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डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 513 नए 4G मोबाइल टावरों की स्वीकृति:डिजिटल कनेक्टिविटी से सशक्त होंगे सुदूर क्षेत्र

रायपुर : नक्सल उन्मूलन के बाद विकास की ठोस पहल: दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगा डिजिटल नेटवर्क डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 513 नए 4G मोबाइल टावरों की स्वीकृति:डिजिटल कनेक्टिविटी से सशक्त होंगे सुदूर क्षेत्र 513 नए 4G टावरों से शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय समावेशन को मिलेगा बल : मुख्यमंत्री साय रायपुर, डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में बीएसएनएल के माध्यम से 513 नए 4G मोबाइल टावर स्थापित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे नक्सल प्रभावित और दूरस्थ अंचलों में शांति, सुरक्षा और विकास के साझा प्रयासों का महत्वपूर्ण प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह निर्णय नक्सल उन्मूलन की दिशा में चल रहे प्रभावी प्रयासों की एक मजबूत कड़ी है। सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई और प्रशासनिक समन्वय से जिन क्षेत्रों में स्थायित्व स्थापित हुआ है, वहां अब विकास और डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन 4G मोबाइल टावरों की स्थापना से सुदूर और दुर्गम इलाकों में रहने वाली जनता को पहली बार सुलभ और विश्वसनीय मोबाइल एवं इंटरनेट सेवाएं प्राप्त होंगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्रशासनिक सेवाओं और आपातकालीन संचार की सुविधा सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी का यह विस्तार वित्तीय समावेशन की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा। मोबाइल नेटवर्क के सशक्त होने से बैंकिंग सेवाएं, डीबीटी, यूपीआई, बीमा, पेंशन और अन्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच आम नागरिकों तक सहज रूप से सुनिश्चित हो सकेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पहल “डिजिटल इंडिया” के उस मूल उद्देश्य को साकार करती है, जिसमें अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने का संकल्प निहित है। इससे स्थानीय युवाओं को डिजिटल माध्यमों से नए अवसर मिलेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा नक्सल प्रभावित राज्यों के लिए सुरक्षा के साथ-साथ विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इस विजन के अनुरूप केंद्र के साथ मिलकर राज्य के प्रत्येक नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय छत्तीसगढ़ को डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।  

मप्र में मोहन सरकार के 2 साल: अतीत की सीख, वर्तमान की मजबूती और भविष्य की दिशा

मप्र में मोहन सरकार के दो वर्ष: अतीत, वर्तमान और भविष्य को साथ लेकर चलने का संकल्प भोपाल मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार को दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवधि में सरकार ने अतीत के सांस्कृतिक वैभव को पुनर्स्थापित करने, वर्तमान की प्रशासनिक चुनौतियों को साधने और भविष्य की विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने की दिशा में कई पहलें की हैं। मुख्यमंत्रीडॉ. यादव ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर से ही प्रदेश की पहचान को सांस्कृतिक और विकासात्मक—दोनों स्तरों पर मजबूत करने की रणनीति अपनाई। काल को तीन खंडों में विभाजित किया जाता रहा है, अतीत, वर्तमान और भविष्य। इन तीनों काल के लिए एक साथ कुछ करने की सामर्थ्य विरले ही व्यक्तित्वों में होती है। लेकिन तीनों कालों के लिए बहुत कुछ करने का चमत्कार बाबा महाकाल की नगरी के डॉ मोहन यादव ने दो साल की अवधि में कर दिखाया है। एक ओर जहां उन्होने मध्यप्रदेश के गौरवशाली अतीत को प्रभावी ढंग से संरक्षित और पुनर्स्थापित किया है, तो महाराज विक्रमादित्य के शासनकाल की झलक इन दो वर्षों के वर्तमान कार्यकाल में देखी जा सकती है। देश के इस हृदय प्रदेश को लेकर उनकी दूरगामी योजनाएं सुनहरे भविष्य के प्रति आश्वस्त करती हैं। अतीत: सांस्कृतिक धरोहर को नया आयाम सरकार ने धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया। महाकाल कॉरिडोर के विस्तार कार्यों ने उज्जैन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। राज्य के प्राचीन धरोहर स्थलों पर संरक्षण गतिविधियाँ तेज की गईं। ओंकारेश्वर क्षेत्र में अद्वैत दर्शन से जुड़े प्रकल्पों को गति दी जा रही है। भगवान श्रीकृष्ण के चरण मध्यप्रदेश की भूमि पर जिन स्थानों पर पड़े, उन्हे श्रीकृष्ण पाथेय में समाहित कर इनको तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। वर्तमान: प्रशासनिक सुधार और बुनियादी ढांचे पर फोकस दो वर्षों में सरकार ने बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता दी है। प्रमुख सड़क मार्गों, औद्योगिक कॉरिडोरों और शहरी सुविधाओं को उन्नत करने के कार्य जारी हैं। ग्रामीण सड़कों का उन्नयन भी अभियान मोड में किया जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी सुधार, रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार पर काम किया गया है। कृषि क्षेत्र में उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, सिंचाई क्षमता बढ़ाने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। महिलाओं और युवाओं के लिए योजनाओं—जैसे लाड़ली बहना और स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम—के क्रियान्वयन पर भी जोर रहा। भविष्य: निवेश, ऊर्जा और स्वास्थ्य ढांचे की तैयारियाँ राज्य सरकार ने आगामी दशक के विकास को लक्ष्य बनाते हुए कई योजनाएँ तैयार की हैं। नई औद्योगिक नीति के तहत MSME और बड़े निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। पीथमपुर, इंदौर, भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन, जल संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन ढांचे को बढ़ावा देकर हरित ऊर्जा क्षेत्र में कदम तेज हुए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं को जिला एवं ग्रामीण स्तर तक मजबूत करने की दिशा में अस्पताल उन्नयन और टेली-मेडिसिन सेवाओं का विस्तार प्रस्तावित है। संतुलित नेतृत्व का संकेत डॉ. मोहन यादव के दो वर्ष का कार्यकाल यह संकेत देता है कि सरकार अतीत के सांस्कृतिक गौरव, वर्तमान की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की विकास योजनाओं—तीनों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। आने वाले समय में इन पहलों का वास्तविक असर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों में दिखाई देगा।                                                                                                                                                   नरेंद्र शिवाजी पटेल  

