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किसानों के चेहरे पर मुस्कान, सोयाबीन पर मोहन सरकार का 1,300 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर

 भोपाल  प्रदेश सरकार ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ सुनिश्चित कराने के लिए बड़ी राहत दी है। सरकार सोयाबीन किसानों को प्रति क्विंटल 1,300 रुपये अपनी ओर से अतिरिक्त देगी। भावांतर योजना में अभी तक मंडियों में हुई बिक्री की दर का औसत निकालकर चार हजार रुपये माडल रेट तय किया है। 13 नवंबर को अंतर की यह राशि पंजीकृत किसानों के खातों में अंतरित की जाएगी। नौ लाख से ज्यादा किसानों कराया पंजीचन सोयाबीन का समर्थन मूल्य 5,328 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। मंडियों में इससे कम भाव मिलने के कारण प्रदेश सरकार ने भावांतर योजना लागू की है। इसमें मंडियों में बिक्री का औसत मूल्य निकालकर माडल रेट तय करने का निर्णय लिया गया। इस योजना का लाभ लेने के लिए नौ लाख 36 लाख किसानों ने पंजीयन कराया। योजना की अवधि प्रदेश में 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक रखी गई है। तय किया मॉडल रेट मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव ने शुक्रवार को राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मीडिया से चर्चा में बताया कि भावांतर योजना में सोयाबीन का प्रति क्विंटल मॉडल रेट 4,000 रुपये से अधिक तय किया गया है। किसानों को उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूर्ण लाभ दिलाने के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को 1,300 रुपये प्रति क्विंटल दिए जाएंगे। 13 नवंबर को यह राशि किसानों के खातों में अंतरित होगी।  

डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा! अमेरिका ने किया जी-20 से बायकॉट, जानें वजह

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस साल दक्षिण अफ्रीका में होने वाले जी-20 सम्मेलन में कोई भी अमेरिकी प्रतिनिधि हिस्सा नहीं लेगा। उन्होंने कहा है कि इस अफ्रीकी देश में श्वेत किसानों के साथ भेदभाव होता है। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही कह दिया था कि वह जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेने नहीं जाएंगे। पहले बताया गया था कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दक्षिण अफ्रीका जा सकते हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में कहा, यह बड़ा ही अपमानजनक है कि जी-20 सम्मेलन दक्षिण अफ्रीका में हो रहा है। ट्रंप ने बुधवार को मियामी में ‘अमेरिका बिजनेस फोरम’ में कहा, ‘‘मैं नहीं जा रहा हूं। दक्षिण अफ्रीका में जी-20 की बैठक है। दक्षिण अफ्रीका को जी-20 में ही नहीं होना चाहिए क्योंकि वहां जो हुआ है वह बहुत बुरा है। मैंने उन्हें बता दिया है कि मैं नहीं आ रहा हूं। मैं वहां अपने देश का प्रतिनिधित्व नहीं करने वाला…।’’ दक्षिण अफ्रीका ने एक दिसंबर 2024 को एक साल के लिए जी-20 की अध्यक्षता ग्रहण की थी और वह 22 और 23 नवंबर को जोहानिसबर्ग में समूह के नेताओं की शिखर बैठक की मेज़बानी करेगा। यह पहली बार है जब जी-20 शिखर सम्मेलन अफ्रीकी धरती पर आयोजित किया जाएगा। भारत दिसंबर 2022 से नवंबर 2023 तक जी-20 का अध्यक्ष था और उसने सितंबर 2023 में नई दिल्ली में 18वें जी-20 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की थी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आए थे। जी-20 में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, ब्रिटेन और अमेरिका के साथ-साथ यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ शामिल हैं। भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान ही अफ्रीकी संघ आधिकारिक तौर पर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के समूह में स्थायी सदस्य के रूप में शामिल हुआ था। न्यूयॉर्क सिटी के नवनिर्वाचित मेयर ‘‘कम्युनिस्ट’’ जोहरान ममदानी की आलोचना करते हुए ट्रंप ने कहा कि मियामी पीढ़ियों से दक्षिण अफ्रीका में कम्युनिस्ट अत्याचार से भागने वालों के लिए एक आश्रय स्थल रहा है। ट्रंप ने कहा, ‘‘मेरा मतलब है कि दक्षिण अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में क्या हो रहा है, इस पर एक नजर डालिए। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में क्या हो रहा है इस पर एक नजर डालिए।

ऑनलाइन मद् भगवद् गीता ज्ञान प्रतियोगिता में इस वर्ष मिलेंगे 70 पुरस्कार :मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गीता ज्ञान प्रतियोगिता में व्यापक भागीदारी करें सुनिश्चित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऑनलाइन मद् भगवद् गीता ज्ञान प्रतियोगिता में इस वर्ष मिलेंगे 70 पुरस्कार गीता जयंती पर पूरे प्रदेश में मद् भगवद् गीता का होगा सस्वर पाठ 7 से 25 नवम्बर प्रदेश में ऑनलाइन प्रतियोगिता उज्जैन में 1 से 3 दिसम्बर तक होगा अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव राजधानी में भी 1 दिसम्बर को होंगी कई गतिविधियां भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गीता जयंती, अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के प्रदेश में गरिमापूर्ण आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण की जाएं। इसके साथ ही ऑनलाइन मद् भगवद् गीता ज्ञान प्रतियोगिता में अधिकाधिक भागीदारी के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में हुई बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मध्यप्रदेश में 7 से 25 नवंबर की अवधि में ऑनलाइन मद् भगवद् गीता ज्ञान प्रतियोगिता हो रही है। मध्यप्रदेश के 70 वें स्थापना वर्ष में इस स्पर्धा में 70 पुरस्कारों का प्रावधान किया गया है। पुरस्कार में प्रथम पुरस्कार एक लाख रूपए, द्वितीय पुरस्कार 51 हजार रूपए का रहेगा। इसके साथ ही 31 हजार रूपए के तीन तृतीय पुरस्कारों सहित 15 लैपटाप, 30 ई-बाइक और 20 ई-रिक्शा का वितरण भी किया जाएगा। श्रेष्ठ ज्ञान स्तर के लिए प्रतियोगिता में 11 से 25 वर्ष आयु के विद्यार्थियों को प्रोत्साहन स्वरूप 2 वर्ष तक शिक्षावृत्ति देने का प्रावधान भी किया गया है। प्रतियोगिता में नागरिकों, विद्यार्थियों के साथ ही प्रतियोगिता में कारावास के बंदी भी हिस्सा ले सकेंगे। यह ऑनलाइन प्रतियोगिता प्रदेशभर में शिक्षण संस्थानों के सहयोग से आयोजित की जा रही है। हरियाणा के कुरूक्षेत्र में सजेंगे मध्यप्रदेश के व्यंजनों के स्टॉल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 24 नवंबर से 1 दिसंबर की अवधि में कुरुक्षेत्र में हो रहे अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 की तैयारी की जानकारी भी प्राप्त की। इस महोत्सव में मध्यप्रदेश के आंचलिक और जनजातीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके साथ ही मध्यप्रदेश की जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी की ओर से प्रदर्शनी, मेले और नाट्य समारोह के आयोजन होंगे। नाट्य समारोह में पुनीत इस्सर और मोहित शेवानी मुंबई, शिरीष राजपुरोहित उज्जैन के कार्यक्रमों सहित जनजातीय संग्रहालय के सौजन्य से जनजातीय नृत्यों की प्रस्तुति होगी। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने कृष्ण पाथेय न्यास, महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ, वीर भारत न्यास सहित उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, गृह, जनसंपर्क, संस्कृति संचालनालय, कृषि उद्योग विकास परिषद नई दिल्ली, इस्कॉन, गीता परिवार और विश्व गीता प्रतिष्ठानम की भागीदारी के संबंध में भी अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगरों में गीता भवन और विभिन्न चिन्हित स्थानों पर कृष्ण पाथेय से संबंधित कार्यों को भी पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योग और रोजगार वर्ष 2025 के समापन अवसर पर विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के साथ स्कूल विद्यार्थियों को जोड़कर एक अभिनव कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में 1 से 3 दिसंबर तक अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के लिए की जा रही तैयारी की भी जानकारी प्राप्त की। इस महोत्सव में ऑनलाइन मद् भागवत गीता ज्ञान प्रतियोगिता के पुरस्कृत प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस वर्ष प्रतियोगिता में 21 लाख नागरिकों की विशाल भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 1 दिसम्बर को दशहरा मैदान उज्जैन में गीता पाठ और प्रदर्शनी सहित सांगीतिक प्रस्तुति होगी। दूसरे दिन काव्य पाठ और सांगीतिक प्रस्तुति और तीसरे दिन बैंगलोर एवं भोपाल के संगीत दल प्रस्तुति देंगे। भोपाल में लाल परेड ग्राउंड पर होगा मद् भगवद् गीता का सस्वर पाठ भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के अंतर्गत 1 दिसम्बर को लाल परेड ग्राउण्ड पर आचार्यों की सन्निधि में मद् भगवद् गीता के 15वें अध्याय का सस्वर पाठ होगा। इसके साथ ही गौ और गोपाल पर आधारित प्रदर्शनी और बैंगलोर के दल द्वारा गीता ऑन व्हील्स सांगीतिक प्रस्तुति होगी। दो दिसम्बर को रवीन्द्र भवन भोपाल के हंसध्वनि सभागार में कृष्णायन की प्रस्तुति के साथ दिव्यांग कलाकार भी कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। जिला स्तर पर कार्यक्रमों का स्वरूप बैठक में जानकारी दी गई कि 1 दिसम्बर को प्रदेश के विकासखंडों में गीता पाठ होंगे। जिला मुख्यालय पर भी आचार्यों की सन्निधि में सस्वर पाठ होंगे। भगवान कृष्ण से जुड़े विशेष स्थलों जैसे इंदौर जिले के जानापाव, धार जिले के अमझेरा, उज्जैन जिले के नारायणा, अशोकनगर जिले के चंदेरी, रायसेन जिले के जामगढ़, देवास जिले के पीवडिया-खातेगांव, सागर जिले के प्राचीन नगर एरण और पन्ना जिले में भी विशेष कार्यक्रम होंगे। गीता जयंती पर कृष्ण मंदिरों की विशेष सज्जा की जाएगी। जिला स्तर पर संतों और विद्वतजनों के व्याख्यान भी आयोजित किए जाएंगे। संस्कृति विभाग द्वारा इन सभी कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही है। विक्रमोत्सव 2026 के आयोजन पर चर्चा बैठक में विक्रमोत्सव 2026 के आयोजन पर भी चर्चा हुई। विक्रमोत्सव की शुरूआत 15 फरवरी 2026 से होगी और 19 मार्च 2026 तक विभिन्न गतिविधियां होंगी। इसके बाद 19 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत प्रस्तावित कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी गई। विक्रमोत्सव में मुख्य रूप से अनादि देव शिव की कलाओं का शिवार्चन, कलश यात्रा, प्रदर्शनी, शिव पुराण, विक्रम व्यापार मेला, विक्रम नाट्य समारोह, पुतुल कठपुतली समारोह, अनादि पर्व, शिल्प कार्यशाला, मालवी कलम कार्यशाला, विक्रमादित्य का न्याय वैचारिक समागम, कवि सम्मेलन, लोकरंजन, अनहद वैचारिक समागम, पौराणिक फिल्म अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव, महाकाल पृथ्वी का समय शोध संगोष्ठी, वेद अंताक्षरी, सूर्य उपासना की गतिविधियां होंगी। प्रदेश के जिलों में भी विक्रमोत्सव के कार्यक्रम होंगे। बैठक में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार राम तिवारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट – सोने में ₹10,000 और चांदी में ₹21,000 की कमी दर्ज

 नई दिल्ली सोना और चांदी की कीमत में गिरावट (Gold-Silver Price) का सिलसिला जारी है. बीते 14 कारोबारी दिनों में एक-दो दिन की बढ़त को छोड़ दें, तो दोनों कीमती धातुओं के दाम फिसले ही हैं. अपने हाई लेवल से गोल्ड और सिल्वर प्राइस बुरी तरह क्रैश (Gold-Silver Price Crash) हो चुके हैं. जहां एमसीएक्स पर ये गिरे हैं, तो घरेलू मार्केट में बीते 17 अक्टूबर के भाव के मुकाबले गोल्ड 10000 रुपये से ज्यादा सस्ता, जबकि चांदी 21000 रुपये के आस-पास सस्ती मिल रही है.  10774 रुपये सस्ता हो गया Gold घरेलू मार्केट में शुक्रवार को भी सोने का भाव टूटकर (Gold Rate Fall) 1,20,100 रुपये पर आ गया. पिछले बंद भाव के मुकाबले ये 570 रुपये सस्ता हुआ. वहीं पिछले 14 कारोबारी दिनों में आए चेंज को देखें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट बीते 17 अक्टूबर की सुबह 1,30,874 रुपये था और इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो पीली धातु इस हाई लेवल से 10,774 रुपये तक सस्ती मिल रही है.  मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने के भाव में आए बदलाव (MCX Gold Rate) पर नजर डालें, 17 अक्टूबर को 5 दिसंबर की एक्सपायरी वाले 24 कैरेट सोने की वायदा कीमत 1,27,008 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो कि 7 अक्टूबर शुक्रवार को गिरकर 1,21,038 रुपये रह गया. यानी 10 Gram Gold Rate में इस दौरान  5,970 रुपये की कमी आई है.  चांदी का दाम तो क्रैश हो गया  बात दूसरी कीमती धातु चांदी की करें, तो घरेलू मार्केट में 14 दिनों में Silver Rate करीब 21000 रुपये प्रति किलो तक कम हुआ है. दरअसल, आईबीजीए की वेबासाइट पर मौजूद रेट्स को देखें, तो 17 अक्तूबर की शाम को 1 किलोग्राम चांदी का भाव 1,69,230 रुपये था, जो कि बीते शुक्रवार को गिरकर 1,48,275 रुपये पर बंद हुआ. इस हिसाब से सिल्वर प्राइस में 20,955 रुपये की गिरावट आई है.  एमसीएक्स पर भी चांदी का भाव टूटा है और इसमें गिरावट लगातार जारी है. 14 कारोबारी दिन पहले इसका वायदा भाव 1,56,604 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था और अब तक इसमें 8,815 रुपये की गिरावट आ चुकी है. वहीं अगर Gold-Silver के हाई वायदा भाव से तुलना करें, तो चांदी 1,70,415 रुपये से 22,626 रुपये, जबकि सोना 11,256 रुपये तक सस्ता हो चुका है.  घरेलू मार्केट में GST+ मेकिंग चार्ज  बता दें कि इंडियन बुलियन की वेबसाइट पर अपडेट होने वाले Gold-Silver Rates देशभर में समान रहते हैं, लेकिन जब आप ज्वेलरी शॉप पर आभूषण खरीदने के लिए जाते हैं, तो फिर आपको 3 फीसदी जीएसटी के साथ ही मेकिंग चार्ज भी देना होता है, जिससे इसकी कीमत में इजाफा हो जाता है. एक और बात ध्यान रखें कि जो Gold Jewellery आप खरीदें, उस पर दर्ज हॉलमार्क के जरिए उसकी क्वालिटी की पहचान जरूर कर लें.  

पचमढ़ी में राहुल गांधी की सक्रियता: जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग और गांधी प्रतिमा पर फूल अर्पित करेंगे

पचमढ़ी  कांग्रेस नेता और रायबरेली से सांसद राहुल गांधी शनिवार से दो दिन के मध्यप्रदेश प्रवास पर रहेंगे। वे पचमढ़ी में कांग्रेस जिलाध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ संगठन की मजबूती, सामाजिक न्याय और आर्थिक नीतियों पर चर्चा करेंगे। बैठक में राहुल गांधी कुछ चुनिंदा नेताओं से अलग-अलग भी बातचीत कर सकते हैं। यह बैठक 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति तय करने में अहम मानी जा रही है।  राहुल गांधी के आगमन को लेकर पचमढ़ी में सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं। करीब 150 पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ के जवान तैनात रहेंगे। राहुल दोपहर 2:30 बजे भोपाल पहुंचेंगे और वहां से हेलीकॉप्टर से पचमढ़ी जाएंगे। चप्पे-चप्पे पर तैनात होगी पुलिस पचमढ़ी में गांधी के दौरे को लेकर 150 पुलिस कर्मियों चप्पे चप्पे पर नजर रखेंगे। पचमढ़ी के हर चौक चौराहों पर शस्त्र बल तैनात रहेगा। राहुल हेलीपेड से गांधी चौक पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करने जाएंगे। बताया जाता है कि इस प्रतिमा का वर्ष 1959 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने सोनिया गांधी ने अनावरण किया था। यहां से राहुल प्रशिक्षण स्थल पर पहुंचेंगे। यहां जिला अध्यक्षों से वन टू वन करेंगे। कार्यक्रम को लेकर पचमढ़ी में कांग्रेसियों ने जगह-जगह पोस्टर, बैनर लगाए हैं। रविशंकर भवन से प्रशिक्षण स्थल तक मार्गों विशेष साफ सफाई की गई है। राहुल के दौरे पर शिक्षा मंत्री ने कसा तंज सेठानी घाट पर सामूहिक वंदे मातरम सामूहिक गायन में शामिल हुए शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने राहुल गांधी के पचमढ़ी दौरे पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि आजाद मुल्क में किसी भी नागरिक को आने जाने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता रहती है। राहुल महत्वपूर्ण अवसर पर घूमते ही हैं। देश में चुनाव चलते हैं तो विदेश जाते हैं। बिहार में चुनाव चल रहे है तो मध्य प्रदेश आते हैं। यह तो उनके सही वक्त पर लिए गए निर्णय को प्रमाणित करता है। भारतीय अर्थशास्त्र और राजनीति पर सत्र भारतीय अर्थशास्त्र और राजनीति विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण चक्रवर्ती ने अपने गहन अनुभव और विशेषजता के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविकताओं, चुनौतियों और अवसरों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। चक्रवर्ती ने बताया कि किस प्रकार वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार आंकड़ों, जुमलों और भामक प्रस्तुतियों के माध्यम से जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने तथ्यों और आर्थिक संकेतकों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति प्रचारित किए जा रहे दावों से भिन्न है। सत्र के दौरान उन्होंने प्रेजेंटेशन के माध्यम से आर्थिक नीतियों और उनके प्रभावों का विश्लेषण किया तथा प्रश्नोत्तर सत्र में जिला अध्यक्षों के साथ सार्थक संवाद स्थापित किया।  पांच माह में दूसरी बार आएंगे मध्यप्रदेश राहुल गांधी पांच माह में दूसरी बात मध्यप्रदेश आ रहे हैं। इसके पहले वे संगठन सृजन अभियान के चलते 3 जून को भोपाल आए थे। कार्यकर्ताओं से संवाद किया था। स्पष्ट तौर से यह भी बताया था कि पार्टी में जिलाध्यक्ष ही पॉवरफुल होंगे। अब जबकि जिलाध्यक्ष के चुनाव हो चुके हैं तो राहुल फिर इन्हें संबोधित करने आ रहे हैं। जाहिर है राहुल के आने पर कार्यकर्ताओं को बूस्टर डोज मिलेगा। कार्यकर्ताओं में उत्साह बना रहे पार्टी का यही प्रयास है। अगले विधानसभा और लोकसभा चुनाव को फोकस रखकर पार्टी काम कर रही है। जिलाध्यक्षों का प्रशिक्षण भी इसी की कड़ी है। पचमढ़ी में आयोजित कांग्रेस संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर के पांचवें दिन सभी जिला कांग्रेस अध्यक्षों एवं विधायकों के लिए ऽजाति, संविधान और राजनीति के विषय पर एक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया। इस सत्र का उद्देश्य भारतीय समाज और राजनीति में जाति की भूमिका, संविधान में उसके प्रावधानों तथा कांग्रेस के दृष्टिकोण की गहराई से समझ विकसित करना था। जाति, संविधान और राजनीति के मुद्दे पर होगी चर्चा सीडब्ल्यूसी के सदस्य एवं झारखंड के प्रभारी के. राजू ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा जाति हमारे सामाजिक और राजनीतिक जीवन की एक सच्चाई है, जिसे केवल परंपरा नहीं बल्कि समानता और सामाजिक न्याय के संदर्भ में समझना चाहिए। संविधान ने समानता और अवसर की समानता के माध्यम से जातीय भेदभाव को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त किया है, और कांग्रेस पार्टी सदैव इस भावना को व्यवहार में लाने के लिए प्रतिबद्ध रही है। कार्यक्रम में कहा कि जाति जनगणना सामाजिक न्याय की दिशा में नीति निर्माण का सशक्त आधार बन सकती है। जाति, संविधान और राजनीति ये तीनों भारतीय लोकतंत्र के मूल तत्व हैं, और जब तक समानता तथा सामाजिक न्याय का लक्ष्य प्राप्त नहीं होता, तब तक संविधान की आत्मा अधूरी रहेगी। इस सत्र में जिला अध्यक्षों, प्रशिक्षणार्थियों ने भागीदारी की और संगठन निर्माण में समावेशी दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।  पचमढ़ी पहुंचने के बाद राहुल गांधी गांधी चौक पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे और फिर प्रशिक्षण सत्र में शामिल होंगे। शाम 4:30 बजे वे जिलाध्यक्षों की ट्रेनिंग कैंप में शामिल होंगे। इसके बाद रात 8 बजे जिलाध्यक्षों और उनके परिवारों के साथ डिनर करेंगे। वे रात को रविशंकर भवन में रुकेंगे और रविवार सुबह 11 बजे बिहार के लिए रवाना होंगे।  बैठक में ‘भारतीय अर्थव्यवस्था और राजनीति की दिशा’ विषय पर एक विशेष सत्र हुआ। इसमें ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण चक्रवर्ती ने देश की आर्थिक चुनौतियों पर बात की और सुझाव दिया कि पार्टी को जनता के आर्थिक मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।  राहुल गांधी का यह दौरा केवल बैठक तक सीमित नहीं रहेगा। वे पार्टी संगठन को मजबूत करने, युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर नई रणनीति बनाने पर जोर देंगे। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, यह बैठक पार्टी की नई कार्ययोजना की दिशा तय करेगी। 

प्रधानमंत्री मोदी का विजन है मध्यप्रदेश का मिशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विश्व बाजार में भारत ने फूंका है स्वदेशी का बिगुल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री  मोदी का विजन है मध्यप्रदेश का मिशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री एमवीएम कॉलेज परिसर में लगे स्वदेशी मेला में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नया भारत अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। दुनिया में जारी आर्थिक युद्ध के बीच भारत ने स्वदेशी का बिगुल फूंका है। प्रधानमंत्री  मोदी ने देश के नागरिकों, व्यापारियों और उद्यमियों को इस आर्थिक युद्ध में "स्वदेशी ब्रह्मास्त्र' सौंपा है। आज सभी क्षेत्रों में स्वदेशी को महत्व देते हुए भारत की सनातन संस्कृति और विरासत से विकास के पथ पर देश अग्रसर है। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री  मोदी के विजन को मिशन बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वदेशी का अर्थ यह नहीं कि हम दुनिया से अलग हो जाएं। इसका मतलब है कि जो चीज़ हम अपने देश में बना सकते हैं, उसे बाहर से न लाएं और अपने देश में बनी वस्तुओं का ही उपयोग करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मोतीलाल विज्ञान आदर्श महाविद्यालय प्रांगण में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित स्वदेशी मेले का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मेला परिसर में स्थापित प्रभु राम की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर राम स्तुति की प्रस्तुति दी गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अंगवस्त्रम एवं ब्रह्मोस मिसाइल की प्रतिकृति भेंटकर आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री जी ने लघु उद्यमियों द्वारा लगाए विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन किया एवं स्वदेशी उत्पादों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन में स्वदेशी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी, स्वामी दयानंद, लाला लाजपत राय एवं बाल गंगाधर तिलक जैसे अनेक महापुरुषों ने देशवासियों से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर स्वदेशी अपनाते हुए आजादी की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। यह स्वदेशी की ही ताकत थी कि बंगाल विभाजन के विरोध में बंग-भंग आंदोलन प्रारंभ हुआ और अंग्रेजों को झुकना पड़ा था। वर्तमान समय में एक देश के नेता दुनिया को टैरिफ की धमकी देते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री  मोदी का संकल्प अडिग है। भारत किसी के सामने नहीं झुकेगा। ऐसे समय में प्रधानमंत्री  मोदी ने स्वदेशी ब्रह्मोस मिसाइल से पड़ोसी दुश्मन देश को चारों खाने चित कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज दुनिया को भारत में बड़ा बाजार दिखाई दे रहा है। वे अपनी कमाई के लिए उत्पादों को भारत लाना चाहते हैं। लेकिन हम अपने स्वदेशी के भाव से नई तकनीक अपनाते हुए खेती को भी संरक्षित कर रहे हैं और विभिन्न उत्पादों के निर्यात को बढ़ा रहे हैं। इस मेले में उत्तरप्रदेश भदौही के व्यापारी तक अपने कालीन बेचने यहां आए हैं। स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय मेला प्रमुख  साकेत राठौर ने कहा कि स्वदेशी मेला कोई आम मेला नहीं है। हमें स्वदेशी से एक अगल पहचान मिलती है। स्वदेशी जब समाज के साथ जुड़ता है तो वह आंदोलन में परिवर्तित होता है। स्वदेशी वस्तुओं में हमारी मिट्टी की खुशबू होती है। भारत आर्थिक स्थिति में चौथे पायदान पर है। अगर हमें अमेरिका, चीन और जापान को पीछे छोड़ना है तो स्वदेशी के भाव को अपनाना होगा। वर्षभर में देश में 150 स्वदेशी मेले लगाए जाएंगे। विधायक  भगवानदास सबनानी ने कहा कि देशभर में वन्देमातरम के आयोजन के दिन स्वदेशी मेले का आयोजन एक ऐतिहासिक क्षण है। हमें स्वयं स्वदेशी अपनाते हुए साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। स्वदेशी मेला संयोजक एवं भोपाल के व्यापारी  सतीश विश्वकर्मा ने कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन किया। स्वदेशी मेले की शुभारंभ अवसर पर  रमणवीर सिंह अरोड़ा,  सुधीर दाते एवं  सुशील अग्रवाल सहित स्वदेशी आंदोलन से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित थे। 

काशी से निकली विकास की रफ्तार! मोदी ने दी 4 ‘वंदे भारत’ ट्रेनों को हरी झंडी

वाराणसी   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने वाराणसी दौरे के दूसरे दिन देश को साल 4 सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदेभारत की सौगात दी है. बनारस स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर पीएम मोदी ने फूलों से सजे बनारस से खजुराहो तक जाने वाले वन्देभारत ट्रेन को रवाना किया है. इस ट्रेन की शुरुआत के बाद देश की सांस्कृतिक डोर से विश्व धरोहर की गांठ और मजबूत होगी. वाराणसी आने वाले पर्यटक सीधे खजुराहो तक कि यात्रा कर सकेंगे. टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल मेहता ने बताया कि इस ट्रेन से काशी आने वाले पर्यटकों को काफी फायदा मिलेगा. यह सीधी ट्रेन महज 8 घंटे में बनारस से खजुराहो तक जाएगी. बीच में चित्रकूट भी एक जंक्शन पड़ेगा. ऐसे में यह पूरा एक सर्किट बनाएगी जिससे टूरिज्म को काफी फायदा होगा. उन्होंने कहा कि लंबे समय से पर्यटन से जुड़े उद्यमियों की मांग थी कि काशी से खजुराहो के बीच ट्रेन सेवा की शुरुआत हो. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां के पर्यटन उद्यमियों की सुनी और आज बनारस से खजुराहो के बीच सीधी चलने वाली वंदेभारत ट्रेन कि उन्होंने सौगात दे दी. जिससे सभी पर्यटन उद्यमी काफी खुश है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, अधिकांश देशों के विकास में इंफ्रास्ट्रक्चर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. किसी भी शहर में जैसे ही बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है, उसका विकास अपने-आप तेजी से शुरू हो जाता है. इंफ्रास्ट्रक्चर सिर्फ बड़े पुलों और हाइवे तक सीमित नहीं है. पीएम मोदी का कहना था कि काशी से खजुराहो वंदे भारत के अलावा, फिरोजपुर-दिल्ली वंदे भारत, लखनऊ-सहारनपुर वंदे भारत और एर्नाकुलम-बेंगलुरू वंदे भारत को हरी झंडी दिखाई गई है. इन 4 नई वंदे भारत ट्रेनों के साथ ही अब देश में 160 से ज्यादा नई वंदे भारत ट्रेनों का संचालन होने लगा है. पीएम ने आगे कहा, आज वंदे भारत, नमो भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनें, भारतीय रेलवे की अगली पीढ़ी की नींव तैयार कर रही हैं. ये भारतीय रेलवे को transform करने का एक पूरा अभियान है. वंदे भारत भारतीयों की, भारतीयों द्वारा, भारतीयों के लिए बनाई गई ट्रेन है. जिस पर हर भारतीय को गर्व है. पर्यटकों के लिए बड़ी सौगात वहीं अजय सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज काशी को इस ट्रेन के जरिये बहुत बड़ी सौगात दी है .इससे यहां के पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा और यात्री सहूलियत के साथ सांस्कृतिक राजधानी काशी से खजुराहो तक जा पाएंगे. बताते चलें कि वाराणसी से खजुराहो तक जाने के लिए पर्यटकों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती थी. लेकिन अब इस ट्रेन की सौगात के बाद उन्हें सहूलियत मिलेगी. वाराणसी को मिली 8 वीं वंदेभारत ट्रेन वाराणसी में लगातार सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदेभारत भारत का कुनबा बढ़ते जा रहा है. बनारस-खजुराहो वन्देभारत की शुरुआत के बाद यह 8 वीं वंदेभारत ट्रेन है जो वाराणसी से चलेगी. गौरतलब है कि वाराणसी एकमात्र शहर है जहां से 8 वंदेभारत ट्रेन का संचालन होता है. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन आज से बनारस-खजुराहो, लखनऊ-सहारनपुर, फिरोजपुर-दिल्ली और एर्नाकुलम-बेंगलुरु रूट पर संचालित होंगी. डीआरएम गौरव अग्रवाल ने बताया, आज चार नई वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई गई. लखनऊ के लोगों को लखनऊ से सहारनपुर जाने का मौका मिलेगा, जो सोमवार को छोड़कर हफ़्ते में 6 दिन चलेंगी.  वंदे भारत की सौगात मिलने पर एक स्थानीय नागरिक का कहना था कि काशी आने वाले सभी श्रद्धालु- चाहे वे दिल्ली से हों या देश-विदेश के अन्य हिस्सों से… पहले काशी पहुंचते हैं, फिर प्रयागराज, चित्रकूट और अन्य धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ते हैं. इसी मार्ग से खजुराहो भी जुड़ता है, जो हमारा ऐतिहासिक और विश्व धरोहर स्थल है. यह पहल सराहनीय है. हमें उम्मीद है कि एनडीए सरकार भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रखेगी. आज चार वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत हो रही है. इससे पहले शुक्रवार शाम करीब 5 बजे प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी पहुंचे. पीएम का विशेष विमान बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरा, जहां प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री और जिले के प्रभारी सुरेश खन्ना, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, विधायक सुनील पटेल, विधायक टी. राम, कमिश्नर एस. राजालिंगम, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया. इसके बाद पीएम मोदी सड़क मार्ग से बीएलडब्ल्यू गेस्ट हाउस पहुंचे. उनका काफिला बाबतपुर, हरहुआ, गिलट बाजार, जेपी मेहता, फुलवरिया फ्लाईओवर और बरेका होते हुए गुजरा. पूरे मार्ग पर हजारों लोग, बीजेपी कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी 'मोदी-मोदी' और 'हर हर महादेव' के नारों के साथ उनका स्वागत करते दिखे. चार नई वंदे भारत का रूट्स… 1. बनारस → खजुराहो 2. खजुराहो → बनारस 3. लखनऊ → सहारनपुर 4. सहारनपुर → लखनऊ 5. दिल्ली → फिरोजपुर 6. फिरोजपुर → दिल्ली 7. बेंगलुरु → एरणाकुलम 8. एरणाकुलम → बेंगलुरु धार्मिक पर्यटन को नई रफ्तार चार नई ट्रेनों में सबसे अहम मानी जा रही है बनारस–खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस, जिसे काशी और पूरे पूर्वांचल के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है. यह ट्रेन बनारस, प्रयागराज, चित्रकूट और खजुराहो जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को जोड़ेगी. इससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी. नई वंदे भारत सेवा वर्तमान स्पेशल ट्रेनों की तुलना में करीब 2 घंटे 40 मिनट का समय बचाएगी. इससे यात्रियों को तेज, आरामदायक और आधुनिक यात्रा अनुभव मिलेगा. क्या बोले केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव… केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी स्टेशन का निरीक्षण किया और कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वाराणसी स्टेशन से चार वंदे भारत सेवाओं को हरी झंडी दिखाई. ये सभी सेवाएं यात्रियों को अत्यधिक सुविधा प्रदान करेंगी. चाहे अमृत भारत ट्रेनें हों, नामो भारत हों या वंदे भारत- यात्रियों की सुविधा पर फोकस करते हुए नई पीढ़ी की ट्रेनें लगातार शुरू की जा रही हैं. इसी के साथ देशभर के 1,300 स्टेशनों पर भी पुनर्विकास का काम चल रहा है.

कटरा रूट पर बड़ा बदलाव: कई ट्रेनें रद्द, अनेक के रूट सीमित — वैष्णो भक्तों की बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली  उत्तर भारत से जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाली रेल सेवाओं को बड़ा झटका लगा है। उत्तर रेलवे ने एक साथ 22 ट्रेनों को मार्च 2026 तक रद्द करने और कई ट्रेनों के रूट को सीमित करने का निर्णय लिया है। इस कदम से जहां यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित होंगी, वहीं माता वैष्णो देवी यात्रा, सर्दियों का पर्यटन सीजन और स्थानीय कारोबार पर भी गहरा असर पड़ेगा। रेलवे ने इस फैसले के पीछे पुलों की मरम्मत और इंजीनियरिंग प्रतिबंध (EER) को कारण बताया है। 6 नवंबर को जारी आदेश के अनुसार, कठुआ और माधोपुर स्टेशनों के बीच पुल नंबर 17, उधमपुर-चक रकवाल सेक्शन के बीच पुल नंबर 163 और पठानकोट-कंदरोड़ी (अप/डाउन) के बीच पुल नंबर 137 और 232 की मरम्मत कार्यों के चलते यह कदम उठाया गया है।   मार्च 2026 तक रद्द की गई प्रमुख ट्रेनें रद्द की गई 22 ट्रेनों में दिल्ली, जम्मू, कटड़ा, उधमपुर और तिरुपति जैसी प्रमुख गंतव्यों को जोड़ने वाली कई महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं। इनमें प्रमुख ट्रेनें हैं- 12207/08 गरीब रथ एक्सप्रेस (काठगोदाम–जम्मू तवी) 12265/66 दुरंतो एक्सप्रेस (दिल्ली–जम्मू) 14503/04 कालका–कटड़ा एक्सप्रेस 14611/12 गोरखपुर–कटड़ा एक्सप्रेस 22439/40 वंदे भारत एक्सप्रेस (नई दिल्ली–श्री माता वैष्णो देवी कटरा) 22705/06 हमसफर एक्सप्रेस (तिरुपति–जम्मू) 22401/02 दिल्ली–उधमपुर एसी एक्सप्रेस 22431/32 सुल्तानपुर–उधमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस 19107/08 जनभूमि एक्सप्रेस (भावनगर–उधमपुर) 26405/06 अमृतसर–कटड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस सीमित रूट पर चलेंगी ये ट्रेनें रेलवे ने कुछ ट्रेनों को पूरी तरह रद्द नहीं किया है, बल्कि उन्हें सीमित रूट पर चलाने का फैसला किया है। इनमें शामिल हैं- 12549/50 दुर्ग–उधमपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस: अब केवल जम्मू छावनी तक 19223/24 साबरमती–जम्मू तवी एक्सप्रेस: अब फिरोजपुर तक 19415/16 साबरमती–कटड़ा एक्सप्रेस: अब अमृतसर तक 20433/34 सुल्तानपुर–कटड़ा जम्मू मेल: अब अंबाला तक 20847/48 दुर्ग–उधमपुर एक्सप्रेस: अब अंबाला तक 20985/86 कोटा–उधमपुर एक्सप्रेस: अब लुधियाना तक 22941/42 इंदौर–उधमपुर एक्सप्रेस: अब जम्मू छावनी तक 14803/04 बीकानेर–जम्मू तवी एक्सप्रेस: अब पठानकोट तक सीमित कब बहाल होंगी सेवाएं? रेलवे ने कुछ ट्रेनों की बहाली की तारीखें भी घोषित की हैं। इनमें 14661/62 शालीमार मलानी एक्सप्रेस, 22461/62 श्री शक्ति एक्सप्रेस और 74906/07 उधमपुर–पठानकोट डीएमयू सेवा शामिल हैं, जिन्हें 30 नवंबर से 3 दिसंबर 2025 के बीच चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू किया जाएगा। पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर असर ट्रेनों के रद्द और सीमित होने से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। वैकल्पिक परिवहन साधन सीमित हैं, जबकि बसों और निजी वाहनों से यात्रा करना महंगा साबित होगा। स्थानीय होटल कारोबारी, ट्रैवल एजेंट और टैक्सी चालक कहते हैं कि ट्रेनों की कमी से यात्रियों की संख्या घटेगी और उनका व्यवसाय प्रभावित होगा। उन्होंने रेलवे से मरम्मत कार्यों को जल्द पूरा करने और अस्थायी वैकल्पिक सेवाएं शुरू करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र की पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को राहत मिल सके।

नई तकनीक: सिर्फ फोन टच से पता चलेगा ब्लड शुगर, दर्दनाक जांच नहीं

नई दिल्ली डायबिटीज पेशेंट को अक्सर बार-बार शुगर चेक करने की जरूरत होती है. घर से दूर नौकरी करने वाले लोगों को काफी परेशानी भी होती है. मार्केट में कुछ खास प्रोडक्ट लिस्टेड हैं, जिनका इस्तेमाल करके मोबाइल पर ब्लड शुगर देखा जा सकेगा. इनका नाम स्मार्ट ग्लुकोज मॉनिटर हैं, जिसका मेडिकल नाम कॉन्टीन्युअस ग्लोस मॉनिटरिंग सिस्टम (CGM) है.  इन ग्लूकोज मीटर को बांह या पेट पर चिपकाया जाता है. इसके बाद मोबाइल पर आसानी से ब्लड शुगर को देख सकते हैं. इसके लिए बार-बार उंगली में सुई चुभाने की जरूरत नहीं होगी.  स्टिकर जैसी शेप और कई सेंसर  मार्केट में अलग-अलग ब्रांड और कंपनियां Blood Glucose Meter Sticker लिस्टेड हैं. जहां कुछ ब्लूटूथ का सपोर्ट देती हैं वहीं कुछ कंपनियां NFC का भी सपोर्ट प्रोवाइड कराती हैं. बहुत सी कंपनियां दोनों का सपोर्ट देती हैं.  NFC सपोर्ट वाले पैच पर सिर्फ स्मार्टफोन को टच करना होता है, उसके बाद ब्लड शुगर लेवल मोबाइल स्क्रीन पर पॉपअप करने लगता है. हालांकि ब्लूटूथ सपोर्ट वाले पैच का डेटा देखने के लिए मोबाइल ऐप की जरूरत होती है.  स्मार्ट ग्लूकोज मीटर पैच ऐसे काम करते हैं     स्मार्ट ग्लूकोज मीटर पैच सेंसर को बांह या पेट पर चिपका जाता है.     यह शरीर के अंदर के इंटरस्टिशियल फ्लूइड में ग्लूकोज की लेवल को मांपता है.     Bluetooth या NFC से डेटा स्मार्टफोन में ट्रांसफर किया जाता है.      ऐप में ग्राफ, हाई/लो अलर्ट और रिपोर्ट दिखाई जाती है.  मार्केट में ढेरों ऑप्शन और इतनी है कीमत  ग्लूकोज मीटर स्टिकर के मार्केट में ढेरों ऑप्शन मौजूद हैं. अलग-अलग कंपनियां अलग-अलग फीचर्स और एक्युरेसी का दावा करते हैं. मार्केट में 3-5 हजार रुपये की कीमत में मिल जाते हैं. एक पैज को करीब 15 दिन तक यूज किया जा सकता है.  ग्लूकोज मीटर स्टिकर किन लोगों के यूजफुल  ग्लूकोज मीटर स्टिकर पैच उन लोगों के लिए यूजफुल हैं, जिनका ब्लड शुगर ज्यादा रहता है और फ्लेक्चुएट करता है. शुगर बढ़ने की वजह से अगर तबियत बिगड़ती है तो पेशेंट आसनी से फोन को पैज पर टैप करके शुगर लेवल जांच सकते हैं. इसके बाद शुगर कंट्रोल करने के लिए काम कर सकते हैं.  ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी-एम) के शोधकर्ताओं ने मधुमेह रोगियों के लिए एक कम बजट वाला, यूजर फ्रेडली और उपयोग करने में आसान ग्लूकोज मॉनिटरिंग उपकरण विकसित किया है। शोधकर्ताओं की टीम का मानना है कि इसकी मदद से शुगर लेवल को नियमित रूप से जांचने में बिना दर्द के मदद मिल सकती है। यह पेटेंट उपकरण मरीजों को बिना उंगलियों में सुई चुभने के दर्द के भी ग्लूकोज के स्तर को मापने में मददगार हो सकती है।  भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट के मुताबिक देश की लगभग 9 प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है, इनमें से अधिकतर लोगों को डॉक्टर नियमित रूप से शुगर की जांच करते रहने की सलाह देते हैं।  ग्लूकोमीटर से घर पर डायबिटीज की जांच अभी तक घर पर डायबिटीज की जांच के लिए ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ये एक छोटा-सा डिवाइस होता है जिससे आप घर पर ही अपने ब्लड शुगर की जांच कर सकते हैं। इसके लिए ग्लूकोमीटर में एक नई टेस्ट स्ट्रिप लगाने के बाद, अपनी उंगली में निडिल या सिरिंज की मदद से पिन करके एक ड्रॉप खून को इसी स्ट्रिप पर लगाना होता है।  कुछ सेकंड में डिवाइस आपकी ब्लड शुगर वैल्यू दिखा देती है।   क्या कहते हैं विशेषज्ञ? इलेक्ट्रॉनिक मटेरियल और थिन फिल्म्स लैब के शोधकर्ताओं ने प्रोफेसर परशुरामन स्वामीनाथन के नेतृत्व में इसे विकसित किया है।  इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे आईआईटी मद्रास के डॉ एल. बालामुरुगन कहते हैं, इस तरह का उपकरण वास्तव में बहुत सहायक है। ग्लूकोज की निगरानी को दर्दरहित बनाने के साथ ये किफायती भी है। यह ग्लूकोज के स्तर की नियमित जांच करने, अपने शरीर के पैटर्न को समझने में जांच के लिए अनावश्यक दौड़ भाग को कम करने में मदद करता है। हालांकि ये डिवाइस किस तरह से काम करती है फिलहाल इसकी स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।  

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान: S-400 खरीद और 50,000 करोड़ का हथियार निर्यात लक्ष्य

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा और आने वाले समय में रूस से और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा. इसी साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 डिफेंस सिस्टम ने अपनी ताकत दिखाई थी. इस डिफेंस सिस्टम के बदले भारत ने पाकिस्तानी क्षेत्र में सैकड़ों किमी भीतर जाकर उसके लड़ाकू विमानों को मार गिराया था. एस-400 की इस सफलता के बाद से इस डिफेंस सिस्टम की दुनिया में चर्चा होने लगी. भारत ने 2018 में रूस के साथ पांच एस-400 डिफेंस सिस्टम की डील की थी. इसमें से तीन सिस्टम भारत को मिल चुके हैं. इस पुरानी डील के दो सिस्टम की डिलिवरी में यूक्रेन युद्ध के कारण देरी हो रही है. इस बीच भारत ने अपने आसमान को और सुरक्षित बनाने के लिए और एस-400 सिस्टम खरीदने की बात कही है. 50 हजार करोड़ के निर्यात का लक्ष्य  राजनाथ सिंह ने रूस से और एस-400 डिफेंस सिस्टम खरीदने की बात कही. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत आज 25000 करोड़ रुपये का एर्म्स एक्सपोर्ट कर रहा है और उसका लक्ष्य इसको बढ़ाकर 50 हजार करोड़ रुपये करने का है. सिंह ने  कहा कि देसी न्यूक्लियर सबमरीन प्रोजेक्ट में थोड़ा समय लग रहा है लेकिन इसमें बहुत अधिक देरी नहीं हुई है. इसमें हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य आने वाले वक्त में हथियारों को लेकर किसी अन्य देश पर निर्भर रहने की नहीं है. हम आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं. उन्होंने एक अन्य सवाल पर कहा कि थिएटराइजेशन की दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है. उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन त्रिशूल एक रूटीन एक्सरसाइज है. भारत इस वक्त ऑपरेशन त्रिशूल चला रहा है. नए S-400 पर दिसंबर में डील हो सकती है भारत रूस से कुछ और S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीद सकता है। ऐसे पांच सिस्टम्स की डील पहले ही हुई थी, जिनमें से 3 भारत को मिल चुके हैं। चौथे स्क्वाड्रन की डिलीवरी रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रुकी हुई है। नई डील इनके अलावा होगी। न्यूज एजेंसी PTI के सोर्स के मुताबिक, दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के समय डील पर बातचीत हो सकती है। भारत ने अक्टूबर 2018 में रूस के साथ 5 अरब डॉलर का समझौता किया था। उस समय अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि इस सौदे को आगे बढ़ाने पर वह CAATSA कानून के तहत भारत पर पाबंदी लगा सकता है। भारत S-500 मिसाइल सिस्टम खरीदने पर भी विचार कर रहा है। S-400 और S-500 दोनों ही मॉडर्न मिसाइल सिस्टम हैं। इनका इस्तेमाल एयर डिफेंस और दुश्मन के हवाई हमलों से बचने के लिए किया जाता है। एयर चीफ मार्शल बोले थे- भारत जरूरत के हिसाब से सिस्टम खरीदेगा हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने और S-400 खरीदने के सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था- भारत के पास अभी तीन स्क्वाड्रन इसी ऑपरेशन के साथ S-400 का कॉम्बैट डेब्यू भी हो गया. हलांकि भारत ने रूस से कुल 5 यूनिट्स की डील की थी, लेकिन अब तक केवल तीन स्क्वाड्रन ही भारतीय वायुसेना को मिल पाई हैं. पहली स्क्वाड्रन – दिसंबर 2021 में मिली तो दूसरी स्क्वाड्रन – अप्रैल 2022 में और तीसरी फरवरी 2023 में मिली हैं. ये स्क्वाड्रन क्रमशः आदमपुर (पंजाब), पूर्वी सेक्टर और पश्चिमी सेक्टर में तैनात की गई हैं. सूत्रों के मुताबिक चौथी यूनिट 2026 में और अंतिम पांचवी यूनिट 2027 तक भारत को मिलने की संभावना है. अगर एस-400 की खासियतों की बात करें तो यह 600 किलोमीटर तक दुश्मन की आसमानी गतिविधियों पकड़ने की क्षमता रखता है . साथ ही यह सिस्टम एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है. रूस से और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदेगा भारत, ऑपरेशन सिंदूर में पाक को चटाई थी धूल भारत ने 2018 में इस सौदे पर 39,000 करोड़ रुपये खर्च किए थे. अब एस-400 की बची हुई दो स्क्वाड्रन की तैनाती के बाद भारत की वायु रक्षा क्षमता और भी अभेद्य हो जाएगी. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने दिखाई अपनी ताकत एस-400 एक पावरफुल वेपन सिस्टम है, जो दुश्मन के हमने से बचाव कर उसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए जबरदस्त हमला भी करता है. इस लिहाज से देश के लिये S-400 वेपन सिस्टम काफी जरूरी हो जाता है. भारत ने साल 2018 में चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए रूस से लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम S-400 खरीदने का बड़ा निर्णय लिया था. यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी तरह सही साबित हुआ, जब पाकिस्तान के हवाई हमलों को भारत की एस-400 बैटरी ने आसमान में ही नष्ट कर दिया था. भारत के पास अभी तीन स्क्वाड्रन इसी ऑपरेशन के साथ S-400 का कॉम्बैट डेब्यू भी हो गया. हलांकि भारत ने रूस से कुल 5 यूनिट्स की डील की थी, लेकिन अब तक केवल तीन स्क्वाड्रन ही भारतीय वायुसेना को मिल पाई हैं. पहली स्क्वाड्रन – दिसंबर 2021 में मिली तो दूसरी स्क्वाड्रन – अप्रैल 2022 में और तीसरी फरवरी 2023 में मिली हैं. ये स्क्वाड्रन क्रमशः आदमपुर (पंजाब), पूर्वी सेक्टर और पश्चिमी सेक्टर में तैनात की गई हैं. सूत्रों के मुताबिक चौथी यूनिट 2026 में और अंतिम पांचवी यूनिट 2027 तक भारत को मिलने की संभावना है. अगर एस-400 की खासियतों की बात करें तो यह 600 किलोमीटर तक दुश्मन की आसमानी गतिविधियों पकड़ने की क्षमता रखता है . साथ ही यह सिस्टम एक साथ 100 से अधिक लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है. 400 किलोमीटर की दूरी तक वार की क्षमता एस-400 की मदद से 400 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन के एयर एसैट्स को गिराने की क्षमता रखता है. एस-400 बॉम्बर, फाइटर जेट, ड्रोन, अर्ली वॉर्निंग एयरक्राफ्ट और बैलिस्टिक मिसाइल तक को ध्वस्त कर सकता है . इसमें मल्टी-रेंज मिसाइलें तैनात होती हैं. एस-400 की एक रेजिमेंट में 8 लॉन्च व्हीकल होते है . प्रत्येक में 4 मिसाइल ट्यूब यानी 32 मिसाइलों के साथ-साथ कमांड-एंड-कंट्रोल और एडवांस राडार भी होता है. 2018 में भारत ने 39 हजार करोड़ रुपए में किया था डील भारत ने 2018 में … Read 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