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भारत पर टैरिफ लगाने से पहले संभल जाए अमेरिका, रूसी तेल खरीद पर जेमी डिमॉन ने चेताया

नई दिल्ली जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमॉन ने रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को कोई सख्त कार्रवाई करने से पहले उसके असर को समझना चाहिए। यूएस को भारत और पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना होगा। डिमॉन ने यह बात मुंबई में जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएनबीसी-टीवी18 से बातचीत में कही। उन्होंने कहा, 'वॉशिंगटन को पहले समझना चाहिए कि भारतीय रिफाइनर रूस से मिलने वाले तेल का किस तरह इस्तेमाल करते हैं।' जेमी डिमॉन ने कहा, 'उम्मीद है कि अमेरिका इन सभी मुद्दों को समझेगा और ऐसा नहीं करेगा कि रूस के खिलाफ जरूरी कदम उठाते हुए भारत और दुनिया के तेल बाजार को नुकसान पहुंचा दे।' उन्होंने भारतीय रिफाइनरियों में इस्तेमाल होने वाले रूसी तेल को लेकर भी बात रखी। डिमॉन के मुताबिक, रूस से आने वाले तेल का कुछ हिस्सा भारत में रिफाइन होकर इस्तेमाल होता है और कुछ तेल रिफाइनरियों की खास जरूरत के मुताबिक खरीदा जाता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत यह तेल रूस से नहीं खरीदेगा तो उसे किसी दूसरे देश से लेना होगा और हो सकता है कि वहां से मिलने वाला तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए सही न हो। रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ डिमॉन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पास किया है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। डिमॉन ने कहा कि अमेरिका को रूस पर दबाव बनाने के उपायों के साथ-साथ यह भी देखना चाहिए कि ऐसे कदमों का तेल बाजार पर कितना व्यापक असर पड़ सकता है। अमेरिका को यूक्रेन के समर्थन के लिए और कदम उठाने चाहिए। भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ का दबाव रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका और यूरोपीय संघ की ओर से दबाव बढ़ा हुआ है। भारत लगातार रूसी तेल खरीद को लेकर हो रही आलोचना को खारिज करता रहा है। नई दिल्ली ने अपनी ऊर्जा खरीद को निशाना बनाने को अनुचित और गैरवाजिब बताया है। रूस पर प्रतिबंध वाले अमेरिकी कानून पर भी भारत ने कहा कि इससे दोनों देशों के संबंध प्रभावित हो सकते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और रूसी तेल के बड़े खरीदारों में शामिल है।

इंदौर जू में दिखेगी पानी के भीतर की दुनिया, 35 करोड़ में बनेगा आधुनिक एक्वेरियम

इंदौर इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में प्रदेश का पहला अंडरवाॅटर फिश एक्ववेरियम का काम शुरू हो चुका है। यह करीब डेढ़ एकड़ में बनेगा। इसके लिए प्राणी संग्रहालय में पांच फीट गहराई में खुदाई भी हो चुकी है। डेढ़ साल में इसके निर्माण को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। दस करोड़ रुपये से अधिक पहले चरण में खर्च किए जाएंगे। दर्शक जब अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम में प्रवेश करेंगे तो उन्हें अपने सिर के उपर से मछलियां और समुद्री जीव तैरते हुए दिखाई देंगे। इसकी योजना चार साल पहले नगर निगम ने बनाई थी, लेकिन अब उसे मूर्त रुप दिया जा रहा है। नगर निगम के बजट में भी इसकी घोषणा की गई है। मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि अंडरवाॅटर फिश एक्वेरियम के बनने से चिडि़याघर के प्रति शहरवासियों का आकर्षण और बढ़ेगा। मनोरंजन शहवासियों को मिलेगा और नगर निगम की आय भी इससे बढ़ेगी। इसके अलावा नगर निगम में 14 डी थिएटर का निर्माण भी जल्दी शुरू होगा। इंदौर के प्राणी संग्रहालय (जू) में घूमने का मजा अब दोगुना होने वाला है। जल्द ही शहरवासियों को यहां समुद्र जैसी गहरी और खूबसूरत जलीय दुनिया का अहसास होगा। शहर के जू में एक आधुनिक अंडरवॉटर टनल एक्वेरियम बनाने की रुकी हुई योजना ने अब फिर से रफ्तार पकड़ ली है। नगर निगम इसे पीपीपी (PPP) मॉडल पर तैयार करने जा रहा है। करीब 35 करोड़ रुपये के बजट वाले इस भव्य प्रोजेक्ट के जरिए लोगों को सिर्फ रंग-बिरंगी मछलियां ही नहीं, बल्कि पेंगुइन, टच पूल और स्नॉर्कलिंग जैसे रोमांचक अनुभव भी मिलेंगे। पानी के बीच से गुजरती पारदर्शी टनल     इस पूरे प्रोजेक्ट की जान इसका 'अंडरवॉटर टनल' होगा, जिसके डिजाइन के लिए लगभग 128 वर्गमीटर की जगह तय की गई है। जब दर्शक इस पारदर्शी टनल से गुजरेंगे, तो उन्हें ऐसा लगेगा जैसे वे खुद पानी के भीतर चल रहे हों और मछलियां उनके चारों ओर तैर रही हों।     टनल में स्पष्ट रूप से देखने के लिए खास एक्रेलिक पैनल वाली खिड़कियां लगाई जाएंगी। जलीय जीवों को उनके अनुकूल माहौल देने के लिए पानी को लगातार फिल्टर करने, ऑक्सीजन की सप्लाई, और तापमान नियंत्रित करने वाले बेहद आधुनिक सिस्टम यहां काम करेंगे। मनोरंजन के साथ शिक्षा का भी बनेगा केंद्र     नगर निगम ने इस प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट और बाद में इसके रखरखाव व संचालन के लिए किसी अनुभवी एजेंसी की तलाश शुरू कर दी है। जू प्रभारी उत्तम यादव के मुताबिक, इस बार नियमों को थोड़ा लचीला बनाया गया है ताकि काम करने वाली एजेंसी आसानी से मिल सके।     इस पूरे प्रोजेक्ट को एक से डेढ़ साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि यह एक्वेरियम सिर्फ मछलियां देखने की जगह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे मीठे और समुद्री पानी के जीवों के बारे में जानकारी देने वाले एक बड़े मनोरंजन और शिक्षा केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। पेंगुइन से लेकर स्नॉर्कलिंग तक, मिलेंगी ये शानदार सुविधाएं इस नए कॉम्प्लेक्स में पर्यटकों के लिए कई विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद होंगी:     5 एक्वेरियम हॉल: यहां अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों और जलीय जीवों को करीब से निहारने की सुविधा होगी।     पेंगुइन प्रदर्शनी: 75 वर्गमीटर के एक खास क्षेत्र में पेंगुइन देखने की व्यवस्था की जाएगी।     टच पूल और स्नॉर्कलिंग जोन: जलीय दुनिया को छूकर महसूस करने के लिए 'टच पूल' और पानी के भीतर का जीवन देखने के लिए 'स्नॉर्कलिंग जोन' भी बनाया जाएगा।     अन्य आकर्षण: इसके अलावा परिसर में 125 वर्गमीटर का एक पूल वाला तालाब, बेहतरीन तस्वीरों के लिए 'सेल्फी पॉइंट', आगंतुकों के खाने-पीने के लिए 'रेस्टोरेंट' और यादगार तोहफे खरीदने के लिए 'सुवेनियर शॉप' भी मौजूद रहेगी।  

किशाऊ समझौते से पंजाब बाहर, यमुना के पानी पर सरकार ने उठाए सवाल

चंडीगढ़  किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर विवाद बढ़ गया है। पंजाब सरकार अब इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। छह राज्यों के बीच हुए समझौते से पंजाब को बाहर रखा गया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता नील गर्ग ने यह जानकारी दी। गर्ग ने कहा कि पंजाब इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगा। उनका कहना है कि यमुना के पानी में पंजाब के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती। 15 सितंबर को नई दिल्ली में यह समझौता हुआ था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल मौजूद थे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। पंजाब इस समझौते का हिस्सा नहीं बना। पंजाब को इस प्रक्रिया से बाहर रखना स्वीकार्य नहीं है। 1954 में पंजाब के यमुना संबंधी अधिकार स्वीकार किए गए थे। पंजाब पुनर्गठन के बाद भी ये अधिकार खत्म नहीं माने जा सकते। पंजाब की आपत्ति और कानूनी आधार गर्ग ने बताया कि पंजाब की गैरमौजूदगी में उसके हितों को प्रभावित करने वाला फैसला नहीं हो सकता। पंजाब को यमुना में उसके हिस्से का पानी मिलना चाहिए। 1954 के समझौते की अनदेखी का कोई कानूनी आधार नहीं है। पंजाब को विश्वास में नहीं लेना आपत्तिजनक है। यह मामला अब नए कानूनी विवाद का रूप ले सकता है। क्या है किशाऊ बांध परियोजना किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस यमुना की एक प्रमुख सहायक नदी है। इस परियोजना में 1,562 दस लाख घन मीटर जल भंडारण की क्षमता होगी। समझौते के तहत हरियाणा को 633 एमसीएम पानी मिलेगा। उत्तर प्रदेश को 411 एमसीएम, राजस्थान को 124 एमसीएम और दिल्ली को 80 एमसीएम पानी आवंटित किया गया है। परियोजना के लाभ और केंद्र का सहयोग परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता 422 मेगावाट होगी। इससे सालाना करीब 1,476 दस लाख यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा होने का अनुमान है। लगभग 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा विकसित करने का लक्ष्य है।  केंद्र सरकार ने इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया है। इसके वित्तीय बोझ का करीब 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार उठाएगी। यह परियोजना लंबे समय से अंतरराज्यीय जल बंटवारे के मतभेदों के कारण अटकी हुई थी।  किस राज्य को कितना पानी मिलेगा? परियोजना के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक पानी मिलने का प्रस्ताव है। वहीं, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस लिहाज से परियोजना केवल एक राज्य की जल जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के कई राज्यों के लिए जल उपलब्धता और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने वाली पहल बन सकती है। क्या है किशाऊ परियोजना     किशाऊ परियोजना उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर निर्मित की जाने वाली एक राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है।     टोंस नदी यमुना नदी की प्रमुख सहायक नदी है।     इस परियोजना के तहत 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट का गुरुत्व बांध बनाया जाएगा।     निर्माण कार्य पूरा होने पर यह टिहरी बांध के बाद एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध बन जाएगा।     इस बांध से 660 मेगावॉट हरित ऊर्जा क्षमता का सृजन होगा।     करीब 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली किशाऊ परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1561.91 मिलियन घन मीटर है।     परियोजना में जल भंडारण के साथ बहुउद्देशीय उपयोग का प्रविधान है।     राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। क्या है किशाऊ परियोजना का उद्देश्य? हर साल लगभग 1,379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। यह बिजली उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच समान रूप से बांटी जाएगी। इसकी जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर होगी। परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और बिजली उत्पादन जैसे बहुउद्देशीय लाभ सुनिश्चित करना है। यमुना को कैसे मिलेगा लाभ? किशाऊ बांध से बिजली और पानी के अलावा यमुना की सफाई करने में भी मदद मिलेगी। इससे मानसून के दौरान बाढ़ की विभीषिका को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। गर्मी के मौसम में टोंस और आगे चलकर यमुना नदी में निरंतर जल प्रवाह बनाए रखा जा सकेगा, जिससे यमुना नदी को साफ करने के अभियान में मदद मिल सकेगी। छह दशक से क्यों अटका था किशाऊ? किशाऊ परियोजना स्थापित करने की योजना करीब छह दशक पहले बनी। परियोजना को लेकर शुरुआती स्तर पर स्थल, भूगर्भीय परिस्थितियों और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन हुआ। इसके बाद डीपीआर, लागत, जल बंटवारे और छह राज्यों की वित्तीय हिस्सेदारी जैसे मुद्दे सामने आते गए। परियोजना को वर्ष 2008 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा भी मिला, लेकिन अंतरराज्यीय सहमति का पेंच नहीं सुलझ पाया। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश ने आगे बढ़कर संयुक्त उपक्रम बनाया, मगर परियोजना को वास्तविक गति देने के लिए छह राज्यों के बीच व्यापक सहमति जरूरी थी। अब यही सबसे बड़ा अड़ंगा दूर होता दिखाई दे रहा है। किशाऊ में कितना पानी जमा होगा? नई डीपीआर ने परियोजना की तस्वीर काफी बदल दी है। बांध की ऊंचाई घटाकर 232.6 मीटर की गई है, लेकिन जलाशय की जीवंत भंडारण क्षमता बढ़ाकर 1561.91 एमसीएम कर दी गई है। पहले यह क्षमता करीब 1324 एमसीएम थी। यानी नई व्यवस्था में लगभग 237.81 एमसीएम अतिरिक्त पानी संग्रहित किया जा सकेगा। लीटर में समझें तो यह करीब 23,781 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी है। यही अतिरिक्त भंडारण मानसून के दौरान पानी को रोकने और गैर-मानसूनी महीनों में उसका इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ाएगा। किशाऊ के आंकड़े एक नजर में बांध की ऊंचाई : 232.6 मीटर जीवंत भंडारण क्षमता : 1561.91 एमसीएम अतिरिक्त भंडारण : 237.81 एमसीएम स्थापित बिजली क्षमता : 422 मेगावाट औसत वार्षिक बिजली उत्पादन : 1457 मिलियन यूनिट पुराने मुकाबले अतिरिक्त उत्पादन : 78 मिलियन यूनिट प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र : लगभग 97,076 हेक्टेयर एमओयू में राज्य : छह

प्याज की कीमतों में तेज उछाल, 3 महीने में 82% बढ़े दाम; सप्लाई घटी

नई दिल्ली देशभर में प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। बीते तीन महीनों में प्याज के खुदरा भाव में करीब 82 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जून की शुरुआत में जो प्याज करीब ₹30 प्रति किलो बिक रहा था, सितंबर के मध्य तक उसका औसत भाव ₹54 प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून को प्याज का औसत खुदरा मूल्य ₹29.50 प्रति किलो था। वहीं 17 सितंबर तक यह बढ़कर ₹53.78 प्रति किलो हो गया। इस दौरान उपभोक्ताओं को प्याज के लिए काफी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी। थोक बाजार में भी बढ़ी कीमतें खुदरा बाजार के साथ-साथ थोक मंडियों में भी प्याज के दाम तेजी से बढ़े हैं। जून की शुरुआत में थोक बाजार में प्याज का औसत भाव करीब ₹22.60 प्रति किलो था, जो सितंबर में बढ़कर ₹45 प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया। थोक कीमतों में यह बढ़ोतरी बाजार में उपलब्ध स्टॉक और नई फसल की आवक से जुड़ी परिस्थितियों को दर्शाती है। कम सप्लाई के कारण मंडियों में प्याज की उपलब्धता प्रभावित हुई है। महाराष्ट्र और कर्नाटक से कम हुई आवक प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारण उत्पादन वाले राज्यों से कम सप्लाई को माना जा रहा है। महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज फसल को नुकसान पहुंचने और आवक घटने से बाजार में दबाव बढ़ा। इसके अलावा कर्नाटक से भी प्याज की सप्लाई में कमी आई है। इन दोनों राज्यों से आने वाली खेप में गिरावट का असर देश के कई बाजारों में दिखाई दिया। नई फसल में देरी का असर बाजार में प्याज की उपलब्धता पर खरीफ फसल की आवक का भी प्रभाव पड़ता है। नई फसल की आवक में देरी होने से पुराने स्टॉक पर निर्भरता बढ़ी, जिससे कीमतों में तेजी बनी रही। व्यापारी और बाजार से जुड़े लोग नई आवक बढ़ने के साथ कीमतों में बदलाव की उम्मीद जता रहे हैं। सरकार और बाजार की नजर सप्लाई पर प्याज जैसी जरूरी खाद्य वस्तु की कीमतों पर सरकार और बाजार दोनों की नजर रहती है। कीमतों में तेज बदलाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं के घरेलू खर्च पर पड़ता है। आने वाले समय में प्याज की आवक, उत्पादन वाले राज्यों की स्थिति और मंडियों में उपलब्ध स्टॉक कीमतों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे।. कब तक गिरेंगे प्याज के दाम, क्या कर रही है सरकार     प्याज की कीमतों में अभी तेजी जारी है,जिसे कुछ हफ्ते ऐसे हालात बने रह सकते हैं. नई फसल के बाजार में आने के बाद प्याज की कीमत गिर सकती है. प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कांदा एक्सप्रेस चलाने का फैसला किया. बफर स्टॉक से राहत पहुंचाने की कोशिश कर रही है. घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए निर्यात पर रोक-टोक जैसे कदम उठाए हैं. घरेलू खुदरा बाजार में प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है. अब उम्मीद है कि नई फसल के आवक के साथ प्याज की कीमत कंट्रोल हो सकेगी। 

पंजाब चुनाव 2027: AAP, BJP, अकाली दल और कांग्रेस ने कसी कमर

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी शुरुआती रणनीति जमीन पर उतार दी है। आम आदमी पार्टी सरकार के करीब साढ़े चार साल के कामकाज और विकास मॉडल को जनता तक पहुंचाने में जुटी है। भाजपा केंद्र और अन्य राज्यों में अपनी सरकारों के कामकाज को आधार बनाकर पंजाब में विकल्प पेश कर रही है।  शिरोमणि अकाली दल प्रकाश सिंह बादल की विरासत और अपने पारंपरिक पंथक आधार को मजबूत करने की कोशिश में है। कांग्रेस गुटबाजी से ऊपर उठकर एकजुटता का संदेश दे रही है। इस बीच दलों की यात्राओं, रैलियों और घर-घर संपर्क अभियानों का सिलसिला शुरू हो चुका है। आप : विकास मॉडल को घर-घर ले जाएगी वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा के अनुसार आप ने 2027 की तैयारी में सरकार के करीब साढ़े चार साल के रिपोर्ट कार्ड और विकास मॉडल को जनता तक पहुंचाने पर फोकस किया है। पार्टी ने 20 सितंबर से राज्यव्यापी घर-घर संपर्क अभियान शुरू किया है। इसमें 2.68 लाख से अधिक बूथ कमेटी सदस्य हर परिवार तक पहुंचने की योजना के तहत काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धूरी से अभियान की शुरुआत की। भाजपा : ट्रैक रिकॉर्ड के सहारे दावेदारी भाजपा नेता सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने और सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के अनुसार पार्टी केंद्र और अन्य राज्यों की भाजपा सरकारों के कामकाज को जनता के सामने रख रही है। वह नक्सलवाद में कमी, उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई और आतंकवाद के खिलाफ केंद्र की नीति को भाजपा के ट्रैक रिकॉर्ड के उदाहरण के तौर पर गिनाते हैं। उनका कहना है कि पंजाब में नशे और गैंगस्टरवाद की समस्या का समाधान भी भाजपा की डबल सरकार कर सकती है। भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा सभी 117 सीटों तक पहुंच रही है। शिअद : बड़े बादल की विरासत पर भरोसा शिरोमणि अकाली दल अपनी पारंपरिक सियासी जमीन मजबूत करने के लिए पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल की विरासत को प्रमुखता से सामने रख रहा है। पार्टी उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्यों और ग्रामीण क्षेत्रों से सीधे जुड़ाव को अपनी पहचान के तौर पर पेश कर रही है। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की रैलियों में अकाली सरकारों के दौरान हुए विकास कार्यों का उल्लेख लगातार हो रहा है। पार्टी बड़े बादल की राजनीतिक विरासत के सहारे पुराने समर्थक वर्ग को फिर लामबंद करने के साथ अपनी क्षेत्रीय पहचान को भी चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस : एकजुटता के संदेश के साथ मैदान में कांग्रेस राहुल गांधी के नाम और एकजुटता के संदेश के सहारे चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी है। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद पार्टी सामूहिक नेतृत्व का संदेश दे रही है। 15 सितंबर के प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा और पूर्व उपमुख्यमंत्री व सांसद सुखजिंदर रंधावा का एक मंच पर आना इसी रणनीति का हिस्सा रहा। पायलट ने चन्नी और वड़िंग के हाथ मिलवाकर कार्यकर्ताओं और पंजाबियों को संदेश दिया कि चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व और सामूहिक ताकत के साथ लड़ा जाएगा।   

चिप डिजाइन, ड्रोन तकनीक, जीसीसी, डेटा सेंटर और स्पेसटेक क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर हुई चर्चा

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश देश में सूचना प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के एक सशक्त केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बेंगलुरु में उद्योगपतियों और प्रमुख निवेशकों से वन-टू-वन संवाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योग-व्यापार के लिए अपार संभावनाएं, मजबूत अधोसंरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और उद्योग-हितैषी नीतियां मौजूद हैं। राज्य सरकार हर निवेशक को सुरक्षित वातावरण, सिंगल विंडो सिस्टम से त्वरित अनुमतियां और नीतिगत सहयोग देने के लिए पूरी तरह तत्पर है। बेंगलुरु के तकनीकी इको सिस्टम और मध्यप्रदेश के औद्योगिक आधार के समन्वय से प्रदेश में नवाचार और रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि उद्योग की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुरूप मध्यप्रदेश में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं हर रोड शो में निवेशकों के साथ संवाद करते हैं और उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी रहते हैं, ताकि निवेश से जुड़ी समस्याओं और आवश्यकताओं का तत्काल समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में पारदर्शी नीतियां लागू हैं और निवेशकों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे का तत्परता से निराकरण किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद में विशेष रूप से ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की विशेषताओं और संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ-साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की नीतियां भविष्योन्मुखी हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण समूहों के विस्तार के लिए वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों ही तरह के आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) की स्थापना के लिए थोलोन्स और सीजीआई से संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद के दौरान आईटी एवं जीसीसी सेक्टर के दिग्गजों ने मध्यप्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित करने को लेकर गहरी रुचि दिखाई। थोलोन्स के चेयरमैन और सीईओ  अविनाश वशिष्ठ और सु अंकिता वशिष्ठ ने प्रदेश में 210 करोड़ रुपये के निवेश से जीसीसी यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने पर चर्चा की। सीजीआई के वाइस प्रेसिडेंट  अतुल अगाशे ने मध्यप्रदेश में जीसीसी निवेश की संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश में विस्तार की मंशा जताई। सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने विस्तृत चर्चा की। असेइक मावेन सिलिकॉन के संस्थापक एवं सीईओ  शिवकुमार पी.आर. ने प्रदेश में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से 'चिप डिजाइन हाउस' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिसके प्रथम चरण में 25 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कोर-आईसी टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ  पंकज गर्ग ने भी विभिन्न चरणों में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से चिप डिजाइन सर्विसेज स्थापित करने पर सहमति जताई। डीपटेक फंडिंग, डेटा सेंटर, स्पेसटेक और सस्टेनेबिलिटी में नए निवेश प्रस्ताव प्रदेश में स्टार्टअप्स और नई तकनीकों को गति देने के लिए डीपटेक वेंचर कैपिटल फंड 'सीफंड' के  नरेंद्र भंडारी ने मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की फंडिंग उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की। नाइनस्टार्स इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीईओ  गोपाल कृष्णन ने मध्यप्रदेश में आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने पर विमर्श किया। स्पेसटेक के क्षेत्र में गैलेक्सी के सह-संस्थापक  रक्षित भट्ट और सु पायल दवे ने अपनी सहभागिता को लेकर संवाद किया। इसके अलावा, मोबिलिटी एवं बाइक शेयरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रैपिडो के सह-संस्थापक  पवन गुंटुपल्ली तथा पर्यावरण एवं सस्टेनेबिलिटी क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनी डोनाउ कार्बन इंडिया के सीईओ व एमडी  वीरेंद्र चौधरी ने भी प्रदेश में अपनी योजनाओं को लेकर चर्चा की। ड्रोन विनिर्माण और रक्षा तकनीक को मिलेगी नई गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की भविष्य की तकनीक को ध्यान में रखते हुए ड्रोन विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एयरबाउंड के संस्थापक  नमन पुष्प, आइडियाफोर्ज की हेड ऑफ मार्केटिंग सु कुथि अरमनमाडा, नॉटिकल विंग्स के हेड ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट  रोहन फर्नांडीस, न्यूस्पेस एंड रिसर्च टेक्नोलॉजीज के हेड ऑफ बिजनेस  अश्विन शास्त्री और अनमैन्ड सिस्टम्स के संस्थापक एवं सीईओ  यशवंत रेड्डी ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण और परीक्षण इकोसिस्टम विकसित करने के साथ-साथ निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एयरबाउंड की ओर से प्रतिनिधियों ने ड्रोन भेंट किया। प्रमुख टेक एवं कंसल्टिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने की भेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बैठक के दौरान एचपी एंटरप्राइजेज की ओर से जीसीसी क्षेत्र में कार्यरत  जयंत और सु तारा,  जेडस्केलर आईटी कंपनी की ओर से  निधि तथा क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई क्षेत्र में कार्यरत कंपनी की ओर से  अनुराग ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फुजित्सु कंसल्टिंग इंडिया प्रा. लि. की ओर से  विशाल अगस्त्या, कंट्री लीडर, इंडिया एवं कंसल्टिंग लीड, ग्लोबल डिलीवरी यूनिट तथा इनफिनिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से  नितिन मेहता, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं कंट्री हेड ने भी भेंट की। प्रदेश के सभी अंचलों में संतुलित औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल के साथ-साथ जबलपुर और ग्वालियर जैसे संभागों में भी औद्योगिक गतिविधियों को समान रूप से संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों में भारी उद्योगों के साथ एमएसएमई और लघु-कुटीर उद्योगों की स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर नागरिकों को सम्मानजनक रोजगार मिल सके। उपस्थित सभी प्रमुख निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों, पारदर्शी कार्य प्रणाली और नेतृत्व की सक्रियता की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेशकों के साथ वन-टू-वन मीटिंग में अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी  एम. सेलवेंद्रन, प्रबंध संचालक एमपीआईडीसी  चंद्रमौली शुक्ला सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहें। 

एमपी में मौसम ने बदला मिजाज, जबलपुर समेत 12 जिलों में बारिश का अलर्ट

भोपाल। मानसून की विदाई से पहले प्रदेश में वर्षा का एक नया दौर आज से शुरू हो सकता है। बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम के प्रभाव से पूर्वी इलाकों में फिर से झड़ी लग सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र ने कटनी, उमरिया, शहडोल, जबलपुर, डिंडोरी, अनूपपुर, मंडला, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और पांढुर्णा जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। इससे पहले मंगलवार को सतना में 0.9 मिलीमीटर, मंडला में 10 मिलीमीटर, छतरपुर जिले के खजुराहो में 5 मिलीमीटर और बालाघाट जिले के मलाजखंड में 8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। 26 सितंबर तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में तेज वर्षा के आसार मौसम विज्ञानी प्रमेंद्र कुमार ने बताया कि पश्चिम–मध्य बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह सिस्टम अगले 12 घंटों में डीप डिप्रेशन में तब्दील हो सकता है। इसके 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह के बीच विशाखापत्तनम और गोपालपुर के तटों को पार करने की संभावना है, जिसका असर मध्य प्रदेश में बुधवार से दिखने लगेगा। उत्तर–पश्चिम भारत से लौटने लगा मानसून दक्षिण–पश्चिम मानसून की विदाई रेखा फिलहाल राजस्थान, पंजाब और Haryana के हिस्सों से गुजर रही है। अगले 2-3 दिनों में दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और शेष पंजाब–हरियाणा से भी मानसून के पूरी तरह लौटने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन चुकी हैं। मध्य प्रदेश में 1 जून से 22 सितंबर तक मानसूनी वर्षा का आंकड़ा सामान्य से कमजोर रहा है। इस अवधि में पूरे प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 6 प्रतिशत कम पानी बरसा है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 2 प्रतिशत कम, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 10 प्रतिशत कम वर्षा रिकार्ड की गई है। सबसे कम और सबसे अधिक बारिश वाले जिलों की स्थिति सामान्य से सबसे कम वर्षा वाले पांच शहर सामान्य से सबसे कम वर्षा वाले पांच शहर       शहर सामान्य वर्षा वास्तविक वर्षा कितनी कम हुई वर्षा अलीराजपुर 837.5 426.0 49 प्रतिशत धार 783.8 489.1 38 प्रतिशत नर्मदापुरम 1234.6 817.2 34 प्रतिशत रतलाम 888.2 593.5 33 प्रतिशत हरदा 1055.3 720.2 32 प्रतिशत (नोट — वर्षा मिलीमीटर में) सामान्य से सबसे अधिक वर्षा वाले पांच शहर सामान्य से सबसे अधिक वर्षा वाले पांच शहर       शहर सामान्य वर्षा वास्तविक वर्षा कितनी अधिक हुई वर्षा निवाड़ी 768.8 1183.7 54 प्रतिशत मऊगंज 948.9 1422.8 50 प्रतिशत सतना 922.4 1319.6 43 प्रतिशत सिंगरौली 844.5 1093.0 29 प्रतिशत भिंड 601.7 757.2 26 प्रतिशत (नोट — वर्षा मिलीमीटर में)  

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, पुलिस मुख्यालय और जेल मुख्यालय के अधिकारियों-कर्मचारियों को करेगा प्रशिक्षित

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दिन-प्रतिदिन के जीवन में जिस गति से डिजिटल प्रणालियों का उपयोग बढ़ रहा है, उसी गति से इस क्षेत्र में चुनौतियां भी बढ़ रही है। डिजिटल और साइबर क्षेत्र की व्यवस्थाओं में समाज हित और जनकल्याण लगातार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सर्तकता आवश्यक है। साइबर और फॉरेंसिक क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों के विस्तार से ही यह संभव है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की पहल पर राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय गांधीनगर की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय गांधीनगर और राज्य शासन के बीच हुआ एमओयू तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और राजीव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के बीच हुआ रिलेशनशिप एग्रीमेंट साइबर क्षेत्र में सर्तकता और डिजिटल फोरेंसिक्स में दक्षता का विस्तार करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार आज मंत्रालय में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय गांधीनगर और मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय भोपाल के मध्य एमओयू के आदान प्रदान के अवसर पर व्यक्त किया। उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार  इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित थे। शीघ्र आरंभ होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम आज हुआ एमओयू, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय गांधीनगर द्वारा प्रदेश के जेल मुख्यालय और पुलिस मुख्यालय के अधिकारी/कर्मचारियों के प्रशिक्षण तथा कौशल विकास के लिये राज्य शासन के साथ किया गया है। अतिशीघ्र ही प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किये जायेगें। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय परिसर, भोपाल के सुचारू संचालन एवं समन्वय के लिए राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गाँधीनगर और राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल के मध्य रिलेशनशिप एग्रीमेंट सम्पादित किया गया। मंत्रालय में हुए एमओयू और रिलेशनशिप एग्रीमेंट कार्यक्रम में आयुक्त तकनीकी शिक्षा  अवधेश शर्मा, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय भोपाल के निदेशक  राकेश कुनवर तथा आरजीपीवी के कुलपति  आलोक शर्मा उपस्थित थे।  भोपाल परिसर में उपलब्ध है साइबर सिक्योरिटी में बीटेक और डिजिटल फोरेंसिक व साइबर सिक्योरिटी में एमएससी पाठ्यक्रम उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर की स्थापना भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 28 सितम्बर, 2020 में की गई थी। इसका उद्देश्य देश में रक्षा के क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, विस्तार एवं सेवाएँ प्रदान करना है। देश के 07 राज्यों में इस विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय परिसर स्थापित किया जा चुके हैं और अब तक लगभग 40 हजार कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। राज्य में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर के परिसर की स्थापना भोपाल में करने के संबंध में मंत्रि-परिषद् की बैठक दिनांक 01.07.2025 में निर्णय लिया गया था। राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर के लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी), भोपाल परिसर में उपलब्ध भूमि में से 10 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। वर्तमान में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा अस्थायी भवन उपलब्ध कराया गया है। इस अस्थायी परिसर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय दिनांक 22 सितम्बर, 2025 को 01 स्नातक एवं 01 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के साथ प्रारंभ किया गया। वर्तमान में इस परिसर में 84 विद्यार्थी अध्ययनरत् है। यहां साइबर सिक्योरिटी में बीटेक और डिजिटल फोरेंसिक साइबर सिक्योरिटी में एमएससी पाठ्यक्रम उपलब्ध है। 

वंदे मातरम् को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक कारणों से वंदे मातरम नहीं गाता है या फिर सारे आंतरे नहीं गाता है तो उसपर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं सुप्रीम कोर्ट नेइस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब भी मांगा है। गायक टीएम कृष्णा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई की वंदे मातरम् से जुड़े कानून की व्याख्या करते वक्त 1986 के 'बिजो एमैनुअल' के तय सिद्धातों को लागू किया जाएगा। आपको बता दें कि जुलाई में संसद के मॉनसून सत्र में एक संशोधन विधेयक लाकर वंदे मातरम को इसके अंतरगत लाया गया था। 29 जुलाई को राज्यसभा में और फिर 30 जुलाई को लेकसभा में विधेयक को पास करके कानून बनाया दिया गया और वंदेमातरम गाना अनिवार्य किया गया था। इसे राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम के दायरे में ले आया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय गीत को दो अंतरे तक ही सीमित रखने पर विचार करने से इनकार कर दिया है। हालांकि इस बात पर विचार करने को तैयार है कि इसे ना गाने को दंडनीय अपराध ना बनाया जाए। राष्ट्रगान ना गाने पर नहीं हो सकती सजा सीजेआई सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बिजो इमैनुएल मामले में सुप्रीम कोर्ट के ही फैसले का हवाला देते हुए कहा कि तय किया गया था कि राष्ट्रगान ना गाने पर किसी को सजा नहीं दी जाएगी और यह अब भी लागू होता है। बिजो इमैनुअल केस: 3 छात्रों ने राष्ट्रगान गाने से मना कर दिया कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वंदे मातरम से जुड़े कानून की व्याख्या करते समय 1986 के ‘बिजो इमैनुअल’ फैसले में तय सिद्धांतों को लागू किया जाएगा। दरअसल, 1986 के बिजो इमैनुअल बनाम केरल सरकार मामले में तीन छात्रों ने धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान नहीं गाया था। हालांकि वे राष्ट्रगान के दौरान सम्मानपूर्वक खड़े रहते थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा था कि केवल राष्ट्रगान न गाने के आधार पर उन्हें दंडित नहीं किया जा सकता। ‘नक्सली’ शब्द पर सॉलिसिटर जनरल और मुरलीधर में बहस सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और कृष्णा के वकील सीनियर एडवोकेट डॉ एस मुरलीधर के बीच तीखी बहस भी हुई। संविधान के तहत निर्णय लेने की प्रक्रिया पर मुरलीधर की दलील के जवाब में मेहता ने ‘नक्सली’ शब्द का इस्तेमाल किया।     मुरलीधर: अभी आपने जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, उसे वापस लें। यह कार्यवाही लाइव चल रही है। मैं इसका कड़ा विरोध करता हूं।     मेहता: मैंने कहा कि यही संवैधानिक तरीका है, न कि वह तरीका जो नक्सली चाहता है। और मुझे इसका कोई अफसोस नहीं है।     मुरलीधर: “किसी बात पर विचार करना नक्सली होना नहीं है। इसके बाद जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति पर आतंकवादी होने का आरोप हो, तब भी संविधान के तहत उसके अधिकार बने रहते हैं। 2026 वंदे मातरम के अपमान पर कानून बना 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने 'वंदे मातरम' को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने 'राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम' बनाया। इस कानून के तहत 'वंदे मातरम' के गायन को जानबूझकर रोकने, इसमें बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है। इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम' के पूरे 6 छंद गाए गए। केंद्र से मांगा जवाब सुप्रीम कोर्ट ने इस पीआईएल पर सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत दिए गए मौलिक अधिकारियों के संबंध में कानून में दंड के प्रावधानों की समीक्षा होनी चाहिए। आपको बता दें कि कर्नाटक संगीत के प्रसिद्ध गायक टी एम कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका फाइल की थी और कहा था कि वंदे मातरम के सभी 6 छंद गाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा था कि आखिरी के चार अंतरे में स्पष्ट रूप से हिंदू देवी देवताओं की आर्चना का भाव है और एक धर्मनिरपेक्ष देश में इसे अनिवार्य कर देना संविधान का उल्लंघन है। केंद्र सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि कुछ लोग संविधान और कानून के राज में विश्वास नहीं करते और उनकी सोच नक्सलवादी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय गीत की अहम भूमिका थी और इसे भुलाना नहीं चाहिए। तुषार मेहता ने क्या दलील दी? सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से नोटिस नहीं जारी करने की मांग की. इस पर उन्होंने दलील दी कि यह सनसेशन को बढ़ावा देने वाला होगा. इसके बाद सुनवाई के दौरान ही जस्टिस बागची ने कहा कि  इसमें कोई संदेह नहीं कि यह हमारा राष्ट्रीय गीत है।  याचिकाकर्ता की बात से सहमत दिखा सुप्रीम कोर्ट इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि दो पद गाए जाएं या छह पद गाए जाएं… यह सरकार से इतर कौन तय करेगा, कोई और तो नहीं कर सकता. इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने दखल दी. उन्होंने कहा कि लोगों की राय ली जानी चाहिए थी. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह सही बात है।  2 सप्ताह में देना है जवाब इसके बाद वंदे मातरम के छह पद गाने की अनिवार्यता के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने जवाब तलब किया. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि दो सप्ताह के अंदर केंद्र को इस मामले में देना होगा जवाब. याचिकाकर्ता के वकील ने एसजी की ओर से दलील में नक्सलाइट शब्द का उपयोग करने पर भी गंभीर आपत्ति जताई। 

राजस्व प्रशासन में डिजिटल बदलाव, जनहित और पारदर्शिता को मिलेगी नई गति

​डिजिटल और पारदर्शी राजस्व प्रशासन: जनहित में सुशासन का नया अध्याय ​रायपुर        राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटक है। भूमि संबंधी मामलों की जटिलताओं को समाप्त करने, प्रशासनिक तंत्र को अधिक पारदर्शी बनाने और आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग द्वारा हाल ही में कई बड़े और दूरगामी नीतिगत निर्णय लिए गए हैं। ये सुधार न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम और सरल बना रहे हैं, बल्कि वर्षों से लंबित पड़ी समस्याओं का समयबद्ध व निष्पक्ष निराकरण भी सुनिश्चित कर रहे हैं। ​डिजिटल प्रणाली से सुगम हुआ रिकॉर्ड प्रेषण       02 अप्रैल 2025 को जारी विशेष आदेश के तहत अब सभी भौतिक दस्तावेजों को डिजिटल स्वरूप में प्राप्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। भारसाधक अधिकारी को सत्यापनकर्ता का दायित्व सौंपते हुए अब समस्त राजस्व रिकॉर्ड ई-प्रणाली के माध्यम से मंगाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल से रिकॉर्ड के त्वरित संप्रेषण की सुविधा मिली है, जिससे कागजी औपचारिकताओं में होने वाला अनावश्यक विलंब पूरी तरह समाप्त हो गया है और प्रकरणों के निराकरण में अप्रत्याशित गति आई है। ​कृषि भूमि की अदला-बदली हुई आसान        कृषकों और भू-स्वामियों को अपनी सुविधा अनुसार कृषि भूमि की परस्पर अदला-बदली करने का विधिक अधिकार संहित के तहत प्राप्त है। इस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुगम और स्पष्ट बनाने के लिए 21 अक्टूबर 2025 को नए मार्गदर्शी निर्देश जारी किए गए हैं। इससे किसानों को अपनी ज़मीन के बेहतर प्रबंधन में काफी सहूलियत मिल रही है। ​त्रुटि सुधार प्रक्रिया का सरलीकरण        अक्सर राजस्व अभिलेखों में लिपिकीय या मामूली त्रुटियों जैसे नाम, जाति, पता या फसल प्रविष्टि के कारण भू-स्वामियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। 19 जुलाई 2024 की अधिसूचना के माध्यम से इन त्रुटियों के त्वरित सुधार हेतु सीधे तहसीलदार को सशक्त बनाया गया है। इस फैसले ने आम जनता के अदालती चक्करों और समय की बर्बादी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।     ​अवैध प्लाटिंग पर कड़ी नकेल        जनवरी 2026 में राजस्व विभाग ने अवैध प्लाटिंग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को कड़े निर्देश जारी किए। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित विशेष समिति अब अवैध प्लाटिंग के खिलाफ समुचित व त्वरित कानूनी कार्यवाही कर रही है, जिससे आम खरीदारों के हितों की रक्षा हो रही है। ​पुराने परिपत्रों का निरस्तीकरण       प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रासंगिक और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 23 जुलाई 2024 के आदेश द्वारा नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि एवं अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन तथा आवंटन से संबंधित 2019, 2020 और 2022 के पूर्व परिपत्रों एवं निर्देशों को निरस्त कर दिया गया है।         ​डिजिटल ई-प्रणाली, प्रक्रियाओं के सरलीकरण और त्वरित निवारण की इस समावेशी नीति ने राज्य के राजस्व प्रशासन को एक नई दिशा दी है। यह कदम सुशासन की दिशा में एक सशक्त और जन-हितैषी प्रयास सिद्ध हो रहा है।  ​विष्णु प्रसाद वर्मा  सहायक संचालक