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‘डायरेक्ट ड्राइव’ ऑटो सिग्नल सिस्टम से ट्रेनें दौड़ेंगी तेज, 33.86 किमी. पर बढ़ेगी गति

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने रेलवे सिग्नलिंग में बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। कुरवाई केथोरा-मंडी बामोरा-कालहार खंड के कुल 33.86 किमी. डबल लाइन पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली को कमीशन किया है। इस सेक्शन में ट्रेन के प्रवेश करते ही सुरक्षित सिग्नल रिसीव और फॉरवर्ड होंगे। इसी के साथ जैसे-जैसे ट्रेन आगे जाएगी, वैसे सिग्नल क्लीयर होते जाएंगे। कुल मिलाकर एआइ सिस्टम जैसी इस तकनीक में मानवीय त्रुटि की आशंका काफी कम होगी। खास बात यह है कि यहां पहली बार डायरेक्ट ड्राइव मॉड्यूल आधारित तकनीक उपयोग की है। इस प्रणाली में ब्लॉक सेक्शन के ऑटो सिग्नलों को सीधे वे साइडकैबिनेट के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। इससे पहले की पारंपरिक व्यवस्था पर निर्भरता कम होगी। इससे सिस्टम तेज, भरोसेमंद और रखरखाव में आसान बनेगा। दो नए ऑटो हट बनेंगे भोपाल मंडल के कुरवाई- कैथोरा मंडी बामोरा के बीच इस सिस्टम के लगने के बाद नए ऑटो हट बनाए जाएंगे। ऑटो हट में मॉनीटरिंग सिस्टम होगा, जो पूरा डेटा ट्रांसमिशन स्पीड और साइबर अटैक से सुरक्षा दिलाएगा। भोपाल-बीना-इटारसी बनेगा फ्रेट कॉरिडोर भोपाल रेल मंडल के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल इटारसी-भोपाल-बीना सेक्शन पर चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। 237 किमी लंबी इस परियोजना पर 4,329 करोड़ खर्च होंगे, जिससे यात्री और मालगाडिय़ों के संचालन में सुधार होगा। यह नया रेल कॉरिडोर इटारसी से शुरू होकर भोपाल होते हुए बीना तक जाएगा। यह मार्ग नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, भोपाल, विदिशा और सागर जिलों से होकर गुजरेगा। वर्तमान में यह सेक्शन अत्यधिक व्यस्त है, जहां यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी मात्रा में मालगाडिय़ों का संचालन होता है। चौथी लाइन बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और ट्रेनें 220 किमी. की स्पीड से दौड़ सकेंगी। भोपाल मंडल में डायरेक्ट ड्राइव सिस्टम को लागू किया है। बाकी सेक्शनों में भी इस तकनीक को इंस्टाल किया जाएगा। सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम

यात्रियों को राहत! ट्रेन छूटने से ठीक पहले तक बदलें बोर्डिंग स्टेशन, रेलवे ने बदले नियम

