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मोहन सरकार के दो वर्षों में छह लाख को मिली नौकरी, तीन साल में 20 लाख को मिलेगी रोजगार की सुविधा

भोपाल   मोहन सरकार अपने दो वर्ष पूरे कर चुकी है और अब शेष तीन वर्षों के लिए सरकार ने विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है। सरकार ने साफ किया है कि आने वाले वर्षों में उसका मुख्य फोकस रोजगार, शहरी विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर, और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर रहेगा। इन सेक्टरों को राज्य के विकास के लिए निर्णायक माना जा रहा है। रोजगार: सबसे बड़ा फोकस राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए रोजगार अवसरों का सृजन है- चाहे सरकारी क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र। सरकार ने आगामी तीन वर्षों में 20 लाख युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य तय किया है। विभागों में खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जा रही है और कई विभागों में भर्ती संबंधी विज्ञप्तियां भी जारी हो चुकी हैं। सरकार का दावा है कि पिछले दो वर्षों में 6 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। स्वरोजगार योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा और 30,000 नए उद्यमियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित करने की योजना है। 38 शहरों का नया जीआईएस मास्टर प्लान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग द्वारा प्रदेश के 38 शहरों के जीआईएस आधारित मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे। साथ ही महानगर क्षेत्र कानून लागू किया जाएगा। टीडीआर पोर्टल का विस्तार, टीओडी नीति का क्रियान्वयन और सिंहस्थ 2028 के लिए एकीकृत मास्टर प्लान आधारित विकास किया जाएगा। डीपीडीपी कानून के अनुरूप विभागीय पोर्टल का आधुनिकीकरण किया जाएगा। नक्शाविहीन गांवों का डिजिटलीकरण, भू-अर्जन प्रक्रियाओं को एंड-टू-एंड ऑनलाइन करने और नई आबादी की भूमि का चिन्हांकन भी योजना का हिस्सा है। विश्वास-आधारित डायवर्ज़न प्रक्रिया भी लागू की जाएगी। जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल हर जनजातीय विकासखंड में सांदीपनि स्कूल, एकलव्य विद्यालय, माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर और बालक आदर्श आवासीय विद्यालय की स्थापना की योजना है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। जल जीवन मिशन- लक्ष्य से पहले पूरा करने का दावा प्रदेश सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समयसीमा दिसंबर 2028 तय की है, लेकिन मध्य प्रदेश इसे मार्च 2027 तक पूरा कर देश में मिसाल पेश करेगा। मिशन के संचालन और संधारण के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार की जाएगी, ताकि जल आपूर्ति किसी भी परिस्थिति में बाधित न हो। 

किसानों की सेवा को सम्मान, सहकारी बैंकों पर कराधान पर आयोजित कार्यशाला

भोपाल :  अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक श्री मनोज गुप्ता ने सहकारी बैंकों पर लागू कराधान पर एक दिवसीय कार्यशाला कहा कि किसानों की सेवा करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है। सेवा के लिए ज्ञान अर्जित करें और विशेषज्ञता प्राप्त करें। वे आज अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कालेज, भोपाल में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। नाबार्ड के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार साहू, उप महाप्रबंधक नन्दू नायक,अपेक्स बैंक के प्राचार्य श्री पी.एस.तिवारी, वि.क.अ श्री अरुण मिश्र, उप महाप्रबंधक श्री के.टी.सज्जन, सहायक महाप्रबंधक श्री अरविंद बौद्ध, विषय विशेषज्ञ श्री अमूल राहंणेकर, चार्टड अकाउंटंट उपस्थित थे। श्री गुप्ता ने कहा कि हमारा प्रयास इस प्रशिक्षण संस्थान को देश में सर्वश्रेष्ठ बनाने का है। हमारा प्रयास बेहतर माहौल व आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण वातावरण में सभी को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान करना है। इसी कड़ी में आज इस कांफ्रेंस हाल का उद्घाटन हुआ है। नाबार्ड के महाप्रबंधक श्री सुरेश कुमार साहू ने प्रदेश में अल्पकालीन सहकारी संरचना को सुदृढ़ीकरण बनाने के प्रयास करने पर जोर दिया। आरंभ में अपेक्स बैंक ट्रेनिंग कालेज के प्राचार्य श्री पी.एस.तिवारी अतिथियों का स्वागत एवं आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए अवगत कराया कि प्रबंध संचालक अपेक्स बैंक के दूरदर्शी व सकारात्मक दृष्टिकोण व नाबार्ड के सहयोग से प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर व संख्या दुगनी होने में सफलता प्राप्त हुई है। नाबार्ड के लखनऊ स्थित संस्थान "बर्ड" ने "ए" एक्रिडेशन प्रदान किया है । आभार प्रदर्शन संकाय सदस्य श्री आर.के.दुबे ने किया।  

