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मध्य प्रदेश से जल्द विदा लेगा मानसून, 25-26 को झमाझम बारिश का अनुमान, आज कुछ जिलों में फुहारें

भोपाल   मध्यप्रदेश में इन दिनों मौसम का मिजाज बार-बार रंगत बदल रहा है। कहीं गरज चमक के साथ झमाझम बारिश का दौर जारी है तो कहीं लोग उमस से बेहाल नजर आए। कई राज्यों से मानसून की विदाई हो चुकी है लेकिन एमपी में अभी भी मानसून बरस रहा है, जो अक्टूबर के पहले सप्ताह तक जारी रह सकता है। विदाई से पहले प्रदेश में मानसून का तांडव देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक, एमपी में अगले 96 घंटे यानि 26-27 सितंबर तक भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग की माने तो 25 सितंबर के आसपास मौसम में बदलाव हो सकता है। वहीं आज भी प्रदेश के कई हिस्सों में लोकल सिस्टम के कारण बारिश(Heavy Rain) का अलर्ट जारी किया गया है। दशहरे के आसपास अच्छी बारिश की संभावना मौसम विशेषज्ञ एके शुक्ला ने बताया कि अभी मौसम का मिजाज इसी तरह रहने की संभावना, अभी एक दो दिन धूप, उमस रहेगी. इसके बाद गरज चमक के साथ बारिश(Heavy Rain), बौछारों की स्थिति बनती रहेगी। धूप, छांव, बादलों की स्थिति रहेगी। दशहरे के आसपास अच्छी बारिश हो सकती है। शहर से मानसून की विदाई अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने के आसार है। भोपाल का मौसम अभी राजधानी भोपाल के मौसम का मिजाज भी इसी तरह रहने की संभावना है, वहीं 25 के आसपास मौसम में फिर बदलाव हो सकता है। ऐसे में विदाई के पहले एक बार फिर मौसम रंगत बदल सकता है। इस बार सितंबर में शहर के अलग-अलग हिस्सों में बारिश(Heavy Rain) का नजारा अलग दिखाई दिया है। ऐसे में शहर में खंडवृष्टि जैसी स्थिति दिखाई दी है। एक सितंबर से ही अगर बात की जाए तो सबसे ज्यादा बारिश अरेरा हिल्स में हुई है, जबकि बैरागढ़ में सबसे कम बारिश हुई है। 1 जून से अब तक की बारिश की स्थिति देखी जाए तो बैरागढ़ के मुकाबले अरेरा हिल्स में 10 इस इंच ज्यादा बारिश हुई है। प्रदेश में मानसूनी बारिश की स्थिति इस मानसूनी सीजन में अब तक मध्य प्रदेश में औसत से 20% अधिक बारिश हुई है। 16 जून से अब तक प्रदेश में कुल 43.9 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि सीजन का सामान्य औसत 37 इंच है। इससे प्रदेश का मानसूनी कोटा 118% पूरा हो चुका है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 16% और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 24% अधिक बारिश हुई है। पूर्वी हिस्सों में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई, जिससे कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। वहीं, पश्चिमी हिस्सों में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में भी सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा बारिश हुई है। जिलेवार बारिश का हाल सबसे अधिक बारिश वाले जिले: गुना (65.4 इंच), रायसेन (61.1 इंच), मंडला (60 इंच), श्योपुर (56.6 इंच), अशोकनगर (56 इंच) सबसे कम बारिश वाले जिले: खरगोन (26.8 इंच), शाजापुर (28.6 इंच), खंडवा (28.8 इंच), बड़वानी (29.8 इंच), धार (31.9 इंच) भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, नर्मदापुरम समेत कई जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इंदौर और उज्जैन संभाग में शुरुआत में कम बारिश हुई थी, लेकिन सितंबर में हुई तेज बारिश से अधिकांश जिलों में सामान्य कोटा पूरा हो गया। आने वाले दिनों में कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार, 24 सितंबर को प्रदेश के सभी जिलों में हल्की बारिश और गरज-चमक का अलर्ट है। 25-26 सितंबर को नया वेदर सिस्टम एक्टिव होगा, जिससे प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश हो सकती है। विशेष रूप से बैतूल, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी में भारी बारिश का अनुमान है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि, बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बन सकता है, जो 25-26 सितंबर के आसपास सक्रिय होगा। इससे प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी संभव है और कई जिलों में दो से तीन दिन तक तेज बारिश हो सकती है। मानसून की विदाई और तापमान मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई अक्टूबर के पहले सप्ताह तक होने की संभावना है। हालांकि, बारिश की कमी के कारण प्रदेश में तापमान में वृद्धि दर्ज की गई है। सितंबर माह में पहली बार अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस पार कर गया। भारी बारिश और मानसून की विदाई के बीच प्रदेश के किसानों को खेतों में काम करने का मौका मिलेगा, लेकिन गर्मी और उमस बढ़ने से लोगों को असुविधा भी हो सकती है। सितंबर में शहर में कहां कितनी बारिश अरेरा हिल्स में 266 मिमी नवीबाग में 208.6 मिमी कोलार में 205.2 मिमी बैरागढ़ में 169.2 मिमी

मध्य प्रदेश में मानसून एक्टिव! भोपाल से इंदौर तक आज होगी बारिश, चार दिन तक बना रहेगा मौसम का मिजाज

भोपाल  मौसम विज्ञानियों के मुताबिक शुक्रवार को भोपाल, नर्मदापुरम, जबलपुर, इंदौर संभाग के जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक वर्तमान में पूर्वी बिहार और उसके आसपास हवा के ऊपरी भाग में एक चक्रवात बना हुआ है। मराठवाड़ा पर भी हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। इस चक्रवात से लेकर दक्षिणी उत्तर प्रदेश तक एक द्रोणिका बनी हुई है।अलग-अलग स्थानों पर बनी चार मौसम प्रणालियों के असर से बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर से नमी आ रही है। इस वजह से प्रदेश में वर्षा हो रही है। अगले 4 दिन तक हल्की बरसात का दौर जारी रहने की संभावना है। पिछले 24 घंटे के दौरान 25 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई।  एक बार फिर शुरू होगा तेज बारिश का दौर मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मानसून की विदाई के दौरान भी पूरे प्रदेश में तेज बारिश का एक और दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल 4 दिन तक तेज बारिश का अलर्ट नहीं है। हालांकि, गुरुवार को दो टर्फ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन की एक्टिविटी प्रदेश में रही। इस वजह से कुछ जिलों में बारिश का दौर चला। शुक्रवार को सिस्टम कमजोर पड़ सकता है। जिससे तेज बारिश का दौर थम सकता है। इधर मानसून की वापसी भी होने लगी है। आधे राजस्थान से मानसून लौट चुका है। वहीं, गुजरात, पंजाब और हरियाणा के कई जिलों से भी मानसून लौटा है। गुरुवार को भी कई जिलों से मानसून लौट गया। यदि वापसी ही यही रफ्तार रही तो एमपी के भी कई जिलों में ऐसी स्थिति बन सकती है। मध्य प्रदेश में अब तक 43.2 इंच बारिश दर्ज मध्यप्रदेश में अब तक औसत 43.2 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 35.8 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। इस सीजन में इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। यहां सबसे कम पानी गिरा है। सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन और शाजापुर शामिल हैं। 

मध्यप्रदेश में बदलेगा मौसम का मिजाज, 24 घंटे का भारी बारिश अलर्ट, कई जिलों में चेतावनी