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। अब ट्रेन छूटने के चंद मिनटों पहले तक आप अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए इस नए प्रस्ताव से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो अंतिम समय में किसी कारणवश अपना स्टेशन बदलना चाहते हैं। अब दूसरे चार्ट तक बदलें अपना बोर्डिंग स्टेशन भारतीय रेलवे अपने सिस्टम को और अधिक 'पैसेंजर फ्रेंडली' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। रेलवे बोर्ड के एक नए प्रस्ताव के अनुसार, यात्री अब ट्रेन का दूसरा आरक्षण चार्ट (Second Reservation Chart) तैयार होने तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रेन प्रस्थान करने के लगभग 30 मिनट पहले तक यात्रियों के पास अपना स्टेशन बदलने का विकल्प मौजूद रहेगा।   क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? वर्तमान नियमों के तहत, बोर्डिंग पॉइंट में बदलाव केवल पहला चार्ट बनने तक ही किया जा सकता है। लंबी दूरी की ट्रेनों के मामले में, पहला चार्ट ट्रेन छूटने से 8 से 20 घंटे पहले ही बन जाता है। ऐसे में यदि किसी यात्री को अंतिम समय में शहर के किसी दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़नी हो, तो उसके पास कानूनी रूप से कोई विकल्प नहीं बचता था। नए नियम से यात्रियों की यह 'लास्ट मिनट' की चिंता दूर हो जाएगी। तकनीकी जांच और क्रियान्वयन रेलवे बोर्ड के निदेशक (पैसेंजर मार्केटिंग-द्वितीय) संजय मनोचा ने 19 फरवरी को क्रिस (CRIS) को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव की तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) पर रिपोर्ट मांगी है।     सॉफ्टवेयर अपडेट: बोर्ड यह समझना चाहता है कि इस बदलाव से रेलवे के रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।     चरणबद्ध शुरुआत: रिपोर्ट सकारात्मक आने पर इस सुविधा को पहले कुछ चुनिंदा ट्रेनों में 'पायलट प्रोजेक्ट' के तौर पर शुरू किया जाएगा, जिसके बाद इसे सभी ट्रेनों के लिए लागू कर दिया जाएगा। क्या हुआ मुख्य बदलाव     पुराना नियम : केवल प्रथम चार्ट (आठ-20 घंटे पहले) तक बदलाव संभव।     नया प्रस्ताव : द्वितीय चार्ट (ट्रेन प्रस्थान से 30 मिनट पहले) तक बदलाव की सुविधा।     उद्देश्य : यात्रियों को अंतिम समय में स्टेशन बदलने का विकल्प देना। यात्रियों को क्या मिलेगा?     अचानक योजना बदलने पर भी सीट सुरक्षित रहेगी।     बिना बोर्डिंग पॉइंट बदले दूसरे स्टेशन से चढ़ने पर होने वाले जुर्माने का डर खत्म होगा।     यात्री IRCTC ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से यह बदलाव कर पाएंगे।

त्योहार में सफर आसान: होली को लेकर रेलवे ने चलाई विशेष ट्रेनें, जानें पूरा रूट और स्टॉपेज

बीना रेलवे ने होली पर यात्रियों की सुविधा एवं उनकी यात्रा मांग को पूरा करने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों के लिए विशेष किराए पर स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया गया है। इसी के तहत रेलवे ने एलटीटी-बनारस-एलटीटी, पुणे-गोरखपुर-पुणे एवं सीएसएमटी-गोरखपुर-सीएसएमटी के बीच स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। रेलवे जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि 01073 एलटीटी-बनारस स्पेशल ट्रेन यात्रा मांग पर 25 एवं 26 फरवरी और होली के अवसर पर 4 एवं 5 मार्च को लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन से दोपहर 12.15 बजे चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन रात 1.10 बजे बनारस स्टेशन पहुंचेगी। 01074 बनारस-एलटीटी स्पेशल ट्रेन 27 एवं 28 फरवरी एवं 6 एवं 7 मार्च को सुबह 6.35 बजे बनारस से चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए दूसरे दिन शाम 4.40 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी। ट्रेन में एक एसी द्वितीय श्रेणी, 6 एसी तृतीय श्रेणी, 9 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य श्रेणी और 2 एसएलआरडी सहित कुल 22 कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों दिशाओं में ठाणे, कल्याण, इगतपुरी, नासिक रोड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, गोविंदपुरी जंक्शन, फतेहपुर, सूबेदारगंज (प्रयागराज) एवं वाराणसी स्टेशनों पर रुकेगी। पुणे-गोरखपुर-पुणे चलेगी 16-16 ट्रिप 01415 पुणे-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन 21 से 28 फरवरी व 1 से 8 मार्च तक प्रतिदिन पुणे स्टेशन से सुबह 6.50 बजे चलेगी, जो बीना स्टेशन पर रुकते हुए दूसरे दिन शाम 4 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार 01416 गोरखपुर-पुणे स्पेशल ट्रेन 22 फरवरी से 9 मार्च तक प्रतिदिन शाम 5.30 बजे गोरखपुर से चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन 3.15 बजे पुणे स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में 1 एसी द्वितीय श्रेणी, 5 एसी तृतीय श्रेणी, 6 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य श्रेणी एवं 2 एसएलआरडी सहित कुल 18 कोच रहेंगे। यह स्टेशन पर दौंड कॉर्ड लाइन, अहिल्यानगर जंक्शन (अहमदनगर), कोपरगांव, मनमाड, भुसावल, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, गोंडा एवं बस्ती स्टेशनों पर रुकेगी। सीएसएमटी-गोरखपुर-सीएसएमटी के बीच चलेगी 16 ट्रिप स्पेशल ट्रेन 01079 सीएसएमटी-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन 21 फरवरी से 8 मार्च तक प्रतिदिन सीएसएमटी स्टेशन से रात 10.30 बजे चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन सुबह 10 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। इसी प्रकार 01080 गोरखपुर-सीएसएमटी स्पेशल ट्रेन 23 फरवरी से 10 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 2.30 बजे गोरखपुर से चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन रात 12.40 बजे सीएसएमटी पहुंचेगी। इस ट्रेन में एक एसी द्वितीय श्रेणी, 6 एसी तृतीय श्रेणी, 9 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य श्रेणी एवं 2 एसएलआरडी सहित कुल 22 कोच रहेंगे। यह ट्रेन दोनों तरफ से दादर, ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, मनमाड़, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, भोपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, कानपुर सेन्ट्रल, लखनऊ, गोंडा, बस्ती एवं खलीलाबाद स्टेशनों पर रुकेगी।

