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एमपी में रेलवे विस्तार पर पर्यावरण चिंता, लाखों पेड़ों की कटाई को केंद्र की हरी झंडी बाकी

इंदौर मध्यप्रदेश में महत्वाकांक्षी महू-खंडवा गेज परिवर्तन परियोजना के तहत घने जंगलों में निर्माण शुरू करने के लिए रेलवे ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मांगी है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद दो जिलों में फैले घने जंगलों में बड़ी रेल लाइन के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। दरअसल, भारतीय रेलवे ने मध्य प्रदेश में महू-खंडवा लाइन का गेज बदलने का काम शुरू करने के लिए केंद्र से आखिरी मंजूरी मांगी है। इस काम में 1.24 लाख से ज्यादा पेड़ों को काटा जाएगा। एक बार केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिल जाने के बाद, दो जिलों के जंगलों में ब्रॉड गेज लाइन के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि 156 km की ब्रॉड-गेज लाइन, आज़ादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 km के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी.गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है.एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के PRO मुकेश कुमार ने कहा, लगभग 90 km के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंज़ूरी की जरूरत है.उन्होंने कहा, “महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच करीब 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा. जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में 100.08 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है.” दो साल में पूरा होगा काम अधिकारियों ने बताया कि 156 किमी की ब्रॉड-गेज लाइन, आजादी से पहले रियासतों के समय बिछाए गए 118 किमी के नैरो-गेज ट्रैक की जगह लेगी। गेज बदलने का काम चल रहा है और अगले दो साल में पूरा होने की उम्मीद है। वन विभाग को मिले 100.08 करोड़ एक बयान में वेस्टर्न रेलवे के रतलाम डिवीजन के पीआरओ मुकेश कुमार ने कहा कि लगभग 90 किमी के महू (डॉ. अंबेडकर नगर)-ओंकारेश्वर रोड सेक्शन के बाकी गेज बदलने के काम के लिए केंद्रीय मंत्रालय से आखिरी मंजूरी की जरूरत है। महू और मुख्त्यारा-बलवाड़ा के बीच 454 हेक्टेयर जंगल की जमीन पर कंस्ट्रक्शन होगा। जमीन खरीदने के लिए, रेलवे ने पहले ही वन विभाग में 100.08 करोड़ रुपए जमा कर दिए हैं और मिनिस्ट्री से इन-प्रिंसिपल मंजूरी ले ली है। मुआवजे के तौर पर लगाएंगे डबल पौधे रेलवे अधिकारियों ने कहा कि महू-खंडवा गेज कन्वर्जन से उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे पैसेंजर सर्विस और माल ढुलाई दोनों में सुधार होगा। वहीं वन विभाग के एक अधिकारी ने अनुमान लगाया कि इंदौर और पड़ोसी खरगोन जिलों में बाकी कंस्ट्रक्शन के लिए 1.24 लाख पेड़ काटने पड़ सकते हैं। डिपार्टमेंट ने पर्यावरण पर असर कम करने और बड़ी संख्या में पेड़ों को बचाने के लिए एक डिटेल्ड प्लान तैयार किया है। एनवायरनमेंटल नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित एरिया से दोगुने एरिया में मुआवजे के तौर पर पेड़ लगाए जाएंगे।

रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर, RAC टिकट पर मिल सकता है रिफंड

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे में सफर करने वाले लाखों यात्रियों को आने वाले समय में एक बड़ी राहत मिल सकती है। संसद की एक शक्तिशाली समिति ने रेल मंत्रालय को सुझाव दिया है कि आरएसी (RAC) टिकट पर यात्रा करने वाले वैसे यात्रियों को किराये का कुछ हिस्सा वापस करना चाहिए जिन्हें पूरा किराया देने के बावजूद ट्रेन में पूरी बर्थ नहीं मिल पाती है। संसद में 4 फरवरी को पेश की गई लोक लेखा समिति (PAC) की रिपोर्ट ‘भारतीय रेलवे में ट्रेनों के संचालन की समयबद्धता और यात्रा समय’ में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, आरएसी श्रेणी के यात्रियों को कंफर्म टिकट के बराबर ही पूरा किराया देना पड़ता है, लेकिन यात्रा के दौरान उन्हें केवल बैठने के लिए आधी सीट (बर्थ) ही मिलती है। समिति ने इस व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि बिना बर्थ सुविधा के पूरा किराया वसूलना न्यायोचित नहीं है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा, "समिति का मानना है कि चार्ट तैयार होने के बाद भी यदि यात्री आरएसी श्रेणी में ही रहता है और उसे पूरी बर्थ नहीं मिलती है तो उससे पूरा किराया लेना गलत है। मंत्रालय को एक ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे ऐसे यात्रियों को किराये का आंशिक हिस्सा वापस मिल सके।" फिलहाल, आईआरसीटीसी (IRCTC) के नियमों के मुताबिक यदि आरएसी ई-टिकट को ट्रेन छूटने के निर्धारित समय से 30 मिनट पहले तक कैंसिल नहीं किया जाता या ऑनलाइन टीडीआर (TDR) फाइल नहीं की जाती। ऐसे में कोई रिफंड नहीं मिलता है। समिति का तर्क है कि जब यात्री आधी सीट पर सफर करने को मजबूर है तो उसे सर्विस भी आधी ही मिल रही है, इसलिए भुगतान भी उसी अनुपात में होना चाहिए। यह सिफारिश अगर लागू होती है तो यह रेलवे के दशकों पुराने किराये ढांचे में एक बड़ा बदलाव होगा। इन 13 ट्रेनों में RAC पर पाबंदी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि रेलवे ने इस साल की शुरुआत से आरएसी नियमों में कुछ कड़े बदलाव किए हैं। अब वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस और अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी 13 आधुनिक ट्रेनों में आरएसी टिकट धारकों को बोर्डिंग यानी ट्रेन में चढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इन ट्रेनों में केवल कंफर्म टिकट वाले यात्री ही सफर कर सकते हैं। गुवाहाटी (कामाख्या)-रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस डिब्रूगढ़-लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस न्यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस अलीपुरद्वार – एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस अलीपुरद्वार-मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस कोलकाता (संतरागाछी) – ताम्बरम अमृत भारत एक्सप्रेस कोलकाता (हावड़ा)-आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस कोलकाता (सियालदह)-बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस तिरुवनंतपुरम सेंट्रल-तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस तिरुवनंतपुरम उत्तर-चार्लापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस नागरकोइल जंक्शन-मंगलुरु जंक्शन अमृत भारत एक्सप्रेस संसदीय समिति की सिफारिश के बाद अब गेंद रेल मंत्रालय के पाले में है। मंत्रालय को अब यह तय करना है कि वह इस पार्शियल रिफंड की गणना कैसे करेगा और इसे यात्रियों के खातों में डिजिटल रूप से वापस भेजने के लिए अपने सॉफ्टवेयर (CRIS/IRCTC) में क्या बदलाव करेगा।

पटरी नवीनीकरण तेज, भोपाल मंडल में 100 किमी से अधिक ट्रैक का सुधार, यात्रियों के लिए सुरक्षा बढ़ाई

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल में अधोसंरचना विकास के साथ-साथ अनुरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ट्रैक नवीनीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। पंकज त्यागी के मार्गदर्शन में इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से ट्रैक अनुरक्षण से जुड़े संरक्षा-आधारित कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। भोपाल मंडल में कंप्लीट ट्रैक रिन्यूअल (सीटीआर), थ्रू रेल रिन्यूअल (टीआरआर), थ्रू स्लीपर रिन्यूअल (टीएसआर), थ्रू टर्नआउट रिन्यूअल (टीटीआर) तथा डीप स्क्रीनिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य आवश्यक ट्रैफिक ब्लॉक लेकर उच्च संरक्षा मानकों के अनुरूप निष्पादित किए जा रहे हैं। नौ माह में हुआ व्यापक ट्रैक नवीनीकरण वित्तीय वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर तक नौ माह की अवधि में 100.741 ट्रैक किलोमीटर में सीटीआर, 121.23 ट्रैक किलोमीटर में टीआरआर, 80.245 ट्रैक किलोमीटर में टीएसआर तथा 80.250 समतुल्य यूनिट्स में टीटीआर का कार्य पूर्ण किया गया है। इसके अतिरिक्त 55 टर्नआउट्स एवं 168.391 ट्रैक किलोमीटर प्लेन ट्रैक की डीप स्क्रीनिंग भी की गई।  

20 साल का रिवाज खत्म, रेलवे रिटायरों को गोल्ड-प्लेटेड चांदी का मेडल नहीं देगा

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे में सामने आए चांदी के नकली सिक्के (मेडल) घोटाले के बाद बड़ा असर देखने को मिला है। रेलवे बोर्ड ने इस मामले में एक अहम फैसला लेते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देने की 20 साल पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया है। रेलवे की ओर से अब रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को विदाई उपहार के रूप में गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा ने इस संबंध में  औपचारिक आदेश जारी किया। आदेश में साफ तौर पर लिखा गया है कि रिटायर होने वाले रेलवे अधिकारियों को सोने की परत वाले चांदी के मेडल देने की प्रथा को बंद करना है। यानी, सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारियों को गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल देने की प्रथा को समाप्त किया जाता है।  दरअसल, रेलवे ने मार्च 2006 से अपने रिटायर होने वाले कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप लगभग 20 ग्राम वजन का स्वर्ण मढ़ा चांदी का सिक्का देना शुरू किया था। बीते करीब 20 वर्षों में हजारों कर्मचारियों को यह चांदी का सिक्का विदाई उपहार के रूप में दिया गया। यह परंपरा रेलवे में सम्मान और सेवा के प्रतीक के तौर पर देखी जाती रही है। हालांकि, इस फैसले के पीछे भोपाल मंडल में सामने आया मेडल घोटाला एक बड़ी वजह माना जा रहा है। जांच में खुलासा हुआ कि रिटायरमेंट पर कर्मचारियों को दिए गए कई मेडल नकली थे और उनमें चांदी की मात्रा महज 0.23 प्रतिशत पाई गई। यानी जिन सिक्कों को चांदी का बताकर दिया गया, वे नाम मात्र के लिए भी चांदी के नहीं थे। मामला सामने आने के बाद रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। साथ ही, रेलवे के पास मौजूद मौजूदा मेडल स्टॉक का उपयोग अब रिटायरमेंट उपहार के तौर पर नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें अन्य प्रशासनिक या वैकल्पिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के आदेश के अनुसार, यह नया नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले अधिकारियों पर भी लागू होगा। यानी अब जो कर्मचारी इस तारीख या इसके बाद सेवानिवृत्त होंगे, उन्हें यह गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नहीं मिलेगा।

रेलवे का मास्टरस्ट्रोक! एक ऐप में समाएंगी यात्रा से जुड़ी सभी सुविधाएं

भोपाल रेल यात्रियों की दैनिक जरूरतों को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एकीकृत मोबाइल एप के माध्यम से यात्रा से जुड़ी अनेक सुविधाएं एक ही डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध करा दी हैं। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा के दौरान जरूरी जानकारियों तक, हर सुविधा एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है, जिससे उन्हें अलग-अलग एप्स और रेलवे काउंटरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस एकीकृत एप के जरिए यात्री आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट और प्लेटफार्म टिकट की बुकिंग कर सकते हैं। लाइव स्टेटस से लेकर भोजन बुकिंग तक की सुविधा इसके अलावा पीएनआर स्टेटस, लाइव ट्रेन रनिंग स्टेटस, ट्रेन सर्च, कोच और सीट लोकेशन की जानकारी भी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। यात्रा के दौरान ट्रेन में भोजन बुकिंग की सुविधा भी इसी प्लेटफार्म पर उपलब्ध है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक और समयबद्ध सेवाएं मिल रही हैं। एक ही एप पर इतनी सुविधाएं मिलने से यात्रा से पहले और यात्रा के दौरान जानकारी जुटाना सरल हो गया है।   डिजिटल पेमेंट पर मिलेगी 3% की छूट तो वहीं डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेलवे द्वारा अनारक्षित टिकटों की बुकिंग पर तीन प्रतिशत की छूट दी जा रही है। यह छूट 14 जनवरी से 14 जुलाई तक प्रभावी रहेगी और यूपीआई, मोबाइल वालेट, नेट बैंकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड सहित सभी स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू होगी। इससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

रेलवे ने शुरू की डिजिटल व्यवस्था, अब ट्रेनों में बैठे-बैठे मिलेगा स्वादिष्ट खाना

भोपाल  ट्रेन के सफर के दौरान यात्रियों को अब गर्म ताजा भोजन, मिनरल वाटर या जरूरी यात्रा जानकारी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भोपाल मंडल (Bhopal Rail Division) में एकीकृत मोबाइल ऐप सेवा को एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म सर्विस प्रोवाइडर सर्वर से कनेक्ट कर दिया है। इस आधुनिक डिजिटल पहल से रेल यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान और सुविधाजनक हो गई है। सीट पर बैठे-बैठे मिलेगी सुविधा सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने यात्रा से जुड़ी अनेक सेवाओं को एक ही मोबाइल ऐप प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया है। इस ऐप के माध्यम से यात्री अपनी सीट पर बैठे-बैठे ट्रेन की लाइव लोकेशन, रिजर्वेशन चार्ट, टिकट विवरण, पीएनआर स्टेटस और ट्रेन के रनिंग स्टेटस की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। मिलेगा गर्म भोजन एकीकृत मोबाइल ऐप के जरिए यात्री आरक्षित टिकट, अनारक्षित टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग भी आसानी से कर सकते हैं। इसके साथ ही ट्रेन सर्च, कोच और सीट लोकेशन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां भी तुरंत उपलब्ध हो जाती हैं, जिससे स्टेशन पर अनावश्यक पूछताछ और भीड़ से राहत मिलती है। यात्रा के दौरान भोजन की समस्या को दूर करने के लिए इस ऐप में ई-कैटरिंग सेवा को भी शामिल किया गया है। यात्री अब अपनी पसंद का गर्म और ताजा भोजन, साथ ही मिनरल वाटर, सीधे अपनी सीट पर ऑर्डर कर सकते हैं। यह सेवा समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करती है, जिससे यात्रियों का सफर अधिक आरामदायक बनता है। 

नौ महीने में 30 करोड़ की वसूली, भोपाल रेल मंडल में बेटिकट यात्रियों से बढ़ा राजस्व

भोपाल  अगर आप ट्रेन में बिना टिकट या अनियमित टिकट पर सफर करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने टिकट चेकिंग अभियान के जरिए बिना टिकट सफर करने वाले मुसाफिरों की जेब पर बड़ी स्ट्राइक की है। चालू वित्तीय वर्ष के पिछले 9 महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2025) में मंडल ने जुर्माने के रूप में 30.48 करोड़ रुपए का भारी-भरकम राजस्व वसूल किया है। 4.75 लाख यात्री धरे गए भोपाल मंडल के टिकट निरीक्षकों ने स्टेशनों और चलती ट्रेनों में सघन जांच अभियान चलाकर कुल 4 लाख 75 हजार ऐसे मामले पकड़े, जो बिना टिकट, अनियमित टिकट या अनबुक्ड लगेज के साथ यात्रा कर रहे थे। खास बात यह है कि इस बार रेलवे ने पिछले साल की तुलना में 4.45 प्रतिशत अधिक राजस्व अर्जित कर अपनी मुस्तैदी का परिचय दिया है। कुल आंकड़ा 100 करोड़ पार महाप्रबंधक के मार्गदर्शन में भोपाल सहित जबलपुर और कोटा मंडल में भी यह अभियान जोरों पर रहा। पूरे पश्चिम मध्य रेल की बात करें तो 9 महीनों में कुल 14.65 लाख मामले पकड़े गए, जिनसे 101 करोड़ 16 लाख रुपये का राजस्व मिला। यह पिछले साल की तुलना में करीब 15.80 प्रतिशत की बड़ी छलांग है। रेलवे की सख्त चेतावनी रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे हमेशा उचित टिकट लेकर ही यात्रा करें। वाणिज्य विभाग और आरपीएफ के समन्वय से यह चेकिंग अभियान आने वाले दिनों में और भी तेज किया जाएगा। गौरतलब है कि बेटिकट यात्रियों को पकड़ने के लिए समय-समय पर रेलवे की तरफ से किलाबंदी चेकिंग अभियान चलाया जाता है। इस दौरान ही बड़ी संख्या में यात्री पकड़े जाते हैं। यह रेलवे के लिए बड़ी सफलता है।  

भारतीय रेलवे में हलाल मीट पर विवाद, सिख संगठन की याचिका पर NHRC ने जारी किया नोटिस

  नई दिल्ली     भारतीय रेलवे की थाली में परोसे जाने वाले नॉनवेज भोजन को लेकर झटका बनाम हलाल विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है. सिख संगठनों की ओर से दायर याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने रेलवे बोर्ड, FSSAI और संस्कृति मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किया है. NHRC ने अपने नोटिस में कहा है कि अगर रेलवे में केवल हलाल मांस परोसा जा रहा है, तो यह उपभोक्ताओं के भोजन के विकल्प के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है. साथ ही, इसे सिख धर्म की आचार संहिता यानी सिख रहत मर्यादा के खिलाफ भी बताया गया है. NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मुद्दे पर कहा, "सिख रहत मर्यादा सिखों को हलाल मांस के सेवन से रोकती है. अगर सिख उपभोक्ताओं को यह जानकारी नहीं दी जा रही कि उन्हें किस तरह का मांस परोसा जा रहा है, तो यह उनके अधिकारों का सीधा उल्लंघन है." आयोग ने संस्कृति मंत्रालय से यह भी कहा है कि वह सभी खाने-पीने की दुकानों और संस्थानों को निर्देश दे कि वे स्पष्ट रूप से यह दिखाएं कि परोसा जाने वाला मीट हलाल है या झटका. NHRC का मानना है कि पारदर्शिता न होना धार्मिक स्वतंत्रता और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है. FSSAI को भेजे गए नोटिस में आयोग ने कहा है कि नॉनवेज फूड के सर्टिफिकेशन में इसका साफ तौर पर जिक्र होना चाहिए कि मीट झटका है या हलाल. इससे उपभोक्ता अपनी धार्मिक और व्यक्तिगत मान्यताओं के अनुसार निर्णय ले सकेंगे. प्रियंक कानूनगो ने रोजगार से जुड़े पहलू पर भी गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा, "दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल वही माना जाता है जिसमें पशु बलि केवल मुसलमान द्वारा दी गई हो. इससे हिंदू दलित समुदायों को रोजगार के अवसरों से वंचित किया जाता है, जो परंपरागत रूप से पशु बलि और मांस बिक्री से जुड़े रहे हैं." उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उन्हें किस तरह का नॉनवेज परोसा जा रहा है. अपने बयान में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा, "यहां तक कि मुस्लिम देश की एविएशन कंपनी एतिहाद एयरलाइंस भी यात्रियों को हलाल और हिंदू झटका भोजन का विकल्प देती है." क्यों है विवाद? कानूनगो ने बताया कि हमने उन्हें एक नोटिस के माध्यम से पूछा है कि रेलवे में जो ठेकेदार भोजन बेचते हैं या सप्लायर मांस की सप्लाई करते हैं, वह हलाल पद्धति से है या झटका पद्धति से. यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि दारुल उलूम देवबंद के अनुसार हलाल पद्धति से जानवर का वध सिर्फ मुसलमान ही कर सकते हैं. उन्होंने कहा, सरकारी एजेंसी होने के नाते रेलवे जो खाना बेच रही है, उसमें मांस किस पद्धति से तैयार किया जा रहा है, यह स्पष्ट होना चाहिए. झटका पद्धति से मांस का वध हिंदू तथा अन्य दलित समुदाय करते हैं. सभी वर्गों के लोगों के जीविका के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के मांस की बिक्री होनी चाहिए. ट्रेन के खाने पर लगेगा स्टिकर? प्रियंक कानूनगो ने आगे कहा कि रेलवे के साथ-साथ FSSAI को भी नोटिस जारी कर पूछा गया है कि ऐसी संभावनाओं पर विचार किया जाए, जहां भारत में बिकने वाली मांसाहारी सामग्री पर यह स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया जाए कि यह सभी धर्मों के लोग खा सकते हैं या नहीं. किसी के लिए प्रतिबंध है तो उसे स्पष्ट रूप से बता दिया जाए. उन्होंने कहा कि भारत में एक अन्य अल्पसंख्यक समुदाय सिख समुदाय है. सिख धर्म मानने वालों के लिए पवित्र नियम पुस्तिका है, जिसमें आर्टिकल 24 में स्पष्ट लिखा है कि सिखों को इस्लामी हलाल पद्धति से तैयार किया गया मीट नहीं खाना चाहिए. यह उनके लिए प्रतिबंधित है. यदि एक विशेष पद्धति से तैयार मीट सिख समुदाय के लिए प्रतिबंधित है, तो अंजाने में उन्हें वही भोजन देना धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ है और मानवाधिकार का उल्लंघन है.

