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राहुल की यात्रा में दिखी एकता, पर तेजस्वी की चुप्पी के पीछे क्या है गठबंधन की गांठ?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा दोनों गठबंधनों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. एनडीए में चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अधिकाधिक सीटें हासिल करने के लिए लंबे समय से बवेला मचाए हुए हैं. मांझी अब 20 सीटों के लिए अड़े हुए हैं. चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-आर (LJP-R) को न सिर्फ सीटें चाहिए, बल्कि अब सीएम पद की रेस में भी उन्हें शामिल कर दिया है. चिराग के बहनोई सांसद अरुण पासवान की नजर में चिराग सीएम पद के लिए फिट कैंडिडेट हैं. मांझी ने अधिक सीटें मांगने के पीछे के कारण भी उजागर कर दिए हैं. उनका कहना है कि पार्टी को सदन में मान्यता के लिए कम से कम 8सीटों पर जीतना जरूरी है. और, यह तभी संभव होगा, जब उनकी पार्टी को 20 या इससे अदिक सीटें मिलें. एनडीए का तो रिकार्ड ही रहा है कि टिकट बंटवारे से पहले खूब चिल्ल-पों मचती है, लेकिन जिसे जितनी सीटें मिलती हैं, वे उससे ही संतुष्ट हो जाते हैं. सबसे मुश्किल हालात 8 विपक्षी दलों के महागठबंधन में पैदा हो गए हैं. कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीट बंटवारे की शर्तों को लेकर घमासान मचा हुआ है. कांग्रेस ने कसी RJD की नकेल महागठबंधन के दो सबसे बड़े घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर तलवारें तन गई हैं. अव्वल तो कांग्रेस तेजस्वी को चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने को तैयार नहीं, जबकि तेजस्वी खुद को सीएम फेस बताते रहे हैं. बिहार अधिकार पर निकले तेजस्वी कांग्रेस की चुप्पी के बावजूद अपने को भावी सीएम के रूप में पेश कर रहे हैं. पहले भी वे कई बार यह बात कह चुके हैं. राहुल के साथ वोटर अधिकार यात्रा के दौरान उन्होंने यहां तक कह दिया कि राहुल को पीएम और उन्हें सीएम बनाने के लिए वोट कीजिए. जहां तक सीटों का सवाल है तो कांग्रेस 2020 की तरह मनपसंद 70 सीटें तो चाहती ही है, साथ ही अब उप मुख्यमंत्री का पद भी मांगने लगी है. दोनों दलों के बीच तनातनी का आलम यह है कि सीट बंटवारे के मुद्दे पर 15 सितंबर को होने वाली महागठबंधन की बैठक टालनी पड़ गई. अब तेजस्वी यादव ने भी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. खींचतान से महागठबंधन में दिख रही दरार अगर टूट की बुनियाद बन जाए तो आश्चर्य नहीं. बिहार की वह सीट, जिसे लेकर RJD-कांग्रेस में खींच गई तलवार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के अंदर सीट शेयरिंग का मसला गरमा गया है. खासकर कुटुंबा (SC) विधानसभा सीट को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच खींचतान तेज हो गई है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक आरजेडी ने इस सीट से पूर्व मंत्री सुरेश पासवान का नाम आगे कर दिया है. इससे कांग्रेस नेताओं में नाराजगी है. कांग्रेस का आरोप है कि आरजेडी जानबूझकर दबाव की राजनीति कर रही है और कुटुंबा में उनकी मजबूत स्थिति को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. दरअसल, कुटुंबा सीट पर कांग्रेस का लगातार दबदबा रहा है. मौजूदा विधायक राजेश कुमार और उनके पिता सात बार से इस सीट पर कब्जा बनाए हुए हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में भी राजेश कुमार ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी. उन्हें 50,822 वोट मिले थे, जबकि रनर-अप हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के उम्मीदवार शर्वन भुइंया को 34,169 वोट ही मिले. कांग्रेस ने तब 16,653 वोटों के अंतर से यह सीट अपने नाम की थी. साल 2020 के नतीजे कैंडिडेट    कुल वोट     वोट शेयर राजेश कुमार    50,822    36.61% शर्वन भुइंया    34,169    24.61% कहां फंसा है मामला? यही वजह है कि कांग्रेस मानती है कि इस सीट पर उनकी स्थिति बेहद मजबूत है और आरजेडी का नया चेहरा थोपना केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस बार आरजेडी की मोहताज नहीं है और बदली हुई परिस्थितियों में बेहतर तरीके से चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस नेताओं का यह भी आरोप है कि राजेश राम को डिप्टी सीएम का चेहरा सामने न लाने के लिए भी अंदरखाने राजनीति हो रही है. यानी, महागठबंधन के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है. 76 सीटों पर दावेदारी इसी बीच, खबर है कि कांग्रेस ने इस बार बिहार की 76 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है. इनमें से 38 सीटों पर जल्द ही उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इन सीटों पर आरजेडी के ग्रीन सिग्नल का इंतजार नहीं करेगी. यानी, पार्टी अब अपनी रणनीति खुद बनाने के मूड में है. आज दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक भी होने वाली है, जिसमें बिहार कांग्रेस के कई नेता शामिल होंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कांग्रेस अपने रुख को और स्पष्ट करेगी. अब देखना यह है कि यह खींचतान सीट शेयरिंग फॉर्मूले को कितना प्रभावित करती है और क्या महागठबंधन एकजुट रहकर मैदान में उतर पाता है. कांग्रेस की आक्रामक दावेदारी सीटों की संख्या के लिए आरजेडी के सामने कांग्रेस ने 2020 को आधार बनाने की शर्त रखी है. तब कांग्रेस को महागठबंधन में 70 सीटें मिली थीं. कांग्रेस का कहना है कि उसे जो सीटें दी गईं, उसमें आधी से अधिक कमजोर सीटें थीं. इसलिए उसने टिकट बंटवारे में अच्छी-बुरी सीटों में संतुलन बनाने की दूसरी शर्त रखी है. कांग्रेस केवल 19 सीटें जीत पाई थी. उसके खराब स्ट्राइक रेट को महागठबंधन की हार का एक मुख्य कारण माना गया था. कांग्रेस का कहना है कि उसे आधी से अधिक वैसी कमजोर सीटें मिली थीं, जिसकी वजह से उसका स्ट्राइक रेट खराब रहा. कांग्रेस ने अपने लिए उप मुख्यमंत्री पद की तीसरी शर्त रखी है. महागठबंधन में शामिल वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी भी डिप्टी सीएम पद के लिए पहले से ही हाय-तौबा मचाए हुए हैं. सहनी तो यहां तक कहते हैं कि अगर तेजस्वी सीएम बनेंगे तो उनका डिप्टी सीएम बनना पक्का है. कांग्रेस की शर्तों से यह साफ है कि काग्रेस अब बिहार में अपने को आरजेडी का पिछलग्गू बनाए रखने से बचना चाहती हैं. राहुल की वोटर अधिकार … Read more

राहुल गांधी की अचानक विदेश यात्राएं बनीं चिंता का कारण, CRPF ने जताई नाराजगी

नई दिल्ली केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अनशेड्यूल्ड विदेश दौरों पर आपत्ति जताई है। सुरक्षा प्रोटोकॉल तोड़ने के मामले में उन्हें एक पत्र लिखा गया है। यह पत्र CRPF के वीवीआईपी सुरक्षा प्रमुख ने जारी किया है और इसकी प्रति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी भेजी गई है। पत्र 10 सितंबर को जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि राहुल गांधी लगातार उन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, जो उनकी सुरक्षा टीम ने निर्धारित किए हैं। वीवीआईपी सुरक्षा प्रमुख ने राहुल गांधी के सुरक्षा के प्रति रवैये पर भी सवाल उठाए और कहा कि वह इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। राहुल गांधी को Z+ श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है, जिसमें ASL (Advance Security Liaison) कवर भी शामिल है। यह देश की सबसे ऊंची सुरक्षा श्रेणियों में से एक है, जिसमें बड़ी संख्या में CRPF के जवान हर वक्त सुरक्षा में तैनात रहते हैं। आपको बता दें कि बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ संपन्न करने के बाद राहुल गांधी अचानक विदेश यात्रा पर चले गए। ट्विटर पर उनकी कुछ तस्वीरें वायरल हो रही थीं। हालांकि वह उपराष्ट्रपति चुनाव में शामिल होने के लिए भारत वापस आ गए और पार्टी के कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। बिहार में यात्रा के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा अचानक गांधी को कसकर गले लगाने और उनके कंधे पर किस करने के कुछ हफ्ते बाद यह चिंता जताई गई। राहुल गांधी भी इस घटना से क्षण भर के लिए अचंभित रह गए थे। यह घटना पूर्णिया जिले में हुई, जहां से राहुल गांधी मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने दिन के अंतिम पड़ाव अररिया के लिए रवाना हुए थे। राजद नेता तेजस्वी यादव सहित सैकड़ों बाइक सवार राहुल गांधी के साथ चल रहे थे।

न रैली, न चुनाव… फिर भी रीवा में लगे राहुल गांधी के पोस्टर, लिखा- कांग्रेस को बचाओ

