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असम के जोरहाट एयरबेस पर बड़ा हादसा: भारतीय वायुसेना के विमान में लैंडिंग के बाद आग लगी

जोरहाट  असम के जोरहाट एयरबेस पर भारतीय वायु सेना के एक विमान के क्रैश होने की खबर है. बताया जा रहा कि विमान में लैंडिंग के बाद आग लग गई. जो विमान क्रैश हुआ है वह वायु सेना का AN-31 विमान बताया जा रहा है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, असम के जोरहाट स्थित वायुसेना स्टेशन पर लैंडिंग के दौरान एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. दुर्घटनाग्रस्त विमान AN-31 श्रेणी का मालवाहक विमान था, जिसका उपयोग आपूर्ति परिवहन के लिए किया जाता है. यह दुर्घटना विमान के वायुसेना बेस पर लैंडिंग के दौरान हुई. हादसे में पायलट के मारे जाने की आशंका है. हालांकि अभी तक किसी  के हताहत होने की वायु सेना ने पुष्टि नहीं की है।  जानकारी के मुताबिक विमान लैंडिंग स्ट्रिप पर नहीं लैंड कर सका था, बल्कि एयरसबेस के उबड़-खाबड़ और घास वाले हिस्से में उसकी लैंडिंग हुई. बता दें कि असम के जोरहाट स्थित ​रौरिया एयर फोर्स स्टेशन (Rowriah Air Force Station) पूर्वोत्तर भारत में भारतीय वायु सेना के प्रमुख सैन्य ठिकानों में से एक है. यह एयरबेस असम समेत पूरे पूर्वोत्तर में वायु अभियानों, सैन्य रसद आपूर्ति और रणनीतिक गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  जानकारी के मुताबिक यह विमान नियमित उड़ान पर था. सूत्रों के मुताबिक जोरहाट एयरबेस पर लै​डिंग के वक्त विमान में धमाका हुआ और आग लग गई. विमान बीच से दो हिस्सों में बंट गया. इसमें सवार क्रू और अन्य वायु सैन्य कर्मियों की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।  AN-32 अब तक 22 दुर्घटनाओं का शिकार वर्ष 1986 से अब तक AN-32 विमान भारत में लगभग 22 दुर्घटनाओं का शिकार हो चुका है. इसकी सबसे हालिया दुर्घटना वर्ष 2025 में दर्ज की गई थी. दुर्घटनाओं के इतिहास के बावजूद AN-32 भारतीय वायु सेना के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले परिवहन विमानों में शामिल है और देशभर में लॉजिस्टिक सपोर्ट, सैनिकों की आवाजाही तथा विभिन्न ऑपरेशनल मिशनों में आज भी इसकी अहम भूमिका बनी हुई है।  इसी साल मार्च में भारतीय वायु सेना का एक सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) लड़ाकू विमान नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर की मौत हो गई थी. विमान ने जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी. यह हादसा असम के कार्बी आंगलोंग जिले के बोकाजन सब-डिवीजन स्थित इंगलोंग एकोपी पहाड़ी क्षेत्र में हुआ था, जो जोरहाट एयरबेस से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है।  IAF का भरोसेमंद कार्गो विमान है AN-32 भारतीय वायु सेना का Antonov AN-32 एक दो इंजन वाला कार्गो प्लेन है, जिसे मूल रूप से सोवियत संघ की एंटोनोव डिजाइन ब्यूरो ने डेवलप किया था. यह विमान AN-26 का अपग्रेडेड वर्जन है और विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों, गर्म मौसम और कठिन परिस्थितियों में संचालन के लिए तैयार किया गया है. भारतीय वायु सेना ने 1980 के दशक से AN-32 को अपने कार्गो फ्लीट का अहम हिस्सा बनाया हुआ है।  भारतीय वायु सेना AN-32 का उपयोग सैनिकों, हथियारों, सैन्य उपकरणों और राहत सामग्री के परिवहन के लिए करती है. यह विमान हिमालयी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और सीमावर्ती इलाकों में रसद आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह छोटे रनवे पर भी टेक ऑफ और लैंडिंग करने में सक्षम है. विमान लगभग 6.7 टन तक का भार ले जा सकता है और इसमें 40 से अधिक सैनिकों को एक साथ ले जाने की क्षमता है।  भारतीय वायु सेना के पास लंबे समय तक 100 से अधिक AN-32 विमान रहे हैं. समय-समय पर इनका अपग्रेडेशन भी किया गया है. इसमें मॉडर्न एवियोनिक्स, नेविगेशन और सिक्योरिटी सिस्टम का अपग्रेडेशन शामिल है. हालांकि, लंबे समय से सेवा में रहने के कारण इन विमानों को चरणबद्ध तरीके से नए परिवहन विमानों से बदलने की योजना पर भी काम चल रहा है. इसके बावजूद AN-32 आज भी भारतीय वायु सेना के सबसे भरोसेमंद परिवहन विमानों में गिना जाता है और आपदा राहत, सैन्य अभियानों और मानवीय सहायता मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  शुरुआती जानकारी के​ विमान, विमान की लैंडिंग के बाद उसमें आग लग गई. सूत्रों के मुताबिक, घटना जोरहाट एयरबेस के भीतर हुई. एयरबेस पर मौजूद फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी टीमों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू कर दिए।  फिलहाल हादसे के कारणों का पता नहीं चल पाया है. जानकारी के मुताबिक यह विमान नियमित उड़ान पर था. सूत्रों के मुताबिक जोरहाट एयरबेस पर लै​डिंग के वक्त विमान में धमाका हुआ और आग लग गई. विमान में सवार क्रू और अन्य कर्मियों की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. भारतीय वायुसेना घटना की जांच में जुट गई हैं. इस घटना को लेकर वायुसेना की ओर से आधिकारिक बयान जारी होने का इंतजार है। 

बंगाल में सियासी हलचल: अभिषेक बनर्जी के घर रेड, मदन मित्रा के ठिकाने पर छापा; दौड़ी-दौड़ी पहुंचीं ममता

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की राजनीति शनिवार को पूरी तरह गरमा गई। एक तरफ कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर पुलिस और केंद्रीय बलों की बड़ी टीम ने छापेमारी की, तो दूसरी तरफ नगर पालिका भर्ती घोटाले में ईडी ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इन दोनों घटनाओं ने राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के एक थाने में दर्ज एक मामले के सिलसिले में शनिवार तड़के पुलिस और केंद्रीय बलों की टीम कोलकाता के कालीघाट स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंची। यह कार्रवाई उस समय हुई जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जांच एजेंसियों के समन और पूछताछ का सामना कर रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाने और कोलकाता पुलिस के अधिकारी तड़के करीब तीन बजे के बाद अभिषेक बनर्जी के पतुआपारा स्थित घर के बाहर पहुंचे। कुछ ही समय बाद केंद्रीय बलों के जवानों ने पूरे परिसर को घेर लिया और बाहर सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली, जबकि पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई। तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि पुलिस ने घर का ताला तोड़कर जबरन प्रवेश किया और पूरे घर की तलाशी ली। घटना की जानकारी मिलते ही पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तुरंत अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंच गईं। इस पूरे अभियान को लेकर राजनीतिक तनाव और बढ़ गया। देर रात करीब ढाई बजे शुरू हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे में पुलिस अधिकारियों ने काफी देर तक दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब न मिलने पर आखिरकार घर का ताला तोड़कर भीतर प्रवेश किया। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी थी। टीएमसी नेता की शिकायत पर की गई कार्रवाई यह सनसनीखेज कार्रवाई शालबनी के एक स्थानीय तृणमूल नेता की शिकायत पर की गई है, जिसमें अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित राय पर टिकट दिलाने के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। मोबाइल टावर लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस तड़के तीन बजे अभिषेक के घर पहुंची और करीब पांच घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया। भागी-भागी आईं ममता बनर्जी इस घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी सुबह-सुबह गाड़ी से सीधे अभिषेक के घर पहुंचीं, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई। तलाशी को लेकर अभिषेक बनर्जी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि पुलिस ने ताला तोड़कर पूरे घर की तलाशी ली है। हमारे पास इसके सारे रिकॉर्डिंग हैं, हमने जांच में पूरा सहयोग किया है। चौतरफा घिरे अभिषेक बनर्जी गौर करने वाली बात यह है कि अभिषेक बनर्जी इस वक्त चौतरफा कानूनी मुकदमों से घिरे हैं। फर्जी हस्ताक्षर मामले में गुरुवार को ही सीआईडी ने उनसे साढ़े पांच घंटे पूछताछ की थी, जिसमें उन्हें रविवार (14 जून) को फिर पेश होना है। इसके अलावा, सोमवार (15 जून) को प्राथमिक भर्ती घोटाले में ईडी ने समन किया है और मंगलवार (16 जून) को धमकी मामले में सीआइडी के सामने उन्हें पेश होना है। इन सबके बीच शनिवार तड़के हुई इस औचक छापेमारी ने राज्य की राजनीति गरमा दी है। यह तलाशी अभियान चार घंटे से अधिक समय तक चला। सुबह तक पुलिस और अधिकारी घर के अंदर मौजूद रहे। बाद में कुछ अधिकारी बाहर निकलते और फिर अंदर जाते देखे गए। घर से बाहर आने के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके घर का ताला तोड़ा और हर कमरे की गहन तलाशी ली। उन्होंने कहा, “उन्होंने ताला तोड़ा, घर में घुसे और हर कमरे की जांच की।” हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई के पीछे का कारण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया। शनिवार को ही पश्चिम बंगाल में दूसरा बड़ा घटनाक्रम नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़ा सामने आया, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग यानी धन शोधन की जांच के तहत की गई। ईडी की टीम ने मदन मित्रा और उनसे जुड़े करीब सात परिसरों को निशाना बनाया। मदन मित्रा उत्तर 24 परगना जिले की कामरहाटी विधानसभा सीट से विधायक हैं और वे पहले राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि नगर पालिकाओं में भर्ती के दौरान अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने के बदले रिश्वत ली गई। यह रिश्वत नकद और सोने के रूप में बिचौलियों के जरिए दी और ली गई। ईडी के अनुसार, इस पूरे मामले में करीब 125 कथित अवैध नियुक्तियों से मदन मित्रा के संबंध होने की बात सामने आई है। ईडी की टीम फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। हालांकि, छापेमारी में क्या बरामद हुआ है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस घोटाले की शुरुआत स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान हुई थी। उस समय ईडी ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़े प्रमोटर अयान शील के घर छापेमारी की थी, जहां से कई अहम दस्तावेज मिले थे। वहीं से नगर पालिका भर्ती घोटाले की जांच आगे बढ़ी। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने भी इस मामले में समानांतर जांच शुरू की। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने लगे, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई। इस कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले मदन मित्रा ने नगर पालिका के सभी तृणमूल पार्षदों को इस्तीफा देने का निर्देश दिया था और पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी। इसी बीच कामरहाटी नगर पालिका के चेयरमैन गोपाल साहा ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद मदन मित्रा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गोपाल साहा को लगातार अपमान और उपेक्षा झेलनी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी प्रशासनिक शक्तियां लगभग खत्म कर दी गई थीं, जिससे उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। मदन मित्रा ने कार्यकर्ताओं और पार्षदों से इस घटना के खिलाफ विरोध दर्ज कराने की अपील भी की। इन दोनों बड़ी कार्रवाइयों ने एक बार फिर … Read more

रोहित शर्मा के निशाने पर इतिहास, आज सेंचुरी जड़ी तो सचिन का बड़ा रिकॉर्ड होगा चकनाचूर