100+ वैगन के साथ WCR ने चलायी सबसे लंबी अनब्रोकन मालगाड़ी, रचा नया रिकॉर्ड

इंदौर   देश के रेलवे नेटवर्क में अब लॉन्ग हॉल वाली एक और मालगाड़ी जुड़ गई है, जिससे एक ही बार में हजारों टन माल देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंचा जा सकेगा. पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने इस क्षेत्र में इतिहास रच दिया है. रतलाम मंडल ने अब तक की सबसे लंबी दूरी वाली अनब्रोकन लॉन्ग हॉल मालगाड़ी का सफल ट्रायल किया है. 10 जनवरी को यह लॉन्ग हॉल ट्रेन वटवा से बकानियां भौरी के बीच सफलतापूर्वक चलाई गई है, जिसने लगभग 585 किलोमीटर की दूरी तय की. क्या होती है अनब्रोकन लॉन्ग हॉल ट्रेन? लॉन्ग हॉल ट्रेन उन मालगाड़ियों को कहा जाता है जो भारी से भारी लोड के साथ सबसे लंबी दूरी तय करती हैं और इन्हें कनेक्ट करके दौड़ाय़ा जाता है. ऐसी मालगाड़ियों की लंबाई 3 से 4 किलोमीटर तक हो सकती है. इससे पहले देश में पहली लॉन्ग हॉल ट्रेन रुद्रास्त्र चलाई गई थी जो 4.50 किलोमीटर लंबी थी. इसमें 6 मालगाड़ियों को 7 इंजन लगाकर जोड़ा गया था, जिसमें 354 डिब्बे थे. वहीं, अब मध्य प्रदेश में पश्चिम रेलवे ने दूसरी लॉन्ग हॉल ट्रेन चलाई है, जिसमें दो रैक्स को जोड़ा गया और इसमें 100 से ज्यादा डिब्बे थे. रेलवे के मुताबिक ऐसी ट्रेनों में इंजन की संख्या 7 तक हो सकती है और 350 तक डब्बे लगाए जा सकते हैं. वहीं, अनब्रोकन का अर्थ है बिना रुके या बिना स्टॉपेज वाली ट्रेन, जो इसे रूद्रास्त्र से अलग बनाता है. मध्य प्रदेश में पमरे ने रचा इतिहास मध्य प्रदेश में पहली बार पश्चिम रेलवे ने अपनी पहली अनब्रोकन लॉन्ग हॉल ट्रेन का सफल संचालन किया है. पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया, '' देश के रेलवे इतिहास में माल परिवहन क्षमता में वृद्धि की दिशा में ये एक महत्वपूर्ण कदम है. लॉन्ग हॉल ट्रेन 2 ईबॉक्सतएन (EBOXN) रेक की संरचना में चलाई गई, जिसकी अधिकतम अनुमत गति 70 किमी प्रति घंटा थी. ट्रेन ने वटवा से बकानियां भौरी तक की दूरी 12 घंटे 58 मिनट में पूर्ण की और इसकी औसत गति 46.98 किमी प्रति घंटा रही, कुल मिलाकर लगभग 11 घंटे की समय बचत सुनिश्चित की गई. इस लॉंग हॉल ट्रेन के सफल परिचालन विभिन्न विभागों के बीच उत्कृष्ट समन्वय, सटीक योजना व प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है.'' रेलवे पीआरओ ने कहा, '' कई किलोमीटर लंबी इन ट्रेनों को लंबी दूरी तक चलाने से चालक दल के अलावा अन्य संसाधनों की बचत होती है. वहीं, भारतीय रेलवे की ढुलाई क्षमता भी बढ़ जाती है.

नई रेलवे परियोजना के लिए 277 पेड़ों की कटाई, MP प्रशासन ने तय की शर्तें

इंदौर  इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण किया जाना है। इसे लेकर जिला प्रशासन ने तेजी से प्रक्रिया करने में लगा है। प्रोजेक्ट के अंतर्गत डकाच्या और सांवेर में आने वाले गांव से रेलवे लाइन गुजरना है। निर्माण के दौरान बाधक पेड़ों को चिन्हित कर लिया है। 35 प्रजातियों के 277 पेड़ों को काटा जाएगा। जिला प्रशासन की तरफ से सशर्त पेड़ों की कटाई को लेकर निर्देश दिए है। यह अनुमति रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) भोपाल के मुख्य परियोजना प्रबंधक के आवेदन पर दी गई है। रेल लाइन प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई जमीन नहीं आ रही है, बल्कि पटरियां राजस्व भूमि में बिछाई जाना है। बावजूद इसके जिला प्रशासन ने इंदौर वनमंडल के दायरे में आने वाले गांवों में पेड़ काटने के लिए वन विभाग को दिए है। डाकच्या, लसूडिया परमार, मेलकलमा, डकाच्या, कदवाली बुजुर्ग, कदवाली खेर्द, बीसाखेडी सहित अन्य गावों में लाइन निकलेगी। यहां 35 प्रजातियों के 277 से अधिक पेड़ है। मार्च 2025 में जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन को पत्र दिया गया। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सांवेर ने पहले वन विभाग से राय मांगी गई थी, लेकिन समय-सीमा में कोई जवाब नहीं मिलने के कारण इसे मौन स्वीकृति माना गया। इसके बाद नायब तहसीलदार के माध्यम से प्रकरण आगे बढ़ाया गया और सभी पहलुओं पर विचार के बाद अनुमति प्रदान की गई। वनमंडलाधिकारी प्रदीप मिश्रा का कहना है कि पूरे प्रोजेक्ट में वन विभाग की कोई भूमि नहीं है। सिर्फ पेड़ों को काटने के लिए विभाग को निगरानी की जिम्मेदारी दी। इन शर्तों पर दी अनुमति प्रशासन ने पेड़ों की कटाई को लेकर कड़ी शर्तें लगाई हैं ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो सके। इसके लिए वन विभाग को निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है। पेड़ काटते समय वन विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे और केवल चिन्हित पेड़ ही काटे जाएंगे। पहले ट्रांसप्लांट की कोशिश पेड़ों को काटने से पहले उन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित (ट्रांसप्लांट) करने का प्रयास किया जाएगा। असफल होने पर ही कटाई होगी। इस बारे में वन विभाग को निगरानी करना है। उचित मूल्यांकन और नीलामी पेड़ों का मूल्यांकन संबंधित विभाग से कराया जाएगा और तय मूल्य से कम पर नीलामी नहीं होगी। कटाई का खर्च अलग से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक जितने पेड़ काटे जाएंगे। उनसे तीन गुना अधिक नए पेड़ रेलवे मार्ग के दोनों ओर लगाए जाएंगे। वहीं लगाए जाने वाले पेड़ कम से कम 3 साल पुराने होंगे। उन्हें ट्री गार्ड या वायर फेंसिंग से सुरक्षित किया जाएगा और 5 साल तक उनकी देखभाल की जाएगी। बकायादा हर साल वीडियोग्राफी कर रिपोर्ट वन समिति और एसडीएम कार्यालय को दी जाएगी। अन्य पेड़ों की कटाई पर रोक बबूल, नारियल, खजूर, आम, जाम, नीम, इमली सहित 35 प्रजातियों के पेड़ों को चिन्हित किया है। इनकी सूची बनाई गई है। इन पेड़ों के अलावा कोई भी अन्य पेड़ नहीं काटा जाएगा। जबकि निजी जमीन के पेड़ों और सागौन (टीक) के पेड़ों की कटाई पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। वहीं यदि भूमि या पेड़ों से जुड़ा कोई मामला कोर्ट में लंबित है, तो न्यायालय का आदेश सर्वोपरि होगा। जबकि किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर यह अनुमति अपने आप रद्द मानी जाएगी। यह होगा फायदा इंदौर-बुधनी नई रेलवे लाइन से इंदौर और भोपाल के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। यहां तक कि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।माल परिवहन आसान होगा। क्षेत्रीय विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।