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अब तक 2937 स्थानों पर हुई जांच, 4527 गैस सिलेंडर जब्त किए गए

भोपाल  खाद्य, नागरिकआपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत एलपीजी की कालाबाजारी रोकने के लिये निरंतर कार्यवाही की जा रही है, अभी तक 2937 स्थानों पर जांच की गई, 4527 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किये गए तथा 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई। प्रदेश के 7 64 रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) की जांच कराई गई है। इसमें 1 प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। प्रदेश के समस्त जिला आपूर्ति नियंत्रक/अधिकारी एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को सतत् रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थ उपलब्ध है। मंत्री राजपूत ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि पीएनजी पाइपलाइन जिन क्षेत्रों में बिछ चुकी है, उस क्षेत्र के उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन जरूर लें। इससे उन्हें गैस सिलेंडर लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। गैस की सतत आपूर्ति होगी। उपभोक्ताओं से आग्रह है कि किसी तरह का भ्रम नहीं पालें। पीएनजी पूरी तरह से सुरक्षित है। भारत में कच्चे तेल (Crude Oil)का पर्याप्त भण्डार है, देश एवं प्रदेश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की निरंतर सप्लाई हो सके एवं सप्लाई में कोई रुकावट न आए। मध्यप्रदेश और पूरे देश में एलपीजी (LPG) पेट्रोल, डीजल, पीएनजी एवं सीएनजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। मंत्री राजपूत ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित 70% सीमा के अधीन संस्थाओं एवं प्रतिष्ठानों को तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार सप्लाई निरंतर जारी रखने के निर्देश दिये हैं। यह भी ध्यान रखा जाये कि सड़क पर कारोबार कर रहे छोटे व्यवसायी (स्ट्रीट वेण्डर) को भी उक्त अनुसार कमर्शियल सिलेण्डर प्रदाय किये जायें। ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी प्लांट अतिरिक्त समय ( Extended Hours) तक काम कर रहे हैं। प्रदेश के जिलों में स्थित बॉटलिंग प्लांट तथा वितरकों के पास उपलब्धता एवं प्रदाय की सतत् रूप से समीक्षा की जा रही है। साथ ही माइग्रेन्ट लेबर, छात्रों आदि के लिए खाना पकाने के लिये 05kgके सिलेण्डेर ऑयल कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आम जनता से अपील की गई है कि वह वैकल्पिक साधनों, जैसे इंडक्शन, सोलर कुकर, बायो गैस, गोबर धन तथा स्वससहायता समूहों द्वारा उत्पादित गो-काष्ठ का उपयोग करें। वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग को उनके यहां रजिस्‍टर्ड 44 कम्‍प्रेस्‍ड बायोगैस (सीबीजी) प्रोजेक्‍ट को चालू करने के निर्देश दिये गये हैं। इसी प्रकार पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 44 जिलों में 136 बायोगैस प्‍लांट संचालित होना बताया गया है। इन बायोगैस प्‍लांटों को क्रियाशील करने के निर्देश भी दिये गये हैं। रसोई गैस की स्थिति रसोई गैस का प्रदेश के बॉटलिंग प्लांटों में घरेलू एवं कॉमर्शियल एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा गया है। घरेलू गैस उपभोक्ताओं द्वारा की गई बुकिंग के विरूद्ध एलपीजी सिलेण्डर का प्रदाय निरंतर रूप से किया जा रहा है। साथ ही कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को शासन द्वारा तय किये गये प्राथमिकता क्रम अनुसार आवंटन प्रतिशत के आधार पर कॉमर्शियल गैस सिलेण्डरों की सप्लाई सतत् रूप से की जा रही है। घरेलू एवं कॉमर्शियल की सप्लाई में किसी प्रकार का अवरोध नहीं है। घरेलू एवं कॉमर्शियल सिलेण्डर की सप्लाई एवं वितरण सामान्य है। पीएनजी गैस सीजीडी संस्थाओं तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरूण शमी द्वारा विशेष अभियान चलाकर जिन घरों में पाइप लाइन की अधोसंरचना उपलब्ध है, एवं सप्लाई प्राप्त नहीं कर रहे है, ऐसे घरों को आगामी 03 माह में पीएनजी से कनेक्ट करने के लिये निर्देशित किया गया। इस के लिये सभी सीजीडी संस्था एवं शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कैम्प लगाए जाएं, जिसमें जिला प्रशासन, खाद्य विभाग नगर निगम/नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी संस्थाओं के जिला अधिका‍री को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे सभी घरों एवं व्यवसाईयों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराई जाये। अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देशित किया गया कि जिन स्थानों पर पूर्व से पीएनजी की पाइप लाइन है, सर्वप्रथम उन्हें प्राथमिकता से कनेक्शन दिए जाएं। साथ ही नई पाइन लाइन डालकर कनेक्श‍न का कार्य भी साथ-साथ किया जाए। सीजीडी संस्थाओं द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होंने जिला कलेक्टर्स के माध्यम से आवश्यक मैन पॉवर प्राप्त करने की कार्यवाही कर ली है तथा आगामी माहों में लक्ष्य् के अनुसार नये पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध करा दिए जाएंगे। भारत सरकार के निर्देशानुसार जिन स्थानों से पीएनजी की पाइन लाइन गई है, उसके आस पास के घरेलू एवं कॉमर्शियल उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन प्राप्त कर लें क्योंकि पीएनजी कनेक्शन प्राप्त न करने की स्थिति में आगामी 03 माह में एलपीजी की सप्लाई बंद की जा सकती है। समस्त सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरूद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य शासन द्वारा पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिए सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन किये जाने के 24 घंटे के अंदर पाइप लाइन बिछाने की आरओयूस्वी्कृतियां जारी की जा रही हैं। अभी तक प्राप्त सभी स्वीकृतियां जारी की जा चुकी है तथा कोई भी आवेदन शेष नहीं है। गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थाओं/सुधार ग़ृ़हों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्यं प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी, आदि में जहां से आस-पास पाइप लाइन बिछी हुई है, उनको प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के निर्देश दिये गये हैं। प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में जहां आस-पास पाइप लाइन गई है, उन क्षेत्रों की औद्योगिक इकाइयों की पहचान की जाकर पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश सीजीडी संस्थाओं को दिये गये हैं।  