धर्मशाला इंडिया वर्सेस अफगानिस्तान तीन मैच की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला आज यानी शनिवार, 13 जून को धर्मशाला के हिमाचर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला जाना है। विराट कोहली चोट के चलते सीरीज से बाहर हो गए हैं, ऐसे में हर किसी की नजरें रोहित शर्मा पर होगी। रोहित शर्मा इंजरी से वापस आ रहे हैं, आईपीएल 2026 के दौरान उन्हें हैम्सट्रिंग में चोट लगी थी। अब वह बीसीसीआई का टेस्ट पास कर अफगानिस्तान के खिलाफ खेलने के लिए एकदम फिट है। रोहित शर्मा जैसे ही धर्मशाला के मैदान पर खेलने के लिए उतरेंगे वैसे ही वह 37 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर देंगे और वनडे में भारत के लिए खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन जाएंगे। भारत के लिए वनडे खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी जी हां, इससे पहले यह रिकॉर्ड 1983 वर्ल्ड कप फाइनल के हीरो मोहिंदर अमरनाथ के नाम था। मोहिंदर अमरनाथ ने 1989 में अपना आखिरी वनडे खेला था, तब वह 39 साल और 36 दिन के थे। वहीं आज जब रोहित शर्मा मैदान पर उतरेंगे तो उनकी उम्र 39 साल 44 दिन होगी और वह भारत के लिए वनडे खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे। वहीं क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, जिन्होंने भारत के लिए सबसे ज्यादा क्रिकेट खेला है। उन्होंने भी अपना आखिरी वनडे 38 साल 329 दिन की उम्र में खेला था। सचिन का आखिरी मैच 18 मार्च 2012 को मीरपुर में पाकिस्तान के खिलाफ था। सचिन के रिकॉर्ड की बराबरी पर हैं ‘हिटमैन’ मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो बतौर भारतीय ओपनर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में रोहित शर्मा फिलहाल सचिन तेंदुलकर की बराबरी पर खड़े हैं. सचिन तेंदुलकर ने अपने पूरे करियर में बतौर ओपनर खेलते हुए कुल 45 शतक जड़े थे. वहीं, रोहित शर्मा भी अब तक बतौर ओपनर 45 शतक ठोक चुके हैं. आज अफगानिस्तान के खिलाफ अगर रोहित शर्मा 100 रनों का आंकड़ा पार कर लेते हैं, तो वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बतौर ओपनर अपना 46वां शतक पूरा कर लेंगे. ऐसा करते ही वह सचिन तेंदुलकर को पछाड़कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले भारतीय ओपनर बन जाएंगे।  वॉर्नर के नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड रोहित शर्मा अगर आज सचिन का रिकॉर्ड तोड़ते हैं, तो उनकी नजरें सिर्फ भारत के नंबर वन ओपनर बनने पर नहीं, बल्कि दुनिया का नंबर वन ओपनर बनने पर भी टिक जाएंगी. फिलहाल, बतौर ओपनर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के धाकड़ बल्लेबाज डेविड वॉर्नर के नाम है, जिन्होंने ओपनिंग करते हुए 49 शतक बनाए हैं. रोहित (45 शतक) इस वर्ल्ड रिकॉर्ड से अब महज 4 कदम दूर हैं।  सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ना या उसकी बराबरी करना किसी भी क्रिकेटर के करियर का सबसे बड़ा माइलस्टोन होता है. रोहित शर्मा पहले ही वनडे क्रिकेट में तीन दोहरे शतक और एक वर्ल्ड कप (2019) में 5 शतक लगाने का अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं. लेकिन सचिन के इस रिकॉर्ड की बराबरी करना उनके करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ देगा।  ODI खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बात ODI खेलने वाले सबसे उम्रदराज क्रिकेटर की करें तो, ओवरऑल रिकॉर्ड नीदरलैंड्स के टॉप-ऑर्डर बैटर नोलन क्लार्क के नाम है। क्लार्क 47 साल और 257 दिन के थे, जब उन्होंने 5 मार्च 1996 को रावलपिंडी में साउथ अफ्रीका के खिलाफ डच टीम को रिप्रेजेंट किया था। ODI में खेलने वाले सबसे उम्रदराज़ खिलाड़ियों की लिस्ट में क्लार्क के बाद ज़िम्बाब्वे के जॉन ट्रेकोस और इंग्लैंड के नॉर्मन गिफोर्ड हैं। ट्रेकोस ने अपना आखिरी ODI 45 साल और 312 दिन की उम्र में खेला था, जबकि गिफोर्ड ने अपना आखिरी ODI 44 साल और 361 दिन की उम्र में खेला था। रोहित शर्मा 6 रन बनाते ही करेंगे एक और कमाल हिटमैन रोहित शर्मा अफगानिस्तान के खिलाफ 6 रन बनाते ही इंटरनेशनल क्रिकेट में बतौर ओपनर 16000 रन पूरा कर लेंगे। वह इस मुकाम तक पहुंचने वाले वीरेंद्र सहवाग के बाद दूसरे भारतीय ओपनर बनेंगे। सहवाग ने पारी का आगाज करते हुए 16,119 रन बनाए थे, अगर रोहित शर्मा को उन्हें पछाड़ना है तो इस सीरीज में कम से कम 126 रन बनाने होंगे।  

तेज आंधी-बारिश से पंजाब में तबाही, तापमान 6.2°C गिरा; दो दिन का मौसम अलर्ट जारी

चंडीगढ़  पंजाब में तेज आंधी-तूफान और बारिश से तापमान में 5.2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इससे अब यह गिरकर सामान्य से 6.3 डिग्री नीचे पहुंच गया है।  मौसम विभाग ने शनिवार व रविवार के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। इसके तहत पंजाब में 40 से 50 किलोमीटर की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी और बारिश होगी। इसके बाद 15 जून से भी चार दिन पंजाब में 13 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।  मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, आज 13 जून को पंजाब के सभी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, श्री मुक्तसर साहिब, बठिंडा, मानसा, रूपनगर और मोहाली में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई। राज्य में सबसे अधिक अधिकतम तापमान 36.7 डिग्री सेल्सियस फरीदकोट में दर्ज किया गया। विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। अब तक करीब 3 लोगों की मौत हो चुकी, जबकि पावरकॉम को आंधी के कारण खंभे और ट्रांसफार्मर टूटने के कारण 2.6 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है। इन जिलों में पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, बठिंडा, बरनाला, मानसा, संगरूर व पटियाला शामिल हैं। विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिन फिलहाल भीषण गरमी से राहत रहेगी और तापमान में गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है।  पंजाब में सबसे अधिक 36.7 डिग्री का पारा फरीदकोट का दर्ज किया गया। पंजाब का न्यूनतम पारा भी 5 डिग्री गिर गया है। इससे न्यूनतम पारा सामान्य से 4.4 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। सबसे कम 19.8 डिग्री का न्यूनतम पारा एसबीएस नगर का दर्ज किया गया। बारिश-आंधी के 3 बड़े असर     850 से ज्यादा बिजली के खंभे टूटे: पंजाब राज्य बिजली निगम (PSPCL) की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक आंधी ने बिजली वितरण नेटवर्क को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। 850 से ज्यादा बिजली के खंभे तेज हवाओं के कारण उखड़कर जमीन पर गिर गए। 129 ट्रांसफार्मर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। 8.57 किलोमीटर लंबी बिजली लाइनें और भारी मात्रा में लो-वोल्टेज व हाई-वोल्टेज केबल टूट गए, जिसके कारण कई जिलों के दर्जनों गांवों और शहरों में ब्लैकआउट (अंधेरा) रहा।     शेड्यूल के मुकाबले 625 मेगावाट कम बिजली ली: गर्मी कम होने की वजह से राज्य की कुल बिजली मांग 12,074 मेगावाट रही है। इसमें राज्य में 4,384 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि 7,686 मेगावाट बिजली ग्रिड से ली गई है। शेड्यूल के मुकाबले 625 मेगावाट कम बिजली ली जा रही है, इसलिए पंजाब अंडर ड्रॉल की स्थिति में है।     अब तक 3 लोगों की मौत: अमृतसर में बारिश के कारण दीवार गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि फाजिल्का के गांव झंगड़ भैणी में सीमेंट का शेड उड़कर सुनीता रानी पर गिर गया, जिससे उसकी गर्दन कट गई और उसकी मौत थी। इसके अलावा संगरूर में भी एक व्यक्ति की मौत को गई। सामान्य से 6 फीसदी अधिक बारिश पंजाब के कई इलाकों में शुक्रवार को अच्छी बारिश हुई। कुछ जगहों पर तेज गरज-चमक के साथ बिजली कड़की, ओले गिरे और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलीं। राज्य में औसतन 9.3 मिमी बारिश दर्ज की गई। सबसे ज्यादा बारिश नवांशहर (एसबीएस नगर) में 55.6 मिमी हुई। यहां कुछ जगहों पर 7 सेंटीमीटर तक पानी गिरा। 1 से 12 जून के बीच पंजाब में औसतन 13.7 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 6 फीसदी ज्यादा है। पंजाब में शुक्रवार सुबह साढ़े 8 बजे तक एसबीएस नगर में 37.2 एमएम, अमृतसर में 33.9 डिग्री, लुधियाना में 9.6 एमएम, पटियाला में 10.2 एमएम, मोहाली में 21.0 एमएम, गुरदासपुर में 32.2 एमएम, बठिंडा में 24.0 एमएम, पठानकोट में 8.0, और रूपनगर में 9.0 एमएम की बारिश दर्ज की गई। अमृतसर का अधिकतम पारा 32.8 डिग्री, लुधियाना का भी 32.8 डिग्री, पटियाला का 32.7 डिग्री, पठानकोट का 33.7 डिग्री, बठिंडा का 32.0 डिग्री, फिरोजपुर का 34.4 डिग्री, एसबीएस नगर का 30.8 डिग्री, फाजिल्का का 34.7 डिग्री, होशियारपुर का 32.1 डिग्री, रूपनगर का 33.8 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 20.5 डिग्री, लुधियाना का 20.4 डिग्री, पटियाला का 22.2 डिग्री, पठानकोट का 23.2 डिग्री, बठिंडा का 24.7 डिग्री, फिरोजपुर का 23.6 डिग्री, होशियारपुर का 22.5 डिग्री और रूपनगर का 21.2 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग के चंडीगढ़ केंद्र के डायरेक्टर सुरिंदर पाल के मुताबिक पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी हवाओं के कारण पंजाब के मौसम में अचानक बदलाव आया है। तेज आंधी से पावरकाम को 2.06 करोड़ का नुकसान पंजाब में वीरवार को चली तेज आंधी व तूफान से बिजली वितरण ढांचे को व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ है। पावरकाम को 2.06 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक तेज आंधी व तूफान से 129 ट्रांसफार्मर, 850 खंबे और 8.57 किलोमीटर बिजली की तारें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इससे पंजाब के कईं इलाकों में बिजली सप्लाई प्रभावित हुई।  आंकड़ों के अनुसार पावरकाम को बिजली सप्लाई में बाधा संबंधी 1 लाख 9 हजार शिकायतें प्राप्त हुईं। कुछ घंटों के अंदर पावरकाम ने ज्यादातर शिकायतों का निपटारा करके बिजली सप्लाई बहाल कर दी। लेकिन इस दौरान लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पंजाब में झुलसा देने वाली गरमी के बीच वीरवार को अचानक मौसम बदला और 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी आई और तेज बारिश हुई। इससे राज्य भर में बिजली वितरण ढांचे को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा है। बड़ी गिनती में खंबों और ट्रांसफार्मरों के अलावा कईं किलोमीटर तक बिजली की तारें क्षतिग्रस्त हुईं। इससे बिजली सप्लाई बाधित होने से कईं घंटों तक लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।  वीरवार को पावरकाम के कंट्रोल रूम और आनलाइन प्रणाली के जरिये बिजली बंद होने की रिकार्ड 1 लाख 9 हजार शिकायतें दर्ज हुईं। यह इस मौजूदा धान सीजन के दौरान अब तक एक ही दिन में आईं सबसे अधिक शिकायतें हैं। इस स्थिति को देखते हुए पावरकाम के तकनीकी और फील्ड स्टाफ ने युद्ध स्तर पर शिकायतों के निपटारे के लिए काम शुरू किया।  रात को ही प्रभावित क्षेत्रों में जाकर क्षतिग्रस्त खंबों, ट्रांसफार्मरों व तारों … Read more

योगी सरकार की हरित पहल: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर जल्द दौड़ेंगी हाइड्रोजन बसें

योगी सरकार की हरित पहल: उत्तर प्रदेश की सड़कों पर दौड़ेंगी हाइड्रोजन बसें डीजल से हाइड्रोजन तक: भविष्य के परिवहन मॉडल का नेतृत्व कर रहा यूपी प्रत्येक हाइड्रोजन बस में होंगी 42 सीटें, एक बार में 750 किमी. की यात्रा, प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन भी लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के साथ 3 हाइड्रोजन बसों को भी हरी झंडी दिखाई। यह पहल प्रदेश को हरित परिवहन की दिशा में आगे ले जाएगी। इससे प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। एनटीपीसी दादरी द्वारा विकसित ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना के तहत इन बसों का निर्माण किया गया है। ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है। डीजल व पेट्रोल आधारित वाहनों की तुलना में हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल हैं। इन बसों से उत्सर्जन के रूप में केवल पानी निकलता है, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या नहीं होती। यही कारण है कि दुनिया के विकसित देश भी हाइड्रोजन आधारित परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं और अब उत्तर प्रदेश भी इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभाता दिखाई देगा। हर साल एक हजार टन कार्बन उत्सर्जन होगा कम इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के जल का उपयोग किया जा रहा है। इससे प्राकृतिक जल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा। साथ ही प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन होगा, जो लगभग 1750 पेड़ लगाने के बराबर है। इसके अलावा इस परियोजना से प्रति वर्ष करीब 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। एक बार में 750 किमी तक यात्रा संभव 42 यात्रियों की क्षमता वाली प्रत्येक बस में एक बार में 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरी जा सकेगी, जिससे लगभग 750 किलोमीटर तक की यात्रा संभव होगी। ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह परियोजना न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि भविष्य के हरित परिवहन मॉडल का भी मार्ग प्रशस्त करेगी।

Artificial Intelligence बन रही जल संकट की वजह? डेटा सेंटरों की खपत पर वैश्विक प्रदर्शन तेज

