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पहलगाम हमले का लिया बदला, PM मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को महादेव को किया समर्पित

 लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर पहुंच गए हैं, जहां वह कुछ देर में करीब 2,183.45 करोड़ रुपये की लागत वाली 52 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त भी जारी की. बताया जा रहा है कि रक्षाबंधन से पहले सावन के महीने में उनका ये दौरा पूर्वांचल के विकास को नई दिशा देगा. इस मौके पर पीएम मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'आज मैं ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार काशी आया हूं. जब 22 अप्रैल पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था. 26 निर्दोष लोगों की बेहरमी से हत्या कर दी गई. उनके परिवार की पीड़िता उन बच्चा का दुख और उन बेटियों की वेदना, मेरा मन बहुत दुख से भर गया था. तब मैं बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना कर रहा था कि उन्हें ये दुख सहन करने की शक्ति दे. मैंने जो वचन दिया था वो भी पूरा हुआ ये महादेश के आशीर्वाद से पूरा हुआ है.' साथियों इन दिनों जब काशी में गंगा जल लेकर जाते हुए शिव भक्तों की तस्वीरें देखने का अवसर मिल रहा है और खास कर जब हमारे यादव बंधु बाबा का जलाभिषेक करने निकलते हैं तो वो बहुत ही मनोरम दृश्य होता है. आज काशी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की है. इस बारे में बोलते हुए पीएम ने कहा, 'जब काशी से धन जाता है तो वो अपने आप में प्रसाद बन जाता है. 21 हजार करोड़ रुपये किसाने के खाते में जमा कर दिए हैं.' पीएम ने कहा कि पहले के सरकारों में किसानों के नाम पर एक घोषणा भी पूरी होना मुश्किल थी, लेकिन बीजेपी सरकार जो कहती है वो करके दिखाती हैं. आज पीएम किसान सम्मान निधि सरकार के पक्के इरादों की उदाहरण बन गई है. किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 20वीं किस्त जारी की, जिसके तहत देशभर के 9.70 करोड़ से अधिक किसानों को 20,500 करोड़ सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित किए गए. इसके बाद पीएम ने दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण वितरित किए. पीएम ने दृष्टिबाधित छात्रा बबली को लो विजन का चश्मा भेंट किया और छात्रा से बातचीत की. इसके बाद पीएम ने संतोष कुमार पांडे व्हीलचेयर प्रदान की.  इन प्रमुख परियोजनाओं का PM करेंगे उद्घाटन     वाराणसी-भदोही सड़क का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण (269.10 करोड़)     मोहनसराय-अडलपुरा मार्ग पर ROB का निर्माण (42.22 करोड़)     PAC रामनगर में बहुउद्देशीय सभागार (2.54 करोड़)     CSR के तहत 8 मिट्टी घाटों का पुनर्विकास (22 करोड़)     कालिका धाम मंदिर पर्यटन विकास (2.56 करोड़)     लालपुर स्टेडियम में हॉकी मैदान का पुनर्निर्माण (4.88 करोड़)     तिलमापुर में रंगीला दास कुटिया के पास घाट का निर्माण (1.77 करोड़)     पशु जन्म नियंत्रण और डॉग केयर सेंटर (1.85 करोड़)     53 विद्यालय भवनों की मरम्मत (7.89 करोड़)     कैंसर अस्पतालों में अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना (73.30 करोड़)     जल जीवन मिशन के तहत 47 पेयजल योजनाएं (129.97 करोड़)     दुर्गाकुंड का जीर्णोद्धार (3.40 करोड़)  

प्रधानमंत्री के प्रदेश आगमन की तैयारी तेज, डॉ. यादव ने किया ऐलान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के विकास कार्यों के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मिल रहा आशीर्वाद सभी प्रदेशवासियों के लिए उत्साहवर्धक है। प्रसन्नता का विषय है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भोपाल मेट्रो ट्रेन के शुभारंभ और धार में आरंभ होने वाले प्रधानमंत्री मित्र पार्क के भूमिपूजन में स्वयं उपस्थित होकर आशीर्वाद प्रदान करने की मौखिक सहमति प्रदान की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी से प्रदेश के किसान सम्मान कार्यक्रम में भी सहभागिता के लिए अनुरोध किया है। इन तीनों कार्यक्रमों के लिए शीघ्र ही प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा तिथि निर्धारित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा में बताया कि दिल्ली प्रवास के दौरान प्रदेश के चहुमुखी विकास के लिए प्रधानमंत्री मोदी से भेंट कर मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त किया।  

