेजी से किया जा रहा है और बस्तर अब विकास की दिशा में सशक्त गति से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय आज जगदलपुर में आयोजित बस्तर ओलम्पिक 2025 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक समृद्ध राज्य है, किंतु माओवाद की समस्या प्रारंभ से ही राज्य के विकास में एक बड़ी बाधा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प के कारण अब माओवाद के अंत की स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। नियद नेल्ला नार योजना के दायरे को 5 किलोमीटर से बढ़ाकर 10 किलोमीटर तक विस्तारित किया गया है, जिसके माध्यम से 403 गांवों में बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचने लगी हैं। मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि माओवाद के कारण बंद पड़े स्कूल अब पुनः खुल रहे हैं। सड़कों का व्यापक नेटवर्क विकसित कर अंदरूनी इलाकों को आवागमन की सुविधा से जोड़ा जा रहा है। माओवाद से मुक्त गांवों में जनहितकारी योजनाओं का पूर्ण सेचुरेशन किया जा रहा है। इन सभी सकारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप विकास के प्रति आमजन का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने बस्तर ओलम्पिक में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें बधाई दी तथा आगामी वर्ष और बेहतर प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि बस्तर देश में एक नया इतिहास रच रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूर्ण रूप से समाप्त होगा और बस्तर पुनः खुशहाल बनेगा। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्रीद्वय अरुण साव एवं विजय शर्मा ने भी संबोधित किया और बस्तर ओलम्पिक के सफल आयोजन के लिए खिलाड़ियों को बधाई दी। विधायक जगदलपुर किरण देव ने स्वागत उद्बोधन में सभी अतिथियों एवं खिलाड़ियों का आत्मीय स्वागत किया। समारोह के अंत में सांसद महेश कश्यप ने आभार व्यक्त किया। इस मौके पर केबिनेट मंत्री केदार कश्यप, सांसद भोजराज नाग, बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुलता उसेंडी, विधायक सर्वविक्रम उसेंडी, नीलकंठ टेकाम, विनायक गोयल, आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, नगर निगम जगदलपुर के महापौर संजय पांडे सहित अनेक जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में खेलप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम

जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लॉन्च करेंगे उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम मुख्य सचिव होंगे परियोजना के अध्यक्ष, प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव सदस्य लखनऊ उत्तर प्रदेश को स्वच्छ, स्वस्थ और आर्थिक रूप से अधिक सक्षम राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर ठोस कदम उठा रही है। वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी माह जनवरी 2026 में उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपीसीएएमपी) का शुभारंभ करेंगे। इस परियोजना के शासी निकाय की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव करेंगे, जबकि प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव सदस्य के रूप में नामित होंगे। वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के उद्देश्य से योगी सरकार विश्व बैंक के सहयोग से यूपीसीएएमपी परियोजना का कार्यान्वयन कर रही है। इसी क्रम में हाल ही में यूपीसीएएमपी प्राधिकरण के शासी निकाय की दूसरी बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजना के कार्यान्वयन से जुड़े सभी आवश्यक कदमों की समयबद्ध प्रगति की अद्यतन जानकारी आगामी बैठक में प्रस्तुत की जाए। इस परियोजना को लेकर बीते 3 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए), विश्व बैंक और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच परियोजना वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी। इसके पश्चात 10 दिसंबर 2025 को विश्व बैंक के निदेशक मंडल द्वारा परियोजना को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई। शासी निकाय को परियोजना की संरचना, वित्तपोषण व्यवस्था और विशेष प्रयोजन वाहन के रूप में गठित यूपीसीएएमपी प्राधिकरण के माध्यम से कार्यान्वयन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी गई। यूपीसीएएमपी भारत की अपनी तरह की पहली वायुक्षेत्र-आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन परियोजना है, जिसे इंडो-गंगा के मैदानों में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को लक्षित करते हुए एक बहु-क्षेत्रीय कार्यक्रम के रूप में विकसित किया गया है। यह परियोजना विश्व बैंक द्वारा IIT कानपुर, IIT दिल्ली और नॉर्वेजियन इंस्टीट्यूट फॉर एयर रिसर्च (NILU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से किए गए व्यापक वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है। इसमें ऑस्ट्रिया के IIASA द्वारा विकसित GAINS मॉडल का उपयोग किया गया है। यूपीसीएएमपी का कुल परिव्यय 304.