रायपुर: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने द्वितीय नेशनल होम्योपैथिक सेमिनार का शुभारंभ किया

रायपुर : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने द्वितीय नेशनल होम्योपैथिक सेमिनार का किया शुभारंभ देश भर से आए विशेषज्ञ कैंसर तथा अन्य बीमारियों के उपचार पर करेंगे दो दिनों तक मंथन रायपुर होम्योपैथिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन रायपुर द्वारा आयोजित द्वितीय नेशनल होम्योपैथिक सेमिनार का आयोजन 13 से 14 दिसंबर तक रायपुर में किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने शनिवार को इस सेमिनार का शुभारंभ किया। सेमिनार में होम्योपैथी के माध्यम से कैंसर उपचार की संभावनाओं सहित विभिन्न विषयों पर दो दिनों तक गहन चर्चा होगी। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने द्वितीय नेशनल होम्योपैथिक सेमिनार का किया शुभारंभ कार्यक्रम में डायरेक्टर आयुष सुसंतन देवी जांगड़े, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.के. पात्रे, एम.ए.आर.बी.एच. के प्रेसिडेंट डॉ. आनंद चतुर्वेदी, रजिस्ट्रार आयुष डॉ. संजय शुक्ला, डॉ. विजय शंकर मिश्र, डॉ. जे. पी. शर्मा सहित प्रदेश और देश के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक एवं विशेषज्ञ शामिल हुए। सेमिनार को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में होम्योपैथी का भविष्य में बड़ा योगदान होने वाला है। अनुभव और ज्ञान से ही मनुष्य ताकतवर बनता है, इसलिए होम्योपैथी के युवा चिकित्सकों को अपने वरिष्ठ और अनुभवी चिकित्सकों से सीख लेकर इस विद्या को आगे बढ़ाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है। पहले लोग इलाज के लिए राज्य से बाहर जाते थे, लेकिन अब प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा बढ़ा है। आसपास के राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। यहां मेडिकल टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं और रायपुर विश्व की टॉप 10 संभावनाशील शहरों में शामिल हो रहा है। उन्होंने बताया कि रायपुर में योग एवं नेचुरोपैथी कॉलेज खोला जा रहा है। साथ ही नव रायपुर में 5 हजार बेड की मेडिसिटी स्थापित करने की योजना पर भी कार्य चल रहा है। सरकार का उद्देश्य लोगों का विश्वास जीतना है और सभी चिकित्सा पद्धतियों को समान महत्व दिया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में होम्योपैथी का भविष्य उज्ज्वल है। सरकार आपके सुझावों को सुनेगी और उन्हें लागू करने का हरसंभव प्रयास करेगी।

भोपाल मेट्रो का पहला चरण: एम्स से सुभाष नगर तक सिर्फ 10 मिनट, पहले सप्ताह यात्रा निःशुल्क