 भोपाल  मध्य प्रदेश में गरज-चमक के साथ छिटपुट बारिश का दौर जारी है। सोमवार शाम साढ़े पांच बजे तक कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। रायसेन में सबसे ज्यादा 51 मिमी, सतना में 32 मिमी, नर्मदापुरम में 20 मिमी, सिवनी में 18 मिमी और पचमढ़ी में 31 मिमी वर्षा हुई। इसके अलावा 17 अन्य स्थानों पर भी बारिश दर्ज की गई। भोपाल में बारिश राजधानी भोपाल में दिनभर बादल छाए रहे और शाम को तेज बरसात हुई। मौसम विभाग का कहना है कि मंगलवार को पूरे प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वर्तमान में उत्तरी तेलंगाना और पूर्वी बिहार की ओर हवा के ऊपरी हिस्सों में चक्रवात सक्रिय है, जो 3.1 से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर बने हुए हैं। इन्हीं सिस्टम की वजह से प्रदेश में अगले दो से तीन दिनों तक छिटपुट बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, यदि लोकल सिस्टम की एक्टिविटी रही तो कुछ जिलों में तेज पानी गिर सकता है। इससे पहले सोमवार को भोपाल में दिनभर धूप खिलने के बाद शाम साढ़े 5 बजे बादल बरस पड़े। कई इलाकों में आधा घंटा तक तेज बारिश हुई। रायसेन, सतना, मंडला, पचमढ़ी, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, सिवनी में भी बारिश हुई। रायसेन में सबसे ज्यादा 2 इंच पानी गिर गया। वहीं, सतना में सवा इंच और मंडला-पचमढ़ी में आधा इंच पानी बरसा। राजस्थान से लौट रहा मानसून रविवार को राजस्थान के कई जिलों से मानसून की वापसी हो गई। अगले दो-तीन दिन में पंजाब और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी मानसून लौट सकता है। इसके बाद एमपी से भी मानसून की वापसी होने लगेगी। हालांकि, सितंबर में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। एमपी में कोटे से ज्यादा पानी गिरा बता दें कि मध्यप्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 42.1 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 35.2 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 6.9 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। इस मानसूनी सीजन में इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। यहां सबसे कम पानी गिरा है। सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा खरगोन और शाजापुर शामिल हैं। ग्वालियर, चंबल-सागर की स्थिति सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। अच्छी बारिश वाले 34 में से भोपाल संभाग के चार, जबलपुर संभाग के 5, इंदौर संभाग के 3, ग्वालियर-चंबल के 8, सागर संभाग के 5, उज्जैन संभाग के 4, रीवा संभाग के 3, शहडोल-नर्मदापुरम संभाग के एक-एक जिला शामिल हैं।  

5 दिन बाद हरियाणा से विदा होगा मानसून, उससे पहले झमाझम बारिश; क्षतिपूर्ति पोर्टल आज होगा बंद

चंडीगढ़   हरियाणा में 22 सितंबर से मानसून के लौटने के आसार है. मौसम विभाग के अनुसार, 16 से 17 सितंबर के बीच राज्य में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. इसकी वजह पहाड़ों पर सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ व बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र को माना जा रहा है. 17 से 19 सितंबर के बीच हरियाणा के कई जिलों में छिटपुट बारिश हो सकती है. इसके बाद, मानसून की रवानगी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि हरियाणा से मानसून की विदाई 22 सितंबर के आसपास से होगी. प्रदेश में 22-23 जून को मानसून की एंट्री हुई थी। उसके बाद से अब तक सामान्य से 41% ज्यादा बारिश हो चुकी है। कल, 14 सितंबर तक प्रदेश में 401.1 एमएम बारिश होनी चाहिए थी लेकिन 564.8 एमएम बरसात हो चुकी है। वहीं बारिश न होने से दिन के समय फिर से गर्मी और उमस बढ़ने लगी है। दिन का तापमान 35 डिग्री तक पहुंचने लगा है। अब दिन का तापमान बढ़ रहा है और रात का तापमान गिरने लगा है। वहीं बारिश से फसलों के नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन करने का आज अंतिम दिन है। कल से इसको लेकर स्पेशल गिरदावरी शुरू की जाएगी। हुई इतनी बारिश पिछले साल हरियाणा से मानसून की वापसी 2 अक्टूबर को हुई थी, लेकिन इस साल यह सामान्य से पहले लौटेगा. इस सीजन में प्रदेश में अब तक 564.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 42 प्रतिशत ज्यादा है और 27 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की विदाई के बाद भी यदि मौसमी सिस्टम सक्रिय होते हैं व बारिश होती है, तो सर्दी इस बार समय से पहले दस्तक दे सकती है. मानसून की विदाई नजदीक आते ही बढ़ना लगा तापमान हरियाणा में मानसून की समाप्ति नजदीक आने के साथ ही तापमान में बदलाव दिखने लगा है। रविवार को दिन के अधिकतम तापमान में औसतन 0.5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी देखी गई। प्रदेश में अधिकतम तापमान नूंह में 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जींद में दिन के तापमान में सबसे ज्यादा 2 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई। वहीं, अगर रात के तापमान की बात करें तो प्रदेश में न्यूनतम तापमान में औसतन 0.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई है। गुरुग्राम में रात का सबसे कम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान में सबसे ज्यादा गिरावट सिरसा में 4.5 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज की गई। यहां ओटू सेंटर पर रात का तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। नूंह में रात का सबसे अधिक तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे रातें अब ठंडी होनी शुरू हो जाएंगी। क्षतिपूर्ति पोर्टल का आज अंतिम दिन मानसून में बारिश और जलभराव से फसलों के नुकसान का मुआवजा लेने के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन करने का आज, 15 सितंबर को अंतिम दिन है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 14 सितंबर तक 4 लाख 85 हजार 90 किसान क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन कर चुके हैं। किसानों का कहना है कि उनकी 28 लाख 46 हजार 98 एकड़ फसल का नुकसान हो चुका है। करीब 6,292 गांवों में यह नुकसान दर्ज किया गया है। सबसे ज्यादा नुकसान भिवानी, जींद, हिसार, चरखी दादरी और महेंद्रगढ़ में होने का अनुमान है। हिसार में 2 हफ्ते बाद खुले स्कूल, ट्रैक्टर पर पहुंचे बच्चे हिसार के बरवाला में जलभराव की वजह से स्कूल 2 हफ्ते बाद खुले। यहां के सुलखनी गांव में सड़कों पर जलभराव की वजह से बच्चे ट्रैक्टर पर बैठकर स्कूल पहुंचे। सुलखनी गांव के रमेश, संदीप, जगदीप ने बताया कि भारी बारिश के कारण राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और राजकीय प्राथमिक विद्यालय दोनों के मैदान और कक्षाओं में पानी भर गया था, जिसके चलते शिक्षा विभाग को स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी थी। नुकसान भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. वीरेंद्र सिंह लाठर ने बताया कि मानसून सीजन में अधिक बारिश से इस बार धान की अगेती फसल को पहले ही 15- 20 फीसदी तक नुकसान पहुंच चुका है. यदि अब बारिश हुई तो पकी हुई फसल को भी 10- 15 फीसदी तक और नुकसान हो सकता है.