75% समर्थन के साथ PM मोदी ने फिर से मारी बाज़ी—ट्रंप अब पायदान 8 पर

नई दिल्ली अमेरिका की बिजनेस इंटेलिजेंस कंपनी मॉर्निंग कंसल्ट के एक सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के नेताओं में 75% अप्रूवल रेटिंग के साथ सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता हैं। यह डेटा 4 से 10 जुलाई 2025 के बीच सर्वे करके इकट्ठा किया गया। साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग 59% के साथ दूसरे स्थान पर हैं। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 45% से कम अप्रूवल के साथ आठवें स्थान पर हैं। पीएम मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 4,078 दिन पूरे कर लिए हैं। वह जवाहरलाल नेहरू के बाद सबसे लंबे समय तक बने रहने वाले प्रधानमंत्री बन गए हैं। मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे का डेटा क्या कहता है? इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे में भाग लेने वाले 75% लोगों ने PM मोदी को एक लोकतांत्रिक विश्व नेता के रूप में पसंद किया। 7% लोग कोई राय नहीं बना पाए, जबकि 18% लोगों ने उन्हें नापसंद किया। इस लिस्ट में दूसरे सबसे लोकप्रिय नेता साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग हैं। उन्हें 59% लोगों ने पसंद किया। 13% लोगों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जबकि 29% लोगों ने उन्हें नापसंद किया। म्युंग के लिए दूसरा स्थान हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अभी एक महीना पहले ही साउथ कोरिया के राष्ट्रपति का पद संभाला है। रेटिंग 4-10 जुलाई तक इकट्ठा किए गए डेटा पर आधारित मॉर्निंग कंसल्ट ने कहा, लेटेस्ट अप्रूवल रेटिंग 4-10 जुलाई, 2025 तक इकट्ठा किए गए डेटा पर आधारित हैं। रेटिंग हर देश में वयस्कों के विचारों का सात दिन का सिंपल मूविंग एवरेज दिखाती हैं। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई तीसरे स्थान पर हैं। उन्हें 57% वोट मिले। 6% लोगों ने कोई राय नहीं दी और 37% लोगों ने उन्हें नापसंद किया।कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी चौथे स्थान पर हैं। उन्हें 56% वोट मिले। 31% लोगों ने उनके खिलाफ वोट किया, जबकि 13% लोगों ने कोई राय नहीं दी। ऑस्ट्रेलिया के एंथोनी अल्बानीस पांचवें स्थान पर हैं। उन्हें 54% वोट मिले। 35% वोटर उनसे सहमत नहीं थे, जबकि 11% लोगों ने कोई राय नहीं दी। डोनाल्ड ट्रंप आठवें स्थान पर हैं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आठवें स्थान पर हैं। उन्हें केवल 44% वोट मिले। हैरानी की बात यह है कि ट्रंप ने पिछले नवंबर में अमेरिका का चुनाव भारी बहुमत से जीता था। लेकिन, उनके व्यापार शुल्क और कुछ अंदरूनी फैसलों से उनकी लोकप्रियता कम हुई है। पोलैंड के डोनाल्ड टस्क नौवें स्थान पर हैं। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी दसवें स्थान पर हैं। इस लिस्ट में पीएम मोदी के बाद दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग 59% अप्रूवल रेटिंग के साथ दूसरे स्थान पर रहे। यह ली जे म्युंग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि दक्षिण कोरिया में सर्वोच्च पद पर आसीन हुए उन्हें अभी सिर्फ एक ही महीना हुआ है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 45% से भी कम अप्रूवल रेटिंग के साथ 8वें स्थान पर खिसक गए हैं। दुनिया में PM मोदी का बढ़ा कद: एक लोकतांत्रिक वैश्विक नेता मॉर्निंग कंसल्ट सर्वे के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी का कद देश के अंदर और बाहर दोनों जगह और बढ़ गया है। सर्वे में शामिल 75% लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को एक लोकतांत्रिक वैश्विक नेता के रूप में स्वीकार किया है। इस पर 7% लोग कोई निर्णय नहीं ले पाए जबकि 18% लोगों की राय इससे अलग थी। अन्य प्रमुख नेता: माइली तीसरे, मैक्रों सबसे कम लोकप्रिय     तीसरा स्थान: दक्षिणपंथी माने जाने वाले अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर रहे उनके पक्ष में 57% वोट पड़े। 6% लोगों ने कोई राय नहीं दी और 37% प्रतिभागियों ने उन्हें अस्वीकार कर दिया।     सबसे कम लोकप्रिय: सबसे कम लोकप्रिय नेताओं में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और चेक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री पेट्र फिआला शामिल हैं जिन्हें केवल 18% लोगों का समर्थन मिला है जबकि 74% लोग उनसे असंतुष्ट हैं।     इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी 10वें स्थान पर हैं। यह सर्वे रिपोर्ट एक बार फिर दर्शाती है कि वैश्विक स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

मालदीव के रक्षा मंत्रालय की बिल्डिंग पर पीएम मोदी का इतना बड़ा बैनर: मुइज्जू ने मोदी को ऐसे कहा शुक्रिया