 भोपाल  भोपाल मेट्रो पटरियों पर 70 से 80 की रफ्तार से दौड़ेगी। चूंकि स्टेशन एक-एक किलोमीटर की दूरी पर हैं, इसलिए मेट्रो अपनी निर्धारित 90 की रफ्तार से नहीं चल पाएगी। एम्स से सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक की दूरी मेट्रो मात्र 10 मिनट पूरी करेगी। हर स्टेशन पर मेट्रो एक मिनट का हाल्ट लेगी। यही दूरी यदि दो पहिया वाहन से तय करने में कम से कम आधा घंटा लगाता है। वहीं चार पहिया वाहन से यह दूरी तय करने में 20 मिनट लगते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो मेट्रो से सफर करने में यात्री मात्र 10 मिनट में सुभाष नगर से एम्स तक पहुंच जाएंगे। इससे यात्रियों को समय भी बचेगा और ट्रैफिक जाम से निजात मिलेगी। पहले सप्ताह जनता के लिए फ्री रहेगी मेट्रो शहर के नागरिकों को लोकार्पण के बाद पहले सप्ताह फ्री में यात्रा करने को मौका मिलेगा । इसके बाद यात्री मैन्युअली टिकट खरीदकर मेट्रो में यात्रा कर सकें। ज्ञात हो कि तुर्किए से हुआ अनुबंध के समाप्त होने के बाद से ऑन लाइन टिकट सिस्टम शुरू नहीं हुआ है। मंथली पास और स्कीम पर हो रहा मंथन मेट्रो का किराया 20 रुपये से शुरू होगा, जो अधिकतम 30 रुपये तक जाएगा। यात्री 30 रुपये में सुभाष नगर से एम्स तक पहुंचेंगे। मंथली पास और स्कीम पर मंथन चल रहा है। इसकी जानकारी मेट्रो प्रबंधन सोमवार यानी 14 दिसंबर को आधिकारिक रूप से जारी करेगा। जानकारी के अनुसार महिलाएं, विद्यार्थी और सीनियर सिटीजन के लिए स्कीम लगा सकता है। पहले चरण में एम्स से सुभाष नगर तक चलेगी मेट्रो भोपाल मेट्रो प्रायोरिटी कारिडोर के पहले चरण में तैयार किए गए एम्स मेट्रो स्टेशन से सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक चलेगी। यह रूट 7.5 किलोमीटर का है। इसमें आठ मेट्रो स्टेशन हैं, जो इस प्रकार हैं, एम्स, अलकापुरी, डीआरएम आफिस, रानी कमलापति रेलवे स्टेशन, एमपी नगर, बोर्ड आफिस चौराहा, केंद्रीय विद्यालय, सुभाष नगर। दूसरे चरण में पुल बोगदा से करोंद तक चलेगी मेट्रो आरेंज लाइन कारिडाेर के दूसरे चरण में करीब 9.24 किलोमीटर का रूट तैयार किया जा रहा है। इस रूट पर भी आठ मेट्रो स्टेशन हैं। जब यह रूट तैयार हो जाएगा, तब मेट्रो पुल बोगदा, ऐशबाग, रेलवे स्टेशन, नादरा बस स्टैंड, सिंधी कालोनी, डीआइजी बंगला, कृषि उपज मंडी, करोंद चौराहा मेट्रो स्टेशन तक चलेगी। इन दिनों रूट की कुल लंबाई 16.74 किलोमीटर है। ब्लू लाइन का भी शुरू हुआ काम आरेंज लाइन के साथ-साथ ब्लू लाइन पर भी मेट्रो का काम शुरू हो चुका है। भदभदा से रत्नागिरी तक बनाए जाने वाले इस कॉरिडोर पर करीब 14 मेट्रो स्टेशन रहेंगे। मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए मिट्टी की टेस्टिंग हो चुकी है। पिलर बनाए जाने के लिए स्थान का चयन हो चुका है। कुछ स्थानों पर बेरिकेड्स कर खोदने का काम शुरू हो गया है। आरेंज और ब्लू लाइन कारिडोर की कुल लंबाई करीब 30.95 किलोमीटर है। इन दोनों कारिडोर को वर्ष 2030 तक पूरा किया जाना प्रस्तावित है। एस कृष्ण चैतन्य, एमडी, एमपी मेट्रो कारर्पोरेशन का कहना है मेट्रो के आपरेशन से जुड़ी समस्त जानकारी आधिकारिक रूप से 14 दिसंबर को जारी की जाएगी । फिलहाल सिर्फ लोकार्पण की तारीख और कार्यक्रम स्थल का तय हुआ है।

भोपाल में एसआइआर प्रक्रिया में 39 दिनों में 4.43 लाख मतदाताओं के नाम कटने का खतरा, चुनाव आयोग ने दिए निर्देश

