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ATC में तकनीकी खराबी के कारण दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन ठप, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

 नई दिल्ली        दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल (ATC) सिस्टम में तकनीकी खराबी आ गई. खामी आने की वजह से उड़ान संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इस तकनीकी खराबी का असर IGI दिल्ली एयरपोर्ट पर आने और जाने वाली दोनों तरह की उड़ानों पर पड़ा है. एजेंसी के मुताबिक, दिल्ली एयरपोर्ट के ने बताया कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम में टेक्निकल दिक्कत की वजह से कम से कम 100 फ्लाइट्स लेट हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक, ATC में एक सॉफ्टवेयर संबंधी समस्या के कारण IGI में उड़ानों के संचालन में देरी हो रही है. स्पाइसजेट समेत कई एयरलाइनों की उड़ानें प्रभावित हुई हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. दिल्ली एयरपोर्ट ने इन बाधाओं पर एक बयान जारी किया है. बयान में कहा गया है कि ATC प्रणाली में एक तकनीकी समस्या की वजह से IGIA में उड़ान संचालन में देरी हो रही है. एयरपोर्ट की टीम इस समस्या को जल्द से जल्द हल करने के लिए DIAL सहित सभी हितधारकों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रही है. यात्रियों को सलाह… एयरपोर्ट मैनेजमेंट ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए गहरा खेद जताया है. यात्रियों को सलाह दी गई है कि नवीनतम उड़ान अपडेट के लिए वे अपनी संबंधित एयरलाइनों के संपर्क में रहें. एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बयान जारी करते हुए कहा, "दिल्ली एयरपोर्ट पर ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) में टेक्निकल दिक्कत की वजह से फ्लाइट ऑपरेशन में देरी हो रही है. यह सिस्टम एयर ट्रैफिक कंट्रोल डेटा को सपोर्ट करता है. कंट्रोलर फ्लाइट प्लान को मैन्युअल रूप से प्रोसेस कर रहे हैं, जिससे कुछ देरी हो रही है. टेक्निकल टीमें जल्द से जल्द सिस्टम को ठीक करने पर काम कर रही हैं. हम सभी यात्रियों और स्टेकहोल्डर्स की समझ और सहयोग की सराहना करते हैं." स्पाइसजेट ने दी चेतावनी स्पाइसजेट एयरलाइन ने भी इस संबंध में जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि दिल्ली में ATC (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) की भीड़ की वजह से सभी आगमन, प्रस्थान और उनके परिणामस्वरूप होने वाली उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं. स्पाइसजेट ने भी यात्रियों से गुजारिश की है कि वे अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक करते रहें. 

पर्यावरण संरक्षण पर उत्कृष्ट प्रदर्शन, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी रही तृतीय स्थान पर

पर्यावरण संरक्षण पर उत्कृष्ट प्रदर्शन, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी रही तृतीय स्थान पर रायपुर में आयोजित प्रदर्शनी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को मिला तृतीय पुरस्कार, बढ़ा गौरव उप राष्ट्रपति  सी. पी. राधाकृष्णन के हाथों वन बल प्रमुख  व्ही. निवास राव ने ग्रहण किया पुरस्कार रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 1 से 5 नवम्बर तक नवा रायपुर अटल नगर, तूता स्थित पंडित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी व्यावसायिक परिसर मेला स्थल में राज्योत्सव का आयोजन किया गया। राज्योत्सव में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा “25 वर्षों की विकास यात्रा” थीम पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई, जिसे जनता द्वारा काफी सराहना मिली। इस पांच दिवसीय राज्योत्सव के दौरान ज्यूरी समिति द्वारा मूल्यांकन उपरांत, वन विभाग की इस प्रदर्शनी को तृतीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। राज्योत्सव के समापन समारोह में उप राष्ट्रपति  सी. पी. राधाकृष्णन के हाथों वन बल प्रमुख  व्ही. निवास राव ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। वन मंत्री  केदार कश्यप ने विभाग की इस उपलब्धि पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता टीमवर्क, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का परिणाम है। पुरस्कार मिलने से विभाग के अधिकारी व कर्मचारी उत्साहित हैं। राज्योत्सव में आने वाले आगंतुकों ने इस स्टॉल को रोचक, आकर्षक और ज्ञानवर्धक बताया। यह प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ की हरित सोच, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सशक्त प्रतीक बनी। उल्लेखनीय है कि प्रदर्शनी में 25 वर्षों की उपलब्धियों की जीवंत झलक वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन, एवं हरित विकास से जुड़े मॉडल और योजनाओं की जानकारी आकर्षक रूप में दिखायी गई। राज्य स्थापना वर्ष 2000 से वर्ष 2025 तक लागू की गई विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं के प्रभाव को सरल और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में अब तक 6.41 करोड़ पौधारोपण का उल्लेख,शहरों में विकसित मियावाकी सूक्ष्म वन,ग्रीन गुफा परियोजना, घोटुल संस्कृति प्रदर्शन,गज संकेत ऐप एवं गजरथ यात्रा द्वारा मानव-हाथी संघर्ष में कमी को प्रदर्शित किया गया। इसके अतिरिक्त प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के माध्यम से वन उत्पादों का मूल्यवर्धन,राज्य के प्रमुख प्राकृतिक स्थलों जैसे हांदावाड़ा जलप्रपात, कांगेर घाटी की कुटुमसर गुफा, बारनवापारा अभयारण्य की जानकारी भी दी गई। प्रदर्शनी में विशेष तौर पर यह प्रदर्शित किया गया कि राज्य में वन्य जीव संरक्षण प्रयासों के फलस्वरूप काला हिरण की संख्या 77 से बढ़कर 190 हुई। इसी तरह बाघों की संख्या वर्ष 2021 में 17 से बढ़कर अप्रैल 2025 में 35 पहुँची।

