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भाजपा के जिक्र के साथ मोहन भागवत का बड़ा बयान: ‘हमें सिर्फ सेवा संगठन समझना भारी भूल’

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों पश्चिम बंगाल के चार दिवसीय दौरे पर हैं। उत्तर बंगाल से कोलकाता पहुंचे भागवत ने साइंस सिटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अगर आप संघ को समझना चाहते हैं, तो तुलना करने से गलतफहमियां पैदा होंगी। अगर आप संघ को केवल एक अन्य सेवा संगठन मानते हैं, तो आप गलत होंगे। आरसएस प्रमुख ने कहा कि कई लोगों में 'संघ' को भाजपा के नजरिए से समझने की प्रवृत्ति होती है, जो एक बहुत बड़ी गलती है। संघ की स्थापना का सार एक ही वाक्य में है 'भारत माता की जय'। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि अपनी खास संस्कृति, परंपरा और स्वभाव का नाम है। संघ का लक्ष्य इन मूल्यों को बनाए रखते हुए भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने के लिए समाज को तैयार करना है। 'संघ को समझाने के लिए इतिहास उदाहरण' भागवत ने साफ किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का जन्म किसी राजनीतिक मकसद, प्रतिस्पर्धा या विरोध के लिए नहीं हुआ। उनका कहना था कि संघ पूरी तरह हिंदू समाज के संगठन, उन्नति और संरक्षण के लिए समर्पित है। संघ की भूमिका समझाने के लिए भागवत ने इतिहास का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के निधन के बाद अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष भले ही थम गया, लेकिन राजा राम मोहन राय के समय से शुरू हुई समाज सुधार की प्रक्रिया लगातार चलती रही। उन्होंने इसे समुद्र के बीच एक ऐसे द्वीप की तरह बताया, जो समय के साथ मजबूती से कायम रहा। हमें अपने समाज को मजबूत करना है- आरएसएस प्रमुख अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने समाज को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि भारत एक महान विरासत वाला देश है और उसे वैश्विक नेतृत्व के लिए खुद को तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि अतीत में हम अंग्रेजों से युद्ध हार गए थे, लेकिन अब वक्त है कि हम अपने समाज को संगठित और सशक्त बनाएं। उनका पूरा भाषण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, ‘व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ की सोच और एकजुट हिंदू समाज के साथ समृद्ध भारत के लक्ष्य पर केंद्रित रहा।

भागवत का संदेश: राष्ट्रवाद की अवधारणा भारत में पश्चिमी सोच से अलग, भाईचारा हमारी पहचान

नागपुर   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि विवादों में पड़ना भारत के स्वभाव में नहीं है और देश की परंपरा ने हमेशा भाईचारे और सामूहिक सद्भाव पर जोर दिया है. नागपुर में एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की राष्ट्रवाद की अवधारणा पश्चिमी सोच से पूरी तरह अलग है. नागपुर में एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि भारत की राष्ट्रवाद की अवधारणा पश्चिमी सोच से पूरी तरह अलग है. उन्होंने कहा, 'हमारी किसी से कोई बहस नहीं होती. हम झगड़ों से दूर रहते हैं. झगड़ा करना हमारे देश के स्वभाव में नहीं है. साथ रहना और भाईचारा बढ़ाना हमारी परंपरा है.' उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के दूसरे हिस्से टकराव वाले हालात में ही बने हैं.' उन्होंने कहा, 'एक बार कोई राय बन जाने के बाद उस विचार के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं होता. वे दूसरे विचारों के लिए दरवाजे बंद कर देते हैं और उसे इज्म कहना शुरू कर देते हैं.' भागवत ने यह भी कहा कि भारत की राष्ट्र की अवधारणा पश्चिमी व्याख्याओं से मूल रूप से अलग है.' उन्होंने जोर देकर कहा, 'वे राष्ट्र के बारे में हमारे विचार नहीं समझते, इसलिए उन्होंने इसे 'राष्ट्रवाद' कहना शुरू कर दिया.' 'राष्ट्र' का हमारा कॉन्सेप्ट, राष्ट्र के पश्चिमी विचार से अलग है. हमारे बीच इस बारे में कोई मतभेद नहीं है कि यह राष्ट्र है या नहीं — यह एक 'राष्ट्र' है और यह पुराने समय से मौजूद है.' उन्होंने दावा किया, 'हम राष्ट्रीयता शब्द का इस्तेमाल करते हैं, राष्ट्रवाद का नहीं. देश पर बहुत ज्यादा गर्व की वजह से दो वर्ल्ड वॉर हुए. इसीलिए कुछ लोग राष्ट्रवाद शब्द से डरते हैं.' आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत का राष्ट्रवाद घमंड या गर्व से पैदा नहीं हुआ है, बल्कि लोगों के बीच गहरे जुड़ाव और प्रकृति के साथ उनके सह-अस्तित्व से पैदा हुआ है. उन्होंने ज्ञान के महत्व पर भी जोर दिया जिससे समझदारी आती है और इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ जानकारी से ज्यादा व्यावहारिक समझ और एक सार्थक जीवन जीना जरूरी है. उन्होंने कहा कि सच्ची संतुष्टि दूसरों की मदद करने से मिलती है. यह एक ऐसी भावना है जो अस्थायी सफलता के विपरीत, जीवन भर बनी रहती है.

मणिपुर में मोहन भागवत का बयान: ‘हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी’, भारत की सभ्यता की मजबूती पर जोर

 इम्फाल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत मणिपुर के दौरे पर हैं. शुक्रवार को उन्होंने अपने संबोधन में सभ्यता, समाज और राष्ट्र की शक्ति का जिक्र किया. इस दौरान मोहन भागवत ने कहा कि हमने समाज का एक बेसिक नेटवर्क बनाया है, उसके चलते हिंदू समाज रहेगा. 'अगर हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी.' भागवत ने कहा, 'परिस्थिति का विचार तो सबको करना पड़ता है. परिस्थिति आती है और जाती है. दुनिया में सब देशों पर तरह-तरह की परिस्थिति आई, गई. कुछ देश उसमें समाप्त हो गए. यूनान, मिस्र और रोमां सब मिट गए यहां से, कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी.' 'हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी' उन्होंने कहा, 'भारत एक अमर समाज, अमर सिविलाइजेशन का नाम है. बाकी सब आए, चमके और चले गए. लेकिन इन सबका उदय और अस्त हमने ही देखा. हम अभी भी हैं और रहेंगे क्योंकि हमने अपने समाज का एक बेसिक नेटवर्क बनाया है. उसके चलते हिंदू समाज रहेगा. हिंदू नहीं रहेगा तो दुनिया नहीं रहेगी. क्योंकि धर्म का सही अर्थ और मार्गदर्शन दुनिया को समय-समय पर हिंदू समाज ही देता है. यह हमारा ईश्वर प्रदत्त कर्तव्य है.' 'भारत में अस्त हुआ ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य'   भागवत ने कहा कि हर समस्या का अंत संभव है. उन्होंने नक्सलवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि जब समाज ने तय किया कि अब यह बर्दाश्त नहीं होगा, तब यह खत्म हो गया. उन्होंने कहा, 'ब्रिटिश साम्राज्य का सूर्य अस्त नहीं होता था. लेकिन भारत में उनके सूर्यास्त की शुरुआत हुई. इसके लिए हमने 90 साल प्रयास किए. 1857 से 1947, उस लंबे समय तक स्वतंत्रता के लिए हम सब लोग लड़ते रहे. वह आवाज कभी हमने दबने नहीं दी. कभी कम हो गई, कभी बढ़ गई, लेकिन दबने कभी नहीं दी.' 'हमारी अर्थव्यवस्था आत्मनिर्भर होनी चाहिए' उन्होंने आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि देश को ऐसा होना चाहिए कि वह किसी पर निर्भर न रहे. भागवत ने कहा, 'हमारी अर्थव्यवस्था पूरी तरह आत्मनिर्भर होनी चाहिए. हम किसी पर डिपेंडेंट नहीं होने चाहिए. हमारे पास इकोनॉमिक एबिलिटी, मिलिट्री एबिलिटी और नॉलेज एबिलिटी होनी चाहिए. यह बढ़नी चाहिए. हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि देश सुरक्षित रहे, समृद्ध रहे और कोई भी नागरिक दुखी, दरिद्र या बेरोजगार न हो. सब लोग देश के लिए काम करें और आनंद से जीवन जिएं.'

मोहन भागवत का कांग्रेस पर निशाना: हिंदू धर्म का उदाहरण देते हुए दिया जवाब

नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रजिस्ट्रेशन पर कांग्रेस के सवाल के बाद आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने जवाब दिया है कि आखिर उन्होने संगठन का रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं करवाया। मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस की स्थापना 1925में ही हो गई थी। ऐसे में क्या ब्रिटिश सरकार के साथ इसका रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए था? मोहन भागवत ने कहा कि आरएसएस की पहचान व्यक्तियों के संगठन के तौर पर है। भागवत बेंगलुरु के एक कार्यक्रम में पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे। मोहन भागवत ने कहा, आजादी के बाद भारत सरकार ने रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं किया था। हम विशेष पहचान रखने वाले संगठन हैं और यह जनता का निकाय है। इसे आयकर से भी छूट दी गई है। उन्होंने कहा, हमें तीन बार बैन किया गया। इसका मतलब सरकार ने हमें मान्यता दी है। अगर हमारी मान्यता ही ना होती तो फिर बैन कैसे किया जाता? उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और अदालतें भी आरएसएस को बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स के रूप में मान्यता देती हैं। बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। जैसे कि हिंदू धर्म का भी कोई रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। केवल भगवा झंडे को सम्मान देने के आरोपों पर भागवत नेकहा कि भगवा को आरएसएस में गुरु के तौर पर सम्मान दिया जाता है। वहीं भारत के तिरंगे का सम्मान किसी मायने में कम नहीं है। हम हमेशा तिरंगे का सम्मान करते हैं और उसकी सुरक्षा का संकल्प लेते हैं। बतादें कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था कि आरएसएस को बैन कर देना चाहिए। यहीं देश में फसाद की जड़ है। खरगे के बेटे और कर्टाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर मांग की थी कि सार्वजनिक स्थानों पर आरएसएस की शाखाओं को बैन कर दिया जाए। उन्होंने आरएसएस के रजिस्ट्रेशन नंबर को लेकर भी सवाल किया था। एक दिन पहले ही मोहन भागवत ने कहा था कि आरएसएस का लक्ष्य हिंदू समाज को सत्ता के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव के लिए संगठित करना है और हिंदू भारत के लिए ‘‘जिम्मेदार’’ हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कोई "अहिंदू" नहीं है, क्योंकि सभी एक ही पूर्वजों के वंशज हैं और देश की मूल संस्कृति हिंदू है। उन्होंने कहा, "शायद उन्हें यह बात पता नहीं है, या उन्होंने यह बात भुला दी है।" उन्होंने कहा, "जानबूझकर या अनजाने में, हर कोई भारतीय संस्कृति का पालन करता है, इसलिए कोई भी अहिंदू नहीं है, और प्रत्येक हिंदू को यह समझना चाहिए कि वह हिंदू है, क्योंकि हिंदू होने का मतलब भारत के लिए जिम्मेदार होना है।"  

सीमा से समाज तक: भारत ही नहीं, विदेशों में भी सक्रिय है आरएसएस – मोहन भागवत

बेंगलुरु कर्नाटक के बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दो दिवसीय व्याख्यानमाला के पहले दिन शनिवार को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संघ को पूरे विश्व का सबसे अनोखा संगठन बताया है। उन्होंने कहा कि आज संघ भारत समेत कई देशों में समाजसेवी कार्य कर रहा है। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बेंगलुरु में 'संघ की यात्रा के 100 वर्ष पूरे होने पर नए क्षितिज व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन किया।  विश्व संवाद केंद्र कर्नाटक द्वारा आयोजित इस सत्र में संघ के विकास और अपनी शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ते भविष्य की दिशा के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने कहा, "आरएसएस के समर्थन या विरोध में आपकी जो भी राय हो, वह तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, धारणा पर नहीं, इसलिए जब हमने अपने सौ वर्ष पूरे किए तो सोचा गया कि देश में चार जगहों (दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, कलकत्ता) पर ऐसी व्याख्यान श्रृंखला आयोजित की जाए।" उन्होंने कहा, "इसी जरूरत को देखते हुए संघ की कल्पना की गई और संघ को लागू किया गया। हमारे पास आक्रमणों का एक लंबा इतिहास रहा है और युद्ध के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्त करने का अंतिम प्रयास 1857 में हुआ था। यह एक अखिल भारतीय प्रयास था।" डॉ. मोहन भागवत ने कहा, "कुछ लोगों ने कहा कि यह समय की बात है, इस लड़ाई में हम असफल रहे, हमें फिर से लड़ना होगा। हमें युद्ध जारी रखना होगा। हम इस लड़ाई में असफल रहे, हमें तैयारी करनी होगी और फिर से लड़ना होगा। यह सिलसिला 1945 तक चलता रहा और सुभाष बाबू कथित तौर पर विमान में लगी आग की दुर्घटना में मारे गए। दो साल में हमें आजादी मिल गई।" उन्होंने कहा, "सबसे पहले हमें संघ के बारे में जानना चाहिए। संघ के कई शुभचिंतक भी संघ को किसी विशेष परिस्थिति की प्रतिक्रिया बताते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। संघ का जन्म प्रतिक्रिया या विरोध से नहीं हुआ है। संघ हर समाज की एक अनिवार्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए है।" डॉ. मोहन भागवत ने कहा, "भारत तभी विश्व गुरु बनेगा जब वह दुनिया को यही अपनेपन का सिद्धांत सिखाएगा। हमारी परंपरा ‘ब्रह्म’ या ‘ईश्वर’ कहती है, उसे आज विज्ञान ‘यूनिवर्सल कॉन्शसनेस’ कहता है।"

पूरी दुनिया आज संकट में, भारत से समाधान की उम्मीद: मोहन भागवत

जबलपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि आज पूरी दुनिया संकट में है. दुनिया अपनी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए बहुत उम्मीद से भारत की तरफ देख रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया को भारत से ऐसी अपेक्षाएं इसलिए हैं क्योंकि देश धर्म और संस्कृति के मार्ग पर चलता है. मोहन भागवत ने यह बात  कही. उन्होंने जबलपुर में 'जीवन उत्कर्ष महोत्सव' नाम के एक धार्मिक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए यह बयान दिया.  उन्होंने कहा कि दुनिया को भारत से अपेक्षाएं हैं क्योंकि भारत धर्म और संस्कृति के रास्ते पर चलता है. उन्होंने संस्कृति का अर्थ नैतिक, सद्गुणी आचरण बताया. विश्व के संकट और भारत की भूमिका… आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया की समस्याओं का समाधान भारत के पास है. उन्होंने बताया कि दुनिया भारत की ओर इसलिए देख रही है क्योंकि भारत अपनी संस्कृति और धर्म के मार्ग पर अडिग रहता है. मोहन भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि संस्कृति का सामान्य अर्थ नैतिक और सद्गुणी आचरण है. उनका मानना है कि जब लोगों में सद्भावना और एक-दूसरे के प्रति गहरा जुड़ाव होता है, तभी वे शालीनता से व्यवहार करते हैं. 'संस्कृति का अर्थ सद्गुणी आचरण…' मोहन भागवत ने इस दौरान संस्कृति के महत्व को भी समझाया. उन्होंने साफ किया कि संस्कृति का मतलब साधारण शब्दों में नैतिक और गुणी व्यवहार होता है. उन्होंने यह भी कहा कि अच्छा व्यवहार तभी संभव है, जब लोगों के बीच सद्भावना की भावना हो और वे एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हों.

RSS तय कर रही देश के लिए आगे की दिशा, 200 से ज्यादा विशिष्ट हस्तियों को दी श्रद्धांजलि

जबलपुर   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक 30 अक्टूबर से जबलपुर में शुरू हो गई है. इस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत सहित आरएसएस के देश भर के सभी 407 प्रमुख कार्यकर्ता शामिल हुए हैं. यह बैठक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आने वाले साल का कार्यक्रम तय करेगी. इसमें संघ प्रमुख कार्यकर्ताओं के सवालों के जवाब भी देंगे. इस बैठक मैं यह तय होगा कि संघ को किस तरह घर-घर तक पहुंचाया जाए. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने की बैठक की शुरुआत जबलपुर के विजयनगर में 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक आयोजित इस बैठक में भारत के कोने-कोने से आए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी प्रमुख सदस्य शामिल हैं. यह बैठक जबलपुर के विजयनगर में एक 5 एकड़ के प्रांगण में हो रही है. बैठक के लिए अलग-अलग डोम हॉल बनाए गए हैं. गुरुवार सुबह 9:00 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर बैठक की शुरुआत की. इस बैठक में पूरे देश के राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रमुख 407 कार्यकर्ता मौजूद रहे. मंच पर केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख और सह कार्यवाहक ही नजर आए जबकि बाकी लोगों की बैठक व्यवस्था नीचे की गई. फिल्म अभिनेता असरानी सहित 200 से ज्यादा विशिष्ट हस्तियों को श्रद्धांजलि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र कुमार ने बताया, '' बैठक की शुरुआत मैं बीते साल देश के 207 से ज्यादा महत्वपूर्ण लोगों की मृत्यु पर शोक संवेदनाएं व्यक्त की गई. इस मौके पर राष्ट्रसेवा सेविका समिति प्रमुख प्रमिला ताई मेढ़े, वरिष्ठ प्रचारक मधुभाई कुलकर्णी, गुजरात के पूर्व CM विजय भाई रूपाणी, झारखंड के पूर्व सीएम शिबू सोरेन, फिल्म अभिनेता असरानी के साथ कई लोगों को श्रद्धांजलि दी गई.'' संघ बना रहा आगे की रणनीति RSS के सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र कुमार ने बताया, '' बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष के लिए लक्ष्य तय किए जाएंगे. बैठक में देश के विभिन्न परिदृश्यों पर होगी चर्चा की जाएगी. इसमें सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे संघ को घर-घर तक पहुंचने वाले जनसंपर्क अभियान का है, जिसके तहत हिंदू सम्मेलन किए जा रहे हैं. इसके साथ ही इस बैठक में सामाजिक सद्भाव पर भी चर्चा होगी. पहले से तय मुद्दों के साथ ही संघ के देश भर से आए महत्वपूर्ण कार्यकर्ताओं प्रचारकों के सवालों पर भी विस्तृत चर्चा होगी. इन सवालों के जवाब संघ प्रमुख देंगे.'' यह बैठक भारत के सबसे बड़े राजनीतिक संगठन को भी प्रभावित करती है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी भी संघ का ही अनुषांगिक संगठन है. यहां तक की इस बैठक में तय किए गए मुद्दे ही आगे जाकर भारतीय जनता पार्टी की नीति तय करता है. इसलिए यह बैठक महत्वपूर्ण हो जाती है. इसमें जिन मुद्दों पर चर्चा होगी और जिन पर सहमति बनेगी उससे जुड़े हुए घटनाक्रम पूरे देश में देखने को मिलेंगे. इस बैठक के बाद क्या-क्या तय होगा इस पर 1 तारीख को जानकारी दी जाएगी.

