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कुछ बड़ा होने की आशंका: भारत ने बांग्लादेश से अपने राजनयिकों के परिवारों को सुरक्षित वापस लाया

नई दिल्ली भारत और बांग्लादेश के बीच मौजूदा संबंधों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। यही वजह है कि भारत लगातार सतर्कता के साथ तेज निर्णय ले रहा है। माना जा रहा है कि बांग्लादेश में बड़े राजनीतिक बदलाव की आशंका को देखते हुए भारत ने अग्रिम तैयारी शुरू कर दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, बांग्लादेश में अब चुनाव महज कुछ दिनों की दूरी पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने चुनाव टालने की कोशिश की और कट्टरपंथी ताकतों को भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया, ताकि चीन और पाकिस्तान के साथ संबंधों को और मजबूत किया जा सके। लेकिन ये कोशिशें नाकाम रहीं। इसी बीच भारत ने एक अहम और चौंकाने वाला फैसला लिया है। भारत ने बांग्लादेश को नॉन-फैमिली स्टेशन घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों को अब अपने परिवार (पति-पत्नी या बच्चे) को साथ रखने की अनुमति नहीं होगी। पहले यह कैटेगरी सिर्फ इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान जैसे देशों के लिए थी। अब बांग्लादेश भी इस सूची में शामिल हो गया है। बताया जा रहा है कि भारतीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि उनके परिवारजन 8 जनवरी तक भारत लौट आएं। स्कूल जाने वाले बच्चों वाले परिवारों को 7 दिन की अतिरिक्त छूट दी गई। इस फैसले के अनुसार, 15 जनवरी तक ढाका समेत अन्य जगहों पर पोस्टेड राजनयिकों के अधिकांश परिवार भारत वापस लौट चुके हैं। हालांकि अभी तक विदेश मंत्रालय ने इस फैसले की कोई आधिकारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह कदम खुफिया रिपोर्ट्स और सुरक्षा आकलन के आधार पर उठाया गया है। यही कारण है कि देश दुनिया में इस फैसले की चर्चा हो रही है।

भारत में Apple पर संकट के बादल, सरकार की चेतावनी से बढ़ी टेंशन

  नई दिल्ली भारत की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था यानी कि Competition Commission of India (CCI) ने Apple को एक कड़ी चेतावनी जारी की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ऐपल 2021 से चल रही एंटीट्रस्ट जांच में देरी करने की कोशिश कर रही है। इससे नाराज होकर CCI ने कंपनी को आखिरी चेतावनी दी है। यह मामला इन ऐप पेमेंट से जुड़ा है और कंपनी पर 38 बिलियन डॉलर यानी कि लगभग 32 लाख करोड़ रुपये का जुर्माना लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐपल बार-बार जवाब देने में देरी कर रही है, जिससे जांच प्रक्रिया बाधित हो रही है। अब CCI ने साफ कर दिया है कि अगर अगले हफ्ते तक Apple ने जवाब नहीं दिया, तो वह एकतरफा कार्रवाई करेगी। क्या है पूरा मामला? भारत में ऐपल 2021 से एक एंटीट्रस्ट मामले में फंसी है, जो कि इन-ऐप पेमेंट से संबंधित है। इस कानूनी लड़ाई में कंपनी पर 38 बिलियन डॉलर का जुर्माना लग सकता है। वहीं ऐपल ने भारत के नए एंटीट्रस्ट दंड कानून को चुनौती दी है। दरअसल यह कानून CCI को जुर्माने की राशि तय करने के लिए ऐपल के ग्लोबल टर्नओवर का इस्तेमाल करने की मंजूरी देता है। इसके जवाब में CCI ने ऐपल से जांच पर अपनी आपत्तियां दर्ज करने के लिए कहा था। इस पर ऐपल को लंबे समय से मौका दिया जा रहा है। CCI की सख्त चेतावनी 31 दिसंबर 2025 एक आदेश में CCI ने कहा है कि साफ निर्देश के बाद भी बार-बार समय बढ़ाना सही नहीं है और इससे नियम-कानून कमजोर होते हैं। साथ ही ऐसा करने से मामले को समय पर खत्म करने में समस्या आती है। ऐपल को लेकर CCI का यह भी कहना है कि ऐसी छूट हमेशा के लिए नहीं दी जा सकती। अब CCI ने फैसला किया है कि अगर अगले हफ्ते तक Apple की ओर से जवाब नहीं मिलता, तो वह खुद ही आगे बढ़ेगी और फैसला लेगी। बता दें कि लंबे समय से ऐपल सरकारी आदेश के जवाब देने में सुस्ती दिखा रही है, जिससे मामले को आगे बढ़ाने में समस्या हो रही है। ऐपल का रुख और आगे क्या? रिपोर्ट के मुताबिक Apple का मानना है कि CCI अदालती कार्यवाही को रोकने की कोशिश कर रही है। इस मामले में अगली सुनवाई 27 जनवरी को है और इससे पहले ऐपल की ओर से CCI को जवाब दिया जाना संभव नहीं है। ऐसे में साफ है कि ऐपल अदालत के फैसले के इंतजार में है। हालांकि अगर Apple जवाब नहीं देती है, तो भारत सरकार सख्त कदम उठा सकती है और भारी जुर्माना लगा सकती है।

यूएई राष्ट्रपति का भारत आगमन आज तय, अहम समझौतों पर लग सकती है मुहर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आज भारत की आधिकारिक यात्रा पर आएंगे। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनकी तीसरी आधिकारिक भारत यात्रा होगी और पिछले एक दशक में उनकी पांचवीं भारत यात्रा होगी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सौहार्दपूर्ण, घनिष्ठ और बहुआयामी संबंध हैं, जो मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों पर आधारित हैं। व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए), स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) प्रणाली और द्विपक्षीय निवेश संधि द्वारा समर्थित ये संबंध दोनों देशों के शीर्ष व्यापारिक और निवेश साझेदारों में से हैं। भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच एक मजबूत ऊर्जा साझेदारी भी है, जिसमें दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्थाएं शामिल हैं। यह दौरा दोनों नेताओं को भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिए नए आयाम स्थापित करने का अवसर प्रदान करेगा। इससे पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी संभव होगा, जहां भारत और यूएई के बीच उच्च स्तर की समानताएं हैं। अमेरिका से तनाव के बीच भारत और यूएई के बीच होगी कोई बड़ी डील? अमेरिका से तनाव के बीच भारत को कई देशों से बड़ी उम्मीद है। अब यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के आने के बाद किस तरह की डील होती है, इसपर आधिकारिक घोषणा के बाद ही पता चलेगा। लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से मिली सूचना के आधार पर ऊर्जा के क्षेत्र में कोई बड़ा समझौता हो सकता है। यूएई और भारत के बीच पहले से रहे हैं मजबूत संबंध बता दें कि यूएई और भारत एक-दूसरे के लिए बड़े व्यापारिक भागीदार और निवेशक हैं। दोनों देशों के बीच CEPA यानी व्यापार समझौता जिससे द्विपक्षीय व्यापार करना आसान हुआ है। LCS यानी स्थानीय मुद्रा प्रणाली, इसके तहत दोनों देश अपनी खुद की करेंसी में लेनदेन कर सकते हैं। निवेश संधि, इससे एक-दूसरे के देश में पैसा लगाना सुरक्षित हुआ है।

हरविन्द्र कल्याण का बयान: 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका

चंडीगढ़  हरियाणा विधान सभा में  राजधानी युवा संसद संस्था के सहयोग से दो दिवसीय ‘हरियाणा युवा संवाद’ का दूसरा संस्करण शुरू हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विधान सभा अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम में 13 राज्यों से 65 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। इस अवसर राष्ट्रगान का भी वादन हुआ। विस अध्यक्ष हरविन्द्र कल्याण ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने लंबे समय तक गुलामी के कठिन दौर को झेला है, जिसके दौरान हमारी समृद्ध संस्कृति और मूल्यों को भी नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। इसके बावजूद भारत आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है। यह हमारे संविधान की शक्ति और देशवासियों की एकजुटता का प्रमाण है। संविधान हमें यह सिखाता है कि भारत की असली ताकत यहां के लोग हैं।  हम सभी को मिलकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के विजन को साकार करना है। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहां अलग-अलग भाषाएं, परंपराएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन इन सबके बीच एक साझा लक्ष्य है- राष्ट्र और प्रदेश की प्रगति। देश की विभिन्न विधानसभाओं में भले ही राज्यों की भाषाएं अलग हों, लेकिन सभी जनप्रतिनिधियों का उद्देश्य समाज के हर वर्ग के लिए प्रभावी और कल्याणकारी योजनाएं बनाना होता है। जनता की कठिनाइयां दूर करना व उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति असली ध्येय है। कल्याण ने युवाओं को कहा कि आज वे उसी विधान सभा भवन में बैठे हैं, जहां से प्रदेश के अनेक दिग्गज विधायकों और नेताओं ने कानून निर्माण से लेकर हरियाणा के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यहां उपस्थित युवा भविष्य में जनप्रतिनिधि का अवसर पाकर लोकतांत्रिक परंपराओं को आगे बढ़ाएंगे और सदन में सक्रिय व सार्थक चर्चाओं में भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों की विविधता स्वाभाविक है, लेकिन युवाओं को चाहिए कि वे सकारात्मक सोच के साथ समाधान की दिशा में आगे बढ़ें, ताकि समाज और देश को नई दिशा मिल सके। विधान सभा अध्यक्ष ने कहा कि यदि देश को आगे बढ़ाना है तो महिलाओं को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से मजबूत करना अनिवार्य है। इसी उद्देश्य से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक विधेयक पारित किया गया है। दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट के अपने अनुभव साझा करते हुए हरविन्द्र कल्याण ने बताया कि वहां कई देशों के स्पीकर इस बात से हैरान थे कि भारत सैकड़ों भाषाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद इतनी मजबूती से आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में विधायक पूजा चौधरी, हरियाणा विधान सभा अध्यक्ष के सलाहकार राम नारायण यादव, हरियाणा युवा संवाद के सह-संस्थापक जय सैनी और ईशा कपूर ने भी युवाओं को संबोधित करते हुए स्वाधीनता आंदोलन, संविधान सभा के अनुभव, लोकतांत्रिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और युवाओं की भूमिका पर विचार रखे। कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रश्नकाल आयोजित किया गया। इसके बाद दो विशेष सत्र संपन्न हुए। पहले सत्र में ‘हरियाणा का सतत विकास : औद्योगिक विस्तार पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग’ विषय पर गहन चर्चा हुई। दूसरे सत्र में औद्योगिक विस्तार की आवश्यकता, इसके समक्ष चुनौतियां और विजन 2030 की प्राप्ति हेतु आवश्यक कदम के संदर्भ में हरियाणा औद्योगिक नीति-2025 पर विस्तार से चर्चा की गई।

ईरान में युद्ध की संभावना, 10 हजार भारतीयों की जान पर बन आई, कश्मीरी छात्रों के माता-पिता का भावुक निवेदन

 नई दिल्ली ईरान में बीते दो हफ्तों से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने वहां की आंतरिक स्थिति को बेहद अस्थिर बना दिया है. हर दिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मृतकों की संख्या 2,000 से अधिक हो चुकी है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स इसे 3,000 से भी ज्यादा बता रही हैं. इस संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ा है. बुधवार को ईरान ने अचानक अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, जिससे भारत, यूरोप समेत उत्तरी अमेरिका के बीच उड़ानें बाधित हो गईं.  एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइंस को रूट बदलने पड़े हैं, जिससे यात्रियों को देरी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. दोनों विमान कंपनियों ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि कि रूट में बदलाव करना पड़ा है और कई फ्लाइट्स को कैंसिल करना पड़ा है. कश्मीरी छात्रों समेत 10 हजार भारतीय संकट में ईरान में इस समय करीब 10,000 से 12,000 भारतीय मूल के लोग मौजूद हैं. इनमें बड़ी संख्या छात्रों की है, जिनमें लगभग दो से तीन हजार कश्मीरी छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं.  जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने इन छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है. बार-बार इंटरनेट बंद होने और हिंसक प्रदर्शनों के चलते इन छात्रों से संपर्क करना मुश्किल हो गया है, जिससे उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है. भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी है. हालांकि छात्रों और उनके संगठनों का कहना है कि अब तक किसी निकासी योजना की घोषणा नहीं की गई है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है. वहीं, पैरेंट्स सरकार से उनके बच्चों को निष्कासन में मदद की अपील कर रहे हैं. इस अशांति का असर व्यापार पर भी दिख रहा है. पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत-ईरान व्यापार में भारी गिरावट आ चुकी है. मौजूदा हालात में शिपिंग रूट्स और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से भारत के व्यापार घाटे पर और दबाव पड़ सकता है. आंकड़ों के अनुसार, 2019 में ईरान और भारत के बीच $17.6 बिलियन का व्यापार हुआ करता था, जो कि 2024 में घटाकर महज़ $2.3 बिलियन रह गया है. ख़ास बात ये है कि भारत के कुल व्यापार का महज़ 0.2 फीसदी व्यापार ईरान के साथ होता है. हालांकि, शिपिंग रूट बाधित होने की वजह से व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है. चाबहार पोर्ट परियोजना खतरे में: भारत की सामरिक योजना पर बड़ा संकट भारत की सामरिक महत्व की चाबहार बंदरगाह परियोजना, जिसमें लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है, अब गंभीर खतरे में दिखाई दे रही है. यह बंदरगाह भारत के लिए पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचने का एक अहम गेटवे है. चाबहार बंदरगाह भारत की रणनीतिक कोशिशों में केंद्रीय स्थान रखता है, लेकिन वहां की वर्तमान अस्थिर राजनीतिक और आर्थिक स्थिति इस परियोजना को प्रभावित कर रही है. बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट एक प्रमुख चिंता का विषय भारत के बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट है. ईरान, जो भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा विदेशी बाजार रहा है, ने इस व्यापार में भी ठहराव देखा है. 2018-19 में भारत का ईरान को निर्यात लगभग 3.51 बिलियन डॉलर था, जो अब 2024-25 में घटकर केवल 1.24 बिलियन डॉलर रह गया है. इससे भारतीय किसानों और निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है. क्षेत्रीय संतुलन और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी पर असर क्षेत्रीय राजनीतिक स्थिति की अनिश्चिता भारत की पश्चिम एशिया नीति के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. भारत ने हमेशा ईरान, सऊदी अरब और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो सके.  चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान के चीनी-प्रायोजित ग्वादर बंदरगाह से मात्र 92 समुद्री मील की दूरी पर है और भारत की रणनीतिक उपस्थिति का प्रतीक है. अगर इस क्षेत्र में अशांति बनी रहती है, तो भारत की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी कमजोर हो सकती है और चीन-पाकिस्तान के प्रभाव में वृद्धि हो सकती है. इसलिए, भारत के लिए यह जरूरी है कि वह चाबहार परियोजना को स्थिर बनाए रखने के लिए अपनी कूटनीतिक और आर्थिक रणनीतियों को और मज़बूत करे, ताकि क्षेत्रीय संतुलन और अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को कायम रखा जा सके.

भारत में T20 विश्व कप खेलने से बांग्लादेश का इनकार, ICC से बदला वेन्यू चाहा

ढाका बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने फैसला किया है कि वह टी20 विश्व कप के लिए अपनी टीम भारत नहीं भेजेगा। भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद उस वक्त से गरमा गया है जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने कहा था। अब बांग्लादेश के एक समाचार वेबसाइट द डेली स्टार के अनुसार, बीसीबी ने टी20 विश्व कप के लिए भारत की यात्रा करने से इनकार कर दिया है। खेल मंत्रालय ने बीसीबी को दिए थे निर्देश इससे पहले, बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के खेल मंत्री ने बीसीबी को निर्देश दिया था कि वह आईसीसी से बांग्लादेश के मुकाबले श्रीलंका में आयोजित करने की मांग उठाने कहा था। बांग्लादेश के खेल मंत्रालय का मानना है कि मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बीसीबी के अध्यक्ष और बांग्लादेश के पूर्व कप्तान अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने के बाद बोर्ड की आपातकालीन बैठक बुलाई थी। चार लीग मैच बांग्लादेश को भारत में खेलने हैं बांग्लादेश को अपने चार लीग मैच में से तीन कोलकाता और एक मुंबई में खेलना है। बांग्लादेश के लीग मैच वेस्टइंडीज (सात फरवरी), इटली (नौ फरवरी) और इंग्लैंड (14 फरवरी) के खिलाफ कोलकाता में और नेपाल (17 फरवरी) के खिलाफ मुंबई में है। बांग्लादेश को ग्रुप सी में इटली, नेपाल, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के साथ रखा गया है। आईपीएल का विवाद आईसीसी तक पहुंचा दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने से शुरू हुई।  केकेआर ने पिछले महीने मिनी नीलामी में मुस्तफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। लेकिन बीसीसीआई के निर्देश पर केकेआर ने इस बांग्लादेशी गेंदबाज को टीम से बाहर कर दिया। मुस्तफिजुर को लेने पर भारत में विरोध हो रहा था और कई राजनेताओं तथा कथावाचक ने इसे लेकर केकेआर के मालिका शाहरुख खान को घेरा था। मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद बीसीबी बौखला गया है और यही कारण है कि उसने भारत में अपनी टीम भेजने से इनकार कर दिया है। हालांकि, इस पर आखिरी फैसला क्रिकेट की वैश्विक संस्था आईसीसी को लेना है जिसके अध्यक्ष जय शाह हैं। बीसीसीआई की भी आई थी प्रतिक्रिया बांग्लादेश के खेल मंत्रालय ने जब बीसीबी को टी20 विश्व कप मैच भारत के बजाए श्रीलंका में कराने की बात कही थी तो इस पर बीसीसीआई की भी प्रतिक्रिया आई थी। बीसीसीआई सूत्र ने कहा था कि सूत्र ने कहा था, आप किसी की मनमर्जी पर खेल का प्रारूप नहीं बदल सकते। यह एक बहुत बड़ी समस्या है। विपक्षी टीमों के बारे में सोचिए। उनके हवाई टिकट, होटल सब बुक होते हैं। साथ ही हर दिन तीन-तीन मैच होने हैं, यानी एक मैच श्रीलंका में होना है। प्रसारण दल भी मौजूद है। इसलिए यह कहना आसान है, करना मुश्किल। कार्यक्रम में अब बदलाव असंभव है क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने में एक महीने का समय बचा है।

बांग्लादेश में संकट, यूनुस की जिद के कारण ₹9 हजार करोड़ का नुकसान, भारतीय सूत पर रोक के बावजूद समस्या बरकरार

नई दिल्ली भारत से दुश्मनी का बांग्लादेश अब खामियाजा भुगतने लगा है. मोहम्मद यूनुस के भारत से पंगा लेने का नुकसान बांग्लादेशियों को खूूब हो रहा है. भारत के कारण बांग्लादेश को 9 हजार करोड़ रुपए का चूना लगने वाला है. जी हां, बांग्लादेश की स्थानीय कताई मिलें गंभीर संकट का सामना कर रही हैं. भारतीय सस्ते सूत की वजह से बंगलादेश की मिलों के पास करीब 9 हजार करोड़ रुपए का बिना बिका स्टॉक जमा हो गया है. बांग्लादेश को 9 हजार करोड़ रुपए के सूत का कोई खरीददार नहीं मिल रहा है. बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन के मुताबिक, मौजूदा वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत से सूत का आयात 137 प्रतिशत बढ़ गया है. भारतीय व्यापारी घरेलू कीमतों से 0.30 डॉलर प्रति किलोग्राम से भी कम दाम पर सूत बांग्लादेश में बेच रहे हैं. इसके चलते प्रतिस्पर्धा में टिक न पाने के कारण लगभग 50 स्थानीय स्पिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं. भारत पर बैन का क्या मकसद? दरअसल, बांग्लादेश मिल्स एसोसिएशन भारतीय सूत पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है. इन लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर हम भारतीय सूत पर ज्यादा निर्भर रहे और भारत अचानक आपूर्ति बंद कर दे, तो हमारा परिधान उद्योग भी मुश्किल में पड़ सकता है. अब इसी का असर बांग्लादेश पर उल्टा पड़ रहा है. बांग्लादेश ने क्या फैसला लिया था? गौरतलब है कि अप्रैल में बांग्लादेश ने लैंड पोर्ट के जरिए भारत से सूत आयात पर प्रतिबंध लगाया था, ताकि घरेलू उद्योग को संरक्षण मिल सके. हालांकि, यह प्रतिबंध समुद्री मार्ग से होने वाले आयात पर लागू नहीं होता. बावजूद इसके भारत के सस्ते सूत से बांग्लादेश की कताई मिलें संकट में आ गई है. बांग्लादेश के मिल मालिकों की नहीं सुन रहे यूनुस हालांकि, बांग्लादेश के मिल मालिकों ने कहा है कि वे भारतीय सूत पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं चाहते, बल्कि द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन कम करने की मांग कर रहे हैं, जो फिलहाल भारत के पक्ष में है…इसके अलावा मिल मालिक उन किस्मों के सूत के आयात पर रोक लगाने की मांग की, जिनका उत्पादन देश में पर्याप्त मात्रा में हो रहा है…     बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन चाहता है कि बांग्लादेश की सरकार कपास व्यापारियों के लिए वेयरहाउसिंग की सुविधा दे ताकि अमेरिकी कपास का भंडारण कर स्थानीय मिलों में उपयोग किया जा सके. क्योंकि ये वादा पारस्परिक टैरिफ वार्ताओं के दौरान किया गया था. भारत का माल है सस्ता अन्य मिल मालिकों ने बताया कि वे भारतीय सूत से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं, जहां भारतीय सूत 2.50 डॉलर प्रति किलोग्राम बिक रहा है, वहीं कच्चे माल, खासकर कपास की कमी के कारण स्थानीय मिलों को सूत 3 डॉलर प्रति किलोग्राम में बेचना पड़ रहा है. क्यों इंटरनेशनल ब्रांड भी भारतीय सूत की रखते हैं चाहत सस्ते दामों के कारण अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी भारतीय सूत को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बांग्लादेश का स्पिनिंग सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान आयात 950 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 137 प्रतिशत अधिक है…बांग्लादेश अब भारतीय सूत का सबसे बड़ा आयातक बन चुका है और कुल आयात का 44 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है. बांग्लादेश में कितनी मिलें बंद? उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि भारत कपास किसानों से लेकर फैक्ट्रियों और निर्यातकों तक कई स्तरों पर प्रोत्साहन देता है, जिससे भारतीय सूत बेहद प्रतिस्पर्धी बन गया है. बांग्लादेश में करीब 40-50 मिलें बंद हो चुकी हैं और कई और बंद होने की कगार पर हैं. श्रम कानून में संशोधन से भी अशांति बढ़ सकती है. BTMA ने बांग्लादेश सरकार से 72 घंटे के भीतर नीतिगत समर्थन देने की अपील की है और कहा कि 25 प्रतिशत नकद प्रोत्साहन, बैक-टू-बैक एलसी सुविधा और EDF के जरिए यह क्षेत्र अब भी संभल सकता है.

भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में तनाव, प्रधानमंत्री ने FTA वादे पर जताई नाराजगी

नई दिल्ली न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का स्वागत करते हुए इसे अपनी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई थीं और इसका विरोध किया था। प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा, “हमने अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ FTA करने का वादा किया था और हमने उसे पूरा कर दिया है।” उन्होंने इस समझौते को आर्थिक विकास के लिए अहम बताते हुए कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर, आय में वृद्धि और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। लक्सन के अनुसार, यह समझौता 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं के विशाल बाजार के दरवाजे न्यूजीलैंड के लिए खोलेगा। लक्सन ने इसे अपनी सरकार के व्यापक एजेंडे से जोड़ते हुए कहा कि यह समझौता बुनियादी सुधार और भविष्य के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है। सत्तारूढ़ गठबंधन में मतभेद हालांकि, इस समझौते ने न्यूजीलैंड की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के भीतर मतभेद भी उजागर कर दिए हैं। विदेश मंत्री और न्यूजीलैंड फर्स्ट (NZF) पार्टी के नेता विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को न तो मुक्त और न ही निष्पक्ष करार दिया। पीटर्स ने कहा कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को अपनी पार्टी की चिंताओं से अवगत कराया है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह जयशंकर का पूरा सम्मान करते हैं। पीटर्स ने आरोप लगाया कि समझौते में गुणवत्ता से अधिक रफ्तार को प्राथमिकता दी गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “न्यूजीलैंड फर्स्ट ने अपने गठबंधन सहयोगी को चेतावनी दी थी कि भारत के साथ कमजोर और जल्दबाजी में किया गया समझौता न किया जाए।” उनका कहना था कि सरकार को पूरे संसदीय कार्यकाल का उपयोग कर एक बेहतर और संतुलित समझौता करना चाहिए था, जो दोनों देशों के नागरिकों के हित में होता। डेयरी सेक्टर सबसे बड़ा विवाद इस समझौते को लेकर सबसे बड़ा विवाद डेयरी उद्योग को लेकर है। पीटर्स ने आरोप लगाया कि न्यूजीलैंड ने भारत के लिए अपना बाज़ार खोल दिया, लेकिन बदले में भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड के डेयरी उत्पादों जैसे दूध, पनीर और मक्खन पर टैरिफ में कोई ठोस रियायत नहीं मिली। उन्होंने कहा, “यह समझौता न्यूजीलैंड के किसानों के लिए अच्छा नहीं है और ग्रामीण समुदायों के सामने इसका बचाव करना असंभव है।” यह FTA इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बातचीत के बाद घोषित किया गया था। दोनों नेताओं ने कहा कि यह समझौता अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर सकता है और अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर तक का निवेश ला सकता है। वर्ष 2024 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच कुल व्यापार 2.07 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 1.1 अरब डॉलर था। भारत से प्रमुख निर्यातों में दवाइयां शामिल हैं, जबकि न्यूजीलैंड से कृषि और वानिकी उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। भारत सरकार के अनुसार, न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पीटर्स ने यह भी आरोप लगाया कि यह समझौता व्यापार से ज्यादा भारतीय श्रमिकों की आवाजाही और भारत में निवेश बढ़ाने पर केंद्रित है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय नागरिकों के लिए एक नया रोजगार वीजा श्रेणी बनाई गई है, जो ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन जैसे साझेदारों को नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “न्यूजीलैंड फर्स्ट हर प्रवासन नीति को इस कसौटी पर परखता है कि क्या वह स्थानीय लोगों के रोजगार और आव्रजन प्रणाली की अखंडता की रक्षा करती है।” पीटर्स के मुताबिक, भारत के साथ किया गया यह समझौता उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता, खासकर ऐसे समय में जब न्यूजीलैंड का श्रम बाज़ार पहले से ही दबाव में है।

कैसे भारत बनेगा AI का केंद्र: 2030 तक लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार

नई दिल्ली केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा को बताया कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में स्किल्स के मामले में दुनिया के सबसे अच्छे देशों में शामिल है। उन्होंने स्टैनफोर्ड AI इंडेक्स रिपोर्ट 2025 का हवाला देते हुए कहा कि भारत AI प्रतिभा को अपनी ओर खींचने में पूरी दुनिया में पहले नंबर पर है। हर साल भारत में AI से जुड़ी नौकरियों में करीब 33% की बढ़ोतरी हो रही है। साल 2016 से अब तक भारत में AI प्रतिभा की संख्या तीन गुना से ज्यादा हो गई है। सरकार का मानना है कि AI से भारत मजबूत बनेगा और हर क्षेत्र में फायदा होगा। सरकार की एआई को लेकर प्लानिंग ANI की रिपोर्ट (Ref.) के मुताबिक, मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत सरकार इस बात को अच्छी तरह समझती है कि जैसे-जैसे अलग-अलग क्षेत्र में AI का इस्तेमाल होगा, वैसे-वैसे अधिक स्किल वाले लोगों की जरूरत होगी। सरकार अपनी AI योजनाओं को इसी दिशा में बना रही है। दुनिया भर की रिपोर्ट्स भी भारत के AI कर्मचारियों की तारीफ कर रही हैं। 2027 तक दोगुना होगा एआई टैलेंट बेस अनुमान है कि भारत में AI का टैलेंट बेस 2027 तक दोगुने से ज्यादा हो जाएगा। हर साल करीब 15 प्रतिशत की दर से यह बढ़ोतरी होगी। भारत के AI एक्सपर्ट्स की बढ़ती संख्या का असर दुनिया भर में दिख रहा है। गिटहब पर AI प्रोजेक्ट्स में भारत का योगदान 2024 में दूसरा सबसे बड़ा था, जो कुल प्रोजेक्ट्स का 19.9 प्रतिशत था। इससे साफ पता चलता है कि भारत के AI डेवलपर्स कितने मजबूत हैं। भारत का IndiaAI मिशन मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये आंकड़े भारत सरकार के बड़े स्तर पर AI कौशल, रिसर्च और नवाचार पर ध्यान देने का नतीजा हैं। IndiaAI मिशन के तहत सरकार कई बड़े कदम उठा रही है। इसमें 500 पीएचडी विद्वानों, 5,000 पोस्टग्रेजुएट और 8,000 ग्रेजुएट छात्रों को AI से जुड़े काम के लिए मदद दी जा रही है। छोटे शहरों में 27 IndiaAI डेटा और AI लैब्स बनाए गए हैं, जहां डेटा तैयार करने करने जैसे कोर्स चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, 174 आईटीआई और पॉलिटेक्निक में भी ऐसे लैब्स बनाए जा रहे हैं। ये सब काम दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में हो रहा है ताकि हर जगह के युवाओं को मौका मिले। 2030 तक 1 करोड़ लोग एआई से जुड़े का करेंगे सरकार नासकॉम के साथ मिलकर युवाओं को AI, बिग डेटा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी नई स्किल्स की ट्रेनिंग दे रही है। ये कोर्स राष्ट्रीय कौशल मानकों से जुड़े हैं। प्लेटफॉर्म पर 500 से ज्यादा कोर्स हैं। अब तक 16 लाख से ज्यादा लोग इन कोर्स में नामांकन कर चुके हैं या ट्रेनिंग ले चुके हैं। इसके अलावा एक फ्री नेशनल कोर्स 'युवा AI फॉर ऑल' शुरू किया गया है, जो हर किसी को AI की बेसिक जानकारी देता है। नासकॉम की रिपोर्ट कहती है कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल कौशल वाला टैलेंट पूल है। साल 2030 तक भारत 80 से 100 लाख लोगों को AI से जुड़े कामों के लिए तैयार कर सकता है।

भारत के खिलाफ नई चाल! बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश की साजिश का खुलासा

नई दिल्ली बांग्लादेश में जहां एक ओर जमीनी स्तर पर भारत विरोधी प्रदर्शन तेज हो रहे हैं. ठीक इसी तरह समुद्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. पिछले दो महीने से भारत ने एक तरह के असामान्य पैटर्न को नोटिस किया है. बंगाल की खाड़ी में लगातार बड़ी संख्या में बांग्लादेश की मछली पकड़ने वाली नौकाएं भारतीय जलसीमा में प्रवेश कर रही हैं.  यह मामला 15 दिसंबर को उस समय सुर्खियां बटोरी, जब बांग्लादेश नौसेना के एक गश्ती पोत ने 16 मछुआरों को ले जा रहे एक भारतीय ट्रॉलर को टक्कर मार दी, जिससे वह पलट गया. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाएं तेज हो गई हैं. शेख हसीना सरकार के तख्तापलटन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ने विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी से भारत मे अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है. यूनुस पहले यह दावा भी कर चुके हैं कि बांग्लादेश पूरे क्षेत्र में महासागर का संरक्षक है, जिसे लेकर भारत में असहजता है. इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास मछली पकड़ने वाले भारतीय मछुआरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं. सोमवार को तनाव उस समय और बढ़ गया जब आरोप लगा कि बांग्लादेश नौसेना के एक जहाज ने सीमा के पास पश्चिम बंगाल के 16 मछुआरों को ले जा रहे भारतीय ट्रॉलर को टक्कर मार दी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेशी जहाज की लाइटें बंद थीं, जिससे रात में भारतीय ट्रॉलर उसे देख नहीं सका. FB Parmita नाम का यह ट्रॉलर पलट गया, जिससे सभी मछुआरे समुद्र में जा गिरे. सुबह करीब 6 बजे भारतीय तटरक्षक बल ने 11 मछुआरों को बचाया. पांच अब भी लापता हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक मछुआरे की भाले जैसे हथियार से हत्या कर दी गई. बचे हुए मछुआरों ने आरोप लगाया है कि ट्रॉलर पर सवार सभी लोगों को मारने की कोशिश की गई.  बांग्लादेशी जहाज ने उस समय टक्कर मारी जब मछुआरे जाल डालने की तैयारी कर रहे थे. एक मछुआरे ने बताया कि राजदुल अली शेख नामक व्यक्ति को भाले से मारा गया. सुंदरबन मरीन फिशरमैन वर्कर्स यूनियन की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. हालांकि, भारतीय तटरक्षक बल ने अब तक यह पुष्टि नहीं की है कि भारतीय ट्रॉलर ने समुद्री सीमा पार की थी या बांग्लादेश नौसेना का जहाज भारतीय जलसीमा में दाखिल हुआ था. उधर, बांग्लादेश ने इन रिपोर्टों को भ्रामक बताते हुए दावा किया है कि उसका गश्ती पोत घटनास्थल से 12 मील दूर था. इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है. विदेश मामलों के विशेषज्ञ रमन मूर्ति ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि यह उकसावा है. वे भारत के साथ टकराव चाहते हैं. यही उनके दयनीय अस्तित्व का एकमात्र रास्ता है.  एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि यह पूरी तरह पूर्व-नियोजित उकसावा है, जिसका मकसद हमें फंसाना है. भारतीय जलसीमा में बांग्लादेशी नौकाएं यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं की भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में घुसपैठ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. 16 दिसंबर को ही भारतीय तटरक्षक बल ने दो बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भारतीय जलसीमा में घुसने के आरोप में पकड़ा.  यह कोई अकेली घटना नहीं है. बीते कुछ महीनों में भारत कम से कम आठ बांग्लादेशी नौकाओं और करीब 170 मछुआरों को पकड़ चुका है. भारत-विरोधी भावनाओं के साथ इन घटनाओं का बार-बार होना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है. भारत-विरोधी बयानबाजी में तेजी बांग्लादेश में चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से इस तरह की गतिविधियों में इजाफा हुआ है. बांग्लादेश सरकार के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ने न सिर्फ पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ाई हैं, बल्कि कट्टरपंथी इस्लामी समूहों और पहले प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों को भी जगह दी है. इसी बीच, नवंबर में पाकिस्तान नौसेना प्रमुख ने बांग्लादेश का तीन दिवसीय दौरा किया. 1971 के बाद पहली बार किसी पाकिस्तानी नौसेना का कोई अधिकारी बांग्लादेश के उच्चस्तरीय दौरे पर रहा. एक संसदीय समिति ने यहां तक कहा है कि ढाका में पाकिस्तान और चीन के बढ़ते प्रभाव के चलते भारत को 1971 के युद्ध के बाद से सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. शुक्रवार को बांग्लादेश में एक बार फिर भारत-विरोधी प्रदर्शन और हिंसा देखने को मिली. यह हिंसा कट्टरपंथी नेता और भारत विरोधी बयानबाजी  के लिए कुख्यात शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की, जिसे नकाबपोश हमलावरों ने गोली मार दी थी.