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इंदौर में 13 नवंबर को होगी टेकग्रोथ कॉन्क्लेव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में 13 नवंबर को आयोजित होने वाला 'मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' प्रदेश को तकनीक, नवाचार और निवेश का वैश्विक केंद्र बनायेगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा किये जा रहे इस आयोजन से राज्य की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति के अगले चरण की रूपरेखा तय की जायेगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि मध्यप्रदेश टियर-2 भारत की तकनीकी क्रांति का नेतृत्व कर सके। कॉन्क्लेव में राज्य सरकार का टेक्नोलॉजी-फर्स्ट इकोनॉमी विजन भी प्रस्तुत किया जायेगा। इसमें दर्शाया जाएगा की मध्यप्रदेश नवाचार, कौशल और उद्यमिता के समन्वय से समावेशी आर्थिक विकास की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कॉन्क्लेव के प्रतिभागी उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन बैठक भी करेंगे। कॉन्क्लेव की थीम 'पॉवरिंग टियर-2, प्रोपेलिंग इंडिया' रखी गई है। कॉन्क्लेव 2.0 का उद्देश्य राज्य के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार, निवेश और सहयोग के माध्यम से नई गति लाना है। कॉनक्लेव की थीम इस तथ्य को रेखांकित करेगी कि भारत की विकास यात्रा में अब टियर-2 शहर अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। मध्यप्रदेश इस परिवर्तन का केंद्र बन रहा है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जौसे शहर तेजी से टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और उद्यमिता के नए हब के रूप में उभर रहे हैं।’ टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' नीति-निर्माताओं, वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख नेतृत्वकर्ता उद्यमियों का संगम होगा। कॉनक्लेव में इस बार 500 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। कॉन्क्लेव का शुभारंभ "एमपी जीसीसी लीडरशिप कनेक्ट" सत्र से होगा। इस सत्र में देशभर के 30 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसीएस) के प्रतिनिधि भाग लेंगे। यह संवाद सत्र मध्यप्रदेश को पसंदीदा जीसीसी गंतव्य के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर केंद्रित रहेगा। इस दौरान "एमपी जीसीसी विज़न डॉक्यूमेंट" तैयार किया जाएगा, जो राज्य की दीर्घकालिक टेक्नोलॉजी रणनीति का आधार बनेगा। मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में “ड्रोन राउंडटेबल” का आयोजन भी होगा।इसमें नीति-निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ और ड्रोन इनोवेशन कंपनियाँ भाग लेंगी। सत्र में राज्य के ड्रोन ईकोसिस्टम, विनिर्माण अवसरों, सरकारी सेवाओं और औद्योगिक उपयोगों में ड्रोन तकनीक के विस्तार पर केंद्रित रहेगा। मुख्य सत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे संबोधित करेंगे। उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि जीसीसी, ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर, सेमीकंडक्टर, ईएसडीएम, स्पेसटेक, डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में निवेश और नवाचार की दिशा में अपने विचार साझा करेंगे।मुख्य सत्र में नई डिजिटल अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन, आईटी पार्कों और स्किल सेंटर्स की आधारशिला, नए निवेशकों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट का वितरण और एमओयू व साझेदारी समझौतों पर हस्ताक्षर किये जायेंगे। मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 से राज्य में तकनीकी निवेश और रोजगार सृजन को नई दिशा मिलेगी। कॉन्क्लेव के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से नई डिजिटल नीतियों और तकनीकी पहलों की घोषणाएँ की जाएँगी। इन नीतियों का उद्देश्य प्रदेश में नवाचार को प्रोत्साहन, निवेश को आकर्षित करना और स्किल डेवलपमेंट को सशक्त बनाना है। कॉन्क्लेव में आईटी-आईटीईएस, सेमीकंडक्टर, ईएसडीएम, ड्रोन, स्पेसटेक, एवीजीसी-एक्सआर, डेटा सेंटर और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स से जुड़े अग्रणी उद्योग, निवेशक, शिक्षण संस्थान, और उद्योग संगठन शामिल होंगे। यह आयोजन राज्य में नवाचार-आधारित निवेश वातावरण और मजबूत सार्वजनिक-निजी साझेदारी (PPP) को बढ़ावा देगा। 'मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 1.0' में अप्रैल 2025 में आयोजित उल्लेखनीय सफलता मिली। कॉनक्लेव में 20 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे और 75 हजार से अधिक रोजगार के अवसरों का सृजन हुआ था। इस सफलता के आधार पर 'टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0' को और भी व्यापक, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा। आयोजन में भाग लेने के इच्छुक संगठन और उद्यमी https://mpsedc.mp.gov.in/mptgc2025/Registration पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए इच्छुक प्रतिभागी इन्वेस्टमेंट प्रमोशन सेल की प्रभारी अधिकारी सुश्री अवंतिका वर्मा, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन से दूरभाष 0755- 2518704 अथवा ईमेल ipcell-mp@mpsedc.com पर सम्पर्क कर सकते हैं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले — संस्कार ही जीवन परिवर्तन की कुंजी हैं

