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ईरान को 48 घंटे की जंग में हुआ कितना नुकसान? 48 नेता, 40 कमांडर, 9 नेवल शिप की कीमत पर मिडिल ईस्ट में फ्रांस की एंट्री

तेहरान / न्यूयॉर्क अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान ईरान को 48 घंटे में भारी नुकसान हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि इन हमलों में 48 ईरानी नेता मारे गए हैं. उन्होंने कहा, 'यह तेजी से आगे बढ़ रहा है. कोई विश्वास नहीं कर सकता कि हमने कितनी सफलता हासिल की है, एक ही हमले में 48 नेता खत्म हो गए.' ट्रंप ने यह बात फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू में कही. वहीं इजरायल की सेना (IDF) ने कहा कि इस हमले में 40 'महत्वपूर्ण' ईरानी सैन्य कमांडर मारे गए हैं, जिनमें ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ, अब्दुलरहीम मौसावी भी शामिल हैं. IDF के अनुसार, यह कार्रवाई खामेनेई पर हमले के तुरंत बाद हुई. नौ ईरानी युद्धपोत डूबे ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी सेनाएं ईरान की नौसेना को बेअसर करने में लगी हैं और अब तक नौ ईरानी युद्धपोत डूब चुके हैं. उन्होंने कहा, 'वे जल्दी ही समुद्र की तलहटी पर तैरेंगे!' उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरानी नौसेना मुख्यालय को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत ईरानी सैन्य बलों ने जवाब में सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. अमेरिकी सेना ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में अब तक तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं. अमेरिकी सेनाध्यक्षों के अनुसार, ईरान के खिलाफ संयुक्त अमेरिकी-इजरायली ऑपरेशन ने देश के कई प्रमुख सैन्य और राजनीतिक नेताओं को खत्म कर दिया, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे. USS अब्राहम लिंकन पर हमले का दावा खारिज यह संघर्ष अब पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में फैल गया है. ईरानी मिसाइलों ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन को निशाना बनाया. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार को दावा किया कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि मिसाइलें कैरियर के पास तक भी नहीं पहुंच सकीं और कैरियर अभी भी क्षेत्र में संचालन कर रहा है. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए ईरान पर भीषण हमले किए जो तीसरे दिन भी जारी हैं. इसके जवाब में ईरान ने भी कई देशों में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में टकराव बढ़ता जा रहा है.  दूसरी तरफ खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने भी अपने तेवर से बता दिया है कि वो रुकने वाला नहीं है. ईरान की जामकरान मस्जिद पर इंतकाम का लाल झंडा फहराया गया है. ईरान ने जवाबी हमले में 'करारा' जवाब देने का दावा करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. मिडिल ईस्ट के देशों ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं, जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें गैर-ज़रूरी मूवमेंट से बचने के लिए कहा गया है.  पाकिस्तान में US दूतावास अलर्ट पर अमेरिकी दूतावास इस्लामाबाद ने पाकिस्तान में वर्तमान स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की है. दूतावास ने बताया कि लाहौर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर चल रहे प्रदर्शन और कराची के अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हिंसक विरोध प्रदर्शन की सूचना मिल रही है. इसके अलावा, इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास और पेशावर के अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के सामने भी अतिरिक्त प्रदर्शन के आह्वान हो रहे हैं. अमेरिकी सरकार के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तब तक अपनी आवाजाही सीमित रखें जब तक अन्य सूचना न दी जाए. सेंसेक्स 2743 अंक टूटा, निफ्टी 519 अंक गिरा ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है. सेंसेक्स में 2743 अंक यानी 3.38% की भारी गिरावट देखी गई और यह 78,543 अंक पर खुला. वहीं, निफ्टी इंडेक्स में भी 519 अंक या 2.06% का नुकसान हुआ, जो इसे 24,659 अंक पर ले आया. इजरायल के हमलों में कम से कम 10 लोगों की मौत ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. इजरायल के हमलों के चलते बेरूत के दक्षिणी इलाकों में कम से कम 10 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है. साइप्रस में ब्रिटिश बेस पर ड्रोन हमला, नुकसान की पुष्टि साइप्रस ने पुष्टि की है कि उसके द्वीप पर स्थित एक ब्रिटिश सैन्य ठिकाने को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया था. इस हमले से ठिकाने को गंभीर नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई है. यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के संदर्भ में चिंता का विषय बनी हुई है.  ईरानी सुप्रीम लीडर की हत्या के विरोध में डोडा-किश्तवाड़ में बंद का आह्वान डोडा और किश्तवार जिलों में शिया और अन्य मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने आज बंद का आह्वान किया है. यह बंद ईरान के सुप्रीम नेता की हत्या के विरोध में आयोजित किया गया है. जम्मू डिवीजन के ये दोनों जिले धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां इस तरह के घटनाक्रम का गहरा असर पड़ता है.

