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शिक्षा में संकट: मध्य प्रदेश में 6.70 लाख बच्चों ने बीच में छोड़ी पढ़ाई, हर साल बढ़ रही इनकी संख्या

 भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयार हो रहे हैं, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या लगातार घटती ही जा रही है। सरकारी व निजी स्कूलों के इस साल 6.70 लाख विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 5.70 लाख था। वहीं सरकारी स्कूलों में इस साल करीब 4.67 लाख बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है। पिछले साल 3.99 लाख विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी थी। इसमें निजी स्कूलों के करीब दो लाख विद्यार्थी शामिल हैं। यह आंकड़ा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन (यूडाईस) रिपोर्ट में सामने आई है। इसके अनुसार, वर्ष 2024-25 में प्रदेश के सरकारी व निजी स्कूलों में पहली से 12वीं तक में करीब 1.50 करोड़ विद्यार्थियों का पंजीयन हुआ था। वहीं 2025-26 में करीब एक करोड़ 41 हजार बच्चों का 13 जुलाई तक प्रोग्रेसिंग पेंडिंग है। वहीं 6.70 लाख बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विद्यार्थियों के प्रोग्रेशन को पूर्ण करें और ड्रापबाक्स के बच्चों को खोजकर स्कूल में नामांकन कराएं तथा नामांकित विद्यार्थियों का मैपिंग कराएं। इंदौर की स्थिति ज्यादा खराब प्रदेश के कुछ जिलों में अधिक संख्या में बच्चों ने स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। इसमें इंदौर में सर्वाधिक 38 हजार, शिवपुरी में 25 हजार, धार व बड़वानी में 21 हजार, छिंदवाड़ा में 20 हजार, छतरपुर में 19 हजार, खरगोन में 18 हजार, बालाघाट में 17 हजार और खंडवा में 16 हजार बच्चों ने स्कूल में प्रवेश नहीं लिया। यहां के सरकारी स्कूलों में सबसे अधिक बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले सत्र में 79.75 लाख बच्चों का नामांकन दर्ज हुआ था। इस सत्र में अब तक 53.81 लाख का प्रोग्रेशन पेडिंग है। वहीं 4.67 लाख बच्चों ने किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। इसमें सबसे अधिक बड़वानी में 17 हजार, छिंदवाड़ा व छतरपुर में 16 हजार, बालाघाट में 13 हजार, भिंड में 10 हजार, शहरी क्षेत्र ग्वालियर व भोपाल में चार-चार हजार, जबलपुर में छह हजार और इंदौर में 11 हजार विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी है। विभाग ने ये कारण गिनाए     बच्चों का अपने माता-पिता के साथ दूसरी जगह जाना।     समग्र आईडी से मैपिंग नहीं होने के कारण ऐसे हालात बने।     जगह बदलने के कारण बच्चे का ठीक से मैपिंग नहीं होना।     अब ऑनलाइन चाइल्ड ट्रैकिंग से सही संख्या सामने आ रही है। ऑनलाइन चाइल्ड ट्रैकिंग से सामने आ रही संख्या     ऐसा भी हो सकता है कि कई जगहों पर सरकारी व निजी स्कूलों में एक ही बच्चों के नाम दर्ज होते हैं। अब ऑनलाइन चाइल्ड ट्रैकिंग के कारण वास्तविक संख्या सामने आ रही है। – डॉ. दामोदर जैन, शिक्षाविद्  

भोपाल में साइबर ठगी के 70 केस, करोड़ों की रिश्वत देकर बचे आरोपी

भोपाल  साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ने के बावजूद भोपाल में अब भी हर सप्ताह कम से कम एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ का मामला सामने आ रहा है। बीते डेढ़ साल में क्राइम ब्रांच की साइबर सेल में ऐसे 70 मामले दर्ज हुए हैं, यानी औसतन हर सात से आठ दिन में एक पीड़ित पुलिस तक पहुंच रहा है। इस दौरान ठगों ने पीड़ितों से करीब ढाई करोड़ रुपये हड़पे हैं। साल 2024 में डिजिटल अरेस्ट के 53 मामलों में लगभग 1 करोड़ 82 लाख रुपये की ठगी हुई, जबकि वर्ष 2025 में जून तक 17 लोगों से 77 लाख 57 हजार रुपये वसूले जा चुके हैं। ऐसे फंसाते हैं ठग साइबर ठग पहले विभिन्न माध्यमों से पीड़ितों के डाटा आधार, पैन, बैंक डिटेल, मोबाइल नंबर से लेकर सोशल मीडिया गतिविधियां तक पर नजर रखते हैं। इन जानकारियों के आधार पर वे पीड़ित की वर्चुअल प्रोफाइल बनाते हैं, ताकि उसे यह भरोसा हो कि काल करने वाला कोई सरकारी अधिकारी है। इसके बाद शुरू होता है डराने-धमकाने का सिलसिला। पीड़ित को फोन कर बताया जाता है कि उसका नाम मनी लांड्रिंग, ड्रग तस्करी या अवैध लेनदेन के मामले में आ गया है। दावा किया जाता है कि ईडी, सीबीआई या कोर्ट में मामला दर्ज है और तुरंत वेरिफिकेशन जरूरी है। पीड़ित को किसी ऐप के जरिए वीडियो कॉल पर जोड़ा जाता है, जहां ठग पुलिस अधिकारी के वेश में, पुलिस कार्यालय जैसी पृष्ठभूमि के साथ बैठा दिखता है। पीड़ित को परिवार या किसी अन्य से बात करने की मनाही होती है। सामान्य पूछताछ के बाद वीडियो काल में ‘अन्य एजेंसियों’ के अफसर के रूप में और लोग जुड़ते हैं, जो सख्ती से पूछताछ कर आरोप ‘सिद्ध’ कर देते हैं और फिर ‘क्लीन चिट’ के नाम पर रकम की मांग करते हैं। यह रकम सीधे ठगों के खातों में जमा कराई जाती है। जज बनकर सुनाई सजा सितंबर 2024 में भोपाल के श्यामला हिल्स क्षेत्र में साइबर ठगों ने एक गैस संचालक की मां को डिजिटल अरेस्ट कर 80 लाख रुपये ठग लिए थे। आरोपियों ने उन्हें फर्जी मनी लांड्रिंग केस में फंसाया। करीब दस दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और ‘अदालत’ में पेश कर दिया। यहां नकली कोर्ट, फर्जी वकील और जज की भूमिका निभाई गई। महिला को ‘सजा’ सुनाने के बाद समझौते के नाम पर 80 लाख रुपये ले लिए गए। यह मामला क्राइम ब्रांच साइबर सेल में दर्ज हुआ था। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कमी आई     साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता के लिए भोपाल और प्रदेशभर में पुलिस लगातार अभियान चला रही है, जिससे डिजिटल अरेस्ट के मामलों में कमी आई है। मप्र स्टेट साइबर ने पहली बार डिजिटल अरेस्ट में लाइव रेस्क्यू किया था। वहीं भोपाल क्राइम ब्रांच ने पहली बार डिजिटल अरेस्ट करने वाले मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद से साइबर ठगों पर लगातार कार्रवाई जारी है। – शैलेंद्र सिंह चौहान एडिशनल डीसीपी, क्राइम ब्रांच  