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसमें 299.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण (लगभग 46,188 करोड़ येन के बराबर) और 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान शामिल है। इस परियोजना को वर्ष 2025 से 2031 तक छह वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। परियोजना उद्योग, परिवहन, कृषि, सड़क की धूल, अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ खाना पकाने जैसे प्राथमिक क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिससे उत्सर्जन में कमी के लिए एक समन्वित और प्रभावी रणनीति अपनाई जा सके। इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य वायुक्षेत्र आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन को सुदृढ़ करना और विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन को कम करना है। इसके तहत लगभग 39 लाख परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने के समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर में 15,000 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि 13,500 प्रदूषणकारी भारी वाहनों के प्रतिस्थापन के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। कृषि और पशुधन प्रबंधन के क्षेत्र में परियोजना के अंतर्गत पोषक तत्व उपयोग दक्षता प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए खेतों में नाइट्रोजन निगरानी प्रणालियों की तैनाती, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करना, तथा खाद आधारित उर्वरकों और बायोगैस स्लरी के मानकीकृत उपयोग के माध्यम से पशुधन अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र में यूपीसीएएमपी संसाधन-कुशल ईंट निर्माण और टनल भट्टों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन देगा। इसके साथ ही औद्योगिक क्लस्टरों के लिए स्वच्छ वायु प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी तथा मिनी बॉयलर से सामान्य बॉयलर सुविधाओं में परिवर्तन के लिए नीति निर्माण और व्यवहार्यता अध्ययन किया जाएगा। वायु प्रदूषण में प्रभावी कमी लाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ सहयोग बढ़ाकर सीमा-पार उत्सर्जन से निपटने की रणनीति भी अपनाएगी, जिससे कम लागत में अधिक प्रभावी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

बस्तर सहित पूरे भारत से नक्सलवाद 31 मार्च 2026 तक खत्म हो जायेगा- अमित शाह

रायपुर : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया बस्तर सहित पूरे भारत से नक्सलवाद 31 मार्च 2026 तक खत्म हो जायेगा- अमित शाह अगले 5 साल में बस्तर संभाग देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनेगा-अमित शाह 2026 का बस्तर ओलंपिक नक्सलवाद से मुक्त बस्तर में होगा नक्सलवाद छोड़कर 700 से अधिक युवाओं का बस्तर ओलंपिक 2025 से जुड़ना हम सभी के लिए गर्व की बात है आत्मसमर्पण करने वालों ने भय की जगह आशा व विनाश की जगह विकास को चुना, यही मोदी जी की विकसित बस्तर की संकल्पना है जिस बस्तर में पहले ‘लाल सलाम’ के नारे लगते थे, अब वहाँ ‘भारत माता की जय’ के नारे गूँज रहे हैं शांति ही विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, इसलिए नक्सली हथियार डालकर मुख्यधारा में आयें और पुनर्वसन नीति का लाभ उठाएं आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक में बस्तर के खिलाड़ी देश का नाम रोशन करें, इसके प्रबंध किए जा रहे हैं बस्तर ओलम्पिक 2025 में 3 लाख 91 हज़ार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जो ढाई गुना बढ़ा है, खिलाड़ियों की वृद्धि दर में बहनों ने भाइयों से बाजी मारी आत्मसमर्पण करने वाले और नक्सल हिंसा के शिकार लोगों के लिए हम बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना लाएंगे केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर विकसित बस्तर बनाने के लिए कार्य कर रही हैं गृह मंत्री ने समाज के प्रमुखों और समाजसेवकों से अपील करते हुए कहा कि वे हथियारबंद नक्सलियों को समझाकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में सहयोग करें रायपुर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमने तय किया था कि 31 मार्च, 2026 से पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म कर देंगे और आज बस्तर ओलंपिक- 2025 में हम इस कगार पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष नवंबर-दिसंबर तक बस्तर ओलंपिक-2026 के समय तक पूरे भारत और छत्तीसगढ़ से लाल आतंक समाप्त हो चुका होगा औऱ नक्सलमुक्त बस्तर आगे बढ़ रहा होगा। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने यह संकल्प लिया है कि पूरे बस्तर और भारत को नक्सलमुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि हमें यहीं नहीं रुकना बल्कि कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के 7 ज़िलों का संभाग बस्तर, दिसंबर 2030 दिसंबर तक देश के सबसे अधिक विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के हर व्यक्ति को रहने के लिए घर, बिजली, शौचालय, नल से पीने का पानी, गैस सिलिंडर, 5 किलो अनाज और 5 लाख तक का मुफ्त इलाज, बस्तर के घर घर में पहुचाने का संकल्प हमारी सरकार का संकल्प है। शाह ने कहा कि हमने अगले पांच साल में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार और विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर बस्तर को विकसित बस्तर बनाने के लिए मिलकर आगे बढ़ेंगे। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर का हर गांव सड़क से जुड़ेगा, वहां बिजली होगी, 5 किलोमीटर के क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाएं होंगी और सबसे घने पीएचसी/सीएचसी का नेटवर्क बनाने का काम भी हमारी सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन उपज की प्रोसेसिंग के लिए कोऑपरेटिव आधार पर यूनिट्स लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर के सातों ज़िले सभी आदिवासी ज़िलों में सबसे अधिक दूध उत्पादन कर डेयरी के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने वाले ज़िले बनेंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर में नए उद्योग, उच्च शिक्षा की व्यवस्था, भारत में सबसे अच्छा स्पोर्ट्स संकुल और अत्याधुनिक अस्पताल की व्यवस्था भी हम करेंगे। शाह ने कहा कि कुपोषण के लिए भी यहां विशेष स्कीम चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है और जो नक्सलवाद के कारण घायल हुए हैं, उनके लिए एक बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना भी हम लाएंगे। गृह मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि नक्सलवाद समाप्त हो क्योंकि नक्सलवादी इस क्षेत्र के विकास पर नाग बनकर फन फैलाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के साथ ही इस क्षेत्र में विकास की एक नई शुरूआत होगी और प्रधानमंत्री मोदी जी और विष्णुदेव जी के नेतृत्व में यह सबसे विकसित क्षेत्र बनेगा। अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक-2025 में सात ज़िलों की सात टीमें और एक टीम आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की थी। उन्होंने कहा कि जब 700 से अधिक सरेंडर्ड नक्सलियों ने इन खेलों में भाग लिया तो यह देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के झांसे में आकर उनका पूरा जीवन तबाह हो जाता और हथियार डालकर मुख्यधारा में आने वाले ऐसे 700 से अधिक युवा आज खेल के रास्ते पर आए हैं। शाह ने दोहराया कि 31 मार्च, 2026 को यह देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने हिंसा में लिप्त नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि अब भी गुमराह होकर हमारे ही जो लोग हाथ में हथियार लेकर बैठे हैं, वो हथियार डाल दें, पुनर्वसन नीति का फायदा उठाएं, अपने और अपने परिवार के कल्याण के बारे में सोचें और विकसित बस्तर के संकल्प के साथ जुड़ जाएं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होता, न हथियार उठाने वाले लोगों का, न आदिवासियों और न सुरक्षाबलों का भला होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शांति ही विकास का रास्ता प्रशस्त कर सकती है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके 700 नक्सलियों ने इन खेलों में खिलाड़ी के रूप में सामने आकर पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने भय की जगह आशा चुनी, विभाजन की जगह एकता का रास्ता चुना और विनाश की जगह विकास का रास्ता चुना है और यही प्रधानमंत्री मोदी जी की नए भारत और विकसित बस्तर की संकल्पना है। उन्होंने कहा कि हमारे बस्तर की संस्कृति … Read more

लातविया में बढ़ी मर्दों की कमी, महिलाएं अब ले रही हैं ‘हज़बैंड फॉर एन ऑवर’ – क्या है इसका असर?