एमसीबी :प्रवासी मजदूरों को 5 किलोग्राम FTL एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी

एमसीबी जिले में प्रवासी मजदूरों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने हेतु संचालनालय, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, नवा रायपुर द्वारा 5 किलोग्राम फी ट्रेड एलपीजी (FTL) सिलेंडर प्रदाय करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत एलपीजी वितरकों के माध्यम से पात्र मजदूरों तक योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रवासी मजदूरों को 5 किलोग्राम FTL एलपीजी सिलेंडर केवल अधिकृत वितरण केंद्रों के माध्यम से ही उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे श्रमिकों को राहत प्रदान करना है, जो अस्थायी रूप से निवास कर रहे हैं और नियमित घरेलू गैस कनेक्शन से वंचित हैं। निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य लाभार्थियों को सिलेंडर प्रदान करते समय उनसे पहचान प्रमाण (आधार कार्ड) प्राप्त किया जाएगा। साथ ही उनकी सहमति से श्रम विभाग द्वारा जारी श्रमिक पंजीयन प्रमाण पत्र की प्रति भी ली जाएगी। इन दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार गैस कनेक्शन एवं रिफिल की सुविधा प्रदान की जाएगी, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित बनी रहे। स्टॉक एवं वितरण पर कड़ी निगरानी एलपीजी वितरकों को निर्देशित किया गया है कि वे दैनिक स्टॉक, विक्रय तथा शेष सिलेण्डरों का नियमित अभिलेख संधारित करें। संबंधित अधिकारियों द्वारा इन अभिलेखों का समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा, ताकि वितरण व्यवस्था में किसी प्रकार की अनियमितता न हो। दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि योजना के अंतर्गत किसी भी प्रकार के दुरुपयोग या व्यपवर्तन को गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्तियों या एजेंसियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं एलपीजी वितरकों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है, ताकि प्रवासी मजदूरों तक इस सुविधा का लाभ समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

