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MP में ‘अपनी बस’ सेवा की वापसी, शुभारंभ की तैयारियां पूरी

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार की शाम गोविंदपुरा, बीएचईएल क्षेत्र में स्थित दशहरा मैदान पहुंचकर शुक्रवार को होने वाली "मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा'' के शुभारंभ कार्यक्रम की तैयारी का जायजा लिया। प्रदेश में शहरों-गांवों में डायरेक्ट बस कनेक्टिविटी की शुरुआत के शुभारंभ का कार्यक्रम भव्य रूप में होगा। इस कार्यक्रम की तैयारियां पूर्ण हो गई हैं।भोपाल, इंदौर समेत 7 शहरों में कुल 351 बसें चलेंगी। परिवहन विभाग ने इंटरसिटी सेवा के लिए 2 रुपए प्रति किलोमीटर किराया तय किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बसों को हरी झंडी दिखाकर प्रदेशवासियों को सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर नई बसों की विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की और बसों में बैठकर भी आधुनिक तकनीक और यात्रियों के लिए की गई सुविधाओं का जायजा लिया। परिवहन सचिव मनीष सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कार्यक्रम से जुड़ी आवश्यक जानकारियों से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी शुक्रवार को भोपाल के बीएचईएल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बसों को हरी झंडी दिखाएंगे। सेवा शुरू होने से पहले गुरुवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीएचईएल दशहरा मैदान पहुंचकर कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने मंच, सभा स्थल और अन्य व्यवस्थाएं देखीं। इसके बाद बसों का निरीक्षण भी किया और ड्राइवरों से बातचीत की। इस दौरान परिवहन सचिव मनीष सिंह मौजूद रहे। सीएम बोले- बेहतर सुविधा मिलेगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 21 साल बाद प्रदेश में लोक परिवहन बस सेवा फिर शुरू होना ऐतिहासिक निर्णय है। आधुनिक ई-बसों और सुविधायुक्त बसों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से नगरों और जिलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके तहत बस स्टॉप, बस स्टैंड, इलेक्ट्रॉनिक सुविधाओं और बेहतर कंट्रोलिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए तैयार किए गए मंच, सभा स्थल सहित अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस अवसर पर भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन सहित संबंधित विभागों के  उपस्थित थे। 7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के 7 शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं। शुरुआती चरण में इंदौर में 145 बसें जिसमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी, भोपाल में 106 बसें जिसमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें जिसमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी, रीवा में 18 इंटरसिटी बसें, देवास में 10 इंटरसिटी बसें, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।  एक विभाग के अंडर में आएंगी बसें सुगम परिवहन सेवा के तहत अलग-अलग बस एजेंसियों की सेवाओं को एक व्यवस्था के तहत लाया जाएगा। भोपाल में भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के साथ पीएम बस सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसी तरह इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन समेत अन्य शहरों में भी बस सेवाएं एक विभाग के अंडर में होंगी। बसों को एकरूपता देने के लिए एक ही रंग में पेंट या स्टीकर लगाने का काम किया गया है। सोशल मीडिया पर इससे जुड़े फोटो और वीडियो सामने आने के बाद अधिकारियों ने बताया कि संबंधित बस एजेंसियों ने ही यह काम किया है। इलेक्ट्रिक बसें भी चलेंगी सुगम परिवहन सेवा में ईजी मायट्रिप की सहायक कंपनी ईएमटीईवी/ईजी ग्रीनमोबिलिटी की बसें भी शामिल हैं। कंपनी की 12 मीटर इलेक्ट्रिक सीटर बस को लंबी दूरी के सार्वजनिक परिवहन के लिए तैयार किया गया है। बस में प्रीमियम और एर्गोनॉमिक सीटिंग, व्यक्तिगत एयर वेंट और यात्रियों के लिए पर्याप्त बैठने की जगह दी गई है। प्रवेश और आवागमन को भी सुविधाजनक बनाने की व्यवस्था की गई है। पहले चरण में 7 शहरों में 351 बसों से शुभारंभ योजना के पहले चरण में 7 शहरों की 351 इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों को एक साथ रवाना किया जाएगा। इसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल हैं।  शुरुआती चरण में इंदौर में 145 बसें चलेंगी। इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी रूट पर दौड़ेगी। भोपाल से 106 बसें (23 इंटरसिटी-83 इंट्रासिटी), जबलपुर के लिए 67 बसें (14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी), रीवा में 18 इंटरसिटी बसें, देवास में 10 इंटरसिटी बसें, कटनी में 3 और भिंड में 2 इंटरसिटी बसें दौड़ेंगी। 3-पीपीपी मॉडल.. ट्रेनिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मॉडर्न सुविधाएं बसों का संचालन पप्बिलक- प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर होगा। इसके लिए अलग- अलग एजेंसियों से 3 सेवाओं और सुविधाओं के विकास के लिए अनुबंध किए हैं। पहला- निजी ऑपरेटरों से अनुबंध किया। दूसरा, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के लिए अनुबंध किया है। इसके तहत बसों की लाइव लोकेशन, स्पीड, ड्राइविंग ट्रेनिंग आदि शामिल है। तीसरे मॉडल में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अनुबंध है। इसके तहत बस टर्मिनल, डिपो, बस स्टॉप और सड़क किनारे सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएंगी। सरकार की त्रिस्तरीय निगरानी बसों के सुगम संचालन के लिए सरकार ने राज्य स्तरीय मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी बनाई है। यह रणनीति और नीति तय करेगी। निगरानी करेगी। इसके अधीन 7 क्षेत्रीय कंपनियां इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन और सागर में बनाई गई हैं। इसके साथ ही कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय परिवहन सलाहकार समिति भी बनाई है। यह जमीनी निगरानी करेगी। मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा के तहत हर साल बढ़ाई जाएंगी 2,500 से 3,000 बसें। ऐसी सुविधाएं-सुरक्षा इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से बसों का संचालन, लोकेशन, टाइमिंग की रियल टाइम निगरानी होगी। मप्र यात्री परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं 7 सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर बनाए हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर बस में सीसीटीवी कैमरे। इमरजेंसी में तुरंत सहायता देने के लिए पैनिक बटन। व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस से बस की लाइव लोकेशन। यात्रियों को बस संचालन एवं यात्रा से जुड़ी जानकारी देने पैसेंजर इन्फॉर्मेशन सिस्टम।

