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उमा भारती ने दी चेतावनी, 2029 के लोकसभा चुनाव में हिस्सेदारी पक्की

जबलपुर   मध्यप्रदेश की पूर्व सीएम और भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमा भारती ने 2029 का लोकसभा चुनाव जरूर लड़ने का ऐलान किया है। जबलपुर में गोपाष्टमी पर्व के मौके पर गोसंवर्धन संकल्प सभा में पहुंची थीं और इसी दौरान उन्होंने मंच से ये ऐलान किया। उमा भारती ने कहा कि वो साल 2029 में लोकसभा का चुनाव जरूर लड़ेंगी। क्योंकि सांसद और मंत्री बनने से आम जनता का भला करने का मौका मिलता है। साथ ही यह भी कहा कि उन्होंने चुनाव लड़ने से उनने कभी इंकार नहीं किया था, बस उसे टाला था। 'लाड़ली बहनों को पैसों के साथ मिले एक-एक गाय' गोसंवर्धन संकल्प सभा को संबोधित करते हुए उमा भारती ने गाय का जिक्र करते हुए कहा कि गाय सेक्युलेरिज्म के चक्कर में फंस गई है। कई नेता डर के मारे गाय पर बोलने से बचते हैं। क्योंकि उन्हें यह लगता है कि धर्म विशेष का वोटर नाराज हो जाएगा। उमा भारती ने आगे कहा कि लाड़ली बहनों को जो राशि मिल रही है वो तो मिलनी ही चाहिए लेकिन इसके साथ ही लाड़ली बहनों को एक-एक दुधारू गाय भी देनी चाहिए। इससे उनकी आमदनी 3 हजार से बढ़कर 10 हजार तक हो जाएगी। वहीं उन्होंने कहा राम के नाम पर पूरा भारत एक हुआ। लेकिन भगवान के कार्य पूरे नहीं हुए हैं। ललितपुर से चुनाव लड़ने की जता चुकी हैं इच्छा बता दें कि उमा भारती बीते दिनों यूपी के ललितपुर के दौरे पर थीं और तब उन्होंने वहां पर भी 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। तब उन्होंने कहा था कि यदि पार्टी अनुमति देती है तो वे 'अगला लोकसभा चुनाव झांसी लोकसभा सीट' से लड़ेंगी। उमा ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर भी अपनी इच्छा जाहिर कर दी थी । सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा था कि 'अगर पार्टी कहेगी तो मैं चुनाव जरूर लड़ूंगी, लेकिन मैं सिर्फ झांसी से ही चुनाव लड़ूंगी।' तब उन्होंने ये भी कहा था कि उनका बुंदेलखंड क्षेत्र से गहरा जुड़ाव है, और वे चाहेंगी कि आने वाले लोकसभा चुनाव में बुंदेलखंड की जनता एक बार फिर उन्हें लोकसभा तक पहुंचाए।

SBI क्रेडिट कार्ड से वॉलेट रिचार्ज अब महंगा, 1 नवंबर से लागू होंगे नए नियम

मुंबई  एसबीआई कार्ड अपनी फीस स्ट्रक्चर और दूसरे चार्जेस में बदलाव करने वाला है. ये नए नियम 1 नवंबर 2025 से लागू हो जाएंगे. एसबीआई कार्ड के स्टेटमेंट में साफ कहा गया है कि खासकर एजुकेशन से जुड़े पेमेंट्स और वॉलेट लोड जैसे ट्रांजेक्शंस पर ज्यादा फीस लगेगी. ये बदलाव आपकी जेब पर असर डाल सकते हैं. राहत की बात ये है कि अगर आप डायरेक्ट इंस्टीट्यूशन को पेमेंट करेंगे, जैसे उनके ऑफिशियल वेबसाइट से या कैंपस पर लगे पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) टर्मिनल्स से, तो कोई फीस नहीं लगेगी. एजुकेशन पेमेंट्स पर चार्ज 1 नवंबर से अगर आप थर्ड-पार्टी ऐप्स जैसे एग्रीगेटर्स या पेमेंट ऐप्स से स्कूल, कॉलेज या किसी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन को फीस भरेंगे तो ट्रांजेक्शन अमाउंट का 1 प्रतिशत फीस लगेगी. एसबीआई कार्ड की नोटिफिकेशन में साफ है कि ये फीस एजुकेशनल पेमेंट्स पर लागू होगी. वहीं, डायरेक्ट इंस्टीट्यूशन को पेमेंट करेंगे तो ये फीस नहीं लगेगी. यानी कार्ड यूजर्स अगर स्कूल या कॉलेज की ऑफिशियल पेमेंट चैनल्स चुनेंगे तो 1 प्रतिशत से बच जाएंगे. एसबीआई कार्ड की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, 1 नवंबर 2025 से थर्ड-पार्टी ऐप्स से एजुकेशन पेमेंट्स पर 1 प्रतिशत फीस लगेगी, लेकिन डायरेक्ट कॉलेज या स्कूल की वेबसाइट या पीओएस मशीन से पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. वॉलेट लोड ट्रांजेक्शंस 1000 रुपये से ज्यादा के वॉलेट लोड पर भी 1 प्रतिशत चार्ज लगेगा. यानी हर बार जब आप डिजिटल वॉलेट में 1000 से ऊपर का बैलेंस ऐड करेंगे, तो लोडेड अमाउंट का 1 प्रतिशत कट जाएगा. मिसाल के तौर पर, 2000 रुपये लोड करने पर 20 रुपये की फीस कटेगी. एसबीआई कार्ड वेबसाइट कहती है कि 1 नवंबर 2025 से हर वॉलेट लोड ट्रांजेक्शन जो 1000 रुपये से ज्यादा हो, पर 1 प्रतिशत फीस अमाउंट का लागू होगा. ये छोटा सा चार्ज लग सकता है लेकिन महीने भर में जुड़ जाए तो बोझ बन जाता है. बैंक खातों में अब जोड़ सकेंगे 4 नॉमिनी 1 नवंबर से बैंक खाताधारकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। अब एक खाते में 4 तक नॉमिनी जोड़ सकते हैं। अब तक सिर्फ एक ही नॉमिनी जोड़ने की सुविधा मिलती थी लेकिन अब चार लोग जोड़ सकते हैं। नए नियमों के अनुसार ग्राहक चाहें तो सभी नॉमिनियों को एक साथ या क्रमवार तरीके से जोड़ सकते हैं। इसका फायदा यह होगा कि किसी अनहोनी की स्थिति में दावों का प्रोसेस आसान हो जाएगा। हालांकि, बैंक लॉकर के लिए क्रमवार नॉमिनेशन की ही अनुमति होगी। यानी यदि पहला नॉमिनी उपलब्ध नहीं है, तो दूसरा नॉमिनी उसका स्थान लेगा। इससे किसी भी विवाद या देरी की संभावना कम हो जाएगी। एसबीआई के अन्य चार्जेस एसबीआई कैश पेमेंट फीस 250 रुपये है. अगर आपका पेमेंट डिसऑनर हो गया तो डिसऑनर फीस पेमेंट अमाउंट का 2 प्रतिशत लगेगी, न्यूनतम 500 रुपये. इसके अलावा चेक पेमेंट पर 200 रुपये फीस है. कैश एडवांस फीस एसबीआई एटीएम और दूसरे डोमेस्टिक एटीएम पर ट्रांजेक्शन अमाउंट का 2.5 प्रतिशत, न्यूनतम 500 रुपये है. इंटरनेशनल एटीएम पर भी वही 2.5 प्रतिशत, न्यूनतम 500 रुपये है. कार्ड रिप्लेसमेंट फीस 100 से 250 रुपये तक है, लेकिन ऑरम कार्ड्स के लिए 1500 रुपये है. अगर विदेश में इमरजेंसी रिप्लेसमेंट है तो एक्टुअल कॉस्ट, न्यूनतम वीजा के लिए 175 डॉलर और मास्टरकार्ड के लिए 148 डॉलर है. लेट पेमेंट चार्जेस भी स्लैब के हिसाब से हैं. अगर मिनिमम अमाउंट ड्यू (एमएडी) पेमेंट ड्यू डेट तक न चुकाया. 0 से 500 रुपये पर निल चार्ज, 500 से 1000 पर 400 रुपये चार्ज है. वहीं, 1000 से 10000 पर 750 रुपये चार्ज, 10000 से 25000 पर 950 रुपये चार्ज, 25000 से 50000 पर 1100 रुपये, और 50000 से ऊपर पर 1300 रुपये चार्ज है. तो अगर आप भी एसबीआई कार्ड यूज करते हैं तो इन नए चार्ज का ध्यान रखें ताकि आपको परेशानी न हो. यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की अंतिम तिथि 30 नवंबर तक केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में शामिल होने की आखिरी तारीख को 30 नवंबर 2025 तक बढ़ा दिया है। पहले यह लिमिट 30 सितंबर थी।  पेंशनर्स के लिए जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate) हर साल की तरह, केंद्रीय और राज्य सरकार के पेंशनर्स को 1 नवंबर से 30 नवंबर 2025 के बीच जीवन प्रमाण पत्र (Jeevan Pramaan) जमा करना होगा। यह प्रमाण पत्र ऑनलाइन (डिजिटल) या बैंक या पोस्ट ऑफिस जाकर जमा किया जा सकता है। इसे समय पर जमा करने से पेंशन का पेमेंट बिना रुकावट जारी रहता है। 80 साल या उससे अधिक उम्र वाले पेंशनर्स को यह सुविधा पहले ही 1 अक्टूबर से दी गई है।

जबलपुर में 12 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, 16 करोड़ की संपत्ति जब्त, धान खरीदी में 43 करोड़ का घोटाला

जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर में करोड़ों के घोटाले में सरकारी खजाने का जो नुकसान हुआ है उसको पूरा करने के लिए अब अधिकारी-कर्मचारियों की संपत्ति को नीलाम किया जाएगा. जबलपुर कलेक्टर ने 12 कर्मचारियों की संपत्ति कुर्की के आदेश जारी किए हैं. आरोप है कि, इन लोगों की मिली भगत से जबलपुर में एक धान खरीदी में घोटाला हुआ था. जिसमें सरकार को लगभग 43 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था. फिलहाल अधिकारी-कर्मचारियों से 16 करोड़ रुपए की वसूली की जा रही है. 43 करोड़ के धान घोटाले का पर्दाफाश जबलपुर में पिछले साल लगभग 43 करोड़ रुपए का धान घोटाला किया गया था. आरोप है कि, इसमें कई मिल मालिकों ने जबलपुर के सरकारी गोदाम से धान मिलिंग के लिए ली थी, लेकिन उतना चावल वापस नहीं किया. कई स्थानों पर तो अच्छी धान को गोदाम से उठाया गया था, लेकिन उसे मिलिंग के लिए ना भेज कर सीधे बाजार में बेच दिया गया. उसके बदले बाजार से खराब किस्म का चावल खरीद कर नागरिक आपूर्ति में जमा करवा दिया गया. सरकार से ट्रांसपोर्टेशन और मिलिंग का पैसा ले लिया गया. इस दौरान जिन गाड़ियों से ट्रांसपोर्टेशन दिखाया गया था, उस गाड़ियों का नंबर स्कूटर और कहीं कार का पाया गया था. 16 मिल मालिक और 12 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ केस जब इस मामले में जांच शुरू की गई तो 43 राइस मिलर्स के अकाउंट में गड़बड़ी पाई गई. जिसमें करीब 43 करोड़ रुपए का धान घोटाला हुआ. सरकार को चूना लगाने के साथ ही कई किसानों के साथ भी धोखाधड़ी की गई और उन्हें पैसा नहीं दिया गया. तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने जब इस मामले की बारीकी से जांच करवाई तो 16 मिल मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. वहीं 12 अधिकारी कर्मचारियों को भी दोषी पाया गया. इन लोगों के खिलाफ भी गबन का मुकदमा दर्ज किया गया. क्योंकि इन अधिकारी कर्मचारियों की भी इस पूरे फर्जीवाड़े में मिलीभगत थी. सहकारी समिति के 4 कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज इस मामले में सरकार को लगभग 43 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. जिसमें से 16 करोड़ रुपए की वसूली अधिकारी कर्मचारी से किया जाना है. जबलपुर के वर्तमान कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं और उनकी चल अचल संपत्ति को कुर्क किया जा रहा है. इसी को बेचकर सरकार अपना नुकसान पूरा करेगी और किसानों को भुगतान करेगी. इस मामले में चार सहकारी समिति के कर्मचारियों को और अधिकारियों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं. अधिकारी और सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगी धान खरीदी जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा कि "पूर्व के अनुभव अच्छे नहीं हैं. इसलिए इस बार खरीदी में ज्यादातर स्वयं सहायता समूह को आगे लाया जा रहा है, उनकी ट्रेनिंग की जा रही है. खरीदी का पूरा काम सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होगा. पहले स्तर पर सर्वेयर, नोडल ऑफिसर और सीसीटीवी कैमरे के बावजूद भी दूसरे अधिकारियों की भी ड्यूटी लगा रहे हैं. जो इस पूरी धान खरीदी को अपने निगरानी में करवाएंगे. धान खरीदी की रिपोर्ट प्रतिदिन तैयार की जाएगी." सरकारी घाटे या नुकसान को इसी तरीके से अधिकारी कर्मचारियों के व्यक्तिगत चल अचल संपत्ति के माध्यम से बेचकर वसूला जाएगा. तो दूसरे अधिकारी कर्मचारियों में भी इस बात की दहशत होगी कि यदि वे गड़बड़ करते हैं तो कल इसी तरह की कार्यवाही उनके खिलाफ भी हो सकती है.

डॉ. मोहन यादव बोले: मध्यप्रदेश में निवेश, नवाचार और रोज़गार के संकल्प का अभ्युदय

सीएम ब्लॉग भोपाल मध्यप्रदेश आज अपनी स्थापना के 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। एक नवंबर 1956 को अस्तित्व में आये मध्यप्रदेश में विकास की नई यात्रा विगत दो दशकों से आरंभ हुई, जो प्रदेश को देश में अग्रणी राज्य बनाने की संभावनाओं तक पहुंच गई है। यह सुखद संयोग है कि आज देवउठनी ग्यारस के पावन अवसर पर राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हमारे तीज, त्यौहार और परंपराएं हमारी संस्कृति का आधार हैं। उत्सव के आनंद से ही भविष्य निर्माण के भाव निर्मित होते हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश में सभी त्यौहारों को व्यापक स्वरूप में मनाया जा रहा है। अपने त्यौहारों का सांस्कृतिक संदर्भ ही हमें पुरातन से नूतन की प्रेरणा देता है। हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत का ह्दय मध्यप्रदेश वन, जल, अन्न, खनिज, शिल्प, कला, संस्कृति, उत्सव और परंपराओं से समृद्ध है। हमें मां नर्मदा, चंबल, पार्वती, शिप्रा नदियों का सान्निध्य और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त है। यह भगवान परशुराम की जन्मस्थली, भगवान कृष्ण की शिक्षास्थली और आदि शंकराचार्य जी की तपोस्थली है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने चित्रकूट में लंबा समय व्यतीत किया है। इतिहास प्रसिद्ध राजा नल, भर्तृहरि, विक्रमादित्य की जन्म स्थली भी मध्यप्रदेश रही है। सम्राट विक्रमादित्य ने ही शकों के आतंक से भारत को मुक्त किया था। संसार की पहली वैज्ञानिक कालगणना "विक्रम संवत्" का आरंभ भी मध्यप्रदेश के उज्जैन से हुआ था। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि हम अपने ऐतिहासिक गौरव की दिव्यता और प्राकृतिक भव्यता के साथ विरासत से विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत को विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए विकसित भारत निर्माण का संकल्प दिया है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारा देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी के इस संकल्प को साकार करने और विकसित भारत निर्माण के लिए मध्यप्रदेश में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में उद्योग वर्ष मनाने के साथ राज्योत्सव की थीम 'उद्योग और रोज़गार' रखी गई है। इसमें प्रदेश के सतत विकास, सांस्कृतिक समृद्धि और जनभागीदारी का भाव है। यशस्वी प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से हमें निवेश और औद्योगिक विकास की यात्रा को परिणाम में बदलने का अवसर प्राप्त हो रहा है। विविधता से समृद्ध मध्यप्रदेश के हर क्षेत्र की अपनी विशेषता, क्षमता और दक्षता है, जिसमें अनंत संभावनाएं हैं। इसी को केन्द्र में रखकर हमने प्रदेश में रीजनल इन्वेस्टर्स समिट का नवाचार किया। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश के हर क्षेत्र का कौशल और उद्योग इसमें शामिल हुआ है। व्यापार को सरल बनाने और निवेशकों से सीधे संवाद के लिए हमने मार्च 2024 से उज्जैन से निवेश यात्रा शुरू की और फिर जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, मुंबई, कोयंबटूर, बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली, यूके, जर्मनी, जापान, दुबई तक इसे विस्तार दिया। विभिन्न सम्मेलनों, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय रोड-शो के माध्यम से मध्यप्रदेश के निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है। निवेशकों को एक सक्षम, सरल और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया गया है। प्रदेश में इनोवेशन हब, स्टार्टअप पॉलिसी, फंडिंग सपोर्ट और इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित कर देश की स्टार्टअप क्रांति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि मध्यप्रदेश ने पिछले एक वर्ष में औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों ने प्रदेश में निवेश के प्रति गहरी रुचि दिखाई है। खनिज कॉन्क्लेव में प्रदेश को 56 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले, जो खनिज नीति और प्रशासनिक सरलता का परिणाम हैं। आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक निर्माण इकाइयां और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश को प्रोत्साहन मिला है। मुझे यह बताते हुए हर्ष है कि प्रदेश एक ऐसे परिवर्तनकाल से गुजर रहा है जहां निवेश, नवाचार और रोज़गार आधार स्तंभ हैं। लगभग दो वर्षों में प्रदेश ने उद्योग, कृषि, दुग्ध उत्पादन, पर्यावरण, ऊर्जा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। भारत के समग्र विकास के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमें गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी (GYAN) के सम्मान का मंत्र दिया है। विकास के इन आधार स्तंभ के अनुरूप प्रदेश विकास और कल्याण के लिए युवा शक्ति, गरीब कल्याण, किसान कल्याण और नारी सशक्तिकरण मिशन के तहत कार्य किया जा रहा है। गरीब कल्याण मिशन में स्वरोज़गार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधा आदि की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश कौशल विकास मिशन और स्टार्टअप नीति 2025 ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर में परिवर्तित किया है। कौशल विकास मिशन के माध्यम से युवाओं को उद्योग-आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रोज़गार मेले, अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम और डिजिटल स्किल सर्टिफिकेशन जैसे प्रयास युवाओं को रोज़गार से जोड़ रहे हैं। रोज़गार सृजन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासकीय और निजी क्षेत्रों में युवाओं के लिए स्थायी, कुशल और सम्मानजनक अवसर उपलब्ध किये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने शासकीय भर्ती का कैलेण्डर जारी किया और उसके अनुरूप भर्ती प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है। कृषि क्षेत्र को नवाचार के साथ सशक्त बनाने की दिशा में एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ है। प्रदेश सरकार ने ड्रोन आधारित फसल निरीक्षण, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और कृषि उत्पाद मूल्य संवर्धन पर विशेष फोकस किया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और मुख्यमंत्री खेत-तालाब योजना सहित अन्य प्रयासों से किसानों के लिए सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लगातार प्रयत्न किया जा रहा है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के किसानों को सिंचाई और पानी की सुविधा व्यापक स्तर पर उपलब्ध होगी। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 52 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। आगामी 3 वर्षों में सिंचाई क्षेत्र का रकबा 100 लाख हेक्टेयर करने की योजना है। कृषि उपज का प्रत्यक्ष भुगतान, ऑनलाइन मंडी व्यवस्था और जैविक खेती के प्रोत्साहन ने अन्नदाताओं की आय में वृद्धि की है। मध्यप्रदेश गेहूं, सोयाबीन, चना और मसालों के उत्पादन में अग्रणी प्रदेश हैं। महिला सशक्तिकरण को आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ने की दिशा में नारी शक्ति मिशन परिवर्तनकारी सिद्ध हो रहा है। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से लाखों … Read more

राष्ट्रनायकों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़े हमारी भावी पीढ़ी – मुख्यमंत्री साय

  राष्ट्रीय एकता दिवस पर मुख्यमंत्री ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि वे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने वाले ऐसे युगपुरुष थे जिन्होंने अपने अदम्य साहस और दृढ़ निष्ठा से देश की रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत की नींव रखी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्कूली बच्चों, जनप्रतिनिधियों और आमजनों के साथ राजधानी रायपुर के शास्त्री चौक से शारदा चौक तक आयोजित ‘एकता दौड़’ में शामिल होकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का संदेश दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार पटेल को उनकी दूरदृष्टि और अद्भुत नेतृत्व क्षमता के कारण ही ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है। राष्ट्र को एकजुट करने के उनके प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर आज पूरे देश में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जा रहा है, जो राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारत विविधताओं से परिपूर्ण देश है, और  'विविधता में एकता' की भावना हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी प्रतिभागियों के उत्साह और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह जोश सरदार पटेल के प्रति श्रद्धा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने सभी को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिए गए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को साकार करने का प्रण लेने का आह्वान किया और सभी को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायककिरण देव, विधायक पुरंदर मिश्रा तथा छत्तीसगढ़ लौह शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी,  जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार से शुरू होगा प्रथम गोरखपुर पुस्तक महोत्सव, 9 नवंबर तक चलेगा

गोरखपुर में ‘साहित्यिक महाकुंभ’ का मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार से शुरू होगा प्रथम गोरखपुर पुस्तक महोत्सव, 9 नवंबर तक चलेगा नेशनल बुक ट्रस्ट कर रहा आयोजन, पुस्तकों के स्टाल के साथ ही सजेंगे बाल मंडप और साहित्यिक मंच गोरखपुर  प्रयागराज में धर्म, अध्यात्म और संस्कृति के अद्वितीय महाकुंभ का भव्य और दिव्य आयोजन सबकी स्मृतियों में रच-बस गया है। अब बारी ‘साहित्यिक महाकुंभ’ की है। साहित्यिक महाकुंभ का यह आयोजन गोरखपुर पुस्तक महोत्सव के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के परिसर में होने जा रहा है। 1 नवंबर से 9 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को करेंगे। गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में ‘प्रथम गोरखपुर पुस्तक महोत्सव’ का आयोजन नेशनल बुक ट्रस्ट (राष्ट्रीय पुस्तक न्यास) की तरफ से किया जा रहा है। यह आयोजन नगर की गहरी आध्यात्मिक, कलात्मक और साहित्यिक विरासत का एक भव्य उत्सव होगा। पुस्तक महोत्सव में आमजन प्रतिदिन पूर्वाह्न 11 बजे से रात 8 बजे तक शामिल हो सकेंगे। इसमें सभी के लिए प्रवेश निशुल्क होगा। पुस्तक महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद सुधाकर मराठे, गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहेंगे।  नेशनल बुक ट्रस्ट के निदेशक युवराज मलिक के अनुसार प्रथम पुस्तक महोत्सव में 100 से अधिक प्रकाशकों के 200 से भी अधिक पुस्तकों के स्टॉल लगेंगे, जहां हिंदी, अंग्रेजी और अनेक भारतीय भाषाओं की हजारों पुस्तकें प्रदर्शित की जाएंगी। साथ ही, बाल मंडप और साहित्यिक मंच पर नामचीन लेखकों-वक्ताओं के साथ संवाद, कार्यशालाएं और चर्चाएं भी आयोजित होंगी। बच्चों के लिए होंगी आकर्षक गतिविधियां बाल मंडप में बच्चों के लिए आकर्षक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसमें कहानी सत्र, कठपुतली शो, आर्ट एंड क्राफ्ट वर्कशॉप, चित्रांकन और डूडलिंग प्रतियोगिताएं, ओरिगेमी और क्ले आर्ट, सुलेख और रंगमंच कार्यशालाएं तथा म्यूजिकल स्टोरीज सेशन शामिल होंगे। ताकि बच्चे पुस्तकों की दुनिया से आनंदपूर्वक तरीके से जुड़ सकें। जानी-मानी साहित्यिक हस्तियों को सुनने का मिलेगा अवसर साहित्यिक मंच पर गोरखपुर और प्रदेश के अन्य हिस्सों से जुड़ी अनेक जानी-मानी साहित्यिक हस्तियाें को सुनने का अवसर मिलेगा। जिनमें अवध संस्कार : लोकाचार और लोकगीत की लेखिका डाॅ. मनोरमा मिश्रा, विद्वान साहित्यकार डाॅ. रामदेव शुक्ल, प्रसिद्ध कवि-आलोचक व्यमोश शुक्ल (प्रधानमंत्री, नागरी प्रचारिणी सभा), वरिष्ठ लेखिका एवं अनुवादक आशा प्रभात, युवा लेखिका डाॅ. निधि अग्रवाल,  पत्रकार-उपन्यासकार उमा, वरिष्ठ कवि अष्टभुजा शुक्ल, पूर्व पुलिस अधिकारी एवं विविध पुस्तकों की लेखिका डाॅ. सत्या सिंह, अरविंद त्रिपाठी, अमित कुमार, कवयित्री सुनीता अबाबील तथा गोरखपुर के प्रतिष्ठित लेखक सुभाष यादव आदि शामिल हैं। सांस्कृतिक संध्या में होंगे समृद्ध विरासत को दर्शाने वाले कार्यक्रम सांस्कृतिक संध्याओं में भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को दर्शाने वाले कार्यक्रम होंगे, जिनमें बिरजू महाराज कथक संस्थान (लखनऊ) के कलाकारों द्वारा शास्त्रीय नृत्य एवं गायन, कव्वाली प्रस्तुति, तथा ‘फोक क्वीन ऑफ इंडिया’ मालिनी अवस्थी की एक विशेष प्रस्तुति शामिल है। इनके अलावा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) का नाटक, सूफी एवं बॉलीवुड फ्यूजन म्यूजिक, कवि सम्मेलन, और ‘द युवाम प्रोजेक्ट’ के साथ एक विशेष म्यूजिकल ईवनिंग आयोजित की जाएगी। जिससे यह आयोजन साहित्य, कला और संस्कृति का एक भव्य महोत्सव बन जाएगा। ई-लाइब्रेरी का भी ले सकेंगे अनुभव दर्शक यहां ‘राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय (नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया)’ का अनुभव भी ले सकेंगे, जहां 3,000 से अधिक ई-पुस्तकों तक निशुल्क पहुंचा जा सकता है। यह पारंपरिक पढ़ने की आदत का डिजिटल ज्ञान की दुनिया के साथ सुंदर समन्वय होगा।

वैशाली के लालगंज विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी संजय कुमार सिंह के समर्थन में सीएम योगी ने मांगा वोट

बिहार विधानसभा चुनाव चुनाव में राहुल गांधी की इंट्री, बीजेपी व एनडीए की जीत की गारंटी- योगी आदित्यनाथ  वैशाली के लालगंज विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी संजय कुमार सिंह के समर्थन में सीएम योगी ने मांगा वोट भारी बारिश के बीच सीएम योगी की रैली में उमड़ा जनसैलाब, 'जय श्री राम' और 'हर हर महादेव' के नारों से गूंजायमान हो उठा वातावरण  – भारी बारिश के बीच भीड़ का उत्साह देख बोले सीएम योगी, यह कीचड़ में कमल खिलाने का संकेत है – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विकास और सुरक्षा दोनों के नए मानक स्थापित किए हैं- सीएम योगी  – बोले सीएम योगी, यूपी की तरह बिहार से भी माफियाओं का होगा सफाया – आज का नया भारत रुकता नहीं, झुकता नहीं और आतंकवाद-नक्सलवाद को उसकी मांद में घुसकर मारना जानता है- मुख्यमंत्री – लौह पुरुष पटेल ने देश को अखंड बनाया, आज प्रधानमंत्री मोदी उसी एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं- मुख्यमंत्री – वैशाली की यह भूमि लोकतंत्र की जननी है, जिसने नालंदा विश्वविद्यालय और भगवान महावीर जैसी विरासत दी- योगी – कांग्रेस और आरजेडी ने 15 साल लगातार राज किया, लेकिन गरीब को छत तक नहीं दे पाए- योगी – उत्तर प्रदेश अब विरासत और विकास दोनों का मॉडल है, यहां न माफिया बचता है, न भ्रष्टाचार पनपता है- मुख्यमंत्री वैशाली भारी बारिश के बावजूद ब्रह्मानंद पंजियार कॉमर्स कॉलेज मैदान में जनसैलाब उमड़ पड़ा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी सभा में 'जय श्री राम' और 'हर हर महादेव' के नारों से वातावरण गूंजायमान हो उठा। लालगंज विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी संजय कुमार सिंह के समर्थन में बोलते हुए योगी ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी प्रचार में आ गए, तो एनडीए की विजय सुनिश्चित है। बारिश में भीड़ का उत्साह देख सीएम योगी ने कहा कि यह कीचड़ में कमल खिलाने का संकेत है। सीएम योगी ने कहा कि वैशाली की यह भूमि लोकतंत्र की जननी है, जिसने नालंदा विश्वविद्यालय और भगवान महावीर जैसी विरासत दी। आज यह धरती एक बार फिर नए भारत के संकल्प की गवाह बन रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का नया भारत रुकता नहीं, झुकता नहीं और आतंकवाद-नक्सलवाद को उसकी मांद में घुसकर मारना जानता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विकास और सुरक्षा दोनों के नए मानक स्थापित किए हैं। यह नया भारत सबका साथ, सबका विकास करता है, लेकिन तुष्टिकरण किसी का नहीं करता। उन्होंने कहा कि आज भारत दुनिया का एकमात्र देश है जो 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन, 50 करोड़ को मुफ्त इलाज और हर गरीब को आवास, शौचालय और बिजली की सुविधा दे रहा है। सीएम योगी ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस और आरजेडी ने 15 साल लगातार राज किया, लेकिन गरीब को छत तक नहीं दे पाए। मोदी जी ने 10 साल में वो कर दिखाया जो इनसे नहीं हुआ। एनडीए की जीत की गारंटी हैं राहुल गांधी- सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राहुल गांधी जब भी प्रचार करने आते हैं, एनडीए की जीत तय हो जाती है। वे बीजेपी और एनडीए की जीत की सबसे बड़ी गारंटी हैं। सीएम योगी ने कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ये लोग सत्ता में आएंगे तो फिर माफिया राज, लूट, अपहरण और बेटियों की असुरक्षा का दौर लौट आएगा। गरीबों का राशन लूटेंगे, व्यापारियों को डराएंगे। लेकिन एनडीए यह नहीं होने देगा। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे यहां माफिया के लिए कोई जगह नहीं है। यूपी में जो माफिया पहले सत्ता का हिस्सा बनते थे, आज जेल में हैं या प्रदेश छोड़कर भाग गए हैं। हमारे बुलडोजर जब चलते हैं, तो माफिया की अवैध संपत्तियां ढहती हैं और उन्हीं जमीनों पर गरीबों के लिए मकान बनते हैं। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब विरासत और विकास दोनों का मॉडल है। यहां न माफिया बचता है, न भ्रष्टाचार पनपता है। सरदार पटेल ने देश को अखंड बनाया- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती का स्मरण करते हुए कहा कि भारत की एकता के शिल्पी लौह पुरुष पटेल ने ब्रिटिशों की विभाजन की साजिश को नाकाम कर देश को अखंड बनाया। आज प्रधानमंत्री मोदी उसी एक भारत, श्रेष्ठ भारत के संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर बिहार को भी विकसित बनाना है, तो एनडीए की डबल इंजन सरकार को मजबूत करना होगा।  सीएम योगी ने बीजेपी प्रत्याशी संजय कुमार सिंह के समर्थन में मांगा वोट संजय कुमार सिंह जैसे जनसेवक को जिताना बिहार के भविष्य को सुरक्षित करना है। बारिश और कीचड़ में भी जो भीड़ जुटी है, वह बताती है कि लालगंज से इस बार कमल जरूर खिलेगा। आप बस घर-घर जाकर वोट मांगिए, बिहार भी यूपी की तरह अपराध और अराजकता से मुक्त होगा। विकसित बिहार, विकसित भारत का मार्ग यहीं से निकलेगा।

हवाई संचालन की दिशा में अहम कदम, एयर नेविगेशन सिस्टम की जांच शुरू

कैलिब्रेशन फ्लाइट ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर की सफल लैंडिंग हवाई संचालन की दिशा में अहम कदम, एयर नेविगेशन सिस्टम की जांच शुरू किसी भी नए एयरपोर्ट के संचालन से पहले अनिवार्य होती है कैलिब्रेशन फ्लाइट एयरपोर्ट के इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम, रडार और एयर नेविगेशन उपकरणों के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप क्षमता का होता है परीक्षण नोएडा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar) के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर तब दर्ज हुआ जब शुक्रवार को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की कैलिब्रेशन फ्लाइट ने सफलतापूर्वक एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। यह उड़ान हवाई अड्डे के नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम की सटीकता जांचने के लिए की जाती है, जो किसी भी नए एयरपोर्ट के संचालन से पहले अनिवार्य होती है। क्या है कैलिब्रेशन फ्लाइट? कैलिब्रेशन फ्लाइट एक विशेष परीक्षण उड़ान होती है, जिसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि एयरपोर्ट के इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS), रडार, और एयर नेविगेशन उपकरण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप काम कर रहे हैं। परीक्षण की प्रक्रिया फ्लाइट के दौरान विशेष रूप से सुसज्जित विमान अलग-अलग ऊँचाइयों और कोणों पर उड़ते हुए ग्राउंड सिस्टम से प्राप्त सिग्नल की ताकत, स्थिरता और सटीकता की जांच करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में फ्लाइट इंस्पेक्टर, टेक्निकल इंजीनियर, और एटीसी विशेषज्ञ शामिल रहते हैं। तकनीकी उपकरण और डेटा विश्लेषण AAI द्वारा उपयोग किए जाने वाले कैलिब्रेशन विमान में अत्याधुनिक माप उपकरण लगे होते हैं। उड़ान से प्राप्त डेटा का बाद में विश्लेषण किया जाता है ताकि किसी भी तकनीकी विचलन को तुरंत ठीक किया जा सके और उपकरणों की सटीकता सुनिश्चित हो। सुरक्षा और विश्वसनीयता की गारंटी कैलिब्रेशन फ्लाइट का पूरा होना यह दर्शाता है कि जेवर एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर की विमानन सुरक्षा मानकों के और करीब पहुंच गया है। इसके बाद एयरपोर्ट के लिए ऑपरेशनल क्लियरेंस की प्रक्रिया को गति मिलेगी।

रायपुर में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन, सीएम साय ने दिलाई एकता की शपथ

रायपुर देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर राजधानी रायपुर में एक बार फिर एकता, अखंडता और राष्ट्रीय समरसता का संदेश गूंजा 31 अक्टूबर को भारतीय जनता पार्टी,प्रदेश,जिला,युवा मोर्चा,मंडल, द्वारा 'Run for Unity' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। जवाहर नगर मंडल के अध्यक्ष संदीप जंघेल एवं मीडिया प्रभारी प्रणीत जैन ने बताया कि यह Run for Unity' कार्यक्रम का भव्य आयोजन भारत की एकता और अखंडता के प्रति नागरिकों की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया जा रहा उन्होंने कहा कि प्रदेश,जिला,मंडल,महिला मोर्चा, के सभी पदाधिकारियों, स्कूलों, कॉलेजों, और स्थानीय नागरिकों की सहभागिता के साथ यह दौड़ आयोजित की गई। जिसमें तिरंगे झंडे और राष्ट्रीय नारों के साथ देशभक्ति का वातावरण देखने को मिला। उन्होंने बताया कि ‘रन फॉर यूनिटी’ की शुरुवात छत्तीसगढ़ प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी की उपस्थित में सुबह 8 बजे शास्त्री चौंक से की गई। 2 किमी किलोमीटर की दूरी तक दौड़ का मुख्यमंत्री सहित प्रदेश,जिला,युवामोर्चा,मंडल,महिला मोर्चा के पदाधिकारीगण बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस अवसर पर प्रतिभागियों के हाथों में तिरंगा लहराएगा, जो एकता और सौहार्द का प्रतीक बना। बच्चों ने हाथों में तिरंगा लेकर वंदे मातरम, भारत माता जी जय,और एक भारत श्रेष्ठ भारत के नारे लगाए। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री मा. विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि सरदार पटेल ने आजादी के बाद बिखरे भारत को एक सूत्र में पिरोया। उनकी दूरदृष्टि और दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही देश आज एक मजबूत राष्ट्र के रूप में खड़ा है। सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत के एकीकरण में जो भूमिका निभाई, वह हमेशा प्रेरणास्रोत रहेगी. आज का दिन हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम सभी मिलकर देश की एकता और अखंडता की रक्षा करें.।उन्होंने सभी से पटेल के आदर्शों पर चलने और समाज में एकता व भाईचारे को बनाए रखने की अपील की। कार्यक्रम का समापन शारदा चौक स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की प्रतिमा स्थल के पास सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के छाया चित्र के समक्ष माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया।  

गुजरात में बस्तर की गूंज: एकता परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

नए छत्तीसगढ़ की झलक देख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हुए प्रभावित एकता नगर (गुजरात), गुजरात के एकता नगर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर आज आयोजित एकता परेड में इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी “बस्तर की धरती – संस्कृति, सृजन और प्रगति की गाथा” ने सभी का मन मोह लिया। यह झांकी छत्तीसगढ़ के जनजातीय जीवन, परंपराओं और विकास यात्रा का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परेड में सम्मिलित सभी झांकियों का अवलोकन किया और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झलकियों की सराहना की। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में प्रदर्शित छत्तीसगढ़ की झांकी ने अपने सौंदर्य, प्रतीकात्मकता और सशक्त संदेश से सबका ध्यान आकर्षित किया। झांकी के अग्रभाग में पारंपरिक वेशभूषा में सजे माड़िया जनजाति के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गौर नृत्य ने बस्तर की आन-बान और सामूहिकता की भावना को सजीव कर दिया। उनके पास रखी पारंपरिक तुरही बस्तर के पर्वों की गूंज और लोक उल्लास की प्रतीक बनी। वहीं, नंदी का चित्रण बस्तर की गहरी लोक आस्था और शिव उपासना की परंपरा को अभिव्यक्त करता नजर आया। झांकी के मध्य भाग में बस्तर के विकास और परिवर्तन की यात्रा को कलात्मक रूप में दर्शाया गया। कभी नक्सलवाद से प्रभावित यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में बस्तर आज तेजी से बदलते भारत का प्रतीक बन चुका है। अब यहाँ बंदूक की नहीं, विकास की गूंज सुनाई देती है। झांकी के अंतिम भाग में टोकरी लिए महिला की प्रतिमा बस्तर की स्त्री शक्ति, श्रम और सृजनशीलता का प्रतीक बनी। संपूर्ण झांकी की ढोकरा शिल्पकला से की गई सजावट ने बस्तर के शिल्पकारों की अद्भुत कलात्मकता और परंपरागत कौशल को दर्शाया। छत्तीसगढ़ की यह झांकी न केवल अपनी संस्कृति और कला में समृद्ध है, बल्कि यह बस्तर में हो रहे सकारात्मक बदलाव की कहानी भी कहती है। झांकी ने दिखाया कि आज का नया बस्तर परंपरा, प्रकृति और विकास का सुंदर संगम बन चुका है। कभी दुर्गम और पहुँच से दूर रहने वाले इलाकों में अब सड़कों का जाल बिछ गया है, जिन पर बच्चों के स्कूल जाने की चहल-पहल सुनाई देती है और स्कूलों में घंटियाँ बजने लगी हैं। गांवों में बिजली की रौशनी और इंटरनेट की पहुँच ने नई आशाएँ जगाई हैं। युवाओं में कुछ करने, आगे बढ़ने का जोश दिखाई देता है। महिलाएँ आत्मनिर्भर बन रही हैं—हस्तशिल्प, वनोपज , विभिन्न विकासात्मक योजनाओं ने उनके जीवन में नई दिशा दी है। लोग अब विकास पर भरोसा करने लगे हैं। यह झांकी इस विश्वास का प्रतीक है कि बस्तर अब सिर्फ़ अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ते एक नए युग के लिए भी जाना जा रहा है। एकता परेड के लिए झांकियों का चयन गृह सचिव की अध्यक्षता में गठित एक उच्चस्तरीय समिति और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने देशभर के राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय संगठनों के प्रजेंटेशन देखे। हर राज्य ने अपनी थीम, मॉडल और विचार समिति के सामने प्रस्तुत किए। इसी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ की झांकी को उसकी मौलिकता, सांस्कृतिक समृद्धि और विकास के जीवंत चित्रण के लिए चयनित किया गया। अंतिम सूची में छत्तीसगढ़ के साथ एनएसजी, एनडीआरएफ, अंडमान-निकोबार द्वीप, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, मणिपुर, पुद्दुचेरी और उत्तराखंड की झांकियाँ शामिल हुईं।