गोवंश सुरक्षा के नए प्रयास, गोसेवकों के लिए मानदेय योजना लागू

रायपुर  राज्य सरकार ने गोवंशों की सुरक्षा के लिए ‘गौधाम’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसमें बेसहारा गोवंश के लिए चारा-पानी की व्यवस्था की जाएगी। चरवाहों और गोसेवकों को मासिक मानदेय मिलेगा, चारा-पानी की व्यवस्था की जाएगी और बेहतर संचालन करने वाली संस्थाओं को रैंकिंग के साथ ईनाम भी दिया जाएगा। वित्त विभाग ने ‘गौधाम योजना’ को मंजूरी दे दी है और पशुधन विकास विभाग ने कलेक्टरों और फील्ड अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है। गोवंशों की लगातार हो रही मौतों पर रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का यह बड़ा कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरकार में आने के बाद गो अभ्यारण बनाने की बात कही थी। बता दें कि दिसंबर 2024 में मुख्यमंत्री साय ने एक कार्यक्रम में कहा था कि गो माता हमारी समृद्धि का प्रतीक हैं और माना जाता है कि उनमें 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा था कि गो अभ्यारण्य को ‘गौधाम’ कहना अधिक उचित है। बेमेतरा में 50 एकड़ में ‘गौधाम’ तैयार बेमेतरा के झालम में 50 एकड़ में गौधाम तैयार है। इसी तरह कवर्धा में 120 एकड़ में गौधाम निर्माण तेजी से जारी है। बता दें कि हाल ही में हाई कोर्ट ने सड़कों पर मृत पड़ी गायों की घटनाओं पर गंभीर टिप्पणी की थी। पिछले सप्ताह तीन अलग-अलग हादसों में 90 गायों की मौत और बिलासपुर रोड पर 18 गायों की दर्दनाक मौत के बाद मुख्य सचिव ने अफसरों को फटकार लगाई थी। क्या होगा ‘गौधाम’ में     गौधाम शासकीय भूमि पर बनाए जाएंगे, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशु-शेड, पर्याप्त पानी, बिजली और चारागाह की सुविधा होगी।     इनका संचालन निकटस्थ पंजीकृत गौशाला समितियों को प्राथमिकता देकर किया जाएगा।     योग्य एनजीओ, ट्रस्ट, सहकारी समितियां या किसान उत्पादक कंपनियां भी जिम्मेदारी संभाल सकेंगी।     चयन का मापदंड गोसेवा, नस्ल सुधार, जैविक खाद निर्माण और पशुपालन प्रशिक्षण का अनुभव होगा।     गोधाम में वैज्ञानिक पद्धति से पशुओं का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा।     गो- उत्पादों को बढ़ावा देना, चारा विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकास, नस्ल सुधार, गौसेवा के प्रति जन-जागरण और रोजगार सृजन योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं।     प्रत्येक गो-धाम में अधिकतम 200 पशु रखे जा सकेंगे। ये हैं कानूनी प्रविधान छत्तीसगढ़ की सीमाएं सात राज्यों से जुड़ी हैं और यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, जिससे अंतर्राज्यीय पशु परिवहन की संभावना रहती है। राज्य में कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 (संशोधित 2011) और छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण नियम 2014 लागू हैं, जिनमें अवैध पशु परिवहन व तस्करी पर सख्ती से रोक है। प्रदेश में बड़ी संख्या में निराश्रित और जब्त गोवंश पाए जाते हैं, जो फसलों को नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। राज्य सरकार का मानना है कि ‘गौधाम योजना’ से न केवल निराश्रित पशुओं की मौत पर रोक लगेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी नए अवसर पैदा होंगे। बेहतर प्रबंधन करने वाली संस्थाएं राज्य में माडल गौधाम के रूप में पहचान बनाएंगी।  

CM मोहन का ‘मेक इन MP’ विजन साकार, राज्य में शुरू होगा प्रीमियम रेल कोच निर्माण

भोपाल  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राज्य को लगातार विकास के पथ पर ले जा रहे हैं। सीएम डॉ. यादव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' मंत्र को साकार कर रहे हैं। वे 'मेक इन मध्यप्रदेश' की ओर बढ़ रहे हैं। राज्य को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रदेश के मुखिया डॉ. यादव लगातार उद्योगपतियों से मुलाकात कर रहे हैं। वे लगातार इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित कर प्रदेश में निवेश और रोजगार को आकर्षित कर रहे हैं। दरअसल, भारत सरकार की बड़ी कंपनियों में से एक भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) प्रदेश में बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। इस प्रोजेक्ट के तहत देश की प्रीमियम ट्रेनों वंदे भारत, अमृत भारत और मेट्रो कोच का निर्माण किया जाएगा।  इस परियोजना की लागत 1800 करोड़ रुपये है। इस प्रोजेक्ट को ब्रह्मा (BRAHMA) नाम दिया गया है। इस कंपनी से प्रदेश के हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा और अहम कदम है।   गौरतलब है कि बीईएमएल इस प्रोजेक्ट की स्थापना रायसेन जिले के गांव उमरिया में कर रही है। इस प्रोजेक्ट में 5000 लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। खास बात है कि यह पहला मौका है जब इस प्रकार के रेलवे कोच निर्माण की सुविधा मध्यप्रदेश को मिलने जा रही है। यह राज्य को देश के रेलवे प्रोडक्शन मैप पर अहम स्थान दिलाएगा। जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए उमरिया गांव की तहसील गौहरगंज में 148 एकड़ जमीन का आवंटन किया जा चुका है। इस प्रोजेक्ट की दूरी ओबैदुल्लागंज से 4 किमी, एनएच-46 से एक किमी और भोपाल एयरपोर्ट से 50 किमी है।  लगातार बढ़ेगा रोजगार बता दें, बीईएमएल इस क्षेत्र में 1800 करोड़ रुपये की लागत से वंदे भारत, अमृत भारत, मेट्रो कोच का निर्माण करेगी। शुरुआत में कंपनी सालाना 125-200 कोचों का निर्माण करेगी। 5 साल के अंदर इनकी संख्या 1100 कोच होगी। इस प्रोजेक्ट से भोपाल और रायसेन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छोटे उद्योगों का निर्माण होगा। ये उद्योग आने वाले समय में बीईएमएल को प्रोडक्शन का मटेरियल बनाकर सप्लाई करेंगे। इस प्रोजेक्ट के लिए कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। इससे स्थानीय युवाओं के कौशल विकास और प्रशिक्षण के अवसर उत्पन्न होंगे। मिशन ज्ञान और पीम मोदी के मंत्र पर सीएम डॉ. यादव का फोकस गौरतलब है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा फोकस मेक इन इंडिया पर है। राज्य सरकार भी लगातार पीएम मोदी के मंत्र पर चल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के विकास और मिशन ज्ञान की पूर्ति के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। प्रदेश के मुखिया डॉ. यादव अब मेक इन मध्यप्रदेश की ओर बढ़ चले हैं। इससे युवाओं को रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही उद्योग स्थापित होंगे और समाज के अंतिम व्यक्ति का भी कल्याण होगा। बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश का सबसे विकसित राज्य बनाने की ओर अग्रसर हैं। इसके लिए वे देश के साथ-साथ विदेशों में भी प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने एक ओर जहां देश के कई राज्यों में इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की, वहीं जापान-दुबई-स्पेन में उद्योगपतियों से संपर्क कर निवेश को राज्य तक ले लाए।  आत्मनिर्भर भारत की दिशा में वैश्विक कदम गौरतलब है कि, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) का यह नया प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम है। इस कंपनी का प्रोजेक्ट ब्रह्मा (BRAHMA) भारत का नेक्स्ट-जेन रेल मैन्युफैक्चरिंग हब है। यह केवल एक संयंत्र नहीं, बल्कि एक दृष्टिकोण है। यह आत्मनिर्भर भविष्य के लिए तैयार और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी प्रोजेक्ट है। बता दें, बीईएमएल लिमिटेड रक्षा मंत्रालय के तहत ‘शेड्यूल ए’ की कंपनी है। य रक्षा, रेल, खनन और निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बीईएमएल तीन क्षेत्रों में रक्षा-एयरोस्पेस, खनन-निर्माण और रेल-मेट्रो क्षेत्रों में काम करती है।

फैमिली कोर्ट का आदेश: बिना वजह पति को छोड़ा, भरण-पोषण का दायित्व नहीं महिला का

शिवपुरी कुटुम्ब न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश शालिनी शर्मा सिंह ने अकारण पति का त्याग करने वाली महिला द्वारा लगाई गई भरण-पोषण याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया है कि, वह पढ़ी लिखी महिला है और खुद कमा कर अपना भरण-पोषण कर सकती है। यह है पूरा मामला जानकारी के अनुसार बैंक कालोनी कलारबाग निवासी बृजेश शिवहरे की 24 वर्षीय बेटी रागिनी उर्फ भूमि की शादी 21 नवम्बर 2021 को ब्यावरा जिला राजगढ़ निवासी खेमचंद्र उर्फ अंकित पुत्र भगवान सिंह शिवहरे के साथ संपन्न हुई थी। रागिनी 16 जुलाई 2022 को अपने पिता के साथ ससुराल से मायके लौट आई। उसका आरोप था कि ससुराल वाले उसे 5 लाख रूपये के दहेज के लिए प्रताड़ित करते हैं, जबकि उसके पिता ने शादी के समय दहेज में आठ लाख रुपये नगद, सोने-चांदी के जेवर व घर-गृहस्थी का सामान दिया था।   रागिनी ने कुटुम्ब न्यायालय में इस आधार पर भरण-पोषण का दावा पेश किया कि उसके पास भरण-पोषण का कोई साधन नहीं है और उसका पति एक क्लीनिक, मेडिकल स्टोर व पाल्ट्री फार्म चलाता है एवं साधन संपन्न व्यक्ति है। खेमचंद ने अपने वकील पंकज आहूजा के माध्यम से न्यायालय को बताया कि रागिनी ने अकारण ही घर छोड़ा है, वह पढ़ी लिखी महिला है जो मायके में बच्चों को ट्यूशन देकर करीब 15 हजार रुपये महीना कमाती है। रागिनी द्वारा उसकी जो आय बताई गई है, वह उतना पैसा नहीं कमाता है। न्यायालय के समक्ष रागिनी ने स्वीकार किया कि वह आय अर्जित करने में सक्षम है। न्यायालय ने समस्त तथ्यों एवं साक्ष्यों पर विचारण उपरांत माना कि आवेदक महिला ने अकारण ही अपने पति का त्याग किया है, वह पढ़ी लिखी है और आय अर्जित कर अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है। ऐसे में भरण-पोषण प्राप्त करने की अधिकारी नहीं है। 

दंगों से जूझती बरेली से आध्यात्मिक नगरी बनी नाथ नगरी, सीएम योगी ने किया उद्घाटन

बरेली 2017 से पहले का समय याद होगा। सपा की सरकार में बरेली दंगों के लिए बदनाम था, लेकिन डबल इंजन की भाजपा सरकार ने प्रदेश में विरासत के साथ विकास की गंगा बहाई है। पहले बरेली में जहां हर तीन माह में दंगा होता था, आज नाथ नगरी की आध्यात्मिक पहचान बन गई है। भाजपा सरकार में बरेली को दंगों के लिए नंहीं आध्यात्मिक नगरी के रूप में पहचाना जा रहा है। बरेली कॉलेज के मैदान पर जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकसित होते बरेली के स्वरूप को इस तरह जनसमूह के सामने रखा। उन्होंने कहा कि नाथ कॉरिडोर, धार्मिक स्थलों के विकास और शांतिपूर्ण कांवड़ यात्राएं निकाले जाने से बरेली की तस्वीर बदल रही है। नाथ नगरी में बाबा अलखनाथ, त्रिवटीनाथ, धोपेश्वरनाथ, तपेश्वरनाथ, मढ़ीनाथ, वनखंडीनाथ और पशुपतिनाथ मंदिरों को जोड़कर विकसित हो रहे नाथ कॉरिडोर से यहां की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई गति मिली है। शासन ने यहां के धार्मिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से संवारने के लिए 62 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके साथ ही रामनगर किला, दिगंबर जैन मंदिर और जैन तीर्थों के आध्यात्मिक पर्यटन को भी नई दिशा दी जा रही है। बरेली को पार्श्वनाथ भगवान की पावन भूमि बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश राम, कृष्ण, बुद्ध और जैन तीर्थंकरों की जन्मभूमि और तपोभूमि है। आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित कर आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ जोड़ा जा रहा है ताकि उत्तर प्रदेश आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक नेतृत्व में अग्रणी बने। यहां शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी विकास हो रहा है। पूर्व की सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि तब नौकरियों में भाई-भतीजावाद हावी था। आज सरकार योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर नियुक्तियां दे रही हैं। बरेली में अब वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया नहीं वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कालेज और वन प्रोडक्ट पर काम हो रहा है। पुराने अस्पताल भवनों का नवीनीकरण, यूनानी मेडिकल कालेज, हाईवे चौड़ीकरण, बीडीए, नगर निगम और ऊर्जा विभाग की कई परियोजनाएं शहर के विकास को गति देने का काम कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार लोगों के जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हुई है, आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहा है। बरेली मंडल को विकास की उड़ान मिलने वाली है। विरासत के साथ विकास के सिद्धांत के तहत बरेली समृद्धि के मार्ग पर अग्रसर है। बोले, प्रदेश को माफिया मुक्त और भय मुक्त बनाया है। जनसभा में इनकी रही मौजूदगी मंत्री वित्त एवं संसदीय कार्य सुरेश कुमार खन्ना, पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सहकारिता जेपीएस राठौर, राज्य मंत्री वन एवं पर्यावरण डा. अरुण कुमार, राज्यमंत्री गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग संजय सिंह गंगवार, सांसद बरेली छत्रपाल गंगवार, जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल, महापौर डॉ. उमेश गौतम, विधान परिषद सदस्य कुंवर महाराज सिंह, बहोरन लाल मौर्य, विधायक कैंट संजीव अग्रवाल, विधायक फरीदपुर डा. श्याम बिहारी लाल, विधायक बिथरी चैनपुर डॉ. राघवेंद्र शर्मा, विधायक मीरगंज डॉ. डीसी वर्मा, विधायक नवाबगंज डा. एमपी आर्य, भाजपा ब्रज प्रांत के क्षेत्रीय अध्यक्ष दुर्विजय सिंह शाक्य, जिला अध्यक्ष बरेली सोमपाल शर्मा, जिला अध्यक्ष आंवला आदेश प्रताप सिंह, महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना सहित अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी उपस्थित रहे।  

PM मोदी ने कहा- संस्कृत भाषा को आमजन तक पहुंचाने के लिए सरकार सक्रिय

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को विश्व संस्कृत दिवस पर अपने संदेश में कहा कि उनकी सरकार ने पिछले एक दशक में इस प्राचीन भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत ज्ञान और अभिव्यक्ति का एक शाश्वत स्रोत है तथा इसका प्रभाव हर क्षेत्र में देखा जा सकता है। मोदी ने कहा कि यह इस भाषा को सीखने और इसे लोकप्रिय बनाने के लिए प्रयासरत सभी लोगों के प्रयासों की सराहना करने का अवसर है। यह दिवस प्रतिवर्ष ‘श्रावण पूर्णिमा' के अवसर पर मनाया जाता है। प्रधानमंत्री ने इस संबंध में अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को सामने रखते हुए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना, संस्कृत शिक्षण केंद्रों की स्थापना, इस भाषा के विद्वानों को अनुदान देने और प्राचीन संस्कृत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए एक मिशन की शुरुआत जैसे विभिन्न उपायों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इससे अनगिनत विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को लाभ हुआ है। हिंदू महाकाव्यों समेत कई प्रभावशाली प्राचीन पुस्तकें संस्कृत में लिखी गई हैं। लेकिन संस्कृत अब ऐसी भाषा बनकर रह गई है जो बड़े पैमाने पर धार्मिक कार्यों में ही सीमित हो गई है।   

गौधाम योजना से पशुधन संरक्षण, नस्ल सुधार और रोजगार में आएगा नया आयाम – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : छत्तीसगढ़ में ‘गौधाम योजना’ की शुरुआत – पशुधन सुरक्षा, नस्ल सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल रायपुर में शुरू हुई ‘गौधाम योजना’, पशुधन सुरक्षा और ग्रामीण विकास को मिलेगी ताकत गौधाम योजना से पशुधन संरक्षण, नस्ल सुधार और रोजगार में आएगा नया आयाम – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और पशुधन संरक्षण को नई दिशा देने के लिए गौधाम योजना की शुरुआत करने जा रही है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल पशुधन की सुरक्षा और नस्ल सुधार को बढ़ावा देगी, बल्कि जैविक खेती, चारा विकास और गौ-आधारित उद्योगों के माध्यम से गांव-गांव में रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी। योजना का स्वरूप इस तरह तैयार किया गया है कि निराश्रित एवं घुमंतु गौवंशीय पशुओं की देखभाल के साथ-साथ चरवाहों और गौसेवकों को नियमित आय का स्थायी स्रोत उपलब्ध हो, जिससे ग्रामीण जीवन में आर्थिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता आ सके। गौधाम योजना के ड्राफ्ट को वित्त एवं पशुधन विकास विभाग से भी मंजूरी मिल चुकी है। गौधाम योजना का उद्देश्य गौवंशीय पशुओं का वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन करना, गौ-उत्पादों को बढ़ावा देना, चारा विकास कार्यक्रम को प्रोत्साहित करना, गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करना, ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना तथा फसलों के नुकसान और दुर्घटनाओं में पशु एवं जनहानि से बचाव सुनिश्चित करना है। अवैध तस्करी और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा पर विशेष फोकस* पशुधन विकास विभाग ने यह योजना विशेष रूप से तस्करी या अवैध परिवहन में पकड़े गए पशुओं और घुमंतु पशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की है। राज्य में अवैध पशु तस्करी एवं परिवहन पर पहले से रोक है। अंतरराज्यीय सीमाओं पर पुलिस कार्रवाई में बड़ी संख्या में गौवंशीय पशु जब्त होते हैं। इन पशुओं और घुमंतु पशुओं को सुरक्षित रखने के लिए ही यह योजना शुरू की जा रही है। प्रत्येक गौधाम में क्षमता के अनुसार अधिकतम 200 गौवंशीय पशु रखे जा सकेंगे। गौधाम योजना के तहत चरवाहों को 10,916 रुपए प्रतिमाह और गौसेवकों को 13,126 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। इसके साथ ही मवेशियों के चारे के लिए प्रतिदिन निर्धारित राशि प्रदान की जाएगी। उत्कृष्ट गौधाम को वहां रहने वाले प्रत्येक पशु के लिए पहले वर्ष 10 रुपए प्रतिदिन, दूसरे वर्ष 20 रुपए प्रतिदिन, तीसरे वर्ष 30 रुपए प्रतिदिन और चौथे वर्ष 35 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से राशि दी जाएगी। योजना के लिए बजट, नियम और शर्तें तय कर दी गई हैं, ताकि संचालन में किसी तरह की परेशानी न हो। मुख्यमंत्री साय – “पशुधन की सुरक्षा और गांवों में रोजगार बढ़ाएगी गौधाम योजना” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  कहा कि गौधाम योजना से प्रदेश में पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और बड़ी संख्या में चरवाहों एवं गौसेवकों को नियमित आय का साधन मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पशुओं की नस्ल सुधार कर उन्हें अधिक दूध देने और खेती-किसानी में पूरी क्षमता से उपयोग करने योग्य बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में जैविक खेती और चारा विकास कार्यक्रमों को भी गति मिलेगी, जिससे ग्राम स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गांवों की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। गौधाम की स्थापना के लिए चयनित होगी उपयुक्त शासकीय भूमि ऐसी शासकीय भूमि, जहां सुरक्षित बाड़ा, पशुओं के शेड, पर्याप्त पानी और बिजली की सुविधा उपलब्ध हो, वहीं गौधाम की स्थापना की जाएगी। जिन गौठानों में पहले से अधोसंरचना विकसित है, वहां उपलब्धता के आधार पर गौठान से सटे चारागाह की भूमि को हरा चारा उत्पादन के लिए दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि आसपास की पंजीकृत गौशाला की समिति संचालन हेतु असहमति व्यक्त करती है, तो अन्य स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी या सहकारी समिति संचालन के लिए आवेदन कर सकेगी। जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर गौधाम स्थापित किए जाएंगे, जो पंजीकृत गौशालाओं से भिन्न होंगे। पहले चरण में छत्तीसगढ़ के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गौधाम स्थापित किए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति प्राप्त आवेदनों का तुलनात्मक अध्ययन कर चयनित संस्था का नाम छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजेगी। मंजूरी के बाद चयनित संस्था और आयोग के बीच करार होगा, जिसके पश्चात गौधाम का संचालन उस संस्था को सौंपा जाएगा। गोबर खरीदी नहीं होगी, चारा विकास को मिलेगा प्रोत्साहन गौधाम में गोबर खरीदी नहीं होगी, पशुओं के गोबर का उपयोग चरवाहा स्वयं करेगा। यहां निराश्रित एवं घुमंतु गौवंशीय पशुओं को ही रखा जाएगा और उनका वैज्ञानिक पद्धति से संरक्षण एवं संवर्धन होगा। संचालन में गौशालाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य गौ सेवा आयोग में पंजीकृत गौशाला की समिति, स्वयंसेवी संस्था, एनजीओ, ट्रस्ट, किसान उत्पादक कंपनी और सहकारी समिति संचालन के लिए पात्र होंगी। गौधाम को वहां रहने वाले पशुओं की संख्या के आधार पर राशि दी जाएगी। गौधाम से सटी भूमि पर चारा विकास के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी—एक एकड़ में चारा विकास कार्यक्रम पर 47,000 रुपए और पांच एकड़ के लिए 2,85,000 रुपए का प्रावधान है। गौधाम बनेंगे प्रशिक्षण केंद्र, बढ़ावा मिलेगा गौ उत्पादों को प्रत्येक गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाएगा। संचालनकर्ता समिति या संस्था ग्रामीणों को गौ-उत्पाद विषय पर प्रशिक्षण देगी और उन्हें गौ-आधारित खेती के लिए प्रेरित करेगी। इसके साथ ही गोबर और गौमूत्र से केंचुआ खाद, कीट नियंत्रक, गौ काष्ठ, गोनोइल, दीया, दंतमंजन, अगरबत्ती आदि बनाने का प्रशिक्षण, उत्पादन और बिक्री के लिए भी गौधाम एक माध्यम बनेंगे।

मुख्यमंत्री ने आगर-मालवा में बहनों से बंधवाई राखी और दिये उपहार

पीकेसी नदी जोड़ो परियोजना से आगर-मालवा भी होगा लाभान्वित जिले के हरेक गांव और एक-एक खेत तक पहुंचेगा पानी जल्द ही रेल की सौगात भी मिलेगी आगर-मालवा को आगर-मालवा जिले को मिले दो आईएसओ प्रमाण-पत्र दिव्यांगजनों को बांटे सहायक उपकरण मुख्यमंत्री आगर मालवा जिले में रक्षाबंधन पर्व में हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश की सभी बहनें हमारा मान हैं, सम्मान हैं, अभिमान हैं। बहनों के बिना यह संसार सूना है। उन्होंने कहा कि जीवन तो नश्वर है, पर भाई-बहन का ये स्नेहिल रिश्ता शाश्वत है और आगे भी रहेगा। जब तक संसार है, यह अनमोल और अटूट रिश्ता भी अजर-अमर ही रहेगा। उन्होंने कहा कि हमने बहनों को उनका हर वाजिब हक दिलाया है। बहनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबकी राखी स्वीकार की और कहा कि आप सबके आशीर्वाद से ही मुझे प्रदेश के विकास के लिए प्राण-प्रण से जुटे रहने की असीम ऊर्जा मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को आगर मालवा जिले के बाबा बैजनाथ महादेव धाम में श्रावण पर्व के अवसर पर आयोजित भव्य रक्षाबंधन कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बहनों और दिव्यांगजनों के प्रति गहरा स्नेह, सम्मान और इनके प्रति अपनी संवेदनशीलता व्यक्त की। उन्होंने दिव्यांगजनों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक उपकरण भी वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी बहनों से राखी बंधवाई, उन्हें मिठाई खिलाई, उपहार दिए, सावन के झूले में झूलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रदेशवासियों को श्रावण एवं रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में देवी अहिल्या नारी शक्ति कल्याण मिशन चलाया जा रहा है। इस मिशन के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हमारी सरकार मिशन मोड पर तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे दिव्यांगजन परमात्मा के दिव्य अंश हैं। इन्हें परमेश्वर ने विशेष शक्तियों से नवाजा है। इन्हें सिर्फ़ प्रोत्साहन की जरुरत है और हमारी सरकार हर कदम पर इनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को शैक्षणिक मदद, पेंशन राशि या शासकीय सेवा में आरक्षण देने की बात हो, हमारी सरकार ने इनके समग्र कल्याण के लिए सभी पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए हैं। आने वाला समय महिलाओं का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहनें चिंता न करें, आने वाला समय महिलाओं का ही है। राज्य की विधानसभा हो या देश की लोकसभा सबमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ने वाला है। उन्होंने कहा कि भारतीय तीज-त्यौहारों में एक संदेश छूपा होता है, जो समझने की जरूरत है। हम कुटुंब परम्परा के संवाहक है। भाई-बहन इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हैं। बहनों के आशीष से हर घर में बरकत है। हमारे आनंद के मूल में बहनें ही हैं। बहनें दो घरों को रोशन करती हैं। वे दो कुलों को जोड़ती हैं, उन्हें पालती-पोसती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विरोधी लोगों की बातों में कभी न आएं। प्रदेश की कोई भी जनकल्याणकारी योजना बंद नहीं होगी। अभी बहनों को हर महीने 1250 रूपए मिल रहे हैं। इसी रक्षाबंधन को 250 रूपए शगुन के रूप में दिए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली दीपावली की भाईदूज से लाड़ली बहनों को हर महीने 1500 रूपए दिए जाएंगे। इसी तरह साल दर साल राशि बढ़ाते हुए वर्ष 2028 तक हमारी सरकार बहनों को 3000 रूपए महीने देगी। उन्होंने कहा कि बहनों के लिए सब कुर्बान है, बहनों के लिए हम कोई कमी नहीं कखेंगे। आगर-मालवा में हो रहा 4 हजार करोड़ रूपए का निवेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आगर-मालवा जिले की तकदीर और तस्वीर जल्दी बदलने वाली है। यहां करीब 4 हजार करोड़ की बड़ी राशि का निवेश हो रहा है। यहां आलू से जुड़े उत्पादों का बड़ा कारखाना स्थापित होने वाला है। इससे यहीं के लोगों को रोजगार मिलेगा। किसानों को उनके द्वारा उगाए जा रहे आलू की लागत से चार गुना ज्यादा कीमत मिलेगी। पीकेसी के बड़े लाभ का हिस्सा बनेगा आगर-मालवा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना का बड़ा लाभ आगर-मालवा जिले को भी मिलेगा। इससे जिले के हर एक गांव और कस्बे को पीने का पानी मिलेगा साथ ही यहां के एक-एक खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव से चर्चा हुई है। आगर-मालवा जिले को भी जल्द ही रेल की सौगत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इंदौर में मेट्रो रेल शुरू हो चुकी है, भोपाल में जल्द ही शुरू होने वाली है। इससे पहले रायसेन जिले में वंदे भारत और मेट्रो रेल के कोच बनाने की बीईएमएल की रोलिंग स्टॉक फैक्ट्री का भूमिपूजन होने जा रहा है। केन्द्रीय रक्षा मंत्री 10 अगस्त को इस फैक्ट्री का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हर्ष जताया कि आगर-मालवा जिले के थाना आगर-मालवा और एसडीओपी ऑफिस आगर-मालवा को आईएसओ प्रमाण-पत्र मिला है। कार्यक्रम में विधायक आगर-मालवा श्री माधौसिंह गेहलोत, शाजापुर विधायक श्री अरूण भीमावद, श्री ओम मालवीय सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में जिले के स्व-सहायता समूहों, प्रजापिता ब्रह्मकुमारी संस्थान की बहनें, खिलाड़ी बहनें और स्कूल की बेटियां/बहनें भी उपस्थित थीं।  

उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मिलेंगी अच्छी पुस्तकें, युवाओं के करियर निर्माण में अहम साबित होंगी सेंट्रल लाइब्रेरी

रायपुर : युवाओं के सपनों को लगेंगे पर, बनेंगे 34 नए नालंदा परिसर नगरीय प्रशासन विभाग ने नालंदा परिसरों के लिए मंजूर किए हैं 237.58 करोड़ सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सूरजपुर, बैकुंठपुर, चिरमिरी, कुनकुरी, जशपुर, बलरामपुर, पेंड्रा जैसे दूरस्थ शहरों में भी खुलेंगी सेंट्रल लाइब्रेरी युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मिलेगा अच्छा माहौल उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मिलेंगी अच्छी पुस्तकें, युवाओं के करियर निर्माण में अहम साबित होंगी सेंट्रल लाइब्रेरी नगरीय प्रशासन विभाग ने नालंदा परिसरों के लिए मंजूर किए हैं 237.58 करोड़ रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार उच्च शिक्षा हासिल कर रहे तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सपनों को पर देने 34 नए नालंदा परिसर बना रही है। ये नालंदा परिसर केवल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, रायगढ़ जैसे बड़े शहरों में ही नहीं बन रहे, बल्कि दूरस्थ वनांचलों के सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सूरजपुर, बैकुंठपुर, चिरमिरी, कुनकुरी, जशपुर, बलरामपुर, पेंड्रा जैसे शहरों में भी बन रहे हैं। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने पिछले दो वर्षों में 33 नए नालंदा परिसरों के लिए राशि स्वीकृत की है। वहीं रायगढ़ में सीएसआर से 700 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी का काम प्रगति पर है। इसके लिए रायगढ़ नगर निगम और एनटीपीसी (National Thermal Power Corporation) के बीच 42 करोड़ 56 लाख रुपए का करार हुआ है। यह प्रदेश का सबसे बड़ा नालंदा परिसर होगा।  इन सेंट्रल लाइब्रेरीज-सह-रीडिंग जोन्स से प्रदेशभर के युवाओं को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अच्छा माहौल मिलेगा। उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अच्छी पुस्तकें भी मिलेंगी। प्रदेश के हर वर्ग के युवाओं के करियर निर्माण में ये लाइब्रेरीज काफी मददगार और अहम साबित होंगे। इन सर्वसुविधायुक्त, अत्याधुनिक लाइब्रेरीज में युवाओं को ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई की सुविधा मिलेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने पिछले दो वर्षों में 33 नालंदा परिसरों के लिए 237 करोड़ 57 लाख 95 हजार रुपए मंजूर किए हैं। विभाग द्वारा चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 17 नगरीय निकायों में 18 नालंदा परिसरों के लिए 125 करोड़ 88 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। वहीं पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में अलग-अलग शहरों में 15 नालंदा परिसरों के लिए 111 करोड़ 70 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। इनमें से 11 नालंदा परिसरों के लिए निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर संबंधित निर्माण एजेंसीज को कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं। ये जल्द ही आकार लेना शुरू कर देंगे।  नगरीय प्रशासन विभाग ने 11 नालंदा परिसरों के लिए जारी किए 19.15 करोड़ उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद विभाग ने 11 नगरीय निकायों में नालंदा परिसरों के निर्माण के लिए प्रथम किस्त के रूप में कुल 19 करोड़ 14 लाख 87 हजार रुपए इसी महीने जारी किए हैं। विभाग द्वारा दुर्ग, राजनांदगांव और अंबिकापुर नगर निगम को प्रत्येक को दो करोड़ 85 लाख 57 हजार रुपए की प्रथम किस्त जारी की गई है। वहीं बलौदाबाजार, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा, कांकेर और जांजगीर नगर पालिका तथा कुनकुरी नगर पंचायत को प्रत्येक को एक करोड़ दस लाख 37 हजार रुपए प्रथम किस्त के रूप में जारी किए गए हैं। नालंदा परिसर के निर्माण के लिए जशपुर नगर पालिका को दो करोड़ 85 लाख 57 हजार रुपए की पहली किस्त जारी की गई है।  दस शहरों में 500 सीटर और 22 में 250 सीटर लाइब्रेरी बनेंगी राज्य के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के अनुकूल माहौल देने के लिए दस नगरीय निकायों में 500 सीटर और 22 शहरों में 250 सीटर लाइब्रेरी बनाए जाएंगे। दुर्ग, राजनांदगांव, अंबिकापुर, जगदलपुर, बिलासपुर और भिलाई नगर निगम तथा जशपुर, लोरमी एवं गरियाबंद नगर पालिका में 500-500 सीटर नालंदा परिसरों का निर्माण किया जाएगा। वहीं धमतरी और चिरमिरी नगर निगम, कवर्धा, जांजगीर-नैला, बालोद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, कांकेर, नारायणपुर, बलरामपुर, मुंगेली, खैरागढ़, सक्ती, पेंड्रा, सारंगढ़, सूरजपुर, बैकुंठपुर, दंतेवाड़ा एवं सुकमा नगर पालिका तथा कुनकुरी, बसना और अंबागढ़-चौकी नगर पंचायत में 250-250 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन बनाए जाएंगे।   रायपुर में अभी तीन लाइब्रेरी संचालित, दो और बनेंगे राजधानी रायपुर में अभी तीन सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन संचालित हैं। इनमें एक हजार सीटर नालंदा परिसर-सह-ऑक्सी रीडिंग जोन, 800 सीटर तक्षशिला सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-स्मार्ट रीडिंग जोन और 500 सीटर सेंट्रल लाइब्रेरी शामिल हैं। पिछले पांच वर्षों में नालंदा परिसर में पढ़ाई करने वाले 400 युवाओं ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित होकर न केवल अच्छी नौकरियां हासिल की हैं, बल्कि प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश भी प्राप्त किया है। रायपुर में जल्दी ही एक हजार सीटर और 500 सीटर नई लाइब्रेरी का काम प्रारंभ होगा। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा इनके लिए क्रमशः 22 करोड़ 80 लाख रुपए और 11 करोड़ 28 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं। नालंदा परिसर सिर्फ इमारत नहीं, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद – विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायपुर के नालंदा परिसर की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के सपनों को उड़ान देने का काम कर रही है। छत्तीसगढ़ के हर क्षेत्र के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिले, इसके लिए हम अलग-अलग क्षेत्र के शहरों में नालंदा परिसरों का निर्माण कर रहे हैं। सुकमा से लेकर सूरजपुर और रायगढ़ से लेकर कवर्धा तक – हर कोने में अत्याधुनिक सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-रीडिंग जोन खोले जा रहे हैं। ये नालंदा परिसर सिर्फ इमारत नहीं, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की बुनियाद हैं।  छत्तीसगढ़ सरकार युवाओं के सपनों को साकार करने सभी सुविधाएं मुहैया कराने प्रतिबद्ध – अरुण साव उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रदेशभर में नालंदा परिसरों के विस्तार के बारे में कहा कि सरकार युवाओं के सपनों को साकार करने सभी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सर्वसुविधायुक्त ये लाइब्रेरियां उच्च शिक्षा हासिल कर रहे तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को पढ़ाई का अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के साथ ही उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री भी प्रदान करेंगी। राज्य के युवाओं की मेहनत को उनके इच्छित मुकाम तक पहुंचाने में नालंदा परिसर बड़ी भूमिका निभाएंगे। यहां वे पूरे फोकस, लगन और समर्पण के साथ अपने लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।