रीगा दुनिया में ज्यादातर देशों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक होती है, लेकिन यूरोप का छोटा-सा देश लातविया बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है.यहां महिलाओं की आबादी पुरुषों से इतनी ज्यादा है कि कई महिलाएं घर का काम संभालने के लिए 'भाड़े के पति' तक रखने लगी हैं.ये पुरुष अस्थायी तौर पर बुलाए जाते हैं और घरेलू काम जैसे पाइपलाइन ठीक करना, पर्दे लगाना, बढ़ईगिरी या टीवी माउंट करना सब कुछ कर देते हैं. द सन की रिपोर्ट कहती है कि लातविया में कई कंपनियां ऐसे पुरुष उपलब्ध कराती हैं, जो तकनीकी और घरेलू मरम्मत से जुड़े काम संभालते हैं. महिलाएं फोन या ऑनलाइन बुकिंग करके 'हस्बैंड फॉर एन ऑवर' को अपने घर बुला सकती हैं और विशेषज्ञ सिर्फ 60 मिनट में पहुंचकर पाइपलाइन, पेंटिंग, बढ़ईगिरी या अन्य काम निपटा देते हैं. लातविया की एक फेस्टिवल वर्कर दनिया ने द सन से कहा कि इसमें कुछ गलत नहीं… लेकिन थोड़ा बैलेंस बनाए रखने के लिए देश में कुछ और पुरुष होने चाहिए. बात करने, फ्लर्ट करने सब में मजा आता है.उनकी दोस्त जाने ने भी कहा-इसी कमी के चलते मेरी ज्यादातर सहेलियां विदेश जाकर बॉयफ्रेंड बना रही हैं. किराए पर पतियों को क्यों बुलाती हैं महिलाएं द न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, लातविया में पुरुषों की कमी इतनी बढ़ गई है कि महिलाओं को घर के मुश्किल कामों के लिए किराए पर “घंटे भर के पति” बुलाने पड़ रहे हैं। यहां महिलाओं की संख्या पुरुषों से करीब 15% अधिक है, जिसके कारण जेंडर इम्बैलेंस पैदा हो गया है। इसी वजह से घर के वे काम, जिनमें पुरुषों की जरूरत होती है, उन्हें पूरा कराने के लिए महिलाएं कुछ समय के लिए पुरुष हेल्पर्स की सेवाएं लेती हैं। क्यों है ये चिंता करने वाली बात दुनिया के कई देशों में युवाओं की तुलना में बुजुर्गों की संख्या अधिक होती है, और यह स्थिति सामान्य मानी जाती है क्योंकि इसमें जेंडर असंतुलन जैसी समस्या कम होती है। लेकिन वर्ल्ड एटलस की एक रिपोर्ट के अनुसार, लातविया में 65 साल से अधिक उम्र के लोगों में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुनी है। इस गंभीर जेंडर इम्बैलेंस का असर ये है कि महिलाओं के लिए सही जीवनसाथी ढूंढना मुश्किल होता जा रहा है, जिससे रिश्तों को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं। पुरुषों की कमी से क्या असर पड़ता है द पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, लातविया में महिलाएं मानती हैं कि जेंडर असमानता के कारण रोजमर्रा की जिंदगी और काम वाली जगहों पर पुरुषों की कमी साफ दिखाई देती है। एक महिला ने बताया कि उसके ऑफिस में सभी सहकर्मी महिलाएं ही हैं। हालांकि माहौल अच्छा रहता है, लेकिन पुरुषों के होने से काम और भी रोचक बन जाता। इसी कमी के चलते कई महिलाएं सही पार्टनर की तलाश में विदेशों का रुख करती हैं, ताकि उन्हें बैलेंस और परफेक्ट जीवनसाथी मिल सके। कैसे सामने आया ये ट्रेंड? लातविया में पुरुषों की कमी बढ़ने के साथ ही घर के कामकाज संभालने की जिम्मेदारी अकेली महिलाओं पर आ गई. जैसे-जैसे विवाह दर गिरती गई और पुरुषों की संख्या कम होती गई, महिलाओं ने घरेलू जरूरतों के लिए पेशेवर मदद लेना शुरू किया. इसी से जन्म हुआ 'हस्बैंड फॉर एन ऑवर' जैसे सेवाओं का, जहाँ प्रशिक्षित पुरुष पैसे लेकर वही काम करते हैं जो आमतौर पर परिवार का पुरुष सदस्य करता है. जैसे मरम्मत, फिक्सिंग, इंस्टॉलेशन और रोज़मर्रा के छोटे-मोटे काम. कैसे बदली जनसंख्या की तस्वीर? लातविया के केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के  जारी ताज़ा आंकड़े चौंकाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार 18 साल से ऊपर