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भीषण गर्मी के बीच गुड न्यूज, जल्द दस्तक देगा मॉनसून; कई राज्यों में आज बरसेंगे बादल

नई दिल्ली भारत में मॉनसून की एंट्री में बस कुछ ही दिन बाकी हैं। खबर है कि मई के अंतिम सप्ताह में राहत भरी बौछारें केरल में दस्तक दे सकती हैं। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत के अधिकांश राज्य गर्मी का सामना करेंगे। हालांकि, उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों में बारिश के आसार हैं। इसके अलावा IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को कम से कम 10 राज्यों में बारिश की संभावनाएं जताई हैं। आज भीगेंगे ये राज्य IMD ने मंगलवार को बताया है कि 19 मई से 22 मई के बीच जम्मू और कश्मीर, 20 से 22 मई के बीच उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, इस दौरा हवा की रफ्तार 30-40 किमी प्रतिघंटा पहुंच सकती है। साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 19 से 24 मई, गंगीय पश्चिम बंगाल में 21 और 22 मई, ओडिशा में 19 मई और 22 मई से 24 मई को बारिश के आसार हैं। बिहार में 19 से 21 मई के बीच, झारखंड में 20 मई, ओडिशा में 20 और 21 मई को तेज हवा के साथ भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में 19 मई को भारी बारिश हो सकती है। 19 से 22 मई के बीच असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में बारिश के आसार हैं। अरुणाचल प्रदेश में 22 मई को भारी बारिश हो सकती है। जबकि, असम और मेघालय में ऐसा ही मौसम 21 और 22 को बन सकता है। कहां पहुंचा मॉनसून मौसम विभाग ने सोमवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के 26 मई को केरल पहुंचने की संभावना है। विभाग ने यह भी कहा कि मॉनसून के आगमन की तारीख में चार दिन का अंतर देखने को मिल सकता है। आईएमडी ने कहा कि अगले पांच दिनों में केरल और माहे के कुछ हिस्सों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, ऐसा दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण के कारण हो सकता है, जिससे केरल, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा और दक्षिण लक्षद्वीप से सटे दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में निम्न वायु दाब का क्षेत्र बन गया है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के अधिकांश हिस्सों और कन्याकुमारी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, यह दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के अधिकांश हिस्सों, अंडमान सागर के अधिकांश भाग, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ चुका है।

गर्मी से मिलेगी राहत! तय हुई मॉनसून की दस्तक की तारीख, बादल बरसाने को तैयार

नई दिल्ली  उत्तर भारत समेत पूरे देशभर में भीषण गर्मी पड़ रही है। सभी लोग मॉनसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, केरल में मॉनसून की एंट्री की खबर ने सबके लिए बड़ी खुशखबरी दी है। केरल में इस बार समय से पहले मॉनसून की एंट्री होने जा रही है। यह 26 मई को दस्तक देगा। हालांकि, इस मॉडल में प्लस माइनस चार दिन का गैप हो सकता है। इस हफ्ते कई दिनों तक उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में हीटवेव से लेकर भीषण हीटवेव की स्थिति रहने वाली है। वहीं, सप्ताह के दौरान उत्तर-पूर्वी भारत में और अगले तीन चार दिनों के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी छिटपुट से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तर पश्चिम भारत के मौसम की बात करें तो 15 और 16 मई को जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में छिटपुट से हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने की संभावना है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में और पूर्वी राजस्थान में 15 और 16 मई को छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली चलने की संभावना है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में गरज के साथ आंधी चलने की संभावना है। इस दौरान आंधी की स्पीड 70 किमी प्रति घंटे हो सकती है। वहीं, 15 मई को पश्चिम राजस्थान के कुछ इलाकों में धूलभरी आंधी चल सकती है। पूर्वोत्तर भारत में 15 से 17 मई के दौरान नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में छिटपुट से लेकर काफी व्यापक स्तर पर बारिश होगी। 15-17 मई और 20 से 21 मई को अरुणाचल प्रदेश में, 15-21 मई को असम, मेघालय में, 15, 20 और 21 मई को नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम में छिटपुट भारी बारिश होगी। लगातार तीसरे साल समय से पहले आ रहा मानसून आम तौर पर केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तारीख 1 जून मानी जाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसमें बदलाव देखा जा रहा है- 2024 में: मानसून 30 मई को पहुंचा था। 2025 में: मानसून ने 24 मई को ही दस्तक दे दी थी। 2026 का अनुमान: इस बार भी यह 26 मई तक पहुंच सकता है। यह भी सामान्य से जल्दी है। अंडमान में कल पहुंचेगा मानसून IMD के मुताबिक मानसून की प्रगति के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। 16 मई (शनिवार) के आसपास दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मानसून के आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। वर्तमान में बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक 'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर' एरिया बना हुआ है, जो मानसून की गति में सहायक हो रहा है। इस साल 'सामान्य से कम' रह सकती है बारिश जहां एक तरफ मानसून जल्दी आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग ने बारिश की मात्रा को लेकर चिंता भी जताई है। अप्रैल में जारी पहले लॉन्ग रेंज फोरकास्ट के मुताबिक इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। यह लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का लगभग 92 प्रतिशत रह सकती है। एल नीनो का खतरा मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई के आसपास 'एल नीनो' (El Nino) की स्थिति बन सकती है। एल नीनो का भारतीय मानसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इसे अक्सर कम बारिश या सूखे की स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह मानसून? भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए मानसून की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। देश की कुल वार्षिक वर्षा का 70% से अधिक हिस्सा इसी सीजन (जून से सितंबर) में प्राप्त होता है। यह न केवल धान जैसी फसलों की सिंचाई के लिए जरूरी है, बल्कि देश भर के जलाशयों के जल स्तर को बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है। इसके अलावा, मानसून ही भीषण गर्मी और लू से राहत दिलाता है। कैसे तय होती है तारीख? IMD मानसून की तारीख तय करने के लिए कई वैज्ञानिक कारकों का विश्लेषण करता है। इसमें उत्तर-पश्चिम भारत का न्यूनतम तापमान, दक्षिण भारत में मानसून पूर्व की बारिश, हवाओं का पैटर्न और हिंद महासागर व दक्षिण चीन सागर के ऊपर बादलों की हलचल शामिल है। अब मौसम विभाग मई के अंत तक मानसून के भौगोलिक विस्तार (किस राज्य में कब पहुंचेगा) को लेकर विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगा। वहीं, दक्षिण भारत में भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।  मॉनसून से पहले बारिश मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून के आगमन से पहले ही दक्षिण भारत में झमाझम बरसात हो रही है। 15-19 मई के दौरान केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, आंतिरक कर्नाटक, लक्षद्वीप में 15-16 मई को छिअपुट से लेकर व्यापक स्तर पर गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। 

