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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार आधुनिक, समावेशी व सक्षम उत्तर प्रदेश बनाने के रोडमैप पर कर रही काम

लखनऊ उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ ही प्रदेश में 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ाने पर विशेष रूप से फोकस कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना विजन जनता के सामने रखा था और कहा था "उत्तर प्रदेश 'ईज ऑफ लिविंग' का मानक प्रदेश बन रहा है।" मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर लाने के लिए और राज्य को निकट भविष्य में वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लिए 'विकसित उत्तर प्रदेश' मुहिम के अंतर्गत तेजी से पर्यावरण समावेशी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना तथा अवसंरचनात्मक विकास पर जोर दिया जा रहा है। इन मानकों के आधार पर ही प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों का कायाकल्प सुनिश्चित होगा, और इसी के मद्देनगर प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों के समेकित विकास का खाका खींचने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन व स्टेकहोल्डर्स के सुझावों को अंगीकार कर व्यापक रोडमैप बनाया जा रहा है। वैश्विक मानकों के अनुरूप जीवन गुणवत्ता में सुधार पर होगा कार्य उत्तर प्रदेश में 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार वैश्विक मानकों को अपनाते हुए एक आधुनिक, सुरक्षित, समावेशी और सक्षम उत्तर प्रदेश का निर्माण करना है। इसके लिए शहरी परिवहन को कुशल बनाने, पर्यावरण अनुकूल अवसंरचना बढ़ाने और सेवाओं को प्रदेश के हर नागरिक तक पहुंचाने की दिशा में अनेक योजनाओं को गति दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ किसी भी व्यक्ति तक पहुंचने से न छूटे। वहीं, यह भी तथ्य है कि किसी भी विकसित क्षेत्र का नगरी क्षेत्र  उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा स्तंभ होता है। ऐसे में, प्रदेश का हर नगरी क्षेत्र वैश्विक मानकों के अनुरूप आधुनिक नगरी नियोजन की अवधारणाओं को अपनाते हुए प्रदेश की अर्थव्यवस्था में अपनी अहम भूमिका को सार्थक करे, इस दिशा में व्यापक स्तर पर मंथन व कार्य जारी है। आधुनिक तथा समावेशी नगरों की अवधारणा को सच करेगा रोडमैप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार नगरीय विकास को प्राथमिकता देते हुए शहरों में रहने वाले लोगों की जीवन गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर कार्य कर रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश के नगर  भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित हों, जहां बेहतर आवास, स्वच्छ जल, सुचारु यातायात, सुरक्षित सार्वजनिक स्थान तथा तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध हों। इन विकास परियोजनाओं में स्मार्ट सिटी मिशन का विस्तार, नगर निकायों की क्षमता वृद्धि, ठोस कचरा प्रबंधन में सुधार, उत्तम प्रकाश, पार्क, स्वास्थ्य तथा आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के नगर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप न केवल बढ़ती आबादी का दबाव संभालने में सक्षम बनें बल्कि आर्थिक विकास, निवेश तथा गुणवत्तापूर्ण जीवन मानकों में वृद्धि के प्रयास को भी धरातल पर उतारने का माध्यम बनें। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर ही विकसित उत्तर प्रदेश की संकल्पना को धरातल पर उतारने के लिए रोडमैप का निर्माण हो रहा है।  कुशल परिवहन व पर्यावरण अनुकूल अवसंरचना से मजबूत होगी अर्थव्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का विशेष जोर कुशल व सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन के विकास पर है। मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार, बस सेवाओं का आधुनिकीकरण, ई-वाहनों को बढ़ावा देने और सड़कों को जाम मुक्त बनाने के प्रयासों को गति दी जा रही है। वहीं रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम व रोप-वे को भी प्रदेश में सुचारू रूप से क्रियान्वित कर आगे बढ़ाने का कार्य जारी है। प्रदेश सरकार का मानना है कि सुचारु परिवहन न केवल नागरिकों की दिनचर्या को सरल बनाता है, बल्कि उद्योग तथा व्यापार को भी नई ऊर्जा देता है। इसके साथ ही, एनर्जी एफिशिएंट बिल्डिंग्स, ग्रीन कॉरीडोर, जल संरक्षण संरचनाएं तथा प्रदूषण नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देकर पर्यावरण समावेशी विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का प्रयास है कि आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के नगर पर्यावरणीय संतुलन, उच्च जीवन स्तर तथा सुदृढ़ आर्थिक गतिविधियों के आदर्श मॉडल के रूप में उभरें और इसी दिशा में विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप उत्तर प्रदेश के कायाकल्प की रूपरेखा तय की जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस नवीन घाट निर्माण कार्य का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए

श्रद्धालुओं का सिंहस्थ 2028 का अनुभव होगा भव्य, दिव्य और अलौकिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस नवीन घाट निर्माण कार्य का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए जा रहे नवीन घाट निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि घाटों पर हरियाली होनी चाहिए, सभी घाटों के निर्माण में एकरूपता होनी चाहिए, घाट निर्माण के बाद घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं और संसाधन भी सुनिश्चित किए जाएं। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिहंस्थ-2028 के सभी कार्य गुणवत्ता पूर्ण और समय अवधि में पूर्ण हो जिससे श्रद्धालुओं का सिंहस्थ-2028 का अनुभव भव्य, दिव्य और अलौकिक बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य में घाट आधारित विकास कार्य योजना पर भी कार्य किया जाएगा। प्रमुख बिन्दु मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के लिए किए जा रहे नवीन घाट निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। घाटों पर हरियाली होनी चाहिए। सभी घाटों के निर्माण में एकरूपता होनी चाहिए। घाट निर्माण के बाद घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं और संसाधन भी सुनिश्चित किए जाएं। सभी कार्य गुणवत्ता पूर्ण और समय अवधि में पूर्ण हो। सिंहस्थ-2028 का अनुभव भव्य, दिव्य और अलौकिक बने।    