की आबादी में सिर्फ 44.6 फीसदी लोग विवाहित हैं.15.6 फीसदी लोग तलाकशुदा हैं और 29.6 फीसदी लोग अविवाहित हैं. इसका मायने ये है कि देश में बड़ी संख्या में महिलाएं अकेली रह रही हैं और घर के दैनिक कामों में सहायता के लिए अस्थायी पति रखना, यानी पेड पार्टनर, एक उभरता ट्रेंड बन गया है. रिपोर्ट कहती है कि 100 आत्महत्याओं में 80 फीसदी से ज्यादा पुरुष होते हैं. यहां की महिलाएं पुरुषों की तुलना में औसतन 11 साल अधिक जीती हैं. देश की औसत आयु भी करीब 44.1 वर्ष है. यहां की महिलाएं इस एप्स से बुलाती हैं इस देश की महिलाओं का मानना है कि पुरुषों की कमी उन्हें हर जगह महसूस होती है। चाहे रोजमर्रा के घरेलू काम हों या इमोशनल सपोर्ट की जरूरत, हर स्थिति में पुरुषों की अनुपस्थिति खटकती है। इसी वजह से यहां Komaanda 24 जैसे प्लेटफॉर्म “Men with Golden Hands” के नाम से सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, जिनमें प्लंबिंग, कारपेंट्री, रिपेयर या टीवी इंस्टॉलेशन जैसे कामों के लिए पुरुषों को बुलाया जाता है। इसके अलावा Remontdarbi.lv नाम की वेबसाइट पर महिलाएं फोन पर बात करने या घर के कामों के लिए “घंटे भर के पति” हायर करती हैं, जो पेंटिंग, घरेलू मरम्मत और मेंटेनेंस जैसे काम संभालते हैं। ये ट्रेंड लातविया तक सीमित नहीं है पहले भी देखा गया यह कॉन्सेप्ट सिर्फ लातविया तक सीमित नहीं है। 2022 में यूके की लौरा यंग तब वायरल हो गईं जब उन्होंने अपने पति जेम्स को घर-घर जाकर छोटे-मोटे काम करने के लिए किराए पर भेजना शुरू किया, ताकि घर में थोड़ी इनकम आ सके। उनके बिजनेस का नाम है “Rent My Handy Husband”, जिसमें घर के आम काम जैसे पेंटिंग, डेकोरेशन, टाइल लगाना, कारपेट बिछाना और दूसरे DIY काम शामिल हैं। 42 साल के जेम्स एक घंटे का लगभग 44 डॉलर और पूरे दिन का 280 डॉलर चार्ज करते हैं। यह सर्विस इतनी मशहूर हो गई कि कई कामों को मना भी करना पड़ा।

भोपाल में प्रदूषण मुक्त सफर की शुरुआत, 21 दिसंबर से दौड़ेगी मेट्रो ट्रेन, मोहन सरकार की बड़ी योजना

 भोपाल मध्य प्रदेश अब देश के उन 12 चुनिंदा राज्यों में शामिल हो रहा है, जहां एक से अधिक शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। इंदौर की तरह अब राजधानी भोपाल भी मेट्रो के नये दौर में प्रवेश करने को तैयार है। प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि भोपाल में मेट्रो का संचालन 21 दिसंबर से शुरू कर दिया जाएगा। इससे राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। राजधानी के यात्रियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से प्रतीक्षित सुविधा है, जिसका उद्देश्य शहर की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के दबाव को कम कर यातायात निर्बाध बनाना है। इंदौर मेट्रो सबसे पहले चली प्रदेश में सबसे पहले इंदौर मेट्रो ट्रेन की शुरुआत 31 मई, 2025 को हुई। अभी इसका छह किलोमीटर (गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन 3 तक) के 'सुपर प्रॉयोरिटी कॉरिडोर' पर कमर्शियल रन किया जा रहा है, जो कि कुल 31.32 किमी के पहले चरण का हिस्सा है, जिसका धीरे-धीरे विस्तार हो रहा है। वहीं, भोपाल में 21 दिसंबर को कमर्शियल रन शुरू होगा। इसमें भोपाल एम्स से सुभाष नगर तक साढ़े सात किमी प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो दौड़ेगी। यह भोपाल के पहले चरण के 30 किमी का हिस्सा है। प्रदेश में इंदौर और भोपाल में कुल 60 किमी के काम को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2028 तय किया गया है। प्रदूषण मुक्त सफर मेट्रो के शुरू होने से रोजाना हजारों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त यात्रा का विकल्प मिलेगा। हालांकि