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होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़ा एलपीजी टैंकर ग्रीन सान्वी, मुंबई तक यात्रा कब पूरी होगी?

मुंबई  होर्मुज स्ट्रेट से भारत के लिए एक और अच्छी खबर आई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ग्रीन सान्वी सफलतापूर्वक पार हो गया है. इस जहाज पर लगभग 44,000 मीट्रिक टन LPG है. टैंकर ने शुक्रवार को होर्मुज स्ट्रेट पार किया और अनुमान है कि यह 6 अप्रैल तक मुंबई पहुंच जाएगा. मार्च महीने में यह होर्मुज पार करने वाला सातवां भारतीय जहाज है. अभी भी कई भारतीय तेल-गैस जहाज होर्मुज में फंसे हुए हैं और ईरानी क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं।  जहाज ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ग्रीन सान्वी फारस की खाड़ी में खड़ा था और ईरान के समुद्री इलाके से होकर होर्मुज स्ट्रेट के पूरब में पहुंचा. इसके बाद यह मुंबई की ओर बढ़ रहा है. अनुमान है कि इस टैंकर में लगभग 44,000 मीट्रिक टन LPG है, जो पश्चिम एशिया युद्ध से पहले भारत की LPG खपत के आधे दिन के बराबर है. युद्ध के कारण सप्लाई में कमी आई है और देश में मौजूदा एलपीजी खपत कम है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में दो और एलपीजी टैंकर  ग्रीन आशा और जग विक्रम भी होर्मुज पार करके भारत आने की उम्मीद है।  होर्मुज पार करने वाला सातवां भारतीय जहाज इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, ग्रीन सान्वी ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज पार करने वाला सातवां भारतीय जहाज है. अब तक आने वाले सभी सात जहाज एलपीजी टैंकर ही थे. ग्रीन सान्वी के ट्रांजिट के साथ, फारस की खाड़ी में अब 17 भारतीय झंडे वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पूरब में हैं. भारत अभी भी होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों के सुरक्षित पास के लिए ईरान के साथ डिप्लोमैटिक बातचीत कर रहा है. ईरान ने होर्मुज बंद कर रखा है और अब टोल वसूल रहा है, लेकिन भारत से अच्छे संबंधों के कारण भारतीय जहाजों को छूट दी गई है।  केवल कुछ देशों को ही होर्मुज पार करने की अनुमति पिछले हफ्ते ईरान ने कहा था कि केवल अमेरिका, इज़राइल और उनके सहयोगी देशों के अलावा मित्र देशों के जहाज ही ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल करके होर्मुज पार कर सकते हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उन देशों के लिए चालू है, जो ईरान के मित्र हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को समुद्री चोकपॉइंट से पार करने की अनुमति दी गई है।  ग्रीन सान्वी ने कैसे पार किया होर्मुज होर्मुज पार करते समय ग्रीन सान्वी ने भारतीय जहाज होने का संकेत दिया, जिसमें भारतीय नाविक सवार थे. यह संकेत ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल बनाने का एक स्टैंडर्ड प्रक्रिया बन गया है. ईरान और ओमान के बीच संकरे पानी के रास्ते से जहाजों की आवाजाही को रेगुलेट किया जाता है. यह रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और ग्लोबल एनर्जी फ्लो के लिए महत्वपूर्ण है. भारतीय जहाजों को इंडियन नेवी द्वारा एस्कॉर्ट भी किया जाता है।  पिछले हफ्ते आए दो एलपीजी टैंकर पिछले हफ्ते जग वसंत ने कांडला में 47,612 मीट्रिक टन LPG डिलीवर किया, जबकि पाइन गैस ने न्यू मंगलौर में 45,000 मीट्रिक टन LPG डिलीवर की. ये दोनों टैंकर भी होर्मुज पार करके भारत पहुंचे. दो और एलपीजी जहाज ग्रीन आशा और जग विक्रम अब स्ट्रेट पार करने के लिए रेडी हैं और इंडियन नेवी के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं. 28 फरवरी से ईरान-अमेरिका युद्ध जारी है. अमेरिका और इज़राइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था, जिसमें खामेनेई की मौत हुई. तब से होर्मुज बंद है। 

भारत के लिए होर्मुज की जरूरत नहीं! अर्जेंटीना के बाद अब एक और मित्र भेजेगा LNG-LPG के जहाज