देशभर में एलपीजी सप्लाई पर सख्ती, 990 FIR और 1.2 लाख छापेमारी से हड़कंप

नई दिल्ली  देशभर में एलपीजी की निष्पक्ष आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की। कंपनी ने जानकारी दी कि अब तक 10,600 से अधिक निरीक्षण किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों व एजेंसियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं। इनमें कारण बताओ नोटिस जारी करना और सस्पेंशन जैसी कार्रवाई शामिल है। कंपनी ने यह भी बताया कि राज्य सरकारों के साथ मिलकर देशभर में 1.2 लाख से अधिक छापेमारी की गई है और 990 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की गई हैं, ताकि एलपीजी की निष्पक्ष वितरण व्यवस्था बनी रहे। इंडियनऑयल ने कहा कि इंडेन गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, जिससे सेवा मानकों को बनाए रखते हुए हर सही उपभोक्ता तक गैस पहुंच सके। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता     इंडियन ऑयल ने स्पष्ट किया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है।     कंपनी का फोकस पारदर्शिता, दक्षता और बिना रुकावट वितरण सुनिश्चित करने पर है।     डायवर्जन, कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए कड़ी निगरानी और सख्त प्रवर्तन उपाय लागू किए गए हैं। कितने सिलेंडरों की डिलीवरी और बिक्री?     सरकार के अनुसार 10 अप्रैल को देशभर में 51.5 लाख से अधिक घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी की गई।     इसी दिन लगभग 1 लाख 5 किलोग्राम फ्री ट्रेड एलपीजी (एफटीएल) सिलेंडर भी बेचे गए, जबकि फरवरी 2026 में इनकी औसत दैनिक बिक्री करीब 77,000 थी।     सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने पिछले 8 दिनों में करीब 2,900 जागरूकता शिविर लगाए, जिनमें 29,000 से अधिक 5 किलोग्राम वाले सिलेंडर बेचे गए।     पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि 23 मार्च 2026 से अब तक 12 लाख से ज्यादा 5-किलोग्राम एफटीएल सिलेंडर छात्रों और प्रवासी मजदूरों जैसे कमजोर वर्गों को उपलब्ध कराए गए हैं।     इन सिलेंडरों को राज्य सरकारों के पास रखा जाएगा ताकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) की मदद से इन्हें खास तौर पर प्रवासी मजदूरों तक पहुंचाया जा सके। मंत्रालय ने की लोगों से अपील मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी न करें और केवल आधिकारिक सोर्स पर भरोसा करें। उपभोक्ताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से गैस बुक करने और डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही पीएनजी, बिजली या इंडक्शन जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग और ऊर्जा बचत पर भी जोर दिया गया है।  

रूस की 40% सस्ती LNG से भारत में ऊर्जा लागत और महंगाई कम हो सकती है

नई दिल्ली Russian Gas: रूस द्वारा 40% सस्ती LNG से भारत में एनर्जी कॉस्ट और महंगाई कम हो सकती है। हालांकि, इसके साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक जोखिम भी जुड़े हुए हैं। आइए जरा विस्तार से रशियन गैस (Russian Gas) के फायदे और नुकसान को समझते हैं।  दुनिया में इस वक्त एनर्जी की समस्या अपने चरम पर है। इसके बीच रूस (Russia) से एक बड़ी खुशखबरी आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने एशियाई देशों को सस्ती गैस (Russian Gas) का बड़ा ऑफर दिया है, जिसने बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। रूस अपनी प्रतिबंधित एलएनजी (Liquefied Natural Gas- LNG) सप्लाई को करीब 40% तक की भारी छूट पर बेचने की कोशिश कर रहा है, खासकर भारत और दक्षिण एशिया जैसे देशों को, जहां ऊर्जा की भारी मांग और खपत है। यह ऑफर ऐसे समय आया है, जब स्टेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव और कतर (Qatar) के एलएनजी प्लांट पर हमलों के कारण वैश्विक गैस सप्लाई का करीब 20% प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस इस मौके का फायदा उठाते हुए अपनी गैस को सस्ते दाम पर बेचकर नए खरीदार तलाश रहा है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ बिचौलियों के जरिए यह भी दावा किया जा रहा है कि कागजी तौर पर इन शिपमेंट्स को ओमान या नाइजीरिया जैसे देशों से आया दिखाया जा सकता है, ताकि प्रतिबंधों से बचा जा सके। हालांकि, इस तरह के ऑफर में कानूनी और कूटनीतिक जोखिम भी जुड़े हुए हैं। भारत और बांग्लादेश जैसे देशों पर इस संकट का सीधा असर पड़ा है। भारत (India) को अपनी एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ रही है, जबकि बांग्लादेश को तो अपनी उर्वरक (fertilizer) सेक्टर में गैस सप्लाई तक कम करनी पड़ी है। ऐसे में रूस का सस्ता ऑफर इन देशों के लिए आकर्षक जरूर है, लेकिन वे अमेरिकी प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए सतर्क रुख अपना रहे हैं। रूस के लिए यह रणनीति अपने निर्यात को बढ़ाने और नए बाजार बनाने का एक तरीका है, खासकर तब जब पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण उसके रेगुलर बॉयर कम हो गए हैं। फिलहाल चीन (China) ही एक बड़ा देश है, जो इस तरह की प्रतिबंधित गैस खरीद रहा है, जबकि बाकी देश अभी दूरी बनाए हुए हैं। अगर भारत (India) रूस से यह सस्ती LNG गैस खरीदता है, तो इसका असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है। इस फैसले से कुछ फायदे भी होंगे और कुछ जोखिम भी हो सकता है। फायदे की बात करें तो इसका सबसे बड़ा फायदा सीधे तौर पर आम जनता और इंडस्ट्री को मिल सकता है। गैस 40% तक सस्ती हो सकती है और देश की ऊर्जा लागत घट सकती है, जिससे बिजली उत्पादन, उर्वरक (fertilizer) और सीएनजी/पीएनजी की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे महंगाई को काबू करने में भी मदद मिलेगी और सरकार के सब्सिडी खर्च में राहत मिल सकती है। खासकर गैस आधारित उद्योगों और बिजली कंपनियों के लिए यह बड़ी राहत साबित हो सकती है। हालांकि, इसके साथ बड़ा जोखिम भी जुड़ा है। रूस की यह गैस अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आती है, इसलिए अगर भारत इस तरह की खरीद करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव या संभावित प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इससे भारत के पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं।  

LPG की किल्लत दूर, ‘ग्रीन आशा’ टैंकर लेकर मुंबई पहुंची 15,400 टन रसोई गैस

 मुंबई नवी मुंबई के समुद्री तट से एक राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है. मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में चल रहे युद्ध और तनाव के बीच रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) लेकर एक भारतीय जहाज सुरक्षित भारत पहुंच गया है. जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (Jawaharlal Nehru Port Authority) ने गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को बताया कि 15,400 टन एलपीजी लेकर आ रहा एक बड़ा जहाज नवी मुंबई के पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच चुका है. यह खबर इसलिए खास है, क्योंकि इस जहाज ने इस वक्त दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पार किया है, जहां इस समय ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी जंग की वजह से भारी तनाव बना हुआ है।  जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने जानकारी दी है कि ग्रीन आशा (Green Asha) नाम का यह भारतीय जहाज सुरक्षित तरीके से अपनी मंजिल पर पहुंच गया है. इस जहाज को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट के उस विशेष हिस्से (बर्थ) पर खड़ा किया गया है, जिसका संचालन भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Bharat Petroleum Corporation Limited) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) मिलकर करते हैं. पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से यह इस तरह का पहला जहाज है, जो इतने खतरनाक माहौल के बावजूद वहां से निकलकर सीधे इस पोर्ट पर पहुंचा है. अधिकारियों का कहना है कि यह भारत के लिए एक बड़ी जीत जैसा है क्योंकि युद्ध के कारण इस रास्ते से गुजरना बहुत मुश्किल हो गया था । सुरक्षित हैं कर्मचारी और जरूरी सामान इस पूरे मिशन की सबसे अच्छी बात यह रही कि जहाज पर मौजूद चालक दल (क्रू) के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं. जहाज में लदी 15,400 टन एलपीजी और खुद जहाज को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. पोर्ट अथॉरिटी ने अपने बयान में कहा है कि ग्रीन आशा का सुरक्षित आना यह दिखाता है कि मुश्किल अंतरराष्ट्रीय हालातों और लड़ाई के बावजूद भारत अपनी समुद्री ताकत के दम पर देश के लिए जरूरी चीजों की सप्लाई जारी रखने में सक्षम है. यह जहाज भारत में रसोई गैस की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण था  क्यों खास है यह पोर्ट और समुद्री रास्ता नवा शेवा पोर्ट (Nhava Sheva Port) के नाम से मशहूर यह बंदरगाह भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बहुत बड़ा रोल निभाता है. यहां से पूरे देश में गैस और तेल की सप्लाई की जाती है।  स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपनी तेल और गैस की जरूरतें पूरी करता है, लेकिन ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने इस रास्ते को जोखिम भरा बना दिया है. ऐसे में भारतीय तिरंगे वाले जहाज का वहां से सुरक्षित निकल आना यह भरोसा दिलाता है कि भविष्य में भी भारत अपनी ऊर्जा सप्लाई को इसी तरह बरकरार रखेगा। 

5 किलो LPG सिलेंडरों का कोटा दोगुना, मजदूरों और गरीबों को मिलेगा राहत

नई दिल्ली देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच सरकार ने प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने अपना गांव छोड़कर शहरों में जाकर कमाई करने वाले मजदूरों के लिए 5 किलो वाले एलपीजी सिलिंडर का कोटा डबल कर दिया है। सरकार ने कहा है कि रोजाना सप्लाई किए जाने वाले 5 किलो के सिलेंडरों की संख्या अब दोगुनी कर दी जाएगी। 2-3 मार्च 2026 को मजदूरों के लिए जितने सिलेंडर एक दिन में सप्लाई करने का लक्ष्य रखा गया था, अब उससे दोगुना सिलेंडर भेजे जाएंगे। बिना कनेक्शन मिलता है छोटू सिलेंडर बता दें कि इन सिलिंडरों को एफटीएल गैस सिलिंडर भी कहा जाता है। सराकर अब दोगुनी संख्या में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन सिलिंडरों की सप्लाई करेगी। आम तौर पर यह सिलिंडर प्रवासी मजदूरों या फिर छात्रों के लिए ही बना है। दरअसल परमानेंट अड्रेस ना होने की वजह से लोगों को स्थायी गैस कनेक्शन मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कोई भी एक पहचान पत्र दिखाकर छोटू सिलेंडर लिया जा सकता है। मजदूरों को बड़ी राहत एक दिन पहले ही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरते हुए कहा था कि सबसे बड़ा वार मजदूरों और गरीबों पर ही किया जाता है। कोविड की तरह एक बार फिर मजदूरो को गांव की ओर चलने का वक्त आ गया है। हालांकि सरकार ने यह फैसला लेकर मजदूर क्लास को बड़ी राहत दी है। यह नया कोटा पहले से तय 20 फीसदी के कोटे के अतिरिक्त होगा। ब्लैक मार्केटिंग रोकने का प्रयास एलपीजी संकट की खबरें आते ही सिलेंडरो की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई थी। ऐसे में सरकार ने एक समय सीमा तय कर दी कि एक कनेक्शन पर उतने दिन से पहले बुकिंग नहीं हो पाएगी। इसका उद्देश्य ब्लैक मार्केटिंग और भीड़ दोनों को नियंत्रित करना था। छोटू सिलेंडर का कोट बढ़ाने का भी उद्देश्य यही है। अब राज्य सरकारों और ऑइल मार्केटिंग कंपनियों को यह सुनिश्चित करना है कि जरूतमंद लोगों तक पर्याप्त सिलेंडर पहुंच जाएं। इंडक्शन चूल्हों को लेकर भी दी गई ढील विद्युत मंत्रालय ने इस साल 01 जुलाई से इंडक्शन चूल्हों के लिए स्टार रेटिंग की व्यवस्था अनिवार्य करने के लिए पिछले साल दिसंबर में अधिसूचना जारी की थी। सोमवार को जारी नयी अधिसूचना में इस तारीख को 01 जनवरी 2027 कर दिया गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के परामर्श से स्टार रेटिंग की अनिवार्यता को टालने का फैसला किया गया है और सरकार इस बात से संतुष्ट है कि इसे छह महीने के लिए टाला जा सकता है।

जिला और तहसील स्तर पर कामर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करें

जिला एवं तहसील स्तर पर भी कामर्शियल सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित करें मंत्रिमण्डल समिति ने की पेट्रोल, डीजल, एलपीजी एवं सीएनजी की आपूर्ति की समीक्षा भोपाल अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम एवं मध्यपूर्व देशों की स्थिति के दृष्टिगत प्रदेश पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा के लिये गठित मंत्रिमण्डल समिति की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। बैठक में समिति के सदस्यों ने जिला एवं तहसील स्तर पर कामर्शियल एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की आपूर्ति की समीक्षा की। बैठक में समिति के सदस्यों ने कहा कि किसी भी स्तर की अनियमित्ता एवं कालाबाजारी पाए जाने पर तत्काल कार्यवाही करें। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एलपीजी की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दें। प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। क्रूड ऑयल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण प्रट्रोलियम पदार्थों की लगातार आपूर्ति हो रही हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, खाद्य, नागरिक आपूति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, अपर मुख्य सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण श्रीमती रश्मि अरूण शमी, आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा और ऑयल कम्पनी के स्टेट नोडल ऑफिसर अजय श्रीवास्तव उपस्थित थे। शहरों में 25 और गाँवों में 45 दिन में सिलेंडर बुकिंग बैठक में बताया गया कि घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग शहरों में 25 दिन और गाँवों में 45 दिन के अंतराल में की जा रही है। वर्तमान में गैस बुकिंग की संख्या सामान्य है, जिसकी पूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। प्रदेश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी की पर्याप्त उपलब्धता है। जिन घरों तक पाईप लाइन पहुँच गई है, उन घरों में पीएनजी कनेक्शन दिये जा रहे है। पिछले 1 दिन में 225 नवीन पीएनजी कनेक्शन दिए गए हैं। 70 प्रतिशत तक दिए जा रहे है कामर्शियल सिलेण्डर बैठक में ऑयल कम्पनी के स्टेट नोडल ऑफिसर श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में भारत सरकार के निर्देशानुसार 70 प्रतिशत की सीमा के अधीन कामर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराये जा रहे है। शुरूआत में 20 प्रतिशत इनकी आपूर्ति हो रही थी। कालाबाजारी पर कार्यवाही प्रदेश में गैस सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जा रही है। अभी तक 3226 स्थानों पर कार्यवाही कर 3872 सिलेंडर जब्त किये गये है और 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई है। पीएनजी कनेक्शन विस्तार पर जोर बैठक में जानकारी दी गई कि सभी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) संस्थाओं को अगले 3 माह में 2 लाख नये पीएनजी कनेक्शन दिये जाने वाले का लक्ष्य दिया गया है। साथ ही सीजीडी संस्थाओं द्वारा प्रतिदिन किये जा रहे आवेदन एवं उसके विरुद्ध दिये जा रहे पीएनजी कनेक्शन की सतत मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। सीजीडी संस्थाओं को पीएनजी के लाभ एवं पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया से संबंधित एफएक्यू तैयार कर उपलब्ध कराने के निर्देश नोडल सीजीडी संस्था थिंक गैस को दिये गए हैं। भारत सरकार के गतिशक्ति पोर्टल पर सीजीडी संस्थाओं को पाइप-लाइन अपलोड करने के निर्देश दिये गये। सीजीडी संस्थाएँ जिलेवार एवं लोकेलिटीवाइज कैम्प शेड्यूल कर जिला प्रशासन एवं विभाग को उपलब्ध करायेंगी। शहर के जिन स्थानों में पाइप-लाइन गई है, उसके आस-पास के क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को ऑयल कम्पनी द्वारा अवगत कराया गया है कि वह पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये तत्काल आवेदन करें। इसके बाद पीएनजी कनेक्शन प्राप्त नही करने की स्थिति में आगामी 3 माह में एलपीजी का कनेक्शन बंद किया जा सकता है। जिला आपूर्ति अधिकारियों को एमपीआईडीसी के जिला अधिकारी, जिले में स्थित पॉलीटेक्निक तथा आईटीआई से प्रशिक्षणार्थियों की सूची सीजीडी संस्था को उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। सीजीडी संस्था द्वारा इन प्रशिक्षणार्थियों को वर्तमान वेण्डर के साथ क्लब कर मैन पॉवर बढ़ाया जाएगा। सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) में प्रदेश में कार्यरत 10 संस्थाओं को पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जहां घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की मांग और शिकायतों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। पीएनजी पाइप लाइन जिन क्षेत्रों में बिछ चुकी है, वहां आवासीय परिसर, स्कूल, हॉस्टल, कॉलेज, कम्युनिटी किचन और आंगनवाड़ी केंद्रों को आवेदन प्राप्त होने के 5 दिन में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पीएनजी कनेक्शन की प्रगति की निगरानी के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर, एडीएम, जिला आपूर्ति अधिकारी और संबंधित सीजीडी संस्थाओं के अधिकारी समीक्षा करेंगे। केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार पीएनजी कनेक्शन प्रदाय करने के लिये नगरीय प्रशासन एवं विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, लोक निर्माण एवं म.प्र. औद्योगिक विकास निगम द्वारा सीजीडी संस्थाओं को उनके आवेदन करने के 24 घंटे में पाइप-लाइन बिछाने की आरओयू अनुमति दिये जाने के आदेश जारी किये गये हैं। विभाग द्वारा 10 से अधिक आरओयू आवेदनों की 24 घंटे के अंदर स्वीकृति जारी की गई है। सीजीडी संस्थाओं को घरेलू एवं व्यावसायिक पीएनजी के आवेदनकर्ताओं को पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करने के लिये सीजीडी संस्थाओं के कंट्रोल रूम नम्बर इस प्रकार हैं। अवंतिका गैस लिमिटेड – इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर (9424098887), गैल गैस लिमिटेड – देवास, रायसेन, शाजापुर, सीहोर (7880001788), नवेरिया गैस लिमिटेड – धार (07292-223311), थिंक गैस – भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी (1800-5727-107), आईओसीएल – गुना (9425991090), मउगंज, रीवा (9424836488), अशोकनगर (9425119522), मुरैना (7223982333), बीपीसीएल – मैहर, सतना शहडोल (9424738607), सीधी, सिंगरौली (9424341954), गुजरात गैस लि. – रतलाम (7412230292) शामिल है। प्रदेश के इन स्थानों से पाइप-लाइन के आस-पास के घरेलू एवं व्यावसायिक उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिये आवेदन कर सकते हैं।  

मैक्सिको की खाड़ी को मिडिल ईस्ट जैसा बनाना है, LPG और पेट्रोल को दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाने की योजना

वॉशिंगटन   ईरान और अमेरिका जंग के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ ब्लॉक हुआ पड़ा है. ईरान ने दोस्त देशों को यहां से निकलने की इजाजत तो देदी है लेकिन तेल की सप्लाई पहले की तरह नहीं चल रही है. इस बीच अमेरिका के ‘मैक्सिको की खाड़ी’ (US Gulf) को लेकर एक बड़ा दांव खेला जा रहा है. बताया जा रहा है कि इसे दूसरा मिडिल ईस्ट बनाने की तैयारी की जा रही है, जहां से भर-भर कर LPG, पेट्रोल दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाया जाएगा. भारत के लिए ये सबसे आसान और सस्ता रास्ता होगा. दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के इस गल्फ पर अभी से ही बड़े-बड़े बिजनेसमैन पैसों की बरसात करने लगे हैं।  तेल कंपनियों की लगी लाइन दुनिया की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनियां अमेरिका के इस अल्ट्रा-डीपवाटर प्रोजेक्ट में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के लिए लाइन लगाकर खड़ी हैं. यूरोप की दिग्गज कंपनी TotalEnergies और Shell के साथ-साथ लंदन की BP और स्पेन की Repsol भी इस रेस में शामिल हैं।  ‘शेननडोह’ फील्ड के मौजूदा मालिक अपनी 51% हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं. इसके लिए आने वाले कुछ ही हफ्तों में बिड्स लगाई जा सकती हैं. सूत्रों का कहना है कि मिडिल ईस्ट और एशिया के बड़े तेल उत्पादक भी इस रेस में शामिल हो सकते हैं, जिससे भारत के लिए भविष्य में तेल और LPG की सप्लाई का एक नया रास्ता खुल सकता है।  यहां से निकलेगा कितना तेल? ये कोई मामूली ऑयल फील्ड नहीं है. ये समंदर की उस गहराई में है जहां जाना किसी चुनौती से कम नहीं. यहां तेल और गैस के भंडार करीब 30,000 फीट नीचे हैं।  यहां का प्रेशर 20,000 पाउंड प्रति वर्ग इंच तक पहुंच जाता है. इसके बावजूद, यहां से जुलाई में उत्पादन शुरू हो चुका है और रोजाना 1,00,000 बैरल तेल निकाला जा रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि यह इलाका युद्ध क्षेत्र से कोसों दूर है. यहां से तेल की सप्लाई के लिए होर्मुज जैसे खतरनाक रास्तों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।  भारत के लिए क्यों है ये गेम चेंजर मिडिल ईस्ट के संकट ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. होर्मुज में जारी समुद्री ब्लॉकेड के बीच अमेरिका का यह इलाका दुनिया के लिए तेल का नया केंद्र बन रहा है।  जब मिडिल ईस्ट में तनाव से कीमतें बढ़ती हैं, तब अमेरिका से होने वाला अधिक उत्पादन मार्केट को संतुलित रखने में मदद करेगा. भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और ऐसे में LPG से लेकर पेट्रोल तक भारी मात्रा में ईंधन चाहिए. अमेरिका जैसे स्थिर देश से सप्लाई मिलना भारत के लिए ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ की सबसे बड़ी गारंटी हो सकता है। 

सरकार का बड़ा कदम: LPG संकट को दूर करने के लिए ‘छुटकू’ सिलेंडरों की बढ़ी आपूर्ति

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का 5वां हफ्ता चल रहा है और हाल-फिलहाल ये थमता नजर नहीं आ रहा है. रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई धमकी देकर टेंशन को और बढ़ा दिया है. इसके साथ ही होर्मुज पर राहत की उम्मीद भी कम हो गई है, जिसकी वजह से दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट गहरा गया है. भारत में भी एलपीजी किल्लत देखने को मिली, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से LPG प्रोडक्शन बढ़ाने, आयात में डायवर्सिफिकेशन समेत अन्य उपायों के जरिए स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया।  हालांकि, इस बीच एलपीजी गैस एजेंसियों के बार लंबी-लंबी कतारें जरूरी लगी नजर आई हैं, लेकिन सरकार की ओर से साफ किया गया है कि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है और पैनिक बायिंग (LPG Panic Buying) की जरूरत नहीं है. अब एलपीजी संकट का तोड़ निकालते हुए सरकार ने डिमांड पूरी करने के लिए 5 किलोग्राम वाले LPG Cylinders की सप्लाई तेज कर दी है।  6.6 लाख सिलेंडरों की बिक्री एलपीजी डीलर्स के काउंटर पर ही ये 5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर उपबल्ध कराए गए हैं और इनकी बिक्री में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की ओर से जानकारी देते हुए बताया गया है कि बीते 23 मार्च से अब तक देश में करीब 6.6 लाख सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।  पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सब्सिडी वाले घरेलू 14.2 किलोग्राम के सिलेंडरों के विपरीत इन 5 किलोग्राम की एलपीजी बोतलों को FTL Cylinder कहा जाता है. ये मार्केट रेट्स पर उपबल्ध हैं और किसी भी नजदीकी गैस डीलर से इन्हें लिया जा सकता है।  सिर्फ ID प्रूफ की जरूरत सबसे खास बात ये है कि इन छोटे सिलेंडरों को खरीदने के लिए किसी भी तरह के एड्रेस प्रूफ को दिखाने की भी जरूरत नहीं है. आपके पास सिर्फ वैध पहचान पत्र (Identity Proof) होना चाहिए और उसके दिखाने के बाद आपको ये दे दिया जाता है. सरकार ने एलपीजी की डिमांड को पूरा करने के लिए इन सिलेंडरों की आपूर्ति में बढ़ोतरी की है।  जमाखोरी पर सरकार का एक्शन इससे पहले बीते शनिवार को भी सरकार की ओर से बयान जारी कर लोगों से पेट्रोल, डीजल और LPG की घबराहट में खरीदारी करने से बचने की अपील की गई. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों और कुकिंग गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए जा रहे हैं।  इसके साथ ही तेल-LPG की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ लगातार एक्शन जारी है. इसके तहत 3,700 से अधिक छापे मारे गए हैं और एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स को लगभग 1,000 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. इसके अलावा अब तक 36 डीलरों को निलंबित किया जा चुका है।  'पूरी क्षमता से काम कर रहीं रिफाइनरियां' सरकार ने साफ किया है कि घरों और ट्रांसपोर्टेशन के लिए पूरी सप्लाई बनाए रखी जा रही है, जबकि फर्टिलाइजर्स प्लांटों को सप्लाई 6 अप्रैल से औसत खपत के लगभग 90 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है, जिसमें आने वाले LNG कार्गो से मदद मिलेगी।  मंत्रालय के मुताबिक, देश की सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और पूरे देश में पेट्रोल पंप पूरी तरह से भरे हुए हैं।   

एलपीजी संकट के बीच मोगा के किसान का समाधान: बायोगैस से जल रहा चूल्हा, 20,000 में बचाए लाखों रुपये

मोगा  देश भर में एलपीजी संकट के बीच लोग सिलिंडर के लिए लंबी-लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। वहीं मोगा के गांव राजेआना के किसान निर्मल सिंह मौज में हैं। दरअसल, निर्मल सिंह ने साल 2011 में मात्र 20 हजार रुपये की लागत से अपने घर में बायोगैस प्लांट लगाया था। इस प्लांट से निकलने वाली गैस से ही उनके घर का खाना तैयार होता है। आज जब एलपीजी के लिए लोग परेशान हैं, वहीं निर्मल सिंह को उनके इस बायोगैस प्लांट ने बड़ी राहत दी है। उन्हें न तो लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है और न ही महंगे दामों पर गैस सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। किसान के लिए बायोगैस एक वरदान साबित हुआ। 25 गज में 20 हजार की कीमत से लगाया प्लांट निर्मल सिंह ने बताया कि उन्होंने घर में दूध के लिए पशु पाले हुए हैं, जिनसे निकलने वाले गोबर का सही उपयोग करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने घर पर बायोगैस प्लांट लगाया। यह प्लांट लगभग 25 गज क्षेत्र में करीब 20 हजार रुपये की लागत से तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें इस बायोगैस प्लांट का खास फायदा समझ नहीं आया, लेकिन आज जब देश में LPG को लेकर संकट है तब उन्हें इस बायोगैस का असली महत्व समझ आया।  निर्मल सिंह ने कहा कि उनके घर में तो जैसे अपनी ही गैस एजेंसी खुली हुई है, इसलिए उन्हें कभी लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ी। पिछले 15 साल में उन्होंने करीब 1.5 लाख रुपये की बचत की है, वह भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के। उन्होंने बताया कि इस प्लांट को चलाने में कोई खास मेहनत नहीं लगती। रोजाना केवल दो टोकरी गोबर को पानी के साथ मिलाकर प्लांट में डालना होता है। सुबह यह प्रक्रिया करने के बाद शाम तक गैस तैयार हो जाती है। इस गैस से उनके 5 सदस्यों वाले परिवार का खाना आराम से बन जाता है।  पूरी तरह सुरक्षित है बायोगैस निर्मल सिंह ने बताया कि बायोगैस पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें गैस लीकेज से आग लगने का कोई खतरा नहीं होता। उन्होंने कहा कि पंजाब में ज्यादातर किसानों के पास पशु होते हैं, इसलिए सभी किसानों को इस तकनीक का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बायोगैस अपनाने वाले किसानों पर एलपीजी संकट का कोई असर नहीं पड़ेगा। कम खर्च, कम मेहनत और अधिक लाभ, यही बायोगैस की सबसे बड़ी खासियत है। आधुनिक दौर में यह पुरानी तकनीक किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है।