नई दिल्ली मालदीव की राजधानी माले में हाल ही में बना रक्षा मंत्रालय भवन आज सुर्खियों में है. इस भवन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. मालदीव में रक्षा मंत्रालय भवन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का होना भारत-मालदीव संबंधों की मजबूती और आपसी सम्मान का प्रतीक है. 25 जुलाई 2025 को पीएम मोदी की दो दिवसीय यात्रा के दौरान, जब वे राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के निमंत्रण पर मालदीव पहुंचे, इस भवन पर उनकी तस्वीर लगाई गई, जो भारत की बढ़ती क्षेत्रीय प्रभावशक्ति और मालदीव के साथ रक्षा सहयोग को दर्शाती है. यह कदम हाल के तनावों के बाद संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है, खासकर जब मालदीव ने भारत को First Responder मानता है. कुछ लोग इसे भारत के प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश या चीन के बढ़ते हस्तक्षेप के जवाब के रूप में भी देखते हैं.   क्या है खास? इस बिल्डिंग में पर्यावरण का खास ख्याल रखा गया है. इसमें सौर पैनल और बादल संग्रहण प्रणाली लगाई गई है, जो इसे पर्यावरण-अनुकूल बनाती है. भवन में कमांड सेंटर, रक्षा संचालन कक्ष और प्रशिक्षण सुविधाएं हैं, जो मालदीव की सेना को आधुनिक तकनीक से लैस करेंगे. इसकी तीन मंजिलें और ग्लास फेसेड डिज़ाइन इसे भव्य बनाता है. क्यों बना यह भवन? मालदीव ने हाल के सालों में अपनी रक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया है, भारत-चीन प्रभाव के बीच. 2023 में मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने रक्षा बजट को दोगुना कर $50 मिलियन (लगभग 420 करोड़ रुपये) किया था. यह भवन उसी रणनीति का हिस्सा है, जो देश की समुद्री सीमाओं और पर्यटन को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी है. भारत के साथ रिश्ता भारत ने इस प्रोजेक्ट में तकनीकी सहायता दी है. 2024 में भारत-मालदीव रक्षा समझौते के तहत भारतीय विशेषज्ञों ने भवन की सुरक्षा और डिज़ाइन में मदद की. मालदीव के रक्षा मंत्री ने कहा कि यह भवन हमारे देश की संप्रभुता को मजबूत करेगा. हालांकि, कुछ लोग इसे चीन के बढ़ते प्रभाव के जवाब के तौर पर देख रहे हैं.

इतिहास में नया मुकाम: इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ PM मोदी बने दूसरे सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के दौरे पर हैं, इसी बीच उन्होंने एक और बेहद खास कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। उन्होंने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का खास रिकॉर्ड तोड़ दिया। नरेंद्र मोदी 25 जुलाई यानी आज भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री पद संभालने वाले पीएम बन गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इंदिरा गांधी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए ये कामयाबी हासिल की है। इंदिरा गांधी सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के मामले में दूसरे नंबर थीं। हालांकि, पीएम मोदी अब उनसे आगे निकल गए हैं। अब प्रधानमंत्री मोदी से आगे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ही हैं। पीएम मोदी ने इस मामले में इंदिरा को पछाड़ा नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को यह मुकाम हासिल कर लिया। वह लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने के मामले में इंदिरा गांधी से आगे निकल गए हैं। इंदिरा गांधी 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक, 4,077 दिनों तक प्रधानमंत्री रहीं। पीएम मोदी मोदी का 25 जुलाई को कार्यकाल 4,078 दिनों का हो गया है। लगातार तीसरी बार स्थिर सरकार नरेन्द्र मोदी ने लगातार तीन लोकसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जीत दिलाकर प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड की बराबरी की है. आजादी के बाद जन्मे पहले प्रधानमंत्री के रूप में पीएम मोदी ने गैर-कांग्रेसी नेताओं में सबसे लंबे समय तक सेवा देने का गौरव भी हासिल किया है. वह दो पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले एकमात्र गैर-कांग्रेसी नेता हैं, जो उनकी राजनीतिक स्थिरता का प्रमाण है. पीएम मोदी ने जीते 6 चुनाव पीएम मोदी का राजनीतिक सफर साल 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुआ, जहां उन्होंने 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की. इसके बाद साल 2014 में केंद्र की सत्ता संभालने के बाद उन्होंने लगातार तीन आम चुनावों में भाजपा को विजय दिलाई. एक अधिकारी ने बताया कि मोदी एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने एक ही पार्टी के तहत छह विधानसभा और लोकसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज की है. यह उपलब्धि उनकी रणनीतिक कुशलता और जनता के बीच उनकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाती है. पीएम मोदी की नीतियों पर जनता को विश्‍वास पीएम मोदी का यह रिकॉर्ड न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की बदलती राजनीतिक गतिशीलता को भी दर्शाता है. जहां नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर में कांग्रेस का वर्चस्व था, वहीं मोदी ने गैर-कांग्रेसी नेतृत्व को एक नई ऊंचाई दी है. उनकी नीतियों, जैसे डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत, ने देश की प्रगति को नई दिशा दी है.यह उपलब्धि मोदी के नेतृत्व की स्थिरता और उनके सुधारवादी एजेंडे के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाती है. हालांकि, विपक्षी दलों द्वारा उन पर लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने और ध्रुवीकरण की राजनीति करने के आरोप भी लगते रहे हैं. फिर भी, यह ऐतिहासिक क्षण भारत के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. अब पीएम मोदी से आगे सिर्फ पहले प्रधानमंत्री नेहरू सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड अभी भी जवाहरलाल नेहरू के नाम है। पंडित नेहरू ने 1952 से 1964 तक देश के प्रधानमंत्री की जिम्मा संभाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात करें तो उन्होंने पीएम पद संभालने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली है। वह 13 साल तक गुजरात के सीएम रहे। गैर कांग्रेसी पीएम के तौर पर सबसे लंबा कार्यकाल गैर कांग्रेस पीएम के तौर पर भी सबसे लंबा कार्यकाल भी प्रधानमंत्री मोदी का ही है। पीएम मोदी ने गुजरात में लगातार तीन बार BJP को जीत दिलाई। यह जीत 2002, 2007 और 2012 में मिली। उन्होंने केंद्र में भी यह कमाल किया। उनकी पार्टी बीजेपी ने 2014, 2019 और 2024 में लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीते। मई 2026 में तोड़ देंगे पूर्व पीएम नेहरू का रिकॉर्ड जिस तरह से प्रधानमंत्री मोदी अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे जल्द ही वो नेहरू को भी पीछे छोड़ देंगे। पीएम मोदी मई 2026 में पूर्व पीएम नेहरू के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। इसी के साथ वो सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले व्यक्ति बन जाएंगे। यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि नरेंद्र मोदी बीते 24 सालों से सत्ता में हैं। वह पहले लगातार गुजरात के सीएम रहे और फिर लगातार करीब 11 सालों से प्रधानमंत्री बने हुए हैं। एक बात और है कि पीएम नरेंद्र मोदी देश की आजादी के बाद पैदा होने वाले पहले शख्स हैं, जो पीएम की कुर्सी तक बैठे हैं। आइए जानते हैं, उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य… – वह सबसे लंबे कार्यकाल वाले देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं। उनसे पहले यह रिकॉर्ड पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम था। – गैर-हिंदी भाषी राज्य से आने वाले वह पहले प्रधानमंत्री हैं, जिनका कार्यकाल इतना लंबा रहा है। – यदि राज्य में उनके सीएम कार्यकाल को भी गिन लिया जाए तो वह पहले नेता हैं, जो किसी चुनी हुई सरकार के सबसे लंबे समय तक मुखिया रहे हैं। – वह ऐसे पहले और गैर-कांग्रेसी पीएम हैं, जिन्होंने अपने दो कार्यकाल लगातार पूरे किए हैं। – एक रिकॉर्ड यह भी है कि वह पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने अपने दम पर बहुमत हासिल करके दो बार सरकार बनाई। – इंदिरा गांधी के कार्य़काल के बाद वह पहले ऐसे पीएम हैं, जिन्होंने दोबारा बहुमत के साथ सत्ता हासिल की। इसके अलावा पंडित नेहरू के बाद वह दूसरे ऐसे नेता हैं, जो केंद्र सरकार का लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर नेतृत्व कर रहे हैं। – वह देश के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने लगातार 6 चुनाव जीते हैं। उन्हें 2002, 2207 और 2012 में गुजरात चुनाव में जीत मिली थी। इसके अलावा 2014, 2019 और 2024 में उन्हें लोकसभा चुनाव में जीत मिली थी।

भारत-मालदीव संबंधों में गर्मजोशी की वापसी? मुइज्जू ने एयरपोर्ट पर किया मोदी का स्वागत

माले  मालदीव दौरे पर पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का माले एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू खुद एयरपोर्ट पर पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया है। जिसके बाद अब संभावना है कि दोनों देशों के संबंध, जो मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद खराब होने लगे थे, वो फिर से सुधर गये हैं। मुइज्जू ने एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया है। राष्ट्रपति मुइज्जू के साथ-साथ मालदीव सरकार के कई शीर्ष मंत्री, जिनमें विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री शामिह हैं, वो भी प्रधानमंत्री मोदी की आगवानी के लिए एयरपोर्ट पर मौजूद थे। यह साफ संकेत है कि द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊर्जा देने के लिए दोनों देशों में राजनीतिक इच्छाशक्ति मौजूद है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पिछले कुछ महीनों में भारत और मालदीव के रिश्तों में सुधार होने लगा है। मोहम्मद मुइज्जू ने 2023 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 'इंडिया ऑउट' कैम्पेन चलाया था। राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू ने पहला द्विपक्षीय विदेशी दौरा चीन का किया था। इसके अलावा उन्होंने अपरोक्ष तौर पर भारत के खिलाफ कुछ बयान भी दिए थे। वहीं जनवरी 2024 में मालदीव के कुछ मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की थी, जिसके बाद दोनों देशों के संबंध काफी खराब होने लगे थे। भारत में 'मालदीव का बहिष्कार' करने की मुहिम भी चलाई गई थी। मालदीव और भारत के सुधर रहे हैं रिश्ते एक्सपर्ट्स का कहना है कि मालदीव के राष्ट्रपति ने पहले चीन और तुर्की जैसे देशों से संबंध बढ़ाने की कोशिश की थी। उनका मकसद भारत को दरकिनार करना था। लेकिन बहुत जल्द उन्हें अहसास हो गया कि भारत के बिना स्थिति काफी मुश्किल हो सकती है। क्योंकि मालदीव हिंद महासागर के बीच में है और कई द्वीपों में बिखरा देश है। यहां भारत की मदद के बिना मालदीव को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। किसी भी आपत स्थिति में सबसे पहले भारतीय मदद ही पहुंच सकती है। श्रीलंका ने भी मालदीव के राष्ट्रपति को भारत के साथ संबंध सुधारने की सलाह दी थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के तीसरी बार शपथ ग्रहण समारोह में मोहम्मद मुइज्जू दिल्ली आए थे। इसके अगले महीने फिर से मोहम्मद मुइज्जू ने दिल्ली का द्विपक्षीय दौरा किया था। फिर धीरे धीरे संबंध सुधरने लगे। प्रधानमंत्री मोदी को मालदीव ने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर राजकीय मेहमान के तौर पर आमंत्रित किया है। इस दौरान दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ाने, समुद्री निगरानी और आतंकवाद विरोधी रणनीति, आर्थिक सहायता और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट्स, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में समझौते या घोषणाएं हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्षेत्रीय दबाव और घरेलू आर्थिक चुनौतियों के चलते मालदीव को भारत जैसे पड़ोसी और सहयोगी की आवश्यकता है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी इस दौरे के दौरान मालदीव के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान कर सकते हैं, जो क्रेडिन लाइन के जरिए होने की संभावना है। मोहम्मद मुइज्जू को चीन का हिमायती माना जाता था, उन्होंने मालदीव चुनाव में भारतीय कंपनियों की मौजूदगी का मुद्दा बढ़ चढ़कर उठाया था. राष्ट्रपति बनने के बाद मोहम्मद मुइज्जू परंपरा को बदलते हुए अपनी पहली यात्रा पर दिसंबर 2023 में तुर्की गए, फिर जनवरी 2024 में उन्होंने चीन की यात्रा की. जबकि मालदीव में रवायत ये थी कि नए राष्ट्राध्यक्ष पहले भारत का दौरा करते थे.  मोहम्मद मुइज्जू  का ये कदम बताता था कि वे मालदीव को भारत से दूर ले जा रहे हैं. इसके बाद मालदीव के मंत्रियों के बयान पीएम मोदी को लेकर आए जो गरिमा के विपरीत थे.  लेकिन साल 2023 से 2025 के बीच राष्ट्रपति मोइज्जू को और मालदीव के थिंक टैंक को भारत को नजरअंदाज करने का मतलब समझ में आ गया. शुक्रवार को पीएम मोदी जब मालदीव की राजधानी माले पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए मालदीव की पूरी सरकार पलक पांवड़े बिछाए तैयार थी.  खुद राष्ट्रपति मुइज्जू, मालदीव के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री, गृह मंत्री एयरपोर्ट पर मौजूद थे. दो साल से कम समय में भी मोइज्जू की बायकॉट इंडिया की नीति, 'वेलकम मोदी' में तब्दील हो गई. आखिर क्या वजह रही जो राष्ट्रपति मोइज्जू को 18-20 महीनों में भारत को लेकर अपनी गलतियों को सुधारने पर मजूबर होना पड़ा.  आर्थिक संकट: कोरोना खत्म हो गया है लेकिन असर से मालदीव की अर्थव्यवस्था निकल नहीं पा रही है.  मालदीव की अर्थव्यवस्था संकट में है, विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर 2024 में मात्र $440 मिलियन था जो डेढ़ महीने के आयात के लिए पर्याप्त था. ऐसे मुश्किल मौके पर भारत ने मालदीव की मदद की. भारत ने 750 मिलियन डॉलर की करेंसी स्वैप की सुविधा दी और 100 मिलियन डॉलक ट्रेजरी बिल रोलओवर के साथ महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की. इसके अलावा भारत अरबों रुपये का प्रोजेक्ट मालदीव में चला रहा है. ये प्रोजेक्ट मालदीव में बुनियाद ढांचे के विकास में अहम रोल अदा करेंगे. थिंक टैंक ओआरएफ ऑनलाइन के अनुसार मालदीव में भारत के सहयोग से बनाए जा रहे हनीमाधू हवाई अड्डा परियोजना और साथ ही 4,000 घरों के अगस्त 2025 से पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद है. भारत यहां  ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (जीएमसीपी) पर काम कर रहा है. इसके जरिये एक पुल बनाया जा रहा है जो सितंबर 2026 तक पूरा हो जाएगा. मालदीव के अड्डू में भारत ने अगस्त 2024 में एक लिंक ब्रिज परियोजना का उद्घाटन किया है. भारत यहां 29 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से एक हवाई अड्डा भी विकसित कर रहा है. भारत से रिश्तों में खटास की वजह से मालदीव के ये सारे प्रोजेक्ट फंस गए थे. 2025 में भारत और मालदीव ने मालदीव में नौका सेवाओं के विस्तार के लिए 13 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए, जिसमें 56 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता शामिल है. भारत मालदीव के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है, जिसका व्यापार मूल्य 548 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है. ऐसे स्थिति में मालदीव का इंडिया बायकॉट का नारा महज चुनावी प्रोपगेंडा साबित हुआ. पर्यटन पर निर्भरता: मालदीव की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का योगदान 28% है, जिसमें भारतीय … Read more

गलवान के बाद रिश्तों में बदलाव? भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा पर लगाई रोक हटाई

नई दिल्ली  भारत और चीन ने अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। भारत सरकार चीनी पर्यटकों के लिए वीजा फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच सालों के बाद भारत चीनी पर्यटकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से जारी करने जा रहा है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 जुलाई से चीनी पर्यटकों के लिए फिर से वीजा जारी होने लगेंगे। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से वीबो प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई पोस्ट को शेयर किया है। भारतीय दूतावास की तरफ से जारी पोस्ट में कहा गया है कि "24 जुलाई 2025 से, चीनी नागरिक भारत आने के लिए पर्यटक वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें पहले वेब लिंक पर ऑनलाइन वीजा आवेदन पत्र भरना होगा और उसका प्रिंट आउट लेना होगा, और फिर वेब लिंक पर अपॉइंटमेंट लेना होगा। इसके बाद, उन्हें भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में आवेदन जमा करने के लिए पासपोर्ट, वीजा आवेदन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।" भारत ने खोला चीन पर्यटकों के लिए दरवाजा भारत सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देश आपसी रिश्ते को सामान्य करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते भारत ने सभी पर्यटन वीजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन अप्रैल 2022 में IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने एक नोटिस जारी कर कहा था, कि चीन के नागरिकों के पर्यटक वीजा अभी मान्य नहीं रहेंगे। भारत ने वो कदम उस वक्त उठाया था, जब चीन ने 22,000 भारतीय छात्रों को वापस देश में आने के लिए वीजा देने से मना कर दिया था। भारत ने उसके बाद चीनी पर्यटकों को वीजा देना बंद कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं। पिछले चार सालों से ये तनाव लगातार बना हुआ था और कभी भी जंग छिड़ने का खतरा था। सैनिकों की वापसी, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। इसके अलावा, जनवरी 2025 में भारत और चीन के बीच विमानों की उड़ाने भी शुरू हो गईं। यह फैसला भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा के बाद सामने आया, जहां दोनों पक्षों ने कूटनीतिक स्तर पर कई सकारात्मक बातचीत की थी। इसी यात्रा के दौरान यह भी तय हुआ था कि भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी इस साल से फिर से शुरू किया जाएगा। इसके अलावा हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी चीन का दौरा किया, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे।  

गलवान के बाद रिश्तों में बदलाव? भारत ने चीनी पर्यटकों के लिए वीजा पर लगाई रोक हटाई

नई दिल्ली  भारत और चीन ने अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से कदम उठाए हैं। भारत सरकार चीनी पर्यटकों के लिए वीजा फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पांच सालों के बाद भारत चीनी पर्यटकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से जारी करने जा रहा है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इसकी जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक 24 जुलाई से चीनी पर्यटकों के लिए फिर से वीजा जारी होने लगेंगे। चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने चीन स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से वीबो प्लेटफॉर्म पर शेयर की गई पोस्ट को शेयर किया है। भारतीय दूतावास की तरफ से जारी पोस्ट में कहा गया है कि "24 जुलाई 2025 से, चीनी नागरिक भारत आने के लिए पर्यटक वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें पहले वेब लिंक पर ऑनलाइन वीजा आवेदन पत्र भरना होगा और उसका प्रिंट आउट लेना होगा, और फिर वेब लिंक पर अपॉइंटमेंट लेना होगा। इसके बाद, उन्हें भारतीय वीजा आवेदन केंद्र में आवेदन जमा करने के लिए पासपोर्ट, वीजा आवेदन पत्र और अन्य संबंधित दस्तावेज साथ ले जाने होंगे।" भारत ने खोला चीन पर्यटकों के लिए दरवाजा भारत सरकार की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देश आपसी रिश्ते को सामान्य करने के लिए लगातार बातचीत कर रहे हैं। साल 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते भारत ने सभी पर्यटन वीजा पर रोक लगा दी थी। लेकिन अप्रैल 2022 में IATA (इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन) ने एक नोटिस जारी कर कहा था, कि चीन के नागरिकों के पर्यटक वीजा अभी मान्य नहीं रहेंगे। भारत ने वो कदम उस वक्त उठाया था, जब चीन ने 22,000 भारतीय छात्रों को वापस देश में आने के लिए वीजा देने से मना कर दिया था। भारत ने उसके बाद चीनी पर्यटकों को वीजा देना बंद कर दिया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से भारत और चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला है। पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक इलाकों से दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटी हैं। पिछले चार सालों से ये तनाव लगातार बना हुआ था और कभी भी जंग छिड़ने का खतरा था। सैनिकों की वापसी, दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। इसके अलावा, जनवरी 2025 में भारत और चीन के बीच विमानों की उड़ाने भी शुरू हो गईं। यह फैसला भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री की चीन यात्रा के बाद सामने आया, जहां दोनों पक्षों ने कूटनीतिक स्तर पर कई सकारात्मक बातचीत की थी। इसी यात्रा के दौरान यह भी तय हुआ था कि भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी इस साल से फिर से शुरू किया जाएगा। इसके अलावा हाल ही में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी चीन का दौरा किया, जहां वे शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल हुए थे।  

