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मध्य प्रदेश में अगले 24 घंटे अहम, 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर से मानसून सक्रिय हो गया है। मानसून की सक्रियता की वजह से कई जिलों में झमाझम बारिश हो रही है। राजधानी भोपाल में भी सुबह से बादल छाए हुए हैं। साथ ही रात में बारिश भी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मध्य प्रदेश में एक मजबूत सिस्टम सक्रिय है। गुरुवार को मौसम विभाग ने प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 2 से 4 इंच तक बारिश यहां हो सकती है।मप्र में अब तक औसत 32.4 इंच बारिश हो चुकी है, जो मानसूनी कोटे की 87 प्रतिशत है। प्रदेश से एक मानसून ट्रफ के गुजरने के चलते बुधवार को भी बारिश का दौर रहा। कई जिलों में पानी गिरा। वहीं, गुरुवार को कुल 12 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। इन 12 जिलों में अलर्ट जारी मौसम विभाग ने गुरुवार को 12 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर शामिल हैं। यहां ढाई से साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। नर्मदापुरम में तवा डैम के 13 गेटों में से 7 गेट आज भी खुले हुए हैं। कल बुधवार सुबह 6:30 बजे से डैम के 5 गेट खोले गए थे। उसके बाद 2 और गेट खोल दिए गए। रतलाम में केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना सीजन में तीसरी बार बह निकला। मंदिर परिसर में पानी ही पानी हो गया। डिंडौरी और शिवपुरी में भी सुबह से बारिश हो रही है। इससे पहले बुधवार को रतलाम, दमोह में भारी बारिश हुई। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर-उज्जैन समेत 30 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। जिन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान बारिश होने की संभावना है, उनमें नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर जिले शामिल हैं। यहां ढाई से साढ़े 4 इंच पानी गिर सकता है। 21 अगस्त को भारी बारिश का यलो अलर्ट मौसम विभाग की मानें तो, 21 अगस्त को एमपी के नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर में भारी बारिश(Heavy Rain) का यलो अलर्ट जारी किया है। यहां अगले 24 घंटे में साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में गरज-चमक और हल्की बारिश का अलर्ट है। 22 और 23 अगस्त को भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के मुताबिक, 22 अगस्त को एमपी के नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, गुनी, शिवपुरी, श्योपुर, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में गरज-चमक और हल्की बारिशHeavy Rain) का यलो अलर्ट है। वहीं 23 अगस्त को ग्वालियर मुरैना, श्योपुर, भिंड, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश(Heavy Rain) का यलो अलर्ट जारी किया गया है। क्यों हो रही तेज बारिश? मौसम विभाग ने बताया कि इस समय मानसून ट्रफ बैतूल और मंडला से गुजर रही है. इसके अलावा, दो साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम का असर भी प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है. यही वजह है कि लगातार तेज बारिश का दौर जारी है. यहां हल्की बारिश की संभावना इसके अलावा, मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी हल्की बारिश होने की संभावना है। मध्य प्रदेश में अब तक औसत 32.4 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 87 प्रतिशत अधिक है। मौसम विभाग ने 22 और 23 अगस्त को भी कई जिलों में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। रतलाम में सबसे अधिक बारिश वहीं, बुधवार को रतलाम में 3 इंच बारिश हुई। प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश का दौर जारी रहा। रतलाम में 9 घंटे में लगभग 3 इंच बारिश हुई, जिससे सड़कों पर पानी भर गया। दमोह में ढाई इंच बारिश दर्ज की गई। इसी तरह इंदौर, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, भोपाल, नरसिंहपुर, उज्जैन, बैतूल, टीकमगढ़, छतरपुर, रायसेन, नर्मदापुरम, शाजापुर, आगर-मालवा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, रीवा, सागर, सतना, सीधी, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, राजगढ़, विदिशा, देवास में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार, बैतूल और मंडला से एक मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही, दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन भी बने हुए हैं। इस वजह से प्रदेश में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना जताई है। एमपी में झमाझम बारिश से हाल बेहाल, प्रदेश में अब तक 32.4 इंच बारिश दर्ज मौसम विभाग ने 22 और 23 अगस्त को भी प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है. राजधानी भोपाल में भी बुधवार को झमाझम बारिश देखने को मिली थी, जिससे निचली बस्तियों में पानी भर गया और जगह-जगह ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई. प्रदेश में अब तक 32.4 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है. यह सामान्य औसत से करीब 87% है. अगर आने वाले दिनों में इसी तरह बारिश होती रही तो जल्दी ही प्रदेश का बारिश का पूरा कोटा पूरा हो जाएगा.