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान ने दागीं मिसाइलें, ट्रंप बोले- अब अमेरिका दिखाएगा ताकत

ईरान ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद व्यापक सैन्य कार्रवाई का दावा किया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ प्रतिशोध के तौर पर की जा रही है। ईरानी मीडिया और सैन्य सूत्रों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए हैं। UAE और कतर में धमाकों की खबर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर, जिन्हें अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता है, वहां हमलों की सूचना सामने आई है। दुबई और कतर की राजधानी दोहा में कई जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबरें हैं। हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।   IRGC का दावा: मिसाइल और ड्रोन से हमला ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस' के पांचवें चरण के तहत कार्रवाई का दावा किया है। जेबेल अली एंकरेज पर अमेरिकी जहाज के लिए गोला-बारूद ले जा रहे एक पोत को ड्रोन से निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। कुवैत के अब्दुल्ला मुबारक क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर 4 बैलिस्टिक मिसाइल और 12 ड्रोन से हमला किए जाने की बात भी सामने आ रही है। हमलों में बुनियादी ढांचे के नष्ट होने और अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दुबई एयरपोर्ट और प्रमुख स्थलों पर हमला ईरान ने दुनिया के व्यस्ततम हवाई अड्डों में शामिल दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को निशाना बनाने का दावा किया है। साथ ही दुबई के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पाम जुमेराह और लक्जरी होटल बुर्ज अल अरब पर भी पहले हमले किए जाने की बात कही गई है। अमेरिका राष्ट्रपति ने फिर दी चेतावनी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमला किया गया तो अमेरिका, ऐसा जवाब देगा जो पहले कभी नहीं देखा गया। ट्रंप के अनुसार, अगर ईरान ने हमारी रेड लाइन पार की, तो उसे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। ईरान ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की कसम खाई वहीं, खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की कसम खाई है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका के समर्पण तक कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है और क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

खामेनेई की मौत के बाद ईरान का इजरायल पर मिसाइल अटैक

तेहरान. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ईरान ने अपना नया कमांडर इन चीफ नियुक्त किया है। ईरान ने खामेनेई की मौत के बगाद 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। वहीं इजरायल और अमेरिका के इस हमले की निंदा संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भी की है। वहीं ईरान ने नए सुप्रीम लीडर का भी ऐलान किया है। हमलों के बाद भड़के हुए ईरान ने भी पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी एयरबेसों को निशाना बनाया। ये हमले ऐसे समय में हुए जब हाल के हफ्तों में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में तैनात किए जा चुके थे और डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए एक समझौता चाहते थे। यह उस समय हो रहा है जब देश के भीतर भी हालात चुनौतीपूर्ण हैं और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ईरान के हमलों की वजह से कतर, सऊदी अरब, ईराक और अन्य देशों में भी उसका विरोध हो रहा है। वहीं खबर के मुताबिक यूएई में ईरान के हमले में एक शख्स की मौत भी हो गई है। IRGC ने ब्रिगेडियर जनरल अहमद वहीदी को नया कमांडर इन चीफ चुन लिया है। ऐसे में युद्ध अभी लंबा खिंचने की संभावना नजर आ रही है। खामेनेई के मारे जाने पर प्रदर्शन की आग भारत तक पहुंच गई है। भारत में कश्मीर, यूपी और कई अन्य जगहों पर शिया मुसलमान सड़कों पर उतर रहे हैं। यूएन ने की हमले की निंदा संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हवाई हमलों की शनिवार को निंदा की और ''क्षेत्र और पूरी दुनिया को संकट से निकालने'' के लिए तत्काल फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने आपातकालीन बैठक में कहा कि स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ''वरना व्यापक संघर्ष होने की आशंका है जिसके नागरिकों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से गंभीर परिणाम हो सकते हैं।'' यहां पढ़ें ईरान-इजरायल युद्ध का पूरा मामला… कैसे चुना जाएगा ईरान का सुप्रीम लीडर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने देश के भविष्य को लेकर बेहद महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मौलवियों की एक समिति को उनके स्थान पर नए नेता के चयन का काम सौंपा गया है। ईरान के संविधान के तहत 88 सदस्यीय समिति 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' (विशेषज्ञों की सभा) नये सर्वोच्च नेता का चयन करेगी। इस निकाय में केवल शिया धर्मगुरु शामिल होते हैं, जिन्हें हर आठ वर्ष में जनमत के आधार पर चुना जाता है। कानून के अनुसार, 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' को जल्द से जल्द नये सर्वोच्च नेता का चयन करना होगा। यदि चयन में देरी होता है तो एक नेतृत्व परिषद कार्यभार संभाल सकती है, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और 'गार्जियन काउंसिल' का एक वरिष्ठ सदस्य शामिल होता है।

ईरान में इजरायल और अमेरिका का बड़ा हमला, राष्ट्रपति भवन, खुफिया एजेंसी सहित 30 ठिकानों को बनाया निशाना

तेल अवीव/तेहरान इजरायली सेना ईरान पर हमला करने की घोषणा की है। इसके अलावा इजरायली सेना ने ईरान के पलटवार की आशंका के बीच लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा है। ईरान की राजधानी तेहरान में कम से कम तीन जगहों पर भीषण धमाकों की आवाज सुनी गई है। इजरायली सेना ने कहा कि ये अलर्ट लोगों को इजरायल की तरफ मिसाइल दागे जाने की संभावना के लिए तैयार करने के लिए हैं। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ये हमला किया है। इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर के निजी आवास को उड़ा दिया गया है। लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सुप्रील लीडर उस वक्त अपने आवास पर मौजूद नहीं थे। वहीं ईरान के एयरस्पेस को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। सिविल एविएशन ऑर्गनाइज़ेशन के स्पोक्सपर्सन ने नए NOTAM जारी होने के बाद पूरे देश में बंद होने की पुष्टि की। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि ईरान में एक साथ 30 टारगेट पर हमले किए हैं। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ली अली खआमेनेई और ईरानी इंटेलिजेंस के हेडक्वार्टर शामिल हैं। शुरुआती धमाके राजधानी तेहरान में तीन जगहों पर करीब 09:30 बजे रिकॉर्ड किए गए, और आगे के हमलों में राजधानी के कम से कम दो और इलाकों को निशाना बनाया गया। तेहरान में लोकल टाइम के हिसाब से सुबह 10:00 बजे के बाद धमाकों की दूसरी लहर शुरू हुई। इजरायली सेना ईरान पर हमला करने की घोषणा की है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही इजरायल और US ईरान पर हमले कर रहे हैं, तेहरान के उत्तर और पूर्व में, साथ ही इस्फ़हान, करज और करमानशाह में भी धमाके सुनाई दे रहे हैं। इजरायल और अमेरिका ने ईरान के जिन जगहों पर हमला किया है वो इस प्रकार हैं.    -रक्षा मंत्रालय  -खुफिया मुख्यालय -सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का ऑफिस -एटॉमिक एनर्जी ऑफ ईरान -परचीन ईरान के किन किन शहरों पर हमला हुआ है -तेहरान -कॉम -तबरेज -करमनशाह -कराज -इस्फहान युद्धपोत अब्राहम लिंकन से ईरान पर अमेरिका ने किया हमला इरान पर अमेरिका ने अपने युद्धपोत अब्राहम लिंकन से ईरान पर हमले कर रहा है. इस हमले में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना शामिल है.   इजरायली PM  ने कहा- ये शेर की दहाड़ इजरायल ने ईरान पर कई मिसाइलें दागी हैं. हमले के बाद राजधानी तेहरान में कई स्थानों इमारतों से धुएं का गुबार निकलता हुआ दिखाई दे रहा है. इजरायल ने इस ऑपरेशन का नाम शील्ड ऑफ जुडा यानी कि यहूदी की ढाल रखा है. वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री ने ईरान पर हमले को शेर की दहाड़ नाम दिया है.  तेहरान विस्फोट की आवाज ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार को एक विस्फोट हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह दावा किया। इस विस्फोट पर सरकार की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई। यह विस्फोट ऐसे समय हुआ जब तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। इजराइल के हमले के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद किया। इजराइल के रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके देश ने ईरान पर हमला किया है और उन्होंने आपातकाल की घोषणा की। इसके साथ ही इजराइल में सायरन बजने लगे। इजरायल ने जवाबी मिसाइल हमले की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की है। एपी के मुताबिक, ईरान पर हमले के बाद इजराइल ने भी अपना हवाई क्षेत्र बंद किया। खामेनेई को सुरक्षित जगह पहुंचा गया एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई तेहरान में नहीं हैं और उन्हें एक सुरक्षित जगह पर भेज दिया गया है। इजराइल ने कहा कि उसने ईरान के खिलाफ हमला किया है, जिसमें तेहरान में कई धमाके होने की खबर है। ईरान में मोबाइल नेटवर्क ध्वस्त अलजजीरा की मुताबिक इजरायली हमले में ईरान के मोबाइल नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया है। एक इज़रायली सिक्योरिटी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि इस ऑपरेशन की प्लानिंग महीनों पहले से थी और इसकी टाइमिंग कई हफ़्ते पहले तय हो गई थी। डिफेंस एस्टैब्लिशमेंट के सूत्रों ने बताया कि 'शील्ड ऑफ़ जूडा' नाम के इन हमलों का एक मकसद "इज़राइली होम फ्रंट के लिए खतरों को दूर करना होगा, जिसमें मिसाइल लॉन्चर और अनमैन्ड एरियल व्हीकल बेस पर ज़ोर दिया जाएगा।" ईरान गरजा- जंग शुरू तुमने की, खत्म हम करेंगे इस बीच ईरानी संसद राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी के चेयरमैन ने इजरायल-अमेरिका को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि ये लड़ाई तुमने शुरू की है, लेकिन इसे खत्म हम करेंगे. इस बीच ईरान ने कहा है कि इस हमले का जवाब में इजरायल  को कुचल दिया जाएगा.  ईरान पर हमले के बाद इराक में भी अलर्ट घोषित कर दिया गया है और उसने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया गया है.  हमले के बाज ट्रंप का पहला बयान इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान पर हमले के बाद पहला बयान आया है. उन्होंने कहा है कि ईरान कभी भी परमाणु बम नहीं बना सकता है. ईरान को निशाना बनाना चाहता था. उन्होंने कहा कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है, जिससे अमेरिका को भी खतरा है. और दूसरे देशों को भी खतरा है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान पर भीषण आक्रमण कर रही है.  ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने मिलकर किया हमला अमेरिका पहले ही मिडिल ईस्ट में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत तैनात कर चुका है। कई राउंड की डिप्लोमैटिक कोशिशों के बावजूद इजरायल और अमेरिका का कहना है कि ‘बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकल पाया है।’ ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर को एक अज्ञात जगह पर छिपा दिया गया है। इजरायली सेना ने इमरजेंसी की घोषणा कर दी है और लोगों से शेल्टर के पास रहने को कहा है। इजरायली सेना ने कहा है कि "हम समझते हैं कि यह एक कैंपेन है जिसे इजरायल ने अपनी इस पॉलिसी के हिसाब से शुरू किया है कि ईरान इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा है।" इजरायल में स्कूलों को बंद कर दिया गया है, लोगों के एक जगह पर जमा होने से मना कर दिया गया है और जरूरी सेक्टर्स छोड़कर गैर-जरूरी जगहों को बंद कर … Read more

हालात बिगड़े, भारत की एडवाइजरी जारी: ईरान छोड़ें भारतीय नागरिक

ईरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराने के बाद भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने एक बयान जारी कर नागरिकों से देश छोड़ने की अपील की है। इसमें निर्देश दिए गए हैं कि लोग किसी भी तरह से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकल जाए। दूस्तवास ने इस संबंध में कई अन्य निर्देश भी दिए हैं। भारत सरकार ने जनवरी में जारी अपनी पिछली एडवाइजरी को दोहराया है जिसमें लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई थी। एडवाइज़री में लिखा था, “सभी भारतीय नागरिकों और PIO को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, विरोध या प्रदर्शन वाली जगहों से बचना चाहिए, ईरान में भारतीय एम्बेसी के संपर्क में रहना चाहिए और किसी भी डेवलपमेंट के लिए लोकल मीडिया पर नजर रखनी चाहिए।” हेल्पलाइन नंबर भी जारी दूतावास ने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह देते हुए, उनसे अपने इमिग्रेशन और ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स अपने पास रखने और किसी भी मदद के लिए इंडियन एम्बेसी से संपर्क करने को कहा है। भारतीय दूतावास ने इस संबंध में भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। फंसे हुए नागरिक इन मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर मदद मांग सकते हैं: +989128109115; +989128109109, +989128109102, +989932179359। कभी भी हमला कर सकता है अमेरिका गौरतलब है कि बीते महीने ईरान में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद से ही अमेरिका खामेनेई शासन को सैन्य हस्तक्षेप की धमकियां दे रहा है। बीते महीने से लेकर अब तक अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते सप्ताह एक बार फिर यह बयान दिया है कि वह ईरान पर हमले का विचार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ दोनों पक्षों के बीच परमाणु वार्ता भी जारी है। हालांकि इससे कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। अगले दौर की वार्ता कब? इन सब के बीच ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का अगला दौर गुरुवार को जिनेवा में होगा। बद्र अल-बुसैदी ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए खुशी हो रही है कि 'समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की दिशा में सकारात्मक पहल की गई है'। ओमान ने इससे पहले जिनेवा में हुई वार्ता की भी मेजबानी की थी।  

क्या जंग के मुहाने पर हैं अमेरिका और ईरान: सैन्य ताकत, पलटवार की योजना और युद्ध के असर

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की आहट बढ़ती जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़ों को ईरान की खाड़ी पर तैनात करने  के आदेश दे दिए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक युद्धाभ्यास कर इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का संकेत दिया, जो वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है। यानी अमेरिका से लेकर यूरोप और अफ्रीका से लेकर पूरे एशिया के लिए आने वाले दिन कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम होने वाले हैं। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया विवाद क्यों और कब से उभरा है? अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? ईरान इस स्थिति से निपटने के लिए कैसे तैयारी कर रहा है? अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष भड़कता है तो इसका क्या असर हो सकता है? पहले जानें- ईरान-अमेरिका के बीच कैसे-क्यों भड़का है तनाव? ईरान-अमेरिका के बीच तनाव ईरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शनों और उसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बीच बढ़ा। तनाव की एक और वजह इस दौरान अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में की गई सैन्य तैनाती भी रही, जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अयातुल्ला शासन को खत्म करने की चेतावनी दे रहे हैं। इन सबके साथ ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से ही दोनों पक्षों में तनाव का बड़ा कारण रहा है। 1. परमाणु कार्यक्रम अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है और राष्ट्रपति ट्रंप एक नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं। 2. आंतरिक विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 में ईरान में बढ़ती कीमतों और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की सख्त कार्रवाई हुई। इसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है। बताया जाता है कि इन घटनाओं को खुद अमेरिका ने भड़काया, ताकि वह ईरान के मामलों में दखल दे सके। 3. क्षेत्रीय सुरक्षा ईरान का लगातार बढ़ता बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और इस्राइल जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर बढ़ता खतरा भी दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई भी अलग-अलग मौकों पर ईरान को लेकर खतरा जताते रहे हैं। अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में 2003 के इराक आक्रमण के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी की गई है। इन सैन्य बेड़ों में अमेरिका के सबसे घातक एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान से लेकर सबसे बड़े और खतरनाक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल हैं। 1. नौसैनिक बेड़े विमानवाहक पोत: अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। पहला यूएसएस अब्राहम लिंकन है, जो जनवरी के अंत में अरब सागर पहुंच चुका है। इसके बाद दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को भी क्षेत्र में पहुंचने का आदेश दिया गया है। यह मौजूदा समय में अटलांटिक महासागर से पश्चिम एशिया के रास्ते पर है। विध्वंसक पोत: वर्तमान में क्षेत्र में कुल 13 विध्वंसक पोत तैनात किए जा चुके हैं। इनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ आए तीन प्रमुख पोत- यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुआंस और यूएसएस माइकल मर्फी शामिल हैं। ये पोत उन्नत रडार और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लैस हैं। 2. वायु शक्ति और लड़ाकू विमान लड़ाकू विमान: अमेरिका ने बड़ी संख्या में एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। इनके अलावा एफ-15 और एफ-16  फैल्कन लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन भी भेजी गई हैं। सहायक विमान: हवाई अभियानों के संचालन के लिए ई-3 सेंट्री (अवाक्स) टोही विमान, केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर और ई-11 युद्धक्षेत्र संचार विमान तैनात किए गए हैं। ड्रोन और बमवर्षक: जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर कम से कम पांच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन देखे गए हैं। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया द्वीप पर बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन्हीं बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए अमेरिका ने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया था और ईरान के परमाणु ठिकानों पर जीबीयू-57 बम बरसाए थे। 3. मिसाइल और रक्षा प्रणालियां हमलावर मिसाइलें: अमेरिकी युद्धपोत टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जिनका इस्तेमाल पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान रक्षा व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए किया जा चुका है। हवाई रक्षा प्रणालियां: ईरानी मिसाइलों के जवाबी हमले से सुरक्षा के लिए पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पैट्रियट और एयर डिफेंस सिस्टम (THAAD) हवाई रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: विमानवाहक पोतों पर इलेक्ट्रॉनिक-वारफेयर विमान और एएन/एसएलक्यू-25ए निक्सी जैसे डिकॉय सिस्टम भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के हथियारों को भ्रमित कर सकते हैं और अपने किसी भी हथियार को हमले से बचा सकते हैं। मौजूदा समय में कहां है अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा? अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा ईरान के इर्द-गिर्द कई रणनीतिक स्थानों पर तैनात है, इनमें प्रमुख एयरबेस और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र जॉर्डन, सऊदी अरब और ओमान के पास स्थित हैं। इसके अलावा अरब सागर, हिंद महासागर, बहरीन और कतर में भी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और सुविधाएं मौजूद हैं। पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ईरान कैसे कर रहा अमेरिका के हमले का जवाब देने की तैयारी? अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। 1. सैन्य हाई अलर्ट और जवाबी हमले की चेतावनी 25 जनवरी को ईरान ने घोषणा की कि उसके सशस्त्र बल पूर्ण सतर्कता की स्थिति में आ गए हैं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे उकसाया गया, तो वह ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। 2. रणनीतिक नौसैनिक अभ्यास होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी ताकत दिखाने के लिए कई लाइव-फायर ड्रिल्स की हैं। ईरान का यह अभ्यास इसलिए भी अहम है, क्योंकि … Read more

ईरान की शर्तों पर होगी अमेरिका से बातचीत, खामनेई तय करेंगे फैसले का समय और स्थान

मस्कट: मिडिल ईस्ट में जंग और बातचीत एक बार फिर आमने-सामने खड़ी नजर आ रही है. अमेरिका और ईरान के बीच महीनों की तल्खी, धमकियों और सैन्य तनाव के बाद आखिरकार ओमान में बातचीत हुई. यह वही दौर है, जब बीते साल अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे और पूरा इलाका युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया था. खाड़ी देश ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई. दोनों देश आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी संदेशवाहक की भूमिका में रहे. यही मॉडल पहले भी ईरान-अमेरिका बातचीत में अपनाया जाता रहा है. हालांकि इस बातचीत के ठीक बाद अमेरिका ने नए प्रतिबंध ठोंक दिए. बातचीत को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद दोनों पक्ष आगे और बातचीत करने पर सहमत हुए हैं. इसे फिलहाल एक ‘सकारात्मक लेकिन सतर्क शुरुआत’ माना जा रहा है. कौन-कौन था बातचीत में शामिल? ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए, जबकि अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर मौजूद रहे. ओमान की सरकारी तस्वीरों में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर की मौजूदगी भी दिखी, जिसने इस बातचीत के सैन्य महत्व को और बढ़ा दिया. बातचीत से पहले धमकी दी गईं बातचीत से ठीक पहले माहौल बेहद गर्म था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुली चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते पर दस्तखत नहीं किए या प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ओर से भी सख्त तेवर दिखाए गए थे. अराघची ने बातचीत से पहले साफ कहा कि ईरान ‘खुली आंखों से कूटनीति’ में उतरा है और उसे पिछले साल की घटनाएं अच्छे से याद हैं. अपनी शर्तों पर बातचीत कर रहा ईरान ईरान ने ओमान के जरिए अमेरिका को एक शुरुआती प्रस्ताव सौंपा, जिसे मौजूदा हालात संभालने की कोशिश बताया गया. अमेरिका की प्रतिक्रिया इस प्रस्ताव पर अगली बातचीत में ईरान को दी जानी है. ईरान ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता है. बैलिस्टिक मिसाइल, क्षेत्रीय संगठन और घरेलू विरोध जैसे मुद्दे उसके लिए बातचीत के एजेंडे में नहीं हैं. इसके उलट अमेरिका चाहता है कि मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार जैसे मुद्दे भी शामिल हों. हालांकि ईरान किसी भी कीमत पर झुक नहीं रहा है. अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध दिलचस्प बात यह रही कि बातचीत खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए. ईरानी तेल ढोने वाले 14 जहाजों और कई कंपनियों को निशाना बनाया गया. अमेरिका का आरोप है कि ईरान तेल से कमाए पैसे का इस्तेमाल दुनिया भर में अस्थिरता फैलाने और अपने ही नागरिकों पर दमन के लिए करता है. वहीं व्हाइट हाउस ने जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शासन के खिलाफ एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जिसमें उन देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही गई है जो ईरान से सामान या सेवाएं खरीदना जारी रखते हैं.

इरान में महिलाओं के लिए बाइक चलाने की अनुमति, एक ऐतिहासिक बदलाव

तेहरान   ईरान की सरकार ने महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए उन्हें कानूनी रूप से मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति दे दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ईरान के मंत्रिमंडल ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे अब महिलाओं को भी दोपहिया वाहन चलाने के लिए आधिकारिक लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। दशकों पुरानी कानूनी अस्पष्टता का अंत ईरान में अब तक महिलाओं के मोटरसाइकिल चलाने पर कोई सीधा कानूनी प्रतिबंध नहीं था, लेकिन प्रशासन उन्हें लाइसेंस देने से इनकार कर देता था। इस अस्पष्टता के कारण महिलाएं सड़क पर वाहन नहीं चला पाती थीं। उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने मंगलवार को यातायात संहिता (Traffic Code) को स्पष्ट करने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर इस वर्षों पुराने गतिरोध को समाप्त कर दिया है। घायल होने पर महिलाओं को ही माना जाता था दोषी लाइसेंस न होने के कारण ईरानी महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। यदि सड़क हादसे में कोई महिला घायल होती थी, तो लाइसेंस के अभाव में उसे ही जिम्मेदार मान लिया जाता था। नए कानून के लागू होने से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और दुर्घटनाओं की स्थिति में उन्हें न्याय मिल सकेगा। ट्रैफिक पुलिस के लिए अनिवार्य निर्देश ईरानी समाचार एजेंसी इलना (ILNA) के अनुसार, सरकार ने यातायात पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं…     महिला आवेदकों को व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण देना होगा।     पुलिस की सीधी देखरेख में ड्राइविंग परीक्षा आयोजित करनी होगी।     योग्य महिलाओं को अनिवार्य रूप से मोटरसाइकिल चालक लाइसेंस जारी करना होगा।  

ईरान में धमाकों में 5 की मौत और कई घायल

तेहरान. कई महीनों से प्रदर्शन से परेशान ईरान को एक बार फिर झटका लगा है। दक्षिणी ईरान के समुद्र किनारे वाले शहर बंदर अब्बास में शनिवार को जोरदार धमाका हुआ है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक यह धमाका गैस के रिसाव की वजह से हुआ। इसके अलावा इराक सीमा के पास स्थित अहवाज शहर में भी गैस के रिसाव से एक धमाका हुआ। दोनों धमाकों में कुल मिलाकर पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि 14 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में सात धमाकों की जानकारी सामने आई है। इनके मुताबिक राजधानी तेहरान, बंदर अब्बास, तबरीज, कोम, अहवाज, नंताज और परंद में धमाके हुए हैं। ईरान सरकार की तरफ से इनकी पुष्टि नहीं की गई है। ईरान के अग्निशमन विभाग के प्रमुख मोहम्मद अमीन लियाकत ने बंदर अब्बास में हुए धमाके पर ईरान की मीडिया एजेंसी मेहर को दिए अपने बयान में कहा, "शुरुआती जांच के हिसाब से पता चला है कि यह धमाका गैस की वजह से हुआ है। अगले कुछ घंटों में मेरे सहयोगी और अधिक जानकारी देंगे।” इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। इनमें मलबे में तब्दील इमारतों के सामने टूटी हुई गाड़ियां खड़ी हुई नजर आ रही हैं, जो कि इमारत के मलबे की वजह से क्षतिग्रस्त हुई हैं। रॉयटर्स ने इमारतों, पेड़ों और सड़क के लेआउट का विश्लेषण कर स्थान की पुष्टि की, जो सैटेलाइट और फाइल इमेजरी से मेल खाता है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित नहीं की जा सकती कि वीडियो किस तारीख का है। ईरान में धमाकों की खबर सामने आने के बाद सबसे बड़ा शक अमेरिका और इजरायल की तरफ ही गया। हालांकि सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी और इजरायली अधिकाियों ने यह साफ किया है कि इन धमाकों के पीछे उनका कोई हाथ नहीं है।

ट्रंप का नया मिशन: ईरान की ओर बढ़ते जंगी जहाज, वेनेजुएला ऑपरेशन से बड़ा प्लान सामने

तेहरान  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि एक 'मैसिव अर्माडा' (बड़ा नौसैनिक बेड़ा) ईरान की ओर जा रहा है, जो वेनेजुएला ऑपरेशन से भी बड़ा है. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर डील पर बात करे, वरना हमला हो सकता है. ईरान ने कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों पर. अगर हमला हुआ तो बचाव करेगा. अरब देशों ने संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि इससे बड़ा युद्ध फैल सकता है. ट्रंप ने क्या कहा? 28 जनवरी 2026 को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि 'एक मैसिव अर्माडा ईरान की ओर जा रहा है.' उन्होंने ईरान से कहा कि न्यूक्लियर डील कर लो, वरना समय खत्म हो रहा है. हमला 'स्पीड और वायलेंस' से होगा. ट्रंप ने इसे वेनेजुएला ऑपरेशन से बड़ा बताया. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु संवर्धन बंद करना होगा. बैलिस्टिक मिसाइलें सीमित करनी होंगी. हमास, हिजबुल्लाह, हूती जैसे ग्रुप्स को सपोर्ट बंद करना होगा. ट्रंप ने पिछले साल जून 2025 में ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले का जिक्र किया और कहा कि अगला हमला और बुरा होगा. क्या है यह 'मैसिव अर्माडा'? यह अमेरिकी नौसेना का बड़ा बेड़ा है, जिसमें USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर, कई गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स, बॉम्बर्स और फाइटर जेट्स शामिल हैं. यह अरब सागर में तैनात है. ट्रंप ने कहा कि यह 'रेडी, विलिंग और एबल' है. हाल ही में USS Delbert D. Black इजरायल के ईलात बंदरगाह पर पहुंचा है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में 35,000+ अमेरिकी सैनिक और कई जहाज तैनात हैं.  वेनेजुएला ऑपरेशन क्या था? तुलना क्यों? वेनेजुएला ऑपरेशन को 'ऑपरेशन सदर्न स्पियर' कहा जाता है. यह 2025 में शुरू हुआ, जब अमेरिका ने कैरिबियन सागर में बड़ा नौसेना बिल्डअप किया. इसमें USS Gerald R. Ford कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, USS Iwo Jima एम्फीबियस रेडी ग्रुप और अन्य जहाज शामिल थे. कुल 15-20 हजार सैनिक और 150+ एयरक्राफ्ट थे. इसका उद्देश्य ड्रग ट्रैफिकिंग रोकना था, लेकिन यह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के लिए था. 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. ट्रंप ने ईरान के लिए इससे बड़ा आर्मडा भेजा है, जो दिखाता है कि कितना बड़ा खतरा है. ईरान की प्रतिक्रिया क्या है? ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी के तहत नहीं. ईरान खुद को बचाएगा अगर हमला हुआ. तेहरान में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. ईरान ने अपना ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी बंदर अब्बास से 6 किमी दूर रखा है.स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर एक्सरसाइज कर रहा है. ईरान ने अपने न्यूक्लियर साइट्स को और गहराई में छिपाया है. क्यों बढ़ रहा है तनाव?       न्यूक्लियर प्रोग्राम: 2018 में ट्रंप ने JCPOA डील तोड़ी. जून 2025 में अमेरिका-इजरायल ने फोर्डो, नटांज, इस्फाहान पर हमला किया. IAEA कहता है कि ईरान फिर से संवर्धन बढ़ा रहा है.       प्रदर्शन: जनवरी 2026 में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन, 100+ मौतें. ट्रंप इसे रेजीम चेंज का मौका मानते हैं.       रीजनल वॉर: ईरान हूती, हिजबुल्लाह को सपोर्ट करता है, जो अमेरिकी सहयोगियों पर हमला करते हैं. अरब और रीजनल देशों की अपील सऊदी अरब, UAE, जॉर्डन जैसे देश युद्ध से डर रहे हैं. तुर्की ने अमेरिका से संयम बरतने को कहा है. वे चाहते हैं कि बातचीत से हल निकले, क्योंकि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर सकता है. इससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी और ग्लोबल इकोनॉमी प्रभावित होगी. यूके, फ्रांस और इजरायल अमेरिका के साथ हैं, लेकिन सऊदी, कतर, ओमान, मिस्र ने हमला न करने की अपील की.  अगर हमला हुआ तो रीजनल युद्ध फैल सकता है. ईरान अमेरिकी बेस या इजरायल पर हमला कर सकता है. ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' पॉलिसी जारी है, लेकिन डिप्लोमेसी की उम्मीद भी है. स्थिति नाजुक है – अभी हमला नहीं हुआ, लेकिन धमकियां बढ़ रही हैं.