बीमा कंपनियों के शेयर क्यों गिरे? IRDAI के प्रस्ताव से मचा हड़कंप

मुंबई  शेयर बाजार में गुरुवार को भारी तबाही देखने को मिली थी. खासकर बीमा कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्‍यादा तबाही दिखी, जहां PB Fintech के शेयरों में 36 फीसदी तक की गिरावट आई. इसके बाद Turtlemint के शेयर करीब 20 फीसदी तक गिर गए. साथ ही HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली. आज भी इन शेयरों में गिरावट देखी जा रही है।  इन सभी शेयरों में गिरावट की एक खास वजह, IRDAI का एक प्रस्‍ताव था. इसमें कुछ ऐसी बातों का जिक्र किया गया है, जिससे इन कंपनियों का रेवेन्‍यू घट जाएगा. साथ ही प्रॉफिट और मार्जिन पर भी तगड़ा असर होने की उम्‍मीद जताई गई है. इसी कारण, इन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई, लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर इस प्रस्‍ताव में ऐसा क्‍या है, जिस कारण किसी कंपनी का शेयर 36 फीसदी तक टूट सकता है? आइए जानते हैं पूरी डिटेल…  पॉलिसी पेपर में ऐसा क्‍या है?   1. कमीशन पर लिमिट लगाने की तैयारी  IRDAI ने लाइफ, हेल्‍थ और मोटर बीमा में प्रोडक्‍ट्स और ड‍िस्‍ट्रीब्‍यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन लिमिट दोबारा लागू करने का प्रस्ताव दिया है. साल 2023 में कमीशन पर मौजूद सेगमेंट वाली लिमिट हटाई गई थी।   2. हेल्‍थ और टर्म इंश्‍योरेंस में कमीशन एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ढांचे में हेल्‍थ और टर्म इंश्‍योरेंस के नए बिजनेस पर कमीशन काफी कम हो सकता है. कुछ मामलों में अनुमानित कटौती करीब एक-तिहाई से दो-तिहाई तक की जा सकती है।  3. लाइफ इंश्‍योरेंस में कमीशन  अभी कमीशन का बड़ा हिस्‍सा पॉलिसी बेचने के समय या शुरुआती अवधि में मिल सकता है. प्रस्‍ताव में कहा गया है कि इस पॉलिसी टर्म के दौरान ज्‍यादा फैलाना चाहिए. इससे असर होगा कि डिस्‍ट्रीब्‍यूशन की शुरुआती कमाई प्रभावित होगी और कंपनियों का रेवेन्‍यू घट सकता है।  4. बीमा कंपनियों के खर्च की सीमा घटाने का प्रस्ताव IRDAI ने एक्‍सपेंसेस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) को भी राश्‍नलाइज करने का प्रस्ताव रखा है. जनरल इंश्‍योरेंस के लिए EoM सीमा को पांच साल में GWP के 30% से डोमेस्टिक GDPI के 20% तक लाने का प्रस्ताव बताया गया है. इससे कंपनियों की कमाई पर तगड़ा असर हो सकता है।  5. लोन के साथ जबरन बीमा बेचने पर रोक  बैंकों और एनबीएफसी को लोन के साथ इंश्‍योरेंस को अनिवार्य करने से रोकने का प्रस्‍ताव दिया गया है. इससे उन बैंकों की इंश्‍योरेंस डिस्‍ट्रीब्‍यूशन फीस इनकम पर भी असर पड़ने की आशंका बाजार में बनी है।  6. डॉर्क पैटर्न पर रोक  कंपनियों को ऐसी डिजान या प्रॉसेस से रोकना है, जिसमें कस्‍टमर्स को किसी खास विकल्प की ओर भ्रमित या मजबत किया जा रहा है. जैसे प्रोडक्‍ट की कीमत या बाकी फीचर्स की जानकारी से पहले ही कस्‍टमर्स से पूरी डिटेल मांगना है।  सीधे शब्‍दों में कहें तो IRDAI का प्रस्ताव कहता है कि इंश्‍योरेंस बेचने पर कंपनियों या डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स कितना कमीशन ले सकेंगे, खर्च कितना कर सकेंगे और कस्‍टमर्स को पॉलिसी कैसे बेच सकेंगे, इन सभी पर ज्‍यादा कंट्रोल होगा. बाजार को डर है कि इन कमीशन बेस्‍ड कमाई से कंपनियों की अर्निग पर बड़ा झका लग सकता है।  सरकार क्‍यों लेकर आई ये प्रस्‍ताव?      इंश्योरेंस की बिक्री में मिस-सेलिंग कम करना     इंश्योरेंस की लागत कम करना     ग्राहक को पता चले कि उसका पैसा किसे और क्यों जा रहा है     बैंक से लोन लेते समय जबरन Insurance बेचने की शिकायतें रोकना 3 जुलाई को आई थी ये रिपोर्ट  जुलाई में ही ये प्रस्‍ताव पब्लिक हो गया था. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि IRDAI commission व्यवस्था में बड़ा बदलाव तैयार कर रहा है. खासकर बड़े अपफ्रंट में कमीशन को कम करके पॉलिसी की अवधि में भुगतान पर विचार कर रहा है. तब 4 से 5 सप्‍ताह में इसे लाने का प्रस्‍ताव था, लेकिन इसे 2 से 3 महीने के बाद पेश किया गया है। 

