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भोपाल को जल्द मिलेगी मेट्रो की सौगात, सितंबर 2025 से कमर्शियल रन संभव

भोपाल   मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर माह में हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को लंबे इंतजार के बाद भोपाल में मेट्रो की सवारी का मौका मिलेगा। कारपोरेशन का सबसे ज्यादा फोकस इस समय एम्स से डीआरएम तक के स्टेशनों का काम पूरा करने में है। बचे हुए काम के लिए सितंबर 2025 की डेडलाइन तय की गई है। कमर्शियल रन को दो माह से भी कम समय बचा है, ऐसे में यहां टिकटिंग सिस्टम से लेकर यात्रियों के लिए इंफॉर्मेशन सिस्टम, इंटीरियर व बाहरी सौंदर्यीकरण के काम काफी बचे हुए हैं। स्टेशनों को पास के संस्थानों से जोडऩे का काम भी बाकी है। कमिश्नर का निरीक्षण कमर्शियल रन के लिए कमिश्रर मेट्रो रेल सेफ्टी की एनओसी जरूरी है। इसलिए सर्वे व मॉनिटरिंग जारी है। सुरक्षा संबंधी कामों को तय मानकों पर कसा जा रहा है। सोमवार को भी मेट्रो रेल एमडी चैतन्य एस कृष्णा ने मेट्रो के कामों का निरीक्षण कर संबंधितों से काम की स्थिति पर बैठक की। तुर्किए की कंपनी की जगह नया टेंडर जल्द मेट्रो रेल कारपोरेशन ने ऑटोमेटिक टिकट फेयर सिस्टम के लिए तुर्की की कंपनी को दिए काम का ठेका रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है। टेंडर की शर्तों के अनुसार प्रक्रिया की जा रही है। अभी रद्द करने का लेटर जारी नहीं किया। अफसरों का कहना है कि नए सिरे से टेंडरिंग की जाएगी। कमर्शियल रन में इंदौर की तरह मैन्युअली टिकट सिस्टम से काम चलाया जाएगा। RDSO से मिली हरी झंडी, अब CMRS की तैयारी तेज शहरवासियों के लिए खुशी की खबर है। भोपाल मेट्रो संचालन पूर्व पहले पड़ाव को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है । अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ), रेल मंत्रालय से मेट्रो को प्रमाणीकरण मिल गया है। अब मेट्रो प्रबंधन ने कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की तैयारियों में जुट गया है। भोपाल मेट्रो को आरडीएसओ से मिली हरी झंडी जानकारी के अनुसार आरडीएसओ के प्रमाणीकरण के बाद ही सीएमआरएस की टीम जांचने आती है। जिसके बाद भोपाल में मेट्रो का संचालन शुरू हो पाएगा। इसके मद्देनजर अब दस्तावेज तैयार किए जाएंगे और प्रोजेक्ट के बचे शेष कामों को टीम के आने से पहले पूरा किया जाएगा। प्रमाणीकरण मिलते ही सोमवार को मेट्रो प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने सुभाष नगर डिपो और एम्स स्टेशन से डीआरएम आफिस मेट्रो स्टेशन तक का निरीक्षण किया। अब सीएमआरएस की तैयारी तेज इस दौरान उन्होंने सीएमआरएस से जुड़ी महत्वपूर्ण साइट्स और कार्यों की स्थिति देखी। स्टेशन में एंट्री-एग्जिट, फुट ओवर ब्रिज, टिकट रूम, स्टेशन कंट्रोल रूम, पम्प रूम, लिफ्ट, एस्केलेटर, फायर एनओसी सहित आंतरिक और बाहरी सुंदरीकरण कार्यों की समीक्षा की गई। एमडी ने सुभाष नगर डिपो का भी मुआयना किया। यहां उन्होंने इन्स्पेक्शन बे लाइन, रिपेयर बे लाइन, टेस्ट ट्रैक, ट्रैक्शन सब-स्टेशन, एडमिन बिल्डिंग के कंट्रोल रूम, प्रमुख सिस्टम रूम्स, रैम्प एरिया, अनलोडिंग-बे और ट्रेनिंग बिल्डिंग जैसी प्रमुख सुविधाओं का जायजा लिया। साथ ही डिपो में ड्रेनेज व्यवस्था, पम्प रूम और फायर एनओसी की स्थिति की भी जानकारी ली। एमडी ने अधिकारियों और ठेकेदारों को दिए निर्देश निरीक्षण के दौरान एमडी ने अधिकारियों और ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रायोरिटी कॉरिडोर के तहत ट्रेन परिचालन से जुड़े सभी शेष कार्य जल्द से जल्द पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि सीएमआरएस के लिए दस्तावेजीकरण और साइट तैयारियों को तेज गति से निपटाना होगा ताकि समय पर संचालन शुरू किया जा सके। भोपाल मेट्रो के इस कदम से उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले महीनों में राजधानी में मेट्रो परिचालन का सपना हकीकत में बदल सकेगा। इससे यातायात दबाव कम होगा और शहर को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की बड़ी सौगात मिलेगी।

दाल-सांभर सहित भारतीय सामानों की कीमतों पर US टैरिफ का प्रभाव क्या रहा?

नई दिल्ली अमेरिका ने भारत पर 7 अगस्‍त से 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया है और 25% एक्‍स्‍ट्रा टैरिफ 27 अगस्‍त से लागू करने की बात कही है. भारत पर ये टैरिफ लागू होने से एक्‍सपोर्ट में गिरावट की आशंका है, जबकि भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों की कीमतों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है.  भारत से भारी मात्रा में कपड़ा, दवा, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्‍पाद, अमेरिका भेजे जाते हैं. एक्‍सपर्ट्स बता रहे हैं कि Trump Tariff की वजह से इन सामानों से प्रॉफिट मार्जिन घट सकता है, जिसका असर अमेरिका में भारतीय प्रोडक्‍ट्स खरीदने वाले कस्‍टमर्स पर भी पड़ सकता है.  अमेरिका में भी ट्रंप के टैरिफ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और कई जगहों पर विरोध भी हुए हैं. बिजनेस टुडे के मुताबिक, हाल ही में एक NRI ने सोशल प्‍लेटफॉर्म रेडिट पर भारतीय आयात पर 25 से 50 फीसदी टैरिफ के संभावित नतीजों को लेकर सवाल उठाया और पूछा कि क्‍या इससे अमेरिका में स्‍थानीय किराना दुकानें प्रभावित हुई हैं और क्‍या भारतीय सामानों की कीमत बढ़ी है? NRI ने लिखा, 'मैं कहीं पढ़ र‍हा था कि पटेल ब्रदर्स और बड़ी कंपनियां टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए दूसरे साउथ एशियाई देशों से दाल, अनाज और मसाले जैसी चीजें मंगा रही हैं. क्‍या आप अपने शहर की किराने की दुकानों में टैरिफ का कोई खास असर देख रहे हैं?  इस पोस्‍ट के बाद अमेरिका में रहने वाले कई यूजर्स के जवाब आए, जिन्‍होंने जानकारी दी कि अमेरिका के किराना स्‍टोर्स में भारतीय सामानों पर क्‍या असर हुआ है? एक यूजर ने लिखा कि मुझे ज्‍यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. मैं बांग्‍लादेश से सांभर या किसी दूसरे देश से दाल नहीं खरीदूंगा. भारत और दूसरे देशों से आने वाले प्रोडक्‍ट्स की क्वालिटी में बहुत फर्क होता है. खासकर एक वेजिटेरियन होने के नाते मैं कभी भी नॉन-इंडियन फूड पर भरोसा नहीं करूंगा कि वे सात्विक है या मेरे परिवार के लिए सही है. लेकिन यह सिर्फ मेरी राय है.  दूसरे यूजर ने बताया कि 7 अगस्‍त से भारत के बंदरगाह से रवाना होने वाले जहाजों के लिए नए टैरिफ लागू होंगे. इसलिए मौजूदा सामान पर कीमतें नहीं बढ़ेंगी. एक तीसरे ने कहा कि ज्यादातर भारतीय किराना दुकानों का मुनाफा मार्जिन काफी अधिक है, इसलिए मुझे लगता है कि शुरुआत में वे इस नुकसान को झेल लेंगे. अगर महीनों तक कोई व्‍यापारिक समझौता नहीं होता है तो यह एक समस्‍या होगी. 

किसानों के लिए PM मोदी का मजबूत रुख, ट्रंप की चुप्पी में छुपी असमंजस की कहानी

नई दिल्ली डराने-धमकाने और धौंस दिखाने वाले दबंग से निपटने के लिए उससे उलझने के बजाय उसके खेल से अलग रहना चाहिए, फिर चाहे वह टकराव के लिए उकसा ही क्यों न रहा हो. इसके बजाय अपने लोगों को यह भरोसा दें कि आप उनके साथ खड़े हैं और दोस्‍तों का साथ दें. उन तक अपनी बात पहुंचाएं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से निपटने के लिए ठीक यही रणनीति अपनाते दिख रहे हैं.  डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया. इसके बाद मोदी ने उन्हें फोन करने के बजाय गुरुवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा से एक घंटे से अधिक समय तक बातचीत की. चर्चा इस बात पर हुई कि कैसे अमेरिका ने दोनों देशों पर सबसे ज्यादा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं और इन हालात में उन्हें एकजुट होकर कदम उठाना चाहिए. गुरुवार सुबह एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि वे भारतीय किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेंगे, भले इसके लिए उन्हें भारी कीमत क्यों न चुकानी पड़े. यह ट्रंप की दबाव वाली रणनीति के जवाब में उनका साफ संदेश था. ट्रंप का दबाव, भारत की ड‍िप्‍लोमेसी रूस के साथ भारत के आर्थिक रिश्तों से नाराज ट्रंप ने बुधवार को अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ भी लगा दिया. इसके बावजूद पीएम मोदी के करीबी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल उसी दिन रूस पहुंचे. गुरुवार को मॉस्को में डोभाल ने एलान किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तारीख लगभग तय हो चुकी हैं. इस महीने के अंत में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी रूस जाएंगे. 1 सितंबर को मोदी बीजिंग में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहां उनकी पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है. दबाव में झुकने को तैयार नहीं… ये घटनाक्रम डोनाल्‍ड ट्रंप को और भड़का सकते हैं. गुरुवार रात राष्‍ट्रपति ट्रंप ने कहा कि भारत के साथ व्यापार वार्ता तब तक आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक रूसी तेल खरीद का मसला हल नहीं हो जाता. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ऐसे दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं, खासकर तब जब अमेरिका भारत से कृषि, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में असीमित पहुंच की मांग कर रहा है. इन मांगों को ठुकराकर मोदी किसानों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे उनके असली मसीहा हैं. साल 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने वे कानून वापस ले लिए थे. साथ ही उनकी सरकार पीएम-किसान निधि योजना के तहत हर साल किसानों को 6,000 रुपये की सहायता और फसल बीमा भी देती है. अब अमेरिका के खिलाफ किसानों के हित में खड़े होकर प्रधानमंत्री उनसे अपना जुड़ाव और मजबूत कर रहे हैं. फोन पर बात…दो टूक जवाब पिछले 100 दिनों में मोदी और ट्रंप की फोन पर केवल दो बार बात हुई है. एक बार 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद और दूसरी बार जून में जब ट्रंप ने कनाडा में मौजूद मोदी को फोन किया. उस समय मोदी ने साफ तौर पर ट्रंप के इस झूठे दावे को खारिज कर दिया था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराया. संसद में भी मोदी ने कहा था कि किसी भी विश्व नेता ने भारत को ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए राजी नहीं किया. फिलहाल पीएम मोदी संयम बरतते हुए अपने मित्र देशों को अमेरिकी दबाव के खिलाफ एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. भारत ने अमेरिकी कदमों को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, अनुचित, अनुचित और अव्यवहारिक बताया है, जो दशकों में वॉशिंगटन के खिलाफ भारत की सबसे कड़ी भाषा है. ट्रंप अचानक ले सकते हैं यू-टर्न भारत जानता है कि ट्रंप अप्रत्याशित हैं और अचानक यू-टर्न ले सकते हैं, इसलिए इंतजार करना सबसे बेहतर कूटनीतिक विकल्प है. अगर जल्द ही ट्रंप-पुतिन की मुलाकात होती है और रूस-यूक्रेन युद्ध सुलझ जाता है, तो ट्रंप का भारत विरोध भी खत्म हो सकता है. आखिरकार रूस से तेल खरीदने के लिए पहले अमेरिका ने ही भारत को प्रोत्साहित किया था और खुद भी रूस से यूरेनियम जैसी चीजें आयात करता है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तभी होगा जब वह राष्ट्रीय हित में होगा और भारतीय किसानों से कोई समझौता नहीं होगा. तब तक मोदी अपने काम में लगे रहेंगे और अपने तरीके से संदेश देते रहेंगे. जैसे कि गुरुवार को संसद में तमिलनाडु के किसानों के एक दल से मुलाकात.

ट्रंप की आलोचना में उतरे पूर्व US मंत्री, मोदी को लेकर कही बड़ी बात

नई दिल्ली अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ की कड़ी आलोचना की है। कैंपबेल ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों को गंभीर खतरे में डाल रहा है, जो 21वीं सदी में अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सलाह दी कि वे ट्रंप के दबाव में नहीं झुकें। राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू किया, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया। यह टैरिफ 27 अगस्त से प्रभावी होगा। कैंपबेल की चेतावनी: भारत रूस से संबंध नहीं तोड़ेगा सीएनबीसी इंटरनेशनल को दिए एक इंटरव्यू में कैंपबेल ने कहा, "21वीं सदी में अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता भारत के साथ है, और यह अब खतरे में है। जिस तरह से राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पीएम मोदी के बारे में बात की है, उसने भारतीय सरकार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है।" उन्होंने भारत को सलाह दी कि वह ट्रंप के दबाव में नहीं झुके। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति ट्रंप के आगे घुटने नहीं टेकने चाहिए।" कैंपबेल ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका भारत पर दबाव डालता है कि वह रूस से संबंध तोड़ दे, तो भारतीय रणनीतिकार ठीक इसके उलट करेंगे। उन्होंने कहा, "भारत को रूस के साथ संबंध तोड़ने के लिए कहना उलटा पड़ सकता है।" अमेरिका में द्विपक्षीय चिंता ट्रंप के इस फैसले ने अमेरिका में भी द्विपक्षीय चिंता को जन्म दिया है। पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने टैरिफ की आलोचना करते हुए कहा कि यह अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर बोझ डालता है। उन्होंने मुक्त व्यापार की वकालत की और कहा, "अमेरिकी कंपनियां और उपभोक्ता ही टैरिफ की कीमत चुकाते हैं।" इसके अलावा, डेमोक्रेट सीनेटर ग्रेगरी मीक्स ने भी चेतावनी दी कि ट्रंप का यह "टैरिफ तंत्र" भारत-अमेरिका साझेदारी को नुकसान पहुंचा सकता है। भारत की स्थिति और पीएम मोदी का रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दिल्ली में एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए एक मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा, "हमारे लिए किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। मुझे पता है कि इसके लिए हमें भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, लेकिन मैं इसके लिए तैयार हूं। भारत तैयार है।" यह बयान ट्रंप के टैरिफ के जवाब में देखा जा रहा है, जिसमें भारत ने साफ कर दिया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

चीन में पीएम मोदी की एंट्री के मायने, 7 साल बाद होगा ऐतिहासिक SCO शिखर संवाद

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएंगे। यह सात साल में उनकी पहली चीन यात्रा होगी। इस यात्रा को भारत-चीन संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है, खासकर 2020 में लद्दाख में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव खत्म होने के बाद। सूत्रों के मुताबिक, मोदी इस यात्रा के साथ जापान भी जाएंगे, जहां वे जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी ने आखिरी बार 2018 में चीन का दौरा किया था, जब वे वुहान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक बैठक और किंगदाओ में एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्ते बहुत खराब हो गए थे। हाल ही में 21 अक्टूबर 2024 को दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव खत्म करने पर सहमति बनी, जिसके बाद रूस के कजान में मोदी और शी की मुलाकात हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने रिश्तों को सामान्य करने और सीमा विवाद पर बातचीत के लिए कई तंत्रों को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई। द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना पीएम मोदी की इस यात्रा में शी जिनपिंग के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना है। इस मुलाकात में सीमा पर तनाव कम करने, डायरेक्ट उड़ानों की बहाली, बॉर्डर व्यापार शुरू करने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हाल के महीनों में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच कई बैठकें हुई हैं। इसके अलावा, कैलाश मानसरोवर यात्रा और चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जैसे कुछ भरोसा बढ़ाने वाले कदम भी उठाए गए हैं। चीन की कुछ गतिविधियों पर चिंता हालांकि, भारत को अभी भी चीन की कुछ गतिविधियों पर चिंता है, जैसे ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर बांध बनाने की शुरुआत और भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान को चीन का समर्थन। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जुलाई में बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात में इन मुद्दों को उठाया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों को रिश्तों को बेहतर करने के लिए सीमा पर तनाव कम करने और व्यापार में रुकावटों को दूर करने की जरूरत है। इससे भारत के लिए क्या बदलेगा, क्या बढ़ेगा ट्रंप पर दबाव? उनकी यह यात्रा वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान की यात्रा के साथ होगी. यदि यह यात्रा होती है तो यह 2018 के बाद और पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2024 में कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. अक्टूबर 2019 के बाद से उनकी पहली सुनियोजित बैठक भी भारत और चीन द्वारा अपनी विवादित सीमा पर गश्त करने के समझौते पर पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद हुई थी. शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन 10 देशों का यूरेशियन सुरक्षा और राजनीतिक समूह है. चीन, रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस इसके सदस्य हैं. अक्टूबर 2024 में कजान में मिले थे मोदी- जिनपिंग अक्टूबर 2024 की बैठक के दौरान पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से कहा था कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए. बैठक में उन्होंने कहा, “यह पांच वर्षों के बाद हमारी पहली औपचारिक बैठक है. हम सीमा पर हुए समझौतों का स्वागत करते हैं. सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता हमारे संबंधों का आधार बने रहने चाहिए. मुझे विश्वास है कि हम खुले दिल से बातचीत करेंगे और हमारी चर्चाएं रचनात्मक होंगी.” इस बीच शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन के लिए अधिक संवाद और सहयोग करना मतभेदों और असहमतियों को उचित ढंग से संभालना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाएं तथा विकासशील देशों की ताकत और एकता को बढ़ावा देने के लिए एक उदाहरण स्थापित करें. जून में बनी थी वार्ता के लिए सहमति इस वर्ष जून माह के प्रारंभ में,भारत और चीन ने ट्रेड और इकनॉमिक्स के क्षेत्र में चिंता के विशिष्ट मुद्दों को हल करने के लिए वार्ता करने पर सहमति व्यक्त की थी. क्योंकि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के लद्दाख क्षेत्र में सैन्य गतिरोध की समाप्ति के बाद द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्माण करने के लिए काम कर रहे थे. यह निर्णय विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीनी उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद लिया गया. दोनों पक्षों ने सीधी हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने के प्रयासों में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की, जो 2020 से निलंबित हैं. इस वर्ष कैसे रहे भारत-चीन संबंध जून में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक की संयुक्त विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था. क्योंकि इसमें आतंकवाद से संबंधित चिंताओं का उल्लेख नहीं किया गया था. एचटी की रिपोर्ट के अनुसार राजनाथ सिंह ने चीन के किंगदाओ में बैठक में भाग लिया, लेकिन उन्होंने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए. क्योंकि इसमें 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख नहीं था. लेकिन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस अपहरण का उल्लेख था. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत के साथ चार दिनों तक चले संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान का पुरजोर समर्थन किया था. चीन ने काफी दिनों बाद पहलगाम हमले की निंदा की हालांकि जब अमेरिका ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने वाले लश्कर-ए-तैयबा के प्रतिनिधि संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया तो चीन ने 22 अप्रैल के हमले की निंदा की. चीन ने आतंकवाद से निपटने तथा स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का दृढ़ता से विरोध करता है और 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता है. चीन क्षेत्रीय देशों से आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने … Read more

पीएम आगमन से पहले धार में तैयारियों का जायजा, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने किया निरीक्षण

धार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी 25 अगस्त को धार जिले के संभावित दौरे को लेकर तैयारियां तेज़ हो गई हैं। इसी क्रम में बुधवार को कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बदनावर तहसील के भैसोला गाँव में निर्माणाधीन पीएम मित्रा पार्क और अन्य तैयारियों का निरीक्षण किया। उनके साथ एमपीआईडीसी के कार्यपालन निदेशक हिमांशु प्रजापति, एसडीएम दीपक चौहान और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। हेलिपैड, सभा स्थल और यातायात प्रबंधन का लिया जायजा कलेक्टर ने प्रस्तावित हेलिपैड, जनसभा स्थल, पार्किंग क्षेत्र और पहुँच मार्गों की व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण की जाएं और सुरक्षा मानकों, ट्रैफिक नियंत्रण एवं आमजन की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। विस्थापितों के लिए बन रहे पुनर्वास स्थल का निरीक्षण पीएम मित्रा पार्क परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले ग्रामीणों के पुनर्वास हेतु बन रहे मकानों का भी कलेक्टर ने निरीक्षण किया। एमपीआईडीसी के ईडी हिमांशु प्रजापति ने बताया कि भैसोला में कुल 89 मकानों का निर्माण प्रस्तावित है। कलेक्टर मिश्रा ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को "टॉप क्लास" बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि विस्थापित परिवारों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने सड़क, बिजली, पानी और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, पुनर्वास स्थल पर सामुदायिक भावना को बढ़ावा देने के लिए सोसाइटी मॉडल अपनाने का सुझाव भी दिया। वोटर आईडी और दस्तावेजी प्रक्रिया की समीक्षा निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पुनर्वास स्थल को विधिवत आबादी क्षेत्र घोषित किए जाने की प्रक्रिया और यहां बसाए जा रहे लोगों के वोटर आईडी से संबंधित दस्तावेजी कार्यों की जानकारी भी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दस्तावेजी कार्य समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए ताकि विस्थापितों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा पीएम मित्रा पार्क जैसे मेगा प्रोजेक्ट और धार जिले के औद्योगिक भविष्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

PM का दो टूक जवाब: ‘बड़ी कीमत चुकानी होगी, लेकिन देशहित में झुकेंगे नहीं

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा है कि भारत किसानों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगा। कृषि मंत्रालय के एक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि किसान भारत की प्राथमिकता है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पीएम मोदी ने कहा, '…हमारे लिए अपने किसानों का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों के, पशुपालकों के और मछुआरे भाई बहनों के हितों के साथ कभी भी समझौता नहीं करेगा। और मैं जानता हूं कि व्यक्तिगत रूप से मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं तैयार हूं। मेरे देश के किसानों के लिए, मेरे देश के मछुआरों के लिए, मेरे देश के पशुपालकों के लिए आज भारत तैयार है।' ट्रंप का टैरिफ बम ट्रंप ने शुरुआत में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। साथ ही अमेरिका की तरफ से रूस से तेल खरीदने के चलते भारत पर जुर्माना भी लगाया गया था। बाद में ट्रंप ने धमकी दी कि वह और टैरिफ बढ़ाने वाले हैं। बुधवार को उन्होंने 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का ऐलान कर दिया। खास बात है कि दोनों ही मौकों पर भारत ने जवाब दिया है कि किसी भी तरह से भारत के आर्थिक हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। भारत ने भारतीय वस्तुओं पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने के अमेरिका के कदम को बुधवार को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अविवेकपूर्ण” करार दिया। नई दिल्ली की यह तीखी प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के कुछ देर बाद आई, जिसके तहत पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत के रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने का हवाला देते हुए भारतीय वस्तुओं पर नया शुल्क लगाने की बात कही गई है। ट्रंप द्वारा अतिरिक्त शुल्क लगाने संबंधी कार्यकारी आदेश जारी करने के कुछ ही देर बाद, भारत ने कहा कि वाशिंगटन ने रूस से उसके तेल आयात को ‘निशाना’ बनाया है और वह राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए ‘‘सभी आवश्यक कार्रवाई’’ करेगा। विदेश मंत्रालय ने रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों का बचाव करते हुए कहा कि आयात बाजार कारकों पर आधारित है और देश के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के समग्र उद्देश्य से किया जाता है।

₹31,500 करोड़ की डील रद्द कर भारत ने दिखाया सख्त रुख, बौखलाए ट्रंप ने दी तीखी प्रतिक्रिया

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के खिलाफ हाथ धोकर पड़ गए हैं. उन्होंने रूस से तेल आयात करने के कारण भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की है. लेकिन, पूरी दुनिया को पता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति का ये दोहरा रवैया है. अमेरिका और यूरोपीय देश खुद रूस से भारी मात्रा में तेल, गैस और फर्टिलाइजर खरीदते हैं. अमेरिका के इसी रवैये को भारत बार-बार दोहराता रहा है. यूरोपीय संस्था सीआरईए (सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर) ने भी एक खास रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे की पोल खोल दी है. खैर, अब भारत भी मन बना चुका है कि वह डोनाल्ड ट्रंप के इस दोगलापन के आगे नहीं झुकेगा. लंबे समय तक डोनाल्ड ट्रंप के बकवास पर चुप रहने के बाद भारत ने पिछले दिनों एक बयान जारी कर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. इसके साथ ही भारत ने एक्शन लेना भी शुरू कर दिया है. भारत ने लिया बड़ा एक्शन एक बड़ी डील रद्द कर दी है. दरअसल, भारत ने अपनी नौसेना के लिए अमेरिका की बोइंग कंपनी से छह पी-8I पोसेडन विमान खरीदने का सौदा किया था. ये विमान समंदर में निगरानी के लिए हैं. भारत के विशाल समुद्री क्षेत्र को देखते हुए नौसेना को ऐसे कई विमानों की जरूरत हैं. ये बेहद आधुनिक और उन्नत विमान हैं और अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक में चीन के बढ़ते प्रभाव पर नजर रखने के लिए इनकी बहुत जरूरत है. डिफेंस वेबसाइट आईडीआरडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने तीन अगस्त को सौदे को फिलहाल के लिए रोकने का फैसला कर लिया. नौसेना के पास 12 विमान भारतीय नौसेना के पास पहले से ही ऐसे 12 विमान है. भारत ने बोइंग से 2009 में ये विमान खरीदे थे. तब अमेरिका से इन विमानों को खरीदने वाला भारत पहला अंतरराष्ट्रीय खरीददार बना था. 2008 में पहले आठ विमानों का सौदा हुआ. उस वक्त इसकी लागत करीब 2.2 बिलियन डॉलर यानी करीब 19 हजार करोड़ रुपये आई थी. फिर 2016 में भारत ने ऐसे चार और विमान खरीदे. उस पर करीब 8500 करोड़ रुपये खर्च हुए. नौसेना के लिए बेहद अहम हैं ये विमान इसके बाद मई 2021 में अमेरिका ने भारत को ऐसे छह विमान बेचने को मंजूरी दे दी. इस सौदे पर करीब 2.42 अरब डॉलर (करीब 21 हजार करोड़ रुपये) की लागत आने वाली थी. यह सौदा ईस्टर्न नेवल कमांड के लिए था. लेकिन, बाद के दिनों लागत बढ़ने के कारण यह डील अटक गई. जुलाई 2025 तक इस सौदे की लागत बढ़कर 3.6 बिलियन डॉलर यानी करीब 31,500 करोड़ रुपये हो गई. बावजूद इसके भारत सरकार इस साल फिर से इस डील को फाइनल करने करने वाली थी. क्योंकि भारतीय नौसेना ने इस विमान को बेहतरीन बताया था. ये पी-8I पोसेडन विमान की क्षमता बेहद एडवांस है. इसमें एंटी शिप मिसाइल NASM-MR लगे है. इसकी रेंज 350 किमी है. यह हिंद महासागर में चीन के नौसैनिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखने में बेहद कारगर है. लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ वार के कारण भारत ने इस सौदे पर रोक लगा दी है. अगर इस डील को पूरी तरह रद्द की जाती है तो यह अमेरिकी कंपनी बोइंग के लिए बड़ा झटका साबित होगी. बोइंग ने भारत में करीब पांच हजार लोगों को रोजगार दिया है. वह भारत की अर्थव्यवस्था में 1.7 बिलियन डॉलर यानी करीब 15 हजार करोड़ रुपये का कारोबार करती है. इस डील को रोके जाने से भारतीय नौसेना की ताकत पर असर पड़ सकता है. इन विमानों का भारत के समुद्री क्षेत्र में सैकड़ों नौसैनिक जहाजों और 20 हजार मर्चेंट जहाजों पर निगरानी में किया जाता है. हालांकि भारत खुद अपना निगरानी विमान बना रहा है. पी-8I पोसेडन को खरीदने में भारी लागत को देखते हुए माना जा रहा है कि भारत अपने स्वदेसी विमान को प्राथमिकता दे सकता है. डीआरडीओ और एचएएल ऐसे विमान विकसित कर रहे हैं.

NDA ने ऑपरेशन सिंदूर-महादेव को बताया अहम कदम, पीएम मोदी को किया गया सम्मानित

नईदिल्ली  भाजपा नीत राजग संसदीय दल (NDA Parliamentary Party Meeting) की बैठक संसद भवन में शुरू हो गई है. इस बैठक का आयोजन संसद भवन के ऑडिटोरियम में हो रहा है. पीएम मोदी जब इस बैठक में शामिल होने पहुंचे तो एनडीए सांसदों ने 'हर हर महादेव' और 'भारत माता की जय' के उद्घोष के साथ उनका स्वागत किया. ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए पीएम मोदी को एनडीए सांसदों द्वारा सम्मानित किया गया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने माला पहनाकर पीएम मोदी का स्वागत किया. एनडीए संसदीय दल की बैठक में ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव की सफलता पर प्रस्ताव पारित हुआ. एनडीए की महिला सांसद अग्रिम पंक्ति में बैठीं. पहलगाम आतंकवादी हमले के पीड़ितों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई. नए सांसदों का प्रधानमंत्री से परिचय कराया गया. एनडीए संसदीय दल की बैठक से जुड़े अपडेट पढ़ें… – एनडीए संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया अमेरिका द्वारा पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (एसडीजीटी) घोषित करना, तथा पहलगाम हमले की निंदा करते हुए ब्रिक्स समिट में जॉइंट डिक्लेरेशन जारी होना, पाकिस्तान द्वारा अपनी धरती पर फैलाए जा रहे आतंकवाद के खिलाफ भारत के कूटनीतिक रुख की जीत को दर्शाता है.  – प्रस्ताव में कहा गया कि एनडीए संसदीय दल इस कठिन समय में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रदर्शित असाधारण नेतृत्व की सराहना करता है. उनके अटूट संकल्प, दूरदर्शी और दृढ़ नेतृत्व ने न केवल राष्ट्र को उद्देश्यपूर्ण दिशा दी है, बल्कि सभी भारतीयों के हृदय में एकता और गौरव की नई भावना भी जगाई है. – एनडीए संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया, 'हमारे सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस और अटूट प्रतिबद्धता को एनडीए संसदीय दल सलाम करता है, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया. उनका साहस हमारे राष्ट्र की रक्षा के प्रति उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है. हम पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.' राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सांसदों की यह बैठक काफी समय के बाद हो रही है और संसद के चालू सत्र में चल रहे गतिरोध के बीच पहली बैठक है. पीएम मोदी के अपने संबोधन में तिरंगा यात्रा और विपक्ष के खिलाफ रणनीति पर भी चर्चा कर सकते हैं. एनडीए की यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो रही है. भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को अपने उम्मीदवार की घोषणा 21 अगस्त तक करनी होगी, जो नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है और संसद का मानसून सत्र भी इसी दिन समाप्त हो रहा है. उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल (इलेक्टोरल कॉलेज) में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल हैं, और इसकी वर्तमान संख्या 782 है. यदि विपक्ष अपना उम्मीदवार घोषित करता है, तो 9 सितंबर को चुनाव होना तय है. यह बैठक संसद के एक ऐसे सत्र (मानसून सेशन) के मध्य में हो रही है, जिसमें पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर दो दिवसीय चर्चा के अलावा अब तक कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका है. विपक्ष चुनाव आयोग द्वारा बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है.

‘भारत के पास विकल्प हैं, घाटा अमेरिका को होगा’ — रूस से तेल पर एक्सपर्ट्स की दो टूक

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने पर भारी जुर्माना लगाने का ऐलान किया है। इसके बाद भारत ने साफ किया कि वह किसी दबाव में नहीं आएगा। हालांकि, भारत किसी कारणवश रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आएगा। इसका असर भारत से ज्यादा अमेरिका पर पड़ेगा। क्योंकि, अमेरिका दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा कहते हैं, अमेरिका से रूस के तेल खरीदने पर जुर्माने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो खुद अमेरिका अछूता नहीं रहेगा। वहां भी तेल के दाम बढ़ेंगे। साथ ही मंहगाई बढ़ेगी। भारत पर भी इसका असर पड़ेगा पर अभी उसने रूस से तेल खरीदना जारी रखने की बात कही है। पेट्रोलियम क्षेत्र के जानकार मानते हैं, रूस पर पूरी तरह कच्चे तेल की खरीद बंद करना आसान नहीं है। क्योंकि, सभी देश अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेते हैं। किसी दबाव या रूस का कच्चा तेल महंगा होने पर आपूर्ति बंद होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। मांग और आपूर्ति में अंतर की वजह से कच्चे तेल के दाम सौ से 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते है। रोज लाखों बैरल निर्यात रूस रोजाना 50 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात करता है। भारत अपनी जरूरत का 33 से 40% तक तेल रूस से आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो भारत पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। क्योंकि, भारत कच्चे तेल के मामले में अमेरिका के बाद तीसरा बड़ा आयातक है। भारत के पास विकल्प भारत करीब तीन दर्जन से ज्यादा देशों से कच्चा तेल खरीदता है। ऐसे में दूसरे देश से इस तेल की आपूर्ति की जा सकती है पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पेट्रोलियम कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसकी संभावना कम है कि कंपनियां इस भार को सीधा उपभोक्ताओं पर डाल देंगी। रूस से जमकर तेल आयात भारत ने फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद कई पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके बाद रूसी तेल की कीमतों में आई कमी का लाभ उठाते हुए सस्ता तेल खरीदना शुरू किया। मई 2025 में भारत ने रूस से 1.96 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल आयात किया, जो उसके कुल तेल आयात का करीब 38% है। भारत खरीदता रहेगा रूस से तेल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी को दरकिनार करते हुए भारतीय तेल कंपनियां रूस से तेल खरीदेंगी। सरकारी सूत्रों ने शनिवार को यह दावा किया। वहीं, इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि मैंने सुना है कि भारत ने रूस से तेल लेना बंद कर दिया है। शनिवार को मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह अच्छा फैसला है, लेकिन इस मामले में क्या हो रहा है मुझे इसकी जानकारी नहीं है। भारत सरकार के सूत्रों ने दावा किया कि तेल खरीद के लिए भारत ने रूस के साथ लंबे समय के लिए करार किया है। ऐसे में एक रात में तेल की खरीदारी बंद हो जाए,यह संभव नहीं है। अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क टाइम्स ने दो अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। अधिकारियों ने कहा, रूस से तेल खरीदने के लिए भारत सरकार की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सरकार ने रूस से तेल नहीं खरीदने के लिए भारतीय कंपनियों को कोई दिशा- निर्देश नहीं दिया है।