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राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा के निवास पर आयोजित तीज मिलन समारोह में शामिल हुए। पारंपरिक उल्लास और आत्मीय वातावरण में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने माताओं-बहनों से भेंट कर उन्हें तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में मातृशक्ति का विशेष स्थान है। माताओं-बहनों का सम्मान, उनकी सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि तीज का पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और आत्मीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का यह पर्व परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की मंगलकामना का अवसर है। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी माताओं-बहनों और उनके परिवारों के सुखी, समृद्ध और स्वस्थ जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीज का पर्व भले ही संपन्न हो चुका है, लेकिन आज इतनी बड़ी संख्या में माताओं-बहनों के बीच तीज मिलन का अवसर अत्यंत सुखद और आत्मीय है। मुख्यमंत्री निवास में भी तीज के अवसर पर प्रदेशभर से आई बहनों के साथ पर्व का उल्लास साझा करने का अवसर मिला था। हमारी परंपराओं की यही खूबसूरती है कि वे हमें परिवार और समाज से जोड़ती हैं तथा आपसी प्रेम और आत्मीयता को मजबूत करती हैं।  सनातन संस्कृति में मातृशक्ति को मिला है सर्वोच्च सम्मान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में आदिकाल से मातृशक्ति को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। हमारे वेदों, पुराणों और सामाजिक परंपराओं में नारी के सम्मान और उसकी गरिमा का संदेश निहित है। हमारी संस्कृति कहती है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः”, अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक मां परिवार की पहली शिक्षक और संस्कारों की आधारशिला होती है। माताओं-बहनों के परिश्रम, त्याग और आशीर्वाद से ही परिवार मजबूत होता है और मजबूत परिवार से सशक्त समाज तथा समृद्ध प्रदेश का निर्माण होता है। इसलिए राज्य सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का हितग्राही नहीं, बल्कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में बराबर का सहभागी मानकर कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनी है। योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में प्रतिमाह एक हजार रुपए की राशि सीधे अंतरित की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में पहुंचाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि इस योजना से माताओं-बहनों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव उन्हें विशेष संतोष देता है। बहनें इस राशि का उपयोग अपनी और परिवार की आवश्यकताओं के साथ बच्चों की पढ़ाई, बचत और छोटे-छोटे स्वरोजगार के लिए भी कर रही हैं। कोई बहन सुकन्या समृद्धि योजना में राशि जमा कर बेटी का भविष्य संवार रही है तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर अपने हुनर को आजीविका में बदल रही है। यह आर्थिक संबल महिलाओं के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक महिला को आगे बढ़ने के लिए अवसर, संसाधन और आवश्यक सहयोग मिले। जब हमारी माताएं-बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तो परिवार मजबूत होगा और पूरे प्रदेश की प्रगति को नई गति मिलेगी। 13.85 लाख लखपति दीदियां बनीं महिला सशक्तिकरण की नई पहचान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि माताओं-बहनों को स्थायी आजीविका, कौशल और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह बदलते और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की सुखद तस्वीर है। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं। अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से मिले आर्थिक संबल और बैंकिंग सुविधाओं का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी न केवल परिवारों को समृद्ध बना रही है, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है। छत्तीसगढ़ की कला-संस्कृति को देश-दुनिया में मिलेगी नई पहचान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट लोककला, संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। यहां की सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान और हमारी ताकत है। इसे सहेजने के साथ नई पीढ़ी और देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 650 करोड़ रुपए की लागत से फिल्म सिटी तैयार की जा रही है। इससे छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण और शूटिंग की संभावनाओं का विस्तार होगा। स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार तथा प्रतिभा प्रदर्शन के नए अवसर तैयार होंगे और प्रदेश के पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में कलाकारों का अमूल्य योगदान है। हमारे कलाकार अपनी प्रतिभा के माध्यम से छत्तीसगढ़ की मिट्टी की सुगंध और यहां की परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार कलाकारों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती रहेगी। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बदली छत्तीसगढ़ की तस्वीर मुख्यमंत्री  साय ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके 15 वर्षों के कार्यकाल में प्रदेश में सड़क, बिजली, पेयजल और खाद्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में व्यापक कार्य हुए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाकर जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न पहुंचाने की मजबूत व्यवस्था विकसित की गई, जिसके कारण डॉ. रमन सिंह को प्रदेश में ‘चाउंर वाले बाबा’ के नाम से भी पहचान मिली। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रही हैं। गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनकल्याण और विकास … Read more

मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स योजना के तहत 140 विधानसभा क्षेत्रों में होगा खेल परिसरों का निर्माण- 962 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति

बुनियादी ढांचे, कृषि विस्तार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को नई गति देने के उद्देश्य से लगभग 13 हजार 790 करोड़ रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स योजना के तहत 140 विधानसभा क्षेत्रों में होगा खेल परिसरों का निर्माण- 962 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर के लिए 13 पदों के सृजन को स्वीकृति राजगढ़ की सुठालिया सिंचाई परियोजना की निरन्तरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति नीमच जिले की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए 4 हजार 197 करोड़ की स्वीकृति राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना की निरन्तरता के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये की स्वीकृति ग्राम न्यायालय योजना के संचालन के लिए 554 करोड़ 61 लाख रूपये की स्वीकृति 2800 मेगावाट ताप विद्युत क्रय किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी म.प्र. विधिक सहायता तथा विधिक सलाह बोर्ड की स्थापना की निरंतरता के लिए 524 करोड़ की स्वीकृति परिवार न्यायालयों की स्थापना के संचालन के लिए 1 हजार करोड़ की स्वीकृति उच्च न्यायालय (भारित) की निरंतरता के लिए 2,015.60 करोड़ रुपए की स्वीकृति वाणिज्यिक कर विभाग की 6 योजनाओं के लिए की निरंतरता के लिए 969 करोड़ 87 लाख रुपए की स्वीकृति मैहर, पांदुर्णा और सिंगरौली में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के कार्यालय स्थापित करने के लिए 18 पदों की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिये गए निर्णय भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश में बुनियादी ढांचे, कृषि विस्तार और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण को नई गति देने के उद्देश्य से लगभग 13 हजार 790 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में खिलाड़ियों और खेलों के विकास, किसानों, युवाओं, न्यायिक व्यवस्था और आम नागरिकों से जुड़े कई दूरगामी व जनहितैषी निर्णय लिए गए। प्रदेश की खेल और युवा प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसरों के निर्माण व संचालन के लिए 962 करोड़ 50 लाख रूपये की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई। इन खेल परिसरों का नाम मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स होगा। 16वें वित्त आयोग के तहत उच्च न्यायालय (भारित), परिवार न्यायालयों, ग्राम न्यायालयों और विधिक सहायता बोर्ड के सुचारू संचालन के लिए 4,000 करोड़ रूपये से अधिक की वित्तीय निरंतरता मंजूर की गई। इसके अलावा वाणिज्यिक कर विभाग की 6 प्रमुख योजनाओं, शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर में 13 निरंतरता के साथ ही नवीन पदों तथा नवगठित जिलों मैहर, पांढुर्णा एवं सिंगरौली में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के नए कार्यालयों व पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई। सिंचाई क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगामी पांच वर्षों 2026-2031 के लिए नीमच की महत्वाकांक्षी जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 4,197 करोड़ 58 लाख रूपये तथा राजगढ़ की सुठालिया एवं पार्वती रिन्सी परियोजनाओं के लिए क्रमशः 262 करोड़ 63 लाख रूपये और 507 करोड़ 23 लाख रूपये की निरंतरता की स्वीकृत दी गई, जिससे 88 हजार हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होगी। इसके साथ ही प्रदेश की भविष्य की बिजली जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए 2800 मेगावॉट ताप विद्युत क्रय करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। राजगढ़ की सुठालिया सिंचाई परियोजना की निरन्तरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने राजगढ़ जिले की सुठालिया सिंचाई परियोजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 262 करोड़ 63 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उ‌द्देश्य राजगढ़ जिले के 40,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई पद्धति द्वारा सिंचाई क्षमता विकसित करना है। नीमच जिले की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए 4 हजार 197 करोड़ की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने नीमच जिले की जावद-नीमच दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की आगामी 5 वर्षो 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरन्तरता के लिए 4 हजार 197 करोड़ 58 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। जावद नीमच परियोजना एक दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई योजना है, जिससे सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाया जाएगा। परियोजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत सिंचाई तकनीक (दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई) के माध्यम से पानी की बचत और सिंचाई क्षमता में वृद्धि करते हुये क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाना हैl राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना की निरन्तरता के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने राजगढ़ की पार्वती रिन्सी सिंचाई परियोजना की आगामी 05 वर्षो यानि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 507 करोड़ 23 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध निर्माण कर राजगढ़ जिले की 48,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है। 2800 मेगावाट ताप विद्युत क्रय किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी मंत्रि-परिषद् ने ऊर्जा विभाग की एम.पी. पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी डीबीएफओओ मॉडल बिडिंग दस्तावेजों के आधार पर कुल 2800 मेगावाट ताप विद्युत जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेश में मौजूदा निर्माणाधीन एवं राज्य में ही प्रस्तावित नवीन (ग्रीन फील्ड/ब्राउन फील्ड) ताप विद्युत परियोजनाओं से प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विद्युत क्रय के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। उल्लेखनीय है कि मंत्रि-परिषद् द्वारा 24 जनवरी 2025 को लिए निर्णय के अंतर्गत 900 मेगावाट ताप विद्युत क्रय से संबंधित अनुमोदन उक्त निविदा के निरस्त हो जाने के फलस्वरूप वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार 2800 मेगावाट ताप विद्युत क्रय में समाहित माना जाएगा। एम.पी. पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी डीबीएफओओ मॉडल बिडिंग दस्तावेजों के आधार पर कुल 2800 मेगावाट ताप विद्युत जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेश में मौजूदा/निर्माणाधीन एवं राज्य में ही प्रस्तावित नवीन (ग्रीन फील्ड/ब्राउन फील्ड) ताप विद्युत परियोजनाओं से प्रतिस्पर्धात्मक निविदा प्रक्रिया के माध्यम से विद्युत क्रय के लिए आवश्यक कार्यवाही किए जाने की स्वीकृति दी है। प्रकरण में नियामक आयोग के अनुमोदन एवं आदेश के अनुसार समस्त आगामी कार्यवाही के लिए प्रबंध संचालक एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी को अधिकृत किया गया है। 140 विधानसभा क्षेत्रों में खेल परिसर निर्माण और संचालन के लिए मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स योजना के अंतर्गत 962 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग … Read more

अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता: मुख्यमंत्री

नियुक्ति पाने वालों से पैसे मांगने वाले को जेल में सड़ना पड़ेगा: सीएम योगी अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता: मुख्यमंत्री पिछले एक सप्ताह में 5297 युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले, हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, सैफई सिंडिकेट गिनती रहे: सीएम योगी जिनके कारनामों से प्रदेश थर्राता था और दुनिया शक की निगाहों से देखती थी, वे आज उपदेश देते फिर रहे: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित 3567 अभ्यर्थियों को वितरित किए नियुक्ति पत्र चयनितों में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता (पीजीटी) और सहायक अध्यापक (टीजीटी) के पद शामिल 2015-16 में जिस अभ्यर्थी से मांगे गए थे आठ लाख रुपये, उसी अभ्यर्थी का सपना हुआ साकार: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा- शिक्षक केवल नौकरी नहीं, नए भारत के निर्माण की आधारशिला तैयार करने का दायित्व संभालें लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए कहा कि अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता। इसीलिए उत्तर प्रदेश पुलिस में अच्छा काम करने वाले अधिकारियों को आयोग और बोर्डों की दिशा-दशा सुधारने का दायित्व दिया गया है। पहले युवाओं को उनके अधिकार से वंचित कर दिया जाता था। लेकिन, अब नियुक्ति पाने वाले किसी भी अभ्यर्थी से पैसे की मांग करने वाले को जेल में सड़ना पड़ेगा। आज का कार्यक्रम केवल नियुक्ति पत्र वितरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा से जुड़े चारों स्तंभ, सहायक अध्यापक, प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य को एक साथ जोड़ने वाला विशेष अवसर है। यहां 3,567 लोगों का चयन कर उनके हाथों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने का महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया है।  हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं और पिछले एक सप्ताह में वह 5,297 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित कर चुके हैं। पिछले नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। हमने सैफई सिंडिकेट से कहा है कि हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं। सीएम ने तंज कसा कि यदि गिनती नहीं आती हो तो शिवपाल जी के सानिध्य में बैठ जाएं, बहुत अच्छी गिनती सीख जाएंगे।  2015-16 में घूसखोरी का शिकार बने युवा का सपना साकार मुख्यमंत्री ने हाल में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले एक नौजवान के इंटरव्यू का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस युवक की आंखों में आंसू भरे थे और उसने बताया कि 2015-16 में भी उसने इस पद के लिए आवेदन किया था। उससे आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। वह खेत बेचकर पैसा लेकर आया, लेकिन तब तक उससे अधिक पैसा देने वाला दूसरा व्यक्ति आ गया और वह नौकरी से वंचित रह गया। आज उसका सपना साकार हुआ है और जिस पद के लिए उसने आवेदन किया था, उसी पद पर उसे नियुक्ति मिल गई है। पूरी प्रक्रिया निरस्त की गई और उस युवा को नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ।  किसी ने लेनदेन की बात की तो जेल में सड़ेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा सभी शिक्षकों को दी है। यह सुविधा शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी दी गई है। बेसिक शिक्षा में रसोइयों, शिक्षामित्रों और अन्य संबंधित कर्मियों को भी इसका लाभ दिया गया है, जिससे वे निश्चिंत होकर कार्य कर सकें। किसी भी शिक्षक को ज्वाइनिंग में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यदि किसी प्रबंधक की कोई जिज्ञासा है तो वह शासन के समक्ष उपलब्ध कराए, लेकिन नियुक्ति पत्र प्राप्त होने के बाद यदि किसी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या शिक्षक से किसी ने लेनदेन की बात की तो उसे जेल में सड़ना पड़ेगा। हमें सख्त सख्त कार्रवाई पर मजबूर होना पड़ेगा। अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ साल में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। अगले छह महीने के अंदर एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रहे हैं। जब लोग परिणाम पूछते हैं तो मैं कहता हूं कि परिणाम यह है कि जो उत्तर प्रदेश नौ वर्ष पहले बीमारू राज्य कहा जाता था, आज भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बना हुआ है। बॉटम फाइव से टॉप-थ्री में आया है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता मिली है। यही युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा है। यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा किया गया था सीएम योगी ने कहा कि आज यूपी के नौजवानों के लिए पूरी दुनिया खुली है। जिन लोगों ने उनके सामने पहचान का संकट खड़ा किया था, वे यहां नौकरी देते नहीं थे और दुनिया ‘यूपी वाला’ कहकर हमारे युवाओं को शक की निगाहों से देखती थी। जिनके कारनामों से प्रदेश थर्राता था, वही लोग आज उपदेश देते फिर रहे हैं। आज नियुक्ति पाने वालों में बहुत से ऐसे होंगे जिन्होंने पहली बार प्रतियोगी परीक्षा दी होगी। कई ऐसे भी होंगे जिन्हें पहले अवसर नहीं मिला होगा। यदि किसी ने पहली बार प्रतियोगी परीक्षा दी है तो स्वाभाविक रूप से दस वर्ष पहले उसकी उम्र 13 से 16-17 वर्ष के बीच रही होगी। उस उम्र में बच्चा मां-बाप पर ज्यादा आश्रित रहता है और माता-पिता उसकी हर जरूरत पूरी करने में योगदान देते हैं। ऐसे बच्चों को यह बताने की आवश्यकता है कि 2017 के पहले क्या होता था। परीक्षा कोई देता था और नियुक्ति पत्र उसे दिया जाता था, जिसने फॉर्म तक नहीं भरा होता था। यह अराजकता, बेईमानी और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा थी। एक शिक्षक 100 छात्रों से संवाद करे तो 3,567 शिक्षक 3.5 लाख से अधिक बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि एक शिक्षक प्रतिवर्ष 100 छात्रों के साथ इंटरेक्शन करता है तो 3,567 शिक्षक एक वर्ष में 3.5 लाख से अधिक बच्चों के साथ संवाद और उनका मार्गदर्शन करेंगे। बच्चों को गाइड करना, उनका मार्गदर्शन करना ही नए भारत की आधारशिला है। भारत … Read more

