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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वदेशी अपनाने के लिए प्रदेशवासियों को किया प्रेरित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

स्वदेशी ही था राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के अंग्रेजों से संघर्ष का मूल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वदेशी अपनाने के लिए प्रदेशवासियों को किया प्रेरित गर्व से कहो हम स्वदेशी अपनाएंगे प्रधानमंत्री  मोदी ने प्रदेश में अपना जन्म दिवस मनाकर जनजातीय अंचल धार को किया धन्य माताओं-बहनों-बेटियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकारी खजाने में कोई कमी नहीं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के 168वें बलिदान दिवस कार्यक्रम को किया संबोधित महाकौशल महावीरों की धरती है, जिसे राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह जैसे बलिदानियों ने अपने रक्त से सींचा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वाधीनता संग्राम के अमर बलिदानी राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने अंग्रेजों के खिलाफ जो लड़ाई लड़ी, उसका मूल 'स्वदेशी' ही था। देश में हमारा अपना शासन और कानून होना चाहिए, इस भाव ने ही जनजातीय वीरों को विदेशी ताकतों से संघर्ष के लिए प्रेरित किया। वे अंग्रेजों के आगे कभी झुके नहीं और पिता-पुत्र (राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह) की जोड़ी ने एक लक्ष्य के लिए लड़ते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और वे अमर हो गए। राज्य सरकार ने उनके बलिदान स्थल को स्मारक के रूप में विकसित किया है। अपनी संस्कृति के लिए प्रतिबद्ध राजा शंकर शाह अपने संस्कारों पर सदैव अडिग रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के 168वें बलिदान दिवस पर गुरूवार को जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दोनों अमर बलिदानियों को नमन कर पुष्पांजलि अर्पित की। अंग्रेजों के सामने नहीं झुके, हो गए शहीद मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह दोनों पिता पुत्रों ने रानी दुर्गावती की परम्‍परा को कायम रखते हुए अंग्रेजों के खिलाफ कविता के माध्‍यम से आवाज उठाई। उन्‍होंने अंग्रेजों के सामने सीना ठोककर जंगल, जमीन और अपने राष्‍ट्र को बचाने के लिए गीतों की रचना की। अंग्रेज उनके विद्रोह को बर्दाश्‍त नहीं कर पाये और कायरता का परिचय देते हुए उन्‍हें तोप के मुंह पर खड़ा कर उड़ा दिया गया। अंग्रेजों ने दोनो पिता-पुत्रों को बंदी बनाकर बगैर कोई मुकदमा चलाये उन्‍हें तोप से उड़ाने का काम किया था। अंग्रेजों ने उनके सामने धर्म बदलने, अंग्रेजी सत्‍ता को स्‍वीकार करने और माफी मांगने की शर्त रखी और इसे मान लेने पर उनकी रिहाई के लिए तैयार थे। लेकिन दोनों पिता-पुत्रों ने अंग्रेजों के इस प्रस्‍ताव को बहादुरी के साथ ठुकरा दिया और कहा कि तोप से उड़ाने के बाद भी यदि वे बच गये तो फिर से अंग्रेजी सत्‍ता के खिलाफ गीत लिखेंगे और अपने राष्‍ट्र की रक्षा के लिए विद्रोह करेंगे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हर व्‍यक्ति के जीवन में जन्‍म और मृत्‍यु एक बार आती है, लेकिन देश की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले शहीद हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ऐसे ही शहीद हैं जो हमेशा के लिए अमर हो गये हैं। उनका बलिदान हमें देश सेवा और देश की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। मध्‍यप्रदेश सरकार की ओर से उनके बलिदान दिवस पर मैं उन्‍हें नमन करता हूं और प्रणाम करता हूं। मां नर्मदा की पवित्र नगरी में गोंडवाना साम्राज्‍य के अमर शहीदों को स्‍मरण कर मैं स्‍वयं भी गौरवान्‍वित महसूस कर रहा हूं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश में स्वदेशी अपनाने का अभियान चल रहा है, विकसित भारत का मार्ग स्वदेशी से होकर गुजरता है। प्रदेश में बहनों ने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की अनोखी मिसाल प्रस्तुत की है। हमारे गांव आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के श्रेष्ठ उदाहरण रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 'गर्व से कहो हम स्वदेशी अपनाएंगे' के उद्घोष के साथ उपस्थित जनसमुदाय को दैनिक उपयोग की स्वदेशी सामग्री अपनाने के लिए प्रेरित किया। जबलपुर की धरा जनजातीय वीरों के रक्त से हुई है सिंचित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राचीनकाल से महकौशल, महावीरों की धरती रही है, जो राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह और राना दुर्गावती जैसी महान विभूतियों के बलिदान को समेटे हुए है। जबलपुर की धरा जनजातीय वीरों के रक्त से सिंचित हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए शाह वंश का अदम्य साहस, अमर शौर्य और अद्वितीय बलिदान सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मां भारती के चरणों में बलिदान देने वाले महावीर होते हैं। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। यही त्याग आने वाली पीढ़ियों के हृदय में राष्ट्रभक्ति की पवित्र ज्योति प्रज्ज्वलित करता रहेगा। 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान' में माताएं-बहनें कराएं जांच मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने कल प्रदेश के जनजातीय अंचल (धार) में अपना जन्म दिवस मनाकर प्रदेश को धन्य किया है। केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय भाई-बहनों के कल्याण के लिए संकल्पित हैं। प्रधानमंत्री  मोदी ने प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों को 'पीएम मित्र पार्क' की सौगात दी है। माता-बहनों-बेटियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकारी खजाने में कोई कमी नहीं है। हमारे लिए मां, बहन, बेटियों का सम्मान और उनका स्वास्थ्य सर्वोपरि है। समय पर बीमारी की जांच हो जाए तो जान बच सकती है। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि माताएं-बहनें "स्वस्थ नारी-सशक्‍त परिवार" अभियान अंतर्गत आयोजित शिविर में स्वास्थ्य जांच कराने के लिए आगे आएं। प्रधानमंत्री  मोदी की प्रतिबद्धता के अनुरूप राज्य सरकार पूर्ण समर्पण, सक्रियता और संवेदनशीलता के साथ इस दिशा में गतिविधियां संचालित करने के लिए तत्पर है। प्रदेश में स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार अभियान के साथ स्वच्छता का संकल्प भी लिया गया है। लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह ने कार्यक्रम में पधारे सभी का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर सांसद  आशीष दुबे, राज्यसभा सदस्य मती सुमित्रा वाल्मीकि, विधायक डॉ. अभिलाष पांडे, विधायक  अशोक रोहाणी, महापौर  जगत बहादुर सिंह 'अन्नू भैया' जनप्रतिनिधि सहित नागरिक उपस्थित थे। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने स्‍वदेशी अभियान प्रदर्शनी का किया अवलोकन मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने सेवा पखवाड़ा के दौरान नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्‍चरल एंड इन्‍फॉर्मेशन सेंटर में लगी स्‍वदेशी उत्‍पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने स्‍व सहायता समूहों के विभिन्‍न स्‍टॉलों … Read more

