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रायपुर : प्रदेश में अब तक 1033.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 1033.0 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 1469.5 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 494.6 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर संभाग में रायपुर जिले में 900.0 मि.मी., बलौदाबाजार में 752.5 मि.मी., गरियाबंद में 904.6 मि.मी., महासमुंद में 733.3 मि.मी. और धमतरी में 933.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 1083.9 मि.मी., मुंगेली में 1047.9 मि.मी., रायगढ़ में 1257.4 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 901.8 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 1234.0 मि.मी., सक्ती में 1125.7 मि.मी., कोरबा में 1053.5 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 1004.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 796.1 मि.मी., कबीरधाम में 751.5 मि.मी., राजनांदगांव में 870.7 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1242.8 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 753.6 मि.मी. और बालोद में 1080.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 733.8 मि.मी., सूरजपुर में 1099.0 मि.मी जशपुर में 1011.1 मि.मी., कोरिया में 1168.2 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 1052.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 1406.6 कोंडागांव जिले में 954.7 मि.मी., कांकेर में 1149.3 मि.मी., नारायणपुर में 1239.6 मि.मी., दंतेवाड़ा में 1379.3 मि.मी., सुकमा में 1088.9 मि.मी. और बीजापुर में 1415.7 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

राजौरी में भूस्खलन से सड़क ध्वस्त, मंडी (HP) में मूसलधार बारिश से जनजीवन प्रभावित

राजौरी/शिमला   राजौरी जिले में हाल ही में निर्मित 32 किलोमीटर लंबी कोटरंका-खवास सड़क पिछले दो हफ्तों से लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. 2023-24 की अवधि में पूरी होने वाली यह सड़क कोटरंका उप-मंडल और खवास तहसील के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग का काम करती थी. हालांकि, पिछले 15 दिनों से यह मार्ग पूरी तरह से कटा हुआ है. इससे स्थानीय निवासियों में भारी परेशानी है. इस व्यवधान ने दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है. स्थानीय लोगों के अनुसार छात्र स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. बीमार लोगों को चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाना बेहद मुश्किल हो गया है. कई ग्रामीणों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने के लिए 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर होना पड़ रहा है. जमीन धंसने के कारण सड़क पुनर्निर्माण के काम बाधिक है. ये एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. राजौरी जिले के बधाल गांव में रहने वाले जतिंदर शर्मा ने मंगलवार को एएनआई को बताया, 'पिछले 15 दिनों से यहां सड़क बंद है. बाढ़ के कारण सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है. इस सड़क से और भी कई रास्ते जुड़े हैं. इस वजह से बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन की तरफ से कोई भी सड़क की मरम्मत के लिए नहीं आया है. हम अनुरोध करते हैं कि सड़क को बहाल किया जाए.' कुछ हिस्सों में जमीन धंसने से संकट और बढ़ गया है. इससे बड़े इलाके खतरे में पड़ गए हैं. कम से कम सात घर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इनमें से एक दो मंजिला घर अपनी मूल जगह से लगभग 50 मीटर नीचे खिसक गया है. हालांकि ये अभी भी सीधा खड़ा है. ऐसी घटनाओं से निवासियों में व्यापक दहशत फैल गई है. कोटरंका के अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) दिलमीर चौधरी के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. स्थानीय प्रशासन भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है. राहत और मुआवजा देने के प्रयास सक्रिय रूप से जारी हैं. अधिकारी के अनुसार प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की फाइलें तैयार की जा रही हैं और जल्द ही उन्हें अंतिम रूप दे दिया जाएगा. किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए पूरे क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जा रही है. इस बीच पुंछ में मेंढर उप-मंडल के कलाबन गांव के लगभग 400 निवासियों को लगातार बारिश के कारण जमीन धंसने से कई घरों में दरारें आने के बाद अस्थायी आश्रयों में स्थानांतरित कर दिया गया है. अधिकारी, एक स्थानीय गैर-सरकारी संगठन के सहयोग से विस्थापित परिवारों को राहत सामग्री और आवश्यक वस्तुएं प्रदान कर रहे हैं. प्रशासन ने कलाबन को असुरक्षित घोषित कर दिया है और निवासियों को अगली सूचना तक वहाँ से निकलने का निर्देश दिया है.

देहरादून के टूरिस्ट हॉटस्पॉट्स में बर्बादी, मौसम का तांडव; PM मोदी और अमित शाह ने की CM धामी से बात

देहरादून  उत्तराखंड में बारिश जमकर कहर बरपा रही है. भारी बारिश की वजह से सहस्त्रधारा में बादल फटने की घटना सामने आई है. अचानक आए सैलाब में कई दुकानें और घर बह गये. इसमें दो लोग लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है. बादल सुबह करीब पांच बजे फटा. SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है.PM मोदी और अमित शाह ने CM धामी से की फोन पर बात, बारिश से पैदा हुई स्थिति की ली जानकारी. आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा, "देहरादून में सहस्त्रधारा और माल देवता तथा मसूरी से भी नुकसान की खबरें मिली हैं. देहरादून में दो से तीन लोग लापता बताए जा रहे हैं. मसूरी में एक व्यक्ति की मौत की खबर मिली है, जिसकी पुष्टि की जा रही है." उन्होंने कहा कि टीमें प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं, जबकि 300 से 400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. देहरादून में भारी बारिश हो रही है, जिससे हालात लगातार बिगड़ रहे हैं. भारी बारिश में देहरादून के पास पुल का हिस्सा भी बह गया. देहरादून-हरिद्वार हाइवे पर फन वैली के पास ये तबाही दिखी. देहरादून में मालदेवता के पास सौंग नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है. ब्रिज तोड़ते हुए नदी बेकाबू रफ्तार से बह रही है. मौसम को देखते हुए पहली क्लास से लेकर 12वीं तक के सभी स्कूलों में आज बंद रहेंगे. ऋषिकेश में भी चंद्रभागा नदी उफान पर है. पानी हाईवे तक आ पहुंचा है. नदी के बहाव में कई गाड़ियां और लोग फंस गये. तीन लोगों को एसडीआरएफ की टीम ने चंद्रभागा नदी से रेस्क्यू किया है. तपकेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में 1-2 फीट मलबा जमा हो गया. मंदिर क्षेत्र में भारी क्षति हुई. आईटी पार्क देहरादून के पास सड़कों पर वाहन खिलौनों की तरह बहते नजर आए. दो लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "देहरादून के सहस्त्रधारा में देर रात हुई अतिवृष्टि से कुछ दुकानों को नुकसान पहुंचने की दुःखद सूचना प्राप्त हुई है. जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं. इस सम्बन्ध में निरंतर स्थानीय प्रशासन से संपर्क में हूं और स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहा हूं. ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करता हूं." उत्तराखंड में कई इलाकों में रातभर हुई भारी बारिश से सड़कें, मकान और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं तथा मंगलवार तड़के एक पुल बह गया. भारी बारिश के कारण सोंग नदी उफान पर आ गई, जिससे आस-पास के इलाकों में बाढ़ आ गई. सदर के सब-डिवीज़नल मजिस्ट्रेट हरि गिरि ने कहा, "जलस्तर बढ़ रहा है और अभी बहाव बहुत तेज़ है. अभी तक किसी के मरने की सूचना नहीं है। पर्यटक होटलों में ठहरे हुए थे." देहरादून के आईटी पार्क क्षेत्र में जलभराव की खबर है, कई कार्यालयों में पानी घुस गया है, जिससे लोग फंस गए हैं. स्थानीय निवासी ऋतिक शर्मा ने कहा, "मैं सुबह 5:30 बजे से यहां फंसा हुआ हूं. यहां बहुत पानी है. कार कल रात से यहां फंसी हुई है और पानी में डूबी हुई है। पानी दफ्तरों और बेसमेंट में घुस गया है."

MP में भारी बारिश की संभावना, 13 जिलों में जारी किया अलर्ट

भोपाल   मध्य प्रदेश में लो प्रेशर एरिया की एक्टिविटी की वजह से बारिश का दौर चल रहा है। सोमवार को इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ग्वालियर-चंबल संभाग में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है।अगले 2 दिन भी तेज बारिश हो सकती है। भोपाल में हुई घंटा तेज बारिश  रविवार को दोपहर में भोपाल में करीब एक घंटा तेज बारिश हुई। जबलपुर, बैतूल, पचमढ़ी, राजगढ़ में भी बारिश का दौर चला। नर्मदापुरम के इटारसी में भी तेज पानी गिरा।खरगोन, खंडवा, डिंडौरी, मंडला, शहडोल, अनूपपुर, नर्मदापुरम, सागर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, रीवा, सतना, मैहर, पन्ना, बुरहानपुर, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, जबलपुर, कटनी, दमोह समेत कई जिलों में हल्की बारिश हुई। प्रदेश में अब तक औसतन 42 इंच बारिश दर्ज मध्यप्रदेश में अब तक औसत 42 इंच बारिश हो चुकी है। जबकि अब तक 34.9 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 7.1 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। इस सीजन में इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। यहां सबसे कम पानी गिरा है। सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा खरगोन और शाजापुर शामिल हैं। जबकि जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई।ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। 

रायपुर : प्रदेश में अब तक 996.5 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर, छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 996.5 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की गई है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में बस्तर जिले में सर्वाधिक 1388.6 मि.मी. और बेमेतरा जिले में न्यूनतम 485.7 मि.मी. वर्षा दर्ज की गई है। रायपुर संभाग में रायपुर में 860.6 मि.मी., बलौदाबाजार में 723.7 मि.मी., गरियाबंद में 866.9 मि.मी., महासमुंद में 717.4 मि.मी. और धमतरी में 892.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर में 1030.0 मि.मी., मुंगेली में 1010.5 मि.मी., रायगढ़ में 1212.3 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 829.4 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 1181.9 मि.मी., सक्ती में 1083.5 मि.मी., कोरबा में 1017.3 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 944.3 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग में 782.0 मि.मी., कबीरधाम में 725.1 मि.मी., राजनांदगांव में 850.4 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1222.2 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 718.4 मि.मी. और बालोद में 1058.0 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा में 706.2 मि.मी., सूरजपुर में 1052.1 मि.मी., बलरामपुर में 1366.5 मि.मी., जशपुर में 968.4 मि.मी., कोरिया में 1108.0 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 997.8 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर में 1388.6 मि.मी., कोंडागांव में 946.0 मि.मी., कांकेर में 1133.4 मि.मी., नारायणपुर में 1208.2 मि.मी., दंतेवाड़ा में 1368.2 मि.मी., सुकमा में 1066.0 मि.मी. और बीजापुर में 1363.8 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है।

मौसम अपडेट: MP के कई जिलों में बारिश का अनुमान, बादलों का सफाया शुरू, श्योपुर में दोगुनी बारिश

भोपाल  वर्तमान में मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर चार मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि अब बादल धीरे-धीरे छंटने लगेंगे। इस दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के रीवा, शहडोल, जबलपुर संभाग के जिलों में मध्यम बारिश हो सकती है। शेष क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है। रविवार को सुबह साढ़े आठ से शाम साढ़े पांच बजे तक मलाजखंड में पांच, जबलपुर में तीन, रतलाम में दो, पचमढ़ी, टीकमगढ़ एवं उमरिया में एक मिलीमीटर बारिश हुई। मध्य प्रदेश के 17 जिलों जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, अनूपपुर, शहडोल और उमरिया में आज बारिश हो सकती है। सूखा बीत रहा, अगस्त जाते-जाते जमकर बरसा। वहीं, सितंबर का पहला सप्ताह पूरा मध्यप्रदेश तरबतर हो गया। इससे न सिर्फ प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा हो गया, बल्कि इंदौर बेहतर स्थिति में पहुंचा। 7 दिन में इंदौर में 10 इंच पानी गिर गया। ऐसा है मौसम का हाल मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, वर्तमान में उत्तरी गुजरात और उससे लगे दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान पर अवदाब का क्षेत्र मौजूद है। दो दिन में इसके पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है। मानसून द्रोणिका गुजरात में बने अवदाब के क्षेत्र से श्योपुर, गुना, दमोह, माना, गोपालपुर से होकर बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। दूसरी ओर, बुरहानपुर में 26 इंच भी पानी नहीं गिरा है। धार, बड़वानी, खंडवा, शाजापुर और खरगोन में अब तक 30 इंच पानी भी नहीं गिरा। हालांकि, औसत बारिश के हिसाब से बड़वानी का कोटा भी पूरा हो चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, सितंबर में अभी करीब 22 दिन बारिश होगी। ऐसे में इन जिलों में भी मानसून की तस्वीर बेहतर हो सकती है। एमपी में कोटे से 4 इंच पानी ज्यादा गिर चुका बता दें, प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 41.2 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 33.1 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 8.1 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। यह कोटा पिछले सप्ताह ही पूरा हो गया है। 4.2 इंच पानी ज्यादा गिर गया है। मौसम विभाग के अनुसार 30 जिले-भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, अलीराजपुर, बड़वानी, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रतलाम, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मुरैना, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना और उमरिया में बारिश का कोटा फुल हो चुका है। कई जिले ऐसे हैं, जहां आंकड़ा डेढ़ सौ प्रतिशत के पार है। श्योपुर में कुल 213 प्रतिशत पानी गिर चुका है। इंदौर-उज्जैन संभाग की तस्वीर बेहतर नहीं इस मानसूनी सीजन में इंदौर और उज्जैन संभाग की स्थिति ठीक नहीं है। यहां सबसे कम पानी गिरा है। सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा खरगोन और शाजापुर शामिल हैं। पूर्वी मध्य प्रदेश में मध्यम बारिश एक अन्य द्रोणिका गुजरात में बने अवदाब के क्षेत्र पर बने चक्रवात से लेकर मध्य प्रदेश से होते हुए छत्तीसगढ़ तक जा रही है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि अवदाब का क्षेत्र काफी दूर रहने के कारण फिलहाल मध्य प्रदेश में वर्षा की गतिविधियों में कमी आएगी। हालांकि वातावरण में नमी रहने के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में मध्यम स्तर की बारिश हो सकती है। शेष क्षेत्रों में भी हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। ग्वालियर, चंबल-सागर सबसे बेहतर एमपी में जब से मानसून एंटर हुआ, तब से पूर्वी हिस्से यानी, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में तेज बारिश हुई है। यहां बारिश के स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। छतरपुर, मंडला, टीकमगढ़, उमरिया समेत कई जिलों में बाढ़ आ गई। ग्वालियर-चंबल में भी मानसून जमकर बरसा है। यहां के सभी 8 जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। इनमें ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, दतिया और श्योपुर शामिल हैं। 30 में से भोपाल संभाग के चार, इंदौर संभाग के दो, जबलपुर के चार, ग्वालियर-चंबल के 8, सागर-उज्जैन संभाग के 4-4, रीवा संभाग के 3 और शहडोल संभाग का एक जिला शामिल हैं। नर्मदापुरम संभाग के किसी भी जिले में कोटा पूरा नहीं हुआ। गुना में 65 इंच बारिश, मंडला-श्योपुर में 56 इंच पानी गिरा सबसे ज्यादा बारिश वाले टॉप-5 जिलों की बात करें तो गुना नंबर-1 पर है। यहां 65 इंच, मंडला-श्योपुर में 56 इंच, अशोकनगर में 54 इंच और शिवपुरी में 54.2 इंच पानी गिर चुका है। कई डैम के गेट खुले जुलाई में तेज बारिश की वजह से प्रदेश के कई डैम और तालाब ओवरफ्लो हो गए थे। भोपाल के बड़ा तालाब, केरवा-कलियासोत डैम में भी पानी आया। कई बड़े डैम के गेट भी खुले, लेकिन अगस्त में उतनी बारिश नहीं हुई है। ऐसे में डैम के गेट नहीं खुल सके, लेकिन अगस्त के आखिरी और सितंबर के पहले सप्ताह में तेज बारिश का दौर रहा। इस वजह से भोपाल के भदभदा डैम का गेट भी खुल गया। इस बार जौहिला, बरगी, इंदिरासागर, बारना, अटल सागर, सुजारा, सतपुड़ा, तवा समेत कई डैम के गेट खुल चुके हैं। कुल 54 बड़े डैमों में अच्छा पानी आ चुका है। ऐसे समझें बारिश का गणित… 50 इंच से ज्यादा बारिश वाले जिले     राजगढ़, रायसेन, नरसिंहपुर, मंडला, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, टीकमगढ़, निवाड़ी और श्योपुर। 40 से 50 इंच बारिश वाले जिले     विदिशा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, ग्वालियर, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, रतलाम, नीचम, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम, सिंगरौली, सीधी, नर्मदापुरम, हरदा और उमरिया। 30 इंच से ज्यादा बारिश वाले जिले     भोपाल, सीहोर, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, दतिया, देवास, मंदसौर, भिंड, मुरैना, रीवा, सतना, बैतूल, शहडोल और अनूपपुर। इन जिलों में 30 इंच से कम बारिश     उज्जैन, शाजापुर, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन।

मौसम अपडेट: MP के 12 जिलों में भारी बारिश, अगले दिन बरसात की संभावना

भोपाल  मध्य प्रदेश में स्ट्रांग सिस्टम एक्टिव होने की वजह से लगातार बारिश का दौर चल रहा है। शनिवार को भी प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। भोपाल में सुबह से बारिश हो रही है। शुक्रवार को इंदिरा सागर समेत 5 डैम के गेट खोलने पड़े। मौसम विभाग ने जिन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, उनमें उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, झाबुआ, धार, शाजापुर, राजगढ़, गुना और श्योपुर शामिल हैं। यहां अगले 24 घंटे में ढाई से साढ़े 4 इंच तक पानी गिर सकता है। 20 जिलों में गिरा पानी शुक्रवार को उज्जैन में सवा 2 इंच और इंदौर में डेढ़ मिमी पानी गिर गया जबकि शिवपुरी में 1 इंच बारिश हुई। इसके अलावा भोपाल, दतिया, गुना, ग्वालियर, नर्मदापुरम, रतलाम, सिवनी, टीकमगढ़, बालाघाट, धार, बड़वानी, श्योपुर, दतिया, विदिशा, मुरैना समेत कई जिलों में हल्की बारिश का दौर जारी रहा। इसलिए हो रही तेज बारिश मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि प्रदेश में शुक्रवार को बारिश के तीन स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव रहे। इनमें एक मानसून समेत दो ट्रफ, एक लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) शामिल हैं। शनिवार को भी सिस्टम की एक्टिविटी देखने को मिल सकती है इसलिए कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। प्रदेश में 40.6 इंच हुई बारिश मौसम विभाग के अनुसार, एमपी में अब तक 40.6 इंच बारिश हो चुकी है, जो सीजन की 110 प्रतिशत है। अब तक 32.4 इंच बारिश होनी थी। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। पिछले मानसूनी सीजन में औसत 44 इंच बारिश हुई थी। गुना सबसे बेहतर है यहां 63.1 इंच बारिश हो चुकी है। गुना में सामान्य से 30 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। श्योपुर में 55.8 इंच, मंडला में 55.8 इंच और शिवपुरी में 53.3 इंच बारिश हुई है। इंदौर और उज्जैन संभाग के हैं। खरगोन में सबसे कम 25.1 इंच, खंडवा में 25.4 इंच, बुरहानपुर में 25.5 इंच, बड़वानी में 25.6 इंच और शाजापुर में 26.2 इंच बारिश हो चुकी है। 

रायपुर : प्रदेश में अब तक 916.8 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 916.8 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 1313.4 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 448.0 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर संभाग में रायपुर जिले में 794.9 मि.मी., बलौदाबाजार में 650.6 मि.मी., गरियाबंद में 773.4 मि.मी., महासमुंद में 670.4 मि.मी. और धमतरी में 825.8 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 904.0 मि.मी., मुंगेली में 877.4 मि.मी., रायगढ़ में 1090.5 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 748.4 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 1077.8 मि.मी., सक्ती में 955.1 मि.मी., कोरबा में 894.3 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 891.5 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 728.8 मि.मी., कबीरधाम में 648.7 मि.मी., राजनांदगांव में 823.3 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1156.9 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 680.4 मि.मी. और बालोद में 1004.2 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 655.0 मि.मी., सूरजपुर में 980.4 मि.मी., जशपुर में 892.5 मि.मी., कोरिया में 998.2 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 908.8 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 1304.9 मि.मी., कोण्डागांव जिले में 845.0 मि.मी., कांकेर में 1062.4 मि.मी., नारायणपुर में 1136.7 मि.मी., दंतेवाड़ा में 1258.7 मि.मी., सुकमा में 1006.0 मि.मी. और बीजापुर में 1246.6 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

