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मध्य प्रदेश में अगले 4 दिन बारिश के आसार, ग्वालियर-भिंड समेत 5 जिलों में येलो अलर्ट

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बादलों की आवाजाही थम नहीं रही है। दिन में धूप और रात में ठंडक के बीच अब अगले चार दिन प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का असर देखने को मिलेगा। शुक्रवार को ग्वालियर, श्योपुर, भिंड, मुरैना और शिवपुरी में बारिश का अलर्ट है। इसके बाद शनिवार से बारिश का दायरा बढ़ने का अनुमान है। ग्वालियर-चंबल के साथ उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कुछ जिलों में भी मौसम बिगड़ सकता है। मौसम में इस बदलाव की वजह प्रदेश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती परिसंचरण हैं। इसके अलावा मध्य प्रदेश से एक ट्रफ गुजर रही है। इन मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश के अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 17 अक्टूबर को ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आगर-मालवा, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में बारिश हो सकती है। 18 और 19 अक्टूबर को भी कई इलाकों में इसका असर बना रहने का अनुमान है।प्रदेश के ऊपरी हिस्से में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) सक्रिय है। इस वजह से अगले 4 दिन तक ग्वालियर, चंबल, उज्जैन, सागर और रीवा संभाग में मौसम बदला रहेगा मानसून लौट गया, फिर क्यों बरस रहे बादल? प्रदेश से मानसून तीन अक्टूबर को विदा हो गया था। वहीं, 15 अक्टूबर को देश से मानसून की वापसी की प्रक्रिया भी पूरी हो गई। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश हो रही है। गुरुवार को भी नीमच, मंदसौर, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड और शिवपुरी में कहीं हल्की बारिश हुई तो कहीं बादल और आंधी वाला मौसम रहा। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह के मौसम का असर देखने को मिलता है। पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में भी यह रुझान सामने आया है। इस बार भी महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने और तेज धूप निकलने के बाद कई जिलों में बारिश हुई है। प्रदेश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा। अमरकंटक में सबसे कम तापमान, भोपाल में भी रात ठंडी बारिश के बीच प्रदेश में रात का तापमान भी गिर रहा है। अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। शाजापुर में 17.4, भोपाल में 17.6 और इंदौर व बालाघाट के मलाजखंड में 17.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड हुआ। रायसेन और छिंदवाड़ा में यह 18 डिग्री रहा। मौसम विभाग का अनुमान है कि 20 अक्टूबर के बाद रात में ठंड का असर और बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के साथ तापमान में बदलाव भी महसूस होगा। अमरकंटक में पारा 15.8 डिग्री पहुंचा मौसम विभाग के अनुसार, 20 अक्टूबर के बाद रात में ठंड का असर बढ़ जाएगा। इससे पहले कई शहरों में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री से नीचे चल रहा है। अनूपपुर का अमरकंटक सबसे ठंडा है। बीती रात यहां न्यूनतम तापमान 15.8 डिग्री, शाजापुर में 17.4 डिग्री, भोपाल में 17.6 डिग्री, इंदौर और बालाघाट के मलाजखंड में 17.8 डिग्री, रायसेन और छिंदवाड़ा में 18 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश से लौट चुका मानसून, पर बारिश जारी प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही मानसून लौट चुका है, लेकिन सिस्टम एक्टिव होने से बारिश का दौर फिर से शुरू हुआ। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी हिस्से के जिलों में आंधी-बारिश का असर देखा गया। हालांकि, रविवार और सोमवार को भी कहीं आंधी-बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम साफ हो गया और धूप खिल गई। वहीं, रात में ठंडक है। कई जिलों में बारिश भी हो रही है। इस बार प्रदेश में 100 दिन तक दक्षिण-पश्चिम मानसून एक्टिव रहा। इस साल सामान्य से कम हुई बारिश दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी, 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।  अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है। इन 25 जिलों में बारिश का कोटा फुल भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा फुल हो चुका है। वहीं 30 जिलों में कम बारिश हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं। सामान्य से 1.5 इंच कम हुई मानसूनी बारिश इस साल प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। जून से सितंबर के बीच कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 1.5 इंच कम बारिश हुई।पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत की कमी रही। जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश होने के कारण सीजन की शुरुआत में ही कमी बन गई थी। जुलाई के शुरुआती दिनों में तेज बारिश से आंकड़ा सुधरा, लेकिन मानसून के बीच में दो बार लंबे अंतराल आने से बारिश की रफ्तार प्रभावित हुई। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का कोटा … Read more