22 सितंबर से लागू हो रही नई जीएसटी दरों को लेकर सीएम योगी ने की प्रेस वार्ता

जीएसटी रिफॉर्म देशवासियों के लिए मोदी जी का दीवाली गिफ्ट : मुख्यमंत्री 22 सितंबर से लागू हो रही नई जीएसटी दरों को लेकर सीएम योगी ने की प्रेस वार्ता  जीएसटी रिफॉर्म्स के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का जताया आभार  मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के निर्णय को महंगाई से राहत और व्यापार को गति देने वाला बताया  सीएम बोले- जीएसटी रिफॉर्म्स रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा उपभोक्ताओं, किसानों, कारोबारियों और आम परिवारों तक सभी को मिलेगी राहतः मुख्यमंत्री  स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री ने की टैक्स रिफॉर्म की घोषणा और 20 दिनों में आ गए उसके परिणामः सीएम  2017 से पहले थे कई जटिल कर, जीएसटी ने इन्हें समाहित कर वन नेशन, वन टैक्स की व्यवस्था दीः योगी आदित्यनाथ  देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार होने के नाते उत्तर प्रदेश को जीएसटी सुधारों का मिलेगा सबसे ज्यादा लाभः मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को प्रेस वार्ता करते हुए हालिया जीएसटी रिफॉर्म्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों के लिए एक बड़ा दीवाली गिफ्ट करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी का यह निर्णय देशवासियों को महंगाई से राहत और व्यापार को गति देने वाला है। यह केवल टैक्स सुधार नहीं बल्कि हर नागरिक के जीवन को सरल बनाने वाला दीपावली का उपहार है। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं, किसानों, कारोबारियों और आम परिवारों तक सभी को राहत देने वाले इन सुधारों का लाभ 22 सितम्बर से, यानी शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन से मिलने लगेगा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रति आभार व्यक्त किया। घोषणा के 20 दिनों के अंदर सामने आए परिणाम  मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री जी ने जिस टैक्स रिफॉर्म की घोषणा की थी, उसके परिणाम महज 20 दिनों में सामने आ गए। जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में 3 सितम्बर को लिए गए फैसले अब लागू हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक टैक्स सुधार नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने वाला व्यापक अभियान है। जीएसटी में अब तक का सबसे बड़ा रिफॉर्म मुख्यमंत्री ने कहा कि जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने से पहले देश में अलग-अलग कर लागू थे जिनमें वैट, सेल टैक्स, सेवा कर, उत्पाद शुल्क, एंट्री टैक्स और मनोरंजन कर जैसे जटिल कर उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर भारी पड़ते थे। जीएसटी ने इन्हें समाहित कर देश को वन नेशन, वन टैक्स की व्यवस्था दी। अब जीएसटी में सबसे बड़ा सुधार किया गया है। पहले चार स्लैब—5%, 12%, 18% और 28% लागू थे। लेकिन अब सिर्फ दो स्लैब—5% और 18%—को रखा गया है। 12% और 28% की दरें समाप्त कर दी गई हैं। कुछ विलासिता की वस्तुओं पर 40% टैक्स यथावत रहेगा। इससे आम उपभोक्ता को सीधी राहत मिलेगी। रसोई से लेकर कृषि, मकान निर्माण से लेकर बड़े हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, उद्योग और व्यापार—हर क्षेत्र को लाभ मिलेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मुख्यमंत्री ने कहा कि एक सामान्य गृहस्थ परिवार को अब घरेलू खर्चों में सीधी राहत मिलेगी। दूध, दही, पनीर, शैम्पू, टूथपेस्ट, साबुन, साइकिल और बच्चों से जुड़े सामान पर केवल 5% या 0% टैक्स लगेगा। इससे न सिर्फ रोज़मर्रा के खर्च कम होंगे बल्कि उपभोक्ता की क्रय क्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ज्यादा खरीद सकेगा तो खपत बढ़ेगी और बाजार में मांग बढ़ने से उत्पादन में तेजी आएगी। किसानों और ग्रामीण भारत को फायदा मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुधार किसानों और ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था के लिए भी ऐतिहासिक है। ट्रैक्टर, टायर, कीटनाशक और सिंचाई उपकरणों पर टैक्स घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल किसानों को राहत देगा बल्कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। बीमा और इलाज होगा सस्ता मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर लगने वाला जीएसटी पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा दवाइयों, ऑक्सीजन और जांच किट पर भी टैक्स घटाया गया है। इससे इलाज सस्ता होगा और हर सामान्य नागरिक को राहत मिलेगी। सरकार ने वाहनों की खरीद-फरोख्त पर भी राहत दी है। पहले कार और बाइक पर 28% जीएसटी लगता था, अब इसे घटाकर 18% कर दिया गया है। यानी सीधे 10% की कटौती। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से न केवल आम नागरिक की गाड़ी खरीदने की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ऑटोमोबाइल सेक्टर को भी बढ़ावा मिलेगा। उत्पादन बढ़ेगा, नए रोजगार उत्पन्न होंगे और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। शिक्षा क्षेत्र को भी फायदा मुख्यमंत्री ने बताया क नोटबुक, पेंसिल और अन्य शिक्षण सामग्री पर टैक्स पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। यह फैसला छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जहां एक ओर आम उपभोक्ताओं और विद्यार्थियों को छूट दी है, वहीं तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पादों पर टैक्स दर बढ़ाकर 40% कर दी गई है। टैक्स प्रणाली हुई और पारदर्शी मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) के लिए टैक्स रजिस्ट्रेशन ऑटो-अप्रूव कर दिया गया है। टैक्स रिफंड की प्रक्रिया भी तेज की गई है। साथ ही रिस्क-आधारित कंप्लायंस और श्रम सुधार भी लागू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जीएसटी से पहले देश का टैक्स संग्रह केवल 7 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 22.8 लाख करोड़ रुपये हो गया है। टैक्स पेयर्स की संख्या भी 65 लाख से बढ़कर 1.51 करोड़ हो गई है। टैक्स सुधार से मजबूत हुई अर्थव्यवस्था मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में टैक्स संग्रह की ऐतिहासिक वृद्धि से देश के हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट और रक्षा उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। 2014 के पहले देश में केवल 74 एयरपोर्ट थे, अब 160 हैं। मेट्रो नेटवर्क 248 किमी से बढ़कर 1,013 किमी हो गया। वंदे भारत ट्रेनों की संख्या 144 तक पहुंची है। रक्षा उत्पादन 46,000 करोड़ से बढ़कर 1,27,000 करोड़ रुपये हो गया। रक्षा निर्यात 686 करोड़ से बढ़कर 23,600 करोड़ रुपये तक पहुंचा। गरीब कल्याणकारी योजनाओं तक सीधा लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि टैक्स सुधारों का लाभ गरीब कल्याणकारी योजनाओं में भी … Read more