लगघाटी में बादल फटने से दुकानों और पुल को नुकसान, कुल्लू-बंजार के स्कूल बंद

कुल्लू.  हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की लगघाटी के कनौण की ऊंची पहाड़ी पर रात ढाई बजे बादल फटने के बाद फ्लेश फ्लड आया है. बादल फटने से आई बाढ़ की चपेट में आकर कनौण में तीन दुकानें बह गईं और बाढ़ से लोगों की ज़मीनों, बाग–बगीचों और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. उधर, सरवरी खड्ड में जलस्तर में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. बाढ़ के कारण एक पुल क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है. एक युवक ने बताया कि कनौण गांव में बूबू नाले पर बना पुल बह गया और तीन दुकानों का नामोनिशान मिट गया. युवक ने बताया कि वह पूरी रात सोए नहीं हैं. युवक ने बताया कि गांव का संपर्क कट गया है और बादल फटने के बाद काफी नुकसान हुआ है और सड़क पर बड़े बड़े पत्थर आ गए थे. इसी तरह आपदा की मार झेल रहे मंडी जिले की पद्दर उपमण्डल की चौहारघाटी में बीती रात और आज सुबह हुई भारी बारिश ने तबाही मचा दी। घाटी की दो पंचायतों शिल्हबुधाणी और तरस्वाण में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। यहां 6 फुट ब्रिज, एक वाहन, एक दुकान और सैकड़ों बीघा निजी भूमि तेज बहाव में बह गई। गनीमत रही कि किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ है। ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने बताया कि भारी बारिश से नाले उफान पर आ गए थे और लोगों ने सुरक्षित स्थानों में शरण लेकर अपनी जान बचाई। सैकड़ों बीघा भूमि बह जाने से किसानों और बागवानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। एसडीएम पधर सुरजीत सिंह और लोक निर्माण विभाग सहित राजस्व विभाग की टीमें मौके पर भेज दी गई हैं। हालात को देखते हुए पधर उपमंडल के शिक्षण संस्थानों में आज अवकाश घोषित कर दिया गया है। कुल्लू जिले की लगघाटी में मंगलवार सुबह बादल फटने से दो दुकानों और एक बाइक को नुकसान पहुंचा है। सरवरी क्षेत्र में एक पैदल पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं। हालात को देखते हुए कुल्लू और बंजार उपमंडल के सभी शिक्षण संस्थान आज बंद रखे गए हैं। कुल्लू जिले में भारी बारिश के कारण ब्यास नदी पर बने भूतनाथ पुल के पास सड़क बह गई। स्थानीय निवासी, ईश्वर दास शर्मा, ने कहा, "नदी में उफान आया हुआ है, और इसने नदी के किनारे के हिस्सों को नुकसान पहुंचाया है। मैं सरकार से इस ओर ध्यान देने का आग्रह करता हूं।" भारी बारिश के बीच कांगड़ा जिले में पौंग डैम से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। मंगलवार सुबह 8 बजे तक डैम का जलस्तर 1383.02 फुट दर्ज किया गया। बीबीएमबी प्रशासन के अनुसार सभी छह टर्बाइनें चालू हैं, जिनसे 17,456 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जबकि स्पिलवे गेट्स से 42,379 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। इस तरह कुल 59,835 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बुधवार से यह मात्रा बढ़ाकर 75 हजार क्यूसेक कर दी जाएगी। निचले क्षेत्रों के प्रशासन को अलर्ट कर दिया गया है और लोगों से अपील की गई है कि वे नदी किनारों की ओर न जाएं। मौसम विभाग ने राज्य में 25 अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। लगातार हो रही वर्षा से भूस्खलन, बादल फटने और नदियों-नालों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने जनता से सतर्क रहने और किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने की अपील की है। सरवरी में भी नुकसान की खबर अहम बात है कि कुल्लू के पास सरवरी में भी फ्लेश फ्लड से खासा नुकसान हुआ है और सड़क का एक हिस्सा टूट गया है. वहीं,  भूतनाथ मंदिर के पास बस स्टैंड को जोड़ने वाली सड़क पर गहरी दरारें पड़ गई हैं और सुरक्षा के लिए बनाया गया डंगा बह गया है. इसके अलावा, हनुमानी बाग को जोड़ने वाला पैदल पुल भी टूटने की कगार पर है, जिससे स्थानीय लोगों की आवाजाही पर संकट खड़ा हो गया है.प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से परहेज करने और सतर्क रहने की अपील की है. कुल्लू जिला प्रशासन ने बीती रात से हो रही बारिश के चलते बंजार और कुल्लू सदर में स्कूल और कॉलेजों को बंद करने के आदेश दिए हैं. डीसी कुल्लू, एस. रवीश (IAS) ने आदेश जारी करते हुए बताया कि क्लाउडबर्स्ट, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की वजह से जगह-जगह सड़कों के बाधित होने, पुल बह जाने और नुकसान की सूचनाएं मिल रही हैं. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 19 अगस्त 2025 के लिए कुल्लू जिला में येलो अलर्ट जारी किया है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने आदेश दिया है कि कुल्लू और बंजार उपमंडल के सभी शैक्षणिक संस्थान, जिनमें स्कूल, कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग व फार्मेसी कॉलेज (सरकारी व निजी), आंगनबाड़ी केंद्र और DIET शामिल हैं, 19 अगस्त 2025 को बंद रहेंगे. प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को छात्रों और स्टाफ की सुरक्षा व कल्याण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. अब तक प्रदेश में 268 लोगों की मौत मॉनसून सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और आपदाओं ने अब तक भारी तबाही मचाई है. राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जून से अब तक 268 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 37 लोग अभी भी लापता हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि 336 लोग घायल हुए, 2540 घर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए, 2274 पशुशालाएं और 362 दुकानें जमींदोज हो गईं. इसके अलावा, 1630 मवेशियों और 25,755 पोल्ट्री बर्ड्स की मौत हो चुकी है. बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश में 2 राष्ट्रीय राजमार्ग और 387 सड़कें बंद हैं. वहीं, 760 ट्रांसफार्मर ठप होने से विद्युत आपूर्ति बाधित है और 186 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं. राज्य को अब तक इस आपदा से 2194 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है.