 नई दिल्ली दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का क्रेज जितनी तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से इसके खतरनाक असर भी सामने आने लगे हैं. कई देशों में एंटी एआई प्रोटेस्ट जमीन पर देखने को मिल रहे हैं। यूएन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल उर्जा, पानी और जमीन जैसे संसाधनों पर बड़ा दबाव डाल रहा है. यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का मामला नहीं है, बल्कि अब यह पर्यावरण और फ्यूचर की स्थिरता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।  अगर सिर्फ बिजली की बात करें तो इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार 2030 तक दुनिया भर के डेटा सेंटर करीब 945 टेरावॉट-आवर बिजली खपत कर सकते हैं. यह आंकड़ा समझने के लिए इसे आसान तरीके से समझिए।  एक देश के बराबर बिजली की खपत!  945 टेरावॉट-आवर बिजली का मतलब है जापान जैसे पूरे देश की सालाना बिजली खपत के बराबर. यानी जो बिजली एक पूरा विकसित देश इस्तेमाल करता है, उतनी बिजली सिर्फ AI और डेटा सेंटर खा जाएंगे. यह ग्लोबल बिजली खपत का करीब 3 प्रतिशत तक हो सकता है।  अब इसे और आसान भाषा में समझें तो अगर एक आम भारतीय घर साल भर में जितनी बिजली इस्तेमाल करता है, उसी बिजली में हजारों घर चल सकते हैं. लेकिन उतनी ही बिजली AI के सर्वर कुछ ही सेकंड में इस्तेमाल कर देते हैं जब लाखों लोग एक साथ AI से सवाल पूछ रहे होते हैं। पहले बिजली फैक्ट्री, घर और ट्रांसपोर्ट में खर्च होती थी. अब एक बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया खा रही है, जो दिखती नहीं लेकिन असर बहुत बड़ा डालती है।  लेकिन असली संकट पानी है. Earth.Org की रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक AI डेटा सेंटर करीब 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी खपत कर सकते हैं. यह पानी सर्वर को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होता है, क्योंकि AI मॉडल्स को चलाने वाले चिप्स बेहद ज्यादा गर्म होते हैं।  1.3 अरब लोगों की जरूरत के बराबर पानी अब इस आंकड़े को समझना जरूरी है. 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी का मतलब है करीब 1.3 अरब लोगों की जरूरत के बराबर पानी. यानी जितना पानी भारत जैसे देश की पूरी आबादी को चाहिए, उतना पानी सिर्फ मशीनों को ठंडा रखने में खर्च हो सकता है।  अगर इसे और आसान तरीके से समझें तो सोचिए एक शहर में रोज पानी की किल्लत होती है, लोग टैंकर मंगाते हैं, पानी बचाने की अपील होती है. वहीं दूसरी तरफ डेटा सेंटर लाखों लीटर पानी सिर्फ अपने सर्वर को ठंडा रखने में खर्च कर रहे हैं. यानी एक तरफ इंसान पानी के लिए जूझ रहा है और दूसरी तरफ मशीनें वही पानी इस्तेमाल कर रही हैं।  अब इस मुद्दे पर सिर्फ एक्सपर्ट ही नहीं, आम लोग भी विरोध करने लगे हैं. खासकर अमेरिका में AI डेटा सेंटर के खिलाफ विरोध तेजी से बढ़ रहा है।  अमेरिका में डेटा सेंटर्स का विरोध रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के कई शहरों में लोगों ने डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स का विरोध किया है. इसकी सबसे बड़ी वजह है पानी और बिजली की भारी खपत. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन डेटा सेंटर की वजह से उनके इलाके में पानी की कमी और बिजली पर दबाव बढ़ सकता है।  कुछ जगहों पर तो प्रोजेक्ट्स को रोकना भी पड़ा. अमेरिका में पिछले साल करीब 200 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स विरोध के चलते या तो रोक दिए गए या देरी का शिकार हुए. यह दिखाता है कि यह सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि अब यह पब्लिक इश्यू बन चुका है।  लोगों को डर है कि कंपनियां उनके संसाधनों का इस्तेमाल करके AI चला रही हैं, लेकिन उसका फायदा आम जनता को उतना नहीं मिल रहा. खासकर पानी की कमी वाले इलाकों में यह चिंता और ज्यादा गहरी है।  यूनाइटेड नेशन्स से जुड़ी रिपोर्ट्स में भी साफ चेतावनी दी गई है कि AI का यह बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर पानी, जमीन और क्लाइमेट तीनों पर दबाव बना रहा है. खासकर उन इलाकों में जहां पहले से पानी की कमी है, वहां डेटा सेंटर का विस्तार बड़ी समस्या बन सकता है।  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि AI की ज्यादातर बिजली खपत ट्रेनिंग में नहीं, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में होती है. IEA के विश्लेषण के मुताबिक करीब 80 से 90 प्रतिशत ऊर्जा खपत ‘इंफेरेंस’ में होती है, यानी जब आप और हम AI से सवाल पूछते हैं।  मतलब हर बार जब आप ChatGPT से सवाल पूछते हैं, फोटो बनाते हैं या AI वीडियो जनरेट करते हैं, तो उसके पीछे सर्वर चालू होते हैं, बिजली खर्च होती है और उन्हें ठंडा रखने के लिए पानी भी लगता है. यानी AI जितना ज्यादा इस्तेमाल होगा, उतना ही ज्यादा संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा।  इसका कोई समाधान है? टेक कंपनियां अब ग्रीन एनर्जी, रीसायकल पानी और नए कूलिंग सिस्टम पर काम कर रही हैं. कई कंपनियां दावा करती हैं कि वे अपने डेटा सेंटर को सोलर या विंड एनर्जी से चलाने की कोशिश कर रही हैं. लेकिन असली चुनौती यह है कि AI की डिमांड इतनी तेजी से बढ़ रही है कि ये प्रयास पीछे छूट सकते हैं।  आज AI हमारी जिंदगी आसान बना रहा है, लेकिन अगर यही टेक्नोलॉजी भविष्य में पानी और बिजली की कमी की वजह बन जाए, तो यह एक नई समस्या पैदा कर सकती है. AI का फ्यूचर जितना स्मार्ट दिखता है, उसका पर्यावरण पर असर उतना ही गंभीर होता जा रहा है।  क्या दुनिया AI और नेचर के बीच बैलेंस बना पाएगी, या फिर टेक्नोलॉजी की यह रफ्तार हमें एक नए संकट की तरफ ले जा रही है? 