मुंबई   ईरान युद्ध के लंबा खिंचने की पूरी आशंका है. अमेरिका और इजरायल ने जब ईरान पर अटैक किया था, तब दावा किया गया था कि यह जंग कुछ ही हफ्तों में समाप्‍त हो जाएगी. हालांकि, ऐसा हुआ नहीं. ईरान की ओर से अभी तक ऐसा पलटवार किया गया है, जिसकी आशंका अमेरिका-इजरायल को तो छोड़िए पूरी दुनिया को नहीं थी. इसका व्‍यापक असर देखने को मिल रहा है. खासकर एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज स्‍ट्रेट के बाधित होने से पेट्रोल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हुई है. ऐसे में तमाम देश अब होर्मुज स्‍ट्रेट के साथ ही तेल और गैस से संपन्‍न खाड़ी के देशों का विकल्‍प तलाशने लगे हैं. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. लैटिन अमेरिकी देश अर्जेंटिना भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सामने आया है. अब नई दिल्‍ली ने अपने दशकों पुराने परंपरागत मित्र देश रूस से LNG और LPG सप्‍लाई को लेकर बातचीत की है. रिपोर्ट की मानें तो भारत और रूस LNG की आपूर्ति बढ़ाने के लिए तैयार हैं. ऐसे में तमाम संकट के बावजूद भारत के घरों में चूल्‍हे जलते रहेंगे, फिर होर्मुज जलडमरूमध्‍य लंबे समय के लिए बाधित ही क्‍यों न रहे।  रूस की न्‍यूज एजेंसी TASS ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि नई दिल्‍ली और मॉस्‍को LNG की सप्‍लाई बढ़ाने को तैयार हैं. रिपोर्ट की मानें तो ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भारत और रूस के बीच LNG और LPG की आपूर्ति बढ़ाने को लेकर बातचीत तेज हो गई है. रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, दोनों देशों ने LNG की सप्लाई बढ़ाने की तत्परता जताई है. साथ ही भारत को LPG की आपूर्ति की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है. तेल और गैस क्षेत्र के एक सूत्र ने बताया कि भारत और रूस के बीच हुई हालिया चर्चाओं में ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने पर सहमति बनी है. सूत्र के मुताबिक, दोनों पक्षों ने LNG की आपूर्ति बढ़ाने की इच्छा जताई है और भारत में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली LPG की सप्लाई पर भी चर्चा की है. भारत में घरेलू ईंधन के रूप में LPG की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में रूस एक अहम आपूर्तिकर्ता के रूप में उभर सकता है।  ऑप्‍शन की तलाश विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है. ऐसे में रूस के साथ बढ़ता ऊर्जा सहयोग भारत की रणनीतिक जरूरतों के अनुरूप माना जा रहा है. हाल के महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंध और मजबूत हुए हैं. सूत्र ने यह भी संकेत दिया कि इस दिशा में आगे की बातचीत में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी. उन्‍होंने बताया कि व्यापार जगत की भागीदारी के साथ वार्ता जारी रहने की उम्मीद है. इससे दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं. गौरतलब है कि भारत पहले ही अर्जेंटीना समेत अन्य देशों से LNG आयात के विकल्प तलाश रहा है. ऐसे में रूस के साथ यह संभावित समझौता भारत के ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण की रणनीति को और मजबूती देगा. आने वाले समय में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।  संकट में सामने आया अर्जेंटिना पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत में उत्पन्न LPG की कथित कमी के बीच करीब 20,000 किलोमीटर दूर स्थित दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना ने भारत की मदद के लिए हाथ बढ़ाया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है, क्योंकि देश के लगभग 60 प्रतिशत LPG आयात इसी मार्ग से होते हैं. समुद्री यातायात बाधित होने के चलते भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में तेजी से कदम उठाने पड़े हैं. इसी के तहत अर्जेंटीना एक अहम साझेदार के रूप में उभरा है. भारत में अर्जेंटीना के राजदूत मैरियानो ऑगस्‍टीन कॉसिनो (Mariano Agustin Cousino) ने कहा कि उनका देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है. उन्होंने बताया कि अर्जेंटीना के पास पर्याप्त गैस भंडार हैं और दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियां इसे और गति दे सकती हैं।  खूब बढ़ी LPG की सप्‍लाई साल 2026 की पहली तिमाही में ही अर्जेंटीना ने भारत को 50,000 टन LPG निर्यात किया, जो पूरे 2025 में भेजे गए 22,000 टन से दोगुने से भी अधिक है. इनमें से लगभग 39,000 टन आपूर्ति अर्जेंटीना के बहिया ब्लांका पोर्ट से भारत पहुंच चुकी थी, जबकि 5 मार्च को अतिरिक्त 11,000 टन भेजा गया. गौरतलब है कि 2024 से पहले अर्जेंटीना ने भारत को LPG की आपूर्ति नहीं की थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत का अर्जेंटीना जैसे दूरस्थ देशों के साथ सहयोग बढ़ाना उसकी व्यावहारिक और दूरदर्शी ऊर्जा नीति को दर्शाता है. यह साझेदारी न केवल मौजूदा संकट का समाधान है, बल्कि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत रणनीतिक संबंध की नींव भी रखती है। 

जग वसंत वेसल ने 42 हजार टन LPG के साथ होर्मुज से गुजरात की ओर किया रवाना

 अहमदाबाद एलपीजी गैस की सप्लाई को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. 'जग वसंत' नाम का वेसल (टैंकर) कांडला पोर्ट पहुंच चुका है. यह होर्मुज के रास्ते गुजरात पहुंचा है. इस जहाज में 42 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा LPG गैस लाई गई है।  यह खेप ठीक उसी समय आई है जब दुनिया भर में ऊर्जा की सप्लाई को लेकर काफी अनिश्चितता चल रही है. कांडला पोर्ट अथॉरिटी ने बताया कि आज ही इस गैस को मिड-सी ट्रांसफर के जरिए उतारा जाएगा।  मिड-सी ट्रांसफर का मतलब है कि समुद्र में ही जहाज से गैस को दूसरे सिस्टम या पोर्ट की सुविधाओं तक पहुंचा दिया जाता है. इससे गैस तेजी से उतर जाती है, समय बचता है और सप्लाई भी जल्दी शुरू हो जाती है।  इस बड़ी खेप से देश में LPG गैस की उपलब्धता और मजबूत होने की उम्मीद है. खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा सप्लाई को लेकर थोड़ी अस्थिरता बनी हुई है। कांडला पोर्ट भारत के सबसे बड़े ऊर्जा आयात बंदरगाहों में से एक है. यहां से LPG गैस देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजी जाती है. इस खेप के आने से आने वाले दिनों में घरेलू LPG सप्लाई को स्थिर और सुचारू रखने में मदद मिलेगी।  बता दें कि ईरान की ओर से कुछ ही मुल्कों को होर्मुज के रास्ते से जहाज लेकर जाने की अनुमति मिली है. भारत उन देशों में शामिल है जिसे ईरान ने रास्ते का इस्तेमाल करने की इजाजत दी है।  अब तक कितने टैंकर भारत पहुंचे? ईरान-अमेरिका तनाव से होर्मुज रास्ता बाधित होने के बावजूद भारत के चार महत्वपूर्ण तेल टैंकर सुरक्षित पहुंच चुके हैं. ईरान द्वारा विशेष अनुमति मिलने से ये जहाज पार हो सके।  MT शिवालिक (LPG) 16 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा, जबकि MT नंदा देवी (LPG) 17 मार्च को कांडला में उतरा. जग लाडकी (81,000 टन कच्चा तेल) 18 मार्च मुंद्रा आया. लाइबेरिया फ्लैग Shenlong सऊदी क्रूड लेकर 11 मार्च के आसपास मुंबई पहुंचा। युद्ध में क्या हैं ताजा अपडेट? युद्ध का 28 दिन बीत चुका है. शुक्रवार को अमेरिका-इजरायल का ईरान के साथ युद्ध का 29वां दिन है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह फिलहाल अगले दस दिनों तक ईरान के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमला नहीं करेंगे। 

सरकार का बड़ा बयान: देश में पेट्रोल, डीजल और LPG की कोई कमी नहीं

नई दिल्ली ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच कुछ शहरों के पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ उमड़ती दिख रही है। इसके अलावा, एलपीजी सिलेंडरों में भी कथित संकट का दावा किया जा रहा है। इस बीच, इन दावों को सरकार ने गलत बताया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति पूरी तरह से सुरक्षित और नियंत्रण में है। सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स पर पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। मंत्रालय ने जनता से अपील की है कि वे जान-बूझकर चलाए जा रहे एक शरारतपूर्ण और सुनियोजित दुष्प्रचार अभियान से गुमराह न हों, जिसका उद्देश्य बेवजह घबराहट फैलाना है। 'पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं' भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है, जो 150 से ज्यादा देशों को रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति करता है। क्योंकि भारत दुनिया के लिए एक शुद्ध निर्यातक है, इसलिए घरेलू पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से सुनिश्चित है। पूरे देश में एक लाख से ज्यादा खुदरा ईंधन आउटलेट खुले हैं और बिना किसी रुकावट के ईंधन दे रहे हैं। किसी भी आउटलेट से आपूर्ति की राशनिंग करने के लिए नहीं कहा गया है। पूरी दुनिया में, देश कीमतों में बढ़ोतरी, राशनिंग, ऑड-ईवन वाहन प्रतिबंधों और स्टेशनों को जबरन बंद करने जैसी स्थितियों का सामना कर रहे हैं। मंत्रालय ने अपने बयान में आगे कहा, ''कुछ देशों ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। भारत को ऐसे किसी भी उपाय की जरूरत महसूस नहीं होती। जहां दूसरे देश राशनिंग कर रहे हैं, वहीं भारत में आपूर्ति की कोई कमी नहीं है। जहां कुछ चुनिंदा पंपों पर घबराहट में खरीदारी के इक्का-दुक्का मामले सामने आए, वे सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो के जरिए जान-बूझकर फैलाई गई गलत जानकारी के कारण हुए थे। ऐसे पंपों पर मांग में अचानक बढ़ोतरी के बावजूद, सभी उपभोक्ताओं को ईंधन दिया गया और तेल कंपनियों के डिपो आपूर्ति बढ़ाने के लिए पूरी रात काम करते रहे। तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को दिए जाने वाले क्रेडिट को पहले के एक दिन से बढ़ाकर 3 दिन से ज्यादा करने के कदम भी उठाए हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पंप मालिकों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) से जुड़ी समस्याओं के कारण किसी भी पंप पर पेट्रोल और डीजल की कोई कमी न हो।'' कच्चे तेल की आपूर्ति: कमी की पूरी भरपाई हो गई है मंत्रालय ने आगे कहा, ''होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति के बावजूद, भारत को आज दुनिया भर में अपने 41 से ज्यादा आपूर्तिकर्ताओं से पहले की तुलना में ज़्यादा कच्चा तेल मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उपलब्ध बड़ी मात्रा ने किसी भी रुकावट की पूरी भरपाई कर दी है। भारत की हर रिफाइनरी 100 फीसदी से ज्यादा क्षमता पर चल रही है। अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति भारतीय तेल कंपनियों द्वारा पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। आपूर्ति में कोई कमी नहीं है।''

LPG गैस बुकिंग के नए नियम 2026, अब सिलेंडर मिलेगा 2-3 दिन बाद

भोपाल  आम आदमी की रसोई पर एक बार फिर महंगाई और इंतज़ार की मार पड़ने वाली है। एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग को लेकर नए नियम लागू कर दिए गए हैं, जिससे अब उपभोक्ताओं को पहले से ज्यादा इंतजार करना पड़ेगा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के इस फैसले ने खासकर शहरों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। क्या बदला नए नियमों में? अब जिन उपभोक्ताओं के पास दो गैस सिलेंडर (डबल कनेक्शन) हैं, उन्हें अगली बुकिंग के लिए 35 दिन का इंतजार करना होगा। पहले यह अवधि 25 दिन थी। यानी सीधे 10 दिन का अतिरिक्त इंतजार बढ़ा दिया गया है। ये आए नए नियम नए नियमों के मुताबिक जिन घरों में दो गैस सिलेंडर हैं उन्हें अब 35 दिन बाद ही नया सिलेंडर मिलेगा। जिनके पास एक सिलेंडर है उन्हें पहले की तरह 25 दिन बाद सिलेंडर मिलेगा। यानी सीधी सी बात है कि अब दो सिलेंडर रखने वालों को कुछ और  लंबा इंतजार करना होगा। एलपीजी सप्लाई को लेकर बदलते हालात के बीच सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब उज्ज्वला उपभोक्ताओं को दूसरे गैस सिलिंडर की बुकिंग के लिए 25 दिन की जगह 45 दिन का इंतजार करना होगा। साथ ही, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बुकिंग अंतर का फर्क भी खत्म कर दिया गया है। वहीं, एलपीजी संकट के चलते कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। केंद्र सरकार ने 23 मार्च से होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 50 प्रतिशत गैस देने का निर्देश दिया था, लेकिन प्रदेश में यह पूरी तरह लागू नहीं हो सका है। अब नई व्यवस्था के तहत प्रतिष्ठानों को उनकी औसत खपत के आधार पर केवल 20 प्रतिशत गैस ही दी जाएगी और इसके लिए पहले जांच की जाएगी।  किसे कितने दिन इंतजार? डबल सिलेंडर वाले: 35 दिन बाद बुकिंग  सिंगल सिलेंडर वाले: 25 दिन (कोई बदलाव नहीं) उज्ज्वला योजना लाभार्थी: 45 दिन बाद बुकिंग 10 किलो कम्पोजिट सिलेंडर: 18 दिन बाद छोटे (5 किलो) सिलेंडर: 9 से 16 दिन सबसे बड़ा बदलाव क्या है? अब बुकिंग का समय पिछली डिलीवरी की तारीख से गिना जाएगा, न कि बुकिंग की तारीख से। अगर कोई उपभोक्ता तय समय से पहले बुकिंग करेगा तो सिस्टम खुद ही रिक्वेस्ट रिजेक्ट कर देगा। शहरों में ज्यादा असर क्यों? शहरी इलाकों में ज्यादातर परिवार डबल सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अब गैस खत्म होने पर तुरंत नया सिलेंडर मिलना आसान नहीं होगा।  कमर्शियल गैस पर भी असर 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई भी दबाव में है। फिलहाल इन्हें प्राथमिकता के आधार पर आपात सेवाओं और शिक्षण संस्थानों को ही दिया जा रहा है। सरकार का क्या कहना है? अधिकारियों के मुताबिक, ये बदलाव गैस की खपत को नियंत्रित करने और सप्लाई सिस्टम को संतुलित रखने के लिए किए गए हैं।  जरूरी सूचना: किसी भी समस्या के लिए उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकते हैं। कुल मिलाकर: अब गैस सिलेंडर सिर्फ महंगा ही नहीं, बल्कि समय पर मिलना भी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं को पहले से प्लानिंग करके चलना होगा, वरना रसोई की आग ठंडी पड़ सकती है।

योगी सरकार की सख्ती: पेट्रोल, डीजल और एलपीजी आपूर्ति पर प्रदेश भर में तेज़ कार्रवाई

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी आपूर्ति पर योगी सरकार सख्त, पूरे प्रदेश में ताबड़तोड़ कार्रवाई कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई, अब तक प्रदेश भर में 12,732 छापे एलपीजी वितरकों के खिलाफ 25 एफआईआर दर्ज, कालाबाजारी में शामिल अन्य 152 व्यक्तियों पर भी मुकदमे दर्ज अब तक 16 लोगों की हुई गिरफ्तारी और 185 व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई, 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय एफआईआर, गिरफ्तारी से लेकर अतिरिक्त सिलेंडर आवंटन तक उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू लखनऊ  प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने व्यापक स्तर पर सख्त कदम उठाए हैं। सरकार की सख्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कालाबाजारी और अवैध बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रदेशभर में 12 मार्च से अब तक 12,732 निरीक्षण और छापेमारी की गई है। इस दौरान एलपीजी वितरकों के खिलाफ 25 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि कालाबाजारी में शामिल अन्य 152 व्यक्तियों पर भी मुकदमे दर्ज हुए। कार्रवाई के दौरान 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 185 व्यक्तियों के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई की गई है। उल्लेखनीय है कि शासन स्तर से 12 मार्च 2026 को जारी निर्देशों के तहत मुख्य सचिव द्वारा सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक आपूर्ति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की बाधा को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकतानुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रदेश के 4,108 एलपीजी वितरकों के यहां बुकिंग के अनुरूप उपभोक्ताओं को गैस रिफिल की डिलीवरी सुनिश्चित कराई जा रही है। वर्तमान में सभी वितरकों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आवश्यकतानुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को लगातार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।इस बीच भारत सरकार द्वारा भी सहयोग करते हुए 23 मार्च 2026 से वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों के लिए 20 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन की अनुमति प्रदान की गई है, जिससे बाजार में आपूर्ति और अधिक सुदृढ़ हुई है। जिला पूर्ति अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी फील्ड में स्थिति की सतत निगरानी के लिए खाद्यायुक्त कार्यालय में 24 घंटे संचालित कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहां पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति से संबंधित सूचनाओं का आदान-प्रदान और समस्याओं का त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। इसके साथ ही होम कंट्रोल रूम में भी खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों की तैनाती की गई है। प्रदेश के सभी जनपदों में भी कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं, जो लगातार सक्रिय हैं। साथ ही जिला पूर्ति अधिकारी और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी फील्ड में लगातार भ्रमण कर उपभोक्ताओं को एलपीजी की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित कर रहे हैं।

पीएनजी वाले घरों में अब एलपीजी सिलिंडर नहीं चलेगा, सरकार ने जारी किए सरेंडर के आदेश

चंडीगढ़  हरियाणा में अब रसोई गैस की व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन घरों तक पाइप नेचुरल गैस यानी पीएनजी पहुंच चुकी है, वहां अब एलपीजी सिलिंडर नहीं चलेगा। यानी एक ही घर में दो तरह की गैस रखने का दौर अब खत्म होगा। सोमवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक के बाद ये सख्त फैसले लिए गए हैं। इसमें राज्य में एलपीजी और पीएनजी की स्थिति की समीक्षा करते हुए यह तय किया गया कि जहां पीएनजी उपलब्ध है, वहां के उपभोक्ताओं को उसी पर शिफ्ट करना होगा। भले ही वे पीएनजी को न चाहते हों लेकिन फिर भी उन्हें पीएनजी ही लेनी होगी।  बैठक में निर्णय लिया गया है कि पीएनजी कनेक्शन होने के बावजूद एलपीजी कनेक्शन रखना अब गैरकानूनी माना जाएगा। ऐसे सभी उपभोक्ताओं को तुरंत अपना सिलिंडर कनेक्शन सरेंडर करना होगा। आदेश में यह भी स्पष्ट है कि इसके बाद कोई भी उपभोक्ता सरकारी तेल कंपनियों से गैस सिलिंडर की रिफिल यानी भरवा नहीं ले सकेगा। सबसे सख्त प्रावधान ये है कि अगर किसी इलाके में पीएनजी की सुविधा उपलब्ध है और उपभोक्ता इसे लेने से इनकार करता है, तो उसका एलपीजी कनेक्शन ही सस्पेंड कर दिया जाएगा। यानी अब विकल्प की गुंजाइश लगभग खत्म कर दी गई है। जिन घरों में पीएनजी मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं, वहां तुरंत प्रभाव से एलपीजी सप्लाई बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि एक ही घर में दोहरी गैस व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाए। अफसरों को सख्ती से आदेश करवाने होंगे लागू- राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों और सिटी गैस कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि इस फैसले को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू कराया जाए। साथ ही पीएनजी पाइपलाइन बिछाने में आ रही अड़चनों जैसे रोड कटिंग और राइट ऑफ वे को भी तुरंत दूर करने को कहा गया है। ताकि गैस कंपनी शहर की सड़कों पर अपनी पाइपलाइन बिछा सकें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पीएनजी के कनेक्शन पहुंच सकें। सरकार का दावा है कि पीएनजी ज्यादा सुरक्षित, सस्ती और सुविधाजनक है। इससे सिलिंडर ढुलाई, गैस खत्म होने और ब्लैक मार्केटिंग जैसी समस्याएं खत्म होंगी। अधिकारी के अनुसार सरकार की ओर से ये आदेश मिले हैं। इनको धरातल पर सख्ती से लागू कराया जाएगा। जहां पीएनजी की पाइपलाइन हैं वहां के उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन ही लेना होगा। जिनके कनेक्शन चल रहे हैं उन्हें अपना एलपीजी सिलिंडर सरेंडर करना होगा। पाइपलाइन बिछाने के लिए सरकार की ओर से नगर निगम और एचएसवीपी को भी निर्देश जारी किए हैं। -मुकेश कुमार, डीएफएससी, करनाल।