एमपी में मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, 76% बारिश पूरी – इंदौर सबसे पीछे, ग्वालियर आगे

भोपाल  मध्य प्रदेश में एक बार फिर से बारिश का दौर शुरू हो गया है। राज्य के उत्तरी हिस्से के ग्वालियर-छतरपुर समेत आठ जिलों में सोमवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में रविवार को बारिश भी हुई। हालांकि राज्य में बारिश का मजबूत तंत्र नहीं दिखाई दे रहा है, जिसके चलते बीते कुछ दिनों से राज्य में हल्की-फुल्की बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्से के ऊपर से एक ट्रफ और साइक्लोनिक सकुर्लेशन की एक्टिविटी जारी है। इसका असर राज्य में भी देखने को मिल रहा है। इस वजह से सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में भारी बारिश का अलर्ट है। मौसम विभाग द्वारा कल जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाओं के चलने की भी आशंका जताई गई है। बीते दिनों की बात करें को गुना, नर्मदापुरम, छतरपुर, रीवा, टीकमगढ़ , सागर, सतना, सीधी, उमरिया समेत कई जिलों में बारिश हुई थी। इससे पहले की बात करें तो बीते सप्ताह तो राज्य में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। ऐसी स्थिति वाले इलाकों में राज्य का पूर्वी हिस्सा- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर शामिल था, जहां मॉनसून झमझमाकर बरसा था। इसके चलते लोगों को कई मुश्किलों का भी सामना करना पड़ा था। बीते दिन सबसे ज्यादा तापमान इन हिस्सों में दर्ज किया गया। ग्वालियर में 27 डिग्री, दतिया में 26.4, पृथ्वीपुर में 26.3, मुरैना में 26.2, श्योपुर में 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं अगर कम तापमान वाले इलाकों की बात करें तो, नरसिंहपुर में 19, खरगौन में 20, राजगढ़ में 20.6 और खंडवा में 21 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया है। मध्यप्रदेश में कोटे की 76% बारिश मध्यप्रदेश के 9 जिले-ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और मुरैना में बारिश का कोटा पूरा हो गया है। सबसे ज्यादा पानी गुना में 45.8 इंच गिरा है। भोपाल, जबलपुर की तस्वीर भी बेहतर है, लेकिन इंदौर फिसड्‌डी है। प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 28.4 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 19 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 9.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मानसून सीजन (1 जून) से जोड़े तो दो महीने बीत चुके हैं। इस दौरान प्रदेश में सामान्य की 76 प्रतिशत बारिश हो गई है। मानसून को अभी करीब दो महीने बचे हैं। ऐसे में उम्मीद है कि अगस्त में ही बारिश का कोटा फुल हो जाएगा। बता दें कि मौसम विभाग ने अबकी बार सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हो रही है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। इस वजह से 9 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर गया। इनमें ग्वालियर-चंबल संभाग के 8 में से 6 जिलों में कोटा पूरा हो चुका है। 3 जिले सागर और भोपाल संभाग के है। दूसरी ओर, इंदौर और उज्जैन संभाग में सिस्टम की एक्टिविटी कम देखने को मिलीं।  पिछले सप्ताह बने थे बाढ़ के हालात पिछले सप्ताह प्रदेश में बाढ़ के हालात बने। खासकर पूर्वी हिस्से यानी- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में मानसून जमकर मेहरबान रहा। रायसेन में बेतवा ने विकराल रूप लिया। खेत-मंदिर और पुल डूब गए। दो दिन से बारिश थमी रही, लेकिन नर्मदा नदी उफान पर है। वहीं, डैम ओवरफ्लो है। इनके गेट खोले गए। एमपी में अब तक 28 इंच से ज्यादा बारिश मध्यप्रदेश के ग्वालियर, राजगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मुरैना और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो गया है। यहां सामान्य से 50% तक ज्यादा पानी गिर चुका है। गुना, टीकमगढ़-निवाड़ी में सबसे ज्यादा बारिश हुई है, जबकि इंदौर में सबसे कम पानी गिरा है। उज्जैन संभाग की तस्वीर भी ठीक नहीं है। वहीं, भोपाल और जबलपुर में सीजन की आधी बारिश हुई है। प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 28.4 इंच बारिश हो चुकी है, जबकि 19 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 9.