ब्रिटेन दौरे की शुरुआत आज: पीएम मोदी और स्टार्मर करेंगे आर्थिक साझेदारी को नई दिशा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ब्रिटेन की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं. उनका यह दौरा दोनों देशों के संबंधों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है. पीएम की इस यात्रा के दौरान भारत-ब्रिटेन में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर साइन किए जाने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को एक नई ऊंचाई मिलेगी. लंदन में मौजूद भारतीय हाई कमिश्नर विक्रम दोराईस्वामी के मुताबिक यह समझौता अपने आखिरी लीगल फेज में है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि 6 मई को भारतीय-ब्रिटिश अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के आधार पर तैयार किए गए हैं. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए भारत-ब्रिटेन की कोशिश द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने की है. उम्मीद की जा रही है कि इस समझौते पर गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर की मुलाकात के दौरान आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हो सकते हैं. व्यापारियों को मिलेगी स्पष्ट रूपरेखा, बढ़ेगा द्विपक्षीय व्यापार भारतीय हाई कमिश्नर दोराईस्वामी के मुताबिक, एफटीए सिर्फ टैरिफ रिडक्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ट्रेड के नियम, कस्टम्स अरेंजमेंट, रूल्स ऑफ ऑरिजिन, गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट और सर्विस सेक्टर से जुड़े कई अहम मुद्दे शामिल हैं. एक बार यह समझौता साइन और ब्रिटेन की संसद द्वारा रैटिफाई किए जाने के बाद, दोनों देशों के व्यापारियों को ज्यादा प्रीडिक्टिबल फ्रेमवर्क मिलेगा. इससे दोनों देशों के व्यापारियों के लिए नियम आसान और ट्रांसपेरेंट होंगे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा. प्रधानमंत्री मोदी के लोकल टाइम के मुताबिक बुधवार शाम को ब्रिटेन पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद गुरुवार को ब्रिटिश पीएम स्टार्मर के साथ उनकी बैठकें होंगी, जहां दोनों पक्षों के बीच सहमत एफटीए पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. ब्रिटेन में भारतीय समुदाय के लिए गर्व का मौका भारतीय हाई कमिश्नर दोराईस्वामी ने प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन यात्रा को लेकर कहा कि हम चाहते थे कि पीएम मोदी का दौरा लंबा हो लेकिन पीएम ब्रिटेन में सिर्फ 24 घंटे रुकेंगे, जो यह दर्शाती है कि भारत इस साझेदारी को कितना महत्व देता है. हाई कमिश्नर ने कहा, "प्रधानमंत्री हमेशा यह मानते हैं कि पारंपरिक और महत्वपूर्ण साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने चाहिए. संसद सत्र के दौरान भी इतनी दूरी तय कर प्रधानमंत्री का आना इस रिश्ते को एक नई ऊंचाई देने की मंशा को दर्शाता है." किंग चार्ल्स से मुलाकात और आयुर्वेद पर चर्चा पीएम मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात किंग चार्ल्स-III से भी तय है. 2018 में जब पीएम ब्रिटेन गए थे, तब उन्होंने तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स के साथ मिलकर एक Ayurvedic Centre of Excellence की शुरुआत की थी. दोराईस्वामी ने उम्मीद जताई कि इस बार भी दोनों नेताओं के बीच स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवनशैली से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी. बिजनेस डेलीगेशन और मालदीव की यात्रा पीएम मोदी के साथ एक बिजनेस डेलीगेशन भी इस दौरे पर है. ब्रिटेन में अपने कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री मालदीव रवाना होंगे, जहां वे 26 जुलाई को वहां की स्वतंत्रता के 60 साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ होंगे.

