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नोएडा से बड़ी चोरी का खुलासा: नेपाल ले जाने से पहले पुलिस ने 821 मोबाइल फोन बरामद किए

नोएडा दिल्ली-एनसीआर में मोबाइल चोरी की बढ़ती घटनाओं पर बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा पुलिस ने अंतरराज्यीय मोबाइल चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है. थाना फेज-2 पुलिस ने इस गिरोह के आठ सदस्यों को पकड़ते हुए उनके कब्जे से 821 चोरी के मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 6 से 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है. पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह झारखंड से दो-तीन महीने के लिए दिल्ली-एनसीआर आता था. यहां किराये पर कमरे लेकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में सक्रिय रहता और मौके का फायदा उठाकर मोबाइल चोरी करता था. पकड़े जाने से बचने के लिए गिरोह के सदस्य चोरी के तुरंत बाद मोबाइल एक-दूसरे को पास कर देते थे. जब चोरी किए गए मोबाइलों की संख्या सैकड़ों में पहुंच जाती थी, तो उन्हें बैग और बोरियों में भरकर ट्रेन और बस के जरिए झारखंड और बिहार ले जाया जाता था. नेपाल में भी करते थे सप्लाई इसके बाद इन मोबाइलों को नेपाल बॉर्डर के इलाकों में बेहद सस्ते दामों पर बेच दिया जाता था. सेंट्रल नोएडा के डीसीपी शक्ति अवस्थी ने बताया कि गिरोह के आठ सदस्यों को पकड़ा गया है, जिनमें छह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि दो नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 821 मोबाइल फोन की बरामदगी नोएडा पुलिस के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी रिकवरी मानी जा रही है. फिलहाल पुलिस बरामद मोबाइल फोन के मालिकों की पहचान करने और गिरोह से जुड़े अन्य नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है.

सतना पुलिस में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 56 पुलिसकर्मियों के तबादले

सतना  सतना जिले की पुलिस व्यवस्था में कसावट लाने के लिए बड़ा फेरबदल किया गया है। एसपी हंसराज ने जिले के थानों, चौकियों और शाखाओं में पदस्थ 56 पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं। तबादला सूची में एसआई, एएसआइ, हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल शामिल है। कई पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन, यातायात शाखा, महिला थाना, अजाक, कंट्रोल रूम, साइबर सेल एवं थानों में नई पदस्थापना दी गई है। 30 पुलिसकर्मियों को थाने भेजा गया कई कर्मचारियों को प्रशासनिक शाखाओं से हटाकर मैदानी थानों में भेजा गया है। जबकि लंबे समय से थानों में पदस्थ कर्मियों को पुलिस लाइन और अन्य शाखाओं में स्थानांतरित किया गया है। पुलिस लाइन से 30 कर्मचारियों को थानों में भेजा गया है। इसमें उन आठ पुलिसकर्मी को भी शामिल किया गया है। जो कि पूर्व में शिकायत के आधार पर थानों से लाइन अटैक किए गए थे। चार महीने हुआ बड़ा बदलाव जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद दोबारा थाना में पदस्थ कर दिया गया। सतना पुलिस की कमान संभालने के चार माह बाद एसपी ने बड़ा बदलाव किया है। आगामी दिनों में जिले में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए निरीक्षक स्तर में तबादले हो सकते हैं। एसआई नेहा ठाकुर को पुलिस लाइन से सिविल लाइन थाना, एसआइ मकरध्वज पांडेय को महिला थाना से डीएसपी अजाक कार्यालय, एएसआइ रामकेश सिंह अजाक से मझगवां, एएसआइ कल्लू रावत को पुलिस लाइन से कोलगवां, एएसआइ प्रदीप लढ़िया को पुलिस लाइन से यातायात, एएसआइ रावेंद्र मिश्रा को अजाक से रामपुर बाघेलान व रामायण सिंह को पुलिस लाइन से उचेहरा थाना भेजा गया है। इनके अलावा 49 पुलिसकर्मियों के नाम सूची में हैं।

राजू की तलाश में 6 राज्यों की पुलिस जुटी, देशभर में डेरे को संरक्षण देने वालों का डेटा तैयार

भोपाल  भोपाल के  ईरानी डेरा अमन कॉलोनी में फिलहाल 6 राज्यों की पुलिस ने डेरा जमा रखा है. क्योंकि पुलिस को कुख्यात राजू ईरानी और उसके गिरोह के पांच सदस्यों की तलाश है. पुलिस देशभर में डेरे को संरक्षण देने वालों का डेटा भी तैयार करने में जुटी है, ताकि इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाए. डेरे की जमीन के कागजात की सर्चिंग भी जारी है. बता दें कि 2014 में 39 घरों में आगजनी के बाद यह ईरानी डेरा चर्चा में आया था. पुलिस पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है. क्योंकि राजू ईरानी पर कई केस चल रहे हैं.  6 राज्यों में नेटवर्क  पुलिस ने बताया कि ईरानी गैंग के सदस्यों का नेटवर्क दूसरे राज्यों में भी फैला है. किसी भी वारदात को अंजाम देने के बाद वह मुंबई, बैंगलुरू, दिल्ली, छत्तीसगढ़ के अलावा एमपी के ही देवास, नर्मदापुरम जैसे जिलों में फरारी काटते हैं, जबकि दूसरे राज्यों से उनके रिश्तेदार यहां आकर फरारी काटते हैं, ऐसे में सभी राज्यों की पुलिस अब तेजी से इस गिरोह के खिलाफ अभियान चला रही है. भोपाल नगर निगम की तरफ से भी बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा की तरफ से भी जानकारी जुटाई जा रही है. माना जा रहा है कि यहां जो नियम विरुद्ध मकान बने हैं, उन पर जल्द ही बुलडोजर की कार्रवाई देखने को मिल सकती है.  ईरानी डेरे के अपराध के तार 12 राज्यों तक अपराध का अड्डा बना चुका ईरानी डेरा पर पुलिस के साथ ही जिला प्रशासन की भी नजर टेढ़ी हो चुकी है. ईरानी डेरा की जमीन की जांच शुरू हो गई है. भोपाल में 6 राज्यों की पुलिस डटी हुई है. ईरानी गिरोह का नेटवर्क सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है. गिरोह के तार देश के 12 राज्यों से जुड़े होना बताए जा रहे हैं. कई राज्यों की पुलिस टीमें मिलकर गिरोह के नेटवर्क, फरार आरोपियों और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही हैं. डेरे की जमीन के कागजात की सर्चिंग जारी अमन कॉलोनी में बने ईरानी डेरे के कागजात की छानबीन प्रशासन की टीम कर रही है। इसी के साथ नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा भी डेरे पर बने मकानों की जांच कर रही है। नियम विरुद्ध बने मकानों पर जल्द प्रशासन का बुल्डोजर चल सकता है। वहीं पुलिस को राजू ईरानी, सालिक ईरानी, गुलाब ईरानी और सबदर की तलाश है। यह सभी पुलिस की कार्रवाई के बाद से फरार हैं। वारदातों के लिए महीनों का सफर ईरानी डेरे में रहने वाले अपराधी चोरी, लूट, ठगी जैसी वारदातों के लिए महीनों कबीले से दूर दूसरे शहर और राज्यों में रहते हैं। इसे सफर में होना कहा जाता है। इस दौरान कबीले के युवक आपराधिक वारदातों को अंजाम देते हैं। पकड़े जाने पर भी माल को सुरक्षित कबीले तक पहुंचाने के लिए दो युवक होते हैं। सफर में जाने वाले युवकों के गिरोह के साथ हर समय दो युवक ऐसे होते हैं जो वारदात में सीधे तौर पर शामिल नहीं होते, लेकिन घटना के बाद मिले माल को लेकर सुरक्षित कबीले तक लाने की जिम्मेदारी इनकी होती है। इसके लिए कई बार आरोपी बाय रोड लग्जरी कार और बाइक से सैकड़ों किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भोपाल पुलिस ने हाल में गिरफ्तार किए गए ईरानी गैंग के सदस्यों से गहन पूछताछ के बाद कई अहम जानकारियां जुटाई हैं। इनमें यह सामने आया है कि गैंग के सदस्य चोरी, लूट और ठगी जैसी वारदातों के बाद नर्मदापुरम, देवास, मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे शहरों में छिपते रहे हैं। इसी तरह, अन्य राज्यों में सक्रिय उनके रिश्तेदार और सहयोगी वारदातों के बाद भोपाल की अमन कॉलोनी में शरण लेते थे। पुलिस अब उन सभी लोगों का डेटा तैयार कर रही है, जो अलग-अलग राज्यों में ईरानी डेरे को संरक्षण देते आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब इस नेटवर्क को राज्य सीमा से बाहर निकलकर तोड़ने की रणनीति बनाई गई है। इसके तहत संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई तेज हो गई है। अमन कॉलोनी में बने ईरानी डेरे की जमीन के कागजातों की सघन जांच की जा रही है। नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन और अतिक्रमण शाखा ने भी नियम विरुद्ध बने मकानों की पड़ताल शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, अनियमित निर्माण पाए जाने पर जल्द ही बुलडोजर कार्रवाई हो सकती है। जांच में यह भी सामने आया है कि ईरानी गैंग वारदातों के लिए महीनों तक अपने कबीले से दूर रहता था, जिसे वे ‘सफर’ कहते हैं। इस दौरान गिरोह के कुछ सदस्य सीधे अपराध करते थे, जबकि दो अन्य युवक केवल चोरी या लूट का माल सुरक्षित रूप से भोपाल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते थे। कई बार ये आरोपी लग्जरी कार और बाइक से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करते थे, ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। अमन कॉलोनी का ईरानी डेरा पहले भी विवादों में रहा है। वर्ष 2014 में यहां शिया और सुन्नी समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें करीब 39 मकानों में आगजनी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। उसी घटना के बाद यह इलाका प्रदेशभर में चर्चा में आया था। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता राजू ईरानी, सालिक ईरानी, गुलाब ईरानी और सबदर जैसे फरार आरोपियों की गिरफ्तारी है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह कार्रवाई न सिर्फ भोपाल बल्कि देशभर में सक्रिय संगठित अपराध के खिलाफ एक अहम कदम मानी जा रही है। इन अपराधियों की तलाश में पुलिस गिरोह का सरगना राजू ईरानी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है. पुलिस को आशंका है कि वह शहर या राज्य छोड़कर फरारी काट रहा है. उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है. सादिक, गुलाम, राजू, हैदर मामू की भी तकनीकी सर्विलांस के साथही पुराने संपर्कों की भी जांच की जा रही है. अमन कॉलोनी स्थित ईरानी डेरा की जमीन को लेकर राजस्व रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. ईरानी डेरे की जमीन की जांच प्रशासन का मानना है कि इस जमीन पर अवैध … Read more

पाकिस्तान लिंक वाले ड्रग्स गिरोह पर अमृतसर पुलिस ने की कार्रवाई, सात आरोपी पकड़े गए

अमृतसर में पाकिस्तान से जुड़े ड्रग गिरोह का पर्दाफाश, सात गिरफ्तार पाकिस्तान लिंक वाले ड्रग्स गिरोह पर अमृतसर पुलिस ने की कार्रवाई, सात आरोपी पकड़े गए अमृतसर: ड्रग्स गिरोह का भंडाफोड़, पाकिस्तान से संबंध होने पर सात आरोपी गिरफ्तार अमृतसर   पंजाब की अमृतसर पुलिस ने एक बड़े ड्रग्स रैकेट का भांडाफोड किया है, जिसका सीधा कनेक्शन पाकिस्तान में बैठे लोगों से था। इस ऑपरेशन में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से 4.75 किलो हेरोइन, 1 किलो मेथाम्फेटामाइन और एक 9एमएम ग्लॉक पिस्टल भी बरामद की है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये ड्रग्स पाकिस्तान से भारत में लाई जा रही थी और पंजाब में छोटे-छोटे ग्रुप्स के जरिए डिस्ट्रीब्यूट की जा रही थी। इन ग्रुप्स का संचालन सोशल मीडिया के जरिए होता था। इनके द्वारा सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ चैटिंग या मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि ड्रग्स का कारोबार करने के लिए भी किया जा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने में लगी है कि यह गिरोह और कहां-कहां तक फैला हुआ है और इससे कौन-कौन से लोग जुड़े हुए हैं ताकि पूरे नेटवर्क को खत्म किया जा सके। पंजाब पुलिस का कहना है कि वह ड्रग्स तस्करी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। राज्य को ड्रग्स से मुक्त करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं और पुलिस हर स्तर पर सतर्क है। आम लोगों से भी अपील है कि अगर किसी को किसी तरह की ड्रग्स या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले तो वह तुरंत पुलिस को सूचित करें। इससे पहले 28 दिसंबर को फाजिल्का में भी पंजाब पुलिस ने नशे की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी। पुलिस ने पांच किलो से ज्यादा हेरोइन के साथ एक ड्रग तस्कर को पकड़ लिया था। यह ऑपरेशन फाजिल्का राज्य विशेष अभियान प्रकोष्ठ (एसएसओसी) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के साथ मिलकर किया गया। जांच में पता चला कि हेरोइन पाकिस्तान स्थित तस्करों ने ड्रोन के जरिए भेजी थी और इसे आगे पूरे राज्य में फैलाया जाना था। पुलिस की समय पर कार्रवाई की वजह से यह खेप पकड़ी गई और तस्कर को गिरफ्तार कर लिया गया।

नया साल 2026: बरेली पुलिस ने की चेतावनी, गड़बड़ी करने वालों को थाने में मनाना पड़ेगा स्वागत

    बरेली  बरेली एसएसपी अनुराग आर्य ने 31 दिसंबर 2025 की रात के लिए नई एडवाइजरी जारी की है. पुलिस प्रशासन ने नए साल 2026 के आगमन पर शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु हुड़दंगियों, स्टंटबाजों और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का खाका तैयार किया है. शहर के होटलों और रेस्टोरेंट संचालकों को भी जरूरी दिशा-निर्देश दे दिए गए हैं. नियम तोड़ने वालों के वाहन सीज करने और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की तैयारी है. सड़क पर केक काटने या यातायात बाधित करने वालों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी. सड़क पर केक काटा या स्टंट किया तो खैर नहीं नए साल के जश्न के दौरान अक्सर कुछ लोग सड़कों पर गाड़ियां रोककर नाच-गाना और तेज आवाज में म्यूजिक बजाते हैं. एसएसपी ने साफ किया है कि बीच सड़क पर केक काटना, बाइक या कार से स्टंट करना और तेज रफ्तार से वाहन चलाना अपराध माना जाएगा. ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ पुलिस अलर्ट मोड पर है. यदि जश्न के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई, तो पुलिस न सिर्फ वाहन जब्त करेगी, बल्कि आरोपियों को जेल भेजने की कार्रवाई भी सुनिश्चित करेगी. होटलों और आयोजकों के लिए कड़े निर्देश पुलिस ने शहर के तमाम होटल और रेस्टोरेंट मालिकों को भी हिदायत दी है. एसएसपी ने बाइट के माध्यम से बताया कि आयोजकों को साफ निर्देश हैं कि वे नियमों के दायरे में रहकर ही सेलिब्रेशन कराएं. किसी भी तरह की अनुशासनहीनता या अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यदि किसी कार्यक्रम में हुड़दंग की स्थिति बनती है, तो आयोजकों की जिम्मेदारी होगी कि वे तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें. थाना अध्यक्षों के माध्यम से सभी प्रोग्राम ऑर्गेनाइजर्स को पहले ही सूचित करा दिया गया है. शांति और सुरक्षा पुलिस की प्राथमिकता बरेली पुलिस का उद्देश्य किसी की खुशियों में खलल डालना नहीं, बल्कि शहर में सुरक्षा और शांति बनाए रखना है. एसएसपी अनुराग आर्य के अनुसार, लोग दूसरों को परेशान किए बिना या यातायात को बाधित किए बिना जश्न मनाएं. किसी भी व्यक्ति को कानून से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जोश में आकर की गई एक छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है और नए साल की पहली सुबह हवालात में देखनी पड़ सकती है.

नागदा में टीआई की बहादुरी, फंदे से लटके युवक को सीपीआर देकर बचाई जान, VIDEO; स्वस्थ होकर अस्पताल से निकला

नागदा  मध्य प्रदेश (MP) के उज्जैन (Ujjain) जिले के नागदा (Nagda) से इंसानियत और पुलिस (Police) की मुस्तैदी की एक दिल जीत लेने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ नागदा थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी ने एक युवक के लिए ‘देवदूत’ बनकर उसकी जान बचाई, जिसे उसके परिवार ने मृत मान लिया था। गश्त के दौरान मिली सूचना घटना रविवार-सोमवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे की है। थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी अपनी टीम के साथ मिर्ची बाजार क्षेत्र में नियमित गश्त पर थे। इसी दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति बदहवास हालत में दौड़ते हुए उनके पास पहुंचा और रोते हुए बताया कि उसके बेटे ने घर के अंदर फांसी लगा ली है। बंद दरवाजा तोड़कर युवक को फंदे से उतारा सूचना मिलते ही टीआई गवरी बिना एक पल गंवाए घटनास्थल पर पहुंचे। घर का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पुलिस ने तुरंत तोड़ दिया। अंदर जाकर देखा तो युवक धैर्य यादव फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। परिवार के सदस्य उसे देखते ही यह मान चुके थे कि धैर्य की मौत हो चुकी है और घर में कोहराम मच गया था। ट्रेनिंग आई काम: CPR से वापस लौटीं सांसें जहाँ परिवार हिम्मत हार चुका था, वहीं थाना प्रभारी ने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने तुरंत युवक को फंदे से नीचे उतारा और उसकी नब्ज जांची। युवक की हालत गंभीर थी, जिसे देखते हुए टीआई गवरी ने अपनी पुलिस ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) तकनीक का इस्तेमाल किया। लगातार कुछ मिनटों तक सीने को पंप करने और जीवन रक्षक प्रयास करने के बाद, युवक के शरीर में हलचल हुई और उसकी सांसें वापस लौट आईं। यह देख परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। डॉक्टर बोले- सीपीआर से बची युवक की जान घटना नागदा में जनमेजय मार्ग स्थित पानी की टंकी के पास सोमवार रात करीब डेढ़ बजे की है। थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। तभी युवक के पिता उनके पास पहुंचे थे। टीआई बिना देरी किए युवक के घर पहुंच गए। उन्होंने अपनी पुलिस ट्रेनिंग के दौरान सिखाई गई सीपीआर तकनीक का उपयोग किया। युवक की सांसें लौटी तो अपने वाहन से उसे एमपी-13 अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने तत्काल जांच कर उपचार शुरू किया और बताया कि समय पर सीपीआर मिलने के कारण युवक की जान बच गई। युवक की जान बचाने में नगर सुरक्षा समिति के राजेश मोरवाल ने भी पुलिस का सहयोग किया। अस्पताल में भर्ती, परिजनों ने जताया आभार सांसें लौटने के बाद पुलिस ने बिना देरी किए युवक को तुरंत रतलाम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसका उपचार जारी है। टीआई अमृतलाल गवरी की इस तत्परता और सूझबूझ की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। परिजनों ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अगर आज साहब नहीं होते, तो हमने अपना बेटा खो दिया होता। क्या होता है CPR और क्यों है यह जरूरी? CPR एक आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन रुक जाती है। यह मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बनाए रखने में मदद करता है।

नए साल से पहले मध्यप्रदेश में मंदिरों की सुरक्षा चाक-चौबंद, DGP कैलाश मकवाना के आदेश

भोपाल नए साल के जश्न और हालिया सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए मध्यप्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ और पहलगाम की घटना के मद्देनज़र प्रदेश के प्रमुख मंदिरों, धार्मिक स्थलों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सतर्कता बढ़ाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। डीजीपी ने कहा कि नए साल के अवसर पर मॉल, बाजार, होटल, रिसॉर्ट और पिकनिक स्पॉट पर भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। ऐसे में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए गश्त बढ़ाई जाए और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाए। हुड़दंग, शांति भंग करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का फैसला किया है। छेड़खानी, अभद्र व्यवहार और महिलाओं के खिलाफ किसी भी अपराध पर तत्काल कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही शराब पीकर वाहन चलाने वालों, तेज रफ्तार और लापरवाही से ड्राइविंग करने वालों पर भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। डीजीपी कैलाश मकवाना ने स्पष्ट किया कि नए साल के दौरान प्रदेशभर में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। पुलिस न केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखेगी, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर सतर्क रहेगी।

भोपाल पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक: ईरानी गैंग का गिरोह तोड़ा, दिल्ली तक फैली दहशत

भोपाल  राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक शहरों सहित दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरू सहित दर्जन भर सहित बड़े शहरों में अब तक सैकड़ों वारदात को अंजाम देने वाले भोपाल के ईरानी गैंग पर पुलिस ने छापा मारा है। देर रात भोपाल डीसीपी जोन-4 मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में भारी पुलिस बल ने एक साथ करोंद क्षेत्र में स्थित अमन कॉलोनी ईरानी डेरे में छापा मारा। छापेमारी काम्बिंग गश्त के तहत की गई।  पुलिस की इस कार्रवाई में 24 पुरुष आरोपी और 10 महिला अपराधी गिरफ्तार की गई हैं। एक साथ 34 ईरानी बदमाशों के खिलाफ भोपाल पुलिस की यह कार्रवाई वर्षों बाद की गई है। कार्रवाई का विरोध करने के लिए अपराधियों ने महिलाओं और बच्चों को आगे किया, लेकिन पुलिस भी पूरी तैयारी के साथ गई थी, इसलिए टीम में भारी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को भी शामिल किया गया था।    ईरानी डेरा … भोपाल में स्थित यह वह जगह है, जहां पुलिस भी जाने से डरती है। पुलिस इस इलाके में घुसने के लिए पूरी पलटन लेकर जाती है। रविवार अहले सुबह जब, पुलिस की टीम पहुंची तो हमला हो गया। हालांकि पुलिस की टीम डरी नहीं है और करीब 32 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। इस डेरे में रहने वाले लोगों का आतंक दिल्ली से मुंबई तक है। देश के अलग-अलग शहरों इनका आतंक रहा है। पीट गई भोपाल पुलिस दरअसल, ईरानी डेरे में रहने वाले कुख्यात अपराधियों को पकड़ने के लिए गई थी। 40 गाड़ियों में करीब 150 जवानों की टीम गई थी। पुलिस की टीम जब ईरानी डेरे में घुसी तो उस समय भोपाल का तापमान करीब 4 डिग्री सेल्सियस था। पुलिस के पहुंचने की भनक लगते ही डेरे की महिलाएं जाग गईं और पुलिस पर हमला बोल दिया। इसके बाद स्थिति बिगड़ने लगी। पुलिस ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए, उनसे डरी नहीं। डेरे से करीब 32 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 10 महिलाएं भी शामिल हैं। दिल्ली से मुंबई तक है इनका खौफ ईरानी डेरे में रहने वाले अधिकांश लोग अपराध में शामिल रहते हैं। दिल्ली से लेकर मुंबई तक की पुलिस को इनकी तलाश है। अलग-अलग शहरों में जाकर ये लूट की वारदात को अंजाम देते हैं। डेरे में कुछ नामी बदमाश भी रहते हैं। समय के हिसाब से अलग-अलग रूप धारण कर ईरानी डेरे के लोग ठगी भी करते हैं। सीबीआई अफसर से लेकर पत्रकार तक बन जाते वहीं, ईरानी डेरे के लोगों को फर्जी अफसर बनने में भी महारत हासिल है। ये लोग सीबीआई के नकली अफसर बनकर भी लोगों को डराते हैं। उनसे रुपए लूट लेते हैं। यही नहीं, लोगों को डराने के लिए डेरे के लोग पत्रकार भी बनते थे। छापेमारी के दौरान इनके पास से चैनल की आईडी भी मिली है। पत्रकार बनकर ये पुलिस और लोगों को चकमा देते थे। हिस्ट्रीशीटर बदमाश को पकड़ने का था लक्ष्य भोपाल पुलिस मुख्य रूप से एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश को पकड़ने के लिए पूरी योजना बनाकर पहुंची थी। पुलिस ने छापेमारी में आरोपियों के ठिकानों से एक नकली पिस्तौल, 21 दोपहिया वाहन और 51 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।  हिस्ट्रीशीटर बदमाश राजू ईरानी को पकड़ने गई थी पुलिस डीपीसी जोन-4 मयूर खंडेलवाल ने बताया कि नकली पुलिस बनकर अमन कॉलोनी के कुछ बदमाशों द्वारा भोपाल के ग्रामीण क्षेत्र सहित आसपास के जिलों में कुछ लोगों को ठगने की शिकायतें मिल रही थीं। इसी आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। पकड़ा गया गिरोह मुख्य रूप से बड़े शहरों में बड़ी चोरियां, भोपाल और आसपास के जिलों में मोबाइल और चेन लूट की वारदातों को अंजाम देता है। रविवार सुबह हिस्ट्रीशीटर बदमाश राजू ईरानी को पकड़ने गई थी। डेढ़ सौ से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने घरों की तलाशी लेनी चाही तो महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। वे पुलिसकर्मियों के सामने खड़ी हो गईं। जल्द ही पुरुष भी प्रदर्शन में शामिल होकर हंगामा करने लगे। महिला पुलिसकर्मियों सहित जवानों से खींचातानी करने लगे। तलाशी अभियान के दौरान बदमाश काला ईरानी के घर से एक नकली पिस्तौल मिली। काला ईरानी नकली पुलिस बनकर कई लोगों को ठग चुका है। हालांकि ठगी का शिकार अधिकांश लोगों ने प्रकरण दर्ज नहीं कराया।  दिल्ली पुलिस ने मुठभेड़ के बाद दो बदमाशों को पकड़ा था इसी साल जुलाई महीने में दिल्ली पुलिस ने अमन कॉलोनी निवासी ईरानी गैंग के दो सदस्यों- मुर्तजा अली उर्फ दमार (38) और सिराज अली (40) को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। पुलिस को उनके दिल्ली में छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके आधार पर इंद्रप्रस्थ पार्क के पास रात में घेराबंदी की गई। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों आरोपी गोली लगने से घायल हो गए थे। जांच में सामने आया कि दोनों के खिलाफ देश के कई राज्यों में हत्या के प्रयास, लूट, चोरी और ठगी जैसे संगीन अपराध दर्ज हैं। वे कई मामलों में फरार चल रहे थे। दिल्ली पुलिस ने दोनों के खिलाफ नया केस दर्ज किया था। अमेरिका और ईरान की करेंसी मिली अपराधी इतने खूंखार हैं कि इन्हें किसी दूसरे शहर में भी लूट करने से डर नहीं लगता है। छापेमारी के दौरान इनके घरों से अमेरिकी और ईरानी की करेंसी मिली है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विदेशी करेंसी लूट के ही हैं। विदेशों में बेचते हैं लूट के सामान जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि ईराने डेरे का नेटवर्क विदेशों में भी फैला है। ये लोग लूट के फोन विदेशों में भी बेचते थे। जांच में यह बात सामने आई है कि लूट के मोबाइल दुबई में बेचते थे। लूट के फोन पहले मुंबई भेजते थे। इसके बाद वहां से दुबई जाता था। अपराधियों का घर है ईरानी डेरा दरअसल, ईरानी डेरा भोपाल के बाहरी इलाके में बसा हुआ है। इनकी बस्ती इतनी सघन है कि बाहरी लोगों का घुसना मुश्किल है। इसी का फायदा उठाकर अपराधी यहां शरण लेते हैं। इन अपराधियों के लिए महिलाएं शिल्ड का काम करती हैं। पुलिस जब आती है तो पहले महिलाओं से उनका सामना होता है। बताया जाता है कि देश भर से अपराध करने के बाद अपराधी यहीं शरण लेने आते हैं। भोपाल के निशातपुरा और … Read more

महाराष्ट्र के शोलापुर से 53 मजदूरों को आज़ादी दिलाई, प्रतापगढ़ पुलिस ने किया रेस्क्यू

प्रतापगढ़ जिले में पुलिस प्रशासन ने एक बड़ी मानवीय कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के शोलापुर जिले में बंधक बनाए गए 53 आदिवासी मजदूरों को सकुशल रेस्क्यू कर लिया है। यह कार्रवाई “ऑपरेशन विश्वास” के अंतर्गत की गई, जिसका उद्देश्य आमजन में विश्वास और अपराधियों में भय का वातावरण स्थापित करना है। जिला पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ बी. आदित्य के निर्देशानुसार तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री गजेन्द्र सिंह जोधा के मार्गदर्शन में थाना घंटाली के उप निरीक्षक सोहनलाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने यह बड़ी कार्रवाई की। रेस्क्यू किए गए मजदूरों में 13 महिलाएं और 40 पुरुष शामिल हैं, जो जिले के विभिन्न आदिवासी बहुल गांवों से संबंधित हैं। मजदूरी का झांसा देकर बनाया गया बंधक : दिनांक 22 दिसंबर 2025 को जिला पुलिस अधीक्षक को सूचना प्राप्त हुई कि प्रतापगढ़ जिले के थाना घंटाली, पीपलखूंट एवं पारसोला क्षेत्र के ग्राम वरदा, जामली, मालिया, गोठड़ा, उमरिया पाड़ा, बड़ा काली घाटी, ठेसला, कुमारी सहित अन्य गांवों के महिला-पुरुषों को मजदूरी दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र के शोलापुर जिले के अकलूज थाना क्षेत्र के जाबुड़ गांव ले जाया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दलाल सीताराम पाटिल (महाराष्ट्र निवासी) एवं खान निवासी अलवर (राजस्थान) ने स्थानीय व्यक्ति की मदद से मजदूरों को इंदौर में ₹500 प्रतिदिन मजदूरी, मुफ्त भोजन व आवास का झांसा दिया। इसके बाद लगभग 100 मजदूरों को शोलापुर ले जाकर अलग-अलग जमींदारों के यहां गन्ने के खेतों में काम पर लगा दिया गया। दलालों द्वारा लाखों की रकम हड़पी : जांच में यह भी सामने आया कि दलाल खान ने जमींदारों से मजदूरों की मजदूरी के रूप में करीब 9.50 लाख रुपये अग्रिम लेकर फरार हो गया, वहीं दलाल सीताराम पाटिल ने भी लगभग 18 लाख रुपये एडवांस के रूप में प्राप्त किए। इसके बाद मजदूरों को न तो मजदूरी दी गई और न ही वापस जाने दिया गया। अत्याचार और अमानवीय व्यवहार : मजदूरों द्वारा मजदूरी मांगने पर उनके साथ मारपीट की गई तथा उन्हें जबरन खेतों के फार्म हाउसों और बाड़ों में बंद कर बंधक बनाकर रखा गया। महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने की जानकारी सामने आई है। कई मजदूर मौका पाकर किसी तरह वहां से भाग निकले, जबकि 53 मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया था।पुलिस की तत्परता से रेस्क्यू : सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर उप निरीक्षक श्री सोहनलाल मय टीम मजदूरों के परिजनों के साथ महाराष्ट्र रवाना हुए। कठिन परिस्थितियों में सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पुलिस टीम ने अलग-अलग स्थानों से सभी 53 मजदूरों को सकुशल रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के दौरान मजदूरों के पास न भोजन था और न ही वापसी का किराया। ऐसे में थाना घंटाली क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों के सहयोग से भोजन, यात्रा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं कर सभी मजदूरों को सुरक्षित प्रतापगढ़ लाया गया। मामला दर्ज, आगे की कार्रवाई जारी : इस प्रकरण में थाना घंटाली पर प्रकरण संख्या 128/2025 के तहत आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है तथा आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। सभी रेस्क्यू किए गए मजदूरों को उनके गांव सुरक्षित पहुंचाया जा रहा है। जिला पुलिस की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई से न केवल 53 परिवारों को राहत मिली है, बल्कि यह संदेश भी गया है कि प्रतापगढ़ पुलिस आमजन की सुरक्षा के लिए हर समय तत्पर है और अपराधियों के लिए कोई स्थान नहीं है।

3 साल की बच्ची की मासूम शिकायत ने जीता दिल, थाने पहुंचते ही पुलिस हरकत में आई

शाजापुर जिले के शुजालपुर में एक रोचक मामला सामने आया है, जहां स्कूल में पढ़ने वाली एक 3 साल की मासूम छात्रा चेरी का स्कूल बैग गुम हो गया. मासूम बच्ची इसकी शिकायत लेकर अपने पिता के साथ पुलिस तक पहुंच गई और पुलिस को अपनी परेशानी बताई. बच्ची ने कहा कि उसका स्कूल बैग गुम हो गया है और स्कूल बैग ना होने से मैं अपना होमवर्क कैसे करूंगी ? नन्ही चेरी के आंसू और स्कूल की नोट बुक्स, बॉटल के लिए उसका लगाव देखकर पुलिस तुरंत हरकत में आई और स्कूल बैग की तलाश शुरू कर दी. पूछताछ में पता चला कि मासूम छात्रा अपने परिजनों के साथ ऑटो रिक्शा में घर लौट रही थी. इसी दौरान स्कूल बैग ऑटो रिक्शा में छूट गया. इसके लिए पुलिस ने शहर के सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे तलाशे. इसी दौरान शहर के पुलिस चौकी चौराहा से बच्ची और उसके परिजनों को सवारी ऑटो में बैठते हुए सीसीटीवी कैमरा फुटेज पुलिस को मिल गया. बस फिर क्या था पुलिस ने उस ऑटो की तलाश शुरू कर दी. ऐसे मिला मासूम का बैग वीडियो के आधार पर ऑटो को पुलिस सहायक उप निरीक्षक धर्मेंद्र परस्ते, यातायात पुलिस प्रधान आरक्षक सुनील ने ढूंढने कोशिश की, लेकिन वाहन पर नंबर नहीं होने से दिक्कत आई. हालांकि वाहन के आगे लिखे नाम और ऊपर लगे लोहे के स्टैंड से आखिरकार खासी मशक्कत के बाद पुलिस इस ऑटो तक पहुंच ही गई. फिर ऑटो ड्राइवर परवेज खान से शुजालपुर सिटी ने स्कूल बैग जब्त किया. मासूम छात्रा का स्कूल बैग मिलते ही उसे एसडीओपी कार्यालय शुजालपुर पहुंचाया गया, जहां शुजालपुर एसडीओपी निमिष देशमुख ने मासूम छात्रा और उसके परिवार वालों को बुलाकर उसका स्कूल बैग सौंपा. पुलिस अंकल को थैंक्स अपना स्कूल बैग पाकर मासूम बेहद खुश नजर आई और उसने कहा कि बैग गुम होने से वह टेंशन में थी कि अब होमवर्क कैसे करेगी. सब वर्कबुक भी बेग में थी. मैंने पुलिस अंकल को बताया और उन्होंने बैग लाकर दिया, पुलिस अंकल को थैंक्स. यातायात पुलिस ने बच्ची के कंधों पर बेग टांगकर उसे घर रवाना किया, परिवार के आग्रह पर पुलिस ने ऑटो चालक को भी समझाइश देकर छोड़ दिया कि आगे से कोई भी बैग, सामान यात्री भूले तो तत्काल पुलिस को सौंपे. क्या बोले अधिकारी? एसडीओपी निमिष देशमुख ने बताया कि बच्ची का अपने स्कूल बैग के लिए लगाव देखकर पुलिस ने प्रयास किया और कैमरे फुटेज की मदद से बैग सौंपा. साथ ही उन्होंने वाहन चालकों से अपील की है कि अगर किसी का कोई सामान वाहन में छूट जाए तो उस सामान को पुलिस को सौंपकर सामाजिक जिम्मेदारी निर्वाह करना चाहिए, बच्ची के दादा, पिता ने भी पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया.