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बस्तर में जल्द दस्तक दे सकता है मानसून, मौसम विभाग ने हवाओं को बताया अहम फैक्टर

जगदलपुर. भीषण गर्मी के बीच बस्तरवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। इस बार मानसून के बस्तर में सामान्य तिथि से पहले पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि मानसून की वास्तविक गति उसके आगे बढ़ने की स्थिति पर निर्भर करेगी। मौसम विभाग के अनुसार, बस्तर में मानसून पहुंचने की सामान्य तिथि 13 जून मानी जाती है। पिछले 15 से 20 वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो मानसून लगभग इसी अवधि में पहुंचता रहा है. हालांकि, दो से चार दिनों का अंतर सामान्य माना जाता है। इस वर्ष केरल में मानसून की जल्द एंट्री को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि बस्तर में भी मानसून तय समय से थोड़ा पहले पहुंच सकता है। विभाग का कहना है कि यदि मानसूनी हवाएं मजबूत रहीं तो इसका असर बस्तर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि मानसून के आगमन की तिथि पूरी तरह उसकी गति और हवाओं की मजबूती पर निर्भर करती है। यदि हवाएं कमजोर पड़ती हैं तो मानसून की रफ्तार थम सकती है, जबकि हवाएं प्रबल होने पर यह तेजी से अधिक क्षेत्रों को कवर करते हुए पहले पहुंच सकता है। फिलहाल, मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि बस्तर में मानसून की दस्तक सामान्य तिथि के आसपास ही रहेगी, लेकिन परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो इस बार बारिश का इंतजार थोड़ा पहले खत्म हो सकता है। ऐसे में किसानों समेत आम लोगों की नजरें अब मानसून की अगली गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।

गर्मी के बीच राहत की खबर! मध्यप्रदेश में तेज बारिश-ओलों का अलर्ट, मानसून ने केरल में दी एंट्री

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की एंट्री को लेकर बड़ा अपडेट सामने आ गया है। बताया जा रहा है कि, इस बार मानसून सामान्य तिथि से लगभग 5 से 7 दिन की देरी से प्रदेश में एंटर हो सकता है। राजधानी भोपाल में स्थित राज्य मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में मानसून की एंट्री 20 से 22 जून के बीच होने की संभावना है। हालांकि मानसून के आगमन से पहले ही प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला हुआ है और जून के शुरुआती चार दिनों तक कई जिलों में आंधी बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहने की संभावना है। वैसे तो मई का महीना भीषण गर्मी और लू के लिए जाना जाता है। शुरुआती दिनों में प्रदेश भीषण गर्मी के साथ साथ लू की चपेट में रहा थी। लेकिन महीने के आखिरी दिनों में प्रदेश के कई इलाकों में मौसम ने करवट ली और भीषण गर्मी के साथ तेज बारिश और ओलावृष्टि का भी सामना किया। स्थिति ये रही कि मई मे औसत से करीब आधा इंच अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इसके साथ-साथ विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भारी बारिश होगी. इंडिया मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने अनुमान लगाया है कि मानसून आने पर पूरे राज्य में जोरदार बारिश होगी. भारत में मानसून को लेकर पूरे देश में करीब से नजर रखी जा रही है, क्योंकि केरल में मानसून का आना देश के बाकी हिस्सों में इसके आगे बढ़ने का बेंचमार्क है. तेज बारिश की आशंका को देखते हुए, आईएमडी (IMD) ने इस हफ्ते अलग-अलग दिनों में सात जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।  विभाग के मुताबिक केरल के अलपुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, त्रिशूर और मलप्पुरम को बुधवार और गुरुवार को ऑरेंज अलर्ट पर रखा गया है, जबकि पठानमथिट्टा और कोझिकोड गुरुवार को अलर्ट पर हैं. मौसम विभाग के अधिकारियों ने कमजोर इलाकों में रहने वालों से हाई अलर्ट पर जाने को कहा है. वहीं, मौसम एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि इन जिलों में कुछ जगहों पर कम समय में 11 से 20 सेंटीमीटर बारिश हो सकती है।  बता दें, इतनी तेज बारिश से शहरी इलाकों में अचानक बाढ़ और पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ जाता है, जिससे डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसियों को मॉनिटरिंग और तैयारी के उपाय बढ़ाने पड़ रहे हैं. कई दूसरे जिलों के लिए भी येलो अलर्ट जारी किए गए हैं, जिससे राज्य के बड़े हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है. आने वाले मानसून से केरल के समुद्र तट पर खराब मौसम और तेज हवाएं चलने की उम्मीद है।  कैसे आता है अंचल में मानसून? मानसून का आगमन बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने निम्नदाब क्षेत्र या चक्रवातीय तूफानों की वजह से या फिर अरब सागर में बने निम्नदाब क्षेत्र की वजह से होता है। मौसम विभाग के अधिकारियों ने मछुआरों को सलाह दी है कि जब तक मौसम ठीक न हो जाए, वे समुद्र में न जाएं. जहां लोग हफ्तों की भीषण गर्मी से राहत की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं राज्य भर में प्री-मानसून तैयारी तेज कर दी है, जिसमें बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए नालों, नहरों और पानी के रास्तों की सफाई शामिल है. बहुत ज़्यादा गर्मी के बाद, आने वाले दिनों में पहली बार बड़े पैमाने पर मानसून की बारिश से केरल का नजारा बदलने की उम्मीद है, साथ ही मौसमी बारिश के लिए माहौल तैयार होगा जो पूरे भारत में खेती और पानी के संसाधनों को बनाए रखती है। 