मोटे अनाज (श्रीअन्न) मक्का, बाजरा व ज्वार की खरीद के लिए चल रहा किसानों का पंजीकरण

पहली अक्टूबर से शुरू होगी मोटे अनाज की खरीद  मोटे अनाज (श्रीअन्न)  मक्का, बाजरा व ज्वार की खरीद के लिए चल रहा किसानों का पंजीकरण  डबल इंजन सरकार ने मक्का का 2400, बाजरा का 2775,  ज्वार (हाईब्रिड) का 3699 व ज्वार (मालवांडी) का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3749 रुपये प्रति कुंतल किया है निर्धारित  31 दिसंबर तक किसानों से सुबह 9 से शाम पांच बजे तक की होगी खरीद  लखनऊ डबल इंजन सरकार एक तरफ जहां श्रीअन्न के फायदों के प्रति प्रदेशवासियों को प्रेरित कर रही है तो वहीं किसानों को भी इसकी खेती के फायदे से जोड़ रही है। वर्ष 2025-26 के लिए मोटे अनाजों की खरीद पहली अक्टूबर से प्रारंभ होगी, जो 31 दिसंबर तक चलेगी। 'मोटे अनाज' में शामिल मक्का, बाजरा व ज्वार की खरीद के लिए किसानों का पंजीकरण व नवीनीकरण चल रहा है। खाद्य व रसद विभाग के मुताबिक इसके लिए किसानों को fcs.up.gov.in या ऐप UP KISAN MITRA पर पंजीकरण/नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। खरीद पंजीकृत किसानों से ही की जाएगी।   टोल फ्री नंबर 18001800150 से मदद ले सकते हैं किसान किसान अपनी किसी भी समस्या के लिए टोल फ्री नंबर 18001800150 से मदद ले सकते हैं। इसके अलावा वे जिला खाद्य विपणन अधिकारी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, विपणन निरीक्षक से भी संपर्क साध सकते हैं। किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा। वहीं बिचौलियों को रोकने व पारदर्शिता बरतते हुए क्रय केंद्रों पर मोटे अनाज की खरीद ई-पॉप (इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ परचेज) डिवाइस के माध्यम से पहले की भांति किसानों का बायोमीट्रिक सत्यापन के जरिए ही होगी।  सरकार ने बढ़ाया है न्यूनतम समर्थन मूल्य  श्रीअन्न को बढ़ावा देने के साथ ही सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य भी बढ़ाया है। मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति कुंतल,  बाजरा का 2775 रुपये प्रति कुंतल, ज्वार (हाइब्रिड) का 3699 व ज्वार (मालवांडी) का 3749 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है।  इन जिलों में होगी मक्का खरीद   बदायूं,  बुलंदशहर, हरदोई, उन्नाव, मैनपुरी, आगरा, फिरोजाबाद, अलीगढ़, एटा, कासगंज, हाथरस, कानपुर नगर-देहात, कन्नौज, औरैया, इटावा, बहराइच, गोंडा, बलिया, जौनपुर, फर्रुखाबाद, मीरजापुर, सोनभद्र, देवरिया व ललितपुर में मक्का की खरीद की जाएगी।   बाजरा खरीद वाले जनपद निर्धारित  बदायूं,  बुलंदशहर, आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, मैनपुरी, अलीगढ़, कासगंज, हाथरस, एटा, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, संभल, रामपुर, अमरोहा, कानपुर नगर-देहात, फर्रुखाबाद, औरैया, कन्नौज, इटावा, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, गाजीपुर, जौनपुर, प्रयागराज, फतेहपुर, कौशांबी, मीरजापुर, बलिया, हरदोई व उन्नाव  इन जिलों में होगी ज्वार की खरीद  बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, कानपुर नगर-देहात, फतेहपुर, उन्नाव, हरदोई, मीरजापुर व जालौन में ज्वार की खरीद होगी।  

CM ने दी MEMU ट्रेन को हरी झंडी: रायपुर-राजिम का सफर अब सिर्फ डेढ़ घंटे में, रोज चलेगी ट्रेन

रायपुर  छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी है। रायपुर से नया रायपुर होते हुए राजिम तक आज से नई मेमू (MEMU) स्पेशल ट्रेन दौड़ेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  राजिम से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया ।आज से रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन (68766/68767) की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नई रेल सेवा शुरू करने का फैसला लिया। इस ट्रेन के शुरू होने से रायपुर और नवा रायपुर के बीच कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन रायपुर से मंदिरहसौद, सीबीडी, केंद्री, अभनपुर, मानिक चौरी और राजिम तक चलेगी। यह ट्रेन हर दिन दोनों तरफ से चलेगी। जिससे राजिम और रायपुर के बीच आना-जाना आसान होगा। डेढ़ घंटे में सफर होगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, रायपुर से राजिम रोजाना 2 हजार लोग यात्रा करते हैं। इस इलाके के ढाई लाख लोगों को इसका लाभ मिलेगा। ट्रेन के शुरू होने से उन्हें राहत मिलेगी। यह रेलवे प्रोजेक्ट 1500 करोड़ का है। छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर से राजिम जाने वाले यात्रियों को ट्रेन की सुविधा मिलने जा रही है. रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा का शुभारंभ आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजिम रेलवे स्टेशन से दोपहर 12 बजे करेंगे. यात्री लंबे समय से इस रूट पर मेमू ट्रेन की सुविधा की मांग कर रहे थे.  धार्मिक स्थलों समेत अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति इस ट्रेन के चलने से रायपुर समेत प्रदेशभर से राजिम के कुलेश्वर महादेव और राजिव लोचन मंदिर जाने वाले लोगों को फायदा होगा। साथ ही प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन स्थलों से लोग जुड़ सकेंगे। वहीं क्षेत्रीय व्यापार, कृषि, तीर्थाटन और पर्यटन को भी नए अवसर मिलेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। मिलेगा फायदा रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर नई सेवा से यात्रियों को सुगम, सुलभ और किफायती यात्रा का विकल्प उपलब्ध होगा. ग्रामीण अंचलों से राजधानी रायपुर का आवागमन अधिक सुविधाजनक बनेगा. राजधानी आने वाले विद्यार्थी, नौकरीपेशा वर्ग और व्यापारी वर्ग के लिए यह ट्रेन विशेष रूप से उपयोगी होगी. इसके साथ ही इस नई सेवा से छत्तीसगढ़ के प्रयाग—राजिम तक सीधी रेल पहुंच सुनिश्चित होगी, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. इस ट्रेन का हो रहा विस्तार दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर और अभनपुर के मध्य संचालित रायपुर-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अब राजिम तक विस्तार किया जा रहा है. 19 सितम्बर 2025 से नियमित समय-सारणी के अनुसार गाड़ी संख्या 68766/68767 रायपुर-राजिम-रायपुर मेमू पैसेंजर प्रतिदिन दोनों छोर से—राजिम और रायपुर से संचालित होगी. इस ट्रेन में 06 सामान्य श्रेणी के डिब्बे तथा 02 पावरकार सहित कुल 08 कोच होंगे. दो फेरे में चलेगी रोजाना नई मेमू ट्रेन रोजाना दो फेरे लगाएगी। इससे रायपुर-नवा रायपुर और आसपास के गांवों, कस्बों में रहने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। मात्र 10 रुपए होगा किराया अभी रायपुर से नवा रायपुर का यात्री किराया 30 से 40 रुपए तक है, लेकिन नई ट्रेन में सफर करने पर यात्रियों को केवल 10 रुपए किराया देना होगा। इससे रोजाना अप-डाउन करने वालों को काफी फायदा होगा। वर्तमान में रायपुर से अभनपुर के बीच दो मेमू ट्रेनें पहले से चल रही हैं। अब नई ट्रेन शुरू होने से यात्रियों को और अधिक सुविधा मिलेगी।