अभी यात्रियों की संख्या कम है, लेकिन आने वाले समय में मेट्रो की दूरी बढ़ने के साथ उपयोग बढ़ने की बात विशेषज्ञ बता रहे हैं। साथ ही शहर के प्रमुख इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे समय और ईंधन की बचत भी होगी। राज्य सरकार का कहना है कि मेट्रो परियोजना न केवल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भोपाल को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लक्ष्य को और सुदृढ़ करेगी। मेट्रो कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। इसी तरह इंदौर में मेट्रो संचालन शुरू होने के बाद से शहरवासियों में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर उत्साह देखने को मिला है और अब भोपाल में भी इसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो ट्रेन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी। सुरक्षा के लिए ऑटोमैटिक डोर सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, यात्री सूचना प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीक इसमें शामिल हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा-कुशल प्रणाली अपनाई गई है। आने वाले महीनों में मेट्रो के अन्य चरणों पर भी तेजी से काम किया जाएगा, ताकि पूरे शहर को बेहतर नेटवर्क से जोड़ा जा सके। अभी इन 11 राज्यों में दौड़ती है मेट्रो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, गुजरात, केरल, राजस्थान, हरियाणा शामिल है। अब भोपाल मेट्रो के व्यावसायिक संचालन की शुरुआत के साथ मध्य प्रदेश 12वां राज्य बन गया। देश के इन शहरों में चल रही मेट्रो     दिल्ली-एनसीआर: देश का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क     कोलकाता: भारत की पहली मेट्रो (1984 में शुरू)।     मुंबई: देश के बड़े मेट्रो नेटवर्क में से एक।     बेंगलुरु (नम्मा मेट्रो): दक्षिण भारत का प्रमुख नेटवर्क।     हैदराबाद: आधुनिक मेट्रो प्रणाली के लिए जाना जाता है।     चेन्नई: एक और बड़ा महानगर मेट्रो।     जयपुर: राजस्थान की राजधानी में मेट्रो।     कोच्चि (केरल): दक्षिण भारत का महत्वपूर्ण मेट्रो नेटवर्क।     लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी में मेट्रो।     नोएडा-ग्रेटर नोएडा: दिल्ली से सटा हुआ मेट्रो नेटवर्क।     अहमदाबाद: गुजरात का मेट्रो नेटवर्क।     नागपुर: अपनी डबल-डेकर मेट्रो के लिए प्रसिद्ध।     कानपुर: उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण मेट्रो।     पुणे: महाराष्ट्र का एक और मेट्रो शहर।     गुरुग्राम (रैपिड मेट्रो): दिल्ली मेट्रो से जुड़ा हुआ। यहां चल रहा काम  पटना, आगरा में भी मेट्रो या तो चल रही है या निर्माण के विभिन्न चरणों में है, जिससे भारत का मेट्रो नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है।  

FD या बचत खाते से लोन लिंक करने पर बैंक को मिलेगी ग्राहक की अनुमति, लोन लिमिट अब सुरक्षित

नई दिल्ली  बैंक और लोन ऐप (Banks and Loan apps) अब अपनी मर्जी से लोन की लिमिट को नहीं बढ़ा सकेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने स्पष्ट किया कि ग्राहक की लिखित मंजूरी के बाद ही लोन सीमा को बढ़ाया जा सकता है। बैंकों की लोन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए आरबीआई ने नए दिशा-निर्देश (RBI New Rules) जारी किए हैं। रिजर्व बैंक ने डेटा संरक्षण को लेकर साफ किया है कि बिना ग्राहक की मंजूरी के उसका डाटा थर्ड पार्टी से साझा नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि बैंकों द्वारा अपनी मर्जी से लोन सीमा बढ़ाए जाने को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। छोटी धनराशि वाले कर्ज को लेकर शिकायतें