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सैंपल रजिस्ट्रेशन रिपोर्ट 2023: मध्य प्रदेश में हर दूसरा युवक अविवाहित, बिहार टॉप पर

भोपाल  मध्य प्रदेश में अविवाहित रहने वाले युवक-युवतियों का आंकड़ा चौंकाने वाला है. प्रदेश में कुल 50.9 फीसदी महिलाएं पुरुष ऐसे हैं, जिन्होंने शादी ही नहीं की. इसमें पुरुषों का आंकड़ा 54.7 फीसदी है, जबकि अविवाहित रहने वाली महिलाएं 46.8 फीसदी हैं. चौंकाने वाला यह आंकड़ा सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2023 के हैं. बता दें कि भारत में जन्म और मृत्यु से संबंधित डाटा जुटाने के लिए 1969-70 में सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम यानी एसआरएस की शुरूआत हुई थी, ताकि सरकार को नीतियां बनाने में मदद मिल सके. मध्य प्रदेश में इस सर्वे के लिए 4 लाख लोगों को शामिल किया गया था. देश की कुल आबादी के 50.5 फीसदी लोग अविवाहित सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक देश की कुल आबादी के 50.5 फीसदी लोगों ने कभी विवाह ही नहीं किया. इसमें महिलाओं का प्रतिशत 45.3 फीसदी जबकि पुरुषों का प्रतिशत 55.4 फीसदी है. इसके अलावा 3.6 फीसदी विधवा, तलाकशुदा हैं. देश में बिहार में सबसे ज्यादा अविवाहित सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक देश में सबसे ज्यादा बिहार राज्य में 58.3 फीसदी अविवाहित हैं. जम्मू-कश्मीर में अविवाहितों का प्रतिशत 57.5 फीसदी है जबकि तमिलनाड़ु में सबसे कम 41.3 फीसदी अविवाहित महिला-पुरुष हैं. 2022 के मुकाबले 2023 मध्य प्रदेश में घटे अविवाहित सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में विवाहितों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. साल 2022 में प्रदेश में औसतन अविवाहितों का प्रतिशत 51.4 था, जो 2023 में घटकर 50.9 फीसदी आ गया. तलाकशुदा महिलाओं की संख्या बढ़ी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में 45.2 फीसदी पुरुष शादीशुदा हैं, जबकि महिलाओं का प्रतिशत 42.9 फीसदी है. हालांकि मध्य प्रदेश में तलाकशुदा, विधवा और अलग होने वालों का प्रतिशत भी बढ़ा है. साल 2022 में ऐसे लोगों का कुल औसत 3.6 फीसदी था, जो 2023 में बढ़कर 3.9 फीसदी पहुंच गया है. इसमें महिलाओं का आंकड़ा पुरुषों से कमोवेश दोगुना है. 100 में से 5.6 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो तलाक ले चुकी हैं या अलग रह रही हैं. 16.8 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल के पहले मध्य प्रदेश के शहरों में लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ रही है. मध्य प्रदेश में 18 साल के होने के पहले ही 16.8 फीसदी युवतियों की शादी कर दी जाती है. मध्य प्रदेश में कम उम्र में लड़कियों की शादी करने का आंकड़ा बढ़ा है. 18 से 20 साल की उम्र के दौरान 19.2 फीसदी लड़कियों की शादी हो जाती है. मध्य प्रदेश में 18 से 20 साल के बीच ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में लड़कियों का विवाह का परसेंटेज बढ़ा है. ग्रामीण इलाकों में 19.2 फीसदी लड़कियों की शादी हो जाती है, जबकि शहरी इलाकों में 19.5 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 से 20 साल के बीच हो रही है. शहरों में शादी की औसत उम्र 23.9 साल मध्य प्रदेश में औसत शादी की उम्र 22.1 साल है जबकि शहरी इलाकों में यह प्रतिशत 23.9 साल है. मध्य प्रदेश में 62.5 फीसदी लड़कियों की शादी 21 साल से ज्यादा उम्र में हो जाती है. यह प्रतिशत बढ़ रहा है. शहरी के अलावा ग्रामीण इलाकों में भी शादी की उम्र बढ़ रही है. 21 साल से ज्यादा उम्र में लड़कियों की शादी का परसेंटेज भी बढ़ा है. 100 में से 23.8 फीसदी लड़कियों की शादी 21 साल के बाद ही हो रही है जो देश के औसत 24.4 फीसदी से भी ज्यादा है.

एमपी में डिजिटल जनगणना की तैयारी, 3 जिलों में प्री टेस्ट और ऐप लॉन्च जल्द

 भोपाल  पिछल कई सालों से देश में जनगणना को लेकर काफी चर्चाएं चल रही हैं. लेकिन अब इसकी पूरी तरह से तैयारियां शुरू हो गई है. इस बार साल 2026-27 में देश में पहली बार डिजिटल जनगणना होगी. इसके लिए जनगणना निदेशालय की तरफ से एक ऐप को लॉन्च किया जाएगा, जो कि एंड्राइड-आईफोन दोनों में उपयोग किया जा सकता है. इस ऐप के माध्यम से हर घर का मुखिया ही अपने घर-परिवार की जानकारी खुद भरेगा. इसके बाद जनगणना अधिकारी, घर-घर जाकर पूरी जानकारी को क्रॉस चेक करेगा, फिर उसे डिजिटल फॉर्म पर डाटा को अपलोड किया जाएगा.  भारत 2027 में अपनी अब तक की सबसे आधुनिक और डिजिटल जनगणना आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। यह पहली बार होगा जब जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल होगी, जिसमें लगभग 34 लाख गणनाकर्ता अपने स्वयं के स्मार्टफोन और मोबाइल ऐप का उपयोग कर आंकड़े एकत्र करेंगे। यह पहल न केवल समयबद्ध और सटीक डेटा एकत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि तकनीक-संचालित प्रशासन की नई मिसाल भी होगी। मोबाइल ऐप्स और स्व-गणना की सुविधा गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (RGI) द्वारा तैयार की जा रही मोबाइल एप्लिकेशन, एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी और इसे अंग्रेजी सहित कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपयोग किया जा सकेगा। यदि किसी कारणवश डेटा कागज़ पर एकत्र किया जाता है, तो उसे बाद में एक वेब पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा जिससे अलग से स्कैनिंग या डेटा एंट्री की आवश्यकता नहीं होगी। इस बार नागरिकों को स्वयं भी वेब पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना (self-enumeration) का विकल्प मिलेगा, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। जनगणना से पहले प्री टेस्ट मिली जानकारी के मुताबिक, जनगणना शुरू होने से पहले देशभर में प्री टेस्ट कराया जाएगा. इनमें मध्य प्रदेश के तीन जिलों को चुना गया है. जहां पर जनगणना से पहले प्री टेस्ट होगा, इनमें मध्य प्रदेश के ग्वालियर, रतलाम और सिवनी जिले शामिल हैं. यहां पर अक्टूबर से नवंबर महीने के बीच में 15 दिन का अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान के माध्यम से जनगणना और घरों की गणना कि जाएगी. इसका सीधा मकसद यह है कि गड़बड़ी रोकने के लिए किया जाएगा.  दो चरणों में होगा आयोजन जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी:     हाउस-लिस्टिंग ऑपरेशन (अप्रैल से सितंबर 2026): इसमें आवास की स्थिति, सुविधाएं और घरों के पास उपलब्ध संपत्तियों से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।     जनसंख्या गणना (फरवरी 2027): भारत के अधिकांश हिस्सों में फरवरी 2027 में यह चरण आरंभ होगा, जबकि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में यह सितंबर 2026 में होगा। पहली बार होगा जाति-आधारित डेटा संग्रहण इस जनगणना में एक और उल्लेखनीय पहल की जा रही है — घर के सदस्यों की जातियों का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। यह कदम सामाजिक-आर्थिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े प्रदान करेगा, जो दशकों से लंबित मांग रही है। खबर से जुड़े जीके तथ्य     2027 की जनगणना भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी।     34 लाख गणनाकर्ता अपने स्मार्टफोन से मोबाइल ऐप के माध्यम से आंकड़े एकत्र करेंगे।     पहली बार सभी भवनों का जियो-टैगिंग किया जाएगा, जिसमें जीआईएस मैप पर भवनों को उनके हाउस-लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLBs) के साथ जोड़ दिया जाएगा।     RGI ने ₹14,618.95 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। पारदर्शिता और निगरानी के लिए वेबसाइट पूरे अभियान की रीयल-टाइम निगरानी और प्रबंधन के लिए एक समर्पित वेबसाइट भी तैयार की जा रही है। इससे प्रत्येक स्तर पर कार्य की प्रगति का निरीक्षण संभव होगा और पारदर्शिता बनी रहेगी। जनगणना 2027 भारत की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में डिजिटल बदलाव का प्रतीक बनने जा रही है। न केवल आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि नीति निर्माण और योजना निर्धारण के लिए समयबद्ध और व्यापक जानकारी भी उपलब्ध हो सकेगी। यह डिजिटल युग में भारत के प्रशासनिक दृष्टिकोण का एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। ऐसे की जाएगी जनगणना मध्य प्रदेश जनगणना निदेशालय की निदेशक भावना वालिम्बे ने जानकारी देते हुए कहा कि जनगणना के लिए एप के माध्यम से हर परिवार के सदस्यों की जानकारी अपलोड करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए प्रश्नावली भी तैयारी की जा रही है, जिसमें सी सदस्यों का नाम, पारिवारिक स्थिति, घर संपत्ति का ब्योरा और रोजगार जैसी जानकारी शामिल की जाएगी. इसके अलवा, इसमें कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए क्रॉस चेक करने के लिए अधिकारी घर-घर जाकर जानकारी की जांच करेंगे. इसके साथ-साथ फील्ड में आने वाली चुनौतियों की रिपोर्ट प्रदेश का जनगणना निदेशालय तैयार करेगा. इसके बाद यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी. मंत्रालय इस आधार पर फाइनल जनगणना शीट तैयार की जाएगी. 