 भोपाल  राजधानी में पिछले 39 दिनों से जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआइआर) प्रक्रिया के दौरान अब तक 4 लाख 43 हजार 633 मतदाताओं के नाम कटना तय हो गया है। ये नाम मृत, शिफ्टेड, अनुपस्थित, डबल एंट्री और अन्य श्रेणियों में पाए गए हैं। वहीं नो-मैपिंग वाले मतदाताओं की संख्या घटकर 1 लाख 35 हजार 765 रह गई है। जिले में सीधे तौर पर नाम काटने के आंकड़े को लेकर शुक्रवार को भारत निर्वाचन आयोग के आब्जर्वर और ज्वाइंट सेकेटरी ब्रजमोहन मिश्रा ने राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से बात की। उन्होंने सभी प्रमुख राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों से कहा कि भोपाल में काटे जा रहे मतदाताओं के नामों को लेकर बीएलओ से वेरिफाई करा लिया जाए। जिसके बाद आब्जर्वर उत्तर के खानूगांव और दक्षिण पश्चिम के पालेटेक्निक मतदान केंद्र पर बीएलओ का काम देखने पहुंचे। हालांकि उन्हें नरेला, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर की विधानसभाओं में भी बीएलओ का काम देखने जाना था, लेकिन वह छत्तीसगढ़ के लिए रवाना हो गए। 35 हजार से अधिक बढ़े नाम काटने के मामले 7 दिसंबर को राजधानी की 7 विधानसभा क्षेत्रों में एसआइआर का कार्य 100 प्रतिशत पूरा घोषित किया गया था। उस समय अनकलेक्टेबल श्रेणी में 4 लाख 8 हजार 106 मतदाताओं के नाम हटाने प्रस्तावित थे, लेकिन नो-मैपिंग के बाद यह संख्या बढ़कर 4 लाख 43 हजार 634 हो गई। इस प्रकार पांच दिनों में 35 हजार 528 नए नाम हटाने की सूची में जुड़ गए। 18 दिसंबर तक जमा कर सकेंगे गणना पत्रक आब्जर्वर ने बताया कि चुनाव आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब मतदाता अपने गणना पत्रक 18 दिसंबर तक जमा कर सकेंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नाम हटाने की कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और सही वेरिफिकेशन के साथ की जाए, ताकि किसी भी मतदाता को अनावश्यक परेशानी न हो।

धान किसानों को 4500 करोड़ से अधिक का भुगतान

धान खरीद (2025-26) : 3.15 लाख से अधिक किसानों से हुई 19.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद  योगी आदित्यनाथ सरकार का किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर जोर  धान किसानों को 4500 करोड़ से अधिक का भुगतान  धान खरीद सत्र में पंजीकृत हुए 7.83 लाख से अधिक किसान  धान बिक्री के लिए पूरे प्रदेश में स्थापित किए जा चुके हैं 4645 धान क्रय केंद्र  35 हजार से अधिक किसानों से हुई बाजरा खरीद, 421.39 करोड़ रुपये हुआ भुगतान  लखनऊ  योगी आदित्यनाथ सरकार का अन्नदाता किसानों की ‘आर्थिक समृद्धि’ पर विशेष जोर है। योगी सरकार एक तरफ न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के लिए 4645 क्रय केंद्र स्थापित कर सभी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है तो वहीं दूसरी ओर डीबीटी के माध्यम से किसानों को सीधे अकाउंट में पैसे भी भेज रही है। आंकड़ों पर ध्यान दें तो 3.15 लाख से अधिक किसानों से 19.14 लाख मीट्रिक टन धान खरीद हो चुकी है। इसके एवज में किसानों को 4500 करोड़ से अधिक का भुगतान भी किया जा चुका है। यही नहीं, बाजरा बिक्री करने वाले 35 हजार से अधिक किसानों को 421.39 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश में ‘श्रीअन्न’ की खरीद पहली अक्टूबर से हो रही है। पहली अक्टूबर से पश्चिम उत्तर प्रदेश व पहली नवंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में धान खरीद हो रही है।  पिछले सत्र से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण  योगी सरकार साल दर साल अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में 13 दिसंबर तक 6.70 लाख किसानों ने धान बिक्री के लिए पंजीकरण कराया था, जबकि 2025-26 में अब तक यह आंकड़ा 7.83 लाख से अधिक है। बाजरा बिक्री के लिए पिछले वर्ष इस अवधि तक 21630 किसानों का पंजीकरण हुआ था, जो इस वर्ष में 80 हजार से अधिक हो गया है। वहीं ज्वार व मक्का में भी पंजीकरण बढ़ गया। ज्वार बिक्री के लिए पिछले साल 12 हजार किसानों ने पंजीकरण कराया था, इस साल 16 हजार से अधिक किसानों का पंजीकरण हो चुका है। बाजरा खरीद 33 व ज्वार खरीद 11 जनपदों में हो रही है।  धान किसानों को 4500 व बाजरा किसानों को 421 करोड़ से अधिक का भुगतान खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धान की बिक्री, किसानों को भुगतान, क्रय केंद्र की व्यवस्था आदि को लेकर निरंतर समीक्षा बैठक कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को समय से भुगतान करने का निर्देश दिया है। शनिवार दोपहर 12 बजे तक 3.15 लाख किसानों से 19.14 लाख मीट्रिक टन धान खरीद हो चुकी है। इस एवज में यूपी के किसानों को 4541.94 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अब तक 4645 क्रय केंद्र भी स्थापित हो चुके हैं। वहीं ‘श्रीअन्न’ की बात करें तो बाजरा किसानों को 421.39 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है, पिछले वर्ष इस अवधि तक 187.98 करोड़ रुपये भुगतान हुआ था। सीएम योगी की मॉनीटरिंग से इस वर्ष किसानों को तेजी से भुगतान किया जा रहा है।  31 दिसंबर तक होगी ‘श्रीअन्न’ की खरीद  ‘श्रीअन्न’ की खरीद पहली अक्टूबर से शुरू हुई थी, जो 31 दिसंबर तक चलेगी। श्रीअन्न के अंतर्गत बाजरा 33, मक्का 25 व ज्वार खरीद 11 जनपदों में हो रही है। पश्चिम उत्तर प्रदेश में 31 जनवरी व पूर्वी उत्तर प्रदेश में 28 फरवरी तक धान खरीद होगी। धान (कॉमन) का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 व (ग्रेड ए) का 2389 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। ज्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य (मालदांडी) 3749, ज्वार (हाईब्रिड) 3699 रुपये प्रति कुंतल, बाजरा का 2775 व मक्का का 2400 रुपये प्रति कुंतल न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।

