samacharsecretary.com

मतदाता सुरक्षा बढ़ी, आयोग का बड़ा फैसला – EVM-VVPAT पर नए नियम लागू

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी मतदान दल को सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बिना ईवीएम और वीवीपैट मशीनें नहीं सौंपी जाएंगी। इस नियम का पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। कॉलेज और जिला स्कूल में बनाए गए हैं डिस्पैच सेंटर विधानसभा चुनाव की प्रशासनिक तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए MIT, RDS कॉलेज और जिला स्कूल में अलग-अलग डिस्पैच सेंटर बनाए गए हैं। आगामी 6 नवंबर को मतदान होना निर्धारित है। उससे एक दिन पहले यानी 5 नवंबर को मतदान कर्मी, पदाधिकारी और सुरक्षा बल बूथों के लिए रवाना होंगे। ये सभी दल डिस्पैच सेंटर से ईवीएम और अन्य आवश्यक मतदान सामग्री प्राप्त करेंगे। जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा है कि चुनाव की प्रक्रिया को पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने के लिए बिना सुरक्षा बलों की उपस्थिति के किसी भी दल को ईवीएम या वीवीपैट उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। काउंटर पर मौजूद पदाधिकारियों की जवाबदेही होगी कि वे केवल उन्हीं दलों को सामग्री दें जो सुरक्षा बलों के साथ पहुंचे हों। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पीठासीन पदाधिकारी निभाएंगे ये जिम्मेदारी डिस्पैच सेंटरों पर मौजूद पीठासीन पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मतदान दल के साथ सुरक्षा बल हों। इसके बाद ही उन्हें मतदान सामग्री सौंपी जाएगी। सभी दलों को सामग्री प्राप्ति की पावती देनी होगी और उसे सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। साथ ही वितरण रजिस्टर को भी लगातार अपडेट किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। निर्वाचन प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए प्रत्येक डिस्पैच सेंटर पर 20-20 काउंटर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जरूरत पड़ने पर काउंटरों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। मतदाता और कर्मियों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन, सूचना सामग्री और पब्लिक एड्रेस सिस्टम की भी व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मजबूत बैरिकेडिंग और ड्राप गेट का निर्माण किया जा रहा है। वहीं, आपात स्थिति से निपटने के लिए सिविल सर्जन को एंबुलेंस, चिकित्सक, पारा मेडिकल स्टाफ और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ का जिक्र, मुख्यमंत्री साय ने जताया पीएम मोदी का आभार

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को न्यू शांति नगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना. इस दौरान भाजपा के सभी महामंत्री, प्रदेश, जिला एवं मंडल पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या व्यापारी मौजूद रहे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित गार्बेज कैफे का जिक्र किया. कैसे आधा किलो कचड़ा देकर नाश्ता और एक किलो कचड़ा देकर दिन या रात का खाना खा सकते हैं. इसके साथ उन्होंने कहा कि ये प्रेरक उदाहरण है कि जब ठान लिया जाए तो बदलाव भी किया जा सकता है. ‘मन की बात’ को सुनने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के हम आभारी हैं. उन्होंने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ का कई बार जिक्र किया है. आज भी छत्तीसगढ़ का जिक्र किया है. अंबिकापुर नगर निगम स्वच्छता के मामले में अव्वल रहा है, जिसका भी जिक्र प्रधानमंत्री ने किया है. मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही है. नक्सली जमीन के अंदर बम गाड़ कर रखते हैं, जिसे देशी स्वान आसानी से डिटेक्ट करता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम में उसका भी जिक्र किया है.

कचरे से कर्म की मिसाल: ‘मन की बात’ में PM ने किया अंबिकापुर के गार्बेज कैफे का ज़िक्र

अंबिकापुर स्वच्छता और नवाचार के क्षेत्र में अंबिकापुर ने देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर नगर निगम की सराहना करते हुए कहा कि 'गार्बेज कैफे जैसी पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह सामाजिक संवेदनशीलता और मानवता की एक प्रेरक मिसाल भी है।' उन्होंने कहा, यह एक बेहतरीन उदाहरण है। अगर ठान लिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है। प्रधानमंत्री की इस प्रशंसा के बाद अंबिकापुर का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर गूंज उठा है।   प्लास्टिक कचरे के बदले भोजन और नाश्ता साल 2019 में अंबिकापुर नगर निगम ने देश का पहला ‘गार्बेज कैफे’ शुरू किया था। इसका उद्देश्य था शहर से प्लास्टिक कचरा हटाना और जरूरतमंदों को सम्मानपूर्वक भोजन उपलब्ध कराना। इस कैफे में कोई भी व्यक्ति पैसे से नहीं, बल्कि प्लास्टिक के कचरे से अपनी भूख मिटा सकता है।   यहां का नियम बेहद दिलचस्प है एक किलो प्लास्टिक कचरे के बदले चावल, दाल, दो सब्ज़ी, रोटी, सलाद और अचार से सजी थाली मिलती है। आधा किलो प्लास्टिक के बदले समोसा, वड़ा पाव या आलू चाप जैसा स्वादिष्ट नाश्ता दिया जाता है।इस व्यवस्था ने गरीबों को भोजन देने के साथ-साथ शहर की सफाई व्यवस्था को भी नया जीवन दिया है।   स्वच्छता और सम्मान की कहानी अंबिकापुर नगर निगम के अधिकारियों का मानना है कि शहर को स्वच्छ रखने में कचरा बीनने वाले लोग असली योद्धा हैं। गार्बेज कैफे उनके लिए न केवल भोजन का माध्यम बना, बल्कि उनके काम को सम्मान भी दिलाया।यह पहल यह संदेश देती है कि समाज जिन लोगों को अक्सर अनदेखा कर देता है, वही पर्यावरण संरक्षण की रीढ़ हैं। कैफे से जमा हुआ प्लास्टिक बाद में रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है और उसका उपयोग प्लास्टिक सामग्रियों के निर्माण में किया जाता है। सड़क निर्माण में भी इसकी उपयोगिता सुनिश्चित की गई है। देशभर में गूंजा अंबिकापुर का मॉडल अंबिकापुर की इस पहल ने देशभर के नगर निगमों को प्रेरित किया है। उत्तर और दक्षिण के राज्यों के कई नगर निगमों ने प्लास्टिक कचरे के निपटान के लिए अलग-अलग नाम से गार्बेज कैफे की शुरुआत की जहां नाश्ता,चाय-काफी उपलब्ध कराया जाता है। निगम अधिकारियों का मानना है कि यदि हर शहर में ऐसे कैफे खोले जाएं, तो यह दोहरी समस्या का समाधान बन सकता है। एक ओर गरीबों को भोजन मिलेगा, तो दूसरी ओर शहर प्लास्टिक मुक्त होंगे। इससे रिसाइक्लिंग उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।

सरहद पर ऑपरेशन त्रिशूल की धमक, पाकिस्तानी सेना में मचा हड़कंप

नई दिल्ली भारत पश्चिमी सीमा पर 30 अक्टूबर से 10 नवंबर तक त्रि-सेवा (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) सैन्य अभ्यास करने वाला है। इसे लेकर पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। तीनों सेना का संयुक्त अभ्यास त्रिशूल के नाम से होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक्सरसाइज सर क्रीक-सिंध-कराची अक्ष पर केंद्रित होगी, जिसे पाकिस्तानी 'पाकिस्तान का गहरा दक्षिण' बताते हैं। इसे देखते हुए इस्लामाबाद अपनी दक्षिणी कमांड में सतर्कता बढ़ाने के लिए मजबूर हो गया है और पूरी तरह से चौकसी बरती जा रही है। पाकिस्तान के रक्षा सूत्रों ने बताया कि सिंध और पंजाब में दक्षिणी कमांड के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया है। साथ ही, वायुसेना और नौसेना को किसी भी संभावित आक्रामकता का जवाब देने के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है। सीएनएन-न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, बहावलपुर स्ट्राइक कोर और कराची कोर को विशेष तैयारियों के लिए चुना गया है। शोरकोट, बहावलपुर, रहीम यार खान, जैकोबाबाद, भोलारी और कराची जैसे हवाई अड्डे भी स्टैंडबाय हैं। इसके अलावा, अरब सागर में गश्त और नौसैनिक गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सैन्य अभ्यास का क्या है मकसद सूत्रों के अनुसार, भारत का यह अभ्यास थार रेगिस्तान और सर क्रीक क्षेत्र के बीच होगा। इसे दक्षिणी क्षेत्रों में नौसेना, वायुसेना और थलसेना के बीच समन्वय जांचने के लिए डिजाइन किया गया है। पाकिस्तानी अधिकारियों को डर है कि इस एक्सरसाइज का इस्तेमाल समुद्री चोकपॉइंट्स और कराची से जुड़े तटीय ढांचे को खतरे में डालने के लिए हो सकता है। ध्यान रहे कि कराची बंदरगाह और बिन कासिम के माध्यम से पाकिस्तान का लगभग 70 प्रतिशत व्यापार होता है, जो इन सुविधाओं को रणनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है।  

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय क्रिटिकॉन रायपुर-2025 कॉन्फ्रेंस में हुए शामिल

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सस्ती और गुणवत्ता पूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वे आज राजधानी के नवा रायपुर स्थित एक निजी होटल में आयोजित क्रिटिकल केयर पर आधारित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस ‘क्रिटिकॉन रायपुर-2025’ में शामिल हुए।   मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि क्रिटिकॉन रायपुर-2025 चिकित्सा विज्ञान, विशेषकर क्रिटिकल केयर के क्षेत्र में नवाचार और उत्कृष्टता का मंच है। यह देश और विदेश के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं को एक साथ लाकर इस क्षेत्र में नई दिशाएं तय करने का अवसर देता है। क्रिटिकल केयर मेडिसिन जीवन रक्षा की रीढ़ है, जो गंभीर परिस्थितियों में मरीजों को नया जीवन देती है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अस्पतालों, क्रिटिकल केयर इकाइयों और मेडिकल सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा  कि नवा रायपुर अटल नगर में मेडिसिटी और फार्मा हब का निर्माण किया जा रहा है, साथ ही प्रदेश के अन्य शहरों में भी लगातार नए अस्पतालों की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि ये कदम छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य सुविधा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगे। मुख्यमंत्री साय ने रामकृष्ण केयर ग्रुप की पूरी टीम को इस राष्ट्रीय आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ देशभर में एक चिकित्सा उत्कृष्टता केंद्र के रूप में उभर रहा है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि क्रिटिकल केयर जैसे अति महत्वपूर्ण विषय पर कॉन्फ्रेंस की मेजबानी रायपुर को मिलना गौरव की बात है। दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में विशेषज्ञों के विचार-विमर्श से निश्चित रूप से ऐसे उत्कृष्ट नवाचार सामने आएंगे, जो मानव स्वास्थ्य उपचार के लिए वरदान साबित होंगे। डॉ. सिंह ने कहा कि आज चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी के उपयोग से इलाज की नई संभावनाएं खुल रही हैं। यही नई तकनीक नए भारत की नई कहानी लिख रही है। उन्होंने चिकित्सकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जब घर में कोई आपात स्थिति होती है और मरीज को सही समय पर हॉस्पिटल पहुँचाया जाता है, तब परिवार के भय को मिटाने में क्रिटिकल केयर डॉक्टरों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि आज समय की आवश्यकता है कि हर जिले और प्रत्येक बड़े अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट्स स्थापित हों। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। आयुष्मान योजना के माध्यम से 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार आम लोगों के लिए बड़ी राहत है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएँ प्रदान करने वाले देश-विदेश और प्रदेश के डॉक्टरों का मंच से सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के संचालक डॉ. संदीप दवे, केयर ग्रुप के सीईओ श्री वरुण खन्ना, तथा देश-विदेश और राज्य भर से आए 1300 से अधिक डॉक्टर  उपस्थित थे।

PM मोदी की ताबड़तोड़ चुनावी सभा: छठ पूजा के बाद बिहार के ये जिले होंगे गर्म

पटना  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 30 अक्टूबर को एक बार फिर बिहार आने वाले हैं। यह जानकारी शनिवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने दी। इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने समस्तीपुर और बेगूसराय का दौरा किया और चुनावी राज्य में दो रैलियों को संबोधित किया। छठ पूजा के बाद 30 अक्टूबर को फिर से बिहार आ रहे PM मोदी दिलीप जायसवाल ने कहा, "प्रधानमंत्री छठ पूजा के ठीक बाद 30 अक्टूबर को फिर से बिहार आ रहे हैं। उनका पहला कार्यक्रम सुबह करीब 10 बजे मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में होगा। मुजफ्फरपुर के बाद, दोपहर करीब 1 बजे छपरा में उनका कार्यक्रम होगा और इन दो कार्यक्रमों के बाद, नवंबर में उनके कार्यक्रम जारी रहेंगे। फिलहाल, प्रधानमंत्री 30 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर और छपरा में कार्यक्रमों के लिए बिहार आ रहे हैं।" शुक्रवार को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की और राज्य में एनडीए की सत्ता में वापसी का दावा किया। जंगलराज वालों को दूर रखेगा बिहार- PM Modi समस्तीपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "लोकतंत्र के महापर्व का बिगुल बज चुका है। पूरा बिहार कह रहा है 'फिर एक बार एनडीए सरकार', 'फिर एक बार सुशासन सरकार'। जंगलराज वालों को दूर रखेगा बिहार।"   

रिलायंस समेत कंपनियां तैयार, रूसी तेल की कमी में भी जारी रहेगा उत्पादन

 नई दिल्ली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने कहा कि उसने रूसी तेल निर्यातक कंपनियों रोजनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए नए प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए अपने रिफाइनरी संचालन को बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इन प्रतिबंधों का असर भारत में ईंधन उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि सरकारी तेल कंपनियां जैसे- इंडियनऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम बढ़ी हुई लागत को कुछ समय तक अपने स्तर पर ही हैंडल कर सकती हैं। अमेरिकी OFAC नोटिफिकेशन की समीक्षा में जुटे रिफाइनर्स  सूत्रों के हवाले से लिखा है कि देश की तेल कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के असर को अच्छे से अध्ययन कर रही हैं- खासकर भुगतान चैनलों और अन्य अनुपालन आवश्यकताओं के संदर्भ में। कंपनियां साथ ही अपनी रिफाइनरियों को 21 नवंबर की कटऑफ तिथि के बाद रूसी कच्चे तेल के बिना संचालन के लिए तैयार कर रही हैं। यानी अमेरिकी प्रतिबंध 21 नवंबर से लागू होंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “रिलायंस अपने रिफाइनरी संचालन को लागू प्रतिबंधों और विनियामक आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल रही है, जिनमें यूरोपीय संघ द्वारा परिष्कृत उत्पादों के आयात पर लगाए गए प्रतिबंध और किसी भी सरकारी दिशा-निर्देश का अनुपालन शामिल है।” कंपनी ने आगे कहा कि, “जैसा कि उद्योग में सामान्य है, सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट समय-समय पर बदलती बाजार और नियामकीय परिस्थितियों को दर्शाने के लिए विकसित होते हैं। रिलायंस इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ संबंध बनाए रखेगी।” यह बयान कंपनी के रूसी तेल कंपनी रोजनेफ्ट के साथ उसके लगभग 5 लाख बैरल प्रतिदिन के कच्चे तेल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट की ओर अप्रत्यक्ष रूप से संकेत करता है। तेल कीमतों में बढ़ोतरी, वैश्विक बाजार में अस्थिरता रोजनेफ्ट और लुकोइल जैसी कंपनियां वैश्विक स्तर पर 3-4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल निर्यात करती हैं। ऐसे में इनकी आपूर्ति रुकने से वैश्विक तेल बाजार में 3-4% की कमी आने की संभावना ने कीमतों को फिर से ऊपर धकेल दिया है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को $66 प्रति बैरल के पार चला गया, जबकि गुरुवार को इसमें 5% की तेजी दर्ज की गई थी। भारत की निर्भरता और विकल्प अब तक इस वर्ष भारत के कुल कच्चे तेल आयात में लगभग 34% हिस्सा रूस से आया है, जिसमें रोजनेफ्ट और लुकोइल का योगदान करीब 60% है। इंडियनऑयल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “रूस के विकल्प के रूप में पश्चिम एशिया, अफ्रीका या अमेरिका से सप्लाई हासिल करना संभव है। लेकिन बाकी देश भी इन्हीं स्रोतों की ओर रुख करेंगे, जिससे तेल कीमतों और प्रीमियम दोनों में बढ़ोतरी होगी।” उन्होंने आगे कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमत $70 प्रति बैरल से अधिक नहीं जाती, तो लाभांश (मार्जिन) पर इसका असर सीमित रहेगा। आयात बिल में संभावित बढ़ोतरी रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि बाजार दर पर विकल्पी आपूर्ति हासिल करने से भारत का तेल आयात बिल लगभग 2% तक बढ़ सकता है, जिसका असर व्यापक आर्थिक संकेतकों पर पड़ेगा। रूस के विकल्प तलाशने की संभावना हालांकि यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के कारण रूस के "शैडो फ्लीट" यानी गुप्त जहाज नेटवर्क पर कुछ असर पड़ा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मॉस्को अभी भी बड़ी मात्रा में तेल वैश्विक बाजार में भेजने में सक्षम रहेगा। रूस नए मध्यस्थों और ट्रांसशिपमेंट रूट्स के जरिए अपनी आपूर्ति को रोज़नेफ्ट और लुकोइल से अलग दिखाकर बाजार में बनाए रख सकता है। फिर भी, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग इन प्रतिबंधों को कितनी कड़ाई से लागू करता है।

158,000 लोग घटे पोलैंड की आबादी, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं गंभीर आर्थिक और सामाजिक प्रभावों की

वारसा कल्पना कीजिए, एक ऐसा देश जहां हर साल लाखों लोग कम हो रहे हों। जहां बच्चे पैदा होने की संख्या मौतों से कहीं कम हो। जहां युवा नौकरी और बेहतर जिंदगी की तलाश में दूसरे देश चले जाते हों। यही हकीकत है यूरोपीय देश पोलैंड की। हाल ही में पोलैंड के सरकारी सांख्यिकी कार्यालय (GUS) ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा जारी किया है। इसके मुताबिक, पिछले एक साल में देश की आबादी 1,58,000 लोगों से घटकर अब लगभग 37.38 मिलियन रह गई है। यह गिरावट न सिर्फ आंकड़ों की बात है, बल्कि एक पूरे समाज की चिंता का विषय है। घटती आबादी का मतलब क्या है? सबसे पहले, आबादी घटने का मतलब समझिए। जनसंख्या को मापने का सीधा फॉर्मूला है। आबादी = जन्म + अप्रवासन (नए लोग आना) – मौतें – प्रवासन (लोगों का जाना)। पोलैंड में जन्म कम हो रहे हैं, मौतें ज्यादा, युवा बाहर जा रहे हैं, और नए लोग उतने नहीं आ रहे जितने चाहिए। GUS की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश की जनसंख्या में पिछले एक साल में 1,58,000 की कमी आई है, जो एक गहराते डेमोग्राफिक संकट की ओर इशारा करती है। सितंबर 2025 के अंत तक पोलैंड की जनसंख्या 37.38 मिलियन थी, जो पिछले साल की तुलना में 1,58,000 और 2024 के अंत की तुलना में लगभग 1,13,000 कम है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 की पहली तीन तिमाहियों में जनसंख्या में 0.30% की कमी आई, यानी हर 10,000 निवासियों पर देश ने 30 लोगों को खोया, जो पिछले साल के 27 प्रति 10,000 की तुलना में अधिक है। यह गिरावट कम जन्म दर और अन्य कारकों के कारण लंबे समय से चली आ रही जनसंख्या घटने की प्रवृत्ति को दर्शाती है। जन्म दर में कमी, ऐतिहासिक निचले स्तर पर रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2025 के बीच लगभग 1,81,000 बच्चों के जन्म दर्ज किए गए, जो 2024 की समान अवधि की तुलना में लगभग 11,000 कम है। इस दौरान जन्म दर 6.5% तक गिर गई, जो पिछले साल की तुलना में 0.3 प्रतिशत अंक कम है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा पोलैंड के इतिहास में जन्म दर के सबसे निचले स्तरों में से एक है। कम प्रजनन दर, यूरोप में सबसे निचला स्तर पिछले साल पोलैंड की कुल प्रजनन दर (TFR), यानी एक महिला द्वारा अपने जीवनकाल में औसतन जन्म दिए गए बच्चों की संख्या, 1.11 तक गिर गई, जो यूरोपीय संघ में सबसे कम और विकसित देशों में भी सबसे निचले स्तरों में से एक है। पोलैंड में महिलाएं औसतन 1.11 बच्चे पैदा कर रही हैं। जबकि जनसंख्या स्थिर रखने के लिए कम से कम 2.1 बच्चे चाहिए। क्यों? क्योंकि युवा लोग शादी टाल रहे हैं, बच्चे पैदा करने से डर रहे हैं। महंगाई, नौकरी की असुरक्षा, और महामारी ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। 2024 में पहली बार मां बनने की औसत उम्र 29.1 साल हो गई जो 1990 में यह 22.7 थी। बच्चे पैदा करने लायक उम्र की महिलाएं खुद कम हो रही हैं, क्योंकि 30 साल पहले जन्म कम हुए थे। यह आंकड़ा पोलैंड के सामने खड़े जनसांख्यिकीय संकट की गंभीरता को रेखांकित करता है। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में जनसंख्या 1989 में पोलैंड की जनसंख्या 4 करोड़ थी, लेकिन तब से यह लगातार कम हो रही है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कम जन्म दर, बढ़ती उम्र की आबादी और प्रवास जैसे कारक इस गिरावट को और तेज कर रहे हैं। GUS की रिपोर्ट ने इन आंकड़ों को "चिंताजनक" करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो देश को सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक और सामाजिक प्रभाव अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जनसंख्या में यह गिरावट श्रम बाजार, पेंशन प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ा सकती है। कम जन्म दर और उम्रदराज आबादी के कारण कार्यबल में कमी आ रही है, जो भविष्य में आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकता है। सरकार ने जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतियां लागू की हैं, लेकिन इनका प्रभाव अभी तक सीमित रहा है।

टैरिफ नीति पर IMF ने जताई राय, भारत पर असर न के बराबर, ट्रंप को झटका

नई दिल्‍ली जिस टैरिफ के बल पर अमेरिकी राष्‍ट्रपति भारत को झुकाना चाहते हैं, उसकी हवा अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष की नवीनतम वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (WEO) रिपोर्ट ने निकाल दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के टैरिफ का भारतीय अर्थव्यवस्था पर खास असर नहीं दिख रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2025–26 तक दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा. इंडिया की ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में चीन से ज्‍यादा बनी रहेगी. IMF चीन की विकास दर 2025–26 में 4.8 प्रतिशत मान रहा है. आईएमएफ ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को भी बढा दिया है. रिपोर्ट के अनुसार भारत की जीडीपी चालू वित्‍त वर्ष में 6.6 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है. आईएमएफी की रिपोर्ट रिपोर्ट शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद आई है. इसका असर अगले सत्र में देखने को मिल सकता है. जीडीपी ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव खबरों से सेंटीमेंट्स और मजबूत होंगे. टैरिफ का झटका सह गया भारत रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू अर्थव्यवस्था की पहली तिमाही की मजबूत ग्रोथ ने टैरिफ के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया है. अमेरिका द्वारा भारतीय और चीनी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाए जाने के बाद तेज़ आर्थिक मंदी की आशंका थी, लेकिन IMF का मानना है कि वास्तविक नुकसान सीमित रहा. भारत में मज़बूत घरेलू खपत, विनिर्माण गतिविधियां और निजी निवेश में बढ़ोतरी ने इस झटके को काफी हद तक झेल लिया. IMF ने नोट किया कि “टैरिफ के प्रभाव अपेक्षा से कम गंभीर रहे, जिसके पीछे लचीली घरेलू मांग और व्यापार विविधीकरण महत्वपूर्ण कारक रहे.” चीन से आगे रहेगा भारत नए अनुमानों के अनुसार, भारत चीन से आगे रहेगा, जिसके लिए आईएमएफ ने 4.8 फीसदी का ग्रोथ अनुमान दिया है. आईएमएफ ने भारत की मजबूती का श्रेय मजबूत घरेलू खपत, मैन्युफैक्चरिंग में सुधार और सेवा क्षेत्र के विस्तार को दिया है. हालांकि, IMF ने भारत की 2026 की वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है. फंड के मुताबिक शुरुआती तेजी लंबे समय तक बनी नहीं रह सकती. भारत की अर्थव्यवस्था FY25 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी और FY26 के लिए सरकार के 6.3–6.8 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है. ये ग्रोथ तब है जब दुनिया भर में अनिश्चितता बढ़ रही है.  

राजधानी भोपाल में आतंकियों और मादक पदार्थ तस्करों की सक्रियता, पिछले 3 साल में कई विदेशी संदिग्ध गिरफ्तार