डिफेंस एग्रीमेंट से सऊदी-पाकिस्तान की नजदीकियां बढ़ीं, एक पर हमला हुआ तो दूसरा भी मानेगा अपना

दुबई   पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार (17 सितंबर 2025) को एक अहम रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए. ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’ नाम के इस समझौते के तहत यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो इसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सऊदी अरब दौरे के दौरान हुआ. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने राजकीय दौरे पर रियाद पहुंचे थे, जहां सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने अल-यमामा पैलेस में उनका स्वागत किया. इसी मौके पर यह रक्षा समझौता किया गया. पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम कार्यालय की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया कि किसी भी तरह की आक्रामकता दोनों देशों के खिलाफ मानी जाएगी. संयुक्त बयान में कहा गया कि यह समझौता आठ दशकों पुराने रिश्तों, भाईचारे, इस्लामी एकजुटता और साझा रणनीतिक हितों पर आधारित है. इसका मकसद रक्षा सहयोग को और गहरा करना और किसी भी हमले के खिलाफ साझा रोकथाम क्षमता को मजबूत बनाना है. इसमें साफ तौर पर लिखा है कि किसी एक देश पर आक्रामक कार्रवाई दोनों देशों पर आक्रमण मानी जाएगी. खाड़ी देशों के दौरे पर शहबाज पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ विदेश मंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ, वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब, सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़, पर्यावरण मंत्री मुसादिक मलिक और विशेष सहायक तारिक फातमी मौजूद थे. यह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक हफ्ते में खाड़ी क्षेत्र का तीसरा दौरा है. इससे पहले वे कतर दो बार गए- 11 और 15 सितंबर को जहां उन्होंने इजरायल के हमले के बाद हमास नेतृत्व के समर्थन में और अरब-इस्लामिक देशों की आपात बैठक में हिस्सा लिया. डील नहीं ये बदलाव का संकेत! यह समझौता 9 सितंबर 2025 को कतर की राजधानी दोहा में इजरायल के हमले के ठीक एक हफ्ते बाद हुआ, जिसमें हमास नेताओं को निशाना बनाया गया. किसी ने सोचा नहीं था कि कतर पर इजरायल हमला कर देगा. यह हमला अमेरिकी मंजूरी के साथ हुआ था, जिससे खाड़ी देशों (सऊदी, कतर, यूएई) में अमेरिकी विश्वसनीयता पर सवाल उठे. सऊदी राजपरिवार के लिए भी यह झटका है, क्योंकि कतर भी अमेरिकी सैन्य अड्डे वाला सहयोगी है. वह अमेरिका के साथ एक नई सैन्य डील चाहता है, जिसमें उसके सुरक्षा की गारंटी हो. हालांकि अभी इसमें सऊदी कामयाब नहीं हुआ है. वहीं पाकिस्तान भी ऐसा ही कोई सहयोगी चाहता है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद उसने देख लिया कि कोई भी उसे बचाने नहीं आया. यह डील ईरान को भी सीधा संदेश देती है. सऊदी अरब और ईरान के बीच हाल ही में रिश्ते सामान्य करने की कोशिश हुई थी, लेकिन पाकिस्तान के साथ यह समझौता फिर से ईरान-सऊदी प्रतिस्पर्धा को हवा दे सकता है. सऊदी की क्या मजबूरी? दरअसल, परमाणु हथियार संपन्न पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी का सैन्य साझेदार रहा है. सऊदी अरब ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता प्रदान की है. साफ-साफ कहें तो पाकिस्तान ने यह डील केवल भारत से बचने के लिए की है. मगर सऊदी अरब की ओर से यह डील मजबूरी के साथ-साथ सोची-समझी चाल है. सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब को अब पहले की तरह अमेरिका पर भरोसा नहीं है. कहा जाता है कि यह समझौता अमेरिका की ‘धोखेबाजी’ का नतीजा है. अमेरिका शुरू से चाहता है कि सऊदी अरब इजरायल संग अपने रिश्ते सामान्य करे. सऊदी को अब अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर यकीन नहीं. पांच प्वाइंट में जानिए डिफेंस डील के पीछे सऊदी अरब की मजबूरी     इजरायल का कतर की राजधानी दोहा में अटैक     ईरान से सऊदी अरब के तल्ख रिश्ते     अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर सऊदी को भरोसा नहीं     पाकिस्तान का परमाणु संपन्न देश होना     इस्लामिक मुल्कों को एकजुट करना यह भी कारण है जिस तरह इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमला किया, इसने भी सऊदी अरब की चिंता को और बढ़ा दिया. जी हां, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह रणनीतिक रक्षा समझौता पड़ोसी कतर की राजधानी दोहा में हुए हमले के ठीक बाद हुआ है. इजरायल ने दोहा में हमास नेताओं पर हमला किया था. हालांकि, दोहा में हुए हवाई हमले की अमेरिका ने निंदा की, मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. इसलिए सऊदी को हमेशा यह डर सता रहा है कि इजरायल कहीं सऊदी तक न अपनी नजर बढ़ा ले. वैसे भी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गाजा युद्ध को ‘नरसंहार’ करार दिया था. सऊदी ने अक्सर इजरायल की आलोचना की है.

शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से ओबीसी उत्थान की नई राह पर योगी सरकार

ओबीसी वर्ग के उत्थान के लिए योगी सरकार ने तैयार किया मजबूत खाका   शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से ओबीसी उत्थान की नई राह पर योगी सरकार  2047 तक 7 करोड़ ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति देने का लक्ष्य – शादी अनुदान योजना में 24 लाख बेटियों को 14,400 करोड़ रुपये का लाभ देने का लक्ष्य, अनुदान बढ़ाकर 60,000 रुपये करने की है तैयारी  – कंप्यूटर प्रशिक्षण से रोजगार के नए अवसर, 11 लाख युवाओं को कौशल विकास का लक्ष्य – छात्रावासों का अनुरक्षण और नए निर्माण से ओबीसी छात्रों की शिक्षा को मिलेगा सहारा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को ‘विकसित यूपी’ के रूप में स्थापित करने का दूरदर्शी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस महत्त्वाकांक्षी विजन की आधारशिला ग्रामीण युवाओं, खासकर पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना, साथ ही ग्राम स्वच्छता और अवसंरचना को मजबूत बनाना है। सरकार का मानना है कि अगले 22 वर्षों में इन क्षेत्रों में व्यापक सुधार से यूपी न केवल 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है, बल्कि भारत की विकास यात्रा में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इस दिशा में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ओबीसी समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए ठोस कदम उठा रहा है, जो प्रदेश के 52% से अधिक आबादी वाले इस वर्ग के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। ओबीसी उत्थान में योगी सरकार ने की अभूतपूर्व प्रगति प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी 52% से अधिक है, और उनके सशक्तिकरण के बिना ‘विकसित यूपी’ का सपना अधूरा रहेगा। पिछले आठ वर्षों में विभाग ने ओबीसी कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में 32,22,499 ओबीसी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति प्रदान की गई, जबकि पिछले आठ सालों में कुल 2,07,53,457 छात्रों को 13,535.33 करोड़ रुपये का लाभ मिला। यह राशि पूर्ववर्ती सरकार के 4,197 करोड़ रुपये के व्यय से चार गुना अधिक है, जो योगी सरकार की ओबीसी समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विभाग का लक्ष्य 2047 तक 7 करोड़ से अधिक ओबीसी छात्रों को 80,000 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति देकर शिक्षा के माध्यम से सामाजिक बराबरी सुनिश्चित करना है। यह कदम ग्रामीण ओबीसी युवाओं को उच्च शिक्षा तक पहुंचाने में मददगार साबित होगा। शादी अनुदान योजना बना है गरीब बेटियों का सहारा ओबीसी समुदाय की गरीब बेटियों के लिए शादी अनुदान योजना एक क्रांतिकारी कदम है। पिछले आठ वर्षों में 1,221 करोड़ रुपये खर्च कर 6,10,483 बेटियों की शादी कराई गई, जबकि पूर्ववर्ती सरकार में यह संख्या महज 2,75,311 और व्यय 344 करोड़ रुपये था। अब अनुदान राशि को 20,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये करने का प्रस्ताव विचाराधीन है, जो ओबीसी परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा। 2047 तक 24 लाख बेटियों को 14,400 करोड़ रुपये का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है, जो न केवल सामाजिक उत्थान को बढ़ावा देगा, बल्कि गरीबी उन्मूलन में भी योगदान देगा। यह योजना ओबीसी बेटियों को आत्मसम्मान और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में महत्वपूर्ण है।  तकनीकी प्रशिक्षण से युवाओं के लिए खुल रहे रोजगार के द्वार पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के तहत पिछले आठ वर्षों में 1,39,698 ओबीसी युवाओं को सीसीसी और ओ-लेवल प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे हजारों को सरकारी और निजी क्षेत्र में रोजगार मिला। यह कदम ग्रामीण ओबीसी युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। विभाग का लक्ष्य 2047 तक 11 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना और 3,850 करोड़ रुपये व्यय करना है। यह पहल न केवल रोजगार सृजन को बढ़ावा देगी, बल्कि ओबीसी समुदाय को डिजिटल युग में आगे बढ़ाने में मदद करेगी। ओबीसी छात्रों के लिए छात्रावासों का विस्तार देगी योगी सरकार ओबीसी छात्रावासों के अनुरक्षण और नए निर्माण को 2047 तक प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि निःशुल्क आवास सुविधा से अधिक से अधिक ओबीसी छात्र लाभान्वित हों। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की कमी को दूर करने के लिए यह कदम अहम है। नई छात्रावास सुविधाएं ओबीसी छात्रों को बेहतर माहौल में पढ़ाई करने का अवसर प्रदान करेंगी, जो ‘विकसित यूपी’ के विजन का अभिन्न हिस्सा है। विभाग का प्रयास है कि हर जिले में ओबीसी छात्रों के लिए आधुनिक छात्रावास बनें, ताकि शिक्षा उनकी पहुंच से बाहर न रहे। यूपी को राष्ट्रीय विकास में अग्रणी राज्य बनाने में ओबीसी वर्ग का विकास अहम ग्रामीण शिक्षा, स्वच्छता और अवसंरचना को मजबूत करने से ओबीसी समुदाय का सशक्तीकरण संभव है। पिछले आठ वर्षों में विभाग ने शिक्षा, विवाह और रोजगार में जो प्रगति की, वह ओबीसी कल्याण की दिशा में मील का पत्थर है। छात्रवृत्ति, शादी अनुदान और तकनीकी प्रशिक्षण जैसी योजनाओं ने ओबीसी युवाओं और बेटियों को नई दिशा दी है। 2047 तक यह प्रयास ओबीसी समुदाय को समृद्ध बनाएगा और यूपी को राष्ट्रीय विकास में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगा। पिछड़ा वर्ग कल्याण व दिव्यांग सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ओबीसी समुदाय की भागीदारी के बिना विकास अधूरा है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की इन पहलों से न केवल ओबीसी युवाओं को अवसर मिल रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब ओबीसी समुदाय को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के समान अवसर मिलें। विभाग का यह विजन ओबीसी समुदाय को मुख्यधारा में लाकर यूपी को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में अग्रसर है।  

सीएम योगी के मार्गदर्शन में लखीमपुर खीरी की डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की पहल पर बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए कॉरपोरेट सेक्टर, उद्यमी और स्वयंसेवी संस्थाएं

योगी सरकार ने खीरी में पेश की जनसहभागिता की मिसाल, 5 हजार सीएसआर स्पेशल किट बनीं बाढ़ पीड़ितों का संबल   सीएम योगी के मार्गदर्शन में लखीमपुर खीरी की डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल की पहल पर बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए कॉरपोरेट सेक्टर, उद्यमी और स्वयंसेवी संस्थाएं  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप बाढ़ पीड़ितों को सरकारी सहायता के साथ उपलब्ध करायी जा रही स्पेशल किट  – 45 लाख रुपये की लागत से तैयार की गयी किट, जरूरत पड़ने पर और भी किट की जाएंगी तैयार – किट में मच्छरदानी, छाता, बैटरी सहित टॉर्च, सेनेटरी पैड और गर्म पानी के थर्मस का किया जा रहा वितरण  – एक किट की कीमत है करीब 9 सौ रुपये, पिछले वर्ष भी सीएसआर स्पेशल किट बाढ़ पीड़ितों को की गयी थीं वितरित      लखनऊ/लखीमपुर खीरी   कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।                           ये पंक्तियां याेगी सरकार के लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन पर पूरी तरह से चरितार्थ होती हैं। यहां पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप आपदा में जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण देखने को मिला, जहां पर जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी द्वारा बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 5 हजार सीएसआर स्पेशल किट का वितरण किया जा रहा है। यह किट योगी सरकार द्वारा सरकारी वित्तीय सहायता, मुआवजा और राहत किट के अतिरिक्त वितरित की जा रही है। इस किट को जिलाधिकारी की पहल पर 45 लाख रुपये की लागत से कॉरपोरेट सेक्टर, उद्यमियों और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से तैयार किया गया। इसी के साथ खीरी पूरे प्रदेश में ऐसा पहला जिला हैं, जहां पर बाढ़ पीड़ितों के लिए सीएसआर स्पेशल किट वितरित की जा रही है। एक किट की लागत करीब 900 रुपये है। बता दें कि पिछले वर्ष भी आपदा की घड़ी में सीएम योगी के मार्गदर्शन में सीएसआर स्पेशल किट का वितरण किया गया था।  निराश्रित महिलाओं, दिव्यागों और 70 वर्ष से ऊपर के वृद्धजनों को उपलब्ध करायी जा रही किट जिलाधिकारी लखीमपुर खीरी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा अापदा के समय प्रदेशवासियों के साथ खड़े रहते हैं। उनके द्वारा न केवल आपदा की घड़ी में पीड़ितों को हर संभव मदद उपलब्ध करायी जाती है बल्कि वह खुद पीड़ितों पर दर्द साझा करने के लिए उनसे मुलाकात कर कुशलक्षेम पूछते रहते हैं। इसी क्रम में सीएम योगी की दूरदर्शी सोच को आत्मसात करते हुए सरकारी सहायता के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में 5 हजार सीएसआर स्पेशल किट का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किट को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए जिले की पांच बाढ़ प्रभावित तहसीलों के सभी बाढ़ प्रभावित गांव में निराश्रित महिलाओं, दिव्यांगों और 70 वर्ष से ऊपर के वृद्धजनों को चिन्हित किया गया है। इसके साथ ही हर जरूरतमंद को स्पेशल किट का वितरण किया जा रहा है। जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने गुरुवार को सदर तहसील में विधायक योगेश वर्मा के साथ जरूरतमंदों को सीएसआर स्पेशल किट वितरित की।  बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए जरूरत पड़ने पर और भी स्पेशल किट करायी जाएगी तैयार जिलाधिकारी ने बताया कि जिले की निघासन, धौरहरा, गोला गोकर्णनाथ औा पलिया तहसीलों में चिन्हित दिव्यांगजन, निराश्रित महिला एवं 70 वर्ष से अधिक उम्र वाले वृद्धजनों को स्पेशल सीएसआर किट का वितरण किया गया। उन्होंने बताया कि फिलहाल बाढ़ पीड़ितों को पांच हजार स्पेशल किट उपलब्ध करायी जा रही है। वहीं जरूरत पड़ने पर और भी सीएसआर स्पेशल किट को बनवाया जाएगा। किट में मच्छरदानी, छाता, बैटरी सहित टॉर्च, सेनेटरी पैड (2 पैकेट) और गर्म पानी रखने के लिए 2 लीटर की थर्मस शामिल है।   

कस्टम मिलिंग घोटाले में बड़ी कार्रवाई: भिलाई में ED की रेड, राइस मिलर सुधाकर के ठिकानों पर दस्तावेजों की पड़ताल

दुर्ग   भिलाई के हुडको में ईडी की टीम ने दबिश दी है.बताया जा रहा है कि मामला कस्टम मिलिंग घोटाला से जुड़ा है.सुबह 6 बजे ईडी की चार सदस्यीय टीम हुडको निवासी सुधाकर रावके के घर पहुंची.जहां टीम ने घर के अंदर जाकर घोटाले से जुड़े दस्तावेजों को खोजना शुरु किया. ईडी की टीम सुधाकर के घर पर मौजूद है और दस्तावेजों की जांच की जा रही है. पूर्व आईएएस आलोक शुक्ला के घर भी दबिश : वहीं पूर्व आईएएस आलोक शुक्ला के तालपुरी स्थित आवास पर भी ईडी की टीम पहुंची है.बताया जा रहा है कि टीम ने कुछ डिजिटल साक्ष्य भी इकट्ठा किए हैं.ईडी से जुड़े सूत्रों की माने तो छत्तीसगढ़ के अलग-अलग 10 जिलों में ईडी की टीम कार्रवाई कर रही है. ये घोटाला 140 करोड़ से अधिक का बताया जा रहा है. पहले भी भिलाई में पड़ा था छापा : इससे पहले भी 3 सितंबर को कस्टम मिलिंग घोटाला को लेकर भिलाई, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर सहित कई जगहों पर एक साथ ईडी की रेड जारी है. कृषि कारोबार से जुड़े व्यापारियों के घरों और दफ्तरों में ईडी ने दबिश देकर अहम दस्तावेजों को इकट्ठा किया था. रायपुर में ईडी की दबिश : 3 सितंबर को ही तीन कृषि कारोबारी के ठिकानों पर दबिश दी गई. जिसमें शंकर नगर चौपाटी के पास, दूसरा महावीर नगर और तीसरा अमलीडीह के विस्टा कॉलोनी में रेड की कार्रवाई हुई. इस कार्रवाई में जानकारी मिली थी कि विक्रेताओं, ठेकेदारों और कथित बिचौलियों के कम से कम 18 परिसरों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है. आरोप है कि छत्तीसगढ़ के बीज निगम के माध्यम से डीएमएफ निधि की राशि का दुरुपयोग किया गया है. क्या है कस्टम मिलिंग घोटाला ?: आपको बता दें कि कस्टम मिलिंग के एवज में प्रति क्विंटल 20 रुपए की वसूली की जाती थी.जिसका मास्टर माइंड राइस मिल एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर और मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी थे.दोनों के खिलाफ ईडी ने 3500 पेज का चालान पेश किया है. जिसमें 35 पेज की समरी भी शामिल है. सूची में अफसरों के नाम गृह विभाग के उपसचिव आरपी चौहान द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सुरेश कुमार भगत को पीटीएस मैनपाट से अजाक क्राइम सरगुजा, ओमप्रकाश कुजूर को बिलासपुर से मैनपुर, तूलसिंह पट्टावी को बालोद से अबिकापुर, नोहरलाल मण्डावी को सारंगढ़ बिलाईगढ़ से मोहला मानपुर चौकी अंबागढ़, यशकरण द्वीप ध्रुव को दुर्ग से धमतरी, शशिकला उईके को बस्तर से बेमेतरा, सुशील मलिक को जिला गरियाबंद से डीएसपी जिला गरियाबंद, कमलेश्वर कुमार भगत को बलरामपुर से क्राइम बलरामपुर, बृजेश कुमार तिवारी सक्ती से पुलिस मुख्यालय रायपुर। रमाकांत साहू एटीएस मुयालय से सीएसपी सिविल लाइन रायपुर, चंद्रशेखर ध्रुव को एसीबी-ईओडब्ल्यू से आईजी सरगुजा रेंज, इंद्रभूषण सिंह को महासमुंद से राज्य पुलिस अकादमी चंद्रखुरी रायपुर, विपीन रंगारी को दुर्ग से नगरी धमतरी, चुन्नू तिग्गा को पुलिस मुयालय से महासमुंद, हरविंदर सिंह को मुंगेली से डीएसपी अधीक्षक मुंगेली हैं। रीना नीलम कुजूर को बलौदाबाजार भाटापारा से सूरजपुर, क्रिसेन्सिया तिर्की को बलौदाबाजार से राज्य पुलिस अकादमी चंद्रखुरी रायपुर, लता चौरे रायपुर से पीटीएस माना रायपुर, प्रमोद कुमार किस्पोट्टा को सूरजपुर से बलरामपुर, गोपाल सिंह धुर्वे बलौदाबाजार से पुलिस मुयालय रायपुर, गंगा धुर्वे पीटीएस माना से डीएसपी पीटीएस माना रायपुर, सत्यपा तारम को सक्ती से जांजगीर चांपा, मीना चौधरी को पीटीएस माना से पीटीएस राजनांदगांव। स्वाति मिश्रा को छग लोक आयोग रायपुर से डॉयल 112 रायपुर, कुमारी चंद्राकर सरगुजा से रायपुर, मंजूलता राठौर रायपुर से गरियाबंद, श्रुति चक्रवर्ती रायपुर से बालोद, संतोषी ग्रेस को बेमेतरा से सारंगढ़-बिलाईगढ़, आशा तिर्की जशपुर से डीएसपी जशपुर, वैजन्तीमाला तिग्गा को पुलिस मुयालय से दुर्ग हैं। वहीं, किरण गुप्ता को रायपुर, रोशनी वासनिक कुजूर को पीएचक्यू से एसआईए रायपुर, उषा सौंधिया कोरबा से बलौदाबाजार, विवेक शर्मा को सक्ती से बिलासपुर, माया शर्मा डॉयल 112 रायपुर से बालोद, ममता शर्मा अली को दुर्ग से खैरागढ़ -छुईखदान-गंडई, सत्यकला रामटेके को जांजगीर चांपा से गौरेला- पेण्ड्रा- मरवाही, योगिताबाली खपर्डे को बलौदाबाजार से जांजगीर, प्रमिला मण्डावी सामा को रायपुर से कबीरधाम। कविता धुर्वे को बस्तर से कांकेर, भारती मरकाम को बिलासपुर से दुर्ग, लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल को बालोद से पुलिस मुयालय रायपुर और सहायक सेनानी रुस्तम सारंग को अमलेश्वर से भिलाई, नरेश नेहरू को बलरामपुर से बालोद, तेलेस्फोर मिंज को बिलासपुर से बालोद, यादराम बघेल को दुर्ग से एसटीएफ बघेरा, विकास कुजूर को बलरामपुर से कोरबा, मनोज गुप्ता को माना से कबीरधाम, नीलकिशोर अवस्थी को माना से राजभवन। डीएसपी फिंगररप्रिंट अजय साहू को रायपुर से पीएचक्यू, राकेश कुमार को पीएचक्यू से फिंगरप्रिंट शाखा पीएचक्यू, विद्या जौहर को रायपुर से पीएचक्यू फिंगरप्रिंट के साथ ही डीएसपी (रक्षित) सीमा अहिरवार को पीएचक्यू से भिलाई, अनिल कुमार को पीएचक्यू से अंबिकापुर और संजय शुक्ला को पीएचक्यू से विशेष शाखा पीएचक्यू में स्थानांतरित किया गया है। कस्टम मिलिंग के एवज में मिलने वाली रकम का भुगतान 20 रुपए प्रति क्विंटल देने पर ही बिल का भुगतान होता था. इस रकम के कलेक्शन का काम राइस मिल एसोसिएशन के पूर्व कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर करते थे. रकम देने वाले मिलर्स की सूची तैयार करने के बाद उन्हें ही कस्टम मिलिंग की रकम जारी होती थी.