रीवा  कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों के बाद रीवा में लगे उनके पोस्टरों ने खलबली मचा दी है. शहर के प्रमुख मार्गों में लगे पोस्टर पर राहुल गांधी की तस्वीर है, जिसमें लिखा गया है. "राहुल गांधी जी रीवा रायशुमारी चोरी हो गई, रीवा कांग्रेस बचाओ.'' इस तरह के पोस्टर से अब कांग्रेस खुद ही घिरती हुई दिखाई दे रहीं है. पोस्टर शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित मुख्य मार्ग लगाए गए हैं. ये पोस्टर किसने लगाए यह अभी सस्पेंस बना हुआ है लेकिन कयास लागाए जा रहें है कि रीवा मे एक बार फिर कांग्रेस के अंदर गुटबाजी का बम फूटा है. जिससे सियासी हलचल भी तेज हो गई है. रीवा कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं? पोस्टरों में मोटे अक्षरों में लिखा गया है, 'कांग्रेस बचाओ, रायशुमारी चोरी हो गई है' यह वाक्य सीधे तौर पर पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है. चौराहे से गुजरने वाले लोग इन पोस्टरों को देखकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं कि रीवा कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं है. पार्टी में भीतरघात और गुटबादजी? सियासी विश्लेषक मान रहे हैं कि इस घटना के पीछे पार्टी मे अंदरूनी तौर पर असंतोष की भूमिका है. कहा जा रहा है कि जिला अध्यक्ष की नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं बरती गई और रायशुमारी को दरकिनार कर कुछ खास नेताओं की पसंद को तरजीह दी गई है. इस असंतोष का परिणाम ही सिरमौर चौराहे पर लगे पोस्टर के रूप में सामने आया. दिलचस्प यह है कि पोस्टर लगाने वाले की पहचान अब तक नहीं हो पाई है, लेकिन पार्टी के अंदरखाने में चर्चा है कि यह कदम नाराज कार्यकर्ताओं या किसी असंतुष्ट गुट की ओर से उठाया गया है. नए जिला अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद खींचतान कांग्रेस पार्टी की रीवा इकाई में लंबे समय से गुटबाजी की खबरें सामने आती रही हैं. नए जिला अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद यह खींचतान और तेज हो गई है. संगठन में कई पुराने और सक्रिय कार्यकर्ताओं ने खुलकर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि वर्षों से पार्टी के लिए मेहनत करने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया. यही कारण है कि नियुक्ति के तुरंत बाद पार्टी के भीतर असंतोष का माहौल बना हुआ है. कांग्रेस ने इस बार भी इंजि. राजेंद्र शर्मा को रीवा कांग्रेस का जिला अध्यक्ष चुना था जबकि इसके पूर्व मे भी राजेंद्र शर्मा ही जिला ही जिला अध्यक्ष के पद पर नियुक्त थे. भाजपा को मिल सकता है फायदा कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान और खुले तौर पर उभरी नाराजगी का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिल सकता है. भाजपा पहले से ही संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत है और कांग्रेस की इस आंतरिक कलह से उसे आगामी चुनावों में बढ़त मिल सकती हैं. रीवा की राजनीति में भाजपा का दबदबा कायम रहा है, ऐसे में कांग्रेस के भीतर का यह असंतोष उसकी स्थिति को और कमजोर कर सकता है. पोस्टर वॉर के जरिए नेतृत्व पर सवाल पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के इस्तेमाल किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. माना जा रहा है कि पोस्टर के जरिए है पार्टी हाईकमान को सीधा संदेश देने की कोशिश की गई है. यह भी बताने का प्रयास किया गया है की जिला स्तर पर संगठन सही ढंग से नहीं चल रहा है “रायशुमारी चोरी हो गई है” जैसी पंक्ति यह संकेत देती है कि पार्टी नेतृत्व तक नाराजगी की गूंज पहुंचाने का प्रयास किया गया है. कुछ लोग करते है गैर अनुपातिक मांग: कांग्रेस जिला अध्यक्ष रीवा में राहुल गांधी के पोस्टर को लेकर कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने कहा, ''जब पद एक होता है तो उसके कई दावेदार होते हैं और उसमें सभी की यह महत्त्वकांक्षा होती है कि वो पद उसे मिले. कांग्रेस में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो गैर अनुपातिक मांगें करते हैं वे अपना कद और साख नहीं देखते. इसके बाद भी उन्हें लगता है कि पद उन्हें मिले. रीवा में रायशुमारी हुई, जिसमें 25 हजार लोग शामिल हुए. रायशुमारी के बाद जो नाम सामने आए उसके आधार पर ही जिला अध्यक्षो की नियुक्तियां की गई.'' पोस्टर लगाने वाले साबित कर रहे कि वे उस पद लायक नहीं: राजेंद्र शर्मा कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा ने आगे कहा, '' जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर शीर्ष नेताओं की भी राय ली गई थी. यहां तक की मध्यप्रदेश की अगर बात करें तो 8 से 10 ऐसे जिला अध्यक्ष बनाएं गए जिन्हें राहुल गांधी ने खुद फोन कर उनकी नियुक्ति कर दी. CEC के मेंबर ओमकार सिंह मरकाम को डिंडोरी का जिला अध्यक्ष बनाया गया, मध्य प्रदेश के मंत्री रहे जयवर्धन सिंह को भी जिला अध्यक्ष बनाएं जाने पर सहमति बनी और वह बनेंगे. कांग्रेस पार्टी अपने तरीके से काम करती है. हर व्यक्ति को नेतृत्व से आस्था होनी चाहिए. पोस्टर लगाने वाले यह साबित कर रहे हैं कि वह उस पद के लायक नहीं हैं.'' राहुल गांधी को नहीं पता अपनी ही पार्टी की परंपरा: बीजेपी जिला अध्यक्ष अब इस मामले पर बीजेपी कहा चुप बैठने वाली थी. राहुल गांधी के रीवा में लगे पोस्टर्स पर बीजेपी के रीवा जिला अध्यक्ष वीरेंद्र गुप्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, " इत्तेफाक है कि एक तरफ राहुल गांधी वोट अधिकार यात्रा तो निकाल रहे हैं लेकिन उन्हें अपनी ही पार्टी की परंपरा का ज्ञान नहीं. सरदार पटेल पंडित जवाहर लाल नेहरू के बीच वोटिंग हुई थी तब सरदार पटेल को 12 वोट मिले थे जबकि जवाहर लाल नेहरू को 2 वोट प्राप्त हुए थे लेकिन इसके बावजूद भी पंडित जवाहर लाल नेहरू विजयी घोषित हुए थे. और यही कांग्रेस की पुरानी परंपरा रही.''    

कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ीं, साथी दलों ने राहुल गांधी को छोड़कर बढ़ाया कदम खींचने का दबाव

नई दिल्ली सबको जोड़कर चलने की कोशिश में जुटी कांग्रेस एक बार फिर अकेली पड़ती जा रही है. पीएम-सीएम वाले बिल पर विपक्षी एकता का गुब्बारा फुटने लगा है. पीएम-सीएम को हटाने वाले बिल पर जीपीसी में शामिल होने को लेकर इंडिया ब्लॉक में दो फाड़ नजर आ रहा है. इंडिया गठबंधन के प्रमुख साथियों ने कांग्रेस को फंसा दिया है. जेपीसी मामले पर राहुल गांधी अब बीच मझधार फंस चुके हैं. यहां से वह किस ओर जाएंगे, यह आने वाले वक्त में पता चल जाएगा. दरअसल, भ्रष्टाचार यानी आपराधिक मामलों में कम से कम 30 दिनों तक बिना बेल के जेल में रहने वाले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने वाले बिलों को जेपीसी के लिए भेजा गया है. इस बिल पर विचार करने के लिए बनने वाली जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति में शामिल होने को लेकर ही विपक्षी खेमे यानी इंडिया ब्लॉक मतभेद है. कांग्रेस की क्या प्लानिंग? ET की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि DMK के TKS एलंगोवन ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिल के विरोध करने और उसे दर्ज कराने के लिए जेपीसी में शामिल होने का फैसला लिया है। वहीं कांग्रेस के एक सांसद ने कहा, "हमारे पास यह सोचने के उपयुक्त कारण हैं कि जेपीसी में शामिल होना कैसे उपयोगी हो सकता है।" उन्होंने कहा कि हम हर किसी को बीजेपी के खिलाफ एक साथ ले जाना चाहते हैं। विपक्षी दल कह रहे JPC बेमतलब बता दें कि इंडिया गठबंधन में शामिल रही आम आदमी पार्टी ने भी तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ही तरह जेपीसी में अपने सदस्य नामित नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि, वामपंथी दलों ने अपनी स्थिति णअभी स्ष्ट नहीं की है लेकिन माना जा रहा है कि वह इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ है और जेपीसी में अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। कई विपक्षी दलों ने कहा है कि इस मुद्दे पर जेपीसी बेमतलब है। विपक्षी एकता में दरार? जब संसद में 130वां संविधान संशोधन विधेयक पेश हुआ तब विपक्षी खेमा एकजुट नजर आया था. मगर अब धीरे-धीरे इस एकता की दीवार ढहने लगी है. पीएम-सीएम वाले बिल पर जेपीसी में हिस्सा लेने को लेकर इंडिया ब्लॉक के प्रमुख दलों में गहरी दरार उभर आई है. अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे से लेकर अरविंद केजरीवाल तक सबने कांग्रेस को फंसा दिया है. सपा, टीएमसी, आप और उद्धव गुट वाली शिवसेना ने जेपीसी से अलग रहने का फैसला किया है. हालांकि, कांग्रेस ने अब तक जेपीसी में शामिल होने के संकेत दिए हैं. इंडिया गठबंधन के सहयोगियों के इस फैसले ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बीच मजधार में अकेला छोड़ दिया है. अब कांग्रेस के सामने यह मुसीबत है कि वह अकेले जेपीसी में जाएगी या फिर अन्य साथियों की तरह अलग रहने का ही फैसला लेगी? क्या है पीएम-सीएम बिल दरअसल, बीते दिनों संविधान (130वां) संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश हुआ. यह बिल और इसके साथ जुड़े जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन संशोधन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश शासन संशोधन विधेयक में प्रावधान है कि अगर कोई मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री किसी ऐसे अपराध में गिरफ्तार या हिरासत में रहता है, जिसकी सजा पांच साल या उससे अधिक है, और यह हिरासत लगातार 30 दिन तक रहती है, तो वह अपने पद से खुद ब खुद बर्खास्त हो जाएंगे. हालांकि, जेल से आने के बाद वह पद ग्रहण कर सकते हैं. यह विधेयक 20 अगस्त को लोकसभा में पेश हुआ. इस दौरान विपक्षी सांसदों ने इसका विरोध किया. इसके बाद सरकार ने पीएम-सीएम वाले बिल को 31 सदस्यीय जेपीसी यानी संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का फैसला किया. जेपीसी में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे.अभी तक इसका गठन नहीं हुआ है. जानिए किसका क्या स्टैंड ममता बनर्जी की टीएमसी ने भी जेपीसी से अलग होने का फैसला किया है. टीएमसी का कहना है कि यह बिल भाजपा की ‘राजनीतिक साजिश’ है, जो विपक्ष को फंसाने और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उलझाने का प्रयास है. जेपीसी में शामिल होकर टीएमसी भाजपा के खेल में नहीं पड़ेगी. अखिलेश की समाजवादी पार्टी का भी यही स्टैंड है. खिलेश यादव ने इसे ‘संघीय ढांचे पर हमला’ करार दिया. अखिलेश ने कहा कि यह बिल राज्यों की स्वायत्तता को कमजोर करेगा. हमारा फैसला स्वतंत्र है, और इस मामले में हम कांग्रेस के साथ नहीं चलेंगे. वहीं, उद्धव गुट वाली शिवसेना ने भी ममता और अखिलेश की राह अपनाई है. उद्धव ठाकरे ने कहा कि विपक्षी एकता चुनावों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लेकिन इस बिल पर जेपीसी में शामिल होना मतलब भाजपा की रणनीति को वैधता देना है। हम बाहर रहकर जनता के बीच मुद्दा उठाएंगे. शिवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि उद्धव ठाकरे को लगता है कि जेपीसी का कोई मतलब नहीं है. वहीं, अरविंद केजरीवाल की आप के सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी जेपीसी में शामिल नहीं होगी, क्योंकि ये बिल भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाने के लिए लाया गया है. राजद भी इससे अलग रहने का मन बना रही है. कांग्रेस फंस गई कांग्रेस? इस तरह इन चार दलों के फैसले ने कांग्रेस को मुश्किल में डाल दिया है. हालांकि, कांग्रेस ने अभी तक आधिकारिक फैसला नहीं लिया, लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी जेपीसी में शामिल होने के पक्ष में हैं, ताकि बिल के कमजोर पक्षों को उजागर किया जा सके. हालांकि, अखिलेश, ममता, अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे के फैसले के बाद कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया है. कांग्रेस असमंजस में है. वह क्या करे और क्या नहीं, अभी इस पर मंथन कर रही है. अगर कांग्रेस अकेले जाती है, तो यह इंडिया ब्लॉक की एकता को और कमजोर कर सकता है. साथ ही भाजपा को विपक्ष की कमजोरी का फायदा मिल सकता है. यह स्थिति राहुल गांधी के लिए चुनौतीपूर्ण है और ऐसा लग रहा है कि वह बीच मझधार में हैं. अब देखने वाली बात होगी कि इससे राहुल गांधी कैसे पार पाते हैं.

कांग्रेस में स्थिरता का संकेत, राहुल गांधी बोले- 6 महीने तक नहीं होंगे बदलाव

भोपाल  लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के नवनिर्वाचित कांग्रेस जिलाध्यक्षों को किसी का रिमोट न बनने को कहा, साथ ही गुटबाजी और अपनी-अपनी चलाने वाले बड़े नेताओं को समन्वय की नसीहत भी दी है। संगठन सृजन अभियान के अंतर्गत शहर और ग्रामीण मिलाकर बने मध्य प्रदेश के कुल 71 जिलाध्यक्षों के प्रशिक्षण में रविवार को राहुल ने यह भी कहा कि छह महीने तक जिलाध्यक्षों के कामों का मूल्यांकन किया जाएगा, तब तक किसी को भी नहीं बदला जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिलाध्यक्षों के चयन को लेकर कई जिलों में किए जा रहे विरोध के बीच राहुल गांधी का यह कहना महत्वपूर्ण है। उन्होंने पार्टी नेताओं और जिलाध्यक्षों से कहा कि गुटबाजी नहीं समन्वय से काम करें। जिलाध्यक्ष सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन में जुटें। वे देखें कि लोगों को उनके संवैधानिक अधिकार मिल पा रहे हैं या नहीं। किसी वर्ग का हक तो नहीं मारा जा रहा है। उन्होंने जिलाध्यक्षों से कहा, किसी का रिमोट मत बनना। आपको संगठन ने बैठाया है, किसी नेता ने नहीं। नई दिल्ली में हुए इस एक दिनी प्रशिक्षण कार्यक्रम को उन्होंने एक घंटे संबोधित किया। प्रशिक्षण 10 घंटे चला। प्रशिक्षण शिविर में पार्टी की सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख सुप्रिया सीनेत ने स्थानीय मु्द्दों को पोस्ट करने के लिए कहा। पहले तीन नेता टिकट बांट देते थे, अब ऐसा नहीं होगा राहुल गांधी ने कहा कि पहले दो-तीन बड़े नेता विधानसभा और लोकसभा के टिकट बांट देते थे। अब ऐसा नहीं होगा। टिकट में जिलाध्यक्षों की अनुशंसा महत्वपूर्ण रहेगी। उनके पास किसी की अनुशंसा के पीछे तर्क और तथ्य रहेंगे। जिलाध्यक्ष कांग्रेस की नींव बनेंगे। उनके नीचे जो संगठन बूथ स्तर तक बनेगा में उसमें युवा, महिला और सभी वर्गों को स्थान दिया जाएगा। हमें विचारधारा के आधार पर सत्ता में आना है। जिलाध्यक्ष का चेहरा अनुशासन वाला हो : खरगे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा जिला अध्यक्ष व उनके नीचे की टीम अनुशासित रहे। कई बार बड़े नेताओं को कठोर और नीतिगत निर्णय लेने पड़ते हैं, जो हमे अच्छे नहीं लगते पर पार्टी के लिए आवश्यक होते हैं। गुटबाजी से दूर रहे हैं। जिलाध्यक्षों का चयन संगठन सृजन के अंतर्गत पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर हुआ है। एआईसीसी मुख्यालय के बाहर इंदौर ग्रामीण अध्यक्ष वानखेड़े के विरोध में प्रदर्शन राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जब दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में जिला अध्यक्षों को अनुशासन का पाठ पढ़ा रहे थे तो बाहर अनुशासन टूट रहा था। 100 से अधिक कार्यकर्ता इंदौर ग्रामीण के अध्यक्ष विपिन वानखेड़े को हटाने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना था कि बाहरी नेता को यह जिम्मेदारी गई है।

राहुल गांधी की सुरक्षा को और सख्त करने की मांग, कांग्रेस नेता ने केंद्रीय गृह मंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली  उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की समुचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने इस पत्र को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया है। राय ने गुरुवार को लिखे गये पत्र में कहा है “जन प्रतिनिधियों को अपने राजनीतिक और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए जनता और समर्थकों से निरंतर संवाद करना पड़ता है। हालांकि, किसी भी गणमान्य राजनेता का जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है और उनकी सुरक्षा के लिए सर्वोत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिये।'' उन्होंने आगे लिखा, ''लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की व्यक्तिगत सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी कांग्रेस और भारतीय राजनीति के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। वर्तमान में वह बिहार में जन अधिकार यात्रा का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें उनके विचारों को सुनने और देखने के लिए लाखों लोग एकत्र हो रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में राहुल गांधी की उच्चतम स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी के परिजन अतीत में आतंकी हिंसा का शिकार हुए हैं, जिसमें सुरक्षा चूक एक प्रमुख कारक रही थी। राय ने आशा व्यक्त की कि गृह मंत्री राहुल गांधी की सुरक्षा के लिए उनकी इस चिंता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आवश्यक निर्देश जारी करेंगे।  

तीसरे दिन गया में तनाव, मंदिर में राहुल गांधी का इंतजार बेकार

गया  बिहार के गया में 'वोटर अधिकार यात्रा' के तीसरे दिन हंगामा हो गया. बताया जाता है कि यहां वजीरगंज के पुनावा हनुमान मंदिर पर लोग राहुल गांधी इंतजार करते रह गए, लेकिन वह नहीं पहुंचे. राहुल गांधी को पूजा अर्चना के बाद इसी मंदिर से यात्रा की शुरुआत करनी थी. लेकिन राहुल और तेजस्वी का काफिला सीधे आगे निकल गया. मंदिर में पूजा अर्चना नहीं करने से नाराज हुए स्थानीय लोग राहुल गांधी के मंदिर में पूजा नहीं करने से स्थानीय लोग नाराज हो गए. पूजा के लिए तैयार की गई थाली रखी रह गई. वहीं, राहुल गांधी का काफिला जब मंदिर के पास से गुजर गया और नहीं रुका तो स्थानीय युवा बीजेपी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे. सिर्फ वोट के लिए आते हैं नेता राहुल गांधी द्वारा मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं किए जाने से वजीरगंज के युवाओं में गुस्सा है. युवाओं ने आज तक से बातचीत में कहा कि  नेता यहां केवल वोट लेने के लिए आते हैं. हमारे लिए यह प्राचीन मंदिर बहुत महत्व रखता है.  आपको बता दें कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की तरफ से वोटर अधिकार यात्रा की शुरुआत की गई है. यह यात्रा रविवार को सासाराम से शुरू हुई और फिर सोमवार को गया जी पहुंचने से पहले औरंगाबाद तक गई. SIR पर राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर बोला हमला यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को चेतावनी दी कि जब गठबंधन सरकार बनेगी तो "वोट चोरी" पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. गांधी ने यह भी कहा कि पूरा देश चुनाव आयोग से हलफनामा मांगेगा और अगर समय मिला तो उनकी पार्टी हर विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र में "वोट चोरी" का पर्दाफाश करेगी. राहुल गांधी यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष पैकेज की बात करते हैं, उसी तरह चुनाव आयोग भी बिहार के लिए एक "नया विशेष पैकेज" लेकर आया है. जिसका नाम SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) है, जो "वोट चोरी का एक नया रूप" है.

जहां से वोट चोरी का दावा, वहीं कांग्रेस की जीत पर केंद्रीय मंत्री ने उठाए सवाल

नई दिल्ली  राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाया है। इसको लेकर केंद्र सरकार उन पर हमलावर है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी पर तंज किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी कहते हैं कि वोट चोरी हुए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि राहुल गांधी ने जिन जगहों पर वोट बढ़ने की कही है कांग्रेस वहीं पर ज्यादा सीटें जीती है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता विपक्ष चुनाव आयोग को लेकर गलत सूचना फैला रहे हैं और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं। राहुल गांधी के दावों पर सवाल गौरतलब है कि एक दिन पहले ही राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक के महादेवपुरा में बड़ी संख्या में वोटों में हेर-फेर हुई है। राहुल गांधी के मुताबिक यह सबकुछ भाजपा को जिताने के लिए किया गया। भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का दावा है कि महाराष्ट्र में 1 करोड़ वोटर बढ़े। वहीं, चुनाव आयोग के मुताबिक केवल 40 लाख वोटर बढ़े। यह राहुल गांधी के दावे से 60 फीसदी कम है। ऐसी होती है नेता विपक्ष की भाषा? भूपेंद्र यादव ने आगे कुछ और बातों की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस अधिकतर उन्हीं सीटों पर जीती है, जहां पर वोट बढ़ने की बात कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले कई दिनों से राहुल गांधी एटम बम छोड़ने की बात कर रहे हैं। वह चुनाव आयोग कर्मचारियों के खिलाफ अशालीन भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि अगर हम सत्ता में आए तो चुनाव आयोग कर्मचारियों को सजा मिलेगी। क्या नेता विपक्ष सरकारी कर्मचारियों के लिए ऐसी भाषा इस्तेमाल कर सकते हैं? क्या था राहुल गांधी का आरोप गौरतलब है कि गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक के एक विधानसभा क्षेत्र में पांच तरह की हेराफेरी के जरिए एक लाख से अधिक वोट चुराए गए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘वोट चोरी’ हमारे लोकतंत्र पर एक ‘एटम बम’ की तरह है। गांधी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनकी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बेंगलुरु मध्य लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के मतदाता आंकड़ों का विश्लेषण किया है।  

राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर सीधा निशाना, 2024 में धांधली का लगाया आरोप, EC को बताया मरा हुआ

नई दिल्ली राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर एक बार फिर जोरदार जुबानी हमला बोला है. राजधानी दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के 'एनुअल लीगल कॉन्क्लेव' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश में चुनाव आयोग का अस्तित्व नहीं रह गया है. उन्होंने कहा कि मैं हाल के इलेक्शन सिस्टम के बारे में बोल रहा हूं. मुझे हमेशा से शक था कि इसमें कुछ गड़बड़ है, 2014 से ही. मुझे गुजरात विधानसभा चुनाव में भी शक था. किसी एक पार्टी की लैंड स्लाइड विक्ट्री का ट्रेंड शक पैदा करता है. लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी को राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात (लोकसभा चुनावों में) में एक भी सीट नहीं मिलती, ये मेरे लिए आश्चर्य की बात थी. जब भी हम बोलते थे तो लोग कहते थे, सबूत कहां है? फिर, महाराष्ट्र में कुछ हुआ. लोकसभा चुनाव में हम जीत गए और फिर चार महीने बाद, हम न सिर्फ हारे, बल्कि पूरी तरह से खत्म हो गए. तीन मजबूत पार्टियां अचानक गायब हो गईं.' देश में अब चुनाव आयोग है ही नहीं राहुल गांधी ने कहा, 'हमने चुनावी धांधलियों की गंभीरता से जांच शुरू की. हमें महाराष्ट्र में यह पता चला, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच एक करोड़ नए मतदाता सामने आते हैं. इनमें से ज्यादातर वोट भाजपा को जाते हैं… अब मैं बिना किसी संदेह के कहता हूं कि हमारे पास सबूत हैं. हमारे पास ऐसे सबूत हैं जो बताते हैं कि चुनाव आयोग है ही नहीं.' कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की डिजिटल प्रति उपलब्ध नहीं कराता. इन दस्तावेजों को स्कैन नहीं किया जा सकता. चुनाव आयोग ऐसी प्रतियां क्यों उपलब्ध कराएगा जिन्हें स्कैन नहीं किया जा सकता? उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि एक लोकसभा क्षेत्र में हमने मतदाता सूची की जांच की और पाया कि 6.5 लाख मतदाताओं में से 1.5 लाख मतदाता फर्जी थे. लोकसभा चुनावों में हुई थी धांधली राहुल गांधी ने लोकसभा चुनावों में धांधली का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, 'हम इसे साबित करने जा रहे हैं, हमारे पास अब डेटा है. लोकसभा चुनाव में धांधली हो सकती है और धांधली हुई भी थी. भारत में चुनाव आयोग मर चुका है. इसे साबित करने के लिए हमारे पास दस्तावेज हैं. अगर उन्हें 15-20 सीटें कम मिलतीं, तो वह (पीएम मोदी) प्रधानमंत्री नहीं बनते.' रिटायर चुनाव अधिकरियों को भी नहीं छोड़ेंगे: राहुल एक दिन पहले संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा था कि मैं बड़ी गंभीरता के साथ कह रहा हूं कि चुनाव आयोग वोटों की चोरी कर रहा है और वह ऐसा बीजेपी के लिए कर रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में बैठकर जो भी लोग ये काम कर रहे हैं, वे देश के खिलाफ काम कर रहें हैं. ऊपर से लेकर नीचे तक कोई भी हो हम उसको छोड़ेंगे नहीं. ये राजद्रोह है. उन्होंने चुनाव आयोग के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था, 'आप कहीं भी हो, रिटायर हो या कुछ भी हो, हम आपको ढूंढ निकालेंगे.' वोटर लिस्ट में फर्जीवाड़े का दावा राहुल गांधी ने एक लोकसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा, "हमने एक सीट की वोटर लिस्ट की जांच की। उसमें 6.5 लाख वोटर थे, जिनमें से 1.5 लाख फर्जी निकले।" उनका दावा है कि यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि सुनियोजित योजना के तहत किया गया फर्जीवाड़ा है। कांग्रेस नेता ने पार्टी के विधि विभाग द्वारा विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान यह टिप्पणी की। "अगर 15-20 सीटें कम होतीं, मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन पाते" राहुल गांधी ने आगे कहा कि बीजेपी की बहुमत सरकार इसी गड़बड़ी के कारण बनी है। उन्होंने कहा, "अगर बीजेपी को 15-20 सीटें कम मिलतीं, तो नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनते।" राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, "भारत में चुनाव आयोग अब मर चुका है।" उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह संस्था स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही। "शक 2014 से था, अब सबूत मिल गए" राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें 2014 से ही चुनाव प्रणाली पर शक था, और गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान यह शक और गहराया। उन्होंने कहा, “राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में कांग्रेस को एक भी सीट न मिलना, हैरान करने वाला था। जब भी हम बोले, लोग कहते थे सबूत कहां हैं?” महाराष्ट्र बना टर्निंग पॉइंट राहुल गांधी ने दावा किया कि महाराष्ट्र में उन्हें पहली बार ठोस सुराग मिले। उन्होंने कहा, "लोकसभा में हमने जीत हासिल की, लेकिन चार महीने बाद विधानसभा में हमारी बुरी हार हुई। जब हमने जांच की तो पाया कि लोकसभा और विधानसभा के बीच 1 करोड़ नए वोटर जुड़ गए, जिनमें से अधिकतर वोट बीजेपी को गए। अब मेरे पास कोई शक नहीं कि ये चुनाव गड़बड़ी से प्रभावित था।" राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब इन तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर पूरे देश के सामने यह सच्चाई उजागर करेगी। उन्होंने कहा कि वे इसे कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उठाएंगे। हम ऐसी धमकियों पर ध्यान नहीं देते: चुनाव आयोग चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा और चुनावों में धांधली के विस्फोटक आरोपों का तीखा खंडन करते हुए उनके दावों को निराधार और गैरजिम्मेदाराना बताया था. आयोग ने कहा कि जब हम राहुल गांधी को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए बुलाते हैं तो वह नहीं आते और अब हमारे कर्मचारियों को धमकाने लगे हैं. कांग्रेस नेता के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने कहा, 'हम हर दिन लगाए जा रहे ऐसे निराधार आरोपों को नजरअंदाज करते हैं और हर दिन दी जा रही धमकियों के बावजूद, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से काम कर रहे हैं. हमने अपने सभी चुनाव अधिकारियों से ऐसे गैरजिम्मेदाराना बयानों पर ध्यान नहीं देने के लिए कहा है.'

OBC मुद्दे पर राहुल गांधी का आत्मस्वीकृति बयान: गलती मानी, सुधार का वादा किया

नई दिल्ली लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि वह ओबीसी हितों की उतनी रक्षा नहीं कर पाए, जितनी उन्हें करनी चाहिए थी। राजधानी दिल्ली में आयोजित 'भागीदारी न्याय महासम्मेलन' में संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा, जातिगत जनगणना ना करवा पाना मेरी गलती है। मैं अब इसे सुधारना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासित सभी राज्यों में जातिगत जनगणना करवाई जाएगी। राहुल गांधी ने कहा, मेरा उद्देश्य देश की उत्पादक शक्ति को सम्मान दिलाना है। ओबीसी, दलित, आदिवासी देश की उत्पादक शक्ति हैं, लेकिन उन्हें अपने श्रम का फल नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आरएसएस और बीजेपी ने जानबूझकर ओबीसी का इतिहास मिटाने की कोशिश की है। इससे पहले तेलंगाना में भी प्रदेश नेतृत्व की बैठक में राहुल गांधी ने कहा था कि दलितों, आदिवासियों और मिलाओं के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ट्रैक पर थी लेकिन बीते 10-15 सालों में ओबीसी वर्ग को लेकर हमारी प्रतिक्रिया वैसी नहीं रही , जैसी रहनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि हमने जिस जगह को खाली छोड़ दिया, बीजेपी ने वहीं कब्जा कर लिया। राहुल गांधी ने कहा, मैं जब पीछे देखता हूं तो मुझे लगता है कि एक चीज में कमी रह गई। वह गलती थी जो ओबीसी वर्ग था उसका जिस प्रकार से प्रोटेक्शन करना था, वह मैं नहीं कर पाया। उन्होंने कहा कि आप आदिवासियों के इलाके में जाते हैं तो जंगल, जल, जमीन सब सामने दिखाई देता है। लेकिन ओबीसी की दिक्कतें छिपी हुई हैं। मेरा पछतावा यही है कि अगर मुझे आपके इतिहास के बारे में थोड़ा सा भी ज्यादा मालूम होता तो मैं तभी इसका समाधान करता। मैं स्टेज से कह रहा हूं कि ये मेरी गलती है। यह कांग्रेस पार्टी की नहीं बल्कि मेरी गलती है। मैं इसे ठीक करने जा रहा हूं। अच्छा यह है कि अगर उस समय मैंने जातीय जनगणना करवा दी होती तो अब जैसी जनगणना करवानी है, वैसी नहीं हो पाती। मैंने एक गलती की, ओबीसी को नहीं समझ सका: राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि ओबीसी समुदाय की समस्याओं को वो समय रहते नहीं समझ पाए, और ये उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक भूलों में से एक रही. उन्होंने कहा, 'अगर मैंने ओबीसी की पीड़ा UPA शासन के दौरान समझ ली होती, तो उसी वक्त जातीय जनगणना करा दी होती.  उन्होंने कहा कि उन्हें दलितों, आदिवासियों और महिलाओं के मुद्दों को समझने में समय लगा, लेकिन ओबीसी की स्थिति को उन्होंने देर से पहचाना. मैंने MGNREGA, खाद्य सुरक्षा कानून, वन अधिकार कानून जैसे मुद्दों पर ठीक काम किया, लेकिन ओबीसी को लेकर मैं चूक गया. अब OBC की लड़ाई मेरी प्राथमिकता राहुल गांधी ने साफ कहा कि अब वे इस मोर्चे पर पीछे नहीं हटेंगे, और जातीय जनगणना से लेकर आरक्षण विस्तार तक, वो OBC के अधिकारों की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाएंगे. उन्होंने कहा, 'PGV (प्रियंका गांधी वाड्रा) से पूछिए, अगर राहुल गांधी कुछ ठान ले, तो क्या वो पीछे हटते हैं?' तेलंगाना की जातीय गणना सुनामी जैसी राहुल गांधी ने कांग्रेस शासित तेलंगाना सरकार की जातीय जनगणना को 'तूफान' बताया और कहा कि उसके आंकड़े चौंकाने वाले हैं. तेलंगाना के कॉर्पोरेट दफ्तरों में कितने ओबीसी, दलित, आदिवासी हैं – यह एक मिनट में सामने आ जाता है. नरेंद्र मोदी कोई बड़ी समस्या नहीं हैं प्रधानमंत्री पर तीखा हमला करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'नरेंद्र मोदी कोई बड़ी समस्या नहीं हैं. वो तो बस अपने प्रचार का एक शो हैं. उनके पास असली ताकत नहीं है." वो हमारे सिर पर चढ़ गए हैं, असल समस्या RSS है.' RSS OBC का सबसे बड़ा दुश्मन राहुल गांधी ने OBC समुदाय से सीधे कहा कि उनका असली विरोधी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) है. 50% आरक्षण की सीमा टूटेगी उन्होंने दावा किया कि जातीय जनगणना के बाद आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा खुद-ब-खुद टूट जाएगी. उन्होंने उदाहरण दिया कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पहले ही यह दीवार तोड़ दी है. आइए जानते हैं कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस महासम्मेलन में क्या-क्या कहा? सभा को संबोधित करते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, 'यह भागीदारी न्याय सम्मेलन न केवल एक राजनीतिक सभा है, बल्कि यह भारत की पिछड़ी और वंचित जातियों की एक सामूहिक पुकार है. डॉ. अंबेडकर ने कहा था — "न्याय ही राष्ट्र की आत्मा है." आज यह वंचित लोग समाज में हो रही असमानता के खिलाफ आवाज उठाने के लिए पुकार रही है'. उन्होंने कहा कि हमें यह स्वीकार करना होगा कि भारत का सामाजिक ढांचा न्याय पर नहीं, बल्कि बहिष्करण पर आधारित था.  जिन्होंने यह देश बनाया — हमारे उत्पादक वर्ग, जिनमें अधिकांश पिछड़े वर्गों से हैं — उन्हें शिक्षा, भूमि और नेतृत्व से वंचित रखा गया. उनकी मेहनत का सम्मान नहीं, बल्कि सामाजिक जंजीरों में जकड़ दिया गया. यह कोई संयोग नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित व्यवस्था थी. बीजेपी-आरएसएस की विचारधारा इस व्यवस्था को खत्म नहीं करना चाहती, बल्कि उसे महिमामंडित करती है.  राहुल गांधी ने कहा कि तेलंगाना में जो जातीय जनगणना हुई उसका असर आपको अब दिखाई देगा। जैसे सुनामी जब आई थी तब 1 हजार किलोमीटर लंबा क्रैक जमीन में आ गया था। किसी ने नहीं देखा लेकिन दो तीन घंटे बाद उसका असर दिखाई दिया। वहीं तेलंगाना में भी हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि तेलंगाना में जो जातीय जनगणना हुई उसका असर आपको अब दिखाई देगा। जैसे सुनामी जब आई थी तब 1 हजार किलोमीटर लंबा क्रैक जमीन में आ गया था। किसी ने नहीं देखा लेकिन दो तीन घंटे बाद उसका असर दिखाई दिया। वहीं तेलंगाना में भी हुआ है। पीएम मोदी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री जी कहते हैं डेटा, डेटा, डेटा, 3जी, 4जी, 5 जी। 50 साल पहले जिसके पास तेल था उसी के पास ताकत थी। लेकिन आज का तेल डेटा है। डेटा कंपनियों के पास होता है। आप रिलायंस या ऐमजॉन के पास जाएंगेतो वे आपको डेटा दिखा देंगे। अस्पताल में जाएंगे तो डेटा दिखा देंगे। लेकिन जो डेटा तेलंगाना सरकार के पास है उसकी देश में कोई तुलना नहीं है। हम आपको एक मिनट में बता सकते हैं कि तेलंगाना के सारे … Read more