RSS कार्यक्रम में मोहन भागवत का संदेश: पहलगाम सिखा गया असली पहचानना

नागपुर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) 100 साल का हो चुका है। अपने स्थापना दिवस (विजयादशमी) पर आज नागपुर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। वहीं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने पहलगाम हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह घटना हमें यह सिखा गई कि कौन सा देश हमारा मित्र है और कौन सा देश दुश्मन। आपको बता दें कि शस्त्र पूजा के साथ इस उत्सव की शुरुआत हुई। मोहन भागवत ने कहा, ''22 अप्रैल को पहलगाम में सीमा पार से आए आतंकवादियों ने 26 भारतीय नागरिक पर्यटकों की हिंदू धर्म के बारे में पूछकर हत्या कर दी। इस हमले से पूरे भारत में शोक, उदासी और आक्रोश की लहर दौड़ गई। भारत सरकार ने एक सुनियोजित योजना के तहत मई माह में इस हमले का माकूल जवाब दिया। इस पूरी अवधि के दौरान, हमने देश के नेतृत्व की दृढ़ता, हमारी सशस्त्र सेनाओं की वीरता और युद्ध-तत्परता तथा हमारे समाज के दृढ़ संकल्प और एकता के हृदयस्पर्शी दृश्य देखे।'' मोहन भागवत ने आगे कहा, 'यह घटना हमें यह भी सिखा गई कि हम भले ही सबके प्रति मित्र भाव रखें, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर सजग रहना होगा। इस पूरी घटना के बाद हमने दुनिया के कई देशों का स्टैंड देखा। इस घटना ने हमें यह भी सीख दी कि कौन सा देश हमारा मित्र है और कौन सा देश दुश्मन।'' आरएसएस मुख्यालय के रेशमबाग मैदान में शस्त्र पूजा के दौरान पारंपरिक हथियारों के अलावा ‘पिनाक एमके-1’, ‘पिनाक एन्हांस’ और ‘पिनाक’ सहित आधुनिक हथियारों की प्रतिकृतियां तथा ड्रोन प्रदर्शित किए गए। इस साल विजयदशमी उत्सव के अवसर पर आरएसएस अपने स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने का जश्न भी मना रहा है।  

‘भारत बंटेगा नहीं, और मज़बूत हुआ है’ – मोहन भागवत ने ब्रिटेन को दिया इतिहास का जवाब

इंदौर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख ने मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए. यहां उन्होंने कहा कि भारत विकास की राह पर तेजी से चल रहा है. जो लोग इसे नहीं मानते थे, वह अब ग़लत साबित हुए हैं. उन्होंने ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का ज़िक्र करते हुए तंज कसा है.  मोहन भागवत ने कहा कि भारत का अस्तित्व और उसकी शक्ति हमारे पूर्वजों द्वारा दिए गए उस भाव में है, जो सबमें अपनापन और भक्ति का संदेश देता है. भारत का जीवनदर्शन हमेशा से यही रहा है कि हम सब एक हैं – पेड़ और इंसान, नदी और इंसान, पहाड़ और इंसान – सबमें एक ही चैतन्य है. इसी भाव से भारत ने हजारों वर्षों तक पूरी दुनिया का नेतृत्व किया है.  भागवत ने कहा कि भारत में यह शिक्षा बचपन से दी जाती है कि हर वस्तु में पवित्रता है. चाहे किताब हो या कागज, उसमें मां सरस्वती का वास माना जाता है. यही विद्या और संस्कार भारत की सबसे बड़ी ताकत रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसी भाव के कारण भारत 3000 सालों तक विश्वगुरु रहा. उस समय दुनिया में कोई कलह नहीं था, पर्यावरण संतुलित था और तकनीकी प्रगति भी ऊंची थी. मानव जीवन सुखी और सुसंस्कारित था. विश्व के लिए भारत का योगदान भागवत ने कहा कि भारत ने कभी किसी देश को जीता नहीं, न ही किसी पर अपने धर्म या व्यापार को थोपने का प्रयास किया. जहां भी भारत गया, वहां सभ्यता और शास्त्रों के ज्ञान से जीवन को उन्नत किया. प्रत्येक राष्ट्र अपनी पहचान के साथ सम्मानित रहा, लेकिन आपसी संवाद बना रहा. उन्होंने बताया कि विदेशी विद्वान विलियम डेली ने अपनी किताब द गोल्डन वे में भारत की इसी वैश्विक भूमिका और प्रभाव का उल्लेख विस्तार से किया है. ब्रिटेन पर तंज मोहन भागवत ने ब्रिटेन के मौजूदा हालात पर तंज कसा. उन्होंने ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का जिक्र करते हुए कहा कि चर्चिल कहते थे कि भारत आजादी के बाद बंटेगा और स्थिर नहीं रह पाएगा. लेकिन भारत एकजुट है और बंटा नहीं है. जबकि ब्रिटेन बंटवारे जैसी स्थिति में आ रही है. आधुनिक समय की चुनौतियां भागवत ने कहा कि आज भले ही विज्ञान और तकनीक में प्रगति हुई है, लेकिन पर्यावरण बिगड़ा है, परिवार टूट रहे हैं और माता-पिता को सड़क पर छोड़ने जैसी स्थितियां पैदा हो रही हैं. नई पीढ़ी में संस्कारों की कमी और विकृत प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया में हर प्रकार के प्रयोग हुए, लेकिन असली बात, यानी भक्ति और अपनापन, गायब हो गया है. यही कारण है कि आज समस्याएं बढ़ी हैं.