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी अब आतंकियों और मादक पदार्थ तस्करों का पनाहगाह बनती जा रही है। बीते तीन वर्षों में भोपाल से सीरिया से लेकर बांग्लादेश तक के कई संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, जो देश विरोधी ताकतों के साथ मिलकर आतंक फैलाने की साजिश रच रहे थे। आशंका है कि सिमी के बाद अन्य प्रतिबंधित संगठन यहां से अपने नेटवर्क का विस्तार करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।  राजधानी को शांति का टापू माना जाता है, लेकिन अब यह आतंकियों और मादक पदार्थ तस्करों का पनाहगाह बनती जा रही है। पिछले तीन साल में शहर से सीरिया से लेकर बांग्लादेश तक के कई संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जो देश विरोधी ताकतों के साथ मिलकर साजिश रच रहे थे। अब यह साफ है कि भोपाल आतंकियों के लिए एक सेफ जोन बनता जा रहा है। जेएमबी और एचयूटी के आतंकी पकड़े गए सिमी के बाद अन्य प्रतिबंधित संगठनों ने भी यहां अपने नेटवर्क फैलाए। जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के आतंकियों ने भोपाल में पनाह ली, लेकिन इंटेलिजेंस की सक्रियता से उनका मॉड्यूल ध्वस्त किया गया। इसके बाद एनआईए ने शाहजहांनाबाद से पीएफआई और हिज्ब-उत-तहरीर (एचयूटी) के सदस्यों को गिरफ्तार किया। पुलिस और एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ युवक सीधे आईएसआईएस से संपर्क में थे। भोपाल से ISIS आतंकी कैसे हुआ गिरफ्तार, जानिए पूरा मामला दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ISIS (इस्लामिक स्टेट) के एक खतरनाक मॉड्यूल को ध्वस्त करते हुए भोपाल के करोंद इलाके से 21 वर्षीय आतंकी सैयद अदनान उर्फ अबू (अदनान खान) को गिरफ्तार किया, जबकि दिल्ली के सादिक नगर से 20 वर्षीय अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब को पहले ही पकड़ लिया गया था। दोनों ने मिलकर दिल्ली के भीड़भाड़ वाले मॉल और पब्लिक पार्क में IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) से फिदायीन (सुसाइड) हमला करने की प्लानिंग की थी। गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि अदनान (भोपाल वाला) के लैपटॉप से फिदायीन ट्रेनिंग के वीडियो बरामद हुए, जिसमें सीरियाई-तुर्की बॉर्डर पर बैठे एक हैंडलर के निर्देश थे।  अदनान ने पहले भी ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे के जज को सोशल मीडिया पर धमकी दी थी। यह गिरफ्तारी न केवल दिल्ली को बचाने वाली है, बल्कि ISIS की ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन की गहराई को उजागर करती है। आइए, इस सनसनीखेज मामले की पूरी परतें खोलते हैं-गिरफ्तारी से लेकर साजिश, खुलासे और पुलिस की कार्रवाई तक। साजिश का खुलासा: 'दिवाली पर IED ब्लास्ट', दिल्ली के मॉल-पार्क थे निशाना दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को 16 अक्टूबर 2025 को खुफिया इनपुट मिला कि ISIS का एक छोटा मॉड्यूल दिल्ली में बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। शुरुआत दिल्ली के सादिक नगर से हुई, जहां 20 वर्षीय अदनान खान उर्फ अबू मुहरिब (जिसका पिता सरकारी कर्मचारी है) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने भोपाल कनेक्शन उजागर किया, जिसके बाद 18 अक्टूबर सुबह 4 बजे स्पेशल सेल की टीम भोपाल पहुंची। निशातपुरा थाना क्षेत्र के इंडस रीजेंसी अपार्टमेंट के मकान नंबर A-46 पर छापा मारा गया, जहां 21 वर्षीय सैयद अदनान उर्फ अबू को उसके परिवार के साथ सोते हुए पकड़ा गया। अदनान भोपाल में CA की तैयारी कर रहा था, लेकिन छह साल से परिवार के साथ रहते हुए ISIS की गतिविधियों में लिप्त था। पुलिस की बड़ी चूक आतंकियों की मौजूदगी के बावजूद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क नहीं दिखीं। सबसे बड़ी विफलता यह रही कि शहर में किरायेदारों का सत्यापन ठीक से नहीं हुआ। इसी कमी का फायदा आतंकियों ने उठाया और घनी बस्तियों में पनाह ले ली। ऐशबाग और करोंद में ठिकाना मार्च 2022 में एटीएस ने ऐशबाग से जेएमबी के आतंकियों को पकड़ा था। पूछताछ में पता चला कि ऐशबाग की घनी बस्ती में किराए पर मकान लेना आसान है और वहां नजर रखना मुश्किल है। यहां तीन साल तक आतंकी छिपे रहे, लेकिन पुलिस और इंटेलिजेंस को भनक तक नहीं लगी। अब तक ऐशबाग से करीब दस संदिग्ध गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं करोंद इलाके में जेएमबी के मददगारों और आईएसआईएस से जुड़े आतंकियों की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।