रेलवे की होली स्पेशल ट्रेनें: त्योहारों के दौरान बढ़ती भीड़ के बीच अब आसानी से घर पहुंचे

रतलाम  होली के त्योहार पर अपने घर जाने का प्लान बना रहे लोगों को यदि ट्रेनों में जगह नहीं मिल रही है, तो चिंता की कोई बात नहीं है. रेलवे यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए 5 जोड़ी होली स्पेशल ट्रेन चलाने जा रहा है. रतलाम रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों से यह होली स्पेशल ट्रेन गुजरेगी. मुंबई, वडोदरा, सूरत और प्रयागराज, बनारस, पटना के लिए चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन 22 फरवरी से 29 मार्च के मध्य संचालित की जाएंगी. रतलाम मंडल से होकर चलेगी होली स्‍पेशल ट्रेनें डॉ. अंबेडकर नगर – पटना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन ट्रेन संख्या 09343, डॉ. अंबेडकर नगर – पटना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन हर गुरुवार को 18:00 बजे डॉ. अंबेडकर नगर से चलकर अगले दिन शाम 18:30 बजे पटना पहुंचेगी. यह ट्रेन डॉ. अम्बेडकर नगर से 26 फरवरी 2026 से 26 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में यह गाड़ी पटना – डॉ. अंबेडकर नगर स्पेशल (09344) हर शुक्रवार को 21:30 बजे पटना से चलकर शनिवार की रात 23:55 बजे डॉ. अंबेडकर नगर पहुंचेगी . यह ट्रेन पटना से 27 फरवरी 2026 से 27 मार्च 2026 तक चलेगी. इस ट्रेन का दोनों दिशाओं में इंदौर, फतेहाबाद चंद्रावतीगंज, उज्जैन, मकसी, संत हिरदाराम नगर, विदिशा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुरवारा, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पं. दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा एवं दानापुर स्टेशनों पर ठहराव रहेगा. मुंबई सेंट्रल – बनारस साप्ताहिक एसी स्पेशल ट्रेन संख्या 09183, मुंबई सेंट्रल – बनारस स्पेशल हर बुधवार को 22:30 बजे मुंबई सेंट्रल से चलकर शुक्रवार को सुबह 10 :30 बजे बनारस पहुंचेगी. यह ट्रेन 04 मार्च से 25 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में यह ट्रेन बनारस– मुंबई सेंट्रल स्पेशल (09184) हर शुक्रवार को 14:30 बजे बनारस से चलकर रविवार को सुबह 4:20 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी. यह ट्रेन 06 मार्च से 27 मार्च 2026 तक चलेगी. इस ट्रेन का दोनों दिशाओं में बोरीवली, पालघर, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, भरतपुर, अछनेरा, आगरा ईदगाह, टूंडला, शिकोहाबाद, मैनपुरी, भोगांव, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, जंघई एवं भदोही स्टेशनों पर ठहराव रहेगा. मुंबई सेंट्रल – कटिहार साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 09189, मुंबई सेंट्रल – कटिहार साप्ताहिक स्पेशल हर शनिवार को 10:55 बजे मुंबई सेंट्रल से चलकर सोमवार को सुबह 07:30 बजे कटिहार पहुंचेगी. यह ट्रेन 21 फरवरी 2026 से 28 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में कटिहार – मुंबई सेंट्रल स्पेशल (09190) हर मंगलवार को 00:15 बजे कटिहार से प्रस्थान कर बुधवार शाम 18:40 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी. यह ट्रेन 24 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक चलेगी. यह ट्रेन दोनों दिशाओं में बोरीवली, वापी, वलसाड, भरूच, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, विदिशा, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, गोंडा, मनकापुर, बस्ती, खलीलाबाद, गोरखपुर, देवरिया सदर, सिवान, छपरा, हाजीपुर, बरौनी, बेगूसराय, खगड़िया एवं नौगछिया स्टेशनों पर रुकेगी. ट्रेन संख्या 09189 का सूरत स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव होगा. वडोदरा – गोरखपुर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 09111, वडोदरा – गोरखपुर साप्ताहिक स्पेशल हर सोमवार को 19:00 बजे वडोदरा से चलकर कर अगले दिन 23:30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी. यह ट्रेन 23 फरवरी 2026 से 23 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में गोरखपुर – वडोदरा स्पेशल(09112) हर बुधवार को 05:00 बजे गोरखपुर से चलकर अगले दिन सुबह 10:35 बजे वडोदरा पहुंचेगी. यह ट्रेन 25 फरवरी 