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मानसून सीजन (1 जून) से जोड़े को दो महीने बीत चुके हैं। इस दौरान प्रदेश में सामान्य की 76 प्रतिशत बारिश हो गई है। गुना में सबसे ज्यादा 42 इंच पानी गिरा इस बार सबसे ज्यादा पानी गुना में गिरा है। यहां 45.8 इंच बारिश हो चुकी है। मंडला में 44 इंच, टीकमगढ़ में करीब 44 इंच निवाड़ी में 43 इंच और अशोकनगर में 42 इंच के करीब बारिश हो चुकी है। इन जिलों की अच्छी-बुरी स्थिति विदिशा, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, पन्ना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम और उमरिया में 30 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। इंदौर में सबसे कम 11 इंच, बुरहानपुर में 11.1 इंच, बड़वानी में 11.5 इंच, खरगोन में 11.8 इंच ओर खंडवा में 12.8 इंच पानी ही गिरा है। ऐसे समझें बारिश का गणित… 40 इंच से ज्यादा बारिश वाले जिले     मंडला, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और रायसेन। 30 इंच से ज्यादा बारिश वाले जिले     ग्वालियर, विदिशा, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, डिंडौरी, सागर, पन्ना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम और उमरिया। 20 से 30 इंच तक बारिश वाले जिले     भोपाल, सीहोर, झाबुआ, अलीराजपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, दतिया, दमोह, शाजापुर, नीमच, भिंड, मुरैना, रीवा, सतना, मैहर, मऊगंज, हरदा, बैतूल, शहडोल और अनूपपुर। 10 से 19 इंच बारिश वाले जिले     इंदौर, धार, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, देवास, शाजापुर, मंदसौर, आगर-मालवा।

मॉनसूनी त्रासदी से बेहाल MP: जनहानि बढ़ी, राहत शिविरों में गुज़र रहा है लोगों का जीवन

भोपाल मध्य प्रदेश में भारी बारिश का दौर फिलहाल थमा हुआ है लेकिन बीते करीब 40 दिनों से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हुई तेज़ बारिश के डराने वाले आंकड़े सामने आए हैं. प्रदेश सरकार ने बताया है कि मॉनसून के इस सीज़न में अबतक 252 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 432 पशु भी बारिश के मौसम में मारे जा चुके हैं जबकि 3600 से ज्यादा लोगों को अब तक रेस्क्यू किया जा चुका है. दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बीते दिनों प्रदेश में हुई अतिवृष्टि और बाढ़ की वजह से बने हालातों और राहत एवं बचाव के संबंध में जिला कलेक्टरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक की थी, जिसमें मुख्यमंत्री को बताया गया कि प्रदेश के अतिवृष्टि वाले जिलों में अब तक 3628 नागरिकों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया गया है. फिलहाल 53 राहत शिविरों में 3065 प्रभावित लोगों को रखकर उन्हें सभी प्रकार की जरूरी मदद जैसे खाना-पीना, दवाइयां, कपड़े आदि मुहैया कराए जा रहे हैं. अब तक 28.49 करोड़ रुपए राहत राशि वितरित बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अफसरों को निर्देश दिए कि अतिवृष्टि या बाढ़ प्रभावितों को कोई भी कठिनाई न आने पाये और जल्द ही सर्वे पूरा कर पीड़ितों को उनके नुकसान की समुचित भरपाई की जाए. बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अतिवृष्टि वाले जिलों के कलेक्टर द्वारा अब तक 28.49 करोड़ रुपए राहत राशि वितरित की जा चुकी है. शासन द्वारा लगभग 3600 करोड़ रुपए की व्यवस्था राहत मदद में की गई है. सीएम मोहन यादव ने बताया कि भारी बारिश को देखते हुए NDRF की टीमों को भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और धार में तैनात किया गया है जबकि SDRF को प्रदेश भर में संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया. 252 लोगों की हुई मौत प्रदेश सरकार के मुताबिक, मॉनसून के सीजन में अबतक 252 लोगों की मौत हुई है. इनमें से भारी बारिश से 47, नदी-नाले में दुर्घटनावश डूबने से 132, आकाशीय बिजली से 60 और दीवार/मकान/पेड़ गिरने से 13 लोगों की मृत्यु दर्ज हुई है. इसके अलावा साथ ही 432 पशु हानि और 1200 मुर्गियां की मृत्यु हुई है. प्रदेश में तैनात बचाव और राहत दलों द्वारा 432 रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए गए हैं, जिसमें 3628 नागरिकों और 94 मवेशियों को जीवित बचाया गया है. इसके अलावा बारिश से 128 मकानों को पूर्ण और 2333 मकानों को आंशिक क्षति हुई है. सामान्य से 59 फीसदी ज्यादा बारिश एमपी सरकार के मुताबिक, अब तक प्रदेश में 711.3 MM वर्षा हो चुकी है, जो सामान्य से 59 प्रतिशत अधिक है. प्रदेश के कुल 40 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है. इस अतिवृष्टि के कारण प्रदेश के प्रभावित लगभग 254 ग्रामीण सड़कों क्षतिग्रस्त हुई हैं. 

