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14,631 वोटों से अर्पित बने जिला अध्यक्ष, युवा कांग्रेस में कमलनाथ गुट की वापसी और MP की सियासत पर असर

भोपाल  मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस चुनाव के परिणाम आ चुके हैं. जिसमें पूर्व सीएम कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के समर्थकों का दबदबा दिखा है. एमपी युवा कांग्रेस की कमान अब यश घनघोरिया संभालेंगे, वह मितेंद्र दर्शन सिंह की जगह लेंगे. यश घनघोरिया कांग्रेस के सीनियर विधायक और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के बेटे हैं,  जिन्होंने एमपी युवा कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव जीता है. वहीं जिलाध्यक्षों में सबसे बड़ी जीत उज्जैन जिले में अर्पित यादव ने हासिल की है. वह उज्जैन में युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बने हैं.  मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस (यूकां) के चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का प्रभाव साफ दिखा. उनके समर्थक और पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया के बेटे यश घनघोरिया नए प्रदेश अध्यक्ष चुने गए. यश ने 3.13 लाख वोट हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के समर्थक अभिषेक परमार 2.38 लाख वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. इस चुनाव की घोषणा मई में हुई थी, जिसके बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस दो गुटों में बंटी नजर आई. यूथ कांग्रेस के सभी प्रमुख पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इनमें प्रदेश महासचिव, जिला अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं. भोपाल शहर से अंकित दुबे यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बने, जबकि भोपाल ग्रामीण का अध्यक्ष पद राहुल मंडलोई को मिला. यश घनघोरिया के नाम की औपचारिक घोषणा दिल्ली से होगी. चुनाव में यश घनघोरिया के लिए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे, विधायक प्रवीण पाठक और सचिन यादव ने जमकर मेहनत की. वहीं, अभिषेक परमार के समर्थन में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह अप्रत्यक्ष रूप से सक्रिय रहे. खुले तौर पर उनके लिए पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, गोविंद सिंह, पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह, कुणाल चौधरी, विक्रांत भूरिया और विपिन वानखेड़े ने वोट मांगे. पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया और जयवर्धन सिंह भी लगातार सक्रिय रहे. जिलाध्यक्षों के चयन में भी राजनीतिक समीकरण साफ दिखे. जीतू पटवारी के समर्थकों ने करीब 40 जिलों में अपनी पसंद के अध्यक्ष बनवाए, जबकि कमलनाथ का प्रभाव लगभग 15 जिलों तक सीमित रहा. महाकौशल क्षेत्र में कमलनाथ के समर्थक पूरी तरह सक्रिय रहे. फिर भी, यूथ कांग्रेस में कमलनाथ गुट का दबदबा साफ नजर आया. चुनाव परिणामों में सबसे बड़ी जीत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह जिले उज्जैन में देखने को मिली. वहां अर्पित यादव ने 14,631 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल कर प्रदेश में सबसे मजबूत जिला अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड बनाया. इस तरह, मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के इस चुनाव में कमलनाथ और उनके समर्थकों ने अपनी मजबूत स्थिति साबित की. जानें, जिलों में किसे कितने वोट मिले… आगर मालवा: जिला अध्यक्ष बने पृथ्वीराज चौहान को सबसे ज्यादा 5050 वोट मिले। दूसरे नंबर पर रहे लक्ष्मण सिंह को 2046 वोट मिले हैं। अलीराजपुर: जिला अध्यक्ष बने पुष्पराज सिंह रावत को 2743 वोट मिले। जबकि, 667 वोट पाकर दीपक भूरिया दूसरे नंबर पर रहे। अनूपपुर: 4406 वोट पाकर मानवेंद्र मिश्रा जिला अध्यक्ष बने। वहीं 1554 वोट पाकर दुर्गेश मिश्रा दूसरे नंबर पर रहे। अशोक नगर: 2988 वोट पाकर रजनीश सिंघई पहले नंबर पर रहे। 2848 वोट पाकर सचिन त्यागी दूसरे नंबर पर रहे। बड़वानी: 3344 वोट पाकर आदित्य गोयल जिला अध्यक्ष बने। मोतीराम सोलंकी 629 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। बालाघाट: शिवम विश्वकर्मा 1258 वोट पाकर जिला अध्यक्ष बने। दूसरे नंबर पर रहे अमरकांत बिसेन को 1080 वोट मिले। बैतूल: संजय यादव 10668 वोट पाकर जिलाध्यक्ष बने। 9986 वोट पाकर प्रदीप कोकटे दूसरे नंबर पर रहे। भिंड: मनीष कुमार शर्मा 3393 वोट पाकर जिला अध्यक्ष बने। दूसरे नंबर पर राजू सिंह लोधी को मात्र 173 वोट मिले। भोपाल ग्रामीण: राहुल सिंह मंडलोई 4785 वोट पाकर जिला अध्यक्ष बने। दूसरे नंबर पर रहे अंकुर राणा को 2146 वोट मिले। भोपाल शहर: 8172 वोट पाकर अंकित दुबे जिला अध्यक्ष चुने गए। 6374 वोट पाकर अमित खत्री दूसरे नंबर पर रहे। बुरहानपुर: 3786 वोट पाकर अर्जुन जांगले जिला अध्यक्ष चुने गए। 2505 वोट पाकर राजेंद्र मसाने दूसरे नंबर पर रहे। छतरपुर: जिला अध्यक्ष बने मानवेंद्र सिंह परमार को 7452 वोट मिले। गजेंद्र परमार 597 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। छिंदवाड़ा: मात्र 896 वोट पाकर हरिओम रघुवंशी निर्विरोध जिला अध्यक्ष बने। दमोह: 2454 वोट पाकर द्रगपाल लोधी जिला अध्यक्ष बने। दूसरे नंबर पर रहे अफजल अजीज को 1754 वोट मिले। दतिया: जिला अध्यक्ष बने अरविंद सिंह गुर्जर को 6188 वोट मिले। 4176 वोट पाकर नोमी सिंह कमरिया दूसरे नंबर पर रहे। देवास: जिले में किशोर सिंह चौहान 11209 वोट पाकर जिला अध्यक्ष बने। नवीन बाली 7041 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। धार : जिले में 6840 वोट पाकर रोहित कामदार जिला अध्यक्ष चुने गए। सोनू सेमलिया 3382 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। डिंडोरी: अमन पाठक 821 वोट पाकर जिला अध्यक्ष चुने गए। दूसरे नंबर पर रहे राजेश मरावी को 517 वोट मिले। गुना: युवा कांग्रेस अध्यक्ष बने पंचम सिंह भील को 3896 वोट मिले। दूसरे नंबर पर रहे दीपक बिलरवां को 1775 वोट मिले। ग्वालियर ग्रामीण: पुष्पेंद्र सिंह 10408 वोट पाकर जिला अध्यक्ष बने। दूसरे नंबर पर रहे योगेंद्र परमार को 3322 वोट मिले। ग्वालियर शहर: 9616 वोट से विजय यादव जिला अध्यक्ष बने। दूसरे नंबर पर रहित सुमित सिंह को 6142 वोट मिले। हरदा: जिले में निर्विरोध जिला अध्यक्ष बने योगेश चौहान को 213 वोट मिले। इंदौर ग्रामीण: जिला अध्यक्ष बने गजेंद्र सिंह राठौड़ को 10156 वोट मिले। जबकि दूसरे नंबर पर रहे गौरव सिंह सोलंकी को 8218 वोट मिले। इंदौर शहर: अमित पटेल को 6286 वोट पाकर जिला अध्यक्ष चुने गए। दूसरे नंबर पर रहीं हिबा खान को 1541 वोट मिले। जबलपुर ग्रामीण: जिला अध्यक्ष बने शुभम श्रीवास्तव को 8267 वोट मिले। जबकि, 961 वोट पाकर सौरभ सिंह गौतम दूसरे नंबर पर रहे। जबलपुर शहर:10478 वोट पाकर सत्येंद्र कुकी जिला अध्यक्ष चुने गए। अमित सोनकर 8290 वोट पाकर दूसरे नंबर पर रहे। झाबुआ: नटवर डोडियार 3370 वोट पाकर जिला अध्यक्ष बने। दूसरे नंबर पर रहे प्रकाश परमार को 1709 वोट मिले। कटनी: जिला अध्यक्ष बने मोहम्मद इसराइल को 2952 वोट मिले। दूसरे नंबर पर रहे पार्थ समाधिया को 915 वोट मिले। खंडवा: जिला अध्यक्ष बने अनिल यादव को … Read more