पंकज चौधरी ने भरा यूपी बीजेपी अध्यक्ष पद का नामांकन, योगी–केशव का मिला समर्थन

लखनऊ   उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 18वें अध्यक्ष के चुनाव के लिए चल रही अटकलों पर आज उस वक्त विराम लग गया, जब केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पंकज चौधरी के नाम का प्रस्ताव किया। संगठन चुनाव प्रभारी महेंद्र नाथ पांडेय ने बताया कि पंकज चौधरी ने चार सेट में अपना नामाकन पत्र दाखिल किया है। इन पर योगी आदित्यनाथ और कैशव मौर्य के अलावा डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, स्मृति ईरानी, स्वतंत्र देव सिंह, सूर्य प्रताप शाही, सुरेश खन्ना और बेबी रानी मौर्य बतौर प्रस्तावक हस्ताक्षर किए हैं। पार्टी के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल करने का दिन था। सुबह से ही लखनऊ स्थित बीजेपी मुख्यालय पर गहमागहमी रही। शनिवार सुबह तक दिल्ली में रहे पंकज चौधरी लखनऊ पहुंचे और वहां से पार्टी कार्यालय पहुंचकर अपना नामांकन पत्र भरा। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के अलावा पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े और महेंद्र नाथ पांडेय पहले से मौजूद रहे। विनोद तावड़े की उपस्थिति में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और मुख्यमंत्री तथा उपमुख्यमंत्री जैसे शीर्ष नेताओं के प्रस्तावक बनने से यह साफ हो गया है कि पंकज चौधरी का नाम केंद्रीय नेतृत्व द्वारा सर्वसम्मति से तय किया गया है। पंकज चौधरी की ताजपोशी क्यों अहम पंकज चौधरी महाराजगंज से सात बार के अनुभवी सांसद हैं और कुर्मी (OBC) समुदाय से आते हैं। उनकी ताजपोशी के पीछे पार्टी की गहरी राजनीतिक रणनीति है। पंकज चौधरी को अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने विपक्ष खासकर सपा के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट करेगी और प्रदेश में ओबीसी वोट बैंक पर अपनी पकड़ और मजबूत करेगी। ओबीसी नेता को सौंपकर पार्टी ने सत्ता और संगठन के बीच जातीय संतुलन को प्रभावी ढंग से साध लिया है। पूर्वांचल पर फोकस पंकज चौधरी का मजबूत आधार पूर्वांचल है, जो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए निर्णायक क्षेत्र है। पूर्वांचल में ही लोकसभा चुनाव के दौरान सपा को बड़ी जीत मिली थी। ऐसे में पंकज चौधरी के जरिए सपा बड़ा दांव खेला गया है। कल होगी औपचारिक घोषणा संगठन चुनाव प्रभारी डॉ. महेंद्रनाथ पाण्डेय द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 14 दिसंबर को नए प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की जाएगी। चूंकि नामांकन केवल पंकज चौधरी ने ही किया है और उन्हें शीर्ष नेतृत्व का समर्थन प्राप्त है, इसलिए उनका निर्विरोध निर्वाचन होना तय है। पंकज चौधरी की ताजपोशी से प्रदेश भाजपा में एक नए युग की शुरुआत होगी, जिसकी सीधी चुनौती 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए बड़ी जीत हासिल करना होगा।  

बीजेपी ने केरल निकाय चुनाव में कांग्रेस को पछाड़ा, लेफ्ट को भी लगा बड़ा झटका

तिरुवनंतपुरम केरल में सत्ता का सेमिफाइनल माने जा रहे अहम स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे अब काफी हद तक साफ हो गए हैं. राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है. वहीं सत्ताधारी सीपीएम नीत एलडीएफ को इन चुनावों में झटका लगा है. वहीं इन निकाय चुनावों में बीजेपी ने चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है. भगवा दल ने तिरुवनंतपुरम सहित कई जिला पंचायतों में जीत दर्ज की है. केरल के 6 नगर निगम, 14 जिला पंचायत, 87 नगर पालिका, 152 ब्लॉक पंचायत और 941 ग्राम पंचायत के लिए चुनाव हुए थे. राज्य के 244 केंद्रों और 14 जिला कलेक्ट्रेट में वोटों की गिनती चल रही है. यहां सभी की नजरें इन नतीजों पर हैं, क्योंकि इससे 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जनता का रुझान पता चलेगा. स्थानीय निकाय चुनाव इस बार केवल सीटों की गणित तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने राज्य की राजनीति में कुछ ऐसे मुद्दों को भी केंद्र में ला दिया, जो आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकते हैं. लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का परंपरागत दबदबा बरकरार है, कांग्रेस भी कई इलाकों में मजबूती से लड़ती दिखी, लेकिन बीजेपी के लिए यह चुनाव खास तौर पर अहम माना जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है एर्नाकुलम जिले का मुनंबम इलाका, जहां NDA की जीत को बीजेपी एक "राजनीतिक और सामाजिक टर्निंग पॉइंट" के रूप में पेश कर रही है. बीजेपी के केरल महासचिव अनूप एंटनी जोसेफ ने मुनंबम वार्ड में NDA की जीत को "ऐतिहासिक" बताया है. बीजेपी नेता का दावा है कि मुनंबम में करीब 500 ईसाई परिवार वक्फ बोर्ड के कथित अवैध दावों की वजह से अपने घरों से बेदखली के खतरे का सामना कर रहे थे. अनूप एंटनी के मुताबिक, मोदी सरकार और बीजेपी ने इस मुद्दे पर खुलकर इन परिवारों का साथ दिया, उसी का नतीजा है कि लोगों ने स्थानीय चुनाव में बीजेपी को अपना समर्थन दिया. सात दशक पुराना है वक्फ विवाद की जड़ मुनंबम वक्फ विवाद की जड़ें आज से करीब सात दशक पुरानी हैं. 1950 में सिद्दीकी सैत नामक व्यक्ति ने यह जमीन फरीद कॉलेज को दान की थी. इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने इस भूमि के कुछ हिस्से स्थानीय निवासियों को बेच दिए, जबकि इन इलाकों में लोग पहले से रह रहे थे. साल 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने इस पूरी जमीन को वक्फ संपत्ति के तौर पर रजिस्टर कर दिया, जिससे पहले हुए सभी सौदे अमान्य माने जाने लगे. इसके बाद सैकड़ों परिवारों के सामने बेदखली का संकट खड़ा हो गया. 410 परिवारों के बेदखली का डर इस फैसले के खिलाफ मुनंबम और चेराई इलाकों में 410 दिनों से भी ज्यादा समय तक आंदोलन चला. प्रभावित परिवारों ने कोझिकोड वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती दी, वहीं राज्य सरकार ने जमीन के स्वामित्व की जांच के लिए सीएन रामचंद्रन नायर आयोग का गठन किया. 2025 में केरल हाई कोर्ट के एकल पीठ ने इस आयोग को रद्द कर दिया था, लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने आयोग को बहाल करते हुए 2019 के वक्फ रजिस्ट्रेशन को "कानून के अनुरूप नहीं" बताया. सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक  रिपोर्ट के मुताबिक, 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के "नॉट वक्फ" वाले फैसले पर रोक लगा दी और जनवरी 2026 तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया. इससे फिलहाल किसी भी परिवार की बेदखली पर रोक है. मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी पहले ही भरोसा दिला चुके हैं कि किसी को जबरन नहीं हटाया जाएगा. मुनंबम की जीत को ईसाई समर्थन का संकेत मान रही बीजेपी बीजेपी अब इस पूरे विवाद को "न्याय बनाम अन्याय" की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है. मुनंबम में मिली जीत को पार्टी केरल में ईसाई समुदाय के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत मान रही है. मसलन, भले ही यह जीत प्रतीकात्मक हो, लेकिन वक्फ जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बीजेपी की आक्रामक राजनीति आने वाले समय में राज्य की चुनावी बहस को और तेज कर सकती है.  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश: दो वर्षों में छत्तीसगढ़ ने देखा विकास और स्थिरता का नया दौर