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता जयंती के पावन अवसर पर इंदौर को दी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नये गीता भवन की सौगात

गीता का प्रत्येक अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य की भावना से परिपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता जयंती के पावन अवसर पर इंदौर को दी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नये गीता भवन की सौगात प्रदेश के हर नगर में बनेंगे नये गीता भवन – मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव और गीता जयंती के पावन अवसर पर एक बड़ी सौगात देते हुए मध्यप्रदेश में शासकीय क्षेत्र के पहले अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नये गीता भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस तरह के गीता भवन प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायत स्तर पर भी बनाये जाएंगे। इंदौर का लोकार्पित यह नया गीता भवन परंपरा एवं आधुनिकता का अनूठा संगम है। राज्य शासन द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन एवं इससे जुड़े विभिन्न आयामों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गीता भवन परियोजना के अंतर्गत ऐतिहासिक गोपाल मंदिर परिसर को आधुनिक गीता भवन के रूप में विकसित कर प्रदेश को समर्पित किया गया है। इस योजना के तहत स्मार्ट सिटी द्वारा इस नये गीता भवन में विकसित विविध आधुनिक सुविधाएँ नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक गोलु शुक्ला, सुमित मिश्रा, श्रवण सिंह चावड़ा, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, गौरव रणदिवे, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव, भारत न्यास के सचिव राम तिवारी, स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन विशेष रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मालवा की गौरवशाली विरासत, कृष्ण भक्ति और गीता का संदेश मध्यप्रदेश की दिशा तय करते हैं। उन्होंने कहा कि मालवा क्षेत्र कृष्ण लीलाओं से अछूता नहीं है। कृष्ण भगवान ने मालवा के उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने कहा कि मालवा की अहिल्या बाई होलकर ने देश में अनेक धर्म स्थलों का जीर्णोद्धार कराया और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गीता संघर्ष में आत्मबल और जीवन में मार्गदर्शन देती है। गीता का प्रत्येक अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य की भावना से परिपूर्ण है। भगवान कृष्ण ने अपने विराट स्वरूप के माध्यम से मानव को भय से मुक्त कर कर्तव्य के प्रति जागरूक किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गीता जयंती के अवसर पर अनेक रिकार्ड कायम किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता जयंती के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि विजेताओं का नगद के साथ ही ई-रिक्शा, ई-बाईक, लैपटॉप आदि प्रदान किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जीवन से संघठन, साहस, धर्म की रक्षा और अन्याय के प्रतिकार का संदेश मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गीता जीवन के हर चरण में मार्गदर्शक है। गीता से भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग से मोक्ष प्राप्ति का रास्ता भी दिखायी देता है। गीता संकट में बल देती है, संघर्ष में , उलझन में सारथी और अंधकार में अटल साथी बनती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है ‍कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्मार्ट सिटी परियोजना प्रारंभ की है। इस परियोजना से विरासत का संरक्षण करते हुए हम विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित तथा रामेश्‍वर लखनलाल पाटीदार द्वारा ‍लिखित कृष्ण चरित मानस और राघवदास पंडितदास द्वारा लिखित अमृतस्य अवंतिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कृष्ण चरित मानस के लेखक रामेश्वर लखनलाल पाटीदार को पाँच लाख रूपये ‍दिये जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के बाद संजीव मालवीय द्वारा निर्देशित कृष्ण लीलाओं पर आधारित नृत्य नाटिका को भी देखा। इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर के लिये आज गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि गीता ने ‍सिखाया है कि अगर हम सभी अपने-अपने धर्म एवं कर्तव्यों का पालन करेंगे तो अधिकारों का संरक्षण स्वत: होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में नया सांस्कृतिक प्रवाह देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में विरासत से ‍विकास की ओर तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोपाल मंदिर में किया पूजन-अर्चन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के पूर्व ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में पूजन-अर्चन किया। उन्होंने प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि के लिए कामना की। उन्होंने गोपाल मंदिर में हुए विकास कार्यों विशेषकर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी और प्रदर्शनी विथिका का अवलोकन भी किया। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त गीता भवन इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर में नया गीता भवन बनाया गया है। इस गीता भवन की विशेषता यह है कि यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रवचनों और शैक्षणिक आयोजनों हेतु अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 550 सीट का एक खूबसूरत सभागृह भी बनाया गया है। सकारात्मक एवं आध्यात्मिक वातावरण से युक्त 50-सीटर रीडिंग हॉल तथा आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई है। लाइब्रेरी में अध्यात्म, दर्शन, योग, ध्यान, भारतीय संस्कृति, माइंडफुलनेस तथा जीवन-प्रबंधन से संबंधित लगभग 1200 पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, डिजिटल आर्काइव के माध्यम से अनेक ई-बुक्स, ऑडियो-वीडियो व्याख्यान, ऑनलाइन कोर्स तथा अन्य डिजिटल संसाधनों तक सरलतापूर्वक पहुँच सुनिश्चित की गई है। लाइब्रेरी की आंतरिक सज्जा को प्राकृतिक रंगों, आध्यात्मिक कलाकृतियों, इनडोर पौधों तथा सौम्य प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि उपयोगकर्ताओं को शांत, प्रेरणादायी तथा एकाग्रता-उन्मुख वातावरण प्राप्त हो सके। मंदिर परिसर के पुनर्विकसित भागों में प्रदर्शनी कक्ष विकसित किए गए हैं, जिससे यह स्थल धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ कला एवं संस्कृति को एक साथ बढ़ावा देते हुए जनता के लिए एक समावेशी सांस्कृतिक अवसंरचना भी प्रदान करेगा। मुख्य बिंदु इंदौर का ऐतिहासिक गोपाल मंदिर परिसर आधुनिक सुविधाओं से युक्त गीता भवन के रूप में विकसित। स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत भवन में सभागार, रीडिंग हॉल, डिजिटल लाइब्रेरी एवं प्रदर्शनी कक्ष जैसी उन्नत सुविधाएँ स्थापित। मालवा की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, कृष्ण भक्ति और गीता का संदेश प्रदेश की दिशा निर्धारित करते हैं। गीता संघर्ष में आत्मबल, जीवन में मार्गदर्शन और … Read more

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए हर संभव सहयोग करेगी प्रदेश सरकार- उपमुख्यमंत्री

विकसित यूपी- 2047 लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च होंगे 1 लाख करोड़ रुपये' :ब्रजेश पाठक  स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए हर संभव सहयोग करेगी प्रदेश सरकार- उपमुख्यमंत्री  विकसित यूपी- 2047 का महत्वपूर्ण लक्ष्य, हर घर तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप विकसित यूपी 2047 के तहत प्रदेश में स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य शिक्षा के विकास के लिये स्टेकहोल्डर्स की कॉनफ्रेंस का आयोजन राजधानी में किया गया। उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण है। विकसित यूपी- 2047 बनाने में हेल्थ सेक्टर को मजबूत करने के लिए आने वाले दस वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में हमारी सरकार बनने के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में तेज विकास हुआ है, लेकिन इसे विकसित देशों के समकक्ष बनाने के लिये हमें अभी और भी प्रयास करना है। कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर राज्य मंत्री मयंकेश्वर सिंह, मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश अवस्थी ने भी अपने विचार रखे।  इसके बाद स्वास्थ्य सेवा, स्वास्थ्य शिक्षा, नर्सिंग, पैरामेडिकल व फार्मा से जुड़े हुए स्टेकहोल्डर्स व विभाग के अधिकारियों के विचार मंथन के कई सत्रों का आयोजन किया गया।  विकसित यूपी- 2047 मिशन के तहत आयोजित स्वास्थ्य व स्वास्थ्य शिक्षा के लिए आयोजित स्टेकहोल्डर्स कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने संबोधित करते हुए कहा कि विकसित यूपी- 2047 का लक्ष्य प्राप्त करने में स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। हमारा लक्ष्य प्रदेश के 25 करोंड़ लोगों तक उनके घर के पास स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के पहले उत्तर प्रदेश जो एक बीमारू राज्य था आज प्रदेश में सर्वाधिक एक्सप्रेस वे, निर्बाध बिजली आपूर्ति और इंफ्रास्ट्रकचर के निर्माण से यूपी में निवेश को बढ़ावा दिया है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी जहां प्रदेश में पहले केवल 40 मेडिकल कॉलेज ही थे, उनकी संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। साथ ही प्रत्येक पांच हजार की आबादी पर आरोग्य मंदिरों का संचालन हो रहा है, जहां पैथोलॉजी जॉच से लेकर, प्राथमिक स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में भी पहले की 5000 एमबीबीएस सीटों की तुलना में वर्तमान में 12,000 से अधिक सीटें हो चुकी हैं, वहीं एमएस और एमडी की सीटें भी लगभग दोगुनी बढ़ी हैं। इसके अलावा मिशन निरामया का सफल संचालन किया जा रहा है एवं संजीवनी एप के माध्यम से प्रदेश की चिकित्सकीय सुविधा की उपलब्धता पर लाइव नज़र रखी जाती है। लेकिन अभी हमें स्वास्थ्य सेवाओं को विकसित देशों के समकक्ष बनाने के लिए कई और प्रयास करने हैं। जिसके लिए प्रदेश सरकार हर संभव सहयोग करेगी, साथ ही आने वाले दिनों में विकसित यूपी- 2047 को सफल बनाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।  कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि आजादी के सौवें वर्ष में विकसित भारत का जो लक्ष्य प्रधानमंत्री ने रखा है उसे प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 ट्रिलियन डालर का योगदान देने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा और स्वास्थ्य आधारभूत स्तंभ हैं। डब्लूएचओ के मानकों के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ इसमें गुणात्मक सुधार की ओर भी ध्यान देना होगा। हमें प्राइमरी, सेंकेडरी, टर्शियरी के साथ पैरामेडिकल और नर्सिंग सुविधाओं का भी विस्तार करना होगा। इस अवसर पर बोलते हुए अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य व स्वास्थ्य शिक्षा, अमित कुमार घोष ने विकसित भारत, विकसित यूपी- 2047 का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इकोनामी के साथ सभी क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया, साथ ही एडीजी 30 के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं को मानक अनुरूप विकासित करने की प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की साथ ही इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सभी के सहयोग की अपेक्षा की। इस अवसर पर राज्य मंत्री मंयकेश्वर सरन सिंह ने भी सत्र को संबोधित किया और स्वास्थ्य सुविधाओं को छोटे शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित यूपी- 2047 के मिशन को प्राप्त करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य शिक्षा की आयोजित कॉफ्रेंस में प्रदेश में स्वास्थ्य, स्वास्थ्य शिक्षा, नर्सिंग, पैरामेडिकल, फार्मा संबंधित विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया। जिसमें विषय से संबंधित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने विचार मंथन के प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान का रोडमैप प्रस्तुत किया। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण व एआई के प्रयोग पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं को डब्लूएचओ के मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से न केवल इंफ्रास्टक्रचर विकास बल्कि चिकित्सकों के साथ अन्य मेडिकल स्टाफ को भी अधिक विषय विशेषज्ञ बनने पर जोर दिया। कोविड जैसे महामारियों का समाना करने के लिए मेडिकल रिसर्च को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

11 दिसंबर तक चार जनपदों (बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर) में लगेगी ‘कृषि चौपाल’

किसानों की समृद्धि के लिए पश्चिम यूपी के गांवों में पहुंच रही योगी सरकार 11 दिसंबर तक चार जनपदों (बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर) में लगेगी ‘कृषि चौपाल’ किसान ही संभालेंगे चौपाल का जिम्मा, आयोजन में सिर्फ किसानों की ही रहेगी भागीदारी   किसानों की खुशहाली पर योगी सरकार का जोर, योगी सरकार तक पहुंचेंगे गन्ना किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार की संवेदनशीलता से किसानों को मिल रहा फसल का उचित दाम और जल्द भुगतान  बागपत योगी सरकार के नेतृत्व में किसानों को गन्ना का उचित दाम मिल रहा है। गन्ना मूल्य का जल्द भुगतान होने से किसान खुशहाल भी हो रहे हैं। योगी सरकार द्वारा गन्ना किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की बदौलत किसान अब स्वयं ‘कृषि चौपाल’ लगा रहे हैं। पहली से 11 दिसंबर तक यह चौपाल पश्चिमी यूपी के चार जनपदों में लगेगी। किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार तक पहुंचेंगे, जिसके जरिए सरकार गन्ना किसानों के संरक्षण व संवर्धन के लिए और बड़े कदम उठाएगी।  11 दिसंबर तक चार जनपदों में होगी दो-दो चौपाल  किसानों द्वारा 11 दिसंबर तक पश्चिमी यूपी के चार जनपदों में ‘कृषि चौपाल’ लगेगी। यह चौपाल बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर में होगी। चारों जनपदों में दो-दो कृषि चौपाल लगेगी। तीन दिसंबर को बागपत के हिसावदा गांव में चौपाल लगेगी। पांच व छह दिसंबर को हापुड़, 7 व 8 को शामली में कृषि चौपाल लगेगी। 10-11 दिसंबर को मुजफ्फरनगर के यहियापुर व दाहोद गांव में कृषि चौपाल लगाई जाएगी। कृषि चौपाल की कमान भी किसान ही संभालेंगे। किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार तक पहुंचाए जाएंगे। इसके आधार पर योगी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए और भी नए कार्य व प्रयास करेगी।  बागपत के मीतली गांव में लगी पहली चौपाल, सिर्फ किसानों की ही रही भागीदारी  पहली कृषि चौपाल सोमवार को लगी। इसका आयोजन बागपत के मीतली गांव में किया गया। किसानों द्वारा लगाए गए चौपाल में सिर्फ किसानों ने ही हिस्सा लिया। किसानों ने बढ़ाए गए गन्ना मूल्य के लिए योगी सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में मूल्य वृद्धि की। पिछली सरकारें गन्ना किसानों का सुध नहीं लेती थी, लेकिन अब इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है। किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले भी योगी सरकार के किसान हित में किए गए फैसले से मौन हो गए हैं।  देश की उन्नति के पांच आधार पर किया गया कार्य  किसानों ने कहा कि एक तरफ योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में जहां किसान, युवा, महिला, नौजवान का ध्यान रखा, वहीं उन्नति के मुख्य पांच आधार पर भी कार्य किया। किसानों ने कहा कि 2014 में जब हाईवे पर चलते थे तो क्या हालात थे, यह किसी से छिपा नहीं है। किसी भी देश की उन्नति के पांच आधार होते हैं स्वास्थ्, शिक्षा, सड़क, बिजली-पानी। 2014 के बाद मोदी और 2017 से योगी सरकार की बदौलत क्षेत्र का कायाकल्प हुआ। अब हर वर्ग का समुचित विकास भी हो रहा है।  योगी सरकार ने गन्ना मूल्य में की 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि  योगी सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा देते हुए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की। योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ने की अगेती प्रजाति का मूल्य 370 से बढ़ाकर 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का 360 रुपये से 390 रुपये प्रति क्विंटल किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हो रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है।

स्वदेशी मेला 2025–26: भूमि पूजन पूरा, 18–25 दिसंबर तक साइंस कॉलेज ग्राउंड में होगा आयोजन

स्वदेशी मेला 2025-26 : भूमि पूजन संपन्न, 18 से 25 दिसंबर तक साइंस कॉलेज ग्राउंड में लगेगा भव्य मेला रायपुर  भारतीय विपणन विकास केन्द्र द्वारा आयोजित होने वाला प्रतिष्ठित स्वदेशी मेला 2025-26 इस वर्ष 18 से 25 दिसंबर तक साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित होगा। मेले के आयोजन से पूर्व 1 दिसंबर की सुबह 9:30 बजे भूमि पूजन कार्यक्रम विधिवत सम्पन्न हुआ। भूमि पूजन में गणमान्यजनों की उपस्थिति कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय कैबिनेट मंत्री गुरु ख़ुशवंत सिंह साहब तथा महापौर मती मीनल चौबे उपस्थित रहीं। मेला संयोजक  केदारनाथ गुप्ता अपनी धर्मपत्नी के साथ भूमि पूजन में उपस्थित हुए। इसके अलावा सहसंयोजक  जसप्रीत सिंह सलूजा, स्वागत समिति अध्यक्ष आनंद सिंघानिया, स्वागत समिति सचिव अमरजीत सिंह छाबड़ा, प्रांत संयोजक स्वदेशी जागरण मंच जगदीश पटेल, प्रांत मेला प्रमुख अमर बंसल, प्रबंधक भारतीय विपणन विकास केंद्र सुब्रत चाकी, महिला मेला प्रमुख आरती दुबे, सह महिला प्रमुख सीमा शर्मा, एवं सामाजिक–सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्यजन सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित अन्य सदस्य एवं समाजसेवी— उमेश अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, युगबोध अग्रवाल, प्रवीण मैशेरी, डॉ. सलीम राज, शताब्दी पांडे, डॉ. इला गुप्ता, शीला शर्मा, इंदिरा जैन, विवेक बर्धन, सुधीर फौजदार, विनय शर्मा, बिहारी होतवानी, अश्विन प्रभाकर, दिग्विजय भाकरे, सुचित्रा बर्धन, निधि झा, शकुंतला वास, अर्चना भाकरे, उमा शुक्ला, रैहाना खान, सुनीता चंसोरिया, सुनीता पाठक, निशा संमदुलकर, अर्चना वोरा, सीमा कटंककार, खुशबू शर्मा, लक्ष्मी जीलहरे, सविता मौर्या, अंजलि देशपांडे, राजमोहन बाग, राहुल देव पंत देवेंद्र गुप्ता सहित कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। 350 से अधिक स्टॉल, अनेक प्रतियोगिताएँ प्रबंधक सुब्रत चाकी ने बताया कि स्वदेशी मेला हर वर्ष की तरह इस बार भी भव्य स्वरूप में आयोजित होगा। मेले में 350 से अधिक स्वदेशी उत्पादों के स्टॉल लगाए जाएंगे सुई से लेकर बड़े मशीनरी स्तर तक की वस्तुएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेंगी प्रतिदिन मेहंदी, रंगोली, चित्रकला, समूह नृत्य सहित विभिन्न प्रतियोगिताएँ होंगी हजारों प्रतिभागियों को मंच प्रदान किया जाएगा विभिन्न राज्यों की संस्कृति और खान-पान होगा आकर्षण मेले में छत्तीसगढ़ के साथ गुजरात, राजस्थान, पंजाब, ओडिशा, आंध्रप्रदेश तथा अन्य राज्यों की संस्कृति, लोक नृत्य और पारंपरिक भोजन के विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। प्रतिदिन मंच पर लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ मेले की विशेष आकर्षण होंगी। संगोष्ठियाँ भी होंगी आयोजित मेले के दौरान समसामयिक विषयों पर विशेषज्ञों की संगोष्ठियाँ भी आयोजित की जाएंगी, जिनमें विषय विशेषज्ञ अपनी बातें रखेंगे।

यूपी को टेक्नोलॉजी ड्रिवन अर्थव्यवस्था बनाने को लेकर स्टेकहोल्डर के साथ मंथन

विजन 2047 : विकसित भारत में उत्तर प्रदेश की होगी बड़ी भूमिका : प्रमुख सचिव आईटी एंड इलेक्ट्रोनिक्स यूपी को टेक्नोलॉजी ड्रिवन अर्थव्यवस्था बनाने को लेकर स्टेकहोल्डर के साथ मंथन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से किसान से लेकर शहरी स्टार्टअप और सरकारी कार्यप्रणाली तक में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को मिली गति लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित उत्तर प्रदेश 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की मजबूत डिजिटल बुनियाद तैयार की जा रही है। सोमवार को लखनऊ स्थित होटल द सेंट्रम में स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन बैठक में प्रदेश सरकार और निजी क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों के बीच भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा हुई। इस मौके पर आईटी एंड इलेक्ट्रोनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव ने कहा कि 2047 के विकसित भारत में उत्तर प्रदेश की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इस बैठक में प्राप्त मुख्य सुझावों के आधार पर सरकार अपनी प्राथमिकताओं को तय करेगी। उत्तर प्रदेश अब डिजिटल आधारित शासन व्यवस्था और टेक्नोलॉजी ड्रिवन अर्थव्यवस्था की ओर तेज गति से बढ़ रहा है। बैठक में सबसे पहले डिजिटल कृषि और ग्रामीण सशक्तिकरण पर जोर देते हुए विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि किसानों के लिए एकीकृत डिजिटल इकोसिस्टम विकसित किया जाए। जिससे उन्हें बाजार की जानकारी, वित्तीय सहायता और कृषि परामर्श आसानी से उपलब्ध हो सके। टेक आधारित लॉजिस्टिक और ट्रेसिंग सिस्टम से कृषि आपूर्ति श्रृंखला में होने वाली बर्बादी कम होगी और इससे किसानों की आय बढ़ेगी। साथ ही ग्रामीण इंटरनेट और डिजिटल सुविधाओं को मजबूत करते हुए कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। योगी सरकार की ग्रामीण विकास और डिजिटल इंडिया के सिद्धांतों को जोड़ने की यह मंशा प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगी। एमएसएमई के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को प्रदेश की आर्थिक रीढ़ मानते हुए इसे राज्यव्यापी स्तर पर बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई। प्रदेश सरकार ने पहले ही कई अवसर प्रदान किए हैं और अब इसे और सशक्त बनाने के लिए डिजिटल टूल्स प्रशिक्षण और सरल डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने की दिशा में तेज कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में राज्य स्तरीय मार्केट लिंकेज प्लेटफॉर्म बनाने का सुझाव दिया गया जिससे यूपी के उत्पाद वैश्विक बाजारों तक पहुंच सकें। साथ ही औद्योगिक क्लस्टर के लिए मांग पूर्वानुमान प्रणाली स्थापित करने का सुझाव भी दिया गया जिससे उत्पादन की योजना अधिक वैज्ञानिक और सटीक हो सके। नीतिगत स्तर पर प्रदेश सरकार की सशक्त योजनाओं क्रियान्वयन की गति और तेज करने पर भी चर्चा हुई । डाटा सेंटर्स, आईटी सिटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में हाल ही में आए लगभग 500 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों का स्वागत करते हुए बैठक में वैश्विक स्तर के टेक एंकरों को आकर्षित करने के लिए शहरी सुविधाओं और जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर भी चर्चा हुई। पर्यावरण हितैषी ढांचे के विकास पर बल देते हुए यह सुनिश्चित करने की बात हुई कि विकास के साथ हरित तकनीकों का उपयोग भी अग्रणी भूमिका में हो। युवा शक्ति और प्रतिभा निर्माण पर सरकार का विशेष ध्यान रहा है और इसी दिशा में डिजिटल शिक्षा को प्रदेश के हर स्कूल में अनिवार्य बनाने की सिफारिश सामने आई। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों से संबंधित कौशल विकास केंद्रों का विस्तार किया जाएगा। आईआईटी बीएचयू और विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों को डीप टेक प्रतिभा निर्माण के केंद्र के रूप में सशक्त बनाने का सुझाव भी दिया गया। स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई उड़ान देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के नेतृत्व में स्टार्टअप उत्पादों के लिए बाजार सुविधाएं उपलब्ध कराने और सरकारी खरीद में इनोवेटिव कंपनियों को विशेष प्रावधान देने का प्रस्ताव भी शामिल रहा। साथ ही नवाचार और शोध प्रयोगशालाओं का बेहतर उपयोग करते हुए पेटेंट और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर जोर दिया गया। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के संबंध में भी विशेषज्ञों ने चर्चा की। बैठक में शामिल विशेषज्ञों ने योगी आदित्यनाथ सरकार की प्रौद्योगिकी केंद्रित सोच की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विकसित भारत के पथ पर डिजिटल नेतृत्व प्रदान करने के लिए तैयार है। तीन शक्तियों पर केंद्रित है डिजिटल प्रदेश की परिकल्पना उत्तर प्रदेश को डिजिटल प्रदेश बनाने की परिकल्पना तीन मुख्य शक्तियों पर केंद्रित है। पहली अर्थ शक्ति है। इसके अंतर्गत कृषि, निर्माण, पर्यटन और अन्य मुख्य क्षेत्रों में आर्थिक परिवर्तन को गति देने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरी सृजन शक्ति है, इसके माध्यम से भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर और हरित इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करते हुए नगरीय विकास, लॉजिस्टिक्स, उपयोगिताओं और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सतत उच्च विकास की नींव तैयार की जा रही है। वहीं जीवन शक्ति का केंद्र राज्य की जनता है जहां स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, लैंगिक सशक्तिकरण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के माध्यम से नागरिकों के जीवन स्तर को समृद्ध बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। विजन 2047 इस बात पर स्पष्ट जोर देता है कि तकनीक और डिजिटल इनोवेशन के बल पर शासन व्यवस्था और आर्थिक ढांचे में दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। जिससे उत्तर प्रदेश नए भारत के विकास मॉडल में अग्रणी भूमिका निभा सके। विजन 2047 पर विशेषज्ञों से मागें परामर्श विकसित उत्तर प्रदेश विजन 2047 की स्टेकहोल्डर बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने उपस्थित प्रतिभागियों से अपील किया कि वह सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार्टअप और अन्य क्षेत्रों में प्रदेश सरकार और अधिक प्रभावी कदम उठा सके इससे संबंधित अपने सुझाव और फीडबैक साझा करें। इस महत्वपूर्ण बैठक में आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव अनुराग यादव, साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव और नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार भी शामिल रहे। बैठक के दौरान इन वरिष्ठ अधिकारियों ने आईटी कंपनियों, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के प्रतिनिधियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का विस्तार से उत्तर दिया और उनकी ओर से आए विभिन्न सुझावों पर सकारात्मक चर्चा हुई। प्रतिनिधियों से यह भी अनुरोध किया गया कि वे अपने सुझावों को विस्तृत रूप में लिखित ड्राफ्ट के रूप में प्रस्तुत करें ताकि उन पर विधिवत विचार कर प्रदेश सरकार उन्हें क्रियान्वित करने के लिए सर्वोत्तम निर्णय ले सके। इस अवसर पर नीति आयोग से रमा सहित कई अन्य विशिष्ट लोग उपस्थित रहे। 1 ट्रिलियन की … Read more

मुख्यमंत्री ने इंदौर में किया आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण

परिक्रमावासियों की सेवा कर धन्य हुए हम : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने इंदौर में किया आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आश्रयग्राहियों को वितरित किए कंबल, व्यवस्थाओं की ली जानकारी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार रात इंदौर के दयालबाग स्थित आश्रय स्थल का देर रात 10:30 बजे औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां अस्थायी रूप रह रहे लोगों से बातचीत की और आश्रय स्थल पर उपलब्ध सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी आश्रयग्राहियों को कंबल वितरित किए, जिससे उन्हें ठंड में उन्हें राहत मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ व दाहोद से परीक्षा देने आए विद्यार्थी  कमल, दाहोद के संकेत एवं संजय तथा इंदौर में पानी टंकी की चौकीदारी कर रहे चुन्नी लाल सहित अन्य श्रमिकों से उनके यहां आने के कारण, कार्य-स्थिति और आश्रय स्थल पर मिल रही सुविधाओं के बारे में चर्चा की।  उन्होंने आश्रय स्थल में ठहरे लोगों की दिनचर्या, समस्याओं और उनकी जरूरतों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। इस दौरान परिक्रमावासी अनिल से भी मुख्यमंत्री ने संवाद किया। परिक्रमावासी  अनिल ने बताया कि वे धार्मिक परिक्रमा पूरी कर वापस लौटे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनसे चर्चा करते हुए कहा कि आपकी सेवा व दर्शन कर हम भी धन्य हो गए है। इस दौरान विधायक  गोलू शुक्ला,  सुमित मिश्रा,  गौरव रणदीवे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं इंदौर सम्भागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर  शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त  दिलीप कुमार यादव व अन्य अधिकारीगण मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने काल भैरव धाम में किए दर्शन    आश्रय स्थल निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ,  काल भैरव धाम पहुंचे। उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और जनकल्याण की कामना की। प्रमुख बिंदु मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दयालबाग के आश्रय स्थल का 10:30 बजे किया औचक निरीक्षण। आश्रय स्थल में किए गए प्रबंधों की ली जानकारी। आश्रय स्थल में मौजूद लोगों को वितरित किए कंबल। परिक्रमावासी  अनिल से की चर्चा। निरीक्षण के बाद  काल भैरव धाम मंदिर में किए दर्शन

एयरपोर्ट चार्ज होगा महंगा: दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट शुल्क में बड़ी बढ़ोतरी की तैयारी

नई दिल्ली दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट से उड़ान भरना अब यात्रियों के लिए काफी महंगा साबित हो सकता है। दोनों प्रमुख एयरपोर्ट्स पर यूजर चार्जेस में 22 गुना तक की भारी बढ़ोतरी की आशंका है। यह स्थिति टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (TDSAT) के हालिया आदेश के बाद बनी है, जिसमें 2009 से 2014 की अवधि के लिए टैरिफ गणना का तरीका बदल दिया गया है। नई गणना के अनुसार, इन पांच वर्षों में एयरपोर्ट ऑपरेटरों को 50,000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ। अब यह नुकसान यात्रियों से वसूले जाने वाले चार्जेज जैसे UDF, लैंडिंग और पार्किंग फीस के जरिए पूरा किया जा सकता है। इससे हवाई किराए पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और टिकटों की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इस फैसले के खिलाफ AERA, घरेलू एयरलाइंस और लुफ्थांसा, एयर फ्रांस और गल्फ एयर जैसी विदेशी एयरलाइंस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, सुनवाई बुधवार को होगी। सूत्रों के मुताबिक, आदेश लागू होने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों से वसूला जाने वाला यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) 129 रुपए से बढ़कर 1,261 रुपए हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यह फीस 650 रुपए से बढ़कर 6,356 रुपए तक जा सकती है। मुंबई एयरपोर्ट में भी तस्वीर बेहद चिंताजनक है- घरेलू यात्रियों की UDF 175 रुपए से बढ़कर 3,856 रुपए, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की फीस 615 रुपए से बढ़कर 13,495 रुपए तक पहुंच सकती है। सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से यात्रियों की संख्या पर गंभीर असर पड़ेगा। एक अधिकारी के अनुसार, “एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस के बीच कानूनी विवादों का खामियाजा यात्रियों को नहीं भुगतना चाहिए।” विवाद की जड़ क्या है? यह विवाद करीब दो दशक पुराना है। 2006 में एयरपोर्ट्स के निजीकरण के दौरान एसेट्स के मूल्यांकन से जुड़े कई बिंदुओं पर विवाद शुरू हुआ था। AERA हर पांच साल में एयरपोर्ट टैरिफ तय करता है, जिसमें ऑपरेटर के निवेश और कमाई को आधार माना जाता है लेकिन AERA का गठन 2009 में हुआ, जबकि दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट की जिम्मेदारी उससे तीन साल पहले DIAL (GMR समूह) और MIAL (तब GVK, अब अडानी समूह) को सौंप दी गई थी। उस समय उपलब्ध एसेट्स का डेटा विश्वसनीय नहीं था। इसलिए सरकार और निजी ऑपरेटरों के बीच Hypothetical Regulatory Asset Base (HRAB) पर सहमति बनी, जो संपत्ति का काल्पनिक मूल्य निर्धारित करता है ताकि टैरिफ तय किया जा सके। किस मुद्दे पर टकराव? FY09–14 की टैरिफ गणना में AERA ने केवल एरोनॉटिकल एसेट्स—जैसे रनवे, टर्मिनल, चेक-इन काउंटर—को शामिल किया लेकिन ऑपरेटर DIAL और MIAL का कहना था कि नॉन-एरोनॉटिकल एसेट्स, जैसे ड्यूटी फ्री दुकानें, लाउंज और पार्किंग, का मूल्य भी शामिल होना चाहिए। AERA के इस फैसले को 2018 में TDSAT और 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था। बाद में ऑपरेटरों ने मंत्रालय की 2011 की चिट्ठी के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार का आवेदन दिया। कोर्ट ने मामला फिर से TDSAT को भेज दिया। TDSAT का पलटा हुआ आदेश जुलाई में TDSAT ने अपना पुराना फैसला बदलते हुए ऑपरेटरों के पक्ष में निर्णय दिया और कहा कि टैरिफ निर्धारण में नॉन-एरोनॉटिकल एसेट्स को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके आधार पर अनुमान लगाया गया कि दोनों एयरपोर्ट्स को FY09–14 के दौरान 50,000 करोड़ रुपए अधिक कमाने चाहिए थे, जिसकी भरपाई अब UDF बढ़ाकर की जा सकती है। भले ही मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लेकिन एयरपोर्ट शुल्कों में तेजी से बढ़ोतरी संसद में भी चिंता का विषय रही है। एक संसदीय समिति ने इस साल की शुरुआत में मंत्रालय को तलब कर कहा था कि निजीकरण के बाद एयरपोर्ट चार्जेज कई गुना बढ़े हैं, जिससे यात्रियों पर भारी बोझ पड़ रहा है।

HSBC होम लोन का खर्च होगा कम? RBI के रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की संभावना

नई दिल्ली   आगे कुछ समय के लिए मुद्रास्फीति टारगेट लेवल से कम बने रहने का अनुमान है इस बीच एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की ओर से कहा गया कि आरबीआई की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की जाएगी। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का रेपो रेट को लेकर फैसला 5 दिसंबर को आएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास दर अभी तक मजबूत बनी हुई है, जिसे सरकारी खर्च और जीएसटी-कट लेड रिटेल खर्च से बढ़ावा मिल रहा है। इसके अलावा, नवंबर फ्लैश मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 56.6 से संकेत मिलता है कि जीएसटी के कारण वृद्धि अपने पीक पर पहुंच गई है क्योंकि कुल मिलाकर नए ऑर्डर कम आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, "अभी विकास दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन मार्च 2026 की तिमाही में इसमें नरमी आ सकती है। हमें उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक आगामी दिसंबर नीति बैठक में पॉलिसी रेट को कम करेगा।" रिपोर्ट में कहा गया कि चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत रही, जो कि जून तिमाही के जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत और हमारे 7.5 प्रतिशत के अनुमान से अधिक रही। वहीं, ग्रॉस वैल्यू एडेड वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत और नॉमिनल जीडीपी 8.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी। जीडीपी में वृद्धि की गति तेज रही, जिसके बहुत से कारण रहे। इनमें से एक महत्वपूर्ण कारक 22 सितंबर को लागू की गई जीएसटी दरों में कटौती रही, जिसे लेकर 15 अगस्त को घोषणा की गई थी। एचएसबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, "हमारा मानना है कि कंज्यूमर डिमांड में वृद्धि की उम्मीद से उत्पादन में वृद्धि देखी गई। हमारे हालिया शोध दर्शाता है कि कम आय वाले राज्य अब वृद्धि की राह पर आ गए हैं, यहां तक कि वे उच्च आय वाले राज्यों से भी तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।"रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के निर्यात पर 50 प्रतिशत के अमेरिकी रेसिप्रोकल टैरिफ के बावजूद भी भारत की विकास दर तेज गति से बढ़ती रही। होम लोन हो जाएगा सस्ता? रेपो रेट में कटौती के आसार रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3 से 5 दिसंबर तक होने वाली है। 5 दिसंबर को गवर्नर संजय मल्होत्रा फैसला सुनाएंगे। जानकारों ने अनुमान जताया है कि रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती हो सकती है। हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर 8.2 फीसदी की GDP ग्रोथ को देखते हुए सेंट्रल बैंक रेट में कोई बदलाव नहीं कर सकता है। लिहाजा केंद्रीय बैंक ब्याज दर को स्थिर रख सकता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति पिछले दो महीनों से सरकार के तय दायरे की निचली सीमा (दो प्रतिशत) से भी कम है। अक्टूबर में तो यह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। खाने-पीने की चीजें सस्ती होने और GST में कटौती की वजह से महंगाई पर लगाम लगी है। सेंट्रल बैंक ने पिछले साल फरवरी में रेट कम करने का अपना साइकिल शुरू किया था। पॉलिसी अनाउंसमेंट में रेपो रेट को कुल मिलाकर 100 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 5.5 फीसदी कर दिया था। घटेगी EMI, सस्ते होंगे लोन RBI के इस फैसले से लोन पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं। रेपो रेट घटने पर बैंकों को आरबीआई से कम ब्याज दर पर लोन मिल सकेगा। बैंक इस सस्ते कर्ज का फायदा ग्राहकों तक भी पहुंचाते हैं। रेपो रेट में गिरावट के बाद आमतौर पर बैंक लोन पर ब्याज दरों को घटा देते हैं। जिससे आम नागरिक के लिए भी लोन सस्ता हो जाता है। होम लोन की ईएमआई नई ब्याज दर के हिसाब से घट जाएगी और नए लोन भी कम ब्याज दर पर उपलब्ध होंगे। अगर रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती होती है तो यह घटकर 5.25 फीसदी पर पहुंच सकता है। अब तक RBI ने क्या किया है? RBI फरवरी से जून के बीच रेपो रेट में कुल 100 bps की कटौती कर चुका है (6.5% से 5.5%)। लेकिन अगस्त और अक्टूबर की पॉलिसी में दरों को बिना बदलाव के छोड़ दिया गया था। जानिए क्या है रेपो रेट यह वह दर होती है जिस जिस पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को कर्ज देता है। अगर रेपो रेट बढ़ाया जाता है तो साफ है कि बैंकों को रिजर्व बैंक से महंगी दर पर कर्ज मिलेगा। इस तरह कर्ज महंगे हो जाएंगे ।