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मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात: कंपनी का 8,000 करोड़ का निवेश, 4300 लोगों को रोजगार

शाजापुर  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव रविवार को शाजापुर जिले के मक्सी पहुंचे। यहां पर उन्होंने 8,174 करोड़ रुपए की छह औद्योगिक इकाइयों का शिलान्यास और भूमिपूजन किया। साथ ही किसानों 80 हजार किसानों के खाते में सोयाबीन की राहत राशि भी ट्रांसफर की। 4300 लोगों को मिलेगा रोजगार सीएम डॉ मोहन यादव ने मक्सी के पास बरंडवा में जैक्सन ग्रुप के 8 हजार करोड़ से अधिक के मेगा सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया। यह प्लांट 44 हेक्टेयर में बनेगा। जो कि मक्सी औद्योगिक क्षेत्र फेज-2 में स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के दोनों चरणों में सोलर मॉड्यूल, सोलर सेल, इंगॉट और वेफर का उत्पादन किया जाएगा। जिससे 4300 से अधिक युवाओं को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। सीएम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हम जो कह रहे हैं, वह करके दिखा रहे हैं। लगातार युवाओं को रोजगार दिलाने, गरीबी दूर करने का काम हम कर रहे हैं। कांग्रेस पर साधा निशाना सीएम डॉ मोहन यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब तक कांग्रेस से इनकी विदाई नहीं होगी, कांग्रेस का कलंक मिटने वाला नहीं है। कांग्रेस में फूट दिख रही है। उन्हें अपने हाल पर छोड़ते हैं। आगे उन्होंने कहा कि सुन लो कांग्रेसी, तुमको जो करना है करो। हम गीता जयंती भी धूमधाम से मनाने वाले हैं। 

17–19 नवंबर Weather Alert: कई राज्यों में भारी बारिश + कड़ाके की ठंड की चेतावनी

मुंबई  भारत मौसम विभाग (IMD) ने 20 नवंबर तक मौसम को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। अगले तीन-चार दिनों तक देश के कई राज्यों में मौसम की दोहरी मार देखने को मिलेगी। कहीं भारी बारिश की संभावना है तो कहीं कड़ाके की ठंड और शीतलहर लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, आने वाले दिनों में उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में ठंड और शीतलहर का असर और तेज हो सकता है, जबकि दक्षिण भारत में भारी बारिश का दौर देखने को मिलेगा। आईएमडी (IMD Weather Forecast) के अनुसार, उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों में तापमान लगातार गिर रहा है और कई जगहों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री कम दर्ज किया गया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के कई इलाकों में सुबह और रात की ठंड बढ़ गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, 17 और 18 नवंबर को मध्य भारत और पड़ोसी राज्यों में शीतलहर और तेज हो सकती है। 17 से 19 नवंबर के बीच पूर्वी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों में भी शीतलहर की संभावना जताई गई है।   दूसरी ओर, दक्षिण भारत में बंगाल की खाड़ी में बना मौसमी सिस्टम मूसलाधार बारिश की वजह बनेगा। इसके चलते तमिलनाडु, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 16 से 20 नवंबर के बीच केरल और माहे में लगातार तेज बारिश हो सकती है, जबकि 17 और 18 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण कर्नाटक में भी तेज वर्षा की संभावना है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 16 से 19 नवंबर तक भारी बारिश और तेज हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की चेतावनी दी गई है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत के कई क्षेत्रों में हल्के से मध्यम कोहरे की स्थिति बनी रहेगी। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में तापमान कई स्थानों पर 6 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी न्यूनतम तापमान 7 से 10 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। राजस्थान में देश का सबसे कम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिससे ठिठुरन और बढ़ गई है।   मौसम विभाग का कहना है कि अगले तीन दिनों तक उत्तर भारत में मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा और ठंड का असर जारी रहेगा। उसके बाद तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। पूर्वी भारत में इस सप्ताह हल्के से मध्यम कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्वविद्यालय स्टेडियम में आयोजित प्रतियोगिता का समापन किया

स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल का पुत्र होने से मुझे मिली प्रतिष्ठा भोपाल  उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने विश्वविद्यालय स्टेडियम में आयोजित स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल टेनिस बाल क्रिकेट प्रतियोगिता का समापन किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रीवा में खेलों के कई बड़े आयोजन होते रहे हैं। यहाँ के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी खेल प्रतिभा की चमक दिखाई है। खेल से तन और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। खेलों से हमें प्रतिस्पर्धा और सहयोग की प्रेरणा मिलती है। खेलों में शामिल होने के साथ अच्छी खेल प्रतियोगिता को देखना भी बड़ा आनंददायक होता है। राष्ट्रीय एकता मंच ने 10 से 16 नवम्बर तक क्रिकेट प्रतियोगिता का शानदार आयोजन किया। स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल के लिए जो हम लोग नहीं कर पाए उसे आयोजन समिति ने करके दिखा दिया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल का पुत्र होने पर मुझे गौरव का अनुभव होता है। मैं यदि उनका पुत्र नहीं होता तो मैं जहाँ पर हूँ वहाँ शायद नहीं होता। मेरे पिताजी के सामाजिक कार्यों और जनता की सेवा ने उन्हें यशस्वी बनाया। उनके नाम के साथ जुड़ा होने से मुझे भी बहुत प्रतिष्ठा और यश मिला। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय स्टेडियम में खेल सुविधाओं का विकास किया जाएगा। यहाँ फ्लड लाइट की सुविधा शीघ्र दी जाएगी जिससे रात में भी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा सके। विधायक जी गुढ़ श्री नागेन्द्र सिंह के प्रयासों से 1983 में रीवा में इसी स्टेडियम में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच रणजी ट्राफी प्रतियोगिता का मैच खेला गया था। अब रीवा में स्पोर्ट्स काम्पलेक्स तथा अन्य स्टेडियम के रूप में खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं। बड़ी खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन से विन्ध्य की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। समारोह में विधायक श्री नागेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए मैं सभी आयोजकों को बधाई देता हूं। खेल संयम और नियम का परिचायक होते हैं। सभी प्रतियोगिताएं खेल भावना से खेली जानी चाहिए। स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल ने सदैव खिलाड़ियों को प्रोत्साहित किया। विधायक मनगवां नरेन्द्र प्रजापति ने कहा कि खेल भावना से प्रतियोगिता में शामिल होने पर सफलता मिलती है। खेल हमें जीवन के संघर्ष में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। आभार प्रदर्शन नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय ने किया। प्रतियोगिता का फाइनल मैच उड़ीसा और नोएडा के बीच खेला गया। रोमांचक मैच में उड़ीसा की टीम ने विजय प्राप्त की। उप मुख्यमंत्री तथा विधायक गुढ़ ने विजेता टीम को 10 लाख रुपए तथा ट्राफी प्रदान की। उप विजेता रेड डेविल्स नोएडा को 5 लाख रुपए तथा ट्राफी प्रदान की गई। समारोह में खिलाड़ियों और निर्णायकों को भी सम्मानित किया गया। समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल, श्री राजगोपाल मिश्रचारी, श्री मुकेश श्रीवास्तव तथा बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे।  

ठंड ने बढ़ाई सर्दी की मार: दो जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव, देखें नया शेड्यूल

छिंदवाड़ा  मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड में दस्तक दे दी है। जिसके कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। कई जिलों में तो स्कूल के समय में बदलाव कर दिया है। मगर, कई जिलों में कलेक्टर ने स्कूल के समय में बदलाव करने के कोई आदेश जारी नहीं किए। छिंदवाड़ा में स्कूलों के समय में परिवर्तन छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेन्द्र नारायण के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी ने बढ़ती ठंड को देखते हुए सभी शासकीय/अशासकीय विद्यालयों का संचालन सुबह 8:30 बजे से पहले नहीं करने का आदेश जारी किया है। उमरिया में बदला स्कूलों का समय उमरिया जिले में बढ़ती ठंड के कारण स्कूलों के समय में परिवर्त किया गया है। कलेक्टर अभय सिंह ने इसके संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। 17 नवंबर से प्री-प्राइमरी के कक्षा आठवीं तक के सभी स्कूल सुबह 9 बजे से संचालित होंगे। सतना में 14 नवबंर को जारी हुए थे आदेश सतना में 14 नवम्बर को कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने शीतलहर के प्रभाव को देखते हुए जिले अंतर्गत संचालित समस्त शासकीय, अशासकीय केन्द्रीय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय, आईसीएसई, सीबीएसई तथा अन्य मान्यता प्राप्त समस्त विद्यालयों की नर्सरी से कक्षा 8वीं तक समस्त स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। स्कूल सुबह 9 बजे से लगेंगे।

निशांत कुमार का बड़ा बयान: जनता का भरोसा फिर जीतेंगे नीतीश

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के परिवार के सदस्यों की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने जीत का श्रेय मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार की 20 साल की मेहनत को दिया और आशीर्वाद के लिए जनता का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने रविवार को कहा, "यह बिहार की जनता का आशीर्वाद और समर्थन है। मेरे पिता ने पिछले 20 सालों में जो कड़ी मेहनत की है, उसका फल मिला है, इसके लिए जनता का धन्यवाद करते हैं।" उन्होंने कहा, "मैं बिहार की जनता का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने एक बार फिर मेरे पिता पर भरोसा जताया और उन्हें यह जीत दिलाई। पूरी उम्मीद होगी कि पिताजी जनता के विश्वास पर खरा उतरें और पहले जो विकास किया है, उसको जारी रखें।" मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बड़े भाई सतीश कुमार ने आईएएनएस से कहा, "बहुत कुछ किया गया है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है। उनके दिमाग में सब कुछ योजनाबद्ध है, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित हैं। वे बिहार के लिए और भी बहुत कुछ करेंगे। जब एक और कार्यकाल पूरा होगा, तो आप बिहार को चमकते हुए देखेंगे।" इससे पहले, बिहार चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी उनसे मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री ने जनता को भरोसा दिया कि सबके सहयोग से बिहार और आगे बढ़ेगा व बिहार देश के सबसे ज्यादा विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा। गौरतलब है कि 243 सदस्यी बिहार विधानसभा में एनडीए ने चुनाव के दौरान 202 सीटों पर जीत हासिल की। एनडीए के घटक दलों में शामिल भाजपा को सबसे अधिक 89 सीटें मिली, जबकि 85 सीटें जीतकर जदयू राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। इसके अलावा, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को चार सीटों पर विजय प्राप्त हुई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मक्सी में किया 8174 करोड़ रुपए लागत वाली 6 औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण

उज्जैन-शाजापुर की भूमि पर बनेंगे हरित ऊर्जा उपकरण मध्यप्रदेश अग्रसर है समृद्धि और प्रगति की अनवरत यात्रा पर बहनों के आर्थिक कल्याण के लिए हमने जो वादा किया, उसे पूरा भी किया गीता जयंती भी हर्ष और आनंद से मनाएंगे, सभी नगरों में गीता भवन भी बनाएंगे उज्जैन और शाजापुर हैं जुड़वा भाई, उज्जैन के विकास का लाभ मिल रहा शाजापुर को भी 487 करोड़ लागत वाले 20 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन सरदार वल्लभ भाई पटेल सांदीपनि विद्यालय के नवीन भवन का किया लोकार्पण शाजापुर जिले के 60 हजार किसानों को अंतरित की 39.50 करोड़ रुपए राहत राशि लखुन्दर सिंचाई परियोजना को दी मंजूरी बेरछा-झोकरा-मक्सी सड़क मार्ग का उन्नयन कार्य किया मंजूर लखुंदर नदी पर 20 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा उच्चस्तरीय पुल   भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मालवा क्षेत्र, जो अपनी मीठी संस्कृति और उर्वर भूमि के लिए मशहूर है, अब ग्रीन एनर्जी का हब बनने जा रहा है। यह क्षेत्र विकास के नए संकल्पों के साथ नई ऊर्जा और उमंग से प्रदीप्त हो रहा है। शाजापुर जो सोने और नमकीन के लिए जाना जाता है, अब अपनी औद्योगिक प्रगति के लिए भी पहचाना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उज्जैन-शाजापुर की पुण्यधरा हरित ऊर्जा उत्पादन में उपयोग होने वाले सभी उपकरणों का प्रोडक्शन सेंटर बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि मक्सी नगर अब सेंट्रल इंडिया के ग्रीन मैनुफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित होकर अपनी नई पहचान कायम करेगा। इससे यहां के किसानों को अपने ही क्षेत्र में प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और भंडारण की भी सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को शाजापुर जिले के औद्योगिक प्रक्षेत्र मक्सी के दशहरा मैदान में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मक्सी नगर में करीब 8174 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली 6 औद्योगिक इकाइयों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इसमें चार इकाइयों का भूमिपूजन एवं दो इकाइयों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री ने करीब 384 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से उज्जैन से मक्सी तक निर्मित होने वाली करीब 38.95 किलोमीटर लम्बी फोर लेन रोड़ निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में अपनी पावन परम्पराओं की चमक, प्रगति एवं समृद्धि की नई रौशनी और विकसित भविष्य की आहट सुनाई दे रही है। हम प्रदेश के युवाओं के सपनों में विकास के नए रंग भर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार की सरकार में हमारा मध्यप्रदेश समृद्धि और प्रगति की अनवरत यात्रा पर अग्रसर है। आज मक्सी औद्योगिक क्षेत्र में हुआ विभिन्न नवीन औद्योगिक इकाइयों के भूमिपूजन की एक-एक ईंट मालवा क्षेत्र की नई ऊर्जा और विकास का आधार बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहुतजल्द यह भूमि न केवल आध्यात्मिक प्रकाश में आलोकित होगी, बल्कि औद्योगिक ऊर्जा से भी दमकेगी। पार्वती-कालीसिंध नदी जोड़ो लिंक परियोजना का लाभ भी क्षेत्र को मिलेगा। आज मक्सी की इस ऊर्वर भूमि पर विकास का जो बीज बोया जा रहा है, वह आने वाले वर्षों में हजारों युवाओं के जीवन में समृद्धि लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि आज शाजापुर जिले को डबल गिफ्ट मिल रहा है। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के साथ शाजापुर को कई विकास कार्यो की सौगातें भी दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज यहां 487 करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से 20 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन सम्पन्न हुआ है। छह औद्योगिक इकाइयों के भूमिपूजन और लोकार्पण से यहां 8174 करोड़ रुपये से अधिक का पूंजी निवेश आएगा। इससे इस क्षेत्र के 15 हज़ार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश शांति, समरसता, सुशासन, औद्योगीकरण के साथ-साथ लोकतांत्रिक परम्पराओं के सहज स्थापन का केंद्र बन चुका है। हमारे यहां सब मिलकर साल भर होली-दीवाली मनाते हैं। हमारी बहनें हर महीने भाईदूज और रक्षाबंधन मनाती हैं। उन्होंने कहा कि जैसी नीयत, वैसी बरकत। बहनों के आर्थिक कल्याण के लिए हमने जो कहा वह किया। जो वादा किया था, वह पूरा करके भी दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना के तहत 1500 रुपए की मासिक आर्थिक सहायता के अलावा हमारी सरकार रोजगार आधारित उद्योगों में रोजगार पाने वाली कामकाजी बहनों को हर महीने 5 हजार रुपए की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देगी। उनके नियोक्ता की तरफ से जो मासिक वेतन मिलेगा, सो अलग। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए हम हर जरूरी प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को हम 20 प्रतिशत तक लेकर जाएंगे। गाय पालने वाले लोगों को हम 40 रुपए प्रति गौमाता अनुदान देंगे। हम गीता जयंती भी हर्ष और आनंद के साथ मनाएंगे। साथ ही प्रदेश के सभी नगरों में गीता भवन भी बनाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन और शाजापुर जुड़वा भाईयों की तरह हैं। उज्जैन में हो रहे विकास का लाभ शाजापुर को भी बराबर मिल रहा है। इन दिनों शाजापुर जिले में विकास का नया सैलाब आ रहा है। शुजालपुर में आयुर्वेदिक कॉलेज और शाजापुर में मेडिकल कॉलेज बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने 15 नवम्बर को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस मनाया है। प्रदेश के जनजातीय भाईयों के कल्याण के लिए हम कोई कमी नहीं रखेंगे। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय कार्य विभाग के अधीर कन्या शिक्षा परिसर/आश्रम/छात्रावास महारानी दुर्गावती के नाम से जाने जाएंगे।  उज्जैन, शाजापुर और देवास बन रहा है नया औद्योगिक सर्किट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन, देवास और शाजापुर मिलकर अब मध्यप्रदेश की नई औद्योगिक त्रिवेणी बन रहे हैं। यहां निवेश, इंडस्ट्री, उपजाऊ भूमि और स्किल्ड वर्कफोर्स भी उपलब्ध है। उज्जैन-देवास-शाजापुर कॉरिडोर की सबसे बड़ी ताकत इसकी ऑल टाइम कनेक्टिविटी है। यह क्षेत्र केवल औद्योगिक भूमि का समूह नहीं रहा, बल्कि ग्रीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई, सप्लाई चेन, खाद्य प्रसंस्करण और ऊर्जा उपकरणों के निर्माण का तेज़ी से उभरता हुआ क्लस्टर बन चुका है। उन्होंने कहा कि शाजापुर के मक्सी नगर में 88 हेक्टेयर क्षेत्रफल में एक बहुउद्देशीय औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया है। यहां की 60 से अधिक सक्रिय औद्योगिक इकाइयां स्थानीय रोज़गार का बड़ा आधार बन … Read more

छत्तीसगढ़ के विकास की खुलकर तारीफ: प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री साय की भूमिका बताई अहम

रायपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, हमारे जनजातीय समाज के विष्णु देव साय राज्य का कायाकल्प कर रहे हैं. यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तारीफ करते हुए कही. गुजरात के नर्मदा में भगवान बिरसामुंडा की जयंती पर आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आज देश की राष्ट्रपति एक आदिवासी महिला हैं. इसी तरह BJP-NDA ने हमेशा आदिवासी समाज के होनहार साथियों को शीर्ष पदों पर पहुंचाने का प्रयास किया है. आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, हमारे जनजातीय समाज के विष्णु देव साय राज्य का कायाकल्प कर रहे हैं.’ गुजरात के आदिवासी जिलों को दी सौगात इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए 14 आदिवासी जिलों के लिए 250 बसों को हरी झंडी दिखाई. इस दौरान उन्होंने कहा, ‘मां नर्मदा की यह पावन धरती आज एक और ऐतिहासिक आयोजन की साक्षी बन रही है. अभी 31 अक्टूबर को हमने यहां सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनाई थी.’ उन्होंने कहा कि हमारी एकता और विविधता को सेलिब्रेट करने के लिए भारत पर्व शुरू हुआ और आज भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के इस भव्य आयोजन के साथ हम भारत पर्व की पूर्णता के साक्षी बन रहे हैं. मैं इस पावन अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा को प्रणाम करता हूं.

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट 4234 रुपए, सीएम डॉ. यादव ने दी बड़ी जानकारी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए आज 16 नवंबर को रेकॉर्डेड 4234 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी हुआ है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। सोयाबीन के मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए तथा 15 नवंबर को 4225 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी हुआ था।  

राज्यपाल और मुख्यमंत्री से करेंगे मुलाकात, निवेश संगोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में होंगे शामिल

भोपाल   आसियान देशों के उच्च स्तरीय राजनयिकों का प्रतिनिधिमंडल 18 से 20 नवंबर तक तीन दिवसीय भोपाल प्रवास के दौरान कई कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इस भ्रमण का उद्देश्य मध्यप्रदेश और आसियान देशों के बीच आर्थिक, औद्योगिक, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग को सुदृढ़ बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से भेंट में औद्योगिक सहयोग पर चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से प्रतिनिधिमंडल 18 नवंबर को भेंट करेंगा। बैठक राज्य सरकार के निवेश-अनुकूल वातावरण, औद्योगिक नीति और आसियान देशों के साथ साझेदारी को लेकर केंद्रित रहेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक परिदृश्य, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-प्रोसेसिंग, पर्यटन और नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। प्रतिनिधिमंडल प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल होगा। जिसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी सहयोग और आर्थिक संबंधों को सुदृढ़ करने पर चर्चा भी होगी। राज्यपाल से शिष्टाचार भेंट और निवेश संगोष्ठी में सहभागिता राज्यपाल श्री मांगूभाई पटेल से प्रतिनिधिमंडल 19 नवंबर को शिष्टाचार भेंट करेगा। इसके बाद होटल कोर्टयार्ड मैरियट में ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट सेमिनार में शिरकत करेंगे। सेमिनार में राज्य के उद्योगपति, चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि और प्रमुख निवेशक शामिल होंगे। इसमें मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक नेटवर्क और निवेश-अनुकूल नीतियों की प्रस्तुति दी जाएगी। मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि से होंगे रूबरू प्रतिनिधिमंडल अपने भ्रमण के दूसरे दिन 19 नवंबर को साँची और भीमबेटका जैसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल विश्व प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण करेगा। इससे उन्हें मध्यप्रदेश की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा, बौद्ध कला और ऐतिहासिक धरोहरों से परिचित होने का अवसर मिलेगा। भ्रमण के तीसरे दिन 20 नवंबर को प्रतिनिधिमंडल भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय और जनजातीय संग्रहालय का भी अवलोकन करेगा। राज्य सरकार का यह प्रयास प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के अनुरूप है, जिसके माध्यम से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच आर्थिक, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत किया जा रहा है। मध्यप्रदेश, अपनी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, मजबूत औद्योगिक आधार, निवेश-अनुकूल नीतियों और तेजी से विकसित होते बुनियादी ढांचे से आसियान देशों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बनकर उभर रहा है। यह दौरा मध्यप्रदेश और आसियान देशों के बीच दीर्घकालीन सहयोग की दिशा में ठोस कदम साबित होगा और दोनों पक्षों के बीच औद्योगिक, व्यापारिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई गति देगा। उल्लेखनीय है कि आसियान (एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन्स) दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, सुरक्षा, सांस्कृतिक संबंध और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है। आसियान में 10 देश सदस्य हैं, जिनमें इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, वियतनाम, म्यांमार, कम्बोडिया,लाओस और ब्रुनेई शामिल हैं।  

भारत का फूड-बास्केट बना MP: कृषि विकास में रचा नया कीर्तिमान

भोपाल  कभी 'बीमारू राज्य' और विकास की दौड़ में पिछड़ा माना जाने वाला मध्यप्रदेश आज आत्मनिर्भरता, कृषि समृद्धि और तीव्र आर्थिक विकास का प्रतीक बन चुका है। यह परिवर्तन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व, सरकार की योजनाबद्ध नीतियों और किसानों की अटूट मेहनत का परिणाम है। मध्यप्रदेश अब न केवल विकास दर में अग्रणी है, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन में भी देश में नई पहचान बना चुका है। यही कारण है कि भारत का हृदय प्रदेश अब देश का नया 'फूड-बास्केट' कहलाने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कहना है कि मध्यप्रदेश ने कृषि और उससे सम्बद्ध क्षेत्रों में जो आशातीत प्रगति की है, उसमें हमारे अन्नदाताओं की महती भूमिका है। बीते वर्षों में मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय वृद्धि के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर देश का नया 'फूड बास्केट' बनने का गौरव प्राप्त किया है। राज्य की विकास दर अब डबल डिजिट में पहुंच चुकी है, जिसमें कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने का संकल्प लिया है। सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, पर्याप्त बिजली आपूर्ति, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी, भावांतर भुगतान योजना और कृषि यंत्रीकरण ने किसानों से जीवन में खुशहाली आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आज मध्यप्रदेश गेहूं, चना, मसूर, सोयाबीन और तिलहन उत्पादन में देश में अग्रणी बन चुका है। पंजाब और हरियाणा जैसे परम्परागत कृषि सम्पन्न राज्यों को कई फसलों के उत्पादन में पीछे छोड़ना राज्य के किसानों की मेहनत और सरकार की संवेदनशील नीतियों का ही परिणाम है। हमने कृषि के साथ-साथ डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्रों में भी राज्य ने नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP), एग्रो एंड फूड प्रोसेसिंग इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज चेन जैसे अनेक कदम किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने में मददगार सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है – हर खेत तक पानी, हर किसान तक प्रगति और हर घर तक समृद्धि। मध्यप्रदेश का किसान अब सिर्फ़ अन्नदाता नहीं, बल्कि खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत का निर्माणकर्ता बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और राज्य के पूरे कृषि अमले को इस राष्ट्रीय उपलब्धि की ओर बढ़ने के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश देश की खाद्य सुरक्षा को सशक्त करेगा, बल्कि वैश्विक कृषि मानचित्र पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। कृषि समृद्ध प्रदेश बनने की कहानी कभी सीमित सिंचाई साधनों, अस्थिर बिजली आपूर्ति और अपर्याप्त अवसंरचना के कारण मध्यप्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था घाटे में चल रही थी। किसानों की आमदनी सीमित थी और ग्रामीण जीवन में भी कुछ कठिनाइयां थीं। परंतु बीते दो दशकों में परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। सरकार ने कृषि और ग्रामीण विकास को अपनी नीतियों के केंद्र में रखकर जो कार्य किया, उसने राज्य की तस्वीर ही बदल दी। हाल ही में हुए आर्थिक सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश ने 24 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो राष्ट्रीय विकास औसत से कहीं अधिक है। यह प्रगति बताती है कि मध्यप्रदेश अब आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कृषि विकास में आई नई क्रांति मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा विकास कृषि क्षेत्र में देखा गया है। बीते वर्षों में राज्य सरकार ने कृषि को सिर्फ़ आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का आधार बनाने का संकल्प लिया। किसानों को फसल उत्पादन की लागत में राहत देने, खेती को लाभकारी बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं लागू की गईं। कृषक कल्याण मिशन के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सभी जतन किए जा रहे हैं। भावांतर भुगतान योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फ़सल खरीदी और इस खरीदी पर बोनस राशि भी देने जैसे प्रयासों ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। इसके अलावा उन्नत कृषि उपकरणों पर सब्सिडी और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की कोशिशों ने भी खेती-किसानी को और अधिक रूचिकर, उत्पादक और टिकाऊ बनाया है। राज्य में सिंचाई सुविधाओं का खेत तक विस्तार भी एक मील का पत्थर साबित हुआ है। नर्मदा घाटी विकास परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदियों को आपस में जोड़ने और केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी लिंक जैसी परियोजनाओं से लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा के दायरे में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के सुदृढ़ीकरण से रबी सीजन में फसलों की उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ गई है। खेती-किसानी की बदलती परिभाषा मध्यप्रदेश के किसान अब पारम्परिक खेती तक सीमित नहीं हैं। वे नई तकनीकों और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार ला रहे हैं। ड्रिप इरिगेशन, ऑर्गेनिक फार्मिंग, मल्टीक्रॉपिंग और फसल विविधीकरण जैसे नवाचारों ने कृषि को एक व्यावसायिक रूप दिया है। प्रदेश में कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों की सक्रिय भूमिका ने किसानों को नवीनतम जानकारी सहित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया है। अब किसान बाजार की मांग के अनुसार फसलें पैदा कर रहे हैं और निर्यात की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं। कृषि से औद्योगिक विकास तक मध्यप्रदेश की तेज कृषि विकास दर देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश कृषि आधारित उद्योगों और एग्रो प्रोसेसिंग का केंद्र बनने जा रहा है। राज्य में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक हब के निर्माण से कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावना बढ़ेगी। सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट 'वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना भी इस दिशा में मददगार सिद्ध हो रही है। यह किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में तो कारगर है ही, ग्रामीण रोजगार को भी यह योजना स्थायी बना रही है। नया मध्यप्रदेश, नया आत्मविश्वास मध्यप्रदेश आज बड़े आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब यह राज्य विकास के नए अध्याय लिख रहा है। गांव से शहर तक, खेत से बाजार तक, फ़ार्म टू लैब हर जगह परिवर्तन की एक नई लहर महसूस की जा रही है। प्रदेश के किसान अब सिर्फ अन्नदाता नहीं रहे, बल्कि “राष्ट्र निर्माता” और ऊर्जादाता भी बन रहे हैं। किसानों को उनके खेत में सोलर पम्प लगाने के … Read more