शूटिंग में भारत का जलवा, कमलजीत-सुरुचि ने जीता गोल्ड

आईची-नागोया जश्न मनाइए, खुशियों में डूब जाइए। एशियन गेम्स 2026 में दिन का आगाज इससे बेहतर नहीं हो सकता था। सिर्फ 2 मिनट के अंदर भारत को दो मेडल मिले, जिसमें एक गोल्ड मेडल और एक सिल्वर मेडल रहा। ये दोनों ही शूटिंग से आए। इसके साथ ही एशियन गेम्स की मेडल टैली में भारतीय दल ने जबरदस्त छलांग लगाई है। पहले वह एक गोल्ड के साथ 15वें नंबर पर था, जबकि अब 12वें नंबर पर पहुंच गया है। इन इवेंट में आए मेडल जापान में खेले जा रहे एशियन गेम्स 2026 से भारत के लिए बहुत बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। निशानेबाजी में भारत ने दो मेडल जीते है। कमलजीत और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने देश को निशानेबाजी में पहला गोल्ड मेडल दिलाकर इतिहास रच दिया है। वहीं पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम इवेंट में भारतीय तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया है। 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल मुकाबले में कमलजीत और सुरुचि सिंह की भारतीय जोड़ी ने दक्षिण कोरिया की मजबूत जोड़ी को एकतरफा अंदाज में पछाड़ते हुए पोडियम के शीर्ष पर तिरंगा फहराया। यह एशियन गेम्स में भारत का दूसरा गोल्ड मेडल है। एशियन गेम्स 2026 में भारत का मेडल जीतने का सिलसिला जारी है। अभी तक भारत ने 2 गोल्ड, 7 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल जीत चुका है। 25 सितंबर को भारत शूटिंग में गोल्ड जीता जबकि दो और मेडल स्क्वॉश और टेबल टेनिस में कन्फर्म किए। कमलजीत और सुरुचि सिंह ने 10m एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। कबड्डी में दो और मेडल कन्फर्म हो सकते हैं। दीया चितले और मानुष शाह ने मिश्रित युगल टेबल टेनिस स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्का कर लिया। वहीं जोशना चिनप्पा और वेलावन सेंथिलकुमार ने मिश्रित युगल स्क्वॉश के सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्का किया। नीजें देखें मेडल की पूरी लिस्ट- शूटिंग में आया गोल्ड कमलजीत और सुरुचि सिंह ने 10m एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने गोल्ड मेडल जीता, इस तरह एशियन गेम्स 2026 में भारत को दूसरा गोल्ड दिलाया। उनका फाइनल स्कोर 484.6 था, जो दूसरे नंबर पर मौजूद साउथ कोरिया से 6.6 पॉइंट ज़्यादा था। सुरुचि इंदर सिंह और कमलजीत ने 484.6 का स्कोर करके नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया और एशियन गेम्स में 10m एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में पहला गोल्ड जीता। नीरज, रुद्राक्ष और ऐश्वर्य ने टीम ने शूटिंग में जीता सिल्वर ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर, नीरज कुमार, रुद्राक्ष पाटिल की टीम ने 50m 3P राइफल शूटिंग में टीम सिल्वर जीता। वे चीन से 4 पॉइंट्स से हार गए। भारतीय टीम का स्कोर 1762 रहा, जबकि चीन की टीम का 1766। एथलेटिक्स में सिल्वर और ब्रॉन्ज विशाल टीके, पूवम्मा, मनु और विथ्या रामराज ने शानदार रनिंग की और रेस 3:14.46 में पूरी करके सिल्वर मेडल जीता। बहरीन ने 3:12.87 की गेम्स रिकॉर्ड टाइमिंग के साथ गोल्ड मेडल जीता और वियतनाम ने 3:14.54 में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। सीमा ने अपनी 10,000m रेस 32:50.05 में पूरी करके शानदार ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। बहरीन की विनफ्रेड यावी ने 32:39.18 में गोल्ड मेडल जीता और जापान की नोज़ोमी तनाका ने 32:41.54 में सिल्वर मेडल जीता। शूटिंग में आया एक और ब्रॉन्ज मिक्स्ड टीम स्कीट में, भारत के अनंतजीत नरुका और परिनाज धालीवाल ने कतर को हराकर ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि चीन और साउथ कोरिया ने गोल्ड और सिल्वर मेडल जीता। रोइंग में जीता ब्रॉन्ज पुरुषों की सतनाम सिंह और सलमान खान की डबल्स स्कल्स जोड़ी 500m, 1000m और 1500m में दूसरे स्थान पर थी, लेकिन आखिर में पिछड़ गई और विजेताओं से 3.48 सेकंड पीछे रहकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता। वुशु में सिल्वर रोशिबिना देवी ने एशियन गेम्स में लगातार सिल्वर मेडल जीते, क्योंकि वह महिलाओं की सैंडा 60kg की फ़ाइनल में चीन की झांग शियाओयू से हार गईं। मणिपुर की एथलीट ने 2022 हांग्जो एशियाड में भी सिल्वर मेडल जीता था। वेटलिफ्टिंग में चकमीं मीराबाई चानू कुल 198kg (स्नैच में 87kg, क्लीन एंड जर्क में 111kg) उठाकर, मीराबाई चानू ने अपना पहला एशियन गेम्स मेडल जीता है, वह सिर्फ़ तीन बार की गोल्ड मेडलिस्ट नॉर्थ कोरिया की री सोंग गम से पीछे हैं, जिन्होंने 215kg उठाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा। बैडमिंटन में भी आया ब्रॉन्ज सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी अकेले विजेता रहे, क्योंकि लक्ष्य सेन, आयुष शेट्टी और अर्जुन-हरिहरन की जोड़ी हार गई, क्योंकि चीन ने पुरुष टीम सेमीफ़ाइनल में भारत को 3-1 से हरा दिया। सॉफ्ट टेनिस में जय मीना ने जीता ब्रॉन्ज जय मीना पुरुषों के सॉफ्ट टेनिस इंडिविजुअल सेमीफ़ाइनल में ताकुया कुरोसाका से हार गए। महिला और पुरुष टीमों ने स्कीट में जीता ब्रॉन्ज राइज़ा ढिल्लन, परिनाज़ धालीवाल और माहेश्वरी चौहान की भारतीय महिला स्कीट टीम ने महिलाओं के स्कीट इवेंट में कुल 331 अंकों के साथ ब्रॉन्ज़ जीता। भारत चीन से पीछे रहा, जिसने 346 अंकों के साथ गोल्ड जीता, कज़ाकिस्तान दूसरे स्थान पर रहा। भारतीय पुरुषों की स्कीट टीम ने BRONZE जीता इसके तुरंत बाद, अनंतजीत सिंह नरुका, मैराज अहमद खान और भावतेग सिंह की भारतीय पुरुषों की स्कीट टीम ने पुरुषों के स्कीट इवेंट में कुल 346 अंकों के साथ BRONZE जीता। भारत कतर से पीछे रहा, जिसने 353 अंकों के साथ गोल्ड जीता, जबकि कुवैत 348 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। क्रिकेट में आया पहला गोल्ड इंडियन विमेंस टीम ने श्रीलंका को 148 रन से हराकर 2026 एशियाड का देश का पहला गोल्ड मेडल जीता। स्मृति मंदाना ने 45 बॉल में 79 रन बनाकर शानदार प्रदर्शन किया, जिससे इंडिया ने 20 ओवर में 216/3 का बड़ा स्कोर बनाया। दीप्ति शर्मा के तीन विकेट की मदद से श्रीलंका 15.4 ओवर में 69 रन पर ऑल आउट हो गई। शूटर्स का दबदबा हिमांशु ढिल्लों ने पुरुषों की इंडिविजुअल 10m एयर राइफल में सिल्वर जीता हिमांशु ने रुद्रांक्ष को पीछे छोड़ने के लिए आखिर में बढ़त बनाई, लेकिन यह बहुत कम और बहुत देर हो चुकी थी, जिससे डिफेंडिंग चैंपियन शेंग लिहाओ को अपना गोल्ड बचाने में मुश्किल हुई। हिमांशु के लिए सिल्वर, 231.0 रुद्रांक्ष पाटिल ने पुरुषों की इंडिविजुअल 10m एयर राइफल में ब्रॉन्ज़ जीता रुद्रांक्ष, … Read more