पहले चरण में 8% ज्यादा मतदान — बिहार में फिर बदल सकती है सत्ता की तस्वीर?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के 18 ज़िलों की 121 सीटों पर उतरे 1314 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है. गुरुवार को पहले चरण में मतदाताओं का उत्साह ज़बरदस्त देखने को मिला. पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फीसदी मतदान ज्यादा हुआ है. बिहार की सियासत में इस बार के मतदान को अभूतपूर्व माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश के इतिहास में यह सर्वाधिक वोटिंग है. साल 2020 में पहले चरण में 56.1 फीसदी वोटिंग हुई, लेकिन उस समय पहले फेज में 71 सीटों पर चुनाव हुए थे जबकि इस बार 121 सीट पर चुनाव हुए हैं.  चुनाव आयोग के मुताबिक पहले फेज की 121 सीटों पर 64.69 फीसदी मतदान रहा जबकि 2020 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर 56 फीसदी के करीब मतदान रहा। इस लिहाज़ से देखें तो वोटिंग पैटर्न कहता है कि पिछले चुनाव से करीब साढ़े आठ फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई है। इस बार चुनाव में जिस तरह से मतदान बढ़ा है, उससे सियासी दलों की धड़कनें बढ़ गई हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 18 ज़िलों की 121 सीटों पर वोटिंग हुई, जिसमें मुज़फ़्फ़रपुर और समस्तीपुर जिले में सबसे ज़्यादा मतदान रहा तो पटना में सबसे कम वोटिंग हुई है। मुजफ़्फरपुर में 70.96 फीसदी, समस्तीपुर में 70.63 फीसदी, मधेपुरा में 67.21 फीसदी, वैशाली में 67.37 प्रतिशत हुआ. सहरसा में 66.84 फीसदी, खगड़िया में 66.36 फीसदी, लखीसराय में 65.05 फीसदी, मुंगेर में 60.40 फीसदी, सीवान में 60.31 फ़ीसदी, नालंदा में 58.91 फीसदी और पटना जिले में 57.93 प्रतिशत वोटिंग हुई। इस तरह से बिहार के पहले चरण में 64.69 फीसदी कुल मतदान रहा. बिहार में साढ़े 8 फीसदी मतदान रहा 2020 में पहले फेज में 3.70 करोड़ कुल वोटर थे, जिसमें से 2.06 करोड़ ने वोट किया था. लेकिन अबकी बार पहले फेज में कुल 3.75 करोड़ वोटर हैं, जो पिछली बार से 5 लाख अधिक हैं. इस बार की पहले चरण में 64.69 फासदी वोटिंग हुई. अब सियासी दल इस बढ़े वोटिंग पैटर्न को अपने-अपने लिहाज से मुफीद बता रहे हैं. बिहार में इससे पहले 1951-52 से 2020 तक सबसे अधिक 2000 के विधानसभा चुनाव में 62.57 फीसदी वोट पड़े थे जबकि 1951-52 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनाव में बिहार में सबसे अधिक 1998 में 64.60 फीसदी मतदान हुआ था, जो कि इस बार बिहार में पहले चरण की सीटों पर हुए वोटिंग ने इसे भी पछाड़ दिया. बिहार का वोटिंग पैटर्न के क्या संकेत वोटिंग फीसदी के घटने-बढ़ने का सीधा-सीधा असर चुनाव के नतीजों पर भी पड़ता है. भारत के चुनावी इतिहास में आमतौर पर माना जाता है कि जब वोटिंग ज़्यादा होती है, तो जनता बदलाव (एंटी इंकम्बेंसी) चाहती है. लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता. चुनाव में देखा गया है कि कई बार अधिक मतदान का मतलब सरकार के प्रति समर्थन (प्रो इंकम्बेंसी) भी रहती है.  मतलब साफ  है कि वोटर्स की ये सक्रियता किस दिशा में जाएगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी. एसआईआर के बाद पहली बार चुनाव हुए हैं. एसआईआर में तमाम वोट काटे गए हैं तो कुछ नए वोट जोड़े गए हैं. इस तरह फर्जी वोटर हटाए जाने की वजह से भी वोटिंग बढ़ने का कारण माना जा रहा है,  लेकिन बिहार में जब-जब वोटिंग बढ़ी है तो सत्ता बदल जाती है.  बिहार में वोटिंग बढ़ने से बदली सरकार बिहार में विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो 1951-52 से 2020 तक केवल तीन बार ही 60 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई. 1990 में 62.04, 1995 में 61.79 और अब से पहले सबसे अधिक रिकॉर्ड 2020 में 62.57 वोट पड़े थे, लेकिन इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. अभी पहले चरण में 64.69 फ़ीसदी वोटिंग रही है. ऐसे ही अगले चरण में वोटिंग हुई तो बिहार के इतिहास में यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा. बिहार में अभी तक सबसे कम 42.60 फ़ीसदी भी 1951-52 में ही वोट पड़े थे. आजादी के बाद से लेकर अभी तक बिहार में जितने चुनाव हुए हैं, उसके वोटिंग पैटर्न को देखते हैं तो साफ जाहिर होता है कि बिहार में जब-जब मतदान में 5 फीसदी से ज़्यादा इजाफा हुआ है, उसका असर चुनाव पर पड़ा है. बिहार में सरकार बदल गई है, तीन बार देखा गया है कि वोटिंग बढ़ने से कैसे सत्ता पर सियासी असर पड़ा है.  बिहार में 5% से कैसे बदल जाती है सरकार बिहार में सबसे पहले 1967 के चुनाव में वोटिंग में इजाफा हुआ तो सरकार बदली. 1962 में 44.5 फ़ीसदी वोटिंग के मुकाबले 1967 में 51.5 फीसदी मतदान रहा.  इस तरह 7 फ़ीसदी वोटिंग ज़्यादा हुई थी और कांग्रेस के हाथों से सरकार निकल गई थी बिहार में पहली बार गैर-कांग्रेसी दलों ने मिलकर सरकार बनाई थी. 1967 के बाद 1980 में भी यही पैटर्न दिखा. वर्ष 1980 में 57.3 फीसदी मतदान हुआ था जबकि 1977 के चुनाव में 50.5 फ़ीसदी वोटिंग रही. इस तरह 6.8 फ़ीसदी ज़्यादा मतदान हुआ, जिसका नतीजा रहा कि सरकार बदल गई. जनता पार्टी को हार झेलना पड़ा और कांग्रेस वापसी कर गई. बिहार में इस बार समीकरण बदल गए हैं हालांकि, इस बार समीकरण बदल गए हैं. 2020 में एनडीए से अलग चुनाव लड़ने वाले चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा इस बार एनडीए के साथ थे तो मुकेश सहनी इस बार महागठबंधन के साथ हैं। इस बार 104 सीटों पर सीधा मुकाबला है, जबकि 17 सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई दिख रही है. पहले चरण में आरजेडी 72 सीट पर है तो उसके सहयोगी कांग्रेस 24 और सीपीआई माले 14 सीट पर किस्मत आजामा रहे हैं. वीआईपी और सीपीआई छह-छह सीट पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि सीपीएम तीन और आईपी गुप्ता की इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) ने दो सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में थे। इस तरह छह सीटों पर महागठबंधन की फ्रेंडली फाइट है. वहीं, एनडीए की तरफ से जेडीयू पहले फेज़ में 57 सीट मैदान में है तो बीजेपी ने 48 सीट पर थी। चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम के दो प्रत्याशी मैदान में हैं और जीतनराम मांझी … Read more