सबसे अधिक थीं। उदाहरण के लिए अगर किसी ग्राहक ने 20 हजार का लोन मंजूर कराया और तय किस्तों पर ग्राहक द्वारा लोन चुकाया जा रहा है तो कुछ बैंक और लोन ऐप आखिरी किस्त आने से पहले बिना स्वीकृति ग्राहक के खाते में 10 हजार रुपये का लोन जारी कर देते हैं। बैंक इसके पीछे अच्छी साख का तर्क देते हैं। ग्राहक इसे लौटाना चाहे तो बैंक आनाकानी करते हैं और ग्राहक पर जुर्माना लगाया जाता है। कर्ज लेने वाले ग्राहकों की एफडी या बचत ब्लॉक न करें आरबीआई के नए नियमों के तहत बैंक कर्ज को किसी सावधि जमा यानी एफडी, बचत खाते या सुरक्षा योजना से लिंक नहीं कर सकते। बैंकों को लेकर शिकायत थी कि छोटे ऋण जारी करते वक्त गारंटी के तौर पर ग्राहक की एफडी, खाते या अन्य सुरक्षा योजना को लिंक किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जब तक ऋण पूरा अदा नहीं होता है या कोई किस्त जमा नहीं जाती है तो बैंक ग्राहक को एफडी तोड़ने की इजाजत नहीं देते। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि घर के खर्च और आय का आकलन बैंकों के लिए करना जरूरी है, लेकिन ऋण के बदले एफडी, खाते या किसी अन्य सुरक्षा को लिंक नहीं किया जा सकता। जरूरत का डेटा ही ले सकेंगे बैंक : कर्ज सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए नए सख्त नियम जारी किए गए हैं। नियमों में डेटा कलेक्शन से लेकर उसकी स्टोरेज, थर्ड-पार्टी शेयरिंग और सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की रिपोर्टिंग तक के प्रावधान शामिल हैं। मोबाइल की फाइल, फोटो, कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग आदि किसी भी संवेदनशील डेटा तक पहुंच नहीं होगी। कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन जैसी सुविधाओं का केवल एक बार उपयोग केवाईसी के लिए ही किया जा सकेगा।  जरूरत का डेटा ही ले सकेंगे बैंक कर्ज सेवा प्रदाता कंपनियों के लिए नए सख्त नियम जारी किए गए हैं। नियमों में डेटा कलेक्शन से लेकर उसकी स्टोरेज, थर्ड-पार्टी शेयरिंग और सभी डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की रिपोर्टिंग तक के प्रावधान शामिल हैं। अब बैंक और उनके पार्टनर केवल जरूरत के आधार पर ही ग्राहक का डेटा लें सकेंगे, जिसके लिए ग्राहकों की स्पष्ट सहमति लेनी अनिवार्य होगी। ग्राहक के मोबाइल की फाइल, फोटो, कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग आदि किसी भी संवेदनशील डेटा तक पहुंच नहीं होगी। कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन जैसी सुविधाओं का केवल एक बार उपयोग केवाईसी के लिए ही किया जा सकेगा। ग्राहकों को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी डेटा शेयरिंग को रोक सकें और पहले दी गई सहमति को वापस ले सकेंगे। ग्राहक बैंक/एलएसपी से अपना डेटा डिलीट करवाने की मांग कर सकें। किसी भी थर्ड-पार्टी के साथ ग्राहक की जानकारी साझा करने से पहले ग्राहक की स्पष्ट सहमति जरूरी होगी। ग्राहकों के हित में अनिवार्य नियम – बैंकों को दस्तावेज सत्यापित ई-मेल व एसएमएस पर देने होंगे। – धनराशि ऐप या एजेंट नहीं सीधे ग्राहक के खाते में जाएगी। – समय से पहले बिना जुर्माने कर्ज चुकाने का अवसर देना होगा। – रिकवरी एजेंट की जानकारी ग्राहक को पहले से भेजनी होगी। – कोई तीसरी पार्टी पैसे के लेनदेन को नियंत्रित नहीं कर सकती। ग्राहकों के हित में अनिवार्य नियम – बैंकों को दस्तावेज सत्यापित ई-मेल व एसएमएस पर देने होंगे। – धनराशि ऐप या एजेंट नहीं सीधे ग्राहक के खाते में जाएगी। – समय से पहले बिना जुर्माने कर्ज चुकाने का अवसर देना होगा। – रिकवरी एजेंट की जानकारी ग्राहक को पहले से भेजनी होगी। – कोई तीसरी पार्टी पैसे के लेनदेन को नियंत्रित नहीं कर सकती।