सियासी पारा बढ़ा, मोहन भागवत की वसुंधरा ‘वन’ वापसी पर उठे सवाल

जयपुर राजस्थान बीजेपी की सियासत इस वक्त ठहरे हुए पानी जैसी लग रही है, लेकिन भीतर बहुत कुछ खदबदा रहा है। कई किरदार सियासत के रंगमंच पर अपनी भूमिका के इंतजार में हैं और नजर एक ही चेहरे पर टिकी है. वो चेहरा है वसुंधरा राजे। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एक बार फिर से भाजपा और संघ की सक्रिय राजनीति के केंद्र में आती दिख रही हैं। बुधवार को जोधपुर प्रवास के दौरान राजे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से मुलाकात की, जो करीब 20 मिनट तक चली। इस मुलाकात की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि करीब एक सप्ताह पहले धौलपुर में एक धार्मिक मंच से वसुंधरा राजे ने बयान दिया कि -जीवन में हर किसी का वनवास होता है, लेकिन वह स्थायी नहीं होता। वनवास आएगा तो जाएगा भी। पिछले महीने वसुंधरा राजे ने दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से संसद में मुलाकात कर हाई कमान से अपने बदलते रिश्तों के संकेत भी दिए थे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजेपी में इन दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर कई चेहरों के नाम चल रहे हैं। बीजेपी जिस तरह पिछली बार संसद में महिला आरक्षण का विधेयक लाई थी उसे देखते हुए पार्टी को अहम पदों पर मजबूत महिला नेत्रियों की जरूरत भी होगी।  हालांकि, संघ प्रमुख सार्वजनिक मंच से हाल में यह बयान दे चुके हैं कि आरएसएस बीजेपी के मामलों में दखल नहीं देती। उन्होंने हाल में बयान दिया था- RSS कुछ नहीं तय करता। हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन वो सरकार चलाने में एक्सपर्ट है और हम अपने काम में एक्सपर्ट है। आपको क्या लगता है कि यदि हम तय करते तो इतनी देर होती क्या? 'कहीं न कहीं संघ का वीटो जरूर होता है' हालांकि, राजनीति के जानकार कहते हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का मसला सिर्फ बीजेपी को ही तय करना होता.. तो अब तक तय हो चुका होता। कहीं न कहीं संघ का वीटो जरूर होता है। इसलिए इस अहम पद पर किसकी तैनाती होगी, इसका रास्ता नागपुर से होकर निकलता है। वसुंधरा की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भाजपा में नेतृत्व को लेकर भीतरखाने कई चर्चाएं चल रही हैं और संघ की भूमिका फिर से महत्वपूर्ण हो रही है। सूत्रों की मानें तो भाजपा के भीतर एक वर्ग लगातार यह चाहता रहा है कि राजे को एक बार फिर से राजस्थान की राजनीति में नेतृत्व की भूमिका दी जाए। वसुंधरा राजे के साथ उनके खेमें के विधायक और सांसद भी भीतर से उम्मीद लगाए बैठे हैं। 