तेजस Mk1A को लेकर बड़ा अपडेट, इंजन की कमी दूर; जल्द IAF में शामिल होने की उम्मीद

नई दिल्ली भारतीय वायु सेना के वाइस चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने स्वदेशी लड़ाकू जेट LCA तेजस मार्क 1ए की मौजूदा स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने इसकी पुष्टि कर दी है कि शुरुआत में देरी का मुख्य कारण अमेरिका से आने वाला इंजन था।  इंजनों की कमी के कारण कार्यक्रम में देरी हुई. अब इंजन मिल चुके हैं. जेटों पर लगा दिए गए हैं. जेट को वायु सेना में शामिल करने से पहले उचित और गहन परीक्षण किए जा रहे हैं. एयर मार्शल दीक्षित के अनुसार अभी दो या तीन बिंदु बाकी हैं जिन्हें पूरा करना बाकी है।  उनका मानना है कि एक या दो महीने के अंदर इन मुद्दों को दूर कर लिया जाएगा. उसके बाद जेट को शामिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा. भारत LCA तेजस मार्क 1ए के शामिल होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. यह बयान वायु सेना की तैयारियों और स्वदेशी कार्यक्रमों की प्रगति को रेखांकित करता है।  इंजन की कमी और वर्तमान प्रगति LCA तेजस मार्क 1ए भारतीय वायु सेना के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है. यह तेजस परिवार का एडवांस वर्जन है जिसमें कई सुधार किए गए हैं. पहले चरण में इंजनों की आपूर्ति में देरी हुई थी जिससे उत्पादन और परीक्षण प्रभावित हुए. अब यह समस्या हल हो चुकी है. इंजन लगने के बाद जेटों पर परीक्षण चल रहे हैं।  इन परीक्षणों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेट सभी परिचालन जरूरतों को पूरा करे. सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्राथमिकता दी जा रही है. वायु सेना उप प्रमुख का बयान बताता है कि तकनीकी चुनौतियां अब अंतिम चरण में हैं. बाकी बचे मुद्दों को जल्द सुलझा लिया जाएगा।  एक बार ये बिंदु पूरे हो जाएं तो जेट को स्क्वॉड्रन में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. यह विकास स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक संकेत है. LCA तेजस मार्क 1ए के शामिल होने से भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता में इजाफा होगा।  यह जेट आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर रडार और हथियार प्रणालियों से लैस है. स्वदेशी जेट होने के कारण रखरखाव और अपग्रेड आसान होगा. विदेशी निर्भरता कम होने से लंबी अवधि में लागत भी नियंत्रित रहेगी. वायु सेना लंबे समय से इस जेट का इंतजार कर रही है क्योंकि पुराने जेटों को बदलने की जरूरत है।  परीक्षण प्रक्रिया को सावधानीपूर्वक पूरा करना जरूरी है. किसी भी कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा. एचएएल और वायु सेना दोनों मिलकर काम कर रहे हैं ताकि जेट पूरी तरह तैयार अवस्था में शामिल हो. एक-दो महीने का समय बाकी मुद्दों को दूर करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है. उसके बाद उत्पादन और डिलीवरी की गति बढ़ सकती है।  यह कार्यक्रम आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है. स्वदेशी लड़ाकू जेट का सफल शामिल होना रक्षा क्षेत्र में आत्मविश्वास बढ़ाएगा. वायु सेना उप प्रमुख के बयान से साफ है कि देरी के कारणों को समझा गया है और अब समाधान की दिशा में काम हो रहा है. परीक्षण पूरा होने के बाद जेट को जल्द सेवा में लेने की उम्मीद है. भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा. सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर लक्ष्य हासिल करने की कोशिश में जुटी हैं। 

E20 के बाद 100% इथेनॉल की कार! गडकरी ने बताया सरकार का अगला प्लान

 नई दिल्ली बीते दिनों इथेनॉल ब्लेंडेड E20 पेट्रोल को लेकर काफी हो हल्ला मचा था. सड़क से लेकर संसद तक इस फ्यूल की चर्चा हो रही थी. सोशल मीडिया पर तो जैसे E20 पेट्रोल से इफेक्टेड वाहनों के वीडियो की बाढ़ सी आ गई थी. फिलहाल मामला शांत है. और इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर से इथेनॉल की वकालत की है।  दिल्ली में आयोजिक एक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि, "दुनिया के 19 देशों में इथेनाल इस्तेमाल किया जा रहा है और भारत के किसी गाड़ी में आज शिकायत नहीं आ रही है. अक्टूबर में टोयोटा कंपनी की इनोवा 100% फ्लेक्स फ्यूल कार पर चलने वाली कार लांच करने का न्यौता मिला है. ये गाड़ी 100% इथेनाल से चलेगी और चलते चलते 60% बिजली पैदा करती है. अगर पेट्रोल के भाव से तुलना करें तो इसके इस्तेमाल में पेट्रोल पच्चीस रुपए प्रति लीटर होगा और प्रदूषण भी नहीं करेगी।  उन्होंने कहा कि, "मक्के से इथेनाल बनाने के फ़ैसले से यूपी बिहार के किसानों को 45 हज़ार करोड़ मिला है. सरकार के पास नीतियाँ हैं. आप को उन नीतियों को सपोर्ट करना होगा. 22 लाख करोड़ का धंधा जिनका है वो जाएगा तो नितिन गडकरी को गालियाँ देंगे. मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ेगा लेकिन हमें किसान का भला करना है। बाइक टैक्सी को प्रमोट करें देश भर में बाइक टैक्सी सर्विस तेजी से बढ़ रहा है. छोटी दूरी की यात्राओं के लिए ये सर्विस बहुत ही किफायती है और लोग तेजी से इसका उपयोग कर रहे हैं. नितिन गडकरी ने कहा कि, "मैं सभी राज्यों के परिवहन मंत्रियों को कह रहा हूँ की गाँव के ग़रीब लड़कों को और उनके दो पहिया से चलने वाले लोगों को आप प्लेटफार्म दीजिए।  गडकरी ने कहा कि, "यह प्लेटफार्म कमाई का बढ़िया जरिया है. ये प्लेटफॉर्म पच्चीस रुपए महीने लेते हैं और जब भी किसी को टैक्सी की सुविधा हो तो लोगों को रोज़गार और कमाई होती है. इसी तरह बिना किसी निवेश के हिंदुस्तान में 10 करोड़ लोगों को रोज़गार मिल सकता है. गडकरी ने कहा कि, मैंने फ़ाइल पर लिखा है कि, किसी के बाद अपना दोपहिया चारपहिया हो तो वो अभी टैक्सी चला सकते हैं. मेरे एक हस्ताक्षर के बाद बैंगलोर की रैपिडो कंपनी ने 3.5 करोड़ लोगों को रोजगार दिया।   

ली जे-म्युंग का बड़ा बयान: न्यूक्लियर फ्रीज के बदले उत्तर कोरिया को मिल सकती है प्रतिबंधों में राहत

 सोल  साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा है कि वे इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में उत्तर कोरिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए एक चरणबद्ध और व्यावहारिक तरीका अपनाने की बात रखेंगे. उन्होंने कहा कि साउथ कोरिया और अमेरिका दोनों ही उत्तर कोरिया के साथ फिर से बातचीत शुरू करने के लिए तैयार हैं।   यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने हथियारों का परीक्षण बढ़ा रहा है, भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साउथ कोरिया के साथ होने वाले बड़े सैन्य अभ्यास को कम करके उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया हो।  न्यूयॉर्क जाने से पहले सोमवार को एक समाचार चैनल को दिए लिखित जवाब में ली ने कहा कि किसी चलती हुई गाड़ी की दिशा बदलने के लिए पहले उसे रोकना जरूरी होता है. उनका मतलब था कि उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे को हल करने के लिए रुकना, कम करना और फिर पूरी तरह खत्म करना, यह तरीका सबसे व्यावहारिक है।  उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है, जिसके चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या इसे एक ही बार में पूरी तरह खत्म किया जा सकता है. ट्रंप ने पिछले महीने दावा किया था कि उत्तर कोरिया के पास 57 परमाणु हथियार हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह संख्या 100 से भी ज्यादा हो सकती है. ली ने कहा कि उत्तर कोरिया की क्षमताएं जितनी बढ़ चुकी हैं, उसे देखते हुए पूरी तरह खत्म होने का इंतजार करना सही रास्ता नहीं है, क्योंकि इस बीच खतरा और बढ़ता जाएगा।  ली ने कोरियाई युद्ध को औपचारिक रूप से खत्म करने के लिए बातचीत का प्रस्ताव भी दोहराया. उन्होंने चिंता जताई कि चरणबद्ध तरीके से उत्तर कोरिया कुछ फायदे लेकर पूरी तरह हथियार छोड़ने से मना कर सकता है, इसलिए एक मजबूत बातचीत का ढांचा जरूरी है जिससे तीनों पक्षों का भला हो।  ट्रंप ने पिछले महीने साउथ कोरिया के साथ अभ्यास को कम करने का ऐलान पहले से बातचीत किए बिना ही किया था, जिससे दोनों देशों के गठबंधन को लेकर चिंता बढ़ी. ली ने माना कि यह फैसला कुछ अचानक आया, लेकिन उन्होंने इसे अमेरिका की तरफ से दुश्मनी न होने के संकेत के तौर पर देखा. उन्होंने बताया कि जहाज निर्माण क्षेत्र में साझेदारी से दोनों देशों को फायदा होगा।  ली ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ईरान और अमेरिका के टकराव में शामिल नहीं होगी, बल्कि खाड़ी में अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना की मौजूदगी बढ़ाने पर विचार कर रही है. साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत बताई और एआई के फायदे सभी देशों तक पहुंचाने की बात कही. किम जोंग उन की बेटी को लेकर पूछे सवाल पर ली ने कहा कि अभी इस बारे में कोई पक्का बयान देना जल्दबाजी होगी। 

योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस को वैज्ञानिक जांच की धार, मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर 75 जिलों की पुलिस होगी अपग्रेड

यूपी में अपराधियों पर और कसेगा शिकंजा, ‘स्पेशल 32’ संभालेंगे क्राइम सीन मैनेजमेंट योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस को वैज्ञानिक जांच की धार, मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर 75 जिलों की पुलिस होगी अपग्रेड छह बैच में प्रशिक्षित 600 अफसरों में से चुने गए 32 विशेषज्ञों को फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की मास्टर ट्रेनिंग लखनऊ उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ अब और सख्ती की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को अब वैज्ञानिक जांच की धार देने की कवायद शुरू की गई है। अपराध के बाद घटनास्थल पर छूटे साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक तरीके से जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस के ‘स्पेशल 32 अफसर’ तैयार किए जा रहे हैं। छह बैच में 100-100 अफसरों को 40 दिन का प्रशिक्षण दिए जाने के बाद चयनित इन 32 अधिकारियों को अब फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट में मास्टर ट्रेनिंग दी जा रही है। आगे इनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सभी 75 जिलों में पुलिस की क्राइम सीन मैनेजमेंट क्षमता को मजबूत करने में किया जाएगा। अब वैज्ञानिक तरीके से घटनास्थल को सुरक्षित कर छोटे से छोटे साक्ष्य की पहचान के जरिए जांच को मजबूत आधार मिलेगा। इसके साथ ही अपराधियों के खिलाफ तेजी से सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट आफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में 32 अधिकारियों को मास्टर ट्रेनिंग के जरिए विशेष रूप से तैयार कर रहा है। प्रशिक्षण में कृत्रिम घटनास्थल तैयार कर अधिकारियों की व्यावहारिक दक्षता भी परखी जाएगी। 600 की ट्रेनिंग से चुने गए ‘स्पेशल अफसर’ छह बैच में 100-100 पुलिस अधिकारियों को पहले ही 40 दिन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया। अब इन्हीं प्रशिक्षित अधिकारियों में से चयनित टॉप 32 अफसरों को फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में विशेषज्ञता के अगले स्तर तक ले जाया जा रहा है। यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि यह स्पेशल ट्रेनिंग उन पुलिस अधिकारियों को दी जा रही है, जो प्रशिक्षण के दौरान टॉप पर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार पुलिस अधिकारियों की व्यावहारिक दक्षता को और बेहतर किया जाएगा। इसके लिए कृत्रिम घटनास्थल तैयार कर उनकी क्षमता का परीक्षण भी किया जाएगा। क्राइम सीन मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत : डॉ. जीके गोस्वामी  डॉ. गोस्वामी ने कहा कि आपराधिक जांच में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए क्राइम सीन मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से यूपीएसआईएफएस ने हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग की पहल की है। फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की मास्टर ट्रेनिंग में व्यावहारिक अनुभव यानी एक्सपीरिएंशियल लर्निंग पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के लेक्चर के साथ हैंड्स-ऑन सेशन के जरिए अधिकारियों को विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। हर सुराग की होगी वैज्ञानिक पड़ताल प्रशिक्षण में घटनास्थल से तलाशी और जब्ती के नियम, क्राइम सीन नोट्स, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, पहचान और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पर फोकस किया जा रहा है। फिंगरप्रिंट और खून के नमूने जैसे साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से पहचानने और सुरक्षित रूप से एकत्र करने की बारीकियां भी सिखाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य यह है कि घटनास्थल पर मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्य अनदेखे न रह जाएं और उन्हें सही तरीके से संरक्षित कर आगे की विवेचना में इस्तेमाल किया जा सके। इससे जांच को साक्ष्य आधारित मजबूत आधार मिलने की संभावना बढ़ेगी। दिन हो या रात, हर क्राइम सीन की तैयारी प्रशिक्षण में दिन और रात के अलग-अलग समय तथा विभिन्न स्थानों पर क्राइम सीन समेत व्यावहारिक जानकारी भी दी जा रही है। इसके अलावा वास्तविक घटनास्थल पर आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को फील्ड वर्क का महत्व समझाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए भी तैयार किया जा रहा है, जहां अपराध के साक्ष्य नष्ट करने, साक्ष्य छिपाने या गलत जानकारी देने का प्रयास किया जा सकता है। इसके जरिए घटनास्थल को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर है। ‘स्पेशल 32’ बनेंगे विशेषज्ञ कड़ी छह बैच में प्रशिक्षित 600 अफसरों के बाद अब 32 अधिकारियों को मास्टर ट्रेनिंग देने से प्रशिक्षण व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी है। इनकी विशेषज्ञता का लाभ आगे जिलों में क्राइम सीन मैनेजमेंट से जुड़े अन्य पुलिस अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने में लिया जा सकेगा। इस पूरी कवायद का बड़ा उद्देश्य अपराध की जांच में घटनास्थल, सुराग, वैज्ञानिक साक्ष्य और विवेचना के बीच की कड़ी को मजबूत करना है। साक्ष्यों का बेहतर संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से संग्रह जांच को बेहतर आधार देगा और न्यायिक प्रक्रिया में तथ्य प्रस्तुत करने की गुणवत्ता को भी मजबूत करेगा। जीरो टॉलरेंस को मिलेगी वैज्ञानिक जांच की धार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ पुलिस की जांच व्यवस्था को भी लगातार मजबूत करने पर जोर है। प्रदेशवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था में गंभीर अपराधों के घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और उनकी वैज्ञानिक जांच की क्षमता महत्वपूर्ण है। ‘स्पेशल 32’ इसी व्यवस्था की विशेषज्ञ कड़ी होंगे। इनका प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इनके अनुभव और विशेषज्ञता का इस्तेमाल व्यापक पुलिस प्रशिक्षण में किया जाएगा, जिससे 75 जिलों में क्राइम सीन मैनेजमेंट और वैज्ञानिक विवेचना की क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ सकेगा।

चंपारण्य बनेगा राष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र, ₹73.42 करोड़ से होगा विकास

चंपारण्य में ₹73.42 करोड़ के महाप्रभु वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स को केंद्र की मंजूरी राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम – राजेश अग्रवाल रायपुर  छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित “वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स” परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति  CSMC ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।  परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं  संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु वल्लभाचार्य जी से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा। परियोजना की परिकल्पना इस प्रकार की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु वल्लभाचार्य जी के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों एवं वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक अवधि तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है। परियोजना की डीपीआर एवं कार्य-सीमा तैयार है और स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को भी विस्तार मिलेगा। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खेती के साथ पशुपालन, दूध उत्पादन और नई तकनीक अपनाने के लिए किसानों को किया प्रेरित

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि हमारा संकल्प है। किसानों के लिए खेती के साथ पशुपालन, दूध उत्पादन, नई तकनीक अपनाना जरूरी हैं। किसानों द्वारा किए जा रहे नवाचार और कृषि उद्योगों की स्थापना से दिन-प्रतिदिन स्थितियां बदल रही हैं। मऊगंज भले ही नया जिला है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक विरासत और यहां के लोगों के परिश्रम से जिले का तेजी से विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में किसानों को दिन में ही दस घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार किसानों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह विचार मऊगंज में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को मंत्रालय से संबोधित करते हुए व्यक्त की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मऊगंज के कार्यक्रम में शामिल हो रहे किसानों और जन सामान्य को डोल ग्यारस की बधाई दी। उन्होंने देव तालाब में विराजे भोलेनाथ और अष्टभुजा महारानी को वर्चुअल नमन भी किया। प्राकृतिक खेती से कम लागत में अधिक उत्पादन ले रहे हैं किसान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे किसान नीम कोटेड यूरिया, नैनो यूरिया, उच्च गुणवत्ता वाले बीज और प्राकृतिक खेती जैसे प्रयासों से कम लागत से अधिक उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उद्यानिकी में भी किसान नए प्रयोग कर रहे हैं। स्ट्रॉबेरी, काला आलू, विशेष का किस्म के तरबूज और मखाने जैसी नवाचार आधारित खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मऊगंज के टमाटर और प्याज के स्वाद के लोग दीवाने हैं। मत्स्य पालन, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियां भी किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सीतापुर-हनुमना, सूक्ष्म दबाव सिंचाई योजना से सिंचाई सुविधा बढ़ेगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीतापुर-हनुमना, सूक्ष्म दबाव सिंचाई योजना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे 1 लाख 20 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। मऊगंज जिले में गौरमा, नैना और गाड़ा तीन बड़े बांध हैं। इसके साथ ही नई गढ़ी सूक्ष्म दबाव सिंचाई परियोजना पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। जिले में खेती मजबूत हो किसान समृद्ध हो कृषि आधारित उद्योग लगे और युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिले, इसी दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से किया संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को खेती के साथ दुग्ध उत्पादन को भी प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के साथ मिलकर सांची के ब्रांड को आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से इस पहल का लाभ लेते हुए दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर अपनी आय में वृद्धि करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मऊगंज के उन्नत किसानों  जसमन पटेल,  तुलसीराम पांडे, मती अनीता मिश्रा,  उमाशंकर त्रिपाठी से कृषि के क्षेत्र में उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों और कृषि से संबंधित अन्य विषयों पर वर्चुअली चर्चा की। मऊगंज में आयोजित कार्यक्रम में विधायक  प्रदीप पटेल और अपेक्स बैंक के प्रशासक  महेन्द्र सिंह यादव विशेष रूप से उपस्थित थे।  