संस्कार से ही जीवन में आता है बदलाव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने बीएपीएस के दो बड़े शिक्षा प्रकल्पों का किया शुभारंभ इंटीग्रेटेड पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स आईपीडीसी का हुआ एमओयू भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संस्कार से ही जीवन में बदलाव आता है। हमारी सनातन संस्कृति अद्भुत है। भारत को सदैव विश्व गुरू के रूप में दुनिया देखती आई है। भारत में ही अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाने की समस्त संभावनाएं निहित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीएपीएस संस्था के वैश्विक प्रयासों की सराह करते हुए कहा कि अबूधाबी में बना भव्य बीएपीएस हिंदू मंदिर अद्भुत है। उनके प्रमुख महंत का जबलपुर का होना हम सभी प्रदेशवासियों के लिये गौरव की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को जबलपुर में बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था द्वारा आयोजित जीवन उत्कर्ष महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महोत्सव में बीएपीएस के 2 पाठयक्रम 'चलो बनें आदर्श' और 'इंटीग्रेटेड पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स' (आईपीडीसी) का शुभारंभ किया। इन पाठयक्रमों का उद्देश्य स्कूली बच्चों और युवाओं को संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा देना है। महोत्सव में मंगलायन यूनिवर्सिटी और रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर्स ने कोर्स से संबंधित एमओयू का आदान-प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देवालयों में दिव्य कल्पनाओं को साकार होते देखा जा सकता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बीएपीएस जैसी संस्थाएं हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। मुख्यामंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामीनारायण संस्था दुनिया को पहचानने और स्वयं को जानने के लिये आम व्यक्ति का प्रशंसनीय मार्गदर्शन कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बीएपीएस का "परिवर्तन की यात्रा" का मध्यप्रदेश से शुभारंभ करने के लिए संस्था का अभिनंदन करते हुए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि संस्कारधानी जबलपुर को ईश्वर और माँ नर्मदा ने परम सौभाग्य दिया है, जिसकी बदौलत आज संस्था के द्वारा महत्वपूर्ण कार्यों की शुरूआत यहां से की जा रही है। यहाँ आने से केवल एक दैवीय आशीर्वाद ही नहीं मिलता, बल्कि यहाँ से जाने वाले जन्म-जन्मांतर तक महंत स्वामियों से भी दुनिया भर के संतों का आशीर्वाद मिलता है। यहाँ के वातावरण में एक ऐसी ऊर्जा है जो हमें निरंतर प्रेरित करती है। साथ ही कहा कि आज़ादी के अमृत काल में हमें वही आत्मविश्वास मिला है जो आत्मबल हमारे भीतर भगवान ने रखा था, वही अब पुनः प्रकट हो रहा है। अब मध्यप्रदेश में भी हुई शुरुआत बीएपीएस संस्था के वरिष्ठ संत पूज्य ज्ञानानंद स्वरूप स्वामी जी ने प्रकल्पों की जानकारी देते हुए बताया कि 'चलो बनें आदर्श' प्रकल्प वीडियो के माध्यम से प्राथमिक शाला के विद्यार्थियों में बचपन से ही जीवन मूल्यों की सुदृढ़ आधारशिला रखता है। यह प्रोजेक्ट पहले से ही गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सहित पांच राज्यों की 23 हजार शालाओं में सफलतापूर्वक चल रहा है, जिसका लाभ 45 लाख से अधिक विद्यार्थी ले रहे हैं। बीएपीएस संस्था के वरिष्ठ संत पूज्य ज्ञानानंद स्वरूप स्वामी जी ने कहा कि कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए 'इंटीग्रेटेड पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स' (आईपीडीसी) का भी शुभारंभ किया है। यह कोर्स युवाओं को नकारात्मकता, मोबाइल की लत, नशीले पदार्थों और डिप्रेशन जैसे संकटों से निकालकर उन्हें भारतीय सनातन मूल्यों से जोड़ने का काम करेगा। इस अवसर पर संतगण, लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह और जबलपुर के महापौर  जगत बहादुर सिंह, संभागायुक्त  धनंजय सिंह, आईजी  प्रमोद वर्मा, कलेक्ट्र  राघवेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्वामी नारायण मंदिर में गुरु पूजन विधि में हुये शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव रसल चौक के समीप स्थित  स्वामी नारायण मंदिर में गुरु पूजन विधि में शामिल हुये। मुख्यमंत्री ने परब्रह्म भगवान स्वामी नारायण के छठें आध्यात्मिक अनुगामी ब्रह्मस्वरूप महंत स्वामी जी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित किये। गुरु पूजन विधि ब्रह्म बिहारी स्वामी जी ने संपन्न कराई।  

लोकल बॉडी चुनाव में वोटिंग विवाद: एक आदमी दो बार वोट कैसे डाल सकता है?

मुंबई  महाराष्ट्र में होने जा रहे लोकल बॉडी इलेक्शन यानी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर एक ऐसा फैसला आया है जिसने मतदाताओं को हैरान कर दिया है. राज्य चुनाव आयोग के नए प्रावधान के तहत एक वोटर दो बार मतदान कर सकेगा. जी हां, आपने सही पढ़ा, एक ही व्यक्ति अब नगर परिषद और जिला परिषद दोनों के चुनाव में दो वोट डालने का अधिकार रखेगा. लेकिन यह बदलाव किसी गड़बड़ी या ‘डबल वोटिंग’ के लिए नहीं, बल्कि तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से किया गया है. आयोग का कहना है कि इससे मतदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित होगी. कैसे होगा यह डबल वोटिंग सिस्टम? नई व्यवस्था के तहत मतदाता सूची में कुछ नामों के आगे स्टार (*) चिन्ह लगाया जाएगा. यही स्टार इस बात का संकेत होगा कि यह व्यक्ति दो अलग-अलग निकायों यानी नगर परिषद और जिला परिषद के लिए मतदान करने का पात्र है. इसलिए ऐसे मतदाता दो बार वोट डाल सकेंगे. एक बार नगर परिषद के लिए और और दूसरी बार जिला परिषद के लिए. राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटली ट्रैक की जाएगी, ताकि कोई मतदाता एक ही निकाय में दो बार वोट न डाल सके. आयोग के अधिकारियों के अनुसार, सिस्टम को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि डुप्लिकेट वोटर की पहचान तुरंत हो जाए. इसके लिए अलग डेटाबेस और मार्किंग सिस्टम बनाया गया है. क्यों किया जा रहा है ऐसा? महाराष्ट्र के कई जिलों में स्थानीय प्रशासनिक सीमाओं का पुनर्गठन हुआ है. इससे कुछ मतदाता ऐसे क्षेत्रों में आते हैं जहां वे दो अलग-अलग निकायों यानी जिला परिषद और नगर परिषद, दोनों के अंतर्गत आते हैं. ऐसे मतदाताओं को दो बार मतदान करने की अनुमति देना जरूरी हो गया है, ताकि उनकी दोनों स्तर की स्थानीय प्रतिनिधित्व प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित की जा सके. सरल शब्दों में कहें, तो यह सिस्टम उन्हीं मतदाताओं पर लागू होगा जो दोहरी प्रशासनिक सीमाओं में आते हैं, बाकी सभी मतदाता सामान्य रूप से एक ही बार वोट डालेंगे. डुप्लिकेट वोटरों की पहचान कैसे होगी? आयोग ने कहा है कि ‘डबल स्टार (*) चिन्ह’ उन्हीं नामों के आगे लगाया जाएगा, जो दोनों निकायों की मतदाता सूचियों में आते हैं. ऐसे वोटरों की पहचान एक डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम के ज़रिए की जाएगी. मतदान केंद्र पर ई-लिस्ट और एप आधारित वेरिफिकेशन किया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति एक ही निकाय में बार-बार वोट न डाल पाए. चुनाव आयोग ने बताया क‍ि हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि स्टार मार्क्ड मतदाता वोट दो बार डालें, लेकिन अलग-अलग निकायों में. किसी भी स्थिति में वे एक ही जगह दो वोट नहीं डाल पाएंगे. डुप्लिकेट वोटरों के लिए अलग रिकॉर्ड आयोग ने बताया है कि डुप्लिकेट वोटरों का अलग रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. मतदान के बाद, दोनों सूचियों को सिंक्रनाइज किया जाएगा ताकि कोई गड़बड़ी या दोहरी गिनती न हो. इसके लिए एक नया ऐप भी लॉन्च किया जा रहा है, जिससे मतदाता अपने नाम और मतदान केंद्र की जानकारी ले सकेंगे, अपने क्षेत्र के उम्मीदवारों की पूरी जानकारी पा सकेंगे. और यह भी देख सकेंगे कि उनका नाम किस निकाय की वोटर लिस्ट में शामिल है. इस बार आयोग ने महिलाओं के लिए भी खास इंतजाम किए हैं. ‘गुलाबी मतदान केंद्र’ बनाए जाएंगे, जहां सिर्फ महिला कर्मचारी और महिला पुलिसकर्मी तैनात रहेंगी. इससे महिलाओं को सुरक्षित माहौल में वोट डालने का मौका मिलेगा.

5 नवम्बर को नवा रायपुर में रजत जयंती महोत्सव के दौरान होगा सूर्यकिरण एरोबैटिक शो

रायपुर : छत्तीसगढ़ देखेगा भारतीय वायुसेना का शौर्य 5 नवम्बर को नवा रायपुर में रजत जयंती महोत्सव के दौरान होगा सूर्यकिरण एरोबैटिक शो रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर राजधानी नवा रायपुर का आसमान 5 नवम्बर को भारतीय वायुसेना के पराक्रम और गौरव का साक्षी बनेगा। भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (Suryakiran Aerobatic Team – SKAT) इस दिन अपने अद्भुत हवाई करतबों से नवा रायपुर के आकाश को देशभक्ति, रोमांच और गर्व के रंगों से भर देगी। यह प्रदर्शन रजत जयंती समारोह का प्रमुख आकर्षण होगा। भारतीय शौर्य का आसमानी प्रदर्शन 5 नवम्बर को नवा रायपुर का आसमान गर्व, रोमांच और देशभक्ति के रंगों से सराबोर होगा। छत्तीसगढ़ की रजत जयंती पर यह “शौर्य की उड़ान” हर नागरिक के हृदय में भारतीय वायुसेना के प्रति सम्मान और गर्व की भावना को और ऊँचा उठाएगी। राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर आयोजित यह एरोबैटिक शो छत्तीसगढ़ की नई ऊँचाइयों और आत्मविश्वास का प्रतीक बनेगा। ‘बॉम्ब बर्स्ट’, ‘हार्ट-इन-द-स्काई’, ‘एरोहेड’ जैसी विश्वप्रसिद्ध फॉर्मेशन्स जब आकाश में आकार लेंगी, तब पूरा वातावरण भारतीय शौर्य और तकनीकी निपुणता से गूंज उठेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ के युवाओं में अनुशासन, टीमवर्क और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत करेगा। राज्य शासन और भारतीय वायुसेना के संयुक्त प्रयास से कार्यक्रम की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। छत्तीसगढ़ के आसमान पर बिखरेगी तिरंगे की झटा : नया रायपुर में सूर्य किरण का रोमांचक एयर शो 5 नवंबर को भारतीय वायुसेना की एरोबेटिक सूर्य किरण टीम का छत्तीसगढ़ के आसमान में रोमांचक प्रदर्शन 5 नवंबर को होगा। यह प्रदर्शन नवा रायपुर के सेंध जलाशय के उपर आसमान में होगा। छत्तीसगढ़ स्थापना की 25 वीं वर्षगांठ पर सूर्य किरण टीम के हैरतअंगेज हवाई करतब के लिए सूर्य किरण की टीम रायपुर पहुच चुकी है। रोमांच से भरे इस प्रदर्शन में सूर्य किरण टीम के 9 फाइटर प्लेन शामिल होंगे।   सूर्य किरण टीम के लीडर अजय दशरथी और अन्य सदस्यों ने सूर्य किरण टीम के प्रदर्शन को लेकर स्थानीय न्यू सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि भारतीय वायु सेना में भर्ती के लिए युवाओं को आकर्षित करने और युवाओं में देशभक्ति का जज्बा जगाने के लिए यह प्रदर्शन किया जा रहा है। यह प्रदर्शन छत्तीसगढ़ वासियों के लिए एक यादगार पल होगा। इस प्रदर्शन में छत्तीसगढ़ के फाइटर पायलेट श्री गौरव पटेल भी भाग लेंगे। सूर्य किरण टीम के 140 सदस्य रायपुर पहुंच चुके हैं। इस टीम में 12 फायटर पायलेट, 3 इंजीनियर और ग्राउड स्टाफ हैं। प्रदर्शन के दौरान वायु सेना द्वारा कामेंट्री भी की जाएगी।  सूर्य किरण टीम के प्रदर्शन में फाइटर पाइलट के शौर्य, अनुशासन और कार्यकुशलता का अनुभव दर्शकों के लिए रोमांचक और यादगार पल होगा। सूर्य किरण टीम 4 नवंबर को रिहर्सल करेगी और 5 नंवबर को सुबह 10 बजे से 12 के बीच फाइनल शो होगा।  इस प्रदर्शन में फाइटर प्लेन मनूवर करते हुए हार्ट, डायमंड, लूप, ग्रोवर, डान आदि फार्मेशन आकाश में दिखाई देगा। इसके साथ ही फाइटर प्लेन आर्कषक तिरंगा लहराते हुए आसमान में दिखेगें। सूर्य किरण का एयर शो लगभग 30 से 35 मिनट तक चलेगा।  सूर्य किरण के फाइटर प्लेन तेजी से मनूवर करते हुए 100 फीट से 10 हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं, इस शो को इस तरह से डिजाईन किया गया है कि 10 से 15 किमी के मध्य लोगों को स्पष्ट रूप से दिखाई दे और भारतीय सेना के शौर्य गाथा को महसूस कर सके।  सूर्य किरण टीम में हिदुस्तान एरोनाटिल लिमिटेड द्वारा निर्मित हाक मार्क 123 विमान शामिल है। इस फाइटर प्लेन का उपयोग फाइटर पायलेट प्रशिक्षण के दौरान भी करते हैं। रायपुर में सूर्यकिरण टीम का प्रदर्शन 15 वर्ष पूर्व किया गया था, जिसमें सूर्य किरण मार्क-2 फाइटर प्लेन ने हिस्सा लिया था।   सूर्य किरण टीम के सदस्यों ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल इंटरटेनमेंट करना ही नहीं है, बल्कि देश और प्रदेश के युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। सूर्य किरण की टीम अब तक देश-विदेश में 700 एयर शो कर चुके हैं। हाल में ही टीम ने थाइलेंड में प्रदर्शन किया था। फाइटर पायलटों ने बताया कि 8 माह के कठिन प्रशिक्षण के बाद एयर शो के लिए सक्षम हो पाते हैं। शो में जोखिम भी है, लेकिन टीम के बेहतर कॉर्डिनेशन और अटूट विश्वास के चलते एयर शो का प्रदर्शन होता है। पत्रकार वार्ता में सूर्य किरण टीम के सदस्य ग्रुप कैप्टन श्री सिद्धेश कार्तिक, स्क्वाड्रन लीडर श्री जसदीप सिंह, श्री राहुल सिंह, श्री गौरव पटेल, श्री संजेश सिंह और फ्लाइट लेफ्टिनेंट सुश्री कंवल संधू शामिल थे। जनसहभागिता से सजेगा रजत जयंती का उत्सव रायपुर सहित आसपास के जिलों से हजारों नागरिक, विद्यार्थी और परिवार इस एरोबैटिक शो के साक्षी बनेंगे। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि “आत्मनिर्भर भारत की उड़ान” का प्रतीक बनेगा। सूर्यकिरण टीम का यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि जब कौशल, समर्पण और तकनीक एक साथ उड़ान भरते हैं, तो आसमान भी झुक जाता है। भारतीय वायुसेना की गौरवशाली परंपरा 1996 में गठित सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम भारतीय वायुसेना की सटीकता और सामूहिक समन्वय की अनूठी मिसाल है। एशिया की यह एकमात्र नौ विमान वाली एरोबैटिक डिस्प्ले टीम है, जिसके विमानों के बीच की दूरी मात्र पाँच मीटर तक होती है। यह भारत की तकनीकी दक्षता, अनुशासन और साहस का अद्भुत उदाहरण है। टीम ने अपनी यात्रा की शुरुआत HJT-16 Kiran Mk-II से की थी और वर्ष 2015 में स्वदेशी तकनीक पर आधारित HAL Hawk Mk-132 Advanced Jet Trainer के साथ नई उड़ान भरी। आज सूर्यकिरण टीम युवाओं के लिए प्रेरणा का पर्याय बन चुकी है। 700 से अधिक प्रदर्शन, विश्वभर में भारत का गौरव अब तक सूर्यकिरण टीम ने 700 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन दिए हैं — श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, ब्रिटेन और थाईलैंड सहित अनेक देशों में भारत की प्रतिष्ठा को ऊँचाई दी है।2023 में टीम ने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में क्रिकेट विश्वकप के दौरान शानदार प्रस्तुति देकर खेल और राष्ट्रगौरव का अनूठा संगम प्रस्तुत किया था। *यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है कि भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम हमारे रजत जयंती समारोह का हिस्सा … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले – देश का पहला हाई-टेक वन्य जीव कैप्चर अभियान सेवा भाव और संरक्षण का प्रतीक

सेवा भाव और वन्य जीव संरक्षण का प्रतीक है देश का पहला हाई-टेक वन्य जीव कैप्चर अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक से पकड़े गए 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय किसानों की फसल बचाने दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों की मदद से हुआ अभिनव प्रयोग मुख्यमंत्री के निर्देश पर चलाया गया सफलतापूर्वक अभियान भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने के लिये शाजापुर, उज्जैन और आस-पास के इलाकों हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक का सफल प्रयोग वन्य जीवों को सुरक्षित पकड़ कर स्थानांतरित करने के लिए किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एक बार फिर संवेदनशीलता दर्शाते हुए लंबे समय से कृष्णमृगों और नीलगायों द्वारा फसलों को पहुंचाये जा रहे भारी नुकसान से बचाने के लिये जारी किये थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में किसानों की इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के लिए देश में अपनी तरह का पहला प्रयास किया गया। अभियान के अंतर्गत वन्य जीवों को बिना हानि पहुँचाए अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से पकड़ कर सुरक्षित क्षेत्रों में छोड़ा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “यह अभियान वन्य जीव संरक्षण और किसानों की सुरक्षा, दोनों के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। मध्यप्रदेश में हम ऐसा संतुलन स्थापित करना चाहते हैं जहाँ प्रकृति, वन्य जीव और किसान, तीनों सामंजस्य के साथ आगे बढ़ें।” उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा टीम ने दीपावली के दौरान भी इस अभियान में हिस्सा लिया, जो उनके सेवा और वन्य जीव संरक्षण के प्रति समर्पण भाव का प्रतीक है। हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक का अभिनव प्रयोग अभियान में दक्षिण अफ्रीका की ‘कंजरवेशन सॉल्यूशंस’ कंपनी के 15 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने प्रदेश में वन विभाग की टीम को प्रशिक्षित किया और उनके सहयोग से 10 दिन तक लगातार अभियान चलाया गया। अभियान में रॉबिन्सन-44 हेलीकॉप्टर का उपयोग किया गया। इसे इस तरह के अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है। हेलीकॉप्टर से पहले खेतों और खुले क्षेत्रों में वन्य जीवों की लोकेशन का सर्वे किया गया। इसके बाद रणनीतिक रूप से ‘बोमा’ बनाया गया। हेलीकॉप्टर की सहायता से फिर धीरे-धीरे हांका लगाकर जानवरों को सुरक्षित रूप से एक फनल (शंकु) आकार की बाड़ में प्रवेश कराया गया, जो जानवरों को भयभीत होने से बचाने के लिए घास और हरे जाल से ढंकी होती है। बोमा में आये वन्य जीवों को वाहनों से सुरक्षित रूप से अभयारण्य तक पहुँचाया गया। अभियान में अनुभवी दक्षिण अफ्रीकी पायलट के साथ भारतीय पायलट को शामिल किये गये। अभियान में सफलता पूर्वक 913 वन्य जीवों का किया गया सुरक्षित पुनर्वास लगभग दस दिनों तक चले इस अभियान में कुल 913 वन्य जीवों को सफलतापूर्वक पकड़कर पुनर्वास कराया गया। इनमें 846 कृष्णमृग और 67 नीलगाय शामिल हैं। सभी नीलगायों को गांधीसागर अभयारण्य के 64 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में छोड़ा गया। कृष्णमृगों को गांधीसागर, कूनो और नौंरादेही अभयारण्यों के उपयुक्त स्थानों पर पुनर्स्थापित किया गया। अभियान में वन्य जीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। सभी वन्य जीव अब अपने नए आवासों में स्वच्छंद होकर विचरण कर रहे हैं। अभियान के अंतिम दिन भी 142 कृष्णमृग पकड़े गए। प्रशासनिक और विशेषज्ञों की निगरानी में चला अभियान अभियान की हर गतिविधि की सतत् निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्य जीव अभिरक्षक शुभरंजन सेन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक (चीता प्रोजेक्ट) उत्तम शर्मा और मुख्य वन संरक्षक उज्जैन एम.आर. बघेल स्वयं अभियान स्थल पर उपस्थित रहे। इस अभियान में वाइल्ड लाइफ एवं फॉरेस्ट्री सर्विस के डॉ. कार्तिकेय ने तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे इससे पहले गौर (बाइसन) ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। शाजापुर विधायक अरुण भीमावद ने भी अभियान स्थल पर पहुंचकर इस अभिनव पहल की सराहना की। अभियान की सफलता पर एसीएस फॉरेस्ट अशोक बर्णवाल और वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्हीएन अम्बाडे भी टीम को बधाई दी गई। प्रशिक्षण और भविष्य की रणनीति वन विभाग ने वन्य जीवों के पुनर्वास के चलाये गये अभियान में एक विशेष प्रशिक्षित दल तैयार किया है, जो दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर चुका है। यह दल भविष्य में राज्य के अन्य जिलों में भी इस प्रकार के कैप्चर ऑपरेशन्स संचालित करेगा। जिला प्रशासन और ग्रामीण समुदाय ने इस अभियान में सक्रिय सहभागिता की। अभियान के दौरान यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि इस तकनीक से किसी भी वन्य जीव को बेहोश (ट्रैंक्युलाइज) करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। वन्य जीवों को पकड़ने की यह जिससे पूरी प्रक्रिया और अधिक सुरक्षित और प्राकृतिक बनी रही। अभियान से किसानों को मिली राहत नील गायों और कृष्णमृग के पुनर्वास अभियान के परिणामस्वरूप शाजापुर और आसपास के क्षेत्रों के किसानों ने राहत की सांस ली है। कृष्णमृग और नीलगायों द्वारा फसलों को रौंदने और खाने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे किसानों की आर्थिक हानि में कमी आयेगी और वन्य जीव-मानव के बीच सह-अस्तित्व की भावना भी सशक्त होगी। अभियान न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे भारत के लिए एक नवीन उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह सिद्ध करता है कि आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और जनसहयोग से मानव-वन्य जीव संघर्ष को मानवीय और वैज्ञानिक तरीकों से हल किया जा सकता है। भविष्य में वन विभाग ऐसे और अभियानों को अन्य जिलों में भी चलाने की योजना बना रहा है, जिससे किसानों को राहत मिले, वन्य जीव सुरक्षित रहें और पर्यावरणीय संतुलन कायम रहे। अभियान को सफल बनाने में वन विभाग, दक्षिण अफ्रीका की ‘कंजरवेशन सॉल्यूशंस’ टीम, स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभाग, और ग्रामीणों का अभूतपूर्व सहयोग रहा।  

पेपर कप में चाय पीना है हानिकारक, IIT खड़गपुर ने किया खतरनाक माइक्रोप्लास्टिक रिसर्च में खुलासा

भोपाल  लोगों को ऐसा लगता है कि पेपर कप का हमारी सेहत पर कोई असर नहीं होता, लेकिन डॉक्टर्स ऐसा नहीं मानते. बता दें की पेपर कप्स को बनाने में मोम या प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है और जब इसमें गर्म चीज डाली जाती है, तो इसमें कैमिकल्स मिल जाते हैं. ऐसे में अगर आप भी इन कप का इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए. आइए पेपर कप से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से जानते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति जो दिन में तीन कप चाय पीता है, वह हर दिन लगभग 75,000 सूक्ष्म प्लास्टिक कण निगल रहा है। जो न केवल शरीर के लिए हानिकारक हैं, बल्कि कैंसर, हार्मोनल और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इस रिसर्च के सामने आने के बाद भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे मिट्टी (कुल्हड़), स्टील या कांच के कप का इस्तेमाल करें और अपनी सेहत को इन ‘साइलेंट टॉक्सिन्स’ से बचाएं। अब जानते हैं शोध में क्या बताया गया… हाइड्रोफोबिक फिल्म है हानिकारक– आईआईटी खड़गपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुधा गोयल और उनके शोध सहयोगी वेद प्रकाश रंजन और अनुजा जोसेफ द्वारा किए गए इस अध्ययन में यह साबित किया गया कि पेपर कप की भीतरी परत में इस्तेमाल होने वाली पतली हाइड्रोफोबिक फिल्म, जो तरल को कप में रोकने के लिए लगाई जाती है। गर्म तरल के संपर्क में आते ही टूटने लगती है। यह फिल्म पॉलीइथिलीन या अन्य को-पॉलिमर से बनी होती है और जब इसमें गर्म पानी (85–90°C) डाला जाता है, तो 15 मिनट के भीतर यह सूक्ष्म कणों में बदलकर पेय पदार्थ में घुल जाती है। गंभीर बीमारी का बनते हैं कारण- रिसर्च के अनुसार, हर 100 मिलीलीटर गर्म तरल में लगभग 25,000 माइक्रो प्लास्टिक कण मिल जाते हैं। ये इतने छोटे होते हैं कि आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन शरीर में जाकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रिसर्च में पाया गया कि ये कण भारी धातुओं जैसे पैलेडियम, क्रोमियम और कैडमियम के वाहक के रूप में काम करते हैं। जब ये शरीर में प्रवेश करते हैं, तो वे अंगों में जमा होकर हार्मोन असंतुलन, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और इम्यून सिस्टम की गड़बड़ी जैसी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं। पेपर कप के नुकसान  पेपर कप बनाने में केमिकल्स और माइक्रोप्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है. ये कप गर्म चीज के संपर्क में आकर घुल जाते हैं, जिससे थायरॉइड और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है. इन कप में बिसफेनोल और बीपीए केमिकल भारी मात्रा में मौजूद होते हैं. जब इनमें गर्म चाय या कॉफी डाली जाती है, तो उसमें मौजूद केमिकल इनमें घुलने लगते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकते हैं पेपर कप न केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं. इन्हें डिस्पोज करना मुश्किल होता है और जलाने पर ये हार्मफुल केमिकल्स छोड़ते हैं.  पेपर कप के इस्तेमाल से एसिडिटी और पेट की अन्य समस्याएं हो सकती हैं, क्योंकि गर्म चीज के संपर्क में आने पर ये छोटे-छोटे कणों में टूटकर घुल जाते हैं. क्या करें इस्तेमाल? अगर आप इन बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं, तो पेपर कप के इस्तेमाल से बचें. इसकी बजाय आप चीनी मिट्टी या स्टेनलेस स्टील कप को इस्तेमाल कर सकते हैं. यह न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा होगा बल्कि अपके स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होगा. पेपर कप बढ़ाता है कैंसर की संभावना एक्सपर्ट्स के अनुसार, जब कोई व्यक्ति कैंसर से ग्रसित पाया जाता है तो उसका सिर्फ कोई एक कारण नहीं होता है। व्यक्ति के शरीर में मौजूद रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट आना, खराब दिनचर्या, शरीर में टाक्सीसिटी का लेवल बढ़ाना, कैंसर कॉजिंग सेल्स की तेज ग्रोथ जैसे कई फैक्टर शामिल होते हैं। पेपर कप और प्लास्टिक कब से निकलने वाला माइक्रो प्लास्टिक इन्हीं फैक्टर को बढ़ावा देते हैं। जिससे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। भोपाल स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी आईआईटी खड़गपुर की इस रिपोर्ट के बाद भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेपर कप में गर्म पेय पदार्थों का सेवन बंद करें। सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए घर से अपना कप साथ लाएं। इसके अलावा बाजार में मिट्टी (कुल्हड़), कांच या स्टील के कप का उपयोग करें। प्लास्टिक या पेपर लाइनिंग वाले डिस्पोजेबल कप का उपयोग न करें। भोपाल में ही रोजाना 15 लाख पेपर कप इस्तेमाल होते पेपर कप का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। भोपाल के थोक विक्रेता रविकांत द्विवेदी के अनुसार राजधानी भोपाल में ही अकेले रोजाना लगभग 15 लाख पेपर कप यूनिट की खपत होती है। यह अनुमानित आंकड़ा है। दरअसल, चाय-दुकान, फूड कोर्ट, रेलवे स्टेशन आदि में होने वाला उपयोग अधिक हो सकता है। इन कप्स में इस्तेमाल होने वाली कोटिंग में 100% पेपर नहीं ये पेपर कप पूरी तरह पेपर के नहीं होते। उनके अंदरूनी हिस्से को लीक-रोधी बनाने के लिए एक प्लास्टिक फिल्म या वैक्स कोटिंग लगाई जाती है। यह भी पाया गया कि जब गर्म पेय पेपर कप में दिया जाता है, तो इस कोटिंग से माइक्रोप्लास्टिक और अन्य रसायन निकलते हैं। अब जानिए माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में कैसे असर डालते हैं? हाल के अध्ययनों से संकेत मिलता है कि पेपर कप से माइक्रोप्लास्टिक (छोटे-छोटे प्लास्टिक कण) पेय में मिल सकते हैं। पूर्व सिविल सर्जन डॉ. राकेश श्रीवास्तव बताते हैं कि शरीर में माइक्रोप्लास्टिक जमा होने से ऑक्सीडेटिव तनाव, जीन में बदलाव, सूजन (inflammation) आदि हो सकते हैं। जिससे कैंसर, न्यूरोलॉजिकल और हारमोंस से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है। प्लास्टिक और फोम कप भी खतरनाक प्लास्टिक कप ये सीधे प्लास्टिक सामग्री से बने होते हैं। इनमें BPA (Bisphenol-A), PFAS और अन्य रसायन पाए जाते हैं, जो गर्म पेय आने पर निकलकर हमारे शरीर में पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क से हार्मोनल असंतुलन, लिवर-किडनी पर असर और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। यह कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। फोम कप ये कप Styrene नामक रसायन से बनते हैं, … Read more

अविवाहित युवतियों में भी समस्या, भारी ब्रेस्ट से पीठ दर्द बढ़ा; एम्स में 246 सर्जरी

नई दिल्ली कई लोगों को अपने जीवन में कभी न कभी पीठ दर्द का अनुभव होता है। कुछ लोगों के लिए, यह तनाव, गलत मुद्रा, अत्यधिक परिश्रम, अधिक वजन और कई अन्य कारकों के कारण हो सकता है। कई महिलाओं में पीठ दर्द का एक प्रमुख कारण बड़े स्तन हैं। बड़े स्तन पीठ दर्द का कारण कैसे बनते हैं? डी-कप स्तनों का वज़न 16 से 24 पाउंड के बीच हो सकता है। इस आकार के स्तन छाती पर अनावश्यक दबाव डाल सकते हैं, जिसके लिए गर्दन, कंधों और पीठ पर संतुलन बनाए रखना ज़रूरी होता है। इन सभी कारणों से मांसपेशियों में खिंचाव और लगातार दर्द हो सकता है। अतिरिक्त वज़न मुद्रा संबंधी समस्याओं को भी जन्म दे सकता है, क्योंकि मांसपेशियां सीधी रहने के लिए संघर्ष करते-करते थकने लगती हैं और पीठ का ऊपरी हिस्सा आगे की ओर झुकने लगता है। पीठ और गर्दन का दर्द, बार-बार थकान और भारीपन का एहसास को कई महिलाएं सामान्य समझकर सालों तक नजरअंदाज करती हैं। लेकिन अब डॉक्टर बता रहे हैं कि इसके पीछे की वजह ब्रेस्ट हाइपर ट्रॉफी यानी ब्रेस्ट का असामान्य रूप से बड़ा होना भी है। एम्स भोपाल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग में पिछले एक साल में 246 महिलाओं ने ब्रेस्ट से जुड़ी सर्जरी कराई हैं, जिनमें से 23.5% यानी 57 महिलाओं की ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी हुई। जिसमें सबसे ज्यादा मरीज 20 से 30 साल की युवतियां हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बढ़ता हार्मोनल इम्बैलेंस, बदलती जीवनशैली और तनाव इस समस्या की बड़ी वजह हैं। यही कारण है कि ब्रेस्ट सर्जरी अब सिर्फ कॉस्मेटिक नहीं, बल्कि मेडिकल जरूरत बन गई है। शरीर को लेकर जागरूक हो रही महिलाएं एम्स भोपाल की रिपोर्ट बताती है कि बीते 4 से 5 सालों में भोपाल समेत मध्यप्रदेश में महिलाएं अपने शरीर को लेकर अधिक जागरूक हुई हैं। दर्द झेलने या पेनकिलर लेने की बजाय अब वे स्थायी समाधान चुन रही हैं। साल 2019 में एम्स भोपाल में 100 के करीब ही ब्रेस्ट से जुड़ी सर्जरी हुई थीं, जो अब बढ़कर 250 के करीब पहुंच गई हैं। ब्रेस्ट हाइपर ट्रॉफी एक गंभीर समस्या एम्स भोपाल के बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मनाल खान बताते हैं कि ब्रेस्ट का असामान्य रूप से बड़ा होना ब्रेस्ट हाइपर-ट्रॉफी कहलाता है। यह स्थिति न केवल शारीरिक असहजता पैदा करती है, बल्कि आत्मविश्वास को भी प्रभावित करती है। इन मरीजों को अक्सर कंधे और गर्दन में दर्द, थकान और स्किन इन्फेक्शन होता है। ब्रेस्ट रिडक्शन सर्जरी से हम उनका साइज बॉडी स्ट्रक्चर के अनुसार करते हैं, जिससे उनकी जीवनशैली सहज हो जाती है। डॉ. खान ने बताया कि एम्स एक सेंट्रल गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट है, इसलिए यहां सर्जरी का खर्च बहुत कम है। ओटी चार्ज, बेड चार्ज और सर्जिकल फीस सभी सरकारी दरों पर हैं। यदि मरीज आयुष्मान कार्डधारक नहीं भी है, तब भी उसे न्यूनतम खर्च में इलाज मिल जाता है। हर सर्जरी से पहले काउंसलिंग अनिवार्य डॉ. खान ने कहा कि हर सर्जरी में कुछ रिस्क होता है, इसलिए मरीज को पहले ही बताया जाता है। हम पहले उसकी मेडिकल कंडीशन, मानसिक स्थिति और फिजिकल पैरामीटर्स का आकलन करते हैं। सर्जरी के बाद रेगुलर फॉलो-अप जरूरी होता है ताकि किसी तरह का इन्फेक्शन या निशान न बने। सर्जरी के बाद मरीजों को एंटीबायोटिक्स और पेन रिलीफ मेडिसिन दी जाती हैं। इसके अलावा ब्रेस्ट सपोर्ट गारमेंट्स पहनने के निर्देश दिए जाते हैं। ब्रेस्ट सर्जरी ने ऐसे बदली जिंदगी एम्स में एक सरकारी महिला कर्मचारी का केस डॉक्टरों के लिए यादगार रहा। उन्हें पोलैंड सिंड्रोम नामक स्थिति थी, जिसमें जन्म से एक साइड का ब्रेस्ट विकसित नहीं होता। डॉ. खान बताते हैं कि इस वजह से उन्हें आत्मग्लानि और सामाजिक परेशानी झेलनी पड़ी। हमने उनका ब्रेस्ट इंप्लांट किया, जिससे वे सामान्य जीवन जीने लगीं। हाल ही में उन्होंने शादी की और धन्यवाद देने एम्स लौटीं। ब्रेस्ट साइज असमानता के मामले बढ़े विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव सिंह के अनुसार, कई महिलाओं में दोनों ब्रेस्ट का आकार एक जैसा नहीं होता। इसे Amastia कहा जाता है। एम्स में ऐसे मरीजों को इंप्लांट या ब्रेस्ट एक्सपैंडर की मदद से दोनों ओर समान आकार दिया जाता है। सर्जरी के बाद नियमित फॉलोअप बेहद जरूरी है। मरीज को एक या दो सप्ताह बाद जांच करानी होती है, फिर दो महीने बाद अंतिम समीक्षा की जाती है। ब्रेस्ट सर्जरी के बाद यह सावधानी जरूरी     ब्रेस्ट पर अत्यधिक दबाव न डालें     सही फिटिंग वाला सपोर्ट गारमेंट पहनें     धूल, पसीना और संक्रमण से बचें नई तकनीक- 3डी प्रिंटर से तैयार होगा कैंसर ग्रसित स्तन एम्स में अब 3डी प्रिंटर से कैंसर ग्रसित ब्रेस्ट मॉडल तैयार किया जाएगा, जो हर मरीज की डिटेल के अनुसार बनेगा। डॉक्टर उस पर प्रयोग कर यह जान सकेंगे कि मरीज के लिए सबसे बेहतर उपचार तकनीक क्या होगी, जिससे मरीज को उसके अनुसार सर्वोत्तम इलाज मिल सके। एम्स में पॉलीजेट डिजिटल एनाटमी प्रिंटर मौजूद है। यह प्रिंटर शरीर के अंग जैसे नकली अंग तैयार करता है, जिनमें नसों, मांसपेशियों और आकार को असली शरीर जैसा बनाया जाता है। शुरुआती चरण में 10 ब्रेस्ट कैंसर पीड़ितों के नकली स्तन तैयार किए जाएंगे, जिन पर अलग-अलग दवाओं का परीक्षण होगा और जो उपचार सबसे बेहतर होगा, वही मरीज को दिया जाएगा। सबसे ज्यादा मामले ब्रेस्ट कैंसर के इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर के मामले 2.3% बढ़े हैं। महिलाओं में कुल कैंसर मामलों में सबसे अधिक 33.9% ब्रेस्ट कैंसर हैं।इसके बाद 12.1% सर्विक्स कैंसर और 7.9% ओवरी कैंसर के केस दर्ज किए गए हैं।

मध्य प्रदेश में इतिहास रचा सुनीता ने किया नक्सली सरेंडर, जानें क्यों मिली 4 लाख रुपये

बालाघाट मध्य प्रदेश में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए यह एक बहुत बड़ी सफलता है. 33 साल में पहली बार, राज्य में किसी नक्सली ने आधिकारिक तौर पर आत्मसमर्पण किया है. 31 अक्टूबर को बालाघाट में 23 साल की नक्सली सुनीता ने हॉक फोर्स (Hawk Force) के सामने हथियार डाल दिए.यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि आखिरी ऐसा सरेंडर साल 1992 में हुआ था, जब छत्तीसगढ़ राज्य, मध्य प्रदेश का ही हिस्सा था. नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ बनने के बाद से अब तक मध्य प्रदेश में एक भी नक्सली ने आत्मसमर्पण नहीं किया था. महिला नक्सली ने सुरक्षा बलों के सामने अपने आप को समर्पित कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया. इस आत्मसमर्पण के बदले उसे कुल 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम दिया गया है.इससे पहले बालाघाट की पांच महिला नक्सलियों ने आत्मसमर्पण तो किया था, लेकिन उनमें से किसी ने भी हथियार नहीं सौंपे थे. इस बड़ी कामयाबी को हॉक फोर्स की बड़ी सफलता माना जा रहा है. वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी X पर पोस्ट कर जानकारी दी है कि आत्मसमर्पण नीति के तहत यह पहला नक्सली सरेंडर है. पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बालाघाट के ग्राम चोरिया में स्थापित हो रहे नए हॉक फोर्स कैंप में 22 वर्षीय महिला नक्सली सनीला उर्फ सुनीता आयाम ने आत्मसमर्पण किया. सनीला वर्ष 2024 से नक्सल संगठन के एमएमसी जोन प्रभारी और सीसी मेंबर रामदेर की हथियारबंद गार्ड के रूप में सक्रिय थी. वह मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल थी. बताया जा रहा है कि सीसी मेंबर रामदेर पर तीनों राज्यों की ओर से मिलाकर लगभग 3 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है. ऐसे में उसकी गार्ड रही सनीला का आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. उसने आत्मसमर्पण के समय इंसास राइफल, तीन मैगजीन में 30 जिंदा कारतूस, एक बीजीएल और अन्य सामग्री पुलिस को सौंपी. कुल मिलाकर मिला 4 लाख का इनाम आत्मसमर्पण नीति के तहत, सुनीता को तुरंत 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई. इसके अलावा, इंसास राइफल के लिए साढ़े तीन लाख रुपये और तीन मैगजीन के लिए दस हजार रुपये का इनाम दिया गया है. इस तरह कुल मिलाकर उसे 4 लाख 10 हजार रुपये का इनाम मिला है. समाज के विकास में योगदान देना चाहती है पुलिस ने बताया कि सुनीता के पिता भी पहले छत्तीसगढ़ में नक्सल संगठन से जुड़े थे, जिन्होंने हाल ही में सितंबर 2025 में आत्मसमर्पण किया था. पूछताछ के दौरान सुनीता ने बताया कि वह राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहती थी. उसने यह भी कहा कि जंगलों में हिंसा और भय का जीवन छोड़कर अब वह समाज के विकास में योगदान देना चाहती है. इसके साथ ही सुनीता का कहना है कि वह अपने पिछले कल में लौटना नहीं चाहती न हीं उसे दोहराना. और भी नक्सली कर सकते हैं आत्मसमर्पण हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने महिला नक्सली से पूछताछ की जिसमें उसने बताया कि उसने कुछ हथियार जंगल में छिपा रखे हैं. इसके बाद सेनानी शियाज के नेतृत्व में सहायक सेनानी अखिलेश गौर और रूपेंद्र धुर्वे की टीम ने गोपनीय सर्च ऑपरेशन चलाकर जंगल से छिपाए गए हथियार बरामद कर लिए. इस प्रकार यह आत्मसमर्पण अभियान पूर्णतः सफल रहा. विशेषज्ञों का मानना है कि सुनीता के सरेंडर के बाद बालाघाट क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सली भी आने वाले दिनों में आत्मसमर्पण कर सकते हैं. इस सफलता के बाद पुलिस महानिरीक्षक संजय सिंह और पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने हॉक फोर्स की सराहना की और टीम को इनाम देने की घोषणा की. सीएम मोहन यादव ने किया एक्स पर पोस्ट इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने एक्स पर पोस्ट करते हुए इस आत्मसमर्पण की प्रशंसा की. उन्होंने लिखा- प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला नक्सली सरेंडर है. यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य नक्सल नियंत्रण के लक्ष्य की ओर अग्रसर है. मध्य प्रदेश पुलिस को नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण में लगातार सफलता मिल रही है. 1 नवंबर को बालाघाट जिले के लांजी थाने अंतर्गत चोरिया कैंप में 14 लाख की इनामी महिला नक्सली सुनीता ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया. यह प्रदेश की प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के तहत पहला समर्पण है. पूर्व में भी नक्सलियों के समर्पण और मुठभेड़ों में पुलिस को सफलता मिलती रही है. साल 2022 में जुड़ी थी माओवादी संगठनों से हॉक फोर्स के डीएसपी अखिलेश गौर ने बताया कि सशस्त्र हार्डकोर की 22 वर्षीय महिला नक्सली छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के गोमवेटा भैरमगढ की रहने वाली है. उसका नाम सलीना उर्फ सुनीता पिता बिसरु ओयाम है. यह महिला नक्सली एसीएम के पद पर रहते हुए सेंट्रल कमेटी के प्रमुख सदस्य सीसीएम रामदेर नक्सली की सुरक्षा गार्ड रह चुकी है. जो वर्ष 2022 में माओवादी संगठनों से जुड़ी थी, जिसने माड़ क्षेत्र में 06 महीने का प्रशिक्षण लिया और फिर सेंट्रल कमेटी के सदस्य रामदेर के सुरक्षा गार्ड के रूप में माड़ क्षेत्र में काम करना शुरू किया. ऐसे पहुंची आत्मसमर्पण के लिए सुनीता सुनीता, रामदेर की 11 सदस्यी टीम के साथ एमएमसी जोन दर्रेकसा क्षेत्र पहुंची जहां जीआरबी डिवीजन में सक्रिय थी और मलाजखंड दर्रेकसा दल में एसीएम के पद पर थी, जिस पर कुल 14 लाख का ईनाम घोषित था. सुनीता इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी के साथ दलम से अलग होकर निकल गई. इसके बाद उसने जंगल में इंसास राइफल, विंडोरी बैग, पिट्ठू बैग और वर्दी को डंप में छिपाया, फिर आत्मसमर्पण करने के उद्देश्य से पुलिस कैंप चौरिया पहुंची.

पहले चरण की वोटिंग से पहले सियासी संग्राम थमा! Bihar Election 2025 में तेजस्वी-खेसारी के बीच मुकाबला रोचक

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहले चरण में 6 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए आज चुनाव प्रचार खत्म हो गया। पहले चरण में राज्य के कुल 121 विधानसभा सीटों पर मतदान होने वाले हैं। इसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है। पहले चरण के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन सभी दलों ने जनता को अपने पक्ष में वोट करने के लिए अपील किया। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुख्य मुकाबला दो मुख्य गठबंधनों, एनडीए और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है लेकिन प्रशांत किशोर की जन सुराज ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। एनडीए में जहां भाजपा, जनता दल (यूनाइटेड), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। वहीं महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, वीआईपी, भाकपा, भाकपा-माले और माकपा साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।    पहले चरण के प्रमुख विधानसभा क्षेत्र पहले चरण के लिए लिए अगर प्रमुख विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो तारापुर में उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (भाजपा) और राजद के अरुण कुमार के बीच के मुकाबले पर सबकी नजर रहेगी। वहीं इस चरण पूरे बिहार नजर  राजद के पारंपरिक गढ़ राघोपुर पर रहने वाली है। यहां से महागठबंधन के सीएम कैंडिडेट तेजस्वी यादव का मुकाबला भाजपा के सतीश कुमार यादव से होने वाला है।  इसके अलावा महुआ विधानसभा सीट पर भी सबकी निगाहें रहने वाली है। यहां मुख्य मुकाबला लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के तेज प्रताप यादव और मुकेश कुमार रौशन के बीच माना जा रहा है। महुआ में तेजस्वी की रैली ने इस सीट पर परिवार की लड़ाई और तेज कर दी है। साथ ही अलीनगर और छपरा सीट पर सबकी नजरें रहने वाली है। अलीनगर से भाजपा की मैथिली ठाकुर तो छपरा से खेसारी लाल यादव चुनावी मैदान में हैं। पहले चरण के प्रमुख उम्मीदवार बिहार चुनाव के पहले चरण में कई दिग्गजों के किस्मत का फैसला होने वाला है। जिसमें  राजद नेता तेजस्वी यादव से लेकर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा का नाम शामिल है। इसके अलावा लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा नाम भी शामिल है। साथ ही भोजपुरी के ट्रेंडिंग स्टार खेसारी लाल यादव और मैथिली ठाकुर के भाग्य का फैसला भी पहले चरण में ही होने वाला है। चुनाव आयोग के आंकड़ों को देखें तो पहले चरण में कुल 1,314 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।   

बिहार में चुनावी रफ्तार तेज! अमित शाह ने किए बड़े वादे – डिफेंस कॉरिडोर से लेकर रामायण सर्किट तक

दरभंगा बिहार में पहले चरण  के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह ने दरभंगा के जाले में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधा और जनता से कई वादे किए। अमित शाह ने कहा कि बिहार ने 15 साल लालू व राबडी के जगंल राज को देखा। अब वह इसको फिर से वापस लाना चाहते हैं। हमारा काम जंगल राज को रोकना और दरभंगा को विकसित जिला बनाना है। शाह ने कहा कि लालू राबडी 15 साल तक मुख्यमंत्री थे, उन्होंने दरभंगा के लिए क्या किया? दरभंगा में एम्स बनाने का काम मोदीजी ने किया। किसी को पटना- दिल्ली जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि एक माई कह रही थी कि एम्स बन जाएगा, इलाज के लिए रुपया कहां से आएगा। मोदी सरकार ने तीन करोड़ से अधिक लोगों का इलाज मुफ्त कर दिया है। दरभंगा का आइटी पार्क बिहार के युवाओं को नौकरी व रोजगार देने का काम करेगा।   अमित शाह ने लगाई वादों की झड़ी  शाह ने कहा कि पूरे मिथिला क्षेत्र में संभावनाओं का अंबार लगने वाला है। पुनौराधाम में साढे आठ सौ करोड़ से मां सीता का भव्य मंदिर बन रहा है। इसे रामायण सर्किट से भी जोड़ने वाले हैं। अयोध्या से सीतामढ़ी के बीच 45 सौ करोड़ से एक नया रेल मार्ग बनाएंगे, वंदे भारत ट्रेन शुरू होगा। 250 करोड़ से जाले का बाइपास बन रहा है। दरभंगा में मेट्रो भी चलने वाला है। जाले में सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र भी नरेन्द्र मोदी बना रहे हैं। एक करोड़ 41 लाख जीविका दीदी के अकाउंट में 10 हजार रुपये डालने का काम हुआ है। लालू की पार्टी ने चुनाव आयोग को रुपया वापस लेने के लिए पत्र लिखा है। हम पांच साल में जीविका दीदी के अकाउंट में दो लाख रुपये डालने का काम करेंगे। बिहार में 10 नए औद्योगिक पार्क बनाएंगे। बिहार में डिफेंस कॉरिडोर बनाएंगे। बिहार में बने गोले से देंगे पाकिस्तान को जवाब: अमित शाह  अमित शाह ने कहा कि पहलगाम में आतंकियों ने निर्दोष लोगों को मार दिया। मोदी जी ने आपरेशन सिंदूर करके आतंकवादियों का सफाया किया। बिहार में बने तोप के गोले से आतंकवादियों को जवाब देने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार बनने के बाद किसानों को छह की जगह नौ हजार रुपये दिए जाएंगे। दरभंगा समेत चार एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय बनाने का काम किया जाएगा। एक करोड़ 17 लाख माताओं को उज्जवला योजना का सिलेंडर देने का काम किया है। बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना की है। 36 हजार करोड़ से कोसी के पानी को किसानों के खेत तक पहुंचाएंगे। बिहार को बाढ़ मुक्त बनाने का काम करेंगे। लालू-राबड़ी पर बोला हमला  उन्होंने पूछा- लालू-राबडी ने कुछ किया था क्या? चारा घोटाला किसने किया? अलकतरा का घोटाला किसने किया? वर्दी घोटाला किसने किया? बाढ़ राहत का घोटाला किसने किया? भीड़ से आवाज आई लालू ने। मोदी जी ने 11 साल और नीतीश कुमार ने 20 साल शासन किया कोई घोटाला किया क्या? सीएम और पीएम की कोई वैकेंसी नहीं है। आपकी चिंता केवल नरेन्द्र मोदी एवं नीतीश कुमार कर सकते हैं। राहुल ने जाले में घुसपैठिया बचाओ यात्रा निकाले थे। हम देश से चुन-चुनकर घुसपैठिया निकालेंगे। मोदी जी की मां के लिए इसी भूमि पर अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया गया। जब- जब राहुल बाबा ने मोदी के लिए अपशब्द कहे, मोदी प्रचंड बहुमत से जीतकर आए। नरेन्द्र मोदी बिहार को विकसित राज्य बनाएंगे।