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एमपी में कर्मचारियों का पेंशन विकल्प पर उदासीन रवैया, संगठन स्तर पर कोई पहल नहीं

भोपाल  भारत सरकार द्वारा लागू एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर मध्य प्रदेश के कर्मचारियों में कोई रुचि नहीं है। किसी भी संगठन ने इसे लेकर पहल नहीं की है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों में भी कुछ ने ही इस विकल्प को चुना है। उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। अब कर्मचारी सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। इस योजना में चार लाख 60 हजार अधिकारी-कर्मचारी हैं। पुरानी पेंशन बहाली की मांग के बीच सरकार ने कर्मचारियों को साधने के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना के साथ-साथ एकीकृत पेंशन योजना का विकल्प कर्मचारियों को दिया है। भारत सरकार की इस योजना को लेकर अधिकारी-कर्मचारी उत्साहित नहीं हैं। प्रदेश में इसे लागू करने के लिए उच्च स्तरीय समिति तो गठित की गई पर इसकी बैठक ही नहीं हुई। दरअसल, अभी योजना को लेकर स्पष्टता नहीं है, जिसके कारण सरकार भी जल्दबाजी में नहीं है। लगातार किए जा रहे हैं संशोधन उधर, राष्ट्रीय पेंशन योजना में लगातार संशोधन किए जा रहे हैं। अब यह प्रविधान किया गया है कि जो कर्मचारी जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं वे सरकारी प्रतिभूति में सौ प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं। वहीं, म्यूचुअल फंड सहित अन्य व्यवस्थाओं में निवेश के लिए अधिकतम सीमा को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है। योजना में कर्मचारी को यह अधिकार दिया गया है वो निवेश के लिए फंड मैनेजर का चयन कर सकते हैं। एक वर्ष में फंड चयन की सुविधा एक बार और निवेश पद्धति में परिवर्तन के लिए दो बार ही रहेगी। क्यों नहीं जुड़ रहे हैं लोग? हालांकि, यूपीएस में लंबी सर्विस ड्यूरेशन, मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन, टाइम से पहले रिटायरमेंट की सिचुएशन में लिमिटेड बेनिफिट्स, और फैमिली पेंशन के लिए लिमिटेड डेफिनिशन को लेकर डिससैटिस्फैक्शन की वजह से, 27 लाख सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज में से सिर्फ करीब 1% ने ही यूपीएस को चुना. सर्विस के दौरान डेथ होने पर मिलने वाले बेनिफिट्स की क्लैरिटी न होने, टैक्सेशन और यूपीएस अपनाने से पहले कॉस्ट वर्सेज बेनिफिट की चिंता से लोग इसे चुनने से बच रहे हैं. क्योंकि एक बार सलेक्ट करने पर इससे बाहर नहीं जाया सकता है. हालांकि, इसके लिए अभी हाल में ही सरकार ने वनटाइम वन वे स्विच का ऑप्शन दिया है, लेकिन उसकी अपनी सीमाएं हैं. UPS के लिए गवर्नमेंट के उठाए कदम जुलाई में, सेंटर ने मार्केट-लिंक्ड एनपीएस के तहत मिलने वाले इनकम टैक्स बेनिफिट्स को यूपीएस तक एक्सटेंड किया, जिसमें रिटायरमेंट पर 60% फंड की टैक्स-फ्री विड्रॉल शामिल है. इसने गवर्नमेंट एम्प्लॉई की डेथ, डिसएबिलिटी या डिसमिसल की सिचुएशन में ओपीएस के बेनिफिट्स को भी इंप्रूव किया. सेंटर ने यूपीएस के तहत एम्प्लॉइज को रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और डेथ ग्रेच्युटी का बेनिफिट भी दिया. इसने एनपीएस से यूपीएस में स्विच करने की डेडलाइन को 30 जून से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया. पिछले हफ्ते, इसने यूपीएस से एनपीएस में वन-टाइम वन-वे स्विच फैसिलिटी स्टार्ट की. यूपीएस चुनने वाले कर्मचारी इसे रिटायरमेंट से एक साल पहले तक या वॉलंटरी रिटायरमेंट के केस में रिटायरमेंट डेट से तीन महीने पहले तक यूज कर सकते हैं. यूपीएस में फिस्कल इंप्लीकेशन यूपीएस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह गवर्नमेंट फाइनेंस पर गैरजरूरी कॉस्ट का असर न डाले. गारंटी एलिमेंट की वजह से एक्स्ट्रा एक्सपेंडिचर का अनुमान फाइनेंशियल ईयर 26 में सिर्फ 8,500 करोड़ रुपये था, जो टाइम के साथ ग्रैजुअली बढ़ेगा, क्योंकि सैलरी स्केल रिवाइज होते हैं और न्यू पीपल सर्विस में जॉइन करते हैं. हालांकि, कर्मचारियों के नंबर में न्यू एडिशन्स पर जनरल कंट्रोल से एक्सपेंसेस पर कंट्रोल रहने की उम्मीद है. चूंकि, 2036 के बाद लोग यूपीएस के तहत रिटायर होंगे और उनमें से कुछ के साथ-साथ फैमिली पेंशनर्स की भी डेथ हो सकती है. ऐसी स्थिति में उनकी पेंशन कैपिटल अमाउंट कर्मचारी के सक्सेसर्स को रिटर्न नहीं की जाएगी. इससे फ्यूचर में बजट पर ज्यादा डिपेंड हुए बिना पेंशन के लिए गवर्नमेंट के रिसोर्सेज को इंप्रूव करने में हेल्प मिलेगी. हर पे कमीशन के डिसीजन के बाद बेसिक पेंशन को रीसेट नहीं किया जाएगा, जैसा कि ओपीएस में होता था.

भोपाल मेट्रो नवंबर के अंत तक दौड़ेगी, अंतिम जांच में यात्री सुरक्षा और एंट्री-एग्जिट सुधार की समीक्षा

भोपाल  भोपाल की बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो नवंबर के आखिरी सप्ताह तक भोपाल मेट्रो पटरियों पर दौड़ती नजर आ सकती है। दरअसल, दिल्ली से आने वाली कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम अगले सप्ताह भोपाल मेट्रो का तीसरा और अंतिम निरीक्षण करने आने वाली है। यह परीक्षा मेट्रो प्रबंधन के लिए निर्णायक साबित होगी, क्योंकि इस रिपोर्ट के आधार पर ही ‘ओके टू रन’ की मंजूरी दी जाएगी। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भोपाल मेट्रो इस बार सुरक्षा मानकों पर खरी उतरकर राजधानीवासियों को नवंबर के अंत तक मेट्रो की सवारी का तोहफा दे पाएगी या फिर इंतजार और लंबा खिंचेगा। एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्य में जुटा गौरतलब है कि अक्टूबर में मेट्रो संचालन शुरू किया जाना था, लेकिन सीएमआरएस टीम के पिछले निरीक्षण के दौरान मेट्रो प्रबंधन परीक्षा में पास नहीं हो सका। उस समय सुरक्षा संबंधी कई खामियां सामने आई थीं। सूत्रों के अनुसार टीम ने यात्री सुरक्षा, स्टेशन एरिया, एंट्री और एग्जिट से जुड़ी कमियों की ओर ध्यान दिलाया था। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए एमपी मेट्रो प्रबंधन एक महीने से सुधार कार्यों में जुटा हुआ है। अब टीम द्वारा देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों पर मेट्रो प्रबंधन ने कितना सुधार किया है और क्या ट्रेन के संचालन के लिए सभी जरूरी मानक पूरे हो गए हैं या नहीं। बता दें कि एमपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक एस. कृष्ण चैतन्य पूरी सक्रियता के साथ प्रायोरिटी कॉरिडोर के सभी मेट्रो स्टेशनों के कार्यों की समीक्षा और निरीक्षण कर रहे हैं।मंगलवार और बुधवार उन्होंने मैदान में उतरकर चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और सीएमआरएस से जुड़े बिंदुओं पर विशेष रूप से रिव्यू किया। मैदानी कार्य पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया प्रायोरिटी कॉरिडोर पर नहीं शुरू हुआ मैदानी कार्य सूत्रों की मानें तो प्रायोरिटी कॉरिडोर पर अभी भी मैदानी कार्य पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है। सामान्यत: यह काम तब शुरू किए जाते हैं, जब परियोजना के सभी तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े कार्य पूरे हो जाएं। ऐसे में इस बार भी मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिल पाएगी या नहीं, यह फिलहाल संशय में है। अक्टूबर में संचालन शुरू नहीं होने पर हुई थी किरकिरी अक्टूबर में समय पर मेट्रो शुरू न होने से एमपी मेट्रो प्रबंधन की काफी किरकिरी हो चुकी है। यही कारण है कि एमडी एस. कृष्ण चैतन्य अब भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं और पूरी तैयारी के साथ सीएमआरएस परीक्षा पास करने पर फोकस कर रहे हैं। इस मामले में भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है।

बड़ी संख्या में महिलाओं को लाड़ली बहना योजना से वंचित, दस्तावेजी और बैंक त्रुटियां बनी बाधा

भोपाल   मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत दतिया जिले की 1,44,204 महिलाओं के बैंक खातों में मध्यप्रदेश सरकार ने अक्टूबर माह में 21 करोड़ 25 लाख 29 हजार 200 रुपए की राशि ट्रांसफर की। यह राशि प्रति महिला 1,500 रुपए के मान से दी गई। लेकिन इसी माह जिले की 2,949 लाड़लियों के नाम योजना की सूची से बाहर कर दिए गए। इनमें 452 महिलाओं ने स्वयं आवेदन देकर योजना का लाभ छोडने की इच्छा जताई, 2,196 महिलाए 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर अपात्र हो गई, जबकि 301 महिलाएं मृत पाई गई, जिनके नाम स्वाभाविक रूप से हटाए गए। अगर मृतक महिलाओं को छोडकर शेष 2,648 महिलाएं योजना में बनी रहतीं, तो सरकार को ?39 लाख 72 हजार रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता। योजना से वंचित महिलाओं की परेशानी जिले में 50 हजार महिलाएं ऐसी हैं जो लाड़ली बहना योजना में अपना नाम जुड़वाने के लिए प्रयासरत हैं। ये महिलाएं बैंक खाते में त्रुटि, आधार या समग्र आईडी लिंक न होने तथा दस्तावेज सत्यापन में देरी और पात्रता जांच की जटिल प्रक्रिया जैसी समस्याओं से जूझ रही हैं। नहीं जुड़ा पा रही नाम शहर के वार्ड क्रमांक 17 निवासी 48 वर्षीय शारदा देवी ने बताया कि वे पिछले एक साल से योजना में नाम जुड़वाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन दसतावेजों में कोई न कोई त्रुटि होने से नाम नहीं जुड़ पा रहा। ठंडी सडक़ निवासी 42 वर्षीय वैजयंती कुशवाह ने बताया कि घर से बार-बार निकल नहीं पाते। एक साल में करीब चार बार नाम जुड़वाने का प्रयास किया लेकिन जुड़ नहीं पाया। योजना से और भी महिलाओं के नाम हो सकते हैं बाहर लाड़ली बहना योजना की पात्रता जांच अब और सख्त हो रही है। विभागीय समीक्षा के अनुसार, जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो चुकी है या जिनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, उन्हें योजना से बाहर किया जा रहा है। यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से वित्तीय पारदर्शिता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे ग्रामीण क्षेत्रों की कई महिलाओं पर सीधा असर पड़ेगा जो अभी भी योजना के सहारे घरेलू खर्च चला रही थीं। अगले कुछ महीनों में यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि दिसंबर-जनवरी में पात्रता की नई समीक्षा प्रस्तावित है। जारी है समीक्षा योजना से जुड़ी पात्रता की समीक्षा निरंतर जारी है। 60 वर्ष की आयु या मृत्यु की स्थिति में लाभ स्वतः समाप्त कर दिया जाता है।- अरविंद उपाध्याय, जिला कार्यकम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग दतिया

स्पिन जाल में फंसेगी टीम इंडिया? पहले टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका की घातक तैयारी

कोलकाता दक्षिण अफ्रीका के बेहतरीन स्पिन आक्रमण के सामने भारत के सितारा बल्लेबाजों के कौशल की असली परीक्षा होगी जब दोनों टीमें दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला के पहले टेस्ट में शुक्रवार से यहां आमने सामने होंगी। भारत को पिछले साल न्यूजीलैंड ने भारत में ही 3.0 से हराया था और कीवी स्पिनरों ऐजाज पटेल, मिचेल सेंटनेर और ग्लेन फिलिप्स ने मिलकर तीन टेस्ट में 36 विकेट चटकाये थे। दक्षिण अफ्रीका का गेंदबाजी आक्रमण इस समय स्पिनरों पर निर्भर है और ऐसे में मेजबान टीम को धीमे गेंदबाजों के खिलाफ अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा। ⁠ मौजूदा विश्व टेस्ट चैम्पियन दक्षिण अफ्रीका आम तौर पर अच्छे तेज गेंदबाजों के लिये जानी जाती रही है लेकिन इस समय उसके पास धुरंधर स्पिनर हैं। पाकिस्तान के खिलाफ हाल ही में उसने श्रृंखला 1.1 से ड्रॉ खेली। इसमें केशव महाराज, साइमन हार्मर और सेनुरान मुथुस्वामी ने 39 में से 35 विकेट लिये। भारत के सहायक कोच रियान टेन डोइशे ने दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाजी आक्रमण को ‘उपमहाद्वीप की शैली‘ वाला बताया। उन्होंने कहा, ‘‘उनके पास चार स्पिनर हैं जिनमे से वे तीन को उतार सकते हैं। ऐसा लग रहा है कि हम उपमहाद्वीप की किसी टीम के खिलाफ खेलने वाले हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस पर बात की है। हमने न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला से सबक लिया है।’’ छत्तीस वर्ष के हार्मर 1000 प्रथम श्रेणी विकेट ले चुके हैं और भारत के हालात से अनभिज्ञ नहीं हैं। दस साल पहले हाशिम अमला की कप्तानी में उन्होंने मोहाली और नागपुर में दो टेस्ट खेलकर चेतेश्वर पुजारा, रोहित शर्मा और रिधिमान साहा के विकेट लिये थे। एक दशक बाद भी वह उतने ही चतुर गेंदबाज हैं। उन्होंने रावलपिंडी में पिछले महीने टेस्ट में आठ विकेट चटकाकर दक्षिण अफ्रीका को जीत दिलाई और श्रृंखला ड्रॉ भी कराई। वहीं महाराज आधुनिक क्रिकेट के सबसे सटीक और आक्रामक स्पिनरों में से एक हैं। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों और दक्षिण अफ्रीका के स्पिनरों के बीच मुकाबला रोचक रहने वाला है। भारत के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक और कप्तान शुभमन गिल कई बार पिच का मुआयना कर चुके हैं। बंगाल क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सौरव गांगुली ने आश्वासन दिया है कि यह टर्निंग पिच नहीं होगी। इससे जसप्रीत बुमराह जरूर आहलादित होंगे जो आम तौर पर शुरूआत में मूवमेंट और बाद में रिवर्स स्विंग देने वाली पिच पर भारत के ट्रंपकार्ड साबित हो सकते हैं। भारत दो तेज गेंदबाजों को उतार सकता है और घरेलू हालात की जानकारी होने से आकाश दीप को तरजीह मिल सकती है। पिछले 15 साल में तेज गेंदबाजों ने यहां टेस्ट में 61 प्रतिशत विकेट लिये हैं। शुभमन गिल की कप्तानी में भारत ने इस साल इंग्लैंड में श्रृंखला 2.2 से ड्रॉ खेली लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली हार उसे अभी भी कचोट रही होगी। वेस्टइंडीज की कमजोर टीम को 2.0 से हराने पर उसे डब्ल्यूटीसी चक्र में ज्यादा मदद नहीं मिलेगी। ऋषभ पंत की वापसी और ध्रुव जुरेल के बतौर बल्लेबाज खेलने से भारत का मध्यक्रम संतुलित लग रहा है। न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला में 16 विकेट लेने वाले वॉशिंगटन सुंदर भी उपयोगी साबित होंगे। दूसरा और आखिरी टेस्ट 22 नवंबर से गुवाहाटी में खेला जायेगा। टीमें : भारत : शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल, यशस्वी जायसवाल, साइ सुदर्शन, ऋषभ पंत, ध्रुव जुरेल, रविंद्र जडेजा, वॉशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह, आकाश दीप, मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, देवदत्त पडिक्कल दक्षिण अफ्रीका : तेम्बा बावुमा (कप्तान ), एडेन माक्ररम, रियान रिकेलटन, ट्रिस्टन स्टब्स , काइल वेरेने , डेवाल्ड ब्रेविस, जुबैर हमजा, टोनी डि जोर्जी, कोर्बिन बोश, वियान मूल्डर, मार्को यानसेन, केशव महाराज, सेनुरान मुथुस्वामी , कैगिसो रबाडा, साइमन हार्मर मैच का समय : सुबह 9.30 से।   

एलजी मनोज सिन्हा का बड़ा बयान: ‘आतंकवाद विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा

जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को जम्मू यूनिवर्सिटी के 19वें (द्वितीय विशेष) दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान, उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वालों और स्वर्ण पदक विजेताओं को सम्मानित किया। जम्मू यूनिवर्सिटी के विशेष दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कुलाधिपति और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने छात्रों और शिक्षकों से बदलाव को अपनाने और कौशल-प्रधान पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। इसके साथ ही, उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज की मांगों को पूरा करने के लिए उभरते रुझानों के साथ तालमेल बनाए रखने समेत अलग-अलग विषयों में सहयोग करने की भी अपील की। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कार्यक्रम के दौरान दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, "10 नवंबर को दिल्ली में हुए बम विस्फोटों में जिन लोगों को हमने खोया है, मैं उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।" उन्होंने कहा, "मेरा मानना ​​है कि आतंकवाद विकास का सबसे बड़ा दुश्मन है। जम्मू-कश्मीर के लोग लंबे समय से इस आतंक का दंश झेल रहे हैं। अब वहां के युवा नए सपने देख रहे हैं और हमें उन्हें उन मुकामों तक पहुंचने के लिए पंख देने में मदद करनी चाहिए, जिनकी देश और दुनिया का हर युवा आकांक्षा रखता है।" मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी वहां मौजूद जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वालों और स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई दी और सभी विषयों में छात्राओं की उल्लेखनीय उपलब्धियों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर जोर दिया और जम्मू-कश्मीर के विश्वविद्यालयों में पहुंच, गुणवत्ता और प्रासंगिकता बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'मिशन युवा' शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और मानसिक स्वास्थ्य के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाने के लिए सरकार की प्रमुख पहल है, जो उन्हें न सिर्फ रोजगार के लिए, बल्कि नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के लिए भी तैयार करती है। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "शिक्षा परिवर्तन का मूल है। विश्वविद्यालय ने आपमें निवेश किया है। अब अपने आसपास की दुनिया में निवेश करें। सफलता इसमें नहीं है कि आप अपने लिए क्या हासिल करते हैं, बल्कि इसमें है कि आप समाज के लिए क्या योगदान देते हैं।"

भोपाल में 2000 एकड़ क्षेत्र में बनेगी नॉलेज एंड एआई सिटी

साइंस सिटी प्रोजेक्ट के लिये 25 एकड़ भूमि होगी आवंटित मध्यप्रदेश, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का बनेगा हब 15 हजार 896 करोड़ का निवेश और 64 हजार से अधिक के रोजगार के अवसर प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत में तकनीकी विकास का प्रारंभ हुआ स्वर्णिम युग एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव में उद्योगपतियों ने निवेश के प्रति जताई रूचि भोपाल  एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अब अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक नई उड़ान भरने जा रहा है। हम बहुत जल्द स्पेस टेक पॉलिसी-2025 लागू करने जा रहे हैं, जिससे राज्य में सैटेलाइट डेटा, रिमोट सेंसिंग और स्पेस स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन मिलेगा। भोपाल में 2000 एकड़ भूमि पर नॉलेज एण्ड एआई सिटी विकसित की जायेगी। यह सिटी आधुनिक हाईटेक सिटी और सायबर सिटी की तर्ज पर बनाई जायेगी। यहां विश्वस्तरीय संस्थान, अनुसंधान केन्द्र और स्टार्ट-अप्स एक साथ आएंगे जिससे मध्यप्रदेश भारत का एआई हब बन जायेगा। साइंस सिटी प्रोजेक्ट के लिये 25 एकड़ भूमि आवंटित्‍की जा रही है। यहां विज्ञान, नवाचार, और तकनीकी अनुसंधान के लिये अत्याधिक सुविधाएं विकसित की जायेंगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में हमारे युवाओं और विद्यार्थियों के लिये ज्ञान और प्रयोग का केन्द्र बनेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेन्टर में आयोजित मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में शामिल निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में तकनीकी विकास का स्वर्णिम युग प्रारंभ हुआ है। इस दिशा में मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र को नई गति देने के लिये मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 का आयोजन इंदौर में किया है। यह आयोजन प्रदेश को भारत में उभरते टेक्नालॉजी मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने में की दिशा में ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ है। राज्य सरकार की प्रगतिशील नीतियां, सुदृढ़ बुनियादी ढांचा, निवेश अनुकूल वातावरण और कुशल मानव संसाधन ने मध्यप्रदेश को ग्लोबल निवेशकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बना दिया है। आईटी, एआई, सेमी कंडक्टर, ड्रोन, फिनटेक, क्लाउड और इएसबीएम जैसे क्षेत्रों में प्रदेश की प्रगति तीव्र गति से हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्दौर में मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में कुल 68 कार्य हुए जिनमें उद्घाटन, भूमि-पूजन, आवंटन-पत्र वितरण, एग्रीमेंट, एमोयू, नीति एवं पोर्टल लॉन्च सहित उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन मीटिंग हुई। इनसे प्रदेश में कुल 15 हजार 896 करोड़ का निवेश आएगा साथ ही 64 हजार 85 रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह आयोजन प्रदेश की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्वेस्टर्स समिट से अप्रेल 2025 में हुए टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 1.0 तक लगभग 99 निवेश प्रस्ताव हुए थे, जिससे लगभग 34 हजार करोड़ रूपये के निवेश और 2 लाख लोगों के लिये रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इसमें 27 प्रोजेक्ट, जमीन आवंटन के साथ अन्य कार्यप्रगतिरत है। साथ ही 8 प्रोजेक्ट साइट विजिट के चरण में है, जो प्राप्त प्रस्तावों का 47 प्रतिशत है। मात्र 8 महिने में लगभग 6 हजार करोड़ का निवेश एवं 50 हजार लोगों का रोजगार का सपना साकार हुआ है। यह मध्यप्रदेश की टेक ड्रिवन ग्रोथ का सकारात्मक परिणाम है। 9 कंपनियों को प्रदाय किए भूमि आवंटन के आशय-पत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कॉन्क्लेव में निवेश और उद्योग संवर्धन लिए 9 कंपनियों को भूमि आवंटन के लिये आशय पत्र जारी किए गए। इन इकाइयों से प्रदेश में कुल 10.61 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 740 नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। इन आशय पत्रों से विभिन्न टेक्नोलॉजी, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की कंपनियों को निवेश के लिए आवश्यक भूमि और संसाधन उपलब्ध कराए जाएँगे जिससे मध्यप्रदेश में उद्यमिता और औद्योगिक विकास को और मजबूती मिलेगी। टॉस, इजीसॉफ्ट कंपनी, ओम्निस बिल्डकेयर एलएलपी, फ्लैट ट्रेडब्रोकिंग सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, असिस्ट क्लिक प्राइवेट लिमिटेड, लॉजिमोंक, मैमथ एग्जॉस्ट्स इंडिया, एमपी ऑनलाइन, रिद्धि एंटरप्राइज को भूमि आवंटन पत्र जारी किए गए हैं। एमओयू पर हस्ताक्षर कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश में निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने की दिशा में 7 महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इन एमओयू से प्रदेश में लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश होगा तथा 10 हजार 500 से अधिक नए रोजगार अवसर सृजित होंगे। ये एमओयू सिलिकॉन वेफर विनिर्माण संयंत्र, आईटी पार्क विकास, टेक्नोलॉजी रिसर्च, गेमिंग, स्किल डेवलपमेंट एवं नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े हैं। इस पहल में सोमवेदा एंटरप्राइज, डीएवीवी आईटी पार्क, एएनएसआर, गेम डेवलपर एसोसिएशन ऑफ इंडिया, इंडस आंत्रप्रेन्योर्स राजस्थान, मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग महू, कोडयोगी फाउंडेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। राज्य सरकार एवं भारतीय सेना के मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के मध्य सायबर सुरक्षा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र और नागरिक तकनीकी क्षेत्र के बीच सहयोग को सुदृढ़ करते हुए अत्याधुनिक तकनीकों के विकास, नवाचार और कौशल वृद्धि को बढ़ावा देना है। यह पहल मध्यप्रदेश को उभरते तकनीकी क्षेत्रों में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  निवेश के लिये हुए एग्रीमेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में 85.51 करोड़ निवेश के महत्वपूर्ण एग्रीमेंट् पर हस्ताक्षर हुए। इसमें आईआईएसईआर भोपाल के सहयोग से एआई-संचालित ड्रोन प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है, जिसमें उन्नत प्रयोगशालाएँ और स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी। एल एंड टी एड्यूटेक के साथ मिलकर प्रदेश में स्किल ट्रेनिंग हेतु मास्टर सर्विस एग्रीमेंट किया जाएगा, इससे नये तकनीकी क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके अंतर्गत एलएनसीटी कॉलेज, ओरिएंटल ग्रुप, बंसल कॉलेज, सेज यूनिवर्सिटी, आईईएस यूनिवर्सिटी शामिल हैं। सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने सीआईएसओ पोर्टल किया लांच मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरकारी विभागों में सायबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए सीआईएसओ पोर्टल की शुरुआत की। यह सुरक्षित और केंद्रीकृत प्लेटफ़ॉर्म रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, थ्रेट इंटेलिजेंस और अनुपालन प्रबंधन को सक्षम बनाएगा, जिससे सरकारी प्रणालियों में सुरक्षा, पारदर्शिता और दक्षता में अभूतपूर्व सुधार होगा। ड्रोन डेटा रिपॉज़िटरी का हुआ शुभारंभ “डिजिटल मध्यप्रदेश” की परिकल्पना को सशक्त करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव  ने ड्रोन डेटा रिपॉज़िटरी (DDR) का भी शुभारंभ किया। यह पहल भूमि प्रबंधन, शहरी नियोजन, वन संरक्षण, सिंचाई और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ड्रोन-आधारित डेटा के उपयोग … Read more

कड़ाके की सर्दी का प्रहार! कई राज्यों में शीतलहर का IMD अलर्ट, तापमान में भारी गिरावट

नई दिल्ली  देशभर में सर्दी का असर लगातार बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में उत्तर और मध्य भारत में ठंड का प्रकोप (Weather Update) और तेज़ होगा। पश्चिमी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 16 नवंबर तक शीतलहर (Cold Waves) की स्थिति बनी रहेगी। वहीं, दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में अगले दो दिनों तक भारी बारिश की संभावना है।   उत्तर भारत में सर्दी और कोहरे की चपेट हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में तापमान 0°C से नीचे चला गया है। लाहौल-स्पीति, मनाली, नैनीताल, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। शीतलहर के कारण जनजीवन प्रभावित है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में 16 नवंबर को पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादल छाने और हल्की बारिश व बर्फबारी की संभावना जताई गई है।   MP और CG में शीतलहर MP में वर्तमान में किसी प्रभावी मौसम प्रणाली के सक्रिय नहीं रहने और लगातार सर्द हवाएं चलने से ठिठुरन बरकरार है। भोपाल, इंदौर सहित कई शहरों में लगातार पांच दिन तक तीव्र शीतलहर की स्थिति बनी हुई है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, मौसम का इस तरह का मिजाज अभी तीन-चार दिन तक और बना रह सकता है। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर ठंड ने दस्तक दे दी है। IMD ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 16 नवंबर तक छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में शीत लहर चलने की संभावना है।   मौसम विभाग ने ओडिशा, हरियाणा, हिमाचल, असम, दिल्ली और चंडीगढ़ में हल्के से घने कोहरे की चेतावनी दी है। दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में रात और सुबह के समय घना कोहरा छाने की संभावना है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, बुधवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 418 दर्ज किया गया, जो “गंभीर श्रेणी” में आता है। प्रदूषण के साथ अब कोहरे की परत ने भी शहर को ढक लिया है, जिससे दृश्यता में भारी गिरावट आई है। दक्षिण भारत में भारी बारिश का अलर्ट दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण के कारण दक्षिण भारत में बारिश का दौर जारी है। 13 नवंबर 2025 को केरल, तमिलनाडु, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और लक्ष्यद्वीप में आंधी-तूफान, गरज के साथ बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। UP में तापमान में गिरावट उत्तर प्रदेश में दिन का तापमान सामान्य है, लेकिन पछुआ हवाओं ने न्यूनतम तापमान में गिरावट ला दी है। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि लखनऊ और पूर्वी यूपी के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस तक की कमी होगी। बिहार में ठंड और धुंध का असर बिहार में सुबह-शाम धुंध और ठंड का असर बना हुआ है, जबकि दिन में हल्की गर्मी महसूस की जा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, दिसंबर से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण राज्य में ठंड और बढ़ सकती है।  

मुख्यमंत्री ने 1.33 लाख से अधिक किसानों के खातों में 233 करोड़ रुपए भावांतर राशि अंतरित की