मानसून देगा रफ्तार पकड़, 23 जुलाई से नए सिस्टम के चलते शुरू होगा तेज़ बारिश का सिलसिला

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून के कमजोर पड़ते ही बारिश का दौर थम गया है हालांकि अगले 48 घंटे बाद फिर नए वेदर सिस्टम के सक्रिय होने से तेज बारिश का दौर देखने को मिलेगा। फिलहाल 21 और 22 जुलाई को कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है।जुलाई अंत में पूर्वी और दक्षिणी हिस्से में तेज बारिश होने का अनुमान है। आज सोमवार को जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है।बता दे कि रविवार को मलाजखंड में सात, खजुराहो में दो, उज्जैन में एक मिलीमीटर बारिश हुई।दिन का सबसे अधिक 35 डिग्री सेल्सियस तापमान खजुराहो में दर्ज किया गया। नदियों में उफान के बाद क्या है प्रशासन की तैयारी? भारी बारिश के चलते प्रदेश के कई हिस्सों में नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग ने संवेदनशील गांवों को अलर्ट पर रखा है। राहत दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल में कैसा है मौसम का हाल? भोपाल, इंदौर, उज्जैन जैसे शहरों में दिन में हल्की धूप और उमस बनी रही, लेकिन शाम होते-होते कई जगहों पर बादल छा गए और बौछारें शुरू हो गईं। वहीं, खजुराहो में सबसे ज्यादा 35 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। 23 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग की मानें तो 23 जुलाई से एक बार फिर मूसलधार बारिश की शुरुआत होगी। नागरिकों को चाहिए कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखें और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरतें। मध्य प्रदेश मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान वर्तमान में मानसून द्रोणिका गहरे कम दबाव के क्षेत्र से होकर चुरू, आयानगर (दिल्ली), शाहजहांपुर, लखनऊ, पटना, बांकुरा, दीघा से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। एक गहरा कम दबाव का क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान और उससे लगे पाकिस्तान पर बना हुआ है जिसके पश्चिम दिशा में कम दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित होने के आसार हैं। एक पश्चिमी विक्षोभ जम्मू के आसपास द्रोणिका के रूप में सक्रिय है। 24 जुलाई को उत्तरी बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने से फिर मानसून एक्टिव होगा और झमाझम बारिश का दौर देखने को मिलेगा। अबतक कहां कितनी हुई है वर्षा प्रदेश में अब तक औसत 20.5 इंच बारिश हो चुकी है। इस सीजन में एक जून से लेकर 20 जुलाई की सुबह साढ़े आठ बजे तक प्रदेश में कुल 521.9 मिमी. बारिश हो चुकी है, जो सामान्य वर्षा (323.2 मिमी.) की तुलना में 61 प्रतिशत अधिक है। 3 जिले निवाड़ी, टीकमगढ़ और श्योपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इन जिलों में सामान्य से 15% तक ज्यादा पानी गिर चुका है।इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, बुरहानपुर और आगर-मालवा में 10 इंच से भी कम पानी गिरा है। इन जिलों के रास्ते वापसी करेगा मानसून मौसम विज्ञानियों के अनुसार, 23 जुलाई से पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में एक नया मानसूनी द्रोणिका और अवदाब सक्रिय हो सकता है, जिसके कारण भारी बारिश (heavy rainfall) की वापसी संभव है। यह सिस्टम धीरे-धीरे पूरे पूर्वी भागों को प्रभावित कर सकता है। शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज जैसे जिलों में भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। वहीं, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से राज्य के अन्य हिस्सों में भी अच्छी बारिश की संभावनाएं बनेंगी। कहां हुई बारिश, कितने मिमी दर्ज पश्चिमी मध्य प्रदेश के मंदसौर ज़िले के धुंधरका में पिछले 24 घंटों में सबसे ज़्यादा 19 मिमी बारिश दर्ज की गई। परसवाड़ा (बालाघाट) में 16 मिमी, मलाजखंड (बालाघाट) में 14.4 मिमी, कायमपुर (मंदसौर) में 13 मिमी, सीतामऊ (मंदसौर) में 12.4 मिमी और सौसर (छिंदवाड़ा) में 10 मिमी बारिश दर्ज की गई।