'प्रमुख दावेदार के तौर पर राजे के नाम की चर्चा' राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार मनीष गोधा  का मानना है कि वसुंधरा राजे और मोहन भागवत की मुलाकात तो महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा- वसुंधरा राजे को उन्होंने समय दिया तो निश्चित रूप से कोई अहम विषय रहा होगा। जब तक परिणाम नहीं आते तब तक सिर्फ कयास लगाए जा सकते हैं क्योंकि दोनों के बीच वन टू वन मुलाकात हुई है। लेकिन बीजेपी में इन दिनों जो घटनाक्रम चल रहे हैं। उससे इसे जोड़ा जा सकता है। इसमें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव और उसमें प्रमुख दावेदार के तौर पर वसुंधरा राजे के नाम की चर्चा है। अब सवाल यह है कि यह मुलाकात क्या उस संदर्भ में थी ? जहां तक राजस्थान की बात है मुझे नहीं लगता कि भागवत लोकल राजनीति में किसी तरह का इंटरेस्ट लेंगे। इसलिए यह मुलाकात राष्ट्रीय मुद्दे पर ही होना लग रहा है। हां इस मुलाकात की चर्चा इसलिए ज्यादा है क्योंकि पिछले दिनों वनवास वापसी को लेकर जिस तरह से राजे ने बयान दिए उसके कई तरह के निहितार्थ निकाले जा सकते हैं। मुलाकात निश्चित रूप से महत्पपूर्ण है। '…विषपान करके अपने आपको धर्यवान रखा' राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन पूरे घटनाक्रम पर बेहद सटीक बात करते हैं। उनका कहना है कि हाई कमान मजबूत होता है, तो स्टेट लीडरशिप के साथ उनके रिश्ते बदल जाते हैं। जैसे आप देखेंगे कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, उसमें हाई कमान और स्टेट लीडरशिप के रिश्तों में स्टेट लीडरशिप भारी पड़ती थी। इसलिए कांग्रेस हाई कमान चाहकर भी वह काम नहीं करवा पाई जो वह करवाना चाहती थी। बीजेपी में भी अतीत में यही पॉजिशन रही थी। लेकिन बीजेपी की सेंट्रल लीडरशिप बहुत ज्यादा मजबूत है। उन्होंने शायद यह समझा कि राजे का राजस्थान में काम करना शायद उतना सरल नहीं है। इसलिए उन्होंने बाकी राज्यों की तरह यहां भी लीडरशिप को चेंज किया ताकि वे अपने तरीके से काम कर सकें। वह तरीका अच्छा है या खराब है वह अलग बात है। इस सूरत में वसुंधरा राजे ने अब तक, खास तौर पर जब से ऐसा लग रहा है कि वे थोड़ा उपेक्षित की गई हैं। तब उन्होंने कहीं न तो फ्रस्ट्रेशन जाहिर किया और न कभी गुस्सा दिखाया। जैस उनके बारे में प्रचारित किया जाता था, उस स्वभाव के बिल्कुल प्रतिकूल उन्होंने बिना कोई गुस्सा या नाराजगी दिखाए वे अपने आपको उपस्थित रखे हुए हैं। इस सूरत में मुझे लगता है कि उन्होंने बेहद शालीनता और गरिमा के साथ पूरा विषपान करके अपने आपको धर्यवान रखा है। मुलाकात एक निर्णायक संकेत दे सकती है हर राजनेता सोचता है कि उनकी भूमिका हो और इनकी होनी चाहिए। खासकर मोदी सरकार ने पिछली बार महिला आरक्षण विधेयक लाई उसमें उन्हें बेहद ताकतवर महिलाओं की जरूरत भी पड़ेगी। मुझे लगता है कि वसुंधरा राजे बीजेपी के बड़े एसेट्स में हैं और हो सकता है कि यह खुद भी प्रयास कर रही हैं कि उनकी भूमिका निर्णायक रहे। हम जानते हैं कि संघ लोगों की भूमिका तय करने में मुख्य भागीदार होता है तो मोहन भागवत के साथ उनकी मुलाकात एक निर्णायक बात हो सकती है। राजे की दावेदारी मजबूत क्यों?     मजबूत जनाधार और जमीनी पकड़ वाली छवि      राजस्थान में बीजेपी में जातिगत संतुलन वाला फार्मूला वसुंधरा राजे की ही देन रही। उन्होंने खुद को“राजपूतों की बेटी, जाटों की बहू और गूर्जरों की संबंधन”बताया।     संगठन और सरकार दोनों का अनुभव     उनके पास संगठन और सरकार चलाने का अनुभव रहा है। उन्होंने – 14 नवम्बर 2002 से 14 दिसम्बर 2003 तथा 2 फरवरी … Read more