CM का बड़ा ऐलान: हर शहर और गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगे

हर शहर, गांव को ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेंगेः मुख्यमंत्री सीएम योगी ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली 45 इलेक्ट्रिक व 3 हाइड्रोजन बसों को किया फ्लैग ऑफ नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी किया शुभारंभ किया सीएम योगी ने 15 जून तक 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन, मांग के अनुरूप 500 तक बढ़ाई जाएगी इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ग्रीन मोबिलिटी व सस्टेनेबल डेवलपमेंट का विजन दिया है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार आने वाले समय में हर शहर-गांव को पेट्रोल-डीजल मुक्त ग्रीन मोबिलिटी इलेक्ट्रिक सेवा से जोड़ेगी। हर व्यक्ति को बेहतर, आरामदायक व पर्यावरण अनुकूल परिवहन सेवा मिलने पर जोर देते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश में परिवहन विभाग का बेड़ा बड़ा हो रहा है, उनके कार्य भी बड़े दिखने चाहिए। सीएम योगी ने शुक्रवार को नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा क्षेत्र में जेवर एयरपोर्ट तक संचालित होने वाली उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की 45 इलेक्ट्रिक बसों व 3 हाइड्रोजन बसों को लखनऊ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये फ्लैग ऑफ किया। उन्होंने इस अवसर पर नोएडा इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी शुभारंभ किया। 15 जून से संचालित होने जा रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट  अपने संबोधन में सीएम ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ पश्चिम एशिया में चल रहे गतिरोध बड़ी चुनौतियां हैं। इनके कारण दुनिया वायु प्रदूषण, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, ओलावृष्टि का सामना कर रही है। दुनिया पर थोपे गए युद्धों की कीमत पूरी मानवता चुका रही है। पीएम के विजन को धरातल पर उतारने के लिए 15 जून से भारत के सबसे बड़े हवाई अड्डे (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) का संचालन प्रारंभ होने जा रहा है। देश के सबसे बड़े आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक हब तथा सुचारु वायुसेवा की दृष्टि से यात्रियों, नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीनों अथॉरिटी (नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा) ने परिवहन निगम के माध्यम से यह सेवा प्रारंभ की है। यह नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरे नोएडा, ग्रेनो व यीडा  मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना अथॉरिटी आईटी-इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर, स्टार्टअप्स, सेमीकंडक्टर समेत अन्य औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में उभरी हैं। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों को वहां लाने के साथ ही पर्यावरण अनुकूल परिवहन समय की मांग है। वहां कुछ क्षेत्रों में मेट्रो का संचालन भी हो रहा है, लेकिन लास्ट माइल कनेक्टिविटी की दृष्टि से इलेक्ट्रिक बस का संचालन मील का पत्थऱ साबित होने जा रहा है। 15 जून तक तीनों अथॉरिटी द्वारा 110 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन प्रारंभ होगा। मांग के अनुरूप इसमें क्रमिक बढ़ोतरी कर 500 बसों का संचालन भी तीनों अथॉरिटी के माध्यम से किया जाएगा।  नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में दिख रहा परिवर्तन सीएम योगी ने 2017 के पहले और इससे बाद के उत्तर प्रदेश का फर्क समझाया। कहा कि नए भारत के नए उत्तर प्रदेश में परिवर्तन दिख रहा है और 9 वर्ष में यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार ने किया है। 2017 से पहले टूटी सड़कें, नदारद बिजली, असुरक्षा, अराजकता व अव्यवस्था के वातावरण में नागरिकों के सामने पहचान का संकट खड़ा था, तब उत्तर प्रदेश में निवेश की बात दिवास्वप्न थी। 2017 के बाद का उत्तर प्रदेश विश्वस्तरीय रोड, एयर कनेक्टिविटी के लिए जाना जाता है। यूपी के पास हाईवे, एक्सप्रेसवे समेत 4 लाख किमी का रोड नेटवर्क है। इंटर स्टेट कनेक्टिविटी सबसे बेहतरीन है। 9 वर्ष पहले जो यूपी बदहाल सड़कों के लिए जाना जाता था, आज उसने एक्सप्रेसवे प्रदेश के रूप में पहचान बनाई है।  सीएम ने कहा कि 2019 में प्रयागराज कुंभ के दौरान सरकार ने कैबिनेट में गंगा एक्सप्रेसवे की घोषणा की थी। मेरठ से प्रयागराज के बीच देश के सबसे बड़े गंगा एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों को आश्चर्य होता है कि यह वही उत्तर प्रदेश है, जहां कभी सड़क व गड्ढे में अंतर का पता नहीं लगता था। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक, दिल्ली-मेरठ 12 लेन एक्सप्रेसवे और शीघ्र ही लोकार्पित होने वाला लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे नए यूपी की नई पहचान बने हैं।  अब यूपी में 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट सीएम ने यूपी की बेहतर एयर कनेक्विटी का जिक्र करते हुए कहा कि प्रयागराज में 11 महीने में एयरपोर्ट बनकर तैयार हुआ। जेवर में देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन गया है। कभी त्रेतायुग में भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से अयोध्या आए थे, लेकिन इसके बाद अयोध्यावासियों को कभी वायुसेवा प्राप्त नहीं हुई। अयोध्या हजारों वर्ष तक उपेक्षित और आजादी के बाद भी अपमानित रही। आज वहां महर्षि वाल्मीकि को समर्पित एयरपोर्ट संचालित हो रहा है। उप्र में लखनऊ, अयोध्या, काशी, कुशीनगर व नोएडा समेत 5 इंटरनेशनल अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। नोएडा एयरपोर्ट यात्रियों के साथ ही कार्गो-एमआरओ हब के रूप में खुद को स्थापित करने जा रहा है।  17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सीएम ने कहा कि देश के 20 में से यूपी के 7 शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। 17 नगर निगमों में 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें संचालित कर रहे हैं। नोएडा में सरकार आज यह सुविधा प्रारंभ कर रही है। पहले इलेक्ट्रिक बसें बाहर से मंगानी पड़ती थीं, लेकिन अब टाटा मोटर्स और अशोक लीलैंड हिंदुजा ग्रुप ने लखनऊ में इलेक्ट्रिक बस के दो-दो मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित कर यह सुविधा देनी प्रारंभ की है। यीडा में 3 हाइड्रोजन बसों का भी होगा संचालन  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से यमुना अथॉरिटी में तीन अन्य हाइड्रोजन बसें भी संचालित करने जा रहे हैं। यीडा को ये बसें एनटीपीसी ने उपलब्ध कराई हैं। इनमें ग्राउंड या सरफेस वाटर नहीं, बल्कि सीवर वाटर का इस्तेमाल कर हाइड्रोजन का निर्माण होगा। ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी अभिनव अवधारणा बन चुकी है। इन बसों का संचालन भी जेवर एयरपोर्ट के पास करेंगे। वायु प्रदूषण को कम करने, जहरीले वातावरण से बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों को बचाने में इनकी बड़ी भूमिका होगी।  नेट जीरो लक्ष्य के प्रति समर्पित सरकार सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नेट जीरो लक्ष्य प्राप्त करने के लिए विश्व बैंक की मदद से 2741 करोड़ रुपये से उत्तर प्रदेश क्लीन एयर मैनेजमेंट … Read more

El Niño vs Indian El Niño: मौसम वैज्ञानिकों की नजरें टिकीं, क्या भारत पर पड़ेगा बड़ा असर?

 नई दिल्ली ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मीटियोरॉलॉजी की हालिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान अल-नीनो की सीमा पार कर चुका है. नीनो 3.4 इंडेक्स जून 2026 की शुरुआत में +0.81°C तक पहुंच गया है, जो अल-नीनो की आधिकारिक सीमा +0.80°C से ज्यादा है. इस खबर से भारत के किसान, सरकार और आम लोग चिंतित हैं क्योंकि अल-नीनो अक्सर भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को कमजोर करता है।  अच्छी खबर यह है कि भारतीय महासागर में पॉजिटिव भारतीय महासागर द्विध्रुव (Positive Indian Ocean Dipole या IOD) विकसित होने की संभावना है, खासकर अगस्त-सितंबर में. यह अल-नीनो के निगेटिव असर को कुछ हद तक कम कर सकता है. भारत में अच्छी बारिश की संभावना बढ़ा सकता है।  अल-नीनो क्या है और यह भारत के मॉनसून को कैसे प्रभावित करता है? अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह के तापमान के असामान्य रूप से बढ़ने से जुड़ी होती है. सामान्य रूप से, प्रशांत महासागर में पूर्वी हिस्से (दक्षिण अमेरिका के पास) ठंडा रहता है क्योंकि वहां ठंडे पानी का ऊपर आना होता है. लेकिन जब अल-नीनो आता है तो हवाओं में बदलाव से गर्म पानी पूर्व की ओर फैल जाता है. इससे पूरे क्षेत्र का तापमान बढ़ जाता है।  भारत के लिए अल-नीनो का मतलब अक्सर कम बारिश होता है. कारण यह है कि अल-नीनो ऊपर की हवाओं को प्रभावित करता है. सामान्य मॉनसून में, गर्म और नम हवा भारत की ओर आती है. लेकिन अल-नीनो के दौरान इंडोनेशिया और भारत के ऊपर वायुमंडल में सब्सिडेंस बढ़ जाता है, जो बादलों के बनने और बारिश को रोकता है. नतीजा- सूखा, अनियमित बारिश, फसलें प्रभावित और पानी की कमी।  रिपोर्ट के मुताबिक नीनो 3.4 इंडेक्स +0.81°C पहुंच चुका है. सभी मॉडल बताते हैं कि आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर और गर्म होता रहेगा. भारतीय मौसम विभाग ने भी 2026 के मॉनसून के लिए औसत से कम बारिश (लगभग 90% LPA) की भविष्यवाणी की है. लेकिन मौसम विज्ञान में एक घटना अकेली नहीं चलती. यहां पॉजिटिव IOD की उम्मीद भारत के लिए राहत की किरण बन सकती है।  भारतीय महासागर द्विध्रुव क्या है?  भारतीय महासागर द्विध्रुव या IOD हिंद महासागर की एक महत्वपूर्ण जलवायु घटना है. इसे कभी-कभी 'भारतीय अल-नीनो' भी कहा जाता है. यह हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से यानी अफ्रीका के पास सोमालिया तट पर और पूर्वी हिस्से यानी इंडोनेशिया के पास समुद्री सतह के तापमान में अंतर पर आधारित है।  IOD के तीन चरण होते हैं…     पॉजिटिव IOD: पश्चिमी हिंद महासागर (अफ्रीका की ओर) का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, जबकि पूर्वी हिस्सा (इंडोनेशिया की ओर) ठंडा रहता है. इससे पश्चिम की ओर नमी बढ़ती है।      निगेटिव IOD: ठीक उलटा- पूर्वी हिस्सा गर्म और पश्चिमी ठंडा।      न्यूट्रल: दोनों तरफ तापमान लगभग सामान्य. IOD की गणना IOD इंडेक्स से की जाती है, जो पश्चिमी-पूर्वी हिस्सों के तापमान के अंतर पर आधारित है. जून 2026 में इंडेक्स -0.34°C था, यानी न्यूट्रल की ओर. लेकिन रिपोर्ट और अन्य मॉडल अगस्त-सितंबर में पॉजिटिव IOD विकसित होने की संभावना जता रहे हैं।  पॉजिटिव IOD कैसे बनता है? सामान्य हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं. पॉजिटिव IOD में ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या दिशा बदल जाती है. इससे पश्चिमी हिस्से में गर्म पानी जमा हो जाता है. पूर्व में ठंडे पानी का ऊपर आना बढ़ जाता है. इससे वायुमंडलीय सर्कुलेशन बदलता है- पश्चिम की ओर (भारत और अफ्रीका) नमी और वर्षा बढ़ती है, जबकि पूर्व (ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया) में सूखा पड़ सकता है।  पॉजिटिव IOD अल-नीनो को कैसे संतुलित करेगा? अल-नीनो और IOD दोनों महासागरों की घटनाएं हैं, लेकिन उनके प्रभाव अक्सर उलटे होते हैं. अल-नीनो भारत में बारिश कम करता है, जबकि पॉजिटिव IOD बारिश बढ़ाने में मदद करता है।  पॉजिटिव IOD के दौरान हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से से ज्यादा नमी भारत की ओर आती है. इससे दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की ताकत बढ़ती है. खासकर मॉनसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में इसका असर ज्यादा देखा जाता है. पॉजिटिव IOD वाले वर्षों में, भले ही अल-नीनो हो, भारत में सामान्य या ज्यादा बारिश हो सकती है।  उदाहरण के लिए- 1997-98 में मजबूत अल-नीनो था, लेकिन पॉजिटिव IOD ने भारत में अच्छी बारिश सुनिश्चित की. 2019 में भी पॉजिटिव IOD ने मॉनसून को मजबूत किया. 2026 में अगर IOD अगस्त-सितंबर तक पॉजिटिव हो गया तो यह अल-नीनो के सूखे प्रभाव को कम कर सकता है, खासकर मध्य और पश्चिमी भारत में।  वैज्ञानिक कारण- पॉजिटिव IOD से हिंद महासागर पर कम दबाव का क्षेत्र बनता है, जो मॉनसून की हवाओं को आकर्षित करता है. इससे बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नम हवा ज्यादा मात्रा में भारत पहुंचती है. अल-नीनो का प्रभाव मुख्य रूप से जून-जुलाई में ज्यादा होता है, जबकि IOD बाद में सक्रिय होकर संतुलन बना सकता है।  भारत के लिए क्या मतलब है? कृषि, अर्थव्यवस्था और तैयारी भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी कृषि पर काफी निर्भर है. अच्छा मॉनसून फसलों के लिए जरूरी है- खासकर खरीफ की फसलें जैसे धान, मक्का, सोयाबीन आदि. अगर पॉजिटिव IOD ने मदद की तो जल संकट कम हो सकता है. बिजली उत्पादन बेहतर रहेगा और सूखे से बचाव हो सकता है. लेकिन पूरी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए. IOD की भविष्यवाणी अभी संभावना है, न कि पक्की. अगर IOD कमजोर रहा या अल-नीनो बहुत मजबूत हुआ (सुपर अल-नीनो) तो समस्या बनी रह सकती है. IMD और अन्य एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं।  भविष्य की चुनौतियां और जलवायु परिवर्तन का रोल जलवायु परिवर्तन के कारण ये घटनाएं ज्यादा तीव्र और अनिश्चित हो रही हैं. अल-नीनो-ला नीना चक्र तेज हो रहा है. IOD भी ज्यादा बार घट रहा है. वैज्ञानिक लगातार बेहतर मॉडल विकसित कर रहे हैं ताकि पूर्वानुमान सटीक हों. 2026 का मौसम महत्वपूर्ण होगा. पॉजिटिव IOD अगर आया तो यह 'मॉनसून बूस्ट' साबित हो सकता है।  अल-नीनो की चेतावनी गंभीर है, लेकिन प्रकृति अक्सर संतुलन बनाती है. पॉजिटिव भारतीय महासागर द्विध्रुव भारत के लिए उम्मीद की किरण है. यह अल-नीनो के प्रभाव को कम करके अच्छी बारिश ला सकता है. वैज्ञानिक निगरानी और सतर्कता से हम इस चुनौती का … Read more