मोहन सरकार की कृषि नीति का असर: मध्य प्रदेश में 55 लाख टन खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार को शुक्रवार को दो वर्ष पूरे हो गए हैं। इन दो वर्षों में कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने उत्पादन, उत्पादकता और विविधीकरण के नये रिकॉर्ड बनाए हैं। वर्ष 2023-24 से 2024-25 के बीच खाद्यान्न उत्पादन में 55 लाख टन से अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सरकार की कृषि नीति, सिंचाई विस्तार और किसान हितैषी योजनाओं की सफलता को दर्शाती है। आंकड़ों के अनुसार 2023-24 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.34 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 2024-25 में 6.13 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। वहीं, कुल कृषि उत्पादन 7.24 करोड़ टन से बढ़कर 7.79 करोड़ मीट्रिक टन हो गया। इसमें 55 लाख टन की वृद्धि हुई। यह बढ़ोतरी उन्नत बीज वितरण, फसल बीमा, सिंचाई परियोजनाओं और कृषि यंत्रीकरण का सीधा परिणाम मानी जा रही है। गेहूं, मक्का और धान ने बढ़ाया प्रदेश का मान सरकारी आंकड़ों के अनुसार गेहूं उत्पादन 2023-24 में 3.28 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में 3.82 करोड़ टन हो गया। मक्का उत्पादन 48.68 लाख टन से बढ़कर 69.37 लाख टन, धान का उत्पादन 1.40 करोड़ से थोड़ा घटकर 1.36 करोड़ टन हुआ। हालांकि, धान की उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 3415 किलोग्राम से बढ़कर 3551 किग्रा हो गई। दलहन-तिलहन भी बढ़ा रिपोर्ट के अनुसार सोयाबीन उत्पादन 66.24 लाख टन, मूंगफली उत्पादन 15.47 लाख टन, तिल उत्पादन 1.69 लाख टन हुआ। कुल तिलहन उत्पादन थोड़ी कमी के साथ 94.95 लाख टन पर स्थिर रहा। वहीं, दलहन उत्पादन में चना 35.83 लाख टन से घटकर 22.04 लाख टन, मूंग बढ़कर 21.28 लाख टन और उड़द बढ़कर 1.51 लाख टन रही। उत्पादकता में भी लगातार सुधार सरकार की रिपोर्ट के अनुसार कुल कुल खाद्यान्न उत्पादकता 2023-24 में 3322 किग्रा प्रति हेक्टेयर और 2024-25 में 3650 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। वहीं, कुल कृषि उत्पादकता 2379 से बढ़कर 2627 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही। किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस मोहन सरकार ने दो वर्ष में किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें एमएसपी पर खरीदी का दायरा बढ़ाया, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा, फसल विविधीकरण नीति लागू करना और ई-उपार्जन और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत किया किया गया है। क्या कहते हैं कि विशेषज्ञ कृषि विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में खेती में यह बढ़त केवल अनुकूल मौसम का परिणाम नहीं है, बल्कि नीतिगत निर्णय, समय पर खाद-बीज उपलब्धता और किसानों को त्वरित भुगतान का असर है। खाद्यान्न में नया कीर्तिमान जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति पीके मिश्रा ने बताया कि प्रदेश में किसानों के लिए भावांतर, सौर ऊर्जा संयंत्र और दुग्ध प्रोत्साहन जैसी योजनाओं ने खेती की लागत कम की है और आमदनी बढ़ाने का रास्ता खोला है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव तभी टिकाऊ होगा, जब मंडियों, सिंचाई ढांचे और तकनीकी क्षेत्र को और मजबूत किया जाए। साथ ही किसानों की भागीदारी बढ़ाई जाए।  

रायपुर: रेडियोलॉजी में एआई का उपयोग, दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों के लिए वरदान – स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर : रेडियोलॉजी के क्षेत्र में एआई का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों के लिए बनेगा वरदान : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित आईरा सीजीकॉन 2025 (IRIA-CGCON-2025) के 15वें वार्षिक राज्यस्तरीय कॉन्फ्रेंस का हुआ शुभारंभ रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग विज्ञान में ज्ञान और सहयोग की नई दिशा रायपुर इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन (आईआरआईए) – छत्तीसगढ़ चैप्टर, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आईरा सीजीकॉन 2025 (IRIA-CGCON-2025) के 15वें वार्षिक राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन चिकित्सा महाविद्यालय स्थित स्व. अटल बिहारी वाजपेई सभागार में किया जा रहा है। दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन माननीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन श्याम बिहारी जायसवाल ने किया। पूरे देशभर से 150 से भी अधिक रेडियोलॉजिस्ट इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं।  रेडियोलॉजी के क्षेत्र में एआई का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों के लिए बनेगा वरदान : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल   सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अपने उद्बोधन में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग तकनीक के क्षेत्र में एआई का समावेश चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया विभिन्न क्षेत्रों में एआई का उपयोग कर तेजी से आगे बढ़ रही है, ऐसे में मेडिकल और विशेषकर रेडियोलॉजी के क्षेत्र में एआई का उपयोग समय की आवश्यकता बन चुका है।   स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि एआई आधारित इमेजिंग तकनीक से जांच की गुणवत्ता में सुधार, रिपोर्टिंग में तेजी और रेडियोलॉजिस्ट विशेषज्ञों की कमी वाले दूरस्थ क्षेत्रों में भी सटीक निदान संभव हो सकेगा। इससे मरीजों को बड़े शहरों तक आने की आवश्यकता कम होगी और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।  उन्होंने सम्मेलन में जुटे देश भर के रेडियोलॉजिस्टों से आह्वान किया कि वे तकनीकी नवाचारों को अपनाते हुए एआई के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य करें, ताकि छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर रहने वाले मरीजों को भी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सके। स्वास्थ्य मंत्री के इस विचारोत्तेजक वक्तव्य को सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों ने सराहा और रेडियोलॉजी के क्षेत्र में एआई के व्यापक उपयोग पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।   इस अवसर पर आयोजन समिति के पेट्रन एवं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी, अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर, आयोजन अध्यक्ष डॉ. आनंद जायसवाल (अध्यक्ष IRIA-CGCON), उपाध्यक्ष डॉ. विवेक पात्रे (विभागाध्यक्ष, रेडियोडायग्नोसिस विभाग), आईरा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. ए. ए. उस्मान, सचिव डॉ. विकास भोजसिया प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।   सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से पधारे प्रख्यात विशेषज्ञों एवं प्रतिष्ठित वक्ताओं में डॉ. सी. कृष्णा, डॉ. वर्षा जोशी, डॉ. प्रशांत ओंकार, डॉ. नितिन सहित अनेक फैकल्टी मेंबर्स ने सहभागिता की।    सम्मेलन की थीम रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग विज्ञान में ज्ञान और सहयोग की नई दिशा (Advancing Knowledge and Collaboration in Radiology and Imaging Science) रखी गई है।

बीजेपी ने तोड़ा LDF का 40 साल पुराना दबदबा, तिरुवनंतपुरम निकाय चुनाव में मिली ऐतिहासिक सफलता