मॉनसून का इंतजार खत्म होने वाला है, जानिए कब बदलेगा मौसम का मिजाज

नई दिल्ली उत्तर भारत समेत देश के विभिन्न हिस्सों में कई दिनों तक बारिश होने के बाद एक बार फिर से भीषण गर्मी का दौर वापस लौट आया है। इसकी वजह से लोग मॉनसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अब यह इंतजार खत्म होने वाला है। दरअसल, मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून 26 मई को दस्तक दे सकता है। भारत में यह सबसे पहले केरल में आता है और इस बार 26 मई को यानी कि तय समय से पहले ही आने की संभावना है। हालांकि, मौसम विभाग ने इस तारीख में प्लस माइनस चार दिनों की संभावना जताई है। वहीं, अगले 24 घंटे में मॉनसून बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पहुंचने वाला है। मॉनसून के आने से पहले दक्षिण भारत में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पूरे हफ्ते के दौरान उत्तर पूर्वी भारत, अगले तीन चार दिनों के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। केरल के जरिए मॉनसून के एंट्री लेने के बाद अगले एक महीने के भीतर यह अन्य राज्यों की ओर बढ़ेगा। भारत के निचले भाग से ऊपरी भाग की ओर मॉनसून बढ़ता जाएगा। आमतौर पर मॉनसून केरल में एक जून को पहुंचता है, लेकिन इस बार चार दिन पहले आने की संभावना है, जोकि किसी खुशखबरी से कम नहीं है। उत्तर भारत के मौसम का हाल उत्तर भारत की बात करें तो 15 व 16 मई को जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में छिटपुट से हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं के चलने की संभावना है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में व पूर्वी राजस्थान में 15 और 16 मई को छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। इस दौरान आंधी की स्पीड 50 किमी प्रति घंटे रह सकती है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान में गरज के साथ आंधी आ सकती है। 15 मई को पश्चिमी राजस्थान में कुल इलाकों में धूलभरी आंधी चलने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो 15-17 मई के दौरान नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में छिटपुट से लेकर काफी व्यापक स्तर पर हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं के चलने की संभावना है। मॉनसून से पहले दक्षिण भारत में झमाझम बारिश इसके अलावा, मॉनसून के आगमन से पहले ही दक्षिण भारत में झमाझम बरसात हो रही है। 15-19 मई के दौरान केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, आंतिरक कर्नाटक, लक्षद्वीप में 15-16 मई को छिअपुट से लेकर व्यापक स्तर पर गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। 15-17 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, 16-17 मई को केरल, माहे, 15 मई को लक्षद्वीप में और 15-18 मई के दौरान दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में अलग-अलग जगहों पर भारी बरसात की संभावना है। साथ ही, 15 मई को केरल, माहे में कुछ जगहों पर बहुत भारी बरसात होगी। 15 मई को आंतरिक कर्नाटक में कुछ जगह पर ओले गिरेंगे।

तपती गर्मी के बीच खुशखबरी: आ रहा है मॉनसून, मौसम विभाग ने जताई बारिश की संभावना

नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सक्रिय हो गया है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मॉनसून की समय से पहले दस्तक के लिए बेहद अनुकूल बन रही हैं. बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया बन गया है, जो अगले कुछ घंटों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है. इस सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी. साथ ही इस सिस्टम से मॉनसून उत्तरी दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर भारत में आज आंधी-बारिश का अलर्ट यूपी-बिहार समेत पांच राज्यों में आज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. बिहार और उत्तराखंड के सभी जिलों में जबकि उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आंधी-तूफान और बारिश से जनजीवन प्रभावित है. इस बीच मौसम विभाग ने अगले दो दिन के लिए प्रदेश में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने वाला है. मौसम विभाग के अनुसार, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 14 से 17 मई के बीच भारी बारिश हो सकती है. वहीं, असम, मेघालय और मणिपुर सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई जगहों पर अच्छी बारिश की संभावना है. बंगाल की खाड़ी में बने इस सिस्टम का असर ओडिशा में भी साफ दिखाई देगा, जहां राज्य के कई हिस्सों में अगले 6 दिनों तक बारिश का अनुमान है. ओडिशा के 20 जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कब होगी मॉनसून की एंट्री? भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां तेजी से अनुकूल होती जा रही हैं. सप्ताह के अंत तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ इलाकों में मॉनसून की एंट्री हो सकती है. इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी का मिश्रित असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के उत्तरी तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है. इसके चलते अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका है। उत्तर भारत में मौसम में बदलाव DTE के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवाओं में चक्रवाती रूप में बना हुआ है. इसके प्रभाव से 12 से 15 मई तक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. गरज-चमक के साथ हवाओं की रफ्तार 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. पूर्वी राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने का भी अंदेशा है। मौसम विभाग ने खराब मौसम में खुले में न निकलने की सलाह दी है.  पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश व बर्फबारी जारी रह सकती है. कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है, जिससे फलों और सब्जियों की फसलों को नुकसान हो सकता है। पूर्वी भारत में बारिश और तेज हवाएं बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा में अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं का असर रहेगा. बिहार में ओलावृष्टि, झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. सिक्किम और उत्तर बंगाल के पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश (64.5-115.5 मिमी) का येलो अलर्ट जारी है। दक्षिण भारत में बारिश और हवाएं तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में भी बारिश व गरज-चमक का दौर रहेगा. कई जगहों पर 30-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कहां चलेगी लू और भीषण गर्मी? डाउन टू अर्थ की खबर के मुताबिक, एक तरफ जहां कई राज्यों में बारिश से राहत मिल रही है. वहीं, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. पश्चिम राजस्थान और गुजरात में 12 से 17 मई तक लू चलने की संभावना है. पूर्वी राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।

IMD का अनुमान: MP में मानसून कमजोर, इंदौर-ग्वालियर में सूखा और भोपाल में ज्यादा बारिश के संकेत

भोपाल  इस साल मानसून के कमजोर रहने की संभावना है। दो साल अच्छी बारिश होने के बाद इस साल सामान्य से कम बारिश होने के पूर्वानुमान ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि देश की लगभग आधी खेती मानसून पर निर्भर है। धान, दालों और तिलहन की बुवाई और पैदावार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।  भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने  अपना पहला आधिकारिक अनुमान जारी किया। इसमें कहा गया है कि इस वर्ष देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान होने वाली वर्षा सामान्य से कम (लगभग सेंटीमीटर) रहने की संभावना है, जो भारत में मौसमी बारिश का दीर्घकालिक औसत (एलपीए-1971-2020) 87 सेंटीमीटर का लगभग 92 फीसदी है। एलपीए के 90 से 95% के बीच की बारिश को सामान्य से कम माना जाता है। निजी एजेंसी स्काईमेट ने भी करीब 94% बारिश का अनुमान लगाया है। जून में मानसून सीजन शुरू हो जाएगा। 24 से 26 जून के बीच अंचल में मानसून की दस्तक हो जाती है। 2025 में मानसून समय से पहले आ गया था और अक्टूबर तक बारिश की थी। 2025 में हुई बारिश से अंचल के बाद व प्राकृतिक जल स्रोत भर गए थे। बारिश ने 90 साल का रिकॉर्ड भी तोड़कर नया बनाया था। 2026 के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इस पूर्वानुमान के अनुसार कम बारिश होगी। खंड बर्षा की वजह से बारिश असंतुलत रहेगी। कहीं सूखा रहेगा और कही बारिश होगी। इस कारण प्रभावित हुआ है मानसून -प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में तापमान में बदलाव देखा जा रहा है। कमजोर ला–नीना जैसी स्थिति अब तटस्थ हो रही है और आगे चलकर एल नीनो जैसी स्थिति बनने की संभावना है। एल–नीनो के दौरान समुद्र का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आने वाली नमी कमजोर पड़ती है और मानसूनी बारिश घटती है। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने प्रेस वार्ता में कहा कि मात्रात्मक रूप से पूरे देश में मौसमी वर्षा एलपीए का 92 प्रतिशत' रहने की संभावना है, जिसमें 5 फीसदी की कमी- बेसी हो सकती है। पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है। इनको छोड़कर देश के शेष हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की उम्मीद है। सामान्य से कम वर्षा का एक कारण जून में प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति का उभरना हो सकता है। आमतौर पर जब भी अल नीनो की स्थिति बनती है तो भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है और सूखे की स्थिति बनने का खतरा रहता है। हालांकि, हिंद महासागर में एक सकारात्मक द्विध्रुव (आईओडी) की स्थिति बन रही है। डॉ. महापात्रा ने कहा कि सकारात्मक आईओडी में सामान्य से अधिक वर्षा होती है। इसलिए उम्मीद है कि यह मानसून के दूसरे भाग में अल नीनो के प्रभाव को कम करने में सहायक होगा। आईओडी हिंद महासागर के पश्चिमी (अफ्रीका तट) और पूर्वी (इंडोनेशिया तट) हिस्सों के बीच समुद्र की सतह के तापमान का एक अनियमित अंतर (दोहराव) है। भारत के लिए मानसूनी बारिश अहम भारत की कुल वर्षा का लगभग 75 प्रतिशत मानसून के मौसम में होता है, जो सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक है। लगभग 64 प्रतिशत भारतीय कृषि पर निर्भर हैं, जो मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर है क्योंकि कुल बोए गए क्षेत्र का केवल लगभग 55 प्रतिशत ही सिंचाई के अंतर्गत आता है। देश के विभिन्न भागों में जलाशयों के भरने के लिए भी मानसूनी वर्षा महत्वपूर्ण है, जिनसे पेयजल की आपूर्ति होती है। कम बारिश से घटेगा उत्पादन पिछले दो साल से अच्छी बारिश होने से फसलों को काफी फायदा पहुंचा। नतीजा ये रहा है कि सोयाबीन का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 2 क्विंटल तक बढ़ गया था। वहीं, गेहूं-चने के लिए भी अच्छा पानी मिला था। इससे उत्पादन बढ़ गया। इस साल यदि कम बारिश होती है तो पेयजल के साथ सिंचाई के लिए भी दिक्कतें खड़ी हो सकती है। 2017 में हुई भी सबसे कम बारिश, 2019 में जमकर बरसा पिछले 10 साल के बारिश के आंकड़े पर नजर डालें तो साल 2017 में सबसे कम बारिश हुई थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.3 इंच है। इसके मुकाबले औसत 29.9 इंच बारिश हुई थी। साल 2018 में 34.3 इंच बारिश दर्ज की गई थी। सबसे ज्यादा पानी वर्ष 2019 में 53 इंच हुई थी। वहीं, 2021 और 2023 में सामान्य से थोड़ी ही कम बारिश हुई थी। 2024 में 44.1 इंच पानी गिरा तो 2025 में आंकड़ा 45.2 इंच तक पहुंच गया। इस तरह कह कहते हैं कि पिछले 7 साल से प्रदेश में अच्छी बरसात हो रही है। अब इस साल मानसून से भी यही उम्मीदें हैं।। यह अपडेट साल 2025 का है। इसमें पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होने का अनुमान जताया था, जो सही निकला था, लेकिन साल 2026 में बारिश को लेकर स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही है। यह पड़ेगा प्रभाव कम बारिश का धान, दालों और तिलहन की बुवाई और पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है। अगर फसल कम होती है, तो खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का डर है। ग्रामीण इलाकों में आय कम होने से बाजार में मांग कम हो सकती है, जिसका असर देश की जीडीपी विकास पर भी पड़ सकता है। गर्मी ने पकड़ा जोर….. उत्तर पश्चिम में उछला पारा, पूर्वोत्तर में बारिश जारी देश के मौसम में इन दिनों स्पष्ट विभाजन देखने को मिल रहा है। एक और उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई राज्यों में लू की स्थिति बनने लगी है, वहीं दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत में बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की घटनाएं जारी हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा अपडेट के अनुसार, उत्तर भारत में तापमान में अगले कुछ दिनों में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इस बीच सौराष्ट्र, कच्छ, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग दिनों में लू चलने का अनुमान है, जबकि गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। मौसम विभाग ने किसानों को भी बढ़ती गर्मी के बीच फसलों की हल्की सिंचाई करने … Read more

मानसून के जाते ही छत्तीसगढ़ में बदला मौसम, ठंड की दस्तक शुरू

रायपुर दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के साथ ही छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार, शुक्रवार यानी 17 अक्टूबर को प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। आसमान में हल्के बादल जरूर रहेंगे, लेकिन बारिश के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार, 16 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरे देश से वापसी हो गई। इसके साथ ही पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय हो गया है और उसकी वर्षा गतिविधियां तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्रप्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल-माहे में शुरू हो गई हैं। प्रदेश में फिलहाल किसी बड़े मौसम तंत्र का प्रभाव नहीं है। हालांकि, उत्तरी झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में औसत समुद्र तल से लगभग 3.1 किलोमीटर ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, लेकिन इसका असर छत्तीसगढ़ पर नहीं पड़ेगा। गुरुवार को प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रहा। तापमान में विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है और आने वाले 24 घंटों में भी मौसम शुष्क रहेगा। दो दिन में हल्की बारिश के आसार रायपुर शहर के लिए स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार को आसमान आंशिक रूप से मेघमय रहेगा। अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। दो दिनों के बाद प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

भोपाल-इंदौर में बढ़ी ठंड, मानसून गया पर बारिश अभी बाकी; दक्षिण MP में अलर्ट जारी

भोपाल मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई के साथ ही रात और सुबह के समय मौसम में ठंडक का एहसास हो रहा है. मौसम साफ बने रहने के साथ ही यहां कई जगहों पर तापमान 15 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड किया जा रहा है. इसमें राजगढ़, इंदौर, छतरपुर, भोपाल और खंडवा जैसे जिले शामिल है. हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों के बाद मौसम में बदलाव के साथ ही कुछ जगहों पर बारिश का दौर देखा जाएगा. मौसम विभाग ने यह भी बताया कि इस बार कड़ाके की ठंड का दौर कब से देखा जाएगा. मौसम वैज्ञानिक दिव्या सुरेंद्रन ने मानसून की विदाई से पहले ही कई शहरों के न्यूनतम तापमान में गिरावट के सवाल पर कहा कि अक्टूबर की शुरुआत में भी भारी बारिश का दौर प्रदेश के कई जिलों में देखा गया. हालांकि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश के सभी जिलों खासतौर पर पश्चिम मध्य प्रदेश से मौसम पूरी तरह साफ बना हुआ है. ऐसे में प्रदेश के सभी जिलों का न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे बना हुआ है. इसके पीछे का मुख्य कारण मौसम साफ होना रहा है. मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश के सभी संभागों से बदल छटने के साथ ही न्यूनतम तापमान में सामान्य से 2 से 4 डिग्री तक की गिरावट देखी गई है. हालांकि यह कहना अभी मुश्किल है कि प्रदेश में ठंड का दौर शुरू हो गया है, क्योंकि धीरे-धीरे हम ठंड के मौसम की ओर रुख कर रहे हैं. मगर प्रदेश में ठंड का दौर सामान्य रूप से नवंबर के दूसरे पखवाड़े में ही शुरू होता है. प्रदेश में अभी जो ठंड का एहसास हो रहा है, उसके पीछे की मुख्य वजह लोकल सिस्टम और उत्तरी हवाओं का रुख भी है. एक बार फिर बदलेगा प्रदेश का मौसम मौसम वैज्ञानिक दिव्या सुरेंद्र ने बताया कि आने वाले दिनों में एक बार फिर प्रदेश का मौसम बदलेगा ऐसे में कई जगहों पर बादल जाने के साथ ही बारिश का दौर भी देखा जाएगा, जिसके चलते तापमान में इजाफा होने की संभावना है. खास तौर पर रात के तापमान में सामान्य से हल्की उछाल देखी जा सकती है. मौसम वैज्ञानिक दिव्या सुरेंद्रन के अनुसार, वर्तमान समय में मानसून प्रदेश से विदाई ले चुका है. वही सिस्टम की बात करें तो उत्तर प्रदेश के ऊपर एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण बन रहा है. हालांकि इसका असर प्रदेश में दिखाई देने की संभावना कम है, लेकिन लोकल सिस्टम के चलते अगले 24 घंटे के बाद प्रदेश के कुछ शहरों में बारिश का दौर देखा जाएगा. हवा का रुख बदला, रातें हुई ठंडी सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, दक्षिणी हिस्से के जिलों में हल्की बारिश का दौर बना रहेगा। मंगलवार को मौसम साफ रहेगा, लेकिन इसके बाद कई जिलों में बूंदाबांदी होने के आसार है। इस बीच प्रदेश में रातें ठंडी हो गई है। हवा का रुख बदलने से ऐसा हो रहा है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है। इस वजह से उत्तरी हवा चल रही है और मध्यप्रदेश में ठंडक बढ़ा रही है। रविवार-सोमवार की रात प्रदेश के अधिकांश शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री के नीचे आ गया। इंदौर-राजगढ़ में 14.6 डिग्री, भोपाल में 15.8 डिग्री, उज्जैन में 17.3 डिग्री, ग्वालियर में 21.3 डिग्री और जबलपुर में पारा 18.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसी तरह बैतूल में 17.2 डिग्री, धार में 16.9 डिग्री, गुना में 18.6 डिग्री, नर्मदापुरम में 18.9 डिग्री, खंडवा में 16.4 डिग्री, खरगोन में 17 डिग्री, पचमढ़ी में 17.8 डिग्री, रतलाम में 17.2 डिग्री, शिवपुरी में 18 डिग्री, छिंदवाड़ा में 16.8 डिग्री, नौगांव में 15.3 डिग्री, टीकमगढ़, रीवा-सागर में 18 डिग्री रहा। तापlमान का ताजा हाल अधिकतम तापमान: खजुराहो (छतरपुर) – 34.2°C (सबसे ज्यादा), ग्वालियर – 32.7°C, नर्मदापुरम – 32.6°C, धार/गुना – 32.5°C, टीकमगढ़ – 32.2°C न्यूनतम तापमान: इंदौर/राजगढ़ – 14.6°C (सबसे कम), नौगांव (छतरपुर) – 15.3°C, भोपाल – 15.8°C, नरसिंहगढ़ (राजगढ़) – 16.3°C, खंडवा – 16.4°C, कैसा रहा बड़े शहरों का पारा ग्वालियर – 32.7°C उज्जैन – 32°C इंदौर – 31°C जबलपुर – 30.4°C भोपाल – 29.6°C

MP में अब मानसून की विदाई की तैयारी, अगले 2 दिन हल्की बारिश के आसार

भोपाल  मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ बारिशों का दौर अब थमने जा रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में तेज बारिश ने जहां गर्मी से राहत दी, वहीं अब मौसम साफ होने की ओर है। मौसम विभाग की मानें तो 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदा हो जाएगा, और इसके बाद राज्य में सुहावना और साफ मौसम लौटेगा। अगले दो दिनों तक हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन कहीं भी भारी बारिश का खतरा नहीं है। यानी अब लोगों को न जलभराव की चिंता होगी, न ही अचानक आने वाली तेज बारिश की। इन जिलों में हुई बारिश सोमवार को श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, टीकमगढ़, सागर, दमोह, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, सिवनी, बालाघाट, मंडला, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नरसिंहपुर, रतलाम, मंदसौर, धार, बड़वानी, इंदौर, देवास, शाजापुर, आगर, बैतूल, नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, रायसेन, भोपाल, राजगढ़ और विदिशा जिलों में आंधी के साथ बारिश हुई थी। इनमें से भोपाल, रायसेन, गुना और हरदा भारी बारिश दर्ज की गई थी।   आज इन जिलों में बारिश का अलर्ट     भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, सिवनी, बालाघाट, पांढुर्णा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, झाबुआ, इंदौर, देवास, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, सागर, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, शहडोल, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पन्ना, दमोह, मंडला, डिंडोरी, मैहर, छिंदवाड़ा, अनूपपुर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मैहर     सीहोर, राजगढ़, उज्जैन, देवास, शाजापुर, गुना, शिवपुरी, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और श्योपुर कलां में 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती है। वर्तमान में सक्रिय है कई मौसम प्रणालियां     अगले 3-4 दिनों के दौरान मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ और हिस्सों तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की और वापसी के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हैं। चक्रवातीय तूफान “शक्ति” वर्तमान में 19.6° उत्तरी अक्षांश और 60.5° पूर्वी देशांतर के पास केंद्रित है। यह मसीरा (ओमान) से लगभग 210 किमी दक्षिण-पूर्व, रास अल हद्द (ओमान) से 310 किमी दक्षिण-दक्षिण-पूर्व, कराची (पाकिस्तान) से 900 किमी दक्षिण-पश्चिम, द्वारका से 940 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और नलिया से 960 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।     इसके पूर्व- दक्षिण-पूर्व की ओर पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम अरब सागर पर बढ़ने और 7अक्टूबर की सुबह तक एक निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है। उत्तरी अफगानिस्तान के ऊपर चक्रवातीय परिसंचरण के रूप में स्थित पश्चिमी विक्षोभ अब उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान और उससे सटे पाकिस्तान के ऊपर 3.1 से 5.8 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर स्थित है, और ऊपरी क्षोभमंडलीय पछुआ हवाओं में एक ट्रफ 7.6 किमी की ऊँचाई तक समुद्र तल से ऊपर देशांतर 69° पूर्व से अक्षांश 23° उत्तर तक फैली हुई है।     एक चक्रवातीय परिसंचरण उत्तर पाकिस्तान और आसपास के क्षेत्र के ऊपर स्थित है, जो समुद्र     तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। एक चक्रवातीय परिसंचरण पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र के ऊपर भी स्थित है, जो समुद्र तल से 1.5 किमी की ऊँचाई तक फैला हुआ है। मध्य प्रदेश : अबतक 12 जिलों से मानसून विदा अबतक मध्य प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इसमें उज्जैन, राजगढ़,अशोकनगर ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर, रतलाम और उज्जैन शामिल हैं।आमतौर पर मानसून 6 अक्टूबर तक विदा हो जाता है लेकिन इस बार नया वेदर सिस्टम बनने से मानसून की वापसी में देरी हो रही है। हालांकि 10-12 अक्टूबर से पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई संभव है। इस वर्ष मानसून ने प्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। 1 जून से 6 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

भोपाल समेत 20 जिलों में बारिश, अगले दिन मानसून की वापसी पर संशय

भोपाल   मध्य प्रदेश में पिछले 3 दिन से तेज बारिश का दौर चल रहा है। मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि अगले 3 दिन में हल्की बारिश का दौर रहेगा। वहीं, ग्वालियर-चंबल संभाग ड्राई रहेगा। फिलहाल कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। रविवार को भोपाल समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। बैतूल में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया।  भदभदा और कलियासोत डैम एक-एक गेट खोले  रविवार को भोपाल, बैतूल समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। भोपाल में ढाई इंच और बैतूल में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया। भोपाल में शाम को तेज बारिश का दौर चला। भोपाल-इंदौर रोड पर इतनी तेज बारिश थी कि गाड़ियां रेंगती हुई चली। बारिश की वजह से भदभदा और कलियासोत डैम के एक-एक गेट रात में ही खोल दिए गए। गुना, नर्मदापुरम, पचमढ़ी, श्योपुर, शिवपुरी, शाजापुर, सीहोर, छिंदवाड़ा, दमोह, सतना, सिवनी, बालाघाट में भी बारिश हुई। श्योपुर और सिवनी में करीब डेढ़ इंच पानी गिरा। देर रात तक प्रदेश के कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। 10 से पूरे प्रदेश में मानसून की वापसी मौसम विभाग के अनुसार, अब तक ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर और रतलाम से मानसून विदा हो चुका है। राजगढ़ और अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून विदा हुआ है। मौसम विभाग की माने तो मानसून की वापसी के लिए अभी परिस्थिति अनुकूल नहीं है, लेकिन 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदाई ले लेगा। इस साल मानसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। समय से एक दिन बाद मानसून प्रदेश में एंटर हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार, 6 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों से मानसून विदा हो जाता है, लेकिन नया सिस्टम बनने से विदाई की तारीख आगे भी बढ़ सकती है। गुना में सबसे ज्यादा बारिश इस बार गुना में सबसे ज्यादा पानी गिरा है। 65.6 इंच बारिश दर्ज हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच से अधिक और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं, शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। शाजापुर में 28.9 इंच, खरगोन में 29.6 इंच, खंडवा में 32 इंच, बड़वानी में 33.5 इंच और धार में 33.6 इंच पानी गिरा है।  एमपी में 24 घंटे के दौरान 21 जिलों में बारिश, रायसेन में 3.7 इंच बरस गया मध्यप्रदेश में पिछले 24 घंटे के दौरान 21 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। रायसेन में सबसे ज्यादा 3.7 इंच पानी गिर गया। भोपाल में ढाई इंच, बैतूल में 2 इंच, बालाघाट के मलाजखंड में 1.8 इंच, श्योपुर-शिवपुरी में 1.7 इंच, सिवनी में डेढ़ इंच, टीकमगढ़ में 1.2 इंच और नर्मदापुरम-दमोह में 1 इंच बारिश हुई। सागर, धार, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, गुना, रतलाम, शाजापुर, सीहोर, देवास, राजगढ़, विदिशा समेत कई जिलों में हल्की बारिश का दौर बना रहा। इतनी तेज बारिश की भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे पर रेंगती हुई चली गाड़ियां रविवार को भोपाल, बैतूल समेत 20 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। भोपाल में ढाई इंच और बैतूल में 2 इंच से ज्यादा पानी गिर गया। भोपाल में शाम को तेज बारिश का दौर चला। भोपाल-इंदौर रोड पर इतनी तेज बारिश थी कि गाड़ियां रेंगती हुई चली। बारिश की वजह से भदभदा और कलियासोत डैम के एक-एक गेट रात में ही खोल दिए गए। गुना, नर्मदापुरम, पचमढ़ी, श्योपुर, शिवपुरी, शाजापुर, सीहोर, छिंदवाड़ा, दमोह, सतना, सिवनी, बालाघाट में भी बारिश हुई। श्योपुर और सिवनी में करीब डेढ़ इंच पानी गिरा। देर रात तक प्रदेश के कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। 1 जून से 5 अक्टूबर तक कहां कितनी हुई वर्षा     मध्य प्रदेश में दीर्घावधि औसत से 21% अधिक वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 17% और पश्चिमी मध्य प्रदेश 25% अधिक वर्षा हुई है। एमपी में अब तक 47 इंच बारिश हो चुकी है वैसे 37.3 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.2 इंच है। अब तक 122 प्रतिशत बारिश हो चुकी है पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी।     गुना में सबसे ज्यादा 65.5 इंच बारिश हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच और श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। हालांकि शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और धार में सबसे कम बारिश हुई।सबसे कम बारिश खरगोन में 27.3 इंच , शाजापुर में 28.7 इंच, खंडवा में 29.1 इंच, बड़वानी में 30.9 इंच और धार में 32.8 इंच हुई है।     ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है।

दशहरा पर बरसेंगे मेघ: यूपी-बिहार में बारिश के आसार, अन्य राज्यों में भी बदलेगा मौसम

नई दिल्ली मॉनसून की वापसी के साथ ही राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों में उमस भरी गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है। भारत मौसम विभाग के अनुसार, एक सुस्पष्ट कम दबाव क्षेत्र पश्चिम विदर्भ और उससे सटे उत्तर मध्य महाराष्ट्र के ऊपर बना हुआ है। इसके प्रभाव से कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, और गुजरात राज्य में कुछ स्थानों पर 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के दौरान भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। IMD ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी जारी है। मॉनसून की वापसी रेखा अभी भी गुजरात के वेरावल, भरूच, उज्जैन, झांसी और शाहजहांपुर से गुजर रही है। वहीं 28 से 30 सितंबर तक पूर्वी और मध्य भारत में मॉनसून फिर से सक्रिय हो सकता है। जानते हैं आपके शहर में कल कैसा मौसम रहेगा… दिल्ली में कल कैसा रहेगा मौसम? भारत मौसम विभाग के लेटेस्ट अपडेट के अनुसार, दिल्ली में 28 व 29 सितंबर को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। दिल्ली-एनसीआर में 30 सितंबर और एक अक्टूबर को हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। इस दौरान अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री तक रह सकता है। यूपी में कल कैसा रहेगा मौसम? उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम के शुष्क रहने की संभावना है। पूर्वी यूपी के जिलों में अगले दो-तीन दिनों में हल्की बारिश हो सकती है। दिन का तापमान सामान्य या थोड़ा अधिक रह सकता है। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि दशहरा के मौके पर बारिश होने की संभावना है। लेकिन हल्की-फुल्की ही बारिश होगी। कहीं पर भी बहुत भारी बारिश होने की संभावना नहीं है। बिहार में कल कैसा रहेगा मौसम? बिहार में पिछले एक सप्ताह से उमस भरी गर्मी ने लोगों को खूब परेशान किया है। हालांकि अगले दो दिनों तक राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में एक से 4 अक्टूबर के बीच कई जिलों में भारी बारिश होने के आसार हैं। जबकि 3–4 अक्टूबर को कुछ जगहों पर बहुत भारी वर्षा की संभावना। उत्तराखंड में कल कैसा रहेगा मौसम? उत्तराखंड ने इस साल बारिश बादल फटने के कारण भीषण तबाही का सामना किया है। इस लोगों की प्राकृतिक आपदा से मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोगों का घर तबाह हो गया। उत्तराखंड में कल ज्यादातर इलाकों में साफ या आंशिक बादल रहेंगे। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बौछार पड़ सकती है। तापमान सामान्य के आसपास ही रहेगा। छत्तीसगढ़ में कल कैसा रहेगा मौसम? राज्य में 29 सितंबर से 4 अक्टूबर तक लगातार बारिश का अनुमान है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं। किसानों को खेतों में अतिरिक्त पानी निकासी की तैयारी रखने की जरूरत है। महाराष्ट्र में कल कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग ने कोकण, मुंबई, पालघर, ठाणे, पुणे, नाशिक, विदर्भ व मराठवाड़ा में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 28–29 सितंबर को मुंबई सहित उत्तर कोकण व उत्तर मध्य महाराष्ट्र में बहुत भारी वर्षा संभव है।