नई गाइडलाइन के तहत प्रदेश में LPG गैस सिलेंडर वितरण, कोटा निर्धारित

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने गैस सिलेंडरों के वितरण का कोटा तय कर दिया है। घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह 100 प्रतिशत आपूर्ति मिलती रहेगी। वहीं, शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्रों को संबंधित जिले में उपलब्ध कमर्शियल गैस के कुल स्टॉक में से 30 प्रतिशत आपूर्ति देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे में दोनों क्षेत्रों की जरूरत पूरी हो सकेगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप सचिव बीके चंदेल ने सभी कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश जारी किए। इससे पहले विभागीय मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने गैस व पेट्रोल-डीजल आपूर्ति की समीक्षा की। सरकार ने कहा कि जमाखोरी या कालाबाजारी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तय कर दिया गया सबका कोटा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस, एयरपोर्ट, रेलवे, दीनदयाल रसोई, जेल, सामाजिक न्याय विभाग और महिला-बाल विकास को 35 प्रतिशत सिलेंडर मिलेगा। होटल क्षेत्र को 9 प्रतिशत, रेस्टोरेंट व केटरिंग को भी समान आपूर्ति तथा ढाबा व स्ट्रीट फूड वेंडरों को 7 प्रतिशत आपूर्ति होगी। उद्योगों में फार्मास्यूटिकल, फूड प्रोसेसिंग, पोल्ट्री फीड व सीड प्रोसेसिंग क्षेत्र को 5 प्रतिशत और अन्य उद्योगों को भी इतनी ही मात्रा में सिलेंडर दिए जाएंगे। किया जाएगा निरिक्षण सरकार ने स्पष्ट किया है कि जमाखोरी, अवैध भंडारण और कालाबाजारी को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने संस्थानों और प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है, ताकि गैस की उपलब्धता का संतुलन बनाए रखा जा सके। यह नई व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी, जिससे आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए आम आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखा जा सके। कमर्शियल गैस सिलिंडरों की दिक्कत राजधानी में अभी भी कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत हो रही है। बीते दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी है। अब इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और छोटे ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है। कारोबार चौपट होने की कगार पर पहुंच चुका है, जिससे व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत: इस साउथ अमेरिकी देश से LPG सप्लाई बढ़ी, आयात हुआ डबल

नई दिल्ली ईरान में छिड़ी जंग का सीधा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली सप्लाई पर पड़ा है तो वहीं उत्पादन भी प्रभावित है। इस बीच भारत के लिए साउथ अमेरिका के देश अर्जेंटीना से महत्वपूर्ण राहत आई है। अर्जेंटीना से बीते तीन महीनों में आयात दोगुना हो गया है और यह भारत के लिए बड़ी राहत है। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि अर्जेंटीना इस साल अब तक 50 हजार टन एलपीजी की खरीद की जा चुकी है, जो बीते साल 22 हजार टन ही थी। इस तरह अब तक दोगुने से ज्यादा का आयात भारत कर चुका है। ऐसे समय में जब ईरान से लेकर कतर तक में गैस फील्ड्स पर हमले हो रहे हैं, तब अर्जेंटीना से आयात का बढ़ना बड़ी राहत है। अर्जेंटीना के पोर्ट ऑफ बाहिया ब्लांका से इस जंग की शुरुआत से ठीक पहले भारत ने 39 हजार टन गैस मंगाई थी। इसके बाद 5 मार्च को फिर से 11 हजार नई खेप मंगाई गई थी। अर्जेंटीना का जनवरी महीने में गैस उत्पादन 2,59,000 टन था। उसने तेजी से अपने उत्पादन में भी इजाफा करने के प्रयास किए हैं। इससे स्पष्ट है कि मिडल ईस्ट के देशों से इतर गैस की खरीद के लिए प्रयास कर रहे भारत को इससे बड़ी राहत मिल सकती है। कतर, सऊदी अरब जैसे देशों पर ईरान के हमले हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में अर्जेंटीना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। भारत पहले ही नॉर्वे और अमेरिका जैसे देशों से गैस की खरीद में बढ़ोतरी कर चुका है। इसके अलावा भारत ने अपनी खरीद को डाइवर्सिफाई करने के जो प्रयास किए हैं, उसी के तहत अर्जेंटीना भी जुड़ा है। भारत 2024 से पहले अर्जेंटीना से तेल और गैस की कोई खरीद नहीं करता था। अब यह देश जुड़ा है और भारत तेजी से उससे खरीद बढ़ाने का इच्छुक है। यही नहीं मांग को देखते हुए अर्जेंटीना ने भी अपनी प्रॉसेसिंग यूनिट के विस्तार का फैसला लिया है। इस तरह भारत ने एक नया पार्टनर एनर्जी के मामले में तलाश लिया है। बता दें कि भारत पहले ही अर्जेंटीना से एडिबल ऑयल खरीदता रहा है। इसमें भी बड़ा हिस्सा सोयाबीन तेल का रहा है। इसके अलावा लेदर, सूरजमुखी का तेल, दाल और कुछ केमिकल्स आदि की खरीद करता रहा है। भारत की कंपनी ONGC विदेश ने किया है करार अर्जेंटीना से तेल और गैस की खरीद के लिए भारत की कंपनी ONGC विदेश लिमिटेड ने समझौता भी किया है। गौरतलब है कि लंबे समय से यह बात होती ही है कि भारत को अपनी तेल और गैस की खरीद को डाइवर्सिफाई करने की जरूरत है। ऐसे में देखना होगा कि आने वाले दिनों में ईरान और खाड़ी देशों से इतर किन मुल्कों से भारत अपनी खरीद में इजाफा करता है। फिलहाल गैस का संकट देश में बड़ा है और उससे निपटने की जरूरत है।  

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरेंगे भारतीय झंडे वाले 2 गैस टैंकर, LPG पर मिली गुड न्यूज

 नई दिल्ली दुनिया में जितना भी तेल और गैस समुद्र के रास्ते जाता है, उसका करीब 20 फीसदी सिर्फ एक रास्ते से गुजरता है होर्मुज की खाड़ी. यह एक बहुत ही पतली सी जलधारा है जो ईरान और ओमान के बीच में है. एक तरफ खाड़ी के देश हैं – UAE, कुवैत, सऊदी अरब, इराक. और इन सबका तेल बाहर जाने का एकमात्र समुद्री रास्ता यही है।  अब सोचिए – अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो क्या होगा? दुनिया के पांचवें हिस्से का तेल और गैस रुक जाएगा. कीमतें आसमान छू लेंगी. और भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से मंगाते हैं, उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ होगी।  हुआ क्या है अभी? ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग छिड़ी हुई है. ईरान ने धमकी दे दी कि जो भी जहाज होर्मुज से निकलने की कोशिश करेगा, उस पर हमला होगा।  बस इतना सुनते ही सैकड़ों जहाज वहीं लंगर डालकर रुक गए. कोई आगे जाने को तैयार नहीं. पिछले 24 घंटों में एक भी तेल का बड़ा जहाज होर्मुज से नहीं गुजरा. यह बहुत बड़ी बात है. मतलब रास्ता व्यावहारिक रूप से बंद पड़ा है।  भारत का क्या हाल है? भारत के 22 जहाज इस वक्त खाड़ी के अंदर फंसे हुए हैं. न आगे जा पा रहे हैं, न वापस आ पा रहे हैं. इनमें दो जहाज खास तौर पर चर्चा में हैं. पाइन गैस जिसे आईओसी यानी इंडियन ऑयल ने किराए पर लिया है. जग वसंत – जिसे बीपीसीएल ने किराए पर लिया है।  ये दोनों LPG टैंकर हैं. मतलब इनमें रसोई गैस जैसा ईंधन भरा है जो भारत के घरों तक पहुंचना है. ये दोनों जहाज UAE के शारजाह के पास लंगर डाले खड़े हैं. शनिवार को निकलने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।  मोदी सरकार क्या कर रही है? भारत सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि भारत चाहता है कि उसके जहाज सुरक्षित और बिना रोक-टोक के निकल सकें।  और सबसे अहम बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद दूसरे देशों के नेताओं से बात कर रहे हैं ताकि इन जहाजों का सुरक्षित रास्ता निकाला जा सके. यह कूटनीति का खेल है. प्रधानमंत्री की कोशिश है कि ईरान तक यह बात पहुंचे कि भारत के जहाजों को जाने दिया जाए।  खबर के मुताबिक पिछले हफ्ते ईरान ने दो भारतीय LPG जहाजों को होरमुज से गुजरने दिया था. यानी ईरान ने भारत को थोड़ी रियायत दी. यह इसलिए भी समझ में आता है क्योंकि भारत और ईरान के रिश्ते पहले से ही ठीक-ठाक रहे हैं, और भारत ने हमेशा इस जंग में किसी एक तरफ खड़े होने से परहेज किया है।  पाकिस्तान वाला दिलचस्प किस्सा इस पूरी खबर में एक बहुत दिलचस्प बात और है. डेटा से पता चला है कि पाकिस्तान जाने वाला एक तेल का जहाज हाल ही में होर्मुज से गुजर गया. इसका मतलब यह है कि ईरान ने पूरी तरह रास्ता बंद नहीं किया है. वो चुन-चुनकर कुछ देशों को जाने दे रहा है. जिनसे उसके संबंध ठीक हैं, या जो उसके लिए काम के हैं – उन्हें रास्ता मिल रहा है।  यह एक तरह का दबाव का हथियार है. ईरान कह रहा है, "देखो, मैं सबको रोक सकता हूं, लेकिन जिसे चाहूं उसे जाने भी दे सकता हूं।  असली मुद्दा क्या है? यह सिर्फ कुछ जहाजों की कहानी नहीं है. यह उस रास्ते की कहानी है जिससे भारत का रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल आता है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो भारत में गैस और तेल की कमी हो सकती है. कीमतें बढ़ सकती हैं और आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।