मध्यप्रदेश अपनी ऊर्जा जरूरतों के साथ ही देश की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादन और ऊर्जा भंडारण समग्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश अपनी ऊर्जा जरूरतों के साथ ही देश की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने में सक्षम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की 32 हजार मेगावाट ऊर्जा क्षमता में से 30% हिस्सा क्लीन एनर्जी का है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद पर विचार-मंथन के लिए भोपाल में एकत्र हुईं विद्युत कम्पनियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, पावर कट से पावर सरप्लस स्टेट अर्थात बिजली गुल से बिजली फुल राज्य बना है। हमारा प्रदेश आज देश के उन चुनिंदा राज्यों में से एक है जो अपनी ऊर्जा जरूरत से आगे बढ़कर देश की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। वर्तमान में नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण केवल देश ही नहीं, अपितु समग्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आज मध्यप्रदेश में 32 हजार मेगावाट की ऊर्जा क्षमता है, जिसमें से 30% हिस्सा क्लीन एनर्जी का है। मध्यप्रदेश, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद विषय पर आयोजित ऑल इंडिया डिस्काम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस का होटल मैरिएट में दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर पुस्तक 'सैलियंट पॉवर स्टैटिस्टिक्स वर्ष 2024-25 से 2025-26' विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्युत वितरण कम्पनियों के इस साझा मंच से ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों के ठोस समाधान निकलेंगे। इस अवसर पर ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल आलोक कुमार, प्रमुख सचिव ऊर्जा मनीष सिंह विशेष रूप से उपस्थित थे। कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न विद्युत कम्पनियों के प्रतिनिधि तथा ऊर्जा विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने रिकॉर्ड स्वयं तोड़ रहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान समय में सभी क्षेत्रों में बिजली अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। राज्य सरकार बिजली की खपत बढ़ाने के साथ-साथ इसके उत्पादन और संधारण पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीक के साथ नई इकाईयां प्रारंभ की गई हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में देश में 360 डिग्री बदलाव आया है। जब जी-20 सम्मेलन में ग्रीन-क्लीन एनर्जी का उत्पादन बढ़ाने और उपयोग का मुद्दा उठा, तो भारत ऐसा देश रहा, जिसने 50 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करके दिखाया है। यह प्रधानमंत्री मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से ही संभव हो पाया है। अब हम नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने रिकॉर्ड स्वयं तोड़ते जा रहे हैं। राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आ रही सभी चुनौतियों का समाधान करने के लिए तत्पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी क्षेत्रों की अपनी एक अलग विशेषता है। ग्रीन- गो ने नीमच-मंदसौर में 2000 मेगावॉट क्षमता का प्लांट स्थापित किया है। यह देश का सबसे अनूठा और सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। आमतौर पर इतनी बड़ी परियोजना का काम पूरा होने में 4 से 6 वर्ष लग जाते हैं, लेकिन सौभाग्य का विषय है कि मध्यप्रदेश में यह काम केवल दो से ढाई साल में पूर्ण हो रहा है। राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आ रही सभी प्रकार की चुनौतियों का समाधान करने के लिए तत्पर है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश को सौर ऊर्जा की शक्ति से परिचित कराया है। देश में सौर ऊर्जा के उपयोग के कारण कार्बन उत्सर्जन में 20 करोड़ टन से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। थर्मल पॉवर और अन्य पारंपरिक तरीकों के स्थान पर अब हम विंड, सोलर और पंप स्टोरेज से बिजली बना रहे हैं। मध्यप्रदेश में अब पानी से और पानी पर भी बिजली बन रही है। सस्ती भरोसेमंद बिजली के लिए उपयोगी रहेगी कार्यशाला ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र अभूतपूर्व बदलाव से गुजर रहा है। हमारी जिम्मेदारी केवल बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करना नहीं, बल्कि उसे विश्वसनीय, टिकाऊ और किफायती बनाना है। भविष्य के लिए हमें सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण का ऐसा संतुलित मिश्रण विकसित करना होगा, जिससे ऊर्जा संक्रमण की लागत न बढ़े और उपभोक्ताओं पर आर्थिक भार न पड़े। मंत्री तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में नई संगठनात्मक संरचना और नई भर्तियों को मिली स्वीकृति, निश्चित ही हमारी विद्युत कंपनियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सुदृढ़ बनाएगी। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस कार्यशाला से ऐसे व्यावहारिक सुझाव निकलेंगे जो हमारी वितरण कंपनियों को अधिक सक्षम, वित्तीय रूप से मजबूत और भविष्य के लिए तैयार कर सकेंगे। कार्यशाला सस्ती और भरोसेमंद बिजली के लिए उपयोगी रहेगी। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल आलोक कुमार ने कांफ्रेस के उद्देश्यों की जानकारी दी। प्रमुख सचिव ऊर्जा मनीष सिंह ने कॉन्फ्रेंस में पधारने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया।