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नया रेलवे ट्रैक 100 किमी की दूरी घटाएगा, भोपाल के करीब पहुंचेगा यह महानगर

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और राजस्थान के कोचिंग महानगर कोटा के बीच की दूरी जल्द ही सिमट जाएगी। भोपाल रामगंज मंडी रेलवे ट्रैक के चालू होने से यह सुविधा मिलेगी। नए ट्रैक से भोपाल एवं कोटा के बीच लगभग 100 किमी की दूरी कम हो जाएगी। नई रेलवे लाइन जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगी। पिछले 3 साल से चल रहा यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने की तैयारी है। भोपाल रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना के लिए हाल ही में कोटा मंडल के अंतर्गत खिलचीपुर राजगढ़ सिटी स्टेशन के बीच 17.8 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर रेलवे सुरक्षा कमिश्नर ने सुरक्षा का जायजा लिया। इस क्षेत्र में यात्री ट्रेन को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ाकर स्पीड ट्रायल लिया गया। ये स्टेशन आएंगे रेल नेटवर्क में मध्यप्रदेश के राजगढ़ और सीहोर जिले के कई स्टेशन इस परियोजना के तहत पहली बार रेल नक्शे पर आएंगे। इनमें पिपलहेड़ा, सोनकच्छ, नरङ्क्षसहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, झारखेड़ा, मुगलियाहाट शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोग अब तक सड़क मार्ग पर निर्भर थे, लेकिन रेल सेवा शुरू होने के बाद भोपाल और राजस्थान के शहरों तक पहुंच आसान हो जाएगी। दूरी 100 किमी घटेगी, समय में 2-3 घंटे की बचत नई रेल लाइन शुरू होने के बाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और राजस्थान के महानगर कोटा के बीच करीब 100 किलोमीटर दूरी कम होगी और यात्रियों का 2 से 3 घंटे समय बचेगा। राजगढ़ और सीहोर के कई इलाके पहाड़ी और ग्रामीण हैं, जहां रेल सुविधा नहीं थी। नई लाइन इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेगी, जिससे रोजगार, व्यापार और शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे। 276 किमी का लंबा ट्रेक: करीब 276 किमी लंबी रेल परियोजना में अब तक 187 किमी का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें शेष 89 किलोमीटर का कार्य मार्च 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि भोपाल रामगंजमंडी प्रोजेक्ट का काम तेजी से खत्म किया जा रहा है। इसके शुरू होते ही कई नए स्टेशन बनेंगे। कोटा से भोपाल की दूरी कम हो जाएगी। ट्रेनें निरस्त होने से बढ़ी समस्या, पहले था कन्फर्म, अब हर ट्रेन में वेटिंग इधर गर्मी के मौसम और छुट्टियों के सीजन में लंबी दूरी की ट्रेनें निरस्त होने से लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है। कंफर्म टिकट निरस्त करवाने के बाद अब जब दोबारा अन्य तारीख पर टिकट लेने का प्रयास कर रहे हैं तो लंबी वेटिंग मिल रही है। कई तारीख पर रिग्रेट की स्थिति बन रही है। रेलवे मेंटेनेंस के चलते पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा रूट पर भोपाल से गुजरने वाली आधा दर्जन गाडिय़ों को निरस्त किया गया है एवं अलग-अलग तारीख पर रीशेड्यूल कर दिया गया है। रेलवे ने दावा किया, सभी प्रभावित यात्रियों को रिफंड कर दिया जाएगा। भोपाल रेल मंडल पर इस प्रकार अनावश्यक कैंसिलेशन के चलते लगभग 50 लाख का आर्थिक बोझ भी रिफंड के रूप में आ गया है। ये ट्रेनें निरस्त: कोरबा-अमृतसर एक्सप्रेस- 25 अप्रैल अमृतसर- बिलासपुर एक्सप्रेस 27 अप्रैल तक रद्द। 12410- 8, 9, 11, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22 अप्रैल। 12409- 8, 9, 10, 11, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 22, 23, 24 अप्रैल। 12807- 8, 9, 11, 12, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 22, 23 अप्रैल 12808 – 9, 10, 11, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24, 25 अप्रैल तक रद्द।

नई रेल लाइन से प्रदेश में बढ़ेगी 32 एक्स्ट्रा ट्रेनों की संचालन क्षमता

उज्जैन  उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ को देखते हुए रेलवे भी तैयारी कर रहा है। रेलवे इंदौर से उज्जैन के बीच कई सुविधाएं देगा, जिससे सिंहस्थ में ज्यादा से ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी। नई लाइनों के साथ रेलवे बायपास लाइन भी बनाएगा, जिससे ट्रेनें इंजन बदले बिना मुड़ सकेंगी। इंदौर-उज्जैन के बीच ऑटोमेटिक सिग्नल भी लगेंगे, जिससे ट्रेन यात्रा सुरक्षित हो सकेगी। रेलवे रतलाम मंडल के प्रमुख स्टेशनों इंदौर, डॉ. अंबेडकर नगर (महू), लक्ष्मीबाई नगर और उज्जैन पर कोचिंग एवं टर्मिनल विकास कार्य चल रहे हैं। ये स्टेशन मालवा क्षेत्र के प्रमुख यात्री, धार्मिक और पर्यटन केंद्र है। इंदौर और उज्जैन के आसपास के स्टेशनों को भी संवारा जाएगा। इंदौर-उज्जैन क्षेत्र में 7 नई पिट लाइनें और 16 नई स्टेबलिंग लाइनों की सुविधाएं जुटाई जाएंगी, जिससे प्रतिदिन 21 प्राइमरी मेंटेनेंस और 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों सहित 32 अतिरिक्त ट्रेनों की संचालन क्षमता विकसित होगी। इंदौर स्टेशन: नया बन रहा स्टेशन वर्तमान में इंदौर स्टेशन से प्रतिदिन लगभग 57 जोड़ी ट्रेनें संचालित होती है, जिसमें 41 जोड़ी ओरिजिनेट/टर्मिनेट होती है। यहां 6 प्लेटफॉर्म और 5 पिट लाइनें उपलब्ध 6 है। स्टेशन का पुनर्विकास प्रगति पर है, जो यात्री सुविधा, अतिरिक्त ट्रेनों की दृष्टि से भी उपयोगी साबित होंगे। लक्ष्मीबाई नगर: 7 स्टेबलिंग लाइनें बनेंगी लक्ष्मीबाई नगर रेलवे स्टेशन में वर्तमान में 4 स्टेबलिंग लाइन, 3 प्लेटफॉर्म तथा 1 शंटिंग नेक उपलब्ध हैं। यहां दो अतिरिक्त प्लेटफार्म निर्माण का कार्य प्रगति पर हैं। यहां एक कोचिंग मेंटेनेंस डिपो बनाया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 259 करोड़ रुपए है। 5 नई पिट लाइनें, 7 स्टेबलिंग लाइनें और सिक कोच लाइनें निर्मित होंगी। इससे प्रतिदिन 15 प्राइमरी मेंटेनेंस ट्रेनों की देखरेख संभव होगी। यह सैटेलाइट टर्मिनल के रूप में विकसित होगा। इसके साथ ही लक्ष्मी बाई नगर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास कार्य भी किया जा रहा, जिसके अंतर्गत अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ नया स्टेशन भवन, नए प्लेटफार्म, कवर शेड, फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट/एस्केलेटर आदि लगाने के कार्य किया जाना है। जल्द ही नई लाइनें भी डाली जाएंगी उज्जैन सिंहस्थ का यात्री दबाव इंदौर पर भी रहेगा। स्टेशन निर्माण के साथ नई लाइनें डाली जाएंगी ताकि नई ट्रेनें भी चलाई जा सके। इस कार्य से आने वाले समय में यात्रियों और नई ट्रेनों के संचालन में काफी फायदा मिल सकेगा। – शंकर लालवानी, सांसद डॉ. अंबेडकर नगर (महू): 2 नई पिट लाइन बनेगी वर्तमान में यहां 4 प्लेटफार्म एवं 3 पिट लाइन उपलब्ध हैं, किंतु प्लेटफार्म की लंबाई, ओएचई एवं प्लेटफार्म कनेक्टिविटी का कार्य प्रगति पर है। इसके बाद यह स्टेशन अधिक गाड़ियों के संचालन के लिए सक्षम हो जाएगा। वर्तमान में इस स्टेशन से 15 जोड़ी नियमित एवं 2 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इस स्टेशन को समेकित कोचिंग डिपो के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके पहले चरण में 2 नई पिट लाइनों का कार्य जो लगभग 94 करोड़ की लागत से किया जाएगा। इससे 6 ट्रेनों की मेंटेनेंस क्षमता बढ़ेगी। उज्जैन जंक्शन: 9 स्टेबलिंग लाइन बनेगी उज्जैन धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, वहां आगामी सिंहस्थ 2028 को देखते हुए 9 नई स्टेबलिंग/होल्डिंग लाइनों की योजना बनाई गई है। इससे लगभग 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों को खड़ा करने और टर्मिनेट करने की क्षमता विकसित होगी।

487 किलोमीटर रूट पर कवच परीक्षण पूरा, दक्षिण मध्य रेलवे ने बड़ी सफलता हासिल की

हैदराबाद  दक्षिण मध्य रेलवे ने 2025-26 के दौरान 487 किलोमीटर रूट के लिए कवच क्षेत्र परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित लक्ष्य से अधिक है।  कवच स्वदेशी रूप से विकसित एक सुरक्षा प्रणाली है, जिसे मानवीय त्रुटि के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। यह किसी खतरे के सिग्नल को पार करने वाली ट्रेन के लिए स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकता है और स्पीड एवं सिग्नल की लगातार निगरानी करके सुरक्षित ट्रेन संचालन सुनिश्चित करने में मदद करता है। दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) ने रविवार को कहा कि उसने सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर दिया है और इस दिशा में पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर नेटवर्क में कवच 4.0 की स्थापना के लिए कदम उठाए गए। जोन ने रेलवे बोर्ड के 402 रूट किलोमीटर के लक्ष्य को पार करते हुए 487 रूट किलोमीटर की दूरी के लिए फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। एससीआर ने एक बयान में कहा कि सावधानीपूर्वक योजना और प्रभावी कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप यह शानदार उपलब्धि हासिल हुई है। जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम भी शुरू कर दिया है, जिससे पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 357 किलोमीटर के लक्ष्य के मुकाबले 479 रूट किलोमीटर (आरकेएम) की दूरी के लिए सेक्शन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है। कवच 4.0 इंस्टॉलेशन का फील्ड परीक्षण काजीपेट पेद्दामपेट (101 मार्ग किमी), मल्काजगिरि कामारेड्डी (106 मार्ग किमी), चारलापल्ली रघुनाथपल्ली (79 मार्ग किमी), गुंतकल रायचूर (120 मार्ग किमी), और मुदखेड परभणी (81) के बीच खंडों में आयोजित किया गया था। इन खंडों में लोको कवच का परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया गया। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान एससीआर ने काजीपेट बलहरशाह, विजयवाड़ा दुव्वाडा और वाडी रेनिगुंटा के बीच 479 रकमाल की दूरी के विभिन्न खंडों में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम को चालू किया है। ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग एक ऐसी रेल संचालन प्रणाली है, जिसमें ट्रेनों की आवाजाही स्वचालित स्टॉप सिग्नलों द्वारा नियंत्रित होती है। ये सिग्नल ट्रेनों के गुजरने पर स्वचालित रूप से संचालित होते हैं। एबीएस प्रणाली का उद्देश्य एक ही दिशा में चलने वाली ट्रेनों को पीछे से टक्कर के जोखिम के बिना सुरक्षित रूप से एक-दूसरे का अनुसरण करने में सक्षम बनाना है। इससे रेलवे लागत कम होती है, खंड की क्षमता में सुधार होता है और ट्रेनों की औसत गति भी बढ़ती है। इस प्रणाली को शुरू में एससीआर नेटवर्क के उच्च घनत्व वाले और प्रमुख मुख्य मार्गों पर चालू किया जा रहा है। एससीआर के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने क्षेत्रीय और मंडल स्तर पर सिग्नल और दूरसंचार विंग के अधिकारियों के असाधारण योगदान की सराहना की है, जिसकी बदौलत जोन ने ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग और कवच फील्ड परीक्षणों को रिकॉर्ड स्तर पर सफलतापूर्वक पूरा किया है। महाप्रबंधक ने यह भी कहा कि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष के दौरान कवच और एबीएस को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।  

पंजाब में अनोखा रेलवे स्टेशन, जहां सिर्फ 2 दिन चलती है ट्रेन और साल में दो बार रुकती है

हुसैनीवाला भारत में रेलवे का नेटवर्क बहुत बड़ा है और ज्यादातर स्टेशनों पर हर दिन कई ट्रेनें आती-जाती रहती हैं। लेकिन एक ऐसा अनोखा स्टेशन भी है, जहां पूरे साल में सिर्फ दो बार ही ट्रेन पहुंचती है। यही वजह है कि यह स्टेशन इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। हाल ही में एक वायरल वीडियो में एक शख्स इस स्टेशन के बारे में बताता नजर आता है। वह स्टेशन पर खड़ी ट्रेन (Unique Railway Station India) के पास खड़े होकर कहता है कि यह वही खास ट्रेन है, जो साल में सिर्फ दो बार चलती है। वीडियो में वह रेलवे ट्रैक भी दिखाता है, जहां साफ दिखाई देता है कि पटरी आगे जाकर खत्म हो जाती है। इस स्टेशन पर ट्रेन आती है सिर्फ दो बार  यानी यह इस लाइन का आखिरी स्टेशन है और यहां से ट्रेन आगे नहीं जाती, बल्कि वापस उसी दिशा में लौट जाती है, जहां से आई होती है। इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर “northern_vlogger” नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है, जिसे लाखों लोग देख चुके हैं। यह खास स्टेशन पंजाब के फिरोजपुर जिले के पास हुसैनीवाला बॉर्डर के नजदीक स्थित है, जिसे हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन (Hussainiwala Railway Station) कहा जाता है। यह स्टेशन अपनी अनोखी व्यवस्था के कारण लोगों को हैरान कर देता है। यहां पूरे साल में केवल दो ही बार ट्रेन आती है और बाकी समय यह स्टेशन (Indian Railways Facts) लगभग सुनसान रहता है। इन दो खास दिनों में पहला दिन 23 मार्च होता है और दूसरा 13 अप्रैल, जो बैसाखी का दिन होता है। साल में सिर्फ 2 बार ही क्यों आती है ट्रेन? हुसैनीवाला स्टेशन की सबसे खास बात यही है कि यहां रोजाना ट्रेन नहीं चलती. पूरे साल में सिर्फ दो खास मौकों पर ही ट्रेन यहां तक पहुंचती है. पहली ट्रेन 23 मार्च को चलती है, जो शहीद भगत सिंह की शहादत दिवस के मौके पर चलाई जाती है. इस दिन देशभर से लोग हुसैनीवाला बॉर्डर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने आते हैं. वहीं, दूसरी ट्रेन की बात करें तो ये 13 अप्रैल को चलती है, जो बैसाखी के पर्व के अवसर पर चलाई जाती है. इन दोनों दिनों पर यहां काफी भीड़ देखने को मिलती है, जबकि बाकी समय यह स्टेशन लगभग खाली रहता है।  वायरल वीडियो से बढ़ी चर्चा हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति इस स्टेशन के बारे में जानकारी देता नजर आता है. वह बताता है कि जिस जगह वह खड़ा है, वहां साल में सिर्फ दो बार ही ट्रेन आती है. इस वीडियो में वो शख्स स्टेशन और वहां खड़ी ट्रेन की झलक भी दिखाता है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इस अनोखी जानकारी ने इंटरनेट यूजर्स को हैरान कर दिया और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देने लगे।  रेलवे लाइन का आखिरी पड़ाव हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन आखिरी रेलवे स्टेशन है और यहां पर आकर रेलवे लाइन भी खत्म हो जाती है. यह उत्तर रेलवे की आखिरी रेलवे लाइन है. यहां आई हुई ट्रेन उसी दिशा में वापस लौटती है, जहां से आई होती है. इस स्टेशन से पहले लाहौर तक की ट्रेन जाया करती थी, जिसे लोग पकड़ते थे. मगर अब वो भी बंद कर दिया गया है. इसके आगे पाकिस्तान लग जाता है।  लोगों की प्रतिक्रियाएं और भावनाएं वीडियो देखने के बाद कई लोगों ने इसपर अपनी प्रतिक्रियाएं दी. कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि इस स्टेशन का नाम बदलकर शहीद भगत सिंह के नाम पर रखा देना चाहिए. वहीं, कुछ यूजर्स ने गर्व के साथ कहा कि वो फिरोजपुर से हैं और इस खास जगह से उनका काफी लगाव है।  23 मार्च का दिन देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी दिन शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। इस दिन को शहादत दिवस (Shaheedi Diwas Train) के रूप में मनाया जाता है। बड़ी संख्या में लोग हुसैनीवाला बॉर्डर पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए इस मौके पर स्पेशल ट्रेन चलाई जाती है। दूसरी बार 13 अप्रैल को बैसाखी (Baisakhi Special Train) के अवसर पर भी यहां ट्रेन चलाई जाती है, क्योंकि उस दिन भी बड़ी संख्या में लोग इस क्षेत्र में पहुंचते हैं। इन दो दिनों के अलावा यह स्टेशन लगभग खाली ही रहता है। इस अनोखे स्टेशन की कहानी लोगों को काफी आकर्षित कर रही है। यही कारण है कि इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे देखकर हैरान भी हो रहे हैं और भारत के रेलवे सिस्टम की इस खासियत को जानकर उत्साहित भी हैं।

‘डायरेक्ट ड्राइव’ ऑटो सिग्नल सिस्टम से ट्रेनें दौड़ेंगी तेज, 33.86 किमी. पर बढ़ेगी गति

भोपाल  पश्चिम मध्य रेल के भोपाल मंडल ने रेलवे सिग्नलिंग में बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। कुरवाई केथोरा-मंडी बामोरा-कालहार खंड के कुल 33.86 किमी. डबल लाइन पर ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली को कमीशन किया है। इस सेक्शन में ट्रेन के प्रवेश करते ही सुरक्षित सिग्नल रिसीव और फॉरवर्ड होंगे। इसी के साथ जैसे-जैसे ट्रेन आगे जाएगी, वैसे सिग्नल क्लीयर होते जाएंगे। कुल मिलाकर एआइ सिस्टम जैसी इस तकनीक में मानवीय त्रुटि की आशंका काफी कम होगी। खास बात यह है कि यहां पहली बार डायरेक्ट ड्राइव मॉड्यूल आधारित तकनीक उपयोग की है। इस प्रणाली में ब्लॉक सेक्शन के ऑटो सिग्नलों को सीधे वे साइडकैबिनेट के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। इससे पहले की पारंपरिक व्यवस्था पर निर्भरता कम होगी। इससे सिस्टम तेज, भरोसेमंद और रखरखाव में आसान बनेगा। दो नए ऑटो हट बनेंगे भोपाल मंडल के कुरवाई- कैथोरा मंडी बामोरा के बीच इस सिस्टम के लगने के बाद नए ऑटो हट बनाए जाएंगे। ऑटो हट में मॉनीटरिंग सिस्टम होगा, जो पूरा डेटा ट्रांसमिशन स्पीड और साइबर अटैक से सुरक्षा दिलाएगा। भोपाल-बीना-इटारसी बनेगा फ्रेट कॉरिडोर भोपाल रेल मंडल के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में शामिल इटारसी-भोपाल-बीना सेक्शन पर चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है। 237 किमी लंबी इस परियोजना पर 4,329 करोड़ खर्च होंगे, जिससे यात्री और मालगाडिय़ों के संचालन में सुधार होगा। यह नया रेल कॉरिडोर इटारसी से शुरू होकर भोपाल होते हुए बीना तक जाएगा। यह मार्ग नर्मदापुरम, रायसेन, सीहोर, भोपाल, विदिशा और सागर जिलों से होकर गुजरेगा। वर्तमान में यह सेक्शन अत्यधिक व्यस्त है, जहां यात्री ट्रेनों के साथ बड़ी मात्रा में मालगाडिय़ों का संचालन होता है। चौथी लाइन बनने से ट्रैफिक का दबाव कम होगा और ट्रेनें 220 किमी. की स्पीड से दौड़ सकेंगी। भोपाल मंडल में डायरेक्ट ड्राइव सिस्टम को लागू किया है। बाकी सेक्शनों में भी इस तकनीक को इंस्टाल किया जाएगा। सौरभ कटारिया, सीनियर डीसीएम

यात्रियों को राहत! ट्रेन छूटने से ठीक पहले तक बदलें बोर्डिंग स्टेशन, रेलवे ने बदले नियम

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। अब ट्रेन छूटने के चंद मिनटों पहले तक आप अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार किए गए इस नए प्रस्ताव से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो अंतिम समय में किसी कारणवश अपना स्टेशन बदलना चाहते हैं। अब दूसरे चार्ट तक बदलें अपना बोर्डिंग स्टेशन भारतीय रेलवे अपने सिस्टम को और अधिक 'पैसेंजर फ्रेंडली' बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रहा है। रेलवे बोर्ड के एक नए प्रस्ताव के अनुसार, यात्री अब ट्रेन का दूसरा आरक्षण चार्ट (Second Reservation Chart) तैयार होने तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रेन प्रस्थान करने के लगभग 30 मिनट पहले तक यात्रियों के पास अपना स्टेशन बदलने का विकल्प मौजूद रहेगा।   क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत? वर्तमान नियमों के तहत, बोर्डिंग पॉइंट में बदलाव केवल पहला चार्ट बनने तक ही किया जा सकता है। लंबी दूरी की ट्रेनों के मामले में, पहला चार्ट ट्रेन छूटने से 8 से 20 घंटे पहले ही बन जाता है। ऐसे में यदि किसी यात्री को अंतिम समय में शहर के किसी दूसरे स्टेशन से ट्रेन पकड़नी हो, तो उसके पास कानूनी रूप से कोई विकल्प नहीं बचता था। नए नियम से यात्रियों की यह 'लास्ट मिनट' की चिंता दूर हो जाएगी। तकनीकी जांच और क्रियान्वयन रेलवे बोर्ड के निदेशक (पैसेंजर मार्केटिंग-द्वितीय) संजय मनोचा ने 19 फरवरी को क्रिस (CRIS) को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव की तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) पर रिपोर्ट मांगी है।     सॉफ्टवेयर अपडेट: बोर्ड यह समझना चाहता है कि इस बदलाव से रेलवे के रिजर्वेशन सॉफ्टवेयर पर क्या प्रभाव पड़ेगा।     चरणबद्ध शुरुआत: रिपोर्ट सकारात्मक आने पर इस सुविधा को पहले कुछ चुनिंदा ट्रेनों में 'पायलट प्रोजेक्ट' के तौर पर शुरू किया जाएगा, जिसके बाद इसे सभी ट्रेनों के लिए लागू कर दिया जाएगा। क्या हुआ मुख्य बदलाव     पुराना नियम : केवल प्रथम चार्ट (आठ-20 घंटे पहले) तक बदलाव संभव।     नया प्रस्ताव : द्वितीय चार्ट (ट्रेन प्रस्थान से 30 मिनट पहले) तक बदलाव की सुविधा।     उद्देश्य : यात्रियों को अंतिम समय में स्टेशन बदलने का विकल्प देना। यात्रियों को क्या मिलेगा?     अचानक योजना बदलने पर भी सीट सुरक्षित रहेगी।     बिना बोर्डिंग पॉइंट बदले दूसरे स्टेशन से चढ़ने पर होने वाले जुर्माने का डर खत्म होगा।     यात्री IRCTC ऐप या वेबसाइट के जरिए आसानी से यह बदलाव कर पाएंगे।

त्योहार में सफर आसान: होली को लेकर रेलवे ने चलाई विशेष ट्रेनें, जानें पूरा रूट और स्टॉपेज

बीना रेलवे ने होली पर यात्रियों की सुविधा एवं उनकी यात्रा मांग को पूरा करने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों के लिए विशेष किराए पर स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया गया है। इसी के तहत रेलवे ने एलटीटी-बनारस-एलटीटी, पुणे-गोरखपुर-पुणे एवं सीएसएमटी-गोरखपुर-सीएसएमटी के बीच स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। रेलवे जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि 01073 एलटीटी-बनारस स्पेशल ट्रेन यात्रा मांग पर 25 एवं 26 फरवरी और होली के अवसर पर 4 एवं 5 मार्च को लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन से दोपहर 12.15 बजे चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन रात 1.10 बजे बनारस स्टेशन पहुंचेगी। 01074 बनारस-एलटीटी स्पेशल ट्रेन 27 एवं 28 फरवरी एवं 6 एवं 7 मार्च को सुबह 6.35 बजे बनारस से चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए दूसरे दिन शाम 4.40 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी। ट्रेन में एक एसी द्वितीय श्रेणी, 6 एसी तृतीय श्रेणी, 9 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य श्रेणी और 2 एसएलआरडी सहित कुल 22 कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों दिशाओं में ठाणे, कल्याण, इगतपुरी, नासिक रोड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, गोविंदपुरी जंक्शन, फतेहपुर, सूबेदारगंज (प्रयागराज) एवं वाराणसी स्टेशनों पर रुकेगी। पुणे-गोरखपुर-पुणे चलेगी 16-16 ट्रिप 01415 पुणे-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन 21 से 28 फरवरी व 1 से 8 मार्च तक प्रतिदिन पुणे स्टेशन से सुबह 6.50 बजे चलेगी, जो बीना स्टेशन पर रुकते हुए दूसरे दिन शाम 4 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार 01416 गोरखपुर-पुणे स्पेशल ट्रेन 22 फरवरी से 9 मार्च तक प्रतिदिन शाम 5.30 बजे गोरखपुर से चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन 3.15 बजे पुणे स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में 1 एसी द्वितीय श्रेणी, 5 एसी तृतीय श्रेणी, 6 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य श्रेणी एवं 2 एसएलआरडी सहित कुल 18 कोच रहेंगे। यह स्टेशन पर दौंड कॉर्ड लाइन, अहिल्यानगर जंक्शन (अहमदनगर), कोपरगांव, मनमाड, भुसावल, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, गोंडा एवं बस्ती स्टेशनों पर रुकेगी। सीएसएमटी-गोरखपुर-सीएसएमटी के बीच चलेगी 16 ट्रिप स्पेशल ट्रेन 01079 सीएसएमटी-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन 21 फरवरी से 8 मार्च तक प्रतिदिन सीएसएमटी स्टेशन से रात 10.30 बजे चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन सुबह 10 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। इसी प्रकार 01080 गोरखपुर-सीएसएमटी स्पेशल ट्रेन 23 फरवरी से 10 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 2.30 बजे गोरखपुर से चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन रात 12.40 बजे सीएसएमटी पहुंचेगी। इस ट्रेन में एक एसी द्वितीय श्रेणी, 6 एसी तृतीय श्रेणी, 9 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य श्रेणी एवं 2 एसएलआरडी सहित कुल 22 कोच रहेंगे। यह ट्रेन दोनों तरफ से दादर, ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, मनमाड़, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, भोपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, कानपुर सेन्ट्रल, लखनऊ, गोंडा, बस्ती एवं खलीलाबाद स्टेशनों पर रुकेगी।

रेलवे की होली स्पेशल ट्रेनें: त्योहारों के दौरान बढ़ती भीड़ के बीच अब आसानी से घर पहुंचे

रतलाम  होली के त्योहार पर अपने घर जाने का प्लान बना रहे लोगों को यदि ट्रेनों में जगह नहीं मिल रही है, तो चिंता की कोई बात नहीं है. रेलवे यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए 5 जोड़ी होली स्पेशल ट्रेन चलाने जा रहा है. रतलाम रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों से यह होली स्पेशल ट्रेन गुजरेगी. मुंबई, वडोदरा, सूरत और प्रयागराज, बनारस, पटना के लिए चलने वाली यह स्पेशल ट्रेन 22 फरवरी से 29 मार्च के मध्य संचालित की जाएंगी. रतलाम मंडल से होकर चलेगी होली स्‍पेशल ट्रेनें डॉ. अंबेडकर नगर – पटना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन ट्रेन संख्या 09343, डॉ. अंबेडकर नगर – पटना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन हर गुरुवार को 18:00 बजे डॉ. अंबेडकर नगर से चलकर अगले दिन शाम 18:30 बजे पटना पहुंचेगी. यह ट्रेन डॉ. अम्बेडकर नगर से 26 फरवरी 2026 से 26 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में यह गाड़ी पटना – डॉ. अंबेडकर नगर स्पेशल (09344) हर शुक्रवार को 21:30 बजे पटना से चलकर शनिवार की रात 23:55 बजे डॉ. अंबेडकर नगर पहुंचेगी . यह ट्रेन पटना से 27 फरवरी 2026 से 27 मार्च 2026 तक चलेगी. इस ट्रेन का दोनों दिशाओं में इंदौर, फतेहाबाद चंद्रावतीगंज, उज्जैन, मकसी, संत हिरदाराम नगर, विदिशा, बीना, सागर, दमोह, कटनी मुरवारा, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पं. दीन दयाल उपाध्याय, बक्सर, आरा एवं दानापुर स्टेशनों पर ठहराव रहेगा. मुंबई सेंट्रल – बनारस साप्ताहिक एसी स्पेशल ट्रेन संख्या 09183, मुंबई सेंट्रल – बनारस स्पेशल हर बुधवार को 22:30 बजे मुंबई सेंट्रल से चलकर शुक्रवार को सुबह 10 :30 बजे बनारस पहुंचेगी. यह ट्रेन 04 मार्च से 25 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में यह ट्रेन बनारस– मुंबई सेंट्रल स्पेशल (09184) हर शुक्रवार को 14:30 बजे बनारस से चलकर रविवार को सुबह 4:20 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी. यह ट्रेन 06 मार्च से 27 मार्च 2026 तक चलेगी. इस ट्रेन का दोनों दिशाओं में बोरीवली, पालघर, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, भरतपुर, अछनेरा, आगरा ईदगाह, टूंडला, शिकोहाबाद, मैनपुरी, भोगांव, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, प्रतापगढ़, जंघई एवं भदोही स्टेशनों पर ठहराव रहेगा. मुंबई सेंट्रल – कटिहार साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 09189, मुंबई सेंट्रल – कटिहार साप्ताहिक स्पेशल हर शनिवार को 10:55 बजे मुंबई सेंट्रल से चलकर सोमवार को सुबह 07:30 बजे कटिहार पहुंचेगी. यह ट्रेन 21 फरवरी 2026 से 28 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में कटिहार – मुंबई सेंट्रल स्पेशल (09190) हर मंगलवार को 00:15 बजे कटिहार से प्रस्थान कर बुधवार शाम 18:40 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी. यह ट्रेन 24 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक चलेगी. यह ट्रेन दोनों दिशाओं में बोरीवली, वापी, वलसाड, भरूच, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, विदिशा, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, गोंडा, मनकापुर, बस्ती, खलीलाबाद, गोरखपुर, देवरिया सदर, सिवान, छपरा, हाजीपुर, बरौनी, बेगूसराय, खगड़िया एवं नौगछिया स्टेशनों पर रुकेगी. ट्रेन संख्या 09189 का सूरत स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव होगा. वडोदरा – गोरखपुर साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन संख्या 09111, वडोदरा – गोरखपुर साप्ताहिक स्पेशल हर सोमवार को 19:00 बजे वडोदरा से चलकर कर अगले दिन 23:30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी. यह ट्रेन 23 फरवरी 2026 से 23 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में गोरखपुर – वडोदरा स्पेशल(09112) हर बुधवार को 05:00 बजे गोरखपुर से चलकर अगले दिन सुबह 10:35 बजे वडोदरा पहुंचेगी. यह ट्रेन 25 फरवरी 2026 से 25 मार्च 2026 तक चलेगी. यह ट्रेन दोनों दिशाओं में गोधरा, रतलाम, कोटा, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, भरतपुर, आगरा फोर्ट, टुंडला, शिकोहाबाद, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कानपुर, लखनऊ, बाराबंकी, गोंडा एवं बस्ती स्टेशनों पर रुकेगी. वडोदरा – मऊ साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन संख्या 09195, वडोदरा – मऊ साप्ताहिक सुपरफास्ट स्पेशल हर शनिवार को 19:00 बजे वडोदरा से चलकर अगले दिन 20:45 बजे मऊ पहुंचेगी. यह ट्रेन 21 फरवरी 2026 से 28 मार्च 2026 तक चलेगी. वापसी में यह ट्रेन मऊ – वडोदरा स्पेशल (09196) हर रविवार को 23:15 बजे मऊ से प्रस्थान कर मंगलवार को 00:45 बजे वडोदरा पहुंचेगी. यह ट्रेन 22 फरवरी 2026 से 29 मार्च 2026 तक चलेगी. यह ट्रेन दोनों दिशाओं में दाहोद, रतलाम, कोटा, बयाना, आगरा फोर्ट, टुंडला, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, सुल्तानपुर एवं वाराणसी स्टेशनों पर रुकेगी. ट्रेन संख्या 09195 का गोधरा स्टेशन पर अतिरिक्त ठहराव होगा. होली स्पेशल ट्रेनों की बुकिंग हो चुकी है शुरू रतलाम रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि "होली स्पेशल ट्रेन संख्या 09343, 09183, 09189, 09111 और 09195 की बुकिंग सभी पीआरएस काउंटरों तथा आईआरसीटीसी वेबसाइट पर शुरू हो चुका है. इन ट्रेनों के ठहराव सहित अन्य विस्तृत जानकारी के लिए यात्री www.enquiry.indianrail.gov.in पर विजिट कर सकते हैं."

अमृत भारत स्टेशन योजना से बिहार में बदल रहा रेलवे का चेहरा

कटिहार. भारतीय रेलवे द्वारा शुरू की गई अमृत भारत स्टेशन योजना देशभर में रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण का नया अध्याय लिख रही है। इस संबंध में सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि एनएफ रेल अंतर्गत बिहार, असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में जहां बड़े पैमाने पर स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है, वहीं बिहार के सीमावर्ती स्टेशन भी इस परिवर्तन यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस योजना के तहत चयनित स्टेशनों के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार कर चरणबद्ध तरीके से यात्री सुविधाओं और आधारभूत संरचना का विकास किया जा रहा है। स्टेशन पहुंच मार्ग, सर्कुलेटिंग एरिया, आधुनिक प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय, लिफ्ट-एस्केलेटर, फ्री वाई-फाई, अत्याधुनिक यात्री सूचना प्रणाली और आकर्षक स्टेशन भवन इसके प्रमुख घटक हैं। वन स्टेशन वन प्रोडक्ट कियोस्क के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और उद्यमिता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पूर्वोत्तर में 60 स्टेशनों के पुनर्विकास का कार्य जारी है, जिनमें असम के 50 स्टेशन शामिल हैं। हैवर गांव रेलवे स्टेशन असम का पहला अमृत भारत स्टेशन बनकर आधुनिक सुविधाओं और असमिया विरासत के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत कर चुका है। इसी कड़ी में बिहार के कटिहार और किशनगंज सहित अन्य रेलवे स्टेशन को भी अमृत भारत योजना के तहत विकसित किया जा रहा है। सीमावर्ती और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ये दोनों स्टेशन पूर्वोत्तर और बिहार को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके पुनर्विकास से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तथा स्थानीय व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नया आयाम मिलेगा। अमृत भारत स्टेशन योजना न केवल रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बना रही है, बल्कि स्टेशनों को सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के सशक्त केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रही है। बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं के साथ यह पहल असम, पूर्वोत्तर और बिहार में विकास की नई रफ्तार का प्रतीक बनती जा रही है। जो अत्याधुनिक तकनीकों और सुख सुविधाओं से सज्जित होगा। जिससे यात्रियों को रेलवे स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसा सुखद अनुभव मिलेगी।

MP में रेललाइन विस्तार: महू-खंडवा गेज परिवर्तन का काम जल्द, महाराष्ट्र-साउथ से सीधे जुड़ेगी ट्रेनें

महू   मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के डॉ. आंबेडकर नगर (महू) से खंडवा तक गेज कन्वर्जन में तेजी आने वाली है। महू से बलवाड़ा तक के महत्वपूर्ण घाट सेक्शन के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा रेलवे को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। डॉ. आंबेडकर नगर से बलवाड़ा के बीच लगभग 454 हेक्टेयर वन भूमि पर रेलवे द्वारा निर्माण कार्य किया जाना है। वन विभाग से भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया चल रही थी। वन विभाग ने भेजा अंतिम प्रस्ताव रेलवे द्वारा वन विभाग की सभी शर्तों के पालन की सहमति के बाद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंधन) द्वारा मंत्रालय को सैद्धांतिक स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजा गया था। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने बताया कि मंत्रालय से सैद्धांतिक अनुमति प्राप्त होने के बाद रेलवे द्वारा संबंधित क्षेत्र में कार्य शुरू करने के लिए वन विभाग से अंतिम अनुमति का प्रस्ताव भेजा है। वन विभाग से स्वीकृति प्राप्त होते ही निर्माण प्रारंभकर दिया जाएगा। महू-खंडवा गेज कन्वर्जन इंदौर के लिए खास है। इस लाइन से शहर का जुड़ाव महाराष्ट्र और साउथ से होगा। घाट सेक्शन के लगभग 454 हेक्टेयर वन भूमि के अधिग्रहण के लिए रेलवे निर्माण विभाग द्वारा पूर्व में 100.08 करोड़ वन विभाग को जमा कराए गए हैं। बीते दिनों, महू स्टेशन के विस्तार और महू-खंडवा नई रेल लाइन परियोजना के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। लंबे समय से यहां बने मकानों के कारण काम अटका हुआ था। कल भी पक्के निर्माणों पर मशीनें चलीं तो कई परिवारों ने सामान समेटने की मशक्कत की। प्रशासन ने पहले ही नोटिस जारी कर दिए थे, इसलिए अधिकतर लोगों ने खुद ही घर खाली कर दिए थे। बचे हुए हिस्सों को भी पूरी तरह हटाकर क्षेत्र समतल कर दिया गया।