2026 से 25 मार्च 2026 तक चलेगी. यह ट्रेन दोनों दिशाओं में गोधरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, भरतपुर, आगरा फोर्ट, टुंडला, शिकोहाबाद, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कानपुर, लखनऊ, बाराबंकी, गोंडा एवं बस्ती स्टेशनों पर रुकेगी. वडोदरा – मऊ साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन संख्या 09195, वडोदरा – मऊ साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल हर शनिवार को 19:00 बजे वडोदरा से चलकर अगले दिन 20:45 बजे मऊ पहुंचेगी. यह ट्रेन 21 फरवरी 2026 से 28 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में यह ट्रेन मऊ – वडोदरा स्पेशल (09196) हर रविवार को 23:15 बजे मऊ से प्रस्थान कर मंगलवार को 00:45 बजे वडोदरा पहुंचेगी. यह ट्रेन 22 फरवरी 2026 से 29 मार्च 2026 तक चलेगी. यह ट्रेन दोनों दिशाओं में दाहोद, रतलाम, कोटा, बयाना, आगरा फोर्ट, टुंडला, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, सुल्तानपुर एवं वाराणसी स्टेशनों पर रुकेगी. ट्रेन संख्या 09195 का गोधरा स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव होगा. होली स्पेशल ट्रेनों की बुकिंग हो चुकी है शुरू रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि "होली स्पेशल ट्रेन संख्या 09343, 09183, 09189, 09111 और 09195 की बुकिंग सभी पीआरएस काउंटरों तथा आईआरसीटीसी वेबसाइट पर शुरू हो चुका है. इन ट्रेनों के ठहराव सहित अन्य विस्तृत जानकारी के लिए यात्री www.enquiry.indianrail.gov.in पर विजिट कर सकते हैं."

अमृत भारत स्टेशन योजना से बिहार में बदल रहा रेलवे का चेहरा

कटिहार. भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई अमृत भारत स्टेशन योजना देशभर में रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण का नया अध्याय लिख रही है। इस संबंध में सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि एनएफ रेल अंतर्गत बिहार, असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में जहां बड़े पैमाने पर स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है, वहीं बिहार के सीमावर्ती स्टेशन भी इस परिवर्तन यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत चयनित स्टेशनों के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार कर चरणबद्ध तरीके से यात्री सुविधाओं और आधारभूत संरचना का विकास किया जा रहा है। स्टेशन पहुंच मार्ग, सर्कुलेटिंग एरिया, आधुनिक प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय, लिफ्ट-एस्केलेटर, फ्री वाई-फाई, अत्याधुनिक यात्री सूचना प्रणाली और आकर्षक स्टेशन भवन इसके प्रमुख घटक हैं। वन स्टेशन वन प्रोडक्ट कियोस्क के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पूर्वोत्तर में 60 स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य जारी है, जिनमें असम के 50 स्टेशन शामिल हैं। हैवर गांव रेलवे स्टेशन असम का पहला अमृत भारत स्टेशन बनकर आधुनिक सुविधाओं और असमिया विरासत के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत कर चुका है। इसी कड़ी में बिहार के कटिहार और किशनगंज सहित अन्य रेलवे स्टेशन को भी अमृत भारत योजना के तहत विकसित किया जा रहा है। सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ये दोनों स्टेशन पूर्वोत्तर और बिहार को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके पुनर्विकास से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा स्थानीय व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नया आयाम मिलेगा। अमृत भारत स्टेशन योजना न केवल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बना रही है, बल्कि स्टेशनों को सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के सशक्त केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रही है। बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं के साथ यह पहल असम, पूर्वोत्तर और बिहार में विकास की नई रफ्तार का प्रतीक बनती जा रही है। जो अत्याधुनिक तकनीकों और सुख सुविधाओं से सज्जित होगा। जिससे यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसा सुखद अनुभव मिलेगी।