महिलाओं-बच्चों के लिए खुशखबरी! यूपी के सभी जिलों में फ्री सुविधा की शुरुआत, मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर फोकस

लखनऊ  यूपी के सभी 75 जिलों में एक साथ सीएम योगी के आदेश पर एक बड़ा अभियान शुरू हुआ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर और केजीएमयू में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में बटन दबाकर 75 जिलों में एक साथ स्वास्थ्य शिविरों की शुरुआत की. खास बात यह रही कि इन शिविरों का केंद्रबिंदु महिलाएं और बच्चे है. 75 जिलों में एक साथ 20,000 से अधिक स्वास्थ्य शिविर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पूरे प्रदेश के 75 जनपदों में कुल 20,324 स्वास्थ्य शिविरों की शुरुआत की गई है. इन शिविरों में रक्तचाप, मधुमेह, रक्त जांच, एनीमिया, ओरल कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की निःशुल्क जांच की जाएगी. यह सिर्फ जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उपचार और परामर्श की सुविधाएं भी वहीं पर उपलब्ध कराई जाएंगी. कार्यक्रम के दौरान यह भी घोषणा हुई कि पूरे अभियान के अंतर्गत 507 रक्तदान शिविर लगाए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे इस अभियान का हिस्सा बनें और रक्तदान कर किसी की जान बचाने के पुण्य से जुड़ें. मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर जोर न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक योगी ने कहा कि यह अभियान खासतौर से गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व देखभाल, बच्चों के टीकाकरण और कुपोषण दूर करने पर केंद्रित है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की कोशिश है कि किसी भी गर्भवती महिला या बच्चे को समय पर इलाज और देखभाल से वंचित न रहना पड़े. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बच्चों को गोद में लेकर अन्नप्राशन संस्कार कराया, गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की और स्वयं पोषाहार वितरण भी किया. यह दृश्य कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा, जहां मुख्यमंत्री ने मातृत्व और बचपन के सम्मान को अपनी संवेदनाओं से जोड़ा. आंगनबाड़ी बहनों के लिए बड़ी सौगात मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए मानदेय वृद्धि और स्मार्ट फोन वितरण की घोषणा की. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी बहनों ने कोरोना काल से लेकर पोषण अभियान तक जिस समर्पण से काम किया है, वह काबिल-ए-तारीफ है. उनकी मेहनत और सेवा का सम्मान करते हुए सरकार ने उनके मानदेय में वृद्धि करने और हर कार्यकर्ता को स्मार्ट फोन देने का निर्णय लिया है. योगी ने कहा कि इससे न केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि समय पर मानदेय और प्रशिक्षण से वे और आत्मनिर्भर बनेंगी. महिलाओं के सशक्तिकरण पर फोकस मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, मातृ वंदना योजना, कन्या सुमंगला और नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे कदम आज के भारत को एक नई पहचान दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि यूपी सरकार ने पिछले 8 वर्षों में बेटियों की निशुल्क शिक्षा से लेकर कन्या सुमंगला योजना के तहत 25,000 रुपये का पैकेज, और सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत हर बेटी की शादी पर 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है. सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की 1.89 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों और 10 लाख महिला स्वयं-सहायता समूहों की मदद से 1 करोड़ से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. वहीं THR प्लांट्स से जुड़ी 60,000 महिलाएं प्रतिमाह लगभग 8,000 रुपये की आय अर्जित कर रही हैं. स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव सीएम योगी ने बताया कि पिछले आठ सालों में प्रदेश में 41 नए मेडिकल कॉलेज बने हैं. हाल ही में अमेठी में मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन इसका उदाहरण है. उन्होंने कहा कि शिशु मृत्यु दर 45 से घटकर 37 और मातृ मृत्यु दर 141 तक आ गई है. उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि एनीमिया के स्तर में 5.1% सुधार, स्टंटिंग में 6.6% सुधार, अल्पवजन में 7.4% सुधार, और कुपोषण में 0.6% सुधार दर्ज किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जब नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो परिणाम आने में देर नहीं लगती. इंसेफेलाइटिस पर विजय सीएम योगी ने बड़ी उपलब्धि गिनाते हुए कहा कि प्रदेश से इंसेफेलाइटिस पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. यह वही बीमारी है जिसने 40 सालों में 50,000 से अधिक मासूम बच्चों की जान ले ली थी. अब सरकार का ध्यान मलेरिया, डेंगू, कालाजार और टीबी उन्मूलन पर केंद्रित है. सामुदायिक प्रयासों को मिली सराहना मुख्यमंत्री ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिला स्वयं-सहायता समूहों की भूमिका को सराहा. उन्होंने कहा कि 10 लाख ग्रामीण और 1 लाख शहरी महिला समूहों ने लगभग 1 करोड़ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अहम योगदान दिया है. योगी ने रक्तदान शिविरों और पोषण पोटली वितरण जैसे सामुदायिक प्रयासों की भी तारीफ की और कहा कि यही सहयोग उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और सशक्त राज्य बनाएगा.

छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता: एनकाउंटर में 4 नक्सली मारे गए, BGL लॉन्चर और राइफल जब्त

रायपुर  छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर और कांकेर में अलग-अलग मुठभेड़ों में कुल 4 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें 2 महिला नक्सली शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के पास से हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की है। खुफिया जानकारी के आधार पर यह ऑपरेशन चलाया गया था। 2 महिला नक्सली भी शामिल बीजापुर में गंगालूर इलाके में 2 नक्सली मारे गए, जिनकी पहचान अभी की जा रही है। कांकेर-महाराष्ट्र सीमा पर गढ़चिरौली जिले के गट्टा जाबिया में सुरक्षाबलों ने 2 महिला नक्सलियों को मार गिराया। मारे गए नक्सलियों के शव बरामद कर लिए गए हैं। अभी और बढ़ सकती है संख्या डीआईजी कमलोचन कश्यप ने बताया कि बीजापुर के गंगालूर इलाके में मारे गए नक्सलियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़ सकती है। बीजापुर पुलिस को सूचना मिली थी कि गंगालूर इलाके के जंगलों में बड़ी संख्या में नक्सली मौजूद हैं। इसके बाद डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा बटालियन के जवान सर्चिंग अभियान पर निकले थे। घात लगाकर बैठे थे नक्सली बुधवार दोपहर करीब 3 बजे घात लगाए बैठे नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में जवानों ने भी गोलियां चलाईं। सर्चिंग में 2 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। मौके से एक 303 राइफल, एक बीजीएल लॉन्चर और विस्फोटक सामग्री भी जब्त की गई है। महिला नक्सलियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। एक दिन पहले जारी किया था प्रेस नोट एनकाउंटर के एक दिन पहले ही नक्सली लीडर अभय ने प्रेस नोट जारी कर कहा था कि सरकार के सामने सरेंडर करने और हथियार डालने को तैयार हैं। गरियाबंद जिले में 11 सितंबर को जवानों ने एनकाउंटर में 5 करोड़ के 10 इनामी नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें डेढ़ करोड़ का इनामी नक्सली मोडेम बालाकृष्ण भी शामिल था, जो ओडिशा स्टेट कमेटी का सचिव था। एडीजी एंटी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा ने बताया था कि नए जगह पांव पसारने से पहले नक्सलियों का खात्मा कर दिया गया। बड़े नक्सल नेटवर्क को तोड़ा गया। जवानों ने जंगल में घेरकर नक्सलियों को मारा। सभी इनामी नक्सली थे।