रायपुर: प्रदेश में अब तक औसत 891.7 मि.मी. वर्षा दर्ज

रायपुर छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 891.7 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बस्तर जिले में सर्वाधिक 1292.9 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 432.1 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है।    रायपुर संभाग में रायपुर जिले में 756.4 मि.मी., बलौदाबाजार में 618.9 मि.मी., गरियाबंद में 747.1 मि.मी., महासमुंद में 651.2 मि.मी. और धमतरी में 797.6 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 843.2 मि.मी., मुंगेली में 829.7 मि.मी., रायगढ़ में 1055.4 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 721.2 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 1038.6 मि.मी., सक्ती में 920.4 मि.मी., कोरबा में 851.3 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 851.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 713.5 मि.मी., कबीरधाम में 627.5 मि.मी., राजनांदगांव में 798.3 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 1143.2 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 666.9 मि.मी. और बालोद में 977.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 633.1 मि.मी., सूरजपुर में 965.0 मि.मी., बलरामपुर जिले में 1277.8 मि.मी., जशपुर में 871.3 मि.मी., कोरिया में 984.4 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 894.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बस्तर संभाग में कोंडागांव जिले में 837.9 मि.मी., कांकेर में 1047.0 मि.मी., नारायणपुर में 1135.1 मि.मी., दंतेवाड़ा में 1243.6 मि.मी., सुकमा में 988.8 मि.मी. और बीजापुर में 1211.9 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

मौसम विभाग का अलर्ट: सितंबर में भारी बारिश, इन फसलों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली अगस्त का पूरा महीना देश के विभिन्न राज्यों के लिए मॉनसूनी बारिश से भीगा रहा तो वहीं कई राज्यों में बाढ़ के प्रकोप ने रिकॉर्ड तोड़े हैं. अब सितंबर में भारत के किस क्षेत्र में कैसा मौसम रहेगा? देश में बारिश की क्या  स्थिति होगी? इसके लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जारी किए हैं.  सितंबर में कैसा रहेगा मौसम? IMD का कहना है कि देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद है. लेकिन, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों समेत दक्षिण भारत के कुछ दूरदराज के इलाकों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सितंबर 2025 में पूरे देश में मासिक औसत वर्षा दीर्घावधि औसत 109% (सामान्य से अधिक) रहने की संभावना है. साल 1971 से 2020 के बीच भारत में सितंबर महीने में बारिश का औसत आंकड़ा 167.9 मिमी रहा है. इन फसलों के लिए किसानों को रहना होगा सतर्क सामान्य से अधिक बारिश कुछ फसलों के लिए नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है. भारत में ग्रीष्मकालीन फसलों जैसे चावल, कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों को नुकसान हो सकता है. दरअसल, इन फसलों की कटाई आमतौर पर मध्य सितंबर से की जाती है. कितना रहेगा तापमान? तापमान के मामले में, सितंबर के दौरान पश्चिम-मध्य, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत के कई इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने की संभावना है. जबकि पूर्व-मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों और पश्चिमी तटीय इलाकों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है. औसत न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश हिस्सों में यह सामान्य से अधिक या सामान्य के करीब रहने की संभावना है. हालांकि, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में रात का तापमान सामान्य से कम रह सकता है. किसानों के लिए राहत की खबर सामान्य से अधिक बारिश खरीफ की फसलों के लिए अच्छी है और इससे बंपर पैदावार की उम्मीद बढ़ सकती है.सितंबर का यह मौसम पूर्वानुमान किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खरीफ फसलों के सीजन का चरम समय है. सामान्य से अधिक बारिश उन फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है जिन्हें अधिक पानी की जरूरत होती है. हालांकि, कुछ इलाकों में बाढ़ जैसी स्थितियों का जोखिम भी बना रह सकता है. वहीं, पूर्वोत्तर, पूर्वी और दक्षिणी भारत में कम बारिश का खेती पर असर भी पड़ सकता है.