डैम से पानी छोड़े जाने के बाद अलर्ट, रीवा-डिंडौरी समेत कई जिलों में बंद हुए स्कूल

छतरपुर / टीकमगढ़ मानसून ट्रफ और डिप्रेशन की वजह से मध्यप्रदेश के कई जिलों में एक बार फिर बाढ़ के हालात हैं। शुक्रवार को ग्वालियर-चंबल के 7 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट है। नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, अशोकनगर, विदिशा, सागर, दमोह, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना में बाढ़ के हालात।  इससे पहले गुरुवार को सतना, डिंडौरी, मऊगंज समेत 26 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। नदी-नाले उफान पर आ गए। इस वजह से कॉलेज की परीक्षा कैंसिल करनी पड़ी। वहीं, भोपाल में सड़क, शहडोल में सीवर लाइन की खुदाई में मिट्‌टी धंस गई। इस वजह से दो मजदूर दब गए। उनकी मौत हो गई।     छतरपुर के रनगुवां डैम के सभी 12 और कुटनी बांध के 7 गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।     छतरपुर में तेज बारिश की वजह से अलग-अलग गांवों में दो मकान ढह गए।  पहली घटना में बेटी की मौत हो गई, मां घायल है। दूसरी घटना में युवक की जान चली गई।     धामची गांव में उर्मिल नदी का पानी घुसने से 200 परिवार फंस गए थे।  एसडीएम अखिल राठौर ने बताया कि टीमें भेजकर 15 लोगों को रेस्क्यू कराया है।     बानसूजारा बांध का जलस्तर बढ़ गया। गुरुवार रात करीब 11 बजे डैम के 3 गेट खोल दिए गए। 180 क्यूमैक पानी छोड़ा गया।     टीकमगढ़ में पूनौल नाला उफान पर है। पुल के ऊपर से 3 फीट तक पानी बह रहा है। झांसी हाईवे पर ट्रैफिक बंद करा दिया गया है।     टीकमगढ़, रीवा, सतना, डिंडौरी और मऊगंज में शुक्रवार को स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।

आज मध्यप्रदेश में 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट, निवाड़ी में कोटा फुल

भोपाल  मध्यप्रदेश में तेज बारिश का दौर मंगलवार को भी जारी रहा। ग्वालियर, भोपाल, इंदौर समेत 25 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। सबसे ज्यादा ग्वालियर में 2.3 इंच पानी गिर गया। पिछले एक सप्ताह से जबरदस्त बारिश की वजह से नदी-नाले उफान पर हैं।  इससे पहले मंगलवार को ग्वालियर में 9 घंटे में ही 2.3 इंच बारिश हो गई। खरगोन में डेढ़ इंच, सीधी में 1 इंच और उमरिया में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा। शाजापुर और रायसेन में भी तेज बारिश का दौर चला। भोपाल, दतिया, इंदौर, नर्मदापुरम, श्योपुर, शिवपुरी, मंडला, सागर, सिवनी, बालाघाट, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर, आगर-मालवा, देवास समेत कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। हालांकि, बीते 24 घंटे में बारिश या वर्षाजनित हादसों में किसी मौत की खबर नहीं है। इस मानसूनी सीजन में मध्यप्रदेश में औसत 18.2 इंच बारिश हो गई है, जो कोटे से आधी है। अब तक की औसत बारिश से यह 72% यानी 5.6 इंच ज्यादा है। अब तक 10.6 इंच पानी गिरता है। निवाड़ी ऐसा जिला है, जहां एक महीने में ही बारिश का आंकड़ा 103% यानी 31.46 इंच पहुंच गया है। इस जिले की सामान्य बारिश साढ़े 30 इंच है। इंदौर और उज्जैन संभाग के जिले पिछड़े हुए हैं। 