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गाजे-बाजे के साथ शुरू हुई ‘पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा’

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अनूठी पहल पर मध्यप्रदेश ने हवाई पर्यटन के क्षेत्र में एक गौरवशाली अध्याय आरंभ किया है। प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी को सुदृढ़ कर पर्यटकों की संख्या में वृद्धि करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा’ का संचालन गुरुवार, 20 नवंबर से विधिवत शुरू हो गया है। परंपरागत गाजे-बाजे, उत्साह, रंगों और स्थानीय जनता के गर्मजोशी भरे स्वागत के साथ यह सेवा शुरू हुई, जिसने पूरे प्रदेश में एक उत्सव जैसा माहौल बना दिया। यह सेवा अब नियमित रूप से संचालित होकर मध्यप्रदेश के पर्यटन को एक नई दिशा और तीव्र गति प्रदान करेगी। पहली उड़ान: एक ऐतिहासिक पल पहले दिन तीन सेक्टरों में शेड्यूल के अनुसार हेलीकाप्टर ने भोपाल से मढ़ई और मढ़ई से पचमढ़ी के लिए उड़ान भरी। इंदौर से उज्जैन एवं ओंकारेश्वर और जबलपुर से कान्हा तथा बांधवगढ़ के बीच हेली सेवा संचालित हुई, जिसका जनप्रतिनिधियों और महंतों ने आनंद लिया।  पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि यह सेवा आध्यात्मिक, प्राकृतिक और वन्यजीव पर्यटन को एक तेज, सुगम और किफायती हवाई मार्ग प्रदान करेगी। यह नया हेली नेटवर्क न केवल यात्रियों का बहुमूल्य समय बचाएगा, बल्कि प्रदेश में रोजगार और निवेश को भी बढ़ावा देगा।  अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति, गृह और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि ‘पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा’ प्रमुख धार्मिक, प्राकृतिक, सांस्कृतिक और वन्यजीव स्थलों को जोड़ने का अभिनव प्रयास है। किफायती किराए और कम समय में गंतव्य तक पहुंचना इस सेवा को पर्यटकों के लिए अत्यंत आकर्षक बनाएगा। यह हाई-वैल्यू और आध्यात्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा और घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में वृद्धि सुनिश्चित करेगा। भोपाल से प्रकृति के आंचल में भोपाल से मढ़ई के लिए सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया सिंह नारोलिया, श्रीमती प्रीति शुक्ला, योगेंद्र राजपूत और संदेश पुरोहित ने यात्रा की। मढ़ई से पचमढ़ी तक की उड़ान में इनके साथ पिपरिया विधायक श्री ठाकुर दास नागवंशी और सोहागपुर विधायक श्री विजय पाल सिंह भी जुड़े।  इंदौर से पवित्र तीर्थों की यात्रा पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा का इंदौर में भक्तिमय वातावरण में शुभारंभ हुआ। सेवा के प्रथम चरण में इंदौर से उज्जैन स्थित बाबा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग तथा उज्जैन से ओंकारेश्वर तक हेलीकॉप्टर से धार्मिक यात्रा प्रारंभ हुई। बिचोली मर्दाना स्थित हेलीपैड से भक्ति भाव से परिपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में यात्रियों का पहला दल रवाना हुआ। यात्रियों के पहले दल को जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने झंडी दिखाकर महाकाल की नगरी उज्जैन के लिए रवाना किया। मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि यह पर्यटन सेवा धार्मिक पर्यटन का नया अध्याय है। इंदौर से उज्जैन और ओंकारेश्वर के इस आध्यात्मिक सर्किट की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस पहल की साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह सेवा बड़ी संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों को सुविधा, समय की बचत और सुरक्षित यात्रा का नया अनुभव प्रदान करेगी। पर्यटकों ने भी इसे धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अत्याधुनिक कदम बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश की पहचान राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत होगी। यात्रियों के प्रथम दल में विधायक श्री रमेश मेंदोला, श्री महेंद्र हार्डिया, श्री सुमित मिश्रा, श्री श्रवण चावड़ा, मीडिया कर्मी सहित अन्य श्रद्धालु शामिल हुए। हेली सेवा से उज्जैन पहुंचने पर यात्रियों का पुष्पवर्षा से परंपरागत स्वागत किया गया। उज्जैन में आयोजित 10 मिनट की जॉय-राइड में महंत आनंद पुरी जी, महंत मंगल दास जी, महंत रामेश्वर गिरी जी और महंत डॉ. रामेश्वर दास जी सम्मिलित हुए। जबलपुर से वन-संपदा तक जबलपुर के श्री अनिल तिवारी और श्री ओमनारायण दुबे ने कान्हा और बांधवगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता को निहारा। शेड्यूल के अनुसार जबलपुर से अमरकंटक की सेवा का संचालन 21 नवंबर से प्रारंभ होगा। जबलपुर से मैहर और चित्रकूट तक आवागमन के लिए भी हेली सेवा का लाभ पर्यटक ले सकेंगे।    सेक्टरवार प्रमुख सुविधाएं धार्मिक सेक्टर : इंदौर–उज्जैन 20 मिनट में, उज्जैन–ओंकारेश्वर 40 मिनट में, ओंकारेश्वर–इंदौर 25 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। इको टूरिज्म सेक्टर : भोपाल–मढ़ई–पचमढ़ी तक तेज कनेक्टिविटी।  भोपाल–मढ़ई 40 मिनट में,  मढ़ई–पचमढ़ी 20 मिनट में और सीधी उड़ान: भोपाल–पचमढ़ी 60 मिनट में होगी पूरी। वाइल्डलाइफ़ सेक्टर : जबलपुर–मैहर 60 मिनट में, मैहर–चित्रकूट 30 मिनट में, चित्रकूट–मैहर 30 मिनट में, जबलपुर–बांधवगढ़ 45 मिनट में और जबलपुर–अमरकंटक 60 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। आसान बुकिंग पर्यटक www.flyola.in, https://air.irctc.co.in/flyola और https://transbharat.in/ पर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।  

