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लगातार बारिश से भोपाल का बड़ा तालाब लबालब, भदभदा डैम का गेट महापौर ने पूजा-अर्चना कर खोला

भोपाल  राजधानी भोपाल में सुबह से ही बारिश का दौर चल रहा है। कभी तेज कभी हल्की बारिश हो रही है। भोपाल में भदभदा डैम के गेट सीजन में पहली बार खुले हैं। शनिवार सुबह 10.35 बजे महापौर मालती राय और निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंसी ने पूजा की, इसके बाद बांध के दो गेट खोल दिए गए। पानी निकासी के बाद इनमें से एक गेट बंद कर दिया गया है। कुल 11 में से एक गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव होने से मध्यप्रदेश में एक बार फिर बाढ़ जैसे हालात हैं। रायसेन में हलाली बांध के 3 गेट 2-2 मीटर तक खोले गए हैं। इनसे 451.89 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है। पुलिस बल तैनात डैम के पास सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात किया गया है। कंट्रोल रूम से अतिरिक्त जवान भी बुलाए गए हैं और आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद लोग परिवार सहित डैम के गेट खुलते देखने पहुंच रहे हैं। दरअसल, कैचमेंट एरिया और सीहोर जिले में बारिश होने से बड़ा तालाब का जलस्तर 1666.50 फीट तक पहुंच गया। इसके बाद डैम प्रबंधन ने गेट खोलने का निर्णय लिया। गेट से निकला पानी सीधे कलियासोत डैम में पहुंच रहा है, जिससे वहां भी गेट खोले जाने की संभावना है। वहीं, केरवा डैम में भी पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को इंदौर के अम्मार नगर, खजराना में नाले किनारे बना तीन मंजिला मकान ढह गया। राजगढ़, नीमच और उज्जैन में कारें पानी में बह गईं। एक युवक लापता है। वहीं, इंदिरा सागर समेत 5 डैम के गेट खोलने पड़े। रतलाम में खाचरौद रोड पर कुछ परिवार बच्चों के साथ पानी के बीच फंस गए थे। एसडीईआरएफ की टीम ने देर रात सभी लोगों को रेस्क्यू किया। 12 जिलों में साढ़े 4 इंच तक बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक, शनिवार को इंदौर में हल्की बारिश का दौर रहेगा जबकि उज्जैन समेत 12 जिलों में भारी बारिश हो सकती है। जिन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है, उनमें उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, झाबुआ, धार, शाजापुर, राजगढ़, गुना और श्योपुर शामिल हैं। यहां अगले 24 घंटे में ढाई से साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। जाने कब खुलता है डैम का गेट जानकारी के लिए बतादें कि कोलांस नदी जब उफान पर रहती है तो बड़ा तालाब में पानी जमा होता है। जब बड़ा तालाब पूरा भर जाता है तो भदभदा डैम के गेट खोले जाते हैं। यह पानी सीधे कलियासोत डैम में पहुंचता है। जिससे इस डैम का लेवल भी बढ़ जाता है और फिर इसके गेट भी खुल जाते हैं। पिछले साल जुलाई-अगस्त में ही ये सभी डैम लबालब भर गए थे, लेकिन इस बार अगस्त सूखा रहा। यही कारण है कि भदभदा, केरवा, कलियासोत और कोलार डैम के गेट अब तक नहीं खोले जा सके थे। राजधानी के डेमों की वर्तमान स्थिति कोलार डैम: इसका वाटर लेवल 1516.40 फीट है। अभी इसमें 1506.82 फीट पानी जमा है। इस हिसाब से यह काफी खाली है।  केरवा डैम: कुल 1673 फीट वाले केरवा डैम में अब तक करीब 1666.60 फीट पानी आ चुका है। तेज बारिश होने के बाद डैम में पानी का लेवल बढ़ जाएगा। कलियासोत डैम: डैम का अभी वाटर लेवल लगभग 1649.67 फीट है। इसकी कुल जलभराव क्षमता 1659.02 फीट है। इसके चलते डैम अभी भी करीब 9 फीट खाली है।  

मुख्यमंत्री साय ने किया बायंग एनीकट कम काजवे का भूमिपूजन, 38 करोड़ की लागत से सिंचाई और आवागमन सुविधा होगी बेहतर

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ जिले के ग्राम बायंग (कछार) में 38 करोड़ रुपये की लागत से मांड नदी बायंग एनीकट कम काजवे निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया। इससे लाभान्वित गांवों में भू-जल संवर्द्धन होगा तथा आवागमन की सुविधा भी बढ़ेगी। एनीकट कम काजवे निर्माण से 100 हेक्टेयर क्षेत्र में सोलर संयंत्र और पाइपलाइन के जरिए सिंचाई सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री साय ने लोकार्पण कार्यक्रम में ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्र में जब भी मैं आता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे अपने ही परिवार के बीच आया हूँ। आप सभी ने 20 वर्षों तक आशीर्वाद देकर मुझे सांसद बनाकर दिल्ली भेजा, अब मुख्यमंत्री के रूप में मैं अपने परिवार से मिलने आप सबके बीच आया हूँ। मुख्यमंत्री साय ने राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विगत 20 महीनों में ‘मोदी की गारंटी’ के तहत अनेक जनकल्याणकारी कदम उठाए गए हैं। इनमें धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से, 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता, तेंदूपत्ता संग्राहकों को पुनः चरण पादुका वितरण, किसानों को धान बोनस तथा 5 लाख 62 हजार भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक मदद जैसी योजनाएँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री ने कहा था कि छत्तीसगढ़ के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। आज प्रदेश के युवा देख रहे हैं कि जिन्होंने पीएससी परीक्षा में घोटालेबाजी की, वे जेल के अंदर हैं और कुछ जाने की तैयारी में हैं। साय ने कहा कि हमारी सरकार में श्रद्धालुओं के लिए रामलला दर्शन योजना और बुजुर्गों के लिए तीर्थ स्थलों की यात्रा की योजना प्रारंभ की गई है।  उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने एनीकट भूमिपूजन के अवसर को बायंग (कछार) गांव के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि हमने जो वादा किया था, उसे पूरा किया। अब गांव-गांव में प्रधानमंत्री आवास बन रहे हैं, महतारी वंदन योजना का पैसा समय पर हर महीने मिल रहा है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन तथा डबल इंजन की सरकार में विकास के कार्य तेजी से हो रहे हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि रायगढ़ क्षेत्र का संसद में पिछले 20 वर्षों से प्रतिनिधित्व करने वाले हमारे मुख्यमंत्री प्रत्येक गांव के लिए परिवार के सदस्य जैसे हैं। रायगढ़ से सांसद रहते हुए शायद ही ऐसा कोई गांव बचा हो जहाँ मुख्यमंत्री साय न गए हों। छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बने मात्र 20 महीने हुए हैं और इस अवधि में अनेक कार्य किए गए हैं। किसानों के एक-एकड़ पर 3100 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदी, दो वर्षों का बकाया बोनस, भूमिहीन मजदूरों के खाते में हर साल 10 हजार रुपये की राशि पहुँच रही है। हर गांव में प्रधानमंत्री योजना के अंतर्गत मकान बनाए जा रहे हैं। राजमिस्त्री और सेंट्रिंग प्लेट कम पड़ गए हैं, फिर भी लगातार कार्य हो रहे हैं। केवल कछार गांव में ही 180 से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास की नई गाथा लिख रहा है। हमारी माताएँ-बहनें हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त हो रही हैं। ग्राम पंचायत कछार के किसानों के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। एनीकट बनने से कृषि संबंधी सुविधाएँ बढ़ेंगी। छत्तीसगढ़ की जनता देख रही है कि विष्णुदेव साय के सुशासन में सभी घोषणाएँ पूरी हो रही हैं और ऐसी योजनाएँ चलाई जा रही हैं जिनके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ निरंतर प्रगति कर रहा है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शिखा रविन्द्र गबेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुजाता सुखलाल चौहान, जनपद पंचायत सदस्य श्रीमती गंगाबाई पटेल, ग्राम बायंग के सरपंच गौरीशंकर सिदार सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित थे।

सीएम विष्णु देव साय ने रायगढ़ के गढ़ उमरिया में नवगुरुकुल का किया शुभारंभ

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षा को नई दिशा देने के लिए नवगुरुकुल का उद्घाटन किया नवगुरुकुल : बालिकाओं की शिक्षा और संस्कारों के संवर्धन की नई पहल रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज रायगढ़ जिले के प्रवास के दौरान खरसिया तहसील अंतर्गत ग्राम गढ़ उमरिया में नवगुरुकुल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवेशी छात्राओं को लैपटॉप वितरित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।  मुख्यमंत्री साय ने नवगुरुकुल में स्थापित आधुनिक कंप्यूटर लैब का निरीक्षण करते हुए शिक्षकों को निर्देश दिए कि वे बालिकाओं को उच्चस्तरीय शिक्षा और मूल्य आधारित संस्कार प्रदान करें ताकि उनका भविष्य सुनहरा बने।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए सर्वप्रथम गणेशोत्सव, शिक्षक दिवस और चक्रधर समारोह की बधाई दी। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक राष्ट्र निर्माता होता है, इसलिए समाज में उनका सर्वोच्च सम्मान होना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने स्मरण कराया कि पिछले वर्ष चक्रधर समारोह के समापन अवसर पर रायगढ़ में प्रयास विद्यालय का उद्घाटन किया गया था और आज नवगुरुकुल की स्थापना इस कड़ी को आगे बढ़ाती है। उन्होंने इस अभिनव पहल के लिए वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी, नवगुरुकुल की सह-संस्थापक सुनिधि और उनकी टीम की प्रशंसा की तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी बालिकाओं को बधाई देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार लगातार युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र में भी रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए नई औद्योगिक नीति लागू की गई है, जिससे प्रदेश के युवाओं को व्यापक लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से नवगुरुकुल संस्था द्वारा जशपुर जिले की 150 बालिकाओं को प्लेसमेंट के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की सराहना की और इस प्रयास को और व्यापक बनाने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि संस्था में प्रवेश पाने वाली 120 बालिकाएँ अपनी योग्यता और मेहनत का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास, ऊर्जा, जज्बा, जुनून और कठिन परिश्रम की पराकाष्ठा आवश्यक है। निराशा के लिए जीवन में कोई स्थान नहीं होना चाहिए क्योंकि निराशा के साथ कोई भी व्यक्ति प्रगति नहीं कर सकता। उप मुख्यमंत्री ने सभी बालिकाओं को निरंतर आगे बढ़ने और सफलता हासिल करने की प्रेरणा दी। वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार बनने के बाद से प्रदेश में निरंतर विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने नवगुरुकुल की स्थापना को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया और कहा कि यह संस्था विशेष रूप से बहनों के लिए समर्पित होकर काम कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि रायगढ़ जिले में 35 करोड़ रुपये की लागत से नालंदा परिसर का निर्माण कार्य प्रगति पर है।  महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बदलती तकनीक और समय की जरूरतों के अनुरूप छात्राओं को शिक्षा प्राप्त कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। नवगुरुकुल की सह-संस्थापक सुनिधि ने गुरुकुल की शिक्षा प्रक्रिया और प्रशिक्षण पद्धति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्था का उद्देश्य छात्राओं को न केवल तकनीकी शिक्षा देना है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने योग्य बनाना है। शुभारंभ समारोह में पूर्व विधायक विजय अग्रवाल, गुरुपाल भल्ला, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत सीईओ जितेंद्र यादव सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित थीं। सभी ने नवगुरुकुल की स्थापना को इस क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए इसे बालिकाओं के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर करार दिया।

सिंहस्थ 2028 की तैयारी: सीएम डॉ. यादव ने अनुभवी अधिकारियों से मांगा मार्गदर्शन

सिंहस्थ 2028 की तैयारी: सीएम डॉ. यादव ने अनुभवी अधिकारियों से मांगा मार्गदर्शन सिंहस्थ 2028 के आयोजन को लेकर सीएम डॉ. यादव की बड़ी घोषणा, वरिष्ठ अधिकारियों का अनुभव होगा शामिल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा की भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ : 2028 प्रतिष्ठापूर्ण आयोजन है। इसके लिए उज्जैन में पिछले दो सिंहस्थ वर्ष 2004 और 2016 के दौरान पदस्थ रहे वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के अनुभव का लाभ भी लिया जाए। इलाहाबाद में सम्पन्न महाकुंभ की व्यवस्थाओं का अध्ययन भी किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार का संकल्प है कि सिंहस्थ : 2028 श्रद्धालुओं की दृष्टि से सुविधाजनक, दुर्घटनाविहीन, आवास, आवागमन, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं के साथ श्रेष्ठ आपदा प्रबंधन का भी उदाहरण बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार की शाम मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन में सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाओं के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग जैन और पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के प्रबंधों पर गत मंगलवार को भी विस्तृत बैठक हुई है। बैठक और संवाद का सिलसिला निरंतर चलेगा। प्रत्येक व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए विभागों को दायित्व दिए गए हैं। तैयारियों की नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार के संबंधित विभागों से भी आवश्यक सहयोग प्राप्त किया जा रहा है। हाल ही में प्रदेश के विभिन्न रेल मंडल प्रबंधकों ने उनसे भेंट कर सिंहस्थ के लिए रेल सुविधाओं की उपलब्धता और विस्तार के संबंध में अवगत करवाया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्मित होने वाले घाटों और उनके निकट विभिन्न सुविधाओं के विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। सरलता और सुगमता से स्नान सम्पन्न हो सकें, इस दृष्टि से सभी जरूरी प्रबंध किए जाएंगे। पर्यटन विभाग और निजी क्षेत्र द्वारा होटलों की व्यवस्था, पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारियों के लिए रहवास व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देश     सिंहस्थ से जुड़े कार्यों की सतत् समीक्षा की जाए। विभागवार बैठकें भी हों।     अधिकारी-कर्मचारियों के प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएं।     सिंहस्थ के दौरान सुरक्षा व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक का प्राथमिकता से उपयोग हो।     विभिन्न देवस्थानों के परिसरों के विकास कार्य भी प्रारंभ किया जाए।     अनुभवी अधिकारियों की सेवाएं और मार्गदर्शन लेने का कार्य भी किया जाए।     भीड़ नियंत्रण में एआई के उपयोग के लिए आवश्यक अध्ययन किया जाए।     अन्य देशों में सिंहस्थ केन्द्रित सांस्कृतिक गतिविधियों की रूपरेखा को अंतिम रूप दें।

महंगाई पर राहत की उम्मीद! SBI रिपोर्ट से सामने आया सबूत

नई दिल्ली  जीएसटी दरों में बड़ा बदलाव होने वाला है, जिससे आम घरेलू सामान और सेवाओं पर टैक्स कम होगा. इससे अगले वित्त वर्ष (2025-26) में रिटेल इंफ्लेशन 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक घट सकता है. एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए जीएसटी नियम लागू होने के बाद देश में महंगाई कम होगी जीएसटी काउंसिल की 56वीं मीटिंग में पुरानी चार स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर (5%, 12%, 18%, 28%) को हटाकर दो स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर (5% और 18%) को मंजूरी दी गई. साथ ही, कुछ लग्जरी सामान और सेवाओं के लिए 40% की स्पेशल टैक्स दर तय की गई है, जिसके तहत रोजमर्जा की काफी चीजें सस्ती हो गई हैं और कुछ तो टैक्स फ्री ही हो गई हैं. नई दरें कब से लागू होंगी? तंबाकू और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स को छोड़कर नई टैक्स दरें 22 सितंबर 2025 से लागू होंगी. रिपोर्ट कहती है कि 453 सामानों की जीएसटी दर में बदलाव हुआ है. इनमें से 413 सामानों पर टैक्स कम हुआ है, जबकि सिर्फ 40 सामानों पर टैक्स बढ़ा है. करीब 295 जरूरी सामानों पर जीएसटी 12% से घटकर 5% या 0% हो गई है. इससे खासकर खाने-पीने की चीजों पर 60% फायदा ग्राहकों को मिलेगा, जिससे कंज्यूमर वैल्यू इंडेक्स आधारित इंफ्लेशन 0.25 से 0.30% तक कम हो सकती है. रिटेल इंफ्लेशन पर क्या असर होगा? एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि इसके अलावा, सेवाओं पर जीएसटी दरों को रेशनाइलज बनाने से अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर खुदरा मुद्रास्फीति में 0.40 से 0.45 प्रतिशत की और कमी आएगी. इसमें ग्राहकों को लाभ 50 प्रतिशत मिलने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान रिटेल इंफ्लेशन में 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. जीएसटी की औसत दर कितनी हुई? जीएसटी काउंसिल के रेट रेशनलाइजेशन से सितंबर 2019 में औसत जीएसटी दर 14.4% से घटकर 11.6% हो गई थी. अब नए बदलावों के बाद ये और कम होकर 9.5% हो सकती है. नए जीएसटी नियमों से जरूरी सामान और सेवाएं सस्ती होंगी, जिससे महंगाई कम होगी और आम लोगों को फायदा होगा.  

हिमाचल आपदा रिपोर्ट: बादल फटना और बारिश से 3787 करोड़ का नुकसान, तापमान 1.5°C बढ़ा

शिमला हिमाचल प्रदेश मे भारी बारिश के चलते इस बार भी भीषण तबाही हुई है और इस तबाही की गवाही आंकड़े दे रहे हैं. तबाही के लिए अलग-अलग कारण गिनवाए जा रहे हैं लेकिन सबसे बड़ा कारण मानवीय चूक माना जा रहा है. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग का असर साफ तौर पर हिमाचल में देखा जा रहा है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार अब तक के तापमान के अध्ययन से पता चला है कि बीते 100 सालों में हिमाचल प्रदेश में तापमान में औसतन 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ौतरी हुई है. इसी का परिणाम है कि हिमाचल में लगातार प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं में बढ़ौतरी हुई है. साल 2023 की त्रासदी के जख्म अभी तक भरे नहीं हैं और 2025 में लगातार जख्म पर जख्म मिल रहे हैं. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में इस मॉनसून सीजन में 20 जून से 5 सितंबर की सुबह 10 बजे तक 355 लोगों की मौत हो चुकी है  और 49 लोग लापता हैं. इसी तरह 416 घायल हुए हैं. आपदा में 5194 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. साथ ही 1945 मवेशियों की मौत और 25 हजार 755 पोल्ट्री वर्ड्स की भी जान गई है. आपदा से अब तक प्रदेश को 3787 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. बीते 2 सालों में हुए नुकसान की बात करें तो आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार साल 2023 में आई भीषण आपदा में हिमाचल में 509 लोगों मौत हुई थी और 12 हजार 034 घरों को नुकसान हुआ था, जिनमें  2944 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए थे. 2023 में 528 घायल हुए थे और 38 लोग लापता हो गए थे. हिमाचल को  9 हजार 712 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ था.  वर्ष 2024 में हिमाचल में आई आपदा में 174 लोगों की जान गई थी, 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे और 31 लोग लापता हुए थे. प्रदेश में 1613 करोड़ की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था. आठ साल में कितनी बार बादल फटे इस वर्ष जुलाई माह से पहले राज्य आपदा प्रबंधन की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपी गई एक रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में साल 2018 से लेकर जुलाई 2025 बादल फटने की 148 घटनाएं हो चुकी हैं. इसके अचानक बाढ़ आने की 294 और भूस्खलन की 5 हजार से ज्यादा घटनाएं हो चुकी है. इस बार 20 जून से अब तक 45 बार बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. वहीं, 105 बड़े भूस्खलन, 91 फ्लैश फ्लड आए हैं. फ्लैश और लैंडस्लाइड में 161 लोगों की मौत और 154 लोगों की सड़क हादसों में जान गई है. मौसम में आए इस बदलाव को लेकर टीम ने शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में कार्यरत मौसम विज्ञानी संदीप शर्मा से बात की. प्रदेश में इस वक्त हो रही लगातार बारिश को लेकर संदीप शर्मा ने बताया कि 8 सितंबर तक मॉनसून थोड़ा कमजोर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि इस वर्ष इतनी ज्यादा बारिश होने का कारण यही है कि मॉनसून पूरा समय सक्रिय रहा है. संदीप शर्मा ने कहा कि इस वर्ष जून माह में सामान्य से 34 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जुलाई में सामान्य बारिश हुई है जबकि अगस्त में रिकार्ड 68 प्रतिशत अधिकत बारिश हुई है. बीते 100 सालों में 9वीं बार सबसे अधिक हुई बारिश संदीप सिहं बताते हैं कि 1901 से लेकर अब तक के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अगस्त महीने में हुई बारिश बीते 100 सालों में 9वीं बार सबसे अधिक हुई बारिशों में से एक है. इससे पहले 1948 में अगस्त में हिमाचल में 456.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी औऱ इस वर्ष 431 मिलीमीटर बारिश हुई है. संदीप शर्मा ने बताया कि तापमान में अप्रत्याशित बढ़ौतरी हुई है, पिछले 100 सालों में हिमाचल में तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ौतरी हुई है. उन्होंने कहा कि जलवायु में लगातार हो रहे परिवर्तन के लिए बहुत से कारण जिम्मेदार हैं, अब पर्यावरण और पारिस्थितिकी को ध्यान में रख कर हर कार्य करने की जरूरत है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की निवेश संवर्धन पहल का परिणाम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवेश संवर्धन प्रयासों के फलस्वरुप ऊर्जा क्षेत्र और ज्यादा मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सुरक्षा बढ़ रही है। मध्यप्रदेश पॉवर सरप्लस राज्य के रूप में पहचान बना चुका है। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से अब इस क्षेत्र में नया निवेश आ रहा है। टोरेंट पॉवर और अडानी पॉवर जैसी बड़ी कंपनियों ने अब ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रदेश में काम करना शुरू कर दिया है। टोरेंट पॉवर कंपनी 22 हजार करोड़ और अडानी पॉवर कंपनी 10 हजार 500 करोड़ रूपये का निवेश करेगी। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार 17,000 को रोजगार मिलेगा। टोरेंट पॉवर 1600 मेगावॉट थर्मल प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश में 22 हजार करोड़ रूपये का निवेश करेगी। टोरेंट पॉवर लिमिटेड को एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) से 1,600 मेगावॉट के कोयला आधारित बिजली संयंत्र की स्थापना के लिए "लेटर ऑफ अवार्ड (LoA)" दे दिया है। यह अहमदाबाद-स्थित समूह द्वारा बिजली क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। यह परियोजना ग्रीनफील्ड 2×800 मेगावॉट की अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी और इसे डिज़ाइन, निर्माण, वित्तपोषण, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। टोरेंट इस संयंत्र की पूरी क्षमता MPPMCL को 25 साल की पॉवर परचेज एग्रीमेंट पॉवर परचेस एग्रीमेंट के तहत 5.829 रूपये प्रति यूनिट की दर से आपूर्ति करेगा। यह परियोजना PPA पर हस्ताक्षर होने के 72 महीनों के भीतर चालू होनी है। परियोजना लागत का लगभग 70% ऋण के माध्यम से पूरा किया जाएगा। इस संयंत्र के लिए कोयले का आवंटन MPPMCL द्वारा केंद्र सरकार की SHAKTI नीति के अंतर्गत किया जाएगा। यह परियोजना अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी, जिससे पारंपरिक थर्मल यूनिट्स की तुलना में बेहतर दक्षता और कम उत्सर्जन मिलेगा। टोरेंट पॉवर का यह निवेश केंद्र सरकार के 2032 तक 80 गीगावॉट अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे ग्रिड को स्थिर करने के लिए आवश्यक बेसलोड क्षमता जुड़ेगी। इस परियोजना के निर्माण के दौरान 10 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। अडानी पॉवर मध्यप्रदेश में 800 मेगावॉट का ताप विद्युत संयंत्र 10 हजार 500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित कर मध्यप्रदेश को बिजली आपूर्ति करेगी। इस परियोजना के तहत 800 मेगावॉट की क्षमता वाला एक नया ताप विद्युत संयंत्र स्थापित किया जाएगा। यह संयंत्र अनूपपुर ज़िले में स्थित होगा। संयंत्र को 54 महीनों में चालू किया जाएगा। यह कदम प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करेगा। एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (MPPMCL) अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र विकसित करने और उससे बिजली आपूर्ति के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) दे चुकी है। यह संयंत्र डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन (DBFOO) मॉडल के तहत स्थापित किया जाएगा। जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, देश की बिजली की मांग, विशेष रूप से बेस लोड पॉवर की मांग, लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा अधोसंरचना में निवेश अत्यंत आवश्यक है, जिससे बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। अनूपपुर संयंत्र विश्वसनीय, सस्ती और प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर बिजली उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह न केवल भारत बल्कि मध्यप्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा और राज्य के सतत विकास को गति देगा। इस संयंत्र के लिए कोयले की आपूर्ति भारत सरकार की 'शक्ति योजना' (SHAKTI Policy) के तहत मध्यप्रदेश को आवंटित की गई है। परियोजना निर्माण चरण में 7,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और चालू होने के बाद इसमें लगभग एक हजार स्थायी कर्मचारी कार्यरत होंगे।  

मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर IAS ट्रांसफर, सीधी-रीवा-भिंड के कलेक्टर बदलना तय

भोपाल  मध्य प्रदेश में बहुप्रतीक्षित आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची अनंत चतुर्दशी के बाद जारी होगी। इन दिनों गणेश विसर्जन के जुलूस निकल रहे हैं। इस दौरान कानून-व्यवस्था को देखते हुए अभी कलेक्टरों को बदला जा रहा है। नवरात्रि के दो-चार दिन पहले तबादला आदेश जारी होंगे ताकि नए कलेक्टर पदभार ग्रहण करने के कुछ दिनों में जिलों को समझ भी लें। मुख्यमंत्री सीधी, रीवा, भिंड सहित कुछ जिलों के कलेक्टरों से नाराज हैं जिनका तबादला होना निश्चित बताया जा रहा है। करीब एक दर्जन कलेक्टरों के साथ ही तीन संभाग के कमिश्नर भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। 2010 बैच के आईएएस अधिकारियों, जिन्हें तीन-चार महीने बाद सुपर टाइम स्केल मिलना है, को भी सुपर टाइम स्केल वाली पदस्थापना मिल सकती है। 2010 बैच के इंदौर के कलेक्टर आशीष सिंह का उज्जैन संभाग का कमिश्नर बनना तय माना जा रहा है। जबलपुर के कलेक्टर दीपक सक्सेना को भी किसी बड़े संभाग का कमिश्नर बनाया जा सकता है। भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह भी 2010 बैच के अधिकारी हैं, उन्हें भी किसी बड़े विभाग का विभाग अध्यक्ष बनाने के साथ ही संबंधित कॉरपोरेशन का MD बनाने की चर्चा है।   प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की अपील का दिखा असर  मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने 3 सितंबर को अपना जन्मदिन परिवार के साथ बाबा महाकाल के दरबार में मनाया और भगवान महाकालेश्वर का आशीर्वाद लिया। मध्य प्रदेश में शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी राजनीतिक हस्ती का जन्मदिन हो और कहीं पर भी होर्डिंग, बैनर और विज्ञापन नहीं दिखे। दरअसल खंडेलवाल ने अपने जन्मदिन से दो दिन पहले ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से सभी कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि उनके जन्मदिन पर किसी भी प्रकार का होर्डिंग, बैनर या किसी प्रचार माध्यम से शुभकामनाएं ना दें। उन्होंने न सिर्फ यह अपील की वरन यह सुनिश्चित किया कि इसका पालन भी हो वरना पूर्व में यह देखा गया है कि राजनीतिक हस्ती दिखावे के लिए अपील तो कर देती है लेकिन होता यही है कि अखबारों में पूरे पेज के विज्ञापन के साथ ही शहर जन्मदिन के होर्डिंग और बैनर से सजे रहते हैं लेकिन वाकई इस बार ऐसा नहीं हुआ।  केवल एक सदस्य के भरोसे मानव अधिकार आयोग  मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग की संरचना के अनुसार अध्यक्ष और तीन सदस्य होते हैं, लेकिन वर्तमान में आयोग की स्थिति यह है कि पिछले कुछ महीनों से केवल एक ही सदस्य पूर्व आईपीएस अधिकारी राजीव टंडन ही कार्यरत हैं। जस्टिस एनके जैन के रिटायरमेंट के बाद अध्यक्ष पद पर तो पिछले दो वर्षों से कोई नहीं है। पूर्व न्यायाधीश मनोहर ममतानी थे तो केवल सदस्य लेकिन पिछले 2 वर्ष से कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे थे, लेकिन वे भी चार महीने पहले रिटायर हो चुके हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार आने वाले समय में इस महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था में अध्यक्ष और सदस्य की जल्द ही नियुक्ति करेगी। उप लोकायुक्त: एक पद भरा, अभी भी एक पद खाली  मध्य प्रदेश में उप लोकायुक्त पद पर प्रदेश के पूर्व प्रमुख सचिव विधि नरेंद्र प्रसाद सिंह की नियुक्ति राज्य शासन ने कर दी है। लोकायुक्त संगठन की संरचना के अनुसार दो उप लोकायुक्त की पदस्थापना की जा सकती है, यानी अभी भी एक पद खाली है। बता दें कि उप लोकायुक्त के दोनों पद पिछले दो साल से खाली रहे हैं। कुछ साल पहले लोकायुक्त के दोनों पद भरे हुए थे और इन पदों पर पूर्व न्यायाधीश उमेश माहेश्वरी और श्री पालो पदस्थ रहे हैं। इससे पहले भी पूर्व न्यायाधीश चंद्र भूषण भी इस पद पर रहे हैं। दो महत्वपूर्ण संस्थाओं के डीजी इस माह हो रहे रिटायर इस महीने महानिदेशक स्तर के दो आईपीएस अधिकारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ये अधिकारी हैं राजविंदर सिंह भट्टी, महानिदेशक, सीआईएसएफ और राहुल रसगोत्रा, महानिदेशक, आईटीबीपी। भट्टी बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं जबकि रसगोत्रा मणिपुर कैडर के हैं। इस बीच पता चला है कि 1991 से 1994 के बीच के लगभग एक दर्जन आईपीएस अधिकारी इस दोनों पदों को हासिल करने के लिए जोड़ तोड़ में जुट गए हैं। माना जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय 20 सितंबर के बाद इन दोनों पदों के प्रमुखों के बारे में फैसला ले सकती है। 

फूड डिलीवरी की दुनिया में बड़ा बदलाव, मंगवाना होगा महंगा और डिलिवरी वालों की आमदनी घटेगी

नई दिल्ली ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना आज हमारे रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है. ऑफिस से थककर आने के बाद या वीकेंड पर दोस्तों संग पार्टी के लिए बस मोबाइल उठाइए और चंद मिनटों में खाना आपके दरवाज़े पर! लेकिन अब यह सुविधा शायद थोड़ी महंगी पड़ सकती है. सरकार के नए फैसले से जोमैटो और स्विगी जैसी बड़ी फूड डिलीवरी कंपनियों पर टैक्स का नया बोझ आ गया है. ये कंपनियां कह रही हैं कि वे यह खर्च अपने ग्राहकों से वसूल सकती हैं. यानी आने वाले दिनों में डिलीवरी चार्ज बढ़ सकते हैं और जेब पर थोड़ा और बोझ पड़ सकता है. 4 सिंतबर को जीएसटी काउंसिल ने स्पष्ट किया कि अब इन ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स को अपने डिलीवरी पार्टनर्स (जो ऑर्डर लेकर आते हैं) के लिए 18% GST खुद से भरना होगा. इसका मतलब यह है कि जोमैटो और स्विगी को हर साल लगभग 180-200 करोड़ रुपये अतिरिक्त टैक्स देना पड़ेगा. इससे पहले डिलीवरी बॉय पर यह टैक्स लागू नहीं था, यानी उनकी डिलीवरी फीस पर GST नहीं लगता था. अब सरकार ने कहा है कि प्लेटफॉर्म को उनकी डिलीवरी फीस पर 18 फीसदी GST देना होगा. उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी ऑर्डर की डिलीवरी फीस 50 रुपये है. पहले Zomato/Swiggy यह 50 रुपये सीधे डिलीवरी पार्टनर को दे देते थे और इस पर कोई GST नहीं लगता था. अब सरकार के नियम के अनुसार इन प्लेटफॉर्म्स को इन 50 रुपयों पर 18 फीसदी यानी 9 रुपये सरकार को टैक्स के रूप में चुकाना होगा. जाहिर है कि इससे कंपनी का खर्च बढ़ जाएगा. क्या ये खर्च कंपनियां खुद उठाएंगी? जोमैटो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि “इसका कुछ हिस्सा डिलीवरी वर्कर्स पर डाला जाएगा, जिससे उनकी कमाई थोड़ी कम हो सकती है. साथ ही ग्राहकों से भी अतिरिक्त चार्ज लेने पर विचार चल रहा है.” स्विगी के एक अधिकारी ने भी पुष्टि की कि कंपनी टैक्स का बोझ आगे बढ़ाने के बारे में सोच रही है. काउंसिल का यह फैसला लंबे समय से चल रहे उस विवाद को खत्म करने का काम करेगा कि डिलीवरी फीस पर टैक्स कौन भरेगा- प्लेटफॉर्म या डिलीवरी पार्टनर. दिसंबर 2024 में जोमैटो को GST अधिकारियों से 2019 से 2022 के समयांतराल के लिए 803 करोड़ रुपये टैक्स और पेनल्टी का नोटिस मिला था. स्विगी को भी इसी मुद्दे पर प्री-डिमांड नोटिस जारी हुआ था. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नई स्पष्टता इन नोटिसों पर क्या असर डालती है. दोनों कंपनियों पर क्या असर होगा, ब्रोकरेज ने बताया ब्रोकरेज हाउस जैफरीज़ का मानना है कि यह फैसला जोमैटो और स्विगी दोनों के लिए हल्का निगेटिव साबित होगा, खासकर तब जब दोनों कंपनियों की ग्रोथ पहले से ही धीमी है. हाल के क्वार्टर में जोमैटो का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 451 करोड़ रुपये और स्विगी का 192 करोड़ रुपये रहा. Morgan Stanley ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कंपनियां यह अतिरिक्त बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं, क्योंकि अब डिलीवरी फीस पर 18% जीएसटी चुकाना अनिवार्य होगा. मामले की जड़ सेंट्रल जीएसटी एक्ट की धारा 9(5) में है, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने सर्विस प्रोवाइडर्स की तरफ से टैक्स इकट्ठा कर सरकार को जमा करने का आदेश देती है. हालांकि अब तक डिलीवरी फीस को लेकर स्पष्टता नहीं थी. कंपनियों का कहना है कि ग्राहकों से ली गई डिलीवरी फीस वे सीधे डिलीवरी पार्टनर्स को देते हैं, और कई बार ग्राहकों से कोई फीस नहीं ली जाती या डिस्काउंट दिया जाता है, लेकिन पार्टनर्स को तय रेट पर भुगतान करना ही पड़ता है. कुल मिलाकर, यह फैसला ग्राहकों और डिलीवरी पार्टनर्स दोनों के लिए बदलाव लेकर आएगा. अब देखना यह है कि कंपनियां इसे किस तरह संभालती हैं ताकि न तो ग्राहकों की जेब ज्यादा खाली हो और न ही डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई बहुत घटे.  

हेल्थ अलर्ट: दो शहरों में ब्रेस्ट कैंसर के केस सबसे ज्यादा, पूर्वोत्तर में लंग कैंसर बढ़ा

 नई दिल्ली हाल ही में एक रिसर्च स्टडी में यह दावा किया गया है कि देश के दक्षिणी राज्यों में कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है। JAMA ओपन नेटवर्क में प्रकाशित राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद तो देश भर में स्तन कैंसर की राजधानी के रूप में उभरा है, जहाँ प्रति 100,000 महिलाओं में 54 इस असाध्य रोग के दंश से पीड़ित हैं जो देशभर में सर्वोच्च घटना दर है, जबकि बेंगलुरु का स्थान दूसरे नंबर पर आता है, जहां एक लाख महिलाओं में औसतन 46.7 महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की मार झेल रही हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण भारत के महानगर न केवल ओवरऑल कैंसर संकट का सामना कर रहे हैं, बल्कि वहां विशिष्ट प्रकार का कैंसर महामारी के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट में इस पर कंट्रोल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया है। स्तन कैंसर के मामले में टॉप पर साउथ के शहर वर्ष 2015 से 2019 के दौरान देशभर में 43 जनसंख्या-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों (PBCR) को कवर करने वाले इस स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक स्तन कैंसर दर वाले शीर्ष छह क्षेत्रों में से चार दक्षिण भारत के हैं। इनमें चेन्नई क्षेत्र में प्रति 100,000 महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की दर 45.4 है, जबकि केरल के अलाप्पुझा और तिरुवनंतपुरम में यह क्रमशः 42.2 और 40.7 है। यह पैटर्न दक्षिण भारत, विशेषकर इसके शहरी केंद्रों को भारत में स्तन कैंसर महामारी का केंद्र बनाता है। 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर 238,085 महिलाओं के स्तन कैंसर से प्रभावित होने का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यह भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर बन गया है। रिसर्च स्टडी के आंकड़ों से पता चलता है कि स्तन कैंसर दक्षिण भारतीय शहरों में तेजी से और व्यापक पैमाने पर पसरा है, जबकि देश के अन्य क्षेत्रों में दूसरे किस्म के कैंसर के मामले बढ़े हैं। रिपोर्ट में इन कैंसर मामलों के बढ़ने के पीछे विशिष्ट स्थानीय कारकों की ओर भी इशारा किया गया है। लंग्स कैंसर पर क्या रिपोर्ट? इस रिपोर्ट में कहा गया है कि स्तन कैंसर के मामले में जहां दक्षिण भारतीय शहर आगे हैं, वहीं फेफड़ों के कैंसर के मामले में पूर्वोत्तर के राज्य आगे हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि फेफड़ों के कैंसर के मामलों में मणिपुर की राजधानी आइज़ोल में प्रति 100,000 महिलाओं में 33.7 इससे ग्रसित हैं जबकि इस राज्य का औसत दर 24.8 दर्ज किया गया है। हालांकि, दक्षिण भारतीय शहरों में भी लंग्स कैंसर की स्थिति चिंताजनक दिखाई देती हैं, जहाँ हैदराबाद में प्रति 100,000 पर 6.8 और बेंगलुरु में प्रति 100,000 में 6.2 केस दर्ज किए गए हैं। ओरल कैंसर के मामले में कौन सा शहर आगे? पुरुष फेफड़ों के कैंसर के पैटर्न के मामले में दक्षिण भारत में केरल सबसे आगे है, जहाँ को कई जिलों में यह दर बेहद ऊँची हैं। धरती पर का स्वर्ग कहलाने वाले कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में भी लंग्स कैंसर के मामले में उच्चतम दर (39.5 प्रति 100,000) पर हैं, जबकि केरल के जिले उसके बाद के स्थान पर हैं। केरल के कन्नूर में यह दर 35.4, मालाबार में 32.5, कासरगोड में 26.6, अलप्पुझा में 25.3 और कोल्लम में प्रति 100,000 पर 24.2 है।ओरल कैंसर के मामलों में भी हैदराबाद, बेंगलुरु सबसे आगे है, जबकि अहमदाबाद इस मामले में सबसे ऊपर है।