MP में रेललाइन विस्तार: महू-खंडवा गेज परिवर्तन का काम जल्द, महाराष्ट्र-साउथ से सीधे जुड़ेगी ट्रेनें

महू   मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के डॉ. आंबेडकर नगर (महू) से खंडवा तक गेज कन्वर्जन में तेजी आने वाली है। महू से बलवाड़ा तक के महत्वपूर्ण घाट सेक्शन के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा रेलवे को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। डॉ. आंबेडकर नगर से बलवाड़ा के बीच लगभग 454 हेक्टेयर वन भूमि पर रेलवे द्वारा निर्माण कार्य किया जाना है। वन विभाग से भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया चल रही थी। वन विभाग ने भेजा अंतिम प्रस्ताव रेलवे द्वारा वन विभाग की सभी शर्तों के पालन की सहमति के बाद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंधन) द्वारा मंत्रालय को सैद्धांतिक स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजा गया था। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि मंत्रालय से सैद्धांतिक अनुमति प्राप्त होने के बाद रेलवे द्वारा संबंधित क्षेत्र में कार्य शुरू करने के लिए वन विभाग से अंतिम अनुमति का प्रस्ताव भेजा है। वन विभाग से स्वीकृति प्राप्त होते ही निर्माण प्रारंभकर दिया जाएगा। महू-खंडवा गेज कन्वर्जन इंदौर के लिए खास है। इस लाइन से शहर का जुड़ाव महाराष्ट्र और साउथ से होगा। घाट सेक्शन के लगभग 454 हेक्टेयर वन भूमि के अधिग्रहण के लिए रेलवे निर्माण विभाग द्वारा पूर्व में 100.08 करोड़ वन विभाग को जमा कराए गए हैं। बीते दिनों, महू स्टेशन के विस्तार और महू-खंडवा नई रेल लाइन परियोजना के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। लंबे समय से यहां बने मकानों के कारण काम अटका हुआ था। कल भी पक्के निर्माणों पर मशीनें चलीं तो कई परिवारों ने सामान समेटने की मशक्कत की। प्रशासन ने पहले ही नोटिस जारी कर दिए थे, इसलिए अधिकतर लोगों ने खुद ही घर खाली कर दिए थे। बचे हुए हिस्सों को भी पूरी तरह हटाकर क्षेत्र समतल कर दिया गया।

एमपी में रेलवे विस्तार पर पर्यावरण चिंता, लाखों पेड़ों की कटाई को केंद्र की हरी झंडी बाकी

इंदौर मध्यप्रदेश में महत्वाकांक्षी महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के तहत घने जंगलों में निर्माण शुरू करने के लिए रेलवे ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मांगी है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद दो जिलों में फैले घने जंगलों में बड़ी रेल लाइन के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। दरअसल, भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश में महू-खंडवा लाइन का गेज बदलने का काम शुरू करने के लिए केंद्र से आखिरी मंजूरी मांगी है। इस काम में 1.24 लाख से ज्यादा पेड़ों को काटा जाएगा। एक बार केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिल जाने के बाद, दो जिलों के जंगलों में ब्रॉड गेज लाइन के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि 156 km की ब्रॉड-गेज लाइन, आज़ादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 km के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी.गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है.एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के PRO मुकेश कुमार ने कहा, लगभग 90 km के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंज़ूरी की जरूरत है.उन्होंने कहा, “महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच करीब 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा. जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में 100.08 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है.” दो साल में पूरा होगा काम अधिकारियों ने बताया कि 156 किमी की ब्रॉड-गेज लाइन, आजादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 किमी के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी। गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है। वन विभाग को मिले 100.08 करोड़ एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के पीआरओ मुकेश कुमार ने कहा कि लगभग 90 किमी के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंजूरी की जरूरत है। महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा। जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही वन विभाग में 100.08 करोड़ रुपए जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है। मुआवजे के तौर पर लगाएंगे डबल पौधे रेलवे अधिकारियों ने कहा कि महू-खंडवा गेज कन्वर्जन से उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे पैसेंजर सर्विस और माल ढुलाई दोनों में सुधार होगा। वहीं वन विभाग के एक अधिकारी ने अनुमान लगाया कि इंदौर और पड़ोसी खरगोन जिलों में बाकी कंस्ट्रक्शन के लिए 1.24 लाख पेड़ काटने पड़ सकते हैं। डिपार्टमेंट ने पर्यावरण पर असर कम करने और बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाने के लिए एक डिटेल्ड प्लान तैयार किया है। एनवायरनमेंटल नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित एरिया से दोगुने एरिया में मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाए जाएंगे।

रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर, RAC टिकट पर मिल सकता है रिफंड

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे में सफर करने वाले लाखों यात्रियों को आने वाले समय में एक बड़ी राहत मिल सकती है। संसद की एक शक्तिशाली समिति ने रेल मंत्रालय को सुझाव दिया है कि आरएसी (RAC) टिकट पर यात्रा करने वाले वैसे यात्रियों को किराये का कुछ हिस्सा वापस करना चाहिए जिन्हें पूरा किराया देने के बावजूद ट्रेन में पूरी बर्थ नहीं मिल पाती है। संसद में 4 फरवरी को पेश की गई लोक लेखा समिति (PAC) की रिपोर्ट ‘भारतीय रेलवे में ट्रेनों के संचालन की समयबद्धता और यात्रा समय’ में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, आरएसी श्रेणी के यात्रियों को कंफर्म टिकट के बराबर ही पूरा किराया देना पड़ता है, लेकिन यात्रा के दौरान उन्हें केवल बैठने के लिए आधी सीट (बर्थ) ही मिलती है। समिति ने इस व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि बिना बर्थ सुविधा के पूरा किराया वसूलना न्यायोचित नहीं है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा, "समिति का मानना है कि चार्ट तैयार होने के बाद भी यदि यात्री आरएसी श्रेणी में ही रहता है और उसे पूरी बर्थ नहीं मिलती है तो उससे पूरा किराया लेना गलत है। मंत्रालय को एक ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे ऐसे यात्रियों को किराये का आंशिक हिस्सा वापस मिल सके।" फिलहाल, आईआरसीटीसी (IRCTC) के नियमों के मुताबिक यदि आरएसी ई-टिकट को ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से 30 मिनट पहले तक कैंसिल नहीं किया जाता या ऑनलाइन टीडीआर (TDR) फाइल नहीं की जाती। ऐसे में कोई रिफंड नहीं मिलता है। समिति का तर्क है कि जब यात्री आधी सीट पर सफर करने को मजबूर है तो उसे सर्विस भी आधी ही मिल रही है, इसलिए भुगतान भी उसी अनुपात में होना चाहिए। यह सिफारिश अगर लागू होती है तो यह रेलवे के दशकों पुराने किराये ढांचे में एक बड़ा बदलाव होगा। इन 13 ट्रेनों में RAC पर पाबंदी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि रेलवे ने इस साल की शुरुआत से आरएसी नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। अब वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी 13 आधुनिक ट्रेनों में आरएसी टिकट धारकों को बोर्डिंग यानी ट्रेन में चढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इन ट्रेनों में केवल कंफर्म टिकट वाले यात्री ही सफर कर सकते हैं। गुवाहाटी (कामाख्या)-रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस डिब्रूगढ़-लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस अलीपुरद्वार – एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस अलीपुरद्वार-मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस कोलकाता (संतरागाछी) – ताम्बरम अमृत भारत एक्सप्रेस कोलकाता (हावड़ा)-आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस कोलकाता (सियालदह)-बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस तिरुवनंतपुरम सेंट्रल-तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस तिरुवनंतपुरम उत्तर-चार्लापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस नागरकोइल जंक्शन-मंगलुरु जंक्शन अमृत भारत एक्सप्रेस संसदीय समिति की सिफारिश के बाद अब गेंद रेल मंत्रालय के पाले में है। मंत्रालय को अब यह तय करना है कि वह इस पार्शियल रिफंड की गणना कैसे करेगा और इसे यात्रियों के खातों में डिजिटल रूप से वापस भेजने के लिए अपने सॉफ्टवेयर (CRIS/IRCTC) में क्या बदलाव करेगा।

पटरी नवीनीकरण तेज, भोपाल मंडल में 100 किमी से अधिक ट्रैक का सुधार, यात्रियों के लिए सुरक्षा बढ़ाई

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल में अधोसंरचना विकास के साथ-साथ अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ट्रैक नवीनीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पंकज त्यागी के मार्गदर्शन में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से ट्रैक अनुरक्षण से जुड़े संरक्षा-आधारित कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भोपाल मंडल में कंप्लीट ट्रैक रिन्यूअल (सीटीआर), थ्रू रेल रिन्यूअल (टीआरआर), थ्रू स्लीपर रिन्यूअल (टीएसआर), थ्रू टर्नआउट रिन्यूअल (टीटीआर) तथा डीप स्क्रीनिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य आवश्यक ट्रैफिक ब्लॉक लेकर उच्च संरक्षा मानकों के अनुरूप निष्पादित किए जा रहे हैं। नौ माह में हुआ व्यापक ट्रैक नवीनीकरण वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में 100.741 ट्रैक किलोमीटर में सीटीआर, 121.23 ट्रैक किलोमीटर में टीआरआर, 80.245 ट्रैक किलोमीटर में टीएसआर तथा 80.250 समतुल्य यूनिट्स में टीटीआर का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके अतिरिक्त 55 टर्नआउट्स एवं 168.391 ट्रैक किलोमीटर प्लेन ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग भी की गई।  

20 साल का रिवाज खत्म, रेलवे रिटायरों को गोल्ड-प्लेटेड चांदी का मेडल नहीं देगा

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे में सामने आए चांदी के नकली सिक्के (मेडल) घोटाले के बाद बड़ा असर देखने को मिला है। रेलवे बोर्ड ने इस मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देने की 20 साल पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। रेलवे की ओर से अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विदाई उपहार के रूप में गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने इस संबंध में  औपचारिक आदेश जारी किया। आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि रिटायर होने वाले रेलवे अधिकारियों को सोने की परत वाले चांदी के मेडल देने की प्रथा को बंद करना है। यानी, सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारियों को गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल देने की प्रथा को समाप्त किया जाता है।  दरअसल, रेलवे ने मार्च 2006 से अपने रिटायर होने वाले कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप लगभग 20 ग्राम वजन का स्वर्ण मढ़ा चांदी का सिक्का देना शुरू किया था। बीते करीब 20 वर्षों में हजारों कर्मचारियों को यह चांदी का सिक्का विदाई उपहार के रूप में दिया गया। यह परंपरा रेलवे में सम्मान और सेवा के प्रतीक के तौर पर देखी जाती रही है। हालांकि, इस फैसले के पीछे भोपाल मंडल में सामने आया मेडल घोटाला एक बड़ी वजह माना जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि रिटायरमेंट पर कर्मचारियों को दिए गए कई मेडल नकली थे और उनमें चांदी की मात्रा महज 0.23 प्रतिशत पाई गई। यानी जिन सिक्कों को चांदी का बताकर दिया गया, वे नाम मात्र के लिए भी चांदी के नहीं थे। मामला सामने आने के बाद रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। साथ ही, रेलवे के पास मौजूद मौजूदा मेडल स्टॉक का उपयोग अब रिटायरमेंट उपहार के तौर पर नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें अन्य प्रशासनिक या वैकल्पिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार, यह नया नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले अधिकारियों पर भी लागू होगा। यानी अब जो कर्मचारी इस तारीख या इसके बाद सेवानिवृत्त होंगे, उन्हें यह गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं मिलेगा।