मॉनसून ने लिया जल्दी रुख्सत, कई राज्यों में सूखे जैसे हालात का खतरा

नई दिल्ली मॉनसून इस साल समय से पहले देशभर में छाया और अब इसके विदाई भी समय से पहले शुरू कर दी है. मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून 14 सितंबर, 2025 को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस चला गया है, जबकि इसकी सामान्य तिथि 17 सितंबर है. वहीं, अगले 2-3 दिनों के दौरान राजस्थान के कुछ और हिस्सों तथा पंजाब और गुजरात के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, मॉनसून आमतौर पर 1 जून तक केरल में प्रवेश करता है और 8 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है. फिर ये 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू कर देता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से वापस चला जाता है. आईएमडी का पूर्वानुमान था कि 15 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. हालांकि ये वापसी 14 सितंबर से ही शुरू हो गई. बता दें कि इस साल मॉनसून ने सामान्य तिथि 8 जुलाई से नौ दिन पहले ही पूरे देश को कवर कर लिया था. 2020 के बाद से इस साल मॉनसून ने सबसे जल्दी पूरे देश को कवर कर लिया था, इससे पहले, 2020 में 26 जून तक ऐसा हुआ था. वहीं, इस बार केरल से मॉनसून का आगमन भी 24 मई को हुआ था, जो 2009 के बाद से भारतीय मुख्य भूमि पर इसका सबसे पहला आगमन था, जब यह 23 मई को मॉनसून पहुंचा था. देश में मॉनसून सीजन में अब तक 836.2 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य बारिश 778.6 मिमी होती है, जो 7 प्रतिशत अधिक है. मई में आईएमडी ने पूर्वानुमान लगाया था कि भारत में जून-सितंबर मॉनसून सीजन के दौरान 87 सेमी की दीर्घकालिक औसत वर्षा का 106 प्रतिशत प्राप्त होने की संभावना है. इस 50-वर्षीय औसत के 96 से 104 प्रतिशत के बीच वर्षा को 'सामान्य' माना जाता है. कैसे तय होती है मॉनसून की वापसी? दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी कुछ मानदंडों पर तय होती है.     पश्चिमी राजस्थान के ऊपर समुद्र तल से 1.5 किमी ऊपर एक प्रतिचक्रवाती परिसंचरण का विकास.     लगातार 5 दिनों के दौरान क्षेत्र में शून्य बारिश.     मध्य क्षोभमंडल तक के क्षेत्र में वायुमंडल की नमी की मात्रा में कमी. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी रेखा 30.5°N /73.5°E, श्री गंगानगर, नागौर, जोधपुर, बाड़मेर और 25.5°N /70°E से होकर गुजरती है. मॉनसून भारत के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद अहम है, जो लगभग 42 प्रतिशत आबादी की आजीविका का आधार है और सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 प्रतिशत का योगदान देता है. यह पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक जलाशयों को पुनः भरने में भी खास भूमिका निभाता है.