मध्यप्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 20 जिलों में तीन दिन आंधी और बारिश के आसार

भोपाल  मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर मौसम बदलने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ  और नए चक्रवाती तंत्र के प्रभाव से 15 से 17 अक्टूबर तक प्रदेश के करीब 20 जिलों में आंधी और बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, शुरुआत में ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में मौसम का असर दिखाई दे सकता है। इसके बाद 17 अक्टूबर को रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। हालांकि, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग के लिए इस पूर्वानुमान के तहत कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम से बदलेगा मौसम मौसम में बदलाव की मुख्य वजह उत्तरी भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती तंत्र को माना जा रहा है। इन मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।मानसून की विदाई के बाद अक्टूबर में होने वाली इस बारिश से तापमान और स्थानीय मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम की गतिविधियों का असर अलग-अलग जिलों में अलग समय पर दिखाई देने की संभावना है। तीन दिन में इन इलाकों में बदलेगा मौसम 15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल तथा सागर संभाग के कुछ जिलों में बारिश की संभावना है। 17 अक्टूबर को इसका दायरा बढ़कर जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग तक पहुंच सकता है। ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है। अक्टूबर में एक साथ दिखेंगे तीन मौसम मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान गर्मी, बारिश और ठंड तीनों का असर देखने को मिला है। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप सामने आ रहा है। महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने से दिन में धूप और गर्मी बढ़ी, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस होने लगी। अब सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण कुछ जिलों में फिर बारिश हो सकती है। प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून तीन अक्टूबर को विदा हो गया था। इस बार करीब 100 दिन तक मानसून सक्रिय रहा। विदाई के बाद भी पूर्वी मध्यप्रदेश में पिछले सप्ताह कई जगह आंधी और बारिश का असर देखा गया था। हालांकि, रविवार, सोमवार और मंगलवार को प्रदेश में कहीं आंधी-बारिश दर्ज नहीं की गई। चार महीने में सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी इस साल जून से सितंबर तक प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब चार प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के बीच अंतर भी साफ दिखाई देता है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12 प्रतिशत की कमी रही। पश्चिमी क्षेत्र के कई जिलों में बारिश का घाटा ज्यादा होने से खेती पर असर पड़ने की आशंका है।आंकड़ों के मुताबिक, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश हुई। इन जिलों में कमी नौ से 51 प्रतिशत तक रही। दूसरी ओर, भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडोरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हो गया। जून की कमी पूरे सीजन पर पड़ी भारी मौसम विभाग के अनुसार, जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। सीजन के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से आंकड़ों को सहारा मिला, लेकिन पूरे सीजन का कुल आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा। यही वजह है कि प्रदेश में मानसून की विदाई के समय करीब चार प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।  17 अक्टूबर को 20 जिलों में आंधी-बारिश की संभावना 17 अक्टूबर को प्रदेश के कई जिलों में मौसम का असर बढ़ने का अनुमान है। संभावित बारिश और आंधी से प्रभावित होने वाले जिलों की सूची इस प्रकार है ग्वालियर-चंबल क्षेत्र: ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी और अशोकनगर। सागर क्षेत्र: निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़। बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र: पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर और सिंगरौली। महाकौशल एवं शहडोल क्षेत्र: शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट। इन जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश की संभावना है। हालांकि, सभी जिलों में एक जैसी स्थिति रहे, यह जरूरी नहीं है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के बताए गए पूर्वानुमान के अनुसार, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में फिलहाल इस बारिश को लेकर अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन क्षेत्रों में मौसम में कोई बदलाव नहीं होगा, बल्कि फिलहाल इन संभागों को संभावित बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल नहीं किया गया है। किसानों और आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए? आंधी और गरज-चमक की स्थिति में कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहतर रहेगा। तेज हवाएं चलने पर पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें। बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान और जलाशयों के पास खड़े होने से बचें। किसान फसलों की कटाई, उपज के भंडारण और खुले में रखे अनाज को सुरक्षित रखने की व्यवस्था करें।

पंजाब और चंडीगढ़ में बदलेगा मौसम, बारिश-आंधी के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी

चंडीगढ़ चंडीगढ़ मौसम केंद्र ने राज्य के छह प्रमुख जिलों – पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब और बठिंडा में गरज-चमक, बिजली गिरने और आंधी को लेकर विशेष चेतावनी जारी की है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों और किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। दूसरी ओर, चंडीगढ़ में भी आसमान में बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में एक-दो बार तेज बौछारें पड़ने का अनुमान है। चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किए जाने की उम्मीद है। तापमान का गणित और मौसम प्रणाली राज्य के औसतन अधिकतम तापमान में पिछले 24 घंटों के दौरान 4.4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि यह अब भी सामान्य से 2.4 डिग्री सेल्सियस कम बना हुआ है। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान भाखड़ा डैम क्षेत्र में 32.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय पाकिस्तान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवातीय हवाओं का क्षेत्र) सक्रिय है। इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश और उत्तरी हरियाणा के आसपास पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) बना हुआ है। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण 14 और 15 अक्टूबर को भी पंजाब और चंडीगढ़ के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ ओलावृष्टि की संभावना बनी रहेगी। मौसम बदलते ही पंजाब में बिजली की मांग में आई गिरावट मौसम में आई नरमी और तापमान में गिरावट का सीधा असर राज्य की बिजली खपत पर देखने को मिला है। पंजाब में बिजली की दैनिक मांग में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। मंगलवार सुबह के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बिजली की कुल मांग घटकर 8,202 मेगावाट रह गई। इस दौरान राज्य के अपने स्रोतों से 4,888 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि 3,317 मेगावाट बिजली बाहरी ग्रिड से प्राप्त की गई। निर्धारित कोटे से वास्तविक ड्रॉअल 295 मेगावाट कम रहा, जिससे ग्रिड फ्रीक्वेंसी 49.98 हर्ट्ज पर स्थिर रही। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के औसत अधिकतम तापमान में 4.4 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, यह अभी भी सामान्य से 2.4 डिग्री नीचे है। सबसे अधिक अधिकतम तापमान 32.2 डिग्री भाखड़ा डैम में दर्ज किया गया। 6 जिलों के लिए जारी किया अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार आज पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, फाजिल्का, मुक्तसर और बठिंडा में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, चंडीगढ़ में आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और एक-दो बार बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। चंडीगढ़ में 13 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 30 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री रहने का अनुमान है। इस तरह की मौसम की स्थिति बनी मौसम विभाग के मुताबिक, पाकिस्तान में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बन रहा है। वहीं, हिमाचल प्रदेश और उत्तरी हरियाणा के आसपास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इन मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से पंजाब व चंडीगढ़ में बादल छाने, गरज-चमक के साथ बारिश होने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब और चंडीगढ़ में 14-15 अक्टूबर को भी आंधी, बिजली गिरने व ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। गर्मी कम होने से पंजाब में बिजली की मांग घटी पंजाब में गर्मी कम होने से बिजली की मांग में कमी आई है। मंगलवार सुबह 6:51 बजे बिजली की मांग 8,202 मेगावाट दर्ज की गई। राज्य में 4,888 मेगावाट बिजली पैदा हुई, जबकि 3,317 मेगावाट बिजली बाहर से ली गई। तय सप्लाई 3,612 मेगावाट थी, लेकिन वास्तविक ड्रॉअल 295 मेगावाट कम रहा। बिजली की फ्रीक्वेंसी 49.98 हर्ट्ज दर्ज की गई।

हरियाणा में बारिश से बदला मौसम, खेतों में जलभराव से किसान परेशान

अंबाला. हरियाणा के कई जिलों में रविवार रात बारिश हुई। अंबाला, रोहतक और कुरुक्षेत्र समेत कई जिलों में रिमझिम बारिश ने रविवार को मौसम का मिजाज बदल दिया। सुबह साढ़े 11 बजे से दोपहर साढ़े तीन बजे तक जिले में बारिश होती रही। अधिकतम तापमान सामान्य से सात डिग्री नीचे 25.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिनभर ठंडक ऐसी रही कि घरों और कार्यालयों में कई जगह एसी ही नहीं, पंखे भी बंद रहे। दूसरी ओर, शहर और छावनी के कई इलाकों में जलजमाव से लोगों की परेशानी बढ़ी तो खेतों में खड़ी फसल को लेकर किसानों की चिंता भी गहरा गई। कई जिलों में बारिश से भीगी फसल: – बारिश के कारण सिरसा, डबवाली, कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर और करनाल समेत कई क्षेत्रों की मंडियों में पानी भर गया. छह जिलों की मंडियों में करीब 6.28 लाख टन धान भीगने की जानकारी सामने आई है. अंबाला की मंडियों में भी पानी भरने से लगभग 4 लाख क्विंटल धान प्रभावित हुआ. फसल भीगने से उसकी गुणवत्ता और खरीद को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है. कैथल और कुरुक्षेत्र में आवक का दबाव: प्रदेश के पांच जिलों में ही 14.17 लाख टन से अधिक धान मंडियों में पहुंच चुका है. कुरुक्षेत्र में सर्वाधिक 5.14 लाख टन आवक दर्ज की गई, जिसमें से 3.74 लाख टन की खरीद और 1.73 लाख टन का उठान हुआ. कैथल में 3.54 लाख टन आवक के मुकाबले 2.10 लाख टन की खरीद और 86 हजार टन का उठान हुआ. करनाल में 2.32 लाख टन, अंबाला में 2.31 लाख टन और फतेहाबाद में 86 हजार टन धान पहुंचा है. इन आंकड़ों से मंडियों पर बढ़ते दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है.

पंजाब में बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें, मंडियों में जमा 15 लाख टन धान की खरीद और उठान प्रभावित

चंडीगढ़  पंजाब में बारिश ने धान की फसल पर दोहरी मार की है। खेतों में खड़ी फसल तेज हवा और पानी से प्रभावित हुई है तो मंडियों में बिकने के इंतजार में पड़ा धान भीगकर खराब होने के खतरे में है। कहीं मंडियों में तीन फीट तक पानी भर गया तो कहीं खुले में रखी धान की बोरियां पानी में डूब गईं।  खेतों में जलभराव के कारण कंबाइन से कटाई नहीं हो पा रही। दूसरी ओर, उठान की धीमी रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश की मंडियों में करीब 15 लाख मीट्रिक टन धान उठान के इंतजार में बताया जा रहा है। किसानों ने प्रभावित क्षेत्रों में गिरदावरी करवाकर मुआवजा देने की मांग की है। मंडियों में भीगा धान, उठान की रफ्तार धीमी बारिश के बीच मंडियों में धान की आवक जारी है, लेकिन उठान उस गति से नहीं हो रहा, जितनी जरूरत है। खुले में रखी बोरियों को तिरपाल से ढकने के बावजूद कई जगह पानी धान तक पहुंच गया। मंडियों में पर्याप्त ढके हुए स्थान और जलनिकासी की कमी ने परेशानी बढ़ा दी है। धान में नमी बढ़ने से खरीद के निर्धारित 17 प्रतिशत मानक को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है। एक दिन में मंडियों में तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक धान पहुंचा, जबकि उठान दो लाख मीट्रिक टन से कम रहा। इससे मंडियों में धान का ढेर बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार केंद्र से उठान तेज करने की मांग कर रही है। पिछले साल का करीब 10 लाख मीट्रिक टन धान और गेहूं भी उठान के इंतजार में बताया जा रहा है। ऐसे में नई फसल के लिए मंडियों में जगह की कमी का संकट गहराने लगा है।  

हरियाणा में बदला मौसम का मिजाज, 5 जिलों में बारिश की चेतावनी; पंचकूला में ओलावृष्टि

हिसार. प्रदेश में मौसम फिर से बदलने लगा है। पंचकूला में मौसम में बदलाव के बाद वर्षा के साथ ओलावृष्टि हुई। इसके साथ ही यमुनानगर में भी वर्षा होने से मंडी में फसल भीग गई। ओलावृष्टि और वर्षा के चलते तापमान में भी गिरावट हो सकती है। आने वाले दिनों में 10 अक्टूबर तक वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। वीरवार को ही पांच जिलों में वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार मौसम में फिर से बदलाव हुआ है। मंगलवार रात के बाद पंचकूला में वर्षा के साथ ओलावृष्टि होने से मौसम ठंडा हो गया। वहीं, यमुना नगर में वर्षा हुई। इससे मंडियों में पहुंची फसल को बचाने के लिए किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम में बदलाव के चलते वीरवार को पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल में वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसी प्रकार 10 अक्टूबर तक प्रदेश के अनेक जिलों में वर्षा हो सकती है।

मध्य प्रदेश में बढ़ने लगी ठंडक, सुबह की गुनगुनी धूप दे रही राहत; बारिश को लेकर आया अपडेट

भोपाल  उत्तरी हवा से वातावरण में ठंडक का अहसास अब धीरे-धीरे होने लगा है। सर्दी के आगमन के बीच सुबह की गुनगुनी धूप अब लोगों को भाने लगी है। मौसम के इस बदलते मिजाज से ये संभावना जताई जा रही है आगामी दिनों में ठंड का असर बढ़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ों में नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है। इसके प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना है। जबलपुर सहित आस-पास का मौसम भी आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है। इसके बाद जबलपुर सहित मप्र में भी ठंड का असर तेजी से बढ़ सकता है। फिलहाल मौसम पूरी तरह से शुष्क है। सुबह और रात में हल्की ठंडक का अहसास हो रहा है वहीं दिन में धूप निकल रही है। सात से 12 अक्टूबर तक आंशिक रूप से मौसम में बदलाव देखा जा सकेगा। इंदौर में रात का तापमान सबसे कम प्रदेश से 3 अक्टूबर को ही मानसून लौट चुका है, लेकिन चक्रवात, पश्चिमी विक्षोभ की वजह से बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। हालांकि, दिन में तेज धूप खिल रही है। इससे अधिकतम तापमान 37 डिग्री से ऊपर चल रहा है। दूसरी ओर, रात में ठंडक बढ़ गई है। बीती रात इंदौर में सबसे कम 17.2 डिग्री, बैतूल में 17.5 डिग्री, छिंदवाड़ा में 17.6 डिग्री, पचमढ़ी में 18 डिग्री और अमरकंटक में 18.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया, पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड है। इस बार भी ऐसा ही होने का अनुमान है। अक्टूबर की शुरुआत में ही मौसम साफ हो गया और धूप खिल गई। वहीं, रात में ठंडक है। इस बार सामान्य से कम हुई बारिश बता दें कि इस बार प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून 100 दिन सक्रिय रहा। 24 जून को यह एंटर हुआ था और 3 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से विदाई ले ली। इस बार कम पानी गिरा, 30 जिलों में असर दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी, 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है। इन 25 जिलों में कोटा फुल भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। बाकी 30 जिलों में कम बारिश हुई। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं। तापमान 21 डिग्री के आसपास फिलहाल दिन का तापमान जहां 32 डिग्री के ऊपर बना हुआ है वहीं रात का न्यूनतम तापमान 20-21 डिग्री के आसपास बना हुआ है। सोमवार को हवा का रुख उत्तर-पश्चिमी रहा। अधिकतम तापमान 34.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम का पूर्वानुमान मौसम शुष्क रहेगा सूर्योदय- 6: 04 सूर्यास्त- 5: 53 तापमान अधिकतम -34.0 न्यूनतम – 21.5 आर्दता-66 -45

मध्य प्रदेश में बारिश की कमी से बढ़ी चिंता, 25 जिलों में सामान्य बरसात; 11 में 80% से भी कम

भोपाल मध्य प्रदेश में इस साल मानसून की बेरुखी से राज्य के आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। प्रदेश के 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हो सका है, जिनमें से 11 जिलों में तो 80 प्रतिशत से भी कम बारिश दर्ज की गई है। इस अनियमित बारिश का सीधा असर फसलों, पेयजल आपूर्ति, जल विद्युत उत्पादन और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है। दरअसल, प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सामान्य बारिश का औसत 37.3 इंच है, जबकि इस बार केवल 35.6 इंच (95.4 फीसदी) बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम है। 5 साल में सबसे सूखा मानसून वर्ष 2022 में सर्वाधिक 46 इंच बारिश हुई थी, जबकि 2023 में 37.2 इंच, 2024 में 40.2 इंच और 2025 में 45.2 इंच पानी गिरा था। इस बार 35.6 इंच के साथ यह बीते 5 वर्षों की सबसे कम बारिश है। मात्र 0.6 फीसदी की कमी के कारण मध्य प्रदेश सामान्य से कम बारिश वाली श्रेणी में चला गया है।प्रदेश में इस बार 5 साल की तुलना में सबसे कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। साल 2022 में सबसे ज्यादा 46 इंच पानी गिरा था। 2023 में 37.2 इंच, 2024 में 40.2 इंच और 2025 में 45.2 इंच बारिश हुई थी। वहीं इस बार 35.8 इंच पानी ही गिरा है। बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले 9 दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। अगस्त के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया, जो आखिरी तक तक जारी रहा। सितंबर के पहले सप्ताह में भारी बारिश का दौर बना रहा। तीसरे सप्ताह पश्चिमी हिस्से में अच्छी बारिश हुई। आखिरी सप्ताह प्रदेशभर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हुई। पश्चिम में कम, पूर्व में ज्यादा बारिश मध्यप्रदेश के पश्चिमी हिस्से (इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल संभाग) में सामान्य से 12 फीसदी कम बारिश हुई, जबकि पूर्वी हिस्से (जबलपुर, रीवा, सागर, शहडोल संभाग) में 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। जून का घाटा नहीं भर पाए जुलाई-सितंबर मानसून ने इस बार 9 दिन की देरी से 24 जून को दस्तक दी थी। जून के महीने में बारिश में 30 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई। जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से अधिक बारिश हुई, लेकिन यह शुरुआती घाटे की भरपाई नहीं कर सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से ज्यादा बारिश जुलाई, अगस्त और सितंबर में कोटे से ज्यादा पानी गिरा, लेकिन वह जून की भरपाई नहीं कर सका। लिहाजा, प्रदेश में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई। मानसूनी पीरियड 30 सितंबर तक 904 मिमी, यानी 35.6 इंच (95.4 प्रतिशत) रिकॉर्ड की गई, जो 'सामान्य बारिश' की कैटेगिरी से नीचे है। IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, 96 से 104 प्रतिशत बारिश ही 'सामान्य बारिश' की कैटेगिरी में शामिल हैं। यदि 0.6% पानी और गिर जाता तो प्रदेश इस कैटेगिरी में पहुंच जाता, यानी इस बार प्रदेश में 'सामान्य से कम' बारिश दर्ज हुई है। सोयाबीन और गेहूं का उत्पादन घटेगा मालवा सहित इंदौर और नर्मदापुरम में कम बारिश से सोयाबीन उत्पादन प्रभावित होगा। इस साल प्रदेश में 52 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन और कुल 134.31 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोवनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि पश्चिमी हिस्से में पानी की कमी से सोयाबीन का उत्पादन 2 से 3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक घट सकता है। वहीं पानी की कमी के कारण आगामी रबी सीजन में गेहूं और चने की बोवनी भी प्रभावित होगी। 19 प्रमुख बांध रीते, पेयजल और बिजली पर खतरा प्रदेश के कुल 54 बड़े बांधों में से 35 बांध 90 फीसदी या उससे अधिक भरे हैं। वहीं 19 बांधों में पानी का स्तर 10 से 90 प्रतिशत के बीच अटका हुआ है। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने 90 फीसदी से अधिक भरे बांधों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। वहीं गांधीसागर, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, राजघाट और मणिखेड़ा जैसे 5 बड़े जल विद्युत गृहों में जलस्तर कम रहने से हाइड्रो पावर उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इस बार बारिश का लंबा दौर नहीं रहा मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक कहते हैं- इस बार प्रदेश में बारिश का ट्रेंड बदला हुआ देखने को मिला। कई जिलों में इतनी अतिवृष्टि हुई कि जनजीवन प्रभावित रहा। कई में अनियमित बारिश भी हुई। जैसे कभी तेज बारिश तो कभी लंबा ब्रेक। इस वजह से हालात ठीक नहीं है। पहले 8 से 10 दिन लगातार बारिश होती थी, लेकिन इस बार अधिकतम दो दिन तक ही लगातार पानी गिरा। पहले बंगाल की खाड़ी से डिप्रेशन, लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) से एक्टिव होते थे और सागर क्षेत्र से होते हुए प्रदेश के कई हिस्सों में गुजरते थे। इससे अति भारी या भारी बारिश होती थी। इस बार सिस्टम इतने मजबूत नहीं रहे। मानसूनी सीजन में भी प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में दिन में गर्म रहे। बारिश के अंतराल की वजह से जमीन सूखने लगी। इस वजह से पानी जमीन के अंदर नहीं उतरा। वर्तमान में तेज धूप है और जमीन सूख रही है। इससे कुछ दिनों के बाद ही भू-जल स्तर नीचे जाने लगेगा। माइक्रो लेवल पर काम करने की जरूरत विशेषज्ञ नायक कहते हैं कि जिन जिलों में 20 प्रतिशत या इससे कम पानी गिरा है, वहां पर सरकार को माइक्रो लेवल पर काम करने की जरूरत है। जब किसी इलाके में 26 प्रतिशत या उससे कम बारिश होती है तो वह इलाका सूखा घोषित होता है। इस बार सूखे के दायरे में आने वाले कई जिले हैं। यहां पर सरकार सर्वे कराकर पेयजल की स्थिति का आकलन लगाए। शहरों में जल संकट की आशंका भोपाल: सामान्य से 9 फीसदी अधिक (41 इंच से ज्यादा) बारिश दर्ज की गई। बड़ा तालाब, भदभदा और कलियासोत डैम फुल हो चुके हैं, हालांकि केरवा और कोलार में पानी की कमी है। इंदौर: सामान्य से 27 प्रतिशत कम (लगभग 9.5 इंच कम) … Read more

पंजाब में बारिश ने बढ़ाई चिंता, 38 फीसदी कम बरसे बदरा; भूजल संकट गहराया

पटियाला पंजाब में इस बार मानसून की विदाई के साथ बारिश के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। जून से सितंबर 2026 तक प्रदेश में सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। यह 2000 के बाद तीसरा सबसे कम बारिश वाला साल रहा है। इस अवधि में केवल 272.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 439.8 मिलीमीटर है। इससे पहले 2014 में 50 फीसदी और 2012 में 47 फीसदी कम बारिश हुई थी। पिछले साल 2025 में 620.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 41 फीसदी अधिक थी। इस साल यह आंकड़ा घटकर 272.8 मिलीमीटर रह गया है। सिर्फ एक साल में मानसूनी बारिश में भारी गिरावट आई है। 2024 में भी 317.3 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 28 फीसदी कम थी। पंजाब ने लगातार दो साल कमजोर मानसून का सामना किया है। भूजल पर बढ़ता दबाव 2026 में जून और सितंबर में सिर्फ 29.5-29.5 मिलीमीटर बारिश हुई। जुलाई में 119.3 मिमी और अगस्त में 94.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह बारिश जून और सितंबर की भारी कमी की भरपाई नहीं कर पाई। पंजाब की खेती भूजल पर बहुत निर्भर है, जिससे सिंचाई के लिए दबाव बढ़ेगा। मानसून की कमजोरी से भूजल का प्राकृतिक रिचार्ज भी प्रभावित हुआ है।  साल–कितनी बारिश हुई-प्रतिशत 2026: 272.8 मिमी  38% कम 2025: 620.9 मिमी  41% ज्यादा 2024: 314.6 मिमी  28% कम 2014: 243.9 मिमी  50% कम 2012: 262.2 मिमी  47% कम पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना से जलवायु परिवर्तन एवं कृषि मौसम विभाग से डा. पवनीत कौर किंगरा का कहना है कि इस बार का मानसून अल नीनो के प्रभाव तले था, जिससे पहले ही अनुमान था कि सामान्य से कम बारिश होगी। पंजाब तक पर्याप्त मानसूनी सिस्टम नहीं पहुंचे। बारिश लाने वाले लो प्रेशर सिस्टम और मानसूनी गतिविधियां इस बार पंजाब के बजाय अन्य हिस्सों में ज्यादा सक्रिय रहीं। जुलाई के मध्य तक पंजाब में बारिश सामान्य से 24 फीसदी कम दर्ज की गई थी। इसके बाद भी मानसून की गतिविधि लगातार कमजोर बनी रही। सितंबर में भी कमी पूरी नहीं हो सकी। 

रेगिस्तान में फूलों की बहार! अल-नीनो की बारिश से अटाकामा बना रंग-बिरंगा

सेंटियागो चिली के अटाकामा रेगिस्तान में इन दिनों लाखों फूल खिल गए हैं. दुनिया के सबसे सूखे इलाकों में शामिल इस रेगिस्तान में हुई तेज बारिश के बाद जमीन के अंदर पड़े बीज और बल्ब सक्रिय हो गए. अल नीनो से जुड़ी इस बारिश के बाद अटाकामा के कई हिस्सों में बैंगनी और सफेद फूल दिखाई दे रहे हैं. चिली की नेशनल फॉरेस्ट कॉरपोरेशन यानी CONAF के मुताबिक, अक्टूबर में इस फूलों का नजारा अपने चरम पर पहुंच सकता है और करीब 15 हजार हेक्टेयर इलाके में फूल खिलने का अनुमान है। अटाकामा रेगिस्तान चिली के उत्तर में है और राजधानी सैंटियागो से करीब 800 किलोमीटर दूर है. यहां आमतौर पर बारिश बहुत कम होती है. इसी वजह से यहां कई पौधों के बीज और बल्ब जमीन के अंदर लंबे समय तक पड़े रहते हैं. जब उन्हें पर्याप्त पानी मिलता है तो वे दोबारा उगने लगते हैं. इस बार कुछ इलाकों में 180 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश हुई, जो वहां के लिए बेहद ज्यादा है. इस पानी का एक बड़ा हिस्सा रेत के अंदर गहराई तक पहुंचा और इससे जमीन में छिपे पौधों को बढ़ने का मौका मिला।      जमीन के अंदर छिपे थे लाखों बीज… अटाकामा में फूलों का यह नजारा अचानक नहीं बना है. यहां करीब 200 प्रजातियों के पौधों के बीज और बल्ब जमीन के अंदर मौजूद रहते हैं. सूखे मौसम में ये पौधे एक तरह से रुके हुए रहते हैं. जैसे ही सही मात्रा में बारिश और नमी मिलती है, ये फिर से सक्रिय हो जाते हैं। चिली की CONAF के अनुसार, 'फ्लावरिंग डेजर्ट' में 200 से ज्यादा तरह के पौधे दिखाई दे सकते हैं. इनमें ऐसे पौधे भी शामिल हैं जो रेगिस्तान की बहुत कम नमी वाली जमीन में रहने के लिए तैयार हो चुके हैं. इनके कुछ हिस्से जमीन के अंदर सुरक्षित रहते हैं और सही मौसम आने पर ऊपर आकर फूल और पत्तियां बनाते हैं। कुछ इलाकों में 180 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश… इस बार अटाकामा के कुछ हिस्सों में बारिश 180 मिलीमीटर से ज्यादा दर्ज की गई. CONAF के अटाकामा जैव विविधता एक्सपर्ट सीजर पिजारो ने बताया कि कुछ जगहों पर इतनी ज्यादा बारिश पहले दर्ज नहीं की गई थी. सामान्य से ज्यादा पानी जमीन में गहराई तक पहुंचा, जिससे पौधों को लंबे समय तक नमी मिली। इसी बारिश के बाद अब रेगिस्तान में बैंगनी और सफेद फूलों के बड़े हिस्से दिखाई दे रहे हैं. इस घटना को चिली में 'फ्लावरिंग डेजर्ट' यानी 'फूलों वाला रेगिस्तान' कहा जाता है. यह घटना हर साल एक जैसी नहीं होती. इसके लिए सही समय पर पर्याप्त बारिश और मिट्टी में जरूरी नमी होना जरूरी है। अक्टूबर में सबसे ज्यादा फूल दिखेंगे… CONAF के अनुमान के मुताबिक, इस साल अटाकामा में फूलों का यह नजारा अक्टूबर में सबसे ज्यादा दिखाई दे सकता है. करीब 15 हजार हेक्टेयर इलाके में फूल खिलने का अनुमान है. बारिश के बाद सिर्फ पौधे ही सक्रिय नहीं होते, बल्कि इस पूरे इलाके में कीड़े, मधुमक्खियां, पक्षी और दूसरे छोटे जीव भी ज्यादा दिखाई देने लगते हैं।  फूलों से मिलने वाला पराग इन जीवों के लिए भी जरूरी होता है. इस नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक भी पहुंच रहे हैं. कई लोग सड़क के किनारे रुककर फूलों की तस्वीरें ले रहे हैं. लेकिन अधिकारियों ने लोगों से पौधों को नुकसान न पहुंचाने और तय रास्तों पर ही चलने की अपील की है। अल-नीनो की बारिश बनी बड़ी वजह… इस बार अटाकामा में फूल खिलने के पीछे अल नीनो से जुड़ी बारिश को बड़ी वजह माना जा रहा है. अल-नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे हवा और बारिश के पैटर्न में बदलाव आ सकता है. इस बार इसका असर चिली के उत्तरी हिस्से में भी देखने को मिला।   हालांकि, अल-नीनो से हुई बारिश का असर सिर्फ फूलों तक सीमित नहीं रहा।      जुलाई में चिली के कुछ हिस्सों में भारी बारिश से नुकसान भी हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान कम से कम 13 लोगों की मौत हुई और करीब 4 हजार घरों को नुकसान पहुंचा या वे पूरी तरह बर्बाद हो गए. यानी जिस बारिश ने अटाकामा में पौधों को जीवन दिया, उसी मौसम ने देश के कुछ हिस्सों में परेशानी भी पैदा की।        बारिश कम होने और जमीन सूखने के बाद फूलों का यह नजारा धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा. लेकिन कई पौधों के बीज और जमीन के अंदर मौजूद हिस्से फिर सुरक्षित रहेंगे. अगली बार जब उन्हें सही मात्रा में बारिश मिलेगी, तो अटाकामा फिर फूलों से भर सकता है।