5 बड़े शहरों में भोपाल में 14.5 इंच, इंदौर में 7 इंच, ग्वालियर में 18.5 इंच, जबलपुर में 21.6 इंच और उज्जैन में 8 इंच पानी गिरा है। वहीं, टीकमगढ़ में 91% (33 इंच), छतरपुर में 75% (28 इंच), शिवपुरी में 82% (25.3 इंच) और मंडला में 75% (35 इंच) बारिश हो चुकी है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से की बेहतर स्थिति मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में बारिश की स्थिति बेहतर है। इन संभागों के जिलों में औसत से 86 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर चुका है। दूसरी ओर, पश्चिमी हिस्से जैसे- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम में औसत से 57 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है। इनमें इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। कुल 15 जिलों में से 10 ऐसे हैं, जहां बारिश का आंकड़ा 10 इंच तक भी नहीं पहुंचा है।  MP में अगले 96 घंटे कैसा रहेगा मौसम, IMD ने जारी की भारी बारिश की चेतावनी  प्रदेश में मानसून की सक्रियता से कई जिलों में भारी बारिश हुई है, जिससे औसत बारिश का आंकड़ा 72% तक बढ़ गया है। निवाड़ी जिले में सामान्य से 103% अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि इंदौर और उज्जैन संभाग में कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। चार दिन तक तेज बारिश का अलर्ट मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी एक मानसून ट्रफ प्रदेश के ऊपरी हिस्से से गुजर रही है। इसके चलते बुधवार से अति भारी और भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। प्रदेश के नजदीक लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) एक्टिव होने से फिर से तेज बारिश का दौर शुरू होगा। अगले 4 दिन तक तेज बारिश का अलर्ट है। 25 से ज्यादा जिलों में हुई बारिश पिछले एक सप्ताह से हो रही जबरदस्त बारिश के कारण राज्य के नदी-नाले उफान पर हैं। ग्वालियर, भोपाल, इंदौर समेत 25 से ज्यादा जिलों में बारिश दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा बारिश ग्वालियर में 2.3 इंच दर्ज की गई। खरगोन में डेढ़ इंच, सीधी में 1 इंच और उमरिया में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा। शाजापुर और रायसेन में भी तेज बारिश का दौर चला। इन जिलों में दर्ज हुई हल्की बारिश भोपाल, दतिया, इंदौर, नर्मदापुरम, श्योपुर, शिवपुरी, मंडला, सागर, सिवनी, बालाघाट, शाजापुर, राजगढ़, सीहोर, आगर-मालवा, देवास समेत कई जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। इस मानसूनी सीजन में मध्यप्रदेश में औसत 18.2 इंच बारिश हो गई है। अब तक की औसत बारिश से यह 72% यानी 5.6 इंच ज्यादा है। निवाड़ी सबसे आगे, इंदौर-उज्जैन संभाग पीछे निवाड़ी ऐसा जिला है, जहां एक महीने में ही बारिश का आंकड़ा 103% यानी 31.46 इंच पहुंच गया है। इस जिले की सामान्य बारिश साढ़े 30 इंच है। इंदौर और उज्जैन संभाग के जिले पिछड़े हुए हैं। 5 बड़े शहरों में भोपाल में 14.5 इंच, इंदौर में 7 इंच, ग्वालियर में 18.5 इंच, जबलपुर में 21.6 इंच और उज्जैन में 8 इंच पानी गिरा है। टीकमगढ़ में 91% (33 इंच), छतरपुर में 75% (28 इंच), शिवपुरी में 82% (25.3 इंच) और मंडला में 75% (35 इंच) बारिश हो चुकी है। पूर्वी हिस्से में ज्यादा बारिश मध्यप्रदेश के पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में बारिश की स्थिति बेहतर है। इन संभागों के जिलों में औसत से 86 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर चुका है।