तिरुवनंतपुरम  केरल निकाय चुनाव में कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) को बड़ी जीत मिली है। वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) को करारी हार का सामना करना पड़ा है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने पहली बार ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इसके अलावा पलक्कड़ नगर पालिका चुनाव में बीजेपी ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल की।  2020 के चुनाव में बीजेपी ने 28 सीटों पर जीत दर्ज की थी। अबकी बार तीन सीटें कम आई। सत्तारूढ़ यूडीएफ ने पिछले चुनाव के मुकाबले तीन अधिक सीटें जीती। उसके खाते में 17 सीट आई। एलडीएफ को आठ सीटों पर जीत मिली। बीजेपी ने केरल के स्थानीय निकाय चुनाव में पहली जीत पलक्कड़ में साल 2015 में दर्ज की थी। तब से यहां पार्टी का दबदबा बरकरार है। 2020 में पलक्कड़ में कांग्रेस को 10 और मुस्लिम लीग को चार सीटों पर कामयाबी मिली थी। राजधानी में सत्ता परिवर्तन, वाम मोर्चे को बड़ा झटका तिरुवनंतपुरम न सिर्फ केरल की प्रशासनिक राजधानी है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम मानी जाती है। लंबे समय से यह क्षेत्र कांग्रेस और LDF के प्रभाव वाला रहा है। ऐसे में यहां बीजेपी की जीत को वाम राजनीति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। शशि थरूर का गढ़, फिर भी बीजेपी की सेंध बता दें कि तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर लगातार चार बार सांसद चुने जा चुके हैं। इस कारण यह इलाका पारंपरिक रूप से गैर-बीजेपी माना जाता रहा है, लेकिन नगर निगम चुनाव परिणाम ने इस धारणा को तोड़ दिया है। पीएम मोदी ने दी बधाई तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहर की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “Thank you Thiruvananthapuram!”  पीएम मोदी ने इस जनादेश को केरल की राजनीति में एक ‘वॉटरशेड मोमेंट’ करार देते हुए कहा कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी-एनडीए को मिला समर्थन इस बात का संकेत है कि राज्य के लोग मानते हैं कि केरल की विकासात्मक आकांक्षाओं को केवल बीजेपी ही पूरा कर सकती है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी तिरुवनंतपुरम जैसे जीवंत शहर के विकास के लिए काम करेगी और आम लोगों के लिए ‘Ease of Living’ को और बेहतर बनाएगी.  शहरी मतदाताओं का बदला रुझान राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो , यह जीत विधानसभा चुनाव में 2-3 सीटें जीतने से कहीं अधिक प्रभावशाली है। शहरी स्थानीय निकाय में सत्ता हासिल करना इस बात का संकेत है कि शहरी मतदाता अब पारंपरिक LDF-UDF ध्रुवीकरण से बाहर निकाल कर बेहतर विकल्प तलाश रहा है। चार नगर निगमों में यूडीएफ का कब्जा केरल की छह में से चार नगर निगमों में यूडीएफ ने जीत हासिल की है। इनमें कोल्लम, कोच्चि, त्रिशूर और कन्नूर शामिल है। इन क्षेत्रों को वामपंथियों का गढ़ कहा जाता है। मगर कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन ने एलडीएफ से कई सीटें छीन ली। तिरुवनंतपुरम में एनडीए ने पहली बार जीत हासिल की है। त्रिपुनिथुरा नगर पालिका पर भी बीजेपी को जीत मिली है। हालांकि थोडुपुझा और कन्हंगड नगरपालिका में उसे मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। एलडीएफ को बड़ा झटका कोझिकोड एकमात्र नगर निगम है, जहां एलडीएफ का जलवा बरकरार है। 2020 में एलडीएफ ने शानदार प्रदर्शन किया था। उसने छह में से पांच नगर निगमों पर अपना कब्जा जमाया था। वहीं यूडीएफ के खाते में सिर्फ कन्नूर नगर निगम सीट आई थी। बीजेपी नेता राजीव चंद्रशेखर का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे केरल में एलडीएफ के एक दशक लंबे शासन के खात्मे में का प्रतीक हैं। 54 नगर पालिकाओं पर यूडीएफ की जीत यूडीएफ ने नगर निगम, नगरपालिका से ब्लॉक और ग्राम स्तर के चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया। सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) भारी नुकसान पहुंचाया। यूडीएफ ने 86 में से 54 नगरपालिकाओं पर जीत हासिल की। 9 और 11 दिसंबर को दो चरणों में केरल के छह नगर निगमों, 14 जिला पंचायतों, 87 नगरपालिकाओं, 152 ब्लॉक पंचायतों और 941 ग्राम पंचायतों में मतदान हुआ। यूडीएफ: मध्य और उत्तरी केरल के बड़े हिस्से में यूडीएफ की पकड़ मजबूत रही। मोर्चा ने एर्नाकुलम, अलाप्पुझा, मलप्पुरम, कोट्टायम और पलक्कड़ जिले में अपना जलवा बरकरार रखा। इसके अलावा इडुक्की और पथानामथिट्टा में अपना प्रदर्शन बेहतरीन किया। एलडीएफ: अबकी चुनाव में एलडीएफ को अपने कुछ गढ़ खोने पड़े। पिछले चुनाव में जहां 5 नगर निगमों पर जीत हासिल की थी। अबकी सिर्फ एक ही सीट खाते में आई। नगर पालिकाओं की बात करें तो पार्टी अपने पारंपरिक गढ़ जैसे तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और कोझिकोड जिलों में अपना दबदबा बरकरार रखने में कामयाबी रही।    

रायपुर: विशेष लेख – छत्तीसगढ़ में महिला विकास की नई दिशा

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के लिए बीते दो वर्षों के दौरान महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर परिवर्तनकारी कार्य हुए हैं, उन्होंने राज्य को राष्ट्रीय पटल पर एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है। सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और निर्णय क्षमता को अपनी नीतियों का मूल आधार बनाते हुए सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक नई दिशा तय की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय कहते हैं कि हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की हर महिला आत्मनिर्भर, सुरक्षित और सम्मानित जीवन जिए। बीते दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर जो कार्य किए गए हैं, वे एक विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव हैं। सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य, आजीविका, सुरक्षा और भागीदारी को हर नीति के केंद्र में रखकर आगे भी योजनाएँ लागू करती रहेगी। शासन की महत्वकांक्षी योजना महतारी वंदन योजना ने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को नई मजबूती दी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को वर्चुअली लॉन्च की गई इस योजना के तहत राज्य की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को हर माह 1,000 रुपये की प्रत्यक्ष सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 14,306 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि 22 किश्तों में उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है। महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य और आर्थिक मजबूती के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान भी यह दर्शाता है कि महिला कल्याण राज्य की विकास-यात्रा का केंद्र बिंदु है। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार देने के लिए रजिस्ट्री शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट जैसे निर्णयों ने उन्हें न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण भी प्रदान की है। इसी क्रम में 368 महतारी सदनों का निर्माण स्वीकृत किया गया है, जहाँ महिलाओं को प्रशिक्षण, परामर्श, कौशल विकास और सहायक सेवाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि का ऑनलाइन भुगतान शुरू कर सरकार ने सुशासन और पारदर्शिता को और भी मजबूत किया है। ग्रामीण और वंचित वर्ग की महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए राज्य सरकार ने स्व-सहायता समूहों को नए अवसर प्रदान किए हैं। छह जिलों बस्तर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, कोरबा, रायगढ़ और सूरजपुर में रेडी-टू-ईट का कार्य महिला समूहों को सौंपा गया है। वहीं 42 हजार 878 महिला समूहों को 12,946.65 लाख रुपये का रियायती ऋण प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया गया है। इसके साथ ही निर्माण श्रमिक परिवारों की महिलाओं और बेटियों के लिए मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना, सिलाई मशीन सहायता और दीदी ई-रिक्शा योजना जैसी पहलों ने आजीविका के नए विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना गर्भवती श्रमिक महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार प्रदान कर रही है। कन्याओं के विवाह में सहयोग देने के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को और सशक्त बनाते हुए 50,000 रुपये की सहायता में से 35,000 रुपये सीधे कन्या के खाते में जमा करने का निर्णय लिया गया है। वर्ष 2024-25 में 8,000 कन्याओं के विवाह हेतु 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एनआरएलएम के तहत लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी पहलों पर 800 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जो देश में महिला उद्यमिता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। महिला सुरक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। नवाबिहान योजना घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को कानूनी, चिकित्सा और मनोसामाजिक सहायता प्रदान कर रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है, जिसने सखी वन-स्टॉप सेंटर का डिजिटल वर्जन तैयार किया और इसके लिए मानक प्रक्रिया (ैव्च्) लागू की। 181 महिला हेल्पलाइन और डायल 112 के एकीकृत संचालन ने संकट की स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की है। इसी तरह सुखद सहारा योजना के अंतर्गत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए शुचिता योजना के तहत 2,000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं, जबकि 3 लाख से अधिक किशोरियों को स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई गई है। हाई स्कूल छात्राओं को साइकिल वितरण के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। नवा रायपुर में 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण महिला समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास भी महिलाओं के लिए नए अवसर खोल रहे हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि, महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ उनके लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल तैयार करना हमारी प्राथमिकता है। महतारी वंदन योजना से लेकर नवाबिहान, लखपति दीदी, शुचिता और महतारी सदन जैसी पहलें महिलाओं के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। आने वाले समय में विभाग इन योजनाओं को और प्रभावी रूप से विस्तार देगा ताकि हर महिला अपने सपनों को साकार कर सके। महिला एवं बाल विकास विभाग को वर्ष 2025-26 में 8,245 करोड़ रुपये का बजट देकर सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि महिला कल्याण और सुरक्षा उसकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में हुए परिवर्तन यह प्रमाणित करते हैं कि महिलाओं को केंद्र में रखकर किया गया विकास न केवल सुशासन की पहचान है बल्कि एक प्रगतिशील समाज की आधारशिला भी है। छत्तीसगढ़ आज महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नई दिशा, नई उम्मीद और नए परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रहा है।   डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक (जनसंपर्क)

किसानों को दिया बड़ा आश्वासन- उपज का एक-एक दाना खरीदेगी सरकार- मंत्री राजेश अग्रवाल

रायपुर : कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने लखनपुर-उदयपुर क्षेत्र में करोड़ों के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन-लोकार्पण किसानों को दिया बड़ा आश्वासन- उपज का एक-एक दाना खरीदेगी सरकार- मंत्री राजेश अग्रवाल रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने विधानसभा क्षेत्र लखनपुर और उदयपुर में करोड़ों रुपये की लागत से विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय संपर्क सुविधाएं मजबूत होंगी तथा ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। मंत्री ने क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हुए कहा कि सभी आवश्यक परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा किया जाएगा। उदयपुर विकासखंड के चैनपुर-खमरिया मार्ग पर रेहंड नदी में उच्च स्तरीय पुल और पहुंच मार्ग निर्माण के लिए 11 करोड़ 86 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। मंत्री अग्रवाल ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन किया, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों को नदी पार करने में होने वाली कठिनाइयों से मुक्ति मिलेगी। पुल बनने के बाद स्थानीय बाजारों, स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच आसान हो जाएगी। ग्राम पंचायत लाटोरी में 5 लाख रुपये की लागत से बनने वाली पुलिया का भी भूमिपूजन किया गया। इस समारोह में स्थानीय सरपंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। यह पुलिया क्षेत्रीय संपर्क को और सशक्त बनाएगी, जिससे किसानों और ग्रामीणों को दैनिक कार्यों में सुगमता मिलेगी। मंत्री राजेश अग्रवाल ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार आपकी उपज का एक-एक दाना खरीदेगी और उचित मूल्य दिलवाएगी। यदि किसी समिति में कर्मचारी द्वारा अवैध वसूली, परेशानी या अनुचित व्यवहार होता है, तो टोल-फ्री नंबर पर शिकायत करें। शिकायत मिलते ही तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने क्षेत्र के विकास के प्रति समर्पण जताते हुए कहा कि सरकार ग्रामीण विकास के लिए कटिबद्ध है।

प्रभारी मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया, मंदसौर जिले में दो साल में हुए महत्वपूर्ण विकास कार्य

मंदसौर जिले ने दो वर्षों में किए विकास के नए आयाम स्थापित : प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया पशुपतिनाथ लोक, मेडिकल कॉलेज, चीता प्रोजेक्ट, नगर वन, उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धियां भावांतर भुगतान योजना में 8,803 किसानों को 10.20 करोड़ रुपए का भुगतान दो वर्षो की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का किया विमोचन प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक भोपाल महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मंदसौर जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा है कि मंदसौर जिले ने विगत दो वर्षों में विकास के हर क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होने राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर मंदसौर जिले में अब तक किए गए विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति तथा उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी दी। प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित सुशासन भवन सभागार में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक एवं प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रभारी मंत्री ने 2 वर्ष की उपलब्धियां पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। सांसद श्री बंशीलाल गुर्जर, कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग, सुवासरा विधायक श्री हरदीप सिंह डंग, जिला योजना समिति सदस्य श्री राजेश दीक्षित, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दुर्गा विजय पाटीदार, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्री बसंत शर्मा सहित पुलिस अधीक्षक श्री विनोद कुमार मीना, अपर कलेक्टर श्रीमती एकता जायसवाल सहित सभी जिलाधिकारी, पत्रकार गण मौजूद थे। प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि विगत दो वर्षों में मंदसौर जिले में धार्मिक, पर्यटन, औद्योगिक, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, नगरीय एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं। भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में लगभग 25 करोड़ रुपए की लागत से पशुपतिनाथ लोक का निर्माण पूर्णता की ओर है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत जिले में 61.62 करोड़ रुपए की लागत से 5 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले के सभी 922 ग्रामों में 2 लाख 40 हजार से अधिक ग्रामीण नल जल कनेक्शन प्रदान किए जा रहे हैं तथा लगभग 1332 करोड़ रुपए की नल जल योजनाओं के कार्य प्रगतिरत हैं। इसके साथ ही गांधीसागर जल विद्युत गृह की 115 मेगावाट क्षमता की इकाइयों के नवीनीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिए 418.91 करोड़ रुपए की स्वीकृति शासन द्वारा प्रदान की गई है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भी जिले ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। मंदसौर जिला मुख्यालय पर श्री सुंदरलाल पटवा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अक्टूबर 2024 से 100 सीट्स के साथ प्रारंभ किया गया है, जहां वर्तमान में प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के कुल 200 छात्र अध्ययनरत हैं। इसके अलावा जिले में 13 सांदीपनि विद्यालयों की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अधिकांश भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। कृषि एवं किसान कल्याण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एवं मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत जिले के 2 लाख 19 हजार से अधिक किसानों को 43.96 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है। सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत 8,803 किसानों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 10.20 करोड़ रुपए की राशि उनके बैंक खातों में जमा कराई गई है। अतिवृष्टि एवं फसल क्षति पर जिले को 267.29 करोड़ रुपए की राहत राशि आवंटित की गई है। औद्योगिक विकास को गति देने जिले में 331.47 हेक्टेयर भूमि पर नवीन औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार किया गया है। कृषि उद्योग समागम 2025 का आयोजन मंदसौर में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति में किया गया, जिसमें 3,600 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश हुआ तथा लगभग 12,500 लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत विगत दो वर्षों में 487 हितग्राहियों को 35.39 करोड़ रुपए का ऋण प्रदान कर स्वरोजगार से जोड़ा गया है। नगरीय एवं ग्रामीण विकास के अंतर्गत अमृत 2.0 योजना में 194.82 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 10,166 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, ग्राम सड़क, प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) सहित 50,512 विकास कार्यों के लिए 810.01 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। प्रभारी मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि मंदसौर जिला निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है तथा आने वाले समय में जिले को विकास के नए शिखर पर पहुंचाया जाएगा।  

रायपुर: जनता की आस्था सरकार की सबसे बड़ी शक्ति, दो वर्षों की सेवा यात्रा समर्पित – CM विष्णुदेव साय

रायपुर : जनता की आस्था ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति: दो वर्ष की सेवा यात्रा छत्तीसगढ़ की जनता को समर्पित – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ विश्वास, स्थिरता और सुशासन के नए अध्याय की ओर अग्रसर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेशवासियों को किया संबोधित रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी सेवायात्रा के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ की जनता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा है कि बीते दो वर्ष शासन के नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और जनसहभागिता के वर्ष रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समय उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्षों में से एक रहा, क्योंकि इस दौरान उन्हें प्रदेशवासियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने और उनकी अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि इन दो वर्षों में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के हर कोने तक विकास की रोशनी पहुँचाने का निरंतर प्रयास किया है। किसानों की मेहनत को सम्मान दिलाने के लिए सुविधाओं का विस्तार किया गया, ताकि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य समय पर प्राप्त हो सके। कृषि को लाभकारी और सम्मानजनक बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने के लिए नई भर्तियों, कौशल प्रशिक्षण और औद्योगिक अवसरों के द्वार खोले गए हैं। रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का युवा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। जिन क्षेत्रों में कभी उम्मीदें धुंधली थीं, वहाँ अब विकास की नई संभावनाएँ आकार ले रही हैं। बहनों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए भी सरकार ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं, जिससे हर परिवार में आत्मविश्वास का वातावरण बना है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन प्रयासों के बीच सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि आज शासन जनता के और अधिक निकट आया है। प्रशासन और आमजन के बीच की दूरी घटकर सहभागिता में बदल रही है। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि छत्तीसगढ़ आज विश्वास, स्थिरता और सुशासन के एक नए अध्याय की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस विकास यात्रा में अपने सुझावों, परिश्रम और विश्वास से सरकार का मार्गदर्शन करते रहें। उन्होंने कहा कि जनता की आस्था ही सरकार की सबसे बड़ी शक्ति है और छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की सच्ची गारंटी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता और भी सशक्त है। आने वाले वर्षों में शिक्षा, रोजगार, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में और तेज़ गति से कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है, जहाँ प्रत्येक युवा को अवसर, किसान को गर्व और हर नागरिक को यह विश्वास हो कि शासन सदैव उसके साथ खड़ा है।

रायपुर: विशेष लेख – मुख्यमंत्री साय ने जताई समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के प्रति शासन की प्रतिबद्धता