अहमदाबाद विमान हादसा: SC ने पायलट को दोषी ठहराने से किया इंकार, पिता को दिया सांत्वना संदेश

 नई दिल्ली/ अहमदाबाद     सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहमदाबाद प्लेन क्रैश जुड़े मामले पर सुनवाई की. इस अदालत ने एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर के पायलट-इन-कमांड, दिवंगत कैप्टन सुमीत सभरवाल के पिता से कहा, "देश में कोई भी यह नहीं मानता कि यह पायलट की गलती थी." जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह टिप्पणी 91 साल के पुष्कर सभरवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए की. पुष्कर सभरवाल ने इस क्रैश की एक स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सही जांच की मांग की है, जिसकी निगरानी सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें. हमदर्दी जताते हुए, बेंच ने याचिकाकर्ता पुष्कर सभरवाल को भरोसा दिलाया कि इस हादसे के लिए उनके बेटे को दोषी नहीं ठहराया जा रहा है. इस साल जून में अहमदाबाद में दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया के लंदन जाने वाले विमान के पायलट को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. कोर्ट ने कहा, "इस त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है." बता दें कि इस विमान हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी. न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ उस दुर्भाग्यपूर्ण उड़ान के पायलटों में से एक, कमांडर सुमित सभरवाल के पिता पुष्कर राज सभरवाल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में शीर्ष अदालत के एक पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक निगरानी वाली समिति से दुर्घटना की जांच कराने का अनुरोध किया गया था. याचिका में तर्क दिया गया है कि दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में भारी खामियां हैं. सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि जांच दल ने व्यापक तकनीकी जांच करने के बजाय, मुख्य रूप से मृत पायलटों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो अब अपना बचाव करने में असमर्थ हैं. याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादियों द्वारा की गई जांच में तथ्यों का चयनात्मक और अपूर्ण खुलासा, महत्वपूर्ण विसंगतियों की उपेक्षा, तथा उन प्रणालीगत कारणों को दबाना शामिल है जो डिजाइन या इलेक्ट्रॉनिक खराबी की ओर इशारा करते हैं. रिपोर्ट में बिना किसी पुष्टिकारक साक्ष्य या व्यापक तकनीकी विश्लेषण के जल्दबाजी में यह अनुमान लगाया गया है कि यह घटना पायलट की गलती से हुई है. याचिका में भारत संघ, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय और महानिदेशक, विमान दुर्घटना जांच बोर्ड (एएआईबी) को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में गंभीर तकनीकी खामियां और चूक हैं, जिससे इसके निष्कर्ष अविश्वसनीय हैं. आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने दलील दी कि उनके मुवक्किल निष्पक्ष जांच चाहते हैं और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एएआईबी द्वारा की जा रही वर्तमान जांच स्वतंत्र नहीं है. उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि वह विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम के नियम 12 के तहत न्यायिक निगरानी में जांच का निर्देश दे. न्यायमूर्ति ने कहा- "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह दुर्घटना घटी और उन्होंने अपने बेटे को खो दिया. लेकिन उन्हें यह बोझ नहीं उठाना चाहिए कि उनके बेटे पर आरोप लगाया जा रहा है या उसे दोषी ठहराया जा रहा है. हम स्पष्ट कर देंगे, कोई भी उसे किसी भी चीज के लिए दोषी नहीं ठहरा सकता." न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि पायलट के खिलाफ कोई आरोप नहीं है और रिपोर्ट में दोष बांटने का कोई सवाल ही नहीं है और वास्तव में, जांच का उद्देश्य दोष बांटना नहीं है और इसका उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करना और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचना नहीं है. शंकरनारायण ने वॉल स्ट्रीट जर्नल में छपे एक लेख का उल्लेख किया, जो इस जांच से प्राप्त जानकारी पर आधारित है और जिसमें कहा गया है कि उनके मुवक्किल के बेटे पर हमला किया जा रहा है. न्यायमूर्ति बागची ने कहा, "हमें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि एक विदेशी प्रेस, आपके मुकदमे को अमेरिकी अदालत में डब्ल्यूएसजे के खिलाफ क्या कहना चाहिए था." वरिष्ठ वकील ने कहा कि डब्ल्यूएसजे एक भारतीय सरकारी सूत्र का हवाला दे रहा है. पीठ ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता और आरोप एक विदेशी प्रेस द्वारा लगाया गया है, जिसका आक्षेप तथ्यात्मक रूप से गलत है. न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि इस