अमेरिका से जैवलिन मिसाइल खरीदने की मंजूरी, भारत की रक्षा क्षमता होगी और मजबूत

नई दिल्ली अमेरिका और भारत के बीच एक धमाकेदार डिफेंस डील हुई है. अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत को जैवलिन मिसाइल सिस्टम बेचने की संभावित विदेशी सैन्य बिक्री को मंजूरी दे दी है. इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 45.7 मिलियन डॉलर यानि ₹4,04,90,31,425 बताई जा रही है. इसके साथ जरूरी उपकरण और सपोर्ट सिस्टम भी शामिल होंगे, जवलिन एक उन्नत एंटी-टैंक मिसाइल है जो जमीन पर दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और किलेबंद ठिकानों को निशाना बनाने में इस्तेमाल होती है. इसके अलावा अमेरिका की ओर से भारत को एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल्स बेचने की संभावित सैन्य बिक्री को भी मंजूरी दी है. इस सौदे की अनुमानित कीमत 47.1 मिलियन डॉलर यानि ₹4,17,38,30,085 है. एक्सकैलिबर एक सटीक निशाना लगाने वाला आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल है, जिसे लंबी दूरी पर भी सटीक निशाने के लिए जाना जाता है. भारतीय सेना में ये शामिल हुआ तो इससे इससे भारतीय सेना की आर्टिलरी क्षमता और घातक हो जाएगी. क्या -क्या भारत को देगा अमेरिका? अमेरिकी रक्षा सुरक्षा सहयोग एजेंसी (DSCA) के मुताबिक अमेरिका ने करीब 45.7 मिलियन डॉलर के FGM-148 Javelin एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम की संभावित बिक्री को मंजूरी दी है. भारत ने अमेरिका से 100 जैवलिन मिसाइलें, 1 टेस्ट फ्लाई-टू-बाय मिसाइल, 25 कमांड-लॉन्च यूनिट, ट्रेनिंग सिस्टम, सिमुलेशन राउंड, स्पेयर पार्ट्स और पूरी लाइफ-साइकल सपोर्ट की मांग की थी. DSCA का कहना है कि यह सौदा भारत की रक्षा क्षमता को वर्तमान और भविष्य की खतरों से निपटने में मदद करेगा और इससे क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. अमेरिका ने भारत के साथ लगभग 93 मिलियन डॉलर (लगभग 775 करोड़ रुपये) के दो अहम रक्षा सौदों को मंजूरी दी है. इन सौदों से भारत की सटीक मारक क्षमता और एंटी-टैंक/एंटी-आर्मर ताकत और मजबूत होगी. क्या है जैवलिन मिसाइल की खासियत? क्या है जैवलिन (FGM-148 Javelin) एंटी टैंक मिसाइल? FGM-148 Javelin दुनिया के सबसे उन्नत एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम में से एक माना जाता है. इसकी खासियतों की बात करें तो ये टैंकों को उड़ाने में माहिर है और एक बार छूटने के बाद इसके टार्गेट की चिंता करने की जरूरत नहीं होती.     जैवलिन मिसाइल छोड़ने के बाद ऑपरेटर को लक्ष्य की ओर देखने की जरूरत नहीं रहती.     यह टैंक के ऊपर वाले हिस्से पर हमला करती है, जो सबसे कमजोर होता है.     लक्ष्य को लॉक करने के लिए उन्नत IR सीकर का इस्तेमाल करती है, जिससे जामिंग कम प्रभावी होती है.     आधुनिक टैंकों और आर्मर्ड व्हीकल्स के खिलाफ बेहद प्रभावी.     2,500 मीटर से अधिक रेंज – सुरक्षित दूरी से हमला करने की क्षमता.     ये इतना हल्का है कि दो सैनिक इसे आसानी से ले जा सकते हैं.     इससे रात में भी पूरी तरह सटीक निशाना लगा सकते हैं.     इसे छोटे स्थानों, इमारतों या कवर के पीछे से भी दागा जा सकता है.     लक्ष्य चूकने की संभावना बेहद कम होती है.     टैंक, बंकर, भवन, हेलिकॉप्टर जैसे कई लक्ष्यों पर काम करती है. भारत को कितना फायदा? जैवलिन मिसाइल और एक्सकैलिबर दोनों हथियार पहले से ही सीमित स्तर पर भारतीय सेना में उपयोग किए जा रहे हैं. यह नए सौदे भारत के मौजूदा स्टॉक बढ़ाएंगे,युद्धक्षमता बेहतर करेंगे और अमेरिका-निर्मित हथियार प्रणालियों के साथ इंटरऑपरेबिलिटी मजबूत करेंगे.

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह की पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों से हुई चर्चा

प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाये जा रहे पाठ्यक्रम पर हो निरंतर रिसर्च- मंत्री  सिंह स्कूल शिक्षा मंत्री  सिंह की पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों से हुई चर्चा भोपाल  स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने प्रदेश के स्कूलों में पढ़ाये जा रहे पाठ्यक्रम पर निरंतर शोध करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में प्रदेश की संस्कृति, विरासत, आंचलिक विशेषताओं और जनजातीय गौरव जैसे विषयों को शामिल किये जाने पर विशेष ध्यान दिया जाये। इस प्रक्रिया से बच्चों को मध्यप्रदेश की विशेषताओं को समझने का मौका मिलेगा। स्कूल शिक्षा मंत्री बुधवार को मंत्रालय में पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों से चर्चा कर रहे थे‍। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता में और वृद्धि के लिये शिक्षकों को लगातार प्रशिक्षण दिये जाने पर भी जोर दिया। पाठ्यक्रम समिति के सदस्यों ने राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के सुझाव दिये। बैठक में तय हुआ कि स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने के लिये होने वाली बैठकों और कार्यशाला का निर्धारित कैलेण्डर तैयार किया जाये। बैठक में तय हुआ कि राज्य शिक्षा केन्द्र की लाइब्रेरी में अनुसंधान से जुड़ी पुस्तकों के संग्रह का विस्तार किया जाये। पाठ्यक्रम समिति की बैठकों में एनसीईआरटी के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर उनके भी सुझाव लिये जायें। बैठक में विभाग के टीचर ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट के प्रस्तावित भवन के संबंध में भी चर्चा हुई। बैठक में पाठ्यक्रम समिति के सदस्य डॉ. रविन्द्र कन्हारे, डॉ. अल्केश चतुर्वेदी, डॉ. भागीरथ कुमावत एवं विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

दिल्ली धमाके की जांच में बड़ा खुलासा, चार डॉक्टरों को हिरासत में लिया गया

नई दिल्ली दिल्ली के लाल क‍िले के बाहर 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच में एनआईए ने सबसे बड़ा खुलासा करते हुए चार नए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. यह चारों वही लोग हैं जिन्होंने ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई i20 कार का इंतजाम, मूवमेंट और सुरक्षित ट्रांसफर कराया था. सबसे हैरान करने वाली बात है क‍ि चारों डॉक्टर हैं. इनमें से एक मुफ्ती का भी काम करता था. एनआईए ने इन चारों को श्रीनगर में गिरफ्तार किया. इनकी गिरफ्तारी के बाद साफ हो गया है कि ब्लास्ट में इनकी भूमिका बेहद प्रमुख थी. एनआईए के मुताबिक, पुलवामा से डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, अनंतनाग से डॉ. अदील अहमद राथर, लखनऊ डॉ. शाहीना सईद और शोपियां से मुफ्ती इरफान अहमद वगाय को पकड़ा गया था. इन चारों ने i20 कार को हासिल करने, उसे उपयोग के लिए तैयार रखने, उसकी मूवमेंट तय करने और मॉड्यूल तक पहुंचाने में कोर ऑपरेशन संभाला था. कैसे डॉक्टरों की टीम बनी कार ऑपरेशन की मास्टरमाइंड?     NIA की जांच में सामने आया है कि ये चारों मॉड्यूल की सबसे रणनीतिक टीम थे. इनकी भूमिका सिर्फ “मदद” नहीं, बल्कि कार ऑपरेशन का पूरा प्रबंधन थी. सूत्रों के मुताबिक, कागजी तौर पर कार किसी और के नाम थी, लेकिन असल में कार की खरीद, लाने, छुपाने और सुरक्षित रखवाने का पूरा काम इन्हीं चारों ने संभाला.     कार की मूवमेंट और रूट प्लानिंग इन्‍होंने ही रची. कार को कहां से उठाना है. किस रास्ते से दिल्ली लाना सुरक्षित रहेगा. बीच में कितनी देर कहां रुकना है. कार कब ‘एक्टिवेशन पॉइंट’ पर पहुंचाई जाए. यह पूरा ब्लूप्रिंट डॉक्टर मुजम्मिल और डॉक्टर राथर ने तैयार किया था.     मेडिकल कवर और कम्युनिकेशन सिस्टम इन्‍हीं के हवाले था. सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ की डॉक्टर शाहीना ने फंड चेन, मेडिकल विज‍िट की आड़ में मीटिंग की. सुरक्षित कम्युनिकेशन जैसे रणनीतिक काम संभाले.     मॉड्यूल को आइडियोलॉजिकल सपोर्ट मुफ्ती इरफान अहमद वगाय ने दिया. यह सदस्यों को जोड़ता था. उन्हें मानसिक रूप से तैयार करता था और विदेश लिंक के लिए संपर्क सूत्र था. यह गिरफ्तारी क्यों बड़ी है? इससे पहले एनआईए ने दो आरोपी पकड़े थे, जिनका नाम आमिर राशिद अली था. कार इसी के नाम पर रजिस्टर थी. फ‍िर एनआईए ने जासिर बिलाल वानी उर्फ दानिश को दबोचा, जो तकनीकी विस्फोटक सेटअप में मददगार साबित हुआ था. लेकिन कार कैसे आई? किसने लाई? किसने मूव कराई? किसने उसे सुरक्षित रखा? इन चारों डॉक्टरों ने ही वह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा संभाला था. यानी कार के बिना ब्लास्ट हो ही नहीं सकता था. और कार को ऑपरेशन में लाने वाले यही चारों थे. मुजम्मिल और शकील को द‍िल्‍ली लेकर आई पुल‍िस इस बीच एनआईए आतंकी डॉ मुजम्मिल और शकील को दिल्ली लेकर आई. उसे कभी भी पटियाला हाउस कोर्ट में पेश क‍िया जा सकता है. जांच एजेंसी के सूत्र के मुताबिक शाहीन,आदिल समेत चार आरोपियों को कोर्ट में आज थोड़ी देर बाद पेश किया जाएगा.

SC ने प्रेसिडेंशियल रेफरेंस पर कहा—राज्यपाल विधेयक लंबित नहीं रख सकते, समयसीमा तय नहीं

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने प्रेसिडेंशियल रफेरेंस पर फैसला सुनाते हुए कहा गवर्नर द्वारा बिलों को मंज़ूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती. "डीम्ड असेंट" का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है. कोर्ट ने कहा चुनी हुई सरकार कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए, ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ़ औपचारिक रोल नहीं होता. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है. वह मंज़ूरी दे सकता है, बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है. बता दें प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की संविधान पीठ ने 10 दिनों तक दलीलें सुनने के बाद 11 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. गवर्नर या प्रेसिडेंट काम अपने पास लेना न्याय के दायरे में नहीं आता सुप्रीम कोर्ट ने कहा गवर्नर या प्रेसिडेंट काम अपने पास लेना न्याय के दायरे में नहीं आता. ज्यूडिशियल रिव्यू तभी होता है जब बिल एक्ट बन जाता है. तमिलनाडु फैसला  न्याय के दायरे में नहीं आता.  सबसे कठोर सिद्धांत यह है कि बिल के स्टेज पर कोई भी  मंज़ूरी को चुनौती दे सकता है.  हम यह भी साफ़ करते हैं कि जब बिल आर्टिकल 200 के तहत गवर्नर द्वारा रिज़र्व किया जाता है तो प्रेसिडेंट रिव्यू मांगने के लिए बाउंड नहीं हैं. अगर बाहरी विचार में, प्रेसिडेंट रिव्यू मांगना चाहते हैं, तो वह मांग सकते हैं, हालांकि, जो सवाल उठता है वह यह है कि जब गवर्नर मंज़ूरी नहीं देते हैं तो क्या समाधान है. जबकि कार्रवाई की मेरिट्स पर विचार नहीं किया जा सकता. कोर्ट द्वारा जांच किए जाने पर, लंबे समय तक, अनिश्चित, बिना किसी कारण के कार्रवाई न करने पर सीमित न्यायिक जांच होगी. सरकार को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट संविधान पीठ के निर्णय के मुताबिक चुनी हुई सरकार यानी कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए. ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते. लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ औपचारिक रोल नहीं होता. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है. वह मंजूरी दे सकता है. बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है.  विधेयक के अधिनियम बनने के बाद ही न्यायिक समीक्षा लागू की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने कहा कि विधेयक के अधिनियम बनने के बाद ही न्यायिक समीक्षा लागू की जा सकती है. गवर्नर की ओर से बिलों को मंजूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती. 'डीम्ड असेंट' का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है.  SC ने कहा- 'बिना वजह की अनिश्चित देरी न्यायिक जांच के दायरे में आ सकती है' सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में राज्यपाल के लिए समयसीमा तय करना संविधान की ओर से दी गई लचीलेपन की भावना के खिलाफ है. पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल के पास केवल तीन संवैधानिक विकल्प हैं- बिल को मंजूरी देना, बिल को दोबारा विचार के लिए विधानसभा को लौटाना या उसे राष्ट्रपति के पास भेजना. राज्यपाल बिलों को अनिश्चितकाल तक रोककर विधायी प्रक्रिया को बाधित नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि न्यायपालिका कानून बनाने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, लेकिन यह स्पष्ट किया कि- 'बिना वजह की अनिश्चित देरी न्यायिक जांच के दायरे में आ सकती है.' जानें सुुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा राष्ट्रपति और राज्यपाल को अपने पास पेंडिंग बिल पर फैसला लेने के समयसीमा में बांधने के मसले पर राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए प्रेसिडेंसियल रेफरेंस पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का फैसला इस तरह है- 1. SC ने कहा गवर्नर द्वारा बिलों को मंज़ूरी देने के लिए टाइमलाइन तय नहीं की जा सकती.  2. "डीम्ड असेंट" का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है. 3.SC ने कहा चुनी हुई सरकार- कैबिनेट को ड्राइवर की सीट पर होना चाहिए– ड्राइवर की सीट पर दो लोग नहीं हो सकते…लेकिन गवर्नर का कोई सिर्फ़ औपचारिक रोल नहीं होता. 4. आर्टिकल 142 प्रयोग कर सुप्रीम कोर्ट विधेयकों को मंजूरी नहीं दे सकता। यह राज्यपाल और राष्ट्रपति का अधिकार क्षेत्र में आता है. 5. SC ने कहा कि विधानसभा से पारित विधेयक को राज्यपाल अगर अपने पास रख लेता है, वह संघवाद के खिलाफ होगा. हमारी राय है कि राज्यपाल को विधेयक को दोबारा विचार के लिए लौटाना चाहिए. 6. सामान्य तौर पर राज्यपाल को मंत्रिमण्डल की सलाह पर काम करना होता है. लेकिन विवेकाधिकार से जुड़े मामले में वह खुद भी फैसला ले सकता है. 7. गवर्नर, प्रेसिडेंट का खास रोल और असर होता है 8. गवर्नर के पास बिल रोकने और प्रोसेस को रोकने का कोई अधिकार नहीं है। वह मंज़ूरी दे सकता है, बिल को असेंबली में वापस भेज सकता है या प्रेसिडेंट को भेज सकता है। 9. जब गवर्नर काम न करने का फैसला करते हैं, तो संवैधानिक  कोर्ट ज्यूडिशियल रिव्यू कर सकते हैं। कोर्ट मेरिट पर कुछ भी देखे बिना गवर्नर को काम करने का लिमिटेड निर्देश दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा- समयसीमा तय करना शक्तियों के विभाजन को कुचलना होगा कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल विधेयकों को अनिश्चित काल तक रोक कर नहीं रख सकते, लेकिन समयसीमा तय करना शक्तियों के विभाजन को कुचलना होगा।     कोर्ट ने कहा, "राज्यपाल अनंतकाल तक विधेयक रोककर नहीं बैठ सकते। समयसीमा लागू नहीं की जा सकती। संविधान के अनुच्छेद 200 और 201 में लचीलापन रखा गया है। इसलिए किसी समयसीमा को राज्यपाल या राष्ट्रपति पर थोपना संविधान के ढांचे के खिलाफ है। यह शक्तियों के पृथक्करण के खिलाफ है।"      1. 'डीम्ड असेंट' का सिद्धांत संविधान की भावना और शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत के खिलाफ है।     2. चुनी हुई सरकार को ड्राइवर सीट पर होना चाहिए। इस सीट पर 2 लोग नहीं हो सकते। हालांकि, राज्यपाल की भूमिका केवल औपचारिक … Read more

सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर आधारित प्रदर्शनी में बच्चों के मॉडल ने खींचा ध्यान

राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में बच्चों द्वारा तैयार किये गये मॉडल बने आकर्षण का केन्द्र प्रदर्शनी का विषय सतत् भविष्य के लिये विज्ञान और प्रौद्योगिकी भोपाल भोपाल में 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी इन दिनों राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान श्यामला हिल्स भोपाल में चल रही है। प्रदर्शनी में 31 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 विद्यार्थी एवं शिक्षकों ने संयुक्त रूप से मिलकर विज्ञान पर केन्द्रित प्रोजेक्ट और मॉडल प्रस्तुत किये हैं। यह मॉडल प्रदर्शनी में आने वाले बच्चों के बीच आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। इस वर्ष आयोजित राष्ट्रीय प्रदर्शनी का विषय सतत् भविष्य के लिये विज्ञान और प्रौद्योगिकी रखा गया है। बच्चों के लिये प्रदर्शनी अवलोकन प्रात: 9:30 से शाम 6:30 बजे तक रहता है। प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के कुसुमकसा, बालोद के स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के छात्रों ने अभिनव प्रोटोटाइप प्रदर्शित किया है। यह प्रोटोटाइप नारियल के रेशे और परलाइट को उगाने के माध्यम के रूप में उपयोग करते हुए एक आधुनिक मृदा-रहित कृषि तकनीक को प्रदर्शित करता है। इसके बारे में छात्रा खुशी विश्वकर्मा और उनकी शिक्षक सु सोनल गुप्ता बताती हैं कि पारंपरिक मृदा की आवश्यकता को इस तकनीक में पौधों को केवल पानी और आवश्यक पोषक तत्वों की सहायता से उगाया जाता है, जिसमें मृदा जनित रोगों को जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है। यह विधि स्वच्छ, अधिक कुशल खेती और स्वास्थ्य वर्धक फसलों के लिये उपर्युक्त है। इस प्रणाली का प्रमुख लाभ यह है कि इसमें पौधों को ऊर्ध्वाधर परतों पर उगाया जा सकता है, जिसमें कम भूमि में अधिक खाद उत्पादन संभव होता है, जो सीमित साधन या शहरी क्षेत्रों के लिये आदर्श समाधान है। इस प्रोटोटाइप में कृषि के साथ मछली पालन जैसी गतिविधियों का विस्तार भी किया जा सकता है। राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में हिमाचल प्रदेश के राजकीय उत्कृष्ट माध्यमिक विद्यालय लालपानी छात्रों ने भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिये भोजन प्रबंधन प्रणाली युक्त स्मार्ट चम्मच का प्रदर्शन किया है। इस साइंस मॉडल के बारे में विद्यार्थी दिव्यांशु सोनी गौरव और उनकी शिक्षक सु नेहा शर्मा ने बताया कि इस मॉडल के माध्यम से भोजन की ताजगी का परीक्षण किया जा सकता है। तैयार किये गये प्रोटोटाइप में रियल टाइम में डिजिटल स्क्रीन पर परिणाम देखा जा सकता है। खाद्यान्न असुरक्षित पाये जाने पर उपकरण अलर्ट देता है। इस तरह के उपकरण से समाज में स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा मिलेगा। महाराष्ट्र राज्य के प्रगट विद्यामंदिर, रामगढ़ मालवन, सिंधु दुर्ग के छात्रों ने दर्भा घास से बनाया स्ट्रा पाइप को प्रस्तुत किया है। उनके द्वारा तैयार किये गये उपकरण से प्लास्टिक स्ट्रा के विकल्प के रूप में घास से तैयार स्ट्रा का उपयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है। पर्यावरण को सबसे ज्यादा खतरा प्लास्टिक से निर्मित वस्तुओं से पहुंच रहा है। प्रदर्शनी में आये बच्चों ने इस उपकरण के संबंध में जिज्ञासापूर्वक जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रीय प्रदर्शनी में सौरमंडल के मॉडल को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इस सौरमंडल में ग्रहों की स्थिति और उनकी विशेषताओं की जानकारी दी गई है। प्रदर्शनी में यह मॉडल भी बच्चों के बीच आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। प्रदर्शनी में प्रतिदिन विभिन्न स्कूलों के करीब 2 हजार बच्चे भ्रमण कर रहे  हैं।  

शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा को अंतिम विदाई, प्रहलाद पटेल ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की

नरसिंहपुर  देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले बलिदानी आशीष शर्मा को समूचे नरसिंहपुर जिले ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने गोटेगांव विधानसभा के खापा गांव, जो सिवनी और नरसिंहपुर की सीमा पर स्थित है, पहुंचकर बलिदानी के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस भावुक क्षण में मंत्री पटेल के साथ ज़िलाध्यक्ष रामस्नेही पाठक, पूर्व मंत्री जालम सिंह पटेल, विधायक महेन्द्र नागेश और रवीन्द्र पटेल सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद थे। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में जनजातीय बंधुओं और स्थानीय बच्चों की उपस्थिति रही, जो शहीद के सम्मान में एकत्रित हुए थे। बलिदानी के सम्मान में रास्ते भर जनसैलाब उमड़ा रहा। खापा रोड ग्राम से लेकर पूरे रास्ते में हर ग्राम पंचायत और स्कूल के बच्चों ने कतारबद्ध होकर खड़े होकर पुष्प मालाएं अर्पित कीं और भारत माता के वीर सपूत को अंतिम सलामी दी। नरसिंहपुर जिले की सीमा पर, खापा रोड ग्राम में, हाई सेकेंडरी स्कूल के एनसीसी छात्रों ने भी मंत्री प्रहलाद पटेल के साथ मिलकर बलिदानी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल व्याप्त रहा, जहां हर आंख नम थी और हर हृदय में बलिदानी के प्रति गहरा सम्मान था। यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम बलिदानी आशीष शर्मा के सर्वोच्च बलिदान के प्रति राष्ट्र के अटूट सम्मान को दर्शाता है।

प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को आवासीय भूमि का पट्टा, अभियान की शुरुआत