भारत-मालदीव रिश्तों में गर्माहट: स्वतंत्रता समारोह में प्रधानमंत्री मोदी होंगे मुख्य अतिथि

नई दिल्ली मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहली बार दो दिवसीय मालदीव की यात्रा पर जा रहे हैं। वह मालदीव की आजादी की 60वीं सालगिरह के जश्न में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। प्रधानमंत्री 25 और 26 जुलाई को मालदीव में रहगें। राष्ट्रपति मुइज्जू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मालदीव आने का न्योता दिया था। अपने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्य अतिथि बनाना इस बात की ओर संकेत करता है कि मालदीव और भारत के रिश्ते फिर से पटरी पर लौट रहे हैं। वहीं मालदीव को अपनी पिछली गलतियों का अहसास भी हो गया है। इस यात्रा का उद्देश्य भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। मुक्त व्यापार समझौते से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 60 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना करने का मार्ग प्रशस्त होगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी पहले चरण में दो दिवसीय यात्रा पर ब्रिटेन जाएंगे और फिर मालदीव की यात्रा करेंगे। क्यों अहम है पीएम मोदी की यह यात्रा प्रधानमंत्री की 25 से 26 जुलाई तक होने वाली मालदीव यात्रा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह द्विपक्षीय संबंधों को पुनः स्थापित करने का प्रतीक है। चीन समर्थक माने जाने वाले मोहम्मद मुइज्जू के नवंबर 2023 में सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा हो गया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अपनी यात्रा के पहले चरण में मोदी 23 से 24 जुलाई को ब्रिटेन की यात्रा पर जाएंगे और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टॉर्मर के साथ व्यापक वार्ता करेंगे। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की लंदन यात्रा के दौरान भारत और ब्रिटेन द्वारा मुक्त व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किये जाने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन ने समझौते पर हस्ताक्षर करने की प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली है। मई में भारत और ब्रिटेन ने मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया था, जिससे 99 प्रतिशत भारतीय निर्यात को टैरिफ से लाभ मिलने की उम्मीद है और इससे ब्रिटिश कंपनियों के लिए भारत में व्हिस्की, कार और अन्य उत्पादों का निर्यात आसान हो जाएगा, साथ ही समग्र व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। यूरोपीय संघ छोड़ने के बाद ब्रिटेन द्वारा किए गए सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के साथ-साथ, दोनों पक्षों ने दोहरे योगदान समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। यह भारतीय कामगारों के नियोक्ताओं को ब्रिटेन में सामाजिक सुरक्षा अंशदान देने से छूट प्रदान करता है। अधिकारियों के अनुसार, तीन वर्षों की बातचीत के बाद तय हुए इस व्यापार समझौते से सभी क्षेत्रों में भारतीय वस्तुओं के लिए व्यापक बाजार पहुंच सुनिश्चित होने की उम्मीद है और भारत को लगभग 99 प्रतिशत टैरिफ लाइन (उत्पाद श्रेणियों) पर टैरिफ हटने से लाभ होगा, जो लगभग 100 प्रतिशत व्यापार मूल्यों को कवर करेगा। ब्रिटेन सरकार के एक बयान में कहा गया था कि भारतीय टैरिफ में कटौती की जाएगी, जिससे 90 प्रतिशत टैरिफ लाइन में कटौती सुनिश्चित हो जाएगी, तथा इनमें से 85 प्रतिशत एक दशक के भीतर पूरी तरह टैरिफ मुक्त हो जाएंगी। अधिकारियों ने बताया कि एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार 2030 तक वर्तमान 60 अरब अमेरिकी डॉलर से दोगुना हो जाएगा। विदेश मंत्रालय ने  दो देशों की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, स्टॉर्मर के साथ भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण पहलुओं पर व्यापक चर्चा करेंगे, साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी करेंगे। यह प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिटेन की चौथी यात्रा होगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के महाराजा चार्ल्स तृतीय से भी मुलाकात करने की संभावना है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "यात्रा के दौरान दोनों पक्ष व्यापार और अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और नवाचार, रक्षा और सुरक्षा, जलवायु, स्वास्थ्य, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों पर विशेष ध्यान देते हुए व्यापक रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे।" लंदन से मोदी मालदीव जाएंगे। वह मुख्य रूप से 26 जुलाई को मालदीव की स्वतंत्रता की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित होने वाले समारोह में शामिल होंगे। यह मोदी की मालदीव की तीसरी यात्रा होगी तथा नवंबर 2023 में राष्ट्रपति मुइज्जू के पदभार ग्रहण करने के बाद भारतीय शासनाध्यक्ष की पहली यात्रा होगी। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मुइज्जू आपसी हितों के मुद्दों पर चर्चा करेंगे और 'व्यापक आर्थिक एवं समुद्री सुरक्षा साझेदारी' के लिए भारत-मालदीव संयुक्त दृष्टिकोण के कार्यान्वयन में प्रगति का जायजा लेंगे। यह संयुक्त दृष्टिकोण पिछले साल अक्टूबर में मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान अपनाया गया था। विदेश मंत्रालय ने कहा, “यह यात्रा भारत द्वारा अपने समुद्री पड़ोसी, मालदीव को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है, जो भारत की 'पड़ोसी प्रथम' नीति और ‘विजन महासागर’ (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) में एक विशेष स्थान रखता है।” मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा दोनों पक्षों को घनिष्ठ द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा तथा मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।