मध्य प्रदेश में मौसम बदलेगा करवट, कई जिलों में तेज आंधी-बारिश की चेतावनी; जानिए मानसून की नई तारीख

भोपाल  मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत और आफत दोनों एक साथ दरवाजे पर खड़ी हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके अगले 4 दिनों में मध्यप्रदेश में एंट्री करने की उम्मीद है। हालांकि, मानसून की आधिकारिक दस्तक से पहले ही प्रदेश का मौसम पूरी तरह बदल गया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए कई जिलों में भारी बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में ओलावृष्टि और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सिवनी जिलों में तेज हवाओं के साथ ओले गिरने की आशंका है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर और सागर समेत करीब 40 से अधिक जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। दूसरी तरफ, पश्चिमी मध्यप्रदेश के इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, धार और खरगोन जिलों में फिलहाल गर्मी और उमस का असर बना रहेगा। एमपी में 4 दिन की देरी से आएगा मानसून मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस साल मध्यप्रदेश में मानसून अपने तय समय से 4 दिन की देरी से एंट्री करेगा। प्रदेश के दक्षिणी हिस्से (बघेलखंड और महाकौशल के रास्ते) से 17-18 जून को मानसून दस्तक दे सकता है। इसके बाद अगले 10 से 15 दिनों में यह धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा। तब तक प्रदेश में प्री-मानसून एक्टिविटीज का दौर इसी तरह जारी रहेगा। मौसम का चल रहा खेल, कहीं भारी बारिश, कहीं सूखा मौसम विश्लेषकों का कहना है कि वर्तमान में हो रही बारिश का वितरण बेहद असमान है। पिछले 24 घंटों में पूर्वी मध्यप्रदेश के छतरपुर (गौरिहार में सबसे ज्यादा 56 मिमी), पन्ना, सतना और रीवा में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक, सतना में सामान्य से 893% और छतरपुर में 601% अधिक वर्षा हो चुकी है। इन इलाकों में अभी भी सूखे जैसे हालात इसके उलट, भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम जैसे मध्य व पश्चिमी जिलों में अभी तक सूखे जैसे हालात हैं और लोग पहली अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से रीवा और सतना में जहां रात का तापमान सामान्य से 5 डिग्री तक गिर गया है, वहीं भोपाल-रायसेन में रातें अब भी गर्म हैं। किसानों के लिए बड़ी चेतावनी, बुआई में न करें जल्दबाजी मौसम विशेषज्ञों ने खरीफ फसलों (सोयाबीन, धान, मक्का) की तैयारी कर रहे किसानों को विशेष सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में हो रही बारिश मुख्यतः स्थानीय बादलों और प्री-मानसून का नतीजा है, यह व्यापक मानसूनी वर्षा नहीं है।

क्या होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाएगा भारत? G7 शिखर सम्मेलन में मोदी-मैक्रों की अहम बैठक

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच फ्रांस ने भारत को एक अहम समुद्री सुरक्षा पहल में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की होने वाली द्विपक्षीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।  फ्रांस कई साझेदार देशों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में फ्री शिपिंग और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय पहल पर काम कर रहा है. इस पहल में भारत को भी शामिल किए जाने की संभावना है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।  रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की बातचीत में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सैन्य उपकरणों की खरीद, रणनीतिक साझेदारी और पश्चिम एशिया के ताजा हालात प्रमुख मुद्दे होंगे. हाल के महीनों में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा वैश्विक चिंता बन गई है।  भारत-अमेरिका-कतर समेत कई देशों की अलग मीटिंग G7 सम्मेलन के इतर पश्चिम एशिया पर केंद्रित एक विशेष बैठक भी होगी, जिसमें भारत, अमेरिका, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के शामिल होने की संभावना है. इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा हो सकती है।  विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि मोदी और मैक्रों की बैठक में पश्चिम एशिया समेत सभी वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी. उन्होंने संकेत दिया कि विभिन्न देशों द्वारा हाल में की गई नई पहलों और घोषणाओं पर भी विचार-विमर्श होगा।  फ्रांस युद्ध में शामिल नहीं, लेकिन समुद्री सुरक्षा जरूरी फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा कि समुद्री मार्गों का खुला और सुरक्षित रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है. उनका कहना है कि फ्रांस किसी युद्ध का हिस्सा नहीं है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है।  फ्रांस ने भारत को अपना प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का स्तर बेहद मजबूत है. रिपोर्ट में फ्रांसीसी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, भारत अब G7 से जुड़े लगभग सभी प्रमुख मंचों का हिस्सा बन चुका है और वैश्विक मामलों में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है. इस बीच सिबी जॉर्ज ने यह भी संकेत दिया कि 14 से 16 जून के बीच होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ अहम ऐलान किए जा सकते हैं।