प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को मिलेगा आवासीय भूमि का पट्टा,  अभियान की हुई शुरूआत प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में भूमिहीन परिवारों को आवासीय भूमि का पट्टा, अभियान की शुरुआत भूमिहीन परिवारों के लिए खुशखबरी, नगरीय इलाकों में आवासीय भूमि के पट्टे वितरण का अभियान शुरू भोपाल राज्य सरकार ने नगरीय क्षेत्रों में रहने वाले भूमिहीन और आवासहीन परिवारों को आवासीय भूमि के पट्टाधिकार प्रदान करने के लिए 20 नवम्बर गुरूवार से व्यापक अभियान शुरू किया है। आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग श्री संकेत भोंडवे ने बताया कि यह अभियान 13 दिसम्बर 2025 तक चलेगा। इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग तथा राजस्व विभाग ने संयुक्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत बीएलसी और एएचपी घटकों के सुचारू क्रियान्वयन के लिए यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने वर्ष 1984 के मध्यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन व्यक्ति (पट्टाधिकार) अधिनियम में संशोधन करते हुए पात्रता तिथि को 31 दिसम्बर 2020 निर्धारित किया है। इस तिथि तक सरकारी, नगर निकाय या विकास प्राधिकरण की भूमि पर वास्तविक रूप से काबिज ऐसे आवासहीन परिवार पट्टाधिकार प्राप्त करने के पात्र होंगे। राज्य के सभी नगरीय क्षेत्रों में सर्वेक्षण कार्य 20 नवम्बर से 13 दिसम्बर तक चलेगा। सूची 14 दिसम्बर को प्रकाशित की जाएगी। किसी भी आपत्ति या सुझाव के निराकरण के बाद 29 दिसम्बर को अंतिम सूची संबंधित जिला कलेक्टर द्वारा जारी की जाएगी। यह सूची संबंधित जिला कार्यालय की वेबसाइट और विभागीय वेबसाइट www.mpurban.gov.in पर भी उपलब्ध रहेगी। प्रत्येक जिले में सर्वेक्षण दल गठित किए जाएंगे, जिनमें राजस्व अधिकारी प्रमुख होंगे और सर्वेक्षण के दौरान आधार e-KYC आधारित समग्र ID अनिवार्य रहेगी। नगरीय विकास आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने के बाद पात्र हितग्राहियों को आवासीय भूमि के स्थाई एवं अस्थायी पट्टों का वितरण 4 जनवरी 2026 से 20 फरवरी 2026 के मध्य किया जाएगा। स्थाई पट्टे लाल रंग में और अस्थायी पट्टे पीले रंग में प्रदान किए जाएंगे। जिन क्षेत्रों में झुग्गी बस्तियों का अन्यत्र पुनर्व्यवस्थापन आवश्यक है, वहां समिति के निर्णय के अनुसार हितग्राहियों को वैकल्पिक स्थान पर व्यवस्थित किया जाएगा। स्थाई रूप से पट्टा प्राप्त क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, नालियां, बिजली और अन्य आवश्यक अधोसंरचना का विकास नगरीय निकाय एवं विकास प्राधिकरणों द्वारा प्राथमिकता से किया जाएगा। राज्य शासन ने पट्टा वितरण की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और जन-जागरूकता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। अवैध अधिपत्य, धोखाधड़ी या गलत जानकारी के आधार पर पट्टा प्राप्त करने जैसे मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर ब्लैकलिस्ट तैयार की जाएगी। राज्य सरकार का यह अभियान शहरी गरीबों को सुरक्षित आवासीय अधिकार प्रदान करने, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के सुचारू क्रियान्वयन और “सबके लिए आवास” के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार का यह प्रयास शहरी गरीबों के लिए स्थायी समाधान प्रदान करने वाला है।  

वाड्रा-दिग्गी पर खंडवा सांसद पाटिल का जवाब, EVM पर तंज—जीत और हार के हिसाब से आरोप बदलते हैं

बुरहानपुर  बिहार विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद भी नेताओं की जुबानी जंग जारी है. इस चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला है, जिसके बाद सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा और एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने ईवीएम मशीन पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सरकार पर महिलाओं के वोट 10 हजार में खरीदने के आरोप लगाए हैं. इसके बाद खंडवा लोकसभा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा द्वारा दिए गए बयान पर पलटवार किया है. जहां कांग्रेस जीतती है वहां ईवीएम सही, जहां हारी वहां खराब खंडवा सांसद ने कहा, '' जिन प्रदेशों में कांग्रेस चुनाव जीतती है, वहां चुनाव निष्पक्ष मानती है, लेकिन जिन प्रदेशों में चुनाव कांग्रेस हारती है, कांग्रेस वहां चुनाव आयोग और बीजेपी सरकार पर सवाल उठाती है.'' बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कांग्रेस नेताओं को नसीहत देते हुए कहा, '' यदि इस चुनाव में कांग्रेस जनता की नब्ज़ को टटोलती तो उनकी ऐसी दुर्गति नहीं होती, जबकि बीजेपी जनता की योजनाओं पर विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ती है. बिहार चुनाव के परिणामों पर अनर्गल बयानबाजी देने की बजाय कांग्रेस के नेताओं को बिहार की जनता से पूछना चाहिए कि उन्होंने किसे वोट दिया, इससे उनकी सारी शंका दूर हो जाएगी.'' कांग्रेसी अपना घर भरते हैं, बीजेपी वादा पूरा करती है : पाटिल सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आगे कहा, '' कांग्रेस सरकार के समय उनके अब्बा और सचिव केंद्र से 1 रु डालते थे, यहां तक आते-आते 15 पैसे मिलते थे. बाकी 85 पैसे से इनके घर भरते थे. हमारी सरकार जनता से जो वादा करती है, उसे पूरा किया जाता हैं. सिंगल क्लिक के जरिए किसानों के खातें में सीधे 6 हजार रु किसान सम्मान निधि ट्रांसफर की जाती है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पूरा ढाई लाख सीधे हितग्राही के खातें में भेजते हैं.'' उन्होंने आगे कहा, '' कांग्रेस और बीजेपी में यही फर्क है, हमारी सरकार जन हितैषी हैं, हम जनता की मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखते हैं, यही वजह है कि जनता ने बिहार चुनाव में एनडीए को चुना है.''

योगी सरकार का नया विकास खाका, मेरठ-कानपुर-मथुरा होंगे विशेष शहरों की तर्ज पर विकसित

 लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन के समग्र शहरी विकास की समीक्षा करते हुए कहा कि तीनों शहरों का विकास केवल निर्माण-कार्य पर आधारित न हो, बल्कि उसमें स्थानीय पहचान, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक शहरी सुविधाओं का संतुलन साफ दिखाई दे. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाए और काम समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो. बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तीनों मंडलों के मंडलायुक्त मौजूद रहे. बताया गया कि अयोध्या, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज की तर्ज पर अब मेरठ, कानपुर और मथुरा-वृंदावन में समेकित विकास मॉडल लागू किया जा रहा है. इसके तहत कुल 478 परियोजनाओं को चिन्हित किया गया है, जिनमें मेरठ में 111, कानपुर में 109 और मथुरा-वृंदावन में 258 परियोजनाएं शामिल हैं. सभी परियोजनाओं को अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक श्रेणियों में विभाजित किया गया है. पहले चरण के रूप में वर्ष 2025-26 में तीनों शहरों की 38 प्राथमिक परियोजनाओं पर काम प्रस्तावित है. इनमें यातायात सुधार, चौराहों का पुनर्विकास, मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण, हरित क्षेत्र विस्तार, सड़क और पेवमेंट सुधार, बिजली लाइनों को भूमिगत करने, जल प्रबंधन और पर्यटन सुविधाओं को उन्नत करने से जुड़े कार्य शामिल हैं. मेरठ: ग्रीन कॉरिडोर मॉडल पर बिजली बम्बा बाईपास टेड इन लेगेसी, राइजिंग टू टुमॉरो” की अवधारणा पर आधारित है. योजना का फोकस औद्योगिक पहचान को बनाए रखते हुए शहर को आधुनिक ट्रैफिक, सार्वजनिक परिवहन और हरित ढांचे से जोड़ना है. प्रमुख प्रस्तावों में मैनावती मार्ग चौड़ीकरण, मल्टीलेवल पार्किंग निर्माण, मास्टर प्लान की प्रमुख सड़कों का विकास, ग्रीन पार्क क्षेत्र का अर्बन डिजाइन सुधार, मकसूदाबाद में सिटी फॉरेस्ट और बोटैनिकल गार्डन, वीआईपी रोड सुधार, रिवरफ्रंट लिंक, ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और मेट्रो विस्तार शामिल है. ग्रेटर कानपुर के रूप में नए विस्तार क्षेत्र का मॉडल भी प्रस्तुत किया गया. मथुरा-वृंदावन: विजन-2030 के तहत धार्मिक पर्यटन मॉडल मथुरा-वृंदावन के लिए मास्टर प्लान को “विजन-2030” के रूप में प्रस्तुत किया गया. योजना का फोकस धार्मिक पर्यटन, यात्री सुविधाओं और शहर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना है. प्रमुख प्रस्तावों में स्ट्रीट फसाड डेवलपमेंट, मल्टीलेवल पार्किंग, बस पार्किंग, शहर के प्रमुख प्रवेश द्वारों का सौंदर्यीकरण, नए मार्गों का निर्माण, बरसाना–गोवर्धन–राधाकुंड कॉरिडोर सुधार, परिक्रमा मार्ग पर आधुनिक सुविधाएं, तथा नगर सीमा से धार्मिक स्थलों तक संकेतक और प्रकाश व्यवस्था शामिल है. निजी निवेश पर जोर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि परियोजनाओं को लागू करने में नवाचार और आधुनिक प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए. जहां संभव हो, पीपीपी मॉडल अपनाया जाए और निजी क्षेत्र के सहयोग से रेवेन्यू शेयरिंग की व्यवस्था विकसित की जाए. उन्होंने कहा कि शहरों के विकास का उद्देश्य ऐसा ढांचा तैयार करना है जो यातायात को सुगम बनाए, सार्वजनिक परिवहन और पैदल यात्रियों को प्राथमिकता दे तथा शहर अधिक हरित और स्वच्छ बने. मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि आवश्यक होने पर परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया जाएगा.