मुफ्त योजनाओं का दांव: पंजाब की राजनीति में गारंटियों का बढ़ता असर

चंडीगढ़  पंजाब में सियासी दलों की ओर से मुफ्त गारंटियों पर फिर दांव खेलने की तैयारी है। सूबे की सियासत में ये मुफ्त सुविधाएं अब महज लोकलुभावन घोषणाएं ही नहीं रहीं, बल्कि मतदाताओं तक असरदार पहुंच का एक बड़ा माध्यम बन चुकी हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की सरकार जहां इसे अपनी सियासी ताकत का एक बड़ा आधार मानती है वहीं सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी इन सबके बंद होने का डर भी दिखा रही है।अपने लोक मिलनी कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान अब खुलेआम इस तरह की आशंका मतदाताओं के समक्ष जता रहे हैं।  पुराना है सियासी दांव मुफ्त गारंटियों व सुविधाओं की बात करें तो यह सियासी दांव नया नहीं है। पंजाब में पिछले चार चुनावों का ट्रेंड देखें तो इस तरह की लोकलुभावन घोषणाएं पहले की जाती रही हैं। सभी प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार इस तरह के वादे किए और उन्हें इसका लाभ भी मिला। साल 2022 में पहली बार पंजाब की सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी की सरकार को तो इसका बंपर फायदा मिला था। लिहाजा, इस बार भी आप इस पर बड़ा दांव खेलने जा रही है। ऐसे में दूसरे दल भी विभिन्न वर्ग के मतदाताओं को साधने के लिए इस तरह की मुफ्त गारंटियों का सहारा लेने की तैयारी में हैं। उधर, राजनीतिक मामलों के जानकार मलकीत सिंह कहते हैं कि चुनावी चौसर पर इन मुफ्त गारंटियों के बूते मिली जीत सूबे की अर्थव्यवस्था को बहुत प्रभावित करती है। मुफ्त बंट रहे राजस्व के कारण राज्यों का राजकोषीय घाटा बढ़ता है। सड़कों, अस्पतालों, स्कूलों व नए रोजगार सृजन जैसे बुनियादी ढांचागत निवेश के लिए बजट की भारी कमी होती है।  सीएम की चेतावनी मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चेतावनी देते हुए कहा कि पारंपरिक विरोधी पार्टियों की सत्ता में वापसी से पंजाब की कल्याणकारी योजनाएं खतरे में पड़ जाएंगी। मान ने कहा कि विरोधी धड़े यदि सत्ता में आ गए तो मुफ्त बिजली व महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा योजनाएं और 1000-1500 रुपये की सम्मान राशि बंद कर देंगे। साथ ही, निजी संस्थानों को बढ़ावा देने के लिए मोहल्ला क्लीनिकों और सरकारी स्कूलों को कमजोर किया जाएगा। लोक मिलनी कार्यक्रमों में इस तरह की आशंका जताते हुए सीएम दोबारा आप को मौका देने की अपील कर रहे हैं। गेमचेंजर बनीं इन घोषणाओं से पलटे समीकरण साल 2022 : आप सरकार – 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली, दो माह में 600 यूनिट तक बिलिंग चक्र में शून्य बिल की व्यवस्था है। – महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर। – मावां-धीयां सत्कार योजना : महिलाओं को हर महीने 1000 व एससी महिलाओं को 1500 रुपये आर्थिक राशि मिलती है। – मुख्यमंत्री सेहत योजना : हर परिवार को सालाना 10 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा। आम आदमी क्लीनिक : क्लीनिकों में प्राथमिक इलाज, दवाओं और निर्धारित जांचें मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं। – मेरी रसोई राशन किट : करीब 40 लाख परिवारों को तिमाही मुफ्त किट में चीनी, चना दाल, सरसों तेल, हल्दी और नमक देने की योजना। – सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा और किसानों के लिए मुफ्त बिजली। किशोरियों के लिए मुफ्त सैनिटरी पैड। साल 2017 : कांग्रेस सरकार – किसानों के लिए मुफ्त बिजली और कर्ज माफी योजना। – अप्रैल 2021 से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त सफर। – सरकारी स्कूलों की छात्राओं को मुफ्त साइकिल सुविधा। – आटा-दाल योजना में सब्सिडी वाला राशन। सामाजिक सुरक्षा पेंशन 2021 में 750 से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रतिमाह की गई। – आशीर्वाद योजना : आर्थिक रूप से कमजोर-एससी परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सहायता राशि साल 2021 में 21 से बढ़ाकर 51 हजार की गई। साल 2007-2017 : शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार – आटा-दाल योजना, 2016-17 तक करीब 36.35 लाख परिवार योजना के दायरे में थे। – किसानों को मुफ्त बिजली, एससी, बीसी व बीपीएल परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली। – माई भागो विद्या योजना : सरकारी स्कूलों की छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए मुफ्त साइकिलें दी जाती थीं। – मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा : साल 2016 से विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा के लिए चयनित श्रद्धालुओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती थी। – शगुन योजना : गरीब व एससी परिवारों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता योजना। 

स्कूलों के आसपास नहीं बिकेंगे चिप्स और सॉफ्ट ड्रिंक? नए नियम की तैयारी

नई दिल्ली देश भर में बच्चों के भीतर तेजी से बढ़ रहे मोटापे और अनहेल्दी खाने-पीने की आदतों पर लगाम कसने के लिए भारत सरकार एक बड़ा और कड़ा कदम उठाने जा रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) देश के 15 लाख से ज्यादा स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में फैट, नमक और चीनी की ज्यादा मात्रा वाले खाने के आइटम की बिक्री और विज्ञापन पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। इससे जुड़े नियम और कानूनों को अंतिम रूप दिया जाने वाला है। इस नए नियम का सीधा असर स्कूलों के आसपास चलने वाली छोटी किराना दुकानों, रेस्टोरेंट, ठेले-खोमचे वालों से लेकर पेप्सिको, कोका-कोला, नेस्ले और मोंडेलेज जैसी दिग्गज मल्टी नेशनल कंपनियों के कारोबार पर पड़ेगा। क्या-क्या नहीं बिकेगा स्कूलों के पास? प्रस्तावित नियमों के तहत, जिस भी फूड आइटम में तय सीमा से ज्यादा फैट, नमक या शुगर पाई जाएगी, उसकी बिक्री 50 मीटर के दायरे में बैन रहेगी। इसमें फास्ट फूड और जंक फूड जैसे- पिज्जा, बर्गर, नूडल्स और समोसे-कचौड़ी। पैक्ड स्नैक्स जैसे- नमकीन, पोटैटो चिप्स (जैसे अंकल चिप्स, लेज)। और सॉफ्ट ड्रिंक्स और कैंडीज जैसे- कोला, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, चॉकलेट और ज्यादा चीनी वाली मिठाइयों को शामिल किया जाएगा। FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रजित पुन्हानी ने इस पहल के बारे में कहा, "हमारा मकसद बच्चों को छोटी उम्र से ही खराब खाने की आदतों से दूर करना है। हमें उनमें सही खान-पान की आदतें विकसित करनी होंगी। इससे दुकानदारों का कारोबार बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि वे बिना HFSS वाले सेहतमंद खाद्य पदार्थ बेच सकते हैं।" FSSAI ने हाल ही में फैट, साल्ट और शुगर की सीमाओं के लिए एक ड्राफ्ट जारी किया है, जिस पर 6 अक्टूबर 2026 तक जनता और हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। भारत में बच्चों में मोटापे का खौफनाक आंकड़ा 'वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन' के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 में भारत में 5 से 19 साल की उम्र के करीब 2.8 करोड़ बच्चे ओवरवेट या मोटापे के शिकार थे। फिर 2025-26 में यह आंकड़ा लगभग 50% बढ़कर 4.1 करोड़ के पार पहुंच गया। आने वाले सालों में अगर यही रफ्तार रही, तो 2040 तक देश में मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या 5.6 करोड़ हो जाएगी। टिफिन में घर का दाल-चावल ले जाने के बजाय रास्ते में मिलने वाले 10 रुपए के चिप्स या 49 रुपए वाले सस्ते पिज्जा की तरफ बच्चों का बढ़ता रुझान इस स्वास्थ्य संकट की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। महाराष्ट्र में शुरू हुई सख्त कार्रवाई जहां केंद्र सरकार पूरे देश के लिए नियम तय कर रही है, वहीं महाराष्ट्र सरकार ने पहले से ही सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि राज्य में किसी भी दुकान को स्कूल के 50 मीटर के दायरे में ऐसे उत्पाद रखने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। राज्य के आंकड़ों के मुताबिक, खाद्य निरीक्षकों ने अब तक 133 दुकानों में उल्लंघन पाया है और 51 दुकानों को अपना कारोबार बंद करने का आदेश जारी किया है। दुकानदारों और कंपनियों में हड़कंप FSSAI के इस कदम से किराना दुकानदारों और खाद्य उद्योग से जुड़े संगठनों में चिंता की लहर है: ओडिशा के भुवनेश्वर समेत कई शहरों के दुकानदारों का कहना है कि स्कूलों के आसपास बिक्री बंद होने से उनकी रोजाना की कमाई में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। 'कॉन्फेडेरेशन ऑफ इंडियन फूड ट्रेड एंड इंडस्ट्री' का तर्क है कि भारत में कई स्कूल बेहद व्यस्त बाजारों के बीच स्थित हैं। ऐसे में 50 मीटर के दायरे को पूरी तरह लागू करना व्यावहारिक रूप से कठिन होगा और इससे लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि चिली और मेक्सिको जैसे देशों की तर्ज पर भारत का यह कानून बड़ी एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों को मजबूर करेगा कि वे अपने स्नैक्स और ड्रिंक्स में नमक, फैट और चीनी की मात्रा कम करें।

मध्य प्रदेश को मिलेगी नई परिवहन सेवा, 25 सितंबर को मोहन यादव-गडकरी करेंगे लॉन्च

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी आज 25 सितंबर को बीएचईएल दशहरा मैदान भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत सावर्जनिक यात्री बसों के संचालन का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत शुरू होने वाली इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों के संचालन को आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में परिवहन विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके अंतर्गत सड़कों पर दौड़ने वाली बसों का स्टेयरिंग एडवांस तकनीक से प्रशिक्षित ड्राइवरों के हाथों में होगा। इसके लिए बस चालकों को इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों की तकनीक, संचालन और सुरक्षा मानकों से परिचित कराने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे नई तकनीक वाली बसों का सुरक्षित और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। पैनिक बटन और जीपीएस से बढ़ेगी सुरक्षा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा में यात्रियों की सुरक्षा और बसों की निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग किया जाएगा। बसों में पैनिक बटन और जीपीएस की सुविधा रहेगी। जीपीएस के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन की निगरानी की जा सकेगी। पैनिक बटन आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करेगा। दो तरह की सेवा होंगी शुरू कार्यक्रम के दौरान 351 बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें 120 इंटरसिटी बसें हैं। ये बसें दो या दो से अधिक शहरों के बीच आवागमन को सुगम और तीव्र बनाएंगी। 231 इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और सस्ती यात्रा सुविधा प्रदान करेंगी। 7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रथम चरण में प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों की बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल है। इंदौर में 145 बस, जिसमें 50 इंटरसिटी, 95 इंट्रासिटी, भोपाल के लिए 106 बसें, जिसमें 23 इंटरसिटी, 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें, जिसमें 14 इंटरसिटी, 53 इंट्रासिटी। रीवा की 18 इंटरसिटी बस, देवास की 10 इंटरसिटी बस, कटनी की 3 और भिंड की 2 इंटरसिटी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें की जाएंगी संचालित मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत वर्ष 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को नई मजबूती दी जाएगी। प्रदेशभर में लगभग 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान होगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा। इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रदेश में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इससे शहरों के बीच आवागमन के साथ ही शहरों के भीतर सार्वजनिक परिवहन की सुविधाएं बढ़ेंगी। सेवा का उद्देश्य प्रदेशवासियों को बेहतर कनेक्टिविटी के साथ सुगम, सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इंटरसिटी बसें दो या दो से अधिक शहरों को जोड़ेंगी, जबकि इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर चलेंगी। साल-दर-साल बढ़ेगी बसों की संख्या, वर्ष 2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में सार्वजनिक परिवहन सेवा का विस्तार करते हुए बसों की संख्या 15 हजार तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए परिवहन विभाग द्वारा चरणबद्ध कार्य योजना भी तैयार की गई है। इसके अनुसार प्रतिवर्ष 2500 से तीन हजार नई बसें जोड़ी जाएंगी। सार्वजनिक परिवहन के दायरे का विस्तार होने के साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में यात्रियों के लिए आवागमन के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। चालकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण, नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर जल्द होंगे तैयार प्रदेश में वाहन चालकों को आधुनिक बसों की सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए इंदौर और छिंदवाड़ा में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश में 5 रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर भी जल्द तैयार हो जाएंगे। ये सेंटर भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा जिला स्तर पर 22 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर भी जल्द तैयार किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से वाहन चालकों को आधुनिक तकनीक, सुरक्षा मानकों तथा इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों के संचालन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाएगा।   इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम से की जाएगी निगरानी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत संचालित बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटरों के माध्यम से बसों के संचालन, लोकेशन, समयबद्धता एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। निजी ऑपरेटरों की भी बढ़ेगी भागीदारी जन-निजी भागीदारी को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा। परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा प्रदेश में सुगम यात्री परिवहन सेवा शुरू होने से परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।  

चुनाव आयोग को लेकर सियासी घमासान, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का नया दांव

नई दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लामबंद हो गया है। विपक्षी दल सीईसी के खिलाफ संसद के दोनों सदनों में महाभियोग लाने जा रहा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से संपर्क किया है और अगले दो हफ्तों में नोटिस को जमा भी कर दिया जाएगा। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने दी है। दरअसल, ज्ञानेश कुमार लंबे समय से विवादों में हैं। देशभर में एसआईआर प्रक्रिया पर पहले ही विपक्षी दल सवाल उठा चुके हैं, जबकि बीते दिन इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। रिपोर्ट में बताया गया था कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों पर तीन में से दो निर्वाचन आयुक्तों -सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- ने बार-बार सवाल उठाए थे। हालांकि, इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा उसके सभी फैसले स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इससे पहले भी विपक्षी दलों ने महाभियोग लाने की कोशिश की थी। 24 अप्रैल को राज्यसभा में 73 विपक्षी सांसदों ने कथित साबित गलत व्यवहार के आधार पर उन्हें पद से हटाने की मांग करते हुए एक नोटिस दिया था। कांग्रेस ने उस समय कहा था कि नोटिस में नौ खास आरोप थे। कांग्रेस सूत्रों और विपक्षी नेताओं के अनुसार, वह नोटिस अभी भी पेंडिंग है। हालांकि, अब सूत्रों का कहना है कि विपक्ष नया नोटिस लाने जा रहा है, जिसमें नए दावे किए जाएंगे। एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें एसआईआर, नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने और वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे चुनाव आयोग के भीतर गंभीर मतभेद का संकेत बताया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया। कांग्रेस, टीएमसी समेत तमाम दलों ने ज्ञानेश कुमार को तुरंत इस्तीफा देने के लिए कहा। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को हटाने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की। टीएमसी ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आगे बढ़ाने की मांग की, जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। CPI(M) ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR रोकने की मांग की है। इसके अलावा, डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने भी उनके तत्काल हटाए जाने और SIR पर रोक लगाने की मांग की। 10 महीने में 14 बार दर्ज हुई आपत्ति द इंडियन एक्सप्रेस की जांच के मुताबिक, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की गई। ये आपत्तियां चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने कुछ फैसलों और आदेशों को अपनी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे। एक दिन में चार बार तक आपत्ति दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने, फॉर्म 6 में बदलाव और चुनावी डेटा के डिजिटल सिस्टम तक पहुंच से जुड़े मुद्दे शामिल थे। दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को ‘अनधिकृत’ और ‘अवैध’ बताया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चुनावी डेटाबेस को दिल्ली में केंद्रीकृत किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए थे। चुनाव आयोग ने कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने 14 नोट्स के अस्तित्व, तारीख और सामग्री को खारिज नहीं किया, लेकिन इन्हें ‘सुझाव’ बताया। आयोग के अनुसार, पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। महुआ मोइत्रा ने पुलिस में दी शिकायत इसी विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दी। ANI से बात करते हुए मोइत्रा ने उन पर प्रक्रिया के उल्लंघन, एकतरफा फैसले लेने और मतदाता सूची में कथित हेरफेर के आरोप लगाए। मोइत्रा ने चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले चीफ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर्स (अपॉइंटमेंट, कंडीशंस ऑफ सर्विस एंड टर्म ऑफ ऑफिस) एक्ट, 2023 की धारा 16 का भी हवाला दिया। उनका तर्क था कि यदि चुनाव आयोग सामूहिक रूप से काम करता है तो ही यह सुरक्षा लागू हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि द इंडियन एक्सप्रेस की जांच में सामने आई 14 आपत्तियों से पता चलता है कि कई फैसलों में बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति नहीं थी। ये मोइत्रा के आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से साबित तथ्य के रूप में नहीं रखा जा सकता।

श्राद्ध पक्ष में 60 साल बाद दुर्लभ संयोग, सर्वपितृ अमावस्या समेत बनेंगे खास योग

उज्जैन   हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व है। पितृपक्ष पितरों की आत्मा की मुक्ति और शांति के लिए भाद्र मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से आरम्भ होकर आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक चलता है।  इस साल श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर (शनिवार) को पूर्णिमा श्राद्ध से हो रही है और इसका समापन 10 अक्टूबर  (शनिवार) को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा।  इस बार पितृपक्ष का समय बहुत ही खास माना जा रहा है क्योंकि इस दौरान बहुत ही दुर्लभ संयोग का निर्माण होने जा रहा है।  16 दिन का रहेगा  श्राद्ध पक्ष इस बार श्राद्ध पक्ष 16 दिन का रहेगा, हालांकि एक दिन दो तिथियां के कारण श्राद्ध निर्धारित कालखंड में किए जाएंगे। ज्योतिष के जानकारों का मानना है कि  ग्रह गोचर और परिभ्रमण की स्थिति के आधार पर इस बार श्राद्ध पक्ष विशेष ग्रहयोग में आ रहा है। 1966 के बाद 2026 में ग्रहयोग की पुनरावृत्ति हो रही है। शनि ग्रह को ज्योतिषीय मान्यता में पितरों का समकारक माना है। इस बार पितृपक्ष की शुरुआत पूर्णिमा तिथि पर शनिवार से और समापन सर्वपितृ अमावस्या तिथि पर भी शनिवार को हो रहा है। इसके साथ बुधादित्य योग और त्रिएकादश के योग बनने की स्थिति बताई गई है। 26 सितंबर से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत होगी। उज्जैन में सिद्धवट, रामघाट और शिप्रा नदी के अन्य घाटों पर देशभर से श्रद्धालु पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए पहुंचेंगे।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार करीब 60 साल बाद विशेष ग्रह संयोग बन रहा है। उनका कहना है कि 1966 के बाद 2026 में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु और शनि की विशेष स्थिति की पुनरावृत्ति हो रही है। इसी के चलते इस बार का 16 दिन का श्राद्ध पक्ष धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य  के अनुसार महालय श्राद्ध की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा यानी 26 सितंबर से होगी और आश्विन कृष्ण अमावस्या, 10 अक्टूबर तक चलेगी। इस बार श्राद्ध पक्ष की शुरुआत शनिवार से होगी और समापन भी शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा। इस दौरान बुधादित्य योग के साथ केंद्र-त्रिकोण और एकादश से जुड़े योग बनने की बात भी ज्योतिषीय गणना में कही गई है। सर्वपितृ अमावस्या पर शनिश्चरी अमावस्या और गजछाया योग 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इसी दिन शनिश्चरी अमावस्या और गजछाया योग का संयोग भी बन रहा है। इसे पितरों के निमित्त तर्पण, श्राद्ध और अन्य धार्मिक कर्मों के लिए विशेष माना जा रहा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार सूर्य का कन्या राशि में गोचर पितृ कर्म के लिए विशेष माना जाता है। इसके साथ बुधादित्य योग और अन्य शुभ योग बनने से इस अवधि में किए जाने वाले तर्पण, श्राद्ध, पार्वण श्राद्ध, एकोद्दिष्ट श्राद्ध और तीर्थ श्राद्ध आदि को विशेष फलदायी माना गया है। सिद्धवट, रामघाट और गया कोठा पर होंगे पितृ कर्म उज्जैन में श्राद्ध पक्ष के दौरान सिद्धवट, रामघाट और गया कोठा प्रमुख पितृ तीर्थ रहेंगे। स्कंद पुराण के अवंती खंड में इन स्थानों का पितृ कर्म के संदर्भ में उल्लेख बताया जाता है। इसी मान्यता के चलते श्राद्ध पक्ष में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां तर्पण, पिंडदान और अन्य कर्मकांड के लिए पहुंचते हैं। रामघाट और सिद्धवट का धार्मिक महत्व प्राचीन धार्मिक नगरी उज्जैन में देशभर से श्रद्धालु सालभर अपने पितरों के तर्पण के लिए शिप्रा नदी के किनारे स्थित रामघाट और सिद्धवट घाट पहुंचते हैं। यहां विधि-विधान से पूजन, तर्पण, पिंडदान और हवन किया जाता है। सिद्धवट घाट पर स्थित प्राचीन वटवृक्ष को माता पार्वती द्वारा स्थापित माना जाता है। स्कंद पुराण में इस स्थान को ‘प्रेत शिला तीर्थ’ कहा गया है। मान्यता है कि यहां तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसी तरह मोक्षदायिनी और उत्तरवाहिनी शिप्रा नदी के तट पर स्थित रामघाट पर आम दिनों के साथ विशेष अवसरों पर भी हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और हवन करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां कर्मकांड करने से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है। मुंडन संस्कार से होता हैश्राद्ध कर्म पितृपक्ष में हर साल बड़ी संख्या में लोग देश के कोने कोने से पिंण्ड दान के लिए संगम आते हैं। पितृ मुक्ति का प्रथम एवं मुख्य द्वार कहे जाने के कारण संगमनगरी में पिंडदान और श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व है।  धर्म शास्त्रों में भगवान विष्णु को मोक्ष के देवता माना जाता है। प्रयाग में भगवान विष्णु बारह भिन्न रूपों में विराजमान हैं। मान्यता है कि त्रिवेणी में भगवान विष्णु बाल मुकुंद स्वरूप में वास करते हैं। प्रयाग को पितृ मुक्ति का पहला और मुख्य द्वार माना जाता है। काशी को मध्य और गया को अंतिम द्वार कहा जाता है। प्रयाग में श्राद्ध कर्म का आरंभ मुंडन संस्कार से होता है। तिथि क्षय के बावजूद 16 श्राद्ध इस बार कुछ पंचांगों में पंचमी और अष्टमी तिथि के क्षय का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद श्राद्ध की संख्या 16 ही रहेगी। ज्योतिषाचार्य के अनुसार धर्मशास्त्रीय परंपरा में एक दिन में समय के अंतर के अनुसार दो तिथियों के श्राद्ध किए जाने का प्रावधान माना जाता है। परंपरा के अनुसार अंतर संभव हालांकि परिवार, गोत्र और शाखा की परंपरा के अनुसार इसमें अंतर हो सकता है। पंचमी और अष्टमी के श्राद्ध को लेकर भी पंचांगों में समय का स्पष्टीकरण दिया गया है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और अन्य कर्म परिवार की परंपरा एवं संबंधित तिथि के अनुसार विधि-विधान से किए जाते हैं। इस बार उज्जैन के सिद्धवट, रामघाट और गया कोठा पर श्राद्ध पक्ष के दौरान विशेष भीड़ रहने की संभावना है। किस दिन कौन-सा श्राद्ध 26 सितंबरःपूर्णिमा श्राद्ध 27 सितंबरःप्रतिपदा श्राद्ध 28 सितंबरःद्वितीया श्राद्ध 29 सितंबर :तृतीया, भरणी श्राद्ध 30 सितंबरःचतुर्थी श्राद्ध,मध्यान्ह के बाद पंचमी 01 अक्टूबरः पंचमी श्राद्ध, दोपहर 12.30 बजे के बाद षष्ठी 02 अक्टूबरःसप्तमी श्राद्ध 03 अक्टूबरःअष्टमी श्राद्ध 04 अक्टूबरःनवमी श्राद्ध 05 अक्टूबरःदशमी श्राद्ध 06 अक्टूबरःएकादशी श्राद्ध 07 अक्टूबरःद्वादशी श्राद्ध 08 अक्टूबरःत्रयोदशी श्राद्ध 09 अक्टूबरःचतुर्दशी श्राद्ध 10 अक्टूबरःसर्वपितृ अमावस्या  

ठंड के मौसम में बढ़ेगा पारा? अल-नीनो के असर से मौसम में बड़ा बदलाव

 नई दिल्ली ठंड का मौसम आने वाला है, लेकिन इस बार सर्दी कुछ कम पड़ सकती है. इसकी एक बड़ी वजह तेजी से मजबूत हो रहा अल-नीनो है. मौसम एजेंसियों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से में समुद्र का पानी सामान्य से 1 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म हो चुका है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर अल-नीनो और मजबूत हुआ तो 2026-27 की सर्दी कई जगह सामान्य से ज्यादा गर्म रह सकती है. इसका असर 2027 की गर्मी पर भी पड़ सकता है।  अल-नीनो में प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे दुनिया के कई हिस्सों के मौसम में बदलाव आता है. भारत में इसका असर बारिश, मॉनसून और तापमान पर पड़ सकता है. इस बार चिंता इसलिए ज्यादा है क्योंकि अल-नीनो ऐसे समय मजबूत हो रहा है, जब क्लाइमेट चेंज के कारण दुनिया का तापमान पहले ही बढ़ा हुआ है।  सर्दी में तापमान कितना बढ़ सकता है? अल-नीनो का मतलब यह नहीं है कि हर शहर का तापमान एक तय संख्या से बढ़ेगा. तापमान पर कई दूसरी चीजों का भी असर होता है. इसे आसान उदाहरण से समझिए. अगर दिल्ली में सर्दियों में किसी समय सामान्य तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहता है और मौसम 2 डिग्री ज्यादा गर्म रहता है, तो तापमान करीब 12 डिग्री हो सकता है।  इसी तरह जहां तापमान -3 डिग्री रहता है, वहां यह -1 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है. लेकिन ये सिर्फ उदाहरण हैं. अभी यह कहना मुश्किल है कि दिल्ली, चूरू, पटना, श्रीनगर या लद्दाख में तापमान कितने डिग्री तक बढ़ेगा. ठंडी हवाएं, बादल और दूसरे मौसम सिस्टम भी तापमान को प्रभावित करते हैं।  दिल्ली, चूरू और पटना में क्या असर होगा? दिल्ली और पटना जैसे मैदानी इलाकों में अगर तापमान सामान्य से ऊपर रहा तो ठंड कम महसूस हो सकती है. खासकर रात का तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है. राजस्थान के चूरू जैसे इलाकों में भी कुछ रातें सामान्य से कम ठंडी हो सकती हैं, जहां सर्दियों में तापमान काफी नीचे चला जाता है।  श्रीनगर और लद्दाख में क्या होगा? श्रीनगर और लद्दाख जैसे ठंडे इलाकों में भी तापमान सामान्य से ऊपर रह सकता है. हालांकि वहां कितना बदलाव होगा, यह अभी साफ नहीं है. लद्दाख में ऊंचाई और जगह के हिसाब से तापमान काफी बदलता है. इसलिए अभी वहां किसी एक तय तापमान का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।  2027 की गर्मी ज्यादा परेशान कर सकती है अल-नीनो का असर सिर्फ सर्दी तक नहीं रहेगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक मार्च से मई 2027 के बीच गर्मी ज्यादा तेज हो सकती है. मजबूत अल-नीनो से भारत में मॉनसून कमजोर हो सकता है और बारिश भी कम या असमान हो सकती है. इससे पानी की कमी और फसलों पर असर का खतरा बढ़ सकता है. ज्यादा तापमान के कारण लू भी ज्यादा परेशान कर सकती है।  अभी अल-नीनो के और मजबूत होने की संभावना है. इसका सबसे ज्यादा असर अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच दिख सकता है. इसके बाद 2027 में यह धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है. हालांकि इसका भारत के मौसम पर कितना असर होगा, यह आने वाले महीनों में साफ होगा।  क्या रिकॉर्ड बढ़ाएगा खतरा? प्रशांत महासागर के निनो 3.4 इलाके में तापमान मापा जाता है और अल-नीनो की तीव्रता का आकलन किया जाता है। 3.05 डिग्री सेल्सियस तापमान आधुनिक रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा है। यह 1982, 1997 और 2015 जैसी मजबूत घटनाओं से आगे जा चुकी है। कुछ आंकड़ों में इसकी 1877 की ऐतिहासिक घटना से भी तुलना हो रही है। इस दौरान बड़े पैमाने पर सूखा और अकाल पड़ा था। मॉडल के मुताबिक, मासिक औसत और भी ऊपर पहुंच सकता है। कुछ अनुमानों में 4 डिग्री के करीब पहुंचने की संभावना जताई गई है, लेकिन यह अभी निश्चित नहीं है।  यह रिकाॅर्ड इसलिए अहम है, क्योंकि अल-नीनो जलवायु परिवर्तन के साथ मिलकर प्रभाव को बढ़ा सकता है। गर्म हो रही दुनिया में समुद्र का तापमान पहले से बढ़ा हुआ है। इसके कारण नई घटनाओं की तीव्रता बढ़ सकती है। वैज्ञानिक हर दिन डेटा पर नजर रख रह हैं,  क्योंकि हर दिन डेटा में उतार-चढ़ाव होता है।  क्या होगा दुनिया पर प्रभाव? दुनिया में अल-नीनो का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है। अमेरिका में इस सर्दी में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है। उत्तरी इलाके में सामान्य से ज्यादा गर्मी, पश्चिमी-मध्य हिस्सों में ज्यादा बर्फबारी हो सकती है।दक्षिण अमेरिका में पेरू और चिली में भारी बारिश और बाढ़ की घटनाएं पहले से देखी जा रही है। मध्य अमेरिका और कैरेबियन में सूखा पड़ने की संभावना है।  भारत पर क्या होगा असर? एशिया में भारत समेत कई देशों में मॉनसून कमजोर हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में सूखा पड़ सकता है। अफ्रीका के कुछ इलाकों में भी बारिश के पैटर्न में बदलाव हो सकता है। कुल मिलाकर बाढ़, सूखा, गर्मी की लहरें और तूफान जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं। 

सेवा संकल्प अभियान में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के लिए 25 सितम्बर ऐतिहासिक होगा यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के जन्मोत्सव के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाला सेवा संकल्प माह सार्थक होगा, जब एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर मध्यप्रदेश सरकार गत 21 साल से बंद लोक परिवहन बस सेवा पुन: शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार की शाम बीएचईएल दशहरा मैदान पर 25 सितम्बर को हो रही मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लने के पश्चात् मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा की । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह एक आधुनिक और यूनिक मॉडल होगा, जिसमें ई-बसों सहित विभिन्न प्रकार की बस सेवाओं को चरणबद्ध रूप से हर नगर और हर जिले तक पहुंचाया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टॉप, बस स्टैंड और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों के साथ बेहतर कंट्रोलिंग व्यवस्था विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिटी बसों से लेकर राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों के लिए लग्जरी बस सेवाएं भी शीघ्र शुरू होंगी। इससे प्रदेश के प्रमुख शहरों के साथ देश के प्रमुख तीर्थस्थलों और महानगरों तक आवागमन सुगम हो जाएगा। मध्यप्रदेश में मेट्रो रेल सेवा की शुरुआत के बाद सड़क परिवहन के क्षेत्र में लोक परिवहन बस सेवा का पुनः शुभारंभ एक महत्वपूर्ण कदम है। मध्यप्रदेश सरकार ने बिजली, पानी, सड़क और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। अब सुगम यातायात की सुविधा को भी विस्तार मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री  नितिन गडकरी हमारे साथ उपस्थित रहेंगे। मैं भोपाल और मध्यप्रदेश की जनता की ओर से उनका स्वागत करता हूं। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा प्रारंभ करने का यह निर्णय प्रदेश की जनता के लिए सुविधा, कनेक्टिविटी और बेहतर आवागमन उपलब्ध करवाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।