तरह की घटिया रिपोर्टिंग इसलिए की जा रही है क्योंकि वे केवल भारत को दोष देना चाहते हैं. शंकरनारायणन ने कहा कि हमें इस घटिया रिपोर्टिंग को नज़रअंदाज करना चाहिए. पीठ ने जवाब दिया कि उनके समक्ष प्रस्तुत याचिका में ऐसा कुछ भी नहीं है. वरिष्ठ वकील ने बताया कि 3 अगस्त को, प्रतिवादी संख्या 3, जो प्रारंभिक जांच कर रहे हैं ने अपने मुवक्किल, जो अब 91 वर्ष के हैं, के घर दो अधिकारियों को भेजा. उन्होंने सवाल किया कि आपके बेटे का तलाक कब हुआ. उसे बताया गया कि करीब 15 साल पहले. इस पर यह थ्योरी बनायी जाने लगी कि वह अवसाद से ग्रस्त था इसीलिए आत्महत्या करने की कोशिश की. उनके मुवक्किल से भी उनकी पत्नी का निधन के बारे में पूछा गया. वरिष्ठ वकील ने कहा कि अधिकारियों ने उनके मुवक्किल से कहा कि इसलिए उनके बेटे को अवसाद है, जबकि उन्होंने जांचकर्ताओं के आचरण की आलोचना की. न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि भारत कोई छोटा देश नहीं है, बल्कि 142 करोड़ लोगों वाला देश है. उन्होंने आगे कहा, "किसी को भी यह विश्वास नहीं है कि पायलट की कोई गलती थी. त्रासदी का कारण चाहे जो भी हो, पायलट इसका कारण नहीं है." वरिष्ठ वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का बेटा पायलट था और उनका पोता भी पायलट है और वे राष्ट्र को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. लोगों द्वारा इस तरह के आरोप लगाना गलत है. प्रतिवेदन सुनने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र से जवाब मांगा और 10 नवंबर को एक अन्य संबंधित मामले के साथ इस मामले पर भी सुनवाई करने पर सहमति जताई.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा — विभाजन की सोच अब भी राष्ट्र के सामने सबसे बड़ी बाधा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने पर एक वर्ष तक चलने वाले स्मरणोत्सव का शुभारंभ किया है। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वंदे मातरम, ये शब्द एक मंत्र है, एक ऊर्जा है, एक स्वप्न है, एक संकल्प है। वंदे मातरम, ये शब्द मां भारती की साधना है, मां भारती की आराधना है। वंदे मातरम, ये शब्द हमें इतिहास में ले जाता है, ये हमारे वर्तमान को नए आत्मविश्वास से भर देता है, और हमारे भविष्य को ये नया हौसला देता है कि ऐसा कोई संकल्प नहीं जिसकी सिद्धि न हो सके, ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जिसे हम भारतवासी पा न सकें। गुलामी के कालखंड  'वंदे मातरम्' आजादी का गीत बना- पीएम इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, 'गुलामी के उस कालखंड में वंदे मातरम् इस संकल्प का उद्घोष बन गया था और वह उद्घोष था- भारत की आजादी का, मां भारती के हाथों से गुलामी की बेड़िया टूटेगी और उसकी संतानें स्वयं अपने भाग्य की भाग्य विधाता बनेगी।' उन्होंने आगे कहा 'गुलामी के कालखंड में जिस तरह अंग्रेज भारत को नीचा और पिछड़ा बताकर अपने शासन को सही ठहराते थे, इस पहली पंक्ति ने उस दुष्प्रचार को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। इसलिए, 'वंदे मातरम्' न केवल आजादी का गीत बना, बल्कि 'वंदे मातरम्' ने करोड़ों देशवासियों के सामने स्वतंत्र भारत कैसा होगा, वह 'सुजलाम सुफलाम' सपना भी प्रस्तुत किया।'   'आतंक के विनाश के लिए दुर्गा भी बनना जानता है भारत' इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा, '1927 में महात्मा गांधी ने कहा था 'वंदे मातरम्' हमारे सामने पूरे भारत की एक ऐसी तस्वीर प्रस्तुत करता है जो अखंड है… हमारे राष्ट्रीय ध्वज में समय के साथ कई बदलाव हुए हैं, लेकिन तब से लेकर आज तक, जब भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, तो 'भारत माता की जय', 'वंदे मातरम्' स्वतः ही हमारे मुंह से निकलता है।' पीएम मोदी ने आगे कहा कि 'बीते वर्षों में दुनिया ने भारत के इसी स्वरूप का उदय देखा है। हमने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरे हैं और जब दुश्मन ने आतंकवाद के माध्यम से भारत की सुरक्षा और सम्मान पर प्रहार करने का दुस्साहस किया, तो पूरी दुनिया ने देखा कि नया भारत अगर मानवता की सेवा के लिए कमला और विमला का स्वरूप है, तो आतंकवाद के विनाश के लिए 10 प्रहर धारिणी दुर्गा बनना भी जानता है।'   विभाजनकारी सोच आज भी देश के लिए चुनौती- पीएम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'आजादी की लड़ाई में 'वंदे मातरम्' की भावना ने पूरे राष्ट्र को आलोकित किया, लेकिन दुर्भाग्य से 1937 में इसकी आत्मा का एक हिस्सा, 'वंदे मातरम्' के महत्वपूर्ण पदों को अलग कर दिया गया। 'वंदे मातरम्' को खंडित किया गया, उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए। 'वंदे मातरम्' के इसी विभाजन ने देश के विभाजन के बीज भी बोए… आज की पीढ़ी के लिए यह जानना जरूरी है कि यह अन्याय क्यों हुआ, क्योंकि वही विभाजनकारी सोच आज भी देश के लिए चुनौती बनी हुई है।'

अहमदाबाद बनेगा 2026 T20 वर्ल्ड कप फाइनल का गवाह, मेजबानी की लिस्ट से बेंगलुरु गायब

अहमदाबाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अगले साल होने वाले T20 वर्ल्ड कप के लिए अहमदाबाद, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई को वेन्यू के रूप में शॉर्टलिस्ट किया है. टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला अहमदाबाद में खेला जाएगा.2023 ODI वर्ल्ड कप का फाइनल भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच अहमदाबाद में ही खेला गया था, जो दुनिया के सबसे बड़ा स्टेडियम है, जिसकी क्षमता एक लाख से ज्यादा दर्शकों की है. तब उस दौरान कुल 10 मैच वेन्यू पर मुकाबले खेले गए थे. PTI के मुताब‍िक- महिला ODI वर्ल्ड कप की लिस्ट से पहले ही बाहर किए जाने के बाद बेंगलुरु इस बार भी फाइनल वेन्यू की सूची में जगह नहीं बना पाया है. जून में RCB की IPL जीत के जश्न के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम में हुई भगदड़ के बाद कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन जरूरी मंजूरी हासिल करने में विफल रहा था. तब इस हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई थी और तब से स्टेडियम में कोई भी इंटरनेशनल मैच नहीं खेला गया है. सूत्रों के मुताबिक, ICC फरवरी-मार्च में होने वाले इस टूर्नामेंट का पूरा शेड्यूल अगले हफ्ते जारी करेगा. यह टूर्नामेंट श्रीलंका के साथ मिलकर आयोजित किया जाएगा, जहां श्रीलंका पाकिस्तान के मैचों के लिए एक न्यूट्रल वेन्यू की भूमिका निभाएगा, जो भारत के साथ समझौते के तहत तय किया गया है. श्रीलंका में तीन वेन्यू पर मुकाबले खेले जाएंगे, जिसमें कोलंबो भी शामिल है. भारत घरेलू सरजमीं पर डिफेंडिंग चैम्प‍ियन के तौर पर उतरेगा. टीम ने पिछला T20 वर्ल्ड कप जून में बारबाडोस में जीता था. भारत में चुने गए पांचों वेन्यू टियर-1 शहरों के हैं और उम्मीद है कि यहां बड़ी संख्या में दर्शक मैच देखने पहुंचेंगे. अगर पाकिस्तान फाइनल में पहुंचता है, तो खिताबी मुकाबला श्रीलंका में खेला जाएगा. ICC, BCCI और PCB के बीच हुए समझौते के अनुसार, भारत और पाकिस्तान 2027 तक अपने सभी मुकाबले न्यूट्रल वेन्यू पर खेलेंगे, चाहे मेजबान देश कोई भी हो.

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया: मुस्लिम पर्सनल लॉ में 18 साल से कम उम्र की सहमति को नहीं मानेंगे

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की से शादी के बाद भी संबंध बनाने को कानूनी तौर पर रेप माना है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि उनकी धार्मिक या व्यक्तिगत कानूनी मान्यता की स्थिति कुछ भी हो, सहमति हो या वैवाहिक स्थिति हो, पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत वैधानिक बलात्कार है। पंजाब के होशियारपुर की एक 17 वर्षीय मुस्लिम लड़की और उसके पति ने अपने परिवारों की इच्छा के विरुद्ध शादी करने के बाद सुरक्षा की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की थी। उन्हें लड़की के माता-पिता से हिंसा का डर था। कपल ने तर्क दिया था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत एक लड़की को यौवन प्राप्त करने पर शादी करने का अधिकार है। इसकी उम्र महज 15 साल मानी जाती है। न्यायमूर्ति सुभाष मेहता ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा, "विपरीत वैधानिक कानून के सामने, व्यक्तिगत कानून प्रभावी नहीं हो सकता।" न्यायाधीश सुभाष मेहता ने अपने विस्तृत आदेश में समझाया कि तीन विशेष कानून इस मामले में प्रभावी हैं। बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत लड़की के लिए शादी की न्यूनतम कानूनी आयु 18 वर्ष है। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति के साथ सभी यौन गतिविधियां, चाहे सहमति हो या वैवाहिक स्थिति, वैधानिक बलात्कार है। किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले हर बच्चे को दुर्व्यवहार, शोषण और उपेक्षा से बचाया जाना चाहिए। न्यायाधीश ने कहा, "ये विशेष कानून धर्मनिरपेक्ष, कल्याण-केंद्रित हैं और व्यक्तिगत कानूनों का अतिक्रमण करते हैं। वे बच्चों की सुरक्षा में सरकारी की बाध्यकारी रुचि और बाल विवाह तथा नाबालिगों के साथ यौन कृत्यों को अपराधी बनाने के विधायी इरादे को दर्शाते हैं, भले ही वे विवाह की आड़ में किए गए हों। उपरोक्त चर्चा के आलोक में यह अदालत ऐसे युगल को सुरक्षा प्रदान करने के पक्ष में नहीं है, जहां पति-पत्नी में से कोई एक नाबालिग है, क्योंकि ऐसा करने से उपर्युक्त लाभकारी विधियों का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।" सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि लड़की 18 वर्ष से कम है, जिससे यह विवाह बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत रद्द करने योग्य है। सरकार ने यह भी कहा कि एक बार नाबालिग का दर्जा स्थापित हो जाने पर अदालत को 'पेरेंट्स पेट्रियाए' (नाबालिग के अभिभावक) के रूप में कार्य करते हुए बच्चे के सर्वोत्तम हित का निर्धारण करना होगा। सभी पक्षों को सुनने के बाद बेंच ने होशियारपुर के एसएसपी को नाबालिग को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि CWC को किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 36 के तहत एक जांच करनी चाहिए और नाबालिग लड़की की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही, पुलिस को याचिकाकर्ता युगल को शारीरिक नुकसान से बचाने का भी निर्देश दिया गया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम को किया संबोधित

भारत की आजादी का अमर मंत्र बन गया था वन्दे मातरम्ः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम को किया संबोधित वन्दे मातरम् का किया गया सामूहिक गायन व लिया गया स्वदेशी का संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम का किया गया लाइव प्रसारण उत्तर प्रदेश पिछले 8 वर्ष में जिन ऊंचाइयों की ओर अग्रसर हुआ है, यह हमारे कर्तव्यों की ही अभिव्यक्ति हैः सीएम योगी बोले- आजादी के मंत्र को बढ़ाने और भारत को नई दिशा देने में सफल हुआ वंदे मातरम् गीत कर्तव्यों के प्रति आग्रही बनाता है वन्दे मातरम्ः सीएम योगी 150 वर्ष से भारत को प्रतिनिधित्व देते हुए राष्ट्रीयता का भाव पैदा करने में सफल हुआ है यह गीतः योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को किया नमन लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। आजादी के आंदोलन का मंत्र बने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर पीएम मोदी ने इस दिवस को स्मृति दिवस के रूप में आयोजित करने के लिए देशवासियों को नई प्रेरणा दी। सीएम ने कहा कि वन्दे मातरम् भारत की आजादी का अमर मंत्र बन गया था। उस दौरान विदेशी हुकूमत के द्वारा दी जाने वाली अनेक यातनाओं, प्रताड़नाओं की परवाह किए बिना भारत का हर नागरिक (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, क्रांतिकारी) वन्दे मातरम् गीत के साथ गांव, नगर, प्रभातफेरी के माध्यम से भारत की सामूहिक चेतना के जागरण के अभियान से जुड़ चुका था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में अपनी बातें रखीं। इस दौरान राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन हुआ और स्वदेशी का संकल्प भी लिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रगीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को नमन किया। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। लोकभवन में उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी देखा। सीएम ने कोविड प्रबंधन की भी चर्चा की सीएम योगी ने 100 वर्ष पूर्व देश के अंदर आई महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भारत की आबादी कुल 30 करोड़ थी और इस महामारी से मरने वालों की संख्या भी करोड़ों में थी। गांव के गांव साफ हो गए थे। स्वतंत्र भारत में कोविड जैसी महामारी का संक्रमण भी दुनिया ने झेला है। इस महामारी के दौरान शासन-प्रशासन हो या अल्पवेतन भोगी, जान की परवाह किए बिना सभी के मन में एक ही भाव था कि इसे नियंत्रित करना है और इसके समाधान का रास्ता निकालना है। सीएम योगी ने कहा कि भारत और भारतीयता, नागरिकों के बारे में संवेदनशील तरीके से वह नेतृत्व ही सोच सकता है, जो उस भावना से ओतप्रोत हो। आजादी के मंत्र को बढ़ाने में सफल हुआ वन्दे मातरम् सीएम योगी ने कहा कि 1875 में रचा गया यह गीत केवल आजादी का ही गीत नहीं रहा, बल्कि देश के अंदर आजादी के मंत्र को बढ़ाने में भी सफल हुआ। वन्दे मातरम् गीत संस्कृत व बांग्ला की सामूहिक अभिव्यक्ति को भले ही प्रदर्शित करता हो, लेकिन यह संपूर्ण भारत को राष्ट्र माता के भाव के साथ जोड़ने का अमर गीत बन गया। इसने भारत की शाश्वत अभिव्यक्ति को देशवासियों के सामने प्रस्तुत किया था। सीएम ने कहा कि जब विदेशी हुकूमत ने 1905 में बंग-भंग के माध्यम से भारत की भुजाओं को काटने का दुस्साहिक निर्णय लिया था, उस समय भी इस गीत ने पूरे भारतवासियों को एकजुट होकर प्रतीकार करने की प्रेरणा दी। उसके बाद के कालखंड में जब भी किसी क्रांतिकारी ने फांसी के फंदे को चूमा, तब उसके मुख से वंदे मातरम् मंत्र ही निकलता रहा। वन्दे मातरम् ने किया संपूर्ण भारत की सामूहिक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व सीएम योगी ने कहाकि भारत की आजादी के आंदोलन के दौरान भी जब स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने कोई स्लोगन, फ्लैग दिया तो वन्दे मातरम् उसका स्वर बना। वन्दे मातरम् संपूर्ण भारत की सामूहिक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हुए पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधने वाला मंत्र बना। इस गीत ने हर भारतीय के मन में यह भाव रचने का प्रयास किया कि व्यक्ति जाति-मत-मजहब से ऊपर उठकर राष्ट्र के बारे में सोच सके और राष्ट्रप्रथम के भाव के साथ राष्ट्रमाता के प्रति सामूहिक अभिव्यक्ति हो। सीएम योगी ने वंदे मातरम् को भारत की भक्ति-शक्ति के सामूहिक शाश्वत अभिव्यक्ति का सामूहिक स्वरूप बताया। सीएम ने कहा कि वन्दे मातरम् के अमरगीत के साथ उसके 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में हम सभी इसके रचयिता को भी याद कर रहे हैं। संविधान सभा ने इस गीत को 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रगीत के रूप में मान्यता दी। यह अमर गीत भारत को नई दिशा देने में हुआ है सफल सीएम योगी ने कहा कि यह भले ही बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के आनंद मठ के उस अमर उपन्यास पर आधारित है, जिन्होंने भारत व बंगाल में उस दौरान भूख से तड़पती, अकाल-अभाव से ग्रसित जनता के उन स्वरों को, जिसे संन्यासियों ने बाद में आंदोलन का रूप दिया। लेकिन वास्तव में यह अमर गीत भारत को नई दिशा देने व भारत की सामूहिक चेतना को आगे बढ़ाने में सफल हुआ है। आज इसके 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। यह गीत 150 वर्ष से भारत को प्रतिनिधित्व देते हुए नई राष्ट्रीयता का भाव पैदा करने में सफल हुआ है। कर्तव्यों के प्रति आग्रही बनाता है वन्दे मातरम् सीएम योगी ने कहा कि हम सब वन्दे मातरम् का हिस्सा हो सकते हैं। वन्दे मातरम् किसी उपासना विधि, किसी जाति-व्यक्ति का महिमा मंडन करने के प्रति नहीं, बल्कि हमारे कर्तव्यों के प्रति आग्रही बनाता है। सीएम ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर द्वारा 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान की ड्राफ्टिंग प्रति सौंपने का भी जिक्र किया। सीएम ने पीएम मोदी के उस कथन की चर्चा की औऱ कहा कि हम देश में रहते हैं, अधिकारों की बात करते हैं पर क्या कभी कर्तव्य के बारे में स्मरण किया है। कर्तव्य ऐसा हो, जो वर्तमान व भावी पीढ़ी के भविष्य को भी उज्ज्वल बना सके। वन्दे … Read more

वंदे मातरम् में भारत की आत्मा, सिर्फ़ गीत नहीं — CM विष्णु देव साय

रायपुर   “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ पूरे देश के लिए गर्व और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय अवसर है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के मार्गदर्शन में इस ऐतिहासिक पर्व को वर्षभर चलने वाले महाअभियान के रूप में मनाया जा रहा है। देश के साथ छत्तीसगढ़ में भी यह आयोजन जनभागीदारी के साथ चार चरणों में ग्राम पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक भव्य रूप में संपन्न किया जाएगा। पहला चरण 7 नवम्बर से होगा प्रारंभ वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यक्रम का शुभारंभ 7 नवम्बर 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया जाएगा। यह राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रातः 10 से 11 बजे तक दूरदर्शन पर प्रसारित होगा। प्रधानमंत्री के उद्बोधन के पश्चात पूरे देश में एक साथ वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया जाएगा। गीत के बोल और धुन पोर्टल vandemataram150.in पर उपलब्ध हैं। चार चरणों में होगा वर्षभर आयोजन कार्यक्रम चार चरणों में आयोजित होगा- प्रथम चरण 7 से 14 नवम्बर 2025, द्वितीय चरण 19 से 26 जनवरी 2026, तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 (हर घर तिरंगा अभियान के साथ), और चतुर्थ चरण 1 से 7 नवम्बर 2026 तक चलेगा। इस दौरान राज्य के सभी जिलों, जनपदों, ग्राम पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों एवं सामाजिक संगठनों में राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन के साथ विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे। जिलों में मंत्रीगण और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता राज्य के सभी जिलों में मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे।प्रत्येक जिले में स्थानीय कलाकारों, छात्रों, सामाजिक संस्थाओं और नागरिक समूहों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले सके। विद्यालयों में विशेष गतिविधियां और रचनात्मक आयोजन प्रदेश के सभी विद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में “वंदे मातरम्” विषय पर विशेष सभाएं, निबंध, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ होंगी। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और स्कूल बैंड के माध्यम से वंदे मातरम से संबंधित संगीतमय प्रस्तुतियां दी जाएँगी। राज्य पुलिस बैंड भी सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम और देशभक्ति गीतों पर आधारित कार्यक्रमों से वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंगेगा। ‘वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ’ एक अभिनव पहल राज्यभर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत “वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ” स्थापित किए जाएंगे। इनमें नागरिक अपनी आवाज़ में वंदे मातरम् गाकर उसे पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर गीत की मूल धुन और बोल की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यह पहल लोगों को अपने तरीके से राष्ट्रप्रेम व्यक्त करने का अवसर देगी और आंदोलन को अधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक बनाएगी। “वंदे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ केवल एक स्मरणीय अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकता, आत्मगौरव और मातृभूमि के प्रति समर्पण का जीवंत संदेश है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हुए उनमें देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रीय चेतना की भावना को और गहराई देगा। वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का स्वर है, जिसकी गूंज हर नागरिक के हृदय में नई ऊर्जा और गर्व का संचार करेगी। – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

देशभर के 10 संभागों में वंदे मातरम्@150 के कार्यक्रम, भोपाल में समारोह हुआ भव्य

भोपाल   वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी ने आज से पूरे देश में ‘वंदे मातरम्@150’ अभियान की शुरुआत की। मध्यप्रदेश में इस अभियान का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के शौर्य स्मारक में किया। इस मौके पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष, मंत्रीगण, सांसद, विधायक, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने शौर्य स्मारक और भाजपा प्रदेश कार्यालय दोनों स्थानों पर ‘वंदे मातरम्’ के मूल स्वरूप में सामूहिक गायन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और स्वतंत्रता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब किसी देश में आजादी की भावना जागृत होती है, तो इस गीत के शब्द लोगों के मन में नई ऊर्जा का संचार करते हैं। भोपाल के शौर्य स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, रामेश्वर शर्मा, महापौर माली श्री राय, ACS अशोक वर्णवाल, प्रमुख सचिव राघवेंद्र सिंह, DGP कैलाश मकवाना, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल और भोपाल की पुलिस कमिश्नर हरि नारायण चारी मिश्रा मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वंदे मातरम का मूल मंत्र हमेशा से हमें प्रेरित करता रहा है। हर देश में जब स्वतंत्रता की भावना बढ़ती है, तब इन शब्दों से एक नए प्रकार का स्पंदन उत्पन्न होता है, जिसे हम गीतों के रूप में अनुभव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि "कदम कदम बढ़ाए जा" पुलिस बैंड द्वारा प्रस्तुत किया गया है और यह गीत आजादी के संघर्ष के दौरान रचित गीतों में से एक है। इस गीत की रचना में त्रिदेवियों दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती को जोड़ने की विशेष संरचना है और इसके माध्यम से उनकी पूजा का संदेश भी निहित है। हमारी त्रिदेवियों की कल्पना हजारों वर्षों से चली आ रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अतीत के अप्रतिम गीतों ने आजादी की अलख जगाई। 19वीं शताब्दी से शुरू हुई यह यात्रा हमें आज भी प्रेरित करती है। आजादी के हर संघर्ष में, चाहे वह अमेरिका हो या इंग्लैंड, जब आजादी की अलख जगती है, तब शब्दों से नए संकल्प उत्पन्न होते हैं। राष्ट्रभक्ति गीतों के माध्यम से देश अपनी पहचान बनाता है। 10 संभागों में एक साथ हुआ आयोजन भाजपा के इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत भोपाल सहित राज्य के 10 संभागों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। हर संभाग में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और प्रदेश सरकार के मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। शौर्य स्मारक पर हुए आयोजन में मंत्री कृष्णा गौर, विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी, महापौर माली श्री राय, DGP कैलाश मकवाना, ACS अशोक वर्णवाल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। ‘स्वदेशी संकल्प’ भी लिया गया ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के बाद कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने ‘स्वदेशी का संकल्प’ भी लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि “वंदे मातरम्” की रचना में भारत की त्रिदेवियों—दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का आह्वान है, जो हमारी संस्कृति और मातृशक्ति की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक जागृति का प्रतीक बनेगा। 10 संभागों में हो रहे कार्यक्रम वंदे मातरम गायन के बाद स्वदेशी का संकल्प भी सामूहिक रूप से लिया जाएगा। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत मध्यप्रदेश के भोपाल सहित 10 संभागों और 10 विशेष स्थानों पर विशेष आयोजन हो रहे है। इन आयोजनों में प्रदेश मंत्री, बीजेपी के प्रदेश पदाधिकारी, सांसद, विधायक सहित जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे है। 26 नवंबर तक चलेगा अभियान 07 नवंबर से शुरू होने वाला यह उत्सव 26 नवम्बर (संविधान दिवस) तक देशभर के साथ प्रदेशभर में मनाया जाएगा, जिसमें हर जिले और हर शैक्षणिक संस्थान की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पूरे प्रदेश में होंगे आयोजन भाजपा ने राज्यभर के 10 प्रमुख ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों पर भी इस अभियान के तहत विशेष आयोजन किए हैं। इनमें महाकाल लोक (उज्जैन), देवी अहिल्याबाई स्मारक (इंदौर), शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मारक (मुरैना), रानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल (ग्वालियर), शहीद रघुनाथ शाह–शंकर शाह स्थल (जबलपुर) और सेठानी घाट (नर्मदापुरम) शामिल हैं। 26 नवंबर तक चलेगा राष्ट्रव्यापी उत्सव यह अभियान 7 नवंबर से 26 नवंबर (संविधान दिवस) तक चलेगा। इस दौरान राज्य के प्रत्येक जिले, स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में वंदे मातरम् गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान आयोजित किए जाएंगे। भाजपा नेताओं ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य देशभर में राष्ट्रगीत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को और सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री बोले — "वंदे मातरम् हमारी पहचान" मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा—     “वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, यह हमारी पहचान है। इसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों भारतीयों को प्रेरित किया। अब समय है कि नई पीढ़ी इस गीत के संदेश को समझे और भारत की सांस्कृतिक एकता को सहेजे।” अब जानिए कौन से मंत्री कहां है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव- शौर्य स्मारक (भोपाल) उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल- कलेक्टर कार्यालय (रीवा) मंत्री कैलाश विजयवर्गीय- कलेक्टर कार्यालय (इंदौर) मंत्री राकेश सिंह – कलेक्टर कार्यालय (जबलपुर) मंत्री राव उदय प्रताप सिंह- कलेक्टर कार्यालय (नर्मदापुरम) मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर -कलेक्टर कार्यालय (ग्वालियर) मंत्री गोविंद सिंह राजपूत- कलेक्टर कार्यालय (सागर) मंत्री एंदल सिंह कंसाना -कलेक्टर कार्यालय (मुरैना) मंत्री दिलीप जायसवाल -कलेक्टर कार्यालय (शहडोल) मंत्री गौतम टेटवाल -कलेक्टर कार्यालय (उज्जैन) भाजपा आज इन दस स्थानों पर कर रही आयोजन     भाजपा प्रदेश कार्यालय भोपाल     मॉ नर्मदा तट सेठानी घाट नर्मदापुरम     शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्मारक मुरैना     रानी लक्ष्मीबाई बलिदान स्थल ग्वालियर     रानी लक्ष्मीबाई स्मारक स्थल सागर     शहीद पदम्धर स्मारक रीवा     शहीद स्मारक शहडोल     शहीद रघुनाथ शाह, शंकर शाह बलिदान स्थल जबलपुर     देवी अहिल्या बाई स्मारक स्थल इंदौर     महाकाल लोक उज्जैन

दिल्ली के इंद्रप्रस्थ से शुरू हुई सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0, बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री करेंगे नेतृत्व

छतरपुर  बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के नेतृत्व में 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा 2.0' का शुभारंभ दिल्ली के इंद्रप्रस्थ से हुआ। यह यात्रा वृंदावन तक जाएगी। शुक्रवार सुबह 9 बजे कात्यायनी मंदिर परिसर में संत-महात्माओं की उपस्थिति में मंचीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के बाद संतों की ओर से सौंपे गए धर्म ध्वज को लेकर बागेश्वर बाबा के नेतृत्व में यात्रा वृंदावन के लिए रवाना होगी। धीरेंद्र शास्त्री बोले- यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति गुरुवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए बागेश्वर महाराज ने कहा कि यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक वैचारिक क्रांति है, जिसका उद्देश्य विचारों को जगाना और समाज को जोड़ना है। उन्होंने कहा, हम विवाद नहीं, संवाद के माध्यम से आगे बढ़ना चाहते हैं। यह यात्रा सनातन एकता का संदेश लेकर चलेगी। महाराज श्री ने बताया कि मंचीय कार्यक्रम में राष्ट्रगान, हनुमान चालीसा, श्रीराम नाम संकीर्तन और हिंदू एकता की शपथ ली जाएगी। उन्होंने देश-विदेश के हिंदुओं से 7 से 16 नवंबर के बीच चलने वाली इस यात्रा में कम से कम एक दिन शामिल होने का आग्रह किया। इस पदयात्रा में देश के कई संत, आचार्य शामिल होंगे इस पदयात्रा में जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज, राजेंद्र दास महाराज, दीदी मां ऋतंभरा, चिदानंद मुनि जी, स्वामी ज्ञानानंद महाराज, सुधांशु जी महाराज, राजू दास महाराज, मृदुल कांत शास्त्री, दाती महाराज, पंडित संजीव कृष्ण ठाकुर और महामंडलेश्वर नवल किशोर दास सहित देशभर के अनेक संत, आचार्य और महामंडलेश्वर भाग ले रहे हैं। राजनीतिक क्षेत्र से दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद मनोज तिवारी और मंत्री कपिल मिश्रा भी उपस्थित रहेंगे। बागेश्वर महाराज ने बताया कि यात्रा दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की 422 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरेगी, जिससे करीब 5 करोड़ लोगों तक इसका संदेश पहुंचेगा। इस साल 300 से अधिक मुस्लिम सदस्य भी होंगे शामिल इस बार यात्रा को मुस्लिम समाज से भी समर्थन मिला है। फैज खान के नेतृत्व में 300 से अधिक मुस्लिम सदस्य पदयात्रा में शामिल होंगे। हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में मुस्लिम समुदाय ने कहा कि यह यात्रा 'लोगों को जोड़ने का कार्य कर रही है', इसलिए वे भी इसमें साथ चलेंगे।     महाराज का संदेश – यात्रा में मर्यादा व शांति बनाए रखें     बागेश्वर महाराज ने सभी पदयात्रियों से कहा है कि वे मर्यादित होकर चलें।     किसी जाति, पंथ या संप्रदाय पर टिप्पणी न करें, और अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग न करें।     प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि सभी संवेदनशील स्थलों पर विशेष सुरक्षा की जाए। पदयात्रा के सात संकल्प 1. यमुना माता का शुद्धिकरण। 2. भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। 3. गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा मिले। 4. श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर भव्य रूप में निर्मित हो। 5. ब्रज परिक्षेत्र से मांस-मदिरा पर प्रतिबंध। 6. अवैध धर्मांतरण और लव जिहाद पर रोक। 7. जात-पात और ऊंच-नीच का भेद समाप्त कर सामाजिक समरसता स्थापित हो।