समय से पहले आएगा मानसून? 26 मई को केरल पहुंचने के आसार, 10 दिन में बस्तर में एंट्री संभव

रायपुर  रायपुर मौसम केंद्र के मौसम वैज्ञानिक बीके चिंधालोरे ने बताया कि केरल में हर साल 1 या 2 जून को मानसून पहुंचता है लेकिन इस बार दक्षिण पश्चिम मानसून 26 मई को ही केरल पहुंच जाएगा. केरल में मानसून के पहुंचते ही नमीयुक्त हवाएं भी आएंगी, जिससे नौतपा में भी लोगों को गर्मी से राहत मिल सकती है।  छत्तीसगढ़ में कब पहुंचेगा मानसून केरल में मानसून पहुंचने के बाद लगभग 10 से 12 दिनों में मानसून छत्तीसगढ़ में पहुंचता है. यानी प्रदेश में मानसून पहुंचने की संभावित तिथि 5 मई से 7 मई के आसपास है।  छत्तीसगढ़ में 25 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. छत्तीसगढ़ में 26 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. कुछ इलाकों में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा) चलने की संभावना है।  छत्तीसगढ़ में 27 मई से 29 मई का मौसम: कुछ इलाकों में लू चलने की संभावना है. कुछ स्थानों पर बिजली कड़कने और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा) के साथ आंधी आने की संभावना है।  छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों के लिए तापमान का पूर्वानुमान छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिनों में अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव होने की संभावना नहीं है. इसके बाद इसमें 1-3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है. साउथ वेस्ट मानसून का अग्रिम आगमन 2026 राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र भारत मौसम विज्ञान विभाग के सुबह 8 बजे जारी बुलेटिन के अनुसार इस बार मानसून का अग्रिम आगमन हो रहा है. मानसून की उत्तरी सीमा 7°N/60°E, 7°N/70°E, 7°N/75°E, 8°N/80°E, 10°N/85°E, 13.5°N/90°E और 17°N/95°E से होकर गुजर रही है. अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र, दक्षिण पश्चिम, दक्षिण पूर्व और पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मानसून आगे बढ़ने के लिए परिस्थतियां अनुकूल है।  पूर्वोत्तर भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 मई को असम और मेघालय में गरज, बिजली और तेज हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 25 और 26 मई को अरुणाचल प्रदेश में, 25 से 29 मई के दौरान असम और मेघालय में, और 25, 29 और 30 मई को नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना है. 25 से 27 मई के दौरान अरुणाचल प्रदेश में, असम और मेघालय में अलग अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।  दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत 25 से 28 मई के दौरान केरल, माहे और लक्षद्वीप में गरज, बिजली और तेज़ हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ व्यापक हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है. 25 से 28 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल और आंतरिक कर्नाटक में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ छिटपुट से लेकर मध्यम वर्षा की संभावना है. तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा में 25 से 27 मई के दौरान और तेलंगाना में 25 से 30 मई के दौरान भी 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है।  25 और 26 मई को उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक के झोंके) की संभावना है. 25 और 26 मई को तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में छिटपुट भारी वर्षा की भी संभावना है. केरल और माहे में 25 से 28 मई के दौरान भी यही संभावना है।  पूर्वी भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 और 26 मई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 25 से 30 मई के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में और 25 से 28 मई के दौरान बिहार में गरज, बिजली और तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा की गति तक) के साथ छिटपुट से लेकर मध्यम बारिश होने की संभावना है. 27 से 29 मई के दौरान गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में, 26 से 28 मई के दौरान बिहार में और 25 मई को झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक हवाएं) आने की संभावना है. 25 से 27 मई के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में छिटपुट भारी बारिश होने की संभावना है।  उत्तरपश्चिम भारत में मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी 25 मई और 28-30 मई के दौरान जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है. उत्तराखंड में 25, 29 और 30 मई को भी यही स्थिति रहेगी. 28-30 मई के दौरान पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट से लेकर मध्यम दर्जे की बारिश, गरज, बिजली और तेज़ हवाएं (40-50 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है. 25-29 मई के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में और 30 मई को राजस्थान में भी यही स्थिति रहेगी. 28 और 29 मई को पूर्वी उत्तर प्रदेश में और 29 और 30 मई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गरज के साथ आंधी (हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटा और 70 किमी प्रति घंटा तक) चलने की संभावना है। 

भारत पर मंडरा रहा बड़ा संकट, मानसून से पहले आई डराने वाली रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन

नई दिल्ली  दुनियाभर में एक बार फिर अल नीनो (El Nino) को लेकर चिंता बढ़ने लगी है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार बनने वाला अल नीनो पिछले कई दशकों का सबसे खतरनाक संकट हो सकता है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और जलवायु एजेंसियों के मुताबिक, कुछ क्लाइमेट मॉडल संकेत दे रहे हैं कि यह अल नीनो 1950 के बाद दर्ज सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक बन सकता है. इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों में मौसम, खेती, पानी और अर्थव्यवस्था पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।  अल नीनो का नाम स्पेनिश भाषा के शब्द 'लिटिल बॉय' से पड़ा है. यह प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान और हवाओं के पैटर्न में बदलाव से पैदा होने वाली प्राकृतिक जलवायु घटना है. आमतौर पर भूमध्य रेखा के पास चलने वाली ट्रेड विंड्स पूर्व से पश्चिम दिशा में बहती हैं, लेकिन जब ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या उलटी दिशा में बहने लगती हैं तो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में गर्म पानी जमा होने लगता है. यही बदलाव पूरी दुनिया के मौसम तंत्र को प्रभावित करता है।  विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अल नीनो ऐसे समय में बन रहा है जब धरती पहले से ही ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण ज्यादा गर्म हो चुकी है. वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ता तापमान अल नीनो के असर को और खतरनाक बना सकता है. इससे कहीं बाढ़ और चक्रवात बढ़ सकते हैं तो कहीं लंबे सूखे, भीषण गर्मी और जंगलों में आग जैसी घटनाएं तेज हो सकती हैं।  CNN की रिपोर्ट के अनुसार, कई मौसम मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाला अल नीनो 1982-83, 1997-98 और 2015-16 जैसे बड़े अल नीनो से भी ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है. 1997-98 का 'सुपर अल नीनो' दुनिया के इतिहास की सबसे विनाशकारी जलवायु घटनाओं में गिना जाता है, जिसने वैश्विक स्तर पर भारी आर्थिक तबाही मचाई थी।  रिपोर्ट्स के मुताबिक 1982-83 के अल नीनो से वैश्विक अर्थव्यवस्था को करीब 4.1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था, जबकि 1997-98 के सुपर अल नीनो ने लगभग 5.7 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक क्षति पहुंचाई थी. इसका असर खेती, मछली पालन, ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य कीमतों, ट्रांसपोर्ट और बीमा सेक्टर तक पर पड़ा था. वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो सीधे किसी तूफान या आपदा को पैदा नहीं करता, लेकिन यह मौसमीय परिस्थितियों को इतना बदल देता है कि चरम घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।  भारत के लिए यह खतरा और भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि देश की कृषि और जल व्यवस्था काफी हद तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर करती है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) पहले ही संकेत दे चुका है कि 2026 का मानसून अल नीनो के कारण कमजोर पड़ सकता है. अगर मानसून कमजोर रहा तो कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।  भारत की करीब आधी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है. ऐसे में कम बारिश का असर फसल उत्पादन, ग्रामीण आय और महंगाई पर पड़ सकता है. मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बारिश का वितरण भी असमान हो सकता है. कुछ इलाकों में लंबे समय तक सूखा पड़ सकता है, जबकि कुछ जगहों पर कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने से बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं. विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि भारत के शहर पहले से ही हीटवेव, फ्लैश फ्लड और पानी की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. अल नीनो इन संकटों को और गंभीर बना सकता है।  इतिहास में भी अल नीनो के खतरनाक असर देखे जा चुके हैं. 1876-78 का महान अकाल (Great Famine) भी एक शक्तिशाली अल नीनो के दौरान आया था. उस समय भारत, चीन और ब्राजील समेत कई देशों में फसलें बर्बाद हो गई थीं और दुनिया भर में करोड़ों लोगों की मौत भूख और बीमारियों से हुई थी।  हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि आज आधुनिक मौसम पूर्वानुमान, खाद्य भंडारण और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पहले से काफी बेहतर है, इसलिए वैसी तबाही की आशंका कम है. लेकिन इसके बावजूद एक शक्तिशाली अल नीनो भारत की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, बिजली की मांग और जल संकट पर भारी दबाव डाल सकता है. जलवायु एजेंसियां अब लगातार इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं. माना जा रहा है कि सर्दियों तक अल नीनो और मजबूत हो सकता है, जिसके चलते दुनिया के कई देशों ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। 

भीषण गर्मी के बीच गुड न्यूज, जल्द दस्तक देगा मॉनसून; कई राज्यों में आज बरसेंगे बादल

नई दिल्ली भारत में मॉनसून की एंट्री में बस कुछ ही दिन बाकी हैं। खबर है कि मई के अंतिम सप्ताह में राहत भरी बौछारें केरल में दस्तक दे सकती हैं। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत के अधिकांश राज्य गर्मी का सामना करेंगे। हालांकि, उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों में बारिश के आसार हैं। इसके अलावा IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को कम से कम 10 राज्यों में बारिश की संभावनाएं जताई हैं। आज भीगेंगे ये राज्य IMD ने मंगलवार को बताया है कि 19 मई से 22 मई के बीच जम्मू और कश्मीर, 20 से 22 मई के बीच उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, इस दौरा हवा की रफ्तार 30-40 किमी प्रतिघंटा पहुंच सकती है। साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 19 से 24 मई, गंगीय पश्चिम बंगाल में 21 और 22 मई, ओडिशा में 19 मई और 22 मई से 24 मई को बारिश के आसार हैं। बिहार में 19 से 21 मई के बीच, झारखंड में 20 मई, ओडिशा में 20 और 21 मई को तेज हवा के साथ भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में 19 मई को भारी बारिश हो सकती है। 19 से 22 मई के बीच असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में बारिश के आसार हैं। अरुणाचल प्रदेश में 22 मई को भारी बारिश हो सकती है। जबकि, असम और मेघालय में ऐसा ही मौसम 21 और 22 को बन सकता है। कहां पहुंचा मॉनसून मौसम विभाग ने सोमवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के 26 मई को केरल पहुंचने की संभावना है। विभाग ने यह भी कहा कि मॉनसून के आगमन की तारीख में चार दिन का अंतर देखने को मिल सकता है। आईएमडी ने कहा कि अगले पांच दिनों में केरल और माहे के कुछ हिस्सों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, ऐसा दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण के कारण हो सकता है, जिससे केरल, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा और दक्षिण लक्षद्वीप से सटे दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में निम्न वायु दाब का क्षेत्र बन गया है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के अधिकांश हिस्सों और कन्याकुमारी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, यह दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के अधिकांश हिस्सों, अंडमान सागर के अधिकांश भाग, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ चुका है।

गर्मी से मिलेगी राहत! तय हुई मॉनसून की दस्तक की तारीख, बादल बरसाने को तैयार

नई दिल्ली  उत्तर भारत समेत पूरे देशभर में भीषण गर्मी पड़ रही है। सभी लोग मॉनसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, केरल में मॉनसून की एंट्री की खबर ने सबके लिए बड़ी खुशखबरी दी है। केरल में इस बार समय से पहले मॉनसून की एंट्री होने जा रही है। यह 26 मई को दस्तक देगा। हालांकि, इस मॉडल में प्लस माइनस चार दिन का गैप हो सकता है। इस हफ्ते कई दिनों तक उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में हीटवेव से लेकर भीषण हीटवेव की स्थिति रहने वाली है। वहीं, सप्ताह के दौरान उत्तर-पूर्वी भारत में और अगले तीन चार दिनों के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी छिटपुट से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। उत्तर पश्चिम भारत के मौसम की बात करें तो 15 और 16 मई को जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में छिटपुट से हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने की संभावना है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में और पूर्वी राजस्थान में 15 और 16 मई को छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली चलने की संभावना है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में गरज के साथ आंधी चलने की संभावना है। इस दौरान आंधी की स्पीड 70 किमी प्रति घंटे हो सकती है। वहीं, 15 मई को पश्चिम राजस्थान के कुछ इलाकों में धूलभरी आंधी चल सकती है। पूर्वोत्तर भारत में 15 से 17 मई के दौरान नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में छिटपुट से लेकर काफी व्यापक स्तर पर बारिश होगी। 15-17 मई और 20 से 21 मई को अरुणाचल प्रदेश में, 15-21 मई को असम, मेघालय में, 15, 20 और 21 मई को नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम में छिटपुट भारी बारिश होगी। लगातार तीसरे साल समय से पहले आ रहा मानसून आम तौर पर केरल में मानसून के आगमन की सामान्य तारीख 1 जून मानी जाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इसमें बदलाव देखा जा रहा है- 2024 में: मानसून 30 मई को पहुंचा था। 2025 में: मानसून ने 24 मई को ही दस्तक दे दी थी। 2026 का अनुमान: इस बार भी यह 26 मई तक पहुंच सकता है। यह भी सामान्य से जल्दी है। अंडमान में कल पहुंचेगा मानसून IMD के मुताबिक मानसून की प्रगति के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हैं। 16 मई (शनिवार) के आसपास दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मानसून के आगे बढ़ने की पूरी संभावना है। वर्तमान में बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक 'वेल-मार्क्ड लो प्रेशर' एरिया बना हुआ है, जो मानसून की गति में सहायक हो रहा है। इस साल 'सामान्य से कम' रह सकती है बारिश जहां एक तरफ मानसून जल्दी आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग ने बारिश की मात्रा को लेकर चिंता भी जताई है। अप्रैल में जारी पहले लॉन्ग रेंज फोरकास्ट के मुताबिक इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। यह लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का लगभग 92 प्रतिशत रह सकती है। एल नीनो का खतरा मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई के आसपास 'एल नीनो' (El Nino) की स्थिति बन सकती है। एल नीनो का भारतीय मानसून पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इसे अक्सर कम बारिश या सूखे की स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह मानसून? भारत की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए मानसून की भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है। देश की कुल वार्षिक वर्षा का 70% से अधिक हिस्सा इसी सीजन (जून से सितंबर) में प्राप्त होता है। यह न केवल धान जैसी फसलों की सिंचाई के लिए जरूरी है, बल्कि देश भर के जलाशयों के जल स्तर को बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है। इसके अलावा, मानसून ही भीषण गर्मी और लू से राहत दिलाता है। कैसे तय होती है तारीख? IMD मानसून की तारीख तय करने के लिए कई वैज्ञानिक कारकों का विश्लेषण करता है। इसमें उत्तर-पश्चिम भारत का न्यूनतम तापमान, दक्षिण भारत में मानसून पूर्व की बारिश, हवाओं का पैटर्न और हिंद महासागर व दक्षिण चीन सागर के ऊपर बादलों की हलचल शामिल है। अब मौसम विभाग मई के अंत तक मानसून के भौगोलिक विस्तार (किस राज्य में कब पहुंचेगा) को लेकर विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगा। वहीं, दक्षिण भारत में भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।  मॉनसून से पहले बारिश मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून के आगमन से पहले ही दक्षिण भारत में झमाझम बरसात हो रही है। 15-19 मई के दौरान केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, आंतिरक कर्नाटक, लक्षद्वीप में 15-16 मई को छिअपुट से लेकर व्यापक स्तर पर गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। 

मॉनसून का इंतजार खत्म होने वाला है, जानिए कब बदलेगा मौसम का मिजाज

नई दिल्ली उत्तर भारत समेत देश के विभिन्न हिस्सों में कई दिनों तक बारिश होने के बाद एक बार फिर से भीषण गर्मी का दौर वापस लौट आया है। इसकी वजह से लोग मॉनसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अब यह इंतजार खत्म होने वाला है। दरअसल, मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून 26 मई को दस्तक दे सकता है। भारत में यह सबसे पहले केरल में आता है और इस बार 26 मई को यानी कि तय समय से पहले ही आने की संभावना है। हालांकि, मौसम विभाग ने इस तारीख में प्लस माइनस चार दिनों की संभावना जताई है। वहीं, अगले 24 घंटे में मॉनसून बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पहुंचने वाला है। मॉनसून के आने से पहले दक्षिण भारत में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पूरे हफ्ते के दौरान उत्तर पूर्वी भारत, अगले तीन चार दिनों के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। केरल के जरिए मॉनसून के एंट्री लेने के बाद अगले एक महीने के भीतर यह अन्य राज्यों की ओर बढ़ेगा। भारत के निचले भाग से ऊपरी भाग की ओर मॉनसून बढ़ता जाएगा। आमतौर पर मॉनसून केरल में एक जून को पहुंचता है, लेकिन इस बार चार दिन पहले आने की संभावना है, जोकि किसी खुशखबरी से कम नहीं है। उत्तर भारत के मौसम का हाल उत्तर भारत की बात करें तो 15 व 16 मई को जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में छिटपुट से हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं के चलने की संभावना है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में व पूर्वी राजस्थान में 15 और 16 मई को छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। इस दौरान आंधी की स्पीड 50 किमी प्रति घंटे रह सकती है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान में गरज के साथ आंधी आ सकती है। 15 मई को पश्चिमी राजस्थान में कुल इलाकों में धूलभरी आंधी चलने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो 15-17 मई के दौरान नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में छिटपुट से लेकर काफी व्यापक स्तर पर हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं के चलने की संभावना है। मॉनसून से पहले दक्षिण भारत में झमाझम बारिश इसके अलावा, मॉनसून के आगमन से पहले ही दक्षिण भारत में झमाझम बरसात हो रही है। 15-19 मई के दौरान केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, आंतिरक कर्नाटक, लक्षद्वीप में 15-16 मई को छिअपुट से लेकर व्यापक स्तर पर गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। 15-17 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, 16-17 मई को केरल, माहे, 15 मई को लक्षद्वीप में और 15-18 मई के दौरान दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में अलग-अलग जगहों पर भारी बरसात की संभावना है। साथ ही, 15 मई को केरल, माहे में कुछ जगहों पर बहुत भारी बरसात होगी। 15 मई को आंतरिक कर्नाटक में कुछ जगह पर ओले गिरेंगे।

तपती गर्मी के बीच खुशखबरी: आ रहा है मॉनसून, मौसम विभाग ने जताई बारिश की संभावना

नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सक्रिय हो गया है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मॉनसून की समय से पहले दस्तक के लिए बेहद अनुकूल बन रही हैं. बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया बन गया है, जो अगले कुछ घंटों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है. इस सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी. साथ ही इस सिस्टम से मॉनसून उत्तरी दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर भारत में आज आंधी-बारिश का अलर्ट यूपी-बिहार समेत पांच राज्यों में आज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. बिहार और उत्तराखंड के सभी जिलों में जबकि उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आंधी-तूफान और बारिश से जनजीवन प्रभावित है. इस बीच मौसम विभाग ने अगले दो दिन के लिए प्रदेश में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने वाला है. मौसम विभाग के अनुसार, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 14 से 17 मई के बीच भारी बारिश हो सकती है. वहीं, असम, मेघालय और मणिपुर सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई जगहों पर अच्छी बारिश की संभावना है. बंगाल की खाड़ी में बने इस सिस्टम का असर ओडिशा में भी साफ दिखाई देगा, जहां राज्य के कई हिस्सों में अगले 6 दिनों तक बारिश का अनुमान है. ओडिशा के 20 जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कब होगी मॉनसून की एंट्री? भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां तेजी से अनुकूल होती जा रही हैं. सप्ताह के अंत तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ इलाकों में मॉनसून की एंट्री हो सकती है. इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी का मिश्रित असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के उत्तरी तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है. इसके चलते अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका है। उत्तर भारत में मौसम में बदलाव DTE के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवाओं में चक्रवाती रूप में बना हुआ है. इसके प्रभाव से 12 से 15 मई तक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. गरज-चमक के साथ हवाओं की रफ्तार 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. पूर्वी राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने का भी अंदेशा है। मौसम विभाग ने खराब मौसम में खुले में न निकलने की सलाह दी है.  पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश व बर्फबारी जारी रह सकती है. कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है, जिससे फलों और सब्जियों की फसलों को नुकसान हो सकता है। पूर्वी भारत में बारिश और तेज हवाएं बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा में अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं का असर रहेगा. बिहार में ओलावृष्टि, झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. सिक्किम और उत्तर बंगाल के पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश (64.5-115.5 मिमी) का येलो अलर्ट जारी है। दक्षिण भारत में बारिश और हवाएं तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में भी बारिश व गरज-चमक का दौर रहेगा. कई जगहों पर 30-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कहां चलेगी लू और भीषण गर्मी? डाउन टू अर्थ की खबर के मुताबिक, एक तरफ जहां कई राज्यों में बारिश से राहत मिल रही है. वहीं, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. पश्चिम राजस्थान और गुजरात में 12 से 17 मई तक लू चलने की संभावना है. पूर्वी राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।

IMD का अनुमान: MP में मानसून कमजोर, इंदौर-ग्वालियर में सूखा और भोपाल में ज्यादा बारिश के संकेत

भोपाल  इस साल मानसून के कमजोर रहने की संभावना है। दो साल अच्छी बारिश होने के बाद इस साल सामान्य से कम बारिश होने के पूर्वानुमान ने चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि देश की लगभग आधी खेती मानसून पर निर्भर है। धान, दालों और तिलहन की बुवाई और पैदावार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।  भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने  अपना पहला आधिकारिक अनुमान जारी किया। इसमें कहा गया है कि इस वर्ष देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान होने वाली वर्षा सामान्य से कम (लगभग सेंटीमीटर) रहने की संभावना है, जो भारत में मौसमी बारिश का दीर्घकालिक औसत (एलपीए-1971-2020) 87 सेंटीमीटर का लगभग 92 फीसदी है। एलपीए के 90 से 95% के बीच की बारिश को सामान्य से कम माना जाता है। निजी एजेंसी स्काईमेट ने भी करीब 94% बारिश का अनुमान लगाया है। जून में मानसून सीजन शुरू हो जाएगा। 24 से 26 जून के बीच अंचल में मानसून की दस्तक हो जाती है। 2025 में मानसून समय से पहले आ गया था और अक्टूबर तक बारिश की थी। 2025 में हुई बारिश से अंचल के बाद व प्राकृतिक जल स्रोत भर गए थे। बारिश ने 90 साल का रिकॉर्ड भी तोड़कर नया बनाया था। 2026 के मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इस पूर्वानुमान के अनुसार कम बारिश होगी। खंड बर्षा की वजह से बारिश असंतुलत रहेगी। कहीं सूखा रहेगा और कही बारिश होगी। इस कारण प्रभावित हुआ है मानसून -प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में तापमान में बदलाव देखा जा रहा है। कमजोर ला–नीना जैसी स्थिति अब तटस्थ हो रही है और आगे चलकर एल नीनो जैसी स्थिति बनने की संभावना है। एल–नीनो के दौरान समुद्र का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आने वाली नमी कमजोर पड़ती है और मानसूनी बारिश घटती है। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने प्रेस वार्ता में कहा कि मात्रात्मक रूप से पूरे देश में मौसमी वर्षा एलपीए का 92 प्रतिशत' रहने की संभावना है, जिसमें 5 फीसदी की कमी- बेसी हो सकती है। पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की उम्मीद है। इनको छोड़कर देश के शेष हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा की उम्मीद है। सामान्य से कम वर्षा का एक कारण जून में प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति का उभरना हो सकता है। आमतौर पर जब भी अल नीनो की स्थिति बनती है तो भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है और सूखे की स्थिति बनने का खतरा रहता है। हालांकि, हिंद महासागर में एक सकारात्मक द्विध्रुव (आईओडी) की स्थिति बन रही है। डॉ. महापात्रा ने कहा कि सकारात्मक आईओडी में सामान्य से अधिक वर्षा होती है। इसलिए उम्मीद है कि यह मानसून के दूसरे भाग में अल नीनो के प्रभाव को कम करने में सहायक होगा। आईओडी हिंद महासागर के पश्चिमी (अफ्रीका तट) और पूर्वी (इंडोनेशिया तट) हिस्सों के बीच समुद्र की सतह के तापमान का एक अनियमित अंतर (दोहराव) है। भारत के लिए मानसूनी बारिश अहम भारत की कुल वर्षा का लगभग 75 प्रतिशत मानसून के मौसम में होता है, जो सिंचाई, पेयजल और जलविद्युत उत्पादन के लिए आवश्यक है। लगभग 64 प्रतिशत भारतीय कृषि पर निर्भर हैं, जो मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर है क्योंकि कुल बोए गए क्षेत्र का केवल लगभग 55 प्रतिशत ही सिंचाई के अंतर्गत आता है। देश के विभिन्न भागों में जलाशयों के भरने के लिए भी मानसूनी वर्षा महत्वपूर्ण है, जिनसे पेयजल की आपूर्ति होती है। कम बारिश से घटेगा उत्पादन पिछले दो साल से अच्छी बारिश होने से फसलों को काफी फायदा पहुंचा। नतीजा ये रहा है कि सोयाबीन का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 2 क्विंटल तक बढ़ गया था। वहीं, गेहूं-चने के लिए भी अच्छा पानी मिला था। इससे उत्पादन बढ़ गया। इस साल यदि कम बारिश होती है तो पेयजल के साथ सिंचाई के लिए भी दिक्कतें खड़ी हो सकती है। 2017 में हुई भी सबसे कम बारिश, 2019 में जमकर बरसा पिछले 10 साल के बारिश के आंकड़े पर नजर डालें तो साल 2017 में सबसे कम बारिश हुई थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37.3 इंच है। इसके मुकाबले औसत 29.9 इंच बारिश हुई थी। साल 2018 में 34.3 इंच बारिश दर्ज की गई थी। सबसे ज्यादा पानी वर्ष 2019 में 53 इंच हुई थी। वहीं, 2021 और 2023 में सामान्य से थोड़ी ही कम बारिश हुई थी। 2024 में 44.1 इंच पानी गिरा तो 2025 में आंकड़ा 45.2 इंच तक पहुंच गया। इस तरह कह कहते हैं कि पिछले 7 साल से प्रदेश में अच्छी बरसात हो रही है। अब इस साल मानसून से भी यही उम्मीदें हैं।। यह अपडेट साल 2025 का है। इसमें पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होने का अनुमान जताया था, जो सही निकला था, लेकिन साल 2026 में बारिश को लेकर स्थिति ठीक नहीं बताई जा रही है। यह पड़ेगा प्रभाव कम बारिश का धान, दालों और तिलहन की बुवाई और पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है। अगर फसल कम होती है, तो खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का डर है। ग्रामीण इलाकों में आय कम होने से बाजार में मांग कम हो सकती है, जिसका असर देश की जीडीपी विकास पर भी पड़ सकता है। गर्मी ने पकड़ा जोर….. उत्तर पश्चिम में उछला पारा, पूर्वोत्तर में बारिश जारी देश के मौसम में इन दिनों स्पष्ट विभाजन देखने को मिल रहा है। एक और उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई राज्यों में लू की स्थिति बनने लगी है, वहीं दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत में बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की घटनाएं जारी हैं। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा अपडेट के अनुसार, उत्तर भारत में तापमान में अगले कुछ दिनों में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। इस बीच सौराष्ट्र, कच्छ, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग दिनों में लू चलने का अनुमान है, जबकि गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर सकती है। मौसम विभाग ने किसानों को भी बढ़ती गर्मी के बीच फसलों की हल्की सिंचाई करने … Read more

मानसून के जाते ही छत्तीसगढ़ में बदला मौसम, ठंड की दस्तक शुरू

रायपुर दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के साथ ही छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर के अनुसार, शुक्रवार यानी 17 अक्टूबर को प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। आसमान में हल्के बादल जरूर रहेंगे, लेकिन बारिश के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग ने बताया कि गुरुवार, 16 अक्टूबर को दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरे देश से वापसी हो गई। इसके साथ ही पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय हो गया है और उसकी वर्षा गतिविधियां तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्रप्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल-माहे में शुरू हो गई हैं। प्रदेश में फिलहाल किसी बड़े मौसम तंत्र का प्रभाव नहीं है। हालांकि, उत्तरी झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में औसत समुद्र तल से लगभग 3.1 किलोमीटर ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, लेकिन इसका असर छत्तीसगढ़ पर नहीं पड़ेगा। गुरुवार को प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रहा। तापमान में विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है और आने वाले 24 घंटों में भी मौसम शुष्क रहेगा। दो दिन में हल्की बारिश के आसार रायपुर शहर के लिए स्थानीय पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार को आसमान आंशिक रूप से मेघमय रहेगा। अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। दो दिनों के बाद प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।