जापान से कोरिया तक बाजार में भूचाल, भारतीय बाजार भी लुढ़के — शुरुआती कारोबार में धड़ाम हुए ये स्टॉक्स

मुंबई      एशियाई शेयर बाजारों में मचे कोहराम के बीच भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन की शुरुआत बेहद खराब रही. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलने के साथ ही 600 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 150 अंक टूट गया. इस बीच कई दिग्गज कंपनियों के शेयर ओपनिंग के साथ ही बिखर गए, इनमें भारतीय एयरटेल से लेकर एचसीएल टेक तक शामिल हैं. बता दें कि जापान का निक्केई 1100 अंक से ज्यादा टूटकर क्रैश हो गया, तो हांगकांग का हैंगसेंग 300 अंक से ज्यादा फिसलकर कारोबार कर रहा था. सेंसेक्स-निफ्टी में तेज गिरावट  Share Market में कारोबार शुरू होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 83,311 की तुलना में फिसलकर 83,150 के लेवल पर ओपन हुआ. लेकिन ये गिरावट कुछ ही मिनटों और इतनी तेज हो गई, कि Sensex 620 अंक की गिरावट लेकर 82,690 पर कारोबार करता दिखाई दिया.  सेंसेक्स की तरह ही निफ्टी भी खुलते ही धराशायी हो गया. एनएसई का ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 25,509 के लेवल से गिरकर 25,433 पर ओपन हुआ और फिर अचानक बुरी तक टूटते हुए 175 अंक 25,334 पर ट्रेड करता नजर आया.  ये 10 शेयर खुलते ही धड़ाम शेयर बाजार में आई तेज गिरावट के बीच सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों की बात करें, तो BSE लार्जकैप कैटेगरी में शामिल 30 में से 27 स्टॉक रेड जोन में कारोबार कर रहे थे. टेलीकॉम दिग्गज कंपनी भारतीय एयरटेल के शेयर (Bharti Airtel Share) में ब्लॉक डील की खबर के बाद सबसे ज्यादा गिरावट आई और ये करीब 4% फिसलकर 2012 रुपये पर आ गया.  इसके अलावा HCL Tech (2%), TCS (1.50%) और Tech Mahindra Share (1.40%) की गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Hext Share (4%), Escorts Share (3%), Bharti Hexacomm Share (2.90%) और Kaynes Share (2.77%) फिसलकर ट्रेड कर रहे थे. स्मॉलकैप कंपनियों में Bliss GVS Share (16%), तो Amber Share (14%) तक फिसल गया. 1586 शेयर गिरावट के साथ ओपन  खराब ग्लोबल संकेतों के बीच गिरावट के साथ खुले शेयर बाजार के दोनों इंडेक्स में भगदड़ मची नजर आई. जब Stock Market में सुबह 9.15 बजे पर ट्रेडिंग शुरू हुई, तो उस समय बाजार में मौजूद 1586 कंपनियों के शेयरों ने अपने पिछले बंद के मुकाबले फिसलकर ट्रेड शुरू किया. तो वहीं 830 शेयरों ने बिखरे बाजार के बावजूद भी तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की, जबकि 131 शेयरों की फ्लैट ओपनिंग हुई.  एशियाई बाजारों में मचा कोहराम शेयर बाजार में खराब शुरुआत के संकेत विदेशी बाजारों से मिल रहे थे. दरअसल, ज्यादातर Asian Market लाल निशान पर कारोबार कर रहे थे. Gift Nifty 117 अंक की गिरावट में नजर आ रहा था, तो वहीं जापान का निक्केई तो 1134 अंक फिसलकर 49,749 पर आ गया. हांगकांग का Hanseng 310 अंक की गिरावट लेकर 26,176 पर, जबकि साउथ कोरिया का KOSPI Index 121 अंक गिरकर 3,906 पर कारोबार कर रहा था. 

वाराणसी से दौड़ेगी 4 नई Vande Bharat! 8 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी दिखाएंगे हरी झंडी

वाराणसी  भारत की आधुनिक रेल अवसंरचना के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 नवंबर को सुबह लगभग 8:15 बजे वाराणसी का दौरा करेंगे और चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को झंडी दिखाएंगे। नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें बनारस-खजुराहो, लखनऊ-सहारनपुर, फिरोजपुर-दिल्ली और एर्नाकुलम-बेंगलुरु मार्गों पर चलेंगी। प्रमुख गंतव्यों के बीच यात्रा के समय को उल्लेखनीय रूप से कम करने के जरिए, ये ट्रेनें क्षेत्रीय गतिशीलता में वृद्धि करेंगी, पर्यटन को बढ़ाएंगी और देश भर में आर्थिक कार्यकलापों को बढ़ावा देंगी। बनारस-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस इस रूट पर सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और वर्तमान में चल रही विशेष ट्रेनों की तुलना में लगभग 2 घंटे 40 मिनट की बचत करेगी। बनारस-खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस भारत के कुछ सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों, जैसे वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट और खजुराहो को जोड़ेगी। यह संपर्क न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि तीर्थयात्रियों और यात्रियों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल खजुराहो तक त्वरित, आधुनिक और आरामदायक यात्रा भी प्रदान करेगा। लखनऊ-सहारनपुर वंदे भारत एक्सप्रेस लगभग 7 घंटे 45 मिनट में यात्रा पूरी करेगी, जिससे यात्रा समय में लगभग 1 घंटे की बचत होगी। लखनऊ-सहारनपुर वंदे भारत एक्सप्रेस से लखनऊ, सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली, मुरादाबाद, बिजनौर और सहारनपुर के यात्रियों को बहुत लाभ होगा, साथ ही रुड़की होते हुए हरिद्वार तक उनकी पहुंच भी बेहतर होगी। मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुगम तथा त्वरित अंतर-शहर यात्रा सुनिश्चित करने के ज़रिए, यह सेवा कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय विकास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फिरोजपुर-दिल्ली वंदे भारत इस रूट पर सबसे तेज चलने वाली ट्रेन होगी, जो अपनी यात्रा मात्र 6 घंटे 40 मिनट में पूरी कर लेगी। फिरोजपुर-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस राष्ट्रीय राजधानी और पंजाब के प्रमुख शहरों, जैसे फिरोजपुर, बठिंडा और पटियाला के बीच संपर्क को सुदृढ़ करेगी। इस ट्रेन से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने, सीमावर्ती क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देने और राष्ट्रीय बाजारों के साथ बेहतर एकीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। दक्षिण भारत में, एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस यात्रा समय में 2 घंटे से अधिक की कमी ला देगी, जिससे यह यात्रा 8 घंटे 40 मिनट में पूरी हो जाएगी। एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस प्रमुख आईटी और वाणिज्यिक केंद्रों को जोड़ेगी, जिससे प्रोफेशनलों, छात्रों और पर्यटकों को तेज और अधिक आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा। यह रूट केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच आर्थिक कार्यकलापों और पर्यटन को बढ़ावा देगा, जिससे क्षेत्रीय विकास और सहयोग में सहायता मिलेगी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि यह विश्वस्तरीय रेल सेवाओं के माध्यम से नागरिकों को सुगम, त्वरित और अधिक आरामदायक यात्रा प्रदान करने के प्रधानमंत्री के विजन को साकार करने में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

चैंपियन शेफाली वर्मा से मुख्यमंत्री की खास बातचीत, किया राज्य अतिथि के रूप में आमंत्रित

चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महिला विश्व कप 2025 के फाइनल में साउथ अफ्रीका के खिलाफ शानदार पारी खेलने वाली सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा से फोन पर बात की। सीएम ने टीम को खिताबी जीत की बधाई देने के साथ सलामी बल्लेबाज को चंडीगढ़ आकर मुलाकात करने का निमंत्रण भी दिया है। मुख्यमंत्री सैनी के आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर एक क्लिप साझा की गई है, जिसमें वह शेफाली वर्मा से फोन पर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि शेफाली वर्मा के शानदार प्रदर्शन पर पूरे प्रदेश को गर्व है। मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट पर इस बातचीत की एक छोटी सी क्लिप शेयर की गई है, जिसके कैप्शन में लिखा है, “महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक प्रदर्शन करके भारत को विश्व विजेता बनाने वाली टीम की सदस्य, हरियाणा की लाडली बिटिया शेफाली वर्मा से वार्ता करके पूरी टीम को बधाई दी और चंडीगढ़ आने का निमंत्रण दिया।” शेफाली वर्मा को चोटिल प्रतिका रावल के स्थान पर महिला विश्व कप 2025 में मौका मिला था। शेफाली को सीधे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में मौका दिया गया, जिसमें उन्होंने महज 10 रन बनाए। इसके बावजूद उन पर कप्तान ने अपना भरोसा बनाए रखा। शेफाली वर्मा साउथ अफ्रीका के खिलाफ खिताबी मुकाबले में बतौर सलामी बल्लेबाज उतरीं। उन्होंने स्मृति मंधाना के साथ पहले विकेट के लिए 104 रन की साझेदारी की। फाइनल मुकाबले में उनके निजी प्रदर्शन को देखें, तो शेफाली ने 78 गेंदों में 2 छक्कों और 7 चौकों के साथ 87 रन बनाए। इसके अलावा, एक गेंदबाज के तौर पर 7 ओवर फेंके, जिसमें 36 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। भारत ने खिताबी मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट खोकर 298 रन बनाए। इसके जवाब में साउथ अफ्रीकी टीम 45.3 ओवरों में महज 246 रन पर सिमट गई। ऐतिहासिक मुकाबले में शानदार प्रदर्शन के चलते शेफाली वर्मा को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।  

नई कृषि क्रांति की तैयारी – ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से होगी स्मार्ट खेती

नई दिल्ली.  भारत में कृषि अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि तकनीक का संगम बन चुकी है. एग्री-टेक यानी कृषि प्रौद्योगिकी ने किसानों की मेहनत को आधुनिक साधनों से जोड़कर खेती को लाभकारी बना दिया है. ड्रोन से लेकर सेंसर्स, डेटा एनालिटिक्स और मोबाइल ऐप्स तक- हर स्तर पर तकनीक का असर दिखने लगा है. अब किसान मौसम की सटीक जानकारी, मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की पैदावार का अनुमान डिजिटल साधनों से कर पा रहे हैं. इससे न सिर्फ उत्पादकता बढ़ रही है, बल्कि लागत में भी बड़ी कमी आई है. केंद्र सरकार की योजना परवान चढ़ी तो देश में कृषि अब हल-बैल से नहीं, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ), रोबोट और बीजों की जीन एडिटिंग से चलेगी। पानी की बर्बादी शून्य होगी और भरपूर पैदावार से अन्नदाता किसान की आय मौजूदा स्तर से दोगुनी हो सकती है। नीति आयोग ने अगले पांच साल के लिए देश में खेती का रोडमैप जारी करते हुए यह सपना दिखाया है जो सच भी हो सकता है। नीति आयोग ने रोडमैप के रूप में विजन डॉक्यूमेंट ‘रीइमैजिनिंग एग्रीकल्चर : रोडमैप फॉर फ्रंटियर टेक्नोलॉजी लेड ट्रांसफॉर्मेशन’ तैयार किया है। इस डॉक्यूमेंट में कृषि में 100 प्रतिशत आत्मनिर्भता लाने के लिए ऐसी तकनीकों को चुना है, जिसके जरिए देश की कृषि में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। ये तकनीकें क्लाइमेट चेंज, पानी की कमी, मिट्टी की थकान और बाजार की अनिश्चितता को खत्म करने में मददगार बनेगी। रोडमैप पर प्रभावी अमल से अगले 5 साल में देश मेें कृषि लागत 40 प्रतिशत घटने का अनुमान जताया गया है। कृषि लागत को ही किसानों की खुशहाली और खेती को लाभकारी बनाने में सबसे बड़ी बाधा माना जाता है। रोडमैप से कृषि उत्पादन में 60 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी। स्मार्ट फार्मिंग: खेतों से जुड़ी स्मार्ट सोच ‘स्मार्ट फार्मिंग’ अब भारतीय गांवों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह तकनीक खेती के हर चरण में वैज्ञानिक नजरिया अपनाने पर आधारित है. उदाहरण के लिए, ड्रोन के जरिए फसलों पर छिड़काव से समय और पानी दोनों की बचत होती है. वहीं, सेंसर से मिट्टी की नमी और पोषक तत्वों की निगरानी कर किसान तय कर सकते हैं कि किस समय कितनी सिंचाई या खाद की जरूरत है. कई स्टार्टअप्स किसानों को मोबाइल ऐप्स के माध्यम से बाजार भाव, बीज चयन, और फसल बीमा की जानकारी भी दे रहे हैं. इससे किसान पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और जागरूक हो रहे हैं. डिजिटल एग्रीकल्चर से नए अवसर सरकार और निजी कंपनियां मिलकर ‘डिजिटल एग्रीकल्चर’ को तेजी से बढ़ावा दे रही हैं. प्रधानमंत्री किसान ड्रोन योजना, डिजिटल किसान पोर्टल, और ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) जैसी पहलों ने किसानों के लिए तकनीक को सुलभ बना दिया है. आज किसान अपने स्मार्टफोन से सीधे मंडियों से जुड़ सकते हैं और बिचौलियों से बचकर बेहतर दाम पा सकते हैं. इसके अलावा, सैटेलाइट इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकें फसलों की स्थिति पर नज़र रखती हैं और समय रहते चेतावनी भी देती हैं. इससे फसल नुकसान की संभावना काफी घट गई है. आधुनिक तकनीक से आत्मनिर्भर किसान एग्री-टेक ने भारतीय कृषि को नई दिशा दी है. जहां पहले खेती को जोखिम भरा माना जाता था, वहीं अब यह इनोवेशन और उद्यमिता का क्षेत्र बन चुका है. युवा किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ जैविक, हाइड्रोपोनिक और प्रिसिशन फार्मिंग जैसी तकनीकों को अपना रहे हैं. इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है. भारत धीरे-धीरे ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर इकोनॉमी’ की ओर बढ़ रहा है, जहां तकनीक और परंपरा मिलकर एक स्थायी कृषि भविष्य की नींव रख रहे हैं. संक्षेप में भारत में एग्री-टेक सिर्फ खेती का आधुनिकीकरण नहीं, बल्कि किसानों की जिंदगी में नई उम्मीदों की बुआई है. तकनीक ने साबित कर दिया है कि अगर सही जानकारी और संसाधन मिलें, तो खेत भी डिजिटल इंडिया की ताकत बन सकते हैं. फ्रंटियर टेक्नोलॉजी : खेत से लैब तक ड्रोन फार्मिंग : एक घंटे में 50 एकड़ पर कीटनाशक छिड़काव, 80% दवा बचत। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग (एआइ/एमएल): मौसम, कीट, बीमारी का 100% सटीक पूर्वानुमान। इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) : मिट्टी की नमी, पीएच, पोषक तत्व 24 घंटे सातों दिवस मोबाइल पर। सैटेलाइट इमेजरी : बादल पार कर फसल की लाइव तस्वीर, सूखा-बाढ़ अलर्ट। ब्लॉकचेन : बीज से बाजार तक पारदर्शी चेन, नकली खाद-बीज खत्म। रोबोटिक्स : बुवाई, निराई, कटाई सब ऑटोमैटिक, मजदूरों की कमी दूर। जीन एडिटिंग (सीआरआइएसपीआर ) : 2 साल में सूखा, कीट, नमक रोधी नई किस्में। प्रिसिजन फार्मिंग : हर पौधे को अलग खाद-पानी, 30% लागत में होगी बचत। वर्टिकल फार्मिंग : शहरों में की छतों पर 10 मंजिला खेत, 1 एकड़ यानी 10 एकड़ यील्ड पर फॉर्मिंग। हाइड्रोपोनिक्स : बिना मिट्टी, 90 प्रतिशत कम पानी, साल भर फसल। एरोपोनिक्स : हवा में उगाएं सब्जी, पानी की बूंद भी न बर्बाद। बिग डेटा एनालिटिक्स : हर गांव, हर फसल का अलग ‘डिजिटल फॉर्मूला’। साल दर साल ऐसे कदम वर्ष –लक्ष्य — यह होगा 2026- पायलट प्रोजेक्ट – 10 राज्यों में ड्रोन एआइ हब, 1 लाख एकड़ कवर 2027- डिजिटल पहुंच – 50 प्रतिशत किसानों को मुफ्त ऐप, सैटेलाइट डेटा, आइओटी किट मिलेंगे 2028 –ग्लोबल मार्केट- ब्लॉक चेन से सीधे निर्यात, 10 लाख टन ऑर्गेनिक 2029—रोबोट क्रांति-— 500 रुपए /दिन रोबोट किराया, 50,000 यूनिट डिप्लॉय 2030—स्मार्ट विलेज-–हर गांव में ‘डिजिटल खेत’, आय दोगुनी की गारंटी किसानो को ऐसे लाभ आय: 1 एकड़ में गेहूं से मौजूदा 25,000 रुपए से बढ़कर 2030 में 70,000 रुपए लागत कम: 40% कम होगी (खाद-पानी-दवा) उत्पादन बढ़ेगा : 60% बढ़ेगा पानी बचत : 90% (हाइड्रो/एरोपोनिक्स) बाजार उपलब्धता: 100% (ब्लॉकचेन) फंडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर : कृषि-टेक फंड : 50,000 करोड़ रुपए ड्रोन दीदी : 1 लाख महिलाओं को ट्रेनिंग। एआइ लैब: हर जिले में 1 एआइ लैब बनेगी। फ्री स्मार्टफोन: 10 करोड़ किसानों को रोबोट बैंक: 1 लाख यूनिट रेंट पर खुलेगा। सब साथ आएंगे होंगे सफल यह यात्रा अकेले सरकार की नहीं है। यह तभी सफल होगी जब किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी, निवेशक और नीति-निर्माता एक साथ आएं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि खेतों तक पहुंचे। जहां यह वास्तव में बदलाव ला सकें। यह रोडमैप ऐसे भविष्य का एक आह्वान है, जहां भारत … Read more

150 साल पूरे होने पर वंदे मातरम का भव्य आयोजन, पीएम की मौजूदगी में उठा इस्लाम से जुड़ा मुद्दा

 नई दिल्ली भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 साल पूरे हो रहे हैं। इस मौके पर केंद्र सरकार ने देश भर के 150 स्थानों पर आयोजन का फैसला लिया है। इसके तहत सामूहिक रूप से वंदे मातरम गाया जाएगा। यही नहीं सभी आयोजनों में मुख्य अतिथि के तौर पर कोई वरिष्ठ नेता, मंत्री या अधिकारी भी शामिल होगा। खुद पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में ऐसे ही एक कार्यक्रम में भाग लेंगे। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे। इस बीच जम्मू-कश्मीर में इन आयोजनों को लेकर इस्लाम वाला सवाल उठ गया है। मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा ने केंद्र शासित प्रदेश की सरकार पर सवाल उठाए हैं। सरकार ने सभी स्कूलों को यह आदेश दिए जाने पर आपत्ति जताई है कि वे वंदे मातरम पर संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम करें। इस्लामिक संस्था का कहना है कि वंदे मातरम के आयोजन में शामिल होने के लिए कहना गैर-इस्लामी है। यह मुस्लिम बहुल इलाके पर आरएसएस की हिंदुत्व वाली विचारधारा को थोपने का प्रयास है। बता दें कि 7 नवंबर को होने वाले आयोजनों में स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों, अधिकारियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पुलिसकर्मियों और डॉक्टरों सहित नागरिकों की भागीदारी रहेगी। इन आयोजनों में वंदे मातरम का सामूहिक गान होगा। अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली में होने वाले उद्घाटन समारोह में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम, वंदे मातरम के 150 वर्षों के इतिहास पर एक प्रदर्शनी, एक लघु वृत्तचित्र फिल्म का प्रदर्शन और एक स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी किया जाएगा। भाजपा भी इस उपलब्धि को एक उत्सव के रूप में मनाने की योजना बना रही है। नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में भाजपा के महासचिव तरुण चुघ ने कहा, 'इस अवसर को मनाने के लिए सात नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक देश भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ’ इन प्रमुख स्थानों पर भी होगा वंदे मातरम का गायन उन्होंने बताया कि सात नवंबर को 150 महत्वपूर्ण स्थानों पर वंदे मातरम गाया जाएगा, जिसके बाद स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की शपथ ली जाएगी। इस दौरान कविता लेखन, पाठन और चित्रकला जैसे कई अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। जिन स्थानों पर सात नवंबर को वंदे मातरम का गायन आयोजित किया जाएगा उनमें कारगिल युद्ध स्मारक, अंडमान और निकोबार सेलुलर जेल, ओडिशा का स्वराज आश्रम, आगरा में शहीद स्मारक पार्क और वाराणसी में नमो घाट शामिल हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि वंदे मातरम अंग्रेजों से भारत की मुक्ति के लिए एक प्रमुख मंत्र के रूप में उभरा। क्या है इस्लाम वाली दलील और जम्मू-कश्मीर से सरकार से क्या अपील संस्कृति मंत्रालय के अनुसार ऐसा माना जाता है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत की रचना सात नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के अवसर पर की थी। मातृभूमि की वंदना में गाए गए इस गीत को 1950 में राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था। वहीं मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा ने एक लेटर लिखकर जम्मू-कश्मीर की सरकार और एलजी से मांग की है कि वंदे मातरम के आयोजन में भाग लेने की अनिवार्यता खत्म की जाए। ऐसा करना गैर-इस्लामिक है और हिंदुत्व की विचारधारा को थोपने वाला है।

वंदे-मातरम के 150 साल: मध्यप्रदेश में भव्य जन-उत्सव, राज्य मंत्री लोधी ने किया ऐलान

राष्ट्रगीत वंदे-मातरम की 150वीं वर्षगांठ मध्यप्रदेश में एक भव्य जन-उत्सव के रूप में मनाई जाएगी : राज्य मंत्री  लोधी पूरे एक वर्ष तक, पंचायत से लेकर पर्यटन स्थलों तक गूंजेगा वंदे मातरम का अमर स्वर राज्य स्तरीय मुख्य समारोह 7 नवंबर को शौर्य स्मारक में होगा सभी मुख्यालयों पर होगा एक साथ गायन "स्वदेशी अपनाएँ" का लिया जाएगा सामूहिक संकल्प भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर को मध्यप्रदेश में एक अविस्मरणीय 'जन-उत्सव' के रूप में मनाया जाएगा। संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह गौरवशाली आयोजन 7 नवंबर 2025 से प्रारंभ होकर 7 नवंबर 2026 तक, पूरे एक वर्ष तक चलेगा। यह समारोह, भारत सरकार के निर्णय के अनुरूप, राष्ट्रगीत के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी ओजस्वी भूमिका और हमारी सांस्कृतिक विरासत में इसके अमूल्य महत्व को प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जा रहा है। राज्यमंत्री  लोधी ने इस आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा, "'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं, बल्कि यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का वह जीवंत स्फुरण है जिसने करोड़ों भारतवासियों के हृदय में स्वाधीनता की अलख जगाई। यह हमारे अमर बलिदानियों का जयघोष था। इस ऐतिहासिक वर्षगांठ को मनाने का निर्णय हमारी नई पीढ़ी को उस त्याग और राष्ट्र-प्रेम की भावना से सीधे जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। मध्य प्रदेश इस राष्ट्रीय आयोजन को एक जन-अभियान का स्वरूप देगा। राज्यमंत्री  लोधी ने बताया कि वर्ष भर चलने वाले इन समारोहों को चार मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है, जिससे राष्ट्र-प्रेम की भावना सतत प्रवहमान रहे।          प्रथम चरण: 7 नवंबर से 14 नवंबर 2025 तक।          द्वितीय चरण: 19 जनवरी से 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस सप्ताह)।          तृतीय चरण: 7 अगस्त से 15 अगस्त 2026 ('हर घर तिरंगा अभियान' के साथ)।          चतुर्थ चरण: 1 नवंबर से 7 नवंबर 2026 (समापन सप्ताह)। राज्यमंत्री  लोधी ने बताया कि राज्य स्तरीय समारोह 7 नवंबर 2025 को प्रातः 09:30 बजे भोपाल स्थित शौर्य स्मारक में संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित किया जाएगा। इसी समय, प्रातः 9:30 बजे, प्रदेश के सभी जिला, तहसील एवं विकासखण्ड मुख्यालयों पर "वंदे मातरम" का संपूर्ण गायन एक साथ, एक स्वर में किया जाएगा। प्रातः 10 बजे से नई दिल्ली में आयोजित प्रधानमंत्री के मुख्य कार्यक्रम के सीधे प्रसारण को देखने-सुनने की व्यवस्था प्रदेश के सभी आयोजन स्थलों पर सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय, अर्द्ध-शासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में 7 नवंबर को वंदे मातरम का भव्य गायन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाएगा। इस राष्ट्रगीत गायन को और अधिक भव्य स्वरूप प्रदान करने के लिए पुलिस बैंड, स्कूल-कॉलेजों के बैंड एवं अन्य स्थानीय बैंड दलों की सहभागिता भी होगी। राज्यमंत्री  लोधी ने बताया कि यह आयोजन केवल शासकीय न होकर, 'जन-जन का आयोजन' बनेगा। इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी, पुलिसकर्मी, चिकित्सक, शिक्षक और सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से शामिल होंगे। राज्य मंत्री  लोधी ने कार्यक्रमों की श्रंखला के संबंध में बताया कि 8 नवंबर 2025: प्रातः 10 बजे पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश की सभी जिला, जनपद एवं ग्राम पंचायतों में 'वंदे मातरम' का सामूहिक गायन आयोजित किया जाएगा, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। 10 नवंबर 2025 प्रातः 10 बजे नगरीय विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से प्रदेश के सभी नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद) में वंदे मातरम का गायन किया जाएगा। संस्कृति मंत्री ने निर्देश दिए कि पर्यटन विभाग के समन्वय से, प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टरों द्वारा चयनित प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भी 'वंदे मातरम' राष्ट्रगीत का गायन सुनिश्चित किया जाए, जिससे पर्यटकों में भी राष्ट्रीय गौरव का संचार हो। "सभी स्वदेशी अपनाएँ" का लिया जाएगा सामूहिक संकल्प राज्यमंत्री  लोधी ने बताया कि इन सभी आयोजनों का एक महत्वपूर्ण और सार्थक भाग "सभी स्वदेशी अपनाएँ" का सामूहिक संकल्प। यह संकल्प राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रतीकात्मक और ठोस कदम होगा।   

उमरिया में 3 दिवसीय मास्टर ट्रेनर ट्रेनिंग, साल 2026 में होगी बाघों की गणना

उमरिया  बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में साल 2026 में होने वाली बाघ की गणना को लेकर अधिकारी कर्मचारियों को लगातार ट्रेंड किया जा रहा है. इसके लिए 3 नवंबर से लेकर 5 नवंबर तक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में तीन दिवसी मास्टर ट्रेनर की ट्रेनिंग कराई गई. इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. 50 से अधिक कर्मचारी और अधिकारियों ने लिया हिस्सा 3 नवंबर से 5 नवंबर तक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला ईको केंद्र में विशेष ट्रेनिंग आयोजित की गई, जिसमें वन मंडल स्तरीय मास्टर ट्रेनर और समन्वय अधिकारियों की ये तीन दिवसीय ट्रेनिंग आयोजित की गई थी, जहां 7 मंडलों के 50 से अधिक अधिकारी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया. इसमें कर्मचारी और अधिकारियों को अलग-अलग लेवल की ट्रेनिंग कराई गई. इस दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी और एक्सपर्ट्स भी मौजूद रहे. फील्ड सेशन में डाटा कलेक्शन सहित कई बिंदुओं पर चर्चा 3 दिवसीय ट्रेनिंग के आखिरी दिन भोपाल से आए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एल कृष्णमूर्ति भी शामिल हुए, जहां उन्होंने फील्ड सत्र में हिस्सा लिया. इस दौरान एल कृष्णमूर्ति के साथ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय और उपसंचालक पीके वर्मा भी सम्मिलित थे. फील्ड सेशन में फील्ड में डाटा कलेक्शन में आने वाली कठिनाइयों और छोटी-छोटी गलतियां के निराकरण पर ध्यान दिया गया. कैमरा ट्रैप में इन बातों पर फोकस फील्ड सत्र के बाद WII देहरादून से आए आशीष प्रसाद और मास्टर ट्रेनर कमलेश नंदा ने क्लासरूम सेशन भी लिया और फील्ड में आने वाली समस्याओं का निराकरण किया. बाघों की गणना में कैमरा ट्रैप का बहुत बड़ा रोल होता है, फील्ड में कैमरा ट्रैप लगाने में अक्सर गलतियां हो जाती हैं, ऐसे में कौन सी छोटी-छोटी गलतियां होती हैं, जिन पर फोकस करने की जरूरत है, फील्ड में होने वाली इन छोटी छोटी गलतियों पर भी ध्यान दिया गया. इन कारणों से बाघ गणना में सही संख्या नहीं मिलती कई बार कैमरा ट्रैप को गलत दिशा में, दूरी एवं ऊंचाई पर लगाने के कारण फोटो ब्लर हो जाती है और टाइगर नहीं मिल पाता है. जिसके चलते बाघ गणना में सही संख्या नहीं मिल पाती. इसके अलावा कैमरा ट्रैप आईडी और स्थान भी मिसमैच होने के चलते डाटा कलेक्शन में दिक्कत होती है. ऐसी छोटी-छोटी गलतियों पर भी फोकस किया गया, उन गलतियों को सुधारने के तरीके भी बताए गए. बांधवगढ़ बाघों का गढ़ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि "ये तीन दिवसीय ट्रेनिंग थी, जिसमें 7 वन मंडल के 50 से ज्यादा अधिकारी कर्मचारियों ने हिस्सा लिया और मास्टर ट्रेनर बने. यह तैयारी 2026 में होने वाली बाघ गणना के लिए हो रही है. बाघ गणना 2026 की तैयारी की समीक्षा भी की गई. साथ ही इसे सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश भी सभी अधीनस्थों को दिए.     बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों का गढ़ माना जाता है, इसीलिए पूरे मध्य प्रदेश में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में मिलने वाले बाघों की संख्या पर सबकी नजर रहेगी. टाइगर रिजर्व प्रबंधन भी बाघों की सटीक और सही गणना के लिए लगातार ट्रेनिंग और तैयारी कर रहा है. इससे पहले साल 2022 में बाघों की गणना की गई थी, जिसमें 165 बाघ मिले थे, इस बार देखना दिलचस्प होगा की बाघों की संख्या कहां तक पहुंचती है.

सिंहस्थ से पहले तैयार होगा भोपाल-इंदौर हाईवे का 31 करोड़ रुपये का फ्लाईओवर

 भोपाल  भोपाल शहर के सबसे प्रमुख सड़क जंक्शन को सुरक्षित करने की योजना ने महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा कर लिया है। भोपाल-इंदौर राजमार्ग पर यह छह लेन का नया फ्लाईओवर है, जिसका निर्माण 31 करोड़ रुपयों की लागत से होगा। इसके बन जाने से भोपाल से इंदौर जाने वालों को खजुरी स्थित 11 मील जंक्शन की भीड़ का सामना नहीं करना पड़ेगा। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और क्षेत्रीय भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने बुधवार को इस परियोजना के निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रदेश सरकार में सबका साथ-सबका विकास के तहत पूरे भोपाल में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी के तहत यह फ्लाईओवर का निर्माण कार्य किया जाएगा, जो कि 2028 में होने वाले उज्जैन सिंहस्थ के पहले तैयार हो जाएगा। ऐसे में इंदौर-भोपाल मुख्य मार्ग पर बढ़ते यातायात को विभाजित करने में मदद मिलेगी और इस सड़क पर हो रहे हादसे भी नियंत्रित होंगे। 18 महीने में निर्माण का लक्ष्य अधिकारियों ने बताया कि छह लेन के इस फ्लाईओवर की लंबाई 850 मीटर होगी। इसके निर्माण की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम को मिली है। यह एजेंसी 18 महीने में निर्माण पूरा करने की लक्ष्य लेकर चल रही है। फ्लाईओवर के साथ उसपर पथप्रकाश व्यवस्था और सर्विस लेन भी बनाई जाएगी ताकि आवागमन सुगम बना रहे। भोपाल बाइपास को बाइपास करेगा खजूरी स्थित 11 मील तिराहे पर भोपाल बायपास व भोपाल इंदौर राजमार्ग आपस में जुड़ते हैं। इस तिराहे से औसतन दो लाख वाहन रोज गुजरते हैं। इसकी वजह से इस चौराहे पर अक्सर जाम लग जाता है। नया फ्लाईओवर जंक्शन से करीब 400 मीटर पहले शुरू होगा। जंक्शन तिराहे के ऊपर से गुजरकर यह खजुरी के पास उतरेगा। इसकी वजह से भोपाल से इंदौर या इंदौर से भोपाल की ओर आ रहे वाहनों को जाम से मुक्ति मिल जाएगी। बाइपास से आने वाले वाहन सर्विस रोड से होकर मुख्य सड़क पर पहुंचेंगे।     850 मीटर लंबा होगा फ्लाईओवर     6 लेन का होगा     31 करोड़ रुपयों में बनेगा     18 महीने में पूरा होगा     3 लाख लोग रोजाना गुजरेंगे