      रायपुर, छत्तीसगढ़ में समाज के कमजोर, वंचित और विशेष जरूरतों वाले वर्गों को सशक्त बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में बीते दो वर्ष उल्लेखनीय सिद्ध हुए हैं। समाज कल्याण विभाग ने इस अवधि में पेंशन योजनाओं, दिव्यांगजन सहायता, वरिष्ठ नागरिक कल्याण, आश्रय सुविधाओं, उभयलिंगी पुनर्वास और नशा मुक्ति कार्यक्रमों के क्षेत्र में व्यापक सुधारों और नई पहल का नेतृत्व किया है। योजनाओं की पारदर्शिता पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाकर राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतिम व्यक्ति तक सहायता और सुरक्षा पहुँचे। यह कार्यकाल संवेदनशील, जवाबदेह और जनकेंद्रित शासन का वास्तविक उदाहरण प्रस्तुत करता है। पेंशन योजनाओं में क्रांतिकारी सुधार 21.99 लाख हितग्राहियों तक सहायता राज्य सरकार ने सामाजिक सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए पेंशन योजनाओं के संचालन में तकनीकी सुधार किए। छह प्रमुख पेंशन योजनाओं इंदिरा गांधी वृद्धावस्था, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सुखद सहारा तथा मुख्यमंत्री पेंशन योजना के माध्यम से 21.99 लाख हितग्राही लाभान्वित हुए। पेंशन वितरण पारदर्शी और समयबद्ध डीबीटी भुगतान 98 प्रतिशत और आधार सीडिंग 96 प्रतिशत तक पहुँचने के साथ पेंशन वितरण प्रणाली अत्यंत पारदर्शी और समयबद्ध बनी। ई-केवायसी प्रक्रिया में मृत हितग्राहियों को हटाकर वास्तविक पात्रों को लाभ सुनिश्चित किया गया। मुख्यमंत्री पेंशन योजना के हितग्राही 7.10 लाख से बढ़कर 7.45 लाख होना राज्य की संवेदनशील नीतियों का महत्वपूर्ण परिणाम है। राष्ट्रीय परिवार सहायता-संकट की घड़ी में बड़ा सहारा गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना जीवन रक्षक सिद्ध हुई है। दो वर्षों में 5,110 पात्र परिवारों को 20 हजार रुपए की एकमुश्त सहायता प्रदान की गई, जिससे आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में उन्हें राहत मिल सके। दिव्यांगजन सहायता सुविधाओं, पहचान और पुनर्वास में कई गुना वृद्धि दिव्यांगजनों की सहायता और सशक्तिकरण के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रयास अत्यंत प्रभावी रहे। यूडीआईडी कार्ड लाभार्थी 2.74 लाख तक पहुँचे। सहायक उपकरण वितरण 1,161 से बढ़कर 3,609 हो गया। सामर्थ्य विकास शिविरों में भी वृद्धि हुई और 4,983 दिव्यांगजनों को सीधा लाभ प्राप्त हुआ। ये सभी प्रयास दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं। विशेष शिक्षा एवं पुनर्वास विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए मजबूत आधार छत्तीसगढ़ ने विशेष शिक्षा और पुनर्वास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विस्तार किया है। सरकारी विशेष विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 1,342 हुई, जबकि स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा संचालित विद्यालयों में 3,049 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। माना कैम्प स्थित फिजिकल रिफरल रीहैब सेंटर और सेरेब्रल पाल्सी गेट लैब की सेवाएँ लगभग दोगुनी हो गईं। ये उपलब्धियाँ विशेष जरूरत वाले बच्चों और युवाओं के लिए आत्मनिर्भर भविष्य का आधार मजबूत करती हैं। छात्रवृत्तियों से बढ़ा शैक्षणिक आत्मविश्वास राज्य और केंद्र सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा जारी रखने में बड़ी मदद मिली। राज्य छात्रवृत्ति 7,807 से बढ़कर 8,726 और केंद्रीय छात्रवृत्ति 390 से बढ़कर 423 हुई। वरिष्ठ नागरिकों के लिए आस्था और सम्मान, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पुनः शुरू वरिष्ठ नागरिकों में अत्यधिक लोकप्रिय मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को आईआरसीटीसी के सहयोग से पुनः प्रारंभ किया गया। अब तक 6 यात्राओं में 4,697 वरिष्ठजन लाभान्वित हुए हैं। वर्ष 2025-26 के लिए 15 करोड़ रुपए और अतिरिक्त 10 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान इस योजना को और व्यापक बनाता है। स्वरोजगार एवं आर्थिक संबल दिव्यांगजनों को नया अवसर दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने हेतु रियायती ब्याज दर पर ऋण एवं उत्थान सब्सिडी योजनाएँ अत्यंत सफल रहीं। 2,435 दिव्यांगजनों को रियायती ऋण और 411 लाभार्थियों को उत्थान सब्सिडी प्रदान की गई। इसके अलावा 24.50 करोड़ रुपये के ऋण माफ किए जाकर दिव्यांगजनों को भारी आर्थिक राहत मिली। आश्रय सुविधाओं में सुधार सुरक्षित जिंदगी की गारंटी घरौंदा, हाफ-वे-होम, अपराजिता और प्रशामक देखभाल गृहों में रहने वाले हितग्राहियों की संख्या बढ़ी है, जो सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार को दर्शाता है। गंभीर और बहुदिव्यांगजन, मानसिक रोग से स्वस्थ हुए व्यक्ति तथा जरूरतमंद वृद्धजन इन सुविधाओं का लाभ उठाकर सम्मानजनक जीवन जी पा रहे हैं। उभयलिंगी व्यक्तियों के पुनर्वास में महत्वपूर्ण प्रगति उभयलिंगी समुदाय के लिए राज्य सरकार का दृष्टिकोण अत्यंत संवेदनशील रहा है। पहचान प्रमाण पत्र 506 से बढ़कर 915 हुए, वहीं एसआरएस ऑपरेशन के लाभार्थी 5 से बढ़कर 9 हुए। यह समुदाय को मुख्यधारा में लाने और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। नशा मुक्ति अभियान नई शुरुआत की राह नशा मुक्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार करते हुए नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़ाकर 25 कर दी गई। लाभार्थी बढ़कर 4,379 हुए। भारत माता वाहिनी दल गतिविधियों के विस्तार के साथ सक्रिय हुआ, जबकि सियान हेल्पलाइन ने 2.73 लाख कॉल प्राप्त कर राज्य में भरोसेमंद सहायता तंत्र स्थापित किया। नवीन पहल भविष्य के लिए मजबूत नीति ढांचा सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान के तहत सभी सार्वजनिक भवनों का एक्सेस ऑडिट किया गया। नए विशेष विद्यालयों और आवासीय परिसरों के निर्माण हेतु 205 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया। दिव्यांग विकास आयोग गठन एवं बढ़े हुए बजट (1504 करोड़ रुपए से 1575 करोड़ रुपए) ने विभागीय कार्यों को नई ऊर्जा प्रदान की है। इन दो वर्षों में समाज कल्याण विभाग की उपलब्धियाँ साबित करती हैं कि संवेदनशील और जनकेंद्रित शासन किस प्रकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर परिवर्तन ला सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सामाजिक सुरक्षा, दिव्यांगजन, सशक्तिकरण, वरिष्ठ नागरिक कल्याण और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में देश के सामने एक सशक्त और परिणामदायी मॉडल बनकर उभरा है। यह दो वर्ष छत्तीसगढ़ के लिए मानवीय मूल्यों, विकास और संवेदना का मजबूत अध्याय साबित हुए हैं।   डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक (जनसंपर्क)