रायपुर  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपनी सेवायात्रा के दो वर्ष पूरे होने पर जनता को संबोधित करते हुए कहा कि यह समय केवल शासन का नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का रहा। उन्होंने बताया कि इन दो वर्षों में सरकार ने हर वर्ग और क्षेत्र के लोगों तक विकास की किरण पहुँचाने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री का संदेश:  प्रिय छत्तीसगढ़वासी भाइयों और बहनों, जय जोहार आज जब मैं सेवायात्रा के दो वर्ष पूरे कर रहा हूँ, तो मन अपार भावनाओं से भर गया है। यह दो वर्ष मेरे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्ष रहे , क्योंकि यह समय केवल शासन का नहीं, सेवा और समर्पण का था। आपके साथ चलने का, आपकी मुस्कान में अपने दायित्व का प्रतिबिंब देखने का अवसर मिला। इन दो वर्षों में हमने छत्तीसगढ़ के हर कोने में विकास का दीप जलाने की कोशिश की है। हमने किसानों की मेहनत को सम्मान देने के लिए सुविधाएँ बढ़ाईं, जिससे उनकी उपज का पूरा मूल्य समय पर मिल सके। युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए नई भर्तियों, प्रशिक्षण और औद्योगिक अवसरों के द्वार खोले गए। आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों का ऐसा जाल बिछाया गया जिससे विकास की रोशनी उन इलाकों तक पहुँचे जहाँ पहले उम्मीदें धुंधली थीं। हमारी बहनों के लिए सुरक्षा और सम्मान की दिशा में नए कदम उठाए गए ताकि हर घर में आत्मविश्वास और स्वावलंबन का वातावरण बने। इन सभी प्रयासों के बीच सबसे बड़ा परिवर्तन यह हुआ कि शासन अब जनता के द्वार पर है। प्रशासन और लोगों के बीच जो दूरी कभी रही, वह अब सहभागिता में बदल रही है। मुझे गर्व है कि छत्तीसगढ़ आज विश्वास और स्थिरता के एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है। भविष्य के लिए हमारी प्रतिबद्धता और भी सशक्त है। आने वाले वर्षों में हम शिक्षा, रोजगार, कृषि और ग्रामीण विकास पर और तीव्र गति से काम करेंगे। हमारा लक्ष्य है ऐसा छत्तीसगढ़, जो आत्मनिर्भर हो, जहाँ हर युवा को अवसर मिले, किसान को गर्व हो और हर नागरिक को यह विश्वास हो कि उसका शासन उसके साथ खड़ा है।* प्रिय जनों, यह यात्रा अभी लंबी है और मंज़िल बड़ी। मैं आप सबसे यही अपेक्षा करता हूँ कि इस विकास यात्रा में अपने सुझावों, अपने परिश्रम और अपने विश्वास से हमारा मार्ग रोशन करते रहें। आपकी आस्था ही हमारी शक्ति है, और आपका सहयोग ही छत्तीसगढ़ के सुनहरे भविष्य की गारंटी। – विष्णु देव साय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2 साल की उपलब्धियां गिनाईं, मध्य प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों को मिलेगा ज्यादा वेतन

भोपाल  ''जिस प्रकार से समय बदला है और समय के साथ उर्जा के क्षेत्र में सबसे सस्ती बिजली मध्य प्रदेश दे रहा है. बिजली में ऐसे-ऐसे नए प्रयोग हुए हैं कि लोग भैंचक्के होकर देख रहे हैं कि ये मध्य प्रदेश में क्या हो रहा है. हमारा सबसे लोएस्ट रेट बिजली में गया.'' यह बात प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही है. शुक्रवार को राज्य सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होने पर सीएम मोहन यादव ने राजधानी के कुशाभाऊ इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सरकार की उपलब्धियां गिनाई है. इस दौरान उन्होंने बीते दो सालों के साथ आने वाले भविष्य को लेकर भी खुलकर चर्चा की. 6-6 महीने एमपी और यूपी को मिलेगी बिजली सीएम ने कहा कि, ''बिजली में ऐसे-ऐसे नए प्रयोग हुए हैं कि लोग भौचक्के होकर देख रहे हैं कि ये मध्य प्रदेश में क्या हो रहा है. हमारा सबसे लोएस्ट रेट बिजली में गया. हमारे प्रदेश में ओंकारेश्वर, आगर और नीमच में सोलर पार्क की स्थापना की गई है. नीमच में 2 हजार मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट लगाया गया है. वो भी कंपोजिट प्रोजेक्ट है. यानि यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों के सहयोग से स्थापित किया जा रहा है.'' पानी के बाद अब बिजली की अदला-बदली सीएम मोहन यादव ने कहा, ''इस सोलर प्रोजेक्ट से 6 महीने मध्य प्रदेश और 6 महीने उत्तर प्रदेश को बिजली मिलेगी. पानी की अदला-बदली के साथ हम दूसरे राज्यों के साथ बिजली की साझेदारी भी कर रहे हैं. मुरैना के बीहड़ वाले जंगलों का बेहतर इस्तेमाल उर्जा के क्षेत्र में कैसे किया जा सकता है, इस पर भी विचार किया जा रहा है. उज्जैन में शिप्रा नदी के पानी से होगा स्नान सीएम ने बताया कि "उज्जैन में शिप्रा नदी का पानी पहले उपलब्ध नहीं था. जिससे श्रद्धालुओं को स्नान करने में समस्या होती थी. पिछली बार भी सिंहस्थ के दौरान साधु-संतों ने मटमैले पानी से स्नान किया था. लेकिन इस बार सिंहस्थ की व्यवस्था जल संसाधन विभाग ने कर दी है. 800 करोड़ रुपये की योजना तैयार किया गया है. जिससे शिप्रा का पानी उज्जैन में लाने की तैयारी है. दो राज्यों के बीच आपसी सहमति से नदी जोड़ने का अभियान भी शुरु किया गया है. इसके तहत गंभीर और खान नदी को जोड़ते हुए जमीन के नीचे टनल बनाकर जोड़ने का काम किया गया है. जिसके ऊपर खेती होगी और नीचे जलधारा बहेगी." उन्होंने आगे बताया कि "कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा की थी. इस दौरान डाक्टरों की कमी को लेकर भी चर्चा हुई थी. जिस रफ्तार से प्रदेश में मेडिकल कालेज बढ़ रहे हैं, उसी तेजी से हमको मैन पावर भी चाहिए. हेल्थ सेक्टर में एक्सपर्ट नहीं मिलने की चुनौती सरकार के सामने है, लेकिन अब हमने तय किया है कि प्राइवेट सेक्टर से अधिक वेतन देकर विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी सेवाओं में लिया जाएगा. कार्यकाल के दो साल के भीतर भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन शहर बनाने की घोषणा करने के साथ काम भी शुरू कर दिया है."