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भावांतर भुगतान, अन्नदाता के उत्थान का पर्याय है। अन्नदाता को दी गई एमएसपी की गारंटी की पूर्ति करते हुए सोयाबीन भावांतर योजना में 1 लाख 33 हजार किसानों के खाते में 233 करोड रुपए की राशि अंतरित की गई है। यह इस बात का प्रमाण है कि हमने जो कहा उसे कर दिखाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में अनेक किसान हितैषी योजनाएं संचालित की जा रही है। मध्यप्रदेश किसानों को उपज का उचित लाभ दिलवाने के लिए भावान्तर योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। पिछले साल सोयाबीन का भाव 4800 रुपए था, इस बार किसानों को 500 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ देकर 5300 रुपए से अधिक कीमत पर सोयाबीन खरीदा जा रहा है। भावान्तर योजना के लिए प्रदेश में 9 लाख से अधिक किसानों ने सोयाबीन बेचने के लिए पंजीयन किया। आज 1.33 लाख किसानों के खाते में राशि भेजी गई है। हमारी सरकार ने योजना की शुरुआत करने के 15 दिन में ही किसानों से किया वादा पूरा किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को देवास से प्रदेश के 1.33 लाख सोयाबीन उत्पादक किसानों को भावान्तर योजना के अंतर्गत 233 करोड़ रुपए की राशि अंतरित करने के बाद विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ कर कन्या-पूजन भी किया। वंदे मातरम के गान ने वातावरण को देशभक्ति की भावना का संचार किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवास जिले के सर्वांगीण विकास के लिए 183.25 करोड़ लागत के विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। साथ ही हितग्राहियों को जैविक खेती, कृषि यंत्र एवं पीएमएफएमई सहित विभिन्न योजनाओं में हितलाभ वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि यंत्रों एवं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने वाली प्रदर्शनी का शुभारंभ कर अवलोकन किया। 220 से अधिक मुख्य और 80 उप मंडियों में की जा रही खरीदी : सारी प्रक्रिया ई-मंडी पोर्टल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष-2026 को कृषि आधारित उद्योग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भावांतर योजना पंजीकृत किसान 15 जनवरी तक अपनी सोयाबीन मंडियों में बेच सकेंगे। पूरे प्रदेश में 220 से अधिक मुख्य मंडियों और 80 उप मंडियों में खरीदी की जा रही है। रेट पारदर्शी तरीके से तय हो रहे हैं, सारी प्रक्रिया ई-मंडी पोर्टल पर है, किसान का डाटा अपने आप दिख रहा है, पैसा सीधे ऑनलाइन खाते में पहुंचने की व्यवस्था की गई है और हर कदम पर रियल टाइम एंट्री और सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है। किसानों की सुविधा के लिए भावांतर कॉल सेंटर भी स्थापित किया गया है। भावांतर योजना लागू होने से फसल बेचने में किसानों को होने वाली कई परेशानियां दूर हो गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक दिसंबर को गीता जयंती भी पूरी भव्यता के साथ मनाई जाएगी। प्रदेश के नगरों में गीता भवन बनाए जा रहे हैं। साथ ही प्रत्येक विकासखंड में वृंदावन ग्राम बनाए जाएंगे। नरवाई की समस्या के निदान के लिए लगाए जा रहे हैं कम्प्रेस्ट बायो गैस प्लांट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे लिए धरती पुत्र किसान और सीमा पर जवान, दोनों समान सम्मान का भाव रखते हैं। धरती पुत्र किसानों से देश की विशेष पहचान बनी है। किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार खेती के साथ-साथ गोपालन को भी प्रोत्साहित कर रही है। किसान प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए पंजीयन कराएं और 4 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदान का लाभ उठाएं। प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना शुरू की गई है। योजना में अगर कोई किसान 40 लाख रूपए लागत का डेयरी व्यवसाय शुरू करता है तो राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए नरवाई की समस्या खत्म करने की दिशा में कदम उठाते हुए प्रदेश में कम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट का शुभारंभ किया गया है। बहनों का आर्थिक सशक्तिकरण सनातन संस्कृति का गौरव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार 12 नवम्बर को लाड़ली बहनों को जारी बढ़ी हुई राशि का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की बहनों और किसानों को लगातार सौगातें मिल रही हैं। बहनों का आर्थिक सशक्तिकरण सनातन संस्कृति का गौरव है। भारत दुनिया का एक मात्र देश है, जो मातृ सत्ता को स्वीकार करता है। उन्होंने कहा कि जहां देवियों का वास है, वही देवास है। उन्होंने देवास स्थित नोट प्रेस का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के नोट दुनिया में भारत का मान बढ़ाते हैं। भले ही नोट अर्थव्यवस्था को गति देते हों, लेकिन सोयाबीन, कपास और गेहूं का उत्पादन देश की अर्थव्यवस्था को आधार प्रदान करता है। कृषि उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान देश में महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने मोटे अनाज 'श्रीअन्न' पर दिया बोनस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने मोटा अनाज 'श्रीअन्न' खरीदने के लिए मंडला, बालाघाट, जबलपुर सहित 11 जिलों के लिए किसानों को कोदो-कुटकी पर 1000 रुपए प्रति क्विंटल बोनस दिया है। धान और गेहूं उत्पादक किसानों को भी बोनस का लाभ मिला है, चरणबद्ध रूप से गेहूं की कीमतें बढ़ाई जा रही है। संकल्प पत्र में किये वादे को पूरा करते हुए लाड़ली बहना योजना में बहनों के लिए भी राशि बढ़ाकर 1500 रुपए कर दी गई है। किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए अनुदान का लाभ दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रत्येक 7 दिन में प्रदेशवासियों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राशि अंतरित की जाएगी। प्रदेश में औद्योगीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार को पिछले दिनों भारत सरकार की ओर से 4 पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। देवास जिले में भावान्तर योजना के लिए सबसे अधिक हुआ पंजीयन कृषि मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा कि मध्यप्रदेश किसानों के लिए भावान्तर योजना संचालित करने वाला देश का इकलौता राज्य है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में किसान हितैषी सरकार है। मुख्यमंत्री का किसान मोर्चा और नागरिकों ने किया स्वागत मुख्यमंत्री डॉ. यादव के देवास पहुँचने पर … Read more

उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन-भत्ते व पेंशन पर हुई बैठक

भोपाल उप मुख्यमंत्री  जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन भत्ते, पेंशन आदि के संबंध में गठित समिति की द्वितीय बैठक गुरूवार को मंत्रालय में हुई। बैठक में विधायक सर्व अजय विश्नोई एवं  सचिन सुभाषचंद्र यादव उपस्थित रहे। समिति ने महाराष्ट्र, गुजरात एवं छत्तीसगढ़ के राज्यों में विधायक एवं पूर्व विधायक को मिलने वाली वेतन भत्ते एवं पेंशन राशि पर विस्तृत चर्चा की गई। समिति ने यह निर्णय लिया कि अगामी बैठक में मध्यप्रदेश के विधायकों/पूर्व विधायकों को मिलने वाली सुविधा पर अंतिम निर्णय लिया जायेगा। समिति के सदस्य सचिव अपर मुख्य सचिव,  अनुपम राजन, अपर मुख्य सचिव वित्त, मनीष रस्तोगी, विधान सभा के प्रमुख सचिव  अरविन्द शर्मा एवं अपर सचिव  वीरेन्द्र कुमार उपस्थित रहे।  

एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0: मध्यप्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम

मध्यप्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का पसंदीदा गंतव्य बनाने की पहल एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में हुआ जीसीसी लीडरशिप कनेक्ट इंदौर मध्यप्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने के लिए इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में गुरुवार को एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 के अंतर्गत “एमपी जीसीसी लीडरशिप कनेक्ट राउंडटेबल” का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर 25 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) शामिल हुए और राज्य की दीर्घकालिक तकनीकी रणनीति को दिशा देने के लिए सार्थक चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  संजय दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश को जीसीसी के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। टियर-2 शहरों में उपलब्ध सुविधाएं जीसीसी के लिए सशक्त बिजनेस इको सिस्टम बनाने में सक्षम हैं।  दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां समर्पित जीसीसी नीति बनाई गई है। इसके साथ ही राज्य में ड्रोन नीति के तहत ड्रोन डाटा रिपॉजिटरी विकसित की जा रही है। प्रदेश में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश एवं विकास को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। डाटा सेंटर नीति के तहत व्यवसायों को सब्सिडी दी जा रही है और स्पेस टेक्नोलॉजी नीति तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि आईआईटी इंदौर देश का एकमात्र संस्थान है जहाँ स्पेस टेक्नोलॉजी में बीटेक एवं एमटेक कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने वाला अग्रणी राज्य है। देश के 10 प्रतिशत से अधिक गेमिंग आईपी क्रिएशन मध्यप्रदेश से हुए हैं, जो राज्य की तकनीकी क्षमता और टैलेंट की उपलब्धता को दर्शाते हैं। नीतिगत और प्रशासनिक सहयोग मध्यप्रदेश सरकार ने जीसीसी की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतिगत एवं प्रशासनिक कदम उठाए हैं। संपदा पोर्टल के माध्यम से आसान रजिस्ट्री, लेबर लॉ में सरलीकरण, साइबर तहसील के माध्यम से विवाद निपटान, पेरोल सब्सिडी और पेटेंट असिस्टेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। राज्य में ग्रीन एनर्जी की उपलब्धता और कार्बन क्रेडिट व्यवस्था जैसे पर्यावरणीय उपाय सकारात्मक बिजनेस इकोसिस्टम को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं। उद्योग प्रतिनिधियों ने साझा किये विचार वेना इंडिया सेंटर हेड  गौतम यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में आईआईटी इंदौर, MANIT भोपाल, और GSITS इंदौर जैसे संस्थानों की मौजूदगी से राज्य में उच्च गुणवत्ता वाला टैलेंट पूल उपलब्ध है। उन्होंने जीसीसी के सशक्त विकास के लिए सीनियर लीडरशिप को आकर्षित करने का सुझाव दिया। वेना इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट  पार्थ सेन गुप्ता ने कहा कि मध्यप्रदेश में वित्तीय क्षेत्र की विशेषता और संभावनाएं जीसीसी की स्थापना के लिए अत्यंत अनुकूल हैं। केपीएमजी के पार्टनर  गौरव कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश के टियर-2 शहरों में उत्कृष्ट टैलेंट पूल उपलब्ध है और यहां के युवा राज्य में ही रहकर काम करना पसंद करते हैं, जिससे टैलेंट की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित रहती है। एनटीटी डाटा के साइबर हेड  क्षितिज बंथिया ने कहा कि राज्य में कई जीसीसी पहले से सक्रिय हैं और यहां स्टार्टअप कल्चर को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है। जीसीसी में स्थानीय भर्ती को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ई एंड वाई एलएलपी के पार्टनर  आदित्य क्षेत्रपा ने कहा कि जीसीसी की स्थापना के साथ उसकी निरंतरता पर भी ध्यान देना आवश्यक है, जिससे कार्य त्वरित गति और कम लागत से हो सके। प्रदेश में सस्टेनेबिलिटी, प्रगति और विकास की दिशा में आगे बढ़ते हुए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। इन केंद्रों का उद्देश्य न केवल तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं को सशक्त बनाना है, बल्कि रोजगार, नवाचार और कौशल विकास के नए अवसर भी सृजित करना है।