मॉनसून 2025 की विदाई: इन राज्यों में सिर्फ 48 घंटे में छंट जाएगी बारिश

नई दिल्ली  इस बार देशभर में मॉनसून की वजह से अच्छी बरसात हुई है। हालांकि, अब इसके वापस लौटने का समय आ गया है। धीरे-धीरे करके मॉनसून आने वाले कुछ दिनों में तमाम राज्यों से वापस चला जाएगा। मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान के कुछ हिस्सों से मॉनसून आज वापस चला गया है और अगले दो से तीन दिनों में राजस्थान के अन्य हिस्सों, पंजाब और गुजरात के कुछ हिस्सों से वापस चला जाएगा। इसके लिए परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल बनी हुई हैं। वहीं, अगले तीन दिनों तक पूर्वोत्तर राज्यों में और महाराष्ट्र में भारी से बहुत भारी बारिश होगी। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो 14 और 17 तारीख को अरुणाचल प्रदेश में अधिकांश जगहों पर बारिश की संभावना है। 15 और 16 तारीख को असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और 18-20 सितंबर के दौरान अरुणाचल प्रदेश में 15 और 16 तारीख को बहुत भारी बारिश की संभावना है। 14 सितंबर को नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और असम, मेघालय में भारी बरत होगी। दक्षिण भारत की बात करें तो 16-19 सितंबर के दौरान तमिलनाडु में गरज के साथ बारिश की संभावना है। 14 को तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, 14 और 15 के दौरान तेलंगाना, 14-16 सितंबर के दौरान आंतरिक कर्नाटक में भारी बरसात होगी। वहीं, अगले पांच दिनों के दौरान तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा में तेज हवाएं चलने का अनुमान है। पश्चिम भारत की बात करें तो 16 सितंबर को कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। 14 और 15 सितंबर को कोंकण एवं गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में बहुत भारी बारिश हो सकती है। उत्तर पश्चिम भारत की बात करें तो 14 सितंबर को हिमाचल प्रदेश, 14 और 16 सितंबर को उत्तराखंड, 14-20 सितंबर के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश और 15 सितंबर को उत्तराखंड में बहुत भारी बारिश हो सकती है।  

14 सितंबर से MP में मॉनसून फिर होगा सक्रिय, मौसम विभाग ने दिया भारी बारिश का चेतावनी संदेश

भोपाल मध्यप्रदेश में मॉनसून एक बार फिर से जोर पकड़ने को तैयार है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में बारिश का दौर थम सा गया है। आज से मध्यप्रदेश फिर से बारिश में भीगने वाला है। मौसम विभाग का कहना है कि कल से 17 सितंबर तक मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा।। मौसम विभाग की भविष्यवाणी मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 14-15 सितंबर से मध्यप्रदेश में मॉनसून फिर से रफ्तार पकड़ेगा। इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम संभागों में तेज बारिश की संभावना है, जिसके लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा रीवा, सागर और शहडोल संभागों में भी भारी बारिश हो सकती है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे निम्न दबाव क्षेत्र के कारण यह बारिश का दौर 17 सितंबर तक जारी रह सकता है। इस साल जमकर बरस रहा मॉनसून आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में इस साल मॉनसून ने उम्मीद से ज्यादा मेहरबानी दिखाई है। 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 36.3 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य 33.4 इंच से 9% अधिक है। पूर्वी मध्यप्रदेश में 6% और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12% ज्यादा बारिश हुई है। मंडला जिला 47.56 इंच बारिश के साथ सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जबकि भोपाल में 43 इंच से अधिक बारिश हो चुकी है।

मध्य प्रदेश के लिए अलर्ट: 15 और 16 सितंबर को भारी बारिश का तांडव होने वाला है

भोपाल  मध्यप्रदेश में लगातार हो रही बारिश का दौर थम गया है। हालांकि, गुरुवार को बालाघाट के मलाजखंड में भारी बारिश हुई। नर्मदापुरम, मंडला और नरसिंहपुर में भी बारिश देखने को मिली। मौसम विभाग की मानें तो मध्यप्रदेश में अगले 2 दिन तक भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-जबलपुर समेत प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जरूर रह सकता है। मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 15-16 सितंबर से नया सिस्टम बनने के बाद फिर से पूरे प्रदेश में तूफानी बारिश(Heavy Rain) का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग की मानें तो पूर्वी मध्यप्रदेश में 14 और 15 सितंबर और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 15 से 17 सितंबर तक अतिभारी बारिश की संभावना है। मौजूदा समय में प्रदेश में कोई सिस्टम एक्टिव नहीं है। वहीं 15 सितंबर से नया सिस्टम बन सकता है। जिसके बाद एक बार फिर से पूरा प्रदेश भीगने की संभावना है।मध्यप्रदेश में अगले 4 दिन तक भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-जबलपुर समेत प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जरूर रह सकता है। 15-16 सितंबर से नया सिस्टम बनने के बाद फिर से पूरे प्रदेश में तेज बारिश का दौर शुरू होगा । जानकारी के मुताबिक, भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है। कई जिले ऐसे हैं, जहां आंकड़ा डेढ़ सौ प्रतिशत के पार है। श्योपुर में कुल 213 प्रतिशत पानी गिर चुका है। एमपी में कोटे से 4.4 इंच ज्यादा बारिश बता दें, प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 41.6 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 34.2 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। 4.6 इंच पानी ज्यादा गिर गया है। 30 जिले-भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है। कई जिले ऐसे हैं, जहां आंकड़ा डेढ़ सौ प्रतिशत के पार है। श्योपुर में कुल 213 प्रतिशत पानी गिर चुका है। ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। 30 में से भोपाल संभाग के चार, इंदौर संभाग के दो, जबलपुर के चार, ग्वालियर-चंबल के 8, सागर-उज्जैन संभाग के 4-4, रीवा संभाग के 3 और शहडोल संभाग का एक जिला शामिल हैं। नर्मदापुरम संभाग के किसी भी जिले में कोटा पूरा नहीं हुआ। गुना में 65 इंच बारिश, मंडला-श्योपुर दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा बारिश वाले टॉप-5 जिलों की बात करें तो गुना नंबर-1 पर है। यहां 65 इंच बारिश हो चुकी है। मंडला में 57 इंच, श्योपुर में 56.3 इंच, शिवपुरी में 54.3 इंच और अशोकनगर में 54.1 इंच पानी गिरा है। वहीं, खरगोन में सबसे कम 25.7 इंच बारिश हो चुकी है। बुरहानपुर में 25.9 इंच, खंडवा में 26.8 इंच, शाजापुर में 26.8 इंच और बड़वानी में 26.9 इंच बारिश हुई है।

मध्यप्रदेश में मॉनसून की मार, मौसम विभाग ने आज के लिए दिया अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश के कई जिलों में आज भी बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक और बारिश होने की संभावना जताई है। भोपाल जिले में अब तक 38 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो इस सीजन के कोटे से केवल 2 इंच कम है। बड़ा तालाब छलकने की कगार पर पहुंच गया है। ऐसे में भदभदा डैम के गेट किसी भी समय खोले जा सकते हैं। बात दें कि मौसम विभाग के अनुसार, इस बार मध्य प्रदेश में इस मॉनसूनी सीजन में औसत से अधिक करीब 40 इंच बारिश हो चुकी है, जो कोटे का 108 प्रतिशत है। हालांकि अब तक 32.1 इंच बारिश होनी थी, प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। पिछले मॉनसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी। यह लगातार दूसरे साल प्रदेश में सामान्य से ज्यादा है। फिलहाल मॉनसून के 25 दिन ओर बाकी हैं, ऐसे में यह आंकड़ा और भी बढ़ने के संभावना जताई जा रही है। उज्जैन इंदौर रतलाम में हालात बिगड़े लगातार हो रही बारिश से इंदौर, उज्जैन और रतलाम जिले के हालात बिगड़ रहे हैं, मौसम विभाग ने अगले 2 दिन तक प्रदेश में तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। अगले 24 घंटे में रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। यहां साढ़े 8 इंच तक पानी गिर सकता है। उज्जैन संभाग के नीमच, मंदसौर, देवास और आसपास के जिले इंदौर, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, गुना, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 24 घंटे में यहां ढाई से साढ़े 4 इंच तक बारिश हो सकती है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश में गुरुवार को चार सिस्टम एक्टिव रहे। इनमें एक मॉनसून समेत दो टर्फ, एक लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम शामिल हैं। शुक्रवार को भी सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिल सकती है, इसलिए कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। एमपी में जब से मॉनसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल में भी मॉनसून जमकर बरसा है। प्रदेश के 20 जिलों में बारिश का कोटा फुल हो गया है। उज्जैन घाट पर बने मंदिरों में पानी भरा बुधवार ओर गुरुवार उज्जैन और आसपास के जिले देवास ओर इंदौर में रुक-रुक कर तेज बारिश होती रही। बुधवार देर रात और गुरुवार रुक-रुक कर हुई बारिश से शहर के कई निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति बन गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिप्रा नदी उफान पर आ गई है। नदी के बढ़ते जलस्तर से रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर पानी आने से मंदिर डूब गए। वहीं अंगारेश्वर महादेव मंदिर में क्षिप्रा का जल घुस गया। घाट पर स्थित सभी मंदिर जलमग्न हो गए हैं। साथ ही चिंतामण जवासिया, खरेट सहित गांव के घरों तक पानी पहुंचा। दाउदखेड़ी में बन रही कॉलोनियों के चलते गांव के रास्ते पानी में डूब गए। नालों के ऊपर हो रहे निर्माण से पानी निकल नहीं पा रहा। यहां से आरटीओ जाने वाला रास्ता पानी भरने के चलते तालाब जितना भरा मिला, जहां एक बस भी काफी समय तक फंसी रही। इस दौरान शहर में हुई बारिश के कारण बहादुरगंज, एटलस चौराहा, केडी गेट, नीलगंगा, इंदौर गेट, दशहरा मैदान सहित कई क्षेत्रों में जलभराव हो गया है। इन क्षेत्रों के रहवासी जलभराव के कारण खासे परेशान नजर आ रहे हैं। उज्जैन जिले में प्रशासन ने लोगों से नदियों-घाटों के पास नहीं जाने की अपील की है, क्षिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण उज्जैन बड़नगर मार्ग स्थित छोटा ब्रिज पूरी तरह से डूब गया है। उज्जैन कलेक्टर ने पुलिस बल के साथ एसडीई आरएफ टीम को मौके पर तैनात किया है। क्षिप्रा किनारे रामघाट पर नगर निगम, होमगार्ड और एसडीईआरएफ की टीमें तैनात हैं। घाट पर आने वाले श्रद्धालुओं को दूर रखा जा रहा है बात दे कि उज्जैन में क्षिप्रा नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया है कि घाट किनारे स्थित मंदिर गुंबद तक जलमग्न हो गए है। ग्रामीण क्षेत्र के चिंतामन थाना के दाउद खेडी गांव में एक स्कूल बस और सरकारी स्कूल में कुछ छात्र और टीचर जलभराव के दौरान फंस गए। आसपास इतना पानी भर गया कि मोटर बोट से टीचर्स को रेस्क्यू करना पड़ा। 7 सदस्यीय एसडीईआरएफ टीम ने सभी टीचर्स को निकालकर सकुशल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। गुना में सबसे ज्यादा, 5 जिलों में कम एमपी के गुना जिले में अब तक सबसे ज्यादा बारिश हुई है तो वहीं उज्जैन संभाग सहित एमपी के 5 जिलों में बारिश फिलहाल औसत से कम है, यह जिले इंदौर और उज्जैन संभाग के हैं। इसमें खरगोन में सबसे कम 24.7 इंच, खंडवा में 24.9 इंच, बड़वानी में 25.2 इंच, बुरहानपुर में 25.5 इंच और शाजापुर में 25.6 इंच बारिश हुई है। इस मामले में गुना सबसे बेहतर है। यहां 62.9 इंच बारिश हो चुकी है। गुना में 30.5 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मंडला में 55.5 इंच बारिश हो चुकी है। शिवपुरी में 52.9 इंच, अशोकनगर में 52.6 इंच और श्योपुर में 55.3 इंच पानी गिर चुका है। ब्लॉक की वजह से ट्रेनें निरस्‍त रतलाम नागदा खंड में ब्‍लॉक के कारण कुछ ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के रतलाम-नागदा खंड में ऑटोमेटिक ब्‍लॉक सिगनलिंग प्रणाली को लागू करने के लिए शीघ्रता से काम जारी है। रतलाम-नागदा खंड में ऑटोमेटिक ब्‍लॉक सिगनलिंग सिस्‍टम को कार्यान्वित करने के लिए 6 सितंबर को प्रस्‍तावित ब्‍लॉक के कारण मंडल की कुछ ट्रेनें प्रभावित होगी। 6 सितंबर 25 को निम्‍न ट्रेनें निरस्‍त रहेंगी : 59318 उज्‍जैन – नागदा पैसेंजर 59346 नागदा-उज्‍जैन पैसेंजर,59345 रतलाम-नागदा पैसेंजर 6 सितम्‍बर, 25 को नागदा से चलने वाली गाड़ी संख्‍या 19341 नागदा बीना एक्‍सप्रेस, उज्‍जैन से चलेगी तथा नागदा से उज्‍जैन के मध्‍य निरस्‍त रहेगी। ट्रेनों की आगमन/प्रस्‍थान समय सहित अन्‍य अद्यतन जानकारियों के लिए यात्री कृपया www.enquiry. indianrail.gov.in पर जाकर अवलोकन कर सकते हैं।

मॉनसून का कहर जारी! MP में कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

भोपाल  मध्यप्रदेश में मॉनसून ने एक बार फिर अपनी पूरी ताकत दिखा दी है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से प्रदेश में जमकर बारिश हो रही है। मौसम विभाग (IMD) ने आज, 4 सितंबर 2025 को प्रदेश के लगभग आधे हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। जानिए आज कहां कैसा मौसम रहेगा। इन जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने नौ जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसमें सीहोर, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ और देवास शामिल हैं। इन इलाकों में तेज हवाएं (40-50 किमी/घंटा) और वज्रपात की भी आशंका है। यहां भारी बारिश का येलो अलर्ट इसके अलावा प्रदेश के 17 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है। इसमें भोपाल, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, धार, इंदौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, आगर, गुना, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और पांढुर्णा शामिल हैं। उज्जैन में क्षिप्रा का जलस्तर बढ़ने से घाट किनारे के मंदिर डूब गए हैं। उनके गुंबद तक पानी आ गया है। प्रशासन ने लोगों को घाटों से दूर रहने की चेतावनी दी है। रतलाम और आसपास के इलाकों में गुरुवार सुबह तेज बारिश हुई। इससे जनता कॉलोनी, पीएंडटी कॉलोनी, जवाहर नगर समेत कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। कई मकानों में गृहस्थी का सामान डूब गया। नर्मदापुरम जिले के इटारसी में तवा डैम के तीन गेट 5-5 फीट की ऊंचाई तक खुले हैं। इनसे करीब 25000 क्यूसेक पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। डैम के गेट पिछले 15 दिन से खुले हैं। भोपाल में गुरुवार सुबह कहीं धीमी, कहीं तेज बारिश हुई। 26 जिलों में अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने गुरुवार को 26 जिलों में अति भारी या भारी बारिश की चेतावनी दी है। अगले 24 घंटे के दौरान झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, देवास और सीहोर में अति भारी बारिश होने का अलर्ट है। यहां अगले 24 घंटे में साढ़े 8 इंच तक पानी गिर सकता है। बाकी मध्यप्रदेश का हाल प्रदेश के अन्य हिस्सों, जैसे ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, सतना और शहडोल में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कहीं-कहीं गरज-चमक और वज्रपात की संभावना है। तापमान की बात करें तो भोपाल में 30.0 डिग्री, इंदौर में 29.3 डिग्री, ग्वालियर में 31.4 डिग्री, और जबलपुर में 30.3 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। पचमढ़ी जैसे पहाड़ी इलाकों में तापमान 25.0 डिग्री तक नीचे जा सकता है। अगले चार दिन जारी रहेगा बारिश का दौर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 4 से 7 सितंबर तक मध्यप्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। खासकर मालवा-निमाड़, विंध्य और पूर्वी मध्यप्रदेश में मॉनसून की सक्रियता चरम पर होगी। 5 सितंबर को ग्वालियर-चंबल संभाग में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके बाद बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आ सकती है, लेकिन उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम है। औसत से 21 फीसदी ज्यादा बरसा मॉनसून मौसम विभाग के अनुसार, मध्यप्रदेश में इस साल मॉनसून ने औसत से 21% अधिक बारिश दी है और यह सिलसिला अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मॉनसून ट्रफ के कारण प्रदेश में 6-7 सितंबर तक झमाझम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पूर्वी मध्यप्रदेश में 21% और पश्चिमी मध्यप्रदेश में 22% अतिरिक्त बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य औसत 37 इंच के मुकाबले अब तक 38.2 इंच तक पहुंच चुकी है। मालवा-निमाड़ और विंध्य क्षेत्रों में बारिश का जोर सबसे ज्यादा रहेगा।