बिहार की राजनीति में बड़े नेताओं का ताबड़तोड़ दौरा, क्या है पार्टी की रणनीति?

पटना   बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर अब किसी भी वक्त चुनाव आयोग तारीखों का ऐलान कर सकता है. इसे देखते हुए बीजेपी पूरी ताकत झोंक रही है. पार्टी हर हाल में इस चुनाव में जीत दर्ज करने में जुट गई है. इसी कड़ी में 13 सितंबर को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, 15 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 17 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बिहार का दौरा करेंगे. इन दौरों को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं. पीएम मोदी के दौरे की तैयारियों का जायजा लेने सम्राट चौधरी 10 सितंबर को पूर्णिया पहुंचे थे. माना जा रहा है कि इसी सप्ताह एनडीए में सीट बंटवारे का भी अंतिम निर्णय हो सकता है. सीएम नीतीश से मुलाकात कर सकते हैं बीजेपी प्रेसिडेंट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 13 सितंबर को पटना पहुंचेंगे. यहां वे बिहार बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में हिस्सा लेंगे. इस बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों और रणनीति का गहराई से आकलन किया जाएगा. इस दौरे पर उनकी मुलाकात सीएम नीतीश से भी हो सकती है. दोनों नेताओं के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम रूपरेखा पर चर्चा होने की संभावना है. नड्डा का यह दौरा बीजेपी और जेडीयू के बीच गठबंधन की मजबूती को और पुख्ता करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है. पीएम मोदी का दौरा बिहार बीजेपी के लिए अहम नड्डा के दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितंबर को बिहार आएंगे. यह चुनावी साल में उनका सातवां दौरा होगा. पीएम मोदी अपने हर दौरे पर बिहार को नई परियोजनाओं की सौगात देते रहे हैं और इस बार भी उनके द्वारा करोड़ों रुपये की योजनाओं का ऐलान किए जाने की संभावना है. मोदी की मौजूदगी एनडीए कार्यकर्ताओं में जोश भरने और चुनावी माहौल को बीजेपी के पक्ष में मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगी.

दिवाली से पहले लाड़ली बहना योजना से हटेंगी अपात्र महिलाएं, सरकार करेगी बड़ा संशोधन

भोपाल  सरकार सबसे पहले अयोग्य लाभार्थियों से खुद अपना नाम सूची से वापस लेने की अपील करेगी। इसके बाद विभागीय टीमें जांच करेंगी और अपात्र नाम हटा दिए जाएंगे। सरकार का मानना है कि योजना में कुछ ऐसे नाम शामिल हो गए हैं, जिन्हें लाभ नहीं मिलना चाहिए था। सरकार का उद्देश्य है कि योजना का फायदा केवल पात्र/ योग्य महिलाओं तक पहुंचे। राशि बढ़ाकर 1500 रुपए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जून 2024 में घोषणा की थी कि दिवाली से लाडली बहनों को 1500 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे। भाई दूज के बाद महिलाओं को यह बढ़ी हुई राशि दी जाएगी। वर्तमान लाड़ली बहनों की संख्या से गणना करने पर सरकार पर करीब 3100 करोड़ रुपए प्रति माह का भार बढ़  जाएगा। योजना की शुरुआत में योजना के तहत 1000 रुपए दिए जाते थे। अक्टूबर 2023 से राशि 1250 रुपए कर दी गई थी और अब इसे 1500 रुपए किया जा रहा है। सरकार का वादा है कि आगे चलकर इस राशि को बढ़ाकर 3000 रुपए प्रति माह किया जाएगा। 1.26 करोड़ महिलाएं लाभान्वित फिलहाल योजना में लगभग 1.26 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। यह प्रदेश की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजना मानी जा रही है। सरकार हर महीने करीब 1550 करोड़ रुपए इस पर खर्च कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी योजना ने राज्य में बीजेपी सरकार की वापसी में अहम भूमिका निभाई और इसके बाद कई राज्यों ने भी इसी तर्ज पर योजनाएं शुरू कीं। 1.63 लाख अपात्रों के नाम सूची से हटाए  हाल ही में प्रशासन ने जांच के दौरान 1.63 लाख लाभार्थियों के नाम सूची से हटाए हैं। पाया गया कि कई महिलाओं ने समग्र आईडी में गलत जानकारी देकर योजना का अनुचित लाभ लिया था। सरकार अब यह सुनिश्चित कर रही है कि केवल योग्य बहनें ही योजना का लाभ प्राप्त करें। महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि योजना के लिए शर्ते और नियम बने हैं, जिसके अनुसार कार्रवाई की जाती है। अपात्रों के नाम योजना से हटाए भी जाते हैं।  यह है पात्रता की शर्तें – लाभार्थी महिला और उसके पूरे परिवार की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। – परिवार का कोई भी सदस्य आयकरदाता नहीं होना चाहिए। – महिला या उसके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में नियमित या संविदा पद पर कार्यरत न हो, न ही किसी को पेंशन मिल रही हो। – परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) नहीं होना चाहिए। – परिवार की कुल जमीन 5 एकड़ से अधिक नहीं होनी चाहिए। – यदि महिला को या उसके परिवार को किसी अन्य योजना से हर महीने 1000 रुपये से अधिक सहायता मिल रही है, तो वह पात्र नहीं होगी। – परिवार में कोई भी सदस्य सांसद, विधायक, निर्वाचित जनप्रतिनिधि या मनोनीत पदाधिकारी (पंचायत वार्ड पंच व उपसरपंच को छोड़कर) नहीं होना चाहिए। – महिला या उसके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मंडल या उपक्रम में अध्यक्ष/सदस्य/संचालक के रूप में चयनित या मनोनीत नहीं होना चाहिए। 

जापान की नेवी ने रचा इतिहास! इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन 8000 KM की स्पीड से करती है वार

टोक्यो  जापान ने अपनी नेवी के जहाज से पहली बार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन फायरिंग का सफल टेस्ट कर इतिहास रच दिया है. समुद्र में तैनात टारगेट शिप पर दागे गए इस ‘शॉक वेपन’ ने साफ कर दिया कि परंपरागत तोप-गोलों का जमाना अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है. जापान के रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण, तकनीक और लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने खुलासा किया कि जून से जुलाई के बीच टेस्ट शिप JS Asuka से रेलगन के ट्रायल किए गए. चार तस्वीरें जारी करते हुए ATLA ने लिखा, ‘यह पहली बार है जब किसी वारशिप से रेलगन का टेस्ट किया गया और वह भी सीधे एक असली जहाज पर.’ क्या है रेलगन? रेलगन बारूद नहीं, बल्कि बिजली की ताकत से गोला दागती है. प्रोजेक्टाइल को इतनी गति मिलती है कि वह परंपरागत तोपों से कहीं अधिक दूरी और शक्ति के साथ टारगेट भेदता है. जापान की यह रेलगन करीब Mach 6.5 की स्पीड यानी आवाज की रफ्तार से साढ़े छह गुना (8,000 किलोमीटर प्रति घंटा) तक प्रोजेक्टाइल दाग सकती है. खास बात यह कि 120 लगातार फायरिंग के बाद भी बैरल की स्पीड में गिरावट दर्ज नहीं हुई. चीन और अमेरिका भी इस टेक पर लगे चीन भी इसी तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है और उसके पास सतत फायरिंग के सफल टेस्ट की खबरें आई हैं, लेकिन वह इसे अब तक तैनात नहीं कर पाया है. अमेरिका ने भी एक समय रेलगन प्रोजेक्ट पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन 2021 में तकनीकी चुनौतियों और लागत के चलते इसे बंद कर दिया. वहीं जापान अब इस हथियार को वास्तविक तैनाती की दिशा में सबसे आगे निकल आया है. क्यों इतनी खास है यह तकनीक? डिफेंस एक्सपर्ट मसाशी मुरानो ने जापान टाइम्स को बताया कि हाई-स्पीड एंटी-शिप मिसाइलों को परंपरागत मिसाइलों से इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है. रेलगन इस चुनौती का जवाब हो सकता है. इसके दागे प्रोजेक्टाइल न सिर्फ बेहद तेज होते हैं, बल्कि पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में सस्ते भी हैं. जहां एयर डिफेंस मिसाइल की एक शॉट की कीमत करोड़ों-करोड़ होती है, वहीं रेलगन अपेक्षाकृत किफायती है. इसके अलावा, रेलगन से एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए ‘एयरबर्स्ट म्युनिशन’ भी विकसित किए जा रहे हैं, जो हवा में ही फटकर घातक टुकड़े छोड़ते हैं. यह मिसाइलों और ड्रोन जैसे खतरों से निपटने में बेहद कारगर हो सकता है. जापान रेलगन को सिर्फ नौसैनिक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहता. योजना है कि इसे जमीन पर भी तैनात किया जाए, ताकि दुश्मन के आर्टिलरी यूनिट्स को निशाना बनाया जा सके और तटीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके. ATLA अब प्रोजेक्टाइल की उड़ान स्थिरता, फायर-कंट्रोल सिस्टम और सतत फायरिंग क्षमता को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. हालांकि, अभी तक इसकी अधिकतम रेंज और रैपिड फायर की क्षमता उजागर नहीं की गई है.

नए सभापति सीपी राधाकृष्णन: शपथ ग्रहण कर किया कार्यभार ग्रहण

नई दिल्ली सीपी राधाकृष्णन ने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सीपी राधाकृष्णन को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके बाद सीपी राधाकृष्णन ने राज्यसभा के सभापति का कार्यभार संभाला। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने शुक्रवार को औपचारिक रूप से राज्यसभा के सभापति का पदभार ग्रहण किया। साथ ही एक्स पर सीपी राधाकृष्णन के पदभार ग्रहण करते हुए तस्वीरें भी शेयर की गई हैं। इससे पहले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राजघाट पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की तथा राष्ट्रपिता और उनके सत्य एवं अहिंसा के शाश्वत आदर्शों का सम्मान किया। उन्होंने सदैव अटल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। राधाकृष्णन ने दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय के स्मारक पर भी पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने किसान घाट पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनको नमन किया। साथ ही उन्होंने संसद भवन स्थित प्रेरणा स्थल पर महान विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने संसद भवन परिसर में एक पौधा भी लगाया और देश की समृद्ध विरासत एवं एक सतत भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति के रूप में सीपी राधाकृष्णन ने जगदीप धनखड़ की जगह ली है। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उपराष्ट्रपति चुने जाने से पहले राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर कार्यरत थे। सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद रहे।

नशामुक्ति केंद्रों में अब होगी सख्त जांच! सामाजिक न्याय मंत्री कुशवाहा ने दिए निर्देश

सामाजिक न्याय मंत्री कुशवाहा ने नशामुक्ति केंद्रों की जाँच के दिये निर्देश राज्य स्तरीय कार्यक्रम कर दिव्यांगों की प्रतिभा को मंच देने के निर्देश भोपाल सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने प्रदेश में संचालित समस्त शासकीय नशा मुक्ति केंद्रों के निरीक्षण के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित कर केंद्रों का आकस्मिक निरीक्षण कराया जाए। उन्होंने यह निर्देश शुक्रवार को मंत्रालय में विभागीय समीक्षा बैठक में दिये। इसके साथ ही दिव्यांगों के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर मेडिकल बोर्ड के शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए। मंत्री कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "विकसित भारत का मंत्र-भारत हो नशे से स्वतंत्र" देशव्यापी कार्यक्रम के अंतर्गत मध्यप्रदेश में नशा मुक्ति के क्षेत्र में प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। नशा मुक्त समाज के लिए सामाजिक भागीदारी के साथ-साथ विभाग द्वारा जो कार्यक्रम और योजनाएं संचालित की जा रही है, उनका प्रभावी क्रियान्वयन मैदानी स्तर पर किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नशे से पीड़ित लोगों के लिए प्रदेश में 13 नशा मुक्ति-सह-पुनर्वास केन्द्र, सात आउट रिच एंड ड्रॉप इन सेंटर, तीन कम्युनिटी बेस्ड पियर-लेड इन्टरवेशन सेंटर तथा 8 जिला मुख्यालय पर डीडीआरसी संचालित किए जा रहे हैं। इन सभी संस्थानों के सुव्यवस्थित संचालन की नियमित समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन के लिए चलाए जा रहे "सुगम भारत अभियान" की भी नियमित समीक्षा की जाए। मंत्री कुशवाहा ने कहा कि दिव्यांगजन को प्रोत्साहित करने के लिए विभाग द्वारा राज्य स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिसमें प्रदेश भर के दिव्यांगजन जो गायन, वादन, नृत्य, अभिनय और खेलकूद में रुचि रखते हैं, उनको प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त हो सके। इसके लिए विभाग कार्यक्रम की रूपरेखा बनाकर प्रस्तुत करे। प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर ने बताया कि प्रदेश में नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत सामाजिक संगठन, शैक्षणिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ सामाजिक न्याय विभाग द्वारा लगातार जन-जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गांधी जयंती 2 अक्टूबर को विशेष ग्रामसभाओं का आयोजन भी कराया जाएगा। शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचने के लिए छात्रावास स्तर पर नशा मुक्ति समितियों का गठन किया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। बैठक में प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वायंगणकर सहित अन्य विभाग की अधिकारी उपस्थित थे।

भोजपुर-रोहतास के बीच सफर होगा और आसान, आरा-सासाराम रूट पर शुरू हुई डबल रेल लाइन

रोहतास  डेढ़ दशक से लंबित आरा-सासाराम रेललाइन के दोहरीकरण का रास्ता अब साफ हो गया है. रेल मंत्रालय ने पूर्व मध्य रेल क्षेत्राधिकार में 12 परियोजनाओं के फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) को मंजूरी दे दी है. इसमें 97 किलोमीटर लंबी आरा-सासाराम रेललाइन का दोहरीकरण शामिल है, इसमें लिए लगभग 232.8 लाख रुपये की लागत का सर्वे किया जाएगा. साथ ही इस रेलखंड को डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) से जोड़ने की योजना को भी मंजूरी मिल गई है.  इस दोहरीकरण से सासाराम-आरा मार्ग पर ट्रेनों का संचालन बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा. फिलहाल यह लाइन सिंगल ट्रैक पर चल रही है जिसके कारण ट्रेनों को विपरीत दिशा से आने पर स्टेशन पर रुकना पड़ता है. इससे यात्रियों का समय बर्बाद होता है और ट्रेनों की आवाजाही भी धीमी हो जाती है. दोहरीकरण के बाद ट्रेनें समय पर चलेंगी और मार्ग पर ट्रेनों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी.  डबल होगा रेलवे लाइन रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना भोजपुर और रोहतास जिलों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी. आरा-सासाराम मार्ग दोनों जिलों के व्यापार और यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है. दोहरीकरण के पूरा होने से मालगाड़ियों की आवाजाही भी सुगम होगी, जिससे स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.  12 परियोजनाओं को हरी झंडी पूर्व मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि बिहार में रेल अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कुल 1051 लाख रुपये से अधिक की लागत वाली 12 परियोजनाओं के फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी दी गई है. आरा-सासाराम रेलखंड का दोहरीकरण इनमें प्रमुख परियोजना है. 2009 में आरा तक हुआ था विस्तार सासाराम-आरा ब्रॉड गेज रेललाइन का निर्माण चरणबद्ध ढंग से हुआ. 2007 में सबसे पहले सासाराम से बिक्रमगंज तक ट्रेन सेवा शुरू हुई. इसके एक साल बाद 2008 में इसे पीरो तक बढ़ाया गया और 2009 में आरा तक रेललाइन पूरी तरह चालू हुई. तब से यह रेलखंड सिंगल ट्रैक पर ही संचालित हो रहा है. फाइनल लोकेशन सर्वे के दौरान मार्ग का सटीक निर्धारण, भू-तकनीकी अध्ययन, मिट्टी और क्षेत्र की संरचना की जांच, लागत का अनुमान और नक्शों की तैयारी की जाती है. यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि निर्माण सुरक्षित और स्थायी हो.  व्यापारिक गतिविधि होगी तेज रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि दोहरीकरण के पूरा होने से न केवल यात्रियों को तेज और सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा, बल्कि डीएफसी से जुड़ने के बाद मालगाड़ियों की आवाजाही भी आसान होगी. इस परियोजना से भोजपुर और रोहतास जिलों के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी मजबूती मिलेगी. 

345 करोड़ के विकास कार्यों के साथ झाबुआ चमकेगा, CM मोहन यादव ने किया लोकार्पण

भोपाल/झाबुआ मध्यप्रदेश में 12 सितंबर का दिन महिलाओं के नाम रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने झाबुआ जिले के पेटलावद में प्रदेश की 1.26 करोड़ से अधिक लाड़ली बहनों के खाते में 1541 करोड़ से ज्यादा रुपये ट्रांसफर किए। यह राशिलाड़ली बहना योजना की 28वीं किश्त थी। इसके अलावा प्रदेश के मुखिया ने 53.48 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राहियों को 320.89 करोड़ रुपये, 31 लाख से ज्यादा बहनों को एलपीजी सिलेंडर रीफिलिंग के लिए 48 करोड़ रुपये, बीपीएल परिवारों के दिव्यांग हितग्राहियों को कस्टमाइज्ड व्हीकल दिए। उन्होंने पेटलावद में 345.34 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने विभिन्न विभागों की थीम पर आधारित प्रदर्शनियों का अवलोकन किया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पारंपरिक झूलड़ी-पगड़ी पहनाकर और तीर कमान भेंटकर भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने कांग्रेस पर भी जमकर प्रहार किया।   कांग्रेसियों के पेट में मरोड़ें उठने लगीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि झाबुआ खेती और सब्जी उत्पादन में नई इबारत लिख रहा है। यहां का टमाटर देश के साथ-साथ विदेशों तक जाता है। लाड़ली बहनों को आज एक बार फिर सिंगल क्लिक से 1250 रुपए की सौगात मिली है। यह रक्षाबंधन के आनंद की तरह है। कांग्रेस ने महिलाओं को कभी एक रुपया भी नहीं दिया। कांग्रेसियों को शर्म आनी चाहिए, उन्हें डूब मरना चाहिए। हमारी सरकार ने सावन के महीने में जब लाड़ली बहनों को 1500 रुपये दिए तो कांग्रेसियों के पेट में मरोड़ें उठने लगीं। उनको नींद नहीं आ रही थी, उनका पूरा ध्यान वोट बैंक पर था। कांग्रेसियों ने बेशर्म होकर कहा कि बहनों को पैसे दो तो शराब पी जाती हैं। बहनों को इस बात का जवाब कांग्रेसियों को देना होगा। बहनें पूरे परिवार को देखकर चलती हैं। वे बच्चों की दवाई से लेकर हर चीज में पैसे का सदुपयोग करती हैं। कांग्रेसी जो मन में आ रहा है बेशर्मी से बोल रहे हैं। पूरा प्रदेश इन्हें माफ नहीं करेगा। इस राज्य के लोग बहनों का अपमान कभी बर्दाश्त करने वाले नहीं हैं। कांग्रेस ने कभी फूटी कौड़ी नहीं दी। उन्होंने कभी बहनों की चिंता नहीं की। जब हम बहनों के लिए योजना लेकर आए तो कांग्रेसी सवाल-जवाब करने लगे। कांग्रेसी देख लें, योजना शुरू भी हुई और चल भी रही है। इस योजना में अभी तक 41 हजार करोड़ की राशि दी जा चुकी है। कांग्रेसियों सुन लो बहनों के लिए हमारे खजाने में कोई कमी नहीं है। हम भविष्य में बहनों को 3 हजार रुपये देने के लिए वचनबद्ध हैं। झाबुआ के लोगों को बाहर जाने की नहीं होगी जरूरत सीएम डॉ. यादव ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में यहां मौजूद कपास की मिलें बंद होती गईं, कपास के खेत घटते गए। परिणाम यह हुआ कि प्रदेश में कपड़ा बनना करीब-करीब बंद हो गया। अब झाबुआ के लोगों को बाहर जाने की जरूरत नहीं है। इस पूरे क्षेत्र में रोजगार के बड़े पैमाने पर अवसर मिलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशवासियों को जीएसटी से छूट मिली है। वे भारत को आत्मनिर्भर बनाते हुए दुनिया के सामने चट्टान की तरह खड़े हैं। दुनिया के हर मंच पर प्रधानमंत्री मोदी के पहुंचने से ही सबेरा आता है। दुनिया भारत की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही है। भारत सरकार देश के 85 करोड़ जरूरतमंदों को नि:शुल्क राशन वितरित कर रही है। प्रधानमंत्री उज्जवला कनेक्शन के माध्यम से बहनों को 48 करोड़ रुपए की सहायता राशि भेजी गई है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का सुरक्षा संदेश, हेलमेट पहनकर छात्रों को किया जागरूक

हेलमेट पहनकर स्टूडेंट्स को CM डॉ. यादव ने दिया सुरक्षा का पाठ, रोड सेफ्टी पर दिया जोर स्कूल के टॉपर्स स्कूटी चलाते वक्त यातायात सुरक्षा नियमों का रखें ध्यान : स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री सिंह भोपाल स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने आहवान किया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के स्कूटी वितरण से लाभान्वित टॉपर्स स्कूटी चलाते वक्त यातायात सुरक्षा नियमों का सावधानीपूर्वक पालन करें। उन्होंने कहा कि 11 सितम्बर को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों को स्कूटी वितरण कार्यक्रम में हेलमेट पहन कर स्कूटी पर सवारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हेलमेट पहन कर विद्यार्थी को यह संदेश भी दिया कि वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना जरूरी है। यातायात नियमों का रखे ख्याल स्कूल एवं परिवहन मंत्री सिंह ने हितग्राही विद्यार्थियों से सुरक्षा के लिये यातायात नियमों का पालन करने का आहवान किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि स्कूटी चलाते वक्त हेलमेट अनिवार्य रूप से पहने और पीछे बैठने वालो को भी दोनों हेलमेट पहनें के लिये कहें। ट्रैफिक सिग्नल, जेब्रा क्रॉसिंग और स्टॉप लाइन का पालन जरूर करें। वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करें, मोबाइल का उपयोग दुर्घटना का कारण बनता है। सड़‍क पर मुड़ने से पहले इंडिकेटर अवश्य दें और हॉर्न का अनावश्यक प्रयोग न करें। गलत दिशा में न चलें और ओवरटेक से बचें। वाहन की नियमित जाँच करें। ब्रेकलाइट, टायर और अन्य उपकरण सही हालत में रखें। दो पहिया वाहनों पर दो से ज्यादा लोग न बैठें। परिवहन मंत्री ने बताया कि परिवहन विभाग ने 16 वर्ष से 18 वर्ष तक की उम्र में 50 सीसी से कम इंजन वाली गेयरलेस वाहन के लिये, 16 साल की उम्र में लर्नर लायसेंस ओर 18 साल पूरे होने पर गियर वाले लाइट मोटर व्हीकल के लिये स्थायी ड्रायविंग लायसेंस दिये जाने का प्रावधान है। लर्नर लायसेंस जारी होने के 30 दिन बाद 180 दिन के भीतर ड्रायविंग टेस्ट देना अनिवार्य किया गया है। पिछले 3 वर्षों में 23 हजार 454 टॉपर्स को दी गई स्कूटी प्रदेश में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहन देने के लिये राज्य सरकार ने 3 वर्ष पहले नि:शुल्क स्कूटी प्रदाय योजना शुरू की थी। इस योजना में अब तक सरकारी हायर सेकेण्डरी स्कूल में 23 हजार 454 टॉपर विद्यार्थियों को 246 करोड़ 58 लाख रूपये की राशि व्यय कर स्कूटी प्रदान की गई है। टॉपर्स द्वारा चयन की गई पेट्रोल स्कूटी पर 90 हजार और इलेक्ट्रिकल व्हीकल चयन करने पर एक लाख 20 हजार रूपये की राशि उनके बैंक खातों में अंतरित